Author: bharati

  • शनि गोचर से बड़ा बदलाव: इन राशियों पर बरसेगी कृपा, बन सकता है धन लाभ

    शनि गोचर से बड़ा बदलाव: इन राशियों पर बरसेगी कृपा, बन सकता है धन लाभ


    नई दिल्ली । वैदिक ज्योतिष में शनि को न्याय और कर्म का ग्रह माना जाता है, जो धीरे-धीरे लेकिन गहरा प्रभाव डालता है। 16 मई 2026 को शनि रेवती नक्षत्र में प्रवेश करेंगे, जो बुध ग्रह का नक्षत्र माना जाता है और धन, बुद्धि तथा समृद्धि से जुड़ा हुआ है।ज्योतिषाचार्यों के अनुसार यह गोचर आईटी, बैंकिंग, मैनेजमेंट और तकनीकी क्षेत्रों में नई संभावनाएं पैदा कर सकता है। साथ ही रोजगार और व्यापार के क्षेत्र में भी सकारात्मक परिवर्तन देखने को मिल सकते हैं।

    वृषभ राशि (Taurus): आर्थिक मजबूती और करियर ग्रोथ
    वृषभ राशि के जातकों के लिए यह गोचर स्थिरता और आर्थिक सुधार के संकेत दे रहा है। नौकरीपेशा लोगों को नई जिम्मेदारियां या पदोन्नति मिल सकती है। व्यापार में रुका हुआ धन वापस मिलने की संभावना है और नई साझेदारियों से लाभ हो सकता है।

    मिथुन राशि (Gemini): नए अवसरों का द्वार खुलेगा
    मिथुन राशि के लिए यह समय करियर में बदलाव और नई नौकरी के अवसर लेकर आ सकता है। मीडिया, टेक्नोलॉजी और कम्युनिकेशन से जुड़े लोगों को विशेष लाभ मिल सकता है। आर्थिक स्थिति में सुधार और आय के नए स्रोत बनने के संकेत हैं।

    सिंह राशि (Leo): प्रतिष्ठा और सफलता में वृद्धि
    सिंह राशि के जातकों के लिए यह गोचर करियर में मजबूती लेकर आ सकता है। रुके हुए कार्यों में गति आएगी और कार्यस्थल पर सम्मान बढ़ेगा। व्यापार में लाभ और निवेश से अच्छे परिणाम मिलने के योग बन रहे हैं।

    तुला राशि (Libra): संतुलन और आर्थिक सुधार
    तुला राशि के लोगों के लिए यह समय स्थिरता और संतुलन का संकेत दे रहा है। नौकरी में पदोन्नति और व्यापार में नई डील मिल सकती है। आर्थिक स्थिति मजबूत होगी और मानसिक तनाव में कमी आने के योग हैं।

    मकर राशि (Capricorn): करियर में बड़ी उपलब्धियां
    मकर राशि के लिए यह गोचर बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। नौकरी में सम्मान, रुका हुआ धन वापस मिलने और व्यापार में विस्तार के संकेत हैं। आईटी और फाइनेंस सेक्टर से जुड़े लोगों के लिए यह समय विशेष रूप से लाभकारी रह सकता है।

    शनि का यह नक्षत्र गोचर कई राशियों के लिए करियर, धन और सामाजिक जीवन में सकारात्मक बदलाव लेकर आ सकता है। हालांकि ज्योतिषीय प्रभाव व्यक्ति की कुंडली और कर्मों पर भी निर्भर करते हैं, इसलिए निर्णय सोच-समझकर लेना ही बेहतर माना जाता है।

  • शनि देव की कृपा पाने के लिए शनिवार व्रत में इन नियमों का पालन जरूरी

    शनि देव की कृपा पाने के लिए शनिवार व्रत में इन नियमों का पालन जरूरी


    नई दिल्ली । शनिवार का दिन न्याय के देवता शनिदेव को समर्पित माना जाता है। शनि देव को कर्मफलदाता कहा जाता है, जो व्यक्ति के अच्छे-बुरे कर्मों के अनुसार फल प्रदान करते हैं। शनिवार व्रत का उद्देश्य जीवन में शांति, स्थिरता और समृद्धि प्राप्त करना होता है। ज्योतिष के अनुसार, जिन लोगों पर शनि की ढैय्या या साढ़ेसाती का प्रभाव होता है, उनके लिए यह व्रत विशेष रूप से लाभकारी माना गया है।

    शनिवार व्रत की विधि और नियम

    शनिवार व्रत की शुरुआत सूर्योदय से पहले स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करने से करनी चाहिए। इस दिन काले या नीले रंग के वस्त्र पहनना शुभ माना जाता है। पूजा में शनिदेव को काले तिल, काली उड़द दाल, सरसों का तेल और काले वस्त्र अर्पित किए जाते हैं। इसके साथ “ॐ शं शनैश्चराय नमः” मंत्र का 108 बार जाप करना अत्यंत फलदायी माना गया है। कुछ भक्त पीपल वृक्ष की पूजा भी करते हैं, जिसमें दीपक जलाकर धागा बांधने की परंपरा है। व्रत के दौरान कई लोग दिनभर उपवास रखते हैं और सूर्यास्त के बाद सात्विक भोजन ग्रहण करते हैं।

    शनिवार व्रत के प्रमुख लाभ
    शनिवार व्रत के कई आध्यात्मिक और व्यावहारिक लाभ बताए गए हैं। यह व्रत शनि के नकारात्मक प्रभाव को कम करने में सहायक माना जाता है। इस व्रत से व्यक्ति में अनुशासन, संयम और आत्म-नियंत्रण बढ़ता है। मानसिक तनाव कम होता है और जीवन में स्थिरता आती है। साथ ही आर्थिक स्थिति में सुधार और कार्यों में सफलता मिलने की भी मान्यता है।

    दान और सेवा का विशेष महत्व
    शनिवार के दिन दान का विशेष महत्व बताया गया है। इस दिन काले तिल, उड़द दाल, तेल, लोहे की वस्तुएं और काले कपड़ों का दान करना शुभ माना जाता है। इसके अलावा जरूरतमंदों की सेवा और गरीबों को भोजन कराना भी शनिदेव को प्रसन्न करने का श्रेष्ठ उपाय माना गया है।

    हनुमान जी और पीपल पूजा का महत्व
    मान्यता है कि शनिदेव की कृपा पाने के लिए हनुमान जी की पूजा भी अत्यंत लाभकारी होती है। इसके साथ ही पीपल के वृक्ष के नीचे दीपक जलाना और उसकी परिक्रमा करना शनि दोष को शांत करने में सहायक माना जाता है।

    शनिवार व्रत का आध्यात्मिक महत्व
    शनिवार व्रत केवल धार्मिक परंपरा नहीं बल्कि जीवन को संतुलित और अनुशासित बनाने का माध्यम माना जाता है। यह व्रत व्यक्ति को आत्मिक शुद्धि, मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करता है। नियमपूर्वक व्रत और पूजा करने से शनिदेव की कृपा प्राप्त होती है और जीवन में आने वाली बाधाएं धीरे-धीरे कम होने लगती हैं।

  • मेष राशि का आज का दिन (16 मई 2026): मिले-जुले परिणाम, धैर्य से बनेंगे काम

    मेष राशि का आज का दिन (16 मई 2026): मिले-जुले परिणाम, धैर्य से बनेंगे काम


    नई दिल्ली । आज का दिन मेष राशि के जातकों के लिए उतार-चढ़ाव से भरा रह सकता है। ग्रहों की स्थिति संकेत दे रही है कि आपको आज हर काम में सोच-समझकर कदम बढ़ाने की जरूरत है। जल्दबाजी में लिया गया निर्णय नुकसान पहुंचा सकता है, जबकि धैर्य से किए गए काम अच्छे परिणाम दे सकते हैं।

    करियर और नौकरी
    कार्यस्थल पर आज कुछ बाधाएं आ सकती हैं। किसी सहकर्मी के साथ मतभेद होने की संभावना है, इसलिए वाणी पर नियंत्रण रखें। नौकरीपेशा लोगों को अपने काम को समय पर पूरा करने के लिए अतिरिक्त मेहनत करनी पड़ सकती है। हालांकि दिन के दूसरे हिस्से में स्थितियां थोड़ी बेहतर होती नजर आएंगी और रुके हुए काम आगे बढ़ सकते हैं।

    आर्थिक स्थिति
    आर्थिक मामलों में आज सतर्क रहने की जरूरत है। अनावश्यक खर्च बढ़ सकते हैं, जिससे बजट बिगड़ सकता है। किसी भी बड़े निवेश या लेन-देन से पहले अच्छी तरह विचार करना जरूरी होगा। धन प्राप्ति के नए स्रोत अभी धीमे रह सकते हैं, इसलिए फिजूलखर्ची से बचना आपके लिए बेहतर रहेगा।

     पारिवारिक और प्रेम जीवन
    परिवार में छोटी-छोटी बातों को लेकर तनाव की स्थिति बन सकती है, लेकिन बातचीत से समस्या का समाधान संभव है। रिश्तों में मधुरता बनाए रखने के लिए आपको धैर्य और समझदारी से काम लेना होगा। प्रेम संबंधों में भी आज भावनात्मक उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकते हैं, इसलिए किसी भी बात को बढ़ाने से बचें।

    स्वास्थ्य
    सेहत के मामले में आज थोड़ा ध्यान रखने की आवश्यकता है। थकान, सिरदर्द या मानसिक तनाव महसूस हो सकता है। काम के बीच में आराम जरूर करें और पर्याप्त पानी पिएं। बाहर के खाने से परहेज करना बेहतर रहेगा।

     उपाय
    आज हनुमान जी को लाल फूल चढ़ाएं और “ॐ हनुमते नमः” मंत्र का 108 बार जप करें। इससे मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होगी।

    कुल मिलाकर, मेष राशि वालों के लिए आज का दिन सामान्य से थोड़ा चुनौतीपूर्ण रह सकता है, लेकिन धैर्य, संयम और सही निर्णय आपको सफलता की ओर ले जाएंगे।

  • Sun Tan Removal Tips: घर पर बनाएं ये फेस पेस्ट और पाएं ग्लोइंग स्किन

    Sun Tan Removal Tips: घर पर बनाएं ये फेस पेस्ट और पाएं ग्लोइंग स्किन


    नई दिल्ली । गर्मियों में सूरज की UV किरणें (Ultraviolet Rays) त्वचा की ऊपरी परत को प्रभावित करती हैं, जिससे स्किन डार्क और डल दिखने लगती है। जो हिस्से खुले रहते हैं जैसे चेहरा, हाथ और गर्दन वह ज्यादा टैन होते हैं। महंगे ब्यूटी प्रोडक्ट्स के बजाय घर पर बने नुस्खे इस समस्या में काफी असरदार माने जाते हैं।

    बेसन और दही का टैन रिमूवल पेस्ट
    कैसे बनाएं:
    2 चम्मच बेसन
    2 चम्मच दही
    1 चुटकी हल्दी
    इन्हें मिलाकर एक स्मूद पेस्ट तैयार करें।

    कैसे लगाएं:
    चेहरे और टैन वाली जगह पर लगाएं
    15–20 मिनट बाद हल्के हाथों से रगड़कर धो लें

    फायदे:
    डेड स्किन हटाता है
    स्किन को प्राकृतिक रूप से ब्राइट बनाता है
    टैनिंग धीरे-धीरे कम करता है
     नींबू और शहद का नेचुरल पेस्ट
    कैसे बनाएं:
    1 चम्मच शहद
    1 चम्मच नींबू का रस
    दोनों को अच्छे से मिलाएं।

    कैसे लगाएं:
    टैन वाली जगह पर हल्के हाथ से लगाएं
    10–15 मिनट बाद धो लें

    फायदे:
    नींबू स्किन को हल्का करता है
    शहद स्किन को मॉइश्चर देता है
    स्किन टोन को समान बनाने में मदद करता है
    कितने दिनों में असर दिखेगा?
    अगर इन दोनों पेस्ट को नियमित रूप से 7 दिनों तक इस्तेमाल किया जाए, तो:
    टैनिंग में कमी दिखाई देने लगती है
    स्किन पहले से ज्यादा साफ और फ्रेश लगती है
    जरूरी सावधानियां
    नींबू लगाने के बाद धूप में तुरंत न जाएं
    पहले पैच टेस्ट जरूर करें
    बहुत ज्यादा रगड़ने से बचें

    सन टैन एक आम समस्या है, लेकिन सही घरेलू उपाय अपनाकर इसे आसानी से कम किया जा सकता है। बेसन-दही और शहद-नींबू जैसे नेचुरल पेस्ट त्वचा को बिना साइड इफेक्ट के निखारने में मदद करते हैं।

  • बारिश से पहले क्यों बढ़ जाते हैं वायरल फीवर के मामले? जानिए मौसम और सेहत का यह अहम संबंध

    बारिश से पहले क्यों बढ़ जाते हैं वायरल फीवर के मामले? जानिए मौसम और सेहत का यह अहम संबंध

    नई दिल्ली । बारिश से ठीक पहले का मौसम शरीर के लिए सबसे संवेदनशील माना जाता है। गर्मी के बाद जब अचानक हवा में नमी बढ़ती है, तापमान बार-बार ऊपर-नीचे होता है और वातावरण अस्थिर हो जाता है, तो वायरस और बैक्टीरिया को फैलने का बेहतर माहौल मिल जाता है। इसी वजह से इस समय वायरल फीवर, फ्लू और इंफेक्शन के मामले तेजी से बढ़ जाते हैं।

    इस मौसम में शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता भी थोड़ी कमजोर पड़ जाती है। दिन में गर्मी और रात में ठंडक के कारण शरीर एडजस्ट नहीं कर पाता, जिससे सर्दी-जुकाम, गले में दर्द और बुखार जैसी समस्याएं आम हो जाती हैं। इसके साथ ही नमी बढ़ने से मच्छरों की संख्या भी बढ़ती है, जिससे डेंगू और मलेरिया जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।

    सबसे ज्यादा असर छोटे बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर इम्यूनिटी वाले लोगों पर पड़ता है। गंदा पानी, बाहर का खाना और साफ-सफाई की कमी भी पेट से जुड़ी बीमारियों जैसे दस्त, उल्टी और फूड पॉइजनिंग को बढ़ावा देती है।

    कैसे करें बचाव

    इस मौसम में बचाव ही सबसे बड़ा उपाय है। घर के आसपास पानी जमा न होने दें ताकि मच्छर न पनपें। बाहर का खुला या बासी खाना खाने से बचें और हल्का, ताजा भोजन करें। पर्याप्त पानी पिएं और शरीर को हाइड्रेट रखें।

    बारिश में भीगने के बाद तुरंत कपड़े बदलना जरूरी है। बच्चों और बुजुर्गों का खास ध्यान रखें। अगर बुखार, कमजोरी या खांसी लंबे समय तक बनी रहे तो घरेलू उपायों पर निर्भर रहने की बजाय डॉक्टर से सलाह लें।

    थोड़ी सावधानी रखकर इस मौसम की कई गंभीर बीमारियों से आसानी से बचा जा सकता है।
    बारिश से पहले बदलते मौसम, नमी और कमजोर इम्युनिटी के कारण वायरल बीमारियां तेजी से फैलती हैं।

  • शनिवार व्रत के जरूरी नियम: शनि देव की कृपा पाने के लिए जानें सही विधि

    शनिवार व्रत के जरूरी नियम: शनि देव की कृपा पाने के लिए जानें सही विधि


    नई दिल्ली । हिंदू धर्म में शनिदेव को न्याय के देवता और कर्मफलदाता माना गया है। मान्यता है कि शनिदेव व्यक्ति को उसके कर्मों के अनुसार फल देते हैं। शनिवार के दिन विधिपूर्वक व्रत और पूजा करने से जीवन में चल रही बाधाएं कम होती हैं और सुख-शांति की प्राप्ति होती है। लेकिन यह व्रत तभी पूर्ण फल देता है जब इसके नियमों का सही तरीके से पालन किया जाए।

    शनिवार व्रत के महत्वपूर्ण निय
    शनिवार व्रत रखने वाले साधक को कुछ विशेष नियमों का पालन करना अनिवार्य माना गया है। व्रत के दौरान तामसिक भोजन जैसे मांस, मदिरा, प्याज और लहसुन का सेवन नहीं करना चाहिए। साथ ही किसी भी व्यक्ति का अपमान या बुरा बोलने से बचना चाहिए, क्योंकि शनिदेव कर्मों के आधार पर ही फल देते हैं। व्रत के दिन अन्न का सेवन न करने की परंपरा भी कई जगहों पर निभाई जाती है। व्रत समाप्ति यानी पारण के समय खिचड़ी और काली उड़द दाल का सेवन शुभ माना गया है।

    दान और सेवा का विशेष महत्व
    शनिवार के दिन दान का विशेष महत्व बताया गया है। इस दिन श्रद्धा अनुसार काले तिल, लोहे की वस्तुएं, कंबल, जूते-चप्पल और धन का दान करना अत्यंत फलदायी माना जाता है। ऐसा करने से शनि दोष का प्रभाव कम होता है और जीवन में सकारात्मकता आती है। गरीबों और जरूरतमंदों की सेवा करना भी शनिदेव को प्रसन्न करने का एक श्रेष्ठ उपाय माना गया है।

    पूजा विधि और मंत्र जाप
    शनिवार के दिन सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करने के बाद शनिदेव की पूजा करनी चाहिए। पूजा में शनि देव को काले तिल, फूल, धूप, दीप और सरसों का तेल अर्पित किया जाता है। पूजा के दौरान “ॐ शं शनैश्चराय नमः” और “शनि मंत्र” का जाप करना अत्यंत शुभ माना गया है। इसके बाद शनि चालीसा और आरती करने से पूजा पूर्ण फल देती है।

    शनि दोष से मुक्ति के विशेष उपाय
    ज्योतिष शास्त्र के अनुसार यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में शनि की ढैय्या या साढ़ेसाती चल रही हो तो शनिवार के दिन शनि कवच का पाठ करना लाभकारी माना गया है। इसके साथ ही लगातार आठ शनिवार तक सरसों का तेल शनिदेव को अर्पित करने से शनि दोष के प्रभाव में कमी आने की मान्यता है।

    शनिवार व्रत केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं बल्कि अनुशासन, संयम और कर्म सुधार का प्रतीक माना जाता है। यदि श्रद्धा और नियमों के साथ इस व्रत का पालन किया जाए तो जीवन में स्थिरता, सफलता और मानसिक शांति प्राप्त की जा सकती है।

  • क्या किचन स्पंज से होता है कैंसर? जानिए वायरल दावे की सच्चाई और असली खतरा क्या है

    क्या किचन स्पंज से होता है कैंसर? जानिए वायरल दावे की सच्चाई और असली खतरा क्या है

    नई दिल्ली । किचन में रोज इस्तेमाल होने वाला स्पंज या स्क्रबर अचानक चर्चा में है, क्योंकि सोशल मीडिया पर यह दावा तेजी से फैल रहा है कि यह कैंसर जैसी गंभीर बीमारी का कारण बन सकता है। इस दावे ने कई लोगों के बीच चिंता पैदा कर दी है, लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार यह पूरी तरह भ्रामक और वैज्ञानिक तथ्यों पर आधारित नहीं है।

    असल में किचन स्पंज का सबसे बड़ा मुद्दा कैंसर नहीं बल्कि उसमें पनपने वाले बैक्टीरिया हैं। जब स्पंज लंबे समय तक गीला रहता है और उसमें खाने के छोटे कण फंस जाते हैं, तो यह बैक्टीरिया के बढ़ने के लिए अनुकूल वातावरण बन जाता है। ऐसे में इसका उपयोग करने पर ये हानिकारक सूक्ष्मजीव बर्तनों और भोजन तक पहुंच सकते हैं, जिससे पेट से जुड़ी बीमारियां, फूड पॉइजनिंग, उल्टी और दस्त जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

    डॉक्टरों और वैज्ञानिकों का कहना है कि अब तक किसी भी विश्वसनीय शोध में यह साबित नहीं हुआ है कि किचन स्पंज सीधे तौर पर कैंसर का कारण बनता है। इसलिए इसे लेकर जो दावा वायरल हो रहा है, वह एक मिथक से ज्यादा कुछ नहीं है। कैंसर जैसी बीमारी के कारण जटिल और लंबे समय तक चलने वाली प्रक्रियाओं से जुड़े होते हैं, जिनका संबंध सामान्य घरेलू स्पंज से नहीं पाया गया है।

    विशेषज्ञ यह जरूर मानते हैं कि खराब किचन हाइजीन कई तरह के संक्रमणों को बढ़ावा दे सकती है। गंदा स्पंज बैक्टीरिया का स्रोत बन सकता है, जो खाने की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकता है। इसलिए इसे नियमित रूप से साफ करना और समय-समय पर बदलना जरूरी माना जाता है।

    सेहत विशेषज्ञों के अनुसार किचन स्पंज को कुछ हफ्तों के अंतराल पर बदल देना चाहिए और इस्तेमाल के बाद उसे पूरी तरह सूखने देना चाहिए। इसके अलावा गर्म पानी से समय-समय पर उसकी सफाई करना और अलग-अलग कामों के लिए अलग स्क्रबर का उपयोग करना भी बेहतर माना जाता है।

    कुल मिलाकर, किचन स्पंज से कैंसर होने का दावा वैज्ञानिक रूप से सही नहीं है, लेकिन साफ-सफाई की अनदेखी निश्चित रूप से स्वास्थ्य के लिए खतरा बन सकती है। इसलिए असली ध्यान डर पर नहीं, बल्कि सही हाइजीन आदतों पर देना चाहिए।

  • शनिवार व्रत के असरदार उपाय, शनि देव की कृपा पाने के लिए जानें सही तरीका

    शनिवार व्रत के असरदार उपाय, शनि देव की कृपा पाने के लिए जानें सही तरीका


    नई दिल्ली । ज्योतिष शास्त्र के अनुसार शनिवार का दिन न्याय के देवता शनि देव को समर्पित होता है। शनि कर्मों के अनुसार फल देते हैं, इसलिए इस दिन की गई पूजा और व्रत जीवन की बाधाओं को कम करने में मदद करता है। माना जाता है कि जो व्यक्ति श्रद्धा से शनिवार व्रत करता है, उसके कार्यों में रुकावटें कम होती हैं और भाग्य का साथ मिलने लगता है।

    शनिवार व्रत का आसान उपाय (सबसे असरदार तरीका)
    शनिवार के दिन एक बेहद सरल लेकिन प्रभावशाली उपाय बताया जाता है:

    पीपल के पेड़ के नीचे दीपक जलाना

    कैसे करें:
    शनिवार सुबह या शाम पीपल के पेड़ के पास जाएं
    सरसों के तेल का दीपक जलाएं
    उसमें एक काले तिल डाल दें
    “ॐ शं शनैश्चराय नमः” मंत्र का 108 बार जप करें
    पेड़ की 7 बार परिक्रमा करें

     शनिवार व्रत में क्या करें?
    काले कपड़े या गहरे रंग के वस्त्र पहनें
    शनि मंदिर में तेल चढ़ाएं
    जरूरतमंदों को काले तिल, कंबल या भोजन दान करें
    हनुमान चालीसा का पाठ करें (शनि देव प्रसन्न होते हैं)
    दिनभर संयम और अनुशासन बनाए रखें

    क्या नहीं करना चाहिए
    झूठ बोलने और विवाद से बचें
    मांसाहार और शराब से दूर रहें
    किसी का अपमान न करें
    क्रोध और जल्दबाजी से बचें
    शनिवार व्रत से मिलने वाले लाभ
    नौकरी और व्यवसाय में स्थिरता
    कोर्ट-कचहरी के मामलों में राहत
    आर्थिक परेशानियों में कमी
    मानसिक शांति और आत्मविश्वास में वृद्धि
    शनि दोष और साढ़ेसाती के प्रभाव में कमी

    शनिवार व्रत सिर्फ धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि अनुशासन और सकारात्मक कर्मों का प्रतीक है। यदि इसे श्रद्धा और सही विधि से किया जाए, तो जीवन में धीरे-धीरे बाधाएं कम होकर सफलता के रास्ते खुलने लगते हैं।

  • अधिकमास 2026 की शुरुआत: विवाह और मुंडन पर विराम, पूजा-पाठ रहेगा फलदायी

    अधिकमास 2026 की शुरुआत: विवाह और मुंडन पर विराम, पूजा-पाठ रहेगा फलदायी


    नई दिल्ली । हिंदू पंचांग के अनुसार, इस बार ज्येष्ठ मास में ही अधिकमास लग रहा है, जिसके कारण यह महीना सामान्य 30 दिनों का न होकर लगभग 60 दिनों तक चलेगा। 16 मई तक ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष रहेगा और 17 मई से अधिकमास की शुरुआत होगी। इसे पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है क्योंकि यह भगवान विष्णु को समर्पित माना जाता है। मान्यता है कि इस समय में किए गए धार्मिक कार्य कई गुना फल देते हैं।

    अधिकमास 2026 की तारीखें
     प्रारंभ: 17 मई 2026
    समाप्ति: 15 जून 2026
    सामान्य ज्येष्ठ मास: 22 मई से 29 जून 2026
    विशेष स्थिति: दोनों मास एक-दूसरे के साथ ओवरलैप करेंगे
    यह वर्ष 13 महीनों का माना जाएगा (हिंदू पंचांग अनुसार)
    कौन से कार्य रहेंगे वर्जित?

    अधिकमास को धार्मिक दृष्टि से “मलमास” भी कहा जाता है, इसलिए इस अवधि में कुछ मांगलिक कार्य नहीं किए जाते:
    विवाह संस्कार
    गृह प्रवेश
    मुंडन
    जनेऊ संस्कार
    नया व्यापार या शुभ शुरुआत
    मान्यता है कि इस समय किए गए शुभ कार्यों का अपेक्षित फल नहीं मिलता।

     अधिकमास में क्या करना शुभ माना जाता है?
    इस पवित्र महीने में धार्मिक कार्यों का विशेष महत्व होता है:

    पूजा-पाठ और मंत्र जाप
    भगवान विष्णु की आराधना
    सत्यनारायण कथा
    “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र जाप
    श्रीमद्भागवत और रामायण पाठ

     दान-पुण्य
    अनाज, कपड़े और धन का दान
    गरीबों और जरूरतमंदों की मदद
    मंदिरों में दान
    गायों को भोजन कराना
    विशेष धार्मिक कार्य
    तीर्थ स्नान
    शिवलिंग पर अभिषेक
    यज्ञ और अनुष्ठान
    ब्रजभूमि और तीर्थ स्थलों की यात्रा
    अधिकमास का धार्मिक महत्
    मान्यता है कि सौर और चंद्र कैलेंडर के अंतर को संतुलित करने के लिए हर कुछ वर्षों में एक अतिरिक्त महीना जोड़ा जाता है। इसी कारण इसे अधिकमास कहा जाता है।

    कथा के अनुसार, जब महीनों का बंटवारा हुआ तो अधिकमास को स्थान नहीं मिला, तब भगवान विष्णु ने इसे “पुरुषोत्तम मास” का नाम देकर अपना प्रिय मास घोषित किया।

    अधिकमास 2026 आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण समय है। यह अवधि भले ही मांगलिक कार्यों के लिए वर्जित हो, लेकिन पूजा, तप, दान और सेवा के लिए इसे सबसे शुभ माना गया है। जो लोग इस दौरान भक्ति और संयम से जीवन व्यतीत करते हैं, उन्हें विशेष आध्यात्मिक फल प्राप्त होता है।

  • शनिवार की सुबह करें ये 3 काम, दूर होंगी परेशानियां और बढ़ेगी सफलता

    शनिवार की सुबह करें ये 3 काम, दूर होंगी परेशानियां और बढ़ेगी सफलता


    नई दिल्ली । शनिवार का दिन शनि देव को समर्पित माना जाता है। वास्तु शास्त्र के अनुसार इस दिन सुबह कुछ सरल उपाय करने से जीवन में चल रही रुकावटें कम होती हैं और रुके हुए कामों में गति आने लगती है।

     1. घर के मुख्य द्वार की साफ-सफाई करें
    वास्तु शास्त्र में मुख्य द्वार को ऊर्जा का प्रवेश द्वार माना गया है।
    अगर यह जगह साफ और व्यवस्थित रहती है तो घर में सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है।

    क्या करें:
    सुबह उठकर दरवाजे की अच्छे से सफाई करें
    पानी छिड़ककर हल्के कपड़े से पोछा लगाएं
    चाहें तो हल्दी या कुमकुम से शुभ चिन्ह बनाएं

     2. पीपल के पेड़ के नीचे दीपक जलाए
    शनिवार को पीपल के पेड़ का विशेष महत्व माना जाता है।

    क्या करें:
    स्नान के बाद सरसों के तेल का दीपक जलाएं
    दीपक जलाते समय मन शांत रखें और अच्छी कामना करें
    यदि पेड़ न मिले तो घर के मंदिर में दीपक जला सकते हैं

     3. घर के कोनों से बेकार सामान हटाएं
    घर के कोनों में जमा कबाड़ और पुरानी चीजें नकारात्मक ऊर्जा बढ़ाती हैं।

    क्या करें:
    टूटे-फूटे सामान को हटा दें
    कोनों की अच्छे से सफाई करें
    घर को खुला और व्यवस्थित रखें
    इससे घर हल्का और सकारात्मक महसूस होता है।

    शनिवार की सुबह किए गए ये छोटे-छोटे उपाय जीवन में बड़ा बदलाव ला सकते हैं। साफ-सफाई, सकारात्मक सोच और श्रद्धा के साथ किए गए ये काम घर में शांति और स्थिरता लाने में मदद करते हैं।