Author: bharati

  • महंगाई मापने का आधार बदला… नई सीरीज में 299 की जगह 358 वस्तुएं, ई-कॉमर्स-ओटीटी भी शामिल

    महंगाई मापने का आधार बदला… नई सीरीज में 299 की जगह 358 वस्तुएं, ई-कॉमर्स-ओटीटी भी शामिल


    नई दिल्ली।
    खुदरा महंगाई (Retail Inflation) की गणना के लिए नई शृंखला (New Series) का आगाज गुरुवार को किया गया। इसके लिए आधार वर्ष को 2012 से बदलकर 2024 किया गया है। आधार वर्ष वह संदर्भ वर्ष होता है जिसे तुलना के लिए चुना जाता है। इसके माध्यम से यह आकलन किया जाता है कि कीमतों (Prices) में कितनी वृद्धि या कमी हुई है।


    कितने बाजार और कस्बे शामिल किए गए?

    नई सीरीज में 1,465 ग्रामीण बाजार और 1,395 शहरी बाजार शामिल हैं, जो 434 कस्बों में फैले हुए हैं। इसके अलावा, 25 लाख से अधिक आबादी वाले 12 कस्बों में 12 ऑनलाइन बाजार भी शामिल किए गए हैं। ग्रामीण और शहरी बाजारों से मूल्य डेटा मासिक आधार पर एकत्र किया गया, जबकि ऑनलाइन कीमतें साप्ताहिक आधार पर ली गई हैं।

    इसमें ऑनलाइन बाजार क्यों शामिल किए गए ?
    25 लाख से अधिक आबादी वाले 12 कस्बों में 12 ऑनलाइन बाजार शामिल किए गए हैं, ताकि ई-कॉमर्स और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर बिकने वाली वस्तुओं की कीमतों में बदलाव को दर्ज किया जा सके। इसके अलावा हवाई किराया, टेलीफोन और ओटीटी सेवाओं की कीमतें भी ऑनलाइन माध्यम से एकत्र की जा रही हैं।

    क्या बदलाव हुआ ?
    अखिल भारतीय स्तर पर भारित वस्तुओं की संख्या 299 से बढ़कर 358 हो गई है। इनमें वस्तुओं की संख्या 259 से बढ़कर 308 और सेवाओं की संख्या 40 से बढ़कर 50 हो गई है।

    मकान किराये के लिए आवासों का नमूना आकार क्या है?
    किराया संग्रह के लिए कुल 19,039 आवासों की पहचान की गई है, जिनमें 15,715 शहरी और 3,324 ग्रामीण आवास शामिल हैं। चेन-आधारित सूचकांक के उपयोग को देखते हुए भविष्य में, उपलब्धता के अनुसार और आवास जोड़े जा सकते हैं। इसमें ग्रामीण आवास का भार 11.764% है, जिसमें आवास, पानी, बिजली, गैस और अन्य ईंधन शामिल हैं।

    क्या हवाई किराए की कीमतों की गणना भी होगी?
    – हवाई किराए की कीमतें प्रसिद्ध ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से एकत्र की जाती हैं।

    क्या स्ट्रीमिंग सेवाओं की कीमतें भी शामिल?
    – अमेजन प्रइम वीडियो, नेटफ्लिक्स, जियो हॉटस्टर, सोनी लिव जैसी सेवाओं की कीमतें सीधे सेवा प्रदाताओं की वेबसाइट्स से ऑनलाइन एकत्र की जाती हैं।

    ‘खाद्य एवं पेय पदार्थ’ के भार में कितना बदलाव हुआ ?
    – यदि सीपीआई 2012 की वर्गीकरण प्रणाली अपनाई जाती, तो खाद्य एवं पेय पदार्थों का हिस्सा 45.86% से घटकर 40.10% हो जाता। नई वर्गीकरण संरचना के अनुसार इसका हिस्सा 36.75% है। यह बदलाव संयुक्त राष्ट्र सांख्यिकी प्रभाग के फ्रेमवर्क को अपनाने के कारण हुआ है।

  • फिच रिपोर्ट: भारत इस साल भी बना रहेगा एशिया की सबसे तेज अर्थव्यवस्था… 6.4% रहेगी रफ्तार

    फिच रिपोर्ट: भारत इस साल भी बना रहेगा एशिया की सबसे तेज अर्थव्यवस्था… 6.4% रहेगी रफ्तार


    नई दिल्ली।
    फिच रेटिंग्स (Fitch Ratings) की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक, भारत (India) 2026 में एशिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्था (Asia’s Fastest-Growing Major Economy) बना रहेगा। एजेंसी को उम्मीद है कि भारत की अर्थव्यवस्था 2026 में 6.4 प्रतिशत की दर से विस्तार करेगी, जो फिलीपींस, इंडोनेशिया और मलेशिया जैसे क्षेत्रीय देशों से आगे होगी।

    फिच ने कहा कि भारत, इंडोनेशिया और फिलीपींस की इकनॉमिक ग्रोथ पर ट्रेड पैटर्न में बदलाव का फिलहाल कम असर पड़ेगा, क्योंकि ये अपेक्षाकृत बंद अर्थव्यवस्थाएं हैं और इनका मैन्यूफैक्चरिंग एक्सपोर्ट्स कम है। भारत अमेरिकी टैरिफ के जोखिम को कम करने के लिए कई व्यापार समझौतों के जरिए अमेरिका के अलावा दूसरे देशों के साथ अपने व्यापार संबंध बढ़ा रहा है। हाल ही में उसने यूरोपीय संघ के साथ भी समझौता किया है।

    पिछले दो महीनों में भारत ने अमेरिका और यूरोपीय संघ के साथ सौदे किए हैं। अमेरिका के साथ यह समझौता 6 फरवरी को घोषित किया गया था। रेटिंग एजेंसी ने यह भी कहा कि अमेरिकी टैरिफ का वास्तविक असर अभी स्पष्ट नहीं है।


    नीति और वित्तीय सुधार: मजबूत बुनियाद की ओर

    नीतिगत मोर्चे पर फिच का कहना है कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) फिलहाल ब्याज दरों में बदलाव नहीं करेगा। दिसंबर में दर में कटौती के बाद अब RBI नीतिगत दर 5.25 प्रतिशत पर बनाए रख सकता है। रिपोर्ट के अनुसार, भारत ने वित्तीय पारदर्शिता बढ़ाई है और बजट में अधिक खर्च मदों को शामिल किया है। वहीं, तेज वृद्धि और वस्तु एवं सेवा कर (GST) लागू होने से राजस्व भी मजबूत हुआ है, जिससे मध्यम अवधि में सरकारी कर्ज में मामूली गिरावट की संभावना बढ़ी है। हालांकि, एजेंसी ने यह भी स्पष्ट किया कि कर्ज का जीडीपी अनुपात अभी भी उच्च स्तर पर बने रहने का अनुमान है।

    7.3 ट्रिलियन का सपना: कैसे बदल रही है इंडियन इकनॉमी
    भारत का इकनॉमिक ग्रोथ लगातार दुनिया का ध्यान खींच रहा है। दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में, देश 2030 तक 7.3 ट्रिलियन डॉलर की जीडीपी के साथ तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने के लक्ष्य पर आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रहा है। विकास की यह रफ्तार निर्णायक नीति-निर्माण, संरचनात्मक सुधारों और वैश्विक स्तर पर बढ़ते एकीकरण की मजबूती को दर्शाती है।

    तेज वृद्धि के साथ भारत ने एक बार फिर वैश्विक साथियों को पीछे छोड़ दिया है। यह उछाल मजबूत घरेलू मांग, नियंत्रित महंगाई और बढ़ती श्रम भागीदारी पर टिकी है। घरेलू निवेश में आई तेजी और निवेशकों के मजबूत विश्वास से स्थिर और व्यापक आधार वाली अर्थव्यवस्था की झलक मिलती है।


    जीडीपी आंकड़े: तेज छलांग का सबूत

    कुछ दिन पहले पीआईबी पर जारी एक रिपोर्ट में कहा गया है कि वित्त वर्ष 2025-26 की दूसरी तिमाही (जुलाई-सितंबर) में मुद्रास्फीति-समायोजित वास्तविक जीडीपी 8.2% बढ़ने का अनुमान है, जबकि पिछले वित्त वर्ष की इसी तिमाही में यह 5.6% थी। वहीं, चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में वास्तविक जीडीपी 7.8% की दर से बढ़ी, जो पिछले साल की समान तिमाही में 6.5% थी। सकल मूल्य वर्धन (जीवीए) के आंकड़े भी बताते हैं कि दूसरी तिमाही में प्राथमिक क्षेत्र में 3.1%, द्वितीयक क्षेत्र में 8.1% और सेवा क्षेत्र में 9.2% की वृद्धि दर्ज की गई।


    पहली छमाही में 8% की रफ्तार

    वित्त वर्ष 2025-26 की पहली छमाही (अप्रैल-सितंबर) में वास्तविक जीडीपी 8% की दर से बढ़ी है, जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में यह 6.1% थी। इस दौरान प्राथमिक क्षेत्र में 2.9% की मध्यम वृद्धि हुई, जबकि द्वितीयक (7.6%) और तृतीयक क्षेत्र (9.3%) ने लगातार शानदार विस्तार किया।

  • दुनिया का सबसे सस्ता पेट्रोल बेचने वाला देश… यहां 1 कप चाय से भी बेहद कम कीमत..

    दुनिया का सबसे सस्ता पेट्रोल बेचने वाला देश… यहां 1 कप चाय से भी बेहद कम कीमत..


    नई दिल्ली।
    दुनिया में सबसे सस्ता पेट्रोल (Cheapest Petrol) बेचने वाले देशों की लिस्ट में बड़े चौंकाने वाले तथ्य हैं। इन देशों में पेट्रोल की कीमत भारतीय नजरिए से न सिर्फ बहुत कम है, बल्कि कई में तो पेट्रोल की कीमत (Petrol-Price) भारत में बिकने वाले एक कप चाय (One Cup Tea) से भी सस्ती है। लीबिया (Libya) दुनिया में सबसे सस्ता पेट्रोल बेचने वाला देश है। यहां एक लीटर पेट्रोल की कीमत मात्र 2.15 रुपये है। यानी कए कप चाय की कीमत में करीब 5 लीटर पेट्रोल यहां मिल रहा है। भारत के अधिकतर शहरों में एक कप चाय की कीमत 10 से 15 रुपये के बीच है।

    इस लिस्ट में ईरान दूसरे स्थान पर है। यहां एक लीटर पेट्रोल की कीमत केवल 2.59 रुपये है। जबकि, सबसे महंगा तेल हांगकांग में 340.53 रुपये लीटर है। यह जानकारी ग्लोबलपेट्रोलप्राइसेज डॉट कॉम के 9 फरवरी 2026 के आंकड़ों पर आधारित है।


    दुनिया में सबसे सस्ता पेट्रोल बेचने वाले टॉप-10 देश

    देश और पेट्रोल की अनुमानित कीमत (₹)
    1. लीबिया ₹2.15
    2. ईरान ₹2.59
    3. वेनेजुएला ₹3.17
    4. अंगोला ₹29.63
    5. कुवैत ₹30.98
    6. अल्जीरिया ₹32.89
    7. तुर्कमेनिस्तान ₹38.78
    8. मिस्र ₹40.65
    9. कजाकिस्तान ₹45.06
    10. कतर ₹46.02
    स्रोत: globalpetrolprices.com


    आज पेट्रोल-डीजल के रेट में कोई बदलाव नहीं

    अगर भारत की बात करें तो आज ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने पेट्रोल-डीजल के दाम जारी कर दी हैं। पेट्रोल-डीजल के रेट में कोई बदलवा नहीं हुआ है। देश में सबसे सस्ता पेट्रोल आज भी पोर्ट ब्लेयर में ₹82.46 प्रति लीटर और डीजल ₹78.05 प्रति लीटर है। बता दें मार्च 2024 में पेट्रोल-डीजल के दाम ₹2 प्रति लीटर घटाए गए थे। इसके बाद अब तक कोई बदलाव नहीं हुआ है।

    भारत में सबसे सस्ता पेट्रोल बेचने वाले शहर
    पोर्ट ब्लेयर, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह: ₹82.46 प्रति लीटर
    ईटानगर, अरुणाचल प्रदेश: ₹90.87 प्रति लीटर
    सिलवासा, दादरा और नगर हवेली: ₹92.37 प्रति लीटर
    दमन, दमन और दीव: ₹92.55 प्रति लीटर
    हरिद्वार, उत्तराखंड: ₹92.78 प्रति लीटर
    रुद्रपुर, उत्तराखंड: ₹92.94 प्रति लीटर
    उना, हिमाचल प्रदेश: ₹93.27 प्रति लीटर
    देहरादून, उत्तराखंड: ₹93.35 प्रति लीटर
    नैनीताल, उत्तराखंड: ₹93.41 प्रति लीटर
    स्रोत: इंडियन ऑयल

    भारत में सबसे सस्ता डीजल बेचने वाले शहर
    पोर्ट ब्लेयर, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह: ₹78.05 प्रति लीटर
    इटानगर, अरुणाचल प्रदेश: ₹80.38 प्रति लीटर
    जम्मू, जम्मू और कश्मीर: ₹81.32 प्रति लीटर
    संबा, जम्मू और कश्मीर: ₹81.58 प्रति लीटर
    कठुआ, जम्मू और कश्मीर: ₹81.97 प्रति लीटर
    उधमपुर, जम्मू और कश्मीर: ₹82.15 प्रति लीटर
    चंडीगढ़: ₹82.44 प्रति लीटर
    राजौरी, जम्मू और कश्मीर: ₹82.64 प्रति लीटर
    स्रोत: इंडियन ऑयल

  • टी20 वर्ल्ड कप 2026: अभिषेक शर्मा ने दी हेल्थ अपडेट, पाकिस्तान मुकाबले से पहले फैंस में उत्सुकता

    टी20 वर्ल्ड कप 2026: अभिषेक शर्मा ने दी हेल्थ अपडेट, पाकिस्तान मुकाबले से पहले फैंस में उत्सुकता

    नई दिल्ली। टी20 वर्ल्ड कप 2026 में टीम इंडिया के युवा बल्लेबाज अभिषेक शर्मा की सेहत ने फैंस और टीम प्रबंधन की चिंता बढ़ा दी है। दिल्ली पहुँचने के बाद उनकी तबीयत बिगड़ गई और उन्हें पेट में इन्फेक्शन हुआ, जिसकी वजह से वह नामीबिया के खिलाफ मैच में नहीं खेल पाए। हालांकि वह टीम के साथ मौजूद थे और मैच की तैयारियों में हिस्सा लेते रहे।

    दिल्ली में हेड कोच गौतम गंभीर के घर आयोजित एक पार्टी में भी अभिषेक शामिल हुए थे, लेकिन वहां ही उन्हें महसूस हुआ कि उनकी तबीयत ठीक नहीं है। इसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती होना पड़ा। 11 फरवरी को अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद अभिषेक ने टीम के साथ अभ्यास शुरू किया।

    हाल ही में अभिषेक शर्मा ने खुद फैंस को अपनी हेल्थ अपडेट दी। एक वायरल वीडियो में अर्शदीप सिंह उनसे उनकी सेहत के बारे में पूछते हैं। इस पर अभिषेक ने कहा कि उनकी सेहत अब ठीक है, लेकिन उनका वजन थोड़ा कम हो गया है। अर्शदीप के सवाल आप पतले हो गए हो? पर उन्होंने मुस्कुराते हुए जवाब दिया, हाँ, सब ठीक है, लेकिन मेरा कुछ वजन घट गया।

    अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि पाकिस्तान के खिलाफ मुकाबले में अभिषेक खेल पाएंगे या नहीं। फिलहाल स्थिति स्पष्ट नहीं है। कप्तान सूर्या ने हाल ही में बयान दिया कि अभिषेक अभी पूरी तरह फिट नहीं हैं। टीम प्रबंधन और बीसीसीआई उनकी वापसी को लेकर कोई जल्दबाजी नहीं कर रहे हैं और स्वास्थ्य को प्राथमिकता दे रहे हैं।

    याद दिला दें कि अभिषेक शर्मा पहले ही यूएसए के खिलाफ मैच में बीमार थे और अपनी पहली ही गेंद पर आउट हो गए थे। इसके बावजूद दिल्ली में उन्हें अभ्यास करते हुए देखा गया, जो यह दर्शाता है कि वह वापसी के लिए पूरी मेहनत कर रहे हैं।

  • रूस ने व्हाट्सएप को किया पूरी तरह ब्लॉक… स्थानीय कानूनों के उल्लंघन का आरोप

    रूस ने व्हाट्सएप को किया पूरी तरह ब्लॉक… स्थानीय कानूनों के उल्लंघन का आरोप


    मास्को।
    रूस (Russia) ने मेटा (Meta) के स्वामित्व वाले मैसेजिंग प्लेटफॉर्म व्हाट्सएप (Messaging Platform Whatsapp) को स्थानीय कानूनों के कथित उल्लंघन के आरोप में ब्लॉक कर दिया है। क्रेमलिन ने गुरुवार को समाचार एजेंसी एएफपी से इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि यह निर्णय घरेलू कानूनों के अनुपालन न करने के कारण लिया गया है। क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव (Dmitry Peskov) ने प्रतिबंध के बारे में पूछे जाने पर कहा कि वास्तव में ऐसा निर्णय लिया गया और उसे लागू किया गया है। इस दौरान उन्होंने आरोप लगाया कि व्हाट्सएप ने रूसी कानून के मानदंडों और अक्षरशः पालन करने में अनिच्छा दिखाई, जिसके बाद यह कदम उठाया गया।

    इससे पहले व्हाट्सएप ने दावा किया था कि रूसी अधिकारी ऐप तक पहुंच को सीमित करने की कोशिश कर रहे हैं। कंपनी का यह बयान टेलीग्राम के संस्थापक पावेल दुरोव द्वारा मॉस्को पर अपने प्लेटफॉर्म की पहुंच बाधित करने का आरोप लगाने के तुरंत बाद आया।

    सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी एक बयान में व्हाट्सएप ने कहा था कि आज रूसी सरकार ने लोगों को सरकारी निगरानी ऐप की ओर धकेलने के प्रयास में व्हाट्सएप को पूरी तरह से ब्लॉक करने की कोशिश की। 10 करोड़ से अधिक उपयोगकर्ताओं को निजी और सुरक्षित संचार से अलग करने का प्रयास एक पिछड़ा कदम है और इससे रूस में लोगों की सुरक्षा में कमी आएगी। हम उपयोगकर्ताओं को जोड़े रखने के लिए हर संभव प्रयास जारी रखेंगे।

    रूसी समाचार एजेंसी TASS से बातचीत में पेस्कोव ने संकेत दिया कि यदि इसकी मूल कंपनी मेटा स्थानीय नियमों का पालन करती है तो प्लेटफॉर्म को बहाल किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि यह रूसी कानूनों के अनुपालन का मामला है। यदि मेटा अनुपालन करती है, तो वह रूसी अधिकारियों के साथ बातचीत करेगी और फिर समझौते की संभावना बन सकती है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अगर कंपनी अपने रुख पर कायम रहती है और रूसी कानूनों का पालन करने में अनिच्छा दिखाती है, तो बहाली की संभावना नहीं होगी।

    इस बीच सरकारी एजेंसी TASS ने रिपोर्ट दी कि रूस के दूरसंचार नियामक Roskomnadzor ने राष्ट्रीय कानून के कथित उल्लंघन के आरोप में व्हाट्सएप की गति धीमी करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। रूसी अधिकारियों का दावा है कि इस प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल आतंकवादी गतिविधियों के आयोजन और क्रियान्वयन के लिए किया गया है। साथ ही इसे रूसी नागरिकों को निशाना बनाकर धोखाधड़ी और जबरन वसूली के प्रमुख माध्यमों में से एक बताया गया है।

    रिपोर्टों के अनुसार, सरकार समर्थित विकल्प ‘मैक्स’ नामक ऐप को रूस में बेचे जाने वाले सभी नए स्मार्टफोन और टैबलेट में पहले से इंस्टॉल करना अनिवार्य किया गया है। इस ऐप के जरिए उपयोगकर्ता संदेश भेजने, पैसे ट्रांसफर करने और ऑडियो-वीडियो कॉल करने जैसी सुविधाएं प्राप्त कर सकते हैं।

  • माइक्रोसॉफ्ट AI के CEO ने मचाई दुनिया में हलचल… बोले- 12 से 18 माह में व्हाइट-कॉलर जॉब्स की जगह ले लेगा AI

    माइक्रोसॉफ्ट AI के CEO ने मचाई दुनिया में हलचल… बोले- 12 से 18 माह में व्हाइट-कॉलर जॉब्स की जगह ले लेगा AI


    नई दिल्ली।
    माइक्रोसॉफ्ट एआई (Microsoft AI) के सीईओ मुस्तफा सुलेमान (CEO Mustafa Suleiman) का ताजा बयान एआई की दुनिया में तहलका मचा रहा है। फाइनेंशियल टाइम्स को दिए एक इंटरव्यू में सुलेमान ने चेतावनी दी है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) अगले 12 से 18 महीनों के भीतर अधिकांश व्हाइट-कॉलर नौकरियों (White-Collar Jobs) के ज्यादातर कामों को पूरी तरह से स्वचालित (ऑटोमेट) कर देगी। उन्होंने कहा कि व्हाइट-कॉलर जॉब्स, यानी वे काम जो लोग कंप्यूटर के सामने बैठकर करते हैं, चाहे वो वकील हों, चार्टर्ड अकाउंटेंट, प्रोजेक्ट मैनेजर या मार्केटिंग प्रोफेशनल, इनमें से अधिकांश टास्क अगले 12-18 महीनों में एआई द्वारा पूरी तरह ऑटोमेट हो जाएंगे।


    एआई की मदद से कोडिंग

    उन्होंने सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग का उदाहरण देते हुए बताया कि अब इंजीनियर एआई की मदद से अपना अधिकांश कोड बनवा रहे हैं। उनकी भूमिका अब ‘रणनीतिक’ कार्यों जैसे आर्किटेक्चर डिजाइन करने और उत्पादन में लाने की ओर स्थानांतरित हो गई है। सुलेमान के अनुसार, यह बदलाव पिछले छह महीनों में ही देखने को मिला है। इसके अलावा, उन्होंने कहा कि आज मौजूद एआई मॉडल अधिकांश मानव कोडर्स से बेहतर कोडिंग कर सकते हैं, शायद अब तक के सभी कोडर्स से भी बेहतर। उन्होंने जोर देकर कहा कि नए एआई मॉडल बनाना अब ‘पॉडकास्ट बनाने या ब्लॉग लिखने’ जितना आसान हो जाएगा। संस्थान और संगठन अपनी जरूरतों के अनुसार खुद एआई डिजाइन कर सकेंगे। इस दौरान उन्होंने यह भी बताया कि अगले दो से तीन वर्षों में एआई एजेंट बड़े संस्थानों के वर्कफ्लो को और भी कुशलता से संभालने में सक्षम हो जाएंगे।


    माइक्रोसॉफ्ट का सुपरइंटेलिजेंस मिशन

    अपने विजन के बारे में बात करते हुए सुलेमान ने कहा कि माइक्रोसॉफ्ट का लक्ष्य एक सुपरइंटेलिजेंस का निर्माण करना है। उन्होंने बताया कि कुछ महीने पहले कंपनी ने ओपनएआई के साथ दीर्घकालिक समझौते को फिर से बातचीत करके 2032 तक आईपी लाइसेंस बढ़ा दिया है। उन्होंने कहा कि हमने यह भी तय किया है कि अब वास्तविक एआई आत्मनिर्भरता हासिल करने का समय आ गया है। सुलेमान ने माइक्रोसॉफ्ट के अपने स्वतंत्र बेसिक एआई मॉडल विकसित करने की योजना पर चर्चा की, जिसमें मजबूत प्रशिक्षण टीम होगी और डेटा को व्यवस्थित व क्रमबद्ध तरीके से तैयार किया जाएगा।

    माइक्रोसॉफ्ट एआई प्रमुख की ये टिप्पणियां ऐसे समय में आई हैं जब एआई के कारण मानव कार्यों के प्रतिस्थापित होने और बड़े पैमाने पर छंटनी की चिंताएं बढ़ रही हैं। इससे पहले अमेजन ने एक ब्लॉग पोस्ट में कहा था कि एआई से जुड़ी बढ़ती प्रतिस्पर्धा के कारण लगभग 16000 कंपनियों की नौकरियां प्रभावित हो सकती हैं। पिछले साल माइक्रोसॉफ्ट ने एक ब्लॉग पोस्ट में बताया था कि उसने ओपनएआई के साथ नए समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं, जो दोनों संगठनों के बीच मजबूत होती साझेदारी पर आधारित है। इस समझौते के तहत ओपनएआई माइक्रोसॉफ्ट का प्रमुख मॉडल पार्टनर बना रहेगा और दोनों कंपनियों के बीच अनन्य बौद्धिक संपदा अधिकारों का विस्तार होगा।

  • बांग्लादेश चुनाव में गठबंधन के साथ आगे चल रही BNP…. नतीजों पर भारत की पैनी नजर

    बांग्लादेश चुनाव में गठबंधन के साथ आगे चल रही BNP…. नतीजों पर भारत की पैनी नजर


    नई दिल्ली।
    बांग्लादेश चुनाव (Bangladesh Elections) पर भारत (India) की पैनी नजर बनी हुई है। हालांकि, विदेश मंत्रालय ने बताया है कि पड़ोसी मुल्क के निमंत्रण के बाद भी भारत (India) की तरफ से पर्यवेक्षक (Supervisor) नहीं भेजे गए थे। साथ ही सरकार ने इसकी वजह भी बताई है। ताजा आंकड़े बता रहे हैं कि तारिक रहमान (Tariq Rahman) की अगुवाई वाली बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (Bangladesh Nationalist Party) और गठबंधन के साथ चुनाव में आगे चल रहे हैं।


    भारत ने क्यों नहीं भेजे पर्यवेक्षक

    विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, ‘हमें पर्यवेक्षक भेजने का निमंत्रण मिला था। हमने बांग्लादेश में अपने पर्यवेक्षकों को नहीं भेजा है।’ उन्होंने कहा, ‘बांग्लादेश में चुनाव हे रहा है। हमें चुनाव परिणामों का इंतजार करना चाहिए ताकि पता चल सके कि किस तरह का जनादेश आया है…और उसके बाद हम सामने आने वाले मुद्दों पर विचार करेंगे। चुनाव के संबंध में, आप जानते हैं कि हमारा रुख क्या रहा है। हम बांग्लादेश में स्वतंत्र, निष्पक्ष, समावेशी और विश्वसनीय चुनावों के पक्षधर हैं।’

    करीब 81 स्थानीय संगठनों के 55,454 पर्यवेक्षकों ने चुनाव की निगरानी की, जबकि विदेशी चुनाव पर्यवेक्षकों की संख्या 394 रही। अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों में से 80 अलग-अलग अंतरराष्ट्रीय संगठनों की तरफ से हैं, जबकि बाकी अलग-अलग देशों से हैं, जिनमें स्वतंत्र यूरोपीय पर्यवेक्षक भी शामिल हैं।


    किसके पक्ष में जा रहा है चुनाव

    मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कुल 299 सीटों में से 174 निर्वाचन क्षेत्रों में मतगणना पूरी हो चुकी है। वहीं, 125 अभी बाकी हैं। बीएनपी और गठबंधन 135 पर आगे चल रहा है। वहीं, जमात और गठबंधन 34 पर आगे है। इस्लामी आंदोलन बांग्लादेश 1 सीट पर आगे है। अन्य 4 पर बढ़त बनाए हुए है।


    बांग्लादेश चुनाव

    इस चुनाव में दो पूर्व सहयोगी दलों बीएनपी और जमात-ए-इस्लामी के नेतृत्व वाले गठबंधनों के बीच सीधा मुकाबला है। जनमत सर्वेक्षणों में बीएनपी को मामूली बढ़त दी गई थी। गुरुवार को मुल्क की 300 में से 299 सीटों पर 60 फीसदी से ज्यादा मतदान हुआ था। खास बात है कि अगस्त 2024 में हुई हिंसा और शेख हसीना सरकार के गिरने के बाद पहली बार आम चुनाव हो रहे हैं।


    शेख हसीना की पार्टी का नाम ही नहीं

    बांग्लादेश के मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार ने शेख हसीना की अवामी लीग को पिछले साल भंग कर दिया था और पार्टी के चुनाव लड़ने पर रोक लगा दी थी। बांग्लादेश में 30 साल के इतिहास में यह पहली बार है जब हसीना की अवामी लीग का चुनाव चिन्ह ‘नाव’ मतपत्र पर नहीं दिखाई दिया।

  • MP: रेप केस में पुलिस की कार्यप्रणाली पर HC ने जताई नाराजगी, लगाई फटकार

    MP: रेप केस में पुलिस की कार्यप्रणाली पर HC ने जताई नाराजगी, लगाई फटकार


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश हाईकोर्ट (Madhya Pradesh High Court) ने दुष्कर्म मामले में सुनवाई के दौरान पुलिस की कार्यप्रणाली (Police Working) पर कड़ी नाराजगी जताई है। जस्टिस जीएस अहलूवालिया की एकलपीठ ने डीएनए रिपोर्ट (DNA Report) में आरोपी के निर्दोष पाए जाने के बावजूद असली आरोपी की तलाश शुरू न करने पर पुलिस विभाग को आड़े हाथों लिया। कोर्ट ने डीजीपी से पूछा कि क्या उनके अधीनस्थ अधिकारियों को दोबारा प्रशिक्षण की जरूरत है या आम जनता ऐसे ही पुलिस की कानूनी जानकारी की कमी का खामियाजा भुगतती रहे।

    बार एंड बेंच में छपी खबर के मुताबिक, मामला बैतूल जिले का है। आरोपी को 10 अक्टूबर 2025 को गिरफ्तार किया गया था और उसके खिलाफ चालान पेश किया जा चुका था। दिसंबर 2025 में आई डीएनए रिपोर्ट में स्पष्ट हुआ कि आरोपी नाबालिग पीड़िता से जन्मे बच्चे का जैविक पिता नहीं है। इसके बावजूद पुलिस ने वास्तविक आरोपी की पहचान और गिरफ्तारी के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया।


    अदालत की टिप्पणी- पुलिस अधिकारियों को प्रशिक्षण की जरूरत

    10 फरवरी को जमानत अर्जी पर सुनवाई के दौरान कोर्ट ने बैतूल के पुलिस अधीक्षक वीरेंद्र जैन से पूछा कि डीएनए रिपोर्ट के बाद आगे क्या कार्रवाई की गई। कोर्ट ने पाया कि एसपी संतोषजनक जवाब नहीं दे सके। आदेश में कहा गया कि यह स्थिति राज्य के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के प्रशिक्षण पर गंभीर सवाल खड़े करती है।


    डीएनए जांच में आरोपी को क्लीन चिट

    कोर्ट ने यह भी उल्लेख किया कि दो अन्य दुष्कर्म मामलों में भी शुरुआती तौर पर गिरफ्तार किए गए आरोपी बाद में डीएनए जांच में निर्दोष पाए गए, लेकिन पुलिस ने समय रहते वास्तविक आरोपियों की तलाश में सक्रियता नहीं दिखाई। पीठ ने टिप्पणी की कि ऐसा प्रतीत होता है कि पुलिस विभाग अपनी कार्यप्रणाली में सुधार को लेकर गंभीर नहीं है।

    हालांकि, कोर्ट ने एसपी के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई का आदेश नहीं दिया, बल्कि डीजीपी से यह विचार करने को कहा कि क्या विभाग को सक्षम और विधिक रूप से प्रशिक्षित अधिकारियों की आवश्यकता है? कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि आगे की जांच ट्रायल कोर्ट से अनुमति लेकर की जाए, क्योंकि चार्जशीट दाखिल होने के बाद आगे की जांच के लिए न्यायालय की अनुमति आवश्यक है, जैसा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्णयों में निर्धारित है।


    जमानत अर्जी खारिज

    कोर्ट ने कहा कि चूंकि बच्चा जीवित है, इसलिए सभी संभावित संदिग्धों के रक्त नमूने लेकर जैविक पिता की पहचान सुनिश्चित की जाए। जहां तक जमानत का सवाल है, कोर्ट ने आरोपी की याचिका खारिज कर दी। पीठ ने कहा कि केवल डीएनए रिपोर्ट के आधार पर पीड़िता के बयान को खारिज नहीं किया जा सकता। चूंकि अभी पीड़िता का साक्ष्य दर्ज नहीं हुआ है, इसलिए इस स्तर पर आरोपी को जमानत नहीं दी जा सकती। बता दें कि आरोपी की ओर से अधिवक्ता प्रदीप सिंह चौहान ने पैरवी की, जबकि राज्य की ओर से शासकीय अधिवक्ता स्वाति जॉर्ज उपस्थित रहीं।

  • महाराष्ट्रः मनसे नेता देशपांडे ने उद्धव गुट के पार्षदों पर लगाए गंभीर आरोप… बोले- एक-एक करोड़ में बिके

    महाराष्ट्रः मनसे नेता देशपांडे ने उद्धव गुट के पार्षदों पर लगाए गंभीर आरोप… बोले- एक-एक करोड़ में बिके


    मुम्बई।
    महाराष्ट्र (Maharashtra) में पंचायत और नगर निकाय चुनाव (Panchayat and Municipal Elections) अब खत्म हो चुके हैं। चुनावों के खत्म होने के बाद ठाकरे बंधुओं की पार्टियों के बीच में एक बार फिर से तनाव देखने को मिल रहा है। राज ठाकरे (Raj Thackeray) की महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के नेता संदीप देशपांडे ने गुरुवार को आरोप लगाया कि चंद्रपुर में शिवसेना (उबाठा) के पार्षदों ने महापौर चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का समर्थन करने के लिए एक-एक करोड़ रुपये प्राप्त किए। हालांकि, उद्धव गुट (Uddhav Group) और भाजपा की तरफ से इन आरोपों को खारिज कर दिया गया है।

    महाविकास आघाडी (एमवीए) गठबंधन में शामिल कांग्रेस और शिवसेना (उबाठा) के बीच उस समय से तनातनी चल रही है जब कांग्रेस के सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरने के बावजूद, शिवसेना (उबाठा) पार्षदों के समर्थन से चंद्रपुर नगर निगम में भाजपा प्रत्याशी महापौर चुन लिया गया।

    राज ठाकरे के नेतृत्व वाली मनसे की मुंबई इकाई के अध्यक्ष देशपांडे ने उद्धव गुट को आड़े हाथों लिया। कल्याण डोंबिवली स्थानीय निकाय में मनसे नेताओं द्वारा शिवसेना शिंदे गुट का समर्थन करने पर संजय राउत द्वारा की गई आलोचना का जिक्र कते हुए उन्होंने कहा कि जब शिवसेना (उबाठा) भाजपा का समर्थन करती है तो उसे सही आचरण माना जाता है लेकिन जब मनसे ऐसा करती है तो उसे गलत ठहराया जाता है। देशपांडे ने दावा किया, “चंद्रपुर में शिवसेना (उबाठा) के प्रत्येक पार्षद को एक करोड़ रुपये मिले, इसके अलावा अन्य प्रस्ताव भी दिए गए। एक निर्दलीय पार्षद को 50 लाख रुपये दिए गए।”

    मुंबई में हुए निकाय चुनाव में शिवसेना (उबाठा) और मनसे ने गठबंधन करके चुनाव लड़ा था लेकिन वे भाजपा-शिवसेना गठजोड़ को बृहन्मुंबई महानगरपालिका पर नियंत्रण हासिल करने से नहीं रोक सके। शिवसेना (उबाठा) के चंद्रपुर जिला अध्यक्ष संदीप गिरहे ने कहा कि यदि देशपांडे पार्षदों को धन मिलने के आरोप का प्रमाण पेश कर दें तो वह इस्तीफा दे देंगे। उन्होंने स्थानीय कांग्रेस नेताओं पर शिवसेना (उबाठा) नेतृत्व का अपमान करने का भी आरोप लगाया।

    देशपांडे ने संजय राउत पर भी निशाना साधते हुए पूछा कि चंद्रपुर में हुए घटनाक्रम के दौरान क्या उन्हें अंधेरे में रखा गया था या उन्होंने आंखों पर पट्टी बांध रखी थी। वरिष्ठ भाजपा नेता सुधीर मुनगंटीवार ने कहा कि देशपांडे के आरोपों को कोई गंभीरता से नहीं ले रहा और यह शिवसेना (उबाठा) और मनसे के बीच बढ़ती दूरी को दर्शाता है। इसी बीच, संजय राउत ने बृहस्पतिवार को मुंबई में मनसे प्रमुख राज ठाकरे से मुलाकात की। राउत ने संवाददाताओं से कहा कि चंद्रपुर में हुए घटनाक्रम के लिए कांग्रेस जिम्मेदार है और उसे स्थानीय शिवसेना (उबाठा) पार्षदों के साथ अधिक गंभीरता से चर्चा करनी चाहिए थी।

  • रूस से 288 S-400 मिसाइलों की खरीदी करेगा भारत… DAC ने दी मंजूरी…

    रूस से 288 S-400 मिसाइलों की खरीदी करेगा भारत… DAC ने दी मंजूरी…


    नई दिल्ली।
    रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह (Defence Minister Rajnath Singh) की अध्यक्षता में रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) ने रूस (Russia) से 288 S-400 मिसाइलों (S-400 Missiles) की खरीद को आवश्यक स्वीकृति (AoN) प्रदान कर दी है। इन मिसाइलों की अनुमानित लागत 10,000 करोड़ है। यह निर्णय मई 2025 में हुए ‘ऑपरेशन सिंदूर (Operation Sindoor)’ के दौरान इस्तेमाल की गई मिसाइलों के स्टॉक को फिर से भरने और देश की हवाई रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने के लिए लिया गया है। सूत्रों के अनुसार, DAC द्वारा मंजूर की गई AoN में 120 छोटी दूरी वाली और 168 लंबी दूरी वाली मिसाइलें शामिल हैं। इन मिसाइलों की खरीद फास्ट ट्रैक प्रोसीजर के माध्यम से की जाएगी।

    इसके अतिरिक्त, भारत को पहले से अनुबंधित दो और S-400 सिस्टम इसी साल जून और नवंबर में मिलने वाले हैं। वायुसेना S-400 के साथ-साथ पैंटसिर छोटी दूरी वाली प्रणाली को खरीदने का प्रस्ताव भी रख रही है, जो ड्रोन और कामिकेज़ ड्रोन से निपटने में प्रभावी है।


    ऑपरेशन सिंदूर में S-400 की भूमिका

    S-400 मिसाइलों का स्टॉक बढ़ाना इसलिए जरूरी समझा गया क्योंकि भारतीय सशस्त्र बलों ने मई 2025 में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान इनका व्यापक उपयोग किया था। इन मिसाइलों ने पाकिस्तानी लड़ाकू विमानों, अर्ली वार्निंग एयरक्राफ्ट और सशस्त्र ड्रोन को मार गिराया था।

    खास बात यह है कि जब भारत ने S-400 मिसाइल का उपयोग करके पाकिस्तान के पंजाब में 314 किमी की दूरी पर एक बड़े विमान को मार गिराया, तो पाकिस्तान ने अपने लगभग सभी ऑपरेशनल विमानों को अफगानिस्तान और ईरान के पास के हवाई अड्डों पर स्थानांतरित कर दिया था। अदमपुर और भुज सेक्टर में तैनात S-400 सिस्टम के डर से 9-10 मई को पाकिस्तानी वायुसेना ने कोई कार्रवाई नहीं की।


    रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया

    भारत की रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया सख्त निगरानी सुनिश्चित करने के लिए कई चरणों से गुजरती है। ‘स्टेटमेंट ऑफ केस’ से शुरू होकर, यह प्रस्ताव रक्षा खरीद बोर्ड और फिर DAC तक जाता है, जिसके बाद कीमत पर बातचीत होती है। अंतिम मंजूरी सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति (CCS) द्वारा दी जाती है।

    गुरुवार को, रक्षा मंत्री ने कुल ₹3.60 लाख करोड़ से अधिक के विभिन्न प्रस्तावों को AoN दी। इसमें राफेल फाइटर जेट, कॉम्बैट मिसाइल और हाई एल्टीट्यूड स्यूडो-सैटेलाइट की खरीद। अधिकांश लड़ाकू विमान भारत में ही बनाए जाएंगे। एंटी-टैंक माइन्स (विभव) और टैंकों व लड़ाकू वाहनों (BMP-II) का ओवरहाल। मरीन गैस टर्बाइन-आधारित इलेक्ट्रिक पावर जनरेटर और P-8I लंबी दूरी के समुद्री टोही विमान।