Author: bharati

  • 1991 का आर्थिक संकट: जब भारत ने सोना गिरवी रखकर बदली अपनी किस्मत

    1991 का आर्थिक संकट: जब भारत ने सोना गिरवी रखकर बदली अपनी किस्मत



    नई दिल्ली। भारत के आर्थिक इतिहास में 1991 का साल एक निर्णायक मोड़ माना जाता है। उस समय देश गंभीर विदेशी मुद्रा संकट से गुजर रहा था और स्थिति इतनी खराब हो गई थी कि सरकार को अंतरराष्ट्रीय भुगतान के लिए सोने का सहारा लेना पड़ा।

    कैसे पैदा हुआ आर्थिक संकट?
    1991 के दौरान भारत कई आर्थिक चुनौतियों से घिरा हुआ थाविदेशी मुद्रा भंडार बहुत तेजी से घट गया थादेश के पास कुछ ही दिनों के आयात के लिए पैसा बचा थाखाड़ी युद्ध के कारण तेल की कीमतें बढ़ गई थींनिर्यात में गिरावट और कर्ज का बोझ लगातार बढ़ रहा था
    इन परिस्थितियों ने देश को डिफॉल्ट की कगार पर पहुंचा दिया था।

    क्यों गिरवी रखना पड़ा सोना?
    संकट इतना गहरा था कि सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) को तत्काल कदम उठाना पड़ा। विदेशी कर्ज चुकाने के लिए फंड की जरूरत थीअंतरराष्ट्रीय बाजार में भरोसा बनाए रखना जरूरी थाभुगतान संतुलन पूरी तरह बिगड़ चुका थाऐसे में भारत ने अपने स्वर्ण भंडार को गिरवी रखकर विदेशी मुद्रा सहायता जुटाई।

    कितना सोना इस्तेमाल हुआ?
    रिपोर्ट्स के अनुसार उस समय लगभग 47 टन सोना बैंक ऑफ इंग्लैंड और बैंक ऑफ जापान को भेजा गया।करीब 20 टन सोना स्विट्जरलैंड के बैंक के पास गिरवी रखा गया यह सोना देश की अर्थव्यवस्था को तुरंत राहत देने के लिए इस्तेमाल किया गया।

    किसने संभाली जिम्मेदारी?
    इस कठिन फैसले के पीछे देश की आर्थिक टीम शामिल थीतत्कालीन प्रधानमंत्री चंद्रशेखरअर्थशास्त्री डॉ. मनमोहन सिंहवित्त मंत्री यशवंत सिन्हाRBI के वरिष्ठ अधिकार यह निर्णय बेहद गोपनीय तरीके से लिया गया था ताकि बाजार में घबराहट न फैले।

    कैसे भेजा गया सोना?
    मुंबई एयरपोर्ट से विशेष सुरक्षा में सोना विदेश भेजा गया

    इसे अलग-अलग अंतरराष्ट्रीय बैंकों में गिरवी रखा गया

    इसके बदले भारत को तत्काल विदेशी मुद्रा सहायता मिली

    क्या मिला फायदा?
    इस कदम के बादभारत को तत्काल आर्थिक राहत मिलीदेश डिफॉल्ट होने से बच गयाबाद में 1991 के आर्थिक सुधारों का रास्ता खुला।  यही सुधार आगे चलकर भारत की उदारीकरण नीति की नींव बने।1991 का सोना गिरवी संकट भारत के लिए एक चेतावनी था कि आर्थिक अनुशासन कितना जरूरी है।उस समय लिए गए कठिन फैसलों ने देश को दिवालिया होने से बचाया और एक नई आर्थिक दिशा दी।

  • ग्लोबल टेंशन और क्रूड की आग से हिला शेयर बाजार, निफ्टी में और गिरावट के संकेत

    ग्लोबल टेंशन और क्रूड की आग से हिला शेयर बाजार, निफ्टी में और गिरावट के संकेत


    नई दिल्ली ।शेयर बाजार में इस कारोबारी सत्र की शुरुआत ही कमजोरी के साथ हुई, जहां निवेशकों के रुझान में साफ तौर पर घबराहट दिखाई दी। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों ही इंडेक्स गैपडाउन ओपन हुए और शुरुआती मिनटों से ही दबाव में कारोबार करते नजर आए। बाजार की चाल पूरी तरह से बिकवाली की तरफ झुकी हुई दिखी, जिससे पूरे ट्रेडिंग सेशन में कमजोरी बनी रही।

    निफ्टी ने 23800 का महत्वपूर्ण सपोर्ट लेवल तोड़ दिया, जो पिछले कई सत्रों से एक मजबूत आधार के रूप में काम कर रहा था। इस लेवल के टूटते ही बाजार में सेलिंग प्रेशर और तेज हो गया और इंडेक्स 23700 के नीचे तक फिसल गया। तकनीकी विश्लेषकों के अनुसार, जब किसी प्रमुख सपोर्ट लेवल का ब्रेकडाउन होता है, तो बाजार में तेजी से गिरावट का जोखिम बढ़ जाता है और इसी तरह की स्थिति फिलहाल देखने को मिल रही है।

    वैश्विक स्तर पर बढ़ते तनाव का असर भी घरेलू बाजार पर साफ नजर आ रहा है। ईरान और अमेरिका के बीच तनावपूर्ण हालात ने अंतरराष्ट्रीय निवेशकों को सतर्क कर दिया है। इसके साथ ही कच्चे तेल की कीमतों में लगातार तेजी बनी हुई है, जो लगभग 100 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच चुकी है। क्रूड ऑयल की यह ऊंची कीमतें महंगाई और आर्थिक स्थिरता को लेकर चिंता बढ़ा रही हैं, जिसका सीधा असर इक्विटी बाजारों पर पड़ रहा है।

    बाजार में सेक्टोरल प्रदर्शन भी काफी असमान रहा। आईटी सेक्टर में सबसे ज्यादा दबाव देखने को मिला, जहां बड़े स्टॉक्स में लगभग तीन प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई। टेक्नोलॉजी आधारित कंपनियों पर बिकवाली का दबाव लगातार बना हुआ है, जिससे पूरा आईटी इंडेक्स कमजोर दिखाई दिया। दूसरी ओर, कुछ चुनिंदा शेयरों में हल्की मजबूती जरूर देखने को मिली, लेकिन वह बाजार की समग्र कमजोरी को संभालने में नाकाफी रही।

    ऑयल और गैस सेक्टर में कुछ स्टॉक्स में तेजी देखने को मिली, जिससे यह संकेत मिला कि ऊर्जा क्षेत्र में निवेशकों की दिलचस्पी बनी हुई है। वहीं, ऑटो और टेलीकॉम सेक्टर के कुछ शेयरों में भी हल्की बढ़त दर्ज की गई। हालांकि यह तेजी सीमित दायरे में रही और पूरे बाजार की दिशा को बदल नहीं सकी।

    बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा समय में बाजार ‘सेल ऑन राइज’ पैटर्न में काम कर रहा है, जहां हर छोटी तेजी पर बिकवाली देखने को मिल रही है। इसके अलावा, वीकली एक्सपायरी के कारण भी बाजार में अस्थिरता बढ़ी हुई है। इंडिया विक्स का 18 के ऊपर जाना इस बात का संकेत है कि आने वाले समय में उतार-चढ़ाव और तेज हो सकता है।

    कुल मिलाकर बाजार फिलहाल दबाव में है और निवेशक सतर्क रुख अपनाए हुए हैं। निफ्टी का अहम सपोर्ट टूटने के बाद आगे की दिशा अब नए सपोर्ट और रेजिस्टेंस लेवल पर निर्भर करती नजर आ रही है।

  • नया फ्री-फ्लो टोल सिस्टम शुरू, बिना रुके कटेगा टोल-ईंधन और समय दोनों की होगी बचत

    नया फ्री-फ्लो टोल सिस्टम शुरू, बिना रुके कटेगा टोल-ईंधन और समय दोनों की होगी बचत

    नई दिल्ली ।देश में हाईवे यात्रा को और अधिक आधुनिक और सुगम बनाने की दिशा में बड़ा बदलाव किया गया है, जिसमें टोल कलेक्शन सिस्टम को पूरी तरह डिजिटल और बैरियर-लेस बनाने की पहल शुरू हो गई है। इस नई व्यवस्था के तहत अब वाहनों को टोल प्लाजा पर रुकने की जरूरत नहीं होगी और पूरा प्रोसेस ऑटोमैटिक तरीके से पूरा हो जाएगा।

    इस नई तकनीक में वाहन जैसे ही टोल प्लाजा से गुजरेंगे, कैमरे उनके नंबर प्लेट को स्कैन करेंगे और जुड़े हुए फास्टैग अकाउंट से टोल शुल्क अपने आप कट जाएगा। इस प्रक्रिया के लिए एडवांस टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया गया है, जिससे ट्रैफिक जाम की समस्या काफी हद तक खत्म होने की उम्मीद है। यह सिस्टम खास तौर पर उन हाईवे सेक्शंस के लिए तैयार किया गया है जहां अक्सर लंबी कतारें और देरी देखने को मिलती है।

    नई व्यवस्था का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यात्रा का समय कम होगा और वाहन लगातार गति में रहेंगे। इससे न सिर्फ यात्रियों को सुविधा मिलेगी, बल्कि ईंधन की खपत भी कम होगी। लगातार रुकने और चलने की स्थिति खत्म होने से वाहनों का माइलेज बेहतर होगा और प्रदूषण में भी कमी आने की संभावना जताई जा रही है।

    सरकारी अनुमान के अनुसार इस तकनीक के लागू होने से हर साल बड़ी मात्रा में ईंधन की बचत संभव होगी और कार्बन उत्सर्जन में भी उल्लेखनीय कमी आएगी। इसके साथ ही लॉजिस्टिक्स सेक्टर को भी फायदा मिलेगा क्योंकि माल ढुलाई तेज और अधिक प्रभावी हो जाएगी। इससे सप्लाई चेन सिस्टम में भी सुधार देखने को मिलेगा।

    इस प्रणाली को चरणबद्ध तरीके से देश के अलग-अलग हिस्सों में लागू किया जा रहा है। शुरुआत कुछ चुनिंदा टोल प्लाजा से की गई है और धीरे-धीरे इसे राष्ट्रीय स्तर पर विस्तार देने की योजना है। आने वाले समय में बड़ी संख्या में टोल प्लाजा इस डिजिटल सिस्टम से जुड़ जाएंगे।

    हालांकि इस नई व्यवस्था में फास्टैग बैलेंस को लेकर यात्रियों को अधिक सतर्क रहने की जरूरत होगी। यदि खाते में पर्याप्त बैलेंस नहीं होता है तो ई-नोटिस जारी किया जा सकता है और तय समय सीमा में भुगतान न करने पर अतिरिक्त शुल्क भी देना पड़ सकता है।

  • पूजा में किन चीजों का दोबारा उपयोग करें और किनका नहीं? जानिए धार्मिक नियम और मान्यताएं

    पूजा में किन चीजों का दोबारा उपयोग करें और किनका नहीं? जानिए धार्मिक नियम और मान्यताएं


    नई दिल्ली। हिंदू धर्म में पूजा-पाठ केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि आस्था और शुद्धता से जुड़ी एक गहन प्रक्रिया मानी जाती है। हर वस्तु का उपयोग नियमों के अनुसार किया जाता है ताकि पूजा का पूरा फल प्राप्त हो सके। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कुछ वस्तुएं ऐसी होती हैं जिन्हें शुद्ध मानकर बार-बार इस्तेमाल किया जा सकता है, जबकि कुछ एक बार उपयोग के बाद अपवित्र मानी जाती हैं।

    किन चीजों का किया जा सकता है दोबारा उपयोग?

    पूजा में इस्तेमाल होने वाली कई धातु की वस्तुएं और पवित्र सामग्री ऐसी होती हैं जिन्हें साफ-सफाई के बाद दोबारा प्रयोग किया जा सकता है।

     धातु के पात्
    चांदी, पीतल और तांबे के बर्तन पूजा में बहुत महत्वपूर्ण माने जाते हैं। इन्हें एक बार उपयोग करने के बाद अच्छी तरह साफ करके फिर से पूजा में इस्तेमाल किया जा सकता है।

     पूजा सामग्री
    भगवान की मूर्ति, शंख, घंटी, पूजा की माला और आसन भी बार-बार उपयोग किए जा सकते हैं। इन्हें केवल स्वच्छता के साथ सुरक्षित रखना आवश्यक होता है।

     तुलसी
    तुलसी को माता तुलसी का स्वरूप माना गया है। मान्यता है कि तुलसी कभी अपवित्र नहीं होती। यदि नई तुलसी उपलब्ध न हो, तो पहले से चढ़ाई गई तुलसी को भी दोबारा पूजा में उपयोग किया जा सकता है।

     बेलपत्
    भगवान शिव को अर्पित किया गया बेलपत्र भी कई मान्यताओं के अनुसार 6 महीने तक उपयोग योग्य माना जाता है, बशर्ते वह फटा या खराब न हो।

     किन चीजों का दोबारा उपयोग नहीं करना चाहिए
    कुछ वस्तुएं ऐसी होती हैं जिन्हें एक बार उपयोग करने के बाद दोबारा पूजा में इस्तेमाल करना अशुद्ध माना जाता है।

    भोग और प्रसा
    भगवान को चढ़ाया गया भोग और प्रसाद दोबारा उपयोग नहीं किया जाता। इसे ग्रहण या वितरण के बाद समाप्त मानना चाहिए।

     जल और फूल
    पूजा में चढ़ाया गया जल और फूल एक बार उपयोग के बाद अपवित्र माने जाते हैं, इसलिए इन्हें दोबारा उपयोग नहीं करना चाहिए।

    चंदन, कुमकुम और अक्ष
    भगवान को अर्पित चंदन, कुमकुम और चावल (अक्षत) का दोबारा उपयोग वर्जित है।

    दीपक का तेल या घी
    पूजा में जलाए गए दीपक में बचा हुआ तेल या घी भी दोबारा प्रयोग नहीं किया जाता।

    धार्मिक मान्यता और महत्
    शास्त्रों के अनुसार पूजा में शुद्धता और एकाग्रता का विशेष महत्व है। माना जाता है कि अपवित्र या उपयोग हो चुकी वस्तुओं का पुनः प्रयोग करने से पूजा का पूर्ण फल प्राप्त नहीं होता। इसलिए हर वस्तु का उपयोग नियमों के अनुसार करना आवश्यक बताया गया है।

    पूजा-पाठ में उपयोग होने वाली वस्तुओं का सही ज्ञान होना जरूरी है। जहां एक ओर कुछ चीजें शुद्ध मानी जाती हैं और बार-बार उपयोग की जा सकती हैं, वहीं कुछ वस्तुएं केवल एक बार के उपयोग के लिए होती हैं। इन नियमों का पालन करने से न केवल धार्मिक लाभ मिलता है, बल्कि पूजा की पवित्रता भी बनी रहती है।

  • Gold नहीं तो क्या? 1 साल में रकम दोगुनी करने के लिए बेस्ट इन्वेस्टमेंट ऑप्शंस

    Gold नहीं तो क्या? 1 साल में रकम दोगुनी करने के लिए बेस्ट इन्वेस्टमेंट ऑप्शंस


    नई दिल्ली । वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों और विदेशी मुद्रा बचाने की अपीलों के बीच निवेशकों के सामने बड़ा सवाल है अगर सोना न खरीदें तो पैसा कहां लगाएं? सोना पारंपरिक रूप से सुरक्षित निवेश माना जाता है, लेकिन इसकी रिटर्न ग्रोथ सीमित और अस्थिर भी रहती है। इसी वजह से अब लोग ऐसे विकल्प खोज रहे हैं जो बेहतर ग्रोथ और रिटर्न दे सकें।

    1. शेयर बाजार – हाई रिस्क, हाई रिटर्न का खेल
    भारतीय शेयर बाजार लंबे समय में सबसे ज्यादा रिटर्न देने वाले विकल्पों में माना जाता है।
    सही स्टॉक्स चुनने पर एक साल में अच्छा मुनाफा संभव है, लेकिन इसमें उतार-चढ़ाव और जोखिम भी ज्यादा होता है।
    फायदा: हाई ग्रोथ पोटेंशियल
    जोखिम: मार्केट वोलैटिलिटी

    2. म्यूचुअल फंड – संतुलित और प्रोफेशनल निवेश
    म्यूचुअल फंड उन लोगों के लिए बेहतर विकल्प है जो डायरेक्ट शेयर मार्केट का जोखिम नहीं लेना चाहते।
    SIP के जरिए छोटे निवेश से शुरुआत
    लंबे समय में स्थिर रिटर्न की संभावना
    एक्सपर्ट मैनेजमेंट का फायदा

    3. रियल एस्टेट और REITs – स्थिर आय का जरिया
    REIT (Real Estate Investment Trust) उन लोगों के लिए अच्छा विकल्प है जो प्रॉपर्टी में सीधे निवेश नहीं कर सकते।
    कम पैसे में रियल एस्टेट एक्सपोजर
    किराये जैसी नियमित आय
    लंबी अवधि में वैल्यू ग्रोथ

    4. गोल्ड ETF – सोने का डिजिटल विकल्प
    गोल्ड ETF उन निवेशकों के लिए सही है जो सोना छोड़ना नहीं चाहते लेकिन फिजिकल गोल्ड से बचना चाहते हैं।
    स्टोरेज की झंझट नहीं
    बाजार से जुड़े रिटर्न
    आसानी से खरीदा-बेचा जा सकता है

     क्या सच में 1 साल में पैसा डबल हो सकता है?
    यह समझना जरूरी है कि कोई भी निवेश चाहे शेयर बाजार हो या म्यूचुअल फंड गारंटीड डबल रिटर्न नहीं देता।
    उच्च रिटर्न के साथ हमेशा जोखिम भी जुड़ा होता है। इसलिए निवेश सोच-समझकर और विविधता के साथ करना चाहिए।

    अगर आप सोने में निवेश कम करके अपने पैसे को बढ़ाना चाहते हैं, तो भारतीय शेयर बाजार, म्यूचुअल फंड, REIT (Real Estate Investment Trust) और गोल्ड ETF जैसे विकल्प बेहतर हो सकते हैं लेकिन समझदारी और रिस्क मैनेजमेंट सबसे जरूरी है।

  • साल 2026 की टॉप 10 फिल्में: लिस्ट में बड़े सरप्राइज, एक फिल्म ने तो 8.5+ रेटिंग हासिल की

    साल 2026 की टॉप 10 फिल्में: लिस्ट में बड़े सरप्राइज, एक फिल्म ने तो 8.5+ रेटिंग हासिल की


    नई दिल्ली । साल 2026 भारतीय और ग्लोबल सिनेमा के लिए बेहद खास साबित हो रहा है। जहां कुछ फिल्मों ने बॉक्स ऑफिस पर रिकॉर्ड तोड़े हैं, वहीं कुछ बड़े नाम भी फ्लॉप साबित हुए हैं। इस लिस्ट में एक फिल्म ने 8.5+ IMDb रेटिंग के साथ सबको चौंका दिया है।

     2026 में सिनेमा का धमाका – टॉप 10 फिल्मों की लिस्ट
    साल 2026 में फिल्मों ने दर्शकों को हर तरह का अनुभव दिया है एक्शन, ड्रामा, थ्रिलर से लेकर हॉरर-कॉमेडी तक। इस साल कई बड़ी फिल्मों ने कमाई और रेटिंग दोनों में कमाल किया है।

     1. धुरंधर 2: द रिवेंज – साल की सबसे बड़ी हिट
    धुरंधर 2: द रिवेंज इस साल की सबसे बड़ी ब्लॉकबस्टर साबित हुई है।
    रणवीर सिंह की यह स्पाई थ्रिलर न सिर्फ भारत बल्कि इंटरनेशनल लेवल पर भी छा गई।

     2. बॉर्डर 2 – देशभक्ति का जोश
    बॉर्डर 2 ने दर्शकों में देशभक्ति का जोश जगाया।
    रेटिंग भले ही 6.1 रही, लेकिन बॉक्स ऑफिस पर फिल्म ने अच्छा प्रदर्शन किया।

    3. मन शंकर वर प्रसाद गारू – साउथ का मसाला हिट
    मन शंकर वर प्रसाद गारू ने टॉलीवुड की ताकत फिर साबित की।
    300 करोड़ से ज्यादा की कमाई के साथ यह टॉप 3 में शामिल रही।

    4. भूत बंगला – हॉरर कॉमेडी का तड़का
    भूत बंगला ने दर्शकों को डर और हंसी दोनों का मजा दिया।
    अक्षय कुमार की इस फिल्म ने 243 करोड़ से ज्यादा का कलेक्शन किया।

    5. द राजा साब – उम्मीदों पर नहीं उतरी खरी
    द राजा साब प्रभास की यह फिल्म फ्लॉप साबित हुई।
    कम रेटिंग (3.1) और कमजोर कहानी इसकी सबसे बड़ी कमजोरी रही।

    6. वाझा 2 – मलयालम सिनेमा की चमक
    वाझा 2: बायोपिक ऑफ ए बिलियन ब्रदर्स ने कम बजट में बड़ी सफलता हासिल की।
    8.2 IMDb रेटिंग के साथ यह ब्लॉकबस्टर बन गई।

    7. ओ रोमियो – रीमेक का संघर्ष
    ओ रोमियो दर्शकों को खास प्रभावित नहीं कर पाई और औसत प्रदर्शन किया।

    8. प्रोजेक्ट हेल मेरी – ग्लोबल सुपरहिट
    प्रोजेक्ट हेल मेरी ने वर्ल्डवाइड बॉक्स ऑफिस पर 5700 करोड़ से ज्यादा कमाई कर तहलका मचा दिया।

     9. उस्ताद भगत सिंह – कमजोर परफॉर्मेंस
    उस्ताद भगत सिंह की शुरुआत अच्छी रही लेकिन बाद में फिल्म की पकड़ कमजोर पड़ गई।

     10. राजा शिवाजी – मराठी सिनेमा की शान
    राजा शिवाजी को दर्शकों और क्रिटिक्स दोनों ने सराहा।
    यह फिल्म मराठी सिनेमा के लिए गौरव बनकर उभरी।

    साल 2026 में सिनेमा ने हर तरह के रंग दिखाए जहां धुरंधर 2: द रिवेंज जैसी फिल्में सुपरहिट रहीं, वहीं कुछ बड़े स्टार्स की फिल्में फ्लॉप भी साबित हुईं। इस साल की खास बात यह रही कि कंटेंट और कहानी ने स्टार पावर को पीछे छोड़ दिया।
  • .मल्टीबैगर स्टॉक बना निवेशकों की लॉटरी, 3 साल में 2400% रिटर्न के बाद अब बोनस शेयर का बड़ा ऐलान

    .मल्टीबैगर स्टॉक बना निवेशकों की लॉटरी, 3 साल में 2400% रिटर्न के बाद अब बोनस शेयर का बड़ा ऐलान

    नई दिल्ली । शेयर बाजार में एक बार फिर मल्टीबैगर स्टॉक्स ने निवेशकों का ध्यान खींचा है। स्मॉलकैप कैटेगरी की एक कंपनी वी-मार्क इंडिया ने हाल ही में ऐसा प्रदर्शन किया है जिसने निवेशकों को चौंका दिया है। कंपनी ने 5:1 के अनुपात में बोनस शेयर जारी करने का फैसला लिया है, जिसके बाद इसके शेयरों में जोरदार तेजी देखने को मिली और यह करीब 11 प्रतिशत तक उछल गया।

    बोनस शेयर का मतलब यह है कि जिन निवेशकों के पास कंपनी का एक शेयर होगा, उन्हें अतिरिक्त पांच शेयर मुफ्त में दिए जाएंगे। इस फैसले से बाजार में सकारात्मक माहौल बना और निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ गई। हालांकि इस प्रस्ताव को अभी शेयरधारकों की मंजूरी मिलना बाकी है।

    इस कंपनी की सबसे बड़ी खासियत इसका मल्टीबैगर रिटर्न है। पिछले तीन वर्षों में इस स्टॉक ने लगभग 2400 प्रतिशत का रिटर्न दिया है, यानी निवेशकों की पूंजी कई गुना बढ़ चुकी है। अगर किसी ने कुछ साल पहले इसमें निवेश किया होता, तो उसकी रकम आज कई गुना ज्यादा हो सकती थी। यही कारण है कि यह स्टॉक लगातार चर्चा में बना हुआ है।

    कंपनी वायर और केबल निर्माण के क्षेत्र में काम करती है और इसका उपयोग पावर, इंफ्रास्ट्रक्चर और औद्योगिक प्रोजेक्ट्स में बड़े पैमाने पर होता है। इसके उत्पादों की मांग सरकारी और निजी दोनों क्षेत्रों में बनी रहती है, जिससे इसका बिजनेस लगातार मजबूत हो रहा है।

    बीते कुछ वर्षों में कंपनी के शेयरों ने शानदार प्रदर्शन किया है। एक साल के भीतर भी इसमें कई गुना तेजी देखने को मिली है, जबकि एक महीने के अंदर भी इसमें तेज उछाल दर्ज किया गया है। इस मजबूत प्रदर्शन ने इसे स्मॉलकैप से मल्टीबैगर स्टॉक की श्रेणी में ला दिया है।

    कंपनी का भविष्य विस्तार पर भी जोर है। आने वाले वर्षों में उत्पादन क्षमता बढ़ाने और नए बाजारों में विस्तार करने की योजना है। इसके साथ ही कंपनी का फोकस पावर ट्रांसमिशन, रिन्यूएबल एनर्जी और निर्यात जैसे क्षेत्रों पर भी है।

    कुल मिलाकर यह स्टॉक उन निवेशकों के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है जो लंबी अवधि में मजबूत रिटर्न की तलाश में रहते हैं। बोनस शेयर की घोषणा ने इसके प्रति बाजार की उम्मीदों को और बढ़ा दिया है।

  • पश्चिम एशिया संकट पर ईरान का पलटवार, अमेरिका-इजराइल को बताया जिम्‍मेदार, ट्रंप की सख्‍ती से बढ़ा तनाव

    पश्चिम एशिया संकट पर ईरान का पलटवार, अमेरिका-इजराइल को बताया जिम्‍मेदार, ट्रंप की सख्‍ती से बढ़ा तनाव

    वॉशिंगटन । पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष ने वैश्विक आपूर्ति व्यवस्था को बुरी तरह प्रभावित किया है। कई देशों में जरूरी वस्तुओं की सप्लाई पर असर पड़ा है। इस बीच ईरान ने इन हालात के लिए खुद को जिम्मेदार मानने से इनकार करते हुए अमेरिका और इजराइल पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
    पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष ने वैश्विक आपूर्ति व्यवस्था को बुरी तरह प्रभावित किया है। कई देशों में जरूरी वस्तुओं की सप्लाई पर असर पड़ा है। इस बीच ईरान ने इन हालात के लिए खुद को जिम्मेदार मानने से इनकार करते हुए अमेरिका और इजराइल पर गंभीर आरोप लगाए हैं।

    ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा कि भारत समेत कई देशों में पैदा हुई मौजूदा स्थिति के लिए ईरान नहीं, बल्कि अमेरिका और इजराइल जिम्मेदार हैं। उन्होंने दावा किया कि यह संघर्ष ईरान पर थोपा गया है और देश इससे खुश नहीं है।

    “हमने नहीं शुरू की यह जंग”
    एक साक्षात्कार में बघाई ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को अमेरिका और इजराइल की भूमिका की जवाबदेही तय करनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि इन देशों की कार्रवाई से ही मौजूदा हालात पैदा हुए हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने से प्रभावित देशों के सवाल पर उन्होंने कहा कि पहले यह समुद्री मार्ग पूरी तरह सुरक्षित था और हर देश के लिए खुला था।

    होर्मुज पर ईरान का दावा
    बघाई ने यह भी कहा कि ईरान ने जो भी कदम उठाए हैं, वे अंतरराष्ट्रीय कानून के दायरे में हैं। उनका कहना है कि अमेरिका और इजराइल ने खाड़ी क्षेत्र के देशों की जमीन का इस्तेमाल ईरान पर हमलों के लिए किया, जिसके जवाब में ईरान को कार्रवाई करनी पड़ी। ईरान का कहना है कि वह खुद भी इस जलमार्ग पर निर्भर है, इसलिए उसकी प्राथमिकता इसकी सुरक्षा है।

    अमेरिका की सख्त नीति
    दूसरी ओर अमेरिका ने ईरान के खिलाफ आर्थिक दबाव और बढ़ा दिया है। अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने वैश्विक बैंकों को ईरानी मनी लॉन्ड्रिंग और तेल नेटवर्क पर कड़ी निगरानी रखने के निर्देश दिए हैं। अमेरिका का आरोप है कि ईरान शेल कंपनियों और क्रिप्टो नेटवर्क के जरिए प्रतिबंधित तेल का व्यापार कर रहा है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि ईरान के साथ संघर्ष विराम “कमजोर स्थिति” में पहुंच चुका है और उन्होंने तेहरान के शांति प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया है।

    तेल कारोबार पर सख्ती
    अमेरिकी प्रशासन ने बैंकों से संदिग्ध कंपनियों की पहचान करने को कहा है, खासकर उन फर्मों पर नजर रखने के लिए जो अचानक बड़े वित्तीय लेनदेन कर रही हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, 2024 में ईरान से जुड़ी कंपनियों ने करीब 4 अरब डॉलर का तेल कारोबार किया है। अब अमेरिका इराक, यूएई और ओमान जैसे देशों पर भी दबाव बना रहा है ताकि ईरान की आर्थिक गतिविधियों पर रोक लगाई जा सके।

  • शुभेंदु अधिकारी के PA की हत्‍या के आरोपी राज को लेकर उनकी मां का भावुक बयान, गिरफ्तारी पर उठाए सवाल

    शुभेंदु अधिकारी के PA की हत्‍या के आरोपी राज को लेकर उनकी मां का भावुक बयान, गिरफ्तारी पर उठाए सवाल


    बलिया। कोलकाता में बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के निजी सहायक (PA) की हत्या के मामले में गिरफ्तार किए गए बलिया निवासी राज सिंह को लेकर नया मोड़ सामने आया है। आरोपी की मां जामवंती सिंह ने बेटे के समर्थन में सामने आकर पूरी घटना का क्रम बताया और उसकी बेगुनाही का दावा किया है।

    उन्होंने भावुक होकर कहा कि उनका बेटा कई दिनों तक उनके साथ ही था और ऐसे में वह किसी वारदात में शामिल कैसे हो सकता है। मां का कहना है कि पूरा परिवार लखनऊ में एक शादी समारोह में शामिल होने गया था, जिसके बाद धार्मिक यात्रा भी की गई।

    शादी से लेकर अयोध्या दर्शन तक का सफर
    जामवंती सिंह के मुताबिक, 7 तारीख को राज लखनऊ में एक एमएलसी की बेटी की शादी में शामिल होने गया था। इसी दौरान परिवार ने भी साथ चलने की इच्छा जताई। इसके बाद पूरा परिवार राज, ड्राइवर, एक दोस्त, एक अन्य व्यक्ति और स्वयं मां लखनऊ पहुंचा और एक गेस्ट हाउस में रुका।

    रात में राज शादी समारोह में गया और बाद में वापस लौट आया। अगले दिन सुबह सभी लोग अंबेडकर नगर स्थित किछौछा शरीफ पहुंचे, जहां उन्होंने दरगाह पर चादर चढ़ाई। इसके बाद परिवार अयोध्या गया और वहां राम मंदिर सहित अन्य धार्मिक स्थलों के दर्शन किए। मां ने कहा कि पूरे दिन की यात्रा के बाद सभी ने रास्ते में भोजन किया और सामान्य रूप से समय बिताया।

    अचानक गिरफ्तारी का आरोप
    राज की मां का कहना है कि जब वे अयोध्या से लौट रहे थे, तभी उनकी गाड़ी को पुलिस ने रोक लिया। इसके बाद बेटे को हिरासत में ले लिया गया और परिवार को महिला थाने में बैठा दिया गया। उनके अनुसार, पूरी रात उन्हें मामले की जानकारी नहीं दी गई। अगले दिन थोड़ी देर के लिए बेटे से मुलाकात कराई गई, जिसके बाद पता चला कि कोलकाता पुलिस उसे अपने साथ ले जा रही है। मां ने रोते हुए कहा कि उन्हें अब तक नहीं पता कि उनका बेटा कहां है और उसे किस आधार पर ले जाया गया।

    CCTV और मोबाइल रिकॉर्ड का दावा
    जामवंती सिंह ने दावा किया कि उनके पास बेटे की मौजूदगी के कई सबूत हैं। उन्होंने कहा कि घर के CCTV फुटेज, मोबाइल लोकेशन और कॉल रिकॉर्ड से यह साबित हो सकता है कि राज लगातार परिवार के साथ था। उन्होंने यह भी कहा कि अगर जरूरत पड़े तो शादी समारोह, बाजार और यात्रा के सभी वीडियो और सबूत जांच एजेंसियों को दिए जा सकते हैं।

    आपराधिक रिकार्ड
    राज सिंह की कुछ तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं, जिनमें वह यूपी सरकार के मंत्री दयाशंकर सिंह, बीजेपी विधायक प्रिंसू सिंह और अन्य जनप्रतिनिधियों के साथ नजर आ रहा है। पुलिस के अनुसार, राज का आपराधिक इतिहास भी रहा है। वर्ष 2020 में उस पर एक अंडा व्यवसायी की हत्या का आरोप लगा था और वह फिलहाल जमानत पर बाहर था।

    वहीं राज की मां ने केंद्र सरकार और जांच एजेंसियों से निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि सच सामने आना चाहिए और बिना ठोस सबूत के किसी को दोषी नहीं ठहराया जाना चाहिए।

  • अर्थव्यवस्था को बचाने की कवायद… जानें सोना और तेल के इस्तेमाल में कटौती की अपील का क्या है मकसद?

    अर्थव्यवस्था को बचाने की कवायद… जानें सोना और तेल के इस्तेमाल में कटौती की अपील का क्या है मकसद?


    नई दिल्ली।
    पश्चिम एशिया (West Asia) में संघर्ष से वैश्विक आपूर्ति शृंखला (Global Supply Chain) में आई रुकावट और विदेशी मुद्रा भंडार (Foreign Exchange Reserves) सुरक्षित रखने के लिए सोने, पेट्रोल-डीजल और खाने के तेल के इस्तेमाल में कटौती की पीएम नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) की अपील पर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, अपील का मुख्य मकसद डॉलर की मांग कम करना, रुपये को मजबूत करना और अर्थव्यवस्था को संभावित झटकों से बचाना है। विदेशी मुद्रा भंडार पर बढ़ती आयात लागत और वैश्विक ऊर्जा बाजार में उतार-चढ़ाव से दबाव लगातार बढ़ रहा है। भारत तेल का शुद्ध आयातक है और तेल की 89 फीसदी जरूरतें बाहरी स्रोतों से पूरी करता है और इसके लिए उसे अब ज्यादा कीमत चुकानी पड़ रही है।


    6 अरब डॉलर का सोना हर माह खरीदता है भारत

    भारत सोने का उत्पादक नहीं है। पिछले वर्ष अकेले सोने पर करीब 72 अरब डॉलर खर्च किए गए। यानी, हर माह छह अरब डॉलर। उपभोक्ता आयात और एक आरक्षित संपत्ति के रूप में सोने की दोहरी भूमिका स्थिति को और जटिल बना देती है। आरबीआई तेजी से सोना जमा कर रहा है। एक साल में उसने लंदन से 168 टन सोना खरीदा है, जिससे मार्च तक उसके पास 880 टन सोना हो गया है। भारत के कुल विदेशी मुद्रा भंडार में सोने की 16% हिस्सेदारी है, जो पिछले वर्ष के 10% से अधिक है। हालांकि, घरेलू सोने की खरीद का आर्थिक असर अलग होता है।

    आरबीआई के रिजर्व प्रबंधन कार्यों के विपरीत आयातित सोने की उपभोक्ता मांग अर्थव्यवस्था में डॉलर के प्रवाह को सीधे तौर पर बढ़ा देती है। इसलिए, बड़े पैमाने पर सोने के आयात से चालू खाता घाटे पर दबाव बढ़ सकता है और डॉलर की मांग बढ़ सकती है। इससे समय के साथ रुपया कमजोर पड़ सकता है। जैसे-जैसे डॉलर बाहर जाता है, रुपया कमजोर होता जाता है, सोना और भी महंगा हो जाता है। इससे दुष्चक्र पैदा हो जाता है, जिसमें भारतीय उपभोक्ता सोने के लिए अधिक रुपये चुकाता है, क्योंकि सोने की पिछली खरीद ने रुपये पर दबाव बढ़ा दिया होता है।


    आयात में बढ़ोतरी से बढ़ रहा दबाव

    थिंक टैंक वैश्विक व्यापार अनुसंधान पहल (जीटीआरआई) ने पीएम की अपील का समर्थन करते हुए कहा कि सोने के आयात में हो रही भारी बढ़ोतरी विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव डाल रही है और व्यापार असंतुलन को बढ़ा रही है। जीटीआरआई के अनुसार, भारत के गोल्ड बार का आयात 2022 में 36.5 अरब डॉलर था, जो 2025 में बढ़कर 58.9 अरब डॉलर हो गया। थिंक टैंक ने सरकार से आग्रह किया है कि विदेशी मुद्रा भंडार सुरक्षित रखने के लिए, भारत-यूएई मुक्त व्यापार समझौते के तहत कीमती धातुओं पर दी जाने वाली रियायतों की समीक्षा करे। हाल में सोने के आयात में हुई बढ़ोतरी में इसकी बड़ी भूमिका रही है। अमीरात से 2022 में जहां गोल्ड बार का आयात 2.9 अरब डॉलर था, वहीं 2025 में यह बढ़कर 16.5 अरब डॉलर हो गया।


    89% तेल का आयात करता है भारत

    तेल की कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा असर भी डॉलर के बाहर जाने में वृद्धि के रूप में सामने आता है। हालांकि पेट्रोल-डीजल की खुदरा कीमतें स्थिर रखी गई हैं, पर इसकी भरपाई सरकारी तेल विपणन कंपनियों ने की है। इन कंपनियों को खुदरा कीमत और आयात कीमत के बीच के अंतर का सामना करना पड़ा है और अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों में उछाल के कारण इन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ा है। ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (ओएमसी) को एविएशन टर्बाइन फ्यूल पर भी नुकसान हो रहा है, जिससे उन पर दबाव और बढ़ गया है। इसे देखते हुए कि सरकार ने ओएमसी को इन नुकसानों की भरपाई करने की कोई योजना नहीं होने का संकेत दिया है, कीमतों में बढ़ोतरी की उम्मीद है और कंपनियां खुद भी इस तरह के बदलाव के लिए जोर दे रही हैं। हालांकि, ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी कुछ ही दिनों में पूरी आपूर्ति शृंखला में फैल जाती है।


    खाद्य तेल : विकल्प सीमित थाली की बढ़ती जा रही लागत

    भारत खाने के तेल की जरूरतों के लिए आयात पर बहुत निर्भर है, खासकर इंडोनेशिया और मलयेशिया से पाम तेल तथा रूस और यूक्रेन से सूरजमुखी का तेल मंगाता है। पीएम मोदी ने कहा था कि यदि हर घर खाने के तेल का इस्तेमाल कम कर दे, तो राष्ट्रीय खजाने के साथ परिवार की सेहत भी सुधरेगी। सोने की खरीद टाला जा सकता है या सैद्धांतिक रूप से ईंधन की बचत की जा सकती है, लेकिन खाने के तेल के विकल्प सीमित हैं। यह रोजमर्रा की आवश्यक चीज है। रुपये की गिरावट से यह समस्या और भी बढ़ गई है। कमजोर रुपया आयातित तेल के हर लीटर की कीमत बढ़ा देता है और खाने के तेल की कीमतों में हुई यह बढ़ोतरी आपूर्ति शृंखला के जरिये तेजी से उपभोक्ता की थाली तक पहुंच जाती है। घरेलू स्तर पर उपलब्ध सरसों के तेल जैसे विकल्प मौजूद हैं, लेकिन इनका उत्पादन इतनी तेजी से नहीं बढ़ाया जा सकता कि ये आयात की जगह ले सकें।


    रासायनिक उर्वरक : बढ़ रहीं कीमतें, खाने-पीने की वस्तुओं पर असर

    प. एशिया आपूर्ति मार्गों में भारी रुकावट की वजह से आयात किए गए यूरिया की कीमत फरवरी में 508 डॉलर से बढ़कर 935 डॉलर प्रति टन हो गई है। इसी तरह, डीएपी (डाई-अमोनियम फॉस्फेट) की कीमत पिछले साल के 680 डॉलर से बढ़कर 925 डॉलर प्रति टन होने की उम्मीद है। अमोनिया की कीमतें भी 435 डॉलर से बढ़कर 850–900 डॉलर प्रति टन हो गई हैं, जो दोगुनी से भी अधिक हैं। यूरिया आयात का लगभग 75% हिस्सा खाड़ी सहयोग परिषद (जीसीसी) के देशों से आता है।

    खाद के घरेलू उत्पादन को भी झटका लगा है। खाड़ी से एलएनजी की आपूर्ति में रुकावटों के कारण मार्च में यूरिया का उत्पादन 25 लाख टन की सामान्य मासिक दर के मुकाबले घटकर 15 लाख टन रह गया। जून में स्टॉक की पर्याप्त भरपाई नहीं हुई, तो खेती में इस्तेमाल चीजों की बढ़ी लागत का असर खाद्य वस्तुओं पर पड़ेगा।


    यूरिया आयात का 75% हिस्सा जीसीसी से आता है

    घरेलू यूरिया प्लांट फीडस्टॉक के तौर पर एलएनजी पर निर्भर रहते हैं, जिसका 60% से अधिक हिस्सा कतर, यूएई व ओमान से होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते आयात किया जाता है। इस मार्ग में बाधा ने उर्वरक आयात को प्रभावित किया। खरीफ मौसम के लिए 194 लाख टन यूरिया की जरूरत है, जबकि अप्रैल में स्टॉक केवल 55 लाख टन था।