Author: bharati

  • इंदौर में कांग्रेस का शक्ति प्रदर्शन, जीतू पटवारी के निर्देश पर जुटेंगे नेता और कार्यकर्ता, केंद्र-प्रदेश सरकार के खिलाफ महारैली

    इंदौर में कांग्रेस का शक्ति प्रदर्शन, जीतू पटवारी के निर्देश पर जुटेंगे नेता और कार्यकर्ता, केंद्र-प्रदेश सरकार के खिलाफ महारैली


    इंदौर । मध्यप्रदेश में भाजपा की केंद्र और प्रदेश सरकार के खिलाफ कांग्रेस ने विरोध तेज करने की तैयारी कर ली है। इंदौर में 27 अक्टूबर को कांग्रेस की ओर से जनसंघर्ष महारैली निकाली जाएगी। इस प्रदर्शन के जरिए पार्टी सरकार की नीतियों आम जनता से जुड़े मुद्दों और निर्वाचन प्रक्रिया को लेकर अपनी आपत्तियां दर्ज कराएगी। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि महारैली के माध्यम से जनता की समस्याओं को उठाने के साथ मतदाता सूची में हुए बदलावों और चुनाव प्रक्रिया से जुड़े सवालों पर भी सरकार का ध्यान आकर्षित किया जाएगा।

    इंदौर शहर कांग्रेस और जिला कांग्रेस कमेटी की ओर से आयोजित इस महारैली की शुरुआत सुबह 11 बजे गांधी भवन स्थित कांग्रेस कार्यालय से होगी। यहां से कार्यकर्ता और पार्टी नेता रैली के रूप में रवाना होंगे। प्रस्तावित मार्ग में पढ़ीनाथ चौराहा हरसिद्धि मंदिर और मोती तबेला शामिल हैं। रैली कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर समाप्त होगी। वहां कांग्रेस नेता राष्ट्रपति और राज्यपाल के नाम कलेक्टर को ज्ञापन सौंपेंगे। ज्ञापन में केंद्र और प्रदेश सरकार की नीतियों के विरोध के साथ निर्वाचन प्रक्रिया और मतदाता सूची से संबंधित मुद्दे उठाए जाएंगे।

    कांग्रेस इस प्रदर्शन के जरिए मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग भी उठाने वाली है। पार्टी उनके कार्यकाल में लिए गए निर्णयों और मतदाता सूची में किए गए बदलावों की स्वतंत्र समीक्षा कराने की मांग करेगी। कांग्रेस का आरोप है कि निर्वाचन प्रक्रिया से जुड़े मामलों में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करना जरूरी है। पार्टी इन मुद्दों को लेकर अपना विरोध दर्ज कराने के लिए महारैली को महत्वपूर्ण कार्यक्रम मान रही है। हालांकि निर्वाचन प्रक्रिया और मतदाता सूची को लेकर लगाए जा रहे आरोपों पर संबंधित संस्थाओं का पक्ष और आधिकारिक तथ्य भी महत्वपूर्ण होंगे।

    कांग्रेस नेता देवेंद्र सिंह यादव के मुताबिक मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जीतू पटवारी शहर कांग्रेस अध्यक्ष चिंटू चौकसे जिला कांग्रेस अध्यक्ष विपिन वानखेड़े और वरिष्ठ नेताओं के निर्देश पर इस कार्यक्रम की तैयारी की जा रही है। पार्टी का कहना है कि केंद्र और राज्य सरकार की नीतियों से जुड़ी समस्याओं को जनता के बीच उठाने और प्रशासन तक पहुंचाने के उद्देश्य से यह आयोजन किया जा रहा है।

    महारैली में अधिक से अधिक कार्यकर्ताओं की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए कांग्रेस ने संगठन के विभिन्न स्तरों पर संपर्क शुरू किया है। सभी विधानसभा क्षेत्रों के प्रत्याशियों और प्रभारियों के साथ वरिष्ठ नेताओं को भी शामिल होने के लिए आमंत्रित किया गया है। मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी इंदौर शहर और जिला कांग्रेस के वर्तमान तथा पूर्व पदाधिकारियों से भी कार्यक्रम में पहुंचने की अपील की गई है। इसके साथ ही ब्लॉक और मंडल अध्यक्षों को कार्यकर्ताओं को जुटाने की जिम्मेदारी दी जा रही है।

    युवा कांग्रेस सेवादल एनएसयूआई महिला कांग्रेस और अन्य मोर्चा संगठनों के पदाधिकारियों को भी महारैली में शामिल होने का आह्वान किया गया है। वर्तमान और पूर्व पार्षदों पार्षद प्रत्याशियों तथा पंचायतों के पंच सरपंच और अन्य पदाधिकारियों से भी समर्थकों के साथ पहुंचने की अपील की गई है। पार्टी की कोशिश है कि रैली में संगठन के सभी वर्गों की भागीदारी हो और विरोध प्रदर्शन को व्यापक रूप दिया जा सके।

    अब सभी की नजर 27 अक्टूबर को होने वाली इस महारैली पर रहेगी। कांग्रेस इसे केंद्र और प्रदेश सरकार के खिलाफ जनहित के मुद्दों को उठाने का माध्यम बता रही है। रैली के बाद सौंपे जाने वाले ज्ञापन में उठाई गई मांगों और प्रशासन की प्रतिक्रिया से आगे की राजनीतिक गतिविधियों की दिशा तय हो सकती है।

  • सिंहस्थ में श्रद्धालुओं की थाली से पूजा के फूलों तक का रोडमैप तैयार, 15 जिलों से उज्जैन पहुंचेगी उपज, सप्लाई चेन पर रहेगा फोकस

    सिंहस्थ में श्रद्धालुओं की थाली से पूजा के फूलों तक का रोडमैप तैयार, 15 जिलों से उज्जैन पहुंचेगी उपज, सप्लाई चेन पर रहेगा फोकस


    उज्जैन  । उज्जैन में वर्ष 2028 में होने वाले सिंहस्थ महापर्व को लेकर तैयारियां अभी से तेज होने लगी हैं। आयोजन में करीब 40 करोड़ श्रद्धालुओं के पहुंचने का अनुमान है। इतने बड़े धार्मिक आयोजन के दौरान भोजन और पूजा सामग्री की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती होगी। इसी को ध्यान में रखते हुए उद्यानिकी विभाग ने सब्जियों और फूलों का उत्पादन बढ़ाने के लिए दो साल का रोडमैप तैयार किया है। योजना के तहत मध्यप्रदेश के 15 जिलों में करीब 16 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में उत्पादन क्लस्टर विकसित किए जाएंगे और लगभग 20 हजार किसानों को इससे जोड़ने की तैयारी है।

    सिंहस्थ करीब 60 दिनों तक चलेगा। इस दौरान श्रद्धालुओं की लगातार आवाजाही रहेगी और भोजन की व्यवस्था के लिए बड़ी मात्रा में सब्जियों की जरूरत पड़ेगी। उपलब्ध अनुमान के मुताबिक प्रतिदिन करीब 66 लाख से अधिक श्रद्धालुओं की आवाजाही हो सकती है। यदि प्रति व्यक्ति रोजाना दो किलोग्राम सब्जी की जरूरत का मानक माना जाए तो संभावित मांग लगभग 13 हजार टन प्रतिदिन तक पहुंच सकती है। हालांकि यह एक अनुमानित गणना है। वास्तविक खपत श्रद्धालुओं के ठहरने की अवधि भोजन व्यवस्था और सब्जियों के वास्तविक इस्तेमाल पर निर्भर करेगी। इतनी बड़ी संभावित जरूरत को देखते हुए विभाग का जोर स्थानीय उत्पादन बढ़ाने और दूसरे जिलों से नियमित आपूर्ति सुनिश्चित करने पर है।

    योजना के तहत करीब 16 हजार हेक्टेयर में अतिरिक्त उत्पादन का प्रस्ताव है। इसमें आठ हजार हेक्टेयर में सब्जियां और आठ हजार हेक्टेयर में फूलों की खेती विकसित करने की तैयारी की जा रही है। क्लस्टर आधारित मॉडल में एक क्षेत्र के कई किसान मांग के अनुसार योजनाबद्ध तरीके से फसल उगाएंगे। इससे विभाग को पहले से जानकारी मिल सकेगी कि किस जिले और क्षेत्र में कौन सी फसल कितने रकबे में लगाई जा रही है और उससे कितनी उपज मिलने की संभावना है। इस तरह आयोजन के समय अचानक बढ़ने वाली मांग को पूरा करने के लिए उत्पादन और आपूर्ति की बेहतर योजना बनाई जा सकेगी।

    सब्जियों के उत्पादन के लिए उज्जैन संभाग के उज्जैन आगर-मालवा शाजापुर देवास रतलाम नीमच और मंदसौर जिलों को प्रस्तावित क्लस्टर योजना में शामिल किया गया है। इन जिलों में हाइब्रिड सब्जियों का अतिरिक्त उत्पादन बढ़ाने के साथ किसानों को खेती की तकनीक और फसल चयन के संबंध में प्रशिक्षण देने की तैयारी है। जरूरत के मुताबिक अलग-अलग क्षेत्रों में आलू प्याज टमाटर और हरी सब्जियों का उत्पादन बढ़ाया जा सकता है। यदि किसी एक क्षेत्र में फसल खराब होती है तो दूसरे जिलों से आपूर्ति बढ़ाकर कमी को पूरा करने की कोशिश की जाएगी।

    सिंहस्थ में पूजा और धार्मिक गतिविधियों के कारण फूलों की मांग भी काफी बढ़ने की संभावना है। इसके लिए उज्जैन इंदौर देवास आगर-मालवा खंडवा छतरपुर मैहर और दतिया में फूलों के उत्पादन क्लस्टर विकसित करने का प्रस्ताव है। उज्जैन में करीब 4200 हेक्टेयर में गेंदा उत्पादन के लिए 25 क्लस्टर और 240 गांवों को जोड़ने की योजना बनाई गई है। इसके अलावा गुलाब की खेती का रकबा बढ़ाकर 250 हेक्टेयर से अधिक करने की तैयारी है। फूलों की आधुनिक खेती और बेहतर पौध सामग्री उपलब्ध कराने के लिए उज्जैन में करीब 19 एकड़ में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर फ्लोरीकल्चर विकसित करने की योजना भी है।

    हालांकि केवल उत्पादन बढ़ाना ही पर्याप्त नहीं होगा। खेत से निकली सब्जियों को समय पर उज्जैन तक पहुंचाने के लिए संग्रहण केंद्र ग्रेडिंग पैकिंग और जरूरत के अनुसार कोल्ड स्टोरेज की व्यवस्था भी जरूरी होगी। सब्जियां जल्दी खराब होती हैं इसलिए परिवहन में देरी होने पर उपज की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है। विभाग को मांग और उपलब्धता का रिकॉर्ड तैयार कर आपूर्ति की निगरानी भी करनी होगी। इससे यह तय करने में मदद मिलेगी कि किस जिले से कितनी सब्जियां भेजनी हैं और किस क्षेत्र में उनकी जरूरत अधिक है।

    उद्यानिकी विभाग के उपसंचालक केएस मंडलाई के मुताबिक सिंहस्थ में सब्जियों और फूलों की मांग बढ़ने को देखते हुए दो साल पहले से तैयारी की जा रही है। किसानों को चिह्नित कर प्रशिक्षण देने और विशेष क्लस्टर विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है। अब इस योजना की सफलता उत्पादन बढ़ाने के साथ परिवहन भंडारण और वितरण के बीच तालमेल पर निर्भर करेगी। यदि पूरी व्यवस्था समय पर तैयार हो जाती है तो सिंहस्थ के दौरान श्रद्धालुओं की जरूरत पूरी करने के साथ किसानों को भी अपनी उपज के लिए बड़ा बाजार मिल सकता है।

  • शिवपुरी में तीन बच्चों की मां के लापता होने का मामला, पति ने नकदी और सोने के जेवर ले जाने का लगाया आरोप

    शिवपुरी में तीन बच्चों की मां के लापता होने का मामला, पति ने नकदी और सोने के जेवर ले जाने का लगाया आरोप

    मध्य प्रदेश: के शिवपुरी जिले में तीन बच्चों की मां के लापता होने का मामला सामने आया है। सुरवाया थाना क्षेत्र के ग्राम बिची मोहनगढ़ निवासी धर्मवीर गुर्जर ने आरोप लगाया है कि उसकी पत्नी पूनम गुर्जर 30 सितंबर की रात घर में रखे दो लाख रुपये नकद और पांच तोला सोने के जेवर लेकर चली गई। धर्मवीर का दावा है कि उसकी पत्नी गौशाला क्षेत्र में रहने वाले जीतू गुर्जर के साथ गई है। मामले में शिकायत लेकर वह पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचा और कार्रवाई की मांग की।

    धर्मवीर के अनुसार, उसकी शादी वर्ष 2017 में समाज के सामूहिक विवाह सम्मेलन में पूनम गुर्जर के साथ हुई थी। शादी के बाद उनके तीन बच्चे हुए। उसने बताया कि वह खेती करके परिवार का भरण-पोषण करता था और उसके पास करीब 40 बीघा कृषि भूमि है। बच्चों की पढ़ाई और बेहतर भविष्य को ध्यान में रखते हुए उसने शिवपुरी शहर के गौशाला-लुधावली क्षेत्र में एक मकान भी लिया था, ताकि बच्चों को शिक्षा के बेहतर अवसर मिल सकें।

    धर्मवीर ने अपने आवेदन में आरोप लगाया कि इसी दौरान उसकी पत्नी की गौशाला क्षेत्र में रहने वाले जीतू गुर्जर से नजदीकियां बढ़ गईं। उसके मुताबिक, इस संबंध में जानकारी मिलने के बाद उसने पत्नी को समझाने की कोशिश की, लेकिन परिस्थितियों में सुधार नहीं हुआ। इसके बाद उसने शिवपुरी स्थित मकान बेचने का निर्णय लिया। धर्मवीर का कहना है कि उसने मकान चार लाख रुपये में बेच दिया और इसके बाद पत्नी तथा बच्चों को लेकर अपने गांव बिची मोहनगढ़ लौट आया।

    पीड़ित के आरोप के मुताबिक, 30 सितंबर की रात पूनम घर में रखे दो लाख रुपये नकद और पांच तोला सोने के जेवर लेकर चली गई। धर्मवीर ने दावा किया कि इस मामले में जीतू गुर्जर के मौसा इंदर गुर्जर और उसके दोस्त नरेंद्र लोधी ने भी सहयोग किया। उसने नरेंद्र पर जान से मारकर फेंक देने की धमकी देने का आरोप भी लगाया है। इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। मामले में संबंधित पक्षों का बयान भी सामने नहीं आया है।

    धर्मवीर का कहना है कि उसने इस घटना के संबंध में सुरवाया थाना पुलिस से शिकायत की थी, लेकिन उसकी सुनवाई नहीं हुई। इसके बाद वह अपनी फरियाद लेकर शिवपुरी के पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचा। उसने पुलिस अधीक्षक यांगचेन डोलकर भूटिया से मिलने का प्रयास किया, लेकिन उसकी मुलाकात नहीं हो सकी। इसके बाद उसने अपनी शिकायत पर कार्रवाई कराने की मांग दोहराई।

    धर्मवीर ने अपनी शिकायत में परिवार की स्थिति का भी जिक्र किया है। उसका कहना है कि तीनों बच्चे अपनी मां को याद करते हैं और उसके घर लौटने की उम्मीद में रोते हैं। वह बच्चों को यह कहकर समझाता है कि उनकी मां वापस आ जाएगी। इस स्थिति से परिवार पर पड़ रहे असर को बताते हुए उसने पुलिस से मामले को गंभीरता से लेने की अपील की है।

    पीड़ित ने पुलिस अधीक्षक से मांग की है कि उसकी शिकायत के आधार पर मामले की जांच की जाए और पत्नी को ले जाने, नकदी तथा जेवर साथ ले जाने और धमकी देने से जुड़े उसके आरोपों की पड़ताल की जाए। फिलहाल उपलब्ध जानकारी के अनुसार, यह मामला पति की शिकायत और उसके लगाए गए आरोपों पर आधारित है। आरोपों की सच्चाई जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। पुलिस की ओर से आगे की कार्रवाई या जांच की स्थिति के संबंध में कोई विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है।

  • रावण दहन में शिवराज की मशक्कत से लेकर पटवा की जुबान फिसलने तक, दशहरे पर MP में नेताओं के बयान और वीडियो चर्चा में

    रावण दहन में शिवराज की मशक्कत से लेकर पटवा की जुबान फिसलने तक, दशहरे पर MP में नेताओं के बयान और वीडियो चर्चा में


    भोपाल । मध्यप्रदेश में दशहरे के मौके पर रावण दहन के साथ राजनीति और दिलचस्प घटनाओं की भी खूब चर्चा रही। कहीं केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान को अपने बंगले पर रावण का पुतला जलाने के लिए मशक्कत करनी पड़ी तो कहीं भाजपा विधायक की जुबान फिसलने से जनता ही रावण बन गई। धार जिले में रावण के पुतले से निकले रॉकेटों ने लोगों को दौड़ने पर मजबूर कर दिया। वहीं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह की सत्य सनातन यात्रा पर भाजपा विधायक पन्नालाल शाक्य ने तीखा राजनीतिक तंज कस दिया। इन घटनाओं के वीडियो और बयान अब चर्चा का विषय बने हुए हैं।

    शिवराज सिंह चौहान को रावण दहन में करनी पड़ी मशक्कत

    केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने दशहरे पर अपने बंगले में रावण के पुतले का दहन किया। लेकिन पुतले को जलाने की कोशिश उम्मीद के मुताबिक आसान नहीं रही। कई प्रयासों के बाद पुतले में आग लगी। इसके बावजूद धुआं छंटने पर रावण का पुतला दोबारा दिखाई देने लगा और वह पूरी तरह नहीं जल पाया था। हालांकि बाद में पुतला पूरी तरह जलकर खाक हो गया। इस घटना का वीडियो सामने आने के बाद लोग सोशल मीडिया पर चुटकी लेने लगे। लोगों का कहना है कि रावण दहन का वीडियो तो बन गया लेकिन इसके लिए शिवराज सिंह को काफी मेहनत करनी पड़ी।

    भाजपा विधायक सुरेंद्र पटवा ने जनता को ही बता दिया रावण

    भोजपुर से भाजपा विधायक सुरेंद्र पटवा दशहरा कार्यक्रम में अपने संबोधन के दौरान ऐसी बात कह गए जिसने लोगों का ध्यान खींच लिया। मंच से बोलते हुए उन्होंने कहा कि आज यहां रावण रूपी जो हमारे सारे लोग यहां पर आए हुए हैं। उनके इस बयान को जुबान फिसलने के रूप में देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि वह कुछ और कहना चाहते थे लेकिन शब्दों के चयन में चूक हो गई। इसके बाद उनके बयान पर लोगों ने चुटकी ली। कुछ लोगों ने इसे मंच पर बोलते समय हुई सामान्य गलती माना जबकि कुछ ने नाराजगी भी जताई। फिलहाल इस बयान की चर्चा राजनीतिक हलकों में भी हो रही है।

    धार में रावण के पुतले से निकले रॉकेट तो भागने लगे लोग

    धार जिले के टांडा में रावण दहन के दौरान एक अलग ही नजारा देखने को मिला। बताया गया कि राम की भूमिका निभा रहे युवक ने रावण दहन के लिए जलता हुआ तीर चलाया तो पुतले में रखे पटाखे और रॉकेट फूटने लगे। रॉकेट इधर-उधर जाने लगे और कुछ लोगों की ओर बढ़ते दिखाई दिए। इससे मौके पर मौजूद लोगों में अफरा-तफरी मच गई और कई लोग सुरक्षित जगह की ओर भागने लगे। घटना का वीडियो सामने आने के बाद लोगों ने मजाकिया अंदाज में कहा कि इस बार रावण ने भी पलटवार कर दिया। हालांकि ऐसी घटनाएं सार्वजनिक कार्यक्रमों में पटाखों के इस्तेमाल के दौरान सुरक्षा व्यवस्था की अहमियत भी याद दिलाती हैं।

    दिग्विजय सिंह को धृतराष्ट्र और बेटे को बताया दुर्योधन

    कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह की सत्य सनातन यात्रा को लेकर भी राजनीतिक बयानबाजी तेज है। गुना से भाजपा विधायक पन्नालाल शाक्य ने दिग्विजय सिंह पर निशाना साधते हुए उनकी तुलना धृतराष्ट्र से की और उनके बेटे को दुर्योधन बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि दिग्विजय सिंह अपने बेटे को राजनीतिक रूप से आगे बढ़ाने के उद्देश्य से पदयात्रा कर रहे हैं। यह भाजपा विधायक का राजनीतिक आरोप है। यात्रा के उद्देश्य और इसके पीछे की मंशा को लेकर अंतिम निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। लेकिन इस बयान ने मध्यप्रदेश की राजनीति में एक बार फिर परिवारवाद और राजनीतिक विरासत की बहस को हवा दे दी है।

    सत्ताधारी दल के नेताओं की खींचतान में अफसर परेशान

    राज्य में सत्ताधारी दल के जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच तालमेल को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। खबर के मुताबिक महाकौशल क्षेत्र के एक जिले में बच्चों की सेहत से जुड़े मुद्दे पर भाजपा विधायक प्रशासन से जवाब मांग रहे हैं। मामला कथित तौर पर सत्ताधारी दल के एक पूर्व सांसद के बेटे से जुड़ा होने के कारण कार्रवाई को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। विधायक ने सरकार से शिकायत की है और अब इस मुद्दे को सोशल मीडिया पर उठाने की तैयारी कर रहे हैं। हालांकि संबंधित जिले और मामले का विस्तृत विवरण सामने नहीं रखा गया है। ऐसे में पूरे प्रकरण पर निष्कर्ष निकालने से पहले प्रशासन की जांच और संबंधित पक्षों का जवाब महत्वपूर्ण होगा।

    कुल मिलाकर दशहरे के दौरान मध्यप्रदेश में धार्मिक उत्सव के साथ राजनीतिक बयान और कई घटनाएं सुर्खियों में रहीं। शिवराज सिंह के रावण दहन से लेकर सुरेंद्र पटवा की जुबान फिसलने और दिग्विजय सिंह पर किए गए तंज तक अलग-अलग मुद्दों ने लोगों का ध्यान खींचा। वहीं प्रशासन और सत्ताधारी दल के जनप्रतिनिधियों के बीच कथित खींचतान ने शासन व्यवस्था में तालमेल को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं।

  • शिवपुरी में 27 वर्षीय विवाहिता ससुराल में फंदे पर लटकी मिली, हाथ के निशान को लेकर कही थी परेशान करने वाली बात

    शिवपुरी में 27 वर्षीय विवाहिता ससुराल में फंदे पर लटकी मिली, हाथ के निशान को लेकर कही थी परेशान करने वाली बात

    मध्य प्रदेश: के शिवपुरी शहर के देहात थाना क्षेत्र के गौशाला इलाके में 27 वर्षीय विवाहिता राधा अपनी ससुराल में फंदे पर लटकी मिली। घटना गुरुवार दोपहर की बताई गई है। घटना के समय वह घर में अकेली थी। सूचना मिलने के बाद पुलिस ने मामले में मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है। फिलहाल विवाहिता की मौत के कारण स्पष्ट नहीं हुए हैं। पुलिस का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और परिजनों के बयान के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

    जानकारी के अनुसार, गौशाला क्षेत्र में रहने वाले सुखवीर धाकड़ एक निजी स्कूल में शिक्षक हैं। उन्होंने बताया कि उनकी शादी राधा से करीब एक साल पहले हुई थी। गुरुवार को वह रोज की तरह स्कूल में पढ़ाने के लिए गए थे। दोपहर करीब तीन बजे उन्हें सूचना मिली कि उनकी पत्नी ने फंदे पर लटककर जान दे दी है। सूचना मिलने के बाद घटना की जानकारी पुलिस को दी गई।

    बताया गया कि घटना के समय घर में कोई अन्य व्यक्ति मौजूद नहीं था और राधा अकेली थी। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि किन परिस्थितियों में उसकी मौत हुई। शुरुआती जानकारी में पति ने राधा के हाथ पर मौजूद एक निशान का उल्लेख किया है। उनके अनुसार, राधा अक्सर अपने हाथ के उस निशान को देखकर कहती थी कि वह ज्यादा दिनों तक उनके साथ नहीं रह पाएगी। हालांकि, इस बात का घटना से क्या संबंध था, यह अभी स्पष्ट नहीं है।

    मामले में पुलिस सभी संबंधित पहलुओं की जांच कर रही है। केवल हाथ पर निशान होने या उससे जुड़ी किसी बात के आधार पर मौत का कारण तय नहीं किया जा सकता। पुलिस के मुताबिक, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और परिवार के सदस्यों के बयान से घटनाक्रम को समझने में मदद मिल सकती है। जांच के दौरान यह भी स्पष्ट करने की कोशिश की जाएगी कि घटना से पहले विवाहिता की स्थिति कैसी थी और क्या किसी तरह की परेशानी सामने आई थी।

    देहात थाना प्रभारी विकास यादव ने बताया कि मामले में मर्ग कायम कर लिया गया है। शुक्रवार को शव का पोस्टमार्टम कराया जाना था। उन्होंने स्पष्ट किया कि मौत के वास्तविक कारणों का खुलासा पोस्टमार्टम रिपोर्ट और परिजनों के बयान मिलने के बाद ही हो सकेगा। फिलहाल पुलिस की ओर से मौत को लेकर किसी अंतिम निष्कर्ष की पुष्टि नहीं की गई है।

    घटना के बाद क्षेत्र में मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। विवाहिता की शादी को करीब एक वर्ष ही हुआ था, इसलिए पुलिस उपलब्ध जानकारी के आधार पर घटनाक्रम की जांच कर रही है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि राधा की मौत किन परिस्थितियों में हुई। जांच पूरी होने और आवश्यक रिपोर्ट सामने आने के बाद ही मामले की स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकेगी।

  • VIT भोपाल की वेबसाइट और विज्ञापनों की भी होगी जांच, NHRC ने पूछा- कैंपस की असली लोकेशन छात्रों को स्पष्ट बताई जाती है या नहीं

    VIT भोपाल की वेबसाइट और विज्ञापनों की भी होगी जांच, NHRC ने पूछा- कैंपस की असली लोकेशन छात्रों को स्पष्ट बताई जाती है या नहीं


    भोपाल । वेल्लोर इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी यानी VIT भोपाल विश्वविद्यालय के नाम और उसके वास्तविक परिसर की लोकेशन को लेकर विवाद गहरा गया है। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग यानी NHRC ने इस मामले में मध्यप्रदेश सरकार की ओर से प्रस्तुत रिपोर्ट पर सवाल उठाते हुए अतिरिक्त रिपोर्ट और कार्रवाई प्रतिवेदन मांगा है। आयोग ने राज्य सरकार को चार सप्ताह के भीतर जानकारी प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। रिपोर्ट जमा करने की अंतिम तारीख 29 नवंबर निर्धारित की गई है। अब इस मामले में विश्वविद्यालय के नाम के साथ उसकी वेबसाइट प्रॉस्पेक्टस और विज्ञापनों में परिसर का पता किस तरह बताया जाता है यह भी जांच के दायरे में रहेगा।

    यह शिकायत राष्ट्रीय छात्र संघ यानी NSUI के प्रदेश उपाध्यक्ष रवि परमार ने की थी। शिकायत में आरोप लगाया गया कि विश्वविद्यालय के नाम में भोपाल शब्द होने से विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों को परिसर की वास्तविक लोकेशन को लेकर भ्रम हो सकता है। शिकायतकर्ता के मुताबिक विश्वविद्यालय का मुख्य परिसर सीहोर जिले के कोठरी कलां में भोपाल-इंदौर राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित है। ऐसे में दाखिले के लिए जानकारी जुटाने वाले विद्यार्थियों को यह स्पष्ट होना चाहिए कि विश्वविद्यालय का परिसर वास्तव में कहां है।

    NHRC ने 22 अक्टूबर को मामले पर विचार करते हुए राज्य सरकार की रिपोर्ट और उपलब्ध दस्तावेजों की समीक्षा की। आयोग ने माना कि VIT भोपाल का नाम राज्य विधानमंडल द्वारा निर्धारित किया गया है और विश्वविद्यालय की स्थापना मध्यप्रदेश निजी विश्वविद्यालय स्थापना एवं संचालन अधिनियम 2007 के तहत हुई है। हालांकि आयोग का सवाल केवल नाम की वैधानिकता तक सीमित नहीं है। आयोग ने यह जानना चाहा है कि जब विश्वविद्यालय का कानूनी नाम भोपाल है और उसका वास्तविक परिसर दूसरे जिले में स्थित है तो क्या इससे विद्यार्थियों और अभिभावकों के मन में स्थान को लेकर गलत धारणा बनने की आशंका है।

    आयोग के अनुसार राज्य सरकार की ओर से प्रस्तुत रिपोर्ट में इस महत्वपूर्ण सवाल का स्पष्ट जवाब नहीं दिया गया। इसलिए अतिरिक्त रिपोर्ट के जरिए स्थिति स्पष्ट करने के निर्देश दिए गए हैं। आयोग ने विश्वविद्यालय की आधिकारिक वेबसाइट प्रॉस्पेक्टस और विज्ञापनों में परिसर की वास्तविक लोकेशन के उल्लेख को लेकर भी जानकारी मांगी है। इस पहलू को इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि उच्च शिक्षा संस्थानों में दाखिले से पहले विद्यार्थी और अभिभावक अक्सर वेबसाइट और प्रचार सामग्री के आधार पर निर्णय लेते हैं। ऐसे में संस्थान का नाम और परिसर का पता स्पष्ट रूप से बताना जरूरी है ताकि किसी तरह की गलतफहमी न हो।

    शिकायत में विश्वविद्यालय परिसर में कथित अनधिकृत क्लिनिक संचालित होने और पूर्व में अशांति की घटनाओं से जुड़े आरोप भी लगाए गए थे। आयोग ने पाया कि राज्य सरकार की रिपोर्ट में इन आरोपों की जांच की स्थिति का उल्लेख नहीं है। अब सरकार को यह भी बताना होगा कि इन मामलों की जांच हुई है या नहीं और यदि हुई है तो उसके निष्कर्ष क्या रहे हैं। फिलहाल इन आरोपों को लेकर आयोग ने कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया है और न ही किसी पक्ष की गलती प्रमाणित की है।

    इस मामले में अगला कदम राज्य सरकार की अतिरिक्त रिपोर्ट के बाद सामने आएगा। रिपोर्ट में विश्वविद्यालय के वैधानिक नाम और वास्तविक लोकेशन के बीच संबंध प्रचार सामग्री में दी जाने वाली जानकारी और शिकायत में लगाए गए अन्य आरोपों पर कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट करनी होगी। इसके बाद आयोग उपलब्ध तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई पर विचार कर सकता है। फिलहाल विवाद का मुख्य मुद्दा यह है कि विश्वविद्यालय के नाम को लेकर कानूनी स्थिति स्पष्ट होने के बावजूद विद्यार्थियों को परिसर की वास्तविक लोकेशन की जानकारी किस तरह दी जा रही है।
    शॉर्ट डिस्क्रिप्शन
    VIT भोपाल के नाम और सीहोर जिले में स्थित परिसर की लोकेशन को लेकर NHRC ने मध्यप्रदेश सरकार से अतिरिक्त रिपोर्ट मांगी है। आयोग ने वेबसाइट और विज्ञापनों में पते की जानकारी के साथ कथित अनधिकृत क्लिनिक और अशांति से जुड़े आरोपों की जांच पर भी जवाब मांगा है।
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    VIT Bhopal, NHRC, NSUI, Madhya Pradesh News, Higher Education1. VIT भोपाल की वेबसाइट और विज्ञापनों की भी होगी जांच, NHRC ने पूछा- कैंपस की असली लोकेशन छात्रों को स्पष्ट बताई जाती है या नहीं
    मूल खबर
    वेल्लोर इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी यानी VIT भोपाल विश्वविद्यालय के नाम और उसके वास्तविक परिसर की लोकेशन को लेकर विवाद गहरा गया है। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग यानी NHRC ने इस मामले में मध्यप्रदेश सरकार की ओर से प्रस्तुत रिपोर्ट पर सवाल उठाते हुए अतिरिक्त रिपोर्ट और कार्रवाई प्रतिवेदन मांगा है। आयोग ने राज्य सरकार को चार सप्ताह के भीतर जानकारी प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। रिपोर्ट जमा करने की अंतिम तारीख 29 नवंबर निर्धारित की गई है। अब इस मामले में विश्वविद्यालय के नाम के साथ उसकी वेबसाइट प्रॉस्पेक्टस और विज्ञापनों में परिसर का पता किस तरह बताया जाता है यह भी जांच के दायरे में रहेगा।

    यह शिकायत राष्ट्रीय छात्र संघ यानी NSUI के प्रदेश उपाध्यक्ष रवि परमार ने की थी। शिकायत में आरोप लगाया गया कि विश्वविद्यालय के नाम में भोपाल शब्द होने से विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों को परिसर की वास्तविक लोकेशन को लेकर भ्रम हो सकता है। शिकायतकर्ता के मुताबिक विश्वविद्यालय का मुख्य परिसर सीहोर जिले के कोठरी कलां में भोपाल-इंदौर राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित है। ऐसे में दाखिले के लिए जानकारी जुटाने वाले विद्यार्थियों को यह स्पष्ट होना चाहिए कि विश्वविद्यालय का परिसर वास्तव में कहां है।

    NHRC ने 22 अक्टूबर को मामले पर विचार करते हुए राज्य सरकार की रिपोर्ट और उपलब्ध दस्तावेजों की समीक्षा की। आयोग ने माना कि VIT भोपाल का नाम राज्य विधानमंडल द्वारा निर्धारित किया गया है और विश्वविद्यालय की स्थापना मध्यप्रदेश निजी विश्वविद्यालय स्थापना एवं संचालन अधिनियम 2007 के तहत हुई है। हालांकि आयोग का सवाल केवल नाम की वैधानिकता तक सीमित नहीं है। आयोग ने यह जानना चाहा है कि जब विश्वविद्यालय का कानूनी नाम भोपाल है और उसका वास्तविक परिसर दूसरे जिले में स्थित है तो क्या इससे विद्यार्थियों और अभिभावकों के मन में स्थान को लेकर गलत धारणा बनने की आशंका है।

    आयोग के अनुसार राज्य सरकार की ओर से प्रस्तुत रिपोर्ट में इस महत्वपूर्ण सवाल का स्पष्ट जवाब नहीं दिया गया। इसलिए अतिरिक्त रिपोर्ट के जरिए स्थिति स्पष्ट करने के निर्देश दिए गए हैं। आयोग ने विश्वविद्यालय की आधिकारिक वेबसाइट प्रॉस्पेक्टस और विज्ञापनों में परिसर की वास्तविक लोकेशन के उल्लेख को लेकर भी जानकारी मांगी है। इस पहलू को इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि उच्च शिक्षा संस्थानों में दाखिले से पहले विद्यार्थी और अभिभावक अक्सर वेबसाइट और प्रचार सामग्री के आधार पर निर्णय लेते हैं। ऐसे में संस्थान का नाम और परिसर का पता स्पष्ट रूप से बताना जरूरी है ताकि किसी तरह की गलतफहमी न हो।

    शिकायत में विश्वविद्यालय परिसर में कथित अनधिकृत क्लिनिक संचालित होने और पूर्व में अशांति की घटनाओं से जुड़े आरोप भी लगाए गए थे। आयोग ने पाया कि राज्य सरकार की रिपोर्ट में इन आरोपों की जांच की स्थिति का उल्लेख नहीं है। अब सरकार को यह भी बताना होगा कि इन मामलों की जांच हुई है या नहीं और यदि हुई है तो उसके निष्कर्ष क्या रहे हैं। फिलहाल इन आरोपों को लेकर आयोग ने कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया है और न ही किसी पक्ष की गलती प्रमाणित की है।

    इस मामले में अगला कदम राज्य सरकार की अतिरिक्त रिपोर्ट के बाद सामने आएगा। रिपोर्ट में विश्वविद्यालय के वैधानिक नाम और वास्तविक लोकेशन के बीच संबंध प्रचार सामग्री में दी जाने वाली जानकारी और शिकायत में लगाए गए अन्य आरोपों पर कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट करनी होगी। इसके बाद आयोग उपलब्ध तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई पर विचार कर सकता है। फिलहाल विवाद का मुख्य मुद्दा यह है कि विश्वविद्यालय के नाम को लेकर कानूनी स्थिति स्पष्ट होने के बावजूद विद्यार्थियों को परिसर की वास्तविक लोकेशन की जानकारी किस तरह दी जा रही है।

  • MP में मछली पालन से निर्यात तक बड़ा प्लान, ₹7,430 करोड़ के निवेश से 4 जलाशयों में लगेंगे केज, लाखों रोजगार की उम्मीद

    MP में मछली पालन से निर्यात तक बड़ा प्लान, ₹7,430 करोड़ के निवेश से 4 जलाशयों में लगेंगे केज, लाखों रोजगार की उम्मीद


    भोपाल । मध्यप्रदेश में मछली पालन को बड़े उद्योग और अंतरराष्ट्रीय निर्यात कारोबार के रूप में विकसित करने की तैयारी तेज हो गई है।प्रदेश के प्रमुख जलाशयों में आधुनिक तकनीक से मछली उत्पादन बढ़ाने के साथ प्रसंस्करण भंडारण परिवहन और विपणन की पूरी व्यवस्था तैयार करने की योजना बनाई गई है। सरकार का लक्ष्य अगले तीन वर्षों में मछली उत्पादन दोगुना करना और मध्यप्रदेश को देश के प्रमुख मत्स्य निर्यात केंद्रों में शामिल करना है। इस दिशा में चार बड़े जलाशयों में आधुनिक केज कल्चर विकसित करने और निवेश आकर्षित करने पर जोर दिया जा रहा है।

    इस परियोजना के तहत इंदौर की कामदार्स केयर और कुवैत की जबेदी अल कुवैत फिशरीज कंपनी के बीच करीब 7 हजार 430 करोड़ रुपये के निवेश और बाय-बैक व्यवस्था से जुड़ा समझौता हुआ है। योजना के अनुसार इंदिरा सागर बरगी बाणसागर और बारना जलाशयों में आधुनिक तकनीक के जरिए मछली उत्पादन बढ़ाने के लिए सुविधाएं विकसित की जाएंगी। परियोजना से करीब चार लाख मीट्रिक टन अतिरिक्त मछली उत्पादन का लक्ष्य बताया गया है। हालांकि इस लक्ष्य को हासिल करना परियोजना के क्रियान्वयन निवेश और तकनीकी व्यवस्थाओं पर निर्भर करेगा।

    केज कल्चर इस योजना का प्रमुख हिस्सा है। इसमें जलाशय के भीतर जाल से बने विशेष पिंजरों में नियंत्रित तरीके से मछलियां पाली जाती हैं। इस तकनीक से उपलब्ध जलक्षेत्र का बेहतर इस्तेमाल करते हुए बड़े पैमाने पर उत्पादन बढ़ाया जा सकता है। मध्यप्रदेश में करीब 4.50 लाख हेक्टेयर जलक्षेत्र मत्स्य पालन के लिए उपलब्ध बताया गया है। वर्ष 2025-26 में प्रदेश में 4.95 लाख मीट्रिक टन से अधिक मछली उत्पादन दर्ज किया गया जो अब तक का सर्वाधिक बताया गया है।

    केंद्र सरकार के रिजर्वायर फिशरीज क्लस्टर कार्यक्रम के तहत रायसेन के सम्राट अशोक सागर यानी हलाली जलाशय और खंडवा के इंदिरा सागर जलाशय को मॉडल के रूप में विकसित किया जा रहा है। यहां मछली के बीज और चारे की उपलब्धता से लेकर उत्पादन निकासी प्रसंस्करण शीत भंडारण परिवहन और मार्केटिंग तक की व्यवस्था तैयार करने पर जोर रहेगा। हलाली जलाशय में वर्ष 2024-25 के दौरान मछली उत्पादकता 361 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर प्रतिवर्ष दर्ज की गई थी जो 2025-26 में 319 किलोग्राम रही। विभागीय जानकारी के अनुसार मध्यम श्रेणी के जलाशयों में यह उत्पादकता सबसे अधिक बताई गई है। वैज्ञानिक तरीके से पालन और बेहतर प्रबंधन के जरिए यहां उत्पादन बढ़ाने की संभावनाएं तलाशी जा रही हैं।

    मध्यप्रदेश एकीकृत मत्स्योद्योग नीति-2026 के तहत जलाशयों में करीब एक लाख केज स्थापित करने और अगले तीन वर्षों में मछली उत्पादन दोगुना करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके साथ ही मछली पालन को दूसरी कृषि आधारित गतिविधियों से जोड़ने की योजना भी बनाई गई है। उपयुक्त क्षेत्रों में मछली पालन के साथ बतख और कुक्कुट पालन मोती उत्पादन कमल सिंघाड़ा और मखाने की खेती को बढ़ावा दिया जाएगा। एक्वापोनिक्स हाइड्रोपोनिक्स और ग्रीनहाउस तकनीक के जरिए सब्जियां फूल और औषधीय पौधे उगाने की संभावनाएं भी विकसित की जाएंगी।

    इस एकीकृत मॉडल से मछुआरों और किसानों को आय के अतिरिक्त स्रोत मिल सकते हैं। मछली उत्पादन बढ़ने के साथ प्रसंस्करण पैकेजिंग शीत भंडारण और परिवहन जैसे क्षेत्रों में भी कारोबार के अवसर पैदा होने की उम्मीद है। ग्रामीण युवाओं और महिला स्व-सहायता समूहों को भी इससे रोजगार और स्वरोजगार के अवसर मिल सकते हैं।

    प्रदेश की एकीकृत मत्स्योद्योग नीति के तहत अब तक करीब 40 हजार करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव मिलने की जानकारी दी गई है। इनके जरिए मत्स्य बीज चारा प्रसंस्करण प्रयोगशालाएं शीत भंडारण और निर्यात जैसी सुविधाओं को विकसित करने की योजना है। इन प्रस्तावों से करीब 3.5 लाख प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार व स्वरोजगार के अवसर बनने का अनुमान लगाया गया है। भोपाल में आयोजित फिशरीज इन्वेस्टर्स एंड एक्सपोर्टर्स कॉन्क्लेव-2026 में निवेश और निर्यात से जुड़े मुद्दों पर चर्चा के साथ मत्स्य निवेश एवं निर्यात मार्गदर्शिका जारी करने की योजना है। अब इस पहल की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि निवेश प्रस्ताव कितनी तेजी से जमीन पर उतरते हैं और मछुआरों को उत्पादन से लेकर बिक्री तक कितना लाभ मिलता है।

  • भोपाल मास्टर प्लान-2047 पर व्यापारियों का मोर्चा, कन्वर्जन फीस 5% करने और सीलिंग रोकने की मांग, अब किसान भी उठाएंगे आवाज

    भोपाल मास्टर प्लान-2047 पर व्यापारियों का मोर्चा, कन्वर्जन फीस 5% करने और सीलिंग रोकने की मांग, अब किसान भी उठाएंगे आवाज


    भोपाल । भोपाल मास्टर प्लान-2047 के नए ड्राफ्ट को लेकर विरोध तेज होने लगा है। योजना पर आपत्तियां दर्ज कराने के लिए शुक्रवार को सबसे पहले व्यापारी शाहपुरा स्थित नगर तथा ग्राम निवेश यानी टीएंडसीपी कार्यालय पहुंचे। व्यापारियों ने व्यावसायिक भू-उपयोग कन्वर्जन फीस फ्लोर एरिया रेशियो यानी एफएआर और सीलिंग की कार्रवाई से जुड़े प्रावधानों पर सवाल उठाए। दूसरी ओर भारतीय किसान संघ के बैनर तले किसान भी अपनी जमीन और खेती से जुड़े मुद्दों को लेकर आपत्तियां दर्ज कराने की तैयारी में हैं। इससे मास्टर प्लान के प्रस्तावों पर व्यापारियों और किसानों की नाराजगी खुलकर सामने आने लगी है।

    व्यापारियों की प्रमुख मांग है कि कन्वर्जन फीस एकमुश्त और कुल पांच प्रतिशत तय की जाए। उनका कहना है कि निर्धारित फीस जमा करने के बाद उन्हें पूरा कमर्शियल एफएआर दिया जाना चाहिए। इसके साथ ही पुराने बाजारों को राहत देने और सीलिंग की कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग भी उठाई गई है। व्यापारियों का मानना है कि व्यावसायिक गतिविधियों से जुड़े नियम स्पष्ट और व्यावहारिक होने चाहिए ताकि कारोबारियों को अनिश्चितता का सामना न करना पड़े।

    व्यापारियों के बाद अब किसानों की आपत्तियां भी मास्टर प्लान के लिए अहम होने वाली हैं। भारतीय किसान संघ के बैनर तले किसान शाहपुरा स्थित टीएंडसीपी कार्यालय पहुंचकर अपनी चिंताएं अधिकारियों के सामने रखेंगे। इससे पहले गुरुवार को नीलबड़ में किसानों ने सड़क पर बैठकर प्रदर्शन किया था। किसानों का आरोप है कि नए ड्राफ्ट में 66 गांवों की कृषि भूमि को रिवरफ्रंट फॉरेस्ट ग्रीन बेल्ट और अन्य आरक्षित श्रेणियों में शामिल करने के प्रस्ताव से उनकी निजी जमीन खेती और आजीविका प्रभावित हो सकती है।

    किसानों के मुताबिक वर्ष 1995 के मास्टर प्लान में संबंधित जमीनों का भू-उपयोग कृषि रखा गया था। वर्ष 2031 के लिए तैयार किए गए पहले के मास्टर प्लान के ड्राफ्ट में भी कृषि उपयोग का प्रावधान होने की बात कही जा रही है। अब नए ड्राफ्ट में बड़े तालाब के आसपास की कृषि भूमि के भू-उपयोग में बदलाव की आशंका ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। किसान चाहते हैं कि जमीन का उपयोग बदलने से पहले उनकी आपत्तियों और अधिकारों पर गंभीरता से विचार किया जाए। भारतीय किसान संघ के तहसील अध्यक्ष अखिलेश मीणा ने भी किसानों की ओर से कार्यालय पहुंचकर विरोध दर्ज कराने की बात कही है।

    मास्टर प्लान में बड़े तालाब के कैचमेंट क्षेत्र में निर्माण की सीमा को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। किसानों और स्थानीय लोगों का आरोप है कि कुछ इलाकों में आम लोगों के मकानों पर निर्माण संबंधी पाबंदियों की आशंका है जबकि एलडीआर में शामिल कुछ क्षेत्रों में निर्माण की सीमा बढ़ाने का प्रस्ताव है। आलोचकों का दावा है कि इससे प्रभावशाली लोगों के बंगलों और फार्म हाउस वाले इलाकों को फायदा मिल सकता है। हालांकि इन आरोपों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने के लिए संबंधित नियमों निर्माण अनुमतियों और जमीन के रिकॉर्ड की जांच जरूरी है।

    किसानों ने मेंडोरा मेंडोरी सेवनिया गौंड और केरवा वुड्स जैसे क्षेत्रों में भू-उपयोग और जमीन की सरकारी गाइडलाइन में बदलाव पर भी चिंता जताई है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार मेंडोरी के केरवा वुड्स क्षेत्र में कृषि भूमि की कलेक्टर गाइडलाइन वर्ष 2025-26 में एक करोड़ रुपये प्रति हेक्टेयर थी जो वर्ष 2026-27 में बढ़कर तीन करोड़ रुपये प्रति हेक्टेयर हो गई। हालांकि सरकारी गाइडलाइन में बढ़ोतरी का अर्थ यह नहीं है कि वास्तविक बाजार मूल्य भी उसी अनुपात में बढ़ गया है।

    किसानों की मांग है कि भोजताल संरक्षण जोन-1 और जोन-2 से जुड़े प्रावधानों पर पुनर्विचार किया जाए और कृषि भूमि का उपयोग खेती के लिए सुरक्षित रखा जाए। उनका कहना है कि खेती ही उनकी आजीविका का प्रमुख साधन है इसलिए जमीन के भविष्य से जुड़े फैसले लेते समय किसानों की सहमति और समस्याओं को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।

    टीएंडसीपी की संयुक्त संचालक इंदू त्रिपाठी के मुताबिक नियमानुसार 30 दिन के भीतर आपत्तियां और सुझाव मांगे गए हैं। प्राप्त आपत्तियों को ऑनलाइन पोर्टल पर डिजिटाइज किया जाएगा और इसके बाद संबंधित पक्षों को सुनवाई के लिए बुलाया जाएगा। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि व्यापारियों और किसानों की मांगों पर सुनवाई के दौरान क्या निर्णय सामने आते हैं और भोपाल के विकास की प्रस्तावित योजना में किन बदलावों पर विचार किया जाता है।

  • सौरव गांगुली को दिल्ली हाईकोर्ट से झटका, रिलीज से एक दिन पहले फिल्म ‘दूसरा’ रोकने की मांग खारिज

    सौरव गांगुली को दिल्ली हाईकोर्ट से झटका, रिलीज से एक दिन पहले फिल्म ‘दूसरा’ रोकने की मांग खारिज

    नई दिल्ली । पूर्व भारतीय क्रिकेट कप्तान सौरव गांगुली को फिल्म ‘दूसरा’ की रिलीज रोकने की मांग के मामले में दिल्ली हाईकोर्ट से राहत नहीं मिली। अदालत ने गुरुवार को फिल्म की रिलीज पर अंतरिम रोक लगाने से इनकार कर दिया। यह फिल्म शुक्रवार, 23 अक्टूबर को सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली है। सुनवाई के दौरान अदालत ने मौखिक रूप से कहा कि प्रथम दृष्टया सुविधा का संतुलन फिल्म के निर्माताओं के पक्ष में है। हालांकि, मामले की अगली सुनवाई शुक्रवार को तय की गई है।

    न्यायमूर्ति दिनेश भट्ट की पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि फिल्म की रिलीज अगले दिन निर्धारित है और फिलहाल रोक लगाने का आधार याचिकाकर्ता के पक्ष में नजर नहीं आता। अदालत ने यह भी कहा कि याचिकाकर्ता के पास कोई महत्वपूर्ण अधिकार हो सकता है, लेकिन इस स्तर पर फिल्म के प्रदर्शन पर रोक नहीं लगाई जा रही है। सौरव गांगुली के साथ लव फिल्म्स एलएलपी भी इस मुकदमे में वादी है। यह कंपनी पूर्व भारतीय कप्तान पर आधारित एक अलग बायोपिक बना रही है।

    मामले में गांगुली की ओर से पेश वकील ने व्यक्तित्व के अधिकारों के उल्लंघन की आशंका जताई। उनका कहना था कि फिल्म ‘दूसरा’ का प्रचार सौरव गांगुली के नाम पर किया जा रहा है और दर्शकों के सामने उन्हें ही फिल्म का मुख्य नायक बताया जा रहा है। वकील ने दलील दी कि गांगुली और उनका जीवन फिल्म का प्रमुख विषय हैं, जबकि इसके निर्माण के लिए उनसे कोई लाइसेंस या अनुमति नहीं ली गई। उन्होंने फिल्म की रिलीज टालने के लिए निर्माताओं की ओर से किए गए अग्रिम भुगतान की राशि चुकाने की पेशकश भी की।

    दूसरी ओर, फिल्म निर्माताओं की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि ‘दूसरा’ सौरव गांगुली की बायोपिक नहीं है। उन्होंने कहा कि फिल्म की कहानी राजस्थान की एक मध्यमवर्गीय लड़की पर आधारित है, जो पूर्व भारतीय कप्तान से जुड़े कुछ खेल आयोजनों से प्रेरित होकर क्रिकेट की दुनिया में कदम रखती है। निर्माताओं के अनुसार, गांगुली से जुड़ी कुछ क्लिप का इस्तेमाल करने के लिए आवश्यक अनुमति ली गई थी। सुनवाई के दौरान निर्माताओं के वकील ने याचिका को अंतिम समय में दबाव बनाने की कोशिश बताते हुए कहा कि फिल्म के लिए सौ से अधिक सिनेमाघर बुक किए जा चुके हैं और उनके लिए अग्रिम भुगतान भी किया जा चुका है।

    निर्माताओं की ओर से यह भी दलील दी गई कि याचिकाकर्ताओं ने अब तक फिल्म देखी ही नहीं है और उनकी आशंकाएं अनुमानों पर आधारित हैं। वकील ने वर्ष 2002 की नेटवेस्ट वनडे सीरीज की क्लिप का उल्लेख करते हुए सवाल उठाया कि ऐसी क्लिप के आधार पर कोई खिलाड़ी व्यक्तित्व के अधिकारों का दावा कैसे कर सकता है। इस तरह सुनवाई में फिल्म की विषयवस्तु, प्रचार और गांगुली के व्यक्तित्व से जुड़े अधिकार प्रमुख मुद्दे रहे।

    सुविधा का संतुलन एक कानूनी कसौटी है, जिसका इस्तेमाल अदालतें अंतरिम रोक लगाने के अनुरोध पर विचार करते समय करती हैं। इसमें यह देखा जाता है कि यदि रोक नहीं लगाई जाती तो याचिकाकर्ता को कितना नुकसान हो सकता है और यदि रोक लगा दी जाती तो दूसरे पक्ष को क्या नुकसान उठाना पड़ सकता है। इसी कसौटी पर विचार करते हुए अदालत ने फिलहाल फिल्म की रिलीज रोकने से इनकार किया।

    ‘दूसरा : इंडियाज अदर फ्रीडम स्ट्रगल’ का निर्देशन अभिनय देव ने किया है। फिल्म में प्लबिता बोरठाकुर, अंकुर विकल और समिधा गुरु मुख्य भूमिकाओं में नजर आएंगे। कहानी एक मध्यमवर्गीय राजस्थानी लड़की के क्रिकेट की दुनिया में प्रवेश करने के सफर पर केंद्रित बताई गई है। अदालत ने तत्काल रोक लगाने की मांग स्वीकार नहीं की है और मामले की आगे की सुनवाई शुक्रवार को निर्धारित की गई है।

  • शरद पूर्णिमा की रात क्यों खास है? मां लक्ष्मी की पूजा, 108 बार मंत्र जाप और चांदनी में खीर रखने की जानें परंपरा

    शरद पूर्णिमा की रात क्यों खास है? मां लक्ष्मी की पूजा, 108 बार मंत्र जाप और चांदनी में खीर रखने की जानें परंपरा


    नई दिल्ली। हिंदू धर्म में शरद पूर्णिमा का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। इस वर्ष 25 अक्टूबर 2026 रविवार को शरद पूर्णिमा का पर्व मनाया जाएगा। आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि पर आने वाले इस पर्व को मां लक्ष्मी और चंद्रदेव की आराधना के लिए खास माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस रात चंद्रमा अपनी सोलह कलाओं से परिपूर्ण होता है और उसकी किरणों को अमृत के समान गुणकारी माना जाता है। यही वजह है कि देश के कई हिस्सों में लोग शरद पूर्णिमा की रात चांदनी में खीर रखने और अगले दिन उसे प्रसाद के रूप में ग्रहण करने की परंपरा निभाते हैं। अगर आप भी इस अवसर पर पूजा करने की तैयारी कर रहे हैं तो जरूरी सामग्री पहले से जुटा लेना बेहतर रहेगा।

    शरद पूर्णिमा पर मां लक्ष्मी और भगवान विष्णु की पूजा करने की परंपरा है। मान्यता है कि विधि विधान से पूजा करने पर घर में सुख समृद्धि आती है और परिवार में खुशहाली बनी रहती है। पूजा की शुरुआत से पहले भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की प्रतिमा या तस्वीर को साफ स्थान पर स्थापित करें। इसके बाद पूजा की थाली में रोली कुमकुम अक्षत फूल और फूलों की माला रखें। धूप दीपक घी रुई की बत्ती और गंगाजल भी पूजा के लिए तैयार रखें। इसके साथ ही शुद्ध जल से भरा पात्र चंद्रदेव की पूजा के लिए उपयोग में लाया जा सकता है।

    पूजन सामग्री में फल मिठाई बताशे दूध चावल चीनी और मेवे भी शामिल करें। शरद पूर्णिमा पर खीर बनाने की विशेष परंपरा है इसलिए इसके लिए दूध चावल चीनी और अपनी पसंद के मेवे पहले से रख लें। पूजा में पान सुपारी नारियल और कलश का भी उपयोग किया जा सकता है। अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार तुलसी दल भी रखें। पूजा के लिए थाली आसन और जल से भरा चांदी पीतल या तांबे का कलश तैयार कर लें। यदि आप इस दिन दान करना चाहते हैं तो अनाज वस्त्र या अपनी सामर्थ्य के अनुसार दक्षिणा की व्यवस्था भी कर सकते हैं।

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शरद पूर्णिमा की रात मां लक्ष्मी पृथ्वी पर विचरण करती हैं और भक्तों को सुख समृद्धि का आशीर्वाद देती हैं। इसी विश्वास के चलते कई लोग इस रात जागरण करते हैं और देवी की आराधना में समय बिताते हैं। पूजा के दौरान मां लक्ष्मी और भगवान विष्णु को फूल फल और मिठाई अर्पित करें। इसके बाद अपनी श्रद्धा के अनुसार मंत्र जाप और स्तोत्र पाठ कर सकते हैं। कनकधारा स्तोत्र का पाठ और ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः मंत्र का 108 बार जाप करना धार्मिक परंपराओं में शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इससे धन धान्य और समृद्धि की कामना की जाती है।

    शरद पूर्णिमा पर चंद्रदेव की पूजा का भी विशेष महत्व है। रात में चंद्रमा के दर्शन कर जल अर्पित करने और सुख शांति की प्रार्थना करने की परंपरा कई परिवारों में प्रचलित है। इस अवसर पर केसर और मेवों से खीर तैयार करके चांदनी में रखने की मान्यता है। बाद में इसे प्रसाद के रूप में ग्रहण किया जाता है। हालांकि खीर को चांदनी में रखने से उसमें औषधीय गुण बढ़ने का धार्मिक विश्वास है लेकिन इसे किसी प्रमाणित चिकित्सा लाभ के रूप में नहीं देखना चाहिए।

    शरद पूर्णिमा पर पूजा करते समय सबसे जरूरी बात श्रद्धा और स्वच्छता का ध्यान रखना है। पूजा की सामग्री अपनी सुविधा और पारिवारिक परंपरा के अनुसार जुटाई जा सकती है। पहले से तैयारी करने से पूजा के समय किसी जरूरी वस्तु की कमी नहीं होगी और आप पूरे मन से मां लक्ष्मी तथा चंद्रदेव की आराधना कर सकेंगे।