Author: bharati

  • महिला टी20 विश्व कप भारत को हराने के बाद ऑस्ट्रेलिया का बढ़ा हौसला लूसी हैमिल्टन ने सेमीफाइनल से पहले भरी हुंकार

    महिला टी20 विश्व कप भारत को हराने के बाद ऑस्ट्रेलिया का बढ़ा हौसला लूसी हैमिल्टन ने सेमीफाइनल से पहले भरी हुंकार


    नई दिल्ली। आईसीसी महिला टी20 विश्व कप में ऑस्ट्रेलिया की युवा तेज गेंदबाज लूसी हैमिल्टन ने कहा है कि भारत जैसी मजबूत टीम के खिलाफ मिली जीत ने पूरी टीम के आत्मविश्वास को नई ऊंचाई दी है। उनका मानना है कि बड़े मुकाबले में शानदार प्रदर्शन करने से खिलाड़ियों का भरोसा बढ़ता है और यही आत्मविश्वास अब वेस्टइंडीज के खिलाफ होने वाले सेमीफाइनल में भी टीम की सबसे बड़ी ताकत बनेगा।

    क्रिकेट डॉट कॉम डॉट एयू से बातचीत में हैमिल्टन ने कहा कि नई गेंद के साथ गेंदबाजी करना उनके लिए हमेशा रोमांचक अनुभव रहता है। विश्व कप जैसे बड़े टूर्नामेंट में नई गेंद संभालना बड़ी जिम्मेदारी होती है लेकिन भारत के खिलाफ सफल प्रदर्शन के बाद उनका आत्मविश्वास काफी मजबूत हुआ है। उन्होंने कहा कि टीम ने उस मुकाबले में जिस तरह दबाव झेलते हुए जीत हासिल की उससे सभी खिलाड़ियों का मनोबल बढ़ा है।

    हैमिल्टन ने स्वीकार किया कि विश्व कप जैसे बड़े मंच पर खेलते समय दबाव महसूस होना स्वाभाविक है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रगान के दौरान हर खिलाड़ी के मन में घबराहट होती है लेकिन जैसे ही पहला ओवर शुरू होता है पूरा ध्यान सिर्फ खेल पर केंद्रित हो जाता है। उनके मुताबिक लगातार बड़े मुकाबले खेलने से मानसिक मजबूती भी बढ़ती है और खिलाड़ी चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों से बेहतर तरीके से निपटना सीखते हैं।

    ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाज ने कहा कि भारत के खिलाफ प्रदर्शन ने उन्हें यह भरोसा दिया कि वे बड़े मैचों में भी अपनी जिम्मेदारी प्रभावी ढंग से निभा सकती हैं। यही अनुभव सेमीफाइनल जैसे महत्वपूर्ण मुकाबले में उनके लिए काफी उपयोगी साबित होगा। उन्होंने कहा कि टीम का लक्ष्य पिछले मैचों की लय को बरकरार रखते हुए आक्रामक क्रिकेट खेलना है।

    हैमिल्टन ने मैचों के बीच कम अंतराल को भी टीम के लिए सकारात्मक बताया। उनके अनुसार लगातार मुकाबले खेलने से खिलाड़ियों की लय बनी रहती है और टीम का मोमेंटम भी कायम रहता है। उन्होंने कहा कि ऑस्ट्रेलिया हाल के मैचों में जिस गुणवत्ता का क्रिकेट खेल रहा है उसे सेमीफाइनल में भी दोहराने की पूरी कोशिश की जाएगी।

    द ओवल मैदान पर पहली बार खेलने जा रहीं हैमिल्टन ने कहा कि मैच से पहले मैदान का निरीक्षण करने से परिस्थितियों को समझने में मदद मिलेगी। उन्होंने माना कि हालात तेजी से बदल सकते हैं इसलिए टीम का फोकस जल्द से जल्द खुद को परिस्थितियों के अनुरूप ढालने पर रहेगा।

    उन्होंने वेस्टइंडीज को भी बेहद खतरनाक प्रतिद्वंद्वी बताया। हैमिल्टन का कहना है कि अंडरडॉग के रूप में उतरने वाली टीमों पर अतिरिक्त दबाव नहीं होता और वे खुलकर खेलती हैं। ऐसे में ऑस्ट्रेलिया किसी भी तरह की लापरवाही नहीं बरतेगा। दोनों टीमों के बीच होने वाले इस सेमीफाइनल की विजेता फाइनल में जगह बनाएगी जहां विश्व कप खिताब के लिए मुकाबला होगा।
  • भारत-अमेरिका ट्रेड डील को मिलेगी जल्द मंजूरी! अमेरिकी राजदूत का दावा- 18 महीने की बातचीत निर्णायक मोड़ पर, 500 अरब डॉलर व्यापार लक्ष्य पर जोर

    भारत-अमेरिका ट्रेड डील को मिलेगी जल्द मंजूरी! अमेरिकी राजदूत का दावा- 18 महीने की बातचीत निर्णायक मोड़ पर, 500 अरब डॉलर व्यापार लक्ष्य पर जोर

    नई दिल्ली । भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौता अब अपने अंतिम चरण में पहुंच चुका है। भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने कहा है कि दोनों देशों के बीच इस समझौते का अधिकांश हिस्सा तय हो चुका है और अब केवल अंतिम एक से दो प्रतिशत मुद्दों पर सहमति बननी बाकी है। उन्होंने विश्वास जताया कि करीब 18 महीने से चल रही बातचीत जल्द ही सफल निष्कर्ष तक पहुंचेगी और इससे दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को नई मजबूती मिलेगी।

    अमेरिका-रणनीतिक साझेदारी फोरम के नेतृत्व सम्मेलन में संबोधित करते हुए सर्जियो गोर ने कहा कि हाल के सप्ताहों में दोनों देशों के अधिकारियों के बीच बातचीत की गति तेज हुई है। उन्होंने बताया कि अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेमिसन ग्रीर हाल ही में नई दिल्ली पहुंचे थे, जहां लंबी चर्चा के बाद समझौते के शेष बिंदुओं पर भी महत्वपूर्ण प्रगति हुई। उनके अनुसार अधिकांश प्रावधानों पर सहमति बन चुकी है और अब अंतिम औपचारिकताओं को पूरा किया जा रहा है।

    राजदूत ने कहा कि इतने व्यापक और जटिल व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने में समय लगना स्वाभाविक है। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़े व्यापार समझौतों में कई वर्षों तक बातचीत चलना सामान्य बात है। इसी संदर्भ में उन्होंने यूरोपीय व्यापार समझौतों का उल्लेख करते हुए कहा कि वहां ऐसे समझौतों को पूरा होने में दो दशक तक लग गए थे, जबकि भारत और अमेरिका अपेक्षाकृत कम समय में निर्णायक स्थिति तक पहुंच गए हैं।

    सर्जियो गोर ने इस प्रस्तावित समझौते को दोनों देशों के लिए समान रूप से लाभकारी बताया। उनका कहना था कि यह किसी एक पक्ष के हितों तक सीमित नहीं है, बल्कि ऐसी व्यवस्था तैयार की जा रही है जिससे दोनों अर्थव्यवस्थाओं को दीर्घकालिक लाभ मिल सके। उन्होंने कहा कि समझौते के लागू होने से निवेशकों और व्यापारिक संस्थानों को अधिक स्पष्टता और स्थिरता मिलेगी, जिससे द्विपक्षीय व्यापार को नई गति प्राप्त होगी।

    उन्होंने यह भी बताया कि हाल के सप्ताहों में दोनों देशों के वरिष्ठ अधिकारियों और मंत्रियों के बीच लगातार उच्च स्तरीय बैठकें हुई हैं। भारत और अमेरिका के प्रतिनिधियों ने एक-दूसरे के देशों का दौरा कर लंबित मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की है। उनका मानना है कि इसी सक्रिय संवाद के कारण बातचीत अब अंतिम चरण तक पहुंच सकी है।

    राजदूत ने दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों में पिछले दो दशकों के दौरान आई उल्लेखनीय वृद्धि का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि द्विपक्षीय व्यापार लगभग 20 अरब डॉलर से बढ़कर 220 अरब डॉलर तक पहुंच चुका है, जो दोनों देशों के मजबूत आर्थिक सहयोग का प्रमाण है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि प्रस्तावित व्यापार समझौते के बाद यह आंकड़ा और तेजी से बढ़ेगा।

    सर्जियो गोर ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा निर्धारित 500 अरब डॉलर के द्विपक्षीय व्यापार लक्ष्य को भी दोहराया। उन्होंने कहा कि यह महत्वाकांक्षी लक्ष्य दोनों देशों की साझा आर्थिक सोच और भविष्य की रणनीतिक साझेदारी को दर्शाता है। उनके अनुसार व्यापार, निवेश, प्रौद्योगिकी और विनिर्माण के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ने से इस लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति होगी।

    उन्होंने भारत-अमेरिका संबंधों को लेकर सामने आने वाली नकारात्मक अटकलों को भी खारिज किया। उनका कहना था कि व्यापार, रक्षा, प्रौद्योगिकी, ऊर्जा, निवेश और लोगों के बीच बढ़ते संपर्क इस बात का प्रमाण हैं कि दोनों देशों के संबंध लगातार मजबूत हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित व्यापार समझौता केवल आर्थिक दस्तावेज नहीं होगा, बल्कि यह दोनों लोकतांत्रिक देशों की व्यापक रणनीतिक साझेदारी को और अधिक मजबूत आधार प्रदान करेगा।

  • 'मेसी-रोनाल्डो जैसी प्रतिद्वंदिता फिर शायद कभी नहीं दिखेगी' ओलिवर कान ने दोनों दिग्गजों की जमकर की तारीफ

    'मेसी-रोनाल्डो जैसी प्रतिद्वंदिता फिर शायद कभी नहीं दिखेगी' ओलिवर कान ने दोनों दिग्गजों की जमकर की तारीफ


    नई दिल्ली। जर्मनी के पूर्व कप्तान और दिग्गज गोलकीपर ओलिवर कान का मानना है कि फुटबॉल इतिहास में लियोनेल मेसी और क्रिस्टियानो रोनाल्डो जैसी प्रतिद्वंदिता दोबारा देखने को मिलना बेहद मुश्किल है। उनके अनुसार दोनों खिलाड़ियों ने लगभग दो दशकों तक लगातार एक-दूसरे को बेहतर बनने की प्रेरणा दी और अपने शानदार प्रदर्शन से विश्व फुटबॉल को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। कान ने कहा कि उनकी प्रतिस्पर्धा केवल लोकप्रियता तक सीमित नहीं रही बल्कि मैदान पर प्रदर्शन और निरंतर उत्कृष्टता के दम पर इतिहास रचा गया।

    फीफा विश्व कप 2026 के दौरान विशेषज्ञ के रूप में अपनी भूमिका निभा रहे ओलिवर कान ने कहा कि मेसी और रोनाल्डो ने हर सीजन में एक-दूसरे को चुनौती देते हुए अपने खेल का स्तर लगातार ऊंचा किया। यही वजह है कि दोनों खिलाड़ियों ने वर्षों तक दुनिया के सर्वश्रेष्ठ फुटबॉलरों की सूची में अपना दबदबा बनाए रखा। कान के मुताबिक उनकी प्रतिद्वंदिता व्यक्तिगत उपलब्धियों से कहीं आगे थी क्योंकि इसने पूरी दुनिया के फुटबॉल प्रशंसकों को लंबे समय तक रोमांचित किया।

    उन्होंने कहा कि इतने लंबे समय तक शीर्ष स्तर पर बने रहना किसी भी खिलाड़ी के लिए आसान नहीं होता लेकिन मेसी और रोनाल्डो ने अपनी मेहनत, अनुशासन और खेल के प्रति समर्पण से यह कर दिखाया। दोनों ने क्लब फुटबॉल में कई रिकॉर्ड बनाए और एक-दूसरे को लगातार चुनौती देते हुए नए कीर्तिमान स्थापित किए। कान का मानना है कि इसी कारण यह प्रतिद्वंदिता खेल इतिहास की सबसे यादगार प्रतिस्पर्धाओं में गिनी जाएगी।

    ओलिवर कान ने अपने करियर के सबसे यादगार पल के रूप में 2002 फीफा विश्व कप का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उस टूर्नामेंट में जर्मनी को फाइनल तक पहुंचाना उनके जीवन का सबसे बड़ा अनुभव था। हालांकि फाइनल में हार का दर्द आज भी उनके मन में है क्योंकि हर खिलाड़ी का सपना विश्व कप जीतना होता है। उन्होंने स्वीकार किया कि गोलकीपर के रूप में गोल्डन बॉल जीतना उनके लिए गर्व की बात थी लेकिन यदि मौका मिले तो वह इस व्यक्तिगत सम्मान के बदले विश्व कप ट्रॉफी लेना पसंद करेंगे।

    दिग्गज गोलकीपर ने मौजूदा विश्व कप में खेल रहे युवा खिलाड़ियों और खासकर गोलकीपरों को भी महत्वपूर्ण सलाह दी। उन्होंने कहा कि सीखने की प्रक्रिया कभी खत्म नहीं होनी चाहिए। खिलाड़ियों को लगातार अपने खेल में सुधार करते रहना चाहिए और बड़े मंच पर दबाव से घबराने के बजाय उसका आनंद लेना चाहिए। उनके अनुसार विश्व कप ऐसा मंच है जहां पूरी दुनिया की नजर खिलाड़ियों पर होती है और कई बार एक पल या एक फैसला पूरे टूर्नामेंट का भविष्य तय कर देता है। इसलिए हर खिलाड़ी को हर क्षण पूरी एकाग्रता के साथ खेलना चाहिए।

    मेसी और रोनाल्डो को आधुनिक फुटबॉल के सबसे महान खिलाड़ियों में गिना जाता है। दोनों ने क्लब फुटबॉल में वर्षों तक शानदार मुकाबले खेले और अनगिनत रिकॉर्ड अपने नाम किए। हालांकि विश्व कप में दोनों कभी आमने-सामने नहीं आ सके। माना जा रहा है कि फीफा विश्व कप 2026 दोनों दिग्गजों का आखिरी विश्व कप हो सकता है। ऐसे में दुनिया भर के फुटबॉल प्रशंसकों की नजर एक बार फिर इन दोनों खिलाड़ियों पर रहेगी, जो अपने करियर के इस अहम पड़ाव पर यादगार प्रदर्शन कर इतिहास में एक और सुनहरा अध्याय जोड़ने की कोशिश करेंगे।

  • राम मंदिर दान विवाद पर कांग्रेस का केंद्र और यूपी सरकार पर तीखा प्रहार, SIT रिपोर्ट सार्वजनिक करने समेत कई सवालों पर मांगा जवाब

    राम मंदिर दान विवाद पर कांग्रेस का केंद्र और यूपी सरकार पर तीखा प्रहार, SIT रिपोर्ट सार्वजनिक करने समेत कई सवालों पर मांगा जवाब

    नई दिल्ली । राम मंदिर में कथित दान चोरी के मामले को लेकर राजनीतिक माहौल एक बार फिर गर्म हो गया है। कांग्रेस ने इस मुद्दे पर केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार और उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार को घेरते हुए मामले में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग की है। पार्टी का कहना है कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े इस प्रकरण में अब तक कई महत्वपूर्ण सवालों के जवाब सामने नहीं आए हैं। कांग्रेस ने विशेष जांच दल (SIT) की रिपोर्ट सार्वजनिक करने के साथ पूरे मामले की निष्पक्ष और व्यापक जांच कराने की मांग दोहराई है।

    कांग्रेस का कहना है कि यदि इस मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल का गठन किया गया था, तो उसकी रिपोर्ट अब तक सार्वजनिक क्यों नहीं की गई। पार्टी के अनुसार, जब मामला देशभर के श्रद्धालुओं के विश्वास और दान से जुड़ा है, तब जांच रिपोर्ट को सार्वजनिक करने में किसी प्रकार की गोपनीयता नहीं बरती जानी चाहिए। कांग्रेस का दावा है कि पारदर्शिता बनाए रखने के लिए जांच के निष्कर्ष देश के सामने लाए जाने आवश्यक हैं।

    पार्टी ने आरोप लगाया कि पिछले कुछ समय के दौरान राम मंदिर परिसर में चोरी की कई घटनाएं सामने आई हैं। कांग्रेस का कहना है कि यदि हाल के दिनों में बड़ी संख्या में चोरी के मामले सामने आए हैं, तो यह जानना भी जरूरी है कि पिछले वर्षों में कुल कितनी घटनाएं हुईं, कितना सामान गायब हुआ और दान में प्राप्त संपत्तियों की सुरक्षा के लिए क्या व्यवस्था की गई थी। पार्टी ने मांग की कि पूरे रिकॉर्ड का स्वतंत्र ऑडिट कराया जाए ताकि किसी भी तरह की आशंका समाप्त हो सके।

    जांच प्रक्रिया को लेकर भी कांग्रेस ने सवाल उठाए हैं। पार्टी का आरोप है कि कार्रवाई केवल सीमित स्तर तक की गई है, जबकि यदि किसी बड़े स्तर पर लापरवाही या अनियमितता हुई है तो उसकी भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। कांग्रेस का कहना है कि जांच का दायरा व्यापक होना चाहिए और किसी भी जिम्मेदार व्यक्ति को केवल पद या प्रभाव के आधार पर जांच से बाहर नहीं रखा जाना चाहिए।

    सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी कांग्रेस ने सरकार को घेरा है। पार्टी का कहना है कि जब मंदिर परिसर की सुरक्षा के लिए विभिन्न एजेंसियां और सुरक्षा कर्मी तैनात हैं, तब लगातार चोरी की घटनाओं के आरोप गंभीर चिंता का विषय हैं। कांग्रेस ने निजी सुरक्षा व्यवस्था की भूमिका और उसकी जवाबदेही तय करने की भी मांग की है। पार्टी का कहना है कि यदि सुरक्षा व्यवस्था में कहीं चूक हुई है तो उसकी स्पष्ट जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए।

    कांग्रेस ने यह भी मांग की है कि दान में प्राप्त आभूषणों, नकदी और अन्य मूल्यवान वस्तुओं का पूरा विवरण सार्वजनिक किया जाए। पार्टी का कहना है कि श्रद्धालुओं द्वारा अर्पित प्रत्येक वस्तु का व्यवस्थित रिकॉर्ड उपलब्ध होना चाहिए ताकि किसी प्रकार का संदेह उत्पन्न न हो। इसके साथ ही पूरे चढ़ावे का स्वतंत्र वित्तीय ऑडिट कराने की मांग भी दोहराई गई है।

    पार्टी ने राज्य सरकार से SIT रिपोर्ट सार्वजनिक करने, पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और आवश्यक होने पर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है। कांग्रेस का यह भी कहना है कि यदि सुरक्षा व्यवस्था या प्रशासनिक स्तर पर किसी प्रकार की लापरवाही हुई है तो उसकी जवाबदेही तय की जानी चाहिए। पार्टी ने आरोप लगाया कि सरकार अब तक इस पूरे विवाद पर स्पष्ट स्थिति रखने से बच रही है।

    राम मंदिर को करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र बताते हुए कांग्रेस ने कहा कि इस तरह के किसी भी विवाद का समाधान केवल पारदर्शी जांच, जवाबदेही और तथ्यों को सार्वजनिक करने से ही संभव है। पार्टी का कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच होने और सभी संबंधित तथ्यों के सामने आने से ही श्रद्धालुओं का विश्वास और संस्थागत पारदर्शिता मजबूत हो सकेगी।

  • SIR विवाद पर विपक्ष की न्यायपालिका से दखल की मांग, 23 राजनीतिक दल और एक निर्दलीय सांसद एकजुट, चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर जताई गहरी चिंता


    नई दिल्ली । देश में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन- SIR) अभियान को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। विपक्षी गठबंधन ‘INDIA जनबंधन’ से जुड़े 23 राजनीतिक दलों और एक निर्दलीय सांसद ने भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत को संयुक्त पत्र भेजकर चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर चिंताएं व्यक्त की हैं। विपक्ष का कहना है कि मतदाता सूची के सत्यापन की वर्तमान प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, निष्पक्ष और संवैधानिक मानकों के अनुरूप बनाए जाने की आवश्यकता है, ताकि किसी भी पात्र मतदाता के अधिकार प्रभावित न हों।

    विपक्षी दलों का कहना है कि मतदाता सूची लोकतांत्रिक व्यवस्था की सबसे महत्वपूर्ण आधारशिला है और इसमें किसी भी प्रकार की त्रुटि या विवाद चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता पर प्रश्नचिह्न खड़ा कर सकता है। इसी कारण सभी दलों ने एकजुट होकर सर्वोच्च न्यायपालिका का ध्यान इस मुद्दे की ओर आकर्षित करने का निर्णय लिया है। उनका मानना है कि इस विषय पर न्यायिक स्तर पर आवश्यक मार्गदर्शन और निगरानी लोकतांत्रिक व्यवस्था में विश्वास बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण हो सकती है।

    इस मुद्दे को लेकर विपक्ष ने पहले भी आपसी स्तर पर कई दौर की चर्चा की थी। हाल ही में आयोजित बैठक में विभिन्न दलों ने चुनाव आयोग द्वारा संचालित SIR प्रक्रिया और उससे जुड़े अन्य चुनावी विषयों पर साझा रणनीति तैयार की। बैठक में यह सहमति बनी कि इन चिंताओं को औपचारिक रूप से देश के मुख्य न्यायाधीश के समक्ष रखा जाए। बाद में इस पहल को व्यापक समर्थन मिला और संयुक्त पत्र पर हस्ताक्षर करने वाले दलों की संख्या बढ़कर 23 हो गई।

    संयुक्त पत्र को कई प्रमुख विपक्षी नेताओं और राजनीतिक दलों का समर्थन मिला है। इसमें विभिन्न राज्यों के क्षेत्रीय दलों के साथ-साथ राष्ट्रीय स्तर के दल भी शामिल हैं। एक निर्दलीय सांसद ने भी इस पहल का समर्थन करते हुए हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का कहना है कि यह कदम किसी राजनीतिक लाभ के लिए नहीं बल्कि चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता और मतदाताओं के अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उठाया गया है।

    विवाद का केंद्र चुनाव आयोग द्वारा संचालित स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन अभियान है। इस प्रक्रिया के तहत घर-घर जाकर मतदाताओं का सत्यापन किया जा रहा है। साथ ही परिवार आधारित विवरण का मिलान, रिकॉर्ड का अद्यतन तथा फर्जी या डुप्लीकेट मतदाताओं के नाम हटाने की कार्रवाई भी की जा रही है। चुनाव आयोग का उद्देश्य मतदाता सूची को अधिक सटीक, अद्यतन और त्रुटिरहित बनाना बताया जा रहा है, ताकि भविष्य में चुनाव प्रक्रिया अधिक विश्वसनीय हो सके।

    हालांकि विपक्षी दलों का आरोप है कि इस प्रक्रिया के दौरान कई स्थानों पर वैध मतदाताओं के नाम भी सूची से हटाए जाने की शिकायतें सामने आई हैं। उनका कहना है कि यदि सत्यापन अभियान पूरी पारदर्शिता और स्पष्ट दिशा-निर्देशों के साथ नहीं चलाया गया तो बड़ी संख्या में पात्र नागरिक अपने मतदान अधिकार से वंचित हो सकते हैं। विपक्ष ने यह भी कहा है कि ऐसे मामलों की स्वतंत्र समीक्षा और प्रभावी निगरानी आवश्यक है।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आगामी चुनावों से पहले मतदाता सूची की शुद्धता और पारदर्शिता का मुद्दा राष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण बहस का विषय बन सकता है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि मुख्य न्यायाधीश के समक्ष भेजे गए इस संयुक्त पत्र पर आगे क्या प्रक्रिया अपनाई जाती है और चुनाव आयोग इस संबंध में उठाई गई चिंताओं पर किस प्रकार अपनी प्रतिक्रिया देता है। आने वाले समय में यह मुद्दा चुनावी सुधार और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं से जुड़ी चर्चा का प्रमुख केंद्र बना रह सकता है।

  • देश की सेवा जीवन का सबसे बड़ा सौभाग्य' कहकर जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने सौंपी जिम्मेदारी, संयुक्त सैन्य शक्ति पर दिया भविष्य का विजन

    देश की सेवा जीवन का सबसे बड़ा सौभाग्य' कहकर जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने सौंपी जिम्मेदारी, संयुक्त सैन्य शक्ति पर दिया भविष्य का विजन

    नई दिल्ली । भारतीय सेना में नेतृत्व परिवर्तन के महत्वपूर्ण चरण के तहत मंगलवार को जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने सेना प्रमुख का पदभार जनरल धीरज सेठ को सौंप दिया। चार दशक से अधिक समय तक भारतीय सेना की सेवा करने वाले जनरल द्विवेदी ने अपने विदाई संबोधन में सैन्य जीवन को अपने जीवन का सबसे बड़ा सौभाग्य बताया और कहा कि देश की रक्षा के लिए समर्पित प्रत्येक सैनिक का योगदान भारतीय सेना की सबसे बड़ी शक्ति है। इस अवसर पर उन्होंने राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पहुंचकर शहीद सैनिकों को श्रद्धांजलि भी अर्पित की।

    अपने विदाई संबोधन में जनरल द्विवेदी ने कहा कि सैनिक विद्यालय से लेकर भारतीय सेना के सर्वोच्च पद तक का उनका सफर अविस्मरणीय रहा। उन्होंने कहा कि सेना प्रमुख के रूप में अपना कार्यकाल समाप्त करते हुए उनके मन में विनम्रता, कृतज्ञता, गर्व और संतोष की भावना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारतीय सेना की असली ताकत किसी एक व्यक्ति में नहीं, बल्कि उन लाखों सैनिकों, अधिकारियों, पूर्व सैनिकों, उनके परिवारों और देशवासियों के विश्वास में निहित है, जिन्होंने हमेशा सेना का मनोबल बढ़ाया है।

    उन्होंने उन सभी सैनिकों को विशेष श्रद्धांजलि दी जिन्होंने मातृभूमि की रक्षा करते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया। जनरल द्विवेदी ने कहा कि भारतीय सेना की परंपराएं, अनुशासन और कर्तव्यनिष्ठा ही उसकी सबसे बड़ी पहचान हैं और यही मूल्य भविष्य में भी सेना का मार्गदर्शन करते रहेंगे। उन्होंने विश्वास जताया कि नया नेतृत्व भी इन्हीं आदर्शों को आगे बढ़ाते हुए सेना को नई ऊंचाइयों तक ले जाएगा।

    अपने कार्यकाल की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए जनरल द्विवेदी ने कहा कि पिछले दो वर्षों में भारतीय सेना ने हर मोर्चे पर उच्च स्तर की तैयारी, सतर्कता और संतुलन बनाए रखा। उन्होंने उत्तरी सीमाओं पर संचालित ऑपरेशन स्नो लेपर्ड का विशेष उल्लेख करते हुए कहा कि कठिन परिस्थितियों के बावजूद सेना ने पूरी मजबूती और सजगता के साथ अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन किया। इसी प्रकार पश्चिमी मोर्चे पर ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भी सेना ने अनुशासन, संयम और रणनीतिक दक्षता का प्रभावी प्रदर्शन किया।

    उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े प्रत्येक निर्णय और कार्रवाई में भारतीय सेना ने स्पष्ट उद्देश्य, जिम्मेदारी और पेशेवर दृष्टिकोण को प्राथमिकता दी। इसी सोच ने बदलते सुरक्षा परिदृश्य में देश के लिए एक नए सुरक्षा मानक को स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उनके अनुसार आधुनिक युद्ध का स्वरूप तेजी से बदल रहा है और भविष्य में संयुक्त सैन्य अभियानों का महत्व लगातार बढ़ेगा।

    जनरल द्विवेदी ने तीनों सेनाओं के बीच बढ़ते समन्वय को भी अपने कार्यकाल की महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि भारतीय सेना, नौसेना और वायु सेना ने साझा रणनीति, आपसी विश्वास और बेहतर समन्वय के साथ राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत किया है। उनका मानना है कि भविष्य के युद्ध अधिक एकीकृत, तकनीक आधारित और संयुक्त अभियान पर केंद्रित होंगे। इसलिए तीनों सेनाओं को एक साथ स्थिति का आकलन करने, संयुक्त रूप से निर्णय लेने और समन्वित कार्रवाई करने की दिशा में आगे बढ़ना होगा।

    नई जिम्मेदारी संभालने वाले जनरल धीरज सेठ के नेतृत्व में भारतीय सेना अब बदलती सुरक्षा चुनौतियों और आधुनिक सैन्य आवश्यकताओं के अनुरूप अपनी रणनीतियों को और मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ेगी। नेतृत्व परिवर्तन के इस अवसर पर जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने विश्वास व्यक्त किया कि भारतीय सेना अपनी गौरवशाली परंपराओं, पेशेवर उत्कृष्टता और राष्ट्र के प्रति अटूट समर्पण के साथ भविष्य में भी देश की सुरक्षा सुनिश्चित करती रहेगी।

  • शामली धर्मांतरण विवाद में नया मोड़, आयुष मलिक ने दोबारा अपनाया हिंदू धर्म; परिवार से मांगी माफी, बोले- अपनी इच्छा से लौटा हूं

    शामली धर्मांतरण विवाद में नया मोड़, आयुष मलिक ने दोबारा अपनाया हिंदू धर्म; परिवार से मांगी माफी, बोले- अपनी इच्छा से लौटा हूं

    नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश के शामली जिले में धर्मांतरण से जुड़ा चर्चित मामला एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। कुछ समय पहले इस्लाम धर्म स्वीकार करने वाले आयुष मलिक ने अब दोबारा हिंदू धर्म अपनाने की घोषणा की है। सोशल मीडिया पर सामने आए एक वीडियो में वह धार्मिक अनुष्ठान और पूजा-अर्चना करते दिखाई दे रहे हैं। वीडियो में उन्होंने कहा कि उन्होंने अपनी इच्छा से हिंदू धर्म में वापसी करने का निर्णय लिया है और अब वह अपने परिवार के साथ रहकर उनकी देखभाल तथा सुरक्षा को प्राथमिकता देना चाहते हैं। इस घटनाक्रम के बाद यह मामला फिर चर्चा का विषय बन गया है।

    आयुष मलिक ने वीडियो संदेश में कहा कि उन्होंने पहले इस्लाम धर्म स्वीकार कर लिया था, लेकिन परिवार की भावनाओं और परिस्थितियों को देखते हुए उन्होंने स्वेच्छा से सनातन धर्म में लौटने का फैसला किया है। उन्होंने अपने माता-पिता से क्षमा भी मांगी और भविष्य में परिवार के साथ रहने की बात दोहराई। वीडियो में धार्मिक रीति-रिवाजों के साथ उनकी घर वापसी की प्रक्रिया भी दिखाई गई है।

    आयुष के पिता देवराज मलिक ने भी पुष्टि की कि उनके बेटे ने औपचारिक रूप से दोबारा हिंदू धर्म स्वीकार कर लिया है। उनका कहना है कि यह निर्णय पूरी तरह स्वेच्छा से लिया गया है और परिवार ने इसका स्वागत किया है। उन्होंने पहले भी आरोप लगाया था कि उनके बेटे का योजनाबद्ध तरीके से ब्रेनवॉश किया गया और उसे धर्म परिवर्तन के लिए प्रेरित किया गया। परिवार का यह भी दावा रहा है कि पूरे मामले के पीछे आर्थिक हित और पारिवारिक संपत्ति से जुड़े उद्देश्य थे।

    धर्मांतरण विवाद को लेकर पहले दर्ज कराई गई शिकायत के आधार पर पुलिस ने उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया था। इसी मामले में फिजियोथेरेपिस्ट चांदनी कुरैशी और उनके पिता इस्लाम कुरैशी के खिलाफ कार्रवाई भी की गई थी। पुलिस ने आरोपों की जांच के बाद दोनों को गिरफ्तार किया था और मामले से जुड़े विभिन्न पहलुओं की पड़ताल की थी। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि धर्म परिवर्तन किन परिस्थितियों में हुआ और उसमें किसी प्रकार का दबाव, प्रलोभन या अन्य अवैध तत्व शामिल थे या नहीं।

    जांच से जुड़े दस्तावेजों के अनुसार आयुष मलिक की मुलाकात वर्ष 2018 में पैर की चोट के इलाज के दौरान एक स्थानीय अस्पताल में चांदनी से हुई थी। इसके बाद दोनों के बीच संपर्क बढ़ा और संबंध विकसित हुए। परिवार का आरोप है कि इसी दौरान आयुष पर धीरे-धीरे धर्म परिवर्तन का प्रभाव डाला गया। दूसरी ओर, मामले की कानूनी प्रक्रिया के तहत सभी आरोपों की जांच जारी है और संबंधित पक्षों के बयान भी दर्ज किए गए हैं।

    धर्मांतरण और पुनर्धर्म ग्रहण से जुड़ा यह मामला सामाजिक और कानूनी दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बना हुआ है। एक ओर आयुष ने सार्वजनिक रूप से अपनी इच्छा से हिंदू धर्म में लौटने की बात कही है, वहीं दूसरी ओर पहले दर्ज किए गए धर्मांतरण प्रकरण की जांच और उससे संबंधित न्यायिक प्रक्रिया भी जारी है। ऐसे मामलों में अंतिम निष्कर्ष जांच और न्यायालय में प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर ही तय होगा। फिलहाल आयुष की घर वापसी के बाद यह प्रकरण एक बार फिर सार्वजनिक बहस के केंद्र में आ गया है।

  • गिरफ्तारी दस्तावेजों में गंभीर त्रुटि का मामला, हाईकोर्ट ने सोनम रघुवंशी को मिली जमानत रद्द करने से किया इनकार

    गिरफ्तारी दस्तावेजों में गंभीर त्रुटि का मामला, हाईकोर्ट ने सोनम रघुवंशी को मिली जमानत रद्द करने से किया इनकार

    शिलांग: मेघालय हाईकोर्ट ने हनीमून के दौरान अपने पति की कथित हत्या के मामले में मुख्य आरोपी सोनम रघुवंशी को निचली अदालत से मिली जमानत बरकरार रखते हुए राज्य सरकार की याचिका खारिज कर दी। अदालत ने कहा कि गिरफ्तारी से जुड़े दस्तावेजों में गंभीर प्रक्रियागत कमियां थीं, जिनके आधार पर जमानत रद्द करने का पर्याप्त आधार नहीं बनता।

    एकल पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि गिरफ्तारी के आधार तैयार करने की प्रक्रिया में आवश्यक सावधानी नहीं बरती गई। अदालत के अनुसार, दस्तावेजों में यह स्पष्ट रूप से नहीं बताया गया कि आरोपी के खिलाफ वास्तविक आरोप क्या हैं और किन तथ्यों के आधार पर उसे गिरफ्तार किया गया। न्यायालय ने इसे न्यायिक प्रक्रिया में गंभीर कमी माना।

    सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया कि गिरफ्तारी मेमो, औचित्य चेकलिस्ट, निरीक्षण मेमो और केस डायरी के कुछ हिस्सों सहित कई दस्तावेजों में हत्या से संबंधित भारतीय न्याय संहिता की धारा 103(1) के स्थान पर गलती से धारा 403(1) का उल्लेख किया गया था। अदालत ने कहा कि एक ही प्रकार की त्रुटि सभी दस्तावेजों में दोहराई गई है, इसलिए इसे केवल टाइपिंग या लिपिकीय गलती नहीं माना जा सकता।

    अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि किसी भी दस्तावेज में स्पष्ट रूप से यह दर्ज नहीं था कि आरोपी को हत्या के आरोप में गिरफ्तार किया जा रहा है। साथ ही गिरफ्तारी के समय कथित अपराध से जुड़े विशिष्ट तथ्यों की जानकारी भी आरोपी को उचित तरीके से नहीं दी गई। न्यायालय ने माना कि गिरफ्तारी की प्रक्रिया कानून के निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं थी।

    राज्य सरकार ने हाईकोर्ट में दलील दी कि दस्तावेजों में हुई गलती केवल टाइपिंग संबंधी त्रुटि थी, जिससे आरोपी को किसी प्रकार का वास्तविक नुकसान नहीं हुआ। सरकार का कहना था कि रिमांड आदेश, चार्जशीट और बाद की न्यायिक कार्यवाही में हत्या के आरोप का स्पष्ट उल्लेख मौजूद है, इसलिए केवल इस तकनीकी त्रुटि के आधार पर जमानत देना उचित नहीं माना जाना चाहिए।

    सरकार ने अपने पक्ष में सर्वोच्च न्यायालय के एक फैसले का हवाला देते हुए कहा कि ऐसी प्रक्रियागत कमियां, जिनसे आरोपी के अधिकारों पर वास्तविक असर न पड़े, बाद में सुधारी जा सकती हैं। हालांकि हाईकोर्ट ने इन दलीलों से सहमति नहीं जताई और कहा कि गिरफ्तारी की प्रक्रिया में आवश्यक कानूनी मानकों का पालन किया जाना अनिवार्य है।

    सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने राज्य सरकार की जमानत रद्द करने संबंधी याचिका खारिज कर दी। इसके साथ ही सोनम रघुवंशी को निचली अदालत से मिली जमानत फिलहाल बरकरार रहेगी और वह आगे की न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने तक जमानत पर बाहर रहेगी।

  • कांग्रेस में बगावत की आहट! 300 किलोमीटर पैदल चलकर भोपाल पहुंचे दो कार्यकर्ता, PCC कार्यालय के बाहर खोला मोर्चा


    नई दिल्ली। मध्य प्रदेश कांग्रेस में जिला कांग्रेस कमेटियों के गठन के बाद संगठन के भीतर असंतोष खुलकर सामने आने लगा है। रतलाम के दो निष्कासित कांग्रेस कार्यकर्ता करीब 300 किलोमीटर की पैदल यात्रा कर भोपाल पहुंचे और प्रदेश कांग्रेस कार्यालय के बाहर धरने पर बैठ गए। दोनों कार्यकर्ताओं का आरोप है कि उन्होंने जिला संगठन में एक ही व्यक्ति को कई पद दिए जाने का विरोध किया था, जिसके बाद उन्हें पार्टी से निष्कासित कर दिया गया। उनका कहना है कि यह कार्रवाई लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है और उन्हें अपनी बात रखने की सजा मिली है।

    धरने पर बैठे संजय रावल ने बताया कि वह और उनके साथी गौरव पोरवाल आठ दिन तक लगातार पैदल चलकर भोपाल पहुंचे हैं। उनका कहना है कि जिस पदाधिकारी ने उन्हें निष्कासित किया, उसके पास ऐसा निर्णय लेने का अधिकार ही नहीं था। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी मंगलवार को प्रदेश कांग्रेस कार्यालय पहुंचे, लेकिन उनसे बातचीत किए बिना ही चले गए। कार्यकर्ताओं का कहना है कि वे पार्टी के खिलाफ नहीं बल्कि संगठन में पारदर्शिता और कार्यकर्ताओं के सम्मान की मांग को लेकर धरना दे रहे हैं।

    गौरव पोरवाल ने बताया कि हाल ही में घोषित रतलाम जिला कांग्रेस कमेटी में कुछ नेताओं को एक साथ तीन-तीन और चार-चार पद दे दिए गए हैं। उन्होंने सोशल मीडिया और व्यक्तिगत रूप से जिला अध्यक्ष को इस पर आपत्ति दर्ज कराई थी। उनका कहना है कि संगठन में एक व्यक्ति को कई जिम्मेदारियां देना उचित नहीं है और इससे समर्पित कार्यकर्ताओं के साथ अन्याय होता है। उनका दावा है कि इस मुद्दे पर जब उन्होंने जिला अध्यक्ष से चर्चा की तो जवाब मिला कि संगठन में सक्रिय कार्यकर्ताओं की कमी है, इसलिए एक ही व्यक्ति को कई पद देने पड़े।

    गौरव का कहना है कि उन्होंने केवल संगठन को मजबूत करने के उद्देश्य से अपनी बात रखी थी, लेकिन इसके बजाय उन्हें पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके निष्कासन के पीछे कोई ठोस कारण नहीं बताया गया और न ही उन्हें अपना पक्ष रखने का अवसर दिया गया।

    दोनों कार्यकर्ताओं ने यह भी बताया कि चार जून को नामली में उनकी मुलाकात प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी से हुई थी। उनके मुताबिक पटवारी ने उन्हें गले लगाया और साथ बैठाकर बातचीत भी की थी। उनका आरोप है कि इसके बाद जिला कांग्रेस नेतृत्व नाराज हो गया और कुछ ही समय बाद उन्हें निष्कासित कर दिया गया।

    गौरव पोरवाल ने दावा किया कि जिला कांग्रेस में रवि तिवारी को तीन पद दिए गए हैं, जबकि प्रकाश पाटीदार और सुनील पोरवाल को भी एक से अधिक जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। उनका कहना है कि वे स्वयं किसी पद पर नहीं हैं और केवल एक सामान्य कार्यकर्ता के रूप में संगठन में पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं।

    धरने पर बैठे दोनों कार्यकर्ताओं का कहना है कि उन्हें किसी पद की इच्छा नहीं है। उनकी केवल यही मांग है कि पार्टी में ईमानदारी से काम करने वाले कार्यकर्ताओं का सम्मान हो और संगठन में नियुक्तियां निष्पक्ष तरीके से की जाएं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि प्रदेश नेतृत्व ने उनकी बात नहीं सुनी तो वे भोपाल से पैदल दिल्ली तक मार्च करेंगे और कांग्रेस के राष्ट्रीय नेतृत्व के सामने अपनी बात रखेंगे। फिलहाल दोनों कार्यकर्ता प्रदेश कांग्रेस कार्यालय के बाहर धरना जारी रखे हुए हैं और प्रदेश नेतृत्व की प्रतिक्रिया का इंतजार कर रहे हैं। 

  • मध्य प्रदेश में मानसून का असर तेज: 50 जिलों में बारिश का अलर्ट, बिजली गिरने से दो की मौत, बैतूल में नदी बनी काल

    मध्य प्रदेश में मानसून का असर तेज: 50 जिलों में बारिश का अलर्ट, बिजली गिरने से दो की मौत, बैतूल में नदी बनी काल


    नई दिल्ली। मध्य प्रदेश में मानसून का असर लगातार बढ़ता जा रहा है और मंगलवार को प्रदेश के कई हिस्सों में मौसम ने अचानक करवट ले ली। राजधानी भोपाल, सीहोर और पांढुर्णा समेत कई जिलों में सुबह से बादल छाए रहे और कई स्थानों पर बारिश दर्ज की गई। मौसम विभाग ने प्रदेश के 50 जिलों में बारिश का अलर्ट जारी किया है, जबकि बैतूल, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, सिवनी और बालाघाट में भारी बारिश की चेतावनी दी गई है। इन जिलों में अगले 24 घंटे के दौरान करीब चार इंच तक बारिश होने की संभावना जताई गई है।

    बारिश के बीच कई जिलों से हादसों की खबरें भी सामने आई हैं। खरगोन जिले में दो अलग-अलग घटनाओं में आकाशीय बिजली गिरने से दो लोगों की मौत हो गई। मृतकों में मजदूर राधेश्याम और गृहिणी केनू शामिल हैं। केनू अपने पीछे तीन साल के बेटे को छोड़ गई हैं। उधर बैतूल जिले के चिचोली क्षेत्र में चंपा नदी उफान पर होने के कारण सोमवार रात बड़ा हादसा हो गया। सिप्लाई गांव के राजेश बिहारे और दद्दू धुर्वे बाइक सहित नदी के रपटे से बह गए थे। रातभर चले तलाश अभियान के बाद मंगलवार सुबह दोनों के शव रपटे से करीब एक किलोमीटर दूर झाड़ियों में मिले।

    पांढुर्णा जिले में सोमवार रात से लगातार रुक-रुककर बारिश हो रही है। मंगलवार सुबह मुंगणापार-मोहगांव मार्ग पर एक बड़ा पेड़ बिजली के तारों पर गिर गया जिससे सड़क पर आवागमन प्रभावित हुआ और आसपास के आठ गांवों की बिजली आपूर्ति ठप हो गई। प्रशासन ने पेड़ हटाने और बिजली व्यवस्था बहाल करने का काम शुरू कर दिया है।

    मौसम विभाग के अनुसार भोपाल, रायसेन, सीहोर, राजगढ़, विदिशा, इंदौर, धार, बुरहानपुर, बड़वानी, खंडवा, खरगोन, उज्जैन, आगर मालवा, शाजापुर, देवास, नर्मदापुरम, हरदा, गुना, अशोकनगर, जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर, मंडला, डिंडौरी, रीवा, सतना, सीधी, सिंगरौली, मऊगंज, मैहर, शहडोल, उमरिया, सागर, पन्ना, दमोह, छतरपुर, टीकमगढ़ और निवाड़ी समेत कुल 50 जिलों में बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। कई इलाकों में 60 किलोमीटर प्रति घंटे तक की रफ्तार से तेज हवाएं भी चल सकती हैं। वहीं ग्वालियर, भिंड, मुरैना, श्योपुर, दतिया, शिवपुरी, नीमच, मंदसौर, रतलाम, झाबुआ और अलीराजपुर में हल्की बारिश की संभावना है।

    मौसम विभाग के मुताबिक प्रदेश में मानसून की एंट्री 24 जून को हुई थी और शुरुआती दौर में 15 जिलों तक इसकी आधिकारिक पहुंच दर्ज की गई थी। हालांकि इसके बाद मानसून की रफ्तार धीमी पड़ गई और वह एक ही क्षेत्र में ठहर गया। इसी कारण प्रदेश के कई हिस्सों में गर्मी और उमस का असर भी बना रहा। फिलहाल मानसून के तेजी से आगे बढ़ने के संकेत नहीं मिले हैं लेकिन अगले कुछ दिनों तक अधिकांश जिलों में बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है।

    एक जून से अब तक प्रदेश में औसतन 124.2 मिलीमीटर बारिश होनी चाहिए थी जबकि अभी तक केवल 75.7 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई है। इस तरह प्रदेश में औसत से करीब 39 प्रतिशत कम बारिश हुई है। पूर्वी मध्य प्रदेश में सामान्य से 68 प्रतिशत कम वर्षा रिकॉर्ड की गई है जबकि पश्चिमी हिस्से में यह कमी 11 प्रतिशत है। मौसम विभाग ने लोगों से खराब मौसम के दौरान नदी-नालों से दूर रहने, आकाशीय बिजली के समय खुले स्थानों में नहीं जाने और प्रशासन द्वारा जारी सलाह का पालन करने की अपील की है।