Author: bharati

  • आज आपके सितारे क्या कहते हैं, यह जानने के लिए पढ़ें आज का भविष्यफल

    आज आपके सितारे क्या कहते हैं, यह जानने के लिए पढ़ें आज का भविष्यफल


    मेष राशि :-
    आय-व्यय की स्थिति समान रहेगी। व्यापार में स्थिति नरम रहेगी। शत्रुभय, चिंता, संतान को कष्ट, अपव्यय के कारण बनेंगे। भ्रातृपक्ष में विरोध होने की संभावना है। स्वास्थ्य का पाया भी कमजोर बना रहेगा। कामकाज सीमित तौर पर ही बन पाएंगे। अभी आश्वासनों से संतोष करना पड़ेगा। शुभांक-2-6-8

    वृष राशि :- सुविधा और समन्वय बना रहने से कामकाज में प्रगति बनेगी। मेल-मिलाप से काम बनाने की कोशिश लाभ देगी। अपने काम में सुविधा मिल जाने से प्रगति होगी। समाज में मान-सम्मान बढ़ेगा। यात्रा का दूरगामी परिणाम मिल जाएगा। कामकाज में आ रही बाधा को दूर कर लेंगे। शुभांक-4-6-8

    मिथुन राशि :– नवीन जिम्मेदारी बढ़ने के आसार रहेंगे। अपने काम में सुविधा मिल जाने से प्रगति होगी। यात्रा प्रवास का सार्थक परिणाम मिलेगा। मेल-मिलाप से काम बनाने की कोशिश लाभ देगी। समाज में मान-सम्मान बढ़ेगा। परिवारजनों का सहयोग बना रहेगा। मेहमानों का आगमन होगा। शुभांक-5-7-8

    कर्क राशि :– ले देकर की जा रही काम की कोशिश ठीक नहीं। राजकीय कार्यों से लाभ। पैतृक सम्पत्ति से लाभ। नैतिक दायरे में रहें। पुरानी गलती का पश्चाताप होगा। दाम्पत्य जीवन सुखद रहेगा। धीरे-धीरे लाभ का मार्ग प्रशस्त होगा उचित समय का इन्तजार करें। मेहमानों का आगमन होगा। छात्रों को लाभ। शुभांक-4-6-7

    सिंह राशि :– आय के अच्छे योग बनेंगे। संतान की उन्नति के योग हैं। स्त्री-संतान पक्ष का सहयोग मिलेगा। पुराने मित्र से मिलन होगा। स्वविवेक से कार्य करें। शत्रुपक्ष से सावधान रहें। भाई-बहनों का प्रेम बढ़ेगा। आत्मविश्वास बढ़ेगा। इच्छित कार्य सफल होंगे। इच्छित स्थान की यात्रा का योग हैं। शुभांक-2-5-6

    कन्या राशि :- ”आगे-आगे गौरख जागे” वाली कहावत चरितार्थ होगी। मेहमानों का आगमन होगा। परिवारजन का सहयोग व समन्वय काम को बनाना आसान करेगा। अपना काम दूसरों के सहयोग से पूरा होगा। कारोबारी काम में नवीन तालमेल व समन्वय बनाएं। मीठे बोलने वालों से संभल कर रहें। शुभांक-4-5-7

    तुला राशि :- जीवन साथी अथवा यार-दोस्तों के साथ साझे में किए जा रहे काम में लाभ मिल जाएगा। पूर्व नियोजित कार्यक्रम सरलता से संपन्न हो जाएंगे। जोखिम से दूर रहना ही बुद्घिमानी होगी। ले देकर की जा रही काम की कोशिश ठीक नहीं। महत्वपूर्ण कार्य को समय पर बना लें तो अच्छा ही होगा। शुभांक-3-5-7

    वृश्चिक राशि :- लाभ में आशातीत वृद्धि तय है मगर नकारात्मक रुख न अपनाएं। आशा और उत्साह के कारण सक्रियता बढ़ेगी। स्वास्थ्य मध्यम रहेगा। समाज में मान-सम्मान बढ़ेगा। आय-व्यय समान रहेगा। व्यापार व व्यवसाय में ध्यान देने से सफलता मिलेगी। विशिष्ट जनों से मेल-मुलाकात होगी। शुभांक-2-4-6

    धनु राशि :- अर्थपक्ष मजबूत रहेगा। जीवनसाथी का परामर्श लाभदायक रहेगा। व्यापार व नौकरी में स्थिति अच्छी रहेगी। शुभ कार्यों का लाभदायक परिणाम होगा। कामकाज की अधिकता रहेगी। व्यवसायिक अभ्युदय भी होगा और प्रसन्नताएं भी बढ़ेगी। स्वास्थ्य उत्तम रहेगा। धर्म-कर्म के प्रति रुचि जागृत होगी। शुभांक-4-6-7

    मकर राशि :- कामकाज की व्यस्तता से सुख-आराम प्रभावित होगा। प्रियजनों से समागम का अवसर मिलेगा। अवरुद्ध कार्य संपन्न हो जाएंगे। मानसिक एवं शारीरिक शिथिलता पैदा होगी। श्रेष्ठजनों की सहानुभूतियां होगी। यात्रा प्रवास का सार्थक परिणाम मिलेगा। आनन्ददायक वातावरण बनेगा। शुभांक-1-3-5

    कुंभ राशि :- होश में रहकर कार्य करें। कामकाज सीमित तौर पर ही बन पाएंगे। कारोबारी यात्रा को फिलहाल टालें। आय-व्यय की स्थिति समान रहेगी। अपने हितैषी समझे जाने वाले ही पीठ पीछे नुकसान पहुंचाने की कोशिश करेंगे। स्वास्थ्य का पाया भी कमजोर बना रहेगा। कुछ आर्थिक संकोच पैदा हो सकते हैं। शुभांक-3-4-6

    मीन राशि :– राजकीय कार्यों से लाभ। पैतृक सम्पत्ति से लाभ। कारोबारी यात्रा को फिलहाल टालें। शैक्षणिक कार्य आसानी से पूरे होते रहेंगे। व्यापार व व्यवसाय में ध्यान देने से सफलता मिलेगी। श्रम साध्य कार्यों में सफल होंगे। कुछ महत्वपूर्ण कार्य बनाने के लिए भाग-दौड़ रहेगी। मनोरथ सिद्धि का योग है। शुभांक-2-4-6

  • एमपी में 'भविष्य' की दस्तक: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव लांच करेंगे प्रदेश की पहली 'स्पेसटेक नीति' AI के जरिए बदलेगी गवर्नेंस

    एमपी में 'भविष्य' की दस्तक: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव लांच करेंगे प्रदेश की पहली 'स्पेसटेक नीति' AI के जरिए बदलेगी गवर्नेंस


    भोपाल /मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव गुरुवार 15 जनवरी को भोपाल में मध्यप्रदेश रीजनल एआई इम्पैक्ट कांफ्रेंस-2026 में एआई-सक्षम शासन और आर्थिक परिवर्तन के लिए मध्यप्रदेश के रणनीतिक रोडमैप को प्रस्तुत करेंगे। यह कांफ्रेंस एआई इनेबल्ड गवर्नेंस फॉर एन एम्पावर्ड भारत की थीम पर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा इंडिया एआई मिशन के सहयोग से आयोजित की जा रही है।इससे एआई आधारित शासनतकनीक एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अकादमिक और उद्योग समन्वय को बढ़ावा मिलेगा। इसके साथ प्रदेश सरकार एआई को नागरिक-केंद्रित पारदर्शी और कुशल शासन की आधारशिला के रूप में स्थापित करने की दिशा में ठोस कदम उठा रही है।

    कांफ्रेंस में मध्यप्रदेश ‘इनोवेशन एक्सपो’ का शुभारंभ भी किया जाएगा जिसमें इंडिया एआई पेवेलियन मध्यप्रदेश पेवेलियन स्टार्ट-अप शो-केस हैकाथॉन एरिना और स्टार्ट-अप प्रतियोगिता शामिल होंगी। कांफ्रेंस में केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अपर सचिव एवं सीईओ इंडिया एआई श्री अभिषेक सिंह और आईआईटी इंदौर के निदेशक श्री सुहास एस. जोशी संबोधित करेंगे।

    अपर मुख्य सचिव विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी श्री संजय दुबे द्वारा एआई फॉर पीपलप्लेनेट एंड प्रोग्रेस- मध्यप्रदेश रोडमैप टू इंपैक्ट पर राज्य का प्रमुख एआई विजन प्रस्तुत किया जाएगा। मुख्य सचिव श्री अनुराग जैन कांफ्रेंस को संबोधित करेंगे। कांफ्रेंस में स्पेसटेक नीति लांच होगी विभिन्न समझौता ज्ञापनों और नवाचार एवं युवा एआई पहलों से संबंधित महत्वपूर्ण घोषणाएं की जाएंगी।

    कांफ्रेंस में तीन उच्चस्तरीय थीमैटिक सत्र-टेक्नोलॉजी लेड गवर्नेंस फॉर ऑल एआई फॉर इकोनॉमिक ग्रोथ एंड सोशल गुड और रेज़िलिएंस इनोवेशन एंड डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर आयोजित किए जाएंगे। इनमें डिजिटल इंडिया- भाषिणी यूआईडीएआई एनईपीडी विभिन्न राज्य सरकारों और गूगल माइक्रोसॉफ्ट डिलोट्टी और ईवाई जैसे अग्रणी संगठनों के विशेषज्ञ अपने विचार साझा करेंगे। साथ ही एमपी इनोटेक स्टार्ट-अप पिच कंटेस्ट और उज्जैन महाकुंभ हैकाथॉन के विजेताओं की घोषणा भी की जाएगी।यह कांफ्रेंस इंडिया-एआई इम्पैक्ट समिट-2026 की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इंडिया-एआई इम्पैक्ट समिट-2026 की घोषणा प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा फ्रांस एआई एक्शन समिट में की गई थी। सम्मेलन का आयोजन 16 से 20 फरवरी 2026 तक नई दिल्ली में किया जाएगा।

  • हैवानियत पर कानून का प्रहार: बैतूल में नाबालिग से गैंगरेप के दो दोषियों को मरते दम तक जेल की सजा

    हैवानियत पर कानून का प्रहार: बैतूल में नाबालिग से गैंगरेप के दो दोषियों को मरते दम तक जेल की सजा


    बैतूल। मध्य प्रदेश के बैतूल जिले में मानवता को शर्मसार करने वाले सामूहिक दुष्कर्म के एक मामले में न्यायपालिका ने कड़ा संदेश दिया है। जिले की स्पेशल पॉक्सो कोर्ट ने एक नाबालिग छात्रा के साथ दरिंदगी करने वाले दो युवकों को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास उम्रकैद की सजा सुनाई है। कोर्ट के इस फैसले ने न केवल पीड़िता को न्याय दिलाया है बल्कि समाज में महिलाओं और बच्चियों के विरुद्ध अपराध करने वालों के मन में कानून का खौफ भी पैदा किया है।

    यह हृदयविदारक घटना वर्ष 2023 में आठनेर थाना क्षेत्र में घटित हुई थी। अभियोजन पक्ष के अनुसार दोनों दोषियों ने एक नाबालिग छात्रा को अपनी हवस का शिकार बनाया था। वारदात के बाद डरी-सहमी पीड़िता ने जब परिजनों को आपबीती सुनाई तो पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए मामला दर्ज किया। पुलिस ने विवेचना के दौरान वैज्ञानिक साक्ष्य और गवाहों के बयान एकत्रित कर न्यायालय में पेश किए। मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रकरण की सुनवाई स्पेशल पॉक्सो कोर्ट में चली जहाँ अभियोजन ने प्रभावी पैरवी करते हुए दोषियों के कृत्य को जघन्य श्रेणी का बताया।

    विशेष न्यायाधीश ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद पाया कि आरोपियों ने न केवल कानून का उल्लंघन किया बल्कि एक मासूम के भविष्य और उसकी गरिमा को भी गंभीर चोट पहुँचाई। कोर्ट ने दोनों अभियुक्तों को सामूहिक दुष्कर्म और पॉक्सो एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत दोषी ठहराया। सजा सुनाते हुए अदालत ने स्पष्ट किया कि ऐसे अपराध समाज के लिए कलंक हैं और अपराधियों के प्रति कोई नरमी नहीं बरती जा सकती। दोषियों को ‘अंतिम सांस तक’ जेल की सलाखों के पीछे रहने का आदेश दिया गया है। साथ ही अदालत ने दोनों पर 21-21 हजार रुपए का आर्थिक जुर्माना भी लगाया है। जुर्माने की यह राशि अदा न करने पर उन्हें अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। बैतूल पुलिस और अभियोजन की इस सफलता को महिला सुरक्षा की दिशा में एक बड़ी जीत माना जा रहा है। कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे त्वरित और सख्त फैसलों से अपराधियों के हौसले पस्त होंगे और पीड़ित परिवारों का न्याय प्रणाली पर विश्वास और अधिक मजबूत होगा।

  • देसी बनाम मॉडर्न: मकर संक्रांति के लिए सही खाना क्या है, डॉक्टर मीरा पाठक ने किया खुलासा

    देसी बनाम मॉडर्न: मकर संक्रांति के लिए सही खाना क्या है, डॉक्टर मीरा पाठक ने किया खुलासा

    नई दिल्ली। उत्तर भारत में मकर संक्रांति आते ही घरों में रसोई की खुशबू बदल जाती है। सर्दियों में गाजर, मटर, गोभी और विभिन्न दालों के मेल से बनी खिचड़ी इस पर्व का खास हिस्सा होती है। यह सिर्फ स्वाद या परंपरा का हिस्सा नहीं, बल्कि शरीर को हल्का और ऊर्जा देने वाला भोजन भी है।

    खिचड़ी: हल्का और संतुलित भोजन
    जनवरी का महीना त्योहारी सीजन और भारी खाने के बाद शरीर को हल्का और संतुलित भोजन चाहता है। इसी कारण खिचड़ी इस समय सबसे ज्यादा पसंद की जाती है। भंगेल सीएचसी की सीनियर मेडिकल ऑफिसर डॉ. मीरा पाठक के अनुसार, खिचड़ी एक संपूर्ण और टाइम-टेस्टेड आयुर्वेदिक डाइट है, जिसमें कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन और आवश्यक अमीनो एसिड्स संतुलित मात्रा में मौजूद होते हैं। दाल में मौजूद लाइसीन और चावल में मिथिओनीन मिलकर एक कंप्लीट प्रोटीन बनाते हैं।

    डिटॉक्स और रिकवरी के लिए बेहतरीन विकल्प
    डॉ. पाठक बताती हैं कि खिचड़ी पचाने में हल्की होती है और शरीर व मस्तिष्क को ‘सॉफ्ट रीसेट’ देती है। कुछ दिनों तक सिंपल और आसानी से पचने वाला भोजन लेने से आंतें, लिवर और नर्वस सिस्टम को आराम मिलता है और शरीर रिकवरी मोड में चला जाता है। यही कारण है कि इसे डिटॉक्स डाइट के लिए सबसे सुरक्षित और असरदार माना जाता है।

    शुगर लेवल और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण
    खिचड़ी धीरे-धीरे ऊर्जा रिलीज करती है, जिससे ब्लड शुगर में अचानक उछाल नहीं आता। जूस, प्रोबायोटिक ड्रिंक्स या कोम्बुचा की तुलना में यह अधिक संतुलित और भरोसेमंद विकल्प है। इसमें हाइड्रेटिंग और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण भी मौजूद होते हैं, जो सूजन, थकान और शरीर में होने वाले अंदरूनी ‘वेयर एंड टियर’ को कम करने में मदद करते हैं।

    वर्सटाइल और मॉडर्न-सपोर्टेड भोजन
    खिचड़ी की सबसे बड़ी खूबी इसकी वर्सटाइल नेचर है। इसमें चावल की जगह मिलेट्स, मूंग दाल के साथ अन्य दालें, सब्जियां, पनीर या शुद्ध घी मिलाकर इसे और भी पौष्टिक बनाया जा सकता है। यह हमारी पारंपरिक भारतीय समझ पर आधारित है, जिसे आज की मॉडर्न साइंस भी पूरी तरह समर्थन करती है।

    मकर संक्रांति पर बनाई जाने वाली खिचड़ी सिर्फ स्वाद और त्यौहार की पहचान नहीं है, बल्कि यह स्वास्थ्य, ऊर्जा, डिटॉक्स और शरीर की रिकवरी के लिए एक संतुलित, पौष्टिक और भरोसेमंद भोजन है। यह हर उम्र और हर मौसम के लिए लाभकारी है।

  • ईरान में हालात खराब, भारत ने जारी की एडवाइजरी, देश छोड़ने का किया आग्रह

    ईरान में हालात खराब, भारत ने जारी की एडवाइजरी, देश छोड़ने का किया आग्रह

    नई दिल्ली। ईरान में जारी विरोध प्रदर्शन लगातार हिंसक होते जा रहे हैं। इस स्थिति को देखते हुए भारत के दूतावास ने वहां रह रहे भारतीय नागरिकों के लिए सुरक्षा एडवाइजरी जारी की है। इसमें छात्रों, तीर्थयात्रियों, व्यापारियों और टूरिस्टों को सलाह दी गई है कि वे कमर्शियल फ्लाइट या उपलब्ध अन्य परिवहन साधनों के माध्यम से ईरान छोड़ दें।

    प्रदर्शन और हिंसा की स्थिति

    ईरान में विरोध प्रदर्शन लगभग 20 दिनों से जारी हैं। देशभर में 280 से ज्यादा जगहों पर अशांति की खबरें आई हैं। स्थानीय मीडिया और रिपोर्ट्स के अनुसार, इन विरोधों के दौरान कम से कम 2,000 लोगों की मौत हो चुकी है और लगभग 20,000 लोग गिरफ्तार किए गए हैं। इंटरनेट सेवा पिछले पांच दिनों से बाधित है, जिससे लोगों तक ताजा जानकारी पहुंचने में कठिनाई हो रही है।

    भारतीय दूतावास की सलाह

    भारतीय दूतावास ने सभी नागरिकों से कहा है कि वे विरोध या प्रदर्शन वाली जगहों से बचें और अपने पासपोर्ट और अन्य पहचान दस्तावेज सुरक्षित रखें। दूतावास के साथ संपर्क बनाए रखें और किसी भी स्थानीय घटना के लिए मीडिया पर नजर रखें।

    इमरजेंसी हेल्पलाइन और संपर्क विवरण

    ईरान में किसी भी मदद या आपात स्थिति के लिए भारतीय नागरिक दूतावास से निम्नलिखित नंबरों पर संपर्क कर सकते हैं:

    मोबाइल: +989128109115, +989128109109, +989128109102, +989932179359

    ईमेल: [email protected]

    इसके अलावा, सभी भारतीय नागरिकों से अपील की गई है कि जो लोग दूतावास में रजिस्टर नहीं हुए हैं, वे इस लिंक https://www.meaers.com/request/home
    पर जाकर रजिस्टर करें। यदि इंटरनेट बाधाओं के कारण रजिस्ट्रेशन संभव न हो, तो उनके परिवार भारत से रजिस्टर कर सकते हैं।

    दूतावास का उद्देश्य

    भारतीय दूतावास का मुख्य उद्देश्य वहां रह रहे नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और किसी भी आपात स्थिति में तत्काल मदद प्रदान करना है। उन्होंने बार-बार चेतावनी दी है कि सभी भारतीय नागरिकों को पूरी सावधानी बरतनी चाहिए और किसी भी तरह के जोखिम वाले स्थानों से दूर रहना चाहिए।

    निष्कर्ष:
    ईरान में बढ़ती हिंसा और अशांति को देखते हुए भारत सरकार ने वहां रह रहे नागरिकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता बनाई है और उनके सुरक्षित बाहर निकलने के लिए दूतावास ने सक्रिय कदम उठाए हैं।

  • एमपी में निगम-मंडलों की नियुक्तियों पर मंथन तेज: पूर्व मंत्री-विधायक रेस में इसी महीने हो सकता है फैसला

    एमपी में निगम-मंडलों की नियुक्तियों पर मंथन तेज: पूर्व मंत्री-विधायक रेस में इसी महीने हो सकता है फैसला

    भोपाल। मध्य प्रदेश में निगम मंडल प्राधिकरण और आयोगों में लंबे समय से अटकी राजनीतिक नियुक्तियों को लेकर सियासी सरगर्मी तेज हो गई है। माना जा रहा है कि प्रदेश में जल्द ही इन नियुक्तियों का ऐलान किया जा सकता है। हाल ही में बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के उस बयान के बाद उम्मीदों को और बल मिला है जिसमें उन्होंने निगम-मंडलों की सूची तैयार होने और शीघ्र नियुक्तियां किए जाने की बात कही थी। इसके बाद से ही सत्ता और संगठन से जुड़े कई नेता सक्रिय हो गए हैं। सूत्रों के अनुसार इसी महीने निगम-मंडलों के अध्यक्ष-उपाध्यक्ष प्राधिकरण और विभिन्न आयोगों में राजनीतिक नियुक्तियां की जा सकती हैं। इसे लेकर पार्टी के भीतर कवायद और लॉबिंग तेज हो गई है। कई ऐसे नेता जिन्हें हालिया चुनावों या राज्यसभा में मौका नहीं मिल पाया अब निगम-मंडलों के जरिए संगठन और सरकार में भूमिका की उम्मीद लगाए बैठे हैं।

    बताया जा रहा है कि पूर्व मंत्री लालसिंह आर्य जिन्हें राज्यसभा में स्थान नहीं मिल सका निगम या प्राधिकरण में अहम जिम्मेदारी दी जा सकती है। इसके अलावा पूर्व कैबिनेट मंत्री दर्जा प्राप्त विनोद गोटिया पूर्व मंत्री अरविंद भदौरिया और कांग्रेस से बीजेपी में आए पूर्व मंत्री रामनिवास रावत के नाम भी चर्चा में हैं। पार्टी संगठन इन नेताओं को समायोजित करने की रणनीति पर काम कर रहा है। पूर्व मंत्रियों की सूची यहीं खत्म नहीं होती। सूत्रों के मुताबिक पूर्व मंत्री उमाशंकर गुप्ता कमल पटेल रामपाल सिंह इमरती देवी भी दावेदारी पेश कर रहे हैं। वहीं अंचल सोनकर संजय शुक्ला अलकेश आर्य और कलसिंह भाबर जैसे नेताओं के नाम भी संभावित सूची में बताए जा रहे हैं। संगठनात्मक संतुलन क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व और राजनीतिक समीकरणों को ध्यान में रखकर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

    पूर्व मंत्रियों के साथ-साथ मौजूदा और पूर्व विधायकों को भी निगम-मंडलों में जिम्मेदारी मिलने की संभावना है। इस रेस में विधायक अजय बिश्नोई अर्चना चिटनीस शैलेंद्र जैन प्रदीप लारिया और पूर्व विधायक ध्रुव नारायण सिंह के नाम सामने आ रहे हैं। माना जा रहा है कि जिन विधायकों को संगठन या सरकार में फिलहाल कोई बड़ा पद नहीं मिला है उन्हें निगम-मंडलों के जरिए संतुलित किया जा सकता है।गौरतलब है कि फरवरी 2024 में प्रदेश सरकार ने 46 निगम-मंडलों की राजनीतिक नियुक्तियां रद्द कर दी थीं। इसके बाद से ही नए सिरे से नियुक्तियों का इंतजार किया जा रहा था। अब जब पार्टी नेतृत्व की ओर से संकेत मिल चुके हैं तो माना जा रहा है कि जल्द ही तस्वीर साफ हो जाएगी। आने वाले दिनों में घोषित होने वाली यह सूची मध्य प्रदेश की राजनीति में नए समीकरण भी तय कर सकती है।

  • डबल इंजन सरकार से तेज हुआ विकास का पहिया पीएमजी और प्रगति से अटकी परियोजनाओं को मिली रफ्तार -मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव

    डबल इंजन सरकार से तेज हुआ विकास का पहिया पीएमजी और प्रगति से अटकी परियोजनाओं को मिली रफ्तार -मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव


    भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के सशक्त और दूरदर्शी नेतृत्व तथा केंद्र और राज्य की डबल इंजन सरकार के प्रभावी समन्वय के कारण आज देश में बुनियादी ढांचा विकास को अभूतपूर्व गति मिली है। प्रोजेक्ट मॉनीटरिंग ग्रुप (पीएमजी) और प्रोएक्टिव गवर्नेंस एंड टाइमली इंप्लीमेंटेशन यानी प्रगति प्लेटफॉर्म की शुरुआत से वर्षों से अटकी हुई निवेश और विकास परियोजनाएं फिर से सक्रिय हुई हैं। इन संस्थागत व्यवस्थाओं ने केंद्र और राज्य के सभी हितग्राहियों को एक मंच पर लाकर निर्णय प्रक्रिया को तेज, पारदर्शी और परिणामोन्मुख बनाया है।मुख्यमंत्री डॉ. यादव बुधवार को प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व और डबल इंजन सरकार के समन्वय से पीएमजी की उपलब्धियों को मीडिया प्रतिनिधियों के साथ साझा कर रहे थे। इस अवसर पर मुख्य सचिव श्री अनुराग जैन ने प्रगति प्लेटफॉर्म पर विस्तृत प्रेजेंटेशन दिया।

    मुख्यमंत्री ने बताया कि मध्यप्रदेश को विभिन्न केंद्रीय मंत्रालयों के माध्यम से कुल 209 बड़े प्रोजेक्ट्स की सौगात मिली है। इनमें से 2 लाख 61 हजार 340 करोड़ रुपये के निवेश वाली 108 केंद्रीय विकास परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं। वहीं, 5 लाख 24 हजार 471 करोड़ रुपये से अधिक लागत की 101 परियोजनाएं वर्तमान में क्रियान्वयन के चरण में हैं। केंद्रीय परियोजनाओं के क्रियान्वयन में मध्यप्रदेश ने 97 प्रतिशत की उल्लेखनीय सफलता हासिल की है, जो प्रदेश की प्रशासनिक दक्षता और समन्वय का प्रमाण है।इन परियोजनाओं में रेल मंत्रालय की 14, सड़क परिवहन मंत्रालय की 13, विद्युत मंत्रालय की 5 तथा नवकरणीय ऊर्जा मंत्रालय की कई महत्वपूर्ण योजनाएं शामिल हैं। मुख्यमंत्री ने बताया कि केंद्र और राज्य सरकार मिलकर वन्यजीव पर्यटन को भी बढ़ावा दे रही हैं। कूनो नेशनल पार्क में चीतों का पुनर्वास इसका उदाहरण है। वहीं धार में विकसित हो रहा पीएम मित्र पार्क कपास उत्पादक किसानों के लिए नए अवसर लेकर आएगा।

    डॉ. यादव ने कहा कि केंद्र और राज्यों के बीच परस्पर समन्वय ही देश की सबसे बड़ी शक्ति है। जब विभाग आपसी सहयोग से काम करते हैं, तो विकास की रफ्तार दोगुनी हो जाती है। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने शासन व्यवस्था को केवल प्रक्रियात्मक न रखकर परिणाम आधारित और जवाबदेह बनाया है, जहां हर परियोजना की प्रगति, बाधा और समाधान की सीधी निगरानी सुनिश्चित होती है। पहले बड़ी योजनाएं कागजों तक सीमित रह जाती थीं, लेकिन पीएमजी और प्रगति पोर्टल ने पुरानी प्रणाली को जड़ से बदल दिया है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि अब देश में विकास के साथ आवश्यकताओं का युक्तियुक्तकरण किया जा रहा है। पीएम प्रगति और प्रोजेक्ट मॉनिटरिंग ग्रुप के माध्यम से मध्यप्रदेश में ऐसा ईको-सिस्टम विकसित हुआ है, जहां आधुनिक तकनीक के सहारे अधोसंरचना परियोजनाएं समय पर पूरी हो रही हैं। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत ने समय, लागत और विश्वास – तीनों स्तरों पर ऐतिहासिक उपलब्धियां हासिल की हैं।उन्होंने कहा कि भले ही राज्यों के बीच राजनीतिक मतभेद हों, लेकिन राष्ट्र के विकास के लिए सभी राज्यों का समान महत्व है। प्रगति पोर्टल के माध्यम से भू-गर्भ संपदा का दोहन अब देशहित में अधिक प्रभावी ढंग से किया जा सकेगा। केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना पर पूर्व में पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया था, लेकिन अब प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में मध्यप्रदेश में तीन नदी परियोजनाओं पर कार्य हो रहा है।

    रेलवे क्षेत्र में उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि 285 किलोमीटर लंबी जबलपुर–गोंदिया गेज परिवर्तन परियोजना से मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र के बीच सीधा और उच्च क्षमता वाला रेल संपर्क स्थापित हुआ है। इससे जबलपुर, बालाघाट, मंडला और सिवनी जिलों की कनेक्टिविटी नागपुर, मुंबई, कोलकाता और चेन्नई जैसे महानगरों से बढ़ी है। इसके अलावा 18.5 हजार करोड़ रुपये लागत की इंदौर–मनमाड़ रेल लाइन परियोजना से उज्जैन सहित पूरे मालवा क्षेत्र को बड़ा लाभ मिलेगा।मुख्य सचिव श्री अनुराग जैन ने बताया कि प्रगति प्लेटफॉर्म की शुरुआत 25 मार्च 2015 को हुई थी। इसकी 50वीं बैठक 31 दिसंबर 2025 को सम्पन्न हुई। उन्होंने कहा कि पीएमजी और प्रगति पोर्टल की अभिनव पहल से बुनियादी ढांचा परियोजनाओं और नागरिक शिकायतों का तेजी से समाधान संभव हुआ है। डिजिटल और जवाबदेही आधारित इस मंच ने “नीति नहीं निष्पादन, घोषणा नहीं डिलीवरी और समीक्षा नहीं समाधान” की भावना को साकार किया है।

    उन्होंने बताया कि पीएमजी पोर्टल पर निगरानी में चल रही 209 परियोजनाओं से जुड़े 322 मुद्दों में से 312 का समाधान राज्य सरकार ने किया है, जबकि प्रगति पोर्टल पर सामने आए 124 मुद्दों में से 120 का निराकरण किया गया है। भूमि अधिग्रहण के मामलों में भी मध्यप्रदेश ने राष्ट्रीय स्तर पर नए मानक स्थापित किए हैं।मुख्य सचिव ने कहा कि सड़क, रेलवे और विद्युत परियोजनाओं के कारण मध्यप्रदेश ऊर्जा और परिवहन केंद्र के रूप में उभर रहा है। प्रदेश में 77 सड़क और राजमार्ग परियोजनाओं पर कार्य जारी है, जो देश की समग्र प्रगति को गति दे रही हैं।

  • वाराणसी में मणिकर्णिका घाट पर विकास का बड़ा कदम, सुविधाओं में होगा सुधार

    वाराणसी में मणिकर्णिका घाट पर विकास का बड़ा कदम, सुविधाओं में होगा सुधार

    नई दिल्ली। वाराणसी के प्रसिद्ध मणिकर्णिका घाट पर हर वर्ष लाखों शवदाह होते हैं, जिसके कारण जगह की कमी, साफ-सफाई और व्यवस्थाओं में कई चुनौतियां सामने आती हैं। इन्हीं समस्याओं को देखते हुए घाट पर एक व्यापक विकास परियोजना लागू की जा रही है, जिसका उद्देश्य श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों के लिए सुविधाओं को सुधारना है।

    शवदाह के लिए नए प्लेटफॉर्म और ऊंची चिमनी

    जिलाधिकारी वाराणसी सतेंद्र कुमार ने बताया कि परियोजना के तहत शवदाह के लिए नए व्यवस्थित प्लेटफॉर्म बनाए जा रहे हैं। साथ ही, शवदाह के बाद बची राख के फैलने की समस्या को रोकने के लिए घाट पर ऊंची चिमनी का निर्माण किया जा रहा है। इससे राख का उचित निस्तारण संभव होगा और आसपास के घरों व स्थानों में फैलने से रोक लगेगी।

    लकड़ी और मुंडन संस्कार की सुविधाएं

    घाट पर शवदाह में प्रयुक्त लकड़ी को व्यवस्थित रखने की व्यवस्था की जा रही है, जिससे अव्यवस्था और गंदगी की समस्या कम हो सके। मुंडन संस्कार के लिए आने वाले श्रद्धालुओं को अब बेहतर सुविधाएं मिलेंगी, जिससे उन्हें पहले जैसी कठिनाइयों का सामना न करना पड़े।

    पुराने हिस्सों का पुनर्स्थापन और सुदृढ़ीकरण

    जिलाधिकारी ने बताया कि यह परियोजना पिछले एक वर्ष से चल रही है। इसके तहत घाट के कच्चे हिस्सों में नए निर्माण कार्य किए जा रहे हैं, जबकि पक्के हिस्सों का पुनर्स्थापन और सुदृढ़ीकरण किया जा रहा है। इसका उद्देश्य घाट की पारंपरिक पहचान बनाए रखते हुए आधुनिक आवश्यकताओं के अनुरूप सुविधाओं का विकास करना है।

    सोशल मीडिया पर फैली अफवाहों पर प्रशासन की सफाई

    सतेंद्र कुमार ने सोशल मीडिया पर वायरल हो रही तस्वीरों और वीडियो को लेकर स्पष्ट किया कि वे घाटों और सीढ़ियों पर बनी अलग-अलग कलाकृतियों से संबंधित हैं। कुछ वीडियो एआई के माध्यम से भ्रामक रूप से बनाए गए हैं। उन्होंने बताया कि घाट पर मौजूद सभी मूर्तियां और मंदिर संस्कृति विभाग के संरक्षण में सुरक्षित हैं और उन्हें पुनर्स्थापित किया जाएगा।

    प्रशासन का उद्देश्य

    जिलाधिकारी ने कहा कि सोशल मीडिया पर अफवाह फैलाने वालों की पहचान की जा रही है और आवश्यकता पड़ने पर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन का उद्देश्य स्पष्ट है कि मणिकर्णिका घाट की पवित्रता, सांस्कृतिक विरासत और श्रद्धालुओं की आस्था को किसी भी स्थिति में आघात न पहुंचे।

    मणिकर्णिका घाट पर यह विकास परियोजना पारंपरिक पहचान को बनाए रखते हुए आधुनिक सुविधाओं के साथ श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों के लिए घाट को अधिक व्यवस्थित, सुरक्षित और सुविधाजनक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

  • अबू धाबी में इंडियन ऑयल का ऐतिहासिक सफलता, तेल के नए भंडार की खोज

    अबू धाबी में इंडियन ऑयल का ऐतिहासिक सफलता, तेल के नए भंडार की खोज

    नई दिल्ली। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने बुधवार को जानकारी दी कि भारत की तेल कंपनियों को अबू धाबी में एक बड़ी सफलता मिली है। यहां इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (आईओसी) और भारत पेट्रो रिसोर्सेज लिमिटेड (बीपीसीएल) का संयुक्त उपक्रम, ऊर्जा भारत प्राइवेट लिमिटेड (यूबीपीएल), शिलैफ और हबशन क्षेत्रों में हल्के कच्चे तेल का भंडार खोजने में सफल रहा।

    प्रधानमंत्री मोदी के ऊर्जा आत्मनिर्भरता प्रयास में योगदान

    केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत की ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में नया मील का पत्थर बताया। उन्होंने कहा कि यह सफलता भारतीय इंजीनियरों और वैज्ञानिकों की मेहनत और तकनीकी क्षमता को दिखाती है। इससे न केवल भारत की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी, बल्कि विदेशी निर्भरता कम करने में भी मदद मिलेगी।

    देश में तेल और गैस खोज के नए कदम

    भारत में तेल और गैस की खोज के लिए ‘मिशन अन्वेषण’ पहल शुरू की गई है, जो देश के इतिहास का सबसे बड़ा सर्वेक्षण कार्यक्रम है। इसके तहत 20,000 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में सर्वे किया जाना है, जिसमें से अब तक 8,000 किलोमीटर से अधिक क्षेत्र का सर्वे पूरा हो चुका है। इसके अलावा अब 10 लाख वर्ग किलोमीटर समुद्री क्षेत्र को तेल खोज के लिए खोला गया है और 99 प्रतिशत प्रतिबंधित क्षेत्र हटा दिए गए हैं।

    ओपन एकरेज लाइसेंसिंग प्रोग्राम और निवेश संभावनाएं

    ओपन एकरेज लाइसेंसिंग प्रोग्राम के तहत देशी और विदेशी कंपनियों को तेल और गैस क्षेत्रों में निवेश करने का अवसर मिल रहा है। केंद्रीय मंत्री ने बताया कि देश में 25 नए तेल और गैस क्षेत्र चिन्हित किए गए हैं, 154 क्षेत्र सक्रिय हैं, और अब तक 14 नई खोजें सफल रही हैं। आने वाला समय निवेश और भागीदारी के नए रिकॉर्ड बना सकता है।

    यूबीपीएल की इस खोज ने इंडियन ऑयल और बीपीसीएल के संयुक्त प्रयासों को सार्थक किया है। भारत की ऊर्जा सुरक्षा और आत्मनिर्भरता को ध्यान में रखते हुए यह खोज रणनीतिक और आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। आने वाले वर्षों में इसके सकारात्मक असर से देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलेगी।

  • सीवेज प्रदूषण पर NGT सख्त, MP-UP-राजस्थान से जवाब तलब, इंदौर में मौतें और भोपाल में 'ई-कोलाई' का खतरा

    सीवेज प्रदूषण पर NGT सख्त, MP-UP-राजस्थान से जवाब तलब, इंदौर में मौतें और भोपाल में 'ई-कोलाई' का खतरा


    नई दिल्ली। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) की प्रधान पीठ ने नई दिल्ली में बुधवार को इंदौर, भोपाल और राजस्थान के शहरों में पेयजल में सीवेज की मिलावट से जुड़ी गंभीर समस्याओं पर स्वतः संज्ञान लिया। NGT ने मध्यप्रदेश, उत्तर प्रदेश और राजस्थान की राज्य सरकारों से जवाब तलब किया है। ट्रिब्यूनल ने इंदौर में गंदे पानी के कारण मौतों और भोपाल में पेयजल में ‘ई-कोलाई’ बैक्टीरिया मिलने के मामलों का हवाला दिया।
    मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, इंदौर में गंदे पानी के सेवन से मौतें हुई हैं, जबकि भोपाल के कुछ इलाकों में ट्यूबवेल से रिसाव के कारण पेयजल में ई-कोलाई बैक्टीरिया पाया गया। वहीं, राजस्थान के उदयपुर, जोधपुर, कोटा, बांसवाड़ा, जयपुर और अजमेर जैसे शहरों में पुरानी और जर्जर पाइपलाइन प्रणाली के चलते सीवेज के पानी का पेयजल में मिलना जारी है। ग्रेटर नोएडा में भी सीवेज मिला पानी पीने से कई लोग बीमार पड़े, जिनमें बच्चे भी शामिल थे।
    एनजीटी ने इन घटनाओं को गंभीर पर्यावरणीय और जनस्वास्थ्य से जुड़ा मामला माना। पीठ ने संबंधित राज्य सरकारों, प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) से स्पष्ट जवाब तलब किया है। कहा गया है कि यह मामला पर्यावरणीय कानूनों का पालन सुनिश्चित करने, जिम्मेदारी तय करने और नागरिकों के सुरक्षित पेयजल के अधिकार की रक्षा के लिए विचाराधीन रहेगा।

    इसके अलावा, NGT ने मध्यप्रदेश में बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई के मामलों को भी संज्ञान में लिया। रिपोर्ट के अनुसार, सड़क, रेलवे, राष्ट्रीय राजमार्ग और कोयला खदान परियोजनाओं के लिए 50 से 100 वर्ष पुराने लगभग 15 लाख पेड़ काटे जा चुके हैं या काटे जाने का प्रस्ताव है। सिंगरौली, खंडवा, विदिशा, भोपाल और इंदौर में भारी संख्या में पेड़ों की कटाई से वायु गुणवत्ता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है।

    पीठ ने पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और राज्य वन विभागों को नोटिस जारी करते हुए निर्देश दिया कि वे अगली सुनवाई तक शपथ पत्र के माध्यम से अपना जवाब दाखिल करें। अगली सुनवाई 9 मार्च 2026 को होगी।