Author: bharati

  • भारतीय पासपोर्ट 10 पायदान ऊपर, पर ईरान और बोलिविया ने बंद कर दी वीजा फ्री एंट्री

    भारतीय पासपोर्ट 10 पायदान ऊपर, पर ईरान और बोलिविया ने बंद कर दी वीजा फ्री एंट्री

    नई दिल्ली । भारतीय पासपोर्ट की वैश्विक रैंकिंग में सुधार हुआ है, लेकिन इसके साथ ही दो देशों ने भारतीयों के लिए वीजा फ्री एंट्री बंद कर दी है। हेनले एंड पार्टनर्स की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, अब भारतीय पासपोर्ट वैश्विक सूची में 75वें स्थान पर पहुंच गया है। 2025 में यह रैंक 85वीं थी, और साल की शुरुआत में 80वीं थी। हालांकि भारत की रैंकिंग में सुधार आया है, लेकिन वीजा फ्री सुविधा वाले देशों की संख्या घटकर 56 रह गई है। 2025 में भारतीय पासपोर्ट धारक 57 देशों में बिना वीजा या वीजा ऑन अराइवल यात्रा कर सकते थे।

    वीजा फ्री सुविधा बंद करने वाले देश
    ईरान ने नवंबर 2025 में भारतीय सामान्य पासपोर्ट धारकों के लिए वीजा फ्री सुविधा निलंबित कर दी। भारतीय विदेश मंत्रालय के मुताबिक, इस कदम के पीछे वहां हुई अपहरण और फिरौती की घटनाएं थीं। इसी तरह, बोलिविया ने भी भारतीयों के लिए वीजा ऑन अराइवल सुविधा बंद कर दी। इसके बजाय इस देश ने ई-वीजा प्रणाली लागू की, जिसके तहत भारतीयों को ऑनलाइन आवेदन करना जरूरी हो गया। फिलहाल, गाम्बिया ने फरवरी 2026 में भारतीयों के लिए वीजा ऑन अराइवल सुविधा शुरू की है, जिससे यह संख्या 56 देशों तक पहुंची।

    रैंकिंग में सुधार का कारण
    हालांकि दो देशों की वीजा सुविधा घटने से भारत की पहुंच घट गई, फिर भी हेनले इंडेक्स के रिलेटिव सिस्टम के कारण रैंकिंग में सुधार देखा गया। हेनले इंडेक्स में देशों की रैंकिंग अन्य देशों के मुकाबले निर्धारित होती है। अगर अन्य देशों ने अपनी पहुंच खोई है, तो भारत की रैंकिंग में सुधार दिखाई देता है। इस बार भारत 75वीं रैंक पर है, जो अल्जीरिया और नाइजर के साथ साझा की जा रही है।

    पासपोर्ट रैंकिंग कैसे तय होती है
    हेनले इंडेक्स 199 देशों के पासपोर्ट को विभिन्न आधारों पर रैंक करता है। इसमें देखा जाता है कि किसी देश के पासपोर्ट धारक कितने देशों में वीजा फ्री एंट्री या वीजा ऑन अराइवल का लाभ ले सकते हैं। इसके अलावा बॉर्डर पर जारी विजिटर परमिट और बेसिक इलेक्ट्रॉनिक ट्रेवल ऑथराइजेशन (ETA) के अंक भी जोड़े जाते हैं। अगर किसी देश में प्रवेश के लिए पहले से वीजा या ई-वीजा जरूरी हो, तो उस पर अंक नहीं मिलते।

  • CBSE का बड़ा निर्णय… 12वीं के रिजल्ट के बाद नहीं होगा Mark Verification… अब पूरी तरह डिजिटल जांची जाएंगी कॉपियां

    CBSE का बड़ा निर्णय… 12वीं के रिजल्ट के बाद नहीं होगा Mark Verification… अब पूरी तरह डिजिटल जांची जाएंगी कॉपियां


    नई दिल्ली।
    केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा परिषद (सीबीएसई) (Central Board of Secondary Education (CBSE) ने 12वीं बोर्ड परीक्षा 2026 (12th Board Exam 2026) को लेकर अहम निर्णय लिया है। इस बार 12वीं के परीक्षा परिणाम जारी होने के बाद छात्रों को अंक सत्यापन (मार्क वेरिफिकेशन) (Mark Verification) की सुविधा उपलब्ध नहीं होगी। बोर्ड ने तय किया है कि 2026 से 12वीं की उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन पूरी तरह डिजिटल प्रणाली ‘ऑन स्क्रीन मार्किंग’ के जरिए किया जाएगा।

    दरअसल, केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा परिषद (सीबीएसई) इस बार 12वीं के छात्रों की उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन ‘ऑन स्क्रीन मार्किंग’ के साथ पूरी तरह डिजिटल तरीके से कराने जा रहा है। अधिकारियों का मानना है कि इसके बाद अंकों के सत्यापन की जरूरत नहीं रहेगी। शुक्रवार को सीबीएसई अधिकारियों ने संबद्ध स्कूलों के शिक्षकों और प्रधानाचार्यों के लिए आयोजित एक कार्यशाला में यह जानकारी दी। परीक्षा नियंत्रक संयम भारद्वाज ने बताया कि 2026 में 12वीं की परीक्षा में उत्तर पुस्तिकाओं की जांच में ऑन स्क्रीन मार्किंग की जाएगी। डिजिटल मूल्यांकन की इस प्रक्रिया के बाद अंकों की गिनती में किसी तरह की गड़बड़ी की गुंजाइश नहीं रह जाएगी। ऐसे में छात्रों के लिए परिणाम घोषित होने के बाद अंकों के सत्यापन की जरूरत नहीं रह जाएगी।


    10वीं का मूल्यांकन मैनुअल ही होगा

    परीक्षा नियंत्रक भारद्वाज ने बताया कि बोर्ड इस बार सिर्फ 12वीं की परीक्षा के लिए यह सुविधा लागू कर रहा है। इस बार होने वाली दसवीं कक्षा की बोर्ड परीक्षा में कॉपियों का मूल्यांकन ‘मैनुअल’ यानी शिक्षकों के द्वारा ही किया जाएगा।


    इसलिए कराया जाता था अंक सत्यापन

    पुरानी व्यवस्था में कई बार मानवीय भूलों के चलते अंक जुड़ने से रह जाते थे। परिणाम के बाद छात्र अंक सत्यापन को आवेदन करते थे, जिसके बाद कॉपियों का पुनर्मूल्यांकन होता था।


    क्या होती है ऑन स्क्रीन मार्किंग

    ऑन स्क्रीन मार्किंग डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली है। इसमें उत्तर पुस्तिका को हाथों से चेक नहीं किया जाता। शिक्षक स्कैन की गई उत्तर पुस्तिका को कंप्यूटर पर चेक करेंगे। छात्रों की उत्तर पुस्तिकाएं पहले स्कैन की जाती हैं। इसके बाद ये कॉपियां सुरक्षित ऑनलाइन सिस्टम पर अपलोड होती हैं और शिक्षक कंप्यूटर पर उन्हें देखकर अंक देते हैं। इस सिस्टम में सॉफ्टवेयर खुद ही कुल अंक जोड़ देता है, जिससे टोटलिंग की गलती की संभावना खत्म हो जाती है। अभी तक कई बार हाथ से जोड़ने में गलती हो जाती थी, जिससे छात्रों को बाद में वेरिफिकेशन के लिए आवेदन करना पड़ता था।


    शिक्षक अब अपने स्कूल से ही जांच सकेंगे कॉपियां

    इस नए सिस्टम की एक खास बात यह है कि शिक्षकों को अब कॉपी जांचने के लिए किसी मूल्यांकन केंद्र पर जाने की जरूरत नहीं होगी। वे अपने ही स्कूल में बैठकर, नियमित काम करते हुए कॉपियों का मूल्यांकन कर सकेंगे। इससे समय और यात्रा खर्च दोनों की बचत होगी और ज्यादा शिक्षक इस प्रक्रिया में शामिल हो सकेंगे।


    17 फरवरी से शुरू हो रही है परीक्षा

    सीबीएसई की 12वीं और दसवीं की बोर्ड परीक्षाएं 17 फरवरी से शुरू हो रही हैं। बोर्ड से भारत और दुनिया के 26 देशों में 31,000 से अधिक स्कूल संबद्ध हैं।

  • Ind vs Pak से महामुकाबले से पहले आज कोलंबो में आज रात होगी अभिषेक शर्मा की ‘फिटनेस की अग्निपरीक्षा

    Ind vs Pak से महामुकाबले से पहले आज कोलंबो में आज रात होगी अभिषेक शर्मा की ‘फिटनेस की अग्निपरीक्षा


    नई दिल्ली।
    भारतीय सलामी बल्लेबाज अभिषेक शर्मा (Indian Opener Abhishek Sharma) शुक्रवार की रात को कोलंबो पहुंच गए, जहां 15 फरवरी की शाम को टीम इंडिया (Team India) और पाकिस्तान क्रिकेट टीम (Pakistan Cricket team) के बीच बड़ा मुकाबला खेला जाना है। हालांकि इस हाई-वोल्टेज मैच में उनकी उपलब्धता पेट के संक्रमण से पूरी तरह उबरने पर निर्भर करेगी।


    पाकिस्तान के खिलाफ

    सकारात्मक संकेत यह है कि विस्फोटक ओपनर टीम के साथ कोलंबो पहुंच चुके हैं, जिससे उनकी फिटनेस को लेकर उम्मीदें बढ़ी हैं। रविवार को कोलंबो के आर प्रेमदासा स्टेडियम में होने वाले मैच से पहले उनकी अंतिम फिटनेस जांच आज यानी शनिवार को की जाएगी।


    ट्रेनिंग से तय होगी तस्वीर

    नई दिल्ली के एक निजी अस्पताल से छुट्टी मिलने के बावजूद अभिषेक गुरुवार को नामीबिया के खिलाफ मैच में नहीं खेल सके थे। वे ड्रेसिंग रूम में मौजूद थे, लेकिन उनकी जगह संजू सैमसन ने पारी की शुरुआत की थी।

    भारत बनाम पाकिस्तान मुकाबले से पहले भारतीय टीम शनिवार शाम 6 बजे से कोलंबो में अभ्यास सत्र करेगी। इसी ट्रेनिंग के दौरान साफ होगा कि अभिषेक पूरी तरह फिट हैं या नहीं। अंतिम फैसला लेने से पहले टीम मैनेजमेंट उनकी स्थिति पर बारीकी से नजर रखेगा। ट्रेनिंग से पहले प्रेस कॉन्फ्रेंस भी होगी, जहां इस मुद्दे पर सवाल उठना तय है। अगर वहां तस्वीर स्पष्ट नहीं होती, तो सबकी निगाहें नेट्स पर होंगी—क्या अभिषेक बल्लेबाजी के लिए उतरते हैं और कितनी देर तक अभ्यास करते हैं।

    इस बीच उनके माता-पिता भी पाकिस्तान के खिलाफ मैच से पहले कोलंबो पहुंच चुके हैं। वे एशिया कप के दौरान दुबई में भी टीम का समर्थन करते नजर आए थे।


    विकल्पों पर भी मंथन

    यदि अभिषेक अंतिम समय तक उपलब्ध नहीं होते हैं, तो टीम प्रबंधन संजू सैमसन के साथ जाने पर विचार कर सकता है। एक अन्य विकल्प यह है कि फिट हो चुके वॉशिंगटन सुंदर को ईशान किशन के साथ शीर्ष क्रम में उतारा जाए। हालांकि बड़े मुकाबले में टीम एक विशेषज्ञ सलामी बल्लेबाज को प्राथमिकता देना चाहेगी। वॉशिंगटन को उतारने से ऑफ स्पिन का अतिरिक्त विकल्प जरूर मिलेगा, लेकिन यह प्रयोग जोखिम भरा हो सकता है।

    दिल्ली में अभिषेक की गैरमौजूदगी में संजू सैमसन ने ओपनिंग करते हुए 8 गेंदों में 22 रन बनाए थे, जिसमें 3 छक्के और एक चौका शामिल था। पाकिस्तान के खिलाफ भी तेज शुरुआत के लिए सैमसन एक मजबूत दावेदार माने जा रहे हैं। वहीं, ईशान किशन शानदार फॉर्म में हैं। जरूरत पड़ने पर वॉशिंगटन सुंदर को रिंकू सिंह की जगह भी मौका दिया जा सकता है, जो फिलहाल लय में नजर नहीं आ रहे।

  • बांग्लादेश में BNP की ऐतिहासिक विजय…. जमात-ए-इस्लामी की जीत से बढ़ी भारत की चिंता, सीमावर्ती राज्यों में अलर्ट

    बांग्लादेश में BNP की ऐतिहासिक विजय…. जमात-ए-इस्लामी की जीत से बढ़ी भारत की चिंता, सीमावर्ती राज्यों में अलर्ट


    ढाका।
    बांग्लादेश (Bangladesh) में पिछले दो दशकों के राजनीतिक गतिरोध (Political Deadlock) को तोड़ते हुए, तारिक रहमान (Tariq Rahman.) के नेतृत्व वाली बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) (Bangladesh Nationalist Party – BNP) ने अपने सहयोगियों के साथ मिलकर आम चुनावों में ऐतिहासिक जीत दर्ज की है। 297 घोषित सीटों में से 212 पर कब्जा कर BNP ने दो-तिहाई बहुमत हासिल किया है। इस जीत के साथ ही 20 साल बाद देश में BNP की वापसी हुई है। हालांकि, इस चुनावी परिणाम ने भारत की सुरक्षा एजेंसियों और सरकारों की चिंता बढ़ा दी है। इसका मुख्य कारण जमात-ए-इस्लामी और उसके 11 सहयोगियों द्वारा 77 सीटों पर दर्ज की गई शानदार जीत है।

    भारत के लिए सबसे बड़ी चिंता यह है कि जमात-ए-इस्लामी ने जिन सीटों पर जीत हासिल की है, उनमें से एक बड़ा हिस्सा पश्चिम बंगाल और असम की सीमा से लगे बांग्लादेशी जिलों में स्थित है। सेंटर फॉर स्टडीज इन सोशल साइंसेज के प्रोफेसर मैदुल इस्लाम ने इस स्थिति का विश्लेषण करते हुए बताया कि शेख हसीना की अवामी लीग के चुनाव से बाहर होने के बाद मुकाबला मूल रूप से जमात और BNP के बीच था।

    प्रोफेसर इस्लाम ने कहा, “BNP की जीत यह संकेत देती है कि बांग्लादेश में स्वतंत्र पहचान और राष्ट्रवाद का मुद्दा अभी भी जनता के लिए महत्वपूर्ण है। जमात ने 1971 के मुक्ति संग्राम के इतिहास को चुनौती देने की कोशिश की, जो व्यर्थ साबित हुई। हालांकि, जनमत संग्रह यह भी संकेत देता है कि अब 1972 के संविधान में संशोधन के प्रयास किए जाएंगे।”


    भारत के सीमावर्ती राज्य हाई अलर्ट पर

    जमात की चुनावी ताकत का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि उसने पश्चिम बंगाल के छह जिलों जलपाईगुड़ी, मालदा, मुर्शिदाबाद, नदिया, उत्तर 24 परगना और दक्षिण 24 परगना से लगी सीमा के साथ-साथ असम के सिलचर से लगे क्षेत्रों में अपना प्रभुत्व फिर से स्थापित कर लिया है। सुरक्षा जानकारों का मानना है कि यह स्थिति भारत के सीमा सुरक्षा बल (BSF) और खुफिया एजेंसियों के लिए चुनौती बन सकती है। सीमा के वे हिस्से जहां कंटीली तारें नहीं लगी हैं, वे लंबे समय से मानव तस्करी और तस्करी के लिए उपयोग किए जाते रहे हैं। इस फैसले के बाद भारत को हाई अलर्ट पर रखा गया है।


    अल्पसंख्यकों की चिंता

    राजनीतिक विज्ञान की प्रोफेसर पांचाली सेन ने कहा कि जमात-ए-इस्लामी ने भारत के प्रति अपनी सार्वजनिक मुद्रा को नरम किया है और पड़ोसी देशों के साथ द्विपक्षीय संबंधों के लिए खुलापन दिखाया है, लेकिन भारत के लिए सुरक्षा और आतंकवाद एक प्रमुख चिंता बनी रहनी चाहिए। प्रोफेसर सेन ने जोर देकर कहा, “बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदुओं की सुरक्षा, जिन पर पहले ही हमले हो चुके हैं, भारतीय सरकार की प्राथमिकता सूची में होनी चाहिए। चूंकि भारत ने इस फैसले का स्वागत किया है, दिल्ली ढाका के साथ राजनयिक संबंध बनाए रखने और क्षेत्र में शक्ति संतुलन सुनिश्चित करने के लिए एक सतर्क नीति अपना सकती है।”


    आतंकवाद का खतरा

    खुफिया विभाग के एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि जमात-उल-मुजाहिदीन बांग्लादेश (JMB) जैसे आतंकवादी संगठनों की गतिविधियों पर अभी कोई भी भविष्यवाणी करना जल्दबाजी होगी। JMB ने भारत में भी अपना नेटवर्क स्थापित किया है। अधिकारी ने कहा, “भारत में आतंकवादी समूहों के रूप में सूचीबद्ध छह बांग्लादेशी संगठनों में से JMB ने हाल के वर्षों में सबसे अधिक वृद्धि दिखाई है। 2020 और 2025 के बीच पश्चिम बंगाल और कोलकाता में एक दर्जन से अधिक JMB ऑपरेटरों को गिरफ्तार किया गया है। ये तत्व उन संगठनों की ओर देखते हैं जो जमात का समर्थन करते हैं।”

    दिसंबर 2025 में पश्चिम बंगाल और असम के विभिन्न हिस्सों से 2016 में गिरफ्तार किए गए JMB के पांच सदस्यों को कोलकाता की एक अदालत ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। उनके पास से भारी मात्रा में विस्फोटक और इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइसेज (IED) के घटक जब्त किए गए थे।

  • लिव-इन रिश्ते में दहेज उत्पीड़न का दावा…SC ने सरकार से मांगी कानूनी स्पष्टता

    लिव-इन रिश्ते में दहेज उत्पीड़न का दावा…SC ने सरकार से मांगी कानूनी स्पष्टता


    नई दिल्ली।
    क्या एक विवाहित व्यक्ति जो अपनी पत्नी के जीवित रहते हुए किसी अन्य महिला के साथ लिव-इन रिलेशनशिप (Live-in Relationship) में है, उस महिला द्वारा दहेज प्रताड़ना (IPC की धारा 498A) का मामला दर्ज कराया जा सकता है? यह एक ऐसा सवाल है जिस पर भारत के सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court.) ने अब गंभीर कानूनी विचार करने का निर्णय लिया है। भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 498A (अब भारतीय न्याय संहिता) स्पष्ट रूप से यह प्रावधान करती है कि केवल एक पत्नी ही अपने पति या उसके रिश्तेदारों के खिलाफ दहेज या क्रूरता की शिकायत दर्ज करा सकती है।

    चूंकि हिंदू विवाह अधिनियम के अंतर्गत कानूनी रूप से एक व्यक्ति एक ही समय में दो महिलाओं का पति नहीं हो सकता है। ऐसे में प्रश्न यह उठता है कि क्या लिव-इन पार्टनर को कानूनन पत्नी का दर्जा दिया जा सकता है?

    सर्वोच्च न्यायालय की न्यायमूर्ति संजय करोल और न्यायमूर्ति एन के सिंह की पीठ ने एक डॉक्टर लोकेश बी.एच. द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई की। लोकेश ने फरवरी 2000 में नवीना से शादी की थी। आरोप है कि उन्होंने 2010 में तीर्थ नामक महिला से भी शादी की, जो कानूनी रूप से अवैध है। तीर्थ ने 2016 में लोकेश पर दहेज की मांग को लेकर उसे जलाने का प्रयास करने का आरोप लगाया। बाद में उसने घरेलू हिंसा का मामला भी दर्ज कराया।

    लोकेश ने तर्क दिया कि तीर्थ के साथ उनका कोई कानूनी वैवाहिक संबंध नहीं है। उन्होंने इस आशय की घोषणा के लिए बेंगलुरु की एक पारिवारिक अदालत में मुकदमा भी दायर किया है, जो लंबित है। इसके अलावा लोकेश के नियोक्ता ने प्रमाणित किया है कि कथित घटना के दिन लोकेश अस्पताल में ड्यूटी पर थे।

    कर्नाटक उच्च न्यायालय ने लोकेश की याचिका खारिज कर दी थी, जिसमें उन्होंने अपने खिलाफ चल रही कार्यवाही को रद्द करने की मांग की थी।

    सर्वोच्च न्यायालय ने इस मुद्दे पर केंद्र सरकार से जवाब मांगा है। अदालत ने अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी को इस मामले में सहयोग करने के लिए कहा है। इसके अलावा, अदालत ने मामले की जटिलता को देखते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता नीना नरिमन को ‘एमिकस क्यूरी’ (अदालत का मित्र) नियुक्त किया है, जो इस कानूनी मुद्दे पर निष्पक्ष राय प्रदान करेंगी।

    याचिकाकर्ता के वरिष्ठ वकील संजय नुली ने तर्क दिया कि उच्च न्यायालय ने धारा 498A की व्याख्या करने में गलती की है। उनका तर्क है कि कानून की शब्दावली स्पष्ट रूप से पति और पत्नी का उल्लेख करती है। इसे एक लिव-इन रिलेशनशिप पर लागू नहीं किया जा सकता है। विशेषकर तब जब पुरुष पहले से ही विवाहित हो।

    यदि सुप्रीम कोर्ट लिव-इन पार्टनर को इस धारा के तहत पत्नी मानता है, तो यह वैवाहिक कानूनों की पारंपरिक व्याख्या में एक बड़ा बदलाव होगा।

  • प्रसिद्ध फिल्म निर्देशक रामानंद सागर के बेटे आनंद चोपड़ा का 84 वर्ष की उम्र में निधन

    प्रसिद्ध फिल्म निर्देशक रामानंद सागर के बेटे आनंद चोपड़ा का 84 वर्ष की उम्र में निधन


    मुम्बई।
    मशहूर फिल्ममेकर रामानंद सागर (Filmmaker Ramanand Sagar) के बेटे सागर चोपड़ा (Sagar Chopra) का 13 फरवरी को 84 वर्ष की उम्र में निधन हो गया है। शुक्रवार को ही उनका मुंबई के हिंदू श्मशान भूमि, पवन हंस में अंतिम संस्कार किया गया। सागर परिवार के वरिष्ठ सदस्य आनंद रामानंद सागर चोपड़ा पिछले 10-12 वर्षों से पार्किंसंस बीमारी से जूझ रहे थे। उनके निधन से फिल्म और टेलीविजन जगत में शोक की लहर है।

    परिवार ने इंस्टाग्राम और सोशल मीडिया के जरिए इस दुखद जानकारी को सबके साथ शेयर किया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा, ‘बहुत ही दुख के साथ कहा जा रहा है कि हमारे पिता श्री आनंद रामानंद सागर चोपड़ा का निधन हो गया है।’


    पिता के साथ किया काम

    आनंद के बारे में बता दें कि वह लीजेंड सागर परिवार से थे जिन्होंने साल 2008 में शो रोमायण में अपना कॉन्ट्रीब्यूशन दिया है अपने पिता रामानंद सागर के साथ। यह शो सुपरहिट थी यह तो सब जानते ही हैं। इसके अलावा उन्होंने कई फिल्मों को भी प्रोड्यूस किया है जिसमें आंखें, अरमान और अलिफ लैला शामिल है।


    रामानंद सागर का परिवार

    रामानंद सागर की बात करें तो उन्होंने लीलावती सागर से शादी की थी और दोनों के 5 बच्चे थे, 4 बेटे सुभाश, सागर, मोती सागर, प्रेम सागर, आनंद सागर और एक बेटी सरिता सागर।


    रामानंद का करियर

    रामानंद ने फिल्मों में बतौर राइटर काम की शुरुआत की साल 1940 में और हरसात फिल्म में काम किया। इसके बाद उन्हें चरस, प्रेम बंधन फिल्मों से सक्सेस मिली। 1980 में फिर उन्होंने टीवी में काम करना शुरू किया और माइथोलॉजिकल शोज जैसे लव कुश, श्री कृष्णा, विक्रम और बेताल बनाए। रामानंद को साल 2000 में पद्म श्री अवॉर्ड से सम्मानित भी किया गया था।

  • Bangladesh में हिंदुओं की आबादी 8% … मगर चुनाव में 300 सीटों में से मात्र 3 हिंदू चुने गए सांसद

    Bangladesh में हिंदुओं की आबादी 8% … मगर चुनाव में 300 सीटों में से मात्र 3 हिंदू चुने गए सांसद


    ढाका।
    बांग्लादेश चुनाव (Bangladesh Election) पूरा हो गया है. बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (Bangladesh Nationalist Party) को 209 सीटों पर जीत हासिल हुई है. तारिक रहमान (Tariq Rahman) पीएम बन सकते हैं. जमात-ए-इस्लामी (Jamaat-e-Islami) को 68 और छात्रों वाली पार्टी NCP को सिर्फ 6 सीटों पर वोट मिला. चुनाव के बाद अब जो आंकड़े आए हैं, वह हैरान करने वाले हैं. खासकर हिंदुओं की जीत को लेकर. दरअसल बांग्लादेश की कुल आबादी करीब 16.5 करोड़ है. 2022 की जनगणना के मुताबिक इनमें 1 करोड़ 31 लाख से ज्यादा हिंदू हैं. यानी देश की करीब 8 प्रतिशत आबादी हिंदू समुदाय से आती है. यह कोई छोटी संख्या नहीं है. लेकिन 2026 के ताजा संसदीय चुनाव में हिंदू समुदाय का प्रतिनिधित्व बेहद कम रह गया है. 300 सीटों वाली संसद में इस बार सिर्फ 3 हिंदू सांसद चुने गए हैं. यह आंकड़ा तब आया है जब हाल के दिनों में हिंदुओं के खिलाफ हिंसा देखी गई है।


    बांग्लादेश चुनाव में कितने हिंदू जीते?

    पहले हिंदुओं की बड़ी संख्या अवामी लीग (AL) से होती थी. AL क्योंकि बैन है, इसलिए तीनों हिंदू उम्मीदवार बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) से जीते हैं.
    गायेश्वर चंद्र रॉय- ढाका-3 सीट से
    निताई रॉय चौधरी – मगरी-2 सीट से
    एडवोकेट दिपेन देवान – रंगामाटी सीट से
    इसके अलावा साचिंग प्रू नाम के एक और अल्पसंख्यक उम्मीदवार ने बंदरबन से जीत दर्ज की, लेकिन कुल संख्या फिर भी बहुत कम है.


    जमात का हिंदू कैंडिडेट हारा

    ध्यान देने वाली बात यह है कि जमात-ए-इस्लामी ने इस बार एक हिंदू उम्मीदवार कृष्णा नंदी को खुलना-1 सीट से मैदान में उतारा था. लेकिन वे चुनाव हार गए. इसका मतलब यह हुआ कि जमात के टिकट पर कोई भी अल्पसंख्यक उम्मीदवार जीत नहीं पाया.


    पहले क्या स्थिति थी?

    रिपोर्ट्स के मुताबिक शेख हसीना के लंबे कार्यकाल के दौरान संसद में हिंदू सांसदों की संख्या इससे कहीं ज्यादा रही थी.
    2009-2014 की संसद में 16 हिंदू सांसद थे
    2014-2019 में यह संख्या बढ़कर 17 (और आरक्षित सीटों के साथ 20 तक) पहुंची
    2019-2024 में करीब 14 अल्पसंख्यक सांसद थे
    यानी पहले जहां 14 से 20 के बीच हिंदू सांसद होते थे, अब संख्या घटकर सिर्फ 3 रह गई है. 2006-09 तक बांग्लादेश में केयरटेकर सरकार रही. ऐसे में हम कह सकते हैं कि यह 20 साल में सबसे कम संख्या है. यह गिरावट काफी बड़ी मानी जा रही है।


    कितने हिंदू उम्मीदवार मैदान में थे?

    इस चुनाव में कुल 79 अल्पसंख्यक उम्मीदवार मैदान में थे. इनमें 10 महिलाएं भी शामिल थीं. 60 में से 22 राजनीतिक दलों ने अल्पसंख्यक उम्मीदवार उतारे थे. BNP ने 6 अल्पसंख्यक उम्मीदवार उतारे, जिनमें से 4 जीत पाए. लेकिन कुल संख्या फिर भी बहुत कम रही.


    सवाल क्यों उठ रहे हैं?

    देश की लगभग 8 प्रतिशत आबादी होने के बावजूद संसद में 1 प्रतिशत से भी कम प्रतिनिधित्व होना चिंता का विषय माना जा रहा है. राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि अल्पसंख्यक समुदाय कई इलाकों में निर्णायक भूमिका निभाता है, लेकिन टिकट वितरण और चुनावी गणित में उनकी हिस्सेदारी सीमित रह जाती है. इसके अलावा चुनाव के दौरान सांप्रदायिक तनाव और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा का मुद्दा भी चर्चा में रहा।

    बांग्लादेश चुनाव में कितनी महिलाएं जीतीं?
    इस बार चुनाव में महिला उम्मीदवारों की संख्या भी बहुत कम रही. हालांकि 7 महिलाओं ने जीत दर्ज की, जिनमें ज्यादातर बीएनपी से थीं. जमात-ए-इस्लामी के कुछ बयानों ने महिलाओं की भागीदारी पर भी विवाद खड़ा किया था।

  • निवेशकों को बड़ा तोहफा देने की तैयारी में सरकार … पेंशन के साथ हेल्थ इंश्योरेंस भी…डबल बेनेफिट

    निवेशकों को बड़ा तोहफा देने की तैयारी में सरकार … पेंशन के साथ हेल्थ इंश्योरेंस भी…डबल बेनेफिट


    नई दिल्ली।
    केंद्र सरकार (Central Government) अब निवेशकों (Investors) को पेंशन के साथ-साथ हेल्थ इंश्योरेंस (Health Insurance) कवर भी देने की तैयारी में है। पेंशन फंड रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी (PFRDA) के चेयरमैन एस. रमन ने शुक्रवार को इस बात की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि तीन प्रमुख पेंशन फंड इस समय हेल्थ इंश्योरेंस कवर देने वाली पेंशन योजनाओं पर काम कर रहे हैं।

    यह नई पेंशन योजना या तो हेल्थ इंश्योरेंस कंपनियों के साथ साझेदारी में, या फिर सीधे हेल्थ सर्विस प्रोवाइडर्स के सहयोग से पेश की जा सकती है। रमन ने कहा कि इस पहल का उद्देश्य ‘स्वास्थ्य पेंशन योजना’ के तहत लोगों को चिकित्सा खर्चों के लिए अलग से बचत करने के लिए प्रेरित करना है, जिससे वे भविष्य में किसी भी आकस्मिक स्वास्थ्य स्थिति का सामना बेहतर तरीके से कर सकें।

    यह पहल निवेशकों के लिए एक बड़ा तोहफा साबित हो सकती है, जो अब अपनी पेंशन के साथ-साथ अपनी स्वास्थ्य सुरक्षा को भी सुनिश्चित कर सकेंगे।

    पीएफआरडीए के चेयरमैन ने कहा- हम चाहते हैं कि लोग खुद को सुरक्षित रखने की अहमियत को समझें। हम चाहते हैं कि लोग मेडिकल पेंशन योजना में पैसा बचत करें। यह राशि केवल चिकित्सा उद्देश्यों के भुगतान के लिए समर्पित होगी। बता दें कि PFRDA ने इस साल जनवरी में ‘स्वास्थ्य’ प्लेटफॉर्म की शुरुआत की थी। इस योजना के तहत निवेशक की पेंशन राशि का अधिकतम 30 प्रतिशत हिस्सा चिकित्सा खर्चों के लिए अलग रखा जा सकता है।


    स्वास्थ्य बीमा कंपनियों से सस्ते टॉप-अप कवर

    पेंशन कोष नियामक एवं विकास प्राधिकरण (PFRDA) के प्रमुख ने कहा कि राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (एनपीएस) के तहत बड़ी संख्या में निवेशकों का एकसाथ आना पेंशन फंड को बेहतर सौदे तय करने में मदद करता है। इससे हेल्थ इंश्योरेंस कंपनियों से सस्ते टॉप-अप कवर और अस्पतालों से उपचार पर रियायतें मिल सकती हैं। उन्होंने कहा कि इस योजना में अस्पतालों को मरीज के इलाज के तुरंत बाद ही भुगतान मिल सकेगा जबकि केंद्र सरकार की स्वास्थ्य योजना के तहत भुगतान में कई महीने लग जाते हैं। रमन ने बताया कि आईसीआईसीआई, एक्सिस और टाटा की तरफ से प्रायोजित पेंशन फंड इस तरह की हेल्थ कवरेज योजनाएं पेश करने को लेकर प्रयोग कर रहे हैं और आईसीआईसीआई जल्द ही अपना उत्पाद पेश कर देगा।

    सोना-चांदी ईटीएफ में निवेश की योजना
    उन्होंने कहा कि रिटर्न को लंबे समय तक दहाई अंकों में बनाए रखने के उपायों का अध्ययन किया जा रहा है। इसके लिए परियोजना वित्त, रियल एस्टेट, वैकल्पिक निवेश फंड (एआईएफ) के साथ सोना और चांदी ईटीएफ में सीमित निवेश की भी योजना है। उन्होंने एनपीएस के कम कवरेज (करीब एक करोड़ रुपये) को स्वीकार करते हुए कहा कि निवेशक आधार बढ़ाने के लिए भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (एनपीसीआई) से बातचीत जारी है ताकि डिजिटल माध्यम से लोगों को जोड़ने में तेजी लाई जा सके। इसके साथ ही रमन ने कहा कि कम-से-कम चार बैंकों या बैंकों के समूह ने पेंशन कोष कारोबार में उतरने की इच्छा जताई है। इनमें एक्सिस बैंक और यूनियन बैंक ऑफ इंडिया, इंडियन बैंक एवं स्टार डायची का समूह शामिल हैं।

  • PM मोदी ने बताया – प्रधानमंत्री कार्यालय का नाम 'सेवा तीर्थ क्यों रखा…. क्या है इसके पीछे का गहरा संदेश?

    PM मोदी ने बताया – प्रधानमंत्री कार्यालय का नाम 'सेवा तीर्थ क्यों रखा…. क्या है इसके पीछे का गहरा संदेश?


    नई दिल्ली।
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) ने शुक्रवार को नए ऑफिस का उद्धाटन किया। इसके बाद उन्होंने संबोधन भी दिया। इस दौरान पीएम मोदी ने बताया कि प्रधानमंत्री कार्यालय (Prime Minister Office) का नाम सेवा तीर्थ (Seva Teerth) क्यों रखा गया। इसके साथ ही उन्होंने इसके पीछे के दर्शन और संकल्प के बारे में भी बताया। पीएम मोदी ने कहाकि सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है। सेवा की भावना ही भारत की आत्मा है। नाम बदलने के पीछे स्वतंत्र भारत की पहचान है। उन्होंने आगे कहाकि सेवा की भावना ही भारत की पहचान है। पीएम मोदी ने कहा कि आजादी के बाद साउथ ब्लॉक, नॉर्थ ब्लॉक जैसी इमारतों से देश के लिए अनेक निर्णय, नीतियां बनी लेकिन यह भी सच है कि ये इमारतें ब्रिटिश साम्राज्य के प्रतीक के तौर पर बनाई गई थी। इन इमारतों को बनाने का मकसद भारत को गुलामी की जंजीरों में जकड़े रखना था।


    मिलेगा नया आत्मविश्वास

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहाकि आज जब भारत रिफॉर्म एक्सप्रेस पर सवार है, आज जब भारत अंतर्राष्ट्रीय संबंधों की नई गाथा लिख रहा है, आज जब भारत नए-नए ट्रेड समझौते कर संभावनाओं के नए दरवाजे खुल रहे हैं। जब देश संतृप्ति के लक्ष्य की ओर तेजी से बढ़ रहा है तो सेवा तीर्थ और कर्तव्य भवनों में आप सबके काम की नई गति और आपका नया आत्मविश्वास देश के लक्ष्यों को प्राप्त करने में बहुत बड़ी भूमिका निभाएगा।


    पुरानी इमारतों पर क्या बोले

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहाकि साउथ ब्लॉक और नॉर्थ ब्लॉक जैसी इमारतें जहां ब्रिटिश हुकूमत की सोच को लागू करने के लिए बनी थीं। वहीं, आज मैं गर्व के साथ कह सकता हूं कि सेवा तीर्थ और कर्तव्य भवन जैसे नए परिसर भारत की जनता की आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए बने हैं। यहां से जो फैसले होंगे वह किसी महाराजा की सोच को नहीं 140 करोड़ देशवासियों की सोच को आगे बढ़ाने का आधार बनेंगे। प्रधानमंत्री ने आगे कहाकि इस बदलाव के बीच निश्चित तौर पर पुराने भवन में बिताए गए वर्षों की स्मृतियां हमारे साथ रहेंगी। अलग-अलग समय पर वहां से कई महत्वपूर्ण फैसले किए गए, वहां से देश को नई दिशा मिली है। वह परिसर, वह इमारत भारत के इतिहास का अमर हिस्सा है इसलिए हमने उस भवन को देश के लिए समर्पित म्यूजियम बनाने का फैसला किया है।


    हमने तय किया कि…

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहाकि 2014 में देश ने तय किया कि गुलामी की मानसिकता अब और नहीं चलेगी। हमने गुलामी की इस मानसिकता को बदलने का अभियान शुरू किया, हमने वीरों के नाम नेशनल वॉर मेमोरियल बनाया। हमने पुलिस की वीरता को सम्मान देने के लिए पुलिस स्मारक बनाया। रेस कोर्स रोड का नाम बदलकर लोक कल्याण मार्ग रखा गया। यह सिर्फ नाम बदलना नहीं था, यह सत्ता के मिजाज़ को सेवा की भावना में बदलने का पवित्र प्रयास था।

  • एयर इंडिया की एयरबस ने बिना अनुमति भरी उड़ान, DGCA ने ठोका एक करोड़ का जुर्माना

    एयर इंडिया की एयरबस ने बिना अनुमति भरी उड़ान, DGCA ने ठोका एक करोड़ का जुर्माना


    नई दिल्ली।
    एयर इंडिया (Air India) पर डीजीसीए (DGCA) ने एक करोड़ रुपए का जुर्माना लगाया है। जानकारी के मुताबिक एयर इंडिया (Air India) की एयरबस (Airbus) ने बिना जरूरी परमिशन के उड़ान भरी। ऐसा एक या दो नहीं, बल्कि आठ बार हुआ। डीजीसीए ने इसको बहुत गंभीर किस्म का उल्लंघन माना है। साथ ही लापरवाही के लिए टॉप लेवल मैनेजमेंट को जिम्मेदार ठहराया है। डीजीसीए ने जुर्माना लगाते हुए अपने आदेश में लिखा है कि एयरबस ए320 विमान ने कई सेक्टर्स में उड़ान भरी। इसमें नई दिल्ली, बेंगलुरु, मुंबई और हैदराबाद की कनेक्टिंग फ्लाइट्स भी शामिल हैं।

    ऐसा पिछले साल 24 से 25 नवंबर के बीच हुआ। इन उड़ानों के लिए एयर इंडिया ने अनिवार्य एयरवर्दीनेस रिव्यू सर्टिफिकेट (ARC) नहीं लिया था। एआरसी एक बेहद अहम सर्टिफिकेट है जो सालाना तौर पर डीजीसीए द्वारा जारी किया जाता है। इसके लिए विमान को सभी जरूरी सुरक्षा मानकों को पूरा करना होता है। बिना एआरसी के उड़ान भरना उड़ान के सुरक्षा नियमों का गंभीर उल्लंघन माना जाता है।


    डीजीसीए ने माना बेहद गंभीर

    डीजीसीए ने एयर इंडिया के इस उल्लंघन को बेहद गंभीर माना है। एक खबर के मुताबिक इसे एयरलाइन की कैजुअल अप्रोच बताया गया है। जानकारी के मुताबिक डीजीसीए ने कहाकि इस तरह के उल्लंघन को लेकर हम बहुत कड़ी कार्रवाई करते हैं। इसलिए जितनी ज्यादा संभव हो सकती थी, उतनी पेनाल्टी लगाई गई है। जब किसी संस्था पर जुर्माना लगाया जाता है तो जिम्मेदार मैनेजर को नोटिस दी जाती है। डीजीसीए ने शीर्ष स्तर पर जवाबदेही तय की है, और एयर इंडिया के सीईओ कैम्पबेल विल्सन को इस चूक के लिए जिम्मेदार ठहराया है।


    एयर इंडिया ने क्या कहा

    डीजीसीए के आदेश का जवाब देते हुए, एयर इंडिया के एक प्रवक्ता ने एक बयान में कहाकि एयर इंडिया ने 2025 में स्वेच्छा से रिपोर्ट किए गए एक घटना से संबंधित डीजीसीए आदेश की प्राप्ति को स्वीकार किया है। सभी पहचाने गए गैप्स को तब से संतोषजनक रूप से संबोधित किया गया है, साथ ही प्राधिकरण के साथ साझा किया गया है। एयर इंडिया अपने संचालन की निष्पक्षता और सुरक्षा के उच्चतम मानकों को बनाए रखने की प्रतिबद्धता में अडिग है।