Author: bharati

  • अर्मेनिया चुनाव में सिविक कॉन्ट्रैक्ट पार्टी की जीत पर पीएम मोदी ने दी बधाई, कहा- जनादेश नेतृत्व में जनता के भरोसे का संकेत

    अर्मेनिया चुनाव में सिविक कॉन्ट्रैक्ट पार्टी की जीत पर पीएम मोदी ने दी बधाई, कहा- जनादेश नेतृत्व में जनता के भरोसे का संकेत

    नई दिल्ली । अर्मेनिया में हुए संसदीय चुनाव में सिविक कॉन्ट्रैक्ट पार्टी की जीत के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। इसी क्रम में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अर्मेनिया के प्रधानमंत्री निकोल पाशिन्यान को चुनाव में मिली सफलता पर बधाई दी है और इसे जनता के भरोसे और मजबूत जनादेश का संकेत बताया है।

    पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अपने संदेश में कहा कि चुनाव परिणाम अर्मेनिया के लोगों के प्रधानमंत्री निकोल पाशिन्यान के नेतृत्व और दृष्टिकोण में विश्वास को दर्शाते हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि दोनों देशों के बीच दोस्ती और सहयोग के ऐतिहासिक संबंध और अधिक मजबूत होंगे तथा आने वाले समय में द्विपक्षीय साझेदारी को नई दिशा मिलेगी।

    अर्मेनिया में 7 जून को हुए संसदीय चुनावों में सिविक कॉन्ट्रैक्ट पार्टी को स्पष्ट बढ़त मिलती दिखी। शुरुआती और आधिकारिक रुझानों के अनुसार पार्टी को लगभग 49.81 प्रतिशत वोट मिले, जिससे वह सबसे बड़ी राजनीतिक शक्ति के रूप में उभरकर सामने आई। इस चुनावी परिणाम ने देश की राजनीतिक दिशा को लेकर भी स्पष्ट संकेत दिए हैं।

    चुनाव में अन्य दलों में स्ट्रॉन्ग अर्मेनिया अलायंस को लगभग 23.29 प्रतिशत वोट प्राप्त हुए, जबकि पूर्व राष्ट्रपति रॉबर्ट कोचरियन के नेतृत्व वाले गठबंधन को लगभग 9.94 प्रतिशत वोट मिले। इसके अलावा अन्य छोटी पार्टियों को भी सीमित समर्थन मिला, हालांकि वे निर्णायक भूमिका में नहीं रहीं।

    विशेषज्ञों का मानना है कि इस चुनाव परिणाम ने अर्मेनिया की विदेश नीति और क्षेत्रीय संतुलन पर भी असर डाला है। रूस और पश्चिमी देशों के बीच चल रही प्रतिस्पर्धा के बीच यह परिणाम महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि अर्मेनिया लंबे समय से दोनों पक्षों के बीच रणनीतिक संतुलन बनाए रखने की कोशिश करता रहा है।

    रिपोर्ट्स के अनुसार, चुनाव से पहले के दिनों में क्षेत्रीय भू-राजनीतिक परिस्थितियां भी चर्चा में रहीं, जिसमें ऊर्जा आपूर्ति, व्यापार और राजनीतिक संबंधों को लेकर विभिन्न देशों के बीच तनाव और सहयोग दोनों ही देखने को मिले। इन परिस्थितियों ने चुनावी माहौल को और अधिक संवेदनशील बना दिया था।

    चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद प्रधानमंत्री निकोल पाशिन्यान ने अपनी पार्टी की जीत को ऐतिहासिक बताया और इसे जनता के विश्वास की पुष्टि करार दिया। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार आगे भी विकास और स्थिरता की दिशा में काम करती रहेगी।

    भारत और अर्मेनिया के बीच संबंध पिछले कुछ वर्षों में लगातार मजबूत हुए हैं, जिसमें व्यापार, शिक्षा और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के विभिन्न क्षेत्र शामिल हैं। पीएम मोदी के संदेश को इसी कड़ी में दोनों देशों के संबंधों को और प्रगाढ़ बनाने की दिशा में एक सकारात्मक संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

    फिलहाल अंतरराष्ट्रीय समुदाय अर्मेनिया के इस राजनीतिक बदलाव और उसके क्षेत्रीय प्रभावों पर नजर बनाए हुए है। आने वाले समय में यह देखा जाएगा कि नई राजनीतिक स्थिति क्षेत्रीय कूटनीति और वैश्विक संतुलन को किस तरह प्रभावित करती है।

  • भारतीय स्टेट बैंक ने वित्तीय प्रदर्शन का दिया बड़ा संकेत, केंद्र सरकार को मिला 8,813 करोड़ रुपये का डिविडेंड चेक

    भारतीय स्टेट बैंक ने वित्तीय प्रदर्शन का दिया बड़ा संकेत, केंद्र सरकार को मिला 8,813 करोड़ रुपये का डिविडेंड चेक

    नई दिल्ली । देश के सबसे बड़े सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक भारतीय स्टेट बैंक ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए केंद्र सरकार को 8,813 करोड़ रुपये का डिविडेंड सौंपा है। यह भुगतान बैंक के मजबूत वित्तीय प्रदर्शन और देश की बैंकिंग प्रणाली में उसकी महत्वपूर्ण भूमिका को दर्शाता है।

    एसबीआई के चेयरमैन सी. एस. शेट्टी ने यह डिविडेंड चेक केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को सौंपा। इस संबंध में जानकारी वित्त मंत्री कार्यालय द्वारा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से साझा की गई, जिसमें बताया गया कि यह लाभांश केंद्र सरकार के लिए गैर-कर राजस्व का एक महत्वपूर्ण स्रोत है।

    डिविडेंड का यह भुगतान ऐसे समय में हुआ है जब बैंकिंग क्षेत्र लगातार डिजिटल बदलाव, क्रेडिट ग्रोथ और आर्थिक गतिविधियों के विस्तार के चलते मजबूत प्रदर्शन कर रहा है। एसबीआई की यह उपलब्धि न केवल बैंक की वित्तीय स्थिति को दर्शाती है, बल्कि यह भी संकेत देती है कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक देश की आर्थिक मजबूती में अहम योगदान दे रहे हैं।

    एसबीआई देश का सबसे बड़ा बैंक होने के साथ-साथ सरकार की वित्तीय नीतियों और आर्थिक विकास योजनाओं के क्रियान्वयन में भी प्रमुख भूमिका निभाता है। बैंक की ओर से दिया गया यह डिविडेंड केंद्र सरकार के बजट प्रबंधन और राजस्व संतुलन में सहायक माना जाता है।

    बैंक के चेयरमैन सी. एस. शेट्टी के नेतृत्व में एसबीआई ने हाल के वर्षों में कई क्षेत्रों में सुधार और विस्तार किया है। बैंकिंग सेवाओं का डिजिटलीकरण, वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देना और ग्रामीण तथा शहरी दोनों क्षेत्रों में कर्ज वितरण को मजबूत करना इसकी प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल रहा है।

    हाल ही में एक कार्यक्रम के दौरान सी. एस. शेट्टी ने कहा था कि वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बावजूद भारत की आर्थिक नींव मजबूत बनी हुई है। उन्होंने भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति को संतुलित बताते हुए कहा था कि ब्याज दरों में स्थिरता आर्थिक विकास को समर्थन देने में मदद करती है।

    उन्होंने यह भी कहा था कि निवेशकों को केवल अल्पकालिक बाजार उतार-चढ़ाव पर ध्यान नहीं देना चाहिए, बल्कि भारत की दीर्घकालिक विकास कहानी पर भरोसा रखना चाहिए। उनके अनुसार, बैंकिंग सुधार, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और बुनियादी ढांचे का विस्तार भारत की आर्थिक प्रगति के मुख्य स्तंभ हैं।

    विशेषज्ञों का मानना है कि एसबीआई का यह डिविडेंड भुगतान बैंकिंग क्षेत्र की स्थिरता और लाभप्रदता का संकेत है। यह भी दर्शाता है कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक सरकारी खजाने को मजबूत करने में लगातार योगदान दे रहे हैं।

    वित्तीय वर्ष के इस प्रदर्शन को देखते हुए उम्मीद की जा रही है कि आने वाले समय में भी बैंक अपनी वृद्धि की गति बनाए रखेगा और देश की आर्थिक गतिविधियों को समर्थन देता रहेगा।

  • शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग से लेकर चुनाव प्रक्रिया तक, INDIA गठबंधन की बैठक में पांच अहम प्रस्तावों पर सहमति

    शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग से लेकर चुनाव प्रक्रिया तक, INDIA गठबंधन की बैठक में पांच अहम प्रस्तावों पर सहमति

    नई दिल्ली । विपक्षी गठबंधन INDIA alliance की 7वीं महत्वपूर्ण बैठक सोमवार को दिल्ली में आयोजित की गई, जिसमें देश की वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों और हालिया चुनावों के बाद की रणनीति पर व्यापक चर्चा हुई। बैठक में शामिल दलों ने कई मुद्दों पर एकजुट रुख अपनाते हुए केंद्र सरकार की नीतियों और चुनावी प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल उठाए।

    बैठक के बाद कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने बताया कि गठबंधन में शामिल 25 राजनीतिक दलों ने पांच प्रमुख प्रस्तावों पर सहमति जताई है। उन्होंने कहा कि इन प्रस्तावों का उद्देश्य लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं की रक्षा करना, चुनावी प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ाना और युवाओं से जुड़े मुद्दों को प्राथमिकता देना है।

    बैठक में लिए गए प्रमुख निर्णयों में चुनावी प्रक्रिया से जुड़े मुद्दे को लेकर भारत के मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखने पर सहमति शामिल है। गठबंधन का कहना है कि मतदाता अधिकारों और चुनावी पारदर्शिता से जुड़े मामलों पर गंभीर चिंता है, जिसे सर्वोच्च न्यायालय के संज्ञान में लाया जाएगा। इसके साथ ही NEET-UG परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर शिक्षा मंत्री से इस्तीफे की मांग को भी बैठक में समर्थन मिला।

    गठबंधन नेताओं ने आरोप लगाया कि परीक्षा प्रणाली में लगातार सामने आ रही गड़बड़ियों से लाखों छात्रों का भविष्य प्रभावित हो रहा है। उनका कहना है कि इस स्थिति की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए और उच्च स्तर पर जवाबदेही सुनिश्चित की जानी चाहिए। इसी कारण शिक्षा मंत्रालय की भूमिका पर सवाल उठाते हुए इस्तीफे की मांग को एजेंडे में शामिल किया गया।

    बैठक में आर्थिक स्थिति पर भी चर्चा हुई और सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग रखी गई। विपक्षी दलों ने कहा कि महंगाई, रोजगार और निवेश की धीमी रफ्तार देश की आर्थिक चुनौतियों को बढ़ा रही है। इसके साथ ही छोटे और मध्यम उद्योगों की स्थिति को लेकर भी चिंता जताई गई।

    गठबंधन ने यह भी निर्णय लिया कि अब से हर दो महीने में नियमित रूप से बैठक आयोजित की जाएगी, ताकि राजनीतिक रणनीति और साझा मुद्दों पर लगातार समन्वय बना रहे। अगली बैठक हैदराबाद में निर्धारित की गई है, जिसमें आगे की रणनीति पर विस्तार से चर्चा की जाएगी।

    बैठक में यह भी कहा गया कि संसद के भीतर विपक्षी दलों के बीच समन्वय को और मजबूत किया जाएगा, ताकि सरकार से जुड़े मुद्दों पर एक संयुक्त और प्रभावी आवाज उठाई जा सके। नेताओं ने आरोप लगाया कि जांच एजेंसियों के दुरुपयोग और विपक्षी दलों के साथ भेदभाव जैसे मुद्दों पर भी गंभीर चर्चा की जरूरत है।

    इस बैठक में कई प्रमुख क्षेत्रीय और राष्ट्रीय दल शामिल हुए, जबकि कुछ दलों ने वर्चुअल रूप से भाग लिया। हालांकि कुछ राजनीतिक दलों की अनुपस्थिति भी चर्चा का विषय रही, लेकिन कुल मिलाकर बैठक को विपक्षी एकजुटता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

    गठबंधन ने यह स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य केवल राजनीतिक विरोध नहीं बल्कि लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत करना और जनता से जुड़े मुद्दों को प्रभावी ढंग से उठाना है। बैठक के अंत में यह संदेश भी दिया गया कि आने वाले समय में विपक्षी एकता और समन्वय को और अधिक मजबूत किया जाएगा, ताकि राष्ट्रीय स्तर पर एक वैकल्पिक राजनीतिक मंच तैयार किया जा सके।

  • सूर्य की सतह पर सक्रिय ‘4461 रीजन’ से निकला शक्तिशाली विस्फोट, धरती के चुंबकीय क्षेत्र पर खतरा, अंतरिक्ष एजेंसियों ने बढ़ाई निगरानी

    सूर्य की सतह पर सक्रिय ‘4461 रीजन’ से निकला शक्तिशाली विस्फोट, धरती के चुंबकीय क्षेत्र पर खतरा, अंतरिक्ष एजेंसियों ने बढ़ाई निगरानी

    नई दिल्ली । सूर्य की सतह पर हाल ही में हुए शक्तिशाली सौर विस्फोट के बाद धरती की ओर तेजी से एक मैग्नेटिक महातूफान बढ़ने की स्थिति बन गई है। अंतरिक्ष वैज्ञानिकों और अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने इस सौर गतिविधि को लेकर चेतावनी जारी की है, जिसमें कहा गया है कि इसका प्रभाव पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र पर पड़ सकता है। इस घटना के कारण अंतरिक्ष मौसम में अस्थिरता देखी जा रही है और कई क्षेत्रों में इसका असर महसूस होने की संभावना जताई गई है।

    वैज्ञानिकों के अनुसार सूर्य के सक्रिय क्षेत्र 4461 में 6 जून 2026 की सुबह एक तेज सोलर फ्लेयर दर्ज किया गया, जिसे M1.8 श्रेणी में रखा गया है। इस विस्फोट के साथ एक भारी और अत्यधिक चुंबकीय फिलामेंट भी अंतरिक्ष में निकला, जो लगभग 1,400 किलोमीटर प्रति सेकंड की तेज रफ्तार से पृथ्वी की ओर बढ़ रहा है। यह स्थिति वैज्ञानिकों के लिए महत्वपूर्ण इसलिए भी मानी जा रही है क्योंकि इस तरह के फिलामेंट सीधे तौर पर पृथ्वी के अंतरिक्ष वातावरण को प्रभावित कर सकते हैं।

    नासा और स्पेस वेदर प्रेडिक्शन सेंटर ने इसे G3 श्रेणी का भू-चुंबकीय तूफान यानी जियोमैग्नेटिक स्टॉर्म घोषित किया है। विशेषज्ञों के मुताबिक जब सौर कण पृथ्वी के मैग्नेटिक फील्ड से टकराते हैं, तो इससे अंतरिक्ष मौसम में बदलाव आता है, जिसका असर संचार प्रणालियों, उपग्रहों और बिजली नेटवर्क पर भी पड़ सकता है। हालांकि इसे एक प्राकृतिक खगोलीय घटना माना जाता है, लेकिन इसकी तीव्रता अधिक होने पर तकनीकी सिस्टम प्रभावित हो सकते हैं।

    वैज्ञानिकों ने बताया कि सूर्य के जिस क्षेत्र से यह विस्फोट हुआ है, वहां चुंबकीय रेखाएं असामान्य रूप से मुड़ी हुई थीं, जिससे अत्यधिक ऊर्जा एकत्रित हो गई। जब यह ऊर्जा अचानक रिलीज हुई, तो तेज एक्स-रे विकिरण भी उत्पन्न हुआ, जिसने कुछ समय के लिए रेडियो संचार में व्यवधान पैदा किया। यह प्रक्रिया सौर गतिविधियों के सामान्य चक्र का हिस्सा होती है, लेकिन इस बार इसकी तीव्रता अधिक देखी गई है।

    अंतरिक्ष मौसम विशेषज्ञों के अनुसार फिलामेंट सूर्य के कोरोना क्षेत्र में मौजूद ठंडी और घनी प्लाज्मा संरचना होती है। जब इसे थामे रखने वाला चुंबकीय संतुलन बिगड़ता है, तो यह अंतरिक्ष में तेजी से फैल जाता है। यही प्रक्रिया इस बार के सौर विस्फोट में देखी गई है, जिसे वैज्ञानिक बेहद महत्वपूर्ण घटना मान रहे हैं।

    इस सौर गतिविधि का एक सकारात्मक प्रभाव भी हो सकता है, जिसमें पृथ्वी के ध्रुवीय और कुछ उच्च अक्षांश क्षेत्रों में ऑरोरा यानी उत्तरी रोशनी का शानदार दृश्य दिखाई दे सकता है। यह दृश्य हरे, बैंगनी और लाल रंग की चमकदार रोशनी के रूप में आसमान में नजर आता है। आमतौर पर यह नजारा उत्तरी ध्रुवीय क्षेत्रों में दिखता है, लेकिन G3 या उससे अधिक तीव्रता के तूफानों में यह निचले अक्षांश क्षेत्रों तक भी पहुंच सकता है।

    यदि मौसम और आकाशीय स्थितियां अनुकूल रहीं, तो उत्तरी भारत के कुछ ऊंचाई वाले क्षेत्रों जैसे हिमाचल प्रदेश, लद्दाख और उत्तराखंड के हिस्सों में भी इस दुर्लभ खगोलीय दृश्य के दिखने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि वैज्ञानिकों ने स्पष्ट किया है कि यह पूरी तरह अंतरिक्ष मौसम की स्थिति और तूफान की तीव्रता पर निर्भर करेगा।

    अंतरिक्ष एजेंसियां लगातार इस सौर तूफान की निगरानी कर रही हैं और उपग्रहों के माध्यम से इसके प्रभाव का आकलन किया जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन अगले कुछ दिनों में इसके प्रभाव स्पष्ट रूप से सामने आ सकते हैं।

  • विजय सरकार की योजनाओं पर सवालों के बाद कार्रवाई, चेन्नई साइबर क्राइम पुलिस ने यूट्यूबर को हिरासत में लिया

    विजय सरकार की योजनाओं पर सवालों के बाद कार्रवाई, चेन्नई साइबर क्राइम पुलिस ने यूट्यूबर को हिरासत में लिया


    नई दिल्ली ।
    तमिलनाडु में राजनीतिक और डिजिटल अभिव्यक्ति से जुड़ा मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है, जहां सरकार की नीतियों और योजनाओं पर सवाल उठाने के आरोप में एक यूट्यूबर को हिरासत में लिया गया है। चेन्नई साइबर क्राइम पुलिस ने यूट्यूबर मारिदास को उनके मदुरई स्थित आवास से हिरासत में लिया है। उन पर आरोप है कि उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर मुख्यमंत्री विजय और राज्य सरकार की योजनाओं के खिलाफ लगातार मानहानिकारक टिप्पणियां कीं।

    सूत्रों के अनुसार, यूट्यूबर मारिदास लंबे समय से सोशल मीडिया पर सक्रिय थे और सरकार की नई योजनाओं तथा घोषणाओं को लेकर लगातार आलोचनात्मक पोस्ट कर रहे थे। वे अक्सर आंकड़ों और तथ्यों के आधार पर यह सवाल उठाते थे कि क्या सरकार द्वारा घोषित योजनाएं वास्तविक रूप से लागू हो पाएंगी या नहीं। उनकी टिप्पणियों को लेकर समर्थन और विरोध दोनों ही तरह की प्रतिक्रियाएं सोशल मीडिया पर देखने को मिल रही थीं।

    मामले में तब गंभीर मोड़ आया जब उनके खिलाफ चेन्नई साइबर क्राइम पुलिस के पास एक औपचारिक शिकायत दर्ज कराई गई। शिकायत में आरोप लगाया गया कि यूट्यूबर द्वारा प्रसारित की गई जानकारी झूठी और भ्रामक है, जिसका उद्देश्य सरकार और मुख्यमंत्री की छवि को नुकसान पहुंचाना है। शिकायत के बाद साइबर क्राइम विंग ने मामले की प्रारंभिक जांच शुरू की और तथ्यों का मूल्यांकन किया।

    जांच के आधार पर सोमवार को एक विशेष पुलिस टीम मदुरई पहुंची और स्थानीय पुलिस की मदद से यूट्यूबर को उनके घर से हिरासत में ले लिया गया। उन्हें आगे की पूछताछ के लिए चेन्नई ले जाया जा रहा है, जहां उनसे आरोपों को लेकर विस्तृत सवाल-जवाब किए जाएंगे। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, यह कार्रवाई साइबर क्राइम विंग द्वारा दर्ज एक मामले के तहत की गई है।

    अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया है कि मामले की जांच अभी जारी है और यह तय किया जा रहा है कि किन धाराओं के तहत आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। पुलिस ने कहा कि सोशल मीडिया पर फैलने वाली जानकारी की सत्यता की जांच जरूरी है, खासकर तब जब वह किसी सार्वजनिक व्यक्ति या सरकार की प्रतिष्ठा से जुड़ी हो।

    वहीं, यूट्यूबर मारिदास पहले भी अपने राजनीतिक बयानों और आलोचनात्मक टिप्पणियों को लेकर विवादों में रह चुके हैं। उनके बड़े फॉलोअर्स बेस के कारण उनके पोस्ट अक्सर चर्चा में आते रहे हैं। इस ताजा कार्रवाई के बाद एक बार फिर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सोशल मीडिया पर सरकार की आलोचना की सीमाओं को लेकर बहस तेज हो गई है।

    फिलहाल पुलिस हिरासत और जांच प्रक्रिया जारी है और आने वाले दिनों में इस मामले में और स्पष्टता आने की संभावना है।

  • ईरान-इजरायल संघर्ष पर डोनाल्ड ट्रंप की सख्त चेतावनी, दोनों देशों से तुरंत गोलीबारी रोकने की अपील, तनाव और बढ़ा

    ईरान-इजरायल संघर्ष पर डोनाल्ड ट्रंप की सख्त चेतावनी, दोनों देशों से तुरंत गोलीबारी रोकने की अपील, तनाव और बढ़ा

    नई दिल्ली । मध्य पूर्व में ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते सैन्य तनाव ने एक बार फिर वैश्विक चिंता बढ़ा दी है। दोनों देशों के बीच मिसाइल हमलों और जवाबी कार्रवाई के बाद हालात तेजी से बिगड़ते नजर आ रहे हैं। इसी बीच अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्थिति पर प्रतिक्रिया देते हुए दोनों देशों से तत्काल गोलीबारी रोकने की अपील की है।

    ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर पोस्ट करते हुए कहा कि ईरान और इजरायल को तुरंत सैन्य कार्रवाई रोकनी चाहिए और तनाव को और बढ़ने से रोकना चाहिए। उनका कहना था कि क्षेत्र में जारी संघर्ष वैश्विक शांति और स्थिरता के लिए गंभीर खतरा बन सकता है, इसलिए तत्काल युद्धविराम आवश्यक है।

    ईरान और इजरायल के बीच हालिया संघर्ष की शुरुआत तब हुई जब क्षेत्रीय तनाव के बीच दोनों देशों ने एक-दूसरे पर मिसाइल हमले किए। रिपोर्ट्स के अनुसार, हमलों के दौरान कई सैन्य ठिकानों और रणनीतिक इलाकों को निशाना बनाया गया, जिससे स्थिति और अधिक गंभीर हो गई। हमलों के बाद कई क्षेत्रों में हवाई क्षेत्र भी अस्थायी रूप से बंद कर दिए गए।

    इस पूरे घटनाक्रम के बीच ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने भी हमलों की पुष्टि की और इसे जवाबी कार्रवाई बताया। वहीं इजरायल की ओर से भी सैन्य प्रतिक्रिया जारी रही, जिसमें कई क्षेत्रों में तेज हमले किए गए। दोनों पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है और हालात लगातार तनावपूर्ण बने हुए हैं।

    इजरायल ने अपनी कार्रवाई को आत्मरक्षा का हिस्सा बताते हुए कहा कि उसने लक्षित सैन्य ठिकानों पर हमला किया है। वहीं ईरान ने इन हमलों को अपनी संप्रभुता पर हमला करार दिया है और कड़ी प्रतिक्रिया की चेतावनी दी है। इस पूरे घटनाक्रम ने मध्य पूर्व क्षेत्र में व्यापक अस्थिरता की स्थिति पैदा कर दी है।

    इस बीच अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चिंता बढ़ गई है क्योंकि संघर्ष के विस्तार की आशंका से वैश्विक बाजार और कूटनीतिक संबंध प्रभावित हो सकते हैं। कई देशों ने दोनों पक्षों से संयम बरतने और बातचीत के जरिए समाधान खोजने की अपील की है।

    ट्रंप की ओर से आया बयान ऐसे समय में आया है जब क्षेत्र में हिंसा लगातार बढ़ रही है और किसी भी प्रकार की मध्यस्थता की कोशिशें अब तक सीमित सफलता ही हासिल कर पाई हैं। उनकी अपील को अमेरिका की संभावित भविष्य की विदेश नीति के संकेत के रूप में भी देखा जा रहा है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दोनों देशों के बीच तनाव कम नहीं हुआ तो यह संघर्ष व्यापक क्षेत्रीय युद्ध का रूप ले सकता है, जिसका असर केवल मध्य पूर्व तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा आपूर्ति पर भी पड़ेगा।

    फिलहाल स्थिति बेहद संवेदनशील बनी हुई है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर इस बात पर टिकी है कि आने वाले दिनों में क्या दोनों पक्ष बातचीत की दिशा में आगे बढ़ते हैं या तनाव और बढ़ता है।

  • डिजिटल यूजर्स के लिए बड़ी राहत, BSNL का 399 रुपये वाला फाइबर प्लान पहले साल में भारी फायदे के साथ उपलब्ध

    डिजिटल यूजर्स के लिए बड़ी राहत, BSNL का 399 रुपये वाला फाइबर प्लान पहले साल में भारी फायदे के साथ उपलब्ध

    नई दिल्ली । सरकारी टेलीकॉम कंपनी भारत संचार निगम लिमिटेड (BSNL) ने अपने ब्रॉडबैंड यूजर्स के लिए एक नया और किफायती ऑफर पेश किया है, जो खासतौर पर डिजिटल कनेक्टिविटी को सस्ता और आसान बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। BSNL के ‘Spark’ पोर्टफोलियो के तहत लॉन्च किया गया यह फाइबर-टू-द-होम (FTTH) प्लान शुरुआती 12 महीनों के लिए केवल 399 रुपये प्रति माह की दर पर उपलब्ध है। कंपनी का दावा है कि इस प्लान में हाई-स्पीड इंटरनेट और पर्याप्त डेटा के साथ उपयोगकर्ताओं को बेहतर अनुभव मिलेगा।

    इस नए प्लान के तहत ग्राहकों को 50 Mbps तक की इंटरनेट स्पीड दी जा रही है, जो घरेलू और प्रोफेशनल दोनों तरह के उपयोग के लिए उपयुक्त मानी जा रही है। साथ ही इसमें कुल 3300 GB हाई-स्पीड डेटा उपलब्ध कराया जा रहा है, जो सामान्य ब्रॉडबैंड उपयोगकर्ताओं के लिए काफी बड़ी मात्रा है। डेटा लिमिट खत्म होने के बाद इंटरनेट स्पीड 4 Mbps तक सीमित हो जाती है, जिससे बेसिक कनेक्टिविटी जारी रहती है।

    BSNL ने इस प्लान में अनलिमिटेड वॉइस कॉलिंग की सुविधा भी शामिल की है, जिससे यूजर्स किसी भी नेटवर्क पर बिना अतिरिक्त शुल्क के कॉल कर सकते हैं। इसके साथ ही कंपनी अपने ग्राहकों को BSNL Secure Pro जैसी डिजिटल सुरक्षा सेवाएं भी उपलब्ध करा रही है, जिससे ऑनलाइन उपयोग को और सुरक्षित बनाने पर जोर दिया गया है। यह पैकेज खासतौर पर उन उपभोक्ताओं को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है, जो घर से काम करते हैं, ऑनलाइन पढ़ाई करते हैं या ओटीटी प्लेटफॉर्म पर स्ट्रीमिंग का उपयोग करते हैं।

    हालांकि यह ऑफर शुरुआती एक साल तक ही 399 रुपये प्रति माह की दर पर उपलब्ध है। 12 महीने पूरे होने के बाद, यानी 13वें महीने से इस प्लान की कीमत बढ़कर 499 रुपये प्रति माह हो जाएगी। इसके बावजूद शुरुआती अवधि में यह प्लान बाजार में मौजूद कई निजी कंपनियों के मुकाबले अधिक किफायती विकल्प माना जा रहा है।

    कनेक्शन बुक करने के लिए कंपनी ने डिजिटल माध्यमों को भी आसान बनाया है। ग्राहक BSNL की WhatsApp सेवा के जरिए 1800 4444 नंबर पर ‘Hi’ संदेश भेजकर कनेक्शन के लिए आवेदन कर सकते हैं। यह प्रक्रिया नए उपभोक्ताओं के लिए सरल और तेज मानी जा रही है।

    डिजिटल इंडिया अभियान और बढ़ती इंटरनेट जरूरतों के बीच BSNL का यह कदम ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में किफायती इंटरनेट उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे प्लान से ब्रॉडबैंड उपयोगकर्ताओं की संख्या बढ़ सकती है और डिजिटल सेवाओं की पहुंच और व्यापक हो सकती है।

    कुल मिलाकर यह नया BSNL Spark FTTH प्लान उन उपभोक्ताओं के लिए आकर्षक विकल्प बनकर सामने आया है, जो कम कीमत में अधिक डेटा, स्थिर स्पीड और अनलिमिटेड कॉलिंग जैसी सुविधाओं की तलाश में हैं।

  • महिला वकीलों को आगे बढ़ाने के लिए बड़ा रोडमैप, CJI सूर्यकांत ने 50% प्रतिनिधित्व की वकालत कर दिया स्पष्ट संदेश

    महिला वकीलों को आगे बढ़ाने के लिए बड़ा रोडमैप, CJI सूर्यकांत ने 50% प्रतिनिधित्व की वकालत कर दिया स्पष्ट संदेश

    नई दिल्ली । भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कानूनी पेशे में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने को लेकर अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा है कि इस दिशा में एक मजबूत और दीर्घकालिक संस्थागत व्यवस्था तैयार की जा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल प्रवेश स्तर पर अवसर उपलब्ध कराना पर्याप्त नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी आवश्यक है कि महिलाएं अपने पूरे पेशेवर जीवन में आगे बढ़ सकें और नेतृत्वकारी भूमिकाओं तक पहुंच सकें।

    लंदन में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने कानूनी पेशे में महिलाओं के प्रतिनिधित्व से जुड़े प्रश्नों का उत्तर देते हुए कहा कि न्यायिक और कानूनी संस्थाओं में संतुलित भागीदारी समय की आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि महिलाओं के लिए अवसरों का विस्तार करने के उद्देश्य से विभिन्न स्तरों पर कई पहलें शुरू की गई हैं और भविष्य में भी इस दिशा में प्रयास जारी रहेंगे।

    कार्यक्रम के दौरान उनसे यह सवाल पूछा गया कि बड़ी संख्या में छात्राएं कानून की पढ़ाई तो करती हैं, लेकिन करियर के मध्य चरण तक पहुंचते-पहुंचते अनेक महिलाएं इस पेशे से बाहर हो जाती हैं। इस चुनौती को स्वीकार करते हुए मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि यह एक वास्तविक समस्या है और इसे केवल नीतिगत घोषणाओं से हल नहीं किया जा सकता। इसके लिए संस्थागत समर्थन, समान अवसर और पेशेवर विकास के अनुकूल वातावरण तैयार करना आवश्यक है।

    उन्होंने बताया कि पहले भी उन्होंने सुझाव दिया था कि सरकारी पैनलों में लॉ ऑफिसर के पदों पर महिलाओं की नियुक्तियों का अनुपात 50 प्रतिशत तक बढ़ाया जाना चाहिए। उनका मानना है कि निर्णय लेने वाली संस्थाओं में महिलाओं की पर्याप्त मौजूदगी न केवल प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करती है बल्कि न्याय व्यवस्था को अधिक संतुलित और समावेशी भी बनाती है।

    मुख्य न्यायाधीश ने यह भी कहा कि बार काउंसिल, जिला बार एसोसिएशन और अन्य बार संस्थाओं में महिलाओं के लिए आरक्षित प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने की दिशा में कदम उठाए गए हैं। उनका उद्देश्य केवल संख्या बढ़ाना नहीं बल्कि ऐसी व्यवस्था विकसित करना है जिसमें महिला वकीलों को नेतृत्व के अवसर भी मिल सकें। उन्होंने संकेत दिया कि संस्थागत सुधारों के माध्यम से महिलाओं की भागीदारी को स्थायी रूप से मजबूत करने की योजना पर कार्य जारी है।

    महिलाओं के प्रतिनिधित्व के मुद्दे के अलावा मुख्य न्यायाधीश ने भारत की न्यायिक व्यवस्था के भविष्य को लेकर भी महत्वपूर्ण विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि भारत को अपने संवैधानिक मूल्यों, सामाजिक वास्तविकताओं, भाषाई विविधता और सांस्कृतिक परिस्थितियों के अनुरूप एक स्वदेशी न्यायशास्त्र विकसित करना चाहिए। उनके अनुसार, भारतीय अदालतों को ऐसे कानूनी सिद्धांतों और व्याख्याओं को बढ़ावा देना चाहिए जो देश की विशिष्ट आवश्यकताओं और सामाजिक संदर्भों को प्रतिबिंबित करें।

    उन्होंने यह भी कहा कि तकनीकी बदलावों के दौर में न्यायपालिका को आत्मनिर्भर दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता है। इसी सोच के तहत भारतीय न्याय व्यवस्था के लिए स्वदेशी कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित तंत्र विकसित करने पर भी जोर दिया जा रहा है। उनका मानना है कि भविष्य की न्यायिक प्रक्रियाओं में तकनीक की भूमिका बढ़ेगी, इसलिए भारत को अपनी आवश्यकताओं के अनुरूप स्वतंत्र और विश्वसनीय डिजिटल ढांचा तैयार करना चाहिए।

    मुख्य न्यायाधीश के इन विचारों को न्यायपालिका में लैंगिक समानता, संस्थागत सुधार और तकनीकी आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है। उनका संदेश स्पष्ट था कि न्याय व्यवस्था को अधिक समावेशी, प्रतिनिधिक और भारतीय परिस्थितियों के अनुरूप बनाने के लिए व्यापक स्तर पर सुधारों की आवश्यकता है, जिन पर लगातार कार्य किया जा रहा है।

  • ऑटो उद्योग की बड़ी चिंता: विनिमय दर में उतार-चढ़ाव से घट रहा DVA, कंपनियों ने PLI नियमों में संशोधन का सुझाव दिया

    ऑटो उद्योग की बड़ी चिंता: विनिमय दर में उतार-चढ़ाव से घट रहा DVA, कंपनियों ने PLI नियमों में संशोधन का सुझाव दिया

    नई दिल्ली । वाहन क्षेत्र की उत्पादन-से-जुड़ी प्रोत्साहन (PLI) योजना के तहत मिलने वाले लाभ पर विदेशी मुद्रा विनिमय दरों के उतार-चढ़ाव का असर पड़ने लगा है। इसी को देखते हुए देश की प्रमुख वाहन निर्माता कंपनियों ने केंद्र सरकार से घरेलू मूल्य संवर्धन (Domestic Value Addition-DVA) की गणना के लिए एक निश्चित विनिमय दर लागू करने की मांग की है। उद्योग का कहना है कि रुपये में आई हालिया कमजोरी के कारण कई मॉडलों का स्थानीयकरण स्तर वास्तविक स्थिति से कम दिखाई दे रहा है, जिससे वे प्रोत्साहन योजना की पात्रता के दायरे से बाहर हो सकते हैं।

    25,938 करोड़ रुपये की ऑटो पीएलआई योजना का उद्देश्य देश में उन्नत ऑटोमोबाइल और ऑटो कंपोनेंट निर्माण को बढ़ावा देना है। योजना के तहत किसी पात्र वाहन मॉडल में आयातित पुर्जों और सामग्रियों की हिस्सेदारी निर्धारित सीमा के भीतर रहनी चाहिए। इसके लिए घरेलू मूल्य संवर्धन का एक न्यूनतम स्तर अनिवार्य किया गया है, ताकि स्थानीय विनिर्माण और सप्लाई चेन को प्रोत्साहन मिल सके।

    उद्योग प्रतिनिधियों के अनुसार, DVA की गणना वाहन की एक्स-फैक्ट्री कीमत और उसमें इस्तेमाल आयातित सामग्री की लागत के आधार पर की जाती है। चूंकि आयातित पुर्जों की कीमत विदेशी मुद्राओं में तय होती है, इसलिए रुपये के कमजोर होने पर उनकी लागत स्वतः बढ़ जाती है। इससे कागजों पर आयातित हिस्सेदारी अधिक और घरेलू मूल्य संवर्धन कम दिखाई देने लगता है, जबकि वास्तविक उत्पादन प्रक्रिया और स्थानीयकरण स्तर में कोई बदलाव नहीं होता।

    हाल ही में भारी उद्योग मंत्रालय और ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ARAI) के साथ हुई बैठक में वाहन उद्योग के प्रतिनिधियों ने इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया। उनका तर्क था कि विनिमय दरों में बदलाव एक बाहरी आर्थिक कारक है, जिस पर वाहन निर्माताओं का कोई नियंत्रण नहीं होता। ऐसे में केवल मुद्रा विनिमय के प्रभाव के कारण कंपनियों की पात्रता प्रभावित होना उचित नहीं माना जा सकता।

    उद्योग का कहना है कि बीते एक वर्ष के दौरान अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है। इससे आयातित पुर्जों की लागत बढ़ गई है और कई मॉडलों के DVA प्रतिशत पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। कंपनियों का मानना है कि यदि DVA की गणना के लिए एक पूर्व-निर्धारित या स्थिर विनिमय दर को आधार बनाया जाए, तो स्थानीयकरण का वास्तविक स्तर अधिक सटीक रूप से सामने आएगा और योजना का उद्देश्य भी बेहतर तरीके से पूरा होगा।

    विशेषज्ञों का मानना है कि ऑटो उद्योग में वैश्विक सप्लाई चेन का महत्वपूर्ण योगदान है। कई अत्याधुनिक कंपोनेंट अभी भी विदेशों से आयात किए जाते हैं। ऐसे में मुद्रा विनिमय दरों में तेज बदलाव कंपनियों की लागत संरचना और सरकारी प्रोत्साहन योजनाओं दोनों को प्रभावित कर सकते हैं। इस कारण उद्योग लंबे समय से ऐसी व्यवस्था की मांग करता रहा है जो विनिमय दरों के अस्थायी उतार-चढ़ाव से प्रभावित न हो।

    ऑटो पीएलआई योजना के तहत पात्रता और लाभ निर्धारण में ARAI की महत्वपूर्ण भूमिका है। यह संस्था विभिन्न वाहन मॉडलों के स्थानीयकरण स्तर और अन्य तकनीकी मानकों का सत्यापन करती है। अब उद्योग की मांग पर सरकार और संबंधित एजेंसियां किस प्रकार विचार करती हैं, इस पर वाहन निर्माताओं की नजर बनी हुई है। यदि इस संबंध में कोई नीति संशोधन किया जाता है, तो इससे कई कंपनियों को राहत मिल सकती है और योजना के तहत निवेश तथा उत्पादन को बढ़ावा मिलने की संभावना बढ़ जाएगी।

  • Sebi की सख्त कार्रवाई के बाद Rajesh Exports पर संकट गहराया, PLI योजना से बाहर होने की आशंका से शेयरों में भारी बिकवाली

    Sebi की सख्त कार्रवाई के बाद Rajesh Exports पर संकट गहराया, PLI योजना से बाहर होने की आशंका से शेयरों में भारी बिकवाली

    नई दिल्ली । राजेश एक्सपोर्ट्स के शेयरों में लगातार गिरावट का दौर जारी है और निवेशकों की चिंता भी बढ़ती जा रही है। सप्ताह के पहले कारोबारी दिन कंपनी का शेयर पांच प्रतिशत के लोअर सर्किट के साथ बंद हुआ। पिछले तीन सत्रों के दौरान शेयर में करीब 15 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। बाजार में बढ़ती बेचैनी की मुख्य वजह कंपनी को एडवांस्ड केमिस्ट्री सेल बैटरी स्टोरेज से जुड़ी उत्पादन आधारित प्रोत्साहन योजना यानी पीएलआई योजना से बाहर किए जाने की आशंका है।

    सूत्रों के अनुसार, भारी उद्योग मंत्रालय कंपनी की पात्रता की समीक्षा कर रहा है। मंत्रालय के स्तर पर इस बात पर विचार किया जा रहा है कि क्या राजेश एक्सपोर्ट्स को योजना के लाभार्थियों की सूची में बनाए रखा जाए या नहीं। यदि कंपनी को योजना से बाहर किया जाता है, तो इसका असर उसके बैटरी कारोबार और भविष्य की विस्तार योजनाओं पर पड़ सकता है। यही कारण है कि निवेशक इस पूरे घटनाक्रम पर करीब से नजर बनाए हुए हैं।

    कंपनी से जुड़ी चिंताएं उस समय और बढ़ गईं जब बाजार नियामक ने हाल ही में एक अंतरिम आदेश जारी किया। नियामकीय कार्रवाई में कंपनी पर वित्तीय आंकड़ों को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। आरोप है कि कुछ सहायक कंपनियों के माध्यम से कई वर्षों के दौरान राजस्व को वास्तविक स्थिति से अधिक दिखाया गया। इसके अलावा संबंधित पक्षों के साथ लेनदेन में पारदर्शिता की कमी और आवश्यक खुलासों से जुड़े मुद्दों की भी जांच की जा रही है।

    मामले का संबंध कंपनी के लिथियम-आयन बैटरी कारोबार से जुड़ी इकाइयों से भी जोड़ा जा रहा है। यही कारण है कि बैटरी निर्माण क्षेत्र में कंपनी की भूमिका और सरकारी प्रोत्साहन योजनाओं के लिए उसकी पात्रता को लेकर नए सवाल खड़े हुए हैं। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जांच में गंभीर अनियमितताएं सामने आती हैं तो इसका प्रभाव केवल शेयर प्रदर्शन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि कंपनी की कारोबारी साख पर भी असर पड़ सकता है।

    नियामकीय कार्रवाई के तहत कंपनी के चेयरमैन और प्रमोटर के खिलाफ भी प्रतिबंधात्मक कदम उठाए गए हैं। उन्हें अगले आदेश तक कंपनी के शेयरों में खरीद-बिक्री करने से रोका गया है। साथ ही कंपनी के खातों की दोबारा फॉरेंसिक जांच कराने का निर्देश भी दिया गया है। इस फैसले ने निवेशकों के बीच अनिश्चितता को और बढ़ा दिया है।

    हालांकि कंपनी ने सभी आरोपों को खारिज किया है। प्रबंधन का कहना है कि वह जांच एजेंसियों के साथ पूरा सहयोग कर रहा है और उसके खिलाफ लगाए गए आरोप तथ्यात्मक रूप से सही नहीं हैं। कंपनी का तर्क है कि केवल राजस्व बढ़ाकर दिखाने से कोई विशेष लाभ नहीं मिलता, विशेष रूप से तब जब उससे लाभप्रदता में कोई अतिरिक्त फायदा न हो। कंपनी ने भरोसा जताया है कि जांच पूरी होने के बाद वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो जाएगी।

    फिलहाल बाजार की नजर दो महत्वपूर्ण घटनाक्रमों पर टिकी हुई है। पहला, नियामकीय जांच की आगे की दिशा और उसके निष्कर्ष क्या रहते हैं। दूसरा, भारी उद्योग मंत्रालय पीएलआई योजना में कंपनी की पात्रता को लेकर क्या निर्णय लेता है। इन दोनों मामलों का असर आने वाले समय में कंपनी के शेयर मूल्य, निवेशकों के विश्वास और बैटरी कारोबार की संभावनाओं पर पड़ सकता है।

    शेयर बाजार में मौजूदा उतार-चढ़ाव यह संकेत दे रहा है कि निवेशक फिलहाल सतर्क रुख अपना रहे हैं। जब तक जांच और सरकारी समीक्षा प्रक्रिया पर स्पष्टता नहीं आती, तब तक कंपनी के शेयरों में अस्थिरता बनी रहने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।