Author: bharati

  • क्रेडिट कार्ड से कैश निकालना क्यों है महंगा सौदा? जानिए पूरी डिटेल

    क्रेडिट कार्ड से कैश निकालना क्यों है महंगा सौदा? जानिए पूरी डिटेल


    नई दिल्ली । आज के समय में क्रेडिट कार्ड लोगों की वित्तीय जरूरतों का एक अहम हिस्सा बन चुका है। यह “अभी खरीदें, बाद में भुगतान करें” की सुविधा देकर उपभोक्ताओं को राहत देता है, लेकिन इसी सुविधा के बीच एक ऐसा विकल्प भी मौजूद है जो कई बार आर्थिक रूप से भारी पड़ सकता है क्रेडिट कार्ड से कैश निकासी।

    विशेषज्ञों के अनुसार, क्रेडिट कार्ड से एटीएम के जरिए नकद निकालना सबसे महंगा वित्तीय निर्णयों में से एक हो सकता है। जहां कार्ड से सामान्य खरीदारी पर 45 से 50 दिनों का ब्याज-मुक्त समय मिलता है, वहीं कैश विड्रॉल पर यह सुविधा लागू नहीं होती। जैसे ही ग्राहक एटीएम से पैसे निकालता है, उसी दिन से ब्याज लगना शुरू हो जाता है, जो सालाना 36% से 48% तक पहुंच सकता है।

    इसके अलावा, हर बार नकद निकासी पर कैश एडवांस फीस भी देनी होती है, जो आमतौर पर निकाली गई राशि का 2.5% से 3% तक होती है। कई बैंकों में यह न्यूनतम 300 से 500 रुपये तक भी हो सकती है। ऐसे में छोटी रकम निकालना भी महंगा साबित हो जाता है।

    हाल ही में सामने आए आंकड़ों के अनुसार, लोग आपात स्थिति में क्रेडिट कार्ड से कैश निकालने की प्रवृत्ति दिखा रहे हैं, लेकिन यह आदत लंबे समय में आर्थिक दबाव बढ़ा सकती है। फरवरी 2026 में भी करोड़ों रुपये की नकद निकासी दर्ज की गई, जो इस सुविधा के बढ़ते उपयोग को दर्शाती है।

    वित्तीय विशेषज्ञों का मानना है कि क्रेडिट कार्ड से कैश निकालना बैंक की नजर में वित्तीय संकट का संकेत माना जाता है। इससे व्यक्ति का क्रेडिट व्यवहार नकारात्मक रूप से प्रभावित होता है और आगे चलकर CIBIL Score गिर सकता है, जिससे होम लोन, कार लोन या अन्य ऋण लेना कठिन हो सकता है।

    इसका सीधा असर व्यक्ति की आर्थिक विश्वसनीयता पर पड़ता है। जब बैंक यह देखते हैं कि कोई ग्राहक बार-बार क्रेडिट कार्ड से नकद निकाल रहा है, तो वे उसे उच्च जोखिम वाला उधारकर्ता मान सकते हैं।

    विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि आपात स्थिति में क्रेडिट कार्ड कैश विड्रॉल की बजाय अन्य विकल्पों पर ध्यान देना चाहिए। जैसे कि Emergency Fund का उपयोग, जो 3 से 6 महीने के खर्च के बराबर होना चाहिए। इसके अलावा Personal Loan भी एक बेहतर विकल्प माना जाता है क्योंकि इसकी ब्याज दर अपेक्षाकृत कम होती है। छोटे खर्चों के लिए “बाय नाउ पे लेटर” जैसी सुविधाएं भी उपयोगी हो सकती हैं, लेकिन इनका भी जिम्मेदारी से उपयोग जरूरी है।

    कुल मिलाकर, क्रेडिट कार्ड से कैश निकालना सुविधा जरूर देता है, लेकिन इसके पीछे छिपी लागत और जोखिम इसे एक महंगा सौदा बना देते हैं। समझदारी इसी में है कि इस विकल्प का उपयोग केवल अत्यंत आपात स्थिति में ही किया जाए, ताकि वित्तीय स्थिरता बनी रहे और बजट पर अनावश्यक दबाव न पड़े।

  • दिल्ली–मेरठ एक्सप्रेसवे पर फिर मौत का तांडव: तेज रफ्तार बाइक ट्रक से टकराई, दो युवाओं की दर्दनाक मौत

    दिल्ली–मेरठ एक्सप्रेसवे पर फिर मौत का तांडव: तेज रफ्तार बाइक ट्रक से टकराई, दो युवाओं की दर्दनाक मौत



    नई दिल्ली। गाजियाबाद में दिल्ली–मेरठ एक्सप्रेसवे (Delhi–Meerut Expressway) पर एक बार फिर रफ्तार ने दो युवाओं की जान ले ली। यह दर्दनाक हादसा भोजपुर इलाके के पास हुआ, जहां तेज रफ्तार बाइक आगे चल रहे ट्रक से टकरा गई और दोनों युवकों की मौके पर ही मौत हो गई।

    जानकारी के अनुसार, दीपू (18) और सागर (18) बाइक से दिल्ली से गाजियाबाद की ओर जा रहे थे। बाइक सागर चला रहा था और दीपू पीछे बैठा था। जैसे ही दोनों भोजपुर के पास पहुंचे, अचानक आगे चल रहे ट्रक ने ब्रेक लगा दिया। तेज रफ्तार में होने के कारण बाइक ट्रक से जा टकराई और दोनों सड़क पर गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गए।

    हादसे के बाद मौके पर पहुंची पेट्रोलिंग टीम ने दोनों को तुरंत अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। पुलिस के अनुसार, सागर ने हेलमेट पहना था जबकि दीपू बिना हेलमेट था, जिससे चोट और गंभीर हो गई।

    टक्कर इतनी भीषण थी कि ट्रक चालक मौके से वाहन लेकर फरार हो गया। पुलिस अब ट्रक की पहचान के लिए एक्सप्रेसवे पर लगे CCTV फुटेज की जांच कर रही है।

    सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि बाइक पर प्रतिबंध होने के बावजूद दोनों युवक करीब 30 किलोमीटर तक एक्सप्रेसवे पर कैसे पहुंच गए और किसी भी चेकिंग पॉइंट पर उन्हें रोका क्यों नहीं गया। इससे सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी सिस्टम पर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

    हादसे के बाद दोनों परिवारों में कोहराम मच गया है और पूरे इलाके में शोक का माहौल है। स्थानीय लोग लगातार हो रहे ऐसे हादसों को लेकर प्रशासन से सख्त निगरानी और कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

    कुल मिलाकर यह घटना एक बार फिर दिखाती है कि नियमों की अनदेखी और तेज रफ्तार किस तरह जानलेवा साबित हो सकती है, खासकर हाई-स्पीड एक्सप्रेसवे पर जहां छोटी सी गलती भी बड़ा हादसा बन जाती है।

  • ताजमहल में अब तय होगी पर्यटकों की सीमा, भीड़ नियंत्रण के लिए IIT दिल्ली ने शुरू किया सर्वे

    ताजमहल में अब तय होगी पर्यटकों की सीमा, भीड़ नियंत्रण के लिए IIT दिल्ली ने शुरू किया सर्वे

    आगरा । विश्व प्रसिद्ध ताजमहल में लगातार बढ़ रही पर्यटकों की संख्या को देखते हुए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) अब भीड़ नियंत्रण की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रहा है। सेंट्रल एंपावर्ड कमेटी (CEC) की सिफारिश पर ताजमहल, आगरा किला और फतेहपुर सीकरी की ‘केयरिंग कैपेसिटी’ तय की जाएगी। यानी यह निर्धारित किया जाएगा कि एक समय में इन स्मारकों में कितने पर्यटक सुरक्षित और व्यवस्थित तरीके से मौजूद रह सकते हैं। इस प्रक्रिया की शुरुआत ताजमहल से की गई है और इसके लिए आईआईटी दिल्ली को जिम्मेदारी सौंपी गई है। हाल ही में IIT दिल्ली की तीन सदस्यीय टीम ने ताजमहल पहुंचकर विस्तृत सर्वे किया।

    टिकट से लेकर एंट्री तक हर व्यवस्था का अध्ययन
    टीम ने पूर्वी गेट की टिकट विंडो से लेकर मुख्य मकबरे तक का निरीक्षण किया। इस दौरान टिकट लेने में लगने वाला समय, सुरक्षा जांच, टिकट स्कैनिंग और भीड़ के समय पर्यटकों की आवाजाही का आकलन किया गया। रॉयल गेट, चमेली फर्श, प्रवेश और निकास मार्गों सहित पूरे परिसर की व्यवस्थाओं का भी बारीकी से अध्ययन किया गया। करीब ढाई घंटे तक चली इस जांच के दौरान भीड़ प्रबंधन के हर पहलू पर जानकारी जुटाई गई। IIT टीम ने ASI के उत्तरी जोन के रीजनल डायरेक्टर वसंत कुमार स्वर्णकार से भी चर्चा की। उनके कार्यकाल में मुख्य मकबरे पर भीड़ कम करने के लिए 200 रुपये का अतिरिक्त टिकट लागू किया गया था।

    सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद बढ़ी कवायद
    ताजमहल संरक्षण को लेकर यह कदम सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद तेज हुआ है। इससे पहले पर्यटन विभाग ने स्कूल ऑफ प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर, दिल्ली से एक विजन डॉक्यूमेंट तैयार कराया था, जिसे 2018-19 में सुप्रीम कोर्ट में प्रस्तुत किया गया था। बाद में कोर्ट ने इस मामले में CEC से रिपोर्ट मांगी थी। नवंबर 2025 में सौंपी गई रिपोर्ट में ताजमहल और अन्य स्मारकों पर बढ़ती भीड़ को लेकर चिंता जताई गई थी। रिपोर्ट में सुझाव दिया गया कि वैज्ञानिक तरीके से पर्यटकों की संख्या सीमित की जाए।

    पहले भी मिल चुकी हैं सिफारिशें
    साल 2015 में नेशनल एनवायरमेंटल इंजीनियरिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट (NEERI) ने भी ताजमहल पर अध्ययन करते हुए सुझाव दिया था कि एक समय में अधिकतम 9 हजार पर्यटक ही परिसर में मौजूद रहें, जबकि प्रति घंटे 6 हजार लोगों को प्रवेश दिया जाए। इसके अलावा गेट पर डिजिटल डिस्प्ले बोर्ड लगाने और “स्टेप टिकटिंग सिस्टम” लागू करने की भी सिफारिश की गई थी।

    संरक्षण और बेहतर अनुभव पर फोकस
    अब ASI पहले चरण में ताजमहल की केयरिंग कैपेसिटी तय करेगा। इसके बाद आगरा किला और फतेहपुर सीकरी में भी इसी तरह की व्यवस्था लागू की जाएगी। माना जा रहा है कि इससे ऐतिहासिक धरोहरों का संरक्षण बेहतर होगा और पर्यटकों को भी अधिक सुरक्षित व व्यवस्थित अनुभव मिलेगा।

  • योगी कैबिनेट विस्तार के बाद BJP के भीतर उठे असंतोष के स्वर, आशा मौर्य और बृजभूषण ने जताई नाराजगी

    योगी कैबिनेट विस्तार के बाद BJP के भीतर उठे असंतोष के स्वर, आशा मौर्य और बृजभूषण ने जताई नाराजगी

    लखनऊ। उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले योगी सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार ने सियासी हलचल तेज कर दी है। रविवार को हुए कैबिनेट विस्तार में 2 कैबिनेट मंत्री और 4 नए राज्य मंत्रियों को शामिल किया गया, जबकि दो राज्य मंत्रियों को प्रमोट कर स्वतंत्र प्रभार दिया गया। हालांकि विस्तार के तुरंत बाद भाजपा के भीतर नाराजगी के स्वर भी खुलकर सामने आने लगे हैं। राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने राजभवन की बजाय जन भवन में आयोजित समारोह में सभी नए मंत्रियों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई।

    पश्चिमी यूपी और ब्राह्मण समीकरण पर फोकस
    पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और जाट नेता भूपेंद्र चौधरी को कैबिनेट मंत्री बनाया गया है। इसे पश्चिमी उत्तर प्रदेश में जाट वोट बैंक को मजबूत करने की रणनीति माना जा रहा है। वहीं रायबरेली की ऊंचाहार सीट से विधायक और समाजवादी पार्टी से भाजपा में आए मनोज पांडे को भी कैबिनेट में जगह मिली है। ब्राह्मण चेहरे के तौर पर उनकी एंट्री को अहम माना जा रहा है। मनोज पांडे पहले अखिलेश यादव सरकार में भी मंत्री रह चुके हैं।

    इन मंत्रियों को मिला प्रमोशन
    राज्य मंत्री अजीत पाल सिंह और सोमेंद्र तोमर को बेहतर प्रदर्शन के आधार पर स्वतंत्र प्रभार देकर पदोन्नत किया गया है।

    चार नए चेहरों को मौका
    योगी सरकार में चार नए राज्य मंत्रियों को शामिल किया गया है। कृष्णा पासवान, जो फतेहपुर की खागा सीट से चार बार विधायक रह चुकी हैं, दलित-पासी समाज का प्रतिनिधित्व करती हैं। अलीगढ़ के खैर से विधायक सुरेंद्र दिलेर को भी मंत्री बनाया गया है। वे वाल्मीकि समाज से आते हैं और राजनीतिक परिवार से जुड़े हैं। वाराणसी में लंबे समय तक भाजपा संगठन में सक्रिय रहे हंसराज विश्वकर्मा को OBC चेहरे के रूप में शामिल किया गया। कन्नौज की तिरवा सीट से विधायक कैलाश राजपूत को भी मंत्रिमंडल में जगह मिली है।

    BJP के भीतर असंतोष के स्वर
    मंत्रिमंडल विस्तार के बाद पार्टी के भीतर नाराजगी भी सामने आई है। सीतापुर के महमूदाबाद से विधायक आशा मौर्य का नाम मंत्री पद के लिए चर्चा में था, लेकिन अंतिम सूची में जगह नहीं मिलने पर उन्होंने सोशल मीडिया पर नाराजगी जाहिर की। उन्होंने लिखा कि ऐसा लग रहा है जैसे पार्टी को अब मौर्य समाज की जरूरत नहीं रह गई और दलबदल कर आने वालों को प्राथमिकता दी जा रही है।

    बृजभूषण शरण सिंह का तंज
    पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने भी सोशल मीडिया पर शायराना अंदाज में अपनी नाराजगी जाहिर की। माना जा रहा है कि वे अपने बेटे प्रतीक भूषण के लिए मंत्री पद की उम्मीद कर रहे थे। किसी ठाकुर चेहरे को जगह न मिलने पर उन्होंने लिखा –
    “शोहरत की बुलंदी भी पल भर का तमाशा है,
    जिस शाख पर बैठे हो वह टूट भी सकती है।”

    अब सभी 60 मंत्री पद भर गए
    91वें संविधान संशोधन के तहत उत्तर प्रदेश में अधिकतम 60 मंत्री बनाए जा सकते हैं। इस विस्तार के बाद योगी सरकार में मंत्रियों की कुल संख्या 60 हो गई है। इनमें 23 कैबिनेट मंत्री, 16 स्वतंत्र प्रभार राज्य मंत्री और 21 राज्य मंत्री शामिल हैं।

    जातीय और राजनीतिक समीकरण
    वर्तमान मंत्रिमंडल में अब 22 सवर्ण, 25 OBC, 11 दलित, 1 मुस्लिम और 1 सिख मंत्री शामिल हैं। विधानसभा में भाजपा के 257 विधायक हैं, जबकि समाजवादी पार्टी के पास 102 विधायक हैं। इसके अलावा सहयोगी दलों और अन्य पार्टियों के भी सदस्य सदन में मौजूद हैं।

  • अर्बन कंपनी के नतीजों में भारी गिरावट: 161 करोड़ के घाटे ने जीवों को चौंकाया, बढ़ने के बावजूद बढ़ी चिंता

    अर्बन कंपनी के नतीजों में भारी गिरावट: 161 करोड़ के घाटे ने जीवों को चौंकाया, बढ़ने के बावजूद बढ़ी चिंता

    नई दिल्ली
    घर-घर में ब्यूटी, मेंटेनेंस और प्रोफेशनल सर्विसेज उपलब्ध कराने वाली प्रमुख डिजिटल प्लेटफॉर्म कंपनी Urban Company ने मार्च 2026 तिमाही में जहां मजबूत रेवेन्यू ग्रोथ दर्ज की, वहीं भारी घाटे ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। कंपनी के ताजा वित्तीय नतीजों के बाद शेयर बाजार में इसका सीधा असर देखने को मिला और इसके शेयरों में करीब 10 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई। यह गिरावट तब आई जब बाजार पहले से ही कंपनी के प्रदर्शन पर नजर बनाए हुए था, लेकिन बढ़ते नुकसान ने उम्मीदों पर पानी फेर दिया।

    कंपनी के मुताबिक मार्च तिमाही में उसका कंसोलिडेटेड नेट लॉस बढ़कर 161 करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जो पिछले वर्ष इसी अवधि में केवल 2.8 करोड़ रुपये था। यह बढ़ोतरी निवेशकों के लिए बड़ा झटका साबित हुई क्योंकि घाटा कई गुना बढ़ चुका है। इतना ही नहीं, पिछली तिमाही की तुलना में भी नुकसान में तेज उछाल देखा गया, जिससे यह सवाल और गहरा हो गया है कि क्या कंपनी का तेज विस्तार मॉडल लंबे समय में टिकाऊ साबित हो पाएगा या नहीं।

    हालांकि दूसरी ओर कंपनी के बिजनेस ग्रोथ के आंकड़े मजबूत दिखाई दे रहे हैं। मार्च तिमाही में ऑपरेशंस से रेवेन्यू 43 प्रतिशत बढ़कर 426 करोड़ रुपये पर पहुंच गया, जो पिछले वर्ष इसी अवधि में 298 करोड़ रुपये था। यह वृद्धि दर्शाती है कि कंपनी का ग्राहक आधार लगातार बढ़ रहा है और सेवाओं की मांग मजबूत बनी हुई है। नेट ट्रांजैक्टिंग वैल्यू में भी 42 प्रतिशत की सालाना वृद्धि दर्ज की गई, जो 1,148 करोड़ रुपये तक पहुंच गई और पिछले कई तिमाहियों में सबसे उच्च स्तर पर रही।

    इसके बावजूद खर्चों में तेज बढ़ोतरी ने लाभ की राह को प्रभावित किया है। तकनीकी विस्तार, नए बाजारों में प्रवेश, मार्केटिंग और प्लेटफॉर्म डेवलपमेंट पर भारी निवेश के कारण लागत लगातार बढ़ती जा रही है। इसी वजह से कंपनी का एडजस्टेड EBITDA लॉस 98 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। हालांकि कंपनी ने यह भी बताया कि यदि InstaHelp बिजनेस को अलग रखा जाए तो एडजस्टेड EBITDA सकारात्मक क्षेत्र में दिखाई देता है, जो कुछ हद तक राहत की बात मानी जा सकती है।

    InstaHelp सेगमेंट ने इस तिमाही में तेज रफ्तार ग्रोथ दिखाई है, जहां ऑर्डर और रेवेन्यू दोनों में बड़ी बढ़ोतरी दर्ज की गई। वहीं कंपनी का अंतरराष्ट्रीय कारोबार भी UAE और सिंगापुर जैसे बाजारों में मजबूत प्रदर्शन कर रहा है, जिससे भविष्य की संभावनाओं को बल मिलता है।

    पूरे वित्त वर्ष 2026 में भी कंपनी ने 31 प्रतिशत की NTV ग्रोथ और 36 प्रतिशत की रेवेन्यू वृद्धि दर्ज की है, जो यह संकेत देता है कि बिजनेस विस्तार जारी है। हालांकि बाजार की सबसे बड़ी चिंता अभी भी यही बनी हुई है कि क्या यह तेज ग्रोथ आने वाले समय में मुनाफे में बदल पाएगी या बढ़ते खर्च और घाटे के बीच निवेशकों का भरोसा और कमजोर होगा।

  • गर्मी में नींबू पानी से राहत या परेशानी? जानें क्यों कुछ लोगों को होती है पेट फूलने की समस्या

    गर्मी में नींबू पानी से राहत या परेशानी? जानें क्यों कुछ लोगों को होती है पेट फूलने की समस्या


    नई दिल्ली ।  गर्मी के मौसम में नींबू पानी को एक प्राकृतिक और ताजगी देने वाला पेय माना जाता है। यह शरीर को हाइड्रेट रखने के साथ-साथ विटामिन C की पूर्ति भी करता है। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि हर व्यक्ति के शरीर पर इसका प्रभाव एक जैसा नहीं होता और कुछ लोगों को इसके सेवन के बाद सूजन या पेट फूलने जैसी समस्या का अनुभव हो सकता है।

    चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, नींबू पानी में मौजूद साइट्रिक एसिड कुछ संवेदनशील लोगों के पाचन तंत्र को प्रभावित कर सकता है। जिन लोगों को पहले से गैस, एसिडिटी या इरिटेबल बाउल सिंड्रोम जैसी समस्या होती है, उनमें नींबू पानी के सेवन से पेट में भारीपन, गैस और ब्लोटिंग यानी सूजन की शिकायत बढ़ सकती है।

    हालांकि, सामान्य परिस्थितियों में नींबू पानी शरीर के लिए काफी लाभकारी माना जाता है। यह शरीर से विषैले तत्वों को बाहर निकालने, पाचन सुधारने और गर्मी में थकान कम करने में मदद करता है। लेकिन इसका अत्यधिक या गलत समय पर सेवन नुकसान भी पहुंचा सकता है।

    विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि नींबू पानी हमेशा संतुलित मात्रा में और हल्के गुनगुने या सामान्य तापमान के पानी में लिया जाना चाहिए। बहुत अधिक खट्टा या चीनी युक्त नींबू पानी भी शरीर में असंतुलन पैदा कर सकता है, जिससे सूजन जैसी समस्या उत्पन्न हो सकती है।

    इसके अलावा, खाली पेट अत्यधिक नींबू पानी का सेवन कुछ लोगों में एसिडिटी को बढ़ा सकता है, जो आगे चलकर पेट में सूजन और असहजता का कारण बनता है। इसलिए इसे हमेशा समझदारी और संतुलन के साथ लेना चाहिए।

    डॉक्टरों का मानना है कि यदि किसी व्यक्ति को नींबू पानी पीने के बाद बार-बार सूजन या पेट दर्द की समस्या हो रही है, तो उसे इसका सेवन कम कर देना चाहिए या चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए।

    कुल मिलाकर, नींबू पानी गर्मी में एक बेहतरीन पेय है, लेकिन इसका असर व्यक्ति की शारीरिक स्थिति पर निर्भर करता है। सही मात्रा और सही तरीके से सेवन करने पर यह लाभकारी है, जबकि असंतुलित सेवन सूजन जैसी परेशानी का कारण बन सकता है।

  • अमरोहा में खून के रिश्तों का काला सच: नशे से परेशान परिवार ने ही कर दी बेटे की 5 लाख की सुपारी देकर हत्या

    अमरोहा में खून के रिश्तों का काला सच: नशे से परेशान परिवार ने ही कर दी बेटे की 5 लाख की सुपारी देकर हत्या



    नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश के अमरोहा जिले में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहां एक परिवार पर अपने ही 35 वर्षीय बेटे की हत्या की साजिश रचने का आरोप लगा है। मामला डिडौली कोतवाली क्षेत्र के शमपुर गांव, अमरोहा का है, जहां सूखी गंगनहर में युवक दुष्यंत का शव मिलने से पूरे इलाके में सनसनी फैल गई।

    पुलिस जांच में सामने आया कि दुष्यंत लंबे समय से नशे का आदी था और आए दिन घर में विवाद और मारपीट करता था। इसी से परेशान होकर कथित तौर पर उसके परिवार ने उसे रास्ते से हटाने की साजिश रची। आरोप है कि इस साजिश में छोटे भाई संकित ने अपने दोस्त के साथ मिलकर हत्या की योजना बनाई और वारदात को अंजाम दिया।

    जानकारी के अनुसार, हत्या के लिए लगभग 5 लाख रुपये की सुपारी देने की बात भी सामने आई है। आरोप है कि दुष्यंत को ईंट से सिर पर वार कर गंभीर रूप से घायल किया गया और फिर उसके शव को गंगनहर में फेंक दिया गया, जिससे उसकी मौत हो गई।

    घटना के अगले दिन शव मिलने के बाद गांव में हड़कंप मच गया। मृतक के सिर पर कई गंभीर चोटों के निशान पाए गए, जिससे हत्या की पुष्टि और मजबूत हो गई। पुलिस ने जांच शुरू की और जब परिवार से पूछताछ की गई तो मामला संदिग्ध लगा।

    एसपी के अनुसार, जांच में यह भी सामने आया कि मृतक का आपराधिक इतिहास रहा है और वह पहले भी चोरी और मारपीट जैसे मामलों में जेल जा चुका था। पूछताछ के बाद परिवार के कुछ सदस्यों ने अपराध में संलिप्तता की बात स्वीकार की है, जिसके बाद पुलिस ने आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है।

    कुल मिलाकर यह मामला नशे, पारिवारिक तनाव और अपराध की ऐसी दर्दनाक कहानी बन गया है, जिसने पूरे इलाके को हिला कर रख दिया है।

  • शिवपुरी में बड़ा घोटाला: 71 लाख की मशीन बनी 4.32 करोड़ का बोझ, EOW की सर्जिकल स्ट्राइक जारी

    शिवपुरी में बड़ा घोटाला: 71 लाख की मशीन बनी 4.32 करोड़ का बोझ, EOW की सर्जिकल स्ट्राइक जारी


    नई दिल्ली। शिवपुरी नगर पालिका में वर्ष 2015 के दौरान की गई स्वच्छता मशीनों की खरीद अब गंभीर सवालों के घेरे में आ गई है। उस समय लगभग 71.69 लाख रुपये की मशीनें खरीदी गई थीं लेकिन नियमों को दरकिनार कर पूरी प्रक्रिया को अंजाम दिया गया। आरोप है कि ऑनलाइन निविदा प्रक्रिया को अनदेखा करते हुए एक ही दिन में सभी कार्यादेश जारी कर दिए गए और भुगतान भी तत्काल कर दिया गया। इस पूरे मामले में एक निजी फर्म को अनुचित लाभ पहुंचाने की बात सामने आई है। जांच में यह भी पता चला है कि जिन आठ मशीनों का भुगतान किया गया उनमें से चार मशीनें नगर पालिका को कभी प्राप्त ही नहीं हुईं।

    दूसरा भाग करोड़ों की रिकवरी और कानूनी पेच
    मामला आगे बढ़ते हुए एमएसएमई काउंसिल तक पहुंचा जहां मूल राशि पर भारी ब्याज जोड़ते हुए कुल 4.32 करोड़ रुपये की रिकवरी तय की गई है। यह राशि मूल खरीद से कई गुना अधिक हो चुकी है जिससे नगर पालिका पर बड़ा वित्तीय बोझ खड़ा हो गया है। दूसरी ओर संबंधित कंपनी ने हाई कोर्ट में नगर पालिका के खिलाफ अवमानना याचिकाएं दायर कर दी हैं जिससे मामला और उलझ गया है। आगामी 11 मई 2026 को इस प्रकरण की महत्वपूर्ण सुनवाई तय की गई है। नगर पालिका प्रशासन का कहना है कि यह पूरा मामला फर्जी दस्तावेजों और गलत आदेशों के आधार पर किया गया भुगतान है जिससे संस्था को भारी नुकसान हुआ है।

    तीसरा भाग ईओडब्ल्यू की जांच और संभावित एफआईआर
    इस पूरे प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ ग्वालियर ने जांच शुरू कर दी है। ईओडब्ल्यू ने नगर पालिका से संबंधित सभी दस्तावेज तलब कर लिए हैं और अधिकारियों की भूमिका की गहन जांच की जा रही है। प्रारंभिक जांच में तत्कालीन मुख्य नगर पालिका अधिकारी सहित स्वास्थ्य विभाग और स्टोर शाखा से जुड़े अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठे हैं। एजेंसी जल्द ही एफआईआर दर्ज करने की प्रक्रिया आगे बढ़ा सकती है। वर्तमान प्रशासन का मानना है कि यह एक सुनियोजित वित्तीय अनियमितता का मामला है जिसमें जनता के धन का दुरुपयोग हुआ है। अब यह पूरा मामला न केवल प्रशासनिक स्तर पर बल्कि कानूनी रूप से भी बड़ा रूप ले चुका है और आने वाले समय में कई और खुलासे संभव हैं।

    तीसरा भाग ईओडब्ल्यू की जांच और संभावित एफआईआर

    इस पूरे प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ ग्वालियर ने जांच शुरू कर दी है। ईओडब्ल्यू ने नगर पालिका से संबंधित सभी दस्तावेज तलब कर लिए हैं और अधिकारियों की भूमिका की गहन जांच की जा रही है। प्रारंभिक जांच में तत्कालीन मुख्य नगर पालिका अधिकारी सहित स्वास्थ्य विभाग और स्टोर शाखा से जुड़े अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठे हैं। एजेंसी जल्द ही एफआईआर दर्ज करने की प्रक्रिया आगे बढ़ा सकती है। वर्तमान प्रशासन का मानना है कि यह एक सुनियोजित वित्तीय अनियमितता का मामला है जिसमें जनता के धन का दुरुपयोग हुआ है। अब यह पूरा मामला न केवल प्रशासनिक स्तर पर बल्कि कानूनी रूप से भी बड़ा रूप ले चुका है और आने वाले समय में कई और खुलासे संभव हैं।
  • गिरते Smallcap बाजार में भी चमक रही हैं ये 15 मजबूत कंपनियां, VST, Medicare और UNO Minda में दिख रहा 38% तक का अपसाइड, निवेशकों के लिए बड़ा संकेत

    गिरते Smallcap बाजार में भी चमक रही हैं ये 15 मजबूत कंपनियां, VST, Medicare और UNO Minda में दिख रहा 38% तक का अपसाइड, निवेशकों के लिए बड़ा संकेत

    नई दिल्ली ।
    बाजार में लगातार उतार-चढ़ाव का माहौल बना हुआ है और ऐसे समय में छोटे शेयरों यानी Smallcap सेगमेंट पर सबसे ज्यादा दबाव देखने को मिलता है। जब भी बाजार में गिरावट आती है, निवेशकों के बीच यह डर बढ़ जाता है कि छोटे शेयर कमजोर हो सकते हैं या उनका बिजनेस प्रभावित हो सकता है। लेकिन हर गिरता हुआ स्टॉक कमजोर कंपनी का संकेत नहीं होता। कई बार पूरा सेक्टर या बाजार का सेंटीमेंट दबाव में आ जाता है, जबकि कंपनी का असली बिजनेस और उसकी बुनियाद पहले जैसी मजबूत बनी रहती है। यही वजह है कि निवेशकों के लिए सिर्फ कीमत नहीं, बल्कि कंपनी की क्वालिटी और मैनेजमेंट को समझना ज्यादा जरूरी हो जाता है।

    वर्तमान स्थिति में कुछ Smallcap और Midcap कंपनियां ऐसी हैं जो गिरते बाजार के बावजूद अपने मजबूत प्रदर्शन और स्थिर मैनेजमेंट के कारण चर्चा में बनी हुई हैं। इनमें कई ऐसी कंपनियां शामिल हैं जिनका बिजनेस मॉडल मजबूत है और जिनके भविष्य में बेहतर प्रदर्शन की संभावना मानी जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि बाजार में मौजूदा दबाव का असर इन कंपनियों की लंबी अवधि की ग्रोथ पर नहीं पड़ता, बल्कि यह निवेश के नए अवसर भी पैदा कर सकता है।

    VST Industries, Rainbow Children’s Medicare और UNO Minda जैसी कंपनियों को बाजार में मजबूत स्थिति वाली कंपनियों के रूप में देखा जा रहा है। इन कंपनियों के बिजनेस मॉडल स्थिर हैं और इनके मैनेजमेंट को भी अनुभवी माना जाता है। इसी वजह से इन पर निवेशकों की नजर बनी हुई है। अनुमान लगाया जा रहा है कि आने वाले समय में इनमें करीब 38 प्रतिशत तक की तेजी देखने को मिल सकती है, हालांकि यह पूरी तरह बाजार की स्थिति और कंपनी के प्रदर्शन पर निर्भर करेगा।

    पिछले कुछ समय से बाजार लगातार उतार-चढ़ाव के दौर से गुजर रहा है। वैश्विक अनिश्चितता, कच्चे तेल की कीमतों में बदलाव और अंतरराष्ट्रीय तनाव जैसे कारणों ने निवेशकों की चिंता को और बढ़ा दिया है। इसका सीधा असर शेयर बाजार के छोटे और मध्यम वर्ग के शेयरों पर देखने को मिला है, जहां अक्सर तेज गिरावट दर्ज की जाती है।

    इसके बावजूद कुछ कंपनियां ऐसी हैं जो अपने मजबूत बिजनेस स्ट्रक्चर के कारण बाजार के दबाव को बेहतर तरीके से संभाल रही हैं। JSW Infra और APL Apollo Tubes जैसी कंपनियां भी इसी श्रेणी में आती हैं, जो अपने सेक्टर में मजबूत पकड़ बनाए हुए हैं। इन कंपनियों की खासियत यह है कि इनके पास लंबे समय का विजन और स्थिर मैनेजमेंट टीम मौजूद है, जो कठिन परिस्थितियों में भी बिजनेस को संभालने की क्षमता रखती है।

    निवेश विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे समय में निवेशकों को केवल गिरते शेयर देखकर घबराना नहीं चाहिए, बल्कि कंपनी के फंडामेंटल्स को समझकर निर्णय लेना चाहिए। बाजार में अस्थिरता हमेशा अवसर भी लेकर आती है, और जो निवेशक सही कंपनियों की पहचान कर लेते हैं, उन्हें लंबे समय में बेहतर रिटर्न मिलने की संभावना रहती है।

    कुल मिलाकर, मौजूदा बाजार स्थिति यह संकेत देती है कि हर गिरता हुआ Smallcap कमजोर नहीं होता। कुछ कंपनियां ऐसी होती हैं जो गिरावट के बावजूद अपनी मजबूती बनाए रखती हैं और भविष्य में बेहतर प्रदर्शन करने की क्षमता रखती हैं। ऐसे में निवेशकों के लिए जरूरी है कि वे सतर्कता के साथ सही कंपनियों का चयन करें और केवल डर के आधार पर निर्णय न लें।

  • योगी का मास्टरस्ट्रोक: कैबिनेट विस्तार से PDA पर वार, 2027 चुनाव से पहले बदला पूरा सियासी गेम!

    योगी का मास्टरस्ट्रोक: कैबिनेट विस्तार से PDA पर वार, 2027 चुनाव से पहले बदला पूरा सियासी गेम!



    नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश की राजनीति में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कैबिनेट विस्तार के जरिए एक बार फिर बड़ा राजनीतिक संदेश दिया है। इस विस्तार को 2027 विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी की सोशल इंजीनियरिंग रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है, जिसका सीधा टारगेट समाजवादी पार्टी के PDA फॉर्मूला (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) को कमजोर करना माना जा रहा है।

    रिपोर्ट्स के अनुसार नए मंत्रिमंडल में 6 नए चेहरों को शामिल किया गया है, जिसमें तीन OBC, दो दलित और एक ब्राह्मण नेता को जगह दी गई है। इसके साथ ही कुछ नेताओं को प्रमोशन भी दिया गया है, जिससे यह साफ संकेत मिलता है कि बीजेपी जातीय और क्षेत्रीय संतुलन साधकर अपने वोट बैंक को मजबूत करने की कोशिश कर रही है।

    इस विस्तार में खास ध्यान उन समुदायों पर दिया गया है, जो लोकसभा चुनावों के दौरान बीजेपी से कुछ हद तक दूर माने जा रहे थे। पश्चिमी और पूर्वी उत्तर प्रदेश के अलग-अलग जातीय समूहों को प्रतिनिधित्व देकर पार्टी ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि हर वर्ग को सरकार में हिस्सेदारी दी जा रही है।

    विशेष रूप से ओबीसी और दलित समुदाय के छोटे-छोटे जातीय समूहों को शामिल कर बीजेपी ने अपनी “सोशल इंजीनियरिंग” को और मजबूत किया है। वहीं एक ब्राह्मण नेता को शामिल कर उच्च जातियों के संतुलन को भी बनाए रखने की कोशिश की गई है।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम सिर्फ प्रशासनिक नहीं बल्कि पूरी तरह चुनावी रणनीति है, जिसका उद्देश्य 2027 से पहले सपा के PDA फॉर्मूला नैरेटिव को कमजोर करना है।

    हालांकि, विपक्ष का कहना है कि यह बदलाव चुनावी फायदा लेने की कोशिश है, जबकि बीजेपी का दावा है कि यह सामाजिक प्रतिनिधित्व और विकास आधारित प्रशासन का हिस्सा है।

    कुल मिलाकर यह कैबिनेट विस्तार उत्तर प्रदेश की राजनीति में आने वाले समय के लिए एक बड़ा संकेत माना जा रहा है, जहां जातीय समीकरण और वोट बैंक की राजनीति एक बार फिर निर्णायक भूमिका निभाने वाली है।