Author: bharati

  • इतिहास रचते हुए केएल राहुल ने खेली शानदार शतकीय पारी, भारत ने न्यूजीलैंड को मात दी

    इतिहास रचते हुए केएल राहुल ने खेली शानदार शतकीय पारी, भारत ने न्यूजीलैंड को मात दी

    नई दिल्ली।  निरंजन शाह स्टेडियम में खेले गए वनडे में केएल राहुल ने 92 गेंदों में 1 छक्का और 11 चौकों की मदद से नाबाद 112 रन की पारी खेली। इस पारी के साथ ही उन्होंने वनडे करियर का 8वां शतक पूरा किया। राहुल की इस पारी ने टीम को संकट से बाहर निकालते हुए शानदार स्थिति में पहुंचाया।

    रिकॉर्ड तोड़ा, ग्लेन फिलिप्स को पछाड़ा

    केएल राहुल ने साल 2025 से अब तक 41-50 ओवरों में सर्वाधिक रन बनाने वाले फुल मेंबर टीम के खिलाड़ी का रिकॉर्ड अपने नाम किया। इस दौरान उन्होंने 140.09 की स्ट्राइक रेट के साथ 283 रन बनाए और ग्लेन फिलिप्स (157.4 स्ट्राइक रेट, 244 रन) को पीछे छोड़ा। इस लिस्ट में जनिथ लियानागे (201), जस्टिन ग्रीव्स (194) और कॉर्बिन बॉश (162) क्रमशः तीसरे, चौथे और पांचवें पायदान पर हैं।

    मैच की स्थिति और साझेदारियां

    भारतीय टीम ने टॉस हारकर बल्लेबाजी करते हुए 7 विकेट पर 284 रन बनाए। सलामी जोड़ी रोहित शर्मा और कप्तान शुभमन गिल ने 12.2 ओवरों में 70 रन की साझेदारी की। रोहित 24 रन बनाकर आउट हुए, जबकि गिल ने 53 गेंदों में 56 रन जोड़े। शुरुआती दौर में विराट कोहली ने 23 रन का योगदान दिया।

    केएल राहुल की महत्वपूर्ण साझेदारियां

    टीम 118 रन पर 4 विकेट गंवा चुकी थी। तब केएल राहुल ने रवींद्र जडेजा के साथ पांचवें विकेट के लिए 73 रन की साझेदारी निभाई। जडेजा 27 रन बनाकर आउट हुए। इसके बाद राहुल ने नितीश रेड्डी (20) के साथ छठे विकेट के लिए 57 रन जोड़े। इन साझेदारियों ने टीम को मजबूती प्रदान की और अंत तक 284 रन तक पहुँचाया।

    विपक्षी गेंदबाजों का प्रदर्शन

    न्यूजीलैंड की ओर से क्रिस्चियन क्लार्क ने सर्वाधिक 3 विकेट लिए। काइल जैमीसन, जैक फाउलकेस, जेडेन लेनोक्स और कप्तान माइकल ब्रेसवेल ने 1-1 विकेट अपने नाम किया। हालांकि, केएल राहुल की पारी ने विपक्षी गेंदबाजों की कोशिशों को बेअसर कर दिया।

    केएल राहुल की नाबाद 112 रन की पारी ने न सिर्फ व्यक्तिगत रिकॉर्ड तोड़ा बल्कि टीम को संकट से उबारते हुए मैच में मजबूत स्थिति दिलाई। इस प्रदर्शन से वह वनडे क्रिकेट में अपने स्थान को और मजबूत करते हुए इतिहास रचने में सफल रहे।

  • चूड़ा-दही भोज से दूर रहे तेजस्वी, तेजप्रताप का सियासी वार, शायद जयचंदों ने घेर रखा है

    चूड़ा-दही भोज से दूर रहे तेजस्वी, तेजप्रताप का सियासी वार, शायद जयचंदों ने घेर रखा है


    नई दिल्ली। बिहार की राजनीति में यादव परिवार के भीतर चल रही खींचतान एक बार फिर खुलकर सामने आ गई है। जनशक्ति जनता दल के अध्यक्ष तेजप्रताप यादव ने चूड़ा-दही भोज में तेजस्वी यादव के नहीं पहुंचने पर न सिर्फ नाराजगी जताई, बल्कि तीखा सियासी तंज भी कसा। तेजप्रताप ने कहा कि उन्होंने खुद 13 जनवरी को तेजस्वी यादव को भोज का निमंत्रण देने के लिए संपर्क किया था, लेकिन वे कार्यक्रम में शामिल नहीं हुए।
    इस पर कटाक्ष करते हुए उन्होंने कहा, हो सकता है उन्हें जयचंदों ने घेर रखा हो।

    तेजप्रताप यादव ने साफ शब्दों में कहा कि उनके लिए सबसे बड़ी और संतोष की बात यह रही कि उनके पिता और आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव कार्यक्रम में पहुंचे। उन्होंने कहा, “पिता जी का आना और उनका आशीर्वाद मिलना ही मेरे लिए सबसे बड़ी जीत है। उससे ऊपर कुछ नहीं।” तेजप्रताप ने बताया कि चूड़ा-दही भोज में सत्ता पक्ष और विपक्ष, दोनों खेमों के कई बड़े नेता पहुंचे। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को भी निमंत्रण भेजा गया था और कई दलों के नेताओं ने आकर कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई।

    इस मौके पर तेजप्रताप यादव ने बड़ा राजनीतिक दावा करते हुए कहा कि लालू यादव की मूल और असली पार्टी जनशक्ति जनता दल है। उन्होंने अपने छोटे भाई तेजस्वी यादव को खुली सलाह देते हुए कहा कि उन्हें राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) का विलय जनशक्ति जनता दल में कर देना चाहिए। तेजप्रताप का यह बयान बिहार की सियासत में हलचल पैदा करने वाला माना जा रहा है।

    तेजप्रताप यादव यहीं नहीं रुके। उन्होंने दावा किया कि उन्हें बीजेपी समेत कई राजनीतिक दलों से ऑफर मिल चुके हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी साफ किया कि आगे किसके साथ जाना है, इसका फैसला वे खुद लेंगे। उन्होंने कहा, “जो बिहार के हित में काम करेगा, जनता की बात करेगा, जनशक्ति जनता दल उसी का साथ देगा।”

    पार्टी के भविष्य को लेकर तेजप्रताप यादव ने बड़े ऐलान करते हुए कहा कि जनशक्ति जनता दल आने वाले समय में पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में उम्मीदवार उतारेगी। इसके अलावा दिल्ली नगर निगम (MCD) चुनाव और बिहार में इस साल होने वाले विधान परिषद (MLC) चुनाव में भी पार्टी पूरी ताकत के साथ मैदान में उतरेगी।

    गौरतलब है कि आरजेडी से बाहर होने के बाद तेजप्रताप यादव ने जनशक्ति जनता दल का गठन किया था। उन्होंने इसी पार्टी के सिंबल पर महुआ सीट से बिहार विधानसभा 2025 का चुनाव भी लड़ा, हालांकि जीत हासिल नहीं कर सके। इसके बावजूद तेजप्रताप अपने बयानों और सियासी गतिविधियों के जरिए लगातार यह संकेत दे रहे हैं कि वे बिहार की राजनीति में किसी भी कीमत पर अपनी अलग पहचान और मजबूत भूमिका बनाए रखने के मूड में हैं।

  • सेंसेक्स नहीं, कम महंगाई ने दी सोने-चांदी को उड़ान, बनाया नया रिकॉर्ड

    सेंसेक्स नहीं, कम महंगाई ने दी सोने-चांदी को उड़ान, बनाया नया रिकॉर्ड

    नई दिल्ली। बुधवार के कारोबारी सत्र में कीमती धातुओं ने नया रिकार्ड बनाया। एमसीएक्स पर सोना 1,43,500 रुपए प्रति 10 ग्राम और चांदी 2,87,990 रुपए प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई। हालांकि दोपहर 12.16 बजे सोने ने 1,43,300 रुपए प्रति 10 ग्राम और चांदी 2,85,129 रुपए प्रति किलोग्राम पर कारोबार किया। पिछले कुछ दिनों में भी दोनों धातुओं ने अपने उच्चतम स्तर को छुआ था।

    अमेरिकी महंगाई आंकड़ों का असर

    अमेरिका में दिसंबर के कोर कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) में महीने-दर-महीने महंगाई 0.2 प्रतिशत और साल-दर-साल 2.6 प्रतिशत रही, जो उम्मीद से कम थी। यह संकेत मिला कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक भविष्य में ब्याज दरें घटा सकता है। इसी कारण निवेशक सोने-चांदी की ओर आकर्षित हुए।

    वैश्विक तनाव बढ़ा रहे खरीदारी

    राहुल कलंत्री, कमोडिटी विशेषज्ञ, मेहता इक्विटीज लिमिटेड के अनुसार, ईरान में अशांति और दुनिया के विभिन्न हिस्सों में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण निवेशक सुरक्षित विकल्प के तौर पर सोना और चांदी खरीद रहे हैं। इसके अलावा अमेरिका की ब्याज दरों और महंगाई के आंकड़े भी इन धातुओं की कीमतों को प्रभावित कर रहे हैं।

    तकनीकी स्तर और निवेशकों के लिए संकेत

    विशेषज्ञों के अनुसार, सोने को 1,37,310–1,39,550 रुपए के स्तर पर सपोर्ट और 1,44,350–1,46,670 रुपए के बीच रेजिस्टेंस मिलता है। चांदी के लिए 2,54,170–2,69,810 रुपए सपोर्ट और 2,79,810–2,84,470 रुपए रेजिस्टेंस पर बनी हुई है।

    उद्योग में मांग और सीमित आपूर्ति

    चांदी की मजबूत कीमतों के पीछे सौर ऊर्जा, इलेक्ट्रिक वाहन, एआई और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे उद्योगों में बढ़ती मांग और सीमित आपूर्ति भी एक बड़ा कारण है। विशेषज्ञों का कहना है कि शॉर्ट और मीडियम-टर्म में चांदी की खरीदारी लगातार बनी रहेगी।

    आगे की संभावनाएं

    डॉलर की कीमतों में उतार-चढ़ाव, अमेरिका की सर्वोच्च अदालत के टैरिफ फैसले और वैश्विक तनाव की घटनाओं के चलते इस हफ्ते सोना और चांदी की कीमतों में हल्की उतार-चढ़ाव की संभावना बनी रह सकती है। निवेशक सुरक्षित निवेश और तकनीकी स्तर को ध्यान में रखते हुए ही खरीदारी करें।

  • चांदी में जबरदस्त उछाल, तीन दिन में ₹34 हजार की तेजी; सोना भी सर्वकालिक रिकॉर्ड पर…

    चांदी में जबरदस्त उछाल, तीन दिन में ₹34 हजार की तेजी; सोना भी सर्वकालिक रिकॉर्ड पर…


    नई दिल्ली।देश में कीमती धातुओं की कीमतों ने एक बार फिर निवेशकों को चौंका दिया है। बुधवार को सोना और चांदी दोनों ही नई ऊंचाइयों पर पहुंच गए। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन IBJA के ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक, चांदी की कीमतों में लगातार तीसरे दिन तेज उछाल दर्ज किया गया है। बुधवार को एक किलो चांदी ₹14,145 महंगी होकर ₹2,77,175 के स्तर पर पहुंच गई। बीते महज तीन दिनों में चांदी की कीमतों में कुल ₹34 हजार से अधिक की छलांग लग चुकी है जो हालिया वर्षों में सबसे तेज बढ़ोतरी मानी जा रही है।

    सोने की कीमतें भी ऐतिहासिक रिकॉर्ड बनाती नजर आ रही हैं। 24 कैरेट सोना बुधवार को ₹1,868 की मजबूती के साथ ₹1,42,152 प्रति 10 ग्राम पर खुला। यह अब तक का सर्वकालिक उच्च स्तर है। इससे पहले मंगलवार को सोना ₹1,40,482 प्रति 10 ग्राम के भाव पर बंद हुआ था। लगातार बढ़ती कीमतों ने एक बार फिर सोने को निवेशकों के लिए सुरक्षित विकल्प के रूप में स्थापित कर दिया है।बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता, कमजोर डॉलर और केंद्रीय बैंकों की आक्रामक खरीदारी ने कीमती धातुओं को मजबूती दी है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर के कमजोर होने से सोने की होल्डिंग कॉस्ट कम हो गई है, जिससे निवेशकों का रुझान तेजी से सोने की ओर बढ़ा है। वहीं चांदी को केवल कीमती धातु ही नहीं, बल्कि एक अहम औद्योगिक धातु के रूप में भी देखा जा रहा है, जिससे इसकी मांग लगातार बढ़ रही है।

    विशेषज्ञों के अनुसार, चांदी की कीमतों में तेजी के पीछे सोलर एनर्जी, इलेक्ट्रॉनिक्स और इलेक्ट्रिक व्हीकल सेक्टर से आ रही मजबूत औद्योगिक मांग बड़ी वजह है। इसके अलावा अमेरिका में संभावित टैरिफ नीतियों को लेकर कंपनियां पहले से चांदी का स्टॉक बढ़ा रही हैं, जिससे सप्लाई पर दबाव बना हुआ है।आईबीजेए द्वारा जारी किए गए सोने और चांदी के भाव में 3 प्रतिशत जीएसटी, मेकिंग चार्ज और ज्वेलर्स का मार्जिन शामिल नहीं होता। इसी कारण दिल्ली, मुंबई, चेन्नई और कोलकाता जैसे शहरों में खुदरा स्तर पर कीमतें अलग-अलग हो सकती हैं। आईबीजेए के रेट का उपयोग रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया द्वारा सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड की कीमत तय करने और बैंकों द्वारा गोल्ड लोन की गणना के लिए किया जाता है।

    अगर पिछले एक साल के प्रदर्शन पर नजर डालें, तो 2025 में सोना और चांदी दोनों ने निवेशकों को शानदार रिटर्न दिया है। इस साल अब तक सोने की कीमतों में करीब ₹57,033 यानी लगभग 75 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वहीं चांदी के दामों में ₹1,44,403 की जबरदस्त तेजी आई है, जो करीब 167 प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाती है।भू-राजनीतिक तनाव, रूस-यूक्रेन युद्ध और वैश्विक आर्थिक सुस्ती के संकेतों ने सोने को एक बार फिर सुरक्षित निवेश का मजबूत विकल्प बना दिया है। चीन सहित कई देशों के केंद्रीय बैंक लगातार अपने गोल्ड रिजर्व में इजाफा कर रहे हैं, जिससे मांग और कीमतों दोनों को समर्थन मिल रहा है।

    बाजार जानकारों का मानना है कि यदि वैश्विक हालात ऐसे ही बने रहे, तो आने वाले महीनों में सोने और चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव के साथ तेजी बनी रह सकती है। हालांकि निवेशकों को सलाह दी जा रही है कि वे बाजार की चाल और जोखिम को समझते हुए ही निवेश का फैसला लें।देश में कीमती धातुओं की कीमतों ने एक बार फिर निवेशकों को चौंका दिया है। बुधवार को सोना और चांदी दोनों ही नई ऊंचाइयों पर पहुंच गए। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक, चांदी की कीमतों में लगातार तीसरे दिन तेज उछाल दर्ज किया गया है। बुधवार को एक किलो चांदी ₹14,145 महंगी होकर ₹2,77,175 के स्तर पर पहुंच गई। बीते महज तीन दिनों में चांदी की कीमतों में कुल ₹34 हजार से अधिक की छलांग लग चुकी है, जो हालिया वर्षों में सबसे तेज बढ़ोतरी मानी जा रही है।सोने की कीमतें भी ऐतिहासिक रिकॉर्ड बनाती नजर आ रही हैं। 24 कैरेट सोना बुधवार को ₹1,868 की मजबूती के साथ ₹1,42,152 प्रति 10 ग्राम पर खुला। यह अब तक का सर्वकालिक उच्च स्तर है। इससे पहले मंगलवार को सोना ₹1,40,482 प्रति 10 ग्राम के भाव पर बंद हुआ था। लगातार बढ़ती कीमतों ने एक बार फिर सोने को निवेशकों के लिए सुरक्षित विकल्प के रूप में स्थापित कर दिया है।

    बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता, कमजोर डॉलर और केंद्रीय बैंकों की आक्रामक खरीदारी ने कीमती धातुओं को मजबूती दी है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर के कमजोर होने से सोने की होल्डिंग कॉस्ट कम हो गई है, जिससे निवेशकों का रुझान तेजी से सोने की ओर बढ़ा है। वहीं चांदी को केवल कीमती धातु ही नहीं, बल्कि एक अहम औद्योगिक धातु के रूप में भी देखा जा रहा है, जिससे इसकी मांग लगातार बढ़ रही है।विशेषज्ञों के अनुसार चांदी की कीमतों में तेजी के पीछे सोलर एनर्जी, इलेक्ट्रॉनिक्स और इलेक्ट्रिक व्हीकल सेक्टर से आ रही मजबूत औद्योगिक मांग बड़ी वजह है। इसके अलावा अमेरिका में संभावित टैरिफ नीतियों को लेकर कंपनियां पहले से चांदी का स्टॉक बढ़ा रही हैं, जिससे सप्लाई पर दबाव बना हुआ है।

    आईबीजेए द्वारा जारी किए गए सोने और चांदी के भाव में 3 प्रतिशत जीएसटी, मेकिंग चार्ज और ज्वेलर्स का मार्जिन शामिल नहीं होता। इसी कारण दिल्ली, मुंबई, चेन्नई और कोलकाता जैसे शहरों में खुदरा स्तर पर कीमतें अलग-अलग हो सकती हैं। आईबीजेए के रेट का उपयोग रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया द्वारा सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड की कीमत तय करने और बैंकों द्वारा गोल्ड लोन की गणना के लिए किया जाता है।अगर पिछले एक साल के प्रदर्शन पर नजर डालें, तो 2025 में सोना और चांदी दोनों ने निवेशकों को शानदार रिटर्न दिया है। इस साल अब तक सोने की कीमतों में करीब ₹57,033 यानी लगभग 75 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वहीं चांदी के दामों में ₹1,44,403 की जबरदस्त तेजी आई है, जो करीब 167 प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाती है।

    भू-राजनीतिक तनाव, रूस-यूक्रेन युद्ध और वैश्विक आर्थिक सुस्ती के संकेतों ने सोने को एक बार फिर सुरक्षित निवेश का मजबूत विकल्प बना दिया है। चीन सहित कई देशों के केंद्रीय बैंक लगातार अपने गोल्ड रिजर्व में इजाफा कर रहे हैं, जिससे मांग और कीमतों दोनों को समर्थन मिल रहा है।बाजार जानकारों का मानना है कि यदि वैश्विक हालात ऐसे ही बने रहे, तो आने वाले महीनों में सोने और चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव के साथ तेजी बनी रह सकती है। हालांकि निवेशकों को सलाह दी जा रही है कि वे बाजार की चाल और जोखिम को समझते हुए ही निवेश का फैसला लें।

  • शेयर बाजार समाचार, सेंसेक्स गिरावट, निफ्टी अपडेट, विदेशी निवेशक बिकवाली, आईटी शेयर, ऑटो सेक्टर, आईपीओ न्यूज़।

    शेयर बाजार समाचार, सेंसेक्स गिरावट, निफ्टी अपडेट, विदेशी निवेशक बिकवाली, आईटी शेयर, ऑटो सेक्टर, आईपीओ न्यूज़।


    नई दिल्ली/मुंबई। भारतीय शेयर बाजार में बीते कुछ सत्रों से जारी अनिश्चितता का माहौल मंगलवार को भी बरकरार रहा। घरेलू शेयर बाजार लगातार दूसरे कारोबारी सत्र में दबाव में नजर आयाजिसके चलते प्रमुख सूचकांकों ने लाल निशान के साथ विदाई ली। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज BSE का प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स 245 अंक फिसलकर 83,383 के स्तर पर बंद हुआवहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज NSE का निफ्टी भी 67 अंकों की कमजोरी के साथ 25,666 के स्तर पर आ गया। बाजार की इस गिरावट में सबसे बड़ी भूमिका ऑटोआईटी और एफएमसीजी सेक्टर के दिग्गज शेयरों में हुई बिकवाली ने निभाई।

    बिकवाली के चक्रव्यूह में फंसे निवेशक मंगलवार के कारोबार में निवेशकों के बीच सतर्कता का माहौल साफ दिखाई दिया। सेंसेक्स के 30 प्रमुख शेयरों में से 18 शेयर गिरावट के साथ बंद हुए। बाजार जानकारों का मानना है कि विदेशी संस्थागत निवेशकों FII द्वारा भारतीय बाजार से लगातार पूंजी निकालने और वैश्विक बाजारों में अस्थिरता के कारण घरेलू सेंटिमेंट कमजोर हुआ है। आंकड़ों के मुताबिक13 जनवरी को विदेशी निवेशकों ने 1,499 करोड़ रुपए के शेयर बेचेजिसने बाजार के मोमेंटम को धीमा कर दिया।

    आईटी और ऑटो सेक्टर में सबसे ज्यादा ‘दर्द’ सेक्टर आधारित प्रदर्शन पर नजर डालें तो आईटी IT और ऑटोमोबाइल शेयरों में सबसे ज्यादा मुनाफावसूली देखी गई। हालिया तेजी के बाद इन सेक्टर्स में निवेशकों ने अपनी पोजीशन हल्की की। इसके विपरीतमेटल और सरकारी बैंकिंग शेयरों में थोड़ी खरीदारी दर्ज की गईजिससे बाजार को निचली स्तरों पर कुछ सहारा मिला। घरेलू संस्थागत निवेशकों DII ने भी 1,181 करोड़ रुपए की खरीदारी कर बाजार को संभालने का प्रयास कियालेकिन एफआईआई FII की बिकवाली का दबाव भारी पड़ा।

    वैश्विक संकेतों का मिला-जुला असर अंतरराष्ट्रीय मोर्चे पर एशियाई बाजारों से मिले-जुले संकेत मिले। जहां जापान का निक्केई और दक्षिण कोरिया का कोस्पी बढ़त के साथ बंद हुएवहीं चीन के शंघाई कंपोजिट में गिरावट रही। अमेरिकी बाजारोंविशेषकर डाउ जोंस में रही 0.80% की गिरावट का असर भी भारतीय बाजार की ओपनिंग और क्लोजिंग पर स्पष्ट रूप से देखा गया। ब्याज दरों को लेकर वैश्विक अनिश्चितता ने निवेशकों को जोखिम लेने से दूर रखा है।

    प्राइमरी मार्केट में हलचल और आगे की राह सेकेंडरी मार्केट में जारी उतार-चढ़ाव के बीच निवेशकों की नजर आईपीओ मार्केट पर बनी हुई है। अमागी मीडिया लैब्स के आईपीओ का दूसरा दिन रहाजिसके जरिए कंपनी 1,788 करोड़ रुपए जुटाने की तैयारी में है। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले दिनों में कंपनियों के तिमाही नतीजे और विदेशी निवेशकों का रुख बाजार की दिशा तय करेगा। फिलहालछोटे और मध्यम निवेशकों को ‘वेट एंड वॉच’ की रणनीति अपनाने और केवल मजबूत फंडामेंटल वाले शेयरों में ही लंबी अवधि के लिए निवेश करने की सलाह दी जा रही है।

  • बॉलीवुड अभिनेत्री मलाइका अरोड़ा ने हाल ही में अपने निजी जीवन और डेटिंग अफवाहों पर बात की।

    बॉलीवुड अभिनेत्री मलाइका अरोड़ा ने हाल ही में अपने निजी जीवन और डेटिंग अफवाहों पर बात की।

    नई दिल्ली। बॉलीवुड अभिनेत्री मलाइका अरोड़ा ने हाल ही में अपने निजी जीवन और डेटिंग अफवाहों पर बात की। The Namrata Zakaria Show के एक एपिसोड में मलाइका ने कहा कि उनके रिलेशनशिप हमेशा चर्चा में रहे हैं और मीडिया में लगातार हेडलाइन बनते रहे हैं। उनके पूर्व बॉयफ्रेंड अर्जुन कपूर के साथ ब्रेकअप के बाद उन्हें अक्सर एक मिस्ट्री मैन के साथ देखा गया, जिससे सोशल मीडिया पर अटकलें लगाई जाने लगीं।

    अर्जुन कपूर और पहले के रिश्ते पर मलाइका की राय
    मलाइका ने अर्जुन कपूर के बारे में कहा, “वह मेरे लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं और मेरे जीवन का एक अहम हिस्सा रहे हैं। चाहे कुछ भी हो, मैं अपने अतीत या भविष्य के बारे में ज्यादा बात नहीं करना चाहती, क्योंकि इसके बारे में मीडिया में पहले ही बहुत कुछ लिखा और दिखाया जा चुका है।” 52 साल की मलाइका ने यह भी बताया कि उनके सभी रिश्ते हमेशा चर्चा में रहे हैं और हेडलाइन बनते रहे हैं।

    मिस्ट्री मैन को लेकर अफवाहों पर प्रतिक्रिया
    जब उनसे मिस्ट्री मैन के बारे में पूछा गया, तो मलाइका ने कहा, “लोग बात करना पसंद करते हैं। अगर आपको किसी के साथ देखा गया, तो यह बड़ी चर्चा बन जाती है। मैं अनावश्यक अफवाहों को हवा नहीं देना चाहती क्योंकि इससे कोई फायदा नहीं होता। विश्वास कीजिए, मैं जब भी बाहर जाती हूं, भले ही वह कोई पुराना दोस्त, मैनेजर या किसी भी प्रकार का दोस्त हो, तुरंत मुझे उस व्यक्ति से जोड़ दिया जाता है। यह अब हास्यस्पद बन चुका है।” उन्होंने यह भी बताया कि उनकी मां फोन करके पूछती हैं, “अब यह कौन है, लोग किसके बारे में बात कर रहे हैं?”

    मलाइका अरोड़ा का निजी जीवन
    मलाइका अरोड़ा का निजी जीवन हमेशा चर्चा में रहा है। उन्होंने पहले अरबाज़ खान से शादी की थी। दोनों करीब दो दशक तक शादी में रहे और 2017 में तलाक लिया। उनके एक बेटे, अरहान, को भी साझा रूप से पाला। मलाइका ने 2016 में अर्जुन कपूर को डेट करना शुरू किया था, लेकिन हाल ही में यह स्पष्ट हुआ कि उन्होंने कई वर्षों तक डेटिंग करने के बाद अलग होने का फैसला किया।

    मलाइका अरोड़ा ने स्पष्ट किया कि उनके जीवन में मिस्ट्री मैन जरूर हैं, लेकिन अफवाहों पर प्रतिक्रिया देना और मीडिया को ज्यादा ईंधन देना उनके लिए जरूरी नहीं। उन्होंने अपने अतीत और वर्तमान पर ध्यान रखते हुए निजी जीवन को सुरक्षित रखने का फैसला किया है।

  • बुधवार के उपाय: गणपति और बुध की कृपा से संवरेंगी बुद्धि, व्यापार और आर्थिक स्थिति

    बुधवार के उपाय: गणपति और बुध की कृपा से संवरेंगी बुद्धि, व्यापार और आर्थिक स्थिति


    नई दिल्ली।हिंदू धर्म में सप्ताह के हर दिन का विशेष आध्यात्मिक और ज्योतिषीय महत्व होता है। इन्हीं में से बुधवार का दिन भगवान गणेश और ग्रह बुध को समर्पित माना गया है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार बुध ग्रह बुद्धिवाणीव्यापारशिक्षातर्कशक्ति और संचार का कारक होता है। जब किसी व्यक्ति की कुंडली में बुध कमजोर होता हैतो जीवन में कई तरह की परेशानियां आने लगती हैं। निर्णय लेने में भ्रमव्यापार में नुकसानपढ़ाई में एकाग्रता की कमीबार-बार धोखा मिलना और वाणी से जुड़े दोष आम समस्याएं बन जाती हैं। ऐसे में बुधवार के दिन किए गए कुछ विशेष उपाय जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं।

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार बुधवार को भगवान गणेश की पूजा करने से जीवन के सभी विघ्न दूर होते हैं और कार्यों में सफलता प्राप्त होती है। गणपति को प्रथम पूज्य माना गया हैइसलिए किसी भी शुभ कार्य से पहले उनकी आराधना की जाती है। वहीं बुध ग्रह को मजबूत करने से करियरव्यापार लेखन मीडिया अका उंटिंग शिक्षा और कम्युनिकेशन से जुड़े क्षेत्रों में उन्नति के योग बनते हैं। बुधवार के दिन हरे रंग का विशेष महत्व होता हैक्योंकि यह रंग बुध ग्रह का प्रतीक माना जाता है। इस दिन हरे वस्त्र पहनना शुभ माना जाता है। साथ ही भगवान गणेश को हरी दूर्वा अर्पित करने से बुध ग्रह की अनुकूलता बढ़ती है। मूंग की दालहरी सब्जियांहरा चारा या हरे फल का दान करने से आर्थिक और मानसिक समस्याओं में राहत मिलती है।

    बुधवार को गणपति मंत्र का जाप भी अत्यंत फलदायी माना गया है। सुबह स्नान के बाद ॐ गं गणपतये नमः मंत्र का कम से कम 108 बार जाप करने से मानसिक तनाव कम होता है और कार्यों में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं। यह उपाय विशेष रूप से विद्यार्थियों और नौकरीपेशा लोगों के लिए लाभकारी माना जाता है।इसके अलावा तुलसी पूजन का भी विशेष महत्व है। बुधवार को तुलसी के पौधे में जल अर्पित कर दीपक जलाना और परिक्रमा करना बुध दोष को शांत करने में सहायक होता है। मान्यता है कि इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है और पारिवारिक तनाव कम होते हैं।

    बुधवार को गाय को हरा चारा या पालक खिलाना भी आर्थिक दृष्टि से शुभ माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस उपाय से धन संबंधी अड़चनें दूर होती हैं और आय के नए स्रोत बनते हैं।विद्यार्थियों के लिए यह दिन विशेष माना जाता है। वे गणेश जी को कॉपीकलम या पेंसिल अर्पित कर सकते हैंजिससे पढ़ाई में एकाग्रता और सफलता मिलती है। वहीं व्यापारी हरे वस्त्र में थोड़े से मूंग बांधकर तिजोरी में रखेंमान्यता है कि इससे व्यापार में लाभ और धन आगमन के योग बनते हैं।

    हालांकि बुधवार को कुछ बातों से परहेज करना भी जरूरी है। इस दिन किसी का अपमान न करेंकटु वाणी से बचें और बिना सोचे-समझे कोई बड़ा आर्थिक फैसला न लें। कर्ज लेने या देने से भी बचना चाहिए। साथ ही हरे पेड़-पौधों को काटना अशुभ माना गया है।नियमित रूप से बुधवार के उपाय करने से व्यक्ति की बुद्धि तीव्र होती हैवाणी में मधुरता आती हैव्यापार और नौकरी में स्थिरता मिलती हैशिक्षा में सफलता प्राप्त होती है और रिश्तों में भी सुधार देखने को मिलता है।

  • ईरान में हालात बेकाबू, ढाई हजार से ज्यादा मौतें, भारत ने नागरिकों से तुरंत देश छोड़ने की अपील

    ईरान में हालात बेकाबू, ढाई हजार से ज्यादा मौतें, भारत ने नागरिकों से तुरंत देश छोड़ने की अपील


    नई दिल्ली। ईरान में जारी हिंसक विरोध प्रदर्शनों ने देश को गहरे संकट में धकेल दिया है। हालात लगातार बेकाबू होते जा रहे हैं और अब तक 2,571 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। सख्त कार्रवाई, गिरफ्तारियों और बढ़ती हिंसा के बीच आम जनजीवन पूरी तरह प्रभावित है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए भारत सरकार ने अपने नागरिकों के लिए कड़ी एडवाइजरी जारी करते हुए ईरान तुरंत छोड़ने की अपील की है।
    ईरान स्थित भारतीय दूतावास ने साफ शब्दों में कहा है कि देश में रह रहे सभी भारतीय नागरिकपर्यटक, छात्र, कारोबारी और PIO (पर्सन ऑफ इंडियन ओरिजिन)उपलब्ध कमर्शियल फ्लाइट्स या सुरक्षित परिवहन के किसी भी माध्यम से जल्द से जल्द ईरान से बाहर निकलें। दूतावास ने स्पष्ट किया कि यह फैसला तेजी से बिगड़ते सुरक्षा हालात और अनिश्चित स्थिति को ध्यान में रखकर लिया गया है।

    भारतीय दूतावास ने ईरान में मौजूद नागरिकों को विरोध प्रदर्शनों, धरनों और भीड़भाड़ वाले इलाकों से पूरी तरह दूर रहने की सख्त सलाह दी है।

    साथ ही कहा गया है कि सभी भारतीय नागरिक दूतावास के नियमित संपर्क में रहें और स्थानीय मीडिया व आधिकारिक घोषणाओं पर नजर बनाए रखें, ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत मदद मिल सके।

    एडवाइजरी में यह भी निर्देश दिया गया है कि सभी भारतीय नागरिक अपने जरूरी दस्तावेजपासपोर्ट, वीजा, पहचान पत्र और अन्य इमिग्रेशन पेपर्सहमेशा तैयार और सुरक्षित रखें। किसी भी तरह की सहायता, जानकारी या आपात स्थिति में भारतीय दूतावास से तत्काल संपर्क करने को कहा गया है।

    इस बीच, अमेरिका स्थित मानवाधिकार संस्था ‘ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट न्यूज एजेंसी’ ने हालात को और भी चिंताजनक बताया है। संस्था के मुताबिक, अब तक मारे गए 2,571 लोगों में से 2,403 प्रदर्शनकारी हैं, जबकि 147 सरकारी कर्मी भी हिंसा में जान गंवा चुके हैं। रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि मृतकों में 12 बच्चे और 9 ऐसे आम नागरिक शामिल हैं, जो किसी भी प्रदर्शन में शामिल नहीं थे।

  • 7 पारियों में 578 रन! भारतीय सरजमीं पर न्यूजीलैंड के खिलाफ शुभमन गिल का शानदार दबदबा

    7 पारियों में 578 रन! भारतीय सरजमीं पर न्यूजीलैंड के खिलाफ शुभमन गिल का शानदार दबदबा


    नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट टीम के सलामी बल्लेबाज और कप्तान शुभमन गिल का बल्ला न्यूजीलैंड के खिलाफ भारतीय सरजमीं पर लगातार आग उगल रहा है। राजकोट के निरंजन शाह स्टेडियम में खेले जा रहे वनडे मुकाबले में गिल ने एक बार फिर अपनी क्लास और निरंतरता का शानदार नमूना पेश किया। उन्होंने 53 गेंदों में 1 छक्का और 9 चौकों की मदद से 56 रन की अहम पारी खेली। यह इस सीरीज में उनका लगातार दूसरा अर्धशतक रहा जिसने टीम इंडिया को मजबूत शुरुआत दिलाई।

    भारतीय मैदानों पर न्यूजीलैंड के खिलाफ शुभमन गिल का रिकॉर्ड बेहद लाजवाब रहा है। गिल ने अब तक कीवी टीम के खिलाफ भारत में कुल 7 वनडे पारियां खेली हैं, जिनमें उन्होंने 115.6 की शानदार औसत से 578 रन बनाए हैं। यह आंकड़ा न सिर्फ उनकी निरंतरता को दर्शाता है बल्कि बड़े मैचों में जिम्मेदारी लेने की उनकी क्षमता को भी उजागर करता है इन सात पारियों में गिल ने कई यादगार पारियां खेली हैं। इनमें 149 गेंदों पर खेली गई 208 रनों की ऐतिहासिक पारी, 78 गेंदों में 112 रन, नाबाद 80 रन और हालिया मैचों में लगातार दो अर्धशतक शामिल हैं। उनकी पारियों की सूची में 40*, 26, 56 और 56 रनों की पारियां भी शामिल हैं जो यह साबित करती हैं कि वह हर परिस्थिति में टीम के लिए योगदान दे रहे हैं।

    इस मुकाबले में भारतीय टीम शुभमन गिल की कप्तानी में मैदान पर उतरी है। टीम में अनुभव और युवा जोश का बेहतरीन संतुलन नजर आया। रोहित शर्मा और विराट कोहली जैसे दिग्गज बल्लेबाजों के साथ श्रेयस अय्यर और केएल राहुल विकेटकीपर मध्यक्रम को मजबूती दे रहे हैं। ऑलराउंडर के रूप में रवींद्र जडेजा और नितीश रेड्डी को शामिल किया गया है, जबकि गेंदबाजी विभाग में हर्षित राणा, कुलदीप यादव, मोहम्मद सिराज और प्रसिद्ध कृष्णा टीम की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।दूसरी ओर न्यूजीलैंड की टीम माइकल ब्रेसवेल की कप्तानी में मैदान पर उतरी है। कीवी टीम में डेवोन कॉनवे, हेनरी निकोल्स, विल यंग और डेरिल मिशेल जैसे भरोसेमंद बल्लेबाज मौजूद हैं। ग्लेन फिलिप्स और मिशेल हे विकेटकीपर की भूमिका निभा रहे हैं, जबकि काइल जैमीसन और जैकरी फाउल्क्स गेंदबाजी आक्रमण की अगुवाई कर रहे हैं।

    सीरीज के पहले मुकाबले में भारत ने वडोदरा में न्यूजीलैंड को 4 विकेट से हराकर बढ़त बनाई थी। उस मैच में न्यूजीलैंड ने 300 रनों का चुनौतीपूर्ण स्कोर खड़ा किया था, जवाब में टीम इंडिया ने विराट कोहली की 93 रनों की शानदार पारी और शुभमन गिल के अर्धशतक की बदौलत लक्ष्य हासिल कर लिया था।फिलहाल तीन मैचों की वनडे सीरीज में भारत 1-0 से आगे है। ऐसे में दूसरे मुकाबले में जीत दर्ज कर टीम इंडिया सीरीज पर कब्जा जमाने के इरादे से मैदान पर उतरी है। शुभमन गिल का मौजूदा फॉर्म देखकर यह कहना गलत नहीं होगा कि न्यूजीलैंड के गेंदबाजों के लिए आगे की राह आसान नहीं होने वाली है।

  • दिसंबर में थोक महंगाई में इजाफा, दर बढ़कर 0.83 प्रतिशत पर पहुंची

    दिसंबर में थोक महंगाई में इजाफा, दर बढ़कर 0.83 प्रतिशत पर पहुंची


    नई दिल्ली । देश में थोक स्तर पर महंगाई एक बार फिर बढ़ती नजर आई है। विनिर्मित उत्पादों की कीमतों में वृद्धि के कारण दिसंबर 2025 में थोक मूल्य सूचकांक WPI आधारित मुद्रास्फीति की दर बढ़कर 0.83 प्रतिशत पर पहुंच गई। यह सितंबर 2025 के बाद पहली बार है जब थोक महंगाई की दर शून्य से ऊपर दर्ज की गई है।सरकारी आंकड़ों के अनुसारनवंबर 2025 में थोक मुद्रास्फीति दर शून्य से नीचे रही थी और यह माइनस 0.32 प्रतिशत दर्ज की गई थी। वहींएक साल पहले दिसंबर 2024 में थोक महंगाई दर 2.57 प्रतिशत के स्तर पर थी। इस तरह साल-दर-साल तुलना में थोक महंगाई अब भी अपेक्षाकृत निचले स्तर पर हैलेकिन हालिया बढ़ोतरी से कीमतों पर दबाव के संकेत मिलते हैं।

    विनिर्मित उत्पादों ने बढ़ाई महंगाई

    दिसंबर में थोक महंगाई बढ़ने की मुख्य वजह विनिर्मित उत्पादों की कीमतों में इजाफा रहा। विनिर्मित वस्तुओं का थोक मूल्य सूचकांक में बड़ा योगदान होता है और इनकी कीमतों में मामूली बढ़ोतरी भी समग्र महंगाई दर को प्रभावित करती है। उद्योग जगत से जुड़े विशेषज्ञों के अनुसारकच्चे माल की लागतपरिवहन खर्च और मांग में धीरे-धीरे हो रही बढ़ोतरी इसके प्रमुख कारण हो सकते हैं।

    तीन महीने बाद राहत खत्म

    सितंबर 2025 के बाद से लगातार तीन महीनों तक थोक महंगाई दर शून्य के आसपास या उससे नीचे बनी हुई थीजिससे उद्योग और व्यापार जगत को कुछ राहत मिली थी। हालांकि दिसंबर में दर के फिर से सकारात्मक क्षेत्र में आने से यह संकेत मिलता है कि कीमतों में स्थिरता की अवधि अब खत्म हो सकती है।

    खुदरा महंगाई से अलग संकेत

    थोक महंगाई और खुदरा महंगाई CPI के रुझान अक्सर अलग-अलग होते हैं। थोक स्तर पर कीमतों में बदलाव का असर कुछ समय बाद खुदरा बाजार में भी दिख सकता है। ऐसे में दिसंबर के आंकड़े आने वाले महीनों में खुदरा महंगाई पर संभावित दबाव की ओर इशारा कर सकते हैंहालांकि इसका सीधा और त्वरित असर होना जरूरी नहीं है।

    आगे क्या संकेत

    अर्थशास्त्रियों का मानना है कि थोक महंगाई में यह बढ़ोतरी फिलहाल चिंताजनक नहीं हैलेकिन अगर विनिर्मित उत्पादों और कच्चे माल की कीमतों में लगातार इजाफा होता रहातो इसका असर उत्पादन लागत और अंततः उपभोक्ताओं पर पड़ सकता है। साथ ही वैश्विक बाजारों में कच्चे तेल और अन्य कमोडिटी की कीमतों में उतार-चढ़ाव भी आने वाले महीनों में महंगाई की दिशा तय करेगा। दिसंबर 2025 में थोक मुद्रास्फीति दर का 0.83 प्रतिशत पर पहुंचना यह दर्शाता है कि कीमतों में गिरावट का दौर थम गया है और महंगाई धीरे-धीरे बढ़ने लगी है। हालांकि मौजूदा स्तर अभी नियंत्रण में हैलेकिन सरकार और नीति निर्माताओं के लिए यह एक संकेत है कि महंगाई के रुझानों पर करीबी नजर बनाए रखना जरूरी होगा।