ओपन जेल की खासियत
Author: bharati
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तिहाड़ जेल में कैदियों को मिलेगा मोबाइल कर पाएंगे अपनों से बात! जानिए क्या है नया नियम
नई दिल्ली । दिल्ली की तिहाड़ जेल की ओपन जेल में बड़ा बदलाव आने वाला है। अच्छे आचरण वाले कैदियों को जल्द ही मोबाइल फोन इस्तेमाल करने की अनुमति मिल सकती है। हालांकि इसके लिए सख्त नियम होंगे। जेल प्रशासन इसकी स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर तैयार कर रहा है।हाईकोर्ट के निर्देश से हुआ फैसलायह कदम दिल्ली हाईकोर्ट के अक्टूबर महीने के आदेश के बाद लिया जा रहा है। कोर्ट ने जेल अधिकारियों को ओपन जेल के कैदियों के लिए मोबाइल एक्सेस की योजना बनाने को कहा था। इसका मकसद सुरक्षा बनाए रखते हुए कैदियों का पुनर्वास करना है। ओपन जेल में वे कैदी रखे जाते हैं जो समाज में दोबारा शामिल होने के लिए सुरक्षित माने जाते हैं।ओपन जेल में कैदी कम निगरानी में रहते हैं। वे दिन में बाहर जाकर काम करते हैं और शाम को वापस लौटते हैं। तिहाड़ की यह ओपन जेल 2026 में 10 साल पूरे करेगी। फिलहाल यहां सिर्फ तीन कैदी हैं। पहले यहां जेसिका लाल मर्डर केस के दोषी मनु शर्मा और अपनी पत्नी की हत्या के दोषी पूर्व कांग्रेस नेता सुशील शर्मा जैसे कैदी रह चुके हैं।फोन इस्तेमाल के नियम क्या होंगेअधिकारियों के अनुसार एसओपी लगभग तैयार है। कैदियों को केवल वे मोबाइल नंबर इस्तेमाल करने की इजाजत मिलेगी जो जेल प्रशासन ने पहले रजिस्टर और सत्यापित किए होंगे। इससे गलत इस्तेमाल का खतरा कम होगा। फोन के इस्तेमाल के लिए सीमित समय तक ही होगा। ज्यादातर सुबह काम पर जाते समय से शाम वापसी तक। शाम को लौटते ही कैदी फोन जेल अधिकारियों को सौंप देंगे। एक अधिकारी ने कहा कि इस सुविधा का दुरुपयोग रोकने के लिए पूरी सावधानी बरती जाएगी।पूर्व अधिकारी बोले कोई जोखिम नहींतिहाड़ के पूर्व लीगल एडवाइजर सुनील गुप्ता का कहना है कि ओपन जेल के कैदी दिन में बिना पहरे के बाहर जाते हैं। इसलिए फोन इस्तेमाल करने में कोई बड़ा खतरा नहीं है। यह कदम पूरी तरह सुरक्षित और फायदेमंद है। -

अमित मालवीय के खिलाफ FIR को लेकर सियासी घमासान TMC नेता की शिकायत पर जांच शुरू
नई दिल्ली । भारतीय जनता पार्टी भाजपा के वरिष्ठ नेता और पार्टी के आईटी सेल के राष्ट्रीय प्रभारी अमित मालवीय एक बार फिर अपने सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर विवादों में आ गए हैं। पश्चिम बंगाल के नरेंद्रपुर थाने में उनके खिलाफ औपचारिक शिकायत दर्ज कराई गई है। आरोप लगाया गया है कि उनके पोस्ट से राज्य में सांप्रदायिक सौहार्द बिगड़ सकता है और इससे देश की एकता और संप्रभुता को खतरा उत्पन्न हो सकता है। यह शिकायत अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस टीएमसी के राज्य महासचिव और प्रवक्ता तन्मय घोष की ओर से की गई है।टीएमसी नेता ने क्यों दर्ज कराई शिकायत
तन्मय घोष ने अपनी शिकायत में दावा किया है कि अमित मालवीय ने 19 दिसंबर को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर जो पोस्ट साझा किया उसकी भाषा और संदर्भ बेहद आपत्तिजनक है। शिकायत के अनुसार यह पोस्ट लोगों को उकसाने वाला है और राज्य की शांति व्यवस्था को नुकसान पहुंचा सकता है। टीएमसी नेता का आरोप है कि पोस्ट के जरिए सीधे तौर पर पश्चिम बंगाल सरकार सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को निशाना बनाया गया है जिससे समाज में भय और अविश्वास का माहौल बन सकता है।कानूनी कार्रवाई की मांग
शिकायत पत्र में तन्मय घोष ने पुलिस से मांग की है कि अमित मालवीय के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता समेत अन्य प्रासंगिक कानूनों के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। उनका कहना है कि इस तरह के बयान और सोशल मीडिया पोस्ट समाज को बांटने का काम करते हैं और इन्हें नजरअंदाज करना भविष्य में गंभीर परिणाम ला सकता है। टीएमसी का आरोप है कि भाजपा नेता जानबूझकर संवेदनशील मुद्दों को उठाकर राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश कर रहे हैं।
पुलिस ने क्या कहा जांच जारीनरेंद्रपुर थाना पुलिस के अनुसार उन्हें शिकायत प्राप्त हो चुकी है और उसकी पुष्टि भी कर ली गई है। फिलहाल इस मामले में एफआईआर दर्ज नहीं की गई है। पुलिस का कहना है कि संबंधित सोशल मीडिया पोस्ट की सामग्री की गहन जांच की जा रही है और तथ्यों के आधार पर ही आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। प्रारंभिक जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि मामला एफआईआर दर्ज करने योग्य है या नहीं।किस पोस्ट पर मचा विवाद
विवादित पोस्ट में अमित मालवीय ने बांग्लादेश की राजधानी ढाका में हुई एक तोड़फोड़ की घटना का जिक्र किया था। उन्होंने दावा किया था कि इस्लामी भीड़ ने बंगाली कला और संस्कृति के ऐतिहासिक केंद्र छायानाट भवन को नुकसान पहुंचाया है। इसके साथ ही उन्होंने चरमपंथ पर चिंता जताते हुए पश्चिम बंगाल की मौजूदा स्थिति को गंभीर बताया और ममता बनर्जी सरकार पर निशाना साधा। इसी बयान को लेकर अब बंगाल की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। -

यूपी में शराब पीने वालों के लिए बड़ी खबर नई आबकारी नीति लागू होते ही महंगी हो जाएगी बोतल
.नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश में एक अप्रैल से नई आबकारी नीति लागू होने जा रही है और इसके साथ ही शराब पीने वालों की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ना तय माना जा रहा है. प्रस्तावित नीति के तहत अंग्रेजी शराब की कीमतों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी की संभावना जताई जा रही है. विभागीय सूत्रों के अनुसार लाइसेंस शुल्क में करीब 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी का मसौदा तैयार कर मुख्यालय से लखनऊ भेज दिया गया है. इस प्रस्ताव को जनवरी महीने में मंजूरी मिलने की उम्मीद है.नई नीति में इस बार भी शराब दुकानों के नवीनीकरण की प्रक्रिया अपनाई जाएगी. यानी मौजूदा लाइसेंसधारकों को राहत देते हुए टेंडर प्रक्रिया नहीं कराई जाएगी. इससे व्यापारियों को निरंतरता मिलेगी लेकिन बढ़ी हुई लाइसेंस फीस का असर सीधे उपभोक्ताओं पर पड़ सकता है. विभाग का मानना है कि शुल्क बढ़ोतरी से राजस्व में इजाफा होगा.
पिछली नीति से अलग होगा असर
गौरतलब है कि पिछले वर्ष लागू की गई आबकारी नीति में शराब की कीमतों में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई थी. लेकिन इस बार हालात अलग हैं. लाइसेंस नवीनीकरण शुल्क बढ़ाने के प्रस्ताव के चलते शराब के दाम बढ़ना लगभग तय माना जा रहा है. आबकारी विभाग की बैठकों में इस विषय पर विस्तार से चर्चा की गई है.शराब की कीमतों में संभावित बढ़ोतरी
अनुमान लगाया जा रहा है कि नई नीति लागू होने के बाद अंग्रेजी शराब के क्वार्टर की कीमत में 15 से 20 रुपये तक का इजाफा हो सकता है. वहीं हाफ बोतल करीब 50 रुपये और फुल बोतल 100 रुपये तक महंगी हो सकती है. हालांकि अंतिम फैसला शासन की मंजूरी के बाद ही लिया जाएगा.राजस्व बढ़ेगा उपभोक्ता पर असर
आबकारी विभाग का कहना है कि बढ़े हुए शुल्क से राज्य के राजस्व को मजबूती मिलेगी. वहीं आम उपभोक्ताओं के लिए यह नीति खर्च बढ़ाने वाली साबित हो सकती है. अब सभी की निगाहें जनवरी में होने वाले फैसले पर टिकी हैं. -

श्रीनिवासन की सिनेमाई दुनिया: मलयालम सिनेमा की 6 अविस्मरणीय फिल्में
नई दिल्ली । मलयालम सिनेमा के प्रमुख अभिनेता लेखक और निर्देशक स्रीनिवासन का 69 साल की उम्र में निधन हो गया। 40 वर्षों से अधिक समय तक केरल की संस्कृति और सिनेमा को आकार देने वाले स्रीनिवासन ने अपने करियर में 200 से अधिक फिल्मों में अभिनय किया और कई महत्वपूर्ण फिल्मों की पटकथा लिखी। उनके किरदार और संवाद आज भी मलयाली समाज और सिनेमा प्रेमियों की यादों में बसे हुए हैं। ‘नाडोडिकट्टु’ ‘संदेशम’ ‘वडक्कुनोक्की यंत्रम’ और ‘उदयाननु तरम’ जैसी फिल्मों के जरिए उन्होंने समाज की hypocrisies और व्यंग्य को बेहद प्रभावशाली ढंग से पेश किया। उनके काम ने 1980 से 2010 तक केरल की मध्यम वर्गीय जीवनशैली और राजनीतिक-सामाजिक परिवेश को गहराई से छुआ।6 क्लासिक फिल्में और उनका प्रभाव
संदेशम 1991 में स्रीनिवासन ने केरल की राजनीति पर व्यंग्यपूर्ण दृष्टिकोण प्रस्तुत किया जो आज भी प्रासंगिक है। नाडोडिकट्टु 1987 में बेरोजगारी और खाड़ी देशों में प्रवास की समस्या को हास्यपूर्ण अंदाज में दिखाया गया। वडक्कुनोक्की यंत्रम 1989 में उन्होंने थलाथिल दिनेशन का किरदार निभाकर आम आदमी की जटिलताओं और असुरक्षाओं को पर्दे पर उतारा। वरवेल्पु 1989 में खाड़ी से लौटे व्यवसायियों की कठिनाइयों और सामाजिक दबावों को दिखाया। चिंथाविष्टयाया श्यामला 1998 में मध्यवर्गीय महिला की चुनौतियों और पति की बेरोजगारी पर प्रकाश डाला। वहीं पोंमोट्टा इडुन्ना थारवु 1988 में मानवीय संबंधों और लालच की जटिलताओं को बेहद सजीव ढंग से पेश किया गया।
स्रीनिवासन ने न केवल अभिनय किया बल्कि मलयालम समाज की मानसिकता राजनीतिक और आर्थिक जटिलताओं को पर्दे पर उतारकर लोगों को सोचने पर मजबूर किया। उनके संवाद और किरदार आज भी सामाजिक और सांस्कृतिक विमर्श का हिस्सा हैं। उनकी फिल्में जैसे ‘संदेशम’ ‘नाडोडिकट्टु’ और ‘वडक्कुनोक्की यंत्रम’ पीढ़ियों तक याद रखी जाएंगी और उन्हें मलयालम सिनेमा के सबसे प्रभावशाली हस्तियों में हमेशा याद किया जाएगा।
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रोजाना खाएं ये 1 चीज और पाएं शीशे जैसी चमक पड़ोस वाली भी पूछेगी ‘क्या लगाया
नई दिल्ली । चेहरे की खूबसूरती बढ़ाने के लिए सिर्फ क्रीम और स्किन केयर प्रोडक्ट्स पर्याप्त नहीं होते। हर किसी की त्वचा अलग होती है और इसे पोषण देने वाले तत्वों की कमी के कारण स्किन प्रोडक्ट्स कभी-कभी असर नहीं दिखाते। इसलिए त्वचा की निखार और ग्लो के लिए आहार पर ध्यान देना बेहद जरूरी है। मिडल क्लास से लेकर उच्च वर्ग तक हर कोई महंगे प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करता है लेकिन सही पोषण के बिना परिणाम सीमित ही रहते हैं।ब्लूबेरी: एंटी-ऑक्सीडेंट्स से भरपूर
ब्लूबेरी में उच्च मात्रा में एंटी-ऑक्सीडेंट्स पाए जाते हैं जो त्वचा की नमी बनाए रखते हैं और कोलेजन बढ़ाते हैं। यह झुर्रियों काले धब्बों और सूजन को कम करने में मदद करता है जिससे त्वचा हमेशा युवा और ताजगी भरी नजर आती है।
अखरोट: ओमेगा-3 और विटामिन ई का खजाना
अखरोट में ओमेगा-3 फैटी एसिड विटामिन ई जिंक और एंटी-ऑक्सीडेंट्स पाए जाते हैं। ये त्वचा को गहराई से मॉइस्चराइज करते हैं झुर्रियों और दाग-धब्बों को कम करते हैं और मुंहासों की समस्या भी घटाते हैं। रोजाना अखरोट का सेवन त्वचा की नमी और इलास्टिसिटी बनाए रखने में मदद करता है।
अखरोट: नेचुरल ग्लो के लिएअंगूर खाने से एजिंग के निशानों को कम किया जा सकता है और त्वचा में प्राकृतिक निखार आता है। वहीं संतरे में मौजूद विटामिन सी त्वचा को ग्लोइंग बनाता है और टैनिंग को कम करता है। इन फलों का नियमित सेवन त्वचा को भीतर से पोषण देता है और चेहरे की चमक बढ़ाता है।
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इमरान खान और बुशरा बीबी को 17 साल की सजा, करप्शन केस में PAK कोर्ट का फैसला
नई दिल्ली । पाकिस्तान में भ्रष्टाचार के एक बड़े मामले में पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान और उनकी पत्नी बुशरा बीबी को करारा झटका लगा है. फेडरल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी की विशेष अदालत ने तोशाखाना II भ्रष्टाचार मामले में दोनों को 17-17 साल की कठोर जेल की सजा सुनाई. अदालत ने इमरान खान और बुशरा बीबी को दोषी ठहराते हुए यह फैसला सुनाया ।स्थानीय मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक यह मामला वर्ष 2021 से जुड़ा है जब सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस द्वारा इमरान खान को एक बेहद कीमती बुल्गारी ज्वेलरी सेट गिफ्ट में दिया गया था. जांच में सामने आया कि इस गहनों की वास्तविक कीमत 7 करोड़ 15 लाख पाकिस्तानी रुपये से अधिक थी लेकिन इसे मात्र 58 लाख रुपये में खरीदकर नियमों का उल्लंघन किया गया. अदालत ने इसे सरकारी विश्वास के साथ धोखाधड़ी और भ्रष्ट आचरण करार दिया ।इमरान खान 2023 से जेल में बंदयह फैसला अदियाला जेल में बनाए गए विशेष कोर्ट रूम में विशेष न्यायाधीश शाहरुख अरजुमंद ने सुनाया. गौरतलब है कि इमरान खान अगस्त 2023 से ही विभिन्न मामलों में जेल में बंद हैं. इससे पहले जनवरी 2025 में अल-कादिर ट्रस्ट मामले में भी इमरान खान को 14 साल और बुशरा बीबी को 7 साल की सजा सुनाई जा चुकी है. तोशाखाना केस पर हाईकोर्ट ने लगाई थी रोक हालांकि तोशाखाना मामले में अप्रैल 2024 में इस्लामाबाद हाईकोर्ट ने सजा पर रोक लगा दी थी. इमरान खान की कानूनी टीम ने संकेत दिए हैं कि वे तोशाखाना मामले के इस फैसले को भी हाईकोर्ट में चुनौती देंगे । -

मंत्रियों के विवादों पर घिरी महाराष्ट्र सरकार सुप्रिया सुले बोलीं- यह राज्य की छवि के लिए बुरा
नई दिल्ली । महाराष्ट्र सरकार में एनसीपी अजित पवार गुट के दो मंत्रियों पर लगे गंभीर आरोपों को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है एनसीपी शरद पवार गुट की वरिष्ठ नेता सुप्रिया सुले ने इस पूरे मामले पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि ऐसे घटनाक्रम महाराष्ट्र की छवि के लिए बुरा है और दिल्ली तक में लोग सवाल पूछ रहे हैं कि राज्य में आखिर चल क्या रहा है ।सुप्रिया सुले ने कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि सरकार में शामिल दो बड़े नेताओं पर गंभीर आरोप लगे हैं उन्होंने बताया कि दिल्ली में उनसे लोग पूछ रहे थे कि महाराष्ट्र में एक और मंत्री का विकेट गिर गया उनके मुताबिक इस तरह की बातें राज्य की छवि को खराब करती हैं और जनता में गलत संदेश जाता है उन्होंने साफ कहा कि यह स्थिति किसी भी तरह से अच्छी नहीं कही जा सकती ।माणिकराव कोकाटे मामले पर चिंतापूर्व मंत्री माणिकराव कोकाटे को लेकर सुप्रिया सुले ने कहा कि किसानों के बारे में जिस तरह की बातें कही गईं वह दुर्भाग्यपूर्ण हैं फिलहाल कोकाटे अस्पताल में भर्ती हैं और उन्हें सही इलाज मिलना चाहिए यह जरूरी है
मनरेगा के नाम को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए सुप्रिया सुले ने कहा कि महात्मा गांधी का नाम हटाने का फैसला गलत है उनका कहना है कि इससे न सिर्फ प्रतीकात्मक नुकसान हुआ है ।बल्कि आगे चलकर राज्यों को मिलने वाली फंडिंग पर भी असर पड़ेगा उन्होंने आरोप लगाया कि इस फैसले से राज्य सरकारों को नुकसान होगा और गरीबों से जुड़ी योजनाओं पर भी असर पड़ सकता है एनसीपी अजित पवार गुट और शरद पवार गुट के संभावित गठबंधन को लेकर पूछे गए सवाल पर सुप्रिया सुले ने कहा कि स्थानीय निकाय चुनावों में स्थानीय नेता ही फैसला लेंगे उन्होंने बताया कि पवार साहब पहले ही कह चुके हैं कि इस पर निर्णय जमीनी स्तर पर लिया जाएगा ।
नीतीश कुमार के बुर्का विवाद पर प्रतिक्रियाबिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से जुड़े बुर्का विवाद पर सुप्रिया सुले ने संवेदनशील रुख अपनाया उन्होंने कहा कि किसी भी परिवार की परंपरा और पहनावा उसका निजी विषय होता है घूंघट लेना हो या बुर्का पहनना यह परिवार की अपनी परंपरा है नीतीश कुमार एक वरिष्ठ नेता हैं और इस तरह के विवादों से हमें दुख होता है । -

राजा रघुवंशी मर्डर केसशिलांग कोर्ट से सोनम रघुवंशी को झटका जमानत याचिका खारिज
इंदौर । राजा रघुवंशी हत्याकांड की मास्टरमाइंड पत्नी सोनम रघुवंशी को मेघालय के शिलांग कोर्ट से झटका लगा है। कोर्ट ने सोनम की जमानत याचिका रद्द कर दी। सोनम पर इस साल मई महीने में मेघालय में हनीमून के दौरान अपने पति और राजा रघुवंशी की हत्या कराने का आरोप है। लाइव लॉ की रिपोर्ट के अनुसार मेघायलय पुलिस द्वारा इस मामले में दायर की गई 700 से ज्यादा पन्नों की चार्जशीट में दावा किया गया है कि राजा की हत्या सोनम और उसके कथित प्रेमी राज सिंह कुशवाहा ने मिलकर प्लान की थी।चार्जशीट में भाड़े पर बुलाए गए तीन कथित हत्यारों आकाश सिंह राजपूत विशाल सिंह चौहान और आनंद कुर्मी के नाम भी हैं। इस मामले में एक एडिशनल डिस्ट्रिक्ट जज ने आरोपियों पर हत्या के आरोप भी तय किए हैं। यह अपराध उस वक्त सामने आया था जब मध्य प्रदेश के इंदौर शहर में 12 मई को शादी करने वाला यह जोड़ा 23 मई को मेघालय में हनीमून के दौरान लापता हो गया था। उन्हें आखिरी बार नोंगियाट में एक होमस्टे से चेक आउट करते हुए देखा गया था।कुछ दिनों बाद उनके द्वारा किराए पर ली गई स्कूटी सोहरारिम के पास लावारिस हालत में मिली थी। फिर उनके लापता होने के लगभग 10 दिन बाद 2 जून को राजा का शव पूर्वी खासी हिल्स में वेसावडोंग फॉल्स के पास एक गहरी खाई में मिला था। राजा की पत्नी सोनम जो 8 जून तक लापता थी उत्तर प्रदेश के वाराणसी-गाजीपुर मेन रोड पर एक ढाबे के पास मिली थी। मेघालय पुलिस ने शुक्रवार को बताया कि सोनम को 21 साल के राज कुशवाहा के साथ मिलकर अपने पति की हत्या में मुख्य आरोपियों में से एक माना जा रहा है।0 -

पश्चाताप कर लें हिजाब विवाद पर बसपा सुप्रीमो मायावती ने CM नीतीश कुमार को दी सलाह
नई दिल्ली । बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने एक कार्यक्रम के मुस्लिम महिला के चेहरे से नकाब हटा दिया इसे लेकर विपक्ष के साथ कई मुस्लिमों संगठनों ने प्रतिक्रिया व्यक्त की अब इस मामले को लेकर उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री और बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने अपने एक्स हैंडल पर लंबी चौड़ी पोस्ट लिखते हुए सीएम नीतीश कुमार को सलाह दी हैबसपा चीफ मायावती ने कहा बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा डॉक्टरों को नियुक्ति पत्र वितरण के सार्वजनिक कार्यक्रम में एक मुस्लिम महिला डॉक्टर का हिजाब चेहरे का नकाब हटाने का मामला सुलझने की बजाय खासकर मंत्रियों आदि की बयानबाजी के कारण विवाद का रूप लेकर यह लगातार तूल पकड़ता ही जा रहा है जो दुखद व दुभाग्यपूर्ण है
‘पश्चाताप कर यहीं विवाद को यहीं खत्म करने का करें प्रयास’
मायावती ने कहा यह मामला पहली नजर में ही महिला सुरक्षा व सम्मान से जुड़ा होने के कारण मुख्यमंत्री के सीधे हस्तक्षेप से अब तक सुलझ जाना चाहिये था खासकर तब जब कई जगहों पर ऐसी अन्य वारदातें भी सुनने को मिल रही हैं अच्छा होगा कि मुख्यमंत्री इस घटना को सही परिप्रेक्ष्य में देखते हुये इसके लिये पश्चाताप कर लें और कड़वा होते जा रहे इस विवाद को यहीं पर खत्म करने का प्रयास करें
कथावाचक को गार्ड ऑफ ऑनर देने पर दी प्रतिक्रियाइसके अलावा मायावती ने कहा बहराइच जिला पुलिस द्वारा पुलिस परेड में स्थापित परम्परा नियमों से हटकर एक कथावाचक को सलामी देने का मामला भी काफी बड़े विवाद में है और इसको लेकर सरकार कठघरे में है पुलिस परेड व सलामी की अपनी परम्परा नियम मर्यादा अनुशासन व पवित्रता है जिसको लेकर खिलवाड़ कतई नहीं किया जाना चाहियेमायावती ने कहा यह अच्छी बात है कि यूपी के पुलिस प्रमुख ने इस घटना का संज्ञान लेकर जिला पुलिस कप्तान से जवाब तलब किया है कार्रवाई का लोगों को इंतजार है वैसे राज्य सरकार भी इसको गंभीरता से लेकर ऐसी घटनाओं की पुनरावृति पर रोक लगाये तो यह पुलिस प्रशासन अनुशासन एवं कानून का राज के हक में उचित होगा
पूर्व सीएम ने कहा जहाँ तक कल दिनांक 19 दिसम्बर से शुरू हुए उत्तर प्रदेश विधान सभा के संक्षिप्त शीतकालीन सत्र का सवाल है तो यह सत्र भी पिछले सत्रों की तरह ही जनहित व जनकल्याण के मुद्दों से दूर रहने के कारण सत्ता व विपक्ष के बीच वाद-विवाद में घिर गया है बेहतर होता कि सरकार किसानों के खाद की समस्या के साथ-साथ जनहित की अन्य समस्याओं तथा जनकल्याण के प्रति गंभीर होकर संदन में इन पर जवाबदेह होती
उन्होंने आगे कहा इसके साथ ही संसद का शीतकालीन सत्र भी राजधानी दिल्ली में वायु प्रदूषण की भीषण समस्या सहित देश व जनहित की विकराल रूप धारण कर रही समस्याओं पर विचार किये बिना ही कल समाप्त हो गया जबकि पूरे देश की निगाहें लगी थीं कि सरकार व विपक्ष दोनों देश के ज्वलन्त समस्याओं पर विचार करेंगे और इससे कुछ उम्मीद की नई किरण पैदा होगी लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं होना दुभाग्यपूर्ण देश की चिन्तायें लगातार बरकरार हैं
बांग्लादेश में बिगड़ते हालातों पर जताई चिंता
इसके अलावा मायावती ने कहा इसके साथ-साथ पड़ोसी देश बांग्लादेश में जो हालात तेजी से बिगड़ रहे हैं तथा वहाँ भी नेपाल की तरह भारत विरोधी गतिविधियाँ बढ़ रही हैं वे भी चिन्तनीय स्थिति है जिसपर भी केन्द्र सरकार समुचित संज्ञान लेकर दीर्घकालीन नीति के तहत कार्य करे तो यह उचित होगा
