Author: bharati

  • करीना कपूर के सामने सलमान खान ने शाहिद कपूर पर किया मजाक, स्टेज पर आते ही कही ये बात

    करीना कपूर के सामने सलमान खान ने शाहिद कपूर पर किया मजाक, स्टेज पर आते ही कही ये बात

    नई दिल्ली । बॉलीवुड अभिनेता सलमान खान का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें वह अभिनेता शाहिद कपूर के साथ मजाक करते नजर आ रहे हैं। यह वीडियो आईफा अवॉर्ड्स 2027 की प्रेस कॉन्फ्रेंस का बताया जा रहा है। खास बात यह है कि इस दौरान शाहिद कपूर की पूर्व प्रेमिका करीना कपूर भी मंच पर मौजूद थीं। सलमान खान की मजाकिया टिप्पणी सुनकर वहां मौजूद लोग हंसने लगे। इसके बाद सोशल मीडिया पर भी इस वीडियो को लेकर कई तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आईं।

    वीडियो में सबसे पहले करीना कपूर मंच पर चढ़ती दिखाई देती हैं। इसके बाद अभिनेत्री रश्मिका मंदाना आती हैं और उनके पीछे शाहिद कपूर मंच पर पहुंचते हैं। मंच पर चढ़ते समय शाहिद कपूर हाथ से मंच को छूते हैं। उस समय सलमान खान के हाथ में माइक होता है। शाहिद को ऐसा करते देखकर सलमान मजाकिया अंदाज में कहते हैं, “इन्होंने मेरे पैर नहीं छुए, स्टेज को छुआ।” उनकी इस टिप्पणी के बाद वहां मौजूद लोगों की हंसी सुनाई देती है। सलमान का यह अंदाज अब सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया है।

    सलमान खान और शाहिद कपूर के इस वीडियो पर सोशल मीडिया यूजर्स ने तरह-तरह की टिप्पणियां की हैं। एक यूजर ने टिप्पणी करते हुए बिश्नोई का जिक्र किया और कहा कि संदेश दे दिया गया है, अब शाहिद कपूर को कोई खतरा नहीं है। एक अन्य यूजर ने लिखा कि सलमान ने शायद इसलिए ऐसा कहा, ताकि मीडिया में यह चर्चा न शुरू हो जाए कि शाहिद कपूर ने उनके पैर छुए हैं। वहीं, एक यूजर ने सलमान के मजाक पर टिप्पणी करते हुए कहा कि ऐसा जोक किया गया, जिस पर किसी को हंसी नहीं आई। एक अन्य टिप्पणी में शाहिद कपूर और बिश्नोई का जिक्र किया गया। कुछ लोगों ने यह भी कहा कि सलमान की बात पर शाहिद कपूर ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। हालांकि, ये सभी सोशल मीडिया यूजर्स की व्यक्तिगत टिप्पणियां हैं।

    शाहिद कपूर और करीना कपूर का रिश्ता भी इस वीडियो को लेकर लोगों की दिलचस्पी की एक वजह है। दोनों कलाकार एक समय बॉलीवुड के चर्चित जोड़ों में गिने जाते थे। उनकी नजदीकियां वर्ष 2004 में आई फिल्म ‘फिदा’ की शूटिंग के दौरान बढ़ी थीं। इसके बाद दोनों ने ‘चुप चुप के’, ‘36 चाइना टाउन’ और ‘जब वी मेट’ जैसी फिल्मों में साथ काम किया। वर्ष 2007 में रिलीज हुई ‘जब वी मेट’ दोनों की साथ में सबसे चर्चित फिल्मों में शामिल रही। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, इसी फिल्म की शूटिंग के दौरान वर्ष 2007 में दोनों का रिश्ता समाप्त हो गया था। हालांकि, अलग होने के बाद भी दोनों ने वर्ष 2010 में आई फिल्म ‘मिलेंगे-मिलेंगे’ में साथ काम किया।

    करीना कपूर और शाहिद कपूर ने बाद में अपनी-अपनी जिंदगी में आगे बढ़ते हुए शादी की। करीना ने वर्ष 2012 में अभिनेता सैफ अली खान से विवाह किया, जबकि शाहिद कपूर ने वर्ष 2015 में मीरा राजपूत से शादी की। इसके बाद दोनों कलाकार अपने पारिवारिक जीवन और फिल्मी करियर में व्यस्त रहे।

    आईफा अवॉर्ड्स 2027 का आयोजन 22 और 23 जनवरी को अबू धाबी के यास आइलैंड स्थित एतिहाद एरिना में होना प्रस्तावित है। इस कार्यक्रम में बॉलीवुड के कई बड़े सितारों के शामिल होने की संभावना है। करण जौहर और वरुण धवन कार्यक्रम की मेजबानी कर सकते हैं। सलमान खान, करीना कपूर, शाहिद कपूर, रश्मिका मंदाना और जाह्नवी कपूर जैसे कलाकारों के प्रदर्शन करने की भी संभावना जताई गई है। इस बार समारोह का प्रसारण दुनियाभर में यूट्यूब पर किए जाने की बात कही गई है। सलमान खान की वायरल टिप्पणी के कारण आईफा 2027 की प्रेस कॉन्फ्रेंस का यह वीडियो चर्चा में बना हुआ है।

  • शरद पूर्णिमा पर इन 5 चीजों का दान माना जाता है शुभ, मां लक्ष्मी की कृपा और सुख-समृद्धि के लिए जानें धार्मिक मान्यताएं

    शरद पूर्णिमा पर इन 5 चीजों का दान माना जाता है शुभ, मां लक्ष्मी की कृपा और सुख-समृद्धि के लिए जानें धार्मिक मान्यताएं

    नई दिल्ली । शरद पूर्णिमा का हिंदू धर्म में विशेष महत्व माना जाता है। यह तिथि मां लक्ष्मी की पूजा, चंद्रदेव की आराधना और दान-पुण्य के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा अपनी 16 कलाओं से परिपूर्ण होता है। इस अवसर पर पूजा-पाठ करने के साथ जरूरतमंद लोगों की सहायता करने की परंपरा भी प्रचलित है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धापूर्वक दान करने से सुख-शांति और घर में सुख-समृद्धि की कामना की जाती है। ऐसे में इस पावन अवसर पर कुछ विशेष वस्तुओं का दान करने का धार्मिक महत्व बताया गया है।

    सनातन परंपरा में पूर्णिमा तिथि को पूजा, जप और दान-पुण्य के लिए विशेष माना जाता है। शरद पूर्णिमा पर मां लक्ष्मी का स्मरण करने और चंद्रदेव की पूजा करने की परंपरा है। इस रात खीर बनाकर चंद्रमा की रोशनी में रखने की मान्यता भी काफी प्रचलित है। इसके साथ ही जरूरतमंदों को भोजन, वस्त्र और उपयोगी सामग्री देना सेवा भाव से जुड़ा माना जाता है। धार्मिक विश्वास के अनुसार, दान का महत्व केवल वस्तु देने तक सीमित नहीं है, बल्कि जरूरतमंद व्यक्ति की सहायता करना भी इसका प्रमुख उद्देश्य है।

    शरद पूर्णिमा पर सफेद वस्त्रों का दान करना शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं में सफेद रंग को शांति, पवित्रता और चंद्रमा से जोड़कर देखा जाता है। इस दिन जरूरतमंद लोगों को साफ-सुथरे कपड़े दिए जा सकते हैं। दान करते समय अपनी आर्थिक स्थिति और सामर्थ्य का ध्यान रखना चाहिए। महंगे वस्त्र देना आवश्यक नहीं है, बल्कि किसी जरूरतमंद की आवश्यकता पूरी करना अधिक महत्वपूर्ण माना जाता है।

    इस अवसर पर चावल, दूध और चीनी का दान भी शुभ माना जाता है। शरद पूर्णिमा पर खीर बनाने और उसे चंद्रमा की रोशनी में रखने की परंपरा के कारण इन खाद्य सामग्रियों का विशेष उल्लेख किया जाता है। जरूरतमंद परिवारों को चावल, दूध, चीनी या अन्य उपयोगी खाद्य सामग्री देना अन्नदान और सेवा भाव से जुड़ा है। इस तरह का दान परिवारों की भोजन संबंधी जरूरतों को पूरा करने में भी मदद कर सकता है।

    धार्मिक मान्यताओं में चांदी का संबंध चंद्रदेव से माना जाता है। इसलिए शरद पूर्णिमा पर सामर्थ्य के अनुसार चांदी के बर्तनों का दान करना भी शुभ बताया जाता है। मान्यता है कि ऐसा करने से मानसिक शांति और सुख-समृद्धि की कामना की जाती है। हालांकि, दान के लिए चांदी जैसी महंगी वस्तु देना अनिवार्य नहीं है। व्यक्ति अपनी क्षमता के अनुसार छोटी वस्तु दान करके भी सेवा कार्य में योगदान दे सकता है।

    शरद पूर्णिमा पर सफेद मिठाई और मौसमी फलों का दान करना भी पुण्यदायी माना जाता है। इस दिन जरूरतमंद लोगों को मिठाई, फल और अन्य खाद्य पदार्थ दिए जा सकते हैं। भोजन साझा करना और दूसरों की सहायता करना इस परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसके अलावा जरूरतमंदों को भोजन कराना, राशन देना या आर्थिक सहायता उपलब्ध कराना भी उपयोगी दान कार्यों में शामिल है। धार्मिक परंपराओं में अन्नदान को विशेष महत्व दिया गया है, क्योंकि इससे लोगों की बुनियादी जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलती है।

    दान करते समय कुछ बातों का ध्यान रखना भी जरूरी है। दान हमेशा श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार करना चाहिए। खाद्य सामग्री साफ-सुथरी और उपयोग के योग्य होनी चाहिए। सहायता करते समय सामने वाले व्यक्ति की वास्तविक जरूरत को प्राथमिकता देनी चाहिए और किसी भी प्रकार के दिखावे या अहंकार से बचना चाहिए। किसी जरूरतमंद की मदद करते समय उसके सम्मान और भावनाओं का ध्यान रखना भी महत्वपूर्ण है।

    मां लक्ष्मी की कृपा पाने की धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शरद पूर्णिमा की रात घर की साफ-सफाई करने, दीपक जलाने, श्रद्धापूर्वक पूजा करने और जरूरतमंदों की सहायता करने की परंपरा है। हालांकि, इन धार्मिक मान्यताओं को आस्था और विश्वास के संदर्भ में समझना चाहिए। इस पर्व का एक महत्वपूर्ण संदेश दूसरों के साथ खुशियां बांटना और समाज में सेवा भावना को बढ़ावा देना भी है। इसलिए शरद पूर्णिमा पर दान करते समय वस्तु के मूल्य से अधिक उसके पीछे की भावना और जरूरतमंद की सहायता को महत्व देना चाहिए।

  • F-35 लड़ाकू विमान हर देश को नहीं देता अमेरिका, सर्जियो गोर ने भारत को बताया भरोसेमंद साझेदार, रक्षा सहयोग पर कही अहम बात

    F-35 लड़ाकू विमान हर देश को नहीं देता अमेरिका, सर्जियो गोर ने भारत को बताया भरोसेमंद साझेदार, रक्षा सहयोग पर कही अहम बात

    नई दिल्ली । भारत और अमेरिका के बीच रक्षा सहयोग को लेकर अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने महत्वपूर्ण बयान दिया है। उन्होंने कहा कि अमेरिका अपना अत्याधुनिक एफ-35 लड़ाकू विमान हर देश को नहीं देता, बल्कि इसे केवल उन्हीं साझेदारों को उपलब्ध कराता है जिन पर उसे भरोसा होता है। गोर ने भारत को अमेरिका का भरोसेमंद साझेदार बताते हुए क्वॉड समूह में उसकी भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताया। उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब दोनों देशों के बीच रक्षा संबंधों, सैन्य अभ्यासों और संभावित लड़ाकू विमान सौदों को लेकर चर्चा जारी है।

    सर्जियो गोर ने भारत में हाल के संयुक्त सैन्य अभ्यासों का उल्लेख करते हुए कहा कि पिछले एक महीने के दौरान करीब 500 अमेरिकी सैनिक भारत में आयोजित युद्धाभ्यास में शामिल हुए। इसके अलावा, तरंग शक्ति अभ्यास के दौरान अमेरिकी एफ-35 लड़ाकू विमान भी भारत पहुंचे और भारतीय वायुसेना के साथ अभ्यास किया। इन गतिविधियों को दोनों देशों के बीच बढ़ते सैन्य सहयोग के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    एफ-35 अमेरिका के आधुनिक लड़ाकू विमानों में शामिल है। इसमें स्टील्थ तकनीक का इस्तेमाल किया गया है, जिसका उद्देश्य विमान को दुश्मन के रडार की पकड़ में आने से बचने में मदद करना है। इस तरह के विमान और उनसे जुड़ी तकनीक का इस्तेमाल तथा हस्तांतरण संवेदनशील रक्षा मामलों में गिना जाता है। गोर के बयान के मुताबिक, अमेरिका ऐसे विमानों के मामले में भरोसेमंद साझेदारों को प्राथमिकता देता है। हालांकि, भारत के लिए एफ-35 की खरीद को लेकर किसी अंतिम समझौते की घोषणा इस बयान में नहीं की गई।

    गोर ने भारत को क्वॉड समूह का मूल्यवान साझेदार भी बताया। क्वॉड में भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया शामिल हैं। यह समूह हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सुरक्षा, स्थिरता और सहयोग से जुड़े मुद्दों पर काम करता है। चारों देशों के बीच संवाद और गतिविधियों का उद्देश्य क्षेत्रीय चुनौतियों पर सहयोग बढ़ाना है। ऐसे में भारत के साथ अमेरिकी सैन्य अभ्यास और एफ-35 विमानों की भागीदारी दोनों देशों के रक्षा संबंधों की अहमियत को रेखांकित करती है।

    भारत और अमेरिका के बीच रक्षा सहयोग केवल सैन्य अभ्यासों तक सीमित नहीं है। दोनों देश सैन्य क्षमताओं के समन्वय, संयुक्त प्रशिक्षण और क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर भी सहयोग करते हैं। संयुक्त अभ्यासों के दौरान सेनाओं को एक-दूसरे की कार्यप्रणाली, संचालन प्रक्रियाओं और क्षमताओं को समझने का अवसर मिलता है। इससे भविष्य में साथ काम करने की क्षमता विकसित करने में मदद मिल सकती है। हालांकि, किसी खास अभ्यास से तकनीक हस्तांतरण या विमान खरीद का समझौता अपने आप तय नहीं हो जाता।

    एफ-35 को लेकर गोर की टिप्पणी ऐसे समय में आई है, जब भारत अपनी वायुसेना की क्षमताओं को मजबूत करने और विभिन्न देशों के साथ रक्षा संबंधों को आगे बढ़ाने पर काम कर रहा है। आधुनिक लड़ाकू विमानों की खरीद से जुड़े फैसलों में लागत, तकनीकी जरूरतें, रखरखाव, परिचालन आवश्यकताएं और रणनीतिक प्राथमिकताएं जैसे कई पहलू महत्वपूर्ण होते हैं। इसलिए अमेरिकी राजदूत का बयान दोनों देशों के बीच भरोसे और सैन्य संपर्कों को तो दर्शाता है, लेकिन इसे किसी निश्चित विमान सौदे की पुष्टि नहीं माना जा सकता।

    कुल मिलाकर, सर्जियो गोर ने अपने बयान में भारत को अमेरिका का महत्वपूर्ण और भरोसेमंद साझेदार बताया है। हाल के सैन्य अभ्यासों और तरंग शक्ति में एफ-35 की भागीदारी को उन्होंने दोनों देशों के मजबूत होते रक्षा संबंधों के संदर्भ में रखा। फिलहाल, भारत को एफ-35 की बिक्री को लेकर किसी अंतिम समझौते की पुष्टि नहीं हुई है। आने वाले समय में दोनों देशों के रक्षा सहयोग की दिशा और संभावित समझौतों पर होने वाली बातचीत महत्वपूर्ण रहेगी।

  • प्यार और अपनेपन को तरसे करण जौहर, विजय देवरकोंडा के सामने छलका दिल, भावुक कर गई रिश्ते की ख्वाहिश

    प्यार और अपनेपन को तरसे करण जौहर, विजय देवरकोंडा के सामने छलका दिल, भावुक कर गई रिश्ते की ख्वाहिश


    नई दिल्ली। बॉलीवुड के मशहूर फिल्ममेकर करण जौहर अपनी फिल्मों और बेबाक अंदाज के लिए जाने जाते हैं लेकिन इस बार उन्होंने अपनी निजी जिंदगी और प्यार को लेकर ऐसी बातें साझा की हैं जिन्होंने उनके प्रशंसकों का ध्यान खींचा है। करण ने बताया कि वह भी अपनी जिंदगी में एक ऐसे साथी की तलाश में हैं जिसके साथ रोजमर्रा की छोटी छोटी खुशियां बांट सकें और जिंदगी के खास पलों को यादगार बना सकें। उनकी ख्वाहिश सिर्फ एक रिश्ता बनाने तक सीमित नहीं है बल्कि वह ऐसा इंसान चाहते हैं जो उन्हें समझे उनके साथ खड़ा रहे और उन्हें अपनेपन का एहसास कराए। करण की यह बात सामने आई उनके चर्चित चैट शो कॉफी विद करण 9 के एक एपिसोड में जहां अभिनेता विजय देवरकोंडा के साथ बातचीत के दौरान उन्होंने अपने दिल की बात कही।

    शो में बातचीत के दौरान विजय देवरकोंडा ने अभिनेत्री रश्मिका मंदाना के साथ अपने रिश्ते को लेकर भावनात्मक अंदाज में बात की। विजय ने कहा कि वह रश्मिका का हाथ थामे रखना चाहते हैं और उनके साथ ऐसा रिश्ता चाहते हैं जिसमें वह सुरक्षित महसूस करें। विजय की इस बात के बाद करण ने उनसे अपनी जिंदगी की ख्वाहिशों को लेकर चर्चा की। जब विजय ने करण से पूछा कि वह अपने जीवन में क्या चाहते हैं तो फिल्ममेकर ने बिना किसी झिझक के बताया कि उन्हें भी एक ऐसे साथी की जरूरत महसूस होती है जिसके साथ वह अपनी जिंदगी साझा कर सकें।

    करण जौहर ने कहा कि वह चाहते हैं कि उनकी जिंदगी में ऐसा इंसान आए जिसके साथ वह दिनभर की छोटी छोटी बातें साझा कर सकें। वह अपनी खुशियों और उपलब्धियों का जश्न उस व्यक्ति के साथ मनाना चाहते हैं और मुश्किल समय में भी एक दूसरे का सहारा बनना चाहते हैं। उनके मुताबिक रिश्ते का मतलब केवल बड़े वादे करना नहीं बल्कि रोजमर्रा की जिंदगी में एक दूसरे के साथ खड़े रहना भी है। वह ऐसे साथी की तलाश में हैं जिसके साथ उन्हें प्यार सम्मान और अपनापन महसूस हो। करण की बातों से साफ झलकता है कि उनके लिए रिश्ते में भावनात्मक जुड़ाव और एक दूसरे को समझना कितना मायने रखता है।

    करण ने अपने जुड़वां बच्चों यश और रूही का जिक्र करते हुए यह भी बताया कि वह अपने जीवनसाथी में ऐसा इंसान देखना चाहेंगे जो बच्चों की परवरिश में बराबर की जिम्मेदारी निभाए। उनके लिए परिवार उनकी जिंदगी का अहम हिस्सा है और वह चाहते हैं कि उनका साथी इस जिम्मेदारी को भी समझे। करण ने यह भी कहा कि शादी करना शायद उनके लिए तकनीकी रूप से संभव न हो लेकिन वह किसी के साथ रिश्ते में रहना जरूर चाहते हैं। उनकी यह बात बताती है कि उनके लिए रिश्ते का महत्व किसी सामाजिक बंधन से अधिक साथ और भावनात्मक जुड़ाव में है।

    करण की बातें सुनने के बाद विजय देवरकोंडा ने उनके लिए दिल से दुआ की कि उन्हें भी जल्द ऐसा साथी मिले जिसकी उन्हें तलाश है। विजय ने हल्के फुल्के अंदाज में पुराने और नए देवी देवताओं के साथ कॉफी के देवताओं से भी करण की इच्छा पूरी करने की प्रार्थना की। उनकी इस बात पर करण भावुक नजर आए। उन्होंने कहा कि उन्हें महसूस हुआ कि विजय की प्रार्थना दिल से निकली थी।

    इस बातचीत ने करण जौहर के निजी जीवन के एक भावनात्मक पहलू को सामने रखा। पर्दे पर रिश्तों और प्रेम कहानियों को खूबसूरती से पेश करने वाले करण खुद भी ऐसा रिश्ता चाहते हैं जिसमें प्यार के साथ भरोसा सम्मान और साथ निभाने की भावना हो। उनकी ख्वाहिश यही है कि जिंदगी की खुशियां बांटने और मुश्किलों का सामना करने के लिए उनके पास भी कोई ऐसा इंसान हो जिसे वह अपना कह सकें।

  • दलेर मेहंदी विवाद में मीका सिंह ने मांगी मंत्री सुबोध उनियाल से माफी, सीएम धामी ने फोन कर बातचीत से गलतफहमी दूर करने की अपील की

    दलेर मेहंदी विवाद में मीका सिंह ने मांगी मंत्री सुबोध उनियाल से माफी, सीएम धामी ने फोन कर बातचीत से गलतफहमी दूर करने की अपील की

    नई दिल्ली । गायक दलेर मेहंदी के एक कार्यक्रम को लेकर शुरू हुआ विवाद अब उनके भाई और गायक मीका सिंह तथा उत्तराखंड के मंत्री सुबोध उनियाल के बीच माफी की मांग तक पहुंच गया है। मीका सिंह अपने भाई पर नशे की हालत में कार्यक्रम करने का आरोप लगाए जाने से नाराज हैं। उन्होंने मंत्री से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की है। इस बीच उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मीका सिंह से फोन पर बातचीत की और कहा कि किसी भी तरह की गलतफहमी को आपसी संवाद और सौहार्द से दूर किया जाना चाहिए।

    यह विवाद नवरात्रि के दौरान मां कुंजापुरी से जुड़े एक धार्मिक आयोजन में दलेर मेहंदी की प्रस्तुति को लेकर सामने आया। मीका सिंह का कहना है कि उनके भाई ने कार्यक्रम में करीब एक घंटा 30 मिनट तक प्रस्तुति दी थी और वहां मौजूद कई लोग उनके साथ नाच रहे थे। इसके बावजूद दलेर मेहंदी पर नशे में कार्यक्रम करने का आरोप लगाया गया। मीका ने इस आरोप पर सवाल उठाते हुए कहा कि पूरे मामले को समझने के लिए कार्यक्रम का वीडियो देखा जाना चाहिए।

    मीका सिंह ने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री से मामले में कार्रवाई करने की मांग भी की थी। उनका कहना है कि कलाकारों की गरिमा का सम्मान किया जाना चाहिए और किसी पर आरोप लगाने से पहले तथ्यों को समझना जरूरी है। उन्होंने यह भी कहा कि वह उत्तराखंड आकर बिना किसी शुल्क के कार्यक्रम करने के लिए तैयार हैं, लेकिन इससे पहले मंत्री सुबोध उनियाल को दलेर मेहंदी से माफी मांगनी चाहिए।

    विवाद में उस समय नया मोड़ आया, जब भाजपा के प्रदेश सह मीडिया प्रभारी विनय गोयल ने इस मामले पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि वह दलेर मेहंदी के प्रशंसक हैं, लेकिन धार्मिक आयोजन में सामने आए दृश्य श्रद्धालुओं की भावनाओं को आहत करने वाले हो सकते हैं। उनके अनुसार, यदि दलेर मेहंदी की तबीयत ठीक नहीं थी, तो आयोजकों को इसकी जानकारी पहले ही दी जानी चाहिए थी। उन्होंने मां कुंजापुरी के सम्मान को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि इस मामले में समझौता नहीं किया जा सकता।

    विनय गोयल ने दलेर मेहंदी से माफी मांगने की बात कही। साथ ही मीका सिंह को चुनौती दी कि यदि वह अपने भाई के समर्थन में खड़े हैं, तो उत्तराखंड आकर निशुल्क कार्यक्रम करें। इस बयान के जवाब में मीका ने सोशल मीडिया पर लिखा कि वह उत्तराखंड में मुफ्त प्रस्तुति देने के लिए तैयार हैं, लेकिन पहले मंत्री को दलेर मेहंदी से माफी मांगनी चाहिए। उन्होंने वीडियो साझा करने की बात कहते हुए सवाल किया कि यदि वीडियो में मंत्री सुबोध उनियाल नशे की हालत में दिखाई दें, तो उनके खिलाफ क्या कार्रवाई की जाएगी। मीका ने यह भी पूछा कि क्या नियम और जवाबदेही सभी के लिए समान नहीं होने चाहिए।

    दूसरी ओर, सुबोध उनियाल इस मामले में अपने रुख पर कायम बताए गए हैं। उन्होंने दलेर मेहंदी पर लगाए गए आरोप के संदर्भ में सवाल उठाया कि उन्होंने किस तरह का नशा किया था और इसकी जांच के लिए चिकित्सकीय परीक्षण कराना जरूरी क्यों माना जाए। इस बयान के बाद दोनों पक्षों के बीच विवाद और चर्चा में आ गया है। हालांकि, आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि से संबंधित कोई जानकारी सामने नहीं आई है।

    मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस विवाद को शांत करने की कोशिश करते हुए मीका सिंह से फोन पर बात की। उन्होंने कहा कि दलेर मेहंदी से जुड़े विषय पर चर्चा के दौरान किसी भी प्रकार की गलतफहमी को आपसी बातचीत और सौहार्द के जरिए दूर किया जाना चाहिए। धामी ने उत्तराखंड की ‘अतिथि देवो भवः’ परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य में सभी कलाकारों का हमेशा स्वागत और सम्मान किया जाता है। फिलहाल, मीका सिंह मंत्री से माफी की मांग पर कायम हैं, जबकि मुख्यमंत्री ने विवाद को संवाद के माध्यम से सुलझाने पर जोर दिया है।

  • रिलीज से पहले सनी देओल की ‘सूर्या’ पर विवाद, डॉक्टरों की छवि और स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा को लेकर IMA ने उठाए सवाल

    रिलीज से पहले सनी देओल की ‘सूर्या’ पर विवाद, डॉक्टरों की छवि और स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा को लेकर IMA ने उठाए सवाल

    नई दिल्ली । अभिनेता सनी देओल की आगामी फिल्म ‘सूर्या – अंत से आरंभ तक’ रिलीज से पहले विवादों में आ गई है। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) ने फिल्म में डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों को जिस तरह दिखाए जाने की बात सामने आई है, उस पर गंभीर चिंता जताई है। संगठन का कहना है कि फिल्म की प्रचार सामग्री मेडिकल पेशे की छवि को प्रभावित कर सकती है। इस मामले में आईएमए ने केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव को पत्र लिखकर फिल्म के प्रचार से जुड़ी सामग्री की समीक्षा कराने की मांग की है।

    आईएमए के मुताबिक, फिल्म में चिकित्सा क्षेत्र में भ्रष्टाचार और स्वास्थ्यकर्मियों के खिलाफ हिंसा को जिस तरह प्रस्तुत किया गया है, उससे पूरे मेडिकल पेशे के प्रति लोगों के मन में नकारात्मक धारणा बन सकती है। संगठन को आशंका है कि ऐसी प्रस्तुति डॉक्टरों और अन्य स्वास्थ्यकर्मियों की प्रतिष्ठा, सुरक्षा तथा जनता के भरोसे पर असर डाल सकती है। इसी वजह से एसोसिएशन चाहता है कि फिल्म की रिलीज से पहले संबंधित सामग्री की निष्पक्ष समीक्षा की जाए।

    संगठन ने अपने पत्र में चार प्रमुख चिंताओं को सामने रखा है। पहली चिंता चिकित्सा पेशे को अनुचित रूप से बदनाम किए जाने और उसकी साख को नुकसान पहुंचने की है। दूसरी चिंता फिल्म में स्वास्थ्यकर्मियों के खिलाफ हिंसा दिखाए जाने से जुड़ी है। तीसरा मुद्दा डॉक्टरों और दूसरे स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा का है। वहीं, चौथी चिंता डॉक्टरों और मरीजों के बीच लंबे समय से बने भरोसे पर पड़ने वाले संभावित प्रभाव को लेकर है।

    आईएमए का कहना है कि यदि प्रचार सामग्री के जरिए भ्रष्टाचार को पूरे चिकित्सा क्षेत्र की सामान्य स्थिति के रूप में प्रस्तुत किया जाता है, तो इससे लोगों की धारणा प्रभावित हो सकती है। संगठन ने इस बात पर भी जोर दिया है कि स्वास्थ्यकर्मियों के प्रति हिंसा को दिखाने के संभावित प्रभावों पर ध्यान देना जरूरी है। उसके अनुसार, चिकित्सा सेवाओं से जुड़े लोगों की सुरक्षा और मरीजों का डॉक्टरों पर विश्वास स्वास्थ्य व्यवस्था के महत्वपूर्ण पहलू हैं।

    मेडिकल संगठन ने केंद्रीय मंत्री से आग्रह किया है कि फिल्म में डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों के चित्रण के साथ-साथ उसके प्रचार से जुड़ी सामग्री की निष्पक्ष जांच कराई जाए। आईएमए ने यह भी कहा है कि यदि समीक्षा के दौरान उसकी आशंकाएं सही पाई जाती हैं, तो फिल्म निर्माताओं से आवश्यक बदलाव कराने पर विचार किया जाना चाहिए। फिलहाल, उपलब्ध जानकारी के अनुसार, संगठन ने समीक्षा की मांग उठाई है। फिल्म में बदलाव को लेकर किसी अंतिम निर्णय की जानकारी सामने नहीं आई है।

    फिल्म का टीजर 19 अक्टूबर को सनी देओल के 69वें जन्मदिन के अवसर पर जारी किया गया था। इसमें अभिनेता एक पुलिस अधिकारी की भूमिका निभा रहे हैं। कहानी में उनकी जिंदगी बेटी की मौत के बाद बदल जाती है। इसके बाद वह मामले की जांच शुरू करते हैं और इस प्रक्रिया में चिकित्सा व्यवस्था से जुड़ी कथित गड़बड़ियों का पर्दाफाश करने की कोशिश करते हैं। कहानी का यही पहलू चिकित्सा पेशे के चित्रण को लेकर उठे विवाद के केंद्र में है।

    ‘सूर्या – अंत से आरंभ तक’ का निर्देशन एम. पद्मकुमार ने किया है। फिल्म का निर्माण दीपक मुकुत, हेमंत मुकुत और लोकेश मुकुत ने किया है। यह वर्ष 2018 में आई मलयालम क्राइम थ्रिलर ‘जोसेफ’ का हिंदी रूपांतरण है, जिसकी कहानी शाही कबीर ने लिखी थी। फिल्म को वास्तविक घटनाओं पर आधारित बताया जा रहा है। इसमें सनी देओल मुख्य भूमिका में नजर आएंगे। फिल्म की निर्धारित रिलीज तारीख 20 नवंबर 2026 है। अब देखना होगा कि आईएमए की मांग पर क्या कदम उठाए जाते हैं और विवाद का फिल्म की रिलीज से पहले क्या असर पड़ता है।

  • बिहार में वोटिंग से पहले हाई वोल्टेज ड्रामा…. RJD उम्मीदवार के घर पहुंची पुलिस

    बिहार में वोटिंग से पहले हाई वोल्टेज ड्रामा…. RJD उम्मीदवार के घर पहुंची पुलिस


    पटना।
    बिहार विधान परिषद (Bihar Legislative Council) की 8 सीटों के लिए आज (शुक्रवार 23 अक्टूबर) मतदान (Voting) हो रहा है. इससे पहले पटना में देर रात हाई वोल्टेज ड्रामा देखने को मिला. पटना शिक्षक निर्वाचन सीट (Patna Teachers’ Constituency Seat) से RJD उम्मीदवार डॉ. संजीव कुमार (RJD candidate Dr. Sanjeev Kumar) के घर पुलिस पहुंची. बताया जा रहा है कि पुलिस और प्रशासन को जानकारी मिली थी कि चुनाव को प्रभावित करने के लिए कुछ लोग RJD उम्मीदवार के घर पहुंचे हैं।

    हालांकि, RJD उम्मीदवार डॉ. संजीव कुमार ने अपने घर का गेट पुलिस के लिए नहीं खोला. इसके बाद देर रात उन्होंने मीडिया से बात की और प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए।

    इस घटनाक्रम को लेकर नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने भी सरकार पर निशाना साधा. तेजस्वी यादव ने सवाल उठाया कि आखिर बिना सर्च वारंट के पुलिस RJD उम्मीदवार के घर क्यों पहुंची थी? तेजस्वी यादव ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए कहा कि लालू प्रसाद यादव हों, तेजस्वी यादव हों या RJD के दूसरे नेता, वे डरने वाले नहीं हैं।


    8 बजे से शाम 4 बजे तक वोटिंग

    बिहार विधान परिषद की 8 सीटों के लिए आज सुबह 8 बजे से शाम 4 बजे तक मतदान हो रहा है. इन सीटों के लिए कुल 933 मतदान केंद्र बनाए गए हैं. चुनाव में 5,32,847 मतदाता अपने मताधिकार का इस्तेमाल करेंगे. इनमें 3,86,199 पुरुष, 1,46,611 महिला और 37 तृतीय लिंग के मतदाता शामिल हैं।

    स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों की इन 8 सीटों पर कुल 150 प्रत्याशी मैदान में हैं. इनमें स्नातक सीटों पर 90 और शिक्षक सीटों पर 60 उम्मीदवारों के बीच मुकाबला है. पटना में सभी मतदान केंद्रों पर मतदान की तैयारी पूरी कर ली गई थी।

  • 2014 में ही एआर रहमान को मिला था रामायण से जुड़ने का संकेत, यश ने भी सुनाया संगीत से जुड़ा खास किस्सा

    2014 में ही एआर रहमान को मिला था रामायण से जुड़ने का संकेत, यश ने भी सुनाया संगीत से जुड़ा खास किस्सा

    नई दिल्ली । संगीतकार एआर रहमान ने फिल्म रामायण से अपने जुड़ाव की एक दिलचस्प कहानी साझा की है। उन्होंने बताया कि करीब एक दशक पहले, वर्ष 2014 में सतीश नाम के एक व्यक्ति ने उन्हें ईमेल भेजकर एक सपना बताया था। उस व्यक्ति का दावा था कि उसने सपने में रहमान को महाकाव्य रामायण के लिए संगीत तैयार करते हुए देखा है। अब रहमान इस महाकाव्य पर आधारित फिल्म के संगीत से जुड़े हैं। ऐसे में वर्षों पहले मिला वह संदेश एक बार फिर चर्चा का विषय बन गया है।

    21 अक्टूबर को चेन्नई में आयोजित फिल्म के एल्बम लॉन्च कार्यक्रम के दौरान रहमान ने इस पुराने ईमेल का जिक्र किया। उन्होंने दर्शकों को बताया कि सतीश नाम के व्यक्ति ने उनसे संपर्क कर अपने सपने के बारे में लिखा था। रहमान ने उस संदेश को साझा करते हुए कहा कि वर्ष 2014 में उस व्यक्ति ने उनसे कहा था कि वह रामायण के लिए संगीत तैयार करेंगे।

    ईमेल में सतीश ने लिखा था कि रहमान उन्हें सुबह-सुबह सपने में दिखाई दिए थे। उन्हें विश्वास था कि उनका सपना सच होगा। संदेश में यह भी कहा गया था कि रहमान भारत और दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में संगीत कार्यक्रम कर रहे हैं, जिनमें महान महाकाव्य रामायण को प्रस्तुत किया जा रहा है। उस समय भेजे गए इस संदेश में व्यक्त की गई कल्पना अब फिल्म के साथ रहमान के जुड़ने के संदर्भ में खास लग रही है।

    रामायण पर आधारित यह फिल्म दो भागों में बनाई जा रही एक लाइव-एक्शन परियोजना है। इसका नाम रामायण: राइज ऑफ ए लीजेंड बताया गया है। फिल्म में एआर रहमान ऑस्कर विजेता संगीतकार हंस जिमर के साथ मिलकर संगीत तैयार कर रहे हैं। हंस जिमर हॉलीवुड की कई बड़ी फिल्मों के संगीत के लिए पहचाने जाते हैं। दोनों संगीतकारों के साथ आने से फिल्म के संगीत को लेकर भी दर्शकों की दिलचस्पी बढ़ी है।

    कार्यक्रम में फिल्म में रावण की भूमिका निभा रहे अभिनेता यश भी मौजूद थे। उन्होंने एआर रहमान के प्रति अपना सम्मान व्यक्त करते हुए बताया कि उनके संगीत ने तमिल भाषा सीखने में मदद की। यश ने कहा कि वह रहमान के बहुत बड़े प्रशंसक हैं और उनकी फिल्म जेंटलमैन के गानों पर नृत्य किया करते थे। उन्होंने तमिल फिल्म उद्योग में रहमान के योगदान को भी महत्वपूर्ण बताया।

    यश ने कहा कि जब वह तमिल गानों को हिंदी में सुनते हैं, तो उन्हें लगता है कि उनमें कुछ कमी रह जाती है। उन्होंने खुशी जताई कि रहमान रामायण के लिए संगीत तैयार कर रहे हैं और उन्हें इस फिल्म में उनके संगीत पर अभिनय करने का अवसर मिला है।

    अभिनेता ने रावण का किरदार निभाने को लेकर भी अपनी बात रखी। उनके अनुसार, कई लोगों ने उनसे पूछा कि वह रावण की भूमिका क्यों निभाना चाहते हैं, जबकि इस पात्र को आमतौर पर नकारात्मक रूप में देखा जाता है। यश ने कहा कि कलाकार अलग-अलग किरदार निभाते हैं और हर किरदार में एक अलग तरह की ऊर्जा होती है। उन्होंने बताया कि रावण की भूमिका निभाते समय उन्होंने शिव जी का शिव तांडव गीत सुना, जिससे उन्हें ऊर्जा मिली। उन्होंने इस गीत के लिए रहमान का आभार भी जताया और कहा कि वह पहले भी शिव जी के कई गीत सुनते थे।

    फिल्म में भगवान राम की भूमिका रणबीर कपूर, सीता की भूमिका साई पल्लवी, रावण की भूमिका यश, हनुमान की भूमिका सनी देओल और लक्ष्मण की भूमिका रवि दुबे निभा रहे हैं। इनके अलावा अरुण गोविल, लारा दत्ता, रकुल प्रीत सिंह, विवेक ओबेरॉय, कुणाल कपूर और काजल अग्रवाल भी फिल्म का हिस्सा हैं। फिल्म की निर्धारित रिलीज तारीख 5 नवंबर 2026 रखी गई है, जो दिवाली के अवसर पर पड़ती है।

  • मेघालय: MDA गठबंधन में पहले दूसरी बड़ी पार्टी थी UDP… अब बचा मात्र एक विधायक

    मेघालय: MDA गठबंधन में पहले दूसरी बड़ी पार्टी थी UDP… अब बचा मात्र एक विधायक


    नई दिल्ली।
    भारत (India) के पूर्वोत्तर राज्य मेघालय (Northeastern State Meghalaya) में MDA गठबंधन की सरकार है, जिसने राज्य की 60 में से 51 सीटों को अपने नाम किया है। खास बात है कि इसी गठबंधन में भारतीय जनता पार्टी (Bharatiya Janata Party) और UDP यूनाइटेड डेमोक्रेटिक पार्टी भी है। राजनीतिक उठा पटक ऐसी हुई कि UDP जो गठबंधन की दूसरी सबसे बड़ी पार्टी थी, अब घटकर महज 1 विधायक पर आ गई है। वहीं, भाजपा बढ़कर दहाई के आंकड़े पर आ गई है। विस्तार से समझते हैं।

    एक गठबंधन है MDA, जिसकी अगुवाई नेशनल पीपुल्स पार्टी कर रही है। राज्य में एनपीपी के पास कुल 33 विधायक हैं। वहीं, पाला बदलने से पहले यूडीपी के पास सदस्यों की संख्या 12 पर थी। जबकि, भाजपा 2 सदस्यों के साथ थी। अब यूडीपी के 8 विधायक भाजपा में जा चुके हैं, जबकि 3 अन्य एनपीपी में विलय की कोशिशों में लगे हुए हैं।


    भाजपा में गए ये 8 विधायक

    आठ विधायकों में लखमेन रिम्बुई, पियस मारवेन, किरमेन श्यल्ला, मायरालबॉर्न सिएम, मैथ्यू बियॉन्डस्टार कुर्बाह, ओलन सिंह सुइन, बालाजीद कुपार सिनरेम और सिनशर कुपार रॉय लिंगदोह थाबाह शामिल हैं। इसके साथ ही भाजपा के विधायकों की संख्या 10 पर पहुंच गई थी। ये नेता 23 सितंबर को भाजपा में शामिल हुए थे और दो दिन बाद ही मेघालय विधानसभा को विलय के बारे में जानकारी दी थी। हाल ही में इस विलय को मान्यता दे दी गई है।


    NPP में जाने की कोशिश में तीन विधायक

    इसके साथ ही यूडीपी के पास महज 4 विधायक बचे थे, जिनमें से तीन एनपीपी में जा रहे हैं। खास बात है कि इसके बाद राज्य में यूडीपी के पास पार्टी अध्यक्ष मेतबाह लिंगदोह के रूप में एक ही विधायक रह जाएंगे, जो राज्य सरकार में मंत्री हैं। राज्य के मुख्यमंत्री कोनराड सांगमा हैं। उनकी पार्टी के विधायकों की संख्या 33 से बढ़कर 36 हो जाएगी।


    क्यों बदल रहे हैं पाला

    विधायक किरमिन शायला ने कहा, ‘हमारी पांच बड़ी मांगें हैं, जैसे राज्य में कोयला निकालना और MRSSA कानून। केंद्र की सत्ता में बैठी भाजपा जैसी पार्टी इन बातों को सुलझा सकती है। उन्होंने हमें पक्का भरोसा दिया है कि इन मांगों को पूरा किया जाएगा, इसलिए हमने भाजपा में शामिल होने का फैसला लिया है।’

    उन्होंने कहा, ‘भाजपा लंबे समय से राज्य विधानसभा में दो अंकों की संख्या में अपनी मौजूदगी चाहती थी। अब जब बीजेपी के पास 10 विधायक हैं, तो इससे न केवल पार्टी को बल्कि आम जनता को भी फायदा होगा। आखिरकार लोग काम होते देखना चाहते हैं और अगर भाजपा इसे पूरा कर पाती है, तो लोग पार्टी को और मौके देंगे।’

    भाजपा प्रवक्ता एम खारक्रांग ने कहा, ‘पार्टी जो भी हो। राज्य का विकास प्राथमिकता है। समय गुजरने के साथ उन्हें लगा कि मुश्किल से कोई नतीजे मिल रहे हैं और राज्य के लिए काम करना मुश्किल हो रहा है। इसलिए उन्होंने ऐसी पार्टी चुनी, जो केंद्र में भी है। वो लोगों के लिए और भी अच्छे से काम कर सकेंगे।’


    NPP में जाने वाले क्या बोले

    पश्चिम शिलॉन्ग से विधायक पॉल लिंगदोह एनपीपी में जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि यूडीपी में संगठन स्तर पर समस्याएं हैं। उन्होंने कहा, ‘मेघालय पर इसका अच्छा असर होगा। खंडित जनादेश के कारण राज्य को कई बार नुकसान उठाना पड़ा है, जिससे अस्थिरता आई और बार बार सत्ता परिवर्तन हुआ। अब जब हमने एकजुटता बना ली है, तो हालात काफी बेहतर हो जाएंगे।’


    UDP ने पार्टी से निकाला

    लिंगदोह ने वेस्ट शिलांग के विधायक पॉल लिंगदोह, मावकिरवाट के विधायक रेनिक्टन लिंगदोह टोंगखर और मूकाइआव के विधायक नुजोर्की सुंगोह की पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी। पार्टी ने एक बयान में कहा, ‘आज स्थानीय समाचारों से यह स्पष्ट है कि आप सभी नेशनल पीपुल्स पार्टी में शामिल होने जा रहे हैं। इसलिए यूनाइटेड डेमोक्रेटिक पार्टी के अध्यक्ष के रूप में मुझे प्राप्त अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए मैं आप तीनों को आज, 19 अक्टूबर 2026 से पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से निष्कासित करता हूं।’

  • कच्चे तेल की कीमतों में तूफानी तेजी, सऊदी अरब के तेल ठिकानों पर हमलों से बढ़ी चिंता, पेट्रोल-डीजल पर मंडराया महंगाई का खतरा

    कच्चे तेल की कीमतों में तूफानी तेजी, सऊदी अरब के तेल ठिकानों पर हमलों से बढ़ी चिंता, पेट्रोल-डीजल पर मंडराया महंगाई का खतरा


    नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल ने भारत समेत दुनिया के कई तेल आयातक देशों की चिंता बढ़ा दी है। सऊदी अरब पर हमलों और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण वैश्विक स्तर पर तेल की आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका गहरा गई है। गुरुवार को अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड 113 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया जबकि अमेरिकी कच्चा तेल डब्ल्यूटीआई करीब 99 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करता रहा। तेल की कीमतों में आई इस तेजी का असर आने वाले दिनों में पेट्रोल डीजल की कीमतों और महंगाई पर पड़ सकता है। हालांकि घरेलू बाजार में ईंधन के दाम बढ़ेंगे या नहीं इसका फैसला तेल कंपनियों और सरकार की नीतियों समेत कई कारकों पर निर्भर करेगा।

    कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के पीछे पश्चिम एशिया में बढ़ता सैन्य तनाव प्रमुख वजह माना जा रहा है। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक ईरान समर्थित हूती लड़ाकों ने सऊदी अरब के लाल सागर स्थित यनबू बंदरगाह के अलावा एक तेल क्षेत्र और हवाई अड्डे पर हमलों का दावा किया है। इन घटनाओं ने तेल उत्पादन और निर्यात से जुड़े बुनियादी ढांचे की सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं। सऊदी अरब वैश्विक तेल आपूर्ति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। ऐसे में उसके तेल ठिकानों या निर्यात केंद्रों पर किसी बड़े हमले से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है।

    इस साल अमेरिका और ईरान के बीच जारी संघर्ष के कारण ब्रेंट क्रूड की कीमतों में 85 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी होने की बात रिपोर्ट में कही गई है। डीजल जैसे तैयार पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में भी भारी तेजी दर्ज की गई है। इसके अलावा होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास तनाव ने बाजार की चिंता बढ़ा दी है। यह समुद्री मार्ग दुनिया के लिए तेल और गैस की आपूर्ति का अहम रास्ता है। यहां जहाजों की आवाजाही बाधित होने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में ईंधन की उपलब्धता और कीमतों पर व्यापक असर पड़ सकता है।

    कच्चे तेल की महंगाई का भारत पर सीधा असर पड़ने की आशंका इसलिए भी अधिक है क्योंकि देश अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होने पर भारत का आयात बिल बढ़ता है और इससे विदेशी मुद्रा पर दबाव पड़ सकता है। परिवहन और माल ढुलाई की लागत बढ़ने से खाद्य पदार्थों समेत दूसरी वस्तुओं की कीमतों पर भी असर पड़ने की आशंका रहती है। रिपोर्ट के मुताबिक कच्चे तेल के प्रति बैरल भाव में 10 डॉलर की बढ़ोतरी से तेल कंपनियों को करीब छह रुपये प्रति लीटर के बराबर लागत का दबाव पड़ सकता है। हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि पेट्रोल और डीजल के खुदरा दाम भी स्वतः छह रुपये बढ़ जाएंगे।

    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार को व्हाइट हाउस में बातचीत के दौरान दावा किया कि अमेरिका ने ईरान को काफी कमजोर कर दिया है। उन्होंने आगे भी कार्रवाई के संकेत दिए। इस बीच फारस की खाड़ी से कच्चे तेल की आवाजाही में कुछ सुधार के बावजूद पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति सीमित रहने की खबरें सामने आई हैं। रूस की रिफाइनरियों पर यूक्रेन के हमलों ने भी ईंधन बाजार पर दबाव बढ़ाया है। स्थिति से निपटने के लिए कुछ सरकारें अपने रणनीतिक भंडार से ईंधन जारी कर रही हैं।

    कुल मिलाकर कच्चे तेल की कीमतों में आगे की चाल पश्चिम एशिया में संघर्ष की स्थिति सऊदी अरब के तेल प्रतिष्ठानों की सुरक्षा और प्रमुख समुद्री मार्गों से आपूर्ति सामान्य रहने पर निर्भर करेगी। भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों को लेकर फिलहाल किसी निश्चित बढ़ोतरी का निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी लेकिन लंबे समय तक तेल महंगा बना रहा तो देश की अर्थव्यवस्था और आम उपभोक्ताओं के बजट पर दबाव बढ़ सकता है।