Author: bharati

  • विजय थलापति की निजी जिंदगी पर चर्चा तेज: कौन हैं संगीता सोर्नालिंगम और क्यों उड़ी अफेयर की अफवाहें?

    विजय थलापति की निजी जिंदगी पर चर्चा तेज: कौन हैं संगीता सोर्नालिंगम और क्यों उड़ी अफेयर की अफवाहें?


    नई दिल्ली। विजय थलापति की पत्नी संगीता सोर्नालिंगम मूल रूप से श्रीलंकाई तमिल परिवार से ताल्लुक रखती हैं और यूनाइटेड किंगडम में पली-बढ़ी हैं। दोनों की मुलाकात एक फिल्म सेट के दौरान हुई थी, जब संगीता खुद विजय की बड़ी फैन थीं। साल 1999 में दोनों ने शादी की और उनके दो बच्चे हैं बेटा जेसन संजय और बेटी दिव्या साशा। शादी के बाद संगीता हमेशा लाइमलाइट से दूर रही हैं और परिवार को प्राथमिकता देती रही हैं।

    तलाक की अर्जी और रिश्ते में दरार की खबर

    रिपोर्ट्स के अनुसार, संगीता ने चेन्नई के चेंगलपट्टू फैमिली कोर्ट में तलाक की याचिका दायर की है। इसमें कथित तौर पर विवाह में दूरी, भावनात्मक तनाव और उपेक्षा को कारण बताया गया है।

    सूत्रों के मुताबिक, दोनों पिछले कुछ समय से अलग रह रहे हैं और सार्वजनिक कार्यक्रमों में भी साथ नजर नहीं आते।

     तृषा कृष्णन के साथ अफेयर की चर्चा क्यों?

    अफवाहों की जड़ में एक्ट्रेस तृषा कृष्णन का नाम सामने आ रहा है। फिल्म ‘लियो’ के बाद से दोनों के बीच नजदीकियों की चर्चा तेज हो गई थी।

    हाल ही में तृषा को विजय के घर और मंदिर में प्रार्थना करते देखा गया, जिससे सोशल मीडिया पर अटकलें और बढ़ गईं। हालांकि दोनों कलाकारों ने कभी भी अपने रिश्ते को लेकर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है और हमेशा इसे दोस्ती बताया है।

    राजनीतिक सफलता के बीच निजी जीवन पर सवाल

    विजय थलापति हाल ही में अपनी पार्टी तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) की जीत के बाद राजनीति में मजबूत स्थिति में नजर आ रहे हैं। ऐसे समय में उनकी निजी जिंदगी को लेकर उठे सवालों ने उनके समर्थकों को भी हैरान कर दिया है।

     अफवाह या सच्चाई? अब भी सस्पेंस कायम

    अब तक न तो विजय और न ही संगीता की ओर से तलाक या रिश्ते में दरार की आधिकारिक पुष्टि की गई है। ऐसे में यह मामला फिलहाल अफवाहों और अटकलों के बीच ही बना हुआ है।

     स्टारडम और निजी जिंदगी की उलझन

    विजय थलापति की लोकप्रियता जहां राजनीति और सिनेमा दोनों में बढ़ रही है, वहीं उनकी निजी जिंदगी पर उठे सवाल लगातार चर्चा में बने हुए हैं। आने वाले दिनों में इस मामले पर उनका रुख ही स्थिति को साफ करेगा।

  • उत्तर-पश्चिम भारत में बदला मौसम, आंधी-तूफान के साथ हुई झमाझम बारिश.. आज इन राज्यों में अलर्ट

    उत्तर-पश्चिम भारत में बदला मौसम, आंधी-तूफान के साथ हुई झमाझम बारिश.. आज इन राज्यों में अलर्ट


    नई दिल्ली।
    पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) के प्रभाव से उत्तर-पश्चिम भारत (North-West India.) के पहाड़ी इलाकों और आसपास के मैदानी क्षेत्रों में सोमवार को अचानक मौसम ने करवट ली। आंधी-तूफान (Thunderstorms) के साथ कहीं हल्की तो कहीं झमाझम बारिश (Light to heavy rain) हुई। कुछ क्षेत्रों में धूल भरी आंधी और कुछ जगहों पर ओलावृष्टि से तापमान में गिरावट दर्ज की गई। मंगलवार को भी उत्तर-पश्चिम, मध्य और पूर्वी भारत में छिटपुट से लेकर कई स्थानों पर गरज और चमक के साथ बारिश होने, 40-60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने और ओलावृष्टि की संभावना है।

    मौसम विभाग के अनुसार, उत्तर प्रदेश, पंजाब और हरियाणा में आंधी-तूफान के साथ झमाझम बारिश और ओलावृष्टि हुई है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में छिटपुट स्थानों पर 11-20 सेमी तक वर्षा दर्ज की गई है। कुछ जगहों पर 60-80 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलीं। पश्चिमी उत्तर प्रदेश, हरियाणा, झारखंड, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश और तेलंगाना में ओले गिरे। इसके अलावा, उत्तराखंड, पश्चिम बंगाल और सिक्किम, ओडिशा, तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराईकल, तटीय आंध्र प्रदेश और यनम तथा त्रिपुरा में छिटपुट स्थानों पर भारी वर्षा दर्ज की गई है।

    मौसम में बदलाव से अधिकतम तापमान में 3-5 डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट दर्ज की गई है। पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिमी बंगाल के गंगा किनारे वाले क्षेत्रों, उप-हिमालयी पश्चिमी बंगाल और सिक्किम, पूर्वोत्तर भारत और पश्चिमी हिमालय क्षेत्र में अधिकतम तापमान 36 डिग्री सेल्सियस से कम दर्ज किया गया। विदर्भ, तटीय आंध्र प्रदेश, मध्य महाराष्ट्र, राजस्थान में अधिकतम तापमान 36-40 डिग्री के बीच दर्ज किया गया। सबसे अधिक तेलंगाना के आदिलाबाद में 45.3 डिग्री सेल्सियस तापमान रहा।


    आज भी आंधी-पानी का अलर्ट

    मौसम विभाग ने जम्मू-कश्मीर-लद्दाख-गिलगित-बाल्टिस्तान-मुजफ्फरबाद और हिमाचल प्रदेश में 6 मई तक और उत्तराखंड में 8 मई तक छिटपुट से लेकर हल्की बारिश और बर्फबारी होने, गरज और बिजली की कड़क के साथ 30-50 किमी प्रति घंटा की गति से हवाएं चलने की संभावना है। मंगलवार को राजस्थान, पंजाब, हरियाणा और बिहार में भी बारिश हो सकती है। इससे गर्मी से राहत तो मिलेगी, लेकिन फसलों को नुकसान पहुंचने की भी आशंका है। दिल्ली समेत एनसीआर के गाजियाबाद, नोएडा और हापुड़ में बिजली कड़कने, तेज आंधी और ओले गिरने का अलर्ट जारी किया गया है।

  • तमिलनाडु में TVK का कमाल…. लेकिन अभी राजनीति में नहीं आना चाहते थे विजय….जानें इसकी वजह?

    तमिलनाडु में TVK का कमाल…. लेकिन अभी राजनीति में नहीं आना चाहते थे विजय….जानें इसकी वजह?


    चेन्नई।
    सोमवार को आए तमिलनाडु विधानसभा (Tamil Nadu Assembly elections) के चुनावी नतीजों में हाल ही में बनी पार्टी टीवीके (TVK) ने कमाल कर दिया। अपने पहले ही चुनाव में टीवीके चीफ थालापति विजय (TVK Chief Thalapathy Vijay) की पार्टी ने तमिलनाडु के 108 सीटों पर जीद दर्ज की है। आज पूरे देश में नई बनी पार्टी टीवीके और थालापति विजय की चर्चा है, लेकिन एक समय ऐसा भी था जब थालापति विजय राजनीति में नहीं आना चाहते थे। राजनीति में आने से पहले अपने भविष्य को लेकर विजय थालापति असमंजस में रहते थे। आइए जानते हैं उन्हें किस बात का डर था और वो राजनीति में अभी क्यों नहीं आना चाहते थे।


    किस बात का था डर

    साउथ की फिल्मों में सुपरस्टार थालापति विजय बॉक्स ऑफिस पर एकदम हिट थे और प्रदेश की जनता भी उन्हें भगवान की तरह पूजती थी, लेकिन वो राजनीति में नहीं आना चाहते थे। विजय के पिता भी चाहते थे कि वो राजनीति में आएं, लेकिन उनको अपने ऊपर पूरी तरह भरोसा नहीं था। अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर थालापति विजय निश्चित नहीं थे, इसलिए वो पार्टी नहीं बनाना चाहते थे।

    थालापति विजय ने अचानक क्यों बनाई पार्टी
    थालापति के माता-पिता उन्हें साल 2009 से ही राजनीति में लाना चाहते थे, क्योंकि पूरे तमिलनाडु में उनकी लोकप्रियता और फैन फॉलोइंग बहुत ज्यादा थी। लेकिन वो राजनीति में नहीं आए। इस दौरान वो चाहते थे कि प्रदेश में ऐसा वैक्यूम बने जब एक नई राजनीतिक पार्टी की जरूरत हो। साल 2016 में जयललिता के निधन के बाद एआईएडीएमके (AIADMK) अपनी साख खोती दिख रही थी। तमिलनाडु में मजबूत संगठन के बावजूद अपने शीर्ष नेताओं के बीच चल रही लगातार लड़ाई के कारण एआईएडीएमके ने अपनी राजनीतिक हैसियत को खत्म कर लिया। इस दौरान विजय थालापति ने एआईएडीएमके के खिलाफ बुगल फूंक दिया और बीजेपी को भी निशाने पर लिया।

    एआईएडीएमके के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप लगाए और बीजेपी के खिलाफ सांप्रदायिकता का आरोप लगाकर विजय ने जमीन पर अपना काम शुरू कर दिया। इस दौरान विजय को युवाओं और महिलाओं के बीच काफी समर्थन मिला। इसी समय विजय ने पार्टी बनाने का मन बना लिया और साल 2026 के चुनावों में कमाल करते हुए पहली बार में ही सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभर आई।

  • IPL 2026 ऑरेंज कैप रेस में बड़ा उलटफेर: रियान रिकेल्टन ने कोहली को पछाड़ा, केएल राहुल बन सकते हैं नंबर-1

    IPL 2026 ऑरेंज कैप रेस में बड़ा उलटफेर: रियान रिकेल्टन ने कोहली को पछाड़ा, केएल राहुल बन सकते हैं नंबर-1


    नई दिल्ली। इंडियन प्रीमियर लीग 2026 में बल्लेबाजों के बीच रन बनाने की होड़ अपने चरम पर पहुंच गई है। हर मैच के साथ ऑरेंज कैप की स्थिति बदल रही है और टॉप ऑर्डर में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है।

     रिकेल्टन की धमाकेदार छलांग, कोहली पीछे

    मुंबई इंडियंस के युवा बल्लेबाज रियान रिकेल्टन ने लखनऊ सुपर जायंट्स के खिलाफ 83 रनों की शानदार पारी खेलकर बड़ा असर डाला। इस पारी के बाद वह रन बनाने वालों की सूची में विराट कोहली से आगे निकल गए हैं। हालांकि वे अभी भी टॉप-5 से बाहर हैं, लेकिन सिर्फ कुछ रनों से पीछे रह गए हैं।

    मुंबई इंडियंस के इस बल्लेबाज ने अब तक 8 मैचों में 380 रन बनाए हैं। वहीं विराट कोहली 379 रनों के साथ उनसे पीछे खिसक गए हैं।

    रोहित शर्मा की दमदार वापसी, लेकिन रेस से बाहर

    एलएसजी के खिलाफ लंबे समय बाद वापसी करने वाले रोहित शर्मा ने 84 रनों की शानदार पारी खेली, लेकिन ऑरेंज कैप की दौड़ में वह काफी पीछे हैं। वे फिलहाल 28वें स्थान पर मौजूद हैं, जिससे साफ है कि उनकी फॉर्म वापसी तो हुई है, लेकिन रैंकिंग में सुधार अभी बाकी है।

     टॉप-5 बल्लेबाजों की स्थिति

    फिलहाल ऑरेंज कैप की रेस में ये खिलाड़ी आगे हैं:

    अभिषेक शर्मा – 440 रन
    केएल राहुल – 433 रन
    हेनरिक क्लासेन – 425 रन
    वैभव सूर्यवंशी – 404 रन
    साई सुदर्शन – 385 रन

    केएल राहुल अब सिर्फ 7 रनों के अंतर से नंबर-1 बनने के बेहद करीब हैं।

     आज बदल सकता है नंबर-1 का समीकरण

    आज के मुकाबले में केएल राहुल के पास बड़ा मौका है। अगर वह सिर्फ 8 रन और बना लेते हैं, तो वे अभिषेक शर्मा को पीछे छोड़कर ऑरेंज कैप अपने नाम कर सकते हैं। वहीं अभिषेक शर्मा भी अपनी बढ़त बनाए रखने के लिए पूरी ताकत झोंकेंगे।

    अभिषेक शर्मा और राहुल के बीच यह टक्कर अब टूर्नामेंट की सबसे रोमांचक रेस बन चुकी है।

     पर्पल कैप की जंग भी दिलचस्प

    गेंदबाजी में भी मुकाबला कड़ा है। भुवनेश्वर कुमार 17 विकेट के साथ पर्पल कैप पर कब्जा जमाए हुए हैं, लेकिन अंशुल कंबोज भी बराबरी पर पहुंच चुके हैं। आज का दिन यहां भी बड़ा बदलाव ला सकता है।

     हर मैच बदल रहा है समीकरण

    इंडियन प्रीमियर लीग 2026 में ऑरेंज कैप की दौड़ बेहद रोमांचक हो चुकी है। रिकेल्टन की एंट्री से जहां कोहली पीछे हुए हैं, वहीं राहुल और अभिषेक की टक्कर ने टॉप पोजिशन को और दिलचस्प बना दिया है। आने वाले मैच तय करेंगे कि इस सीजन का असली रन किंग कौन बनेगा।

  • शुभेन्दु 1 सीट से लड़ना चाहते थे….अमित शाह ने दिया 2 सीटों का फॉर्मूला… ममता को दिखाया 2021 का रीकैप

    शुभेन्दु 1 सीट से लड़ना चाहते थे….अमित शाह ने दिया 2 सीटों का फॉर्मूला… ममता को दिखाया 2021 का रीकैप


    कोलकाता।
    भारतीय जनता पार्टी (Bharatiya Janata Party) ने तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो ममता बनर्जी (Trinamool Congress supremo Mamata Banerjee) को 2021 का रीकैप दिखा दिया। सोमवार को जब नतीजे घोषित हुए तो एक बार फिर भाजपा हैवी वेट शुभेंदु अधिकारी (Shubhendu Adhikari) ने उन्हें हरा दिया, लेकिन इस बार मैदान भवानीपुर का रहा। इसके अलावा अधिकारी ने नंदीग्राम से भी जीत दर्ज कर ली है। अब खबर है कि अधिकारी सिर्फ एक ही सीट से लड़ना चाहते थे, लेकिन उन्हें दो सीटों से लड़ाने का फॉर्मूला केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह (Amit Shah) ने दिया था।


    जब अमित शाह ने बताई भवानीपुर की इनसाइड स्टोरी

    भवानीपुर सीट ममता बनर्जी का गढ़ माना जाता था। इस बार भी वह इस सीट से चुनाव लड़ रहीं थीं। 2 अप्रैल को गृह मंत्री शाह भवानीपुर में जनसभा को संबोधित कर रहे थे। तब उन्होंने कहा था, ‘शुभेंदु दा हमारे नंदीग्राम से लड़ना चाहते थे। मैंने शुभेंदु दा को कहा था कि सिर्फ नंदीग्राम नहीं, ममता के घर में जाकर उसको हराना है।’

    भवानीपुर सीट पर जीत के बाद अधिकारी ने बताया कि मतगणना के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री शाह लगातार उनके संपर्क में थे और इस हाई-प्रोफाइल मुकाबले को लेकर चिंता जताई थी।


    शुभेंदु अधिकारी ने 17 हजार का अंतर कवर किया

    भाजपा नेता और टीएमसी प्रमुख के बीच भवानीपुर में रोमांचक मुकाबला देखने को मिला था। यहां शुरुआती दौर में अधिकारी ने लीड हासिल कर ली थी, लेकिन कुछ राउंड काउंटिंग के बाद बनर्जी आगे आ गईं थीं। यहां तक कि एक समय पर वह करीब 17 हजार मतों से आगे भी चल रही थीं, लेकिन जैसे-जैसे राउंड बढ़े और अंतर कम होता गया।

    अंतिम नतीजा आया कि अधिकारी ने 20 राउंड की काउंटिंग के बाद बनर्जी को 15 हजार से ज्यादा वोटों से हराया। उन्हें कुल 73 हजार 917 वोट मिले थे। जबकि, बनर्जी को 58 हजार 812 वोट मिले। इस सीट पर तीसरे स्थान पर लेफ्ट नेता श्रीजीब बिस्वास रहे और चौथे पर महज 1257 वोट पाने वाले कांग्रेस नेता प्रदीप प्रसाद थे।


    डबल धमाका

    ऐसा ही नतीजा नंदीग्राम से भी देखने को मिला, जहां अधिकारी ने अपने पूर्व करीबी और टीएमसी प्रत्याशी पवित्र कर को 9 हजार से ज्यादा वोटों से हराया। यहां उन्होंने 1 लाख 27 हजार 301 वोट पाकर जीत दर्ज की। सीट पर कांग्रेस पांचवें स्थान पर रही और महज 794 वोट ही हासिल कर सकी।


    जीत के क्या बोले अधिकारी

    अधिकारी ने इसे निर्णायक राजनीतिक क्षण बताया है। चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद, जीत का प्रमाणपत्र दिखाते हुए राज्य विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष अधिकारी ने सोमवार को कहा कि बनर्जी को उनके गढ़ में हराना प्रतीकात्मक और रणनीतिक, दोनों ही दृष्टि से अहम है। उन्होंने कहा, ‘यह बहुत महत्वपूर्ण है। ममता बनर्जी को हराना काफी मायने रखता है।’

    अधिकारी ने दावा किया कि यह चुनाव परिणाम ममता के राजनीतिक करियर के अंत का संकेत है। उन्होंने कहा, ‘यह जीत हिंदुत्व की जीत है।’ उन्होंने दावा किया कि विभिन्न वर्गों, यहां तक कि अन्य दलों के पारंपरिक समर्थकों ने भी उनका समर्थन किया। उन्होंने दावा किया कि निर्वाचन क्षेत्र में वामपंथी मतदाताओं के एक वर्ग ने उनका समर्थन किया, जिससे तृणमूल कांग्रेस विरोधी वोटों को एकजुट करने में मदद मिली।

  • CG: कबीरधाम जिले में पुल से नीचे गिरी बेकाबू कार…. 4 युवकों की मौत

    CG: कबीरधाम जिले में पुल से नीचे गिरी बेकाबू कार…. 4 युवकों की मौत


    कबीरधाम।
    छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) के कबीरधाम जिले (Kabirdham district) में एक कार अनियंत्रित होकर पुल से नीचे गिर (Car Skidded off Bridge) गई। इस हादसे में कार पर सवार चार युवकों की मौत हो गई। दुर्घटना में दो अन्य घायल हो गए। घटना की जानकारी देते हुए पुलिस अधिकारियों ने बताया कि जिले के पंडरिया इलाके में पांडातराई के करीब गड़ाई गांव स्थित एक छोटे पुल से तेज गति से जा रही कार अनियंत्रित होकर नीचे गई। इस घटना में अरमान अली (20), मोहम्मद सैफ (19), अनस अली (21) और कौनैन (19) की मौत हो गई तथा दो अन्य जुनेद रजा (21) और आरजू खान (19) घायल हो गए हैं।

    पुलिस को मिली सूचना के अनुसार, रायपुर के बिरगांव निवासी युवक एक कार में सवार होकर विवाह समारोह में शामिल होने पंडरिया के लिए रवाना हुए थे। रविवार देर रात जब वह गड़ाई गांव स्थित एक छोटे पुल के करीब पहुंचे तब उसकी कार अनियंत्रित होकर पुल से लगभग 50 फुट नीचे गिर गई। इस घटना में चार युवकों की मौत हो गई तथा दो अन्य घायल हो गए।

    अधिकारियों ने बताया कि घटना की जानकारी मिलने के बाद पुलिस दल को घटनास्थल के लिए रवाना किया गया तथा शवों और घायलों को अस्पताल भेजा गया। उन्होंने बताया कि घायल युवकों को बेहतर इलाज के लिए रायपुर के अस्पताल में भर्ती कराया गया है। अधिकारियों ने बताया कि पुलिस मामला दर्ज कर जांच कर रही है।

  • MP: भोजशाला मामले में HC बोला- ASI सर्वे की वीडियोग्राफी पर मुस्लिम पक्ष 3 दिन में दर्ज कराएं आपत्तियां

    MP: भोजशाला मामले में HC बोला- ASI सर्वे की वीडियोग्राफी पर मुस्लिम पक्ष 3 दिन में दर्ज कराएं आपत्तियां


    इंदौर
    मध्य प्रदेश हाई कोर्ट (Madhya Pradesh High Court) की इंदौर पीठ (Indore Bench) ने धार के विवादित भोजशाला परिसर (Disputed Bhojshala complex) के वैज्ञानिक सर्वेक्षण की वीडियोग्राफी पर मुस्लिम पक्ष को 3 दिन के भीतर अपनी लिखित आपत्तियां दर्ज करने का निर्देश दिया है। सुनवाई के दौरान मुस्लिम पक्ष के वकील ने तकनीकी समस्याओं के कारण वीडियोग्राफी नहीं देख पाने की बात कही। इसके बाद अदालत ने आईटी विभाग को तुरंत एक्सेस देने और वरिष्ठ अधिवक्ता सलमान खुर्शीद (Salman Khurshid) के साथ इसे साझा करने का आदेश दिया। उधर, एएसआई ने स्पष्ट किया कि 1904 से यह स्मारक उनके संरक्षण में है। एएसआई ने दो-टूक कहा कि 1935 के ‘मस्जिद’ घोषित करने वाले दावे की अब कोई कानूनी मान्यता नहीं है।

    भोजशाला को हिंदू समुदाय वाग्देवी (देवी सरस्वती) का मंदिर मानता है, जबकि मुस्लिम पक्ष इस स्मारक को कमाल मौला मस्जिद बताता है। यह विवादित परिसर एएसआई द्वारा संरक्षित है। धार की मौलाना कमालुद्दीन वेलफेयर सोसाइटी के वकील तौसीफ वारसी ने जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी के सामने तकनीकी समस्याओं का हवाला दिया।

    तौसीफ वारसी ने कहा कि उन्हें इस परिसर में एएसआई के वैज्ञानिक सर्वेक्षण के दौरान की गई वीडियोग्राफी तक पहुंच नहीं मिल सकी है। उधर, एएसआई के एक वकील ने कहा कि अदालत के निर्देशानुसार इस वीडियोग्राफी को गूगल ड्राइव पर उपलब्ध कराया गया था। मौलाना कमालुद्दीन वेलफेयर सोसाइटी के वकील को उसका एक्सेस भी दे दिया गया था।

    खंडपीठ ने दोनों पक्षों की बात सुनने के बाद वारसी को वीडियोग्राफी देखने की सुविधा उपलब्ध कराए जाने के निर्देश दिए और इसके लिए हाई कोर्ट के आईटी अनुभाग को जरूरी व्यवस्था करने के लिए कहा। अदालत ने यह भी कहा कि मौलाना कमालुद्दीन वेलफेयर सोसाइटी की ओर से पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता सलमान खुर्शीद के ई-मेल पते पर अतिरिक्त पहुंच उपलब्ध कराते हुए उनसे वीडियोग्राफी जल्द से जल्द साझा की जाए।


    पेश कीं दलीलें

    खंडपीठ ने निर्देश दिया कि मौलाना कमालुद्दीन वेलफेयर सोसाइटी इस वीडियोग्राफी पर 7 मई तक अपनी लिखित आपत्तियां प्रस्तुत करे। सुनवाई के दौरान अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल सुनील कुमार जैन ने ASI की ओर से धार के विवादित परिसर के संरक्षण के इतिहास के बारे में दलीलें पेश कीं।


    मुस्लिम पक्ष का दावा- मस्जिद घोषित था स्मारक

    अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल सुनील कुमार जैन ने कहा कि यह परिसर साल 1904 से एक संरक्षित स्मारक है। यह एएसआई के नियामकीय नियंत्रण में रहा है। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में मुस्लिम पक्ष के एक याचिकाकर्ता ने दावा किया है कि 1935 में तत्कालीन धार रियासत के दरबार ने 11वीं सदी के इस स्मारक को मस्जिद घोषित किया था।


    5 मई को भी जारी रहेंगी दलीलें

    अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल सुनील कुमार जैन ने मुस्लिम पक्ष के दावे को काटते हुए कहा कि यह ऐलान ASI संरक्षित स्मारकों से जुड़े प्रावधानों के कारण निष्प्रभावी हो चुका है। इसे कोई कानूनी मान्यता हासिल नहीं है। सुनील कुमार जैन की दलीलें 5 मई को भी जारी रहेंगी। अदालत ने भोजशाला मंदिर-कमाल मौला मस्जिद परिसर के धार्मिक स्वरूप को लेकर दायर 4 याचिकाओं और एक रिट अपील पर 6 अप्रैल से नियमित सुनवाई कर रहा है।

  • मेक्सिकन नेवी हेलिकॉप्टर उड़ान भरते ही लड़खड़ाकर जमीन पर गिरा… कैमरे में कैद हुई घटना

    मेक्सिकन नेवी हेलिकॉप्टर उड़ान भरते ही लड़खड़ाकर जमीन पर गिरा… कैमरे में कैद हुई घटना


    मेक्सिको।
    सोशल मीडिया (Social media) पर इस समय एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है. इस वीडियो में आप देख सकते हैं कि एक मेक्सिकन नेवी का हेलिकॉप्टर (Mexican Navy Helicopter Crash) उड़ान भरते ही अचानक लड़खड़ा कर गिर जाता है. इस वीडियो ने मेक्सिकन नौसेना (Mexican Navy) को झकझोर कर रख दिया है. दावा किया जा रहा है कि यह वायरल वीडियो मेक्सिको के मिशोआकान (Michoacan) राज्य में लाजारो कार्डेनास (Lazaro Cardenas) बंदरगाह से लगभग 370 किमी दक्षिण-पश्चिम में समुद्र के बीचों-बीच हुआ है. फिलहाल इसकी अभी कोई पुष्टि नहीं हो पाई है।


    कैसे हुआ यह हादसा?

    वायरल वीडियो में आप देख सकते हैं कि कैसे एक मेक्सिकन नौसेना (Mexican Navy) का हेलिकॉप्टर आराम से हेलिपैड पर खड़ा रहता है. इसके बाद वह उड़ान भरने के लिए तैयार होता है. उड़ान भरने के कुछ ही सेकंड बाद हेलिकॉप्टर अनियंत्रित होकर जमीन पर गिर जाता है. यह हादसा तब हुआ जब हेलिकॉप्टर महज कुछ मीटर की ऊंचाई पर ही था. इस हादसे की मुख्य वजह इंजन का पावर फेलियर बताया जा रहा है. वीडियो में दिख रहा है कि हेलिकॉप्टर के उड़ान भरते ही पायलट नियंत्रण खो बैठा और हेलिकॉप्टर ड्रॉप डेड (सीधे नीचे गिरना) की स्थिति में जमीन से टकरा गया।


    घटना कहां और कब हुई?

    इसकी कोई आधिकारिक जानकारी अभी तक सामने नहीं आई है. लेकिन कुछ मीडिया रिपोर्ट्स और सोशल मीडिया पोस्ट में दावा किया जा रहा है कि यह हादसा मेक्सिको के मिशोआकान (Michoacan) राज्य में लाजारो कार्डेनास (Lazaro Cardenas) बंदरगाह से लगभग 370 किमी दक्षिण-पश्चिम में कहीं हुआ है. बताया जा रहा है कि हेलिकॉप्टर एक गश्त पर जाने के लिए उड़ान भर रहा था, लेकिन टेक-ऑफ के कुछ ही सेकंड बाद वह अनियंत्रित होकर जमीन पर गिर गया. फिलहाल इसकी कोई आधिकारिक जानकारी अभी तक नहीं मिल पाई है।


    कैमरे में कैद हुई घटना

    वायरल वीडियो में हेलिकॉप्टर के रोटर्स को घूमते हुए और फिर अचानक विमान को डगमगाते हुए देखा जा सकता है. जमीन से टकराते ही धूल का गुबार उठा और वहां मौजूद लोग मदद के लिए दौड़ते नजर आए. आधिकारिक तौर पर अभी तक घायलों या नुकसान की कोई सटीक संख्या या जानकारी सामने नहीं आई है. हालांकि, इतनी कम ऊंचाई से गिरने के कारण बड़े विस्फोट की संभावना कम रही, जो चालक दल के लिए राहत की बात हो सकती है।


    जांच के आदेश

    मेक्सिकन नौसेना ने इस दुर्घटना के कारणों का पता लगाने के लिए जांच शुरू कर दी है. शुरुआती कयासों में इंजन फेलियर या ‘पायलट एरर’ को संभावित कारण माना जा रहा है।

  • बंगाल : घर की दहलीज से विधानसभा तक पहुंचीं रत्ना देवनाथ, बेटी को खोने का दर्द बना ताकत

    बंगाल : घर की दहलीज से विधानसभा तक पहुंचीं रत्ना देवनाथ, बेटी को खोने का दर्द बना ताकत


    कोलकाता । पश्चिम बंगाल में इस बार राजनीतिक परिदृश्य पूरी तरह बदल गया। जहां एक ओर तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी समेत कई बड़े नेताओं को करारी हार का सामना करना पड़ा, वहीं दूसरी ओर आरजी कर मामले की पीड़िता की मां रत्ना देवनाथ ने अपनी पहली ही चुनावी पारी में बड़ी जीत दर्ज की। उन्होंने टीएमसी उम्मीदवार तीर्थंकर घोष को 28 हजार से अधिक वोटों से हराया।

    कौन हैं रत्ना देवनाथ
    रत्ना देवनाथ का राजनीति से कोई लंबा अनुभव नहीं था, लेकिन जीवन की एक बड़ी त्रासदी ने उन्हें जनता के बीच खड़ा कर दिया। 54 वर्षीय रत्ना देवनाथ, पति रंजन देवनाथ के साथ रहती हैं और चुनावी हलफनामे के अनुसार उनके पास लगभग 74 लाख रुपये की संपत्ति है। बेटी के साथ हुई दर्दनाक घटना ने उन्हें व्यवस्था के खिलाफ आवाज उठाने के लिए मजबूर किया। उन्होंने महिलाओं की सुरक्षा को लेकर समाज में बदलाव की जरूरत पर जोर दिया और इसी उद्देश्य के साथ राजनीति में कदम रखा।

    घर की दहलीज से चुनाव के मैदान तक
    साल 2024 में आरजी कर अस्पताल में मेडिकल छात्रा के साथ हुई दरिंदगी और हत्या ने पूरे राज्य को झकझोर दिया। इस घटना के बाद सरकार और प्रशासन पर गंभीर सवाल उठे। इसी मुद्दे को लेकर बीजेपी ने महिला सुरक्षा को अपने चुनावी एजेंडे में प्रमुखता से शामिल किया और रत्ना देवनाथ को पानीहाट सीट से उम्मीदवार बनाया। यह कदम उनके जीवन का बड़ा मोड़ साबित हुआ।

    रत्ना के लिए पीएम मोदी ने की रैली
    चुनाव प्रचार के दौरान रत्ना देवनाथ ने खुलकर कहा कि उनका संघर्ष मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से है, क्योंकि पीड़िता के मामले में न्याय की उम्मीदें कमजोर पड़ीं। नामांकन के समय पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी मौजूद रहीं, जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 24 अप्रैल को पानीहाट में रैली कर उनके समर्थन में जनसभा की।

    चुनाव परिणाम
    इस बार पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला। 293 सीटों में से बीजेपी ने 207 सीटें जीतकर ऐतिहासिक प्रदर्शन किया, जबकि टीएमसी केवल 80 सीटों पर सिमट गई। कांग्रेस को 2 और लेफ्ट फ्रंट को भी 2 सीटें मिलीं। ममता बनर्जी अपनी भवानीपुर सीट भी नहीं बचा पाईं।

  • 90 दिन जंक फूड से दूरी ने बदली जिंदगी, शरीर ने खुद संभाला हेल्थ का बैलेंस..

    90 दिन जंक फूड से दूरी ने बदली जिंदगी, शरीर ने खुद संभाला हेल्थ का बैलेंस..

    नई दिल्ली।25 साल की पूजा की जिंदगी शहर में आने के बाद काफी बदल चुकी थी। पढ़ाई और नौकरी के बीच बाहर का खाना उसकी रोजमर्रा की आदत बन गया था। पिज्जा, बर्गर और फ्राइड फूड उसके लिए सामान्य विकल्प थे, क्योंकि तेज रफ्तार जिंदगी में यही सबसे आसान रास्ता लगता था। शुरुआत में उसे इस पर कोई खास ध्यान नहीं था, लेकिन धीरे-धीरे शरीर ने संकेत देने शुरू कर दिए। लगातार एसिडिटी, पेट में भारीपन, थकान और चेहरे की चमक कम होने जैसी समस्याएं उसे परेशान करने लगीं।

    इन बदलावों को महसूस करने के बाद उसने अपने खाने की आदतों पर ध्यान देना शुरू किया और एक दिन खुद को चुनौती दी कि वह 90 दिनों तक पूरी तरह जंक फूड से दूरी बनाए रखेगी। यह फैसला उसके लिए आसान नहीं था, क्योंकि यह उसकी दिनचर्या का हिस्सा बन चुका था। शुरुआत के दिन काफी कठिन रहे, जब बार-बार बाहर का स्वादिष्ट खाना खाने की इच्छा होती थी और पुरानी आदतें उसे बार-बार आकर्षित करती थीं।

    पहले हफ्ते में सबसे बड़ी चुनौती क्रेविंग्स थीं। शाम के समय खासकर तला-भुना या मसालेदार खाना खाने की इच्छा इतनी बढ़ जाती थी कि वह कई बार अपने निर्णय पर दोबारा सोचने लगती थी। लेकिन उसने खुद को व्यस्त रखने और घर के खाने पर ध्यान देने का तरीका अपनाया। धीरे-धीरे उसने घर पर ही हेल्दी और स्वादिष्ट विकल्प तैयार करने शुरू किए, जिससे उसका मन भी संतुष्ट रहने लगा और शरीर को भी बेहतर पोषण मिलने लगा।

    तीसरे हफ्ते तक पहुंचते-पहुंचते उसके शरीर में बदलाव दिखने लगे। पाचन पहले से बेहतर हो गया और पेट की समस्याएं काफी हद तक कम हो गईं। जो असहजता और भारीपन पहले रोज महसूस होता था, वह धीरे-धीरे खत्म होने लगा। इसके साथ ही उसकी ऊर्जा में भी सुधार आने लगा और वह पहले से ज्यादा हल्का महसूस करने लगी।

    एक महीने के बाद सबसे बड़ा बदलाव उसकी खाने की इच्छा में देखा गया। जो फूड पहले उसे बहुत आकर्षित करता था, अब उसकी क्रेविंग्स काफी कम हो चुकी थीं। उसे खुद भी आश्चर्य हुआ कि बिना जंक फूड के भी वह पूरी तरह संतुलित और सामान्य महसूस कर रही थी। धीरे-धीरे उसका शरीर नए पैटर्न के अनुसार ढल गया और पुरानी आदतें कमजोर पड़ने लगीं।

    90 दिनों का यह अनुभव उसके लिए सिर्फ एक डाइट चैलेंज नहीं रहा, बल्कि पूरी जीवनशैली बदलने वाली प्रक्रिया बन गया। इस दौरान उसने समझा कि शरीर को अगर सही पोषण और संतुलन मिले तो वह खुद ही अपने आप को बेहतर तरीके से संभाल सकता है। अब उसकी आदतें पहले से ज्यादा स्वस्थ हो चुकी थीं और वह अपनी दिनचर्या में अधिक ऊर्जा और संतुलन महसूस कर रही थी।