Author: bharati

  • तकनीक और पारदर्शिता की दिशा में बड़ा कदम: गुजरात में स्व-गणना शुरू, राज्यभर में जनगणना प्रक्रिया को मिला नया आयाम

    तकनीक और पारदर्शिता की दिशा में बड़ा कदम: गुजरात में स्व-गणना शुरू, राज्यभर में जनगणना प्रक्रिया को मिला नया आयाम

    नई दिल्ली ।  गुजरात में जनगणना-2027 की तैयारियों के बीच एक नए डिजिटल युग की शुरुआत देखने को मिल रही है, जहां स्व-गणना प्रक्रिया को औपचारिक रूप से शुरू कर दिया गया है और राज्य सरकार ने नागरिकों से इसमें सक्रिय भागीदारी की अपील की है। इस पहल के तहत लोगों को यह सुविधा दी गई है कि वे अपने घर और परिवार से जुड़ी आवश्यक जानकारी स्वयं ऑनलाइन माध्यम से दर्ज कर सकें, जिससे न केवल प्रक्रिया तेज होगी बल्कि डेटा संग्रह अधिक सटीक और पारदर्शी भी बन सकेगा। इस महत्वपूर्ण अभियान की शुरुआत राज्य के शीर्ष नेतृत्व द्वारा स्वयं अपनी और अपने परिवार की जानकारी दर्ज कर की गई, जिससे यह संदेश दिया गया कि यह केवल एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं बल्कि एक राष्ट्रीय जिम्मेदारी है जिसमें हर नागरिक की भूमिका महत्वपूर्ण है। सरकार की ओर से यह भी स्पष्ट किया गया है कि नागरिकों के पास एक निश्चित अवधि के भीतर अपनी जानकारी दर्ज करने का अवसर होगा, जिसके बाद फील्ड स्तर पर घर-घर जाकर सत्यापन और विस्तृत सर्वेक्षण का कार्य किया जाएगा। इस पूरी प्रक्रिया में तकनीक का व्यापक उपयोग किया जा रहा है और पहली बार जनगणना को डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से अधिक आधुनिक स्वरूप दिया गया है, जिससे डेटा संग्रह की गति और गुणवत्ता दोनों में सुधार की उम्मीद है।

    इस व्यवस्था के तहत लोगों से उनके आवास, परिवार के सदस्यों, उपलब्ध सुविधाओं और जीवन स्तर से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर जानकारी ली जा रही है, ताकि नीति निर्माण और विकास योजनाओं को अधिक प्रभावी बनाया जा सके। सरकार का मानना है कि जब वास्तविक और सटीक डेटा उपलब्ध होगा, तो सामाजिक कल्याण योजनाओं को अधिक लक्षित और प्रभावी तरीके से लागू किया जा सकेगा। इसी के साथ पारंपरिक घर-घर सर्वेक्षण की प्रक्रिया भी जारी रखी गई है ताकि उन लोगों तक भी पहुंच सुनिश्चित हो सके जो डिजिटल माध्यम का उपयोग करने में सक्षम नहीं हैं। फील्ड स्तर पर नियुक्त कर्मचारी मोबाइल तकनीक के माध्यम से डेटा एकत्र करेंगे, जिससे पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहेगी और त्रुटियों की संभावना कम होगी।

    राज्य में इस स्व-गणना प्रक्रिया को लेकर लोगों में जागरूकता और भागीदारी बढ़ रही है, और बड़ी संख्या में परिवार इस डिजिटल पहल से जुड़कर अपनी जानकारी दर्ज कर रहे हैं। यह कदम न केवल प्रशासनिक दक्षता को बढ़ाता है बल्कि नागरिकों को भी एक सरल और सुरक्षित माध्यम प्रदान करता है जिसके जरिए वे सीधे इस राष्ट्रीय प्रक्रिया का हिस्सा बन सकते हैं। जनगणना को लेकर यह नया दृष्टिकोण आने वाले समय में देशभर में डेटा प्रबंधन और नीति निर्माण के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण बदलाव साबित हो सकता है, क्योंकि यह पारंपरिक तरीकों के साथ आधुनिक तकनीक का संतुलित उपयोग सुनिश्चित करता है और विकास योजनाओं को अधिक वास्तविक आधार प्रदान करता है।

  • भारतीय रेल वित्त निगम की आक्रामक रणनीति, कर्ज मंजूरी और फंड जुटाने का बड़ा रोडमैप तैयार

    भारतीय रेल वित्त निगम की आक्रामक रणनीति, कर्ज मंजूरी और फंड जुटाने का बड़ा रोडमैप तैयार

    नई दिल्ली ।  भारतीय रेलवे से जुड़ी वित्तीय आवश्यकताओं को मजबूत आधार देने वाली सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी भारतीय रेल वित्त निगम (IRFC) ने चालू वित्त वर्ष के लिए एक बड़ा और महत्वाकांक्षी विस्तार लक्ष्य निर्धारित किया है, जिसके तहत कंपनी ने 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक की ऋण मंजूरी का लक्ष्य तय किया है। यह कदम न केवल कंपनी की बढ़ती वित्तीय क्षमता को दर्शाता है, बल्कि देश के बुनियादी ढांचा क्षेत्र में उसके विस्तारशील योगदान को भी रेखांकित करता है। कंपनी के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक के अनुसार, मजबूत परियोजना पाइपलाइन और लगातार बढ़ती मांग को देखते हुए यह लक्ष्य पूरी तरह व्यावहारिक और विकासोन्मुख है, जिससे रेलवे और संबंधित क्षेत्रों में निवेश की गति और तेज होगी।

    IRFC ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए एक और बड़ा लक्ष्य तय करते हुए घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों से लगभग 70,000 करोड़ रुपये जुटाने की योजना बनाई है, जिससे कंपनी अपनी वित्तीय संरचना को और अधिक मजबूत और विविध बना सके। यह पूंजी जुटाने की रणनीति कंपनी को केवल रेलवे फाइनेंसिंग तक सीमित न रखकर एक व्यापक इंफ्रास्ट्रक्चर फाइनेंसिंग संस्था के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

    पिछले वित्तीय वर्ष में भी कंपनी ने उल्लेखनीय प्रदर्शन किया था, जहां उसने लगभग 72,949 करोड़ रुपये की परियोजनाओं को मंजूरी दी थी और 35,067 करोड़ रुपये का वितरण किया था, जो उसके वार्षिक अनुमानों से अधिक रहा। इस प्रदर्शन ने यह संकेत दिया कि IRFC की वित्तीय क्षमता और परियोजना निष्पादन की गति दोनों ही मजबूत स्थिति में हैं। इसी अवधि में कंपनी का शुद्ध लाभ बढ़कर 7,009 करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 7.8 प्रतिशत अधिक है। लगातार बढ़ते लाभ और मजबूत बैलेंस शीट ने कंपनी की बाजार स्थिति को और मजबूत किया है।

    कंपनी की परिसंपत्तियां भी तेजी से बढ़कर 4.85 लाख करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच चुकी हैं, जबकि इसका नेटवर्थ 56,748 करोड़ रुपये के सर्वकालिक उच्च स्तर पर दर्ज किया गया है। यह वृद्धि इस बात का संकेत है कि IRFC न केवल पारंपरिक रेलवे वित्तपोषण तक सीमित है, बल्कि अब यह बिजली उत्पादन, नवीकरणीय ऊर्जा, ट्रांसमिशन और उर्वरक जैसे विविध क्षेत्रों में भी सक्रिय भूमिका निभा रही है। इस रणनीतिक विविधीकरण ने कंपनी की आय संरचना को अधिक स्थिर और मजबूत बनाने में मदद की है।

    IRFC ने अब तक शून्य एनपीए की स्थिति बनाए रखी है, जो उसकी मजबूत वित्तीय अनुशासन और जोखिम प्रबंधन क्षमता को दर्शाता है। कंपनी का शुद्ध ब्याज मार्जिन भी लगातार सुधार के साथ आगे बढ़ रहा है, जिसे आने वाले समय में और बेहतर करने का लक्ष्य रखा गया है। भारतीय रेलवे द्वारा नए ऋण वितरण का उपयोग कम करने के बाद IRFC ने अपनी भूमिका को और व्यापक बनाते हुए विभिन्न इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्रों में निवेश बढ़ाया है, जिससे यह एक बहुआयामी वित्तीय संस्था के रूप में उभर रही है।

    आने वाले समय में IRFC की यह विस्तार रणनीति देश के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और बड़े स्तर पर निवेश को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है, जिससे न केवल रेलवे परियोजनाओं को लाभ मिलेगा, बल्कि ऊर्जा और औद्योगिक क्षेत्रों में भी विकास की रफ्तार तेज हो सकती है।

  • ट्रंप की एक पोस्ट से फिर गरमाया पश्चिम एशिया! ईरान पर नए हमले की अटकलों से दुनिया में हलचल

    ट्रंप की एक पोस्ट से फिर गरमाया पश्चिम एशिया! ईरान पर नए हमले की अटकलों से दुनिया में हलचल


    नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर खतरनाक मोड़ पर पहुंचता दिखाई दे रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सोशल मीडिया पोस्ट ने नए सैन्य टकराव की आशंकाओं को हवा दे दी है। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर एक तस्वीर साझा की, जिसमें वह युद्धपोत पर सैन्य अधिकारियों के साथ खड़े नजर आए। तस्वीर के साथ उन्होंने लिखा— “तूफान से पहले की शांति।” इस एक लाइन ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल मचा दी है और माना जा रहा है कि अमेरिका ईरान के खिलाफ फिर बड़ा कदम उठा सकता है।

    तस्वीर में ट्रंप समुद्र के बीच युद्धपोत पर खड़े दिखाई दे रहे हैं। पीछे ईरान का झंडा लगे जहाज और तूफानी मौसम जैसे दृश्य नजर आ रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह पोस्ट केवल प्रतीकात्मक नहीं बल्कि ईरान को सीधी चेतावनी भी हो सकती है। खास बात यह है कि हाल के दिनों में ट्रंप कई बार सार्वजनिक रूप से कह चुके हैं कि अगर ईरान के साथ समझौता नहीं हुआ तो उसे “गंभीर परिणाम” भुगतने पड़ सकते हैं।

    इसी बीच अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स ने तनाव और बढ़ा दिया है। द न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अमेरिकी रक्षा विभाग ने ईरान के खिलाफ संभावित सैन्य कार्रवाई के लिए “ऑपरेशन एपिक फ्यूरी 2.0” नाम की योजना तैयार की है। रिपोर्ट के मुताबिक इस योजना में ईरान के सैन्य ठिकानों और अहम बुनियादी ढांचे पर बड़े पैमाने पर हवाई हमले शामिल हो सकते हैं। इसके अलावा विशेष सैन्य अभियान और रणनीतिक इलाकों पर कब्जे जैसे विकल्पों पर भी चर्चा चल रही है।

    अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने भी संकेत दिए हैं कि जरूरत पड़ने पर अमेरिका सैन्य कार्रवाई तेज कर सकता है। हालांकि उन्होंने यह साफ नहीं किया कि हमला कब और किस स्तर पर हो सकता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिकी सेना के पास कई विकल्प तैयार हैं, लेकिन अंतिम फैसला अब भी राष्ट्रपति ट्रंप के हाथ में है।

    दूसरी तरफ ईरान ने भी कड़ा रुख अपना लिया है। ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने अमेरिका को चेतावनी देते हुए कहा कि ईरान किसी भी हमले का जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने कहा कि अगर अमेरिका ने गलत कदम उठाया तो उसका जवाब भी उसी भाषा में मिलेगा। ईरान ने साफ कर दिया है कि वह बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन युद्ध की स्थिति में पीछे हटने वाला नहीं है।

    गौरतलब है कि अमेरिका और इजरायल ने 28 फरवरी को ईरान से जुड़े ठिकानों पर संयुक्त कार्रवाई की थी। इसके बाद 8 अप्रैल को अस्थायी सीजफायर जरूर हुआ, लेकिन दोनों पक्षों के बीच तनाव खत्म नहीं हुआ। अब ट्रंप की नई पोस्ट और अमेरिकी सैन्य तैयारियों की खबरों ने पश्चिम एशिया में फिर बड़े संघर्ष की आशंका बढ़ा दी है। दुनिया की नजरें अब वॉशिंगटन और तेहरान पर टिकी हैं, क्योंकि एक गलत फैसला पूरे क्षेत्र को युद्ध की आग में झोंक सकता है।

  • एमसीडी क्षेत्रों में जनगणना अभियान की शुरुआत, हर घर से जुटाई जाएगी विस्तृत जनसांख्यिकी जानकारी

    एमसीडी क्षेत्रों में जनगणना अभियान की शुरुआत, हर घर से जुटाई जाएगी विस्तृत जनसांख्यिकी जानकारी


    नई दिल्ली ।  देश की राजधानी में जनसंख्या और आवास से जुड़े आंकड़ों को अधिक सटीक और व्यवस्थित बनाने के उद्देश्य से जनगणना 2027 की तैयारियां तेज कर दी गई हैं। इस प्रक्रिया के पहले चरण की शुरुआत एमसीडी क्षेत्रों में घर-घर सर्वेक्षण के साथ की गई है, जिसमें मकानों की सूची तैयार करने और परिवारों से संबंधित विस्तृत जानकारी एकत्र करने का कार्य किया जा रहा है। इस अभियान का मुख्य लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी घर या परिवार का डेटा छूट न जाए और शहर की वास्तविक जनसंख्या संरचना को सही ढंग से समझा जा सके।

    इस व्यापक अभियान के तहत लगभग 32 लाख मकानों का विस्तृत सर्वे किया जाएगा, जिसके लिए पूरे क्षेत्र को 46 हजार से अधिक छोटे ब्लॉकों में विभाजित किया गया है। प्रत्येक ब्लॉक में करीब 180 से 200 घर शामिल किए गए हैं और अनुमान है कि हर ब्लॉक में 700 से 800 लोग निवास करते हैं। इस कार्य के लिए लगभग 50 हजार जनगणना कर्मियों को तैनात किया गया है, जो निर्धारित क्षेत्रों में जाकर डिजिटल टैबलेट के माध्यम से जानकारी एकत्र करेंगे और उसे सीधे ऑनलाइन सिस्टम में दर्ज करेंगे।

    इस प्रक्रिया में प्रत्येक जनगणना कर्मी को एक निश्चित ब्लॉक सौंपा गया है और उन्हें घर-घर जाकर परिवारों की स्थिति, मकान की संरचना, उपलब्ध सुविधाओं और संपत्तियों से जुड़े लगभग 33 प्रश्नों के उत्तर दर्ज करने होंगे। इस बार विशेष रूप से किरायेदारों के आंकड़ों पर भी ध्यान दिया जा रहा है, क्योंकि शहर की बड़ी आबादी किराए के मकानों में रहती है। इस डेटा के आधार पर शहरी विकास और भविष्य की योजनाओं को अधिक प्रभावी और वास्तविक जरूरतों के अनुरूप तैयार किया जाएगा।

    सर्वेक्षण के दौरान यदि किसी घर में ताला लगा हुआ मिलता है तो संबंधित कर्मी दोबारा वहां जाएंगे और यदि कोई परिवार दिन में उपलब्ध नहीं होता है तो उनके घर का दौरा देर रात तक भी किया जा सकता है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि हर परिवार का डेटा सही तरीके से दर्ज किया जाए। इस पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए जनगणना कर्मियों और सुपरवाइजरों की निगरानी व्यवस्था भी मजबूत की गई है, जहां हर छह कर्मियों पर एक पर्यवेक्षक तैनात किया गया है।

    इसके साथ ही नागरिकों की सुविधा और सुरक्षा के लिए जनगणना कर्मियों की पहचान को भी सत्यापित करने की व्यवस्था की गई है, जिसमें उनके पहचान पत्र और क्यूआर कोड स्कैन करके उनकी प्रामाणिकता की पुष्टि की जा सकती है। पहले से ही कई लोगों ने स्व-गणना के माध्यम से अपनी जानकारी दर्ज कर दी है, जिसे आगे चलकर फील्ड सर्वे के दौरान सत्यापित किया जाएगा।

    कुल मिलाकर यह पूरा अभियान न केवल जनसंख्या के सटीक आंकड़े जुटाने की दिशा में एक बड़ा कदम है, बल्कि यह शहरी नियोजन, संसाधन प्रबंधन और विकास योजनाओं के लिए भी एक मजबूत आधार तैयार करेगा, जिससे आने वाले वर्षों में शहर के विकास को अधिक संतुलित और प्रभावी बनाया जा सकेगा।

  • नोएडा एक्सप्रेसवे हादसा: कार की टक्कर से चार घायल, यूट्यूबर मृदुल तिवारी ने पहुंचाया अस्पताल

    नोएडा एक्सप्रेसवे हादसा: कार की टक्कर से चार घायल, यूट्यूबर मृदुल तिवारी ने पहुंचाया अस्पताल

    नई दिल्ली ।  नोएडा में शनिवार को एक दर्दनाक सड़क हादसे ने लोगों को झकझोर दिया जब एक तेज रफ्तार कार ने सड़क पार कर रहे एक ही परिवार के चार लोगों को जोरदार टक्कर मार दी। यह घटना सेक्टर-148 के पास नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे पर हुई, जहां तेज गति से आ रही स्विफ्ट डिजायर कार ने अचानक नियंत्रण खोते हुए राहगीरों को अपनी चपेट में ले लिया। टक्कर इतनी तेज थी कि मौके पर अफरा-तफरी मच गई और आसपास मौजूद लोग तुरंत मदद के लिए दौड़ पड़े।

    घटना के समय वहां से गुजर रहे यूट्यूबर मृदुल तिवारी ने बिना देर किए अपनी गाड़ी रोकी और स्थिति की गंभीरता को देखते हुए घायलों की मदद के लिए आगे आए। उन्होंने चारों घायलों को अपनी गाड़ी में बैठाया और तुरंत नजदीकी अस्पताल पहुंचाया। समय पर मिली इस मदद की वजह से घायलों को तुरंत चिकित्सा सहायता मिल सकी, जिससे उनकी हालत बिगड़ने से बच गई। इस पूरी घटना का वीडियो भी सोशल मीडिया पर सामने आया, जिसके बाद मृदुल तिवारी की त्वरित और मानवीय प्रतिक्रिया की व्यापक सराहना हो रही है।

    हादसे के बाद स्थानीय लोगों ने तुरंत पुलिस को सूचना दी। सूचना मिलते ही ट्रैफिक पुलिस और नॉलेज पार्क थाना क्षेत्र की टीम मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रित किया। पुलिस ने दुर्घटना में शामिल कार को अपने कब्जे में ले लिया है और चालक को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। प्रारंभिक जांच में यह सामने आया है कि वाहन तेज गति से चलाया जा रहा था, जिसके कारण चालक नियंत्रण नहीं रख सका और यह दुर्घटना हो गई।

    घायलों को इलाज के लिए कैलाश अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां डॉक्टरों के अनुसार सभी की हालत फिलहाल स्थिर है और वे खतरे से बाहर बताए जा रहे हैं। हालांकि उन्हें हल्की चोटें आई हैं, लेकिन समय पर उपचार मिलने से उनकी स्थिति गंभीर नहीं बनी।

    इस घटना के कारण कुछ समय के लिए एक्सप्रेसवे पर यातायात भी प्रभावित रहा, क्योंकि दुर्घटना के बाद मौके पर भीड़ जमा हो गई थी और राहत कार्यों में समय लगा। बाद में पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित करते हुए ट्रैफिक को सामान्य कर दिया।

    यह हादसा एक बार फिर तेज रफ्तार वाहनों और सड़क सुरक्षा नियमों की अनदेखी के खतरों को सामने लाता है। विशेषज्ञों के अनुसार सड़क पर थोड़ी सी लापरवाही भी बड़े हादसे का कारण बन सकती है। वहीं इस घटना में मृदुल तिवारी की त्वरित मानवीय मदद ने यह भी दिखाया कि सही समय पर की गई छोटी कोशिश किसी की जान बचाने में बड़ी भूमिका निभा सकती है।

  • रफ्तार के दम पर आसमान पर राज! दुनिया के सबसे तेज लड़ाकू विमानों में रूस का दबदबा, अमेरिका भी पीछे

    रफ्तार के दम पर आसमान पर राज! दुनिया के सबसे तेज लड़ाकू विमानों में रूस का दबदबा, अमेरिका भी पीछे



    नई दिल्ली। हाइपरस्पीड फाइटर जेट्स की दुनिया में रूस ने अपनी अलग पहचान बनाई है। MiG-25 और MiG-31 जैसे विमान आज भी दुनिया के सबसे तेज ऑपरेशनल फाइटर जेट्स माने जाते हैं, जबकि अमेरिका ने F-22 और F-15 जैसे एडवांस विमान बनाकर तकनीक और स्टील्थ में बढ़त हासिल की है।

    आधुनिक हवाई युद्ध अब सिर्फ मिसाइलों और स्टील्थ तकनीक तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि रफ्तार भी जीत का बड़ा हथियार बन चुकी है। यही वजह है कि दुनिया की बड़ी सैन्य ताकतें ऐसे लड़ाकू विमान तैयार कर रही हैं, जो कुछ ही मिनटों में हजारों किलोमीटर की दूरी तय कर सकें। सबसे तेज फाइटर जेट्स की सूची में रूस का दबदबा साफ दिखाई देता है, क्योंकि सोवियत दौर से ही वहां लंबी दूरी और तेज प्रतिक्रिया वाले इंटरसेप्टर विमान विकसित किए जाते रहे हैं।

    इस सूची में सबसे ऊपर रूस का Mikoyan-Gurevich MiG-25 फॉक्सबैट आता है, जिसकी अधिकतम रफ्तार Mach 3.2 यानी करीब 3524 किमी प्रति घंटा है। इसे खास तौर पर अमेरिकी जासूसी विमानों और बमवर्षकों को रोकने के लिए डिजाइन किया गया था। इसकी रफ्तार इतनी खतरनाक थी कि अमेरिका को जवाब में F-15 Eagle विकसित करना पड़ा। हालांकि MiG-25 की कमजोरी यह रही कि कम ऊंचाई पर इसकी क्षमता सीमित थी और डॉगफाइट में यह उतना प्रभावी नहीं माना गया।

    दूसरे स्थान पर रूस का ही MiG-31 फॉक्सहाउंड है, जिसकी स्पीड Mach 2.83 यानी करीब 3000 किमी प्रति घंटा है। यह विमान सिर्फ इंटरसेप्टर नहीं बल्कि लंबी दूरी की निगरानी और मिसाइल हमलों के लिए भी जाना जाता है। इसके बाद अमेरिका का F-15 Eagle आता है, जिसकी अधिकतम रफ्तार Mach 2.5 है। F-15 को दुनिया के सबसे सफल एयर सुपीरियरिटी फाइटर जेट्स में गिना जाता है और इसका युद्ध रिकॉर्ड बेहद शानदार रहा है।

    रूस का Sukhoi Su-27 और MiG-23 भी इस सूची में शामिल हैं। Su-27 को लंबी दूरी के एयर सुपीरियरिटी मिशन के लिए तैयार किया गया था, जबकि MiG-23 को कठिन परिस्थितियों और सीमित संसाधनों वाले एयरबेस से ऑपरेट करने के लिए डिजाइन किया गया। दोनों विमान अपनी स्पीड और ताकत के लिए मशहूर रहे हैं।

    अमेरिका का F-14 Tomcat भी दुनिया के सबसे तेज लड़ाकू विमानों में शामिल है। यह दुनिया का पहला चौथी पीढ़ी का फाइटर जेट माना जाता है, जिसने वेरिएबल-स्वीप विंग तकनीक के जरिए एयरक्राफ्ट कैरियर ऑपरेशन में नई क्रांति ला दी थी। इसके अलावा पांचवीं पीढ़ी का अमेरिकी F-22 Raptor अपनी सुपरक्रूज क्षमता के लिए जाना जाता है, जो बिना आफ्टरबर्नर के भी सुपरसोनिक रफ्तार बनाए रख सकता है।

    इजरायल का IAI Kfir और अमेरिका का F-4 Phantom II भी इस सूची में अपनी जगह बनाए हुए हैं। F-4 Phantom II शीत युद्ध के दौर का बेहद भरोसेमंद फाइटर जेट रहा, जबकि Kfir को Mirage-5 प्लेटफॉर्म पर विकसित कर नई ताकत दी गई।

    रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि रूस में तेज रफ्तार वाले फाइटर जेट्स के विकास की सबसे बड़ी वजह उसका विशाल भूभाग रहा है। वहां हर क्षेत्र में एयरबेस बनाना आसान नहीं था, इसलिए ऐसे विमान तैयार किए गए जो बेहद कम समय में लंबी दूरी तय कर सकें। हालांकि आज के दौर में सिर्फ स्पीड ही सब कुछ नहीं है। इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर, स्टील्थ तकनीक, एयर-टू-एयर मिसाइल और नेटवर्क-सेंट्रिक युद्ध क्षमता भी उतनी ही अहम हो चुकी है। फिर भी दुनिया के सबसे तेज लड़ाकू विमानों की बात हो तो रूस का नाम आज भी सबसे ऊपर दिखाई देता है।

  • कीमती सामान नहीं मिला तो जूते चुराकर भागे चोर, CCTV में कैद

    कीमती सामान नहीं मिला तो जूते चुराकर भागे चोर, CCTV में कैद


    शिवपुरी। शिवपुरी जिले के इंदार थाना क्षेत्र के खतौरा गांव में चोरी की एक हैरान करने वाली घटना सामने आई है। यहां शनिवार देर रात 7 से 8 बदमाश चोरी की नीयत से एक घर में घुसे, लेकिन जब उन्हें कोई कीमती सामान नहीं मिला तो वे घर से दो जोड़ी जूते चुराकर फरार हो गए। पूरी घटना घर में लगे सीसीटीवी कैमरों में कैद हो गई है, जिसके आधार पर पुलिस अब आरोपियों की तलाश में जुटी है।

    जानकारी के अनुसार, खतौरा गांव निवासी मोहर सिंह कुशवाह के घर में शनिवार रात करीब 3:38 बजे बदमाश बाउंड्री फांदकर अंदर दाखिल हुए। सीसीटीवी फुटेज में कई संदिग्ध घर के आसपास घूमते और छत पर चढ़ने की कोशिश करते दिखाई दे रहे हैं। बताया जा रहा है कि बदमाश करीब 10 मिनट तक घर के अंदर और बाहर मंडराते रहे। कुछ आरोपियों के पास हथियार होने की भी आशंका जताई गई है।

    घटना का खुलासा तब हुआ जब सुबह करीब 4 बजे मोहर सिंह कुशवाह की नींद खुली। उन्होंने घर में लगे एलसीडी स्क्रीन पर देखा कि कुछ सीसीटीवी कैमरों के एंगल बदले हुए हैं। शक होने पर जब रिकॉर्डिंग चेक की गई तो घर में कई बदमाश घूमते नजर आए।

    परिवार के अनुसार, चोरों ने घर में काफी तलाश की, लेकिन उन्हें कोई नकदी या कीमती सामान हाथ नहीं लगा। आखिर में बदमाश किरायेदारों के दो जोड़ी जूते उठाकर मौके से फरार हो गए। घटना के बाद गांव में दहशत का माहौल है और लोग रात की सुरक्षा को लेकर चिंता जता रहे हैं।

    स्थानीय लोगों का कहना है कि क्षेत्र में रात के समय संदिग्ध गतिविधियां बढ़ रही हैं और पुलिस गश्त को और मजबूत किए जाने की जरूरत है। वहीं पुलिस ने मामला दर्ज कर सीसीटीवी फुटेज के आधार पर जांच शुरू कर दी है। यह घटना भले ही सुनने में अजीब लगे, लेकिन इससे क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल जरूर खड़े हो गए हैं। लोगों का कहना है कि अगर बदमाश हथियार लेकर घरों में घुस रहे हैं तो यह गंभीर चिंता का विषय है।

  • सरकार का बड़ा फैसला: शराब टैक्स व्यवस्था बदली, उपभोक्ताओं को मिल सकता है फायदा

    सरकार का बड़ा फैसला: शराब टैक्स व्यवस्था बदली, उपभोक्ताओं को मिल सकता है फायदा

    नई दिल्ली ।  कर्नाटक सरकार ने शराब पर टैक्स लगाने की व्यवस्था में एक बड़ा और संरचनात्मक बदलाव करते हुए राज्य की आबकारी नीति को नए स्वरूप में ढाल दिया है। इस नई नीति के तहत अब शराब पर टैक्स उसकी बोतल की कीमत के आधार पर नहीं, बल्कि उसमें मौजूद अल्कोहल की मात्रा के आधार पर तय किया जाएगा। इस प्रणाली को Alcohol-in-Beverage यानी AIB मॉडल कहा जाता है, जिसे दुनिया के कई देशों में एक पारदर्शी और वैज्ञानिक टैक्स व्यवस्था के रूप में अपनाया जाता है।

    सरकार के इस फैसले के बाद कर्नाटक देश का पहला ऐसा राज्य बन गया है जिसने इस तरह के मॉडल को व्यापक रूप से लागू किया है। नई व्यवस्था को वर्ष 2026-27 के बजट प्रावधानों के तहत लागू किया गया है, जिसके बाद शराब की कीमत तय करने का पूरा ढांचा बदल गया है। अब तक जहां शराब की कीमतें कई स्लैब और सरकारी नियंत्रण के आधार पर तय होती थीं, वहीं अब यह प्रक्रिया अधिक बाजार-आधारित और सरल हो गई है।

    नई नीति के अनुसार इंडियन मेड लिकर की कैटेगरी में भी बड़ा बदलाव किया गया है। पहले जहां कई स्लैब मौजूद थे, उन्हें घटाकर एक सीमित संख्या में लाया गया है, जिससे टैक्स संरचना को समझना और लागू करना दोनों आसान हो गया है। सरकार का मानना है कि इस बदलाव से न केवल सिस्टम अधिक पारदर्शी बनेगा, बल्कि कर निर्धारण में अनावश्यक जटिलता भी समाप्त होगी।

    आबकारी विभाग के अनुसार इस नई प्रणाली का उद्देश्य शराब की कीमतों को अधिक तर्कसंगत बनाना है, जिससे उपभोक्ताओं को वास्तविक मूल्य निर्धारण का लाभ मिल सके। इसके साथ ही सरकार का यह भी मानना है कि इस मॉडल से पड़ोसी राज्यों के बीच कीमतों का अंतर कम होगा, जिससे अवैध या सीमा पार खरीदारी पर भी अंकुश लग सकता है।

    नई नीति में यह भी प्रावधान किया गया है कि अब कंपनियों को अपने उत्पादों की कीमत और श्रेणी तय करने में अधिक स्वतंत्रता मिलेगी। हालांकि यह स्वतंत्रता बाजार की मांग और गुणवत्ता के आधार पर नियंत्रित ढांचे के भीतर रहेगी। इससे उद्योग को लचीलापन मिलेगा और प्रतिस्पर्धा भी अधिक संतुलित होने की संभावना है।

    सरकार का दावा है कि यह मॉडल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सबसे आधुनिक टैक्सिंग सिस्टम में से एक माना जाता है, क्योंकि इसमें उत्पाद की वास्तविक संरचना को आधार बनाकर टैक्स लगाया जाता है। इससे न केवल राजस्व प्रणाली अधिक वैज्ञानिक बनती है, बल्कि उपभोक्ता हितों को भी बेहतर तरीके से संतुलित किया जा सकता है।

    हालांकि इस बदलाव को लेकर यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या वास्तव में इससे शराब की कीमतों में कमी आएगी या कंपनियां नई संरचना के तहत अपने मूल्य निर्धारण को किसी अन्य तरीके से संतुलित करेंगी। आने वाले समय में बाजार की प्रतिक्रिया और उपभोक्ता व्यवहार यह तय करेगा कि यह नीति कितनी प्रभावी साबित होती है। फिलहाल इस बदलाव ने राज्य की आबकारी नीति को राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना दिया है।

  • केरल में नई सरकार की तस्वीर साफ, सतीशन कैबिनेट में चेन्निथला से लेकर युवा चेहरों तक पर बड़ा दांव

    केरल में नई सरकार की तस्वीर साफ, सतीशन कैबिनेट में चेन्निथला से लेकर युवा चेहरों तक पर बड़ा दांव


    नई दिल्ली ।  केरल में सत्ता परिवर्तन के बाद राजनीतिक हलचल अब नई सरकार के गठन पर केंद्रित हो गई है, जहां यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट की भारी जीत के बाद वी.डी. सतीशन के नेतृत्व में बनने वाली नई कैबिनेट को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। 140 सदस्यीय विधानसभा में 102 सीटों के मजबूत जनादेश के साथ यूडीएफ ने जहां सत्ता में वापसी की है, वहीं अब मंत्रिमंडल में किसे जगह मिलेगी, इस पर पूरे राज्य की निगाहें टिकी हुई हैं। मुख्यमंत्री पद के लिए मनोनीत वी.डी. सतीशन और केपीसीसी अध्यक्ष सनी जोसेफ के बीच हुई महत्वपूर्ण बैठकों के बाद मंत्रिमंडल की रूपरेखा लगभग अंतिम चरण में पहुंच चुकी है, और माना जा रहा है कि विभागों के बंटवारे के साथ नामों की आधिकारिक घोषणा जल्द हो सकती है।

    सूत्रों के अनुसार, नई सरकार में अनुभव और युवा नेतृत्व का संतुलन बनाने पर विशेष ध्यान दिया गया है। कांग्रेस नेतृत्व चाहता है कि मंत्रिमंडल न केवल प्रशासनिक रूप से मजबूत हो, बल्कि राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर भी सभी वर्गों का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करे। इसी रणनीति के तहत क्षेत्रीय संतुलन को भी प्रमुखता दी गई है, जिसमें त्रावणकोर, कोच्चि और मालाबार क्षेत्रों से प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया गया है। इसके साथ ही समुदायिक संतुलन को ध्यान में रखते हुए नायर, ईझवा, ईसाई और मुस्लिम समुदायों के बीच भी उचित भागीदारी देने की योजना तैयार की गई है, ताकि सरकार को व्यापक सामाजिक स्वीकार्यता मिल सके।

    सबसे चर्चित नामों में वरिष्ठ कांग्रेस नेता रमेश चेन्निथला का नाम प्रमुखता से सामने आ रहा है, जिन्हें गृह या वित्त जैसे अहम विभाग की जिम्मेदारी मिल सकती है। पार्टी के भीतर उन्हें एक अनुभवी और भरोसेमंद नेता के रूप में देखा जाता है, और ऐसे में उनकी भूमिका नई सरकार में काफी अहम मानी जा रही है। इसके अलावा सहयोगी दलों में इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग को उनके मजबूत प्रदर्शन के आधार पर महत्वपूर्ण मंत्रालय दिए जाने की संभावना है, जबकि केरल कांग्रेस के जोसेफ गुट को भी सरकार में सम्मानजनक हिस्सेदारी मिलने की उम्मीद है।

    नई कैबिनेट में युवाओं और पहली बार मंत्री बनने वाले चेहरों को भी शामिल किए जाने की तैयारी है, जिससे सरकार में नई ऊर्जा का संचार हो सके। पार्टी नेतृत्व का मानना है कि आने वाले वर्षों में विकास और प्रशासनिक सुधारों के लिए युवा नेतृत्व की भूमिका अहम होगी। इसके साथ ही महिला प्रतिनिधित्व को मजबूत करने पर भी जोर दिया गया है और दो महिला विधायकों को कैबिनेट में शामिल किए जाने की संभावना जताई जा रही है, जिससे सरकार का सामाजिक आधार और व्यापक हो सके।

    राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह मंत्रिमंडल न केवल सत्ता संतुलन का प्रतीक होगा, बल्कि केरल की विकास यात्रा को नई दिशा देने का भी प्रयास करेगा। मुख्यमंत्री सतीशन ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि उनकी सरकार पूरी तरह पारदर्शिता, जवाबदेही और विकास के एजेंडे पर काम करेगी। शपथ ग्रहण समारोह से पहले राज्य में राजनीतिक माहौल पूरी तरह गरम है और सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि नई सरकार अपने पहले फैसलों से जनता की उम्मीदों पर कितना खरा उतरती है।

  • सनघटा डैम में कार्रवाई: बालाजी क्रेशर सील, भारी मात्रा में गिट्टी जब्त

    सनघटा डैम में कार्रवाई: बालाजी क्रेशर सील, भारी मात्रा में गिट्टी जब्त


    नई दिल्ली। शिवपुरी जिले के पिछोर क्षेत्र में निर्माणाधीन सनघटा डैम परियोजना में गुणवत्ता को लेकर सामने आई लापरवाही पर प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। कलेक्टर अर्पित वर्मा के औचक निरीक्षण के बाद खनिज विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए बालाजी क्रेशर को सील कर दिया। मौके से करीब 4 हजार घनमीटर गिट्टी के साथ एक पोकलेन और एक हाइड्रा मशीन भी जब्त की गई है।

    दरअसल, शनिवार को कलेक्टर अर्पित वर्मा ने सनघटा डैम, निर्माणाधीन पंप स्टेशन और डिस्ट्रीब्यूशन लाइन के कार्यों का अचानक निरीक्षण किया था। निरीक्षण के दौरान निर्माण सामग्री की गुणवत्ता संतोषजनक नहीं पाई गई। कई जगहों पर सामग्री की गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल सामने आए, जिस पर कलेक्टर ने नाराजगी जाहिर की और तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए।

    कलेक्टर ने साफ शब्दों में कहा कि विकास कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही या गुणवत्ता से समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। उनके निर्देश के बाद खनिज विभाग की टीम हरकत में आई और खनिज निरीक्षक सोनू श्रीवास के नेतृत्व में मौके पर पहुंचकर कार्रवाई शुरू की गई।

    खनिज विभाग ने गिट्टी निर्माण के लिए संचालित बालाजी क्रेशर को सील कर दिया। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि अगली अनुमति तक क्रेशर बंद रहेगा। इसके अलावा मौके पर मौजूद लगभग 4000 घनमीटर गिट्टी को जब्त किया गया। कार्रवाई के दौरान एक पोकलेन मशीन और एक हाइड्रा मशीन भी जब्त की गई, जिनका उपयोग निर्माण कार्यों में किया जा रहा था।

    प्रशासन की इस कार्रवाई से निर्माण एजेंसियों और ठेकेदारों में हड़कंप मच गया है। अधिकारियों का कहना है कि जिले में चल रही अन्य परियोजनाओं की भी गुणवत्ता जांच की जाएगी और जहां भी अनियमितता मिलेगी वहां सख्त कार्रवाई होगी।

    स्थानीय लोगों का कहना है कि लंबे समय से निर्माण कार्यों में गुणवत्ता को लेकर शिकायतें सामने आ रही थीं। अब प्रशासन की सख्ती से उम्मीद जगी है कि विकास परियोजनाओं में पारदर्शिता और गुणवत्ता सुनिश्चित की जा सकेगी।

    यह कार्रवाई साफ संकेत देती है कि अब सरकारी परियोजनाओं में लापरवाही और घटिया निर्माण सामग्री के इस्तेमाल पर प्रशासन किसी भी तरह की ढिलाई बरतने के मूड में नहीं है।