Author: bharati

  • Skin Care Tips: बदलते मौसम में भी स्किन रहे फ्रेश और हेल्दी, बस फॉलो करें ये ब्यूटी टिप्स

    Skin Care Tips: बदलते मौसम में भी स्किन रहे फ्रेश और हेल्दी, बस फॉलो करें ये ब्यूटी टिप्स


    नई दिल्ली । बदलते मौसम की वजह से सिर्फ सेहत ही नहीं बल्कि स्किन भी प्रभावित होती है. अभी ठंड पूरी तरह खत्म नहीं हुई है, लेकिन गर्मी ने अपना असर दिखाना शुरू कर दिया है. भले ही सुबह और शाम का मौसम अच्छा रहता है, लेकिन दिन की तेज चिलचिलाती धूप लोगों को बाहर निकलने से पहले सोचने पर मजबूर कर रही है. ऐसे में अपनी स्किन को ग्लोइंग बनाए रखने के लिए सही डाइट लेना और स्किन का ध्यान रखना बेहद जरूरी है. मौसम में बदलाव के कारण स्किन पर बुरा असर पड़ता है, जैसे कि ड्राई स्किन, ऑयलीनेस, पिंपल्स या एलर्जी की समस्या. यहां कुछ ऐसे टिप्स दिए गए हैं, जिन्हें अपनाकर आप बदलते मौसम में भी हेल्दी और ग्लोइंग स्किन पा सकते हैं.

    सनस्क्रीन जरूर लगाएं

    हर मौसम में सनस्क्रीन का उपयोग करना जरूरी होता है. इसे केवल गर्मियों में ही नहीं बल्कि सर्दियों और बरसात में भी लगाना चाहिए. सनस्क्रीन त्वचा को धूप से होने वाले दाग-धब्बों, झुर्रियों और अन्य समस्याओं से बचाने में मदद करती है. बाहर जाने से पहले SPF 40+ या उससे ज्यादा एसपीएफ वाली सनस्क्रीन जरूर लगाएं.

    सही मॉइस्चराइजर का करें इस्तेमाल

    मौसम बदलने के साथ त्वचा में नमी की कमी हो सकती है, इसलिए इसे मॉइस्चराइज करना बेहद जरूरी है. गर्मियों में ग्रीसी और भारी क्रीम की बजाय जेल-बेस्ड या वॉटर-बेस्ड मॉइस्चराइजर का उपयोग करें. हाइड्रेटिंग प्रोडक्ट्स जैसे एलोवेरा, खीरा और गुलाब जल का इस्तेमाल करें, ताकि त्वचा में ताजगी बनी रहे.

    पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं

    हेल्दी और ग्लोइंग स्किन के लिए शरीर को हाइड्रेट रखना बेहद जरूरी है. दिनभर में कम से कम 8-10 गिलास पानी पिएं. पानी की कमी से त्वचा रूखी और बेजान हो सकती है. इसके अलावा, फेस मिस्ट का उपयोग करें, ताकि स्किन को एक्स्ट्रा हाइड्रेशन मिले.

    चेहरे को दिन में दो बार धोएं

    गर्मी के कारण धूल, गंदगी और पसीने की वजह से त्वचा ऑयली हो जाती है, जिससे पिंपल्स की समस्या हो सकती है. दिन में कम से कम दो बार फेस वॉश से चेहरा साफ करें. इसके बाद टोनर का इस्तेमाल करें, ताकि पोर्स क्लीन रहें और स्किन फ्रेश दिखे.

  • क्या आपकी त्वचा भी पड़ रही है काली? मेलानिन को प्राकृतिक रूप से कम करने के लिए अपनाएं ये आसान टिप्स!

    क्या आपकी त्वचा भी पड़ रही है काली? मेलानिन को प्राकृतिक रूप से कम करने के लिए अपनाएं ये आसान टिप्स!


    नई दिल्ली। हमारी त्वचा का प्राकृतिक रंग ‘मेलानिन’ नाम के पिगमेंट पर निर्भर करता है। हालाँकि मेलानिन सूरज की हानिकारक अल्ट्रावॉयलेट किरणों से हमारी रक्षा करता है, लेकिन शरीर में इसकी अधिकता चेहरे पर काले धब्बे, झाइयां और असमान रंगत (पिगमेंटेशन) का कारण बन सकती है। अगर आप भी अपनी त्वचा को एक समान, साफ और चमकदार बनाना चाहते हैं, तो इन 5 आसान और असरदार उपायों को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बना सकते हैं।

    1. सूर्य की किरणों से सुरक्षा सनस्क्रीन का जादू
    सूरज की यूवी किरणें मेलानिन के उत्पादन को सबसे ज्यादा उत्तेजित करती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि चाहे खिड़की से आने वाली धूप हो या बादलों वाला मौसम, SPF 30 या उससे अधिक वाला सनस्क्रीन रोज लगाना अनिवार्य है। इसके अलावा, बाहर निकलते समय टोपी, छाता और हल्के सूती कपड़ों का उपयोग त्वचा को सीधी धूप से बचाने में मदद करता है।

    2. विटामिन C और एंटीऑक्सिडेंट्स का सेव
    विटामिन C मेलानिन को रोकने का एक पावरहाउस है। यह न केवल त्वचा को अंदर से साफ करता है बल्कि टायरोसिनेस (Tyrosinase) एंजाइम को रोककर मेलानिन उत्पादन धीमा करता है। अपने आहार में संतरा, आंवला, स्ट्रॉबेरी और अंगूर शामिल करें। इसके साथ ही, चेहरे पर अच्छी गुणवत्ता वाला विटामिन C सीरम लगाना भी एक सुरक्षित और प्रभावी विकल्प है। ग्रीन टी और बेरीज भी इसमें काफी सहायक होते हैं।

    3. नियमित एक्सफोलिएशन
    त्वचा की ऊपरी मृत कोशिकाओं (Dead Cells) में मेलानिन जमा हो जाता है, जिससे त्वचा डार्क दिखने लगती है। साप्ताहिक स्क्रबिंग या कोमल केमिकल एक्सफोलिएशन से इन मृत कोशिकाओं को हटाया जा सकता है, जिससे नीचे की साफ और नई त्वचा बाहर आती है। ध्यान रहे कि स्क्रब बहुत ज्यादा कठोर न हो, वरना त्वचा छिल सकती है।

    4. नींबू और प्राकृतिक फेस पैक
    नींबू में प्राकृतिक रूप से ब्लीचिंग गुण होते हैं। लेकिन इसे सीधे चेहरे पर लगाने के बजाय दही या शहद के साथ मिलाकर लगाना ज्यादा सुरक्षित है। दही में मौजूद लैक्टिक एसिड और नींबू का विटामिन C मिलकर पिगमेंटेशन को कम करते हैं और त्वचा को हाइड्रेटेड रखते हैं।

    5. लाइफस्टाइल में बदलाव
    आपकी त्वचा आपके अंदरूनी स्वास्थ्य का आईना है। पर्याप्त नींद (7-8 घंटे), भरपूर पानी पीना और तनाव मुक्त रहना मेलानिन को नियंत्रित करने में अहम भूमिका निभाते हैं। तनाव से शरीर में हार्मोनल असंतुलन होता है, जो मेलानिन बढ़ा सकता है। इसके साथ ही धूम्रपान और शराब से परहेज करना भी त्वचा की चमक बनाए रखने के लिए जरूरी है।

    डर्मेटोलॉजिस्ट की राय: विशेषज्ञों का मानना है कि मेलानिन को पूरी तरह खत्म करना न तो संभव है और न ही सही, क्योंकि यह त्वचा का सुरक्षा कवच है। लेकिन सही सनस्क्रीन, संतुलित आहार और स्किनकेयर रूटीन के जरिए डार्क स्पॉट्स और असमान पिगमेंटेशन को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

  • कब्ज और अपच से राहत दिलाए खीरे का यह नुस्खा, चेहरे को भी दे प्राकृतिक चमक

    कब्ज और अपच से राहत दिलाए खीरे का यह नुस्खा, चेहरे को भी दे प्राकृतिक चमक


    नई दिल्ली में आज की भागदौड़ भरी जीवनशैली में अक्सर लोगों को समय पर और व्यवस्थित भोजन करने का अवसर नहीं मिल पाता। कई बार व्यक्ति संतुलित आहार तो लेता है, लेकिन इसके बावजूद शरीर में कमजोरी, सुस्ती और भारीपन की शिकायत बनी रहती है। इसका प्रमुख कारण खराब पाचन तंत्र हो सकता है।

    यदि भोजन ठीक से नहीं पचता, तो उसके पोषक तत्व शरीर को पूरी तरह नहीं मिल पाते। ऐसे में भोजन पेट में रुककर सड़ने लगता है और शरीर को अपेक्षित ऊर्जा और पोषण नहीं मिलता। इसलिए केवल संतुलित आहार लेना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसका सही तरीके से पचना भी उतना ही जरूरी है।

    जब पाचन प्रक्रिया कमजोर हो जाती है, तो पेट से जुड़ी समस्याएं सामने आने लगती हैं। गैस, अपच और कब्ज जैसी परेशानियां न केवल शारीरिक असहजता पैदा करती हैं, बल्कि मानसिक स्थिति पर भी नकारात्मक असर डालती हैं।

    आयुर्वेद में पेट से जुड़े रोगों के लिए कई रामबाण उपाय बताए गए हैं, लेकिन आयुर्वेद का मानना है कि बिना दवा के भी पेट की पाचन अग्नि को सुधारा जा सकता है। इसके लिए एक सरल और असरदार उपाय है खीरे की सलाद।

    अधिकांश लोग खीरे की सलाद खाते हैं, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि इसका नियमित सेवन पेट की कई समस्याओं से राहत दिला सकता है। रोज़ एक कटोरी ताजा खीरे की सलाद खाना पाचन सुधारने में बेहद सहायक माना जाता है।

    खीरे में भरपूर पानी, फाइबर, पोटेशियम और एंटीऑक्सीडेंट मौजूद होते हैं। ये पेट को साफ करने, कब्ज को तोड़ने और आंतों को लुब्रिकेट करने में मदद करते हैं। खीरे का पानी शरीर की शुष्कता कम करता है और मल त्यागने में आसानी होती है।

    खीरे की सलाद का सेवन करने का सबसे अच्छा समय दोपहर के भोजन के साथ माना जाता है। आप चाहें तो इसमें थोड़ा नींबू और काला नमक मिला सकते हैं। इसे हफ्ते में चार दिन आहार में शामिल करना फायदेमंद रहेगा। ध्यान रखें कि ज्यादा नमक न डालें और यदि खीरा फ्रिज में रखा था तो सामान्य तापमान पर आने के बाद ही इसका सेवन करें।

    खीरे का लाभ केवल पाचन तक ही सीमित नहीं है। यह त्वचा और बालों को भी स्वस्थ और चमकदार बनाने में मदद करता है। गर्मियों के मौसम में त्वचा की ड्राईनेस कम करने के लिए खीरे का सेवन और लेपन भी फायदेमंद है। खीरे का नियमित सेवन चेहरे को प्राकृतिक ग्लो देता है और थकान भी कम करता है।

    इस प्रकार रोज़ाना खीरे की सलाद न केवल पेट और पाचन से जुड़ी समस्याओं को कम कर सकती है, बल्कि त्वचा और बालों की सुंदरता में भी सुधार लाती है। यह एक सरल, प्राकृतिक और असरदार नुस्खा है, जिसे आप अपने दैनिक आहार में आसानी से शामिल कर सकते हैं।

  • महाशिवरात्रि से पहले खजुराहो में वन विभाग ने संभाली सुरक्षा, मगरमच्छ को सुरक्षित स्थान पर किया स्थानांतरित

    महाशिवरात्रि से पहले खजुराहो में वन विभाग ने संभाली सुरक्षा, मगरमच्छ को सुरक्षित स्थान पर किया स्थानांतरित


    खजुराहो में शिवसागर तालाब पिछले कुछ समय से मगरमच्छ के लगातार दिखाई देने से चर्चा में था। यह तालाब भारतीय पुरातत्व विभाग के अधीन आता है और शहर के पर्यटन स्थल के रूप में प्रसिद्ध है। मगरमच्छ की उपस्थिति ने स्थानीय लोगों और बाहर से आने वाले पर्यटकों के बीच भय पैदा कर दिया था। खासकर विदेशी पर्यटक इस दृश्य से डरे हुए थे और पर्यटन गतिविधियों पर असर पड़ने की संभावना थी।

    स्थानीय लोगों की शिकायत और सुरक्षा की गंभीर स्थिति को देखते हुए जिला कलेक्टर पार्थ जायसवाल ने 3 फरवरी को आयोजित मेला महाशिवरात्रि की बैठक में स्पष्ट निर्देश दिए थे कि शिवरात्रि से पहले तालाब से मगरमच्छ को निकालकर सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट किया जाए।

    इस आदेश के बाद वन मंडल अधिकारी ऋषि मिश्रा के नेतृत्व में वन विभाग और जिला आपदा प्रबंधन अमला, जिला छतरपुर ने संयुक्त रूप से कार्य शुरू किया। उन्होंने पर्यटकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए तालाब का निरीक्षण किया और मगरमच्छ को सुरक्षित रूप से पकड़ने की योजना बनाई।

    वन विभाग की टीम ने सावधानी और कुशलता के साथ मगरमच्छ को पकड़कर उसके जीवन और पर्यावरण दोनों की सुरक्षा का ध्यान रखा। तालाब से मगरमच्छ को हटाकर अन्य सुरक्षित स्थान पर स्थानांतरित कर दिया गया। इस कार्य के पूरा होने के बाद पर्यटकों और स्थानीय लोगों में राहत की लहर दौड़ गई। अब शिवसागर तालाब के आसपास के क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियां बिना किसी डर के हो सकेंगी।

    वन विभाग ने कहा कि यह कार्य पर्यावरण और पर्यटन दोनों के दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण था। मगरमच्छ को केवल खतरनाक माना जाता है, लेकिन उसका जीवन भी संरक्षण योग्य है। इस कार्रवाई ने यह सुनिश्चित किया कि पर्यटक सुरक्षित रहें और तालाब का पारिस्थितिकी संतुलित रहे।

    स्थानीय व्यापारियों और होटल संचालकों ने भी इस पहल की सराहना की। उनका कहना था कि मगरमच्छ की वजह से पिछले दिनों पर्यटक डर कर दौरे कम कर रहे थे, लेकिन अब सुरक्षा सुनिश्चित होने से पर्यटन में वृद्धि होगी। वन विभाग ने पर्यटकों और स्थानीय लोगों को यह भी चेतावनी दी कि तालाब के पास जाते समय सतर्क रहें और वन्यजीवों को परेशान न करें।

    इस तरह, महाशिवरात्रि 2026 से पहले खजुराहो में वन विभाग ने कुशलता से मगरमच्छ को सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट करके न केवल पर्यटकों की सुरक्षा सुनिश्चित की बल्कि पर्यटन नगरी की प्रतिष्ठा और स्थानीय विश्वास भी बनाए रखा।

  • SIP शुरू करने से पहले समझ लें ये सच्चाई, वरना उम्मीदें बन सकती हैं बोझ

    SIP शुरू करने से पहले समझ लें ये सच्चाई, वरना उम्मीदें बन सकती हैं बोझ

    नई दिल्ली। भारतीय निवेशकों के बीच म्यूचुअल फंड का सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) तेजी से लोकप्रिय हुआ है। हर महीने छोटी रकम लगाकर बड़ा फंड बनाने का सपना अब मध्यम वर्ग की वित्तीय रणनीति का अहम हिस्सा बन चुका है। आसान प्रक्रिया और ऑटोमैटिक निवेश की सुविधा ने इसे आकर्षक बनाया है, लेकिन इसके साथ कई गलतफहमियां भी जुड़ी हैं। सोशल मीडिया और अधूरी जानकारी के कारण कई निवेशक SIP को “गारंटीड मुनाफे” का जरिया मान बैठते हैं। हकीकत यह है कि SIP बाजार से जुड़ा निवेश है और इसमें जोखिम भी शामिल रहता है। सही जानकारी और संतुलित उम्मीदें ही लंबी अवधि में बेहतर परिणाम दे सकती हैं।

    तुरंत मोटा रिटर्न नहीं, समय ही असली ताकत
    कई नए निवेशक यह मान लेते हैं कि SIP शुरू करते ही उन्हें हर साल ऊंचा और स्थिर रिटर्न मिलेगा। कुछ लोग तो इसे जल्दी अमीर बनने का फॉर्मूला समझ लेते हैं। लेकिन सच्चाई यह है कि SIP कोई जादुई योजना नहीं, बल्कि अनुशासित निवेश की प्रक्रिया है। बाजार में उतार-चढ़ाव आते रहते हैं, जिसका असर फंड के प्रदर्शन पर पड़ता है। अगर चुना गया फंड कमजोर है तो नियमित निवेश भी अपेक्षित परिणाम नहीं देगा। आमतौर पर 7 से 15 साल की अवधि में कंपाउंडिंग का असर दिखता है और तब जाकर ठोस ग्रोथ नजर आती है। इसलिए धैर्य और लंबी अवधि की सोच जरूरी है।

    ज्यादा फंड मतलब ज्यादा फायदा? जरूरी नहीं
    अक्सर निवेशक यह सोचकर कई अलग-अलग म्यूचुअल फंड में SIP शुरू कर देते हैं कि ज्यादा फंड रखने से जोखिम कम होगा और रिटर्न बढ़ेगा। इसी भ्रम में कुछ लोग 8–10 फंड तक जोड़ लेते हैं। लेकिन बहुत अधिक फंड रखने से पोर्टफोलियो जटिल हो जाता है और कई बार एक जैसे सेक्टर या स्टॉक में दोहराव भी हो जाता है। विशेषज्ञ मानते हैं कि 3 से 5 मजबूत और अलग रणनीति वाले फंड पर्याप्त होते हैं। निवेश लक्ष्य, जोखिम क्षमता और अवधि को ध्यान में रखकर संतुलित पोर्टफोलियो बनाना ज्यादा समझदारी भरा कदम है।

    जरूरत पड़े तो SIP रोकना भी समझदारी
    एक और आम मिथक यह है कि SIP को कभी बंद नहीं करना चाहिए। जबकि वास्तविकता यह है कि वित्तीय परिस्थितियां बदल सकती हैं। आय में कमी, आपात स्थिति या लक्ष्य में बदलाव आने पर SIP को रोका या बदला जा सकता है। यह कोई कानूनी अनुबंध नहीं है। यदि कोई फंड लगातार खराब प्रदर्शन कर रहा हो, तो बेहतर विकल्प में स्विच करना भी सही फैसला हो सकता है। निवेश में लचीलापन बनाए रखना उतना ही जरूरी है जितना अनुशासन।

  • भोपाल में महाशिवरात्रि पर हुई पहली किन्नर शंकराचार्य की नियुक्ति, धर्मांतरित किन्नरों की घर वापसी

    भोपाल में महाशिवरात्रि पर हुई पहली किन्नर शंकराचार्य की नियुक्ति, धर्मांतरित किन्नरों की घर वापसी


    भोपाल में महाशिवरात्रि 2026 के पावन अवसर पर एक अनूठा और विवादित धार्मिक आयोजन हुआ। मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में देश की पहली किन्नर शंकराचार्य का पट्टाभिषेक संपन्न हुआ, जिसमें हिमांगी सखी को नियुक्त किया गया। इस अवसर पर जगद्गुरु और महामंडलेश्वरों की घोषणा भी की गई।

    कार्यक्रम का आयोजन उस समय सुर्खियों में आया, जब धर्मांतरित किन्नरों की घर वापसी का भी आयोजन किया गया। इस दौरान कुछ मुस्लिम किन्नर वापस हिंदू धर्म में लौटे और शुद्धिकरण के rites संपन्न हुए। इस आयोजन के लिए राजस्थान के पुष्कर पीठ को देश की पहली विवादित किन्नर शंकराचार्य के लिए चुना गया।

    कार्यक्रम में किन्नर अखाड़ा के संस्थापक ऋषि अजय दास भी मौजूद रहे और उन्होंने इस आयोजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। हिमांगी सखी के शंकराचार्य बनने के बाद भव्य पट्टाभिषेक संपन्न हुआ और मंदिर परिसर में धार्मिक अनुष्ठान और मंत्रोच्चारण का माहौल देखने को मिला।

    हालांकि इस नियुक्ति को लेकर धार्मिक समुदाय में विवाद और आलोचना भी सामने आई। साधु संत सन्यासी समिति के कार्यकारी अध्यक्ष स्वामी अनिलानंद ने कहा कि किन्नरों की सनातन धर्म में वापसी को कोई दिक्कत नहीं है, लेकिन अलग से किन्नर शंकराचार्य बनाना अत्यधिक आपत्तिजनक है। उनके अनुसार, धर्मशास्त्र में केवल चार शंकराचार्य ही मान्य हैं।

    स्वामी अनिलानंद ने आगे कहा कि ऋषि अजय दास इस मामले में पाखंड कर रहे हैं और धर्म का मजाक बना रहे हैं। उन्होंने कहा कि किन्नरों और उनके नाम पर आर्थिक लाभ लेने का प्रयास किया गया है। इस पर शिकायत दर्ज कराई गई है और धर्म विरोधी कृत्यों और धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने के मामलों में वैधानिक कार्रवाई और गिरफ्तारी की मांग की गई है।

    इस आयोजन को लेकर सोशल मीडिया और समाचार माध्यमों में भी अलग-अलग प्रतिक्रियाएं आई हैं। कुछ लोग इसे समावेशी धार्मिक पहल मान रहे हैं, जबकि कई धार्मिक विद्वान और समाजिक संगठन इसे धार्मिक परंपरा का उल्लंघन मान रहे हैं।

    भोपाल में आयोजित इस कार्यक्रम ने न केवल धार्मिक दृष्टि से चर्चाओं को जन्म दिया, बल्कि किन्नर समुदाय की धार्मिक पहचान और अधिकारों पर भी ध्यान आकर्षित किया। हिमांगी सखी के शंकराचार्य बनने की प्रक्रिया और धर्मांतरित किन्नरों की वापसी ने समाज में धार्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक बहस को एक नई दिशा दी है।

    साथ ही, यह मामला यह सवाल उठाता है कि परंपरा और आधुनिकता के बीच संतुलन कैसे स्थापित किया जाए और धर्म के अधिकार और मर्यादा के बीच किस तरह की संवेदनशीलता बरती जाए।

  • महाशिवरात्रि पर CM डॉ. मोहन यादव ने भोपाल के बड़वाले महादेव में की विशेष पूजा, प्रदेश की खुशहाली की कामना

    महाशिवरात्रि पर CM डॉ. मोहन यादव ने भोपाल के बड़वाले महादेव में की विशेष पूजा, प्रदेश की खुशहाली की कामना


    भोपाल में महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपनी आस्था और भक्ति के प्रति गहरी श्रद्धा दिखाई। सुबह के समय मुख्यमंत्री भोपाल के प्राचीन और प्रसिद्ध बड़वाले महादेव मंदिर पहुंचे। यह मंदिर अपने प्राचीन ज्योतिर्लिंग के लिए जाना जाता है और महाशिवरात्रि के दिन यहाँ श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ता है।

    मुख्यमंत्री ने मंदिर में पहुँचते ही भगवान शिव के दर्शन किए और जलाभिषेक कर आराधना में लीन हो गए। उन्होंने प्रदेश की सुख-समृद्धि और खुशहाली के लिए विशेष प्रार्थना की। इस दौरान वैदिक मंत्रों के उच्चारण के साथ रुद्राभिषेक और अन्य अनुष्ठान संपन्न हुए। मंदिर परिसर में मुख्यमंत्री की उपस्थिति ने श्रद्धालुओं के बीच उत्साह और भक्ति का माहौल और बढ़ा दिया।

    पूजा-अर्चना के दौरान CM डॉ. मोहन यादव ने भक्तों के साथ मिलकर ‘हर हर महादेव’ के जयकारे लगाए और सभी को महाशिवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएं दी। उन्होंने कहा कि महाशिवरात्रि भगवान शिव की भक्ति, समर्पण और आत्मिक शक्ति का महापर्व है। मुख्यमंत्री ने भोलेनाथ से प्रार्थना की कि वे पूरे मध्य प्रदेश पर अपनी कृपा बनाए रखें और राज्य में शांति, समृद्धि एवं विकास का मार्ग प्रशस्त करें।

    महाशिवरात्रि के दिन प्रदेश भर में शिव मंदिरों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखी गई। उज्जैन के महाकालेश्वर, ओंकारेश्वर और अन्य प्रमुख मंदिरों में भी लाखों श्रद्धालु दर्शन करने के लिए पहुंचे। भोपाल के बड़वाले महादेव मंदिर में सुबह से ही भक्तों की कतार लगी रही, और मुख्यमंत्री की उपस्थिति से मंदिर परिसर में विशेष धार्मिक उत्साह देखने को मिला।

    मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर कहा कि भगवान शिव की भक्ति में जीवन को सरल और सकारात्मक बनाने की शक्ति है। उन्होंने लोगों से आह्वान किया कि वे अपने जीवन में संयम, धर्म और परस्पर सहयोग की भावना बनाए रखें। उन्होंने यह भी कहा कि महाशिवरात्रि केवल पूजा का पर्व नहीं है, बल्कि यह आध्यात्मिक जागरूकता और समाज में भाईचारे को बढ़ावा देने का अवसर भी है।

    प्रदेश में सरकार भी धार्मिक स्थलों के सुचारु संचालन और श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए तैयारियों में लगी रही। बड़वाले महादेव मंदिर में सुरक्षा और व्यवस्थाओं का विशेष ध्यान रखा गया ताकि श्रद्धालुओं को बिना किसी परेशानी के दर्शन और पूजा का अवसर मिल सके।

    इस तरह महाशिवरात्रि 2026 पर CM डॉ. मोहन यादव की भक्ति, प्रदेश की खुशहाली की कामना और जनता के बीच सामूहिक उत्साह का अद्भुत नजारा देखने को मिला। यह पर्व न केवल धार्मिक महत्व रखता है, बल्कि समाज में सकारात्मक ऊर्जा और आस्था का संदेश भी देता है।

  • IMDb Most Anticipated Films: ‘ओ रोमियो’ के बाद अब इन 5 फिल्मों का इंतजार चरम पर

    IMDb Most Anticipated Films: ‘ओ रोमियो’ के बाद अब इन 5 फिल्मों का इंतजार चरम पर

    नई दिल्ली।शाहिद कपूर की फिल्म ओ रोमियो सिनेमाघरों में दस्तक दे चुकी है और रिलीज के साथ ही दर्शकों के बीच जबरदस्त चर्चा में है। रोमांस और ड्रामा से सजी इस फिल्म के बाद अब फैंस की नजरें आने वाली बड़ी रिलीज पर टिक गई हैं। IMDb की रियल-टाइम पॉपुलैरिटी लिस्ट के मुताबिक पांच ऐसी फिल्में हैं, जिनका दर्शक बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। यह रैंकिंग फिल्मों के पेज व्यूज के आधार पर तय होती है, यानी जिस फिल्म को लेकर जितनी ज्यादा दिलचस्पी, वह उतनी ऊपर।

    1. Toxic
    लिस्ट में सबसे ऊपर सुपरस्टार Yash की बहुप्रतीक्षित एक्शन फिल्म Toxic है। इस फिल्म को Geetu Mohandas ने डायरेक्ट किया है। स्टाइलिश एक्शन और दमदार स्क्रीन प्रेजेंस के लिए मशहूर यश इस बार भी बड़े पैमाने पर एक्शन अवतार में नजर आएंगे। फिल्म 19 मार्च को सिनेमाघरों में रिलीज होगी और ट्रेड एनालिस्ट इसे साल की बड़ी ओपनिंग फिल्मों में गिन रहे हैं।

    2. Dhurandhar: The Revenge
    दूसरे नंबर पर Ranveer Singh की फिल्म Dhurandhar: The Revenge है। इसे Aditya Dhar ने निर्देशित किया है। फिल्म का पहला पार्ट 5 दिसंबर 2025 को रिलीज हुआ था और बॉक्स ऑफिस पर अच्छी कमाई की थी। अब इसका सीक्वल 19 मार्च को रिलीज होने जा रहा है। हाई-ऑक्टेन ड्रामा और देशभक्ति के रंग से सजी यह फिल्म दर्शकों में खास उत्साह जगा रही है।

    3. Assi
    तीसरे स्थान पर Taapsee Pannu स्टारर Assi है। इस फिल्म का निर्देशन Anubhav Sinha ने किया है। सामाजिक मुद्दों पर आधारित फिल्में बनाने के लिए पहचाने जाने वाले अनुभव सिन्हा इस बार भी एक गंभीर विषय लेकर आ रहे हैं। फिल्म 20 फरवरी को रिलीज होगी और कंटेंट-ड्रिवन सिनेमा पसंद करने वालों को इससे काफी उम्मीदें हैं।

    4. The Paradise
    चौथे नंबर पर तेलुगु एक्शन ड्रामा The Paradise है, जिसमें Raghav Juyal नजर आएंगे। फिल्म का निर्देशन Srikanth Odela ने किया है। 26 मार्च को रिलीज होने वाली इस फिल्म को लेकर साउथ सिनेमा के दर्शकों में जबरदस्त उत्साह है।

    5. Love Insurance Company
    पांचवें नंबर पर तमिल रोमांटिक-कॉमेडी Love Insurance Company है। इसे Vignesh Shivan ने डायरेक्ट किया है। हल्की-फुल्की प्रेम कहानी और कॉमिक ट्विस्ट के कारण यह फिल्म चर्चा में है। हालांकि इसकी रिलीज डेट का अभी आधिकारिक ऐलान नहीं हुआ है, लेकिन फैंस इसके अपडेट का इंतजार कर रहे हैं।


  • प्रधानमंत्री मोदी ने कश्मीरी पंडित समुदाय के पर्व ‘हेराथ पोश्ते’ पर दी शुभकामनाएं

    प्रधानमंत्री मोदी ने कश्मीरी पंडित समुदाय के पर्व ‘हेराथ पोश्ते’ पर दी शुभकामनाएं


    नई दिल्ली। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने कश्मीरी पंडित समुदाय के समृद्ध परंपराओं और सांस्कृतिक धरोहर को दर्शाने वाले पवित्र त्योहार हेराथ पोश्ते के अवसर पर शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने सभी समुदाय के सदस्यों के जीवन में स्वास्थ्य, खुशहाली और समृद्धि की कामना की।प्रधानमंत्री मोदी ने संदेश में कहा, इस पवित्र अवसर पर, मैं सभी के जीवन में स्वास्थ्य और समृद्धि की कामना करता हूं। यह नए सफलता के मार्ग खोले और हर घर को खुशियों और संतोष से भर दे। उन्होंने इस त्योहार के महत्व पर भी प्रकाश डालते हुए कहा कि यह कश्मीरी पंडित समुदाय की समृद्ध परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है।

    हेराथ पोश्ते का पर्व कश्मीरी पंडित समुदाय में धार्मिक और सामाजिक दृष्टि से विशेष महत्व रखता है। यह उनके पारंपरिक रीति-रिवाजों, सांस्कृतिक प्रथाओं और ऐतिहासिक परंपराओं को जीवित रखने का माध्यम है। इस अवसर पर परिवार और समुदाय के लोग मिलकर पूजा-अर्चना और उत्सव आयोजित करते हैं, जिससे सामाजिक और सांस्कृतिक बंधन मजबूत होते हैं। प्रधानमंत्री मोदी के संदेश ने इस पर्व के अवसर पर समुदाय में उत्साह और आनंद की भावना बढ़ा दी है। उन्होंने यह भी आशा व्यक्त की कि यह पर्व सभी के लिए खुशियों और सफलता का संदेश लेकर आए। उनके संदेश ने यह स्पष्ट किया कि भारतीय समाज में सांस्कृतिक विविधता और परंपराओं का सम्मान सभी के लिए प्रेरणा का स्रोत है।

    हेराथ पोश्ते के अवसर पर कश्मीरी पंडित समुदाय देशभर में अपने घरों और मंदिरों में पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार आयोजन करता है। इस पर्व के माध्यम से युवा पीढ़ी को भी अपनी सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का प्रयास किया जाता है। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने शुभकामना संदेश के माध्यम से समाज में भाईचारे और सामूहिक कल्याण की भावना को भी उजागर किया। उनके संदेश ने न केवल कश्मीरी पंडित समुदाय, बल्कि पूरे देश में सांस्कृतिक और धार्मिक सौहार्द्र की भावना को बल दिया।