Author: bharati

  • बढ़ती उम्र में मांसपेशियां कमजोर? दही-इडली से रखें मसल्स मजबूत, 60 के बाद भी फिट रहें

    बढ़ती उम्र में मांसपेशियां कमजोर? दही-इडली से रखें मसल्स मजबूत, 60 के बाद भी फिट रहें


    नई दिल्ली । बुढ़ापे में थकान चलने में दिक्कत और गिरने का डर आम बात लगती है लेकिन यह केवल उम्र का खेल नहीं है। इसका मुख्य कारण है सार्कोपेनिया यानी मांसपेशियों का कमजोर होना। 60 की उम्र के बाद शरीर प्रोटीन का सही उपयोग नहीं कर पाता जिससे मसल्स धीरे-धीरे गलने लगती हैं।

    डॉ. शैलेंद्र भदौरिया एमडी-जेरियाट्रिक मेडिसिन एम्स नई दिल्ली बताते हैं कि इस उम्र में मसल्स मजबूत रखने के लिए डाइट और हल्की कसरत दोनों जरूरी हैं। आईसीएमआर और WHO के अनुसार 60+ उम्र में प्रतिदिन प्रति किलो शरीर वजन के हिसाब से 1 ग्राम प्रोटीन लेना चाहिए। उदाहरण के लिए यदि आपका वजन 65 किलो है तो रोजाना 65 ग्राम प्रोटीन शामिल करें।

    मसल स्ट्रेंथ बढ़ाने में फर्मेंटेड फूड्स जैसे दही इडली ढोकला और खमीर वाले अन्य पदार्थ बहुत मददगार हैं। ये प्रोबायोटिक्स से पेट की सेहत सुधारते हैं जिससे प्रोटीन आसानी से पचता और अवशोषित होता है। लेकिन अकेले फर्मेंटेड फूड पर्याप्त नहीं हैं। प्रोटीन की सही मात्रा और हल्की वजन वाली कसरत मिलाकर ही मसल्स मजबूत रह सकती हैं।

    WHO की सलाह के अनुसार 65 साल से ऊपर के लोगों को हफ्ते में कम से कम 2 दिन मसल स्ट्रेंथ बढ़ाने वाली कसरत करनी चाहिए। इसके लिए आसान एक्सरसाइज जैसे कुर्सी से 10 बार उठना-बैठना दीवार के सहारे पुश-अप या पानी की बोतल से वेट लिफ्टिंग करना पर्याप्त है।

    डॉ. भदौरिया बताते हैं कि एक संतुलित दिनचर्या अपनाने से मसल्स कमजोर होने की प्रक्रिया धीमी पड़ती है। उदाहरण के तौर पर:

    सुबह: हल्की एक्सरसाइज + प्रोटीन युक्त नाश्ता

    दोपहर: दाल पनीर और सलाद

    शाम: 20 मिनट वॉक

    रात: हल्की खिचड़ी या पौष्टिक डिनर

    इस तरह नियमित प्रोटीन फर्मेंटेड फूड और हल्की कसरत से 60 पार भी मसल्स मजबूत बनी रह सकती हैं और थकान या गिरने का डर कम होता है। बुढ़ापे में फिट रहने के लिए यह आसान और प्रभावी तरीका माना जाता है।

  • रंगों का त्योहार, ठंडाई के साथ: जानें खसखस ठंडाई बनाने का तरीका..

    रंगों का त्योहार, ठंडाई के साथ: जानें खसखस ठंडाई बनाने का तरीका..


    नई दिल्ली।होली केवल रंगों और गुलाल का त्योहार नहीं है। यह त्योहार स्वाद और ताजगी के लिए भी जाना जाता है। और जब बात हो ठंडक और ऊर्जा की, तो ठंडाई का नाम सबसे पहले आता है। खासकर खसखस ठंडाई, जो स्वाद और स्वास्थ्य दोनों में अद्भुत संतुलन देती है। इस होली, आप अपने परिवार और दोस्तों के लिए घर पर खसखस ठंडाई बनाकर त्योहार को और यादगार बना सकते हैं।

    ठंडाई क्यों खास है?
    ठंडाई केवल ठंडी ड्रिंक नहीं है। इसमें खसखस, बादाम, काजू, किशमिश और गुलाब जल जैसे तत्व शामिल होते हैं, जो न केवल शरीर को ठंडक देते हैं, बल्कि ऊर्जा भी प्रदान करते हैं। भारतीय पारंपरिक स्वास्थ्य विज्ञान के अनुसार, ठंडाई में मौजूद सूखे मेवे और मसाले शरीर को गर्मियों की उमस से बचाने में मदद करते हैं।

    खसखस ठंडाई बनाने की सामग्री:
    खसखस – 2 बड़े चम्मच

    काजू – 10-12 पीसेस

    बादाम – 10-12 पीसेस

    काली मिर्च – 1/4 चम्मच

    गुलाब जल – 1 छोटा चम्मच

    ठंडा दूध – 500 ml

    शक्कर – 4-5 बड़े चम्मच (स्वाद अनुसार)

    साबुत किशमिश – 8-10 पीसेस

    खसखस ठंडाई बनाने की स्टेप-बाय-स्टेप रेसिपी:
    1. खसखस और मेवे भिगोएँ: खसखस, काजू और बादाम को 4–5 घंटे या रात भर पानी में भिगोकर नरम कर लें।

    2. पीसना: भिगोए हुए खसखस और मेवे को ब्लेंडर में डालकर थोड़ा पानी डालकर महीन पेस्ट तैयार करें।

    3. मिलाना: पेस्ट में ठंडा दूध डालें और अच्छी तरह मिलाएँ।

    4. मसाले डालें: अब इसमें काली मिर्च, गुलाब जल और शक्कर डालकर फिर से मिक्स करें।

    5. छानना: मिश्रण को छलनी से छानकर गाढ़ा दूध निकाल लें।

    6. ठंडा परोसें: ठंडाई को फ्रिज में 1–2 घंटे ठंडा करें और साबुत किशमिश से गार्निश करके सर्व करें।

    खसखस ठंडाई क्यों चुनें?
    खसखस ठंडाई न सिर्फ स्वाद में लाजवाब होती है, बल्कि इसमें ऊर्जा बढ़ाने वाले तत्व और एंटीऑक्सीडेंट भी मौजूद होते हैं। यह पारंपरिक ठंडाई की तुलना में हल्की और आसानी से पचने वाली होती है।

    होली पर ठंडाई पीने के फायदे:
    शरीर को ठंडक देती है

    प्यास बुझाने के साथ ऊर्जा भी देती है

    रंगों और गुलाल खेलने के बाद डिहाइड्रेशन से बचाती है

    स्वाद में बच्चों और बड़ों दोनों को समान रूप से पसंद आती है

    परंपरा और त्योहार का संगम:
    होली केवल रंगों का त्योहार नहीं है। यह परिवार और दोस्तों के साथ समय बिताने, खास पकवान और ड्रिंक के माध्यम से जुड़ने का अवसर भी है। ठंडाई इस त्योहार में सिर्फ पेय नहीं, बल्कि खुशियों और यादों की मिठास जोड़ती है। इस होली, खसखस ठंडाई बनाकर आप रंगों की मिठास के साथ स्वाद और ठंडक का मज़ा भी बढ़ा सकते हैं।

  • चीज: स्वादिष्ट भी, सेहत के लिए फायदेमंद भी? डाइटीशियन से जानें न्यूट्रिशनल वैल्यू और हेल्थ बेनिफिट्स

    चीज: स्वादिष्ट भी, सेहत के लिए फायदेमंद भी? डाइटीशियन से जानें न्यूट्रिशनल वैल्यू और हेल्थ बेनिफिट्स


    नई दिल्ली । यदि आप किसी रेस्टोरेंट में गए हैं तो मेन्यू पर अक्सर एक्स्ट्रा चीज बर्गर एक्स्ट्रा चीज पिज्जा या एक्स्ट्रा चीज सैंडविच जैसे आइटम्स दिखते हैं। स्वाद में लाजवाब चीज सिर्फ खाने को मजेदार ही नहीं बनाती बल्कि प्रोटीन और कैल्शियम का अच्छा स्रोत भी है। लेकिन क्या चीज नियमित रूप से खाना सेहत के लिए सुरक्षित है?

    डॉ. पूनम तिवारी सीनियर डाइटीशियन डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान लखनऊ बताती हैं कि चीज एक डेयरी उत्पाद है जो पालतू जानवरों के दूध से बनाया जाता है। इसके उत्पादन में दूध को हल्का गर्म किया जाता है फिर उसमें स्टार्टर कल्चर मिलाकर दूध को खट्टा किया जाता है। उसके बाद रेनेट या नींबू का रस डालकर दूध जमाया जाता है। जमा हुआ दूध छोटे टुकड़ों में काटा जाता है ताकि उसमें मौजूद व्हे यानी बचा हुआ पानी अलग हो सके। जो ठोस हिस्सा बचता है वही चीज कहलाता है। कुछ चीज को हफ्तों या महीनों तक एज भी किया जाता है जिससे उसका स्वाद और टेक्सचर और बेहतर होता है।

    चीज में पाए जाने वाले मुख्य पोषक तत्वों में प्रोटीन और कैल्शियम शामिल हैं। यह हड्डियों की मजबूती और मांसपेशियों के विकास के लिए उपयोगी है। इसके अलावा चीज में विटामिन A B12 और फास्फोरस भी होते हैं। वहीं इसका सेवन सीमित मात्रा में करना जरूरी है क्योंकि इसमें सैचुरेटेड फैट और सोडियम भी काफी मात्रा में होता है। ज्यादा चीज खाने से वजन बढ़ने कोलेस्ट्रॉल बढ़ने और हृदय संबंधी जोखिम भी हो सकता है।

    डॉ. तिवारी के अनुसार स्वस्थ वयस्कों के लिए रोजाना 30–40 ग्राम चीज खाना सेहत के लिए लाभकारी है। बच्चों और बुजुर्गों के लिए यह हड्डियों और दांतों की मजबूती में मदद करता है। हालांकि उच्च ब्लड प्रेशर या कोलेस्ट्रॉल वाले लोग चीज का सेवन कम या डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही करें।

    इस प्रकार चीज का स्वाद और न्यूट्रिशनल बेनिफिट दोनों ही इसे खास बनाते हैं। लेकिन इसे संतुलित मात्रा में खाना चाहिए। पिज्जा पास्ता या सैंडविच में एक्स्ट्रा चीज लेना स्वादिष्ट तो है लेकिन सेहत का ध्यान रखते हुए इसका सेवन संतुलित रूप से करना ही सही है।

  • हरसिंगार प्लांटेशन: सफेद फूलों और खुशबू से सजाएं अपना गार्डन

    हरसिंगार प्लांटेशन: सफेद फूलों और खुशबू से सजाएं अपना गार्डन


    नई दिल्ली। इसे पारिजात के नाम से भी जाना जाता है। रात में खिलने और सुबह जमीन पर बिखर जाने वाले ये फूल न केवल बगीचे की शोभा बढ़ाते हैं, बल्कि हल्की-सी खुशबू से माहौल को ताजगी से भर देते हैं।

    हरसिंगार का पौधा ज्यादा देखभाल नहीं मांगता, इसलिए यह घरेलू बगीचों के लिए एकदम परफेक्ट माना जाता है। सही जगह, उपयुक्त मिट्टी और थोड़ी-सी धैर्य के साथ आपका गार्डन कुछ ही महीनों में सफेद फूलों से लहलहा सकता है।

    हरसिंगार पौधा लगाने और देखभाल के टिप्स
    1. सही जगह का चुनाव
    हरसिंगार को धूप और हल्की छांव दोनों पसंद हैं। इसे ऐसी जगह लगाएं जहां रोज़ाना 4-6 घंटे की धूप मिल सके। बहुत तेज धूप में छोटे पौधे की पत्तियां झुलस सकती हैं, इसलिए शुरुआती दिनों में हल्की छाया बेहतर रहती है। अगर आप गमले में पौधा लगा रहे हैं, तो 12–16 इंच का बड़ा गमला चुनें।

    2. मिट्टी कैसी हो?
    इस पौधे के लिए अच्छी जलनिकासी वाली दोमट मिट्टी सबसे बेहतर रहती है। आप 40% गार्डन सॉइल, 30% रेत और 30% गोबर की सड़ी खाद मिलाकर मिश्रण तैयार कर सकते हैं। मिट्टी ज्यादा कड़ी न हो, वरना जड़ें फैल नहीं पाएंगी। रोपण से पहले गड्ढे में थोड़ी जैविक खाद डालना लाभकारी होता है।

    3. पौधा लगाने की विधि

    नर्सरी से स्वस्थ और हरे पत्तों वाला पौधा चुनें। जमीन में लगभग 1–1.5 फुट गहरा गड्ढा खोदें। पौधे को सावधानी से रखें और मिट्टी भरकर हल्के हाथ से दबा दें। तुरंत हल्का पानी दें ताकि मिट्टी जड़ों से अच्छी तरह चिपक जाए। गमले में लगाने पर नीचे ड्रेनेज होल होना जरूरी है।

    4. सिंचाई और देखभाल
    हरसिंगार को ज्यादा पानी की जरूरत नहीं होती। गर्मियों में 2-3 दिन में एक बार और सर्दियों में हफ्ते में एक बार पानी देना पर्याप्त है। ध्यान रखें कि पानी जमा न हो, वरना जड़ें सड़ सकती हैं। हर 2-3 महीने में जैविक खाद डालने से फूलों की संख्या बढ़ती है। सूखी और पीली टहनियों की समय-समय पर छंटाई करें।

    5. कब आएंगे फूल?
    आमतौर पर मानसून के बाद से लेकर शरद ऋतु तक इस पौधे में फूल आने लगते हैं। सुबह जमीन पर गिरे फूलों को इकट्ठा करना भी एक सुखद अनुभव है। सही देखभाल मिलने पर पौधा हर साल और ज्यादा घना और खूबसूरत होता जाता है।

    हरसिंगार लगाने के फायदे
    बगीचे की खूबसूरती बढ़ाता है

    हल्की-सी खुशबू से माहौल को ताजगी देती है

    कम देखभाल में भी लंबे समय तक फूल देती है

    पारंपरिक और धार्मिक महत्व भी रखता है

    हरसिंगार न केवल बगीचे की शोभा बढ़ाता है, बल्कि सफेद फूलों और हल्की खुशबू के जरिए घर के वातावरण को सुंदर और ताजगी से भर देता है। सही मिट्टी, पर्याप्त धूप और नियमित देखभाल के साथ आपका गार्डन सालों तक हरसिंगार के फूलों से लबालब भरा रह सकता है।

  • हस्तरेखा विज्ञान में सूर्य पर्वत का महत्व: करियर और व्यक्तिगत विकास के संकेत..

    हस्तरेखा विज्ञान में सूर्य पर्वत का महत्व: करियर और व्यक्तिगत विकास के संकेत..


    नई दिल्ली। हस्तरेखा विज्ञान में सूर्य पर्वत को केवल हथेली की एक विशेष आकृति नहीं बल्कि जीवन के मार्गदर्शन का संकेतक माना जाता है। यह पर्वत अनामिका उंगली के आधार और हृदय रेखा के ऊपरी हिस्से में स्थित होता है और जातक के करियर, आर्थिक स्थिति और समाज में सम्मान का संकेत देता है। यदि सूर्य पर्वत पूर्ण और सुविकसित हो, तो यह व्यक्ति के जीवन में उच्च पद, प्रतिष्ठा और धन की प्राप्ति का संकेत देता है। वहीं, इसका अभाव या कमजोर स्थिति जीवन में सतर्क रहने और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों का संदेश देती है।

    सूर्य पर्वत मुख्य रूप से उन लोगों के लिए उपयोगी है जो करियर में ऊँचाई प्राप्त करना चाहते हैं या समाज में मान्यता पाना चाहते हैं। विशेषज्ञ बताते हैं कि यदि यह पर्वत गुलाबी रंग और उभार वाला हो, तो जातक स्वभाव से हंसमुख, उदार और मेहनती होता है। ऐसे लोग व्यापार, कला, संगीत और रचनात्मक क्षेत्रों में सफलता प्राप्त कर सकते हैं। सूर्य पर्वत जन्म से ही अस्तित्व में होता है, लेकिन जीवन के अनुभव, शिक्षा और स्वभाव के अनुसार यह अधिक या कम विकसित हो सकता है।

    सूर्य पर्वत के आकार और स्थिति का अध्ययन जीवन में करियर और आर्थिक निर्णय लेने में भी सहायक है। यदि पर्वत अत्यधिक विकसित है, तो यह कभी-कभी अहंकार या खर्चीले स्वभाव की ओर इशारा कर सकता है। वहीं, कमजोर सूर्य पर्वत आत्मविश्वास में कमी, सम्मान की कमी और आर्थिक चुनौतियों का संकेत देता है। इसके झुकाव से भी जातक के व्यक्तित्व और सफलता की दिशा का अनुमान लगाया जा सकता है। बुध की ओर झुके सूर्य पर्वत वाले व्यक्ति आमतौर पर व्यापार में कुशल और धन संचय करने में सक्षम होते हैं, जबकि शनि की ओर झुके पर्वत वाले लोग अधिकांतप्रिय होते हैं और उन्हें आर्थिक संघर्ष का सामना करना पड़ सकता है।

    पहचान के लिए अनामिका उंगली के नीचे के हिस्से और हृदय रेखा के ऊपर के क्षेत्र को देखें। पूर्ण विकसित पर्वत गुलाबी, उभार वाला और स्पष्ट दिखता है। यदि यह सपाट, फीका या कमजोर प्रतीत होता है, तो इसे जीवन में चुनौतियों और सतर्क रहने की चेतावनी के रूप में समझा जाता है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि सूर्य पर्वत का अध्ययन केवल भविष्य जानने के लिए नहीं, बल्कि करियर योजना, आर्थिक प्रबंधन और व्यक्तिगत विकास के मार्गदर्शन के लिए भी किया जा सकता है। सुविकसित सूर्य पर्वत वाले जातक सामाजिक गतिविधियों और टीम वर्क में सफल रहते हैं। कमजोर सूर्य पर्वत वाले जातकों को आत्मविश्वास बढ़ाने, नेतृत्व कौशल विकसित करने और आर्थिक निर्णयों में सतर्क रहने की सलाह दी जाती है।

    हस्तरेखा विज्ञान में सूर्य पर्वत का महत्व लगातार बढ़ रहा है। इसे देखकर व्यक्ति अपने करियर में नई रणनीतियां अपना सकता है, धन प्रबंधन के उपाय कर सकता है और जीवन में सफलता और सम्मान के अवसरों को पहचान सकता है। यही कारण है कि सूर्य पर्वत का अध्ययन हर उम्र के लिए उपयोगी और मार्गदर्शक माना जाता है।

  • नासिक का श्री कालाराम मंदिर: भगवान राम की पवित्रता और अंबेडकर आंदोलन का केंद्र

    नासिक का श्री कालाराम मंदिर: भगवान राम की पवित्रता और अंबेडकर आंदोलन का केंद्र


    नई दिल्ली।महाराष्ट्र के नासिक जिले के पंचवटी क्षेत्र में स्थित श्री कालाराम मंदिर अपने प्राचीन और ऐतिहासिक महत्व के कारण पूरे भारत में प्रसिद्ध है। यह मंदिर प्रभु श्री राम को समर्पित है और काले पत्थरों से निर्मित होने के कारण इसे कालाराम कहा जाता है। मंदिर की अनूठी वास्तुकला और मूर्तियां श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित करती हैं। मंदिर में भगवान राम, माता सीता और भ्राता लक्ष्मण की काली प्रतिमाएं विराजमान हैं, जिन्हें गोदावरी नदी से प्राप्त पत्थरों से बनाया गया था।

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह स्थल भगवान राम के 14 वर्ष के वनवास काल से जुड़ा हुआ है। पंचवटी क्षेत्र को रामायण के अनुसार भगवान राम के वनवास का स्थान माना जाता है, जहां उन्होंने माता सीता और लक्ष्मण के साथ समय बिताया। यही कारण है कि यह मंदिर न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि ऐतिहासिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।

    मंदिर का निर्माण 1782 ईस्वी में हुआ था। यह 74 मीटर लंबा और 32 मीटर चौड़ा है। मंदिर के चारों दिशाओं में चार प्रवेश द्वार हैं और महाद्वार से प्रवेश करने पर भव्य सभामंडप दिखाई देता है, जिसकी ऊँचाई 12 फीट है। मुख्य मंदिर में 14 सीढ़ियां हैं, जो भगवान राम के वनवास के 14 वर्षों का प्रतीक हैं। मंदिर के चारों ओर 84 स्तंभ खड़े हैं, जो 84 लाख प्रजातियों के चक्र का प्रतिनिधित्व करते हैं। मंदिर में हनुमान जी की एक काली मूर्ति भी है, जो भगवान राम के चरणों की ओर देखती हुई नजर आती है।

    श्री कालाराम मंदिर में धार्मिक उत्सवों का आयोजन विशेष धूमधाम से होता है। रामनवमी, दशहरा और चैत्र पड़वा यहां प्रमुख त्योहार हैं, जिनमें देश-दुनिया से हजारों श्रद्धालु भाग लेते हैं। ये उत्सव न केवल आस्था का प्रतीक हैं, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक पहचान भी बनाते हैं।

    इस मंदिर की खासियत केवल धार्मिक महत्व तक सीमित नहीं है। यह सामाजिक इतिहास में भी महत्वपूर्ण स्थान रखता है। 1930 में डॉ. भीम राव अंबेडकर ने यहां दलितों के मंदिर प्रवेश आंदोलन का नेतृत्व किया था। उस समय दलितों को मंदिर में प्रवेश की अनुमति नहीं थी। डॉ. अंबेडकर के नेतृत्व में आंदोलन के बाद दलितों को मंदिर में प्रवेश की अनुमति मिली, जिससे सामाजिक असमानता के खिलाफ एक महत्वपूर्ण संदेश गया। यह आंदोलन आज भी सामाजिक न्याय और समानता के प्रतीक के रूप में याद किया जाता है।

    श्री कालाराम मंदिर का महत्व धार्मिक, ऐतिहासिक और सामाजिक तीनों दृष्टियों से देखा जा सकता है। इसकी वास्तुकला, धार्मिक मान्यताएं, उत्सव और सामाजिक आंदोलन इसे नासिक की पहचान और भारतीय संस्कृति का अनमोल हिस्सा बनाते हैं।

  • द केरला स्टोरी 2 रिलीज से पहले दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस, पीड़ितों ने साझा की अपनी सच्ची कहानियां

    द केरला स्टोरी 2 रिलीज से पहले दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस, पीड़ितों ने साझा की अपनी सच्ची कहानियां


    नई दिल्ली । द केरला स्टोरी 2 गोज बियॉन्ड की रिलीज़ से पहले मेकर्स ने दिल्ली में एक विशेष प्रेस कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया जिसमें देशभर से आए पीड़ित और उनके परिवारों को एक साथ लाया गया। इस मौके पर 49 पीड़ित और उनके परिवार के सदस्य मंच पर मौजूद थे जबकि कई अन्य लोग दर्शकों की सीटों पर बैठकर इस सभा का हिस्सा बने।

    इवेंट में बंगाल बिहार भीलवाड़ा गंगापुर राजकोट उदयपुर जम्मू महाराष्ट्र भोपाल झारखंड फरीदाबाद मेरठ दिल्ली नोएडा गुड़गांव और इंदौर के लोग शामिल हुए। आयोजकों के अनुसार कुल 55 लड़कियों और 33 परिवार के सदस्यों ने अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने मीडिया से अपनी आपबीती साझा करते हुए जागरूकता बढ़ाने की अपील की।

    फिल्म की टीम में प्रोड्यूसर विपुल अमृतलाल शाह डायरेक्टर कामाख्या नारायण सिंह को प्रोड्यूसर आशिन ए. शाह और लीड कास्ट की उल्का गुप्ता ऐश्वर्या ओझा और अदिति भाटिया शामिल थे। कुल छह सदस्य मेकर्स और कलाकारों की ओर से इस सभा में मौजूद थे।

    कामाख्या नारायण सिंह द्वारा निर्देशित यह फिल्म तीन हिंदू लड़कियों उल्का गुप्ता अदिति भाटिया और ऐश्वर्या ओझा की असाधारण और झकझोर देने वाली कहानी पर आधारित है। उनकी जिंदगी तब बदलती है जब उन्हें तीन मुस्लिम लड़कों से प्यार हो जाता है और धीरे धीरे यह रिश्ते धर्म परिवर्तन के एक कथित एजेंडे का खुलासा करते हैं। फिल्म कन्नड़ और तेलुगु भाषाओं में भी रिलीज होगी।

    द केरला स्टोरी 2 गोज़ बियॉन्ड का निर्माण विपुल अमृतलाल शाह ने सनशाइन पिक्चर्स के बैनर तले किया है। फिल्म 27 फरवरी 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज़ होने के लिए तैयार है। इस प्रेस कॉन्फ्रेंस ने न केवल फिल्म का प्रचार किया बल्कि पीड़ितों की आवाज़ को सामने लाकर समाज में जागरूकता फैलाने का भी प्रयास किया।

  • उज्जैन-जावरा ग्रीनफील्ड हाई-वे से किसानों और क्षेत्र का समग्र विकास, मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दी बड़ी सौगात

    उज्जैन-जावरा ग्रीनफील्ड हाई-वे से किसानों और क्षेत्र का समग्र विकास, मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दी बड़ी सौगात


    भोपाल । मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने उज्जैन से जावरा तक बनने वाली ग्रीनफील्ड एक्सेस कंट्रोल्ड हाई वे परियोजना को जिले के किसानों और जनप्रतिनिधियों के समक्ष मंजूरी मिलने पर खुशी जाहिर की। उन्होंने कहा कि यह परियोजना न सिर्फ क्षेत्र की कनेक्टिविटी को मजबूत करेगी बल्कि स्थानीय क्षेत्र के समग्र विकास की नई पहचान भी बनेगी। करीब 5017 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाला यह हाई वे किसानों व्यापारियों और आम जनता के जीवन स्तर को सीधे लाभान्वित करेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि विकास की दिशा में प्रदेश में सभी एकजुट हैं और जीवाईएएन पहल को आगे बढ़ाकर प्रदेश को देश के विकसित प्रदेशों में शामिल करने का लक्ष्य है।

    किसानों की बेहतरी और कृषि उत्पादों को बड़ी मंडियों तक पहुंचाने के लिए यह हाई वे एक महत्वपूर्ण कदम है। मुख्यमंत्री ने किसान प्रतिनिधि मंडल को संबोधित करते हुए बताया कि उज्जैन जावरा हाई वे परियोजना के अलावा प्रदेश में सड़कों और राजमार्गों का विस्तृत नेटवर्क तैयार किया जा रहा है जिससे किसानों की पहुंच सुगम होगी। इस अवसर पर घट्टिया विधायक डॉ. सतीश मालवीय और नागदा विधायक डॉ. तेज बहादुर सिंह चौहान ने मुख्यमंत्री का अभिनंदन किया और उन्हें विकास पुरूष बताया।

    डॉ. यादव ने किसानों के आर्थिक सशक्तिकरण के लिए भी कई योजनाओं का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि ग्रीष्मकालीन उड़द पर हर किसान को 600 रुपये प्रति क्विंटल बोनस मिलेगा। इसके साथ ही सरसों चना मसूर तुअर और अन्य दलहन व तिलहन की फसलों के लिए भावांतर भुगतान योजना और उत्पादन बढ़ाने के ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। प्रदेश के दुग्ध उत्पादन को देश के कुल उत्पादन का 20 प्रतिशत तक बढ़ाने के लिए भी योजनाएं बनाई जा रही हैं। आगामी शैक्षणिक सत्र से कक्षा आठवीं तक के विद्यार्थियों को टेट्रा पैक में दूध उपलब्ध कराया जाएगा जिससे उत्पादन और पोषण दोनों में वृद्धि होगी।

    मुख्यमंत्री ने किसानों को अन्नदाता से ऊर्जादाता और उद्यमी बनाने की दिशा में भी कार्यरत योजनाओं का जिक्र किया। अगले तीन वर्षों में एक लाख किसानों को सोलर पंप उपलब्ध कराए जाएंगे जिससे सिंचाई और अतिरिक्त बिजली उत्पादन का विकल्प मिलेगा। कृषि आधारित उद्योगों और फूड पार्क की स्थापना से किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य स्थानीय स्तर पर मिलेगा।

    डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में गरीब युवा किसान और महिला कल्याण के लिए मिशन मोड में कार्य जारी है। उज्जैन मेट्रोपॉलिटिन क्षेत्र में शामिल होने से नागदा खाचरौद और रतलाम सहित पूरे क्षेत्र का समग्र विकास सुनिश्चित होगा। किसान प्रतिनिधिमंडल में मौजूद समाजसेवी और स्थानीय किसानों ने इस पहल का स्वागत किया।

  • शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद मामले में सियासत तेज, अखिलेश यादव ने दिया खुला समर्थन

    शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद मामले में सियासत तेज, अखिलेश यादव ने दिया खुला समर्थन


    नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश की राजनीति में उस समय हलचल मच गई जब स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती उनके शिष्य मुकुंदानंद ब्रह्मचारी और तीन अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ झूंसी थाने में पॉक्सो एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज की गई। इस घटनाक्रम के बाद मामला धार्मिक दायरे से निकलकर सियासी अखाड़े में पहुंच गया है। विपक्षी दलों ने इसे गंभीर विषय बताते हुए सरकार की मंशा पर सवाल खड़े किए हैं।

    अखिलेश यादव का भाजपा पर तीखा हमला

    समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव खुलकर शंकराचार्य के समर्थन में सामने आए हैं। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि सच्चे संतों का अपमान कर भाजपा ने अपनी कार्यशैली उजागर कर दी है। उनके मुताबिक जो भी व्यक्ति या संत सरकार के खिलाफ आवाज उठाता है उसे झूठे आरोपों में फंसाने की कोशिश की जाती है। अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि भाजपा का मकसद सत्ता के जरिए धन अर्जित करना है और इसके लिए वह किसी भी स्तर तक जा सकती है। उन्होंने कहा कि सत्ताधारी दल के भीतर भी आपसी मतभेद हैं जिनकी आहट समय-समय पर सुनाई देती रहती है।

    कार्रवाई उन पर होनी चाहिए थी जिन्होंने रोका
    अखिलेश यादव ने मीडिया से बातचीत में यह भी कहा कि जिस धार्मिक आयोजन में अविमुक्तेश्वरानंद शामिल होना चाहते थे उस दौरान प्रशासन को उनके तय मार्ग पर आपत्ति थी। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि किसी ने उन्हें स्नान से रोका तो कार्रवाई उन लोगों पर होनी चाहिए थी न कि संत पर।उन्होंने यह भी कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि एक भगवाधारी संत के साथ ऐसा व्यवहार तब हो रहा है जब राज्य में खुद भगवाधारी मुख्यमंत्री सत्ता में हैं।

    भाजपा की ओर से प्रतिक्रिया का इंतजार

    फिलहाल इस मामले में भाजपा की ओर से विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज है कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा और गरमा सकता है। धार्मिक आस्था कानून और राजनीति के बीच खिंची इस रेखा ने उत्तर प्रदेश की सियासत को नया मोड़ दे दिया है। अब नजर इस बात पर है कि जांच किस दिशा में आगे बढ़ती है और आरोपों की सच्चाई क्या सामने आती है। वहीं विपक्ष इसे लोकतांत्रिक आवाजों को दबाने का प्रयास बता रहा है तो सत्ता पक्ष कानून की प्रक्रिया का हवाला दे रहा है।

  • बीमा की गलत बिक्री अब अपराध: बैंकों को वित्त मंत्री की दो टूक चेतावनी, 1 जुलाई से सख्त नियम

    बीमा की गलत बिक्री अब अपराध: बैंकों को वित्त मंत्री की दो टूक चेतावनी, 1 जुलाई से सख्त नियम


    नई दिल्ली । में बैंकिंग क्षेत्र को स्पष्ट संदेश देते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बीमा सहित अन्य वित्तीय उत्पादों की गलत बिक्री मिस-सेलिंग को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने कहा कि भ्रामक तरीके से बीमा बेचने की प्रवृत्ति अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी और यह भारतीय न्याय संहिता के तहत दंडनीय अपराध है। बजट के बाद भारतीय रिजर्व बैंक के केंद्रीय निदेशक मंडल को संबोधित करने के बाद उन्होंने स्पष्ट किया कि बैंकों को अपने मूल कार्य जमा जुटाने और ऋण देने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए न कि ग्राहकों पर अनावश्यक बीमा उत्पाद थोपने पर।

    मिस-सेलिंग बिल्कुल बर्दाश्त नहीं
    वित्त मंत्री ने कहा कि कई मामलों में ग्राहकों को ऐसे बीमा उत्पाद बेचे जा रहे हैं जिनकी उन्हें जरूरत ही नहीं होती। खासकर गृह ऋण के मामलों में संपत्ति पहले से गिरवी होने के बावजूद अतिरिक्त बीमा लेने का दबाव बनाया जाता है। उन्होंने इसे अनुचित बताते हुए कहा कि अब स्पष्ट संदेश जाना चाहिए गलत बिक्री कानूनन अपराध है और दोषियों पर कार्रवाई होगी।

    1 जुलाई से लागू होंगे कड़े प्रावधान

    आरबीआई ने 11 फरवरी को मिस-सेलिंग रोकने के लिए नए दिशानिर्देशों का मसौदा जारी किया था। प्रस्तावित नियमों के अनुसार यदि किसी ग्राहक को भ्रामक जानकारी देकर उत्पाद बेचा जाता है तो संबंधित बैंक को पूरी राशि लौटानी होगी और नुकसान की भरपाई भी करनी होगी। इन नियमों पर 4 मार्च तक सार्वजनिक टिप्पणियां मांगी गई थीं और अब 1 जुलाई से कड़े प्रावधान लागू किए जाएंगे। इससे ग्राहकों के हितों की सुरक्षा को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है।

    नियामकीय खामियों पर भी उठे सवाल

    सीतारमण ने माना कि अब तक आरबीआई और बीमा नियामक के बीच समन्वय की कमी के कारण कुछ मामलों में ग्राहकों को नुकसान उठाना पड़ा। उन्होंने कहा कि नियामकीय अंतर रेगुलेटरी गैप का फायदा उठाकर गलत बिक्री की घटनाएं हुईं जिसे अब सख्ती से रोका जाएगा।

    जमा और कासा मजबूत करें बैंक

    वित्त मंत्री ने बैंकों को सलाह दी कि वे गैर-बैंकिंग उत्पादों की आक्रामक बिक्री से बचें और कम लागत वाली जमा व कासा चालू खाता-बचत खाता आधार को मजबूत करें। ग्राहकों की वास्तविक जरूरतों और उनकी वित्तीय क्षमता को समझना प्राथमिकता होनी चाहिए।

    इस बीच आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बताया कि बैंकिंग प्रणाली में जमा वृद्धि दर लगभग 12.5% है जबकि ऋण वृद्धि करीब 14.5% बनी हुई है। फरवरी 2025 से अब तक रेपो दर में 1.25% की कटौती कर इसे 5.25% किया जा चुका है। हालांकि हालिया समीक्षा में वैश्विक अनिश्चितताओं को देखते हुए दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया।

    आरबीआई ने भरोसा दिलाया है कि बाजार में पर्याप्त नकदी बनाए रखने के लिए जरूरी कदम उठाए जाते रहेंगे। स्पष्ट है कि 1 जुलाई के बाद बैंकिंग क्षेत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही की नई परीक्षा शुरू होने जा रही है।