Author: bharati

  • गरुड़ पुराण के अनुसार बेटी का जन्म: सौभाग्य और सात्विकता का प्रतीक

    गरुड़ पुराण के अनुसार बेटी का जन्म: सौभाग्य और सात्विकता का प्रतीक


    नई दिल्ली । गरुड़ पुराण के अनुसार घर में बेटी का जन्म केवल एक शारीरिक घटना नहीं बल्कि यह पिछले जन्मों के अच्छे कर्मों और परिवार के भाग्य का परिणाम होता है। इस पुराण के अनुसार, अगर किसी परिवार में बेटी का जन्म होता है तो यह संकेत होता है कि उस परिवार में माता लक्ष्मी का वास है, और यह घर सात्विकता, प्रेम और पुण्य से परिपूर्ण होता है।
    जब अर्जुन ने भगवान श्री कृष्ण से पूछा कि किन घरों में कन्या का जन्म होता है तो भगवान श्री कृष्ण ने उत्तर दिया कि यदि किसी घर में पुत्र का जन्म होता है तो यह उसका भाग्य है लेकिन यदि पुत्री का जन्म होता है तो वह उस घर का सौभाग्य होता है। यानी बेटे का जन्म भाग्य से निर्धारित होता है परंतु बेटी का जन्म एक विशेष सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है।
    गरुड़ पुराण में यह भी बताया गया है कि एक घर में बेटी का जन्म उसी परिवार में होता है जहाँ शुद्धता सात्विकता और प्रेम का वातावरण होता है। यह घर अपने अच्छे कर्मों के कारण इस पुण्य लाभ को प्राप्त करते हैं।दूसरी ओर यह भी माना जाता है कि एक घर में जहां बेटी का जन्म होता है, वहां परिवार को आर्थिक समृद्धि सुख-शांति और सुखी जीवन का आशीर्वाद मिलता है। इसीलिए भारत में प्राचीन समय से ही बेटी को लक्ष्मी का रूप माना जाता है।
    कहा जाता है कि भाग्य से बेटे होते हैं, लेकिन सौभाग्य से बेटियां होती हैं। यह कहावत इस बात को पूरी तरह से व्यक्त करती है कि बेटियां घर में आने से न केवल परिवार को मानसिक शांति मिलती है, बल्कि एक प्रकार का आत्मिक शुद्धिकरण भी होता है। गरुड़ पुराण के अनुसार, कन्या का जन्म उस परिवार में होता है जहाँ पूर्वजन्मों के पुण्य और अच्छे कर्म होते हैं। यह परिवार अपने कर्मों के कारण ही इस सौभाग्य को प्राप्त करता है और ऐसे घरों में माता लक्ष्मी का आशीर्वाद भी होता है।
    इस पुराण के अनुसार, एक बेटी का जन्म घर में खुशियाँ और समृद्धि लेकर आता है। यह दर्शाता है कि जीवन का असली सुख केवल भौतिक संपत्ति में नहीं, बल्कि मानसिक शांति, प्रेम, और सौभाग्य में छिपा होता है। इस प्रकार, गरुड़ पुराण के उपदेशों को समझकर हम यह जान सकते हैं कि बेटियों का जन्म एक भाग्यशाली और पवित्र घटना है। यह समाज के लिए एक संदेश है कि हमें बेटियों को समान सम्मान और प्रेम देना चाहिए, क्योंकि वे न केवल हमारे जीवन में खुशियाँ लाती हैं, बल्कि हमारे कर्मों का फल भी होती हैं।

  • आंखों में आंखें डालकर बात करने से डरते हैं? अपनाएं ये आसान ट्रिक्स

    आंखों में आंखें डालकर बात करने से डरते हैं? अपनाएं ये आसान ट्रिक्स


    नई दिल्ली । आप किसी अहम मीटिंग में हो सकते हैं या फिर किसी खास इंसान से बातचीत कर रहे होंगे। कहने को आपके पास ढेर सारी बातें होती हैं, लेकिन जैसे ही सामने वाले की नजर आपकी आंखों से टकराती है, आपका आत्मविश्वास अचानक कमजोर पड़ने लगता है। नजरें भटकने लगती हैं और आपको आसपास की चीजें दिलचस्प लगने लगती हैं। अगर आपने कभी ऐसा महसूस किया है, तो घबराने की जरूरत नहीं है। आंखों में आंखें डालकर बात करना सिर्फ बॉडी लैंग्वेज का हिस्सा नहीं है, बल्कि यह एक प्रभावी तरीका है अपनी बातों को बिना शब्दों के सही तरीके से सामने रखने का। अच्छी बात यह है कि इस स्किल को थोड़ी-सी प्रैक्टिस से बेहतर किया जा सकता है। तो चलिए जानते हैं कि इसको सही से कैसे किया जाए

    ट्रायंगल ट्रिक अपनाएं

    अगर सीधे आंखों में देखना आपको असहज करता है, तो आप सामने वाले के चेहरे पर एक काल्पनिक त्रिकोण ट्रायंगल बना सकते हैं। इस ट्रिक में आप कभी एक आंख कभी दूसरी आंख और फिर नाक या होंठ के पास नजर डाल सकते हैं। इससे सामने वाले को लगेगा कि आप उनकी बातों को ध्यान से सुन रहे हैं और आपको भी दबाव महसूस नहीं होगा। यह तरीका आपको आई कॉन्टैक्ट बनाए रखने में सहज बनाएगा, खासकर जब आप शुरुआत कर रहे हों।

    50/70 का आसान फॉर्मूला

    आपको हमेशा आंखों में आंखें डालकर बात करने की जरूरत नहीं है। इसके बजाय, आप बातचीत के दौरान लगभग आधे समय आंखों में देखें (जब आप बोल रहे हों) और 70% समय जब सामने वाला बोल रहा हो, तो आंखों में आंखें डालें। यह संतुलन एक स्वाभाविक और आत्मविश्वास से भरी बातचीत को जन्म देता है।

    आंखों के रंग पर ध्यान दें

    कभी किसी से पहली मुलाकात हो, तो उनके आंखों का रंग पहचानने की कोशिश करें। ऐसा करने से आपको कुछ सेकंड के लिए नजर मिलानी पड़ेगी, जो धीरे-धीरे आई कॉन्टैक्ट बनाने की आदत बना सकती है। यह एक आसान तरीका है, जिससे आप आत्मविश्वास से बात करने की दिशा में एक कदम और बढ़ सकते हैं।

    अपनों के साथ अभ्यास करें

    सीधे अजनबियों या इंटरव्यू में खुद को परखने से पहले, दोस्तों, परिवार या करीबी लोगों के साथ प्रैक्टिस करें। जब आप अपने परिचितों के सामने सहज हो जाएंगे, तो बाहर की दुनिया में भी कॉन्फिडेंस अपने आप दिखने लगेगा। यह अभ्यास आपको आत्मविश्वास से भरी बातचीत की आदत डालने में मदद करेगा।

    नजरें हटाना भी है जरूरी

    आई कॉन्टैक्ट का मतलब घूरना नहीं होता। यदि आप महसूस करें कि सामने वाला असहज हो रहा है या आपको खुद को रिलैक्स करने की जरूरत महसूस हो रही है, तो कुछ सेकंड के लिए अपनी नजरें हटा लें और फिर दोबारा सामने देखें। यह छोटा सा ब्रेक आपको कूल रहने में मदद करेगा और बातचीत को और स्वाभाविक बनाएगा। आंखों में आंखें डालकर बात करना आपकी बॉडी लैंग्वेज को और भी प्रभावशाली बना सकता है, लेकिन इसके लिए जरूरी है थोड़ी सी प्रैक्टिस। अपनी बातचीत में इन ट्रिक्स को धीरे-धीरे अपनाएं और देखिए कैसे आपका आत्मविश्वास बढ़ता है। याद रखें, यह आदत समय ले सकती है, लेकिन अगर आप रोज़मर्रा की बातचीत में इन छोटी-छोटी आदतों को शामिल करेंगे, तो आपकी आंखें आपकी बातों से कहीं ज्यादा असरदार साबित होंगी।

  • इंदौर पानी त्रासदी: सिर्फ ‘ट्रेलर’, देश के छह बड़े शहरों में भी दूषित पानी से बढ़ रही स्वास्थ्य आपातस्थिति

    इंदौर पानी त्रासदी: सिर्फ ‘ट्रेलर’, देश के छह बड़े शहरों में भी दूषित पानी से बढ़ रही स्वास्थ्य आपातस्थिति


    इंदौर। मध्य प्रदेश के इंदौर में दूषित पानी पीने से 20 लोगों की मौत और कई गंभीर बीमारियों की घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया है। यह मामला सिर्फ इंदौर तक सीमित नहीं है, बल्कि देश के अन्य प्रमुख शहरों में भी दूषित पानी पीने से नागरिकों की सेहत पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है। इंदौर की यह त्रासदी एक चेतावनी की तरह है, जिससे पता चलता है कि कई शहरों में पानी की गुणवत्ता पर नियंत्रण की व्यवस्था गंभीर रूप से कमजोर है।

    इंदौर हादसे की जांच में सामने आया कि देश के सात बड़े शहर पानी की गुणवत्ता मानकों पर फेल हो गए हैं।

    इन शहरों में गुजरात का गांधीनगर, तेलंगाना का हैदराबाद, उत्तर प्रदेश का ग्रेटर नोएडा, मध्य प्रदेश के इंदौर और भोपाल, और हरियाणा के रोहतक और झज्जर शामिल हैं। गांधीनगर में दूषित पानी के कारण टाइफाइड के 108 मामले दर्ज किए गए, और दो लोगों की मौत भी हुई। हैदराबाद में छह सैंपल में से चार में सीवेज, कोलीफॉर्म बैक्टीरिया और औद्योगिक वेस्ट पाए गए।
     इसके चलते नगर निगम ने जमीन के नीचे के पानी पर रोक लगा दी है।

    दूषित पानी के सेवन से आम लोगों में दस्त, उल्टी, हैजा, टाइफाइड और डायरिया जैसी गंभीर बीमारियां देखी जा रही हैं।

    कुछ मामलों में गिलियन बैरे सिंड्रोम जैसे न्यूरोलॉजिकल रोग भी सामने आए हैं। इसके मुख्य लक्षणों में लगातार दस्त और उल्टी, तेज बुखार और कमजोरी, चक्कर आना या पेशाब कम होना, शरीर या आंखों में पीलापन और बच्चों एवं बुजुर्गों में डिहाइड्रेशन के संकेत शामिल हैं।

    स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि अगर इन शहरों में पानी की शुद्धता पर तुरंत कार्रवाई नहीं की गई, तो यह केवल स्वास्थ्य आपात स्थिति तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि बड़े पैमाने पर सामाजिक और आर्थिक संकट भी पैदा कर सकता है। नागरिकों को साफ और सुरक्षित पानी सुनिश्चित करने के लिए नगर निगम और राज्य सरकारों की ओर से तत्काल कदम उठाना बेहद जरूरी है।

    इंदौर की घटना ने स्पष्ट कर दिया है कि दूषित पानी सिर्फ एक शहर की समस्या नहीं है, बल्कि देश के कई शहरों में स्वास्थ्य सुरक्षा की गंभीर चुनौती बन गई है। इसलिए प्रशासन को अब निष्क्रियता छोड़कर, सख्त निरीक्षण और त्वरित सुधार लागू करना होगा, ताकि लोगों की जान और स्वास्थ्य सुरक्षित रहे।

  • रविवार के विशेष उपाय: सूर्य मजबूत होंगे तो चमकेगा भाग्य, दूर होंगी बीमारी और बाधाएं

    रविवार के विशेष उपाय: सूर्य मजबूत होंगे तो चमकेगा भाग्य, दूर होंगी बीमारी और बाधाएं


    नई दिल्ली । ज्योतिष के अनुसार रविवार सूर्यदेव को समर्पित होता है। सूर्य को आत्मा, तेज, स्वास्थ्य और राजसत्ता का प्रतीक माना गया है। यदि कुंडली में सूर्य कमजोर हो, तो व्यक्ति को बार-बार अपमान, असफलता, रोग और करियर में रुकावटों का सामना करना पड़ता है। लेकिन यदि रविवार के उपाय समय पर और नियमित रूप से किए जाएं, तो सूर्य मजबूत होकर जीवन में स्थिरता, सफलता और सकारात्मक ऊर्जा लाते हैं।

    रविवार के असरदार उपाय

    1. उगते सूर्य को अर्घ्य दें

    सुबह जल्दी उठकर स्नान के बाद तांबे के पात्र में जल, लाल पुष्प और थोड़ा गुड़ डालकर सूर्य को अर्घ्य दें। इस दौरान मंत्र ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः का 11 या 21 बार जप करें। यह उपाय सूर्य को बल देता है और जीवन में सकारात्मक बदलाव लाता है।

    2. लाल रंग का दान और उपयोग

    रविवार को लाल वस्त्र पहनें और जरूरतमंद को लाल कपड़ा, गुड़ या गेहूं का दान करें। इस उपाय से मान-सम्मान बढ़ता है और आर्थिक अड़चनें दूर होती हैं।

    3. सूर्य स्तुति और दीप प्रज्ज्वलन

    घर के मंदिर में घी का दीपक जलाकर आदित्य हृदय स्तोत्र या सूर्य चालीसा का पाठ करें। इससे मानसिक कमजोरी दूर होती है और निर्णय क्षमता मजबूत होती है।

    4. पिता और वरिष्ठों का आशीर्वाद लें

    रविवार को पिता, गुरु या किसी वरिष्ठ व्यक्ति का सम्मान करें। उनके चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लेने से सूर्य का शुभ प्रभाव बढ़ता है और जीवन में स्थिरता आती है।

    5. तांबे से जुड़े उपाय

    रविवार को तांबे के बर्तन में जल पीना या कमर में तांबे का सिक्का रखना शुभ माना जाता है। इससे स्वास्थ्य और आत्मबल में वृद्धि होती है और नकारात्मक प्रभाव कम होते हैं।

    6. नौकरी-व्यापार में बाधा हो तो उपाय

    यदि करियर में बार-बार अड़चन आ रही हो, तो किसी मंदिर में गुड़ और गेहूं का दान करें और सूर्यदेव से सफलता की प्रार्थना करें। यह उपाय व्यवसाय और नौकरी में बाधाओं को दूर करने में मदद करता है।

    रविवार के उपाय क्यों जरूरी हैं?

    ज्योतिष में सूर्य को कुंडली का राजा माना गया है। मजबूत सूर्य व्यक्ति को नेतृत्व क्षमता, सम्मान, सरकारी सहयोग और उत्तम स्वास्थ्य देता है। रविवार को नियमित रूप से किए गए उपाय न केवल आत्मविश्वास बढ़ाते हैं बल्कि जीवन में नकारात्मकता को भी दूर करते हैं।

  • पीएम मोदी बोले- सोमनाथ को तोड़ने वाले इतिहास के पन्नों में सिमट गए, मंदिर और भारत आज भी अडिग

    पीएम मोदी बोले- सोमनाथ को तोड़ने वाले इतिहास के पन्नों में सिमट गए, मंदिर और भारत आज भी अडिग


    गुजरात। गुजरात के सोमनाथ मंदिर पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों को ऐतिहासिक और प्रेरक संदेश दिया। उन्होंने कहा कि लगभग 1000 साल पहले जब आक्रमणकारियों ने सोमनाथ मंदिर को तोड़ने की कोशिश की थी, तब उन्हें लगा कि उन्होंने हिंदुस्तान की शक्ति को खत्म कर दिया, लेकिन आज वही मंदिर खड़ा है और उसकी ध्वजा गर्व से फहरा रही है। पीएम मोदी ने चेतावनी दी कि दुर्भाग्य से आज भी देश में ऐसी ताकतें मौजूद हैं, जो मंदिरों के पुनर्निर्माण और देश की एकता का विरोध करती हैं।
    मोदी ने याद दिलाया कि जब स्वतंत्रता के बाद सरदार पटेल ने सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण की शपथ ली, तब भी उन्हें रोकने की कोशिश हुई। 1951 में मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के दौरान तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद के मंदिर में शामिल होने पर आपत्ति जताई थी। मोदी ने कहा कि देशवासियों को आज भी ऐसी ताकतों से सतर्क और एकजुट रहने की आवश्यकता है, जो देश को बांटने में लगी हैं।

    पीएम मोदी ने मंदिर में लगभग 30 मिनट तक पूजा-अर्चना की। उन्होंने शिवलिंग पर जल चढ़ाया, पंचामृत से अभिषेक किया और फूल अर्पित किए। इसके बाद उन्होंने कहा कि 1026 में पहले आक्रमण के बाद गजनवी ने सोमनाथ का वजूद मिटाने की कोशिश की थी, लेकिन मंदिर फिर से पुनर्निर्मित हुआ।

    इसके बाद खिलजी ने मंदिर को फिर तोड़ा, लेकिन जूनागढ़ के राजाओं ने इसे पुनः खड़ा किया। मोदी ने स्पष्ट किया कि न तो सोमनाथ नष्ट हुआ और न ही भारत।

    पीएम ने कहा कि आज जब सोमनाथ मंदिर के आक्रमण की 1000वीं वर्षगांठ और इसके पुनर्निर्माण के 75 साल पूरे हो रहे हैं, तो यह हमें हमारे गौरवशाली इतिहास और आस्था की शक्ति की याद दिलाता है। उन्होंने कहा कि यहां 72 घंटे तक अनवरत ओमकार और मंत्रोच्चार चलता रहा और इस हजार साल की गाथा को शब्दों में बयां करना मुश्किल है। यह केवल समय और अनुभव ही संकलित कर सकता है।

    सद्भावना ग्राउंड में आयोजित रैली को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि यह अद्भुत समय और वातावरण है। समुद्र की लहरें, सूर्य की किरणें, मंत्रों की गूंज और भक्तों की उपस्थिति इस दिव्य उत्सव को और भव्य बना रही है। मोदी ने कहा कि यह उनका सौभाग्य है कि उन्हें सोमनाथ स्वाभिमान पर्व में सेवा का अवसर मिला।

    उन्होंने देशवासियों को भरोसा दिलाया कि भारत अपने गौरव को नई बुलंदियों तक ले जाएगा और गरीबी, सामाजिक और आर्थिक चुनौतियों के खिलाफ लगातार लड़ाई जारी रखेगा।

    पीएम मोदी ने कहा कि जिस देश के पास अपनी विरासत होती है, वह उस पर गर्व करता है। लेकिन स्वतंत्रता के बाद गुलामी की मानसिकता वाले लोगों ने उस विरासत को भूलने की कोशिश की। सोमनाथ मंदिर ने यह साबित कर दिया कि आस्था, साहस और विश्वास किसी भी आघात के सामने टिक सकते हैं।

    सोमनाथ में पूजा-अर्चना और रैली के बाद पीएम मोदी ने रोड शो भी किया और लोगों को संबोधित किया। इस अवसर पर उन्होंने एकजुटता, स्वाभिमान और देशभक्ति का संदेश दोहराया।

  • भोपाल में 1101 ट्रैक्टरों की भव्य रैली, CM मोहन यादव ने किसानों को हरी झंडी दिखाकर किया ‘कृषक कल्याण वर्ष’ का शुभारंभ

    भोपाल में 1101 ट्रैक्टरों की भव्य रैली, CM मोहन यादव ने किसानों को हरी झंडी दिखाकर किया ‘कृषक कल्याण वर्ष’ का शुभारंभ




    भोपाल।
    भोपाल में रविवार का दिन किसानों के नाम रहा, जब मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कोकता बायपास स्थित आरटीओ कार्यालय के पास से 1101 ट्रैक्टरों की भव्य रैली को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस ऐतिहासिक मौके पर मुख्यमंत्री खुद ट्रैक्टर की स्टेयरिंग संभालते नजर आए और रैली में शामिल होकर किसानों के साथ कदम से कदम मिलाया। उनके साथ कृषि मंत्री एदल सिंह कंसाना और विधायक रामेश्वर शर्मा भी ट्रैक्टर पर सवार रहे। सैकड़ों ट्रैक्टरों की कतार और किसानों का उत्साह राजधानी की सड़कों पर एक अलग ही दृश्य रच रहा था।

    रैली को रवाना करने से पहले कोकता बायपास क्षेत्र ‘बोल बम’ और भोलेनाथ के जयकारों से गूंज उठा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने किसानों को संबोधित करते हुए इतिहास और आस्था का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि एक हजार साल पहले महमूद गजनवी ने सोमनाथ मंदिर को तोड़ने का प्रयास किया था, लेकिन आज वही सोमनाथ मंदिर फिर से अपने वैभव में भोलेनाथ के जयकारों से गूंज रहा है।

    उन्होंने सरदार वल्लभभाई पटेल के योगदान को याद करते हुए कहा कि उनके संकल्प से सोमनाथ मंदिर का पुनर्निर्माण हुआ। साथ ही मुख्यमंत्री ने अयोध्या में भगवान राम मंदिर निर्माण को 500 वर्षों के संघर्ष का परिणाम बताया।

    ट्रैक्टर रैली के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि जिस तरह पिछले वर्ष पूरे प्रदेश में ‘उद्योग और रोजगार वर्ष’ मनाया गया था, उसी तर्ज पर अब सरकार ने पूरे साल को ‘कृषक कल्याण वर्ष’ के रूप में मनाने का फैसला किया है। यह केवल एक दिन या एक कार्यक्रम तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सालभर किसानों के हित में योजनाबद्ध और निरंतर प्रयास किए जाएंगे। उन्होंने भरोसा जताया कि इस वर्ष के अंत तक किसानों की आय, खेती की लागत और उत्पादन से जुड़े कई ठोस और सकारात्मक परिणाम सामने आएंगे।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने स्पष्ट किया कि कृषक कल्याण वर्ष केवल कृषि विभाग तक सीमित नहीं रहेगा। अब प्रदेश के 16 विभाग मिलकर किसानों के लिए काम करेंगे, ताकि खेती से जुड़े हर पहलू को मजबूत किया जा सके।

    उन्होंने बताया कि मध्यप्रदेश की कृषि विकास दर इस समय लगभग 16 प्रतिशत की गति से बढ़ रही है और इसे और आगे ले जाने के लिए किसानों की आय बढ़ाने तथा लागत घटाने पर विशेष जोर दिया जाएगा। मुख्यमंत्री ने रैली के दौरान कहा कि हेलिकॉप्टर से आते समय जहां नजर गई, वहां ट्रैक्टर ही ट्रैक्टर दिखाई दे रहे थे। यह तो सिर्फ झांकी है, आने वाले समय में किसान कल्याण की तस्वीर और भी बड़ी होगी।

    रैली के बाद मुख्यमंत्री जंबूरी मैदान पहुंचे, जहां ‘कृषक कल्याण वर्ष-2026’ के राज्य स्तरीय कार्यक्रम का औपचारिक शुभारंभ किया गया। इस अवसर पर उन्होंने किसानों को सरकार की आगामी योजनाओं, कार्यक्रमों और कार्ययोजनाओं की विस्तृत जानकारी दी।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य खेती को केवल परंपरागत कार्य न मानकर उसे लाभकारी, टिकाऊ और तकनीक आधारित रोजगार का माध्यम बनाना है।

    कृषक कल्याण वर्ष-2026 के तहत सरकार का विशेष फोकस उद्यानिकी, पशुपालन, डेयरी, मत्स्य पालन और खाद्य प्रसंस्करण जैसे क्षेत्रों पर रहेगा। मुख्यमंत्री ने बताया कि कृषि, उद्यानिकी, पशुपालन, मत्स्य पालन और वानिकी को एकीकृत करते हुए जिला स्तरीय क्लस्टर आधारित विकास को बढ़ावा दिया जाएगा। इसके साथ ही प्राकृतिक खेती, डिजिटल सेवाओं, उच्च उत्पादकता और कृषि प्रसंस्करण के माध्यम से किसानों की आमदनी बढ़ाने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएंगे। एग्री-टेक, ड्रोन सेवाएं, एफपीओ प्रबंधन, हाइड्रोपोनिक्स और फूड प्रोसेसिंग जैसे क्षेत्रों में ग्रामीण युवाओं के लिए नए रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कृषि और समृद्ध ग्रामीण क्षेत्र मध्यप्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। इसी कारण राज्य सरकार लगातार कृषि बजट में बढ़ोतरी कर रही है। समर्थन मूल्य पर फसलों की खरीदी, सोयाबीन उत्पादकों के लिए भावांतर योजना, प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित किसानों को राहत, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना, मुख्यमंत्री कृषि उन्नति योजना और रानी दुर्गावती श्रीअन्न प्रोत्साहन योजना जैसी कई योजनाएं पहले से संचालित हैं।

    कृषक कल्याण वर्ष-2026 के माध्यम से इन सभी योजनाओं को और प्रभावी बनाया जाएगा।

    इस भव्य ट्रैक्टर रैली और कार्यक्रम के चलते भोपाल की कई सड़कों पर यातायात व्यवस्था में बदलाव किया गया। कोकता बायपास, मिसरोद-सलैया क्षेत्र, खजूरी कला, पटेल नगर चौराहा, प्रेस्टीज कॉलेज के आसपास और जंबूरी मैदान तक जाने वाले मार्गों पर विशेष ट्रैफिक प्लान लागू रहा। प्रशासन ने आम नागरिकों से अपील की कि वे वैकल्पिक मार्गों का उपयोग करें।

    कुल मिलाकर, 1101 ट्रैक्टरों की यह रैली केवल एक शक्ति प्रदर्शन नहीं थी, बल्कि यह संदेश भी थी कि मध्यप्रदेश सरकार किसानों को केंद्र में रखकर विकास की नई कहानी लिखने जा रही है। ‘कृषक कल्याण वर्ष’ के जरिए सरकार का लक्ष्य अन्नदाता के सम्मान, आय वृद्धि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति देना है।

  • भोपाल में इनर व्हील क्लब राइज का 41वां जिला सम्मेलन ‘सिनर्जी’: अभिषेक बच्चन मुख्य अतिथि, महिलाओं और समाज के विकास पर होगी जोरदार रणनीति

    भोपाल में इनर व्हील क्लब राइज का 41वां जिला सम्मेलन ‘सिनर्जी’: अभिषेक बच्चन मुख्य अतिथि, महिलाओं और समाज के विकास पर होगी जोरदार रणनीति


    भोपाल। भोपाल में रविवार को इनर व्हील क्लब ऑफ भोपाल राइज का 41वां जिला सम्मेलन “सिनर्जी” आयोजित किया गया, जिसमें बॉलीवुड अभिनेता अभिषेक बच्चन मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। कार्यक्रम होटल सयाजी में हुआ, जिसकी मेजबानी क्लब ने की। सम्मेलन का उद्देश्य पिछली छह महीनों की उपलब्धियों का मूल्यांकन करना और आने वाले छह महीनों के लिए रणनीति तय करना है।

    भोपाल राइज की प्रेसिडेंट रुखसाना मोहसिन ने बताया कि इनर व्हील क्लब दुनिया के प्रमुख महिला स्वैच्छिक संगठनों में से एक है, जो पिछले एक शताब्दी से समाज सेवा और सामुदायिक कल्याण में सक्रिय है। सम्मेलन में सदस्य अपने अनुभव साझा करेंगे, नए सामाजिक प्रोजेक्ट्स पर चर्चा करेंगे और महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए आगे की योजना बनाएंगे।

    इस आयोजन में अभिषेक बच्चन ने उपस्थित सदस्यों को प्रेरित करते हुए कहा कि समाज सेवा और सामुदायिक योगदान केवल एक पहल नहीं, बल्कि जीवन का हिस्सा होना चाहिए। सम्मेलन का नाम “सिनर्जी” इस बात का प्रतीक है कि सामूहिक प्रयास और सहयोग से ही सामाजिक बदलाव संभव है।

    सम्मेलन के दौरान इनर व्हील डिस्ट्रिक्ट-304 की पिछली छह महीनों की उपलब्धियों की रिपोर्ट पेश की गई, जिसमें शिक्षा, स्वास्थ्य, महिलाओं और बच्चों के लिए किए गए विभिन्न सामाजिक कार्यक्रमों का विवरण शामिल था। इसके साथ ही आगामी छह महीनों की रणनीति पर विस्तार से चर्चा होगी, जिसमें नए प्रोजेक्ट्स, सामाजिक जागरूकता अभियान और स्थानीय समुदायों के लिए विकासात्मक गतिविधियां शामिल होंगी।

    यह जिला सम्मेलन न केवल क्लब की उपलब्धियों का जश्न है, बल्कि आने वाले समय में महिलाओं और समाज के विकास के लिए नई पहल और दिशा तय करने का मंच भी साबित होगा।

  • माघ मेला 2026: ‘मेला सेवा एप’ से श्रद्धालुओं को डिजिटल मार्गदर्शन, QR कोड से सीधे प्रशासन से जुड़ाव

    माघ मेला 2026: ‘मेला सेवा एप’ से श्रद्धालुओं को डिजिटल मार्गदर्शन, QR कोड से सीधे प्रशासन से जुड़ाव


    नई दिल्ली। प्रयागराज में आयोजित हो रहे माघ मेला 2026 में श्रद्धालुओं की सुविधा, सुरक्षा और सहज अनुभव को बढ़ाने के लिए मेला प्रशासन ने तकनीकी नवाचारों को लागू किया है। इसी कड़ी में इस वर्ष ‘माघ मेला सेवा एप’ को लॉन्च किया गया, जो मेले में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए एक डिजिटल सहायक का काम करेगा।

    शनिवार को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने माघ मेला क्षेत्र का निरीक्षण किया और इस एप का औपचारिक शुभारंभ किया।

    मुख्यमंत्री ने मेला के आगामी प्रमुख स्नान पर्वों की तैयारियों की समीक्षा की और अधिकारियों एवं जनप्रतिनिधियों के साथ बैठक में श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने पर विस्तार से चर्चा की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने तीर्थयात्रियों को डिजिटल मार्गदर्शन प्रदान करने के उद्देश्य से ‘मेला सेवा एप’ का लोकार्पण किया।

    यह एप श्रद्धालुओं को मेला क्षेत्र से जुड़ी सभी महत्वपूर्ण सेवाएं एक ही मंच पर उपलब्ध कराएगा। मेला अधिकारी ऋषिराज ने बताया कि एप का डिज़ाइन इस प्रकार किया गया है कि मेला क्षेत्र के किसी भी हिस्से में मौजूद श्रद्धालु या पर्यटक सीधे अपनी समस्या या सुझाव मेला प्रशासन तक पहुंचा सकेंगे। इसके लिए मेला क्षेत्र में स्थापित सभी बिजली के खंभों पर QR कोड लगाए गए हैं। श्रद्धालु अपने मोबाइल फोन से इन QR कोड को स्कैन करके ऑनलाइन फॉर्म भरकर अपनी समस्या दर्ज कर सकते हैं।

    इस एप की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह डिजिटल शिकायत एवं मार्गदर्शन प्रणाली के जरिए प्रशासन और श्रद्धालुओं के बीच सीधे संवाद की सुविधा प्रदान करता है।

    समस्या दर्ज होते ही संबंधित विभागों की टीम सक्रिय होकर उसका त्वरित समाधान सुनिश्चित करेगी। इस प्रकार श्रद्धालुओं को अब पारंपरिक पद्धति की तुलना में अधिक तेज, सहज और प्रभावी सेवा प्राप्त होगी।

    माघ मेले में यह पहल पहली बार लागू की गई है और इसे सुरक्षित, सुव्यवस्थित और श्रद्धालु-अनुकूल मेला बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। एप के माध्यम से श्रद्धालु न केवल शिकायत दर्ज कर सकेंगे, बल्कि मेले में होने वाली विभिन्न सुविधाओं, मार्गदर्शन, स्वास्थ्य और सुरक्षा संबंधी जानकारी भी सीधे प्राप्त कर सकेंगे।

    इस डिजिटल नवाचार से माघ मेले में आने वाले लाखों श्रद्धालुओं के अनुभव को और सहज बनाने के साथ ही प्रशासन की कार्यकुशलता भी बढ़ेगी। QR कोड और मोबाइल एप के माध्यम से श्रद्धालुओं को स्थानिक मार्गदर्शन, हेल्पलाइन संपर्क और शिकायत निवारण जैसी सेवाएं तुरंत उपलब्ध होंगी।

    इस पहल से यह सुनिश्चित होगा कि माघ मेले में पहली बार तकनीक का प्रयोग करते हुए श्रद्धालुओं की समस्याओं का त्वरित समाधान हो और उन्हें एक सुरक्षित और सुव्यवस्थित मेला अनुभव प्राप्त हो। यह कदम मेला प्रशासन को अधिक पारदर्शी, त्वरित और श्रद्धालु-केंद्रित बनाएगा। माघ मेला सेवा एप श्रद्धालुओं के लिए डिजिटल मार्गदर्शन, शिकायत समाधान, और त्वरित प्रशासनिक संपर्क का एक नया आयाम खोल रहा है। QR कोड आधारित इस नवाचार से माघ मेला 2026 और अधिक सुरक्षित, सुव्यवस्थित और तकनीकी रूप से आधुनिक बन रहा है।
  • बसंत पंचमी 2026: ज्ञान और बुद्धि की देवी मां सरस्वती की कृपा पाने के लिए विशेष भोग अर्पित करें

    बसंत पंचमी 2026: ज्ञान और बुद्धि की देवी मां सरस्वती की कृपा पाने के लिए विशेष भोग अर्पित करें


    नई दिल्ली । बसंत पंचमी का पर्व हर वर्ष हिंदू परंपरा में विशेष रूप से ज्ञान, विद्या और बुद्धि की देवी मां सरस्वती की पूजा के रूप में मनाया जाता है। वर्ष 2026 में यह पर्व 23 जनवरी, शुक्रवार को मनाया जाएगा। यह दिन उन सभी छात्रों, शिक्षकों, और विद्वानों के लिए बहुत महत्व रखता है, जो शिक्षा और बुद्धि में वृद्धि चाहते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन श्रद्धा और सही विधि से मां सरस्वती की पूजा करने से न केवल शिक्षा में सफलता मिलती है, बल्कि जीवन की रुकावटें भी दूर होती हैं। साथ ही, पूजा में भोग का भी खास स्थान है, जो देवी की कृपा प्राप्त करने के लिए आवश्यक माना जाता है।

    बसंत पंचमी पर पीले रंग का महत्व

    बसंत पंचमी पर पीले रंग को विशेष महत्व दिया जाता है, और यह रंग ज्ञान, पवित्रता और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। यही कारण है कि इस दिन मां सरस्वती को केसरिया मीठे चावल अर्पित करने की परंपरा है। केसर और हल्दी से बने ये चावल देवी सरस्वती को प्रिय माने जाते हैं। इन चावलों का अर्पण करने से बुद्धि में वृद्धि और सौभाग्य की प्राप्ति होती है। शास्त्रों में इसे सुख-समृद्धि और वैभव का संकेत माना जाता है।

    पारंपरिक मिठाइयों का भोग

    केसरिया चावल के अलावा इस दिन पीली बूंदी के लड्डू, मालपुआ, और बेर जैसे मौसमी फलों का भी भोग अर्पित किया जाता है। शास्त्रों के अनुसार, पीली बूंदी के लड्डू अर्पित करने से वाणी में मधुरता और मानसिक एकाग्रता बढ़ती है। वहीं, मालपुआ को खासकर उत्तर भारत में देवी सरस्वती को अर्पित किया जाता है, जो खुशहाली और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। इस दिन बेर जैसे मौसमी फलों का भोग भी विशेष रूप से प्रिय माना जाता है, और यह देवी को अर्पित करने के बाद ही खाने की सलाह दी जाती है।

    सकारात्मक ऊर्जा और मानसिक स्पष्टता के लिए भोग

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सही भोग अर्पित करने से कई लाभ मिलते हैं। विशेष रूप से, पीले फल और मिठाइयों का अर्पण मानसिक स्पष्टता और निर्णय लेने की क्षमता को मजबूत करता है। सफेद चंदन, पीले फूल, और मिश्री का भोग नकारात्मक ऊर्जा को कम करने और घर में शांति बनाए रखने में सहायक माना जाता है। वहीं, शहद का भोग अर्पित करने से वाणी दोष दूर होते हैं और बोलचाल में मधुरता आती है।

    2026 में बसंत पंचमी शुक्रवार को

    इस बार, 2026 में बसंत पंचमी शुक्रवार को पड़ रही है, जो विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि यह दिन लक्ष्मी जी का भी दिन माना जाता है। इस दिन, मां सरस्वती को भोग लगाने के बाद, विशेष रूप से जरूरतमंद बच्चों में पढ़ाई की सामग्री और पीले रंग की खाने की चीजें बांटना बहुत फलदायी माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस प्रकार का दान न केवल विद्या में सफलता दिलाता है, बल्कि आर्थिक बाधाओं को भी दूर करता है।

  • छिंदवाड़ा में मवेशी विवाद हत्या: रिश्तेदारों ने लाठी-कल्हाड़ी से पीटकर की हत्या, तीन आरोपी गिरफ्तार

    छिंदवाड़ा में मवेशी विवाद हत्या: रिश्तेदारों ने लाठी-कल्हाड़ी से पीटकर की हत्या, तीन आरोपी गिरफ्तार


    नई दिल्ली ।छिंदवाड़ा जिले के जुन्नारदेव क्षेत्र में मवेशी चराने को लेकर मामूली विवाद ने एक सगे परिवार में भयावह घटना का रूप ले लिया। सोमाटेकड़ी (टाटरवारा) गांव के 65 वर्षीय लखनलाल यादव अपने खेत में अपने ही रिश्तेदारों के मवेशी चराने के विरोध में बहस में उलझ गए। मृतक का आरोप था कि रिश्तेदारों के मवेशी उनकी फसल को नुकसान पहुंचा रहे थे, जिस पर विवाद बढ़ गया।बात इतनी गंभीर हो गई कि मृतक के सगे रिश्तेदार धनलाल यादव, ज्ञानचंद यादव और राजकुमार राजा यादव ने गुस्से में आकर लखनलाल पर कुल्हाड़ी और डंडों से ताबड़तोड़ हमला कर दिया। हमला इतना जानलेवा था कि वह मौके पर ही दम तोड़ बैठे।

    घटना की सूचना मिलते ही जुन्नारदेव थाना पुलिस सक्रिय हुई और महज तीन घंटे के भीतर तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में आरोपियों के कब्जे से हत्या में प्रयुक्त दो कुल्हाड़ी और एक डंडा भी जब्त किया गया।पुलिस ने घटना स्थल का पंचनामा तैयार कर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा और फॉरेंसिक जांच के लिए साक्ष्य एकत्र करना शुरू किया। आरोपियों को न्यायालय में पेश कर न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।

    स्थानीय लोग इस घटना से स्तब्ध हैं। मामूली विवाद के कारण रिश्तेदारों के बीच इतनी हिंसा होना गांव में चर्चा का विषय बन गया है। पुलिस ने बताया कि मामले की गहनता से जांच की जा रही है और आरोपी पहले ही हत्या के गंभीर अपराध के तहत जेल भेज दिए गए हैं।यह घटना यह संदेश देती है कि खेत और मवेशी जैसे मामूली झगड़े भी कभी-कभी अनियंत्रित होने पर जानलेवा परिणाम दे सकते हैं। पुलिस ने ग्रामीणों से अपील की है कि विवाद को आपसी बातचीत और समझौते के जरिए हल करें, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं से बचा जा सके।