Author: bharati

  • उत्तराखंड 99 क्विंटल राशन खराब होने के मामले में सरकार ने गठित की जांच कमेटी कोर्ट ने 18 फरवरी तक रिपोर्ट देने का दिया आदेश

    उत्तराखंड 99 क्विंटल राशन खराब होने के मामले में सरकार ने गठित की जांच कमेटी कोर्ट ने 18 फरवरी तक रिपोर्ट देने का दिया आदेश


    नई दिल्ली । उत्तराखंड हाई कोर्ट ने ऊधम सिंह नगर में 2021 में 99 क्विंटल अनाज के खराब होने के मामले में राज्य सरकार को तीन सदस्यीय जांच समिति गठित करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने रिपोर्ट 18 फरवरी तक पेश करने का आदेश दिया है। याचिका में दोषियों से नुकसान की वसूली की मांग की गई थी। उत्तराखंड में राशन घोटाले पर हाई कोर्ट का हस्तक्षेप सरकार ने जांच कमेटी गठित की उत्तराखंड के ऊधम सिंह नगर जिले में 2021 में सस्ता गल्ला वितरण के दौरान 99 क्विंटल से अधिक अनाज के खराब होने के मामले पर अब उच्च न्यायालय ने कड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है।
    इस मामले में राज्य सरकार ने तीन सदस्यीय जांच कमेटी गठित करने का निर्णय लिया है। इस मामले में हाई कोर्ट ने सुनवाई के दौरान सरकार से इस घोटाले की जांच के लिए समिति गठित करने को कहा था जिसके बाद सरकार ने यह कदम उठाया। अब राज्य सरकार को इस जांच कमेटी से रिपोर्ट 18 फरवरी से पहले पेश करने का निर्देश दिया गया है।

    99 क्विंटल राशन का हुआ था नुकसान

    2021 में ऊधम सिंह नगर जिले में सस्ता गल्ला योजना के तहत वितरित होने वाला 99 क्विंटल से अधिक अनाज रखरखाव के अभाव में खराब हो गया था। इस मामले में जिलाधिकारी ने दोषियों से नुकसान की वसूली का आदेश दिया था। हालांकि खाद्य आयुक्त ने इस आदेश को माफ कर दिया था जिसे लेकर हरिद्वार निवासी अभिजीत ने जनहित याचिका दायर की थी। याचिका में आरोप लगाया गया कि यह घोटाला एक गंभीर मामला है और इसका सही तरीके से जांच होनी चाहिए। याचिका में कोर्ट से यह भी मांग की गई कि दोषियों से नुकसान की वसूली की जाए और कड़ी कार्रवाई की जाए।

    सरकार ने गठित की तीन सदस्यीय जांच कमेटी

    उत्तराखंड सरकार ने अब इस मामले की गंभीरता को देखते हुए तीन सदस्यीय जांच कमेटी गठित की है जो इस मामले की जांच करेगी। कोर्ट ने राज्य सरकार से 18 फरवरी तक जांच रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है।राज्य सरकार की तरफ से यह रिपोर्ट दायर की गई कि इस जांच कमेटी में राज्य के तीन वरिष्ठ अधिकारियों को शामिल किया गया है जो मामले की पूरी जांच करेंगे और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश करेंगे।

    जनता की प्रतिक्रिया

    इस मामले को लेकर आम जनता में असंतोष देखा जा रहा है। लोग यह मानते हैं कि सस्ता गल्ला योजना के तहत जो अनाज गरीबों को मिलना था वह खराब हो गया और प्रशासन ने इस मामले में बहुत ही लापरवाही दिखाई। अब जनता का यह कहना है कि दोषियों पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए और वसूली के आदेश को लागू किया जाए। उत्तराखंड सरकार को उम्मीद है कि जांच कमेटी की रिपोर्ट से इस घोटाले का सच सामने आएगा और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

  • भोपाल में घना कोहरा और कड़ाके की ठंड: 20 जिलों में स्कूल बंद, भोपाल में समय बदला

    भोपाल में घना कोहरा और कड़ाके की ठंड: 20 जिलों में स्कूल बंद, भोपाल में समय बदला


    नई दिल्ली। राजधानी भोपाल में पिछले तीन दिनों से घना कोहरा और कड़ाके की ठंड का असर देखने को मिल रहा है। सोमवार सुबह 6 से 8 बजे के बीच विजिबिलिटी 20 से 50 मीटर तक ही रही, यानी कोहरा इतना घना था कि 20 मीटर दूर भी देख पाना मुश्किल था। इसी बीच, नन्हें बच्चे ठिठुरते हुए स्कूल पहुंचे। सुबह के समय स्कूल वैन और बसों द्वारा बच्चों को लेने के दौरान हादसे का खतरा भी बना रहा।
    कड़ाके की ठंड और घने कोहरे की वजह से प्रदेश के 20 जिलों में स्कूलों में छुट्टी घोषित कर दी गई है। भोपाल ऐसा जिला है, जहां नर्सरी से आठवीं तक की कक्षाओं की शुरुआत समय बदलकर सुबह 9.30 बजे कर दी गई, जबकि उच्च कक्षाओं (9वीं से 12वीं) के छात्रों को सामान्य समय पर स्कूल आना पड़ा।

    भोपाल में विशेष व्यवस्था
    भोपाल में नर्सरी से 8वीं तक के स्कूल सोमवार से सुबह 9.30 बजे खुलेंगे। इसके पहले जिला शिक्षा अधिकारी नरेंद्र अहिरवार ने आदेश जारी किया था।

    छोटे बच्चों के लिए टाइमिंग बढ़ाने का मकसद उन्हें ठिठुरते हुए स्कूल जाने से बचाना है। लेकिन 9वीं से 12वीं के छात्रों को घने कोहरे के बीच स्कूल पहुंचना पड़ा।

    अभिभावक मयंक लिमये ने कहा, पूरे प्रदेश में तेज सर्दी और कोहरा छाया हुआ है। कई जिलों में स्कूल बंद किए गए हैं, लेकिन भोपाल में बच्चों को ठंड और कोहरे में स्कूल भेजा गया। यह असुरक्षा का सवाल है।

    हादसे का डर
    सुबह के समय घना कोहरा रहने के कारण स्कूल वैन और बसें घर से बच्चों को लेने गईं।

    अभिभावकों का डर है कि कोहरे में वाहन दुर्घटना हो सकती है। उनका कहना है कि जब तक विजिबिलिटी सामान्य नहीं होती, स्कूल बंद रखना चाहिए।
    प्रदेश के 20 जिलों में छुट्टी की सूची
    इंदौर: कक्षा 1 से 8 तक, तीन दिन की छुट्टी।
    उज्जैन: नर्सरी से 5वीं तक, एक दिन छुट्टी।
    मंदसौर: नर्सरी से 8वीं तक, दो दिन छुट्टी।
    शाजापुर: नर्सरी से 8वीं तक, 5–6 जनवरी को अवकाश।
    विदिशा: नर्सरी से 5वीं तक, 5–6 जनवरी को अवकाश।
    ग्वालियर: नर्सरी से 8वीं तक, 5–6 जनवरी को छुट्टी, 7 जनवरी से स्कूल।
    अशोकनगर: 5 जनवरी को स्कूल व आंगनबाड़ी बंद।
    रायसेन: नर्सरी से 5वीं तक, 7 जनवरी तक छुट्टी।
    आगर-मालवा: कक्षा 1 से 8 तक, दो दिन अवकाश (आंगनबाड़ी भी बंद)।
    भिंड: नर्सरी से 8वीं तक, दो दिन अवकाश।
    टीकमगढ़: नर्सरी से 8वीं तक, 5–6 जनवरी को छुट्टी।
    हरदा: नर्सरी से 8वीं तक, सोमवार को अवकाश।
    नीमच: नर्सरी से 8वीं तक, 5–6 जनवरी को छुट्टी।
    रतलाम: नर्सरी से 8वीं तक, 5–6 जनवरी दो दिन अवकाश।
    राजगढ़: कक्षा 8वीं तक के स्कूलों में दो दिन अवकाश।
    मंडला: नर्सरी से 8वीं तक, 5–6 जनवरी दो दिन अवकाश, आंगनबाड़ी बंद।
    जबलपुर: नर्सरी से 8वीं तक, 5–6 जनवरी दो दिन अवकाश, आंगनबाड़ी बंद; परीक्षाएं यथावत।
    दमोह: प्री-प्राइमरी से 8वीं तक एक दिन अवकाश, आंगनबाड़ी बंद।
    डिंडौरी: नर्सरी से 5वीं, 5–6 जनवरी दो दिन अवकाश।
    नर्मदापुरम: 6–7 जनवरी कक्षा 8वीं तक छुट्टी।
    भोपाल में घने कोहरे और ठंड के बीच बच्चों की सुरक्षा प्राथमिकता होनी चाहिए। जबकि अन्य जिलों में स्कूल पूरी तरह बंद किए गए हैं, राजधानी में केवल छोटे बच्चों के समय में बदलाव किया गया। अभिभावक और शिक्षक उम्मीद कर रहे हैं कि प्रशासन भविष्य में मौसम की गंभीरता को देखते हुए और भी सावधानी बरते।
  • ग्वालियर व्यापार मेले में आरटीओ टैक्स छूट में देरी कारोबारियों और खरीदारों का उत्साह टूटा

    ग्वालियर व्यापार मेले में आरटीओ टैक्स छूट में देरी कारोबारियों और खरीदारों का उत्साह टूटा


    ग्वालियर । ग्वालियर का ऐतिहासिक व्यापार मेला जिसे शहर की शान कहा जाता है इस बार कुछ अलग ही स्थिति का सामना कर रहा है। मेला तो शुरू हो गया लेकिन ऑटोमोबाइल सेक्टर में उस उत्साह का अभाव है जो हर साल होता था। 25 दिसंबर को केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह द्वारा मेले का भव्य उद्घाटन किया गया था लेकिन इसके बाद भी आरटीओ टैक्स में 50 प्रतिशत की छूट की घोषणा नहीं हो पाई है।उम्मीद थी कि मेले के उद्घाटन के बाद यह छूट तत्काल प्रभाव से लागू हो जाएगी जिससे शोरूम्स पर वाहनों की बिक्री तेज हो जाएगी। लेकिन शासन स्तर पर हो रही देरी के कारण न केवल कारोबारियों बल्कि ग्राहकों का भी उत्साह ठंडा पड़ चुका है।

    पिछली बार की तुलना में देरी जारी

    ग्वालियर व्यापार मेले में आरटीओ टैक्स छूट मिलने में देरी का सिलसिला पिछले तीन वर्षों से जारी है। 2022-23 में आरटीओ टैक्स छूट का नोटिफिकेशन मेले के दो दिन पहले ही आया था लेकिन 2023-24 और 2024-25 के दौरान भी यही स्थिति रही जब छूट मकर संक्रांति के आसपास ही लागू हो पाई।अब जबकि मेला 2025-26 के लिए शुरू हो चुका है और इसे शुरू हुए 10 दिन हो गए हैं फिर भी आरटीओ टैक्स छूट का नोटिफिकेशन जारी नहीं हुआ है। इसका सीधा असर शोरूम्स की बिक्री पर पड़ा है।

    शोरूम्स पर सजी गाड़ियां लेकिन बिक्री ठप

    मेले में इस बार सैकड़ों लोग अपनी पसंदीदा कारों और दोपहिया वाहनों की बुकिंग कर चुके हैं लेकिन सभी लोग आरटीओ टैक्स में छूट का इंतजार कर रहे हैं। बिना टैक्स छूट के अधिकांश लोग गाड़ी की डिलीवरी लेने को तैयार नहीं हैं जिससे शोरूम्स की बिक्री का पहिया पूरी तरह से थम गया है।

    व्यापारी और ग्राहक दोनों की उम्मीदें

    व्यापारियों का कहना है कि उन्हें इस साल बिक्री में अच्छी उम्मीदें थीं क्योंकि पिछले वर्षों की तुलना में इस बार मेले में आटोमोबाइल सेक्टर का आकर्षण ज्यादा था। लेकिन अब तक छूट का नोटिफिकेशन न आने से उनके कारोबार पर गंभीर असर पड़ा है। ग्राहकों का कहना है कि वे छूट के बाद ही गाड़ी की डिलीवरी लेने के लिए तैयार हैं क्योंकि यह उन्हें एक अच्छा लाभ प्रदान करेगा।

    क्या है आरटीओ टैक्स में छूट

    आरटीओ टैक्स में 50 प्रतिशत की छूट से ग्राहकों को अपनी गाड़ी खरीदने में काफी राहत मिलती है। यह छूट ग्वालियर व्यापार मेला में आमतौर पर हर साल दी जाती है लेकिन इस बार शासन स्तर पर देरी के कारण व्यापारियों और ग्राहकों दोनों का भरोसा डगमगा गया है।ग्वालियर व्यापार मेले में टैक्स छूट मिलने के बाद व्यवसायिक गतिविधियां तेज हो जाती हैं और मेले का उत्साह भी दोगुना हो जाता है। लेकिन इस बार की देरी ने इसे प्रभावित किया है और कारोबारियों को अब उम्मीद है कि शीघ्र ही नोटिफिकेशन जारी होगा।

  • इंदौर में गंदा पानी फैलाता है GBS महामारी, जानें इसका इलाज और बचाव के उपाय

    इंदौर में गंदा पानी फैलाता है GBS महामारी, जानें इसका इलाज और बचाव के उपाय


    इंदौर । इंदौर का भागीरथपुरा इलाका इस समय गंभीर स्वास्थ्य संकट का सामना कर रहा है। दूषित पानी के कारण शुरू हुई उल्टी और दस्त की समस्या अब एक खतरनाक न्यूरोलॉजिकल बीमारी गुइलेन-बैरे सिंड्रोम में बदल चुकी है। यह बीमारी चिकित्सा विशेषज्ञों के लिए भी चिंता का कारण बन गई है क्योंकि इसके इलाज में न सिर्फ जटिलता है बल्कि खर्च भी बहुत ज्यादा है।
    इंदौर त्रासदी के आंकड़े
    अब तक इंदौर प्रशासन ने इस बीमारी से 6 मौतों की पुष्टि की है जबकि स्थानीय रिपोर्टों के मुताबिक यह आंकड़ा 16 तक पहुंच चुका है। लगभग 200 लोग इस संक्रमण की चपेट में आ चुके हैं और 150 से ज्यादा मरीजों का इलाज जारी है। इन मरीजों में से कई को वेंटिलेटर सपोर्ट की जरूरत है।
    गुइलेन-बैरे सिंड्रोम GBS क्या है
    चिकित्सकों के मुताबिक गुइलेन-बैरे सिंड्रोम एक गंभीर न्यूरोलॉजिकल स्थिति है जिसमें शरीर का इम्यून सिस्टम अपनी ही नसों पर हमला करता है। इसका कारण दूषित पानी से पेट में संक्रमण होना होता है जिससे शुरुआत में उल्टी-दस्त होते हैं। इसके बाद मरीजों को हाथ-पैर में झुनझुनी सुन्नपन और कमजोरी महसूस होती है और स्थिति गंभीर होने पर पैरालिसिस लकवा और सांस लेने में कठिनाई हो सकती है।यदि समय पर इलाज न मिले तो 10% मामलों में यह बीमारी घातक साबित हो सकती है।

    इलाज और खर्च
    GBS का इलाज बेहद महंगा है। एक इंजेक्शन की कीमत लगभग ₹30000 तक होती है और गंभीर मामलों में इलाज का कुल खर्च ₹10 लाख से ₹15 लाख तक पहुंच सकता है। कई मरीजों को 10 या उससे ज्यादा इंजेक्शन और वेंटिलेटर सपोर्ट की जरूरत होती है। हालांकि राहत की बात यह है कि अगर इलाज समय पर शुरू किया जाए तो 70% मरीज पूरी तरह से ठीक हो सकते हैं।
    प्रशासन की अपील और बचाव के उपाय
    स्वास्थ्य विभाग ने इस बीमारी के फैलने के कारण दूषित पानी को जिम्मेदार ठहराया है। विशेषज्ञों ने स्थानीय लोगों से अपील की है कि वे पानी उबालकर पियें और खाने-पीने की चीजों में स्वच्छता का विशेष ध्यान रखें। इसके अलावा किसी भी व्यक्ति को यदि हाथ-पैर में कमजोरी झुनझुनी या सुन्नपन महसूस हो तो उसे सामान्य कमजोरी न समझते हुए तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
    बचाव के उपाय
    पानी उबालकर पिएं दूषित पानी से बचने के लिए यह सबसे प्रभावी तरीका है।स्वच्छता का ध्यान रखें व्यक्तिगत स्वच्छता और खाने-पीने की चीजों की सफाई पर विशेष ध्यान दें। सावधानी रखें यदि शरीर में कमजोरी या झुनझुनी महसूस हो तो इसे सामान्य न समझें और तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। इस महामारी से बचाव के लिए प्रशासन पूरी कोशिश कर रहा है और स्थानीय लोग भी जल्द ही इससे उबरने के उपायों को अपनाने के लिए तैयार हैं।

  • जम्मू-कश्मीर को लेकर ब्रिटिश सांसद बॉब ब्लैकमैन का बड़ा बयान, PoK समेत पूरा..भारत के साथ होना चाहिए

    जम्मू-कश्मीर को लेकर ब्रिटिश सांसद बॉब ब्लैकमैन का बड़ा बयान, PoK समेत पूरा..भारत के साथ होना चाहिए


    नई दिल्ली। ब्रिटेन के सांसद बॉब ब्लैकमैन ने जम्मू-कश्मीर को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि पूरा जम्मू-कश्मीर, जिसमें पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाला PoK भी शामिल है, भारत का अभिन्न हिस्सा होना चाहिए। ब्लैकमैन ने यह भी स्पष्ट किया कि अनुच्छेद 370 को खत्म करने की उनकी मांग नई नहीं है, बल्कि यह तीन दशक से अधिक पुरानी है। उनका रुख 2019 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार के फैसले से प्रेरित नहीं है, बल्कि 1990 के दशक में कश्मीरी पंडितों के पलायन के बाद से उन्होंने इसे अपनाया था।
    जयपुर के कॉन्स्टिट्यूशनल क्लब में आयोजित एक हाई-टी कार्यक्रम में बोलते हुए ब्लैकमैन ने कहा कि उनका यह दृष्टिकोण 1992 में बन गया था, जब कश्मीरी पंडितों को उनके पैतृक घरों से बाहर निकाल दिया गया था। उन्होंने बताया कि उस समय उन्होंने ब्रिटेन में विस्थापित कश्मीरी पंडितों के साथ हुए अन्याय पर ध्यान आकर्षित करने के लिए कई प्रयास किए थे। ब्लैकमैन ने कहा, “हमने उस समय एक बड़ी बैठक आयोजित की थी ताकि यह बताया जा सके कि धर्म के आधार पर लोगों को उनके घरों से निकालना एक गंभीर अन्याय है।
    मैं हमेशा से मानता आया हूं कि पूरा जम्मू-कश्मीर भारत के शासन के तहत ही सुरक्षित और स्थिर रहेगा।”

    बॉब ब्लैकमैन ने इस क्षेत्र में आतंकवाद की लगातार निंदा की है और पाकिस्तान के नियंत्रण वाले हिस्सों की आलोचना की है। उन्होंने कहा, “मैंने हमेशा कहा है कि पूरे जम्मू और कश्मीर रियासत को भारत के शासन में शामिल किया जाना चाहिए। आतंकवाद को बढ़ावा देने वाले पाकिस्तान के प्रयासों को अंतरराष्ट्रीय समुदाय को रोकना चाहिए।”

    उन्होंने पहलागाम में हुए आतंकी हमले की भी कड़ी निंदा की, जिसमें 26 लोग मारे गए थे। ब्लैकमैन ने कहा कि ब्रिटेन की सरकार को आतंकवाद के खिलाफ भारत के साथ मजबूती से खड़ा होना चाहिए।

    उनका मानना है कि भारत और पश्चिमी देशों के बीच सुरक्षा सहयोग को मजबूत करना जरूरी है, ताकि क्षेत्र में स्थिरता और शांति कायम रह सके।

    इससे पहले, जून में ऑपरेशन सिंदूर ग्लोबल आउटरीच के दौरान ब्लैकमैन ने पाकिस्तान को “नाकाम देश” करार दिया और वहां के नागरिक-सैन्य संतुलन पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यह स्पष्ट नहीं है कि पाकिस्तान के लोकतांत्रिक संस्थान कार्यरत हैं या सेना के जनरल शासन कर रहे हैं।

    ब्लैकमैन ने यह भी आरोप लगाया कि पाकिस्तान से भारत में आतंकवाद को बढ़ावा दिया जा रहा है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए भारत के साथ एकजुट होना अनिवार्य है।

    ब्लैकमैन का यह बयान दिखाता है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी भारत का रुख जम्मू-कश्मीर और आतंकवाद के मुद्दों पर मजबूत समर्थन पा रहा है। उनका यह दृष्टिकोण केवल राजनीतिक बयान नहीं बल्कि मानवाधिकार और शांति के दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण है। उनके अनुसार, पूरे जम्मू-कश्मीर को भारत के साथ जोड़ना न केवल न्यायसंगत है, बल्कि यह क्षेत्र में स्थायी शांति और सुरक्षा सुनिश्चित करने का एक जरूरी कदम भी है।

  • सनातन धर्म में 5 प्रमुख स्नान 2026: तन-मन की शुद्धि और मोक्ष के लिए ये दिन न चूकें

    सनातन धर्म में 5 प्रमुख स्नान 2026: तन-मन की शुद्धि और मोक्ष के लिए ये दिन न चूकें


    नई दिल्ली। सनातन परंपरा में नदियों और पवित्र जलाशयों में स्नान करना अत्यंत पुण्यदायी माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, विशेष तिथियों पर पवित्र जल में स्नान करने से तन और मन की शुद्धि होती है, पापों का नाश होता है और मोक्ष की प्राप्ति भी संभव होती है। वर्ष 2026 में कई ऐसे शुभ अवसर हैं, जब श्रद्धालु आस्था के साथ पवित्र नदियों में स्नान करेंगे। मकर संक्रांति, मौनी अमावस्या, माघ पूर्णिमा, गंगा दशहरा और कार्तिक पूर्णिमा इस वर्ष के प्रमुख स्नान पर्व हैं।
    1. मकर संक्रांति स्नान 14 जनवरी
    मकर संक्रांति सूर्य के उत्तरायण होने का पर्व है और इसे नए मौसम की शुरुआत के रूप में भी मनाया जाता है। इस दिन सूर्यदेव के उत्तरायण होने से वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पवित्र नदियों में स्नान करने से तन और मन दोनों शुद्ध होते हैं। इस अवसर पर दान-पुण्य करने से पुण्य कई गुना बढ़ जाता है। मकर संक्रांति के दिन स्नान करना केवल आध्यात्मिक लाभ ही नहीं देता, बल्कि यह नई ऊर्जा और सकारात्मक बदलाव का संकेत भी माना जाता है।
    2. मौनी अमावस्या स्नान 18 जनवरी
    माघ मास की अमावस्या को मौनी अमावस्या कहा जाता है। शास्त्रों में वर्णित है कि इस दिन गंगा का जल विशेष रूप से पवित्र और अमृतमय हो जाता है। मौनी अमावस्या पर गंगा स्नान करने से पापों का नाश होता है और मोक्ष की प्राप्ति संभव होती है। इस दिन मौन व्रत रखना और श्रद्धा के साथ स्नान करना अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है। साथ ही, दान-पुण्य और सत्संग करने से आध्यात्मिक लाभ कई गुना बढ़ जाते हैं।
    3. माघ पूर्णिमा स्नान 1 फरवरी
    माघ पूर्णिमा का दिन सनातन धर्म में अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है। इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करने के साथ-साथ दान-पुण्य करना भी बहुत शुभ होता है। तिल, अनाज, वस्त्र, घी और कंबल का दान करने से पुण्य की प्राप्ति कई गुना बढ़ जाती है। माघ पूर्णिमा के स्नान से व्यक्ति की आत्मा और शरीर दोनों शुद्ध होते हैं और इसे वर्ष का एक महत्वपूर्ण आध्यात्मिक अवसर माना जाता है। वर्ष 2026 में यह स्नान 1 फरवरी को पड़ेगा।
    4. गंगा दशहरा स्नान 25 मई
    गंगा दशहरा ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को मनाया जाता है। मान्यता है कि इसी दिन मां गंगा स्वर्ग से पृथ्वी पर अवतरित हुई थीं। इस अवसर पर गंगा स्नान, दान-पुण्य और पूजा करने से दस प्रकार के पापों से मुक्ति मिलती है। गंगा दशहरा का स्नान श्रद्धालुओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि इस दिन स्नान करने से आध्यात्मिक उन्नति के साथ-साथ मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। वर्ष 2026 में यह पर्व 25 मई को मनाया जाएगा।
    5. कार्तिक पूर्णिमा स्नान 24 नवंबर
    कार्तिक पूर्णिमा को देव दिवाली के रूप में भी जाना जाता है। इस दिन पवित्र नदियों और जलाशयों में स्नान करना अत्यंत शुभ माना गया है। शास्त्रों के अनुसार, इस दिन दीपदान और दान-पुण्य करने से आत्मिक शुद्धि होती है और पापों का नाश होता है। कार्तिक पूर्णिमा के स्नान से आध्यात्मिक लाभ के साथ-साथ जीवन में सकारात्मक बदलाव आता है। वर्ष 2026 में यह पर्व 24 नवंबर को है और यह सभी भक्तों के लिए एक पवित्र अवसर है।

    सनातन धर्म में विशेष तिथियों पर पवित्र जल में स्नान करना न केवल तन-मन की शुद्धि करता है बल्कि जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और आध्यात्मिक उन्नति भी लाता है।

    वर्ष 2026 में मकर संक्रांति, मौनी अमावस्या, माघ पूर्णिमा, गंगा दशहरा और कार्तिक पूर्णिमा जैसे दिन सभी भक्तों के लिए पवित्र स्नान करने का सुनहरा अवसर प्रदान करेंगे। श्रद्धा और आस्था के साथ स्नान करने से न केवल धार्मिक लाभ मिलते हैं बल्कि यह मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी माना जाता है।
  • पीएम मोदी का ब्लॉग 1000 साल बाद भी अडिग खड़ा है सोमनाथ विध्वंस नहीं पुनरुत्थान की गाथा

    पीएम मोदी का ब्लॉग 1000 साल बाद भी अडिग खड़ा है सोमनाथ विध्वंस नहीं पुनरुत्थान की गाथा


    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने ब्लॉग में सोमनाथ मंदिर के इतिहास को याद करते हुए इसे भारत की आस्था संस्कृति और संघर्ष का प्रतीक बताया। 1026 में गजनी के महमूद द्वारा सोमनाथ पर किया गया आक्रमण जिसने मंदिर को ध्वस्त कर दिया था आज से एक हजार साल पहले हुआ था। इस आक्रमण का उद्देश्य केवल मंदिर को नष्ट करना नहीं था बल्कि भारतीय सभ्यता और संस्कृति को भी नष्ट करना था। हालांकि इस आक्रमण के बावजूद आज भी सोमनाथ मंदिर पूरे गर्व और गौरव के साथ खड़ा है और यह भारत की अडिग आस्था और संघर्ष का प्रतीक बन चुका है।प्रधानमंत्री मोदी ने अपने ब्लॉग में लिखा सोमनाथ शब्द सुनते ही हमारे मन और हृदय में गर्व और आस्था की भावना भर जाती है। यह मंदिर भारत के आत्मगौरव का शाश्वत प्रतीक है जो न केवल एक धार्मिक स्थल है बल्कि भारतीय सभ्यता और संस्कृति की अमिट छाप भी छोड़ता है।

    सोमनाथ का ऐतिहासिक महत्व

    गुजरात के प्रभास पाटन में स्थित सोमनाथ भारत के द्वादश ज्योतिर्लिंगों में पहला स्थान रखता है। शास्त्रों के अनुसार सोमनाथ के दर्शन से व्यक्ति अपने पापों से मुक्त हो जाता है और उसे आत्मिक शांति की प्राप्ति होती है। यह मंदिर न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है बल्कि इसके ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व ने इसे कई बार विदेशी आक्रमणों का निशाना बना दिया। विशेष रूप से 1026 में महमूद गजनवी द्वारा किया गया आक्रमण इस मंदिर के इतिहास का एक काला अध्याय था जिसने सोमनाथ को ध्वस्त कर दिया था।

    आक्रमण के बावजूद पुनर्निर्माण

    प्रधानमंत्री मोदी ने लिखा कि 1026 में सोमनाथ पर आक्रमण के बाद भी मंदिर का पुनर्निर्माण लगातार होता रहा। 1951 में सोमनाथ मंदिर का पुनर्निर्माण हुआ और इस मंदिर का वर्तमान स्वरूप 11 मई 1951 को श्रद्धालुओं के लिए खोला गया था। यह घटना भारतीय आस्था और संस्कृति की विजयी गाथा बन गई। प्रधानमंत्री मोदी ने इस अवसर पर तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद की उपस्थिति में हुए इस पुनर्निर्माण समारोह का उल्लेख किया और बताया कि सोमनाथ मंदिर का पुनर्निर्माण भारतीय स्वाभिमान और आस्था की एक शक्तिशाली मिसाल है।

    सरदार पटेल का योगदान

    प्रधानमंत्री मोदी ने सोमनाथ के पुनर्निर्माण में सरदार वल्लभभाई पटेल के योगदान को भी याद किया। 1947 में दीवाली के समय सरदार पटेल ने सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण के लिए दृढ़ संकल्प लिया था। यह उनका सपना था कि इस पवित्र मंदिर को फिर से खड़ा किया जाए और श्रद्धालु यहां पूजा-अर्चना कर सकें। उनका यह प्रयास भारतीय इतिहास का एक अहम हिस्सा बन चुका है।

    सोमनाथ की प्रेरणा

    पीएम मोदी ने अपने ब्लॉग में कहा कि सोमनाथ का पुनर्निर्माण हमें यह सिखाता है कि भारत कभी नहीं हारता। उन्होंने यह भी बताया कि सोमनाथ मंदिर का पुनर्निर्माण केवल एक शारीरिक संरचना का पुनर्निर्माण नहीं था बल्कि यह भारतीय सभ्यता के पुनरुत्थान का प्रतीक था। उन्होंने कहा सोमनाथ हमें यह संदेश देता है कि आस्था में शक्ति होती है जबकि घृणा और कट्टरता में विनाश की ताकत।

    भविष्य के लिए संदेश

    प्रधानमंत्री मोदी ने अंत में कहा कि अगर एक खंडित मंदिर को पुनर्निर्मित किया जा सकता है तो भारत भी अपने प्राचीन गौरव को पुनः प्राप्त कर सकता है। उन्होंने इस प्रेरणा के साथ नए संकल्प के साथ एक विकसित भारत के निर्माण की बात की। मोदी ने यह भी कहा कि सोमनाथ आज भी हमारे विश्वास और आस्था का सबसे मजबूत आधार है जो हमें आगे बढ़ने और सफलता की ओर प्रेरित करता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण की गाथा को याद करते हुए यह स्पष्ट किया कि यह मंदिर केवल धार्मिक स्थल नहीं है बल्कि यह भारतीय संस्कृतिस्वाभिमान और संघर्ष का प्रतीक है। 1026 के आक्रमण के बाद आज तक सोमनाथ ने हमें यह सिखाया है कि हमारी आस्था को न तो नष्ट किया जा सकता है और न ही इसे झुका जा सकता है। यही संदेश भारत को दुनिया भर में हर कठिनाई से निपटने की प्रेरणा देता है।

  • प्रधानमंत्री मोदी ने सोमनाथ मंदिर की गाथा को याद करते हुए कहा- यह भारतीय सभ्यता और साहस का प्रतीक है

    प्रधानमंत्री मोदी ने सोमनाथ मंदिर की गाथा को याद करते हुए कहा- यह भारतीय सभ्यता और साहस का प्रतीक है


    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज सोमनाथ मंदिर के विध्वंस और पुनर्निर्माण की गाथा को याद किया और इसे भारतीय सभ्यता की अमर चेतना का प्रतीक बताया। यह वही मंदिर है जिस पर आज से ठीक एक हजार वर्ष पहले यानी 1026 में गजनी के महमूद ने पहला भीषण आक्रमण किया था। प्रधानमंत्री मोदी ने सोमनाथ मंदिर के ऐतिहासिक महत्व पर विस्तार से बात करते हुए इसे भारत की आस्था और स्वाभिमान का प्रतीक बताया।

    सोमनाथ मंदिर का महत्व

    सोमनाथ मंदिर गुजरात के प्रभास पाटन में स्थित एक अत्यधिक महत्वपूर्ण तीर्थस्थल है और यह द्वादश ज्योतिर्लिंगों में प्रमुख स्थान रखता है। शास्त्रों के अनुसार इस मंदिर के दर्शन से पापों से मुक्ति और आत्मिक शांति की प्राप्ति होती है। इसी आध्यात्मिक और सामाजिक महत्व के कारण यह मंदिर कई बार विदेशी आक्रमणों का लक्ष्य बन चुका है लेकिन इसके बावजूद यह सदैव अपने स्थान पर अडिग खड़ा रहा।

    प्रधानमंत्री मोदी ने अपने ब्लॉग में लिखा कि “जय सोमनाथ! 2026 में हम उस पवित्र स्थल के पहले आक्रमण के 1000 वर्ष पूरे होने का स्मरण कर रहे हैं। बार-बार हुए हमलों के बावजूद हमारा सोमनाथ मंदिर आज भी अडिग खड़ा है। यह मंदिर भारत माता की उन करोड़ों वीर संतानों के स्वाभिमान और अदम्य साहस की गाथा है जिनके लिए अपनी संस्कृति और सभ्यता सर्वोपरि रही।”

    गजनी के महमूद द्वारा आक्रमण

    जनवरी 1026 में गजनी के महमूद ने सोमनाथ मंदिर पर आक्रमण किया था जिसका उद्देश्य केवल मंदिर को तोड़ना नहीं था बल्कि भारतीय आस्था और संस्कृति को नष्ट करना था। यह आक्रमण भारतीय इतिहास का एक अत्यधिक कष्टकारी क्षण था लेकिन इसके बावजूद सोमनाथ के प्रति भारतीयों की आस्था और विश्वास कभी कम नहीं हुआ।

    सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण के बाद से यह भारतीय सभ्यता और सांस्कृतिक आत्मा का प्रतीक बन गया। प्रधानमंत्री मोदी ने इस महत्वपूर्ण क्षण को याद करते हुए कहा कि यह गाथा केवल मंदिर के विध्वंस की नहीं बल्कि संघर्ष बलिदान और पुनर्निर्माण की कहानी है। यह मंदिर आज भी दुनिया को यह संदेश देता है कि आस्था को न तो समाप्त किया जा सकता है और न ही उसे झुकाया जा सकता है।

    सोमनाथ का पुनर्निर्माण और वर्तमान स्थिति

    प्रधानमंत्री मोदी ने इस बात पर भी जोर दिया कि सोमनाथ मंदिर का पुनर्निर्माण भारतीयों की न केवल आस्था बल्कि उनकी संकल्पशक्ति को भी दर्शाता है। उन्होंने कहा कि यदि एक खंडित मंदिर फिर से खड़ा हो सकता है तो भारत भी अपने प्राचीन गौरव के साथ पुनः दुनिया को मार्ग दिखा सकता है।

    आध्यात्मिक और सांस्कृतिक संदेश

    प्रधानमंत्री मोदी ने यह भी कहा कि सोमनाथ की यह कहानी केवल भारत के इतिहास से जुड़ी नहीं है बल्कि यह भारत के पुनर्निर्माण और सामर्थ्य की भी गाथा है। वह मानते हैं कि आज के समय में जब भारत पुनः अपनी सांस्कृतिक पहचान को लेकर गर्व महसूस करता है सोमनाथ मंदिर से हमें यह प्रेरणा मिलती है कि अपनी आस्था और संस्कृति के साथ आगे बढ़ना कितना महत्वपूर्ण है।

    सोमनाथ के द्वारा दिया गया संदेश
    आज भी सोमनाथ मंदिर लाखों श्रद्धालुओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है। यह न केवल धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है बल्कि यह भारतीय समाज के अदम्य साहस संघर्ष और पुनर्निर्माण की जीवंत मिसाल भी प्रस्तुत करता है। पीएम मोदी ने अपनी ब्लॉग पोस्ट में इस तथ्य का उल्लेख किया कि सोमनाथ का पुनर्निर्माण भारत के अदम्य साहस आत्मविश्वास और संस्कृति के प्रति आस्थाओं की महत्ता को दर्शाता है।

    प्रधानमंत्री मोदी ने सोमनाथ मंदिर के महत्व को एक नए दृष्टिकोण से पेश किया जो केवल आस्था का केंद्र नहीं है बल्कि यह भारत की ताकत सामर्थ्य और संघर्ष की भी गाथा है। मोदी ने यह संदेश दिया कि जैसे सोमनाथ का पुनर्निर्माण हुआ वैसे ही भारत अपनी गौरवशाली संस्कृति और सभ्यता के साथ पुनः उठ सकता है और दुनिया को मार्ग दिखा सकता है।

  • संकष्टी चतुर्थी विघ्न विनाशन को प्रसन्न करने का अद्भुत दिन इस तरह करें पूजा

    संकष्टी चतुर्थी विघ्न विनाशन को प्रसन्न करने का अद्भुत दिन इस तरह करें पूजा


    नई दिल्ली । सनातन धर्म में माघ मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को सकट चौथ या संकष्टी चतुर्थी के रूप में मनाया जाता है। यह पर्व विशेष रूप से भगवान गणेश की पूजा और उपवास से जुड़ा हुआ है जिसे विघ्न विनाशक और सुख-समृद्धि के दाता के रूप में पूजा जाता है। इस दिन विधि-विधान से भगवान गणेश का पूजन करने से जीवन की सभी बाधाएं दूर होती हैं और घर में सुख-समृद्धि का वास होता है।

    सकट चौथ का महत्व

    सकट चौथ को खासतौर पर माताएं अपने पुत्रों की लंबी उम्र और कल्याण के लिए रखती हैं। यह दिन गणेश जी की कृपा प्राप्त करने और जीवन में खुशहाली लाने का प्रमुख अवसर होता है। धर्मशास्त्रों के अनुसार इस दिन उपवास करने से न केवल घर-परिवार में सुख-शांति बनी रहती है बल्कि हर प्रकार के संकटों से मुक्ति भी मिलती है।

    तिथि और समय
    दृक पंचांग के अनुसार इस साल संकष्टी चतुर्थी 6 जनवरी 2026 को मनाई जाएगी। चतुर्थी तिथि 6 जनवरी को सुबह 8 बजकर 1 मिनट से शुरू होगी और 7 जनवरी को सुबह 6 बजकर 52 मिनट तक रहेगी। इस दिन चंद्रोदय रात 8 बजकर 54 मिनट पर होगा जो व्रत के पूर्ण होने का संकेत है।

    व्रत का तरीका

    सकट चौथ का व्रत सूर्योदय से चंद्रोदय तक रखा जाता है। कई भक्त इस दिन निर्जला उपवास रखते हैं जबकि कुछ हल्का सात्विक भोजन करते हैं। व्रत के लिए सबसे पहले प्रात काल स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनने चाहिए और व्रत का संकल्प लेना चाहिए। दिनभर भगवान गणेश का स्मरण करते हुए उनका पूजन करें।

    पूजन विधि

    शाम के समय चंद्रमा के दर्शन से पहले भगवान गणेश की पूजा विधिपूर्वक करें। सबसे पहले गणेश जी का पंचामृत से स्नान कराएं फिर घी और सिंदूर का लेप लगाएं। इसके बाद जनेऊ रोली इत्र दूर्वा फूल चंदन अबीर लौंग चढ़ाकर भगवान गणेश को धूप-दीप दिखाएं।गणेश जी को तिल-गुड़ के लड्डू मोदक और तिलकुट का भोग अर्पित करें। यह भगवान गणेश को अत्यधिक प्रिय है। पूजा के बाद गणेश जी के सामने गं गण गणपतये नमः मंत्र का जाप करें और गणेश स्तोत्र या अथर्वशीर्ष का पाठ करें।

    चंद्रोदय पर अर्घ्य देना

    चंद्रमा के दर्शन के बाद चंद्रोदय के समय चंद्रमा को दूध मिश्रित जल से अर्घ्य दें। इस समय दिए गए अर्घ्य से व्रत पूरा होता है और भक्तों को संकटों से मुक्ति प्राप्त होती है। इसके बाद व्रत का पारण करें और प्रसाद ग्रहण करें।

    पूजन से लाभ
    सकट चौथ का व्रत विशेष रूप से संतान सुख और परिवार की समृद्धि के लिए रखा जाता है। साथ ही इस दिन किए गए पूजा से भगवान गणेश की कृपा से घर में शांति और सुख-समृद्धि आती है। भक्तों का मानना है कि इस दिन किए गए व्रत से हर प्रकार के संकट दूर होते हैं और जीवन में सफलता और खुशी का वास होता है।

    व्रत कथा

    सकट चौथ पर पूजा के साथ-साथ व्रत कथा पढ़ना या सुनना भी बेहद महत्वपूर्ण है। कथा में भगवान गणेश के अनेक भक्तों की श्रद्धा और उनकी आस्था के किस्से बताए जाते हैं जो संकटों से उबरकर भगवान गणेश की कृपा से जीवन में सुख-शांति लाए सकट चौथ जिसे संकष्टी चतुर्थी भी कहा जाता है भगवान गणेश की पूजा करने और उपवास रखने का एक विशेष दिन है। इस दिन व्रत और पूजा करने से न केवल जीवन के संकटों से मुक्ति मिलती है बल्कि परिवार में खुशहाली और सुख-समृद्धि भी आती है। यह पर्व विशेष रूप से माताओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है जो अपने पुत्रों की लंबी उम्र और सुख-शांति की कामना करती हैं।

  • उज्जैन में बाबा महाकाल का भांग और भस्म से अलौकिक शृंगार दर्शन कर गदगद हुए श्रद्धालु

    उज्जैन में बाबा महाकाल का भांग और भस्म से अलौकिक शृंगार दर्शन कर गदगद हुए श्रद्धालु


    उज्जैन । मध्य प्रदेश के उज्जैन में स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में माघ मास की कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि पर सोमवार सुबह भस्म आरती का आयोजन किया गया। इस अवसर पर श्रद्धालुओं का भारी तांता लगा जो रातभर लाइन में लगे रहे ताकि वे बाबा महाकाल के दर्शन कर सकें। ब्रह्म मुहूर्त में बाबा महाकाल का विशेष शृंगार किया गया जिसमें भांग और भस्म से सजावट की गई।

    विशेष शृंगार और भस्म आरती का महत्व

    बाबा महाकाल का शृंगार भांग और भस्म से किया गया जो भगवान शिव का प्रिय अलंकार मानी जाती है। यह शृंगार जीवन और मृत्यु के चक्र और निराकार स्वरूप का प्रतीक है। मंदिर के गर्भगृह में सुबह करीब 4 बजे बाबा महाकाल का विशेष शृंगार किया गया। उनका मस्तक चंद्रमा और कमल से सजाया गया जो श्रद्धालुओं के लिए एक अलौकिक दृश्य था। यह देखकर भक्त गदगद हो गए और जय श्री महाकाल के जयकारों से मंदिर परिसर गूंज उठा।
    धार्मिक मान्यता के अनुसार भस्म श्मशान से लाई गई ताजी चिता की राख से बनाई जाती है जिसमें गोहरी पीपल पलाश शमी और बेल की लकड़ियों की राख भी मिलाई जाती है। इस शृंगार के बाद भक्तों को पवित्रता और मोक्ष की प्राप्ति होती है। भस्म आरती की यह परंपरा सदियों पुरानी है और हर दिन हजारों भक्त इस आरती में भाग लेने के लिए मंदिर पहुंचते हैं।

    भस्म आरती की पारंपरिक प्रक्रिया

    महाकालेश्वर मंदिर की भस्म आरती दुनिया में अपनी तरह की एकमात्र आरती मानी जाती है। यह आरती ब्रह्म मुहूर्त में सुबह करीब 4 बजे शुरू होती है। इस दौरान भगवान शिव का शृंगार और आरती भस्म से की जाती है। आरती के समय शंखनाद ढोल-नगाड़ों और मंत्रोच्चार के बीच भस्म चढ़ाई जाती है। इसके बाद पंचामृत अभिषेक और अन्य अलंकारों से बाबा महाकाल को सजाया जाता है।इस आरती में भक्तों की आस्था और श्रद्धा का कोई जवाब नहीं होता। कई भक्तों का मानना है कि भस्म आरती में भाग लेने से उन्हें अपने जीवन के संकटों से मुक्ति मिलती है और वे सुख-समृद्धि के साथ-साथ मोक्ष भी प्राप्त करते हैं।

    महिलाओं के लिए विशेष प्रावधान

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भस्म आरती के समय महाकाल निराकार स्वरूप में होते हैं इस कारण महिलाओं को गर्भगृह में प्रवेश की अनुमति नहीं होती। हालांकि विशेष व्यवस्था के तहत महिलाएं बाहर से दर्शन कर सकती हैं। इसके अलावा महिलाएं सिर पर घूंघट या ओढ़नी डालकर ही मंदिर परिसर में प्रवेश करती हैं ताकि वे श्रद्धा और सम्मान के साथ पूजा-अर्चना कर सकें।

    श्रद्धालुओं की श्रद्धा और उत्साह

    देर रात से ही बाबा महाकाल के दर्शन के लिए भक्तों का तांता लगना शुरू हो गया था। उज्जैन का महाकाल मंदिर हमेशा श्रद्धालुओं से भरा रहता है और इस विशेष दिन पर तो भक्तों की भीड़ और भी अधिक थी। श्रद्धालु इस अवसर को अत्यंत पवित्र मानते हुए बाबा महाकाल के दर्शन करके अपार आशीर्वाद प्राप्त करने की उम्मीद में आते हैं।

    सदियों पुरानी परंपरा

    महाकाल की भस्म आरती एक ऐसी परंपरा है जो सदियों से चली आ रही है और आज भी इसका महत्व उतना ही है। यह धार्मिक आयोजन न केवल श्रद्धालुओं के लिए पुण्य का अवसर है बल्कि यह उज्जैन के सांस्कृतिक और आध्यात्मिक गौरव का प्रतीक भी है। भक्त यहां आकर अपने जीवन के सारे दुखों से मुक्त होकर संतुष्ट महसूस करते हैं।