Author: bharati

  • Cannes Queen ऐश्वर्या राय ब्रांड वीडियो से गायब, आलिया भट्ट की एंट्री पर मचा बवाल

    Cannes Queen ऐश्वर्या राय ब्रांड वीडियो से गायब, आलिया भट्ट की एंट्री पर मचा बवाल

    नई दिल्ली  कान्स फिल्म फेस्टिवल हमेशा से भारत के लिए खास रहा है और इसमें ऐश्वर्या राय बच्चन को ‘कान्स क्वीन’ कहा जाता है। साल 2004 से वह लगातार लोरियल पेरिस की ग्लोबल एंबेसडर के रूप में रेड कार्पेट पर अपनी मौजूदगी दर्ज कराती रही हैं। लेकिन इस बार फेस्टिवल से पहले ब्रांड द्वारा जारी एक प्रमोशनल वीडियो में उनकी गैरमौजूदगी ने फैंस को हैरान कर दिया है।

    वीडियो में आलिया भट्ट की मौजूदगी, ऐश्वर्या गायब
    इंस्टाग्राम पर शेयर किए गए इस वीडियो में कान्स के मशहूर मार्टिनेज होटल की झलक दिखाई गई, जहां ब्रांड से जुड़ी कई इंटरनेशनल और भारतीय सेलिब्रिटीज के पोस्टर नजर आए। इनमें आलिया भट्ट का पोस्टर भी शामिल था।
    हालांकि, लंबे समय से कान्स की पहचान बन चुकी ऐश्वर्या राय बच्चन का कोई पोस्टर या जिक्र नहीं दिखा, जिससे फैंस काफी निराश हो गए।

    सोशल मीडिया पर फैंस का गुस्स
    वीडियो सामने आते ही सोशल मीडिया पर फैंस ने तीखी प्रतिक्रिया दी। कई यूजर्स ने सवाल उठाए कि ऐश्वर्या राय को क्यों शामिल नहीं किया गया। एक यूजर ने लिखा कि “ऐश्वर्या को कोई रिप्लेस नहीं कर सकता।”
    दूसरे ने पूछा “कान्स की असली क्वीन कहां हैं? वहीं कई फैंस ने ब्रांड पर भारत में ऐश्वर्या की लोकप्रियता को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया।

     ऐश्वर्या राय और कान्स का पुराना रिश्ता
    ऐश्वर्या राय बच्चन लंबे समय से कान्स रेड कार्पेट की सबसे चर्चित भारतीय चेहरों में से एक रही हैं। उनके लुक्स, गाउन स्टाइल और बोल्ड मेकअप हर साल सोशल मीडिया पर वायरल होते रहे हैं। उनकी उपस्थिति को अक्सर भारत की ग्लोबल फैशन पहचान से जोड़ा जाता है।

     ब्रांड की चुप्पी बनी चर्चा का विष
    अब तक लोरियल पेरिस की ओर से इस विवाद पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। इसी वजह से फैंस की नाराजगी और सवाल और बढ़ते जा रहे हैं।

     

    =कान्स फिल्म फेस्टिवल 2026 से पहले यह विवाद सोशल मीडिया पर तेजी से चर्चा में है। जहां एक तरफ आलिया भट्ट की मौजूदगी को लेकर चर्चा हो रही है, वहीं दूसरी तरफ ऐश्वर्या राय बच्चन की गैरमौजूदगी ने फैंस को निराश कर दिया है।

  • तमिलनाडुः CM विजय का एक और बड़ा एक्शन.. मंदिरों और स्कूलों के आसपास के शराब ठेके तत्काल बंद करने के आदेश

    तमिलनाडुः CM विजय का एक और बड़ा एक्शन.. मंदिरों और स्कूलों के आसपास के शराब ठेके तत्काल बंद करने के आदेश


    चेन्नई।
    तमिलनाडु (Tamil Nadu) में मुख्यमंत्री (Chief Minister) पद की शपथ लेते ही सी जोसेफ विजय (C Joseph Vijay) ऐक्शन मोड में हैं। उन्होंने बड़ा आदेश देते हुए कहा है कि पूजा के स्थलों, स्कूलों और बस अड्डों के आसपास 500 मीटर के दायरे में सभी शराब की सरकारी दुकानें तत्काल बंद कर दी जाएं। सख्त आदेश जारी करते हुए विजय ने कहा है कि यह फैसला दो हफ्ते के अंदर ही लागू होगा।

    बता दें कि मुख्यमंत्री बनते ही मंच पर ही उन्होंने अपने वादों को पूरा करने के लिए तीन फैसलों पर साइन कर दिए थे। पहला आदेश 200 यूनिट फ्री बिजली देने को लेकर था। दूसरा आदेश महिलाओं की सुरक्षा के लिए स्पेशल टास्क फोर्स गठित करने और तीसरा नशे की सस्या से निपटने के लिए हर जिले में विशेष फोर्स का गठन करना था।

    सोमवार को ही सीएम विजय समेत सभी नवनिर्वाचित विधायकों ने विधानसभा में शपथ ली है। सबसे पहले मुख्यमंत्री विजय ने विधायक के रूप में शपथ ली और मंत्रियों में एन आनंद, आधव अर्जुन, केजी अरुणराज, केए सेनगोट्टैयन, पी वेंकटरमणन, आर निर्मलकुमार, राजमोहन और टीके प्रभु ने भी शपथ ली। इसके बाद द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) विधायक दल के नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री उदयनिधि स्टालिन, पूर्व मुख्यमंत्री पलानीस्वामी और ओ. पनीरसेल्वम तथा अन्य विधायकों ने पद की शपथ ली।

    विजय, उदयनिधि और पनीरसेल्वम उन विधायकों में शामिल थे जिन्होंने “पूर्ण निष्ठा” के नाम पर शपथ ली। पलानीस्वामी और पीएमके की सौम्या अंबुमणि उन विधायकों में शामिल थीं, जिन्होंने ईश्वर के नाम पर शपथ ली। महिला मंत्री कीर्तना शुरुआत में अपना निर्वाचन प्रमाण-पत्र पेश नहीं कर सकीं और उन्हें इसे लाने के लिए वापस जाना पड़ा।

    जब विधानसभा के प्रधान सचिव के. श्रीनिवासन ने माइक पर कीर्तना का नाम शपथ लेने के लिए पुकारा, तो वह मुख्यमंत्री की कुर्सी के सामने बने मंच की ओर बढ़ीं। विधानसभा की परंपरा के अनुसार, शपथ लेने वाले विधायक कार्यवाहक अध्यक्ष की ओर मुख करके खड़े होते हैं। जैसे ही कीर्तना मंच के पास पहुंचीं, सचिव श्रीनिवासन ने हाथ उठाकर उनसे निर्वाचन प्रमाण-पत्र मांगा। हालांकि, वह प्रमाण-पत्र पेश नहीं कर सकीं। श्रीनिवासन को उन्होंने क्या जवाब दिया, यह स्पष्ट रूप से पता नहीं चल सका है।

    बाद में, कीर्तना प्रमाण-पत्र सदन में लेकर आईं और अधिकारी को सौंप दिया तथा ईश्वर के नाम पर शपथ ली। वेलाचेरी से ‘तमिलगा वेत्री कषगम’ (टीवीके) के विधायक आर. कुमार जब अपना निर्वाचन प्रमाण-पत्र जमा करने के बाद शपथ लेने ही वाले थे, तभी अधिकारी श्रीनिवासन ने उन्हें रोक दिया। श्रीनिवासन ने कुमार का ध्यान इस ओर दिलाया कि उनके द्वारा जमा किए गए प्रमाण-पत्र पर किसी अन्य व्यक्ति का नाम दर्ज है।

  • पश्चिम एशिया संकट के बीच 15 मई को यूरोप और यूएई के टूर पर जाएंगे PM मोदी, इन मुद्दों पर रहेगा फोकस

    पश्चिम एशिया संकट के बीच 15 मई को यूरोप और यूएई के टूर पर जाएंगे PM मोदी, इन मुद्दों पर रहेगा फोकस


    नई दिल्ली।
    ईरान और अमेरिका (Iran and America) में तनाव के बीच दुनियाभर में पैदा हुए ऊर्जा संकट के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) 15 से 20 मई तक यूरोप और यूएई की यात्रा पर जाने वाले हैं। जानकारी के मुताबिक इस यात्रा के दौरन वह ऊर्जा सहयोग और व्यापार को बढ़ाने को लेकर कई समझौते कर सकते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) यूएई (UAE) और इटली (Italy) में रुकेंगे। इसके अलावा प्रधानमंत्री मोदी , नीदरलैंड, स्वीडन और नॉर्वे का भी दौरा करेंगे। वह 15 मई को सबसे पहले यूएई पहुचेंगे और राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान से मुलाकात करेंगे।


    किन मुद्दों पर होगा फोकस

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी इस यात्रा के दौरान ऊर्जा सहयोग और क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर वैश्विक नेताओं से चर्चा करेंगे। इसके अलावा यूरोप के देशों के साथ सांस्कृतिक, आर्थिक और राजनीतिक साझेदारी को बढ़ाने पर भी चर्चा होगी। जानकारी के मुताबिक यात्रा के दौरान सभी देशों के बीच व्यापार और निवेश को बढ़ाने पर भी चर्चा की जाएगी।


    यूएई के बाद की यात्रा

    बता दें कि यूएई भारत का बड़ा एनर्जी पार्टनर है। इसके अलावा भी निवेश के मामले में वह भारत का सातवां सबसे बड़ा स्रोत है। यहां 45 लाख से ज्यादा भारतीय भी रहते हैं। यूएई के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नीदरलैंड पहुंचेंगे और पीएम रॉब जेटेन से मुलकात करेंगे। वह 17 मई तक नीदरलैंड की आधिकारिक यात्रा पर रहेंगे। इसके बाद वह स्वीडन के प्रधानमंत्री उल्फ क्रिस्टनर्स के न्योते पर 17 से 18 मई तक के लिए स्वीडन के गोथेनबर्ग पहुंचेंगे। चौथे चरण में प्रधानमंत्री नॉर्वे पहुंचेंगे और भारत-नॉर्डिक शिखऱ सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। वर्ष 1983 के बाद यह किसी भारतीय प्रधानमंत्री की नॉर्वे की पहली यात्रा होगी।

    इस मुद्दे को लेकर हो सकती है अहम बात
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नीदरलैंड दूसरी बार जा रहे हैं। यहां वह पीएम विलियम- अलेक्जेंडर और रानी मैक्सिमा से मिलेंगे। पीएम मोदी इस यात्रा के दौरान रक्षा, ग्रीन हाइड्रोजन, सेमीकंडक्टर और नवाचार के मामलों को आगे बढ़ाने के लिए चर्चा करेंगे। यात्रा के अंतिम चरण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इटली जाएंगे और यहां प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी से मुलाकात करेंगे।

    विदेश मंत्रालय के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा रक्षा, सुरक्षा, नवाचार, हरित हाइड्रोजन, सेमीकंडक्टर और जल पर रणनीतिक साझेदारी सहित विभिन्न क्षेत्रों में उच्च स्तरीय बैठकों और घनिष्ठ सहयोग की गति को और मजबूत करेगी। मंत्रालय ने कहा कि उनकी यह यात्रा बहुआयामी साझेदारी को और गहरा और विस्तारित करने का अवसर प्रदान करेगी। अपनी वार्ता में दोनों पक्ष हरित परिवर्तन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), उभरती प्रौद्योगिकियों, स्टार्टअप, सुदृढ़ आपूर्ति श्रृंखलाओं, रक्षा, अंतरिक्ष, लोगों का लोगों से संबंध और जलवायु परिवर्तन जैसे क्षेत्रों में द्विपक्षीय संबंधों को बढ़ावा देने पर ध्यान केंद्रित करेंगे।

  • Cannes Queen’ ऐश्वर्या राय ब्रांड वीडियो से गायब, फैंस भड़के – आलिया भट्ट की मौजूदगी पर चर्चा तेज

    Cannes Queen’ ऐश्वर्या राय ब्रांड वीडियो से गायब, फैंस भड़के – आलिया भट्ट की मौजूदगी पर चर्चा तेज


    नई दिल्ली  कान्स फिल्म फेस्टिवल हमेशा से भारत के लिए खास रहा है और इसमें ऐश्वर्या राय बच्चन को ‘कान्स क्वीन’ कहा जाता है। साल 2004 से वह लगातार लोरियल पेरिस की ग्लोबल एंबेसडर के रूप में रेड कार्पेट पर अपनी मौजूदगी दर्ज कराती रही हैं। लेकिन इस बार फेस्टिवल से पहले ब्रांड द्वारा जारी एक प्रमोशनल वीडियो में उनकी गैरमौजूदगी ने फैंस को हैरान कर दिया है।

    वीडियो में आलिया भट्ट की मौजूदगी, ऐश्वर्या गायब
    इंस्टाग्राम पर शेयर किए गए इस वीडियो में कान्स के मशहूर मार्टिनेज होटल की झलक दिखाई गई, जहां ब्रांड से जुड़ी कई इंटरनेशनल और भारतीय सेलिब्रिटीज के पोस्टर नजर आए। इनमें आलिया भट्ट का पोस्टर भी शामिल था।
    हालांकि, लंबे समय से कान्स की पहचान बन चुकी ऐश्वर्या राय बच्चन का कोई पोस्टर या जिक्र नहीं दिखा, जिससे फैंस काफी निराश हो गए।

    सोशल मीडिया पर फैंस का गुस्स
    वीडियो सामने आते ही सोशल मीडिया पर फैंस ने तीखी प्रतिक्रिया दी। कई यूजर्स ने सवाल उठाए कि ऐश्वर्या राय को क्यों शामिल नहीं किया गया। एक यूजर ने लिखा कि “ऐश्वर्या को कोई रिप्लेस नहीं कर सकता।”
    दूसरे ने पूछा “कान्स की असली क्वीन कहां हैं? वहीं कई फैंस ने ब्रांड पर भारत में ऐश्वर्या की लोकप्रियता को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया।

     ऐश्वर्या राय और कान्स का पुराना रिश्ता
    ऐश्वर्या राय बच्चन लंबे समय से कान्स रेड कार्पेट की सबसे चर्चित भारतीय चेहरों में से एक रही हैं। उनके लुक्स, गाउन स्टाइल और बोल्ड मेकअप हर साल सोशल मीडिया पर वायरल होते रहे हैं। उनकी उपस्थिति को अक्सर भारत की ग्लोबल फैशन पहचान से जोड़ा जाता है।

     ब्रांड की चुप्पी बनी चर्चा का विष
    अब तक लोरियल पेरिस की ओर से इस विवाद पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। इसी वजह से फैंस की नाराजगी और सवाल और बढ़ते जा रहे हैं।

    कान्स फिल्म फेस्टिवल 2026 से पहले यह विवाद सोशल मीडिया पर तेजी से चर्चा में है। जहां एक तरफ आलिया भट्ट की मौजूदगी को लेकर चर्चा हो रही है, वहीं दूसरी तरफ ऐश्वर्या राय बच्चन की गैरमौजूदगी ने फैंस को निराश कर दिया है।

  • ब्रिक्स बैठक में होर्मुज स्ट्रेट भारतीय जहाजों की सुरक्षित आवाजाही पर चर्चा करेंगे भारत और ईरान

    ब्रिक्स बैठक में होर्मुज स्ट्रेट भारतीय जहाजों की सुरक्षित आवाजाही पर चर्चा करेंगे भारत और ईरान


    नई दिल्ली।
    भारत और ईरान (India and Iran) इस सप्ताह नई दिल्ली (New Delhi) में हो रहे ब्रिक्स शेरपा (BRICS Sherpa) और विदेश मंत्रियों की बैठक के दौरान होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) में भारतीय जहाजों की सुरक्षित आवाजाही पर चर्चा करेंगे। रिपोर्ट के अनुसार, फरवरी के अंत में शुरू हुए अमेरिका-इजरायल युद्ध के बाद से भारतीय टैंकरों को इस रास्ते से गुजरने में भारी दिक्कतें आ रही हैं। द्विपक्षीय वार्ताएं अब तक पूरी तरह सफल नहीं हुई हैं, जिसके चलते भारत अब ब्रिक्स मंच का उपयोग करके मुद्दे का समाधान निकालने की कोशिश कर रहा है। इस स्ट्रेट से भारत का लगभग 40 प्रतिशत कच्चा तेल और 90 प्रतिशत एलपीजी आयात होता है।

    फिलहाल 13 भारतीय जहाज अभी भी फंसे हुए हैं, जबकि 11 जहाजों को कूटनीतिक प्रयासों से निकाला जा चुका है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने पुष्टि की कि ईरानी अधिकारियों से लगातार संपर्क बनाए रखा जा रहा है। इस संकट के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार बुरी तरह प्रभावित हुआ है। ब्रेंट क्रूड का भाव 105 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है, जबकि डब्ल्यूटीआई 100 डॉलर के करीब है।


    भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए गंभीर स्थिति

    सऊदी अरामको के सीईओ अमीन नासिर ने चेतावनी दी है कि अगर हार्मुज से शिपिंग कुछ हफ्तों से ज्यादा समय तक बाधित रही तो बाजार 2027 तक सामान्य नहीं होंगे। भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए यह स्थिति बेहद गंभीर है। ब्रिक्स बैठक में ईरान के उप विदेश मंत्री भाग लेंगे, जो विदेश मंत्रियों की बैठक में भी प्रतिनिधित्व कर सकते हैं अगर विदेश मंत्री सेय्यद अब्बास अरागची नहीं पहुंच पाए। यह बैठक इसलिए भी अहम है क्योंकि युद्ध शुरू होने के बाद पहली बार ईरान और UAE के उप विदेश मंत्री एक ही मंच पर होंगे, जहां पश्चिम एशिया के मुद्दे पर सहमति बनाने की कोशिश की जाएगी।

    ट्रंप प्रशासन और ईरान के बीच शांति वार्ता भी विफल हो गई है। ट्रंप ने ईरान के प्रस्ताव को पूरी तरह अस्वीकार कर दिया है। ईरान ने कुछ यूरेनियम तीसरे देश को सौंपने की पेशकश की लेकिन परमाणु सुविधाओं को तोड़ने से इनकार कर दिया। इजरायली प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने कहा कि ईरान के परमाणु बुनियादी ढांचे को पूरी तरह समाप्त किए बिना युद्ध समाप्त नहीं होगा। इस बीच पर्सियन गल्फ में जहाजों पर ड्रोन हमले की घटनाएं भी हुई हैं, जिससे शिपिंग कंपनियां और अधिक सतर्क हो गई हैं। भारत इस पूरे संकट में अपने नागरिकों और आर्थिक हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सक्रिय कूटनीति चला रहा है।

  • बंगाल में BJP सरकार का एक्शन.. ममता शासन के कई फैसले पर चली कलम, कई अफसरों को किया बाहर

    बंगाल में BJP सरकार का एक्शन.. ममता शासन के कई फैसले पर चली कलम, कई अफसरों को किया बाहर


    कोलकाता।
    पश्चिम बंगाल (West Bengal) में सत्ता परिवर्तन के तुरंत बाद नई बीजेपी सरकार (New BJP Government) ने तेज और आक्रामक शुरुआत की है. मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी (Chief Minister Shubhendu Adhikari) की पहली कैबिनेट बैठक में ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) शासनकाल के कई फैसलों पर CM अधिकारी की कलम तेजी से चली. ममता सरकार द्वारा नियुक्त कई रिटायर्ड IAS-IPS अधिकारियों को सरकारी दफ्तरों से बाहर करने का फैसला लिया गया, जबकि पुरानी नीतियों को पलटते हुए नई दिशा दी गई।

    एक अहम फैसले में अधिकारी सरकार ने BSF को बांग्लादेश सीमा पर बाड़ लगाने के लिए 600 एकड़ जमीन तुरंत ट्रांसफर करने का फैसला किया है. इसके अलावा सरकार ने जनगणना शुरू करने, ममता काल की IAS-IPS ट्रेनिंग नीति को बदलने और भारतीय न्याय संहिता (BNS) को तुरंत लागू करने जैसे बड़े फैसले लिए।

    नए CM शुभेंदु अधिकारी ने साफ संदेश दिया कि अफसरों को ‘येस मैन’ बनने की जरूरत नहीं है और वहीं करें जो ‘राष्ट्र और राज्य हित’ के लिए सर्वोपरि हो. दरअसल ममता राज के ‘मोहरों’ पर चल रही CM अधिकारी की कलम अब बदलाव की नई इबारत लिख रही है।

    मुख्यमंत्री अधिकारी ने कहा कि पश्चिम बंगाल में सुशासन, सुरक्षा और डबल इंजन सरकार का नया सफर देश भर के दूसरे BJP शासित राज्यों में चले विकास के उसी रास्ते पर आगे बढ़ेगा।


    बंगाल सरकार ने सोमवार को पहली कैबिनेट में क्या क्या फैसले लिए.

    1. बंगाल में आयुष्मान भारत योजना लागू की जाएगी. इसके साथ ही कई अन्य केंद्रीय कल्याणकारी परियोजनाएं भी इसमें शामिल होंगी. जैसे पीएम जन आरोग्य योजना, किसानों के लिए फसल बीमा देने वाली पीएम फसल बीमा योजना, सरकारी स्कूलों को अपग्रेड करने के लिए पीएम स्कूल्स फॉर राइजिंग इंडिया (पीएम एसएचआरआई) योजना, कारीगरों और शिल्पकारों की मदद करने वाली पीएम विश्वकर्मा योजना, महिलाओं की शिक्षा और सशक्तीकरण के लिए बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना और सब्सिडी वाले रसोई गैस कनेक्शन के लिए उज्ज्वला 3.0 योजना. ममता बनर्जी ने इन योजनाओं को राज्य में लागू नहीं किया था।

    2. आज से बीएनएस (भारतीय न्याय संहिता) लागू हो जाएगा. सीएम ने आरोप लगाया कि पिछली सरकार ने संविधान का उल्लंघन करते हुए बीएनएस लागू नहीं किया था. आईपीसी और सीआरपीसी पर ही काम हो रहा था।

    3. भारत-बांग्लादेश सीमा पर बाड़ लगाने के लिए केंद्र को जमीन का ट्रांसफर प्रोसेस तुरंत शुरू होगा. कैबिनेट ने चीफ सेक्रेटरी और राज्य के लैंड और लैंड रेवेन्यू डिपार्टमेंट के सेक्रेटरी को अगले 45 दिनों के अंदर प्रोसेस पूरा करने का अधिकार दिया है.”

    4. बीजेपी के जिन 321 कार्यकर्ताओं ने बंगाल में जान गंवाई, उनके परिवारों की पूरी जिम्मेदारी सरकार लेगी. बीजेपी का दावा है कि बंगाल में ममता सरकार के दौरान उसके 300 से ज्यादा कार्यकर्ताओं की राजनीतिक हिंसा में हत्या हुई।

    5.पश्चिम बंगाल सरकार ने राज्य सरकार के अधीन गैर-सांविधिक निकायों, बोर्डों, संगठनों और सार्वजनिक उपक्रमों में नियुक्त सभी मनोनीत सदस्यों, निदेशकों और अध्यक्षों के कार्यकाल को तत्काल प्रभाव से समाप्त करने का निर्देश जारी किया. इसके साथ ही राज्य सरकार ने 60 वर्ष की सामान्य सेवानिवृत्ति आयु के बाद एक्सटेंशन या री-अपॉइंटमेंट पर कार्यरत अधिकारियों और कर्मचारियों की सेवाएं भी तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दिया है।

    6. विधानसभा चुनाव के दौरान पश्चिम बंगाल के चीफ इलेक्टोरल ऑफिसर रहे मनोज अग्रवाल को शुभेंदु अधिकारी की BJP सरकार में राज्य का नया चीफ सेक्रेटरी बनाया गया है. सोमवार को जारी एक ऑफिशियल ऑर्डर के मुताबिक वर्तमान चीफ सेक्रेटरी दुष्यंत नरियाला को नई दिल्ली में प्रिंसिपल रेजिडेंट कमिश्नर नियुक्त किया गया है. इसके अलावा एडमिनिस्ट्रेटिव सुधारों के तहत, राज्य के IAS अधिकारी अब दूसरे राज्यों की तरह केंद्र सरकार के ट्रेनिंग प्रोग्राम में हिस्सा लेंगे।

    7. पश्चिम बंगाल सरकार ने 1 जून से बसों में महिलाओं के लिए फ्री बस सेवा की शुरुआत की है. ये बीजेपी के चुनावी वादे का हिस्सा था।

    8. CM शुभेंदु ने सरकारी नौकरी की परीक्षाओं में बैठने वाले उम्मीदवारों के लिए ऊपरी उम्र सीमा में पांच साल की छूट की घोषणा की है. इस घोषणा से अब जनरल कैटेगरी के आवेदकों को मौजूदा उम्र सीमा 40 से 45 साल तक की छूट मिलेगी, और SC, ST और OBC कैटेगरी के लोग मौजूदा उम्र सीमा 43 से 48 साल तक नौकरियों के लिए अप्लाई कर सकेंगे।

    9. अधिकारी सरकार ने पश्चिम बंगाल में तुरंत जनगणना शुरू करने का फैसला किया है. मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछली सरकार जनगणना प्रक्रिया के बारे में केंद्रीय गृह मंत्रालय के 16 जून, 2025 के निर्देश को लागू करने में नाकाम रही थी. मौजूदा सरकार ने पेंडिंग एडमिनिस्ट्रेटिव सर्कुलर को तुरंत लागू कर दिया है।

    10. सीएम शुभेंदु अधिकारी ने कहा है कि उनकी सरकार ममता शासन की किसी भी योजना को बंद नहीं करेगी. हालांकि मुख्यमंत्री ने कहा कि हम उन लोगों की पहचान करेंगे और उन्हें हटाएंगे जो इस देश के लोगों के लिए बनी वेलफेयर मदद पाने के हकदार नहीं हैं, जैसे मरे हुए लोग और गैर-भारतीय।

    सीएम अधिकारी ने कहा कि यह सरकार घमंड पर नहीं चलेगी, बल्कि यह सरकार सिद्धांतों पर चलेगी. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “डर बाहर, भरोसा अंदर” के संदेश का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि नई सरकार पश्चिम बंगाल के लोगों की सुरक्षा, भरोसा और विकास पक्का करने के लिए पूरी तरह तैयार है।

  • पश्चिम बंगाल में नई सरकार का कामकाज शुरू…. CM शुभेंदु ने मंत्रियों को बांटे विभाग

    पश्चिम बंगाल में नई सरकार का कामकाज शुरू…. CM शुभेंदु ने मंत्रियों को बांटे विभाग


    कोलकाता।
    पश्चिम बंगाल (West Bengal) विधानसभा चुनाव (Assembly Elections) में प्रचंड जीत के बाद नई बीजेपी सरकार (New BJP government) ने राज्य में प्रशासनिक कामकाज को तेजी से पटरी पर लाने की कोशिश शुरू कर दी है. मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी (Chief Minister Shubhendu Adhikari) ने भी सोमवार को मंत्रियों के बीच विभागों का बंटवारा कर दिया. गृह, वित्त और कर्मचारियों ​अधिकारियों की ट्रांसफर पोस्टिंग से जुड़े कार्मिक जैसे महत्वपूर्ण विभाग मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने अपने पास रखे हैं।


    दिलीप घोष:

    बीजेपी के वरिष्ठ नेता और खड़गपुर सदर से विधायक दिलीप घोष को ग्रामीण विकास, पंचायती राज और पशु संसाधन विभाग की जिम्मेदारी सौंपी गई है. यह विभाग राज्य में ग्रामीण प्रशासन और जमीनी योजनाओं के क्रियान्वयन के लिहाज से बेहद अहम माना जाता है।


    अशोक कीर्तनिया:

    बनगांव उत्तर के विधायक अशोक कीर्तनिया को खाद्य विभाग का प्रभार दिया गया है. पश्चिम बंगाल की राजनीति में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) का बड़ा महत्व रहा है, ऐसे में यह विभाग भी काफी अहम माना जा रहा है. यह विभाग राज्य भर में पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम के जरिए खाद्य सामग्री के वितरण और कल्याणकारी योजनाओं के कार्यान्वयन की देखरेख करेगा।


    खुदिराम टुडू:

    रानीबांध विधायक खुदिराम टुडू को पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग सौंपा गया है. इसे आदिवासी और पिछड़े वर्गों के बीच बीजेपी की पकड़ मजबूत करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है. यह मंत्रालय पूरे बंगाल में पिछड़े समुदायों के लिए कल्याणकारी योजनाओं, छात्रवृत्तियों और सामाजिक विकास कार्यक्रमों पर ध्यान केंद्रित करता है.


    अग्निमित्रा पॉल:

    आसनसोल उत्तर की विधायक और पार्टी में प्रमुख महिला चेहरा अग्निमित्रा पॉल को महिला एवं बाल विकास विभाग और नगर विकास विभाग की जिम्मेदारी सौंपी गई है. वह शुभेंदु कैबिनेट की इकलौती महिला मंत्री हैं. महिलाओं के लिए कल्याणकारी कार्यक्रमों के संचालन और महिला सुरक्षा के पहलों को बढ़ावा देने के अलावा शहरों के इंफ्रास्ट्रक्चर में सुधार के लिहाज से अग्निमित्रा को मिले दोनों विभाग भाजपा सरकार के लिए काफी महत्वपूर्ण हैं.


    निशीथ प्रमाणिक:

    माथाभांगा विधायक निशीथ प्रमाणिक को खेल और युवा कल्याण के साथ-साथ उत्तर बंगाल के विकास का प्रभार दिया गया है. यह पोर्टफोलियो महत्वपूर्ण है क्योंकि हालिया चुनाव में भी भाजपा ने उत्तरी बंगाल में अपना मजबूत आधार बनाए रखा और उसका लक्ष्य इस क्षेत्र में अपनी उपस्थिति को और मजबूत करना है.


    मंत्रिमंडल के जरिए साधा समीकरण

    नई कैबिनेट में शामिल नेताओं का चयन राजनीतिक और सामाजिक समीकरणों को ध्यान में रखकर किया गया है. दिलीप घोष लंबे समय तक पश्चिम बंगाल बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष रहे और राज्य में पार्टी का संगठन खड़ा करने में उनकी अहम भूमिका रही.

    अग्निमित्रा पॉल को कैबिनेट में जगह देकर बीजेपी महिला वोटरों को साधने की कोशिश कर रही है, जबकि खुदीराम टुडू और अशोक कीर्तनिया के जरिए आदिवासी और मतुआ समुदाय तक पहुंच मजबूत करने की रणनीति दिखाई दे रही है. वहीं निशीथ प्रमाणिक के जरिए बीजेपी ने मंत्रिमंडल में युवा प्रतिनिधित्व को जगह दी है.


    चुनाव में बीजेपी की ऐतिहासिक जीत

    बंगाल विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने 294 में से 207 सीटें जीतकर ऐतिहासिक जीत दर्ज की, जबकि ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस 80 सीटों पर सिमट गई. इस प्रचंड बहुमत ने नई सरकार को बिना किसी गठबंधन दबाव के अपनी नीतियां लागू करने की ताकत दी है.


    पहली कैबिनेट बैठक में 5 बड़े फैसले

    नई सरकार ने मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की अध्यक्षता में हुई पहली कैबिनेट बैठक में ही कई केंद्रीय योजनाओं को राज्य में लागू करने का ऐलान किया. इनमें आयुष्मान भारत, पीएम जन आरोग्य योजना, पीएम श्री, विश्वकर्मा योजना, बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ और उज्ज्वला योजना शामिल हैं.

    शुभेंदु सरकार ने बंगाल में भारतीय न्याय संहिता (BNS) लागू करने, सरकारी नौकरियों की अधिकतम आयु सीमा में 5 साल की बढ़ोतरी और आईएएस अधिकारियों को केंद्र सरकार के ट्रेनिंग प्रोग्राम में शामिल करने जैसे प्रशासनिक सुधारों से जुड़े फैसले लिए हैं.


    सुशासन और पारदर्शिता पर रहेगा जोर

    कैबिनेट बैठक के बाद मीडिया से बातचीत में मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कहा है कि उनकी सरकार ‘सुशासन और पारदर्शिता’ को प्राथमिकता देगी. उन्होंने यह भी भरोसा दिलाया कि पिछली सरकार के दौरान शुरू की गईं कल्याणकारी योजनाएं जारी रहेंगी, लेकिन लाभार्थियों का सत्यापन सख्ती से किया जाएगा ताकि किसी तरह की गड़बड़ी न हो. मुख्यमंत्री ने बांग्लादेश सीमा से लगे जिलों में बीएसएफ को फेंसिंग के लिए लैंड ट्रांसफर की प्रक्रिया को भी 45 दिनों के भीतर पूरा करने का निर्देश अधिकारियों को दिया।

  • मिनी गोवा का एहसास अब उत्तर प्रदेश में, गढ़मुक्तेश्वर बना नया हॉलिडे स्पॉट

    मिनी गोवा का एहसास अब उत्तर प्रदेश में, गढ़मुक्तेश्वर बना नया हॉलिडे स्पॉट


    नई दिल्ली। अगर आप हर बार गोवा या मनाली घूमने का सपना देखते हैं, लेकिन समय और बजट की कमी आड़े आ जाती है, तो अब परेशान होने की जरूरत नहीं है। उत्तर प्रदेश के हापुड़ जिले में स्थित गढ़मुक्तेश्वर इन दिनों लोगों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। इसे अब लोग प्यार से “यूपी का मिनी गोवा” कहने लगे हैं। दिल्ली-एनसीआर से कुछ ही घंटों की दूरी पर मौजूद यह जगह वीकेंड ट्रिप के लिए परफेक्ट बनती जा रही है। यहां पहुंचते ही गंगा किनारे फैली रेत और शांत बहता पानी लोगों को किसी बीच का एहसास कराता है।

     रेत, पानी और सुकून – बीच जैसा अनुभव
    गढ़मुक्तेश्वर में गंगा नदी के किनारे फैली सफेद रेत और ठंडी हवा पर्यटकों को आकर्षित करती है। खासकर शाम के समय यहां का नजारा बेहद खूबसूरत हो जाता है। लोग घंटों बैठकर पानी को निहारते हैं, फोटो-वीडियो बनाते हैं और नाव की सवारी का आनंद लेते हैं। यही वजह है कि सोशल मीडिया पर यहां की तस्वीरें और रील्स तेजी से वायरल हो रही हैं।

     दिल्ली-एनसीआर वालों के लिए परफेक्ट वीकेंड स्पॉट
    दिल्ली, नोएडा और गाजियाबाद से यहां आना बेहद आसान है। कम दूरी और कम खर्च की वजह से यह जगह युवाओं और फैमिली ट्रैवलर्स दोनों की पसंद बनती जा रही है। लोग सुबह निकलकर शाम तक वापस लौट आते हैं, जिससे यह एक “क्विक गेटवे” के रूप में मशहूर हो रहा है।

     धार्मिक महत्व भी है खास
    गढ़मुक्तेश्वर सिर्फ घूमने की जगह नहीं है, बल्कि इसका धार्मिक महत्व भी गहरा है। यहां स्थित गंगा घाट और प्राचीन मंदिर श्रद्धालुओं के लिए आस्था का केंद्र हैं। रोजाना बड़ी संख्या में लोग गंगा स्नान और पूजा के लिए यहां पहुंचते हैं।
    शाम की गंगा आरती यहां का सबसे आकर्षक दृश्य होता है, जहां दीपों की रोशनी और घंटियों की आवाज माहौल को दिव्य बना देती है।

    सोशल मीडिया ने बढ़ाई लोकप्रियता
    इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर वायरल हो रहे वीडियो ने गढ़मुक्तेश्वर को नई पहचान दी है। ट्रैवल ब्लॉगर्स इसे “Hidden Beach” और “Mini Goa” जैसे नामों से प्रमोट कर रहे हैं। बारिश के मौसम में यहां का नजारा और भी ज्यादा आकर्षक हो जाता है।

     मेले और त्योहारों में लगता है विशाल मेला
    कार्तिक पूर्णिमा और गंगा मेले के दौरान यहां लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं। उस समय पूरा इलाका रोशनी, भीड़ और आस्था से भर जाता है। घाटों पर अलग ही उत्सव जैसा माहौल देखने को मिलता है।

     कम बजट में बेहतरीन अनुभव
    आज के समय में जहां ट्रिप्स महंगे होते जा रहे हैं, वहीं गढ़मुक्तेश्वर कम बजट में शानदार अनुभव देता है। शांति, प्रकृति और धार्मिकता का यह मिश्रण इसे उत्तर भारत का उभरता हुआ टूरिस्ट स्पॉट बना रहा है।

    अगर आप भी गोवा जैसी बीच वाली फीलिंग चाहते हैं, तो गढ़मुक्तेश्वर आपके लिए एक बेहतरीन विकल्प हो सकता है। दिल्ली के पास ही मौजूद यह जगह अब धीरे-धीरे एक पॉपुलर वीकेंड डेस्टिनेशन बन चुकी है।

  • बच्चों के दिल तक पहुंचने का आसान तरीका, पैरेंट्स अपनाएं ये 5 खास बातें, रिश्ते में बढ़ेगा भरोसा और अपनापन

    बच्चों के दिल तक पहुंचने का आसान तरीका, पैरेंट्स अपनाएं ये 5 खास बातें, रिश्ते में बढ़ेगा भरोसा और अपनापन

    नई दिल्ली । आज की तेज़ रफ्तार जिंदगी में बच्चों और माता-पिता के बीच भावनात्मक दूरी बढ़ना एक आम समस्या बनती जा रही है। पढ़ाई का दबाव, मोबाइल और डिजिटल दुनिया में बढ़ता समय, साथ ही व्यस्त दिनचर्या के कारण कई बच्चे अपने मन की बातें खुलकर नहीं कह पाते। धीरे-धीरे यह दूरी रिश्तों में खामोशी और गलतफहमियां पैदा करने लगती है। ऐसे में जरूरी हो जाता है कि पैरेंट्स अपने बच्चों के साथ ऐसा रिश्ता बनाएं, जहां वे बिना डर और झिझक अपनी हर भावना साझा कर सकें।

    विशेषज्ञों के अनुसार, बच्चों के साथ मजबूत रिश्ता बनाने की शुरुआत उनकी बातों को ध्यान से सुनने से होती है। अक्सर माता-पिता बच्चों की बात पूरी सुने बिना ही प्रतिक्रिया देने लगते हैं, जिससे बच्चे खुद को अनदेखा महसूस करते हैं। अगर बच्चे को यह एहसास हो कि उसकी बातों को गंभीरता से सुना जा रहा है, तो उसका भरोसा धीरे-धीरे मजबूत होने लगता है।

    इसके अलावा बच्चों के साथ व्यवहार करते समय बहुत ज्यादा सख्ती या हर बात पर आलोचना करने से बचना चाहिए। जब बच्चे को लगता है कि उसकी हर गलती पर उसे डांटा जाएगा, तब वह अपनी बातें छिपाने लगता है। ऐसे समय में जरूरत होती है समझदारी और धैर्य की, ताकि बच्चा खुलकर अपनी परेशानियां बता सके।

    पैरेंट्स और बच्चों के रिश्ते को मजबूत बनाने में साथ बिताया गया समय भी बेहद अहम माना जाता है। दिनभर की व्यस्तता के बीच अगर माता-पिता कुछ समय सिर्फ बच्चों के लिए निकालें, उनके साथ खेलें, बातचीत करें या छोटी-छोटी गतिविधियों में शामिल हों, तो इससे भावनात्मक जुड़ाव काफी बढ़ता है। बच्चे ऐसे समय को बेहद खास मानते हैं और इससे उनका आत्मविश्वास भी मजबूत होता है।

    विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि बच्चों के साथ दोस्त जैसा रिश्ता बनाना जरूरी है। जब बच्चा अपने माता-पिता को केवल अनुशासन सिखाने वाला नहीं बल्कि भरोसेमंद साथी मानने लगता है, तब वह अपने मन की बातें आसानी से साझा करता है। इससे बच्चे के अंदर सुरक्षा और अपनापन दोनों की भावना विकसित होती है।

    बच्चों की भावनाओं को समझना और उन्हें महत्व देना भी एक मजबूत रिश्ते की सबसे जरूरी कड़ी है। कई बार बच्चों की छोटी-छोटी बातें बड़ों को मामूली लग सकती हैं, लेकिन वही बातें उनके लिए बहुत महत्वपूर्ण होती हैं। ऐसे में उनकी भावनाओं को नजरअंदाज करने के बजाय उन्हें समझना और सपोर्ट करना बेहद जरूरी होता है।

  • MP: भोपाल में पुलिस ने अपने ही विभाग के कांस्टेबल और एक FRV ड्राइवर को रिश्वत लेते दबोचा

    MP: भोपाल में पुलिस ने अपने ही विभाग के कांस्टेबल और एक FRV ड्राइवर को रिश्वत लेते दबोचा


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) की राजधानी में भ्रष्टाचार के खिलाफ एक दुर्लभ मामला सामने आया है, जिसमें आरोपी और कार्रवाई करने वाली टीम, दोनों एक ही विभाग के हैं. पुलिस विभाग (Police Department.) के भीतर ही चले इस ‘क्लीनअप ऑपरेशन’ (‘Cleanup Operation’) में एक कांस्टेबल और एक FRV ड्राइवर को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया गया है।

    पूरा मामला एक मकान मालिक और किरायेदार के बीच चल रहे आपसी विवाद से शुरू हुआ था. आरोप है कि जब फरियादी किरायेदार मदद के लिए पुलिस के पास पहुंचा, तो कोहेफिजा थाने में तैनात कांस्टेबल यशपाल तोमर ने उसके पक्ष में कार्रवाई करने के बदले 50 हजार रुपये की मांग की।


    कमिश्नर तक पहुंची बात

    किरायेदार ने इस भ्रष्टाचार की शिकायत सीधे पुलिस कमिश्नर से कर दी. मामले की गंभीरता को देखते हुए कमिश्नर ने तत्काल जांच और कार्रवाई के आदेश दिए. कमिश्नर के निर्देश पर एसीपी अनिल वाजपेयी के नेतृत्व में एक विशेष टीम गठित की गई. टीम ने योजनाबद्ध तरीके से जाल बिछाया: जैसे ही कांस्टेबल और एफआरवी ड्राइवर ने रिश्वत की राशि स्वीकार की, एसीपी की टीम ने उन्हें मौके पर ही दबोच लिया।


    कोहेफिजा थाना अब जांच के दायरे में

    इस घटना ने पूरे थाने की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं. कमिश्नर के सख्त रुख के बाद अब कोहेफिजा थाने के अन्य पुलिसकर्मियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है. यह देखा जा रहा है कि क्या इस वसूली रैकेट में अन्य सीनियर या जूनियर अधिकारी भी शामिल थे।