अगर आप फ्रूटी फ्लेवर पसंद करते हैं, तो इसी बेस में आम का पल्प मिलाकर Mango Ice Cream भी तैयार कर सकते हैं। यह खासतौर पर बच्चों और परिवार के सभी सदस्यों को खूब पसंद आती है और गर्मियों में एक परफेक्ट ट्रीट बन जाती है।
Author: bharati
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भीषण गर्मी में घर पर बनाएं ठंडी-ठंडी आइसक्रीम, स्वाद भी हेल्दी भी
नई दिल्ली। गर्मी का मौसम अपने साथ तेज धूप और थकान लेकर आता है, ऐसे में ठंडी आइसक्रीम मिल जाए तो सारा मूड फ्रेश हो जाता है। हालांकि बाजार में मिलने वाली आइसक्रीम स्वादिष्ट जरूर होती है, लेकिन उसमें प्रिजर्वेटिव और आर्टिफिशियल फ्लेवर भी होते हैं। ऐसे में घर पर बनी आइसक्रीम न सिर्फ स्वाद में बेहतर होती है, बल्कि सेहत के लिए भी ज्यादा फायदेमंद रहती है। खास बात यह है कि आप इसे अपनी पसंद के फ्लेवर में आसानी से तैयार कर सकते हैं।घर पर आइसक्रीम बनाना बेहद आसान है और इसके लिए ज्यादा मेहनत की भी जरूरत नहीं होती। वनीला आइसक्रीम बनाने के लिए सबसे पहले 2 कप ठंडी फ्रेश क्रीम लें और उसे अच्छी तरह फेंटें जब तक वह गाढ़ी और फ्लफी न हो जाए। इसके बाद इसमें 1 कप कंडेंस्ड मिल्क डालकर हल्के हाथ से मिलाएं, ताकि मिश्रण की क्रीमीनेस बनी रहे। अब इसमें एक छोटा चम्मच वनीला एसेंस डालें और स्वाद के अनुसार 2-3 चम्मच चीनी मिलाएं।अगर आप आइसक्रीम को और मजेदार बनाना चाहते हैं, तो इसमें चॉकलेट चिप्स, ड्राई फ्रूट्स या अपनी पसंद के टॉपिंग्स भी जोड़ सकते हैं। इससे इसका स्वाद और टेक्सचर दोनों बेहतर हो जाते हैं। जब मिश्रण पूरी तरह तैयार हो जाए, तो इसे एक एयरटाइट कंटेनर में डालकर फ्रीजर में 6 से 8 घंटे के लिए रख दें। बीच-बीच में एक-दो बार इसे बाहर निकालकर हल्का सा मिक्स कर लें, इससे आइसक्रीम ज्यादा स्मूद और क्रीमी बनती है।
अगर आप फ्रूटी फ्लेवर पसंद करते हैं, तो इसी बेस में आम का पल्प मिलाकर Mango Ice Cream भी तैयार कर सकते हैं। यह खासतौर पर बच्चों और परिवार के सभी सदस्यों को खूब पसंद आती है और गर्मियों में एक परफेक्ट ट्रीट बन जाती है।घर पर बनी आइसक्रीम की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें किसी तरह का प्रिजर्वेटिव नहीं होता। आप अपनी जरूरत और हेल्थ के हिसाब से इसमें शुगर की मात्रा कम या ज्यादा कर सकते हैं। साथ ही, यह बाहर मिलने वाली आइसक्रीम की तुलना में काफी किफायती भी पड़ती है।इस गर्मी में बाहर की बजाय घर पर ही ठंडी, स्वादिष्ट और हेल्दी आइसक्रीम बनाएं और अपने परिवार के साथ इसका आनंद लें। यह न सिर्फ आपको गर्मी से राहत देगी, बल्कि आपके स्वास्थ्य का भी पूरा ख्याल रखेगी। -

मनाली में वीकेंड पर पर्यटकों की बाढ़, 3 दिन में 7000+ वाहन पहुंचे
नई दिल्ली। हिमाचल प्रदेश की खूबसूरत वादियों में बसे Manali में इस वीकेंड पर्यटकों का जबरदस्त सैलाब देखने को मिला। तीन दिनों के भीतर 7 हजार से अधिक पर्यटक वाहन मनाली पहुंचे, जिससे पूरा पर्यटन कारोबार एक बार फिर से गुलजार हो उठा। देश के अलग-अलग राज्यों के साथ-साथ स्थानीय जिलों से भी बड़ी संख्या में लोग यहां घूमने पहुंचे।आंकड़ों के मुताबिक, गुरुवार को करीब 1550 वाहन मनाली पहुंचे थे, जबकि शुक्रवार को यह संख्या अचानक बढ़कर 3000 तक पहुंच गई। शनिवार को थोड़ी गिरावट जरूर आई, लेकिन फिर भी करीब 2500 वाहन शहर में दाखिल हुए। रविवार को वापसी का दौर ज्यादा रहा, हालांकि करीब 1500 पर्यटक वाहन फिर भी मनाली पहुंचे।पर्यटकों की बढ़ती संख्या का सीधा असर होटल इंडस्ट्री पर भी देखने को मिला। शहर के प्रमुख होटलों में ऑक्यूपेंसी 70 प्रतिशत से बढ़कर 75 प्रतिशत तक पहुंच गई है, जिससे पर्यटन कारोबारियों के चेहरे खिल उठे हैं।रोहतांग दर्रे की बहाली का इंतजार
हालांकि, अभी तक Rohtang Pass पर्यटकों के लिए पूरी तरह से नहीं खुल पाया है। ऐसे में पर्यटक बर्फ का आनंद लेने के लिए Koksar का रुख कर रहे हैं, जहां भारी किराया देकर स्नो प्वाइंट तक पहुंचना पड़ रहा है। पर्यटन कारोबारियों को उम्मीद है कि रोहतांग दर्रा खुलते ही पर्यटकों की संख्या में और इजाफा होगा।कोकसर से ग्राम्फू तक लगा जाम
रविवार को कोकसर में हालात ऐसे हो गए कि Gramphu तक सड़क किनारे 3-4 किलोमीटर लंबा जाम लग गया। पर्यटकों ने बर्फ से ढकी वादियों में जमकर मस्ती की और सुहावने मौसम का आनंद उठाया।शिंकुला दर्रे के लिए एडवाइजरी
यदि आप Shinkula Pass की ओर जाने की योजना बना रहे हैं, तो ध्यान रखें कि केवल फोर-बाय-फोर (4×4) वाहन से ही यात्रा करें। यहां सड़क पर जमी बर्फ काफी फिसलन भरी है, जिससे हादसे का खतरा बना रहता है।
स्थानीय प्रशासन के अनुसार, जल्द ही सड़क बहाली के बाद पर्यटकों को मढ़ी तक जाने की अनुमति दी जा सकती है। जैसे ही रोहतांग मार्ग पूरी तरह खुलता है, पर्यटन गतिविधियों में और तेजी आने की उम्मीद है।कुल मिलाकर, वीकेंड पर मनाली में उमड़ी भीड़ ने यह साफ कर दिया है कि गर्मियों की शुरुआत के साथ ही पहाड़ों की ओर लोगों का रुख तेजी से बढ़ रहा है। -

सिर्फ 20 रुपये का चुकंदर देगा नेचुरल ग्लो, घर पर ऐसे बनाएं सस्ता स्किन केयर मास्क
नई दिल्ली। आजकल ग्लोइंग स्किन पाने के लिए लोग महंगे सैलून ट्रीटमेंट्स और ब्यूटी प्रोडक्ट्स पर हजारों रुपये खर्च कर देते हैं, लेकिन अगर आप चाहें तो बेहद कम खर्च में घर पर ही नेचुरल निखार पा सकते हैं। हेल्थ और ब्यूटी एक्सपर्ट्स के अनुसार सिर्फ 20 रुपये का Beetroot आपकी त्वचा के लिए किसी ब्यूटी टॉनिक से कम नहीं है।चुकंदर में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स और आयरन त्वचा को अंदर से साफ करने में मदद करते हैं, जिससे चेहरे पर प्राकृतिक चमक आती है। वहीं, इसे सही सामग्री के साथ मिलाकर लगाने से स्किन टाइट और फ्रेश भी दिखती है।चुकंदर और कॉफी से बनाएं नेचुरल फेस मास्क
एक आसान घरेलू उपाय के लिए चुकंदर और कॉफी पाउडर का इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके लिए पहले चुकंदर को उबालकर या कद्दूकस करके उसका पेस्ट बना लें। इसके बाद इसमें थोड़ी मात्रा में Coffee पाउडर मिलाएं। चाहें तो इसमें थोड़ा सा एलोवेरा जेल या शहद भी मिलाया जा सकता है ताकि स्किन को अतिरिक्त नमी मिले।इस मिश्रण को अच्छे से मिलाकर चेहरे पर लगाएं और लगभग 15-20 मिनट तक सूखने दें। इसके बाद हल्के गुनगुने पानी से चेहरा धो लें।इस उपाय के फायदे
चुकंदर और कॉफी का यह मिश्रण स्किन से डेड सेल्स हटाने में मदद करता है। इससे चेहरा साफ, मुलायम और चमकदार नजर आता है। चुकंदर ब्लड सर्कुलेशन को बेहतर करता है, जिससे चेहरे पर नैचुरल पिंक ग्लो आता है। वहीं कॉफी स्किन को एक्सफोलिएट कर डलनेस कम करती है।क्यों है यह तरीका खास?
इस घरेलू नुस्खे की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह पूरी तरह नेचुरल और सस्ता है। इसमें किसी भी तरह के केमिकल्स नहीं होते, जिससे साइड इफेक्ट्स का खतरा भी नहीं रहता। नियमित उपयोग से त्वचा हेल्दी और ग्लोइंग बनी रहती है।आज के समय में जब लोग महंगे ब्यूटी ट्रीटमेंट्स पर निर्भर हो रहे हैं, ऐसे में यह आसान और घरेलू उपाय न सिर्फ किफायती है, बल्कि लंबे समय तक असरदार भी साबित हो सकता है।अगर आप भी बिना ज्यादा खर्च किए नेचुरल ग्लो पाना चाहते हैं, तो इस चुकंदर फेस मास्क को अपनी स्किन केयर रूटीन में जरूर शामिल करें। -

आज का मीन राशिफल 5 मई: अवसर भी मिलेंगे, अहंकार से बचना होगा जरूरी
नई दिल्ली। 5 मई का दिन Pisces यानी मीन राशि के जातकों के लिए मिश्रित परिणाम लेकर आया है। आज आपको करियर में आगे बढ़ने के अच्छे अवसर मिल सकते हैं, लेकिन इन अवसरों का सही लाभ उठाने के लिए आपको अपने व्यवहार और निर्णयों पर विशेष ध्यान देना होगा।कार्यक्षेत्र में आज आपकी मेहनत रंग ला सकती है। नई जिम्मेदारियां मिल सकती हैं या किसी बड़े प्रोजेक्ट का हिस्सा बनने का मौका भी मिल सकता है। अगर आप टीम के साथ काम कर रहे हैं, तो लीडरशिप दिखाने का अवसर मिलेगा। हालांकि, यहां एक बात का ध्यान रखना बेहद जरूरी है—अहंकार या ओवरकॉन्फिडेंस से बचें, क्योंकि इससे आपके संबंधों और छवि पर असर पड़ सकता है।
आर्थिक स्थिति की बात करें तो आज धन लाभ के योग बन रहे हैं। आपकी आय में वृद्धि हो सकती है या कोई नया स्रोत सामने आ सकता है। निवेश के लिहाज से भी दिन ठीक-ठाक कहा जा सकता है, लेकिन कोई भी बड़ा फैसला सोच-समझकर ही लें।
प्रेम जीवन में आज सामान्य स्थिति बनी रहेगी। पार्टनर के साथ तालमेल बनाए रखना जरूरी है। छोटी-छोटी बातों को नजरअंदाज करें और रिश्ते में मिठास बनाए रखें।
स्वास्थ्य के मामले में दिन अच्छा रहेगा। कोई बड़ी परेशानी नहीं दिख रही है, लेकिन दिनभर की भागदौड़ के बीच थोड़ा आराम जरूर करें।
कुल मिलाकर, आज का दिन आपके लिए प्रगति और सफलता के अवसर लेकर आया है, बस जरूरत है संतुलन और विनम्रता बनाए रखने की। सही दृष्टिकोण के साथ आप दिन को अपने पक्ष में कर सकते हैं।
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मध्यप्रदेश में बंद परिवहन निगम पर हाईकोर्ट सख्त, सरकार को फिर नोटिस
नई दिल्ली। मध्यप्रदेश में वर्षों से बंद पड़े राज्य सड़क परिवहन निगम को लेकर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने सख्त टिप्पणी की है। कोर्ट ने राज्य और केंद्र सरकार को पुनः नोटिस जारी करते हुए छह सप्ताह के भीतर विस्तृत जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। यह मामला जनहित याचिका के रूप में सामने आया है, जिसमें राज्य में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था की गंभीर स्थिति को उजागर किया गया है।21 साल से बंद परिवहन सेवा पर सवाल
यह याचिका सामाजिक कार्यकर्ता और अधिवक्ता बीएल जैन द्वारा दायर की गई थी। इसमें कहा गया है कि लगभग 21 वर्षों से राज्य का परिवहन निगम बंद पड़ा है, जिसके कारण लोगों को यात्रा के लिए निजी बसों और असुरक्षित साधनों पर निर्भर रहना पड़ रहा है।ग्रामीण इलाकों में हालात गंभीर
याचिका में बताया गया कि ग्रामीण क्षेत्रों में बसों की कमी के कारण लोग मालवाहक वाहनों में यात्रा करने को मजबूर हैं, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा लगातार बढ़ रहा है। कई मामलों में जानमाल की हानि भी हो चुकी है।पहले भी नोटिस, लेकिन जवाब नहीं
कोर्ट ने पहले भी सितंबर 2024 में राज्य सरकार को चार सप्ताह में जवाब देने के निर्देश दिए थे, लेकिन अब तक कोई जवाब दाखिल नहीं किया गया। इस पर अदालत ने नाराजगी जताते हुए दोबारा नोटिस जारी किया है।सरकारी जिम्मेदारी पर उठे सवाल
याचिकाकर्ता की ओर से तर्क दिया गया कि सुरक्षित और सुलभ परिवहन व्यवस्था उपलब्ध कराना सरकार की मूल जिम्मेदारी है, ठीक वैसे ही जैसे शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाएं। केरल और महाराष्ट्र जैसे राज्यों का उदाहरण देते हुए कहा गया कि वहां सरकारी परिवहन निगम सफलतापूर्वक चल रहे हैं और लाभ में भी हैं।घोषणाओं के बावजूद ठोस कदम नहीं
याचिका में यह भी कहा गया कि राज्य सरकार द्वारा समय-समय पर सार्वजनिक परिवहन सेवा शुरू करने की घोषणाएं की गईं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई जमीन पर नहीं दिखी।सार्वजनिक परिवहन पर बढ़ा दबाव
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की यह सख्ती राज्य में बंद परिवहन व्यवस्था को लेकर नई बहस छेड़ रही है। अब सभी की नजर सरकार के जवाब और आगामी कदमों पर टिकी है। -

झाबुआ में बनेगा DAVV का मेडिकल कॉलेज, इंजीनियरिंग कॉलेज में अस्थायी संचालन की तैयारी
नई दिल्ली। इंदौर स्थित देवी अहिल्या विश्वविद्यालय अब आदिवासी बहुल झाबुआ जिले में अपना मेडिकल कॉलेज स्थापित करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। विश्वविद्यालय को इसके लिए राज्य सरकार द्वारा भूमि आवंटित कर दी गई है, जिससे परियोजना को औपचारिक रूप से मंजूरी मिल चुकी है।इंजीनियरिंग कॉलेज में अस्थायी संचालन की योजना
कुलगुरु प्रोफेसर राकेश सिंघई के अनुसार, जब तक मेडिकल कॉलेज का नया भवन तैयार नहीं होता, तब तक अस्थायी रूप से इंजीनियरिंग कॉलेज परिसर में ही मेडिकल शिक्षा शुरू करने का प्रस्ताव है। इसके लिए विश्वविद्यालय ने अनुमति के लिए आवेदन किया है और राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) से मंजूरी का इंतजार किया जा रहा है।झाबुआ जिला अस्पताल बनेगा टीचिंग हॉस्पिटल
योजना के तहत झाबुआ जिला अस्पताल को मेडिकल कॉलेज के टीचिंग हॉस्पिटल के रूप में विकसित किया जाएगा। अधिकारियों के अनुसार अस्पताल में लगभग 250 बेड पहले से उपलब्ध हैं, और इसे 300 बेड क्षमता तक बढ़ाया जाएगा, जो 100 मेडिकल सीटों के लिए आवश्यक मानक है।परियोजना की लागत और विकास योजना
मेडिकल कॉलेज की आधारभूत संरचना तैयार करने में शुरुआती तौर पर करीब 350 से 400 करोड़ रुपये की लागत आने का अनुमान है। हालांकि अस्पताल पहले से उपलब्ध होने के कारण लागत अपेक्षाकृत नियंत्रित रहेगी।शासन की मंजूरी पर टिकी आगे की प्रक्रिया
विश्वविद्यालय ने उम्मीद जताई है कि इस महीने के भीतर अनुमति से जुड़ा निर्णय आ सकता है। यदि मंजूरी मिलती है तो झाबुआ में मेडिकल शिक्षा की शुरुआत अस्थायी ढांचे से ही कर दी जाएगी।आदिवासी क्षेत्र के लिए बड़ा बदलाव
झाबुआ जैसे आदिवासी क्षेत्र में मेडिकल कॉलेज की स्थापना से न सिर्फ चिकित्सा शिक्षा का विस्तार होगा, बल्कि स्थानीय स्वास्थ्य सेवाओं में भी बड़ा सुधार आने की उम्मीद है।शिक्षा और स्वास्थ्य दोनों में नई शुरुआत
देवी अहिल्या विश्वविद्यालय की यह पहल मध्यप्रदेश के आदिवासी क्षेत्रों में उच्च चिकित्सा शिक्षा और बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। -

मध्यप्रदेश में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल: 62 IPS अफसरों के तबादले, 19 जिलों के SP बदले गए
नई दिल्ली। मध्यप्रदेश में कानून-व्यवस्था को मजबूत करने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने बड़ा प्रशासनिक कदम उठाते हुए 62 IPS अधिकारियों के तबादले कर दिए हैं। यह सूची देर रात गृह विभाग द्वारा जारी की गई, जिसमें ADG, DIG, SP और DCP स्तर तक के अधिकारियों को नई जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं।यह फैसला मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और डीजीपी कैलाश मकवाणा के बीच हुई उच्च स्तरीय चर्चा के बाद लिया गया।
सिंगरौली और सिवनी में कार्रवाई के बाद बदलाव
हाल ही में हुए बैंक डकैती कांड के बाद सिंगरौली के तत्कालीन SP मनीष खत्री को हटा दिया गया है और उन्हें AIG PHQ भोपाल भेजा गया है। वहीं सिवनी में सामने आए हवाला कांड के बाद SP सुनील कुमार मेहता को हटाकर इंदौर में DCP की जिम्मेदारी दी गई है।19 जिलों में बदले गए SP
इस बड़े फेरबदल में प्रदेश के 19 जिलों जैसे भिंड, शिवपुरी, रीवा, सागर, धार, मुरैना, छतरपुर, खंडवा, नीमच, पांढुर्णा, आगर मालवा, अनूपपुर, मऊगंज, डिंडौरी, मंदसौर, दतिया, सीहोर, सिंगरौली और दमोह में नए पुलिस अधीक्षक नियुक्त किए गए हैं।DIG और SP स्तर पर बड़ा रोटेशन
कई वरिष्ठ अधिकारियों को DIG पद पर पदोन्नति दी गई है। रीवा, धार, झाबुआ और ग्वालियर सहित कई जिलों में तैनात अधिकारियों को अब राज्य मुख्यालय या अन्य रेंज में जिम्मेदारी दी गई है। इस बदलाव में पुलिस अधीक्षक स्तर के कई अधिकारी सीधे DIG या वरिष्ठ पदों पर पहुंचे हैं, जिससे पुलिस संरचना में बड़ा बदलाव देखने को मिला है।क्यों किया गया इतना बड़ा फेरबदल?
सूत्रों के अनुसार, यह कदम कानून-व्यवस्था को और मजबूत करने, लंबित मामलों में तेजी लाने और प्रशासनिक जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है। हाल के दिनों में कुछ जिलों में हुई आपराधिक घटनाओं को भी इस बदलाव का प्रमुख कारण माना जा रहा है।कुछ पद अभी खाली, जल्द आ सकती है नई सूची
बुरहानपुर और सागर जैसे कुछ जिलों में अभी SP और IG स्तर के पद खाली हैं। माना जा रहा है कि जल्द ही एक और तबादला सूची जारी हो सकती है जिसमें इन पदों को भी भरा जाएगा।पुलिस व्यवस्था में नई सर्जरी
मध्यप्रदेश सरकार का यह बड़ा कदम प्रशासनिक सख्ती और सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। 62 IPS अधिकारियों के तबादले से राज्य की पुलिस व्यवस्था में एक नया संतुलन और नई रणनीति देखने को मिल सकती है। -

MP के सांसदों को दक्षिण में झटका: तमिलनाडु-केरल में BJP को हार का सामना
नई दिल्ली। पांच राज्यों के चुनाव में जहां बीजेपी को कई जगहों पर सफलता मिली, वहीं मध्य प्रदेश के लिए दक्षिण भारत से निराशाजनक खबर सामने आई है। एमपी कोटे से राज्यसभा सांसद एल. मुरुगन और जॉर्ज कुरियन को क्रमशः तमिलनाडु और केरल में हार का सामना करना पड़ा।केरल में जॉर्ज कुरियन तीसरे नंबर पर
केरल की कांजीरापल्ली सीट से चुनाव लड़ रहे जॉर्ज कुरियन मुख्य मुकाबले से बाहर नजर आए। उन्हें करीब 26,984 वोट मिले और वे तीसरे स्थान पर रहे। इस सीट पर सीधा मुकाबला एलडीएफ और यूडीएफ के बीच रहा। कांग्रेस के उम्मीदवार रोनी के. बेबी ने 56,646 वोट हासिल कर जीत दर्ज की, जबकि दूसरे स्थान पर डॉ. एन. जयराज रहे। करीब 29 हजार वोटों के बड़े अंतर से हार ने यह साफ कर दिया कि भाजपा इस सीट पर प्रभाव नहीं बना पाई।तमिलनाडु में मुरुगन को कड़ी टक्कर, पर जीत नहीं
तमिलनाडु की अविनाशी (SC) सीट पर एल. मुरुगन ने जोरदार मुकाबला किया, लेकिन जीत हासिल नहीं कर सके। उन्हें करीब 68,836 वोट मिले और वे दूसरे स्थान पर रहे। इस सीट पर बड़ा उलटफेर करते हुए तमिलगा वेत्री कड़गम के उम्मीदवार कमाली एस. ने 84,209 वोटों के साथ जीत दर्ज की। वहीं द्रविड़ मुनेत्र कड़गम के उम्मीदवार तीसरे स्थान पर रहे। यह मुकाबला इसलिए भी खास रहा क्योंकि इसमें विजय की पार्टी का प्रभाव साफ तौर पर देखने को मिला।क्षेत्रीय राजनीति का असर भारी
तमिलनाडु में द्रविड़ मुनेत्र कड़गम गठबंधन और क्षेत्रीय पहचान की राजनीति का असर साफ नजर आया। वहीं केरल में परंपरागत रूप से मजबूत एलडीएफ और यूडीएफ के बीच भाजपा अपनी जगह नहीं बना सकी।कौन हैं ये दोनों नेता?
एल. मुरुगन केंद्र सरकार में सूचना एवं प्रसारण राज्य मंत्री हैं और तमिलनाडु बीजेपी के पूर्व अध्यक्ष रह चुके हैं। वे दलित चेहरे के रूप में पार्टी के अहम नेता माने जाते हैं।वहीं जॉर्ज कुरियन केंद्रीय अल्पसंख्यक कल्याण और मत्स्य पालन राज्य मंत्री हैं और केरल में भाजपा के पुराने चेहरों में शामिल हैं। उन्हें ईसाई समुदाय और पार्टी के बीच सेतु माना जाता है।
दक्षिण में चुनौती बरकरार
तमिलनाडु और केरल के नतीजे यह संकेत देते हैं कि दक्षिण भारत में भाजपा को अभी भी मजबूत पकड़ बनाने के लिए लंबा रास्ता तय करना है। क्षेत्रीय दलों और स्थानीय मुद्दों के सामने राष्ट्रीय चेहरों की रणनीति पूरी तरह सफल नहीं हो सकी। -

“महादेव सबसे शक्तिशाली किरदार”-तरुण खन्ना ने तोड़ी टाइपकास्ट की धारणा
नई दिल्ली। टीवी इंडस्ट्री में तरुण खन्ना को ‘महादेव’ के रूप में खास पहचान मिली है। उन्होंने अब तक 400 से ज्यादा बार भगवान भगवान शिव का किरदार निभाया है। ‘कर्म फल दाता शनि’, ‘राधा कृष्ण’, ‘जय कन्हैया लाल की’, ‘देवी आदि पराशक्ति’ और ‘परम अवतार श्री कृष्ण’ जैसे कई लोकप्रिय पौराणिक शोज में उनकी मौजूदगी ने दर्शकों के दिलों में खास जगह बनाई है।टाइपकास्ट या सोच-समझकर लिया फैसला?
लगातार एक ही तरह के किरदार निभाने पर अक्सर कलाकारों को ‘टाइपकास्ट’ कहा जाता है, लेकिन तरुण खन्ना इस धारणा से अलग सोच रखते हैं। उनका कहना है कि वह जानबूझकर इस भूमिका को चुनते हैं क्योंकि यह बेहद प्रभावशाली और शक्तिशाली किरदार है। उनके अनुसार, “एक अभिनेता के लिए किरदार की ताकत समझना जरूरी है और महादेव से ज्यादा शक्तिशाली रोल मिलना मुश्किल है। इसलिए यह मेरा सोचा-समझा निर्णय है।”किरदार ने बदली जिंदगी
तरुण खन्ना मानते हैं कि भगवान शिव का किरदार निभाने से उनके व्यक्तित्व में बड़ा बदलाव आया है। इस भूमिका ने उन्हें अधिक धैर्यवान बनाया और उनके भीतर की विनम्रता को फिर से जागृत किया।टीवी से फिल्मों और थिएटर तक का सफर
तरुण खन्ना ने सिर्फ टीवी ही नहीं, बल्कि फिल्मों और थिएटर में भी महादेव का किरदार निभाया है। तेलुगु फिल्म ‘अखंडा 2’ और नाटक ‘हमारे राम’ में भी उन्होंने इसी रूप में दर्शकों को प्रभावित किया।सिर्फ VFX नहीं, भावनाएं जरूरी
पौराणिक शोज पर अपनी राय रखते हुए तरुण खन्ना ने कहा कि केवल VFX और भव्य कॉस्ट्यूम से शो सफल नहीं होता। उनका मानना है कि अगर कहानी में भावनाओं की गहराई नहीं होगी, तो दर्शकों से जुड़ाव नहीं बन पाएगा। उन्होंने साफ कहा, “महादेव सिर्फ एक लुक नहीं, बल्कि एक दिव्य अनुभूति है, जिसे निभाने के लिए सच्ची श्रद्धा और समर्पण चाहिए।”किरदार नहीं, आस्था का प्रतीक
तरुण खन्ना के लिए ‘महादेव’ का किरदार सिर्फ एक रोल नहीं, बल्कि आस्था और समर्पण का प्रतीक है। यही वजह है कि वह इसे बार-बार निभाने के बावजूद इसे अपनी ताकत मानते हैं, कमजोरी नहीं।
