Author: bharati

  • गल्फ जायंट्स को मिला नया कोच: साइमन हेल्मोट की हुई ILT20 2026 टीम में एंट्री

    गल्फ जायंट्स को मिला नया कोच: साइमन हेल्मोट की हुई ILT20 2026 टीम में एंट्री


    नई दिल्ली । यूएई की इंटरनेशनल लीग टी20 (ILT20) 2026 सीजन से पहले अदाणी स्पोर्ट्सलाइन ने अपनी टीम गल्फ जायंट्स के लिए बड़ा बदलाव करते हुए अनुभवी ऑस्ट्रेलियाई कोच साइमन हेल्मोट को नया हेड कोच नियुक्त किया है।

    हेल्मोट के पास दो दशकों से अधिक का अंतरराष्ट्रीय और फ्रेंचाइजी क्रिकेट अनुभव है। वे लंबे समय से इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) में सनराइजर्स हैदराबाद के साथ जुड़े रहे हैं और कई बड़ी टी20 लीगों में टीमों को सफलता दिलाने में अहम भूमिका निभा चुके हैं।

    कोचिंग करियर में उन्होंने ऑस्ट्रेलिया, कैरेबियन और यूएई की कई टीमों के साथ काम किया है। हाल ही में उन्होंने विमेंस बिग बैश लीग में मेलबर्न रेनेगेड्स को 2024 में पहला खिताब जिताने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

    नियुक्ति के बाद साइमन हेल्मोट ने कहा कि वे गल्फ जायंट्स के साथ जुड़कर बेहद उत्साहित हैं और टीम के दीर्घकालिक विकास व प्रतिस्पर्धी प्रदर्शन पर काम करेंगे।

    वहीं अदाणी एंटरप्राइजेज के निदेशक प्रणव अदाणी ने कहा कि हेल्मोट का अनुभव और नेतृत्व क्षमता टीम के भविष्य के विजन के अनुरूप है और उनसे आगामी सीजन में मजबूत प्रदर्शन की उम्मीद है। गल्फ जायंट्स ने पूर्व हेड कोच जोनाथन ट्रॉट का भी धन्यवाद किया और उनके योगदान की सराहना की।

  • पैपराजी की बदसलूकी और सितारों की चुप्पी: आयुष्मान खुराना, सारा और रकुल पर क्यों भड़क गए फैंस?

    पैपराजी की बदसलूकी और सितारों की चुप्पी: आयुष्मान खुराना, सारा और रकुल पर क्यों भड़क गए फैंस?

    नई दिल्ली ।  बॉलीवुड के गलियारों में अक्सर सितारों और पैपराजी के बीच नोकझोंक की खबरें आती रहती हैं, लेकिन कभी-कभी ये घटनाएं सोशल मीडिया पर बड़े विवाद का रूप ले लेती हैं। हाल ही में फिल्म ‘पति पत्नी और वो 2’ की स्टार कास्ट-आयुष्मान खुराना, सारा अली खान, वामिका गब्बी और रकुल प्रीत सिंह-एक वीडियो की वजह से लोगों के निशाने पर आ गए हैं। दरअसल, फिल्म के प्रमोशन के दौरान सितारों के साथ मैशबल इंडिया के मशहूर होस्ट सिद्धार्थ आलमबायन भी मौजूद थे। सभी मिलकर वड़ा पाव का लुत्फ उठा रहे थे, तभी वहां मौजूद कुछ फोटोग्राफर्स सिद्धार्थ पर भद्दे कमेंट्स करने लगे क्योंकि वे स्टार्स की फोटो के बीच में आ रहे थे।

    वायरल हो रहे इस वीडियो में साफ सुना जा सकता है कि पैपराजी सितारों को कैप्चर करने के चक्कर में सिद्धार्थ को वहां से हटने के लिए चिल्ला रहे थे। हद तो तब हो गई जब एक फोटोग्राफर ने उन्हें ‘वड़ा पाव’ कहकर संबोधित किया और वहां से हटने को कहा। शुरुआत में सिद्धार्थ ने इन कमेंट्स को नजरअंदाज किया, लेकिन जब पानी सिर से ऊपर चला गया, तो उन्होंने कड़े लहजे में जवाब देते हुए कहा कि ‘प्यार से बोलो भाई, ऐ-ऐ मत करो।’ हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम के दौरान वहां मौजूद बड़े सितारे चुप्पी साधे रहे, जिसे देख सोशल मीडिया यूजर्स का गुस्सा फूट पड़ा।

    इंटरनेट पर लोग इस बात को लेकर सबसे ज्यादा नाराज हैं कि आयुष्मान खुराना, रकुल प्रीत सिंह और सारा अली खान जैसे स्थापित कलाकारों ने उस वक्त सिद्धार्थ का बचाव क्यों नहीं किया। कमेंट सेक्शन में लोग सवाल उठा रहे हैं कि जब आपके सामने किसी सह-कर्मी या होस्ट का अपमान हो रहा हो, तो एक स्टार के तौर पर आपकी जिम्मेदारी बनती है कि आप उसे रोकें। कई यूजर्स ने लिखा कि ये सितारे स्क्रीन पर तो बड़ी-बड़ी नैतिकता की बातें करते हैं, लेकिन असल जिंदगी में अपने साथ खड़े शख्स के लिए आवाज तक नहीं उठा पाए। इस ‘साइलेंट रिएक्शन’ की वजह से कलाकारों को ‘क्लास’ लगाई जा रही है और उनकी संवेदनशीलता पर सवाल खड़े किए जा रहे हैं।

    यह विवाद ऐसे समय में आया है जब आयुष्मान खुराना की फिल्म ‘पति पत्नी और वो 2’ 15 मई को सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है। मुदस्सर अजीज के निर्देशन में बनी यह फिल्म साल 2019 की सुपरहिट फिल्म ‘पति पत्नी और वो’ का सीक्वल है। फिल्म को लेकर पहले से ही यह चर्चा थी कि क्या यह बेवफाई जैसे विषयों को बढ़ावा दे रही है, जिस पर आयुष्मान ने स्पष्ट किया था कि उनका किरदार ‘प्रजापति पांडे’ एक पूरी तरह से समर्पित और पत्नी से प्यार करने वाला व्यक्ति है। उन्होंने यह भी भरोसा दिलाया था कि वे कभी किसी गलत संदेश वाली फिल्म का हिस्सा नहीं बनेंगे।

    बहरहाल, फिल्म के बॉक्स ऑफिस प्रदर्शन और क्रिटिक्स की प्रतिक्रिया के बीच इस प्रमोशनल विवाद ने फिल्म की टीम के लिए एक नई चुनौती खड़ी कर दी है। जहाँ फिल्म की रिलीज का इंतजार काफी समय से हो रहा था, वहीं इस घटना ने सितारों की छवि पर थोड़ा दाग जरूर लगाया है। अब देखना यह होगा कि क्या आयुष्मान या फिल्म की बाकी टीम इस बढ़ते गुस्से पर कोई सफाई देती है या नहीं। फिलहाल, सोशल मीडिया पर सिद्धार्थ आलमबायन के समर्थन में लोग खड़े नजर आ रहे हैं और पैपराजी के व्यवहार की कड़ी निंदा कर रहे हैं।

  • राजस्थान की गर्म हवाओं का असर: सागर में पारा 43°C पार, लू का अलर्ट

    राजस्थान की गर्म हवाओं का असर: सागर में पारा 43°C पार, लू का अलर्ट


    नई दिल्ली । सागर शहर इन दिनों भीषण गर्मी की चपेट में है। राजस्थान की ओर से आ रही गर्म हवाओं ने पूरे वातावरण को और अधिक तप्त बना दिया है, जिससे दिन के साथ-साथ रातें भी गर्म महसूस की जा रही हैं।

    शुक्रवार को सुबह से ही तेज धूप और गर्म हवाओं का असर देखने को मिला। दोपहर तक हालात ऐसे हो गए कि बाजारों में सन्नाटा पसर गया और लोग घरों में कैद रहने को मजबूर हो गए।

    मौसम विभाग के अनुसार सागर का अधिकतम तापमान 43.6 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 27.9 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि सक्रिय मौसमीय सिस्टम और ट्रफ लाइन की वजह से हवा भट्टी जैसी गर्म हो रही है।

    राजस्थान से आने वाली गर्म हवाएं स्थिति को और गंभीर बना रही हैं, जिससे लू चलने की संभावना भी बढ़ गई है। अनुमान है कि रात का तापमान भी 30 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है।

    मौसम विभाग ने लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। दोपहर 12 से 3 बजे के बीच विशेष सावधानी बरतने, पर्याप्त पानी पीने, हल्के कपड़े पहनने और बच्चों व बुजुर्गों का विशेष ध्यान रखने की अपील की गई है।

  • लखनऊ में आजम परिवार की अखिलेश यादव से मुलाकात, प्रतीक यादव के निधन पर जताया शोक

    लखनऊ में आजम परिवार की अखिलेश यादव से मुलाकात, प्रतीक यादव के निधन पर जताया शोक



    नई दिल्ली। लखनऊ में समाजवादी राजनीति के बीच शुक्रवार को भावनात्मक माहौल देखने को मिला, जब वरिष्ठ सपा नेता आजम खान की पत्नी तंजीन फातिमा और उनके बेटे अदीब आजम खान ने सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव से मुलाकात की। यह मुलाकात हाल ही में दिवंगत हुए मुलायम सिंह यादव के छोटे पुत्र प्रतीक यादव के निधन पर शोक व्यक्त करने के लिए की गई।

    मुलाकात के बाद सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने तस्वीरें साझा करते हुए लिखा कि “दुख की घड़ी में सब साथ हैं।” इस मुलाकात को राजनीतिक औपचारिकता से ज्यादा मानवीय संवेदना और आपसी समर्थन के तौर पर देखा जा रहा है।

    बता दें कि प्रतीक यादव का 38 वर्ष की उम्र में बुधवार को हृदय और फेफड़ों से जुड़ी गंभीर बीमारियों के चलते निधन हो गया था। तबीयत बिगड़ने पर उन्हें लखनऊ के सिविल अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। इसके बाद उनके पार्थिव शरीर का अंतिम संस्कार बृहस्पतिवार को लखनऊ के बैकुंठ धाम में किया गया, जहां उनके ससुर अरविंद सिंह बिष्ट ने उन्हें मुखाग्नि दी।

    परिवार के करीबी सूत्रों के अनुसार, अंतिम यात्रा विक्रमादित्य मार्ग स्थित आवास से शुरू हुई, जिसमें बड़ी संख्या में परिजन और समर्थक शामिल हुए।

    आजम परिवार की यह मुलाकात ऐसे समय पर हुई है जब समाजवादी पार्टी पहले से ही शोक की स्थिति से गुजर रही है। राजनीतिक गलियारों में इसे एकजुटता और संवेदना के संदेश के रूप में देखा जा रहा है।

  • सागर में बिजली संकट: दो ट्रांसफार्मर जलकर खाक, पूरे इलाके में अफरा-तफरी

    सागर में बिजली संकट: दो ट्रांसफार्मर जलकर खाक, पूरे इलाके में अफरा-तफरी


    नई दिल्ली। सागर शहर में गुरुवार देर रात एक के बाद एक दो बिजली ट्रांसफार्मरों में आग लगने से हड़कंप मच गया। सिविल लाइन क्षेत्र में लगे ट्रांसफार्मर में अचानक धमाके के साथ आग भड़क उठी, जिससे आसपास का इलाका दहल गया।

    इसके कुछ ही समय बाद इतवारा बाजार के कचेरन कुआं क्षेत्र में भी एक अन्य ट्रांसफार्मर में आग लगने की घटना सामने आई। दोनों जगहों पर आग लगने से बिजली आपूर्ति पूरी तरह प्रभावित हो गई और कई इलाकों में अंधेरा छा गया।

    स्थानीय लोगों ने तुरंत फायर ब्रिगेड और बिजली विभाग को सूचना दी। मौके पर पहुंची दमकल टीम ने कड़ी मशक्कत के बाद करीब एक घंटे में आग पर काबू पाया। इस दौरान ट्रांसफार्मरों में लगातार धमाके और चिंगारियां निकलती रहीं, जिससे लोग दहशत में आ गए।

    आग के कारण दर्जनों घरों की बिजली सप्लाई ठप हो गई। गर्मी के मौसम में बिजली गुल होने से लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। सुबह करीब 6 बजे तक मरम्मत कार्य के बाद आपूर्ति बहाल की जा सकी।

    बिजली विभाग की टीम फिलहाल आग लगने के कारणों की जांच कर रही है। प्रारंभिक अनुमान में ओवरलोड या तकनीकी खराबी को वजह माना जा रहा है।

  • सिर्फ एक फिल्म नहीं, आतंकवाद के खिलाफ एक आंदोलन थी 'सरफरोश': बजट से चार गुना कमाई और उस दौर का सबसे बड़ा विवाद

    सिर्फ एक फिल्म नहीं, आतंकवाद के खिलाफ एक आंदोलन थी 'सरफरोश': बजट से चार गुना कमाई और उस दौर का सबसे बड़ा विवाद


    नई दिल्ली ।
    भारतीय सिनेमा के इतिहास में साल 1999 एक ऐसा मोड़ था, जब पर्दे पर देशभक्ति को एक नई और यथार्थवादी परिभाषा मिली। उस दौर में जहाँ बॉलीवुड मुख्य रूप से रोमांटिक कहानियों में व्यस्त था, निर्देशक जॉन मैथ्यू माथन एक ऐसी कहानी लेकर आए जिसने न केवल दर्शकों को झकझोर दिया, बल्कि सेंसर बोर्ड के पसीने छुड़ा दिए। फिल्म ‘सरफरोश’ को आज एक क्लासिक का दर्जा प्राप्त है, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि इसकी रिलीज का रास्ता कांटों भरा था। यह पहली बार था जब किसी मुख्यधारा की भारतीय फिल्म ने सीधे तौर पर पड़ोसी देश पाकिस्तान और उसकी खुफिया एजेंसी आईएसआई का नाम लेकर उन्हें भारत में हो रही आतंकवादी घटनाओं का जिम्मेदार ठहराया था। फिल्म की यही निर्भीकता इसके लिए सबसे बड़ी मुसीबत बन गई थी।

    उस समय भारत और पाकिस्तान के बीच कूटनीतिक रिश्ते एक नाजुक मोड़ पर थे। तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी शांति की पहल करते हुए दिल्ली से लाहौर के बीच बस सेवा शुरू कर रहे थे। एक तरफ जहाँ सरकार दोस्ती का हाथ बढ़ा रही थी, वहीं दूसरी तरफ ‘सरफरोश’ जैसी फिल्म सेंसर बोर्ड के पास पहुंची जिसमें आतंकवाद को सीधे तौर पर पाकिस्तान से जोड़कर दिखाया गया था। केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सीबीएसई) के सदस्यों को डर था कि फिल्म के संवाद और चित्रण दोनों देशों के बीच चल रही बातचीत की प्रक्रिया को बिगाड़ सकते हैं। बोर्ड ने फिल्म को सर्टिफिकेट देने से साफ इनकार कर दिया और शर्त रखी कि फिल्म से ‘पाकिस्तान’ और ‘आईएसआई’ जैसे शब्दों को पूरी तरह से हटा दिया जाए।

    निर्देशक जॉन मैथ्यू माथन अपनी फिल्म की सच्चाई और रिसर्च को लेकर इतने आश्वस्त थे कि उन्होंने बोर्ड की शर्तों के आगे झुकने से मना कर दिया। जॉन का तर्क था कि फिल्म में जो दिखाया गया है, वह वास्तविकता पर आधारित है और इसे बदलने का मतलब फिल्म की आत्मा को मारना होगा। जब विवाद काफी बढ़ गया और सेंसर बोर्ड अपनी जिद पर अड़ा रहा, तो जॉन ने एक बड़ा कदम उठाते हुए बोर्ड को चेतावनी दी कि वे इस मामले को लेकर देश की सर्वोच्च अदालत यानी सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे। निर्देशक के इस सख्त तेवर और कानूनी लड़ाई की धमकी के आगे आखिरकार सेंसर बोर्ड को झुकना पड़ा। फिल्म को बिना किसी बड़े बदलाव के पास किया गया और 30 अप्रैल 1999 को यह सिनेमाघरों में रिलीज हुई।

    आमिर खान के करियर के लिए ‘सरफरोश’ एक गेम-चेंजर साबित हुई। एसीपी अजय सिंह राठौड़ के किरदार में उन्होंने एक ऐसे पुलिस अधिकारी की भूमिका निभाई, जो अपने निजी दुख को देश की सेवा के जज्बे में बदल देता है। फिल्म की पटकथा इतनी मजबूत थी कि दर्शक शुरू से अंत तक बंधे रहे। लगभग 8 करोड़ रुपये के सीमित बजट में बनी इस फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर तहलका मचा दिया और भारत में करीब 30.37 करोड़ रुपये का ग्रॉस कलेक्शन किया। फिल्म की सफलता केवल व्यावसायिक नहीं थी, बल्कि इसे साल 2000 में ‘बेस्ट पॉपुलर फिल्म प्रोवाइडिंग व्होलसम एंटरटेनमेंट’ की श्रेणी में प्रतिष्ठित नेशनल अवॉर्ड से भी नवाजा गया।

    फिल्म की सफलता में इसके संगीत और अन्य कलाकारों का भी बड़ा योगदान था। सोनाली बेंद्रे के साथ आमिर की केमिस्ट्री और जगजीत सिंह की आवाज में सजी गजल ‘होश वालों को खबर क्या’ आज भी लोगों की जुबान पर है। वहीं, नसीरुद्दीन शाह ने पाकिस्तानी गजल गायक और जासूस ‘गुलफाम हसन’ के किरदार में जो जान फूंकी, उसने फिल्म को एक अलग ऊंचाई पर पहुंचा दिया। आज के दौर में जब ‘धुरंधर’ जैसी फिल्मों में आतंकवाद की जड़ें दिखाई जा रही हैं, तब ‘सरफरोश’ की याद आना स्वाभाविक है, क्योंकि यह वह पहली फिल्म थी जिसने कूटनीति की परवाह किए बिना सच बोलने का साहस दिखाया था। 8.1 की आईएमडीबी रेटिंग वाली यह फिल्म आज भी ओटीटी प्लेटफॉर्म पर सबसे ज्यादा देखी जाने वाली देशभक्ति फिल्मों में से एक है।

  • क्षतिग्रस्त पुल का काम खिंचा, बीहर नदी पर यातायात बहाली अभी टली

    क्षतिग्रस्त पुल का काम खिंचा, बीहर नदी पर यातायात बहाली अभी टली


    नई दिल्ली ।  रीवा के बायपास मार्ग स्थित बीहर नदी पर बने क्षतिग्रस्त पुल की मरम्मत का कार्य अभी भी धीमी गति से चल रहा है, जिससे यातायात बहाल होने की उम्मीदें टलती नजर आ रही हैं। पुल की मौजूदा स्थिति को देखते हुए अब यह स्पष्ट नहीं है कि इसे कब तक पूरी तरह से सुरक्षित किया जा सकेगा।

    मौके पर स्थिति चिंताजनक बताई जा रही है। गर्डर उठाने की प्रक्रिया के दौरान एलाइनमेंट बिगड़ने से तकनीकी समस्याएं और बढ़ गई हैं। वहीं, पिलरों के बीच गैप बढ़ने की भी जानकारी सामने आई है, जिससे संरचना की मजबूती पर सवाल खड़े हो गए हैं।

    सूत्रों के अनुसार, मरम्मत कार्य में लगी डीजीसी इंफ्रा की टीम ने प्रारंभिक तौर पर सुझाव दिया था कि पुल को पूरी तरह तोड़कर नए सिरे से निर्माण करना अधिक सुरक्षित विकल्प होगा। हालांकि, इस पर अंतिम निर्णय जिला प्रशासन को लेना है और फिलहाल मरम्मत का काम ही जारी है।

    एमपीआरडीसी के अधिकारी इस मामले में स्पष्ट जानकारी देने से बच रहे हैं। वहीं, इंजीनियरों का मानना है कि जल्दबाजी में यातायात बहाल करना जोखिम भरा हो सकता है। अनुमान है कि पुल को सुरक्षित बनाने में अभी एक महीने से अधिक समय लग सकता है।

    गौरतलब है कि प्रशासन ने पहले 10 मई तक पुल पर यातायात बहाल करने का दावा किया था, लेकिन तय समय सीमा बीतने के बाद भी काम अधूरा है। इससे लोगों को निराशा का सामना करना पड़ रहा है।

    इस बीच भारी वाहनों को शहर के भीतर से गुजरना पड़ रहा है, जिससे ट्रैफिक जाम, धूल और दुर्घटना का खतरा बढ़ गया है और स्थानीय लोगों को लगातार परेशानी झेलनी पड़ रही है।

  • 4000 करोड़ की 'रामायण' और अयोध्या में प्रीमियम प्रॉपर्टी,भगवान राम का किरदार निभाने से पहले रणबीर ने शहर में किया बड़ा निवेश

    4000 करोड़ की 'रामायण' और अयोध्या में प्रीमियम प्रॉपर्टी,भगवान राम का किरदार निभाने से पहले रणबीर ने शहर में किया बड़ा निवेश


    नई दिल्ली ।
    भारतीय सिनेमा के गलियारों में इन दिनों सुपरस्टार रणबीर कपूर का नाम न केवल उनकी बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘रामायण’ के लिए, बल्कि अयोध्या में किए गए एक बड़े रियल एस्टेट निवेश के लिए भी चर्चा का विषय बना हुआ है। नितेश तिवारी के निर्देशन में बन रही भव्य फिल्म ‘रामायण’ में भगवान राम की भूमिका निभाने जा रहे रणबीर कपूर ने असल जिंदगी में भी अयोध्या से अपना नाता जोड़ लिया है। हालिया जानकारी के मुताबिक, अभिनेता ने अयोध्या के सरयू नदी के तट पर स्थित एक बेहद प्रीमियम प्रोजेक्ट ‘द सरयू’ में जमीन खरीदी है। ‘द हाउस ऑफ अभिनंदन लोढ़ा’ के इस प्रोजेक्ट में रणबीर ने लगभग 2,134 वर्ग फीट का प्लॉट अपने नाम किया है, जिसकी कीमत तकरीबन ₹3.31 करोड़ बताई जा रही है।

    अयोध्या में इस निवेश को लेकर रणबीर कपूर ने बेहद भावुक और आध्यात्मिक संदेश साझा किया है। उनका मानना है कि अयोध्या ने उन्हें खुद चुना है और यह निवेश उनके लिए केवल एक वित्तीय सौदा नहीं, बल्कि उनके परिवार की विरासत का एक हिस्सा है। सरयू नदी के किनारे स्थित यह 75 एकड़ का विशाल प्रोजेक्ट आधुनिक सुविधाओं और सांस्कृतिक मूल्यों का एक अनूठा संगम है। यहाँ न केवल एक भव्य क्लबहाउस और 35 से ज्यादा लाइफस्टाइल सुविधाएं होंगी, बल्कि पांच एकड़ में फैला एक शुद्ध शाकाहारी लग्जरी होटल भी बनाया जाएगा, जिसका संचालन प्रसिद्ध होटल श्रृंखला ‘द लीला’ द्वारा किया जाएगा। रणबीर के अनुसार, डिजिटल प्रक्रिया के माध्यम से इस डील को पूरा करना उनके लिए बेहद पारदर्शी और सुखद अनुभव रहा।

    रणबीर कपूर की इस डील के साथ ही उनकी आगामी फिल्म ‘रामायण’ को लेकर भी दर्शकों का उत्साह चरम पर है। यह फिल्म भारतीय सिनेमा के इतिहास की अब तक की सबसे महंगी फिल्म मानी जा रही है, जिसका कुल बजट लगभग 4000 करोड़ रुपये बताया गया है। इस महाकाव्य को दो हिस्सों में रिलीज किया जाएगा, जिसका पहला भाग इसी साल दिवाली के शुभ अवसर पर सिनेमाघरों में दस्तक देगा। फिल्म में रणबीर कपूर के साथ दक्षिण भारतीय अभिनेत्री साई पल्लवी माता सीता के किरदार में नजर आएंगी, जबकि सुपरस्टार यश रावण की भूमिका को जीवंत करेंगे। फिल्म की स्टार कास्ट काफी प्रभावशाली है, जिसमें हनुमान के रूप में सनी देओल और लक्ष्मण के रूप में रवि दुबे जैसे कलाकार शामिल हैं।

    दिलचस्प बात यह है कि रणबीर कपूर ने शुरुआत में इस चुनौतीपूर्ण किरदार को निभाने से मना कर दिया था। अभिनेता ने एक सार्वजनिक मंच पर स्वीकार किया कि वे इस महान चरित्र के साथ न्याय करने को लेकर संशय में थे। हालांकि, उनके जीवन में बेटी राहा के आगमन और उसी समय इस किरदार का प्रस्ताव दोबारा आने को उन्होंने एक सुखद संयोग माना और अंततः इसे स्वीकार किया। रणबीर का मानना है कि ‘राम’ का किरदार निभाना उनकी अभिनय यात्रा का सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव है। अयोध्या में जमीन खरीदने के उनके फैसले को फिल्म की रिलीज से पहले एक प्रतीकात्मक कदम के रूप में भी देखा जा रहा है, जो उनकी इस भूमिका के प्रति गहरी निष्ठा को दर्शाता है।

    अयोध्या इस समय वैश्विक स्तर पर निवेश और पर्यटन के केंद्र के रूप में उभर रहा है। रणबीर कपूर जैसे बड़े सितारों का यहाँ जमीन खरीदना शहर की बढ़ती ब्रांड वैल्यू और सांस्कृतिक महत्व को रेखांकित करता है। जैसे-जैसे ‘रामायण’ की रिलीज की तारीख नजदीक आ रही है, प्रशंसकों की नजरें रणबीर के अभिनय और उनकी इस नई प्रॉपर्टी पर टिकी हुई हैं। कुल मिलाकर, रणबीर कपूर के लिए यह साल न केवल पेशेवर रूप से मील का पत्थर साबित होने वाला है, बल्कि अयोध्या में अपनी जड़ें जमाने के कारण यह उनके व्यक्तिगत जीवन के लिए भी अत्यंत विशेष बन गया है। अब दुनिया को इंतजार है तो बस पर्दे पर उस भव्यता को देखने का, जिसे नमित मल्होत्रा और नितेश तिवारी की टीम ने करोड़ों के बजट के साथ तैयार किया है।

  • पर्यावरण संदेश के साथ प्रशासनिक दौरा: उज्जैन महापौर ने कार छोड़ अपनाया ई-रिक्शा

    पर्यावरण संदेश के साथ प्रशासनिक दौरा: उज्जैन महापौर ने कार छोड़ अपनाया ई-रिक्शा


    नई दिल्ली । पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ती ईंधन कीमतों के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पेट्रोल-डीजल के संयमित उपयोग की अपील का असर अब उज्जैन में दिखाई देने लगा है। शहर के महापौर मुकेश टटवाल ने एक नई पहल करते हुए हर शुक्रवार को कार का उपयोग न करने और उसकी जगह ई-रिक्शा, पैदल या इलेक्ट्रिक वाहनों से सफर करने का निर्णय लिया है।

    शुक्रवार को महापौर अटल पार्क पहुंचे, जहां उन्होंने ई-रिक्शा से वार्डों का निरीक्षण किया और आम नागरिकों से मुलाकात कर ईंधन बचत का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि देश की मौजूदा परिस्थितियों में पेट्रोल-डीजल का संतुलित उपयोग बेहद जरूरी है।

    महापौर ने स्पष्ट किया कि यह पहल केवल प्रतीकात्मक नहीं है, बल्कि इसे लंबे समय तक जारी रखने की योजना है, ताकि लोगों में जागरूकता बढ़े।

    उन्होंने नगर निगम के अधिकारियों और पार्षदों से भी सप्ताह में कम से कम एक दिन ई-रिक्शा, इलेक्ट्रिक वाहन या पैदल चलने की अपील की। उनका कहना है कि यदि सभी अधिकारी मिलकर यह प्रयास करें तो हर सप्ताह सैकड़ों लीटर पेट्रोल की बचत संभव है।

    इस पहल को शहर में ईंधन बचत और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक सकारात्मक संदेश के रूप में देखा जा रहा है।

  • किसी की मुस्कुराहटों पे निसार होने वाले 'शंकरदास' के 'शैलेंद्र' बनने और बेमन से मैकेनिक की नौकरी करने का पूरा सच

    किसी की मुस्कुराहटों पे निसार होने वाले 'शंकरदास' के 'शैलेंद्र' बनने और बेमन से मैकेनिक की नौकरी करने का पूरा सच


    नई दिल्ली ।
    भारतीय सिनेमा के इतिहास में जब भी सादगी और गहराई से भरे गीतों का जिक्र होगा, गीतकार शैलेंद्र का नाम स्वर्ण अक्षरों में लिया जाएगा। ‘किसी की मुस्कुराहटों पे हो निसार’ जैसे कालजयी गीत लिखने वाले इस कलाकार का जीवन किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं था। पाकिस्तान के रावलपिंडी में जन्मे शंकरदास केसरीलाल, जिन्हें दुनिया ने बाद में शैलेंद्र के नाम से पूजा, के पूर्वज मूलतः बिहार के आरा जिले से ताल्लुक रखते थे। उनके पिता ब्रिटिश मिलिट्री अस्पताल में ठेकेदार थे, लेकिन पारिवारिक और आर्थिक परिस्थितियों के चलते उन्हें रावलपिंडी छोड़कर मथुरा बसना पड़ा। शैलेंद्र बचपन से ही कुशाग्र बुद्धि के थे और उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा मथुरा के ही एक सरकारी स्कूल से पूरी की। उनकी मेधा का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इंटरमीडिएट की परीक्षा में उन्होंने पूरे उत्तर प्रदेश में तीसरा स्थान प्राप्त किया था।

    पढ़ाई में अव्वल होने के बावजूद घर की आर्थिक तंगी ने उन्हें अपनी पसंद का रास्ता चुनने की इजाजत नहीं दी। परिवार की जिम्मेदारी कंधे पर आई तो उन्होंने रेलवे की परीक्षा पास की और मुंबई में बतौर मैकेनिक यानी अप्रेंटिस की नौकरी शुरू कर दी। आपको यह जानकर हैरानी होगी कि जिस शख्स ने शब्दों से संवेदनाओं की दुनिया बुनी, उसके पास मैकेनिकल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा था और वेल्डिंग जैसे कठोर काम में उनकी विशेषज्ञता थी। मुंबई के रेलवे यार्ड में पसीने और लोहे की गूँज के बीच शैलेंद्र बेमन से अपना काम करते थे, क्योंकि उनका मन तो कविता और साहित्य की दुनिया में बसता था। इस नौकरी के दौरान ही उनके भीतर का कवि जाग उठा और वे खाली समय में कागज के टुकड़ों पर अपनी भावनाओं को उकेरने लगे।

    रेलवे की इस नौकरी के दौरान शैलेंद्र का जीवन काफी संघर्षपूर्ण रहा। आर्थिक तंगी का आलम यह था कि शादी होने के बावजूद वे अपनी पत्नी को मुंबई नहीं ला पा रहे थे। विरह का यही दर्द और अपनों से दूर रहने की तड़प उनके बाद के गीतों में साफ झलकती है। कहा जाता है कि जब वे अपनी कविताओं के जरिए भारतीय जन नाट्य संघ यानी इप्टा से जुड़े, तब उनकी मुलाकात राज कपूर से हुई। राज कपूर उनकी प्रतिभा से इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने शैलेंद्र को फिल्मों के लिए लिखने का प्रस्ताव दिया, लेकिन शुरुआत में स्वाभिमानी शैलेंद्र ने इसे ठुकरा दिया था। हालांकि, बाद में अपनी घरेलू जरूरतों और आर्थिक तंगहाली के कारण उन्होंने फिल्मी दुनिया का रुख किया और फिर कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।

    शैलेंद्र और राज कपूर की जोड़ी ने भारतीय सिनेमा को ‘आवारा हूं’, ‘मेरा जूता है जापानी’ और ‘प्यार हुआ इकरार हुआ’ जैसे न भूलने वाले गाने दिए। शैलेंद्र की सबसे बड़ी खूबी यह थी कि वे जटिल से जटिल दार्शनिक बातों को बहुत ही सरल शब्दों में पिरो देते थे। उन्होंने जो कुछ भी अपनी निजी जिंदगी में झेला, चाहे वह मैकेनिक की नौकरी की मजबूरी हो या गरीबी का दंश, उसे उन्होंने अपनी रचनाओं में ईमानदारी से उतारा। उनके गीतों में आम आदमी का दर्द और उसकी छोटी-छोटी खुशियां साफ दिखाई देती थीं। यही वजह है कि उनके लिखे गीत आज भी उतने ही प्रासंगिक और ताजे महसूस होते हैं जितने दशकों पहले थे।

    मात्र 43 साल की छोटी सी उम्र में शैलेंद्र इस दुनिया को अलविदा कह गए। यह एक अजीब संयोग था कि जिस 14 दिसंबर को उनके सबसे अजीज दोस्त राज कपूर का जन्मदिन होता था, उसी दिन हिंदी सिनेमा के इस चमकते सितारे का निधन हुआ। उनके जाने से जो खालीपन पैदा हुआ, उसे आज तक कोई भर नहीं पाया है। एक मैकेनिक के रूप में करियर शुरू करने वाले इस इंसान ने साबित कर दिया कि अगर दिल में जज्बा हो और कलम में सच्चाई, तो लोहे के कारखानों में काम करते हुए भी दुनिया को प्रेम और भाईचारे का संगीत सुनाया जा सकता है। आज भी जब कोई ‘सजन रे झूठ मत बोलो’ या ‘सब कुछ सीखा हमने’ सुनता है, तो उसे उस महान आत्मा की याद आती है जिसने अपनी पूरी जिंदगी शब्दों की साधना में लगा दी।