Author: bharati

  • त्रिवेणी शनि मंदिर में श्रद्धालुओं का सैलाब, सुबह से शिप्रा स्नान जारी

    त्रिवेणी शनि मंदिर में श्रद्धालुओं का सैलाब, सुबह से शिप्रा स्नान जारी

      उज्जैन। मध्य प्रदेश के धार्मिक नगरी उज्जैन में शनिवार को आस्था का अद्भुत दृश्य देखने को मिला, जब 13 साल बाद शनि जयंती और शनिचरी अमावस्या का विशेष महासंयोग बना। इस अवसर पर त्रिवेणी स्थित प्राचीन शनि मंदिर में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। देशभर से आए भक्तों ने शिप्रा नदी में स्नान कर शनिदेव के दर्शन किए और तेल, काले तिल, नारियल तथा काले वस्त्र अर्पित कर पूजा-अर्चना की।

      शिप्रा स्नान के लिए विशेष इंतजाम, फव्वारों से स्नान कर रहे श्रद्धालु

      श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने शिप्रा नदी के त्रिवेणी घाट पर विशेष व्यवस्था की है। नदी में जल स्तर कम होने के कारण नर्मदा जल से फव्वारे लगाए गए हैं, जिससे श्रद्धालु स्नान कर सकें।

      सुबह से ही भक्त स्नान कर शुद्धि प्राप्त कर मंदिर पहुंच रहे हैं और शनिदेव के दर्शन कर रहे हैं। सुरक्षा व्यवस्था के लिए पुलिस, होमगार्ड और SDRF की टीमें तैनात की गई हैं।

      मंदिर में विशेष अनुष्ठान, 24 घंटे तेल अभिषेक जारी
      त्रिवेणी शनि मंदिर में सुबह तड़के ही पंचामृत अभिषेक और विशेष पूजा के साथ दिन की शुरुआत हुई। मंदिर को फूलों और विद्युत सज्जा से भव्य रूप दिया गया है। महंत राकेश बैरागी के अनुसार गर्भगृह में आम श्रद्धालुओं की एंट्री बंद रखी गई है, जबकि शनि प्रतिमा पर 24 घंटे तक तिल के तेल का अभिषेक जारी रहेगा।

      श्रद्धालुओं की आस्था, दान और परंपराओं का पालन
      श्रद्धालु शिप्रा स्नान के बाद पुराने वस्त्र और जूते-चप्पल मंदिर परिसर में दान कर रहे हैं। भक्त अपने साथ लाए काले तिल, नारियल और तेल शनिदेव को अर्पित कर रहे हैं। मान्यता है कि इस दिन पूजा करने से शनि दोष, साढ़ेसाती और ढैय्या के प्रभाव से मुक्ति मिलती है और जीवन में सकारात्मकता आती है।

      धार्मिक अनुष्ठानों और उपायों का महत्व
      पंडितों के अनुसार शनि जयंती के दिन पीपल वृक्ष पर जल अर्पण, काले तिल चढ़ाना और तेल का दीपक जलाना विशेष फलदायी माना जाता है। शनि स्तोत्र, हनुमान चालीसा और सुंदरकांड का पाठ भी शनि दोष शांति के लिए लाभकारी बताया गया है। इसके साथ ही जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र और दान देना अत्यंत शुभ माना जाता है।

      उज्जैन में बना यह दुर्लभ संयोग न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण रहा, बल्कि आस्था और परंपरा के अद्भुत संगम का प्रतीक भी बन गया। त्रिवेणी शनि मंदिर में उमड़ी भीड़ ने एक बार फिर साबित किया कि शनिदेव के प्रति श्रद्धा जनमानस में गहराई से स्थापित है।
  • गोरखपुर में इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम का शिलान्यास, CM योगी बोले– यूपी अब विकास का मॉडल बन चुका है

    गोरखपुर में इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम का शिलान्यास, CM योगी बोले– यूपी अब विकास का मॉडल बन चुका है



    गोरखपुर। गोरखपुर में शनिवार को इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम का भव्य शिलान्यास किया गया, जिसमें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी मौजूद रहे। करीब 393 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाला यह स्टेडियम CM योगी का ड्रीम प्रोजेक्ट माना जा रहा है, जिसे 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य है।

    “उत्तर प्रदेश अब सिर्फ संभावनाओं का नहीं, परिणामों का राज्य है” – हरदीप पुरी
    केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि 2017 के बाद उत्तर प्रदेश में जिस तरह विकास कार्यों ने रफ्तार पकड़ी है, वह देश के लिए उदाहरण बन गया है। उन्होंने कहा कि कानून व्यवस्था में सुधार से निवेश बढ़ा है और गोरखपुर का यह स्टेडियम युवाओं के सपनों को नई उड़ान देगा।

    18 महीने में पूरा करने का लक्ष्य, अंतरराष्ट्रीय मैच की उम्मीद
    मंत्री पुरी ने दावा किया कि स्टेडियम का निर्माण तेजी से पूरा होगा और 18 महीने के भीतर इसे तैयार करने की कोशिश होगी। उन्होंने कहा कि भविष्य में यहां IPL और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैच आयोजित किए जा सकेंगे, जिससे पूर्वी उत्तर प्रदेश को नई पहचान मिलेगी।

    VIP कारपूल से पहुंचे रवि किशन, नेताओं ने दिखाई एकजुटता
    शिलान्यास समारोह में सांसद रवि किशन केंद्रीय मंत्री कमलेश पासवान और अन्य नेताओं के साथ कारपूल करके पहुंचे। इस दौरान गोरखपुर में खेल सुविधाओं के विस्तार और ग्रामीण स्तर पर स्टेडियम विकसित करने की योजनाओं पर भी चर्चा हुई।

    स्टेडियम से बदल जाएगी गोरखपुर की पहचान
    केंद्रीय राज्य मंत्री गिरीश चंद्र यादव ने कहा कि प्रदेश के हर जिले में खेल इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत किया जा रहा है। उन्होंने विश्वास जताया कि गोरखपुर का यह स्टेडियम भविष्य में कई बड़े क्रिकेट सितारे तैयार करेगा और क्षेत्र की आर्थिक स्थिति को भी मजबूती देगा।

  • हाईकोर्ट का बड़ा आदेश: जबलपुर में अवैध शिकार और खनन पर जताई चिंता

    हाईकोर्ट का बड़ा आदेश: जबलपुर में अवैध शिकार और खनन पर जताई चिंता

    जबलपुर। मध्य प्रदेश के जबलपुर में नर्मदा नदी और उसके आसपास के क्षेत्रों में हो रहे अवैध रेत खनन और राज्य मछली महाशीर के अवैध शिकार को लेकर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने इन गतिविधियों पर तत्काल रोक लगाने के निर्देश देते हुए संबंधित अधिकारियों से जवाब तलब किया है। चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की डिवीजन बेंच ने इस मामले में मछुआरा कल्याण एवं मत्स्य विकास विभाग, कलेक्टर, एसपी, ईओडब्ल्यू और जिला खनिज अधिकारी सहित कई विभागों को नोटिस जारी किए हैं।

    जनहित याचिका से सामने आया गंभीर मामला
    यह मामला जबलपुर निवासी अभिषेक कुमार सिंह द्वारा दायर जनहित याचिका के बाद सामने आया। याचिकाकर्ता का आरोप है कि नर्मदा नदी के खिरहनी घाट क्षेत्र में बड़े पैमाने पर अवैध रेत खनन और महाशीर मछली का शिकार लगातार जारी है। अधिवक्ता अंशुमान सिंह ने कोर्ट में दलील दी कि महाशीर को वर्ष 2011 में मध्यप्रदेश की राज्य मछली का दर्जा दिया गया था, लेकिन इसके संरक्षण के लिए जमीनी स्तर पर पर्याप्त कदम नहीं उठाए गए हैं।

    ब्रीडिंग सीजन में भी जारी शिकार, विलुप्ति का खतरा
    याचिका में कहा गया है कि विशेष रूप से प्रजनन काल के दौरान महाशीर मछली का शिकार पूरी तरह प्रतिबंधित होना चाहिए, लेकिन इसके बावजूद अवैध मत्स्याखेट जारी है। इसके कारण यह दुर्लभ प्रजाति धीरे-धीरे विलुप्ति की ओर बढ़ रही है। इसके साथ ही नर्मदा नदी में चल रहे अवैध रेत खनन को भी पर्यावरण और जलजीवों के लिए बड़ा खतरा बताया गया है।

    रेत खनन और धमकी के आरोप भी पहुंचे कोर्ट
    याचिकाकर्ता ने अदालत को बताया कि खिरहनी घाट पर पहले भी प्रशासन ने अवैध रेत भंडारण और मशीनें जब्त की थीं, लेकिन उसके बाद भी अवैध गतिविधियां नहीं रुकीं। आरोप है कि जब्त रेत को लेकर उपसरपंच को धमकाया गया और बाद में वह सामग्री चोरी कर ली गई। शिकायत दर्ज होने के बावजूद पुलिस और खनन विभाग की कार्रवाई को लेकर सवाल उठाए गए हैं।

    जैव विविधता संरक्षण पर बड़ा सवाल
    हाईकोर्ट ने इस मामले को गंभीर मानते हुए कहा है कि नर्मदा नदी की जैव विविधता और पर्यावरण की सुरक्षा बेहद जरूरी है। महाशीर जैसी दुर्लभ प्रजाति का संरक्षण न केवल पर्यावरण बल्कि पारिस्थितिक संतुलन के लिए भी अहम है।

    जबलपुर हाईकोर्ट का यह फैसला नर्मदा नदी और उसकी जैव विविधता के संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस पर कितनी गंभीरता से कार्रवाई करता है और अवैध गतिविधियों पर कितनी प्रभावी रोक लगती है।

  • जबलपुर में धर्मांतरण का आरोप, स्कूल पर नौकरी से निकालने का मामला

    जबलपुर में धर्मांतरण का आरोप, स्कूल पर नौकरी से निकालने का मामला


    जबलपुर। मध्य प्रदेश के जबलपुर शहर में सेंट एलायसिस स्कूल को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। यहां काम कर रही महिला सफाई कर्मचारियों ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि उन पर ईसाई धर्म अपनाने का दबाव बनाया गया और इनकार करने पर नौकरी से निकाल दिया गया। मामला सामने आने के बाद शहर में तनाव का माहौल बन गया है और पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।

    नौकरी के बदले धर्म परिवर्तन का आरोप, महिलाओं ने लगाए गंभीर आरोप
    पीड़ित महिला कर्मचारियों का कहना है कि स्कूल प्रशासन की ओर से उन पर चर्च जाने और ईसाई धर्म अपनाने का दबाव बनाया गया। आरोप है कि कहा गया “अगर यहां काम करना है तो धर्म बदलना होगा, वरना नौकरी छोड़नी पड़ेगी। महिलाओं ने बताया कि दबाव मानने से इनकार करने पर उन्हें काम से हटा दिया गया। इसके बाद पीड़ित महिलाएं पुलिस के पास पहुंचीं और कार्रवाई की मांग की।

    2024 से काम कर रही थीं महिलाएं, फादर बदलने के बाद बढ़ा दबाव
    शिकायतकर्ता दीपा पटेल के अनुसार वह वर्ष 2024 से स्कूल में सफाई कर्मचारी के रूप में काम कर रही थीं और पहले स्थिति सामान्य थी। उनके अनुसार पहले फादर वाल्टर के समय कोई समस्या नहीं थी, लेकिन नए फादर सोमी जैकब के आने के बाद दबाव बढ़ गया। दीपा का आरोप है कि उन्हें और अन्य महिला कर्मचारियों को चर्च जाने के लिए कहा गया, और मना करने पर नौकरी से निकाल दिया गया।

    12 साल की नौकरी, फिर अचानक निकाला गया: एक और आरोप
    एक अन्य कर्मचारी ने आरोप लगाया कि उसने स्कूल में 12 साल तक काम किया, लेकिन छोटी छुट्टी लेने के बाद उसे वापस काम पर नहीं आने दिया गया। आरोप है कि उनसे भी धर्म परिवर्तन की बात कही गई और विरोध करने पर नौकरी समाप्त कर दी गई।

    हिंदू संगठनों का विरोध, कार्रवाई की मांग
    मामले को लेकर हिंदू धर्म सेना समेत कई संगठनों ने विरोध जताया है। संगठन के नेताओं का कहना है कि शहर में कुछ स्कूलों में नौकरी के नाम पर धर्म परिवर्तन का दबाव बनाया जा रहा है। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि दोषियों पर कार्रवाई नहीं हुई तो बड़ा प्रदर्शन किया जाएगा।

    पुलिस जांच शुरू, स्कूल प्रशासन से नहीं मिला जवाब
    मामले की शिकायत पुलिस और एएसपी तक पहुंच चुकी है। एएसपी सूर्यकांत शर्मा ने बताया कि शिकायत में लगाए गए आरोपों की जांच विजय नगर थाना प्रभारी को सौंपी गई है। पुलिस का कहना है कि जांच के बाद ही आगे की कार्रवाई तय होगी। स्कूल प्रशासन की ओर से फादर सोमी जैकब का पक्ष जानने की कोशिश की गई, लेकिन कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली।

    जबलपुर का यह मामला अब सामाजिक और कानूनी बहस का विषय बन गया है। जहां एक ओर पीड़ित कर्मचारी न्याय की मांग कर रही हैं, वहीं दूसरी ओर जांच के बाद ही सच्चाई सामने आने की बात कही जा रही है। फिलहाल मामला पुलिस जांच के दायरे में है।

  • प्रतीक यादव की अस्थियां लेकर हरिद्वार रवाना हुआ परिवार, अपर्णा यादव चार्टर्ड प्लेन से पहुंचीं गंगा घाट

    प्रतीक यादव की अस्थियां लेकर हरिद्वार रवाना हुआ परिवार, अपर्णा यादव चार्टर्ड प्लेन से पहुंचीं गंगा घाट



    लखनऊ। सपा प्रमुख अखिलेश यादव के छोटे भाई प्रतीक यादव की अस्थियां आज हरिद्वार में गंगा में विसर्जित की जाएंगी। इसके लिए पत्नी अपर्णा यादव चार्टर्ड प्लेन से अस्थि कलश लेकर परिवार के साथ लखनऊ से रवाना हुईं। इस दौरान उनके साथ शिवपाल यादव के सांसद पुत्र आदित्य यादव, बेटियां प्रथमा और पद्मजा, पिता अरविंद बिष्ट और भाई अमन भी मौजूद रहे।

    अमौसी एयरपोर्ट से लेकर जॉलीग्रांट एयरपोर्ट तक पूरे सफर में परिवार के सदस्य अस्थि कलश के साथ रहे। इसके बाद सड़क मार्ग से हरिद्वार पहुंचकर जूना अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर और स्वामी अवधेशानंद गिरि की मौजूदगी में गंगा तट पर विधिवत अस्थि विसर्जन किया जाएगा। सुरक्षा और निजीता को देखते हुए पूरा कार्यक्रम बेहद सीमित और वीवीआईपी स्तर पर आयोजित किया गया है।

    निजी जीवन और अंतिम विदाई की प्रक्रिया
    प्रतीक यादव का 13 मई को 38 वर्ष की उम्र में निधन हो गया था, जिसके बाद 14 मई को लखनऊ में उनका अंतिम संस्कार किया गया था। उनके ससुर अरविंद सिंह बिष्ट ने मुखाग्नि दी थी। प्रतीक मुलायम सिंह यादव की दूसरी पत्नी साधना गुप्ता के पुत्र थे और राजनीति से दूर रहते हुए रियल एस्टेट और फिटनेस व्यवसाय से जुड़े थे।

    पत्नी अपर्णा यादव, जो वर्तमान में भाजपा नेता और यूपी राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष हैं, पूरे परिवार के साथ इस अंतिम यात्रा का हिस्सा बनीं। अपर्णा के पैतृक गांव उत्तराखंड में भी शोक का माहौल है, जहां लोग दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना कर रहे हैं।

  • जबलपुर में डिजिटल न्याय पर मंथन, CJI और कानून मंत्री समेत कई दिग्गज पहुंचे

    जबलपुर में डिजिटल न्याय पर मंथन, CJI और कानून मंत्री समेत कई दिग्गज पहुंचे


    जबलपुर। मध्य प्रदेश का जबलपुर शुक्रवार को देश की न्याय व्यवस्था के डिजिटल भविष्य का केंद्र बन गया, जहां ‘फ्रेगमेंटेशन टू फ्यूजन: एम्पॉवरिंग जस्टिस वाया यूनाइटेड डिजिटल प्लेटफॉर्म इंटीग्रेशन’ विषय पर उच्चस्तरीय सेमिनार आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में देश की न्यायपालिका, सरकार और कानून व्यवस्था से जुड़े शीर्ष प्रतिनिधियों की मौजूदगी ने इसे बेहद अहम बना दिया। कार्यक्रम में भारत के प्रधान न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल शामिल हुए। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट के कई वरिष्ठ जजों और मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के न्यायाधीशों ने भी भाग लिया।

    सुप्रीम कोर्ट के 9 जजों की मौजूदगी, हाईकोर्ट के न्यायाधीश भी शामिल
    सेमिनार में सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस पीएस नरसिम्हा, सतीश चंद्र शर्मा, पीबी वराले, एन. कोटेश्वर सिंह, आर. महादेवन, मनमोहन और आलोक आराधे सहित कई न्यायाधीश उपस्थित रहे। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा सहित सभी न्यायाधीशों ने भी कार्यक्रम में हिस्सा लिया। यह उपस्थिति इस बात का संकेत है कि देश की न्याय व्यवस्था में तकनीक आधारित बदलाव को लेकर गंभीर चर्चा चल रही है।

    डिजिटल न्याय प्रणाली पर केंद्रित रहा सेमिनार
    इस सेमिनार का मुख्य उद्देश्य न्यायपालिका में तकनीक के उपयोग को बढ़ाना और सभी न्यायिक प्रक्रियाओं को एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाना रहा। इसमें ई-कोर्ट सिस्टम, डेटा इंटीग्रेशन, केस मैनेजमेंट और यूनिफाइड डिजिटल जस्टिस प्लेटफॉर्म जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की पहल न्याय प्रणाली को तेज, पारदर्शी और अधिक प्रभावी बनाने में मदद करेगी।

    सुरक्षा के कड़े इंतजाम, सीमित काफिला चर्चा में
    कार्यक्रम को देखते हुए जबलपुर में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का काफिला भी सादगीपूर्ण रहा, जिसमें केवल छह वाहन शामिल थे। प्रशासन ने पूरे आयोजन को व्यवस्थित और सुरक्षित तरीके से संपन्न कराने के लिए विशेष तैयारी की थी।

    भविष्य की न्याय व्यवस्था की दिशा तय करने की कोशिश
    यह सेमिनार केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं बल्कि भारत की न्याय प्रणाली के भविष्य को डिजिटल रूप देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, इससे देश में न्यायिक प्रक्रियाओं की गति और पारदर्शिता दोनों में सुधार संभव है।

    जबलपुर का यह आयोजन न्यायपालिका और तकनीक के संगम का प्रतीक बनकर उभरा है। शीर्ष न्यायाधीशों और सरकार की एक साथ मौजूदगी ने यह संकेत दिया है कि आने वाले समय में भारत की न्याय व्यवस्था पूरी तरह डिजिटल रूपांतरण की ओर बढ़ सकती है।

  • श्रद्धा और आस्था के साथ बरेली में मनाया गया वट सावित्री पर्व, सुहागिन महिलाओं ने की पूजा-अर्चना

    श्रद्धा और आस्था के साथ बरेली में मनाया गया वट सावित्री पर्व, सुहागिन महिलाओं ने की पूजा-अर्चना




    बरेली । बरेली में शनिवार को वट सावित्री व्रत पूरे श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया। सुहागिन महिलाओं ने अपने पति की दीर्घायु और सुख-समृद्धि की कामना करते हुए व्रत रखा और पारंपरिक विधि-विधान से वट वृक्ष की पूजा की। सुबह से ही शहर के मंदिरों और बरगद के पेड़ों के पास महिलाओं की भीड़ देखने को मिली।

    शहर के अलखनाथ मंदिर, त्रिवटीनाथ मंदिर, धोपेश्वरनाथ मंदिर और तपेश्वरनाथ मंदिर सहित कई धार्मिक स्थलों पर महिलाओं ने वट वृक्ष की पूजा की। इसके अलावा बन्नूवाल नगर, मॉडल टाउन और अन्य कॉलोनियों में भी सामूहिक रूप से वट सावित्री पूजन किया गया। 16 श्रृंगार में सजी महिलाओं ने वट वृक्ष की परिक्रमा कर परंपराओं का पालन किया और अपने वैवाहिक जीवन की खुशहाली की कामना की।

  • ग्वालियर में जमीन विवाद पर फायरिंग, युवक को गोली मारकर बदमाश फरार

    ग्वालियर में जमीन विवाद पर फायरिंग, युवक को गोली मारकर बदमाश फरार


    ग्वालियर। मध्य प्रदेश के ग्वालियर शहर में शनिवार को उस समय हड़कंप मच गया जब थाटीपुर थाना क्षेत्र के पीएमटी चौराहे पर एक युवक को बदमाशों ने घेरकर बेरहमी से पीट दिया और फिर उस पर गोलियां चला दीं। इस सनसनीखेज वारदात से पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई और लोग दहशत में आ गए। घायल युवक की पहचान रामवीर गुर्जर के रूप में हुई है, जिसे स्थानीय लोगों की मदद से तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उसकी हालत गंभीर बनी हुई है।

    बाइक सवार बदमाशों ने पहले पीटा, फिर की फायरिंग
    प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, रामवीर पीएमटी चौराहे के पास सड़क किनारे खड़ा था, तभी आधा दर्जन से अधिक बाइक सवार बदमाश वहां पहुंचे। उन्होंने पहले उसे घेरकर लाठी-डंडों से बेरहमी से पीटा और फिर अचानक फायरिंग शुरू कर दी। गोलियों के छर्रे लगने से युवक गंभीर रूप से घायल हो गया, जबकि मारपीट में उसके सिर में भी गहरी चोट आई है। घटना के बाद हमलावर मौके से फरार हो गए।

    जमीन विवाद से जुड़ा है मामला, पुरानी रंजिश की आशंका
    प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि यह हमला जमीन विवाद से जुड़ा हो सकता है। बताया जा रहा है कि रामवीर गुर्जर का अपने पड़ोसी पिंटू उर्फ उदय गुर्जर से प्लॉट को लेकर पुराना विवाद चल रहा था। करीब दो सप्ताह पहले भी दोनों पक्षों के बीच कहासुनी और तनाव की स्थिति बनी थी। पुलिस को शक है कि पुरानी रंजिश के चलते इस वारदात को अंजाम दिया गया।

    CCTV फुटेज से खुल सकते हैं राज
    घटना के बाद पुलिस ने मौके पर पहुंचकर जांच शुरू कर दी है। आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है, जिसमें हमले की पूरी घटना कैद हुई है। फुटेज में साफ दिख रहा है कि कुछ लोग दौड़ते हुए आते हैं और सड़क किनारे खड़े युवक पर हमला कर देते हैं। इसके बाद मारपीट और फायरिंग की पुष्टि होती है।

    पुलिस की कार्रवाई, आरोपियों की तलाश तेज
    थाटीपुर थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आरोपियों की पहचान की जा रही है और उन्हें जल्द गिरफ्तार कर लिया जाएगा। घायल युवक का इलाज जारी है और डॉक्टर उसकी स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।

    ग्वालियर में दिनदहाड़े हुई यह वारदात एक बार फिर शहर की कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है। जमीन विवाद ने हिंसक रूप लेकर आम लोगों में दहशत फैला दी है। अब देखना होगा कि पुलिस कितनी जल्दी आरोपियों तक पहुंचती है।

  • वट सावित्री व्रत और अमावस्या का संयोग, ग्वालियर में शनि मंदिरों में विशेष पूजा

    वट सावित्री व्रत और अमावस्या का संयोग, ग्वालियर में शनि मंदिरों में विशेष पूजा


    ग्वालियर। मध्य प्रदेश के ग्वालियर शहर में शनिवार को शनि जयंती के अवसर पर धार्मिक उत्साह चरम पर रहा। न्याय और कर्मफल के देवता भगवान शनिदेव की जयंती इस बार अमावस्या और वट सावित्री व्रत के दुर्लभ संयोग के साथ मनाई जा रही है, जिससे इसका धार्मिक महत्व और अधिक बढ़ गया है। सुबह से ही शहर के सभी प्रमुख शनि मंदिरों में श्रद्धालुओं की लंबी कतारें देखने को मिलीं। भक्तों ने काले तिल, सरसों का तेल और फूल चढ़ाकर शनिदेव से अपने परिवार में सुख-शांति और लंबी आयु की कामना की।

    नवग्रह मंदिर बना आस्था का केंद्र
    ग्वालियर के बहोड़ापुर स्थित प्राचीन नवग्रह मंदिर में विशेष भीड़ देखने को मिली। यह लगभग 150 साल पुराना मंदिर शहर के सबसे प्राचीन धार्मिक स्थलों में से एक माना जाता है। मंदिर परिसर में श्रद्धालु शनि देव सहित सभी नवग्रहों की पूजा कर रहे हैं। मान्यता है कि यहां सच्चे मन से की गई प्रार्थना से शनि दोष, साढ़ेसाती और ढैय्या के प्रभाव में राहत मिलती है। श्रद्धालुओं का कहना है कि हर शनिवार यहां आने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं और जीवन के कष्ट दूर होते हैं।

    तेल,   और दान का विशेष महत्व
    शनि जयंती पर भक्तों ने विशेष रूप से सरसों का तेल और काले तिल अर्पित किए। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार इस दिन दान-पुण्य का विशेष महत्व होता है। कंबल, अन्न, तिल और दक्षिणा का दान करने से जीवन में सकारात्मक परिणाम मिलने की मान्यता है। ज्योतिषाचार्य रोहित उपाध्याय के अनुसार शनिदेव को न्याय का देवता माना जाता है, जो व्यक्ति के कर्मों के अनुसार फल देते हैं। इस दिन पूजा और मंत्रोच्चारण से शनि दोष में राहत मिलती है और जीवन में बाधाएं कम होती हैं।

    वट सावित्री व्रत में महिलाओं की आस्था
    इस अवसर पर महिलाओं ने वट सावित्री व्रत भी रखा, जो पति की लंबी आयु और सुखी दांपत्य जीवन के लिए किया जाता है। महिलाएं वट वृक्ष की पूजा कर देवी सावित्री और यमराज का स्मरण कर निर्जला व्रत रखती हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह व्रत अत्यंत कठिन माना जाता है क्योंकि इसमें पूरे दिन जल और अन्न का त्याग किया जाता है।

     धार्मिक संयोग ने बढ़ाया महत्व
    शनि जयंती, अमावस्या और वट सावित्री व्रत का एक साथ पड़ना इस दिन को अत्यंत विशेष बना रहा है। इस दुर्लभ संयोग को लेकर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखा गया और मंदिरों में सुबह से ही पूजा-अर्चना का दौर जारी रहा।

    ग्वालियर में शनि जयंती का यह अवसर सिर्फ एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि आस्था, परंपरा और विश्वास का संगम बन गया। मंदिरों में उमड़ी भीड़ ने एक बार फिर साबित किया कि शनिदेव के प्रति श्रद्धा लोगों के जीवन में गहराई से जुड़ी हुई है।

  • ओंकारेश्वर श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए ट्रैफिक व्यवस्था में बड़ा बदलाव

    ओंकारेश्वर श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए ट्रैफिक व्यवस्था में बड़ा बदलाव


    इंदौर। मध्य प्रदेश के प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग ओंकारेश्वर में शनिश्चरी अमावस्या और रविवार के अवकाश के चलते भारी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना को देखते हुए जिला प्रशासन ने विशेष ट्रैफिक प्लान लागू कर दिया है। इस दौरान इंदौर-खंडवा मार्ग पर भारी वाहनों की आवाजाही पर अस्थायी प्रतिबंध लगाया गया है। प्रशासन के अनुसार 16 मई को शनिश्चरी अमावस्या और 17 मई को रविवार होने के कारण नर्मदा स्नान और ओंकारेश्वर दर्शन के लिए हजारों श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद है। भीड़ और संभावित जाम की स्थिति से बचने के लिए यह निर्णय लिया गया है।

    भारी वाहनों पर 18 मई सुबह तक रोक
    कलेक्टर शिवम वर्मा द्वारा जारी आदेश के अनुसार तेजाजी नगर चौराहे से खंडवा की ओर जाने वाले और खंडवा से इंदौर आने वाले मार्ग पर भारी मालवाहक वाहनों का प्रवेश पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। यह प्रतिबंध 15 मई रात 12 बजे से लागू हो चुका है और 18 मई 2026 की सुबह 8 बजे तक प्रभावी रहेगा। इस दौरान केवल हल्के और आवश्यक सेवा वाहनों को छूट दी गई है।

    भारी वाहनों के लिए वैकल्पिक मार्ग तय
    प्रशासन ने भारी वाहनों के लिए वैकल्पिक रूट भी निर्धारित किए हैं। अब सभी भारी वाहन तेजाजी नगर चौराहा बायपास से धामनोद होते हुए खंडवा की ओर जा सकेंगे। यह व्यवस्था केवल इंदौर जिले की सीमा के भीतर लागू की गई है। अधिकारियों का कहना है कि इंदौर-खंडवा मार्ग पर चल रहे सड़क निर्माण कार्य और बढ़ती श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए यह कदम जरूरी था, ताकि किसी तरह की अव्यवस्था या जाम की स्थिति न बने।

    किन वाहनों को मिली छूट
    इस ट्रैफिक प्रतिबंध से कुछ आवश्यक सेवाओं को छूट दी गई है
    कार, जीप, दोपहिया वाहन और यात्री बसें सामान्य रूप से चल सकेंगी
    दूध सप्लाई वाहन
    नगर निगम और स्वास्थ्य सेवा वाहन
    पुलिस, फायर ब्रिगेड और पानी के टैंकर
    सेना और बिजली विभाग के वाहन
    कृषि उपज मंडी से जुड़े आवश्यक वाहन

    श्रद्धालुओं की सुविधा प्राथमिकता
    प्रशासन ने साफ किया है कि इस व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुगम आवागमन सुनिश्चित करना है। ओंकारेश्वर में भीड़ के दौरान किसी भी तरह की दुर्घटना या ट्रैफिक जाम से बचने के लिए यह अस्थायी निर्णय लिया गया है। साथ ही आम जनता और वाहन चालकों से अपील की गई है कि वे वैकल्पिक मार्गों का उपयोग करें और यातायात नियमों का पालन करें।

    ओंकारेश्वर में बढ़ती श्रद्धालुओं की भीड़ और सड़क निर्माण कार्य को देखते हुए इंदौर-खंडवा मार्ग पर भारी वाहनों पर अस्थायी रोक एक एहतियाती कदम है। प्रशासन का लक्ष्य है कि श्रद्धालुओं को बिना किसी परेशानी के दर्शन और स्नान की सुविधा मिल सके।