Author: bharati

  • सोमवारी शिव आराधना: जल से लेकर पंचामृत तक, शिवभक्ति से बदल सकता है भाग्य का प्रवाह

    सोमवारी शिव आराधना: जल से लेकर पंचामृत तक, शिवभक्ति से बदल सकता है भाग्य का प्रवाह


    नई दिल्ली। हिंदू धर्म में सोमवार का दिन भगवान शिव को समर्पित माना गया है। इस दिन की गई पूजा-अर्चना को अत्यंत शुभ और शीघ्र फल देने वाली माना जाता है। श्रद्धालु मानते हैं कि महादेव अत्यंत सरल स्वभाव के देवता हैं, जो केवल सच्चे भाव और श्रद्धा से ही प्रसन्न हो जाते हैं। यही कारण है कि शिव उपासना में जटिल विधियों की बजाय शुद्धता और भक्ति को सर्वोच्च स्थान दिया गया है। सोमवार के दिन शिवलिंग पर जलाभिषेक करना सबसे महत्वपूर्ण साधना मानी जाती है, जिससे जीवन के कष्टों का निवारण और मानसिक शांति प्राप्त होती है।

     पंचामृत और पवित्र जल से अभिषेक का महत्
    शिव पूजन में जल और पंचामृत का विशेष स्थान है। श्रद्धालु भगवान शिव को गंगाजल, स्वच्छ जल, दूध, दही, शहद, चीनी और घी से अभिषेक करते हैं, जिसे पंचामृत कहा जाता है। मान्यता है कि पंचामृत से किया गया अभिषेक न केवल आध्यात्मिक शुद्धि देता है, बल्कि जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार भी करता है। सफेद चंदन का लेपन मानसिक शांति और स्थिरता का प्रतीक माना जाता है, जो भक्त के जीवन में संतुलन लाने में सहायक होता है।

    बेलपत्र, धतूरा और शमी पत्तों का विशेष महत्व
    भगवान शिव को बेलपत्र अत्यंत प्रिय माना गया है। ऐसी मान्यता है कि तीन पत्तियों वाला बेलपत्र अर्पित करने से त्रिदेवों का आशीर्वाद प्राप्त होता है। इसके साथ ही धतूरा, आंकड़े के फूल और शमी के पत्ते भी शिव पूजा का अभिन्न हिस्सा हैं। ये सभी सामग्री शिव के त्याग, तप और वैराग्य भाव का प्रतीक मानी जाती हैं। भक्त इन वस्तुओं को अर्पित कर अपने जीवन में नकारात्मक ऊर्जा को दूर करने की कामना करते हैं।

    भोग और प्रसाद में सात्विकता का संदेश
    शिव पूजन में भोग का भी विशेष महत्व है। भक्त भगवान शिव को भांग, मिश्री और सात्विक मिठाइयों का भोग लगाते हैं। माना जाता है कि सात्विक भोग से मन शुद्ध होता है और आध्यात्मिक ऊर्जा में वृद्धि होती है।  भांग को शिव का प्रिय माना गया है, जो उनके वैराग्य और योगी स्वरूप का प्रतीक है। वहीं मिश्री और मिठाई भक्ति में मधुरता और सौम्यता का संदेश देती हैं।

    श्रद्धा और विश्वास से बदलता जीवन
    सोमवार को की गई शिव आराधना केवल धार्मिक कर्मकांड नहीं, बल्कि आत्मिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा का माध्यम है। जल, पंचामृत और पवित्र पत्तों से की गई पूजा व्यक्ति के जीवन में संतुलन, सुख और समृद्धि लाने की मान्यता रखती है। श्रद्धालु मानते हैं कि सच्चे मन से की गई शिव भक्ति से जीवन के सभी कष्ट धीरे-धीरे समाप्त हो जाते हैं और भाग्य का नया मार्ग खुलता है।

  • मॉस्को पर यूक्रेन का सबसे बड़ा ड्रोन हमला, 500+ ड्रोन से रूस दहला, तीन की मौत, एयर डिफेंस ने 556 ड्रोन गिराने का दावा

    मॉस्को पर यूक्रेन का सबसे बड़ा ड्रोन हमला, 500+ ड्रोन से रूस दहला, तीन की मौत, एयर डिफेंस ने 556 ड्रोन गिराने का दावा


    नई दिल्ली। रूस-यूक्रेन युद्ध में तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। यूक्रेन ने रूस की राजधानी मॉस्को और आसपास के इलाकों पर एक साथ 500 से ज्यादा ड्रोन से बड़ा और संगठित हमला किया, जिसे अब तक का सबसे बड़ा ड्रोन अटैक माना जा रहा है।

    रूस के रक्षा मंत्रालय ने दावा किया है कि उसकी एयर डिफेंस सिस्टम ने रातभर में कुल 556 यूक्रेनी ड्रोन को इंटरसेप्ट और नष्ट किया। वहीं मॉस्को के मेयर सर्गेई सोबयानिन के मुताबिक, शहर और आसपास के क्षेत्रों में 120 से ज्यादा ड्रोन को मार गिराया गया।

    इस हमले में मॉस्को के पास खिमकी और मितिशची इलाकों में ड्रोन गिरने से कम से कम 3 लोगों की मौत हो गई, जबकि 12 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। एक महिला की मौत घर पर ड्रोन गिरने से हुई, जबकि दो लोगों की जान निर्माणाधीन इमारत पर मलबा गिरने से गई।

    हमले के दौरान कई रिहायशी इमारतें क्षतिग्रस्त हुईं, कुछ जगहों पर आग लगने की घटनाएं भी सामने आईं। रूस के सबसे व्यस्त शेरेमेत्येवो एयरपोर्ट के पास भी ड्रोन के टुकड़े गिरे, हालांकि किसी बड़े नुकसान की पुष्टि नहीं हुई है।

    रूसी मीडिया TASS के अनुसार, यह हमला पिछले एक साल में मॉस्को पर सबसे बड़ा ड्रोन हमला माना जा रहा है। कई जगहों से आग और धुएं की तस्वीरें सामने आई हैं, जिससे राजधानी में दहशत का माहौल बन गया।

    उधर, यूक्रेनी वायुसेना ने दावा किया कि रूस ने भी जवाबी कार्रवाई में 287 ड्रोन दागे, जिनमें से अधिकांश को मार गिराया गया। इस हमले में यूक्रेन के Dnipropetrovsk और Zaporizhzhia क्षेत्रों में 9 लोग घायल हुए हैं।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यह हमला रूस की राजधानी तक युद्ध के दायरे के और गहराने का संकेत है और आने वाले दिनों में तनाव और बढ़ सकता है।

  • मोदी की नीदरलैंड यात्रा में ऐतिहासिक समझौता: 1000 साल पुराने चोल तमिल दस्तावेज भारत लौटेंगे, टाटा-ASML डील से सेमीकंडक्टर सहयोग को बढ़ावा

    मोदी की नीदरलैंड यात्रा में ऐतिहासिक समझौता: 1000 साल पुराने चोल तमिल दस्तावेज भारत लौटेंगे, टाटा-ASML डील से सेमीकंडक्टर सहयोग को बढ़ावा



    नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीदरलैंड यात्रा के दौरान भारत के इतिहास और तकनीकी क्षेत्र दोनों के लिए बड़े समझौते हुए। इस यात्रा में 11वीं सदी के चोल काल के तमिल ताम्र पट्टिकाओं को भारत वापस लाने पर सहमति बनी, वहीं टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स और डच कंपनी ASML के बीच सेमीकंडक्टर क्षेत्र में महत्वपूर्ण साझेदारी भी हुई।

    1000 साल पुराने चोल दस्तावेज भारत लौटेंगे
    भारत और नीदरलैंड के बीच हुए समझौते के तहत 11वीं सदी की चोल ताम्र पट्टिकाएं जल्द भारत लाई जाएंगी। यह संग्रह 21 बड़ी और 3 छोटी तांबे की प्लेटों का है, जिन पर अधिकतर लेख तमिल भाषा में लिखे गए हैं।

    प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि इन ऐतिहासिक दस्तावेजों में चोल साम्राज्य के महान शासक राजा राजेंद्र चोल प्रथम और उनके पिता राजा राजराजा चोल प्रथम से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियाँ दर्ज हैं। ये पट्टिकाएं 19वीं सदी में यूरोपीय व्यापार और शोध के दौरान भारत से बाहर ले जाई गई थीं।

    टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स और ASML के बीच बड़ा समझौता
    नीदरलैंड के द हेग में आयोजित कार्यक्रम के दौरान टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स और डच कंपनी ASML के बीच सेमीकंडक्टर और चिप तकनीक के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने का समझौता हुआ।

    ASML दुनिया की अग्रणी चिप मशीन निर्माता कंपनी है, जबकि टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स भारत में सेमीकंडक्टर निर्माण में तेजी से निवेश कर रही है। यह डील भारत को चिप निर्माण क्षेत्र में मजबूत स्थिति दिलाने की दिशा में अहम मानी जा रही है।

    नीदरलैंड के राजा-रानी से मुलाकात
    पीएम मोदी ने नीदरलैंड के राजा विलेम-अलेक्जेंडर और रानी मैक्सिमा से शाही महल ‘पैलेस हाउस टेन बॉश’ में मुलाकात की। इस दौरान दोनों देशों के बीच शिक्षा, तकनीक, डिजिटल नवाचार, ग्रीन एनर्जी और वाटर मैनेजमेंट जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा हुई।

    नीदरलैंड के राजा-रानी ने प्रधानमंत्री मोदी के सम्मान में रात्रिभोज का भी आयोजन किया। मोदी ने 2019 की उनकी भारत यात्रा को याद करते हुए दोनों देशों के संबंधों को और मजबूत बताया।

    भारत में निवेश का सुनहरा मौका: पीएम मोदी
    CEO राउंड टेबल बैठक में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत में निवेश और कारोबार का यह सबसे उपयुक्त समय है। उन्होंने बताया कि टैक्स और लेबर सुधारों के कारण भारत में मैन्युफैक्चरिंग अब अधिक आसान और सस्ती हो गई है।

    उन्होंने यह भी कहा कि भारत अब इलेक्ट्रॉनिक्स का बड़ा निर्यातक बन चुका है और ग्रीन हाइड्रोजन, टेक्नोलॉजी और इनोवेशन जैसे क्षेत्रों में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

    300 से अधिक डच कंपनियां भारत में सक्रिय
    प्रधानमंत्री ने बताया कि पहले से ही 300 से अधिक डच कंपनियां भारत में काम कर रही हैं। भारत-यूरोपीय संघ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट से दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश के नए अवसर खुलेंगे।

    स्वीडन के लिए रवाना हुए पीएम मोदी
    नीदरलैंड दौरे के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अब स्वीडन के गोथेनबर्ग शहर के लिए रवाना हो गए हैं, जहां वे 17 और 18 मई को द्विपक्षीय वार्ता और सहयोग को लेकर चर्चा करेंगे।
    मोदी की नीदरलैंड यात्रा न केवल भारत की ऐतिहासिक धरोहर को वापस लाने में सफल रही, बल्कि सेमीकंडक्टर और तकनीकी सहयोग के नए रास्ते भी खोल गई। यह दौरा भारत-नीदरलैंड संबंधों को एक नई ऊंचाई पर ले जाने वाला माना जा रहा है।

  • सुबह के नाश्ते की आसान और हेल्दी शुरुआत: झटपट बनने वाला वेजिटेबल उपमा, स्वाद और सेहत का परफेक्ट मेल

    सुबह के नाश्ते की आसान और हेल्दी शुरुआत: झटपट बनने वाला वेजिटेबल उपमा, स्वाद और सेहत का परफेक्ट मेल

    नई दिल्ली ।  लंबी यात्रा का नाम सुनते ही जहां कुछ लोगों के चेहरे पर उत्साह आ जाता है, वहीं कई लोगों के लिए सफर एक बड़ी परेशानी बन जाता है। कार, बस या पहाड़ी रास्तों पर सफर करते समय उल्टी, चक्कर, घबराहट और जी मिचलाने जैसी समस्याएं कई यात्रियों को परेशान करती हैं। इस स्थिति को सामान्य भाषा में मोशन सिकनेस कहा जाता है। यह समस्या न केवल यात्रा का आनंद खराब कर देती है, बल्कि कई बार लोगों को सफर करने से भी डर लगने लगता है। हालांकि, कुछ आसान घरेलू उपायों को अपनाकर इस परेशानी को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

    मोशन सिकनेस आमतौर पर तब होती है जब आंखों और दिमाग के बीच तालमेल बिगड़ जाता है। चलते वाहन में शरीर एक तरह की गति महसूस करता है, जबकि दिमाग उसे अलग तरीके से समझता है। इसी कारण घबराहट, चक्कर और उल्टी जैसी दिक्कतें शुरू हो जाती हैं। लेकिन यदि सफर से पहले और दौरान कुछ छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखा जाए, तो यात्रा काफी आरामदायक बन सकती है।

    अदरक को इस समस्या का सबसे प्रभावी घरेलू उपाय माना जाता है। इसमें मौजूद प्राकृतिक गुण पेट को शांत रखने में मदद करते हैं और जी मिचलाने की समस्या को कम करते हैं। सफर पर निकलने से पहले अदरक वाली चाय पीना या अदरक का छोटा टुकड़ा चबाना फायदेमंद साबित हो सकता है। कई लोग अदरक की टॉफी या कैंडी का इस्तेमाल भी करते हैं, जिससे यात्रा के दौरान राहत मिलती है।

    नींबू और काला नमक भी सफर के दौरान काफी लाभकारी माने जाते हैं। नींबू की खुशबू और उसका स्वाद पेट को आराम देता है। यात्रा के दौरान यदि जी मिचलाने लगे तो नींबू के टुकड़े पर थोड़ा काला नमक लगाकर चूसने से तुरंत राहत महसूस हो सकती है। यह तरीका खासतौर पर पहाड़ी रास्तों में बेहद कारगर माना जाता है।

    विशेषज्ञ यह भी सलाह देते हैं कि खाली पेट सफर करने से बचना चाहिए। कई लोग यह सोचकर बिना कुछ खाए यात्रा पर निकल जाते हैं कि इससे उल्टी नहीं होगी, लेकिन वास्तव में खाली पेट होने से परेशानी और बढ़ सकती है। सफर से पहले हल्का और आसानी से पचने वाला भोजन करना बेहतर माना जाता है। तला-भुना और अधिक मसालेदार भोजन से दूरी बनाना भी जरूरी है।

    सही सीट का चुनाव भी मोशन सिकनेस को कम करने में अहम भूमिका निभाता है। कार या बस में आगे की सीट पर बैठने से शरीर को कम झटके महसूस होते हैं। साथ ही बाहर के दृश्यों को देखने से दिमाग और आंखों के बीच बेहतर तालमेल बना रहता है, जिससे चक्कर और घबराहट कम होती है। सफर के दौरान लगातार मोबाइल देखने या किताब पढ़ने से बचना चाहिए, क्योंकि इससे परेशानी बढ़ सकती है।

    ताजी हवा लेना भी बेहद जरूरी है। बंद खिड़कियां, तेज गंध और घुटन भरा माहौल कई बार उल्टी की समस्या को बढ़ा देते हैं। ऐसे में वाहन की खिड़की थोड़ा खुला रखना या बीच-बीच में ताजी हवा लेना राहत पहुंचा सकता है।

    अगर किसी व्यक्ति को हर यात्रा में गंभीर मोशन सिकनेस की समस्या होती है, तो डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी हो सकता है। कुछ मामलों में दवाओं की जरूरत भी पड़ सकती है। सही सावधानी और घरेलू उपायों के जरिए सफर को आरामदायक और आनंददायक बनाया जा सकता है।

  • जालंधर ब्लास्ट की जांच में नया मोड़, दूर से मोबाइल सिग्नल से ट्रिगर किया गया IED हमला

    जालंधर ब्लास्ट की जांच में नया मोड़, दूर से मोबाइल सिग्नल से ट्रिगर किया गया IED हमला

    नई दिल्ली ।  जालंधर में बीएसएफ मुख्यालय के बाहर हुए धमाके की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे इस मामले में अंतरराष्ट्रीय आतंकी नेटवर्क से जुड़े नए और गंभीर खुलासे सामने आ रहे हैं। शुरुआती जांच में यह संकेत मिला है कि इस विस्फोट के पीछे पाकिस्तान में बैठे एक आतंकी हैंडलर का हाथ हो सकता है, जिसने मोबाइल सिम आधारित आधुनिक तकनीक के जरिए इस घटना को अंजाम देने की योजना बनाई। इस पूरे मामले ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता को और बढ़ा दिया है, क्योंकि यह हमला पारंपरिक तरीकों से हटकर अत्याधुनिक रिमोट ट्रिगरिंग सिस्टम के इस्तेमाल की ओर इशारा करता है।

    जांच रिपोर्ट के अनुसार, विस्फोटक उपकरण को पहले से ही घटनास्थल के पास प्लांट किया गया था और उसमें एक सिम कार्ड को विशेष डिवाइस के साथ जोड़ा गया था। इसके बाद यह सिम नंबर पाकिस्तान में बैठे हैंडलर को भेजा गया, जिसने कॉल या मैसेज के जरिए डिवाइस को सक्रिय किया। जैसे ही उस सिग्नल को सिस्टम ने रिसीव किया, एक इलेक्ट्रॉनिक रिले सर्किट सक्रिय हुआ और डेटोनेटर के जरिए विस्फोट हो गया। इस पूरी प्रक्रिया में किसी व्यक्ति की मौके पर मौजूदगी या किसी तार से कनेक्शन की आवश्यकता नहीं होती, जिससे इस तकनीक को बेहद खतरनाक माना जा रहा है।

    सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह तकनीक आतंकवाद के नए डिजिटल स्वरूप को दर्शाती है, जिसमें साधारण मोबाइल नेटवर्क का उपयोग विस्फोटक को नियंत्रित करने के लिए किया जाता है। इसमें जीएसएम मॉड्यूल, सिम कार्ड और इलेक्ट्रॉनिक सर्किट का उपयोग कर हजारों किलोमीटर दूर बैठे व्यक्ति द्वारा भी विस्फोट को ट्रिगर किया जा सकता है। यह तरीका न केवल आसान है बल्कि इसे ट्रेस करना भी पारंपरिक तरीकों की तुलना में अधिक चुनौतीपूर्ण होता है।

    इस घटना के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने पूरे क्षेत्र में सतर्कता बढ़ा दी है और आसपास के इलाकों में लगे सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल नेटवर्क डेटा और कॉल रिकॉर्ड्स की गहन जांच की जा रही है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि विस्फोटक सामग्री को मौके तक कैसे पहुंचाया गया और इसमें किन स्थानीय सहयोगियों की भूमिका रही।

    विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि इस तरह की घटनाएं सीमा पार से संचालित होने वाले आतंकी नेटवर्क की बदलती रणनीति को दर्शाती हैं, जहां अब तकनीक का इस्तेमाल हथियार के रूप में किया जा रहा है। यह हमला न केवल सुरक्षा व्यवस्था के लिए एक चेतावनी है, बल्कि यह भी संकेत देता है कि आने वाले समय में आतंकवाद तकनीकी रूप से और अधिक उन्नत रूप ले सकता है।

    फिलहाल जांच एजेंसियां इस पूरे नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने में लगी हैं और यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि इस हमले के पीछे और कौन-कौन लोग शामिल हो सकते हैं।

  • अहमदाबाद में विकास की नई उड़ान: अमित शाह बोले- गुजरात को AI, सेमीकंडक्टर और सर्विस सेक्टर में बनाएंगे अग्रणी राज्य

    अहमदाबाद में विकास की नई उड़ान: अमित शाह बोले- गुजरात को AI, सेमीकंडक्टर और सर्विस सेक्टर में बनाएंगे अग्रणी राज्य


    नई दिल्ली ।  अहमदाबाद में विकास और तकनीक की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाते हुए केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने दो महत्वपूर्ण परियोजनाओं का लोकार्पण किया, जिनमें ‘मिलियन माइंड्स टेक पार्क’ और ‘गणेश रियल एस्टेट मैनेजमेंट इंस्टीट्यूट’ शामिल हैं। इस अवसर पर उन्होंने स्पष्ट किया कि गुजरात अब केवल औद्योगिक उत्पादन का केंद्र नहीं रहेगा, बल्कि आने वाले वर्षों में यह राज्य तकनीक, सेवा क्षेत्र और नवाचार की वैश्विक पहचान बनने की ओर अग्रसर है। उनके अनुसार राज्य की विकास यात्रा अब एक नए चरण में प्रवेश कर रही है, जहां डिजिटल अर्थव्यवस्था, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स और सेमीकंडक्टर जैसे क्षेत्रों में तेजी से विस्तार होगा।

    लोकार्पण कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि गुजरात ने हमेशा देश के आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है और अब यही राज्य तकनीकी क्रांति का नेतृत्व भी करेगा। ‘मिलियन माइंड्स टेक पार्क’ को उन्होंने भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार की गई एक ऐसी परियोजना बताया, जो हजारों युवाओं को उच्च कौशल आधारित रोजगार उपलब्ध कराएगी। इस टेक पार्क में आधुनिक तकनीकी कंपनियों, अनुसंधान केंद्रों और स्टार्टअप्स के लिए एक मजबूत इकोसिस्टम विकसित किया जाएगा, जिससे नवाचार और रोजगार दोनों को बढ़ावा मिलेगा।

    इसके साथ ही ‘गणेश रियल एस्टेट मैनेजमेंट इंस्टीट्यूट’ को शहरी विकास और आधुनिक रियल एस्टेट प्रबंधन के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण पहल बताया गया। यह संस्थान आधुनिक शहरी नियोजन, तकनीक आधारित शिक्षा और वैश्विक मानकों के अनुरूप प्रशिक्षण देकर कुशल मानव संसाधन तैयार करेगा। इससे न केवल रियल एस्टेट सेक्टर में पारदर्शिता और पेशेवरता बढ़ेगी, बल्कि शहरी विकास योजनाओं को भी नई दिशा मिलेगी।

    कार्यक्रम के दौरान यह भी बताया गया कि अहमदाबाद-गिफ्ट सिटी-गांधीनगर कॉरिडोर में विकसित हो रही यह टेक सिटी हजारों करोड़ रुपये के निवेश और लाखों रोजगार के अवसर पैदा करने की क्षमता रखती है। इस परियोजना के तहत ग्रेड-ए ऑफिस स्पेस, आवासीय सुविधाएं और आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया जा रहा है, जो भारत को वैश्विक टेक्नोलॉजी और वित्तीय सेवाओं के नक्शे पर और मजबूत स्थिति में लाएगा।

    अमित शाह ने यह भी कहा कि गुजरात पहले से ही मैन्युफैक्चरिंग, पोर्ट डेवलपमेंट, ग्रीन एनर्जी और फार्मा सेक्टर में अग्रणी रहा है, और अब यह राज्य आईटी और नॉलेज-आधारित अर्थव्यवस्था की ओर तेजी से बढ़ रहा है। उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले वर्षों में गुजरात देश का प्रमुख टेक्नोलॉजी और सर्विस सेक्टर हब बनकर उभरेगा।

    कार्यक्रम में यह भी उल्लेख किया गया कि राज्य में विकसित हो रही सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम और गिफ्ट सिटी जैसे प्रोजेक्ट्स भारत को वैश्विक निवेश का आकर्षण केंद्र बना रहे हैं। इस दौरान यह संदेश भी सामने आया कि ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य को हासिल करने में गुजरात की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होगी और यह राज्य देश की विकास यात्रा का प्रमुख इंजन साबित होगा।

  • कभी अंटार्कटिका का हिस्सा था भारत! लाखों साल पुरानी चट्टानों ने खोला पृथ्वी के इतिहास का बड़ा राज

    कभी अंटार्कटिका का हिस्सा था भारत! लाखों साल पुरानी चट्टानों ने खोला पृथ्वी के इतिहास का बड़ा राज



    नई दिल्ली। वैज्ञानिकों ने एक नई रिसर्च में बड़ा खुलासा किया है कि आज का भारत कभी अंटार्कटिका से जुड़ा हुआ था। लाखों नहीं बल्कि करोड़ों साल पहले दोनों भूभाग एक विशाल पर्वत श्रृंखला और साझा भूवैज्ञानिक संरचना का हिस्सा थे। अब आंध्र प्रदेश की प्राचीन चट्टानों और पूर्वी अंटार्कटिका की चट्टानों के अध्ययन से इस रहस्य पर नई रोशनी पड़ी है।

    रिसर्च के मुताबिक आंध्र प्रदेश के विजयनगरम और सालूर इलाके में मिली चट्टानों की संरचना, उम्र और रासायनिक गुण पूर्वी अंटार्कटिका की चट्टानों से काफी मिलते-जुलते पाए गए हैं। वैज्ञानिकों का कहना है कि ये दोनों क्षेत्र कभी “रेनर-ईस्टर्न घाट ओरोजेन” नाम की एक ही भूवैज्ञानिक प्रणाली का हिस्सा थे।

    यह अध्ययन भारत, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण कोरिया के वैज्ञानिकों की संयुक्त टीम ने किया है। रिसर्च में खास तौर पर ग्रैनुलाइट नाम की मेटामॉर्फिक चट्टानों का अध्ययन किया गया, जो पृथ्वी के भीतर अत्यधिक गर्मी और दबाव में बनती हैं और अरबों साल पुराने भूवैज्ञानिक बदलावों की जानकारी अपने अंदर सुरक्षित रखती हैं।

    वैज्ञानिकों ने जिरकॉन, गार्नेट और मोनाजाइट जैसे खनिजों का आधुनिक तकनीक से परीक्षण किया। इनमें जिरकॉन को सबसे अहम माना गया क्योंकि यह अत्यधिक तापमान और दबाव में भी सुरक्षित रहता है। वैज्ञानिकों ने जिरकॉन के भीतर मौजूद रेडियोधर्मी तत्वों के अध्ययन से करोड़ों साल पुराने भूवैज्ञानिक घटनाक्रमों का पता लगाया।

    रिसर्च में सामने आया कि भारत और अंटार्कटिका दोनों क्षेत्रों में भूवैज्ञानिक विकास के तीन बड़े चरण एक जैसे रहे। पहला चरण करीब 1000 से 990 मिलियन वर्ष पहले हुआ, जब विशाल महाद्वीपीय टकराव से बड़ी पर्वत श्रृंखलाएं बनीं। दूसरा चरण 950 से 890 मिलियन वर्ष पहले का था, जिसमें चट्टानों में गहरे संरचनात्मक बदलाव आए। तीसरा चरण 570 से 540 मिलियन वर्ष पहले हुआ, जब खनिजों से भरपूर तरल पदार्थ चट्टानों की दरारों से गुजरे और खास रासायनिक निशान छोड़ गए।

    वैज्ञानिकों के अनुसार, बाद में सुपरकॉन्टिनेंट Gondwana टूटने लगा और करीब 130 से 150 मिलियन वर्ष पहले भारत और अंटार्कटिका अलग हो गए। भारतीय प्लेट उत्तर दिशा में एशिया की ओर बढ़ गई, जबकि अंटार्कटिका दक्षिण की ओर खिसक गया।

    आज दोनों भूभाग हजारों किलोमीटर दूर हैं, लेकिन करोड़ों साल पुरानी चट्टानें अब भी उनके साझा इतिहास की कहानी बयां कर रही हैं।

  • FBI डायरेक्टर काश पटेल पर लग्जरी ट्रिप का आरोप, गर्लफ्रेंड संग कंसर्ट के लिए इस्तेमाल किया सरकारी जेट!

    FBI डायरेक्टर काश पटेल पर लग्जरी ट्रिप का आरोप, गर्लफ्रेंड संग कंसर्ट के लिए इस्तेमाल किया सरकारी जेट!


    नई दिल्ली। अमेरिका की प्रमुख जांच एजेंसी Federal Bureau of Investigation के डायरेक्टर काश पटेल एक बार फिर विवादों में घिर गए हैं। उन पर आरोप लगा है कि उन्होंने सरकारी संसाधनों का इस्तेमाल अपनी गर्लफ्रेंड को लग्जरी ट्रीटमेंट देने के लिए किया। रिपोर्ट्स के मुताबिक काश पटेल ने अपनी निजी यात्रा के दौरान FBI के जेट विमान का इस्तेमाल किया और हजारों डॉलर के आलीशान सुइट में म्यूजिक कंसर्ट का आनंद लिया।

    रिपोर्ट के अनुसार, 10 मई 2025 को काश पटेल अपनी 27 वर्षीय गर्लफ्रेंड एलेक्सिस विलकिंस के साथ FBI के गल्फस्ट्रीम V जेट से वॉशिंगटन से फिलाडेल्फिया पहुंचे थे। वहां दोनों ने मशहूर कंट्री सिंगर्स George Strait और Chris Stapleton का लाइव म्यूजिक कंसर्ट देखा।

    बताया जा रहा है कि इस कार्यक्रम के लिए दोनों ने करीब 35 हजार से 50 हजार डॉलर कीमत वाले प्राइवेट लग्जरी सुइट का इस्तेमाल किया। इतना ही नहीं, FBI फ्लाइट क्रू और सुरक्षा कर्मियों को देर रात तक ड्यूटी पर इंतजार करना पड़ा, जिसके लिए उन्हें ओवरटाइम भुगतान भी किया गया।

    मामले ने तब और तूल पकड़ लिया जब यह सवाल उठने लगे कि क्या सरकारी संसाधनों का निजी इस्तेमाल नियमों के खिलाफ था। हालांकि काश पटेल ने इन आरोपों पर सार्वजनिक रूप से कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।

    यह पहला मौका नहीं है जब काश पटेल विवादों में आए हों। इससे पहले भी उनकी यात्राओं और आधिकारिक कार्यक्रमों में निजी लोगों की मौजूदगी को लेकर सवाल उठ चुके हैं। हाल ही में पर्ल हार्बर मेमोरियल के पास वीआईपी टूर को लेकर भी उनकी आलोचना हुई थी।

    हालांकि FBI के प्रवक्ता बेन विलियमसन ने इन आरोपों का बचाव करते हुए कहा कि यात्रा को गलत तरीके से पेश किया जा रहा है और यह एक आधिकारिक दौरा था। बावजूद इसके, अमेरिकी मीडिया और राजनीतिक गलियारों में इस पूरे मामले को लेकर बहस तेज हो गई है।

  • सोलर सेक्टर की इस कंपनी ने मचाई हलचल, तिमाही नतीजों में रिकॉर्ड कमाई से निवेशक उत्साहित

    सोलर सेक्टर की इस कंपनी ने मचाई हलचल, तिमाही नतीजों में रिकॉर्ड कमाई से निवेशक उत्साहित

    नई दिल्ली ।  रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर की तेजी से उभरती कंपनी Solex Energy ने अपने ताजा तिमाही नतीजों से बाजार में हलचल पैदा कर दी है। कंपनी ने चौथी तिमाही में शानदार वित्तीय प्रदर्शन दर्ज करते हुए मुनाफे में 305 प्रतिशत की जबरदस्त बढ़ोतरी हासिल की है। इसके साथ ही कंपनी का रेवेन्यू भी कई गुना बढ़ा है, जिसने निवेशकों का ध्यान एक बार फिर अपनी ओर खींच लिया है।

    कंपनी के मुताबिक, चौथी तिमाही के दौरान उसका शुद्ध मुनाफा बढ़कर 57.9 करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह आंकड़ा केवल 14.3 करोड़ रुपये था। इसी तरह कंपनी की कुल आय में भी बड़ी छलांग देखने को मिली। इस तिमाही में कंपनी का रेवेन्यू 885.5 करोड़ रुपये दर्ज किया गया, जो एक साल पहले 254.4 करोड़ रुपये था। आंकड़े साफ संकेत दे रहे हैं कि कंपनी ने बेहद तेज रफ्तार से कारोबार का विस्तार किया है।

    कंपनी के ऑपरेटिंग प्रदर्शन में भी मजबूत सुधार देखने को मिला। EBITDA यानी ऑपरेटिंग प्रॉफिट 251 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 98.3 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। पिछले साल इसी अवधि में यह 28 करोड़ रुपये था। EBITDA मार्जिन भी हल्के सुधार के साथ 11.1 प्रतिशत पर पहुंच गया, जो कंपनी की परिचालन क्षमता को मजबूत दर्शाता है।

    पूरे वित्त वर्ष 2025-26 की बात करें तो कंपनी का प्रदर्शन और भी प्रभावशाली रहा। इस दौरान कंपनी की कुल आय 1,621 करोड़ रुपये से अधिक रही, जो पिछले वित्त वर्ष की तुलना में लगभग 144 प्रतिशत ज्यादा है। वहीं EBITDA 186 करोड़ रुपये से ऊपर पहुंच गया और कंपनी का प्रॉफिट आफ्टर टैक्स भी 132 प्रतिशत से ज्यादा बढ़कर 98 करोड़ रुपये के पार निकल गया। इन आंकड़ों ने यह साबित किया है कि कंपनी केवल रेवेन्यू ग्रोथ ही नहीं बल्कि मुनाफे के स्तर पर भी मजबूत पकड़ बना रही है।

    कंपनी प्रबंधन का कहना है कि बीता वित्त वर्ष उसके लिए बदलाव और विस्तार का दौर रहा। Solex Energy अब केवल एक मैन्युफैक्चरिंग आधारित कंपनी नहीं रहना चाहती, बल्कि वह खुद को एक इंटीग्रेटेड क्लीन एनर्जी बिजनेस के रूप में स्थापित करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है। कंपनी आने वाले समय में वैश्विक बाजारों में भी अपनी मौजूदगी मजबूत करने की योजना पर काम कर रही है।

    शेयर बाजार में भी कंपनी का प्रदर्शन लगातार चर्चा का विषय बना हुआ है। पिछले पांच वर्षों में इस स्टॉक ने निवेशकों को लगभग 3900 प्रतिशत का मल्टीबैगर रिटर्न दिया है। यही वजह है कि यह स्टॉक लंबे समय से निवेशकों की पसंद बना हुआ है। पिछले तीन वर्षों में भी कंपनी के शेयरों में करीब 300 प्रतिशत की तेजी देखने को मिली है, जबकि एक साल के भीतर भी स्टॉक ने मजबूत रिटर्न दिया है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर को मिल रहे सरकारी समर्थन और बढ़ती मांग का सीधा फायदा ऐसी कंपनियों को मिल रहा है, जो सोलर और क्लीन एनर्जी क्षेत्र में तेजी से विस्तार कर रही हैं। आने वाले वर्षों में यह सेक्टर और अधिक मजबूत हो सकता है, जिससे इस तरह की कंपनियों के कारोबार में और तेजी देखने को मिल सकती है।

    Solex Energy के ताजा नतीजों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि कंपनी केवल तेजी से बढ़ ही नहीं रही, बल्कि निवेशकों के भरोसे पर भी लगातार खरी उतर रही है।

  • WHO का बड़ा अलर्ट! अफ्रीका में फिर फैला खतरनाक ईबोला वायरस, नई महामारी को लेकर बढ़ी चिंता

    WHO का बड़ा अलर्ट! अफ्रीका में फिर फैला खतरनाक ईबोला वायरस, नई महामारी को लेकर बढ़ी चिंता



    नई दिल्ली। विश्व स्वास्थ्य संगठन World Health Organization ने अफ्रीकी देशों डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो और युगांडा में तेजी से फैल रहे ईबोला वायरस को लेकर वैश्विक स्वास्थ्य चेतावनी जारी की है। WHO ने इसे अंतरराष्ट्रीय सार्वजनिक स्वास्थ्य आपात स्थिति घोषित करते हुए कहा है कि इस बार फैल रहा बुंडीबुग्यो स्ट्रेन पहले के मुकाबले अलग और बेहद चिंताजनक है।

    स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक यह वायरस ईबोला के बुंडीबुग्यो स्ट्रेन के कारण फैल रहा है, जो इंसानों के लिए बेहद खतरनाक माना जाता है। सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि इस स्ट्रेन के लिए अभी तक कोई विशेष वैक्सीन या प्रभावी दवा उपलब्ध नहीं है।

    रिपोर्ट्स के अनुसार, कांगो के इटुरी प्रांत में ईबोला का यह 17वां बड़ा प्रकोप है। हालांकि इस बार वायरस का प्रकार अलग होने से स्वास्थ्य एजेंसियों की चिंता और बढ़ गई है। बुंडीबुग्यो स्ट्रेन पहली बार साल 2007-08 में युगांडा के बुंडीबुग्यो जिले में सामने आया था, जहां सैकड़ों लोग संक्रमित हुए थे और बड़ी संख्या में मौतें दर्ज की गई थीं।

    विशेषज्ञ बताते हैं कि ईबोला वायरस के कई प्रकार होते हैं, लेकिन ज़ैरे, सूडान और बुंडीबुग्यो स्ट्रेन इंसानों में सबसे ज्यादा संक्रमण फैलाते हैं। ज़ैरे स्ट्रेन सबसे घातक माना जाता है, जबकि बुंडीबुग्यो स्ट्रेन में भी मौत का खतरा 40 प्रतिशत तक पहुंच सकता है।

    वैज्ञानिकों का मानना है कि यह वायरस अफ्रीका के घने जंगलों में मौजूद जंगली जानवरों, खासकर चमगादड़ों से फैलता है। संक्रमित व्यक्ति के खून, शरीर के तरल पदार्थ या संपर्क में आने से यह तेजी से दूसरे लोगों तक पहुंच सकता है।

    ईबोला के शुरुआती लक्षण सामान्य फ्लू जैसे दिखाई देते हैं। मरीज को तेज बुखार, सिरदर्द, कमजोरी, मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द महसूस होता है। बाद में उल्टी, दस्त, पेट दर्द और गले में संक्रमण जैसी समस्याएं बढ़ने लगती हैं। गंभीर स्थिति में शरीर के अलग-अलग हिस्सों से खून बहना शुरू हो सकता है और कई बार मरीज के अंग काम करना बंद कर देते हैं।

    WHO और स्वास्थ्य एजेंसियां प्रभावित इलाकों में निगरानी बढ़ाने, संक्रमित मरीजों को अलग रखने और लोगों को सतर्क रहने की सलाह दे रही हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि समय रहते नियंत्रण नहीं हुआ तो यह संक्रमण कई देशों के लिए बड़ा खतरा बन सकता है।