Author: bharati

  • मुरैना का रहस्यमयी ककनमठ मंदिर भूतों द्वारा बना 1000 साल पुराना शिव मंदिर

    मुरैना का रहस्यमयी ककनमठ मंदिर भूतों द्वारा बना 1000 साल पुराना शिव मंदिर


    मुरैना । मध्य प्रदेश के मुरैना जिले में स्थित ककनमठ मंदिर जो कि भगवान शिव को समर्पित है अपनी रहस्यमयी और ऐतिहासिक स्थिति के कारण एक विशेष स्थान रखता है। यह मंदिर ना सिर्फ धार्मिक महत्व रखता है बल्कि एक दिलचस्प किंवदंती के कारण भी चर्चा का विषय बना हुआ है। यह मंदिर 1000 साल पुराना माना जाता है और इसके निर्माण से जुड़ी रहस्यमयी कहानी इसे और भी दिलचस्प बना देती है।
    भूतों द्वारा मंदिर का निर्माण
    ककनमठ मंदिर को ‘भूतों का मंदिर’ भी कहा जाता है। स्थानीय लोग मानते हैं कि इस मंदिर का निर्माण एक रात में भूतों ने किया था। किंवदंती के अनुसार जब भूत इस मंदिर का निर्माण करने के अंतिम चरण में थे तभी एक गांव की महिला ने हाथ से चलने वाली चक्की चला दी जिससे भूतों का काम अधूरा रह गया। इस घटना के बाद भूत मंदिर छोड़कर भाग गए और मंदिर का निर्माण कभी पूरा नहीं हो सका। यही कारण है कि आज भी यह मंदिर अधूरा और खंडहर में बदला हुआ दिखाई देता है।
    अद्भुत वास्तुकला
    ककनमठ मंदिर की वास्तुकला अत्यंत अद्भुत है। मंदिर के निर्माण में न तो सीमेंट का उपयोग किया गया है और न ही चूने का बल्कि एक के ऊपर एक विशाल पत्थर रखे गए हैं जो बिना किसी जोड़ के एक साथ जुड़े हुए हैं। इसके बावजूद यह मंदिर पिछले एक हजार सालों से प्राकृतिक आपदाओं आंधी-तूफान और भूकंप जैसी घटनाओं का सामना करने के बावजूद अपनी जगह पर खड़ा है। यह मंदिर 115 फीट ऊंचा है और इसकी संरचना देखते ही बनती है।
    खंडित मूर्तियां और इतिहास
    ककनमठ मंदिर में कई हिंदू देवी-देवताओं की मूर्तियां पाई जाती हैं लेकिन इनमें से अधिकांश खंडित अवस्था में हैं। इतिहासकारों का मानना है कि ये मूर्तियां विदेशी आक्रमणकारियों द्वारा तोड़ी गईं थीं। इसके अलावा आसपास के क्षेत्रों में इस मंदिर से संबंधित कई अवशेष भी पाए गए हैं। आज भी पुरातत्वविदों द्वारा किए गए उत्खनन में नई-नई जानकारी और अवशेष मिलते रहते हैं।
    मौसम की मार और मंदिर की अवस्था
    मंदिर की खंडहर स्थिति का मुख्य कारण इसका समय के साथ खराब होना है। पुरातत्व विशेषज्ञ डॉ. अशोक शर्मा के अनुसार मंदिर की खंडित अवस्था का कारण यहां की कठोर जलवायु और मौसम की मार है। हालांकि इस मंदिर का ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व आज भी बरकरार है।
    किवदंतियां और भविष्यवाणी
    किवदंतियों के अनुसार जब नाई जाति के नौ काने दूल्हे जिनकी एक आंख फूटी हो एक साथ इस मंदिर में पहुंचेंगे तो यह मंदिर पूरी तरह से ढह जाएगा। यह एक दिलचस्प और रहस्यमयी मान्यता है जो इस मंदिर के आसपास की लोककथाओं को और भी आकर्षक बनाती है। कैसे पहुंचे ककनमठ मंदिर मुरैना शहर से लगभग 35 किलोमीटर दूर सिहोनिया गांव में स्थित है। यहां तक पहुंचने के लिए आपको निजी वाहन या किराए पर वाहन लेना होगा क्योंकि इस मार्ग पर कोई सार्वजनिक परिवहन नहीं चलता है। जब आप इस मंदिर के पास पहुंचेंगे तो आपको 3 किलोमीटर दूर से ही इसका गुंबद दिखाई देगा।

    ककनमठ मंदिर न सिर्फ धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है बल्कि यह भारतीय इतिहास और संस्कृति का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है। भूतों से जुड़ी कहानियां मंदिर की अद्भुत वास्तुकला और इसके रहस्यमयी इतिहास ने इसे एक दिलचस्प स्थल बना दिया है जो पर्यटकों को आकर्षित करता है।

  • IPL 2026 मिनी ऑक्शन: विदेशी खिलाड़ियों पर 18 करोड़ की लिमिट, अबू धाबी में 16 दिसंबर को लगेगी बोली

    IPL 2026 मिनी ऑक्शन: विदेशी खिलाड़ियों पर 18 करोड़ की लिमिट, अबू धाबी में 16 दिसंबर को लगेगी बोली


    नई दिल्ली /इंडियन प्रीमियर लीग IPL 2026 के मिनी ऑक्शन को लेकर क्रिकेट फैंस के बीच उत्साह चरम पर है। यह मिनी ऑक्शन 16 दिसंबर 2025 को अबू धाबी में आयोजित किया जाएगा। इस बार ऑक्शन में कुल 359 खिलाड़ियों को शॉर्टलिस्ट किया गया है, जिनमें से 77 खिलाड़ियों को 10 आईपीएल टीमें खरीद सकेंगी। इनमें 31 विदेशी खिलाड़ी भी शामिल हैं, जिन पर खासतौर पर सभी फ्रेंचाइजियों की नजर रहने वाली है। इस मिनी ऑक्शन की सबसे बड़ी खासियत आईपीएल का नया नियम है, जिसके तहत किसी भी विदेशी खिलाड़ी को अधिकतम 18 करोड़ रुपए से ज्यादा नहीं मिल सकेंगे, चाहे ऑक्शन में बोली कितनी भी ऊंची क्यों न चली जाए।

    क्या है Maximum Fee Rule?
    बीसीसीआई BCCI ने आईपीएल में वित्तीय संतुलन और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए Maximum Fee Rule लागू किया है। इस नियम के अनुसार, विदेशी खिलाड़ियों की अधिकतम कीमत दो मानकों में से कम राशि के आधार पर तय होती है-हाईएस्ट रिटेंशन स्लैबपिछले मेगा ऑक्शन में सबसे महंगे खिलाड़ी की कीमत आईपीएल 2026 के लिए हाईएस्ट रिटेंशन स्लैब 18 करोड़ रुपए तय किया गया है। वहीं, पिछले मेगा ऑक्शन में ऋषभ पंत 27 करोड़ रुपए में बिके थे। नियम के मुताबिक, इन दोनों में से कम राशि को अधिकतम सीमा माना जाता है। इसी वजह से इस बार विदेशी खिलाड़ियों के लिए 18 करोड़ रुपए की कैप लागू की गई है।

    ज्यादा बोली लगी तो पैसा कहां जाएगा?
    अगर कोई टीम किसी विदेशी खिलाड़ी पर, मान लीजिए, 20 करोड़ रुपए की बोली लगाती है, तो खिलाड़ी को सिर्फ 18 करोड़ रुपए ही मिलेंगे।बचे हुए 2 करोड़ रुपए सीधे BCCI के पास जाएंगे।
    बीसीसीआई ने साफ किया है कि यह अतिरिक्त राशि खिलाड़ियों के कल्याण, विकास और क्रिकेट से जुड़ी योजनाओं में इस्तेमाल की जाएगी। हालांकि, टीम के कुल पर्स बजट से पूरी 20 करोड़ रुपए की राशि घटा दी जाएगी। यानी टीम को आर्थिक नुकसान होगा, लेकिन खिलाड़ी को तय सीमा से ज्यादा पैसा नहीं मिलेगा।इस नियम का मकसद ऑक्शन में बेलगाम बोली को रोकना और लीग में आर्थिक संतुलन बनाए रखना है। मिनी ऑक्शन से पहले टीमों की स्थिति आईपीएल 2026 मिनी ऑक्शन से पहले कुछ टीमों के पास भारी भरकम बजट मौजूद है। कोलकाता नाइट राइडर्स KKR के पास सबसे ज्यादा 64.30 करोड़ रुपए बचे हैं। चेन्नई सुपर किंग्स CSK के पास 43.40 करोड़ रुपए का पर्स उपलब्ध है। इन दोनों टीमों के पास विदेशी और घरेलू दोनों तरह के खिलाड़ियों पर खुलकर बोली लगाने का मौका रहेगा। हालांकि विदेशी खिलाड़ियों के लिए 18 करोड़ की सीमा उनकी रणनीति को प्रभावित कर सकती है।

    रणनीति और रोमांच का संगम
    IPL 2026 का यह मिनी ऑक्शन सिर्फ खिलाड़ियों की खरीद-बिक्री तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह रणनीति, बजट मैनेजमेंट और दूरदर्शिता की भी परीक्षा होगा।टीमों को यह तय करना होगा कि वे सीमित स्लॉट्स में किस खिलाड़ी पर दांव लगाएं और कहां पैसा बचाकर संतुलित टीम बनाएं। बीसीसीआई का यह नया नियम लीग को लंबे समय तक स्थिर और प्रतिस्पर्धी बनाए रखने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। इससे न सिर्फ टीमों के बीच बराबरी बनी रहेगी, बल्कि खिलाड़ियों के हितों की भी रक्षा होगी। मिनी ऑक्शन के बाद यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि कौन-सी टीम अपनी रणनीति में सफल रहती है, कौन-से विदेशी सितारे 18 करोड़ की लिमिट तक पहुंचते हैं और किस फ्रेंचाइजी की बोली सबसे ज्यादा चर्चा में रहती है।

  • पूर्व डीजीपी आर श्रीलेखा बनीं तिरुवनंतपुरम के पहले बीजेपी मेयर उम्मीदवार वाम मोर्चे को दी हार

    पूर्व डीजीपी आर श्रीलेखा बनीं तिरुवनंतपुरम के पहले बीजेपी मेयर उम्मीदवार वाम मोर्चे को दी हार


    नई दिल्ली । केरल की पहली महिला आईपीएस अधिकारी और पूर्व डीजीपी आर श्रीलेखा ने तिरुवनंतपुरम में हुए निकाय चुनाव में ऐतिहासिक जीत दर्ज की है। उन्होंने संस्थामंगलम डिवीजन में बड़ी जीत हासिल की है जिससे राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि बीजेपी उन्हें तिरुवनंतपुरम नगर निगम का मेयर बना सकती है। यह चुनाव केरल की राजनीति में महत्वपूर्ण बदलाव का संकेत है खासकर तब जब बीजेपी ने एलडीएफ वाम लोकतांत्रिक मोर्चा को हराकर नगर निगम में सत्ता हासिल की है। एलडीएफ को 40 साल बाद इस नगर निगम से बाहर किया गया है।

    लेखा का राजनीतिक सफर

    आर श्रीलेखा ने 2024 में बीजेपी जॉइन की थी और इसके बाद उन्होंने नगर निगम चुनाव में वॉर्ड सदस्य के रूप में चुनावी मैदान में उतरने का निर्णय लिया। श्रीलेखा की जीत ने यह साबित कर दिया कि जनता ने उनकी मेहनत और प्रयासों को सराहा है। वह पार्टी के फैसले को सम्मान देने का बयान देती हैं और कहती हैं कि वह तिरुवनंतपुरम में बीजेपी की पहली महिला मेयर बनने को लेकर खुश हैं अगर पार्टी उन्हें यह जिम्मेदारी देती है।

    एलडीएफ और कांग्रेस की आलोचनाओं के बावजूद जीत

    श्रीलेखा ने इस दौरान यह भी कहा कि जब उनकी उम्मीदवारी की घोषणा हुई थी तब एलडीएफ और कांग्रेस ने उनकी कड़ी आलोचना की थी। दोनों पार्टियों ने उनके खिलाफ कई आरोप लगाए थे लेकिन श्रीलेखा ने जनता के समर्थन को धन्यवाद दिया और कहा कि उन्होंने पार्टी विरोधियों को उचित जवाब दिया है।

    तिरुवनंतपुरम नगर निगम चुनाव के परिणाम

    शनिवार को हुए चुनाव परिणामों के बाद यह साफ हो गया कि बीजेपी ने तिरुवनंतपुरम नगर निगम में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरने में सफलता प्राप्त की है। बीजेपी ने 101 सदस्यीय नगर निगम में 50 वॉर्डों में जीत हासिल की है जबकि एलडीएफ को सिर्फ 29 सीटें मिली हैं। कांग्रेस की अगुआई वाली यूडीएफ को 19 सीटें मिलीं। यह परिणाम बीजेपी की ताकत और पार्टी के लिए केरल में एक नई शुरुआत का प्रतीक है।

    आर श्रीलेखा का आईपीएस करियर

    आर श्रीलेखा ने जनवरी 1987 में केरल की पहली महिला आईपीएस अधिकारी के तौर पर सेवा शुरू की थी। उन्होंने अपने करियर में कई अहम पदों पर कार्य किया जिनमें सीबीआई केरल क्राइम ब्रांच विजिलेंस फायर फोर्स और मोटर व्हीकल डिपार्टमेंट शामिल हैं। 2017 में वह केरल की डीजीपी बनीं और इसके बाद उन्हें भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़े कदम उठाने के लिए जाना गया। उनके सीबीआई कार्यकाल के दौरान उन्हें “रेड श्रीलेखा” का उपनाम भी मिला था क्योंकि वह बिना किसी डर के छापे मारती थीं और भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कदम उठाती थीं।

    राजनीति में कदम

    रिटायरमेंट के बाद आर श्रीलेखा ने राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाई। वह अक्सर सार्वजनिक मामलों में अपनी राय रखती रहीं जैसे कि अभिनेता दिलीप पर लगे यौन उत्पीड़न के आरोपों और कांग्रेस नेता राहुल मामकूटाथिल पर केस में देरी को लेकर सवाल उठाना। अक्टूबर 2024 में उन्होंने औपचारिक रूप से बीजेपी जॉइन की और अब चर्चा है कि पार्टी उन्हें तिरुवनंतपुरम नगर निगम का मेयर बना सकती है।

    आर श्रीलेखा की तिरुवनंतपुरम में मिली जीत न केवल उनके राजनीतिक करियर की सफलता का प्रतीक है बल्कि यह केरल की राजनीति में भी एक नए युग की शुरुआत का संकेत देती है। अगर उन्हें बीजेपी का मेयर बनाया जाता है तो यह केरल में पार्टी के लिए एक बड़ी उपलब्धि होगी खासकर तब जब राज्य में वाम मोर्चे के कई दशकों से कायम रहे प्रभुत्व को चुनौती मिल रही है।

  • ट्रंप के बयान के बाद इल्हान उमर का दावा: बेटे से ICE ने मांगा नागरिकता का सबूत..

    ट्रंप के बयान के बाद इल्हान उमर का दावा: बेटे से ICE ने मांगा नागरिकता का सबूत..


    नई दिल्ली /अमेरिका में प्रवासियों को लेकर सख्त नीतियों और बयानबाज़ी के बीच एक नया विवाद सामने आया है। मिनेसोटा से डेमोक्रेटिक सांसद इल्हान उमर ने दावा किया है कि उनके बेटे अदनान हिरसी को अमेरिकी इमिग्रेशन एंड कस्टम्स एनफोर्समेंट ICE के एजेंट्स ने सार्वजनिक स्थान पर रोककर उसकी नागरिकता का सबूत मांगा। यह घटना ऐसे वक्त हुई है जब कुछ ही दिन पहले पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इल्हान उमर को लेकर बेहद आपत्तिजनक टिप्पणी की थी।

    इल्हान उमर के अनुसार शनिवार को उनका बेटा एक स्टोर से खरीदारी कर रहा था। तभी वहां मौजूद कुछ फेडरल एजेंट्स ने उसे रोका और उसकी पहचान व नागरिकता से जुड़े दस्तावेज दिखाने को कहा। उमर ने बताया कि उनका बेटा अपना अमेरिकी पासपोर्ट साथ रखता है जिसे दिखाने के बाद एजेंट्स ने उसे जाने दिया।उन्होंने इस घटना को अमेरिका में प्रवासियों और अल्पसंख्यकों के साथ बढ़ती सख्ती का उदाहरण बताया। उमर का कहना है कि मौजूदा माहौल में केवल नाम रंग या पृष्ठभूमि के आधार पर लोगों को संदेह की नजर से देखा जा रहा है।

    सीबीएस न्यूज के अनुसार हाल के दिनों में फेडरल एजेंसियों को अवैध अप्रवासियों की पहचान और जांच के लिए ज्यादा सक्रिय रहने के निर्देश दिए गए हैं। हालांकि इल्हान उमर के बेटे से हुई इस घटना पर ICE की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।इल्हान उमर अमेरिका की राजनीति में एक चर्चित नाम हैं। वह सोमालिया मूल की अमेरिकी नागरिक हैं और कांग्रेस में अपने बेबाक बयानों के लिए जानी जाती हैं। कश्मीर मुद्दे पर भारत सरकार की आलोचना और पाकिस्तान के पक्ष में दिए गए बयानों को लेकर भी वह कई बार विवादों में रही हैं।डोनाल्ड ट्रंप ने अपने कार्यकाल के दौरान और उसके बाद भी इल्हान उमर पर कई निजी हमले किए हैं। उन्होंने सार्वजनिक मंचों से उन्हें “कचरा कहा था और यह तक कहा था कि वह नहीं चाहते कि इल्हान उमर अमेरिका में रहें। ट्रंप ने उन पर यह आरोप भी लगाया कि उन्होंने अमेरिकी नागरिकता हासिल करने के लिए अपने ही भाई से शादी की हालांकि इन आरोपों को कभी कानूनी तौर पर साबित नहीं किया जा सका।

    कौन हैं अदनान हिरसी?

    अदनान हिरसी इल्हान उमर और उनके पूर्व पति अहमद हिरसी के बेटे हैं। उनके दो बहनें भी हैं लेकिन इल्हान उमर ने हमेशा अपने बच्चों को सार्वजनिक और राजनीतिक सुर्खियों से दूर रखा है। जब इल्हान उमर 2016 में पहली बार कांग्रेस के लिए चुनी गई थीं उस समय अदनान लगभग 10 साल के थे। इल्हान उमर ने यह भी कहा कि यह पहली बार नहीं है जब उनके बेटे को इस तरह की जांच का सामना करना पड़ा हो। इससे पहले एक बार वह मस्जिद में नमाज़ पढ़ रहे थे तभी वहां एजेंट्स पहुंचे और मौजूद लोगों से पूछताछ की गई। बाद में सभी को बिना किसी कार्रवाई के छोड़ दिया गया।इस घटना के बाद एक बार फिर अमेरिका में नस्लीय प्रोफाइलिंग प्रवासियों के अधिकार और फेडरल एजेंसियों की भूमिका को लेकर बहस तेज हो गई है। इल्हान उमर ने साफ कहा है कि वह इस मुद्दे को केवल व्यक्तिगत नहीं बल्कि नागरिक स्वतंत्रता से जुड़ा मामला मानती हैं।

  • लश्कर आतंकी अब्दुल रऊफ का भड़काऊ वीडियो 'दिल्ली को दुल्हन बनाएंगे एस-400 और राफेल कुछ नहीं

    लश्कर आतंकी अब्दुल रऊफ का भड़काऊ वीडियो 'दिल्ली को दुल्हन बनाएंगे एस-400 और राफेल कुछ नहीं


    नई दिल्ली । भारत और पाकिस्तान के बीच तनावपूर्ण रिश्तों के बीच पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के एक कुख्यात आतंकी अब्दुल रऊफ का एक वीडियो सामने आया है। इस वीडियो में रऊफ ने भारतीय सेना और उसके अत्याधुनिक हथियारों को निशाना बनाते हुए भड़काऊ बयान दिए हैं। उसने भारतीय वायुसेना के राफेल विमान एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम और ड्रोन को बेकार बताते हुए कहा कि “यह सब हमारे सामने कुछ भी नहीं हैं।

    दिल्ली पर कब्जे की धमकी

    रऊफ ने वीडियो में यह भी दावा किया कि कश्मीर में युद्ध खत्म नहीं हुआ है और वह भविष्य में कश्मीर में हिंसा जारी रखने की बात कर रहा है। उसने यह कहा कि उनका असली लक्ष्य दिल्ली पर कब्जा करना है जो भारत की राजधानी है। उसने पाकिस्तान के न्यूक्लियर हथियारों का भी हवाला दिया और कहा कि भारतीय वायुसेना अब पाकिस्तान के एयरस्पेस में घुसने की हिम्मत नहीं करेगी। रऊफ के इस वीडियो से पाकिस्तान की नापाक नीयत एक बार फिर सामने आई है जो भारत के खिलाफ आतंकवाद फैलाने की साजिशों में शामिल है। यह वीडियो पाकिस्तान की आतंकवाद समर्थक नीति और वहां के आतंकी संगठनों के एजेंडे को उजागर करता है।

    रऊफ और पाकिस्तान का कनेक्शन

    अब्दुल रऊफ लश्कर प्रमुख हाफिज सईद का करीबी सहयोगी है और वह अक्सर पाकिस्तान सेना के अधिकारियों के साथ दिखता है। ऑपरेशन सिंदूर के बाद जब भारतीय सेना ने आतंकियों के खिलाफ कड़ा कदम उठाया था रऊफ को पाकिस्तान के आतंकियों की कब्र पर कलमा पढ़ते हुए देखा गया था। इस दौरान पाकिस्तानी सेना के कई अधिकारी भी वहां मौजूद थे जो पाकिस्तान के आतंकवाद को समर्थन देते हैं। भारत और पाकिस्तान के बीच कश्मीर को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा है और इस तरह के भड़काऊ बयान इसे और बढ़ा सकते हैं। रऊफ का यह बयान भारतीय सेना और नागरिकों के खिलाफ आतंकवाद को प्रोत्साहित करने की एक और कोशिश प्रतीत होती है।

    भारत का जवाब

    भारत ने हमेशा पाकिस्तान की आतंकवाद समर्थक नीति का विरोध किया है और ऑपरेशन सिंदूर जैसे कड़े कदमों से यह स्पष्ट किया है कि किसी भी प्रकार की आतंकवादी गतिविधियों को सहन नहीं किया जाएगा। रऊफ के इस वीडियो और पाकिस्तान के आतंकवाद को समर्थन देने के बावजूद भारत का उद्देश्य आतंकवाद से निपटना और देश की सुरक्षा को सुनिश्चित करना है।

    अब्दुल रऊफ का यह वीडियो पाकिस्तान के आतंकवाद और भारत के खिलाफ उसकी नापाक साजिशों का एक और प्रमाण है। हालांकि भारत के पास हर प्रकार की सुरक्षा तंत्र और शक्ति है लेकिन ऐसे भड़काऊ बयानों से यह साफ होता है कि पाकिस्तान और उसके आतंकी संगठन भारत के खिलाफ अपनी योजनाओं को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं।
    भारत और पाकिस्तान के बीच तनावपूर्ण रिश्तों के बीच पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के एक कुख्यात आतंकी अब्दुल रऊफ का एक वीडियो सामने आया है। इस वीडियो में रऊफ ने भारतीय सेना और उसके अत्याधुनिक हथियारों को निशाना बनाते हुए भड़काऊ बयान दिए हैं। उसने भारतीय वायुसेना के राफेल विमान एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम और ड्रोन को बेकार बताते हुए कहा कि “यह सब हमारे सामने कुछ भी नहीं हैं।

    दिल्ली पर कब्जे की धमकी

    रऊफ ने वीडियो में यह भी दावा किया कि कश्मीर में युद्ध खत्म नहीं हुआ है और वह भविष्य में कश्मीर में हिंसा जारी रखने की बात कर रहा है। उसने यह कहा कि उनका असली लक्ष्य दिल्ली पर कब्जा करना है जो भारत की राजधानी है। उसने पाकिस्तान के न्यूक्लियर हथियारों का भी हवाला दिया और कहा कि भारतीय वायुसेना अब पाकिस्तान के एयरस्पेस में घुसने की हिम्मत नहीं करेगी। रऊफ के इस वीडियो से पाकिस्तान की नापाक नीयत एक बार फिर सामने आई है जो भारत के खिलाफ आतंकवाद फैलाने की साजिशों में शामिल है। यह वीडियो पाकिस्तान की आतंकवाद समर्थक नीति और वहां के आतंकी संगठनों के एजेंडे को उजागर करता है।

    रऊफ और पाकिस्तान का कनेक्शन

    अब्दुल रऊफ लश्कर प्रमुख हाफिज सईद का करीबी सहयोगी है और वह अक्सर पाकिस्तान सेना के अधिकारियों के साथ दिखता है। ऑपरेशन सिंदूर के बाद जब भारतीय सेना ने आतंकियों के खिलाफ कड़ा कदम उठाया था रऊफ को पाकिस्तान के आतंकियों की कब्र पर कलमा पढ़ते हुए देखा गया था। इस दौरान पाकिस्तानी सेना के कई अधिकारी भी वहां मौजूद थे जो पाकिस्तान के आतंकवाद को समर्थन देते हैं। भारत और पाकिस्तान के बीच कश्मीर को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा है और इस तरह के भड़काऊ बयान इसे और बढ़ा सकते हैं। रऊफ का यह बयान भारतीय सेना और नागरिकों के खिलाफ आतंकवाद को प्रोत्साहित करने की एक और कोशिश प्रतीत होती है।

    भारत का जवाब

    भारत ने हमेशा पाकिस्तान की आतंकवाद समर्थक नीति का विरोध किया है और ऑपरेशन सिंदूर जैसे कड़े कदमों से यह स्पष्ट किया है कि किसी भी प्रकार की आतंकवादी गतिविधियों को सहन नहीं किया जाएगा। रऊफ के इस वीडियो और पाकिस्तान के आतंकवाद को समर्थन देने के बावजूद भारत का उद्देश्य आतंकवाद से निपटना और देश की सुरक्षा को सुनिश्चित करना है। अब्दुल रऊफ का यह वीडियो पाकिस्तान के आतंकवाद और भारत के खिलाफ उसकी नापाक साजिशों का एक और प्रमाण है। हालांकि भारत के पास हर प्रकार की सुरक्षा तंत्र और शक्ति है लेकिन ऐसे भड़काऊ बयानों से यह साफ होता है कि पाकिस्तान और उसके आतंकी संगठन भारत के खिलाफ अपनी योजनाओं को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं।

  • कर्नाटक CM पद पर खींचतान बरकरार, सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार दिल्ली में हाई कमान से करेंगे मुलाकात

    कर्नाटक CM पद पर खींचतान बरकरार, सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार दिल्ली में हाई कमान से करेंगे मुलाकात


    नई दिल्ली / कर्नाटक में मुख्यमंत्री पद को लेकर कांग्रेस के भीतर जारी सियासी खींचतान अभी थमने के आसार नहीं दिखा रही है। बेलगावी से लेकर बेंगलुरु तक लगातार बयानबाजी के बीच अब यह मामला सीधे दिल्ली दरबार तक पहुंचता नजर आ रहा है। चर्चा है कि मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उप मुख्य मंत्रीडीके शिवकुमार 14 दिसंबर को नई दिल्ली में कांग्रेस हाई कमान से मुलाकात कर सकते हैं। कुछ दिन पहले हाई कमान के निर्देश पर दोनों नेताओं का मुख्यमंत्री आवास पर नाश्ता हुआ था। उस बैठक के बाद यह संदेश देने की कोशिश की गई कि सब कुछ सामान्य हो गया है। लेकिन इसके बाद दोनों खेमों से जिस तरह के बयान सामने आए हैं, उससे साफ है कि अंदरखाने असहमति अब भी बनी हुई है।

    दिल्ली में अहम बैठक की संभावना
    हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व से मुलाकात कर सकते हैं। पार्टी के वरिष्ठ सूत्रों का कहना है कि यह बैठक सोनिया गांधी, राहुल गांधी या कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे में से किसी एक के साथ हो सकती है। हालांकि समय कम बताया जा रहा है, लेकिन अगर यह मुलाकात होती है तो इसे कर्नाटक की राजनीति के लिए बेहद अहम माना जा रहा है। कांग्रेस के कर्नाटक प्रभारी रणदीप सुरजेवाला ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा
    सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार पार्टी के वरिष्ठ नेता हैं। अगर वे हमारे शीर्ष नेतृत्व से मिलना चाहते हैं, तो इसमें कोई बाधा नहीं है।सूत्रों के अनुसार, यह संभावित बैठक नई दिल्ली के रामलीला मैदान में होने वाली कांग्रेस रैली के बाद हो सकती है, जिसे ‘वोट चोर गद्दी छोड़’ अभियान के तहत आयोजित किया जा रहा है।
    कहां से शुरू हुआ विवाद?
    2023 में कर्नाटक में कांग्रेस की सत्ता में वापसी के बाद से ही मुख्यमंत्री पद को लेकर असमंजस की स्थिति बनी रही। सत्ता गठन के समय सिद्धारमैया को मुख्यमंत्री और डीके शिवकुमार को उप मुख्यमंत्री बनाया गया था। तभी से यह चर्चा चलती रही कि ढाई साल बाद मुख्यमंत्री पद में बदलाव हो सकता है।20 नवंबर को सरकार के ढाई साल पूरे होने के बाद यह मुद्दा फिर से तेज हो गया। शिवकुमार समर्थकों का दावा है कि चुनाव जीतने के बाद सत्ता साझा करने को लेकर कोई अघोषित समझौता हुआ था, जिसके तहत आधे कार्यकाल के बाद मुख्यमंत्री बदले जाने की बात थी। हालांकि पार्टी और सरकार की ओर से कभी भी इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई।

    बयानबाजी ने बढ़ाया तनाव

    हाल के दिनों में दोनों नेताओं के समर्थकों की बयानबाजी ने आग में घी डालने का काम किया है। एक ओर सिद्धारमैया खेमे की ओर से यह संदेश दिया जा रहा है कि सरकार स्थिर है और नेतृत्व में बदलाव की कोई जरूरत नहीं है, वहीं शिवकुमार समर्थक लगातार समझौते” की याद दिला रहे हैं।यह खींचतान न सिर्फ सरकार की छवि पर असर डाल रही है, बल्कि पार्टी के भीतर असंतोष को भी उजागर कर रही है। यही वजह है कि हाई कमान को अब सीधे दखल देना पड़ सकता है।

    हाई कमान के लिए बड़ी चुनौती
    कांग्रेस नेतृत्व के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि कर्नाटक में सरकार की स्थिरता बनी रहे और अंदरूनी कलह बाहर न आए। ऐसे में सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार की दिल्ली मुलाकात को फायरफाइटिंग मीटिंग के तौर पर देखा जा रहा है।अगर यह बैठक होती है, तो इससे यह साफ हो सकता है कि पार्टी नेतृत्व कर्नाटक में नेतृत्व को लेकर क्या रुख अपनाने जा रहा है। फिलहाल इतना तय है कि कर्नाटक की सियासत में आने वाले दिन काफी अहम होने वाले हैं।

  • सऊदी अरब में श्रमिकों के लिए नए नियम: 90 दिन का प्रोबेशन 30 पेड लीव ओवरटाइम और खाना-ब्रेक की सुविधाएं

    सऊदी अरब में श्रमिकों के लिए नए नियम: 90 दिन का प्रोबेशन 30 पेड लीव ओवरटाइम और खाना-ब्रेक की सुविधाएं


    नई दिल्ली । सऊदी अरब में घरेलू कामगारों और कृषि तथा पशुपालन से जुड़े श्रमिकों के लिए नए नियम लागू किए गए हैं जो उनके रोजगार के अधिकारों को बेहतर तरीके से संरक्षित करेंगे। इन नियमों का उद्देश्य श्रमिकों को न्यायसंगत कामकाजी स्थितियां पारदर्शिता और सुरक्षा प्रदान करना है। ये नए दिशा-निर्देश कर्मचारियों को न केवल बेहतर वेतन बल्कि उनके जीवन स्तर को बेहतर बनाने के लिए कई सुविधाएं प्रदान करते हैं।

    30 पेड लीव और आर्थिक मुआवजा
    नए नियमों के अनुसार प्रत्येक कर्मचारी को प्रतिवर्ष कम से कम 30 दिनों की पेड लीव का लाभ मिलेगा। यदि कर्मचारी का अनुबंध छुट्टी से पहले समाप्त होता है तो उन्हें आर्थिक मुआवजा प्रदान किया जाएगा। इसमें रमजान के 29वें दिन से शुरू होने वाली ईद-उल-फित्र की चार छुट्टियां राष्ट्रीय दिवस और स्थापना दिवस भी शामिल हैं। यह कदम कर्मचारियों को मानसिक और शारीरिक विश्राम देने के लिए महत्वपूर्ण साबित होगा।
    दैनिक कार्य समय और आराम
    दैनिक कार्य समय आठ घंटों से अधिक नहीं होगा। यदि कर्मचारी पांच घंटे से अधिक निरंतर काम करता है तो उसे कम से कम आधे घंटे का ब्रेक दिया जाएगा ताकि वह आराम कर सके और भोजन कर सके। यह नया प्रावधान कर्मचारियों की भलाई और कार्य क्षमता को बढ़ाने के लिए है। इसके अलावा कर्मचारियों को साप्ताहिक 24 घंटे का अनिवार्य अवकाश दिया जाएगा। यदि कामकाजी दिन में काम करना पड़े तो उसे वैकल्पिक अवकाश देना होगा।
    ओवरटाइम और वेतन
    नए नियमों के अनुसार ओवरटाइम काम करने पर कर्मचारी को उसके मूल वेतन का 50% अतिरिक्त भुगतान मिलेगा। हालांकि सरकारी अवकाशों के दौरान किए गए काम को ओवरटाइम में शामिल नहीं किया जाएगा। इस नियम से श्रमिकों के लिए अतिरिक्त कमाई के अवसर बढ़ेंगे और उनकी मेहनत का सही मुआवजा मिलेगा।
    प्रोबेशन और अन्य अधिकार
    नए नियमों में प्रोबेशन अवधि को अधिकतम 90 दिनों तक सीमित किया गया है। इस दौरान किसी भी पक्ष को बिना मुआवजे के अनुबंध समाप्त करने का अधिकार होगा। हालांकि यह प्रोबेशन अवधि एक ही नियोक्ता के साथ दोबारा नहीं बढ़ाई जा सकती। इसके अलावा कर्मचारियों को उचित आवास भोजन या भत्ता प्रदान करना अनिवार्य होगा और अगर आवास कार्यस्थल से दूर है तो नियोक्ता को परिवहन की व्यवस्था करनी होगी। नियोक्ता वीजा निवास परमिट या अन्य संबंधित शुल्क नहीं ले सकते और कर्मचारियों के पासपोर्ट या व्यक्तिगत सामान को अपने पास नहीं रख सकते।
    कर्मचारियों की मृत्यु और अन्य प्रावधान
    अगर किसी कर्मचारी की मृत्यु हो जाती है तो नियोक्ता को अंतिम संस्कार या शव को वापस भेजने का खर्च वहन करना होगा। कर्मचारियों को अपने परिवार से संपर्क करने की अनुमति मिलनी चाहिए और उन्हें भर्ती शुल्क का भुगतान नहीं करना पड़ेगा। इन नए नियमों के लागू होने से सऊदी अरब में श्रमिकों के अधिकारों को अधिक सम्मान मिलेगा और उनके लिए एक बेहतर कार्य वातावरण सुनिश्चित होगा।

  • पाकिस्तान में बढ़ता फर्जी शादियों का ट्रेंड, युवाओं के लिए सिर्फ मनोरंजन का जरिया..

    पाकिस्तान में बढ़ता फर्जी शादियों का ट्रेंड, युवाओं के लिए सिर्फ मनोरंजन का जरिया..


    नई दिल्ली /पाकिस्तान में हाल ही में एक नया ट्रेंड उभरकर सामने आया है-फर्जी शादियां। इन शादियों में हिस्सा लेने वाले युवा केवल मनोरंजन और सामाजिक अनुभव के लिए शादी करते हैं। इसमें कोई भी पारिवारिक दबाव या जीवन भर की जिम्मेदारी नहीं होती। यह ट्रेंड खासकर शहरों और विश्वविद्यालयों में तेजी से लोकप्रिय हो रहा है।

    शादी दक्षिण एशियाई समाज में हमेशा से एक बड़ा उत्सव रही है। भारत और पाकिस्तान में शादी का आयोजन कई दिनों तक चलता है, जिसमें हल्दी, मेहंदी, संगीत और विदाई जैसी रस्में शामिल होती हैं। पारंपरिक शादियों में दूल्हा-दुल्हन के अलावा परिवार और समाज की जिम्मेदारियां भी बड़ी होती हैं। लेकिन फर्जी शादियों में इसका उल्टा माहौल होता है-युवाओं को केवल अनुभव और मनोरंजन का अवसर मिलता है।पाकिस्तान में इस ट्रेंड की शुरुआत लाहौर यूनिवर्सिटी ऑफ मैनेजमेंट साइंसेज से हुई। वहां दो छात्राओं ने एक फर्जी शादी का आयोजन किया, जिसमें शादी की सारी रस्में और सजावट वही थी जो असली शादी में होती हैं। सोशल मीडिया पर इस शादी के वीडियो वायरल होने के बाद पूरे देश में ध्यान खींचा गया। युवाओं में इसे लेकर उत्सुकता और उत्साह बढ़ा।

    हालांकि, इस घटना ने विरोध भी खड़ा किया। कुछ लोगों ने इसे समलैंगिक विवाह समझकर आपत्ति जताई। वीडियो वायरल होने के बाद दुल्हन बनने वाली छात्रा को ऑनलाइन ट्रोलिंग और आलोचना का सामना करना पड़ा। यूनिवर्सिटी प्रशासन ने छात्रों की सुरक्षा और निजता सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाए। सबसे पहले वीडियो और फोटो को ऑनलाइन पोस्ट करने पर रोक लगा दी गई। साथ ही केवल उन लोगों को ही इस आयोजन में आने की अनुमति दी जाने लगी, जो इसे केवल मनोरंजन के रूप में लेते हों।

    फर्जी शादी में दुल्हन बनने वाली छात्रा के परिवार को भी काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा। इसके विपरीत, दूल्हा बनी छात्रा का परिवार इस पूरे मामले में अपेक्षाकृत शांत रहा। इस अनुभव के बावजूद, इस ट्रेंड ने युवाओं में लोकप्रियता हासिल की और कई समूहों ने इसे व्यवस्थित रूप से आयोजित करना शुरू कर दिया।एक ऐसा ही समूहहुनर क्रिएटिव मार्केट है, जिसकी संस्थापक रिदा इमरान ने महिलाओं के लिए विशेष फर्जी शादियों और मेहंदी पार्टियों का आयोजन किया। इसमें कारीगरों, कलाकारों, कंटेंट क्रिएटर्स और इवेंट मैनेजर्स ने हिस्सा लिया। इस तरह की घटनाएं खासतौर पर उन लोगों के लिए वरदान साबित हुईं जो पारंपरिक शादियों की थकावट और सामाजिक दबाव के कारण शादी का असली आनंद नहीं ले पाते।

    फर्जी शादियों का यह ट्रेंड युवा पीढ़ी में खुद को व्यक्त करने और सामाजिक अनुभव का मज़ा लेने का एक नया तरीका बन गया है। इसमें विवाह के वास्तविक दायित्वों की कमी होने के बावजूद लोग शादी की रस्मों, उत्सव और उत्साह का आनंद ले सकते हैं।पाकिस्तान में फर्जी शादियों का यह चलन यह दिखाता है कि समाज में नई पीढ़ी पारंपरिक धारणाओं और सामाजिक दबावों से हटकर, स्वतंत्र और रचनात्मक तरीके से अपनी खुशियों का अनुभव करना चाहती है। यह केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं बल्कि युवाओं के लिए सामाजिक और सांस्कृतिक प्रयोग का एक नया रूप बन चुका है।

  • हिमंत सरमा ने ममता बनर्जी को ठहराया मेसी के कोलकाता इवेंट में भगदड़ के लिए जिम्मेदारकहा गिरफ्तार हो राज्य के मुख्यमंत्री और पुलिस आयुक्त

    हिमंत सरमा ने ममता बनर्जी को ठहराया मेसी के कोलकाता इवेंट में भगदड़ के लिए जिम्मेदारकहा गिरफ्तार हो राज्य के मुख्यमंत्री और पुलिस आयुक्त


    नई दिल्ली । लियोनेल मेसी के भारत दौरे के पहले दिन कोलकाता में आयोजित उनके कार्यक्रम के दौरान मची भगदड़ ने राज्य की कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस घटना के बाद असम के मुख्यमंत्री हिमंत सरमा ने ममता बनर्जी की सरकार पर हमला बोला है। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में वीआईपी कल्चर के चलते इस कार्यक्रम का संचालन सही तरीके से नहीं हो सकाजिससे अफरा-तफरी मच गई। सरमा ने यहां तक कहा कि राज्य के मुख्यमंत्रीगृहमंत्री और पुलिस आयुक्त को गिरफ्तार किया जाना चाहिए।

    सरमा ने आरोप लगाया कि बंगाल में ऐसे बड़े सार्वजनिक कार्यक्रमों के दौरान भीड़ प्रबंधन की भारी नाकामी नजर आती है। उन्होंने कहा”दूसरे राज्यों में भीड़ को शांतिपूर्वक संभाला जाता हैलेकिन बंगाल में कुछ भी सुनिश्चित नहीं होता। यहां वीआईपी कल्चर का प्रभाव बहुत ज्यादा हैजो कार्यक्रमों को बर्बाद कर देता है।

    उनके अनुसारगुवाहाटी में गायक जुबिन गर्ग के निधन के बाद तीन दिनों तक 10 लाख लोग सड़कों पर थेलेकिन कोई हादसा नहीं हुआ। वहींमुंबई में विश्व कप फाइनल भी शांति से संपन्न हुआ था। सरमा ने कहा”बंगाल में कोई बड़ी घटना कभी भी घट सकती हैक्योंकि यहां हर चीज पर वीआईपी कल्चर हावी है।

    कोलकाता के सॉल्ट लेक स्टेडियम में हुए इस कार्यक्रम में हजारों प्रशंसक अपने पसंदीदा फुटबॉल आइकॉन मेसी की एक झलक पाने पहुंचे थे। लेकिन केवल 15 मिनट के कार्यक्रम के बाद मेसी वहां से चले गएजिससे दर्शकों में नाराजगी फैल गई। गुस्साए प्रशंसकों ने आयोजकों पर आरोप लगाते हुए पानी की बोतलें फेंकी। आयोजकों का कहना था कि कार्यक्रम लगभग 45 मिनट तक चलने वाला थालेकिन मेसी केवल 15 मिनट के बाद ही चले गए।

    इसके बाद प्रशंसकों ने आरोप लगाया कि कार्यक्रम के दौरान टीएमसी नेताओं और वीआईपी लोगों के परिवारों ने मेसी को घेरे रखाजिससे आम दर्शकों को किसी भी प्रकार का सामान्य अनुभव नहीं मिला।हिमंत सरमा ने इस घटना की जिम्मेदारी राज्य सरकार की ठहराते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रमों का आयोजन सही ढंग से किया जाताअगर वहां पर कानून और व्यवस्था को बेहतर तरीके से लागू किया जाता।

  • AIIMS की सबसे बड़ी स्टडी: कोविड वैक्सीन और युवाओं की अचानक मौत में 'कोई संबंध नहीं'

    AIIMS की सबसे बड़ी स्टडी: कोविड वैक्सीन और युवाओं की अचानक मौत में 'कोई संबंध नहीं'


    नई दिल्ली/ दिल्ली स्थित AIIMS ऑल इंडिया इंस्टिट्यूट ऑफ़ मेडिकल साइंसेज की हालिया स्टडी में यह पुष्टि हुई है कि कोरोना वायरस के टीकाकरण और युवाओं 18-45 साल में अचानक मौतों के बीच कोई वैज्ञानिक संबंध नहीं है। यह अध्ययन फोरेंसिक और पैथोलॉजिकल जांच पर आधारित है और कोविड वैक्सीन की सुरक्षा को दोहराता है। स्टडी में एक वर्ष के दौरान अचानक मौत के 2,214 मामलों का अध्ययन किया गया, जिनमें से 180 मामलों को अचानक मौत माना गया। इसमें दुर्घटना, आत्महत्या, हत्या और ड्रग्स से मौत के केस बाहर रखे गए। हर मामले में परिवार से बातचीत करके मृतक की पुरानी बीमारियों, कोविड संक्रमण का इतिहास, वैक्सीनेशन स्टेटस, धूम्रपान-शराब की आदतें जैसी जानकारियां जुटाई गईं। अध्ययन में मौखिक ऑटोप्सी, पोस्ट-मॉर्टम इमेजिंग, पारंपरिक ऑटोप्सी और हिस्टोपैथोलॉजिकल जांच शामिल थी। शोध टीम में फोरेंसिक विशेषज्ञ, पैथोलॉजिस्ट, रेडियोलॉजिस्ट और क्लिनिशियन शामिल थे।

    मुख्य निष्कर्ष:

    कोविड वैक्सीन सुरक्षित: टीकाकरण की स्थिति और अचानक मौतों के बीच कोई सांख्यिकीय संबंध नहीं पाया गया। हृदय रोग प्रमुख कारण: युवाओं में अचानक मौत का सबसे आम कारण अस्पष्ट हृदय रोग रहा। इसके बाद श्वसन प्रणाली और अन्य गैर-हृदय संबंधी कारण जिम्मेदार थे। युवाओं और बड़ों की तुलना: 18-45 साल के युवाओं और 46-65 साल के बड़ों में कोविड-19 का इतिहास और टीकाकरण लगभग समान पाया गया। सुरक्षा और जागरूकता: डॉक्टरों ने कहा कि अचानक मौतों के पीछे छिपे हृदय रोग और जीवनशैली संबंधी कारण ज़्यादातर जिम्मेदार हैं। इसलिए समय पर जांच, स्वस्थ जीवनशैली और इलाज जरूरी है। AIIMS के प्रोफेसर डॉ. सुधीर अरावा ने कहा, झूठे दावों और अफवाहों के बीच यह स्टडी बहुत जरूरी थी। इससे साबित होता है कि युवाओं में अचानक मौतें कोविड-19 टीकाकरण से संबंधित नहीं हैं। इस अध्ययन के नतीजे दुनिया भर के वैज्ञानिक अध्ययनों से मेल खाते हैं, जो कोविड-19 वैक्सीन को सुरक्षित और प्रभावी बताते हैं।

    स्टडी की अवधि और तरीका:

    समय: मई 2023 से अप्रैल 2024 कुल मामले: 2,214 लाशों में से 180 अचानक मौत छानबीन: पारिवारिक जानकारी, स्वास्थ्य इतिहास, ऑटोप्सी, पोस्ट-मॉर्टम इमेजिंग निष्कर्ष: टीकाकरण और अचानक मौत में कोई संबंध नहीं युवाओं में अचानक मौतें मुख्य रूप से अस्पष्ट हृदय रोगों और जीवनशैली से संबंधित कारणों से होती हैं, न कि कोविड-19 वैक्सीन से। विशेषज्ञों का कहना है कि जल्दी जांच, सही जीवनशैली और समय पर इलाज से इन मौतों को रोका जा सकता है।