Author: bharati

  • MP: छिंदवाड़ा NICU अग्निकांड में 1 बच्ची की मौत, 2 झुलसे बच्चों के इलाज का पूरा खर्च उठाएगी सरकार

    MP: छिंदवाड़ा NICU अग्निकांड में 1 बच्ची की मौत, 2 झुलसे बच्चों के इलाज का पूरा खर्च उठाएगी सरकार


    छिंदवाड़ा।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के छिंदवाड़ा जिला अस्पताल (Chhindwara District Hospital) के स्पेशल न्यूबॉर्न केयर यूनिट (Special Newborn Care Unit) में शनिवार तड़के वार्मर मशीन में अचानक आग लगने से बड़ा हादसा हो गया. इस दुखद घटना में झुलसे तीन नवजात शिशुओं में से एक बच्ची ने जबलपुर में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया. मुख्यमंत्री मोहन यादव (Chief Minister Mohan Yadav) ने इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया है और शोकाकुल परिवार के प्रति संवेदना जताई है।

    मुख्यमंत्री ने मृतक बच्ची के परिजनों को 4 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है. इसके साथ ही उन्होंने साफ किया कि जबलपुर मेडिकल कॉलेज में उपचाराधीन अन्य दो नवजात बच्चों के इलाज का पूरा खर्च राज्य सरकार वहन करेगी.

    आग लगने के तुरंत बाद ऑन-ड्यूटी स्टाफ ने मुस्तैदी दिखाते हुए अग्निशामक यंत्रों का उपयोग किया और ऑक्सीजन सप्लाई लाइन बंद कर बड़े हादसे को टाल दिया. यूनिट में मौजूद 33 नवजातों में से 30 को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।

    वार्मर में रखे 3 बच्चे झुलस गए, जिन्हें प्राथमिक उपचार के बाद तुरंत एंबुलेंस और डॉक्टरों की निगरानी में जबलपुर मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया. इनमें से एक नवजात की हालत अत्यंत गंभीर थी, जिसने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया.

    इस घटना को लेकर मध्य प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला है. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर पोस्ट करते हुए सिंघार ने आरोप लगाया कि सरकारी अस्पताल मरीजों की जान के लिए खतरा बनते जा रहे हैं. उन्होंने प्रदेश के सभी सरकारी व निजी अस्पतालों का तुरंत फायर सेफ्टी ऑडिट कराने और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।

    फिलहाल, छिंदवाड़ा जिला प्रशासन और अस्पताल प्रबंधन ने हादसे के तकनीकी कारणों की जांच शुरू कर दी है और सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित कर लिए गए हैं।

  • नीदरलैंड्स के डेटा प्रोटेक्शन नियामक ने Uber पर ठोंका ₹9,226 करोड़ का जुर्माना, जानें क्या है मामला?

    नीदरलैंड्स के डेटा प्रोटेक्शन नियामक ने Uber पर ठोंका ₹9,226 करोड़ का जुर्माना, जानें क्या है मामला?


    नई दिल्ली।
    कैब बुकिंग कंपनी उबर (Cab Booking Company Uber) पर यूरोप (Europe) में बड़ा जुर्माना लगाया गया है। नीदरलैंड्स (Netherlands) के डेटा प्रोटेक्शन वॉचडॉग (Data Protection Watchdog) ने कंपनी पर 825 मिलियन यूरो यानी करीब ₹9,226 करोड़ का जुर्माना लगाया है। मामला ड्राइवरों के अकाउंट को कथित तौर पर बिना पहले चेतावनी दिए और बिना इंसानी जांच के ऑटोमेटेड सिस्टम के जरिए सस्पेंड या डिएक्टिवेट करने से जुड़ा है। नियामक ने इसे ड्राइवरों के अधिकारों का गंभीर उल्लंघन बताया है। उसका कहना है कि किसी कंप्यूटर सिस्टम को अकेले ऐसे फैसले नहीं लेने चाहिए, जिनसे किसी व्यक्ति की कमाई और रोजमर्रा की जिंदगी पर बड़ा असर पड़ सकता है। आइए जरा विस्तार से इसकी डिटेल्स जानते हैं।

    डच डेटा प्रोटेक्शन अथॉरिटी के मुताबिक Uber ने कुछ मामलों में ड्राइवरों के अकाउंट को बिना पर्याप्त चेतावनी और मानवीय हस्तक्षेप के बंद किया। नियामक की डिप्टी चेयर मोनिक वर्डियर ने इसे “गंभीर उल्लंघन” बताया। उनका कहना है कि कई ड्राइवरों के लिए अकाउंट बंद होने का सीधा मतलब उनकी आय का अचानक खत्म होना था। नियामक का तर्क है कि जब किसी व्यक्ति की रोजी-रोटी पर इतना बड़ा असर पड़ रहा हो, तो केवल कंप्यूटर एल्गोरिदम के आधार पर फैसला लेना उचित नहीं है और प्रभावित व्यक्ति को अपना पक्ष रखने का अवसर मिलना चाहिए।

    यह मामला यूरोप में 2018 से 2022 के बीच हुई घटनाओं से जुड़ा है। इसकी शुरुआत फ्रांस में एक शिकायत से हुई थी, बाद में जांच नीदरलैंड्स के डेटा प्रोटेक्शन नियामक ने संभाली, क्योंकि Uber का यूरोपीय मुख्यालय नीदरलैंड्स में स्थित है। जांच में Uber के उन सिस्टम पर सवाल उठे, जिनका इस्तेमाल ड्राइवरों की संदिग्ध गतिविधियों को पहचानने और उनके अकाउंट पर कार्रवाई करने के लिए किया जाता था। कंपनी के सिस्टम कुछ ड्राइवरों पर अनावश्यक लंबे रास्ते लेने से किराया बढ़ाने या यात्रा स्वीकार करने के बाद उसे पूरा न करने जैसी गतिविधियों का संदेह कर सकते थे।

    Uber का कहना है कि ऐसे कई सस्पेंशन अस्थायी थे और स्थायी रूप से अकाउंट बंद करने का फैसला इंसानी समीक्षा के बिना नहीं किया जाता था। कंपनी ने नियामक के इस निष्कर्ष को भी खारिज किया कि कम ग्राहक रेटिंग के आधार पर कुछ ड्राइवरों को स्थायी रूप से ऑटोमेटेड सिस्टम के जरिए डिएक्टिवेट किया गया। Uber ने जुर्माने को अनुपातहीन और अत्यधिक बताते हुए कहा कि वह ड्राइवरों के अधिकारों को गंभीरता से लेती है। कंपनी के मुताबिक उसके पास मानव समीक्षा और ड्राइवरों को सस्पेंशन के खिलाफ चुनौती देने का विकल्प देने वाली नीतियां मौजूद हैं।

    इस मामले में यूरोप के GDPR (General Data Protection Regulation) के नियम महत्वपूर्ण हैं। GDPR के तहत कंपनियां ऐसे फैसले केवल कंप्यूटर एल्गोरिदम के भरोसे नहीं छोड़ सकतीं, जिनका किसी व्यक्ति पर महत्वपूर्ण असर पड़ता हो। ऐसे मामलों में सार्थक मानवीय निगरानी और फैसले को चुनौती देने का अवसर जरूरी माना जाता है। Uber पर लगाया गया जुर्माना इसी सिद्धांत से जुड़ा है। नियामक ने बताया कि जुर्माने की राशि कंपनी के 2025 के सालाना कारोबार के एक हिस्से के आधार पर तय की गई है। Uber का कहना है कि प्रभावित ड्राइवरों की संख्या सीमित थी और 2021 में कम ग्राहक रेटिंग के कारण पूरे यूरोप में केवल 126 ड्राइवरों को डिएक्टिवेट किया गया था।

    यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब यूरोपीय नियामक बड़ी अमेरिकी टेक कंपनियों पर डेटा प्राइवेसी, प्रतिस्पर्धा और डिजिटल नियमों के उल्लंघन को लेकर लगातार सख्ती कर रहे हैं। Meta, Google, Apple और Amazon जैसी कंपनियों पर भी अरबों यूरो के जुर्माने लग चुके हैं। Uber के मामले में यह फैसला एक बड़ा संदेश देता है कि AI और ऑटोमेशन से लिए गए फैसलों में भी इंसानी निगरानी और अपील का अधिकार जरूरी है, खासकर तब जब किसी फैसले का सीधा असर किसी व्यक्ति की नौकरी या आय पर पड़ता हो।

  • US में बड़ी आतंकी साजिश नाकाम…. FBI चीफ बोले- ISIS के निशाने पर था न्यूयॉर्क स्टेट कैपिटल

    US में बड़ी आतंकी साजिश नाकाम…. FBI चीफ बोले- ISIS के निशाने पर था न्यूयॉर्क स्टेट कैपिटल


    वाशिंगटन।
    एफबीआई निदेशक काश पटेल (FBI Director Kash Patel) ने शनिवार को कहा कि संघीय कानून प्रवर्तन एजेंसियों (Federal Law Enforcement Agencies) ने एक आतंकी साजिश (Terrorist plot) नाकाम की है। उन्होंने कहा कि यह न्यूयॉर्क स्टेट कैपिटल को निशाना बनाने की साजिश थी। पटेल के मुताबिक, यह साजिश आईएसआईएस (ISIS) से प्रेरित थी।

    काश पटेल के मुताबिक, इस साजिश में अल्बानी की 35 साल की एक महिला शामिल थी। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इसकी जानकारी दी। पटेल ने संघीय आतंकवाद रोधी अभियानों के बारे में भी बताया। उन्होंने कहा कि पिछले एक साल में 640 आतंकी हमलों की साजिशें नाकाम की गईं।


    काश पटेल ने सोशल मीडिया पोस्ट में क्या लिखा?

    उन्होंने एक्स पर लिखा, अमेरिकी जमीन पर एक और संभावित आतंकी हमला नाकाम किया गया। 35 साल की अल्बानी की एक महिला पर न्यूयॉर्क स्टेट कैपिटल को निशाना बनाने का आरोप है। उसने आईएसआईएस से प्रेरित हमले की साजिश रची थी। यह उन खतरों में से सिर्फ एक है, जिनका संघीय कानून प्रवर्तन सामना कर रहा है। पिछले साल 640 आतंकी हमलों की योजनाएं नाकाम की गईं।

    पटेल ने मौजूदा सुरक्षा चुनौतियों पर भी बात की। उन्होंने कहा कि खतरे कई तरह के हैं। अधिकारी अमेरिका में लोगों को निशाना बनाने वाले खतरों से निपट रहे हैं। इसके साथ ही विदेश में तैनात अमेरिकी सैनिक भी निशाने पर हैं। उन्होंने कहा कि इन खतरों से भी अधिकारी निपट रहे हैं। अल्बानी की साजिश नाकाम होने पर पटेल ने कहा कि निर्दोष लोगों की जान जाने से पहले एक और कथित आतंकी साजिश रोक दी गई। उन्होंने कहा कि कुछ अभियानों के बारे में लोगों को जानकारी मिलती है। कई अभियानों के बारे में कभी पता नहीं चलता। उन्होंने कहा, यही हमारा मिशन है।


    साजिश को नाकाम करने में शामिल टीमों की सराहना की

    पटेल ने हमले को नाकाम करने में शामिल टीमों की तारीफ की। उन्होंने संघीय जांच ब्यूरो (एफबीआई) की कार्रवाई को भी सराहा। उन्होंने कहा, हमारी एफबीआई अल्बानी टीम ने शानदार काम किया। न्याय विभाग में हमारे सहयोगियों ने भी अच्छा काम किया। अटॉर्नी जनरल टॉड ब्लांशे ने भी सहयोग किया। यह एफबीआई खतरों का पता लगाती रहेगी। उन्हें नाकाम करती रहेगी। अमेरिकियों को सुरक्षित रखेगी।


    आईएसआईएस के खिलाफ पहले भी चला था अभियान

    इससे पहले मई में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बड़ी कार्रवाई की जानकारी दी थी। उन्होंने बताया था कि अमेरिकी सेना ने नाइजीरिया के सशस्त्र बलों के साथ मिलकर अभियान चलाया। इस अभियान में आईएसआईएस के दूसरे नंबर के कमांडर को मार गिराया गया था। ट्रंप ने इसे ‘जटिल और सटीक’ सैन्य अभियान बताया था। ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर इसकी जानकारी दी थी। उन्होंने कहा था कि अबू-बिलाल अल-मिनुकी को संयुक्त अभियान में मार गिराया गया।

  • PoK में पाकिस्तान का नरसंहार रोकिए…. ब्रिटिश सांसदों ने UN महासचिव को पत्र लिखकर की अपील

    PoK में पाकिस्तान का नरसंहार रोकिए…. ब्रिटिश सांसदों ने UN महासचिव को पत्र लिखकर की अपील


    लंदन।
    पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (Pakistan-occupied Kashmir-PoK) में बिगड़ते हालात को लेकर 70 से ज्यादा ब्रिटिश सांसदों (British MPs) ने संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस (United Nations Secretary-General António Guterres) को पत्र लिखकर हस्तक्षेप की मांग की है। साथ ही पाकिस्तानी बलों द्वारा किए जा रहे नरसंहार को खत्म करने और नागरिकों की जान की सुरक्षा के उपाय करने की अपील भी की गई है।

    ब्रिटिश सांसदों की अपील क्षेत्र में बढ़ती हिंसा और दुर्व्यवहार के बीच आई है, जहां पाकिस्तानी बलों की क्रूर कार्रवाई में सैकड़ों लोग मारे गए और घायल हुए हैं। क्षेत्र में अभी भी सख्त नाकाबंदी, कर्फ्यू और पूरी तरह से कम्युनिकेशन्स ब्लैकआउट लागू है। संयुक्त राष्ट्र महासचिव को संबोधित पत्र में ब्रिटिश सांसदों ने कहा कि पिछले कुछ महीनों में, मौतों, संचार पर प्रतिबंधों, मनमानी गिरफ्तारियों, आवश्यक आपूर्ति में व्यवधान और शांतिपूर्ण नागरिक और राजनीतिक अभिव्यक्ति पर लगाम की रिपोर्टों ने काफी चिंता पैदा की है। हमने ब्रिटिश कश्मीरियों से भी लगातार सुना है, जो संबंधित क्षेत्र में अपने रिश्तेदारों और प्रियजनों की सुरक्षा को लेकर गहरी चिंता में हैं।


    संयुक्त राष्ट्र की तरफ से उठाया गया था मुद्दा

    संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतारेस के एक प्रवक्ता ने पीओके में पाकिस्तान की बर्बरता को लेकर आवाज उठाई थी और कहा था कि शांतिपूर्ण प्रद्र्शन के दौरान इस तरह का अत्याचार करने को लेकर पाकिस्तानी सरकार को जवाब देना चाहिए।


    खत्म कर दी गई अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता

    संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त वोल्कर तुर्क ने पीओके के हालिया घटनाक्रम पर चिंता जताई थी। उन्होंने प्रदर्शनकारियों की मौत मामले की निष्पक्ष और गहन जांच कराए जाने तथा पाकिस्तान द्वारा ‘संयुक्त अवामी कार्रवाई समिति’ पर प्रतिबंध लगाने एवं उसके नेताओं को गिरफ्तार किए जाने का मुद्दा उठाया था। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और शांतिपूर्ण रूप से एकत्र होने के अधिकार का उल्लंघन करते हुए इंटरनेट के इस्तेमाल और सार्वजनिक सभाओं पर लगाई गई पाबंदियों को लेकर भी चिंता जताई गई थी।

    हक ने प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई को लेकर अधिकारियों की जवाबदेही तय किए जाने की मांग से जुड़े सवाल पर कहा, ”यह महत्वपूर्ण है कि हर जगह सभी प्राधिकारी शांतिपूर्ण प्रदर्शन की अनुमति दें और निश्चित रूप से यहां भी ऐसा ही होना चाहिए। अगर शांतिपूर्ण प्रदर्शन में शामिल होने के कारण लोगों को नुकसान पहुंचा है तो इसके लिए जवाबदेही तय होनी चाहिए।” पिछले महीने जिनेवा में जारी एक बयान में कहा गया था कि तुर्क ने क्षेत्रीय चुनावों से पहले पीओके में पैदा हुई अशांति के मद्देनजर शांति बनाए रखने की अपील की।

    मानवाधिकार उच्चायुक्त ने अशांति के कारण प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के सदस्यों की हुई सभी मौतों की गहन और निष्पक्ष जांच तत्काल कराए जाने का आह्वान किया था। संयुक्त अवामी कार्रवाई समिति (जेएएसी) ने इन प्रदर्शनों की अगुवाई की। इनमें ट्रांसपोर्टर, छात्र, वकील, कार्यकर्ता एव अन्य लोग शामिल हैं। सार्वजनिक व्यवस्था और सुरक्षा के लिए खतरा पैदा करने के आरोप में समिति पर आतंकवाद-रोधी कानूनों के तहत प्रतिबंध लगा दिया गया है।

  • एक देश, एक चुनाव की कवायद हुई तेज….2034 की जगह 2029 तक लागू करने की तैयारी

    एक देश, एक चुनाव की कवायद हुई तेज….2034 की जगह 2029 तक लागू करने की तैयारी


    नई दिल्ली।
    देशभर में लोकसभा (Lok Sabha) और विधानसभा चुनाव (Legislative Assembly Elections) साथ कराने को लेकर कवायद तेज हो गई है। रिपोर्ट के मुताबिक ‘एक देश, एक चुनाव’ (‘One Nation, One Election’) को लेकर बनाई गई संसद की संयुक्त समिति ने भी सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने इस बारे में सलाह लेनी शुरू कर दी है। रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकार एक देश एक चुनाव के लिए 20234 की डेडलाइन को घटाकर 2029 ही करना चाहती है। यानी अगला लोकसभा चुनाव बिल्कुल अलग अंदाज में हो सकता है। इसके साथ ही विधानसभा के चुनाव भी करवाए जा सकते हैं। अगर ऐसा होता है तो एक साथ ही सभी राज्य की विधानसभाओं को भंग कर दिया जाएगा।


    दो साल में 11 राज्यों में होना है चुनाव, अभी एनडीए की सरकार

    इस समय देश के 22 राज्यों में एनडीए की सरकार है। इनमें से 11 राज्यों में अगले दो सालों में विधानसभा का चुनाव होना है। चार ऐसे राज्य हैं जिनमें लोकसभा चुनाव के साथ ही चुनाव हो सकते हैं। इनमें आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम और ओडिशा का नाम शामिल है। 2024 में एक देश एक चुनाव को लेकर जो कमेटी बनाई गई थी उसका टारगेट यही था कि 2034 में साथ में चुनाव कराने को लेकर रणनीति तैयार की जाए। एक रिपोर्ट में कहा गया कि अब सरकार इस प्रयास में है कि इसके लिए ज्यादा इंतजार ना किया जाए।


    शीत सत्र में सौंप सकती है रिपोर्ट

    संयुक्त संसदीय समिति पिछले दो साल से अपने काम में लग है और इस शीत सत्र में संसद में रिपोर्ट जमा कर सकती है। संविधान का अनुच्छेद 174 2, बी राज्यपाल को विधानसभा भंग करने का अधिकार देता है। ऐसे में अगर एक साथ चुनाव करवाने होंगे तो जनवरी में ही राज्यों की विधानसभा भंग कर दी जाएगी। जिन राज्यों में एनडीए की सरकार है वहां यह आसान होगा। क्योंकि मंत्रिपरिषद की सलाह पर ही राज्यपाल विधानसभा भंग कर सकते हैं।

    संसद का शीतकालीन सत्र आमतौर पर नवंबर के आखिरी हफ्ते में शुरू होता है और क्रिसमस से पहले संपन्न हो जाता है। यह 41 सदस्यीय समिति ‘एक देश, एक चुनाव’ व्यवस्था को लागू करने के लिए संविधान (129वां संशोधन) विधेयक, 2024 पर विचार-विमर्श कर रही है। समिति 2029 तक, लोकसभा, राज्य विधानसभाओं और स्थानीय निकायों के चुनाव एक साथ कराने के प्रस्ताव पर देश भर में परामर्श कर रही है।

    बीजेपी के कुछ मुख्यमंत्रियों ने पहले ही लोकसभा चुनाव के साथ ही विधानसभा के चुनाव कराने की इच्छा जाहिर की है। गोवा, हरियाणा और उत्तराखंड के मुख्यमंत्रियों ने इसका समर्थन किया है। इसके साथ ही दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने भी 1 जुलाई को कमेटी के साथ बैठक की थी।

  • गोविंदा को अस्पताल के बाहर देख फैंस हुए परेशान पैप्स के सवालों का नहीं दिया जवाब हाथ हिलाकर बढ़े कार की ओर

    गोविंदा को अस्पताल के बाहर देख फैंस हुए परेशान पैप्स के सवालों का नहीं दिया जवाब हाथ हिलाकर बढ़े कार की ओर


    नई दिल्ली। बॉलीवुड अभिनेता गोविंदा इन दिनों अपनी निजी जिंदगी को लेकर लगातार सुर्खियों में बने हुए हैं। पत्नी सुनीता आहूजा के साथ रिश्ते को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच अब अभिनेता का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इस वीडियो में गोविंदा अस्पताल के बाहर नजर आ रहे हैं। अभिनेता ने चेहरे पर मास्क लगाया हुआ था और पैपराजी के सवालों का जवाब देने से भी बचते दिखाई दिए। गोविंदा को इस तरह अस्पताल के बाहर देखकर उनके फैंस चिंता जाहिर कर रहे हैं। हालांकि अभी तक यह स्पष्ट नहीं हुआ है कि गोविंदा अस्पताल किस वजह से पहुंचे थे और उनकी तबीयत को लेकर कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।

    वायरल वीडियो में गोविंदा सफेद शर्ट और जींस पहने नजर आ रहे हैं। उनके चेहरे पर मास्क लगा हुआ है और वह अस्पताल से बाहर निकलते हुए दिखाई देते हैं। वहां मौजूद पैपराजी ने अभिनेता से बातचीत करने की कोशिश की लेकिन गोविंदा ने किसी सवाल का जवाब नहीं दिया। उन्होंने सिर्फ हाथ हिलाकर वहां से निकलने का इशारा किया और सीधे अपनी गाड़ी की तरफ बढ़ गए। अभिनेता के इस अंदाज को देखकर सोशल मीडिया पर उनके प्रशंसक उनकी सेहत को लेकर सवाल कर रहे हैं। हालांकि सिर्फ वीडियो के आधार पर उनकी स्वास्थ्य स्थिति को लेकर किसी निष्कर्ष पर पहुंचना सही नहीं होगा।

    गोविंदा का अस्पताल के बाहर नजर आना ऐसे समय हुआ है जब उनकी पत्नी सुनीता आहूजा के साथ रिश्ते को लेकर लगातार खबरें सामने आ रही हैं। पिछले कुछ समय से दोनों की शादीशुदा जिंदगी को लेकर कई तरह की चर्चाएं चल रही हैं। सुनीता ने गोविंदा के खिलाफ तलाक का मामला दायर किया था लेकिन बाद में उन्होंने इसे वापस ले लिया। इसके बाद दोनों के रिश्ते को लेकर एक बार फिर चर्चाओं का दौर शुरू हो गया।

    इसी बीच राखी सावंत का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर सामने आया था जिसमें वह सुनीता आहूजा से फोन पर बातचीत करती नजर आई थीं। इस दौरान सुनीता ने कथित तौर पर तलाक का केस वापस लेने की वजह बताते हुए गोविंदा की दूसरी शादी की योजना का जिक्र किया था। हालांकि इस दावे की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। गोविंदा की दूसरी शादी को लेकर सामने आई खबरों पर उनके मैनेजर ने सफाई देते हुए इसे गलत बताया था। मैनेजर के मुताबिक गोविंदा दूसरी शादी नहीं कर रहे हैं और अभिनेता ने खुद अपने निजी रिश्ते को लेकर सार्वजनिक तौर पर कोई बयान नहीं दिया है।

    गोविंदा और सुनीता की शादी साल 1987 में हुई थी। दोनों के दो बच्चे हैं। उनकी बेटी टीना और बेटा यशवर्धन हैं। पारिवारिक विवाद और रिश्ते को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच यशवर्धन के बॉलीवुड डेब्यू की खबर भी सामने आ चुकी है। उनकी फिल्म को लेकर भी दर्शकों के बीच उत्सुकता बनी हुई है।

    फिलहाल अस्पताल के बाहर गोविंदा के वीडियो ने उनके फैंस की चिंता जरूर बढ़ा दी है लेकिन अभिनेता अस्पताल क्यों पहुंचे थे इसकी वजह सामने नहीं आई है। ऐसे में उनकी सेहत को लेकर किसी तरह की अटकल लगाने के बजाय आधिकारिक जानकारी का इंतजार करना ही उचित होगा। वहीं गोविंदा और सुनीता के रिश्ते को लेकर जारी चर्चाओं के बीच यह नया वीडियो एक बार फिर अभिनेता की निजी जिंदगी को सुर्खियों में ले आया है।

  • श्रीश्री रविशंकर के आर्ट ऑफ लिविंग को 5 करोड़ रुपये लौटाएगा DDA…. SC ने रद्द किया NGT का आदेश

    श्रीश्री रविशंकर के आर्ट ऑफ लिविंग को 5 करोड़ रुपये लौटाएगा DDA…. SC ने रद्द किया NGT का आदेश


    नई दिल्ली।
    सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने NGT (राष्ट्रीय हरित अधिकरण) के 2017 के उस आदेश को शनिवार को रद्द कर दिया, जिसमें साल 2016 में आयोजित विश्व संस्कृति महोत्सव (World Culture Festival) के कारण यमुना (Yamuna) के बाढ़ क्षेत्र को हुए नुकसान के लिए श्रीश्री रविशंकर (Sri Sri Ravi Shankar) के ‘आर्ट ऑफ लिविंग फाउंडेशन’ (‘Art of Living Foundation’) को जिम्मेदार ठहराया गया था। इसके साथ ही शीर्ष अदालत ने दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) को फाउंडेशन द्वारा जमा किए गए पांच करोड़ रुपए के पर्यावरणीय मुआवजे को भी वापस करने का निर्देश दिया और इसके लिए उसे चार सप्ताह का समय भी दिया।

    यमुना के बाढ़ क्षेत्र डीएनडी फ्लाईवे में गंदगी फैलाने के आरोपों से आर्ट ऑफ लिविंग को क्लीन चिट देते हुए जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा और जस्टिस एन.के. सिंह की पीठ ने कहा कि रिकॉर्ड पर पर्याप्त सामग्री मौजूद है, जिससे पता चलता है कि आर्ट ऑफ लिविंग फाउंडेशन को सौंपे जाने से पहले ही कार्यक्रम स्थल खराब स्थिति में था। पीठ ने कहा, ‘रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री वास्तव में यह साबित करती है कि यदि कोई नुकसान हुआ भी है, तो उसके लिए अपीलकर्ता को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता…।’


    सुप्रीम कोर्ट ने रद्द किया 9 साल पुराना फैसला

    पीठ ने कहा, ‘सात दिसंबर 2017 के फैसले को रद्द किया जाता है और इसके परिणामस्वरूप अपीलकर्ता के खिलाफ की गई सभी कार्रवाइयों और अंतरिम आदेशों को भी निरस्त किया जाता है। अपीलकर्ता नौ मार्च 2016 के अधिकरण के आदेश के अनुपालन में डीडीए के पास जमा की गई पांच करोड़ रुपए की राशि वापस पाने का हकदार है। डीडीए आज से चार सप्ताह के भीतर यह राशि वापस करेगा।’


    NGT ने दिया था 5 करोड़ रुपए DDA को देने का आदेश

    शीर्ष अदालत ने यह आदेश ‘आर्ट ऑफ लिविंग फाउंडेशन’ से जुड़े ‘व्यक्ति विकास केंद्र इंडिया’ की ओर से दायर एक अपील पर दिया। एक समिति की रिपोर्ट के आधार पर राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने आर्ट ऑफ लिविंग फाउंडेशन को पांच करोड़ रुपए जमा करने का निर्देश दिया था और कहा था कि कार्यक्रम से बाढ़ क्षेत्र को नुकसान पहुंचा है।


    कोर्ट बोला- रिपोर्ट से पूरी तरह प्रभावित हो गया था NGT

    शीर्ष अदालत ने कहा कि NGT, विशेषज्ञ समिति की उस रिपोर्ट से प्रभावित हो गया, जिसमें कहा गया था कि स्थल पर बड़े पैमाने पर तैयारियां चल रही थीं और इस आधार पर उसने निष्कर्ष निकाला कि ऐसे काम करके अपीलकर्ता (आर्ट ऑफ लिविंग) ने बाढ़ क्षेत्र को गंभीर रूप से नुकसान पहुंचाया।


    बाढ़ क्षेत्र में कार्यक्रम की अनुमति देने पर भड़का कोर्ट

    अदालत ने सक्रिय बाढ़ क्षेत्र में कार्यक्रम आयोजित करने की अनुमति देने के लिए डीडीए की भी आलोचना की और उसे एनजीटी के निर्देश के अनुसार यमुना के बाढ़ क्षेत्र के बहाली का काम जारी रखने का निर्देश दिया। विश्व सांस्कृतिक महोत्सव 11 से 13 मार्च, 2016 तक आयोजित किया गया था। यह कार्यक्रम दिल्ली में यमुना नदी के सक्रिय बाढ़ क्षेत्र में डीएनडी फ्लाईवे के आगे की ओर 25 हेक्टेयर क्षेत्र में आयोजित किया गया था।

  • Jharkhand: धनबाद में फिर धंसी जमीन…. 13 घरों को नुकसान, रहवासियों ने भागकर बचाई जान

    Jharkhand: धनबाद में फिर धंसी जमीन…. 13 घरों को नुकसान, रहवासियों ने भागकर बचाई जान


    धनबाद।
    झारखंड (Jharkhand) के धनबाद (Dhanbad) में जमीन धंसने (Land subsidence) की एक और घटना सामने आई है। बस्ताकोला क्षेत्र (Bastakola area) अंतर्गत बंद झरिया आरएसपी कॉलेज के समीप स्थित कामिनी कल्याण बस्ती में शनिवार की दोपहर जोरदार आवाज के साथ जमीन धंस गई। इससे करीब एक दर्जन घरों में दरार पड़ गई। घटना से पूरी बस्ती में अफरा-तफरी और दहशत का माहौल बन गया। इस घटना के बाद लोग अपने घरों से निकलकर जान बचाने के लिए सुरक्षित स्थानों की ओर भागने लगे।

    भू-धंसान इतना भीषण था कि कई घरों की भूमिगत पाइपलाइन टूट गई, जिससे बस्ती में जलापूर्ति पूरी तरह ठप हो गई है। माइंस रेस्क्यू की पूरी तकनीकी टीम ने भी घटनास्थल पर पहुंचकर जांच शुरू कर दी है। घटना से आक्रोशित लोगों ने झरिया-धनबाद मुख्य मार्ग पर आकर जोरदार विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। इस दौरान लोगों ने सड़क के बीचोंबीच खड़े होकर आवागमन पूरी तरह ठप कर दिया। इससे मुख्य मार्ग पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं।

    मेयर संजीव सिंह सबसे पहले पहुंचे। उन्होंने बीसीसीएल अधिकारियों को तत्काल मौके पर पहुंचकर युद्धस्तर पर राहत कार्य शुरू करने के लिए कहा। इसके बाद बस्ताकोला जीएम एसके गायकवाड़ और राजापुर परियोजना पदाधिकारी एम कुंडू पहुंचे। अधिकारियों ने प्रभावित स्थल का निरीक्षण कर पीड़ितों के साथ वार्ता की। मौके पर सिंदरी डीएसपी प्रकाश चंद महतो दलबल के साथ मौजूद थे। अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों ने आक्रोशित लोगों को समझा-बुझाकर और उचित कार्रवाई का भरोसा देकर किसी तरह शांत कराया।


    मेयर संजीव के समझाने पर शांत हुए प्रभावित

    मेयर संजीव सिंह ने प्रभावित परिवारों से मुलाकात कर उन्हें हरसंभव मदद का आश्वासन दिया। कहा कि सभी प्रभावितों को सुरक्षित जगहों पर बसाया जाएगा। तत्काल राहत के तौर पर मेयर ने बेघर हुए आशीष रवानी, निरंजन रवानी, बेबी देवी और विश्वजीत दे के परिवार को रात गुजारने के लिए बस्ताकोला रेस्क्यू स्कूल स्थित जीएम ऑफिस में रहने की व्यवस्था कराई।

  • डेंगू के बढ़ते खतरे के बीच बरतें सावधानी, तेज बुखार के साथ पेट दर्द, रक्तस्राव या सांस फूलने पर तुरंत डॉक्टर से मिलें

    डेंगू के बढ़ते खतरे के बीच बरतें सावधानी, तेज बुखार के साथ पेट दर्द, रक्तस्राव या सांस फूलने पर तुरंत डॉक्टर से मिलें

    नई दिल्ली । बारिश के मौसम में मच्छरों से होने वाली बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। जुलाई से अक्तूबर के बीच डेंगू और मलेरिया जैसे संक्रमण के मामले बढ़ने की आशंका रहती है। डेंगू की शुरुआत कई बार सामान्य वायरल बुखार जैसी ही दिखाई देती है, इसलिए मरीज और परिवार के लोग शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज कर देते हैं। तेज बुखार, सिरदर्द, शरीर में दर्द, कमजोरी, जी मिचलाना और उल्टी जैसी शिकायतें डेंगू में देखी जा सकती हैं। हालांकि केवल लक्षणों के आधार पर डेंगू की पुष्टि नहीं की जा सकती और जरूरत पड़ने पर चिकित्सकीय जांच कराना जरूरी होता है।

    डेंगू संक्रमित एडीज मच्छर के काटने से फैलता है। बारिश के बाद घरों और आसपास जमा साफ पानी मच्छरों के प्रजनन के लिए अनुकूल वातावरण तैयार कर सकता है। ऐसे में पानी जमा होने वाली जगहों की नियमित सफाई और मच्छरों से बचाव के उपाय बेहद महत्वपूर्ण हो जाते हैं। दिन के समय भी मच्छरों से बचने के लिए शरीर को ढककर रखना और आवश्यकता के अनुसार मच्छररोधी उपाय अपनाना उपयोगी हो सकता है।

    डेंगू के मरीज में कमजोरी और शरीर में दर्द होना आम लक्षण हो सकते हैं, लेकिन अगर कमजोरी अचानक बहुत ज्यादा बढ़ जाए और मरीज को उठने-बैठने में परेशानी होने लगे तो इसे सामान्य मानकर घर पर इंतजार नहीं करना चाहिए। अत्यधिक सुस्ती, बेचैनी या तेजी से बिगड़ती तबीयत भी चिकित्सकीय मदद लेने का संकेत हो सकती है।

    तेज बुखार के साथ पेट में गंभीर दर्द या पेट दबाने पर अधिक दर्द होना भी चिंता का कारण है। डेंगू के गंभीर मामलों में शरीर में तरल संतुलन और रक्तसंचार से जुड़ी जटिलताएं हो सकती हैं। इसलिए लगातार पेट दर्द या असामान्य बेचैनी होने पर डॉक्टर से तत्काल संपर्क करना जरूरी है।

    सांस सामान्य से बहुत तेज चलना या सांस लेने में परेशानी होना भी गंभीर संकेत माना जाता है। ऐसी स्थिति में मरीज को घर पर केवल सामान्य बुखार समझकर इलाज करते रहना उचित नहीं है। चिकित्सकीय जांच के बाद ही स्थिति की गंभीरता और आवश्यक उपचार तय किया जा सकता है।

    नाक या मसूड़ों से खून आना, उल्टी में खून दिखाई देना अथवा मल में रक्त आना भी डेंगू के गंभीर चेतावनी संकेतों में शामिल हो सकते हैं। बुखार के साथ इनमें से कोई लक्षण दिखाई दे तो तत्काल चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए। अत्यधिक रक्तस्राव गंभीर स्थिति पैदा कर सकता है।

    डेंगू के इलाज में आमतौर पर लक्षणों को नियंत्रित करने, शरीर में पर्याप्त तरल बनाए रखने और जटिलताओं की निगरानी पर ध्यान दिया जाता है। बुखार या दर्द के लिए दवा डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही लेनी चाहिए। एस्पिरिन और आइबुप्रोफेन जैसी दवाओं का इस्तेमाल चिकित्सकीय सलाह के बिना नहीं करना चाहिए, क्योंकि कुछ परिस्थितियों में रक्तस्राव का खतरा बढ़ सकता है। तेज बुखार होने पर स्वयं दवा लेने के बजाय डॉक्टर से परामर्श करना अधिक सुरक्षित है।

    बरसात में डेंगू से बचाव के लिए घर और आसपास पानी जमा न होने दें, कूलर, गमले, टंकियों और अन्य पात्रों की नियमित सफाई करें तथा मच्छरों से बचाव के उपाय अपनाएं। बुखार आने पर पर्याप्त आराम और तरल पदार्थ लेना महत्वपूर्ण है, लेकिन गंभीर चेतावनी संकेत दिखाई देने पर घरेलू देखभाल तक सीमित रहना उचित नहीं है। समय पर चिकित्सकीय सलाह और आवश्यक जांच से स्थिति को गंभीर होने से रोकने में मदद मिल सकती है।

  • काबुल की सड़कों पर दिखे भारतीय पीले-काले ऑटो रिक्शा, वायरल वीडियो ने हजारों किलोमीटर दूर देसी गाड़ी की झलक दिखाई

    काबुल की सड़कों पर दिखे भारतीय पीले-काले ऑटो रिक्शा, वायरल वीडियो ने हजारों किलोमीटर दूर देसी गाड़ी की झलक दिखाई

    नई दिल्ली ।अफगानिस्तान की राजधानी काबुल की सड़कों पर भारतीय ऑटो रिक्शा दिखाई देने का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से चर्चा में है। वीडियो में सड़क पर कई पीले-काले रंग के ऑटो रिक्शा एक के बाद एक गुजरते नजर आते हैं। भारत में रोजमर्रा के परिवहन का हिस्सा माने जाने वाले इन वाहनों को विदेश की सड़क पर देखकर वीडियो बनाने वाला भारतीय शख्स भी हैरान रह गया।

    वीडियो में दिखाई दे रहे ऑटो का रंग और डिजाइन भारतीय शहरों में आम तौर पर नजर आने वाले वाहनों जैसा है। खास बात यह है कि इनकी मौजूदगी काबुल की सड़क पर एक साथ दिखाई देती है। यही वजह है कि सामान्य परिवहन का यह दृश्य भारतीय सोशल मीडिया यूजर्स के लिए खास बन गया और वीडियो पर लोगों की प्रतिक्रियाएं आने लगीं।

    वीडियो में भारतीय व्यक्ति एक ऑटो चालक से बातचीत करता हुआ नजर आता है। वह चालक से पूछता है कि क्या यह ऑटो भारत में बना हुआ है। इसके जवाब में अफगान चालक हामी भरता है। बातचीत के दौरान भारतीय शख्स अपनी खुशी जाहिर करते हुए भारतीय ऑटो की विदेश में मौजूदगी को लेकर प्रतिक्रिया देता है। यह छोटा संवाद वीडियो को और दिलचस्प बना देता है।

    भारत में ऑटो रिक्शा केवल यातायात का साधन नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की रोजमर्रा की यात्रा का हिस्सा है। महानगरों से लेकर छोटे शहरों और कस्बों तक कम दूरी की यात्राओं के लिए इनका इस्तेमाल व्यापक रूप से किया जाता है। बाजार, रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड और स्थानीय इलाकों के बीच आवागमन में ऑटो रिक्शा आसानी से उपलब्ध हो जाते हैं।

    इन वाहनों की उपयोगिता का एक बड़ा कारण उनका छोटा आकार और अपेक्षाकृत कम लागत वाला परिवहन है। संकरी सड़कों और भीड़भाड़ वाले इलाकों में भी ऑटो रिक्शा आसानी से चल सकते हैं। इसी वजह से तीन पहिया वाहन भारत के अलावा कई अन्य देशों में भी स्थानीय परिवहन व्यवस्था का हिस्सा बने हैं।

    काबुल से सामने आए इस वीडियो ने लोगों की दिलचस्पी इस बात में बढ़ा दी कि भारतीय ऑटो वहां तक कैसे पहुंचे। हालांकि वीडियो में इन वाहनों के आयात, निर्माता, मॉडल, संख्या या अफगानिस्तान में इनके इस्तेमाल से जुड़ी विस्तृत जानकारी नहीं दी गई है। इसलिए केवल वायरल वीडियो के आधार पर इनके बड़े पैमाने पर इस्तेमाल को लेकर कोई निश्चित निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।

    सोशल मीडिया पर वीडियो देखने वाले कई लोगों ने भारतीय ऑटो की विदेश में मौजूदगी को लेकर उत्साह जताया। कुछ यूजर्स ने इसे भारत की रोजमर्रा की चीजों की अंतरराष्ट्रीय पहुंच से जोड़ा, जबकि कई लोगों ने पीले-काले ऑटो को देखकर अपनी परिचित सड़कों की याद साझा की।

    विदेश में किसी भारतीय वाहन को चलते देखना भारतीय दर्शकों के लिए इसलिए भी आकर्षक होता है क्योंकि ऑटो रिक्शा देश के सार्वजनिक परिवहन की एक पहचान बन चुका है। भारत में लाखों यात्रियों के लिए यह कम दूरी का सुविधाजनक और अपेक्षाकृत किफायती साधन है।

    काबुल की सड़क पर दिखाई दे रहे ऑटो रिक्शा का वीडियो किसी बड़े घटनाक्रम की तस्वीर नहीं दिखाता, लेकिन भारत से दूर परिचित वाहनों की मौजूदगी इसे सोशल मीडिया के लिए रोचक जरूर बना रही है। फिलहाल वायरल वीडियो में दिखाई देने वाला यही दृश्य लोगों के बीच चर्चा और उत्सुकता का कारण बना हुआ है।