Author: bharati

  • फार्मा सेक्टर को झटका, सिप्ला का नेट प्रॉफिट घटकर 555 करोड़ रुपए पर पहुंचा..

    फार्मा सेक्टर को झटका, सिप्ला का नेट प्रॉफिट घटकर 555 करोड़ रुपए पर पहुंचा..

    नई दिल्ली । भारतीय फार्मा उद्योग की प्रमुख कंपनियों में शामिल Cipla ने वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही के नतीजे जारी किए हैं, जिनमें कंपनी के मुनाफे में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। ताजा आंकड़ों के अनुसार जनवरी से मार्च 2026 की अवधि में कंपनी का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट करीब 55 प्रतिशत घटकर लगभग 555 करोड़ रुपए रह गया। पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही की तुलना में यह गिरावट काफी बड़ी मानी जा रही है, जिसने निवेशकों और बाजार विशेषज्ञों का ध्यान अपनी ओर खींचा है।

    कंपनी के अनुसार इस गिरावट के पीछे प्रमुख कारण इम्पेयरमेंट चार्ज और बदलती कारोबारी परिस्थितियां रही हैं। बाजार की मौजूदा स्थिति और सहयोगी कंपनियों से जुड़े वित्तीय प्रभावों ने कंपनी की कुल कमाई पर दबाव बनाया, जिसका असर सीधे तिमाही मुनाफे पर दिखाई दिया।

    इस तिमाही में कंपनी की कुल आय में भी हल्की कमी दर्ज की गई। ऑपरेशंस से होने वाला राजस्व पिछले साल की समान अवधि की तुलना में कम रहा। हालांकि गिरावट सीमित रही, लेकिन लाभ में आई तेज गिरावट ने कंपनी के प्रदर्शन को प्रभावित किया। विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ती लागत, प्रतिस्पर्धा और बाजार की अनिश्चितता के कारण फार्मा कंपनियों पर दबाव बना हुआ है।

    ऑपरेशनल स्तर पर भी कंपनी का प्रदर्शन अपेक्षा से कमजोर रहा। ईबीआईटीडीए में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई, जबकि मार्जिन भी पिछले वर्ष की तुलना में नीचे आ गया। कंपनी ने हालांकि यह स्पष्ट किया कि यदि इम्पेयरमेंट चार्ज के प्रभाव को अलग कर दिया जाए, तो परिचालन प्रदर्शन कुछ हद तक बेहतर दिखाई देता है। इसके बावजूद तिमाही नतीजों ने यह संकेत जरूर दिया है कि कंपनी को आने वाले समय में लाभप्रदता सुधारने के लिए अतिरिक्त प्रयास करने होंगे।

    कमजोर वित्तीय नतीजों के बीच कंपनी ने अपने शेयरधारकों के लिए राहत भरी घोषणा भी की है। बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए प्रति इक्विटी शेयर 13 रुपए के अंतिम डिविडेंड की सिफारिश की है। कंपनी का कहना है कि आवश्यक मंजूरी मिलने के बाद निर्धारित समय सीमा के भीतर यह राशि पात्र शेयरधारकों को वितरित कर दी जाएगी। इसके लिए रिकॉर्ड डेट भी तय कर दी गई है।

    दिलचस्प बात यह रही कि तिमाही नतीजों के बाद बाजार में कंपनी के शेयरों में सकारात्मक रुख देखने को मिला। निवेशकों ने कंपनी की दीर्घकालिक संभावनाओं पर भरोसा दिखाया, जिसके चलते शेयरों में बढ़त दर्ज की गई। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि निवेशकों को उम्मीद है कि कंपनी आने वाले समय में अपने कारोबार और लाभप्रदता को बेहतर बनाने के लिए नई रणनीतियों पर काम करेगी।

    Cipla लंबे समय से घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में मजबूत उपस्थिति रखने वाली कंपनी रही है। ऐसे में तिमाही नतीजों में आई यह गिरावट कंपनी के लिए एक चुनौती जरूर मानी जा रही है, लेकिन उद्योग जानकारों का मानना है कि मजबूत ब्रांड और व्यापक बाजार नेटवर्क के कारण कंपनी के पास वापसी की पर्याप्त संभावनाएं मौजूद हैं। अब निवेशकों और बाजार की नजर आने वाली तिमाहियों पर टिकी रहेगी, जहां कंपनी के प्रदर्शन और रणनीतिक फैसलों का असर साफ दिखाई देगा।

  • वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारत का व्यापार मजबूत, मर्चेंडाइज एक्सपोर्ट में हल्की बढ़त की संभावना

    वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारत का व्यापार मजबूत, मर्चेंडाइज एक्सपोर्ट में हल्की बढ़त की संभावना

    नई दिल्ली । देश के विदेशी व्यापार को लेकर एक नया आर्थिक आकलन सामने आया है, जिसमें संकेत दिया गया है कि वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में भारत का कुल मर्चेंडाइज एक्सपोर्ट लगभग 111.9 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है। यह अनुमान पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में मामूली लेकिन सकारात्मक वृद्धि को दर्शाता है, जो वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के बीच भारत के व्यापारिक प्रदर्शन को मजबूत संकेत देता है।

    रिपोर्ट के अनुसार इस अवधि में नॉन-ऑयल एक्सपोर्ट में भी वृद्धि देखने को मिल सकती है, जिसका अनुमान लगभग 97.8 अरब डॉलर लगाया गया है। इसके अलावा नॉन-ऑयल और नॉन-जेम्स एंड ज्वेलरी निर्यात में भी लगभग 3 प्रतिशत की सालाना बढ़त की संभावना जताई गई है, जो यह दर्शाता है कि भारत का निर्यात आधार धीरे-धीरे अधिक संतुलित और विविध हो रहा है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय निर्यात में यह सुधार कई कारकों का परिणाम है। इनमें वैश्विक बाजारों में बढ़ती मांग, व्यापारिक अवसरों का विस्तार और निर्यातकों को मिल रहे नीतिगत सहयोग शामिल हैं। इसके साथ ही सरकार द्वारा समय-समय पर किए गए आर्थिक हस्तक्षेप और वित्तीय सहायता उपायों ने भी निर्यात गतिविधियों को स्थिरता प्रदान की है।

    आर्थिक आकलन में यह भी बताया गया है कि हाल के वर्षों में भारत ने कई देशों के साथ व्यापारिक संबंधों को मजबूत किया है, जिसका सीधा असर निर्यात क्षेत्रों पर दिखाई दे सकता है। इन समझौतों से विशेष रूप से नॉन-ऑयल सेक्टर को फायदा मिलने की उम्मीद है, जिससे औद्योगिक उत्पादन और निर्यात दोनों को गति मिल सकती है।

    इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय बाजार में यदि मांग में सुधार आता है और मुद्रा विनिमय दरें अनुकूल बनी रहती हैं, तो भारत के निर्यात प्रदर्शन में और बेहतर परिणाम देखने को मिल सकते हैं। इससे भारतीय उत्पादों की वैश्विक प्रतिस्पर्धा क्षमता भी बढ़ेगी।

    हालांकि रिपोर्ट में कुछ जोखिमों की ओर भी इशारा किया गया है। वैश्विक अर्थव्यवस्था में अनिश्चितता, भू-राजनीतिक तनाव और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कीमतों में उतार-चढ़ाव ऐसे कारक हैं जो निर्यात वृद्धि की गति को प्रभावित कर सकते हैं। इन परिस्थितियों में व्यापारिक स्थिरता बनाए रखना एक बड़ी चुनौती माना जा रहा है।

    इसके बावजूद निर्यात क्षेत्र को लेकर सकारात्मक माहौल बना हुआ है। आर्थिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि वर्तमान नीतिगत समर्थन और वैश्विक परिस्थितियां संतुलित रहती हैं, तो भारत आने वाले समय में अपने निर्यात स्तर को और ऊंचाई तक ले जा सकता है।

  • अर्थव्यवस्था के लिए चेतावनी संकेत: खुदरा महंगाई में फिर तेजी के संकेत

    अर्थव्यवस्था के लिए चेतावनी संकेत: खुदरा महंगाई में फिर तेजी के संकेत


    नई दिल्ली । भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर जारी एक नई आकलन रिपोर्ट में संकेत दिया गया है कि आने वाले समय में महंगाई का दबाव फिर से बढ़ सकता है। अनुमान के अनुसार वित्त वर्ष 2027 में देश की औसत खुदरा महंगाई दर 5.1 प्रतिशत के आसपास रह सकती है। हालांकि हाल के महीनों में महंगाई अपेक्षाकृत नियंत्रित रही है, लेकिन वैश्विक और घरेलू परिस्थितियां आगे चलकर स्थिति को प्रभावित कर सकती हैं।

    पिछले कुछ समय में खुदरा महंगाई में हल्की बढ़ोतरी दर्ज की गई है, लेकिन यह अब भी सीमित दायरे में बनी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि वर्तमान में उपभोक्ता कीमतों पर बड़ा दबाव पूरी तरह सामने नहीं आया है, लेकिन आने वाले समय में यह स्थिति बदल सकती है। ऊर्जा क्षेत्र में बढ़ती लागत इस दबाव का एक प्रमुख कारण मानी जा रही है, जिसका असर धीरे-धीरे परिवहन और उत्पादन लागत पर पड़ रहा है।

    कच्चे तेल की कीमतों में संभावित वृद्धि भी एक अहम चिंता का विषय बनी हुई है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी रहने की आशंका है, जिससे आयात बिल बढ़ सकता है और इसका सीधा असर घरेलू बाजार की कीमतों पर पड़ सकता है। इससे न केवल ईंधन बल्कि वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों में भी बढ़ोतरी का जोखिम रहता है।

    हालांकि सरकार की ओर से ईंधन की कीमतों को स्थिर रखने के प्रयासों से अभी तक उपभोक्ताओं को कुछ राहत मिली है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्थिति लंबे समय तक बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। जैसे-जैसे लागत बढ़ेगी, कंपनियां इसका बोझ उपभोक्ताओं पर डाल सकती हैं, जिससे महंगाई में धीरे-धीरे बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।

    इसके अलावा खाद्य महंगाई को लेकर भी अनिश्चितता बनी हुई है। मौसम से जुड़े जोखिम, खासकर कम मानसून और अल नीनो जैसी परिस्थितियां, कृषि उत्पादन को प्रभावित कर सकती हैं। यदि फसल उत्पादन में गिरावट आती है तो खाद्य वस्तुओं की कीमतों में तेजी आना स्वाभाविक माना जा रहा है, जिससे आम लोगों की खर्च क्षमता पर असर पड़ सकता है।

    अर्थव्यवस्था से जुड़े जानकारों का मानना है कि फिलहाल महंगाई स्थिर दिख रही है, लेकिन यह स्थिरता अस्थायी हो सकती है। आने वाले महीनों में ऊर्जा, परिवहन और खाद्य क्षेत्रों से जुड़े कारक मिलकर महंगाई की दिशा तय करेंगे।

  • असम के शहद से लेकर अंतरराष्ट्रीय समझौतों तक, भारत के व्यापारिक विस्तार की नई कहानी

    असम के शहद से लेकर अंतरराष्ट्रीय समझौतों तक, भारत के व्यापारिक विस्तार की नई कहानी

    नई दिल्ली । देश की अर्थव्यवस्था को वैश्विक स्तर पर नई दिशा देने की कोशिशों के बीच हाल के दिनों में व्यापार और निवेश के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण प्रगति देखने को मिली है। सरकार की रणनीति का फोकस न केवल निर्यात बढ़ाने पर है, बल्कि स्थानीय उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में मजबूत पहचान दिलाने पर भी केंद्रित है। इसी कड़ी में कई ऐसे कदम सामने आए हैं, जो भारत की बढ़ती आर्थिक भूमिका को दर्शाते हैं।

    हाल ही में असम से जुड़े एक महत्वपूर्ण कदम के तहत स्थानीय शहद को पहली बार अंतरराष्ट्रीय बाजार में भेजा गया, जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था और किसानों के लिए एक बड़ा अवसर माना जा रहा है। यह पहल
    One District One Product
    के तहत की गई है, जिसका उद्देश्य देश के विभिन्न जिलों के विशिष्ट उत्पादों को वैश्विक मंच तक पहुंचाना है। इस कदम से न केवल स्थानीय उत्पादकों को नई पहचान मिली है, बल्कि निर्यात क्षेत्र में भी एक नया विस्तार देखने को मिला है।

    इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय व्यापार समझौतों को लेकर भी भारत की स्थिति मजबूत होती दिख रही है। भारत और कनाडा के बीच प्रस्तावित व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते पर दूसरे दौर की वार्ता सफलतापूर्वक पूरी हो चुकी है। यह समझौता भविष्य में दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश संबंधों को और अधिक मजबूत बनाने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।

    सरकार की ओर से यह भी बताया गया है कि पिछले कुछ समय में कई वैश्विक कंपनियों के साथ निवेश और उत्पादन को लेकर विस्तृत चर्चा हुई है। इन चर्चाओं में मुख्य रूप से भारत में मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने, स्थानीय प्रतिभाओं को अवसर देने और निर्यात क्षमता को मजबूत करने पर जोर दिया गया है। इससे यह संकेत मिलता है कि भारत वैश्विक सप्लाई चेन में अपनी स्थिति को लगातार मजबूत कर रहा है।

    विशेष रूप से कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों के क्षेत्र में भी निर्यात बढ़ाने के प्रयास तेज हुए हैं। सरकार ने गुणवत्ता मानकों और आवश्यक अनुमतियों की समीक्षा कर यह सुनिश्चित करने की कोशिश की है कि भारतीय उत्पाद अंतरराष्ट्रीय बाजार की आवश्यकताओं को पूरा कर सकें। इससे किसानों और छोटे उत्पादकों को बेहतर बाजार उपलब्ध होने की उम्मीद है।

    आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि भारत अब केवल एक उपभोक्ता बाजार नहीं रह गया है, बल्कि एक उभरता हुआ उत्पादन और निर्यात केंद्र बनता जा रहा है। वैश्विक कंपनियों की बढ़ती रुचि इस बात का संकेत है कि भारत में निवेश के अवसर तेजी से बढ़ रहे हैं। इसका सीधा असर रोजगार, तकनीकी विकास और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।

  • नरसिंहपुर मर्डर केस: हाथ-पैर बांधकर युवक की हत्या, शव को गहरी खाई में फेंका

    नरसिंहपुर मर्डर केस: हाथ-पैर बांधकर युवक की हत्या, शव को गहरी खाई में फेंका


    नई दिल्ली। राजस्थान के भीलवाड़ा निवासी वीरू उर्फ पप्पू जाट हत्याकांड में बड़ा खुलासा हुआ है। पुलिस के मुताबिक, नरसिंहपुर के साईंखेड़ा में रहने वाली रीना किरार ने अपने बचपन के प्रेमी अरुण पटेल और उसके साथी हरनाम किरार के साथ मिलकर वीरू की हत्या की साजिश रची। वीरू को सोशल मीडिया के जरिए करीब 900 किलोमीटर दूर मध्यप्रदेश बुलाया गया था।
    जांच में सामने आया कि 29 अप्रैल को वीरू जैसे ही रीना के घर पहुंचा, वहां पहले से मौजूद आरोपियों ने बेसबॉल बैट से हमला कर उसकी हत्या कर दी। इसके बाद घर में फैला खून साफ किया गया, शव के हाथ-पैर बांधकर मुंह पर टेप लगाया गया और बोरी में पैक कर XUV 700 से रायसेन जिले के नागिन मोड़ सिरवारा ब्रिज के पास ले जाकर करीब 40 फीट गहरी खाई में फेंक दिया गया।
    7 मई को रायसेन के बाड़ी थाना क्षेत्र में सड़ी-गली लाश मिलने के बाद पुलिस जांच शुरू हुई। मौके से मिले बैग और बच्चे की कॉपी ने केस सुलझाने में अहम भूमिका निभाई। कॉपी में लिखावट के आधार पर पुलिस साईंखेड़ा पहुंची और फिर उज्जैन से रीना किरार, अरुण पटेल और हरनाम किरार को गिरफ्तार किया गया।
    पुलिस का कहना है कि हत्या की वजह प्रेम संबंधों में जलन और विवाद था। जांच में यह भी सामने आया कि अरुण पटेल रीना के परिवार पर काफी पैसा खर्च करता था और उसने उसे SUV व जेवर भी दिलाए थे। वीरू का रीना से लगातार बढ़ता संपर्क अरुण को पसंद नहीं था, जिसके बाद साजिश रचकर हत्या कर दी गई।
  • प्रेम प्रसंग से शुरू हुआ मर्डर केस अब पहुंचा राजनीति तक, आरोपी की तस्वीरों पर बवाल

    प्रेम प्रसंग से शुरू हुआ मर्डर केस अब पहुंचा राजनीति तक, आरोपी की तस्वीरों पर बवाल


    नरसिंहपुर —मध्यप्रदेश के नरसिंहपुर जिले के चर्चित साईंखेड़ा हत्याकांड में अब राजनीतिक एंगल भी जुड़ गया है। हत्या के आरोपी अरुण पटेल की भाजपा नेताओं के साथ तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद मामले ने नया मोड़ ले लिया है। तस्वीरों के सामने आने के बाद क्षेत्र में आरोपी की राजनीतिक पहुंच और रसूख को लेकर चर्चाओं का दौर तेज हो गया है।
    वायरल  तस्वीरों में आरोपी अरुण पटेल, Darshan Singh Choudhary, Narendra Shivaji Patel और पूर्व मुख्यमंत्री Shivraj Singh Chouhan के साथ नजर आ रहा है। कुछ तस्वीरों में वह नेताओं को माला और गुलदस्ता भेंट करता दिखाई दे रहा है, जबकि एक फोटो सांसद के केबिन की बताई जा रही है। इन तस्वीरों के वायरल होने के बाद विपक्षी दलों और स्थानीय लोगों ने सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं। हालांकि, अब तक किसी भी भाजपा नेता की ओर से इस मामले पर आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
     प्रेम प्रसंग बना हत्या की वजह
    पूरा मामला साईंखेड़ा थाना क्षेत्र से जुड़ा है। यहां राजस्थान निवासी पप्पू उर्फ वीर जाट की हत्या कर शव को बोरी में पैक कर रायसेन जिले की सीमा में नागन मोड़ सिरवारा ब्रिज के नीचे फेंक दिया गया था। बाड़ी पुलिस ने शव बरामद कर जांच शुरू की थी। जांच के दौरान मौके से मिले थैले, नोटबुक और हस्ताक्षरों के आधार पर पुलिस आरोपियों तक पहुंची। पुलिस पूछताछ में खुलासा हुआ कि आरोपी रीना किरार का पहले अरुण पटेल से प्रेम संबंध था और अरुण ही उसका खर्च उठाता था। इसी बीच सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक के जरिए रीना की दोस्ती राजस्थान निवासी वीर जाट से हो गई और दोनों करीब आ गए। पुलिस के अनुसार अरुण पटेल को यह रिश्ता पसंद नहीं था। इसी रंजिश के चलते 29 अप्रैल को रीना किरार, अरुण पटेल और उनके साथियों ने मिलकर वीर जाट की हत्या कर दी।
    चार आरोपी गिरफ्तार, हथियार और वाहन जब्त
    पुलिस ने मामले में रीना किरार, अरुण पटेल, हरनाम सिंह और कन्हैया उर्फ अजय को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के कब्जे से हत्या में इस्तेमाल बेसबॉल डंडा और एक चारपहिया वाहन भी बरामद किया गया है। इसके अलावा साईंखेड़ा स्थित आरोपी के घर को भी सील कर दिया गया है।
    सोशल मीडिया पर गरमाया मामला
    गिरफ्तारी के बाद जैसे ही आरोपी की नेताओं के साथ तस्वीरें सामने आईं, सोशल मीडिया पर मामला तेजी से वायरल हो गया। लोग आरोपी की राजनीतिक पहचान और प्रभाव को लेकर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। इस मामले में कांग्रेस नेता और तेंदूखेड़ा के पूर्व विधायक Sanjay Sharma ने कहा कि यह बेहद गंभीर मामला है और सरकार को संवेदनशीलता के साथ कार्रवाई करनी चाहिए।

  • अम्मा के बाद बिखरती AIADMK! क्या 2026 में खत्म हो जाएगी MGR-जयललिता की राजनीतिक विरासत?

    अम्मा के बाद बिखरती AIADMK! क्या 2026 में खत्म हो जाएगी MGR-जयललिता की राजनीतिक विरासत?

    नई दिल्ली ।तमिलनाडु की राजनीति में कभी बेहद मजबूत मानी जाने वाली All India Anna Dravida Munnetra Kazhagam आज अपने सबसे कठिन दौर से गुजरती दिखाई दे रही है। 2026 विधानसभा चुनाव में मिली बड़ी हार के बाद पार्टी के भीतर लंबे समय से दबा असंतोष अब खुलकर सामने आने लगा है। हालात ऐसे बन गए हैं कि पार्टी एक और बड़े विभाजन की कगार पर खड़ी नजर आ रही है। राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या एमजीआर और J. Jayalalithaa द्वारा खड़ी की गई यह राजनीतिक विरासत अब बिखरने की ओर बढ़ रही है।

    चुनावी हार के बाद पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं ने मौजूदा नेतृत्व पर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं। पार्टी के भीतर एक बड़ा गुट खुलकर नेतृत्व परिवर्तन की मांग कर रहा है। आरोप लगाए जा रहे हैं कि मौजूदा रणनीति और फैसलों ने पार्टी को कमजोर कर दिया है, जिसका सीधा असर चुनावी परिणामों में दिखाई दिया। यही कारण है कि अब संगठन के भीतर दो अलग-अलग धड़े स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगे हैं।

    तमिलनाडु विधानसभा के हालिया सत्र के दौरान भी पार्टी के भीतर का मतभेद खुलकर सामने आ गया। विधायकों के अलग-अलग समूहों में दिखाई देने से यह साफ संकेत मिला कि अंदरूनी एकजुटता लगभग खत्म होती जा रही है। कुछ नेताओं ने खुले तौर पर मौजूदा नेतृत्व को अस्वीकार करते हुए नए चेहरे को आगे लाने की मांग की। इस घटनाक्रम ने पार्टी समर्थकों के बीच भी चिंता बढ़ा दी है।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि All India Anna Dravida Munnetra Kazhagam पहले भी कई बार आंतरिक संघर्षों का सामना कर चुकी है, लेकिन इस बार स्थिति पहले से कहीं ज्यादा गंभीर मानी जा रही है। पार्टी के संस्थापक M. G. Ramachandran और बाद में J. Jayalalithaa के नेतृत्व में संगठन ने तमिलनाडु की राजनीति में मजबूत पकड़ बनाई थी, लेकिन अब करिश्माई नेतृत्व की कमी साफ महसूस की जा रही है।

    विवाद की एक बड़ी वजह भविष्य की राजनीतिक रणनीति को लेकर भी बताई जा रही है। पार्टी के भीतर कुछ नेता बदलते राजनीतिक समीकरणों के अनुसार नई साझेदारी और गठबंधन की वकालत कर रहे हैं, जबकि दूसरा पक्ष पुराने ढर्रे पर आगे बढ़ना चाहता है। इसी टकराव ने संगठन के भीतर दूरी और बढ़ा दी है।

    चुनाव में खराब प्रदर्शन के बाद पार्टी के कई नेता खुलकर यह कह रहे हैं कि अगर समय रहते संगठन में बड़े बदलाव नहीं किए गए, तो पार्टी का जनाधार और कमजोर हो सकता है। समर्थकों के बीच भी निराशा का माहौल है क्योंकि वे लगातार पार्टी के भीतर बढ़ती खींचतान को देख रहे हैं।

    राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आने वाले महीनों में यदि यह विवाद और गहराया, तो पार्टी के सामने पहचान और चुनाव चिन्ह तक का संकट खड़ा हो सकता है। फिलहाल पूरा तमिलनाडु इस राजनीतिक संघर्ष पर नजर बनाए हुए है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या कोई नया नेतृत्व इस बिखरते संगठन को संभाल पाएगा या फिर यह संघर्ष पार्टी के इतिहास का सबसे बड़ा संकट साबित होगा।

  • IPL 2026: पहली बार आमने-सामने होंगी RCB और KKR, आंकड़ों में कोलकाता आगे

    IPL 2026: पहली बार आमने-सामने होंगी RCB और KKR, आंकड़ों में कोलकाता आगे


    नई दिल्ली। IPL 2026 का रोमांच अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुका है। बुधवार शाम रायपुर के Shaheed Veer Narayan Singh International Stadium में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु और Kolkata Knight Riders के बीच सीजन का बेहद अहम मुकाबला खेला जाएगा। मैच शाम 7:30 बजे शुरू होगा और दोनों टीमों के लिए इसकी अहमियत काफी ज्यादा है।
    Royal Challengers Bengaluru इस समय 14 अंकों के साथ अंकतालिका में शीर्ष पर बनी हुई है। टीम आज जीत हासिल कर प्लेऑफ का टिकट लगभग पक्का करना चाहेगी। दूसरी ओर कोलकाता के लिए यह मुकाबला अस्तित्व की लड़ाई जैसा है। एक और हार KKR को प्लेऑफ की दौड़ से लगभग बाहर कर सकती है।
     36वीं भिड़ंत, KKR का पलड़ा भारी
    दोनों टीमों के बीच अब तक 35 मुकाबले खेले जा चुके हैं। इनमें कोलकाता ने 20 मैच जीते हैं, जबकि बेंगलुरु को 15 बार जीत मिली है। हालांकि पिछले सीजन का मुकाबला RCB ने अपने नाम किया था। इस सीजन दोनों टीमें पहली बार आमने-सामने होंगी।
    कोहली पर फिर टिकी RCB की उम्मीदें
    RCB के लिए Virat Kohli शानदार फॉर्म में हैं। उन्होंने 11 मैचों में 379 रन बनाकर टीम की बल्लेबाजी की जिम्मेदारी संभाली हुई है। पिछले मैच में मुंबई के खिलाफ क्रुणाल पंड्या की शानदार फिफ्टी और आखिरी ओवर में Bhuvneshwar Kumar के सिक्स ने टीम को जीत दिलाई थी। हालांकि कप्तान Rajat Patidar की खराब फॉर्म टीम के लिए चिंता का विषय बनी हुई है। वे पिछले छह मैचों में उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर सके हैं।
     KKR की ताकत बनी गेंदबाजी
    KKR की सबसे बड़ी ताकत उसकी गेंदबाजी यूनिट है। Sunil Narine और Varun Chakravarthy की स्पिन जोड़ी शानदार लय में है। वहीं कार्तिक त्यागी, वैभव अरोड़ा और अनुकूल रॉय भी लगातार विकेट निकाल रहे हैं।
    कोलकाता ने लगातार चार मुकाबले जीतकर जबरदस्त वापसी की है। अगर रायपुर की पिच धीमी रही तो KKR के स्पिनर्स RCB के बल्लेबाजों के लिए बड़ी चुनौती बन सकते हैं।
    पिच और मौसम रिपोर्ट
    रायपुर की पिच संतुलित मानी जा रही है। शुरुआती ओवरों में तेज गेंदबाजों को स्विंग और अतिरिक्त बाउंस मिल सकता है, जबकि बाद में बल्लेबाजी आसान होगी। यहां अब तक खेले गए IPL मुकाबलों में चेज करने वाली टीमों का रिकॉर्ड बेहतर रहा है। मौसम साफ रहेगा और बारिश की संभावना बेहद कम है। तापमान 33 से 36 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने की उम्मीद है।

    संभावित प्लेइंग-11


    RCB
    विराट कोहली, जैकब बेथेल, रजत पाटीदार (कप्तान), जितेश शर्मा, टिम डेविड, रोमारियो शेफर्ड, क्रुणाल पंड्या, भुवनेश्वर कुमार, जोश हेजलवुड, सुयश शर्मा, रसिख सलाम।
    KKR
    अजिंक्य रहाणे (कप्तान), अंगकृष रघुवंशी, कैमरन ग्रीन, रोवमन पॉवेल, मनीष पांडे, रिंकू सिंह, सुनील नरेन, अनुकूल रॉय, कार्तिक त्यागी, वरुण चक्रवर्ती, वैभव अरोड़ा।
  • . वीआईपी कल्चर में बदलाव! सीमित काफिले के साथ निकले मुख्यमंत्री, सादगी की नई मिसाल

    . वीआईपी कल्चर में बदलाव! सीमित काफिले के साथ निकले मुख्यमंत्री, सादगी की नई मिसाल


    नई दिल्ली। भोपाल प्रधानमंत्री Narendra Modi की पेट्रोल-डीजल के संयमित उपयोग की अपील का असर अब मध्यप्रदेश सरकार में साफ दिखाई देने लगा है। मुख्यमंत्री Mohan Yadav ने अपने वीवीआईपी काफिले में चलने वाले वाहनों की संख्या घटाकर बड़ा संदेश दिया है। अब मुख्यमंत्री के काफिले में पहले की तरह 13 गाड़ियां नहीं, बल्कि सिर्फ 7 वाहन ही नजर आए।
    बुधवार को जब मुख्यमंत्री भोपाल से नरसिंहपुर के लिए रवाना हुए, तब वीआईपी रोड और एयरपोर्ट रोड पर उनका छोटा काफिला लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया। सरकार ने इसे ईंधन संरक्षण और सादगी की दिशा में अहम कदम बताया है।
    सीएम के इस फैसले के बाद प्रदेश सरकार के अन्य मंत्री और अधिकारी भी सक्रिय हो गए हैं। डिप्टी सीएम Rajendra Shukla ने भी अपने काफिले में न्यूनतम वाहनों के उपयोग का ऐलान किया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि राष्ट्रहित में ईंधन बचत हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है और विभागीय गतिविधियों में अनावश्यक वाहन उपयोग से बचा जाएगा।
    डिप्टी सीएम ने अधिकारियों को भी निर्देश दिए हैं कि वे कार पूलिंग, सार्वजनिक परिवहन और साझा वाहन व्यवस्था को प्राथमिकता दें। उन्होंने कहा कि ईंधन संरक्षण के साथ पर्यावरण सुरक्षा और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देना भी जरूरी है, क्योंकि इससे आयातित रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम होगी और स्वास्थ्य के लिए बेहतर वातावरण तैयार होगा।
    इधर, खेल एवं सहकारिता मंत्री Vishvas Sarang ने भी अपने सुरक्षा काफिले में बदलाव किया। वे केवल एक कार में स्टाफ के साथ मंत्रालय पहुंचे। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी का यह आह्वान केवल ईंधन बचाने तक सीमित नहीं है, बल्कि देश को आर्थिक रूप से मजबूत और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में बड़ा प्रयास है।
    मंत्री सारंग ने कहा कि हर नागरिक का दायित्व है कि वह पेट्रोल-डीजल की खपत कम करे। उन्होंने कार्यकर्ताओं और आम लोगों से भी अपील की कि अनावश्यक वाहन उपयोग से बचें और ईंधन बचत को जनआंदोलन बनाएं।
    प्रदेश सरकार के इस कदम को प्रशासनिक सादगी और संसाधनों के बेहतर उपयोग की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। राजनीतिक गलियारों में भी इसे पीएम मोदी की अपील पर तेज और प्रतीकात्मक कार्रवाई के रूप में देखा जा रहा है।

  • रतलाम सड़क हादसा: ओवरलोड ऑटो पलटने से किशोरी की दबकर मौत, दो दिन पहले ही कटा था चालान

    रतलाम सड़क हादसा: ओवरलोड ऑटो पलटने से किशोरी की दबकर मौत, दो दिन पहले ही कटा था चालान


    नई दिल्ली। रतलाम मध्यप्रदेश के रतलाम जिले में ओवरलोड वाहन एक बार फिर दर्दनाक हादसे की वजह बन गया। सैलाना क्षेत्र के सकरावदा गांव में बुधवार सुबह मजदूरों से भरा एक ऑटो अनियंत्रित होकर पलट गया। हादसे में 15 वर्षीय किशोरी की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि 6 लोग घायल हो गए। इनमें कुछ की हालत गंभीर बताई जा रही है।
    जानकारी के अनुसार, ऑटो रिक्शा (MP 43 K 2267) फूफीरुंडी गांव से करीब 25 से 30 मजदूरों को बैठाकर सैलाना की ओर जा रहा था। सुबह करीब 7:30 बजे सकरावदा के इमली चौक के पास मोड़ पर तेज रफ्तार और अत्यधिक भार के कारण चालक वाहन पर नियंत्रण खो बैठा। देखते ही देखते ऑटो सड़क पर पलट गया और उसमें सवार लोग उसके नीचे दब गए।
    हादसे के बाद मौके पर चीख-पुकार मच गई। आसपास के ग्रामीण तुरंत दौड़कर पहुंचे और ऑटो के नीचे दबे लोगों को बाहर निकाला। इस हादसे में फूफीरुंडी निवासी 15 वर्षीय कविता खराड़ी की ऑटो के नीचे दबने से मौके पर ही मौत हो गई।
    घटना की सूचना मिलते ही एंबुलेंस और पुलिस मौके पर पहुंची। घायलों को तत्काल सैलाना सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया गया। हादसे में घायल कालीबाई मईड़ा और रेखा खराड़ी का अस्पताल में इलाज जारी है, जबकि अन्य को मामूली चोटें आई हैं।
    सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि दुर्घटनाग्रस्त ऑटो पर दो दिन पहले ही ओवरलोडिंग के मामले में 15 हजार रुपए का चालान किया गया था। इसके बावजूद चालक ने नियमों की अनदेखी करते हुए फिर क्षमता से अधिक मजदूरों को वाहन में बैठा लिया।
    सैलाना थाना प्रभारी पिंकी आकाश ने बताया कि चालक के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि हादसे के समय वाहन में कितने लोग सवार थे और सुरक्षा नियमों का कितना उल्लंघन किया गया।
    क्षेत्र में ओवरलोड वाहनों के कारण लगातार हादसे हो रहे हैं। इससे पहले 2 मई को भी करीब 50 मजदूरों से भरी बोलेरो खाई में गिर गई थी। स्थानीय लोगों का आरोप है कि प्रशासन कुछ दिन कार्रवाई करता है, लेकिन बाद में ओवरलोड वाहनों पर नियंत्रण नहीं रह पाता। यह हादसा एक बार फिर सड़क सुरक्षा और ओवरलोडिंग पर प्रशासनिक सख्ती की जरूरत को उजागर करता है।