Author: bharati

  • किस लाइन से शुरू हुआ दिल्ली मेट्रो का सफर? यहां जानें पूरी जानकारी

    किस लाइन से शुरू हुआ दिल्ली मेट्रो का सफर? यहां जानें पूरी जानकारी


    नई दिल्ली । दिल्ली की लाइफलाइन बन चुकी Delhi Metro आज देश की सबसे व्यस्त और आधुनिक मेट्रो सेवाओं में से एक है। रोजाना लाखों यात्री इस नेटवर्क का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि इसकी शुरुआत कब और कैसे हुई।

    भारत में मेट्रो सेवा सबसे पहले कोलकाता में शुरू हुई थी, लेकिन दिल्ली मेट्रो का औपचारिक संचालन 2002 में शुरू हुआ। इसी के साथ राजधानी में एक नए और तेज़ सार्वजनिक परिवहन युग की शुरुआत हुई।

    दिल्ली मेट्रो की सबसे पुरानी लाइन Red Line (Delhi Metro) है। इसकी शुरुआत 24 दिसंबर 2002 को रिठाला से तीस हजारी के बीच हुई थी। यह लाइन दिल्ली मेट्रो नेटवर्क की पहली कड़ी थी, जिसने राजधानी के परिवहन ढांचे को पूरी तरह बदल दिया। बाद में इसका विस्तार कई रूट्स तक किया गया और आज यह कई महत्वपूर्ण इलाकों को जोड़ती है।

    वहीं, दिल्ली मेट्रो की सबसे लंबी लाइन फिलहाल Pink Line (Delhi Metro) मानी जाती है। यह लगभग 71.5 किलोमीटर लंबी है और इसमें 46 स्टेशन शामिल हैं। इस लाइन की सबसे खास बात यह है कि यह दिल्ली मेट्रो के कई अन्य कॉरिडोर से जुड़ी हुई है, जिससे यात्रियों को आसानी से इंटरचेंज की सुविधा मिलती है।

    पिंक लाइन से जुड़ी कई दिलचस्प बातें भी हैं। इसी लाइन पर दिल्ली मेट्रो का सबसे ऊंचा स्टेशन धौला कुआं स्थित है, जो लगभग 23.6 मीटर ऊंचा है। वहीं, आश्रम स्टेशन को नेटवर्क के सबसे छोटे स्टेशनों में से एक माना जाता है।

    भविष्य की बात करें तो Magenta Line (Delhi Metro) के विस्तार के बाद यह दिल्ली मेट्रो की सबसे लंबी लाइन बन सकती है। अनुमान है कि इसका विस्तार लगभग 89 किलोमीटर तक हो जाएगा, जिससे यह नेटवर्क का सबसे बड़ा कॉरिडोर बन सकता है।

    लगातार बढ़ता हुआ यह मेट्रो नेटवर्क दिल्ली को न सिर्फ तेज और सुविधाजनक परिवहन दे रहा है, बल्कि ट्रैफिक और प्रदूषण जैसी समस्याओं को कम करने में भी अहम भूमिका निभा रहा है।

  • थोड़ा रेशम लगता है गाने की धुन चुराना हॉलीवुड कंपनी को पड़ा था भारी, बप्पी दा ने कॉपीराइट केस में दी थी मात

    थोड़ा रेशम लगता है गाने की धुन चुराना हॉलीवुड कंपनी को पड़ा था भारी, बप्पी दा ने कॉपीराइट केस में दी थी मात

    नई दिल्ली । भारतीय संगीत जगत में डिस्को किंग के नाम से मशहूर दिवंगत संगीतकार बप्पी लहरी न केवल अपनी अनूठी धुनों और सोने के गहनों के शौक के लिए जाने जाते थे, बल्कि वे अपने काम के प्रति बेहद सजग भी थे। साठ और सत्तर के दशक से लेकर आज तक बॉलीवुड के कई गानों पर विदेशी धुनों की नकल करने के आरोप लगते रहे हैं, लेकिन इतिहास में एक ऐसा अनोखा वाकया भी दर्ज है जब हॉलीवुड के एक बड़े संगीतकार ने बॉलीवुड के गाने की धुन चुराई थी। इस चोरी पर बप्पी लहरी ने कड़ा रुख अपनाते हुए अमेरिकी अदालत का दरवाजा खटखटाया और न केवल यह ऐतिहासिक कानूनी लड़ाई जीती, बल्कि विदेशी कंपनी को भारी-भरकम हर्जाना देने पर भी मजबूर कर दिया था। यह पूरा मामला भारतीय सिनेमा के संगीत इतिहास में कॉपीराइट उल्लंघन के खिलाफ सबसे बड़ी जीतों में से एक माना जाता है।

    इस विवाद की जड़ें साल 1981 में आई बॉलीवुड फिल्म ‘ज्योति’ से जुड़ी हुई हैं। इस फिल्म के लिए बप्पी लहरी ने एक बेहद खूबसूरत और थिरकने पर मजबूर कर देने वाला गाना तैयार किया था, जिसके बोल थे ‘थोड़ा रेशम लगता है’। इस गाने को स्वर कोकिला दिवंगत लता मंगेशकर ने अपनी जादुई आवाज से सजाया था और रिलीज के बाद यह गाना देश के कोने-कोने में गूंजने लगा था। सब कुछ सामान्य चल रहा था और लोग इस गाने को पसंद कर रहे थे, लेकिन इस गाने के रिलीज होने के ठीक 21 साल बाद, यानी साल 2002 में अमेरिकी हिप-हॉप आर्टिस्ट ‘ट्रुथ हर्ट्स’ का एक नया गाना रिलीज हुआ जिसका टाइटल ‘एडिक्टिव’ था। जब भारतीय संगीत प्रेमियों ने इस अमेरिकी गाने को सुना, तो वे दंग रह गए क्योंकि इस गाने की पूरी शुरुआत और बैकग्राउंड म्यूजिक हूबहू लता मंगेशकर के उसी पुराने गाने से लिया गया था।

    जैसे ही यह बात बप्पी लहरी के संज्ञान में आई, उन्होंने तुरंत उस अमेरिकी गाने को पूरा सुना और म्यूजिक लेबल ‘सारेगामा’ के साथ मिलकर अमेरिकी अदालत में कानूनी कार्रवाई करने का फैसला किया। बप्पी दा ने ‘एडिक्टिव’ गाने के मशहूर अमेरिकी प्रोड्यूसर डॉ. ड्रे के खिलाफ कॉपीराइट उल्लंघन का मुकदमा दायर कर दिया। अदालत की कार्यवाही के दौरान अमेरिकी मेकर्स ने बचाव में यह अजीब तर्क दिया कि उन्होंने यह धुन एक विदेशी रेडियो स्टेशन पर बजते हुए सुनी थी और उन्हें इस बात की बिल्कुल जानकारी नहीं थी कि इसके वास्तविक कॉपीराइट्स किसके पास सुरक्षित हैं। हालांकि, बप्पी दा और सारेगामा की लीगल टीम ने अदालत के सामने पुख्ता सबूत पेश किए कि यह धुन पूरी तरह से भारतीय संगीतकार की मूल रचना है।

    बप्पी दा और डॉ. ड्रे के बीच यह कानूनी लड़ाई काफी समय तक अमेरिकी कोर्ट में चलती रही और अंततः अदालत ने भारतीय संगीतकार के पक्ष में फैसला सुनाया। कोर्ट ने अपने कड़े आदेश में कहा कि जब तक इस अमेरिकी गाने में बप्पी लहरी और सारेगामा को आधिकारिक तौर पर क्रेडिट नहीं दिया जाता, तब तक ‘एडिक्टिव’ गाने की सीडी और पूरे एल्बम की बिक्री पर तुरंत प्रभाव से रोक लगी रहेगी। इसके साथ ही, अदालत ने हॉलीवुड की संबंधित म्यूजिक कंपनी पर बड़ा जुर्माना लगाया, जिसके तहत हर्जाना और रॉयल्टी मिलाकर उन्हें 500 मिलियन डॉलर यानी करीब 4,744 करोड़ रुपये देने का ऐतिहासिक आदेश जारी किया गया।

    इस कानूनी जीत ने दुनिया भर में भारतीय संगीत की ताकत और उसके कानूनी अधिकारों का लोहा मनवाया। जिस फिल्म ‘ज्योति’ के गाने पर यह पूरा विवाद हुआ था, वह फिल्म भी जितेंद्र के डबल रोल, हेमा मालिनी, अशोक कुमार, शशिकला और अजीत जैसे दिग्गज कलाकारों के अभिनय और बेहतरीन गानों की वजह से बॉक्स ऑफिस पर काफी सफल रही थी। भारतीय संगीत को वैश्विक स्तर पर सम्मान दिलाने वाले बप्पी लहरी भले ही लंबे समय तक बीमार रहने और स्लीप एपनिया के कारण 15 फरवरी 2022 को इस दुनिया को अलविदा कह गए, लेकिन हॉलीवुड के खिलाफ दर्ज कराई गई उनकी यह ऐतिहासिक जीत हमेशा संगीत जगत की आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी।

  • कृति सेनन का ग्लैमरस अवतार बना चर्चा का विषय, ‘Cocktail 2’ को लेकर बढ़ा उत्साह

    कृति सेनन का ग्लैमरस अवतार बना चर्चा का विषय, ‘Cocktail 2’ को लेकर बढ़ा उत्साह


    नई दिल्ली । बॉलीवुड अभिनेत्री Kriti Sanon एक बार फिर अपने स्टाइल और ग्लैमर को लेकर सुर्खियों में हैं। हाल ही में उनका नया समर-रेडी लुक सामने आया है, जिसमें वे एडन एम्बेलिश्ड आउटफिट में बेहद आकर्षक नजर आईं। उनके इस ग्लिट्ज और ग्रेस से भरपूर अंदाज ने सोशल मीडिया पर फैंस का ध्यान खींच लिया है।

    कृति सेनन अपनी सादगी, कॉन्फिडेंस और फैशन सेंस के लिए जानी जाती हैं, और इस बार भी उन्होंने अपने लुक से एक बार फिर साबित कर दिया कि वे बॉलीवुड की सबसे स्टाइलिश अभिनेत्रियों में से एक क्यों मानी जाती हैं। उनका यह नया अवतार तेजी से वायरल हो रहा है और फैंस लगातार उनकी तारीफ कर रहे हैं।

    इसके साथ ही उनकी आगामी फिल्म Cocktail 2 को लेकर भी दर्शकों में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है। माना जा रहा है कि इस फिल्म में कृति सेनन एक नए और दिलचस्प किरदार में नजर आ सकती हैं, जिसे लेकर फैंस लंबे समय से इंतजार कर रहे हैं।

    सोशल मीडिया पर वायरल हो रही तस्वीरों में कृति का स्टाइलिश और एलिगेंट अंदाज साफ झलक रहा है। उनका यह लुक समर फैशन के लिए भी ट्रेंड सेट करता नजर आ रहा है। वहीं, फिल्म ‘Cocktail 2’ को लेकर बढ़ती चर्चा ने उनके फैनबेस में उत्साह और बढ़ा दिया है।

    कुल मिलाकर, कृति सेनन का यह नया लुक और उनकी आने वाली फिल्म दोनों ही एंटरटेनमेंट और फैशन वर्ल्ड में चर्चा का बड़ा विषय बने हुए हैं।

  • प्रेग्नेंसी के ग्लो से लेकर डिलीवरी के बाद मोटापे के तानों तक, कियारा आडवाणी ने बयां किया मां बनने का दर्द

    प्रेग्नेंसी के ग्लो से लेकर डिलीवरी के बाद मोटापे के तानों तक, कियारा आडवाणी ने बयां किया मां बनने का दर्द

    नई दिल्ली । बॉलीवुड की अग्रणी अभिनेत्रियों में शुमार कियारा आडवाणी ने मातृत्व और उसके बाद समाज में महिलाओं के प्रति बदलने वाले दृष्टिकोण पर बेहद संजीदगी से अपनी बात रखी है। एक हालिया इंटरव्यू में उन्होंने मां बनने के बाद महिलाओं के सामने आने वाली व्यावहारिक और मानसिक चुनौतियों पर खुलकर चर्चा की। कियारा ने इस बात पर गहरी चिंता व्यक्त की कि कैसे बच्चा होने के बाद समाज महिलाओं को लेकर बेहद आत्मकेंद्रित और जजमेंटल हो जाता है। उन्होंने कहा कि मां बनने के इस खूबसूरत लेकिन कठिन सफर के बाद वे दुनिया को और भी बेहतर और परिपक्व तरीके से समझने लगी हैं, जिसका सकारात्मक असर उनके अभिनय पर भी दिखेगा। अभिनेत्री के अनुसार, अब जो भी फिल्म निर्देशक उनके साथ काम करेंगे, उन्हें उनके अभिनय का एक बिल्कुल नया, गहरा और सबसे बेहतरीन वर्जन देखने को मिलेगा।

    कियारा आडवाणी ने बॉम्बे टाइम्स को दिए अपने विशेष इंटरव्यू में गर्भावस्था के दौरान और बच्चे के जन्म के बाद महिलाओं के प्रति लोगों के बदलते व्यवहार के दोहरे मापदंडों को उजागर किया। उन्होंने कहा कि जब कोई महिला गर्भवती होती है, तब हर कोई उसकी तारीफ करता है। लोग उसके चेहरे की चमक और खूबसूरती की सराहना करते हुए उसे पलकों पर बिठाकर रखते हैं। समाज का रवैया उस समय ऐसा होता है जैसे वे किसी देवी की तरह उस महिला का सम्मान कर रहे हों। लेकिन जैसे ही वह महिला बच्चे को जन्म देती है, अचानक लोगों की सोच और नजरिया पूरी तरह बदल जाता है। लोग उसके मातृत्व की सराहना करने के बजाय उसके शारीरिक बदलावों पर टिप्पणियां करना शुरू कर देते हैं, जिससे महिलाओं को काफी मानसिक तनाव का सामना करना पड़ता है।

    अभिनेत्री ने समाज की इस कड़वी सच्चाई को बयां करते हुए कहा कि बच्चे के जन्म के तुरंत बाद लोग महिला के चेहरे की चमक को भूलकर उसके बढ़े हुए वजन यानी मोटापे पर ध्यान केंद्रित करने लगते हैं। समाज में यह उम्मीद की जाने लगती है कि मां बनने के तुरंत बाद वह महिला बिल्कुल फिट दिखने लगे और बिना समय लिए अपने पुराने रूटीन में वापस लौट आए। कियारा ने स्पष्ट किया कि असल में एक महिला के जीवन का सबसे कठिन और चुनौतीपूर्ण समय बच्चे के जन्म के बाद ही शुरू होता है, क्योंकि इसी नाजुक दौर में उसे सबसे ज्यादा पारिवारिक और सामाजिक सहयोग की आवश्यकता होती है। यह वह समय होता है जब महिला को शारीरिक और मानसिक दोनों स्तरों पर सबसे ज्यादा सहारा चाहिए होता है।

    अपनी बात को और अधिक सरल ढंग से समझाते हुए कियारा आडवाणी ने एक पुरानी कहावत का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि जैसे अक्सर कहा जाता है कि एक बच्चे की सही परवरिश करने के लिए पूरे गांव के सहारे की जरूरत होती है, ठीक उसी तरह एक नई मां को संभालने और मानसिक रूप से मजबूत बनाए रखने के लिए भी पूरे परिवार और समाज के सहयोग की जरूरत होती है। प्रसव के बाद का समय वह होता है जब आपको उस महिला का सबसे ज्यादा ख्याल रखना चाहिए, क्योंकि वह एक साथ दो मोर्चों पर जूझ रही होती है। वह अपने शरीर में होने वाले हार्मोनल और शारीरिक बदलावों का सामना करने के साथ-साथ एक मां के रूप में अपनी बिल्कुल नई भूमिका और जिम्मेदारियों में खुद को ढालने की कोशिश कर रही होती है।

    गौरतलब है कि कियारा आडवाणी ने साल 2023 में अभिनेता सिद्धार्थ मल्होत्रा के साथ सात फेरे लिए थे और शादी के दो साल बाद यानी 15 जुलाई, 2025 को उन्होंने अपनी बेटी सारायाह का दुनिया में स्वागत किया था। अपनी व्यक्तिगत जिंदगी के इस खूबसूरत अनुभव को जीने के बाद वे दोबारा काम पर लौटने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। आने वाले समय में कियारा सुपरस्टार यश की बहुप्रतीक्षित और पैन इंडिया स्तर पर बनने वाली एक्शन फिल्म ‘टॉक्सिक’ में एक बेहद अहम भूमिका निभाती हुई नजर आएंगी। हालांकि इस बड़ी फिल्म की रिलीज डेट के बारे में मेकर्स ने अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है, लेकिन फैंस बड़े पर्दे पर कियारा के इस नए अवतार को देखने का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।

    कियारा आडवाणी के इस बेबाक और संवेदनशील इंटरव्यू ने मनोरंजन जगत के साथ-साथ आम समाज में भी एक नई बहस को जन्म दे दिया है। मातृत्व के बाद महिलाओं पर होने वाली बॉडी शेमिंग और अवास्तविक फिटनेस उम्मीदों के खिलाफ उठाई गई उनकी यह आवाज निश्चित रूप से समाज को इस विषय पर दोबारा सोचने और नई माताओं के प्रति अधिक संवेदनशील बनने के लिए प्रेरित करेगी।

  • पेट्रोल की कीमतों का रहस्य: अंतरराष्ट्रीय गिरावट का फायदा क्यों नहीं मिल रहा?

    पेट्रोल की कीमतों का रहस्य: अंतरराष्ट्रीय गिरावट का फायदा क्यों नहीं मिल रहा?


    नई दिल्ली । दुनिया भर के बाजारों में कच्चे तेल यानी क्रूड ऑयल की कीमतों में गिरावट देखी जा रही है, लेकिन इसका फायदा भारतीय उपभोक्ताओं को तुरंत नहीं मिल रहा है। यही कारण है कि आम लोगों के मन में सवाल उठ रहा है कि जब ब्रेंट क्रूड सस्ता हो रहा है तो देश में पेट्रोल और डीजल महंगा क्यों हो रहा है।

    दरअसल, अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड ऑयल 98 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ चुका है, जिससे यह उम्मीद थी कि भारत में ईंधन सस्ता होगा। लेकिन इसके उलट हाल के हफ्तों में पेट्रोल और डीजल के दामों में कई बार बढ़ोतरी देखने को मिली है। रिपोर्ट्स के अनुसार, पिछले कुछ दिनों में पेट्रोल की कीमत में प्रति लीटर कई रुपये की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

    इस स्थिति की एक बड़ी वजह तेल कंपनियों की मूल्य नीति और उनका वित्तीय संतुलन है। भारत की प्रमुख तेल कंपनियां जैसे Indian Oil Corporation, Bharat Petroleum Corporation Limited और Hindustan Petroleum Corporation Limited पहले वैश्विक बाजार में तेल महंगा होने के बावजूद कीमतें तुरंत नहीं बढ़ा पाईं थीं। उस समय कंपनियों ने उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए खुद घाटा सहा था। अब माना जा रहा है कि वे उसी पुराने नुकसान की भरपाई कर रही हैं।

    इसके अलावा भारत की तेल आयात पर भारी निर्भरता भी कीमतों को प्रभावित करती है। देश अपनी जरूरत का लगभग 85 से 90 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है, जिससे वैश्विक बाजार में मामूली उतार-चढ़ाव भी घरेलू कीमतों पर सीधा असर डालता है।

    एक और अहम कारण है डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी। भारत कच्चे तेल का भुगतान अमेरिकी डॉलर में करता है, इसलिए जब रुपया कमजोर होता है तो आयात महंगा हो जाता है। इसका असर सीधे पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर पड़ता है, भले ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल सस्ता क्यों न हो रहा हो।

    कीमतों में टैक्स का भी बड़ा योगदान होता है। पेट्रोल और डीजल के दाम सिर्फ कच्चे तेल पर निर्भर नहीं करते, बल्कि इसमें केंद्र और राज्य सरकारों के एक्साइज ड्यूटी और वैट जैसे टैक्स भी शामिल होते हैं। यही टैक्स अंतिम उपभोक्ता तक पहुंचने वाली कीमत को काफी बढ़ा देते हैं।

    इसके अलावा ट्रांसपोर्टेशन खर्च, डीलर कमीशन और लॉजिस्टिक्स लागत भी अंतिम कीमत में जुड़ते हैं। इन सभी कारकों के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में गिरावट का असर तुरंत भारतीय बाजार में नहीं दिखता।

    विशेषज्ञों के अनुसार, जब तक वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें और नीचे नहीं आतीं, रुपया मजबूत नहीं होता और टैक्स संरचना में राहत नहीं मिलती, तब तक पेट्रोल-डीजल के दामों में बड़ी कमी की उम्मीद करना मुश्किल है।

  • शाहरुख खान से लेकर अक्षय कुमार तक, जब भारतीय सिनेमा के इन दिग्गज कलाकारों ने बनाए वैश्विक कीर्तिमान

    शाहरुख खान से लेकर अक्षय कुमार तक, जब भारतीय सिनेमा के इन दिग्गज कलाकारों ने बनाए वैश्विक कीर्तिमान

    नई दिल्ली । भारतीय सिनेमा ने न केवल देश में बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी एक खास और अमिट पहचान बनाई है। बॉलीवुड के सितारों की लोकप्रियता और उनका काम अक्सर दुनिया भर में सुर्खियां बटोरता रहता है। इसी कड़ी में एक-दो नहीं बल्कि कई बार भारतीय फिल्म जगत के कलाकारों ने अपने असाधारण और अनोखे प्रयासों से प्रतिष्ठित गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में अपना नाम स्वर्ण अक्षरों में दर्ज कराया है। इन कलाकारों ने अपनी फिल्मों के प्रचार के अनोखे तरीकों, सबसे लंबे अभिनय करियर, अनोखे किरदारों और अपनी बेमिसाल वैश्विक लोकप्रियता के दम पर ऐसे कीर्तिमान स्थापित किए हैं, जिन्हें तोड़ पाना किसी भी अन्य वैश्विक कलाकार के लिए एक बेहद चुनौतीपूर्ण कार्य साबित हो रहा है।

    बॉलीवुड के ‘खिलाड़ी’ यानी अक्षय कुमार अपने प्रशंसकों को खुश करने और नए प्रयोग करने के मामले में हमेशा आगे रहते हैं। उन्होंने साल 2023 में अपनी फिल्म ‘सेल्फी’ के प्रमोशन के दौरान एक अद्भुत रिकॉर्ड अपने नाम किया था। अक्षय ने अपने फैंस के साथ महज 3 मिनट के बेहद संक्षिप्त समय में कुल 184 परफेक्ट सेल्फी खींचकर एक नया वर्ल्ड रिकॉर्ड बना डाला था। वहीं दूसरी तरफ, बच्चन परिवार के नाम भी एक बेहद अनोखा सिनेमाई रिकॉर्ड दर्ज है। फिल्म ‘पा’ में असल जिंदगी के पिता अमिताभ बच्चन ने एक दुर्लभ बीमारी से पीड़ित बेटे का किरदार निभाया था, जबकि उनके वास्तविक बेटे अभिषेक बच्चन ने फिल्म में उनके पिता की भूमिका अदा की थी। गिनीज बुक ने इस अनोखे प्रदर्शन को दुनिया का इकलौता ऐसा रिवर्सल रोल माना, जहां असल जिंदगी के पारिवारिक रिश्ते पर्दे पर पूरी तरह से उलट गए थे।

    अभिषेक बच्चन के नाम इस पारिवारिक रिकॉर्ड के अलावा एक और व्यक्तिगत वैश्विक कीर्तिमान भी दर्ज है। साल 2009 में अपनी फिल्म ‘दिल्ली-6’ के अनोखे प्रमोशन के दौरान अभिषेक ने 12 घंटे के भीतर देश के विभिन्न शहरों में कुल 13 पब्लिक अपीयरेंस यानी सार्वजनिक प्रस्तुतियां दी थीं। इस दौरान उन्होंने अपने निजी विमान और कार की मदद से लगभग 1800 किलोमीटर का लंबा सफर तय किया था और हॉलीवुड के मशहूर स्टार विल स्मिथ के पुराने रिकॉर्ड को ध्वस्त कर दिया था। लोकप्रियता की बात करें तो बॉलीवुड के ‘किंग खान’ यानी शाहरुख खान को गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स द्वारा दुनिया का सबसे लोकप्रिय और मांग वाला अभिनेता घोषित किया जा चुका है। एक वैश्विक विश्लेषण के अनुसार, शाहरुख खान की ग्लोबल डिमांड दुनिया के किसी भी अन्य औसत अभिनेता की तुलना में 53.2 गुना ज्यादा आंकी गई थी, जो उनकी बेमिसाल वैश्विक बादशाहत को साबित करती है।

    सिनेमा के शुरुआती दौर के कलाकारों की बात करें तो दिग्गज अभिनेता अशोक कुमार के नाम भी एक बेहद सम्मानित और ऐतिहासिक रिकॉर्ड दर्ज है। उन्होंने साल 1936 में फिल्म ‘जीवन नैया’ से अपने अभिनय सफर की शुरुआत की थी और इसके बाद वे लगातार 63 वर्षों तक मुख्य और सहायक भूमिकाओं में बड़े पर्दे पर सक्रिय रूप से नजर आते रहे। सबसे लंबे समय तक बतौर मुख्य अभिनेता सक्रिय रहने का यह रिकॉर्ड आज भी ‘दादा मुनी’ के नाम से मशहूर अशोक कुमार के ही पास है। इसी तरह मशहूर कैरेक्टर आर्टिस्ट जगदीश राज खुराना ने सिनेमाई इतिहास में एक ऐसा रिकॉर्ड बनाया है जिसे तोड़ना लगभग असंभव माना जाता है। उन्होंने अपने पूरे करियर में 144 से भी अधिक फिल्मों में सिर्फ ‘पुलिस इंस्पेक्टर’ का किरदार निभाया था, जिसके चलते उनका नाम गिनीज बुक में हमेशा के लिए दर्ज हो गया। अभिनेत्रियों में कैटरीना कैफ ने साल 2013 में एक बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए उस दौर के हिसाब से रिकॉर्ड 63.75 करोड़ रुपये की अनुमानित सालाना कमाई के साथ बॉलीवुड की सबसे महंगी और कमाई करने वाली अभिनेत्री के रूप में अपना नाम इस वैश्विक सूची में दर्ज कराया था।

    ये वैश्विक रिकॉर्ड्स इस बात का साफ संकेत हैं कि बॉलीवुड के कलाकार न केवल कला के क्षेत्र में बल्कि कूटनीति, विपणन और लोकप्रियता के हर पैमाने पर दुनिया के किसी भी सिनेमा से पीछे नहीं हैं। आने वाले समय में तकनीक और सिनेमा के बदलते स्वरूप के साथ भारतीय कलाकारों द्वारा ऐसे कई और नए कीर्तिमान स्थापित किए जाने की पूरी संभावना दिखाई देती है।

  • कॉलोनियों में घुसा पानी, मथुरा समेत कई जिलों में बरसात का असर

    कॉलोनियों में घुसा पानी, मथुरा समेत कई जिलों में बरसात का असर


    उत्तर प्रदेश । उत्तर प्रदेश में लगातार बदलते मौसम ने एक बार फिर तबाही और राहत दोनों के हालात पैदा कर दिए हैं। तड़के हुई मूसलाधार बारिश के चलते आगरा में हालात सबसे ज्यादा गंभीर रहे, जहां कुछ ही घंटों की बारिश ने शहर की व्यवस्था की पोल खोल दी। कई इलाकों में जलभराव हो गया, सड़कें धंस गईं और वाहनों के फंसने की घटनाएं सामने आईं।

    आगरा में सबसे बड़ा हादसा उस समय हुआ जब एक फुटपाथ और सड़क का बड़ा हिस्सा अचानक धंस गया। देखते ही देखते करीब 25 फीट गहरा गड्ढा बन गया, जिसमें ईंटों से भरी ट्रैक्टर-ट्रॉली समा गई। वहीं, सड़क किनारे खड़ी कारें और अन्य वाहन भी गड्ढों में फंस गए या पलट गए। छीपीटोला इलाके में बारिश के दबाव से एक मकान भी गिर गया, जिससे स्थानीय लोगों में दहशत फैल गई।

    शहर की कई कॉलोनियों में पानी घुस जाने से लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। घरों के अंदर तक पानी भर गया और सड़कों पर घुटनों तक जलजमाव देखने को मिला। हालात इतने खराब हो गए कि कई जगहों पर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट होना पड़ा।

    इसी तरह मथुरा में भी देर रात हुई बारिश ने जनजीवन प्रभावित किया। गोवर्धन परिक्रमा मार्ग पर श्रद्धालु घुटनों तक पानी में चलते नजर आए। बारिश के कारण सड़कों पर पानी भरने से यातायात भी बाधित हुआ, हालांकि नमी के कारण लोगों को भीषण गर्मी से कुछ राहत जरूर मिली।

    मौसम विभाग ने प्रदेश के 9 जिलों में आंधी-बारिश को लेकर अलर्ट जारी किया है। अधिकारियों के अनुसार, पश्चिमी विक्षोभ का असर अभी जारी है, हालांकि यह धीरे-धीरे कमजोर हो रहा है। इसके बावजूद अगले कुछ दिनों तक प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में बारिश और तेज हवाओं की संभावना बनी हुई है।

    मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक, 3 जून से एक नया पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने की संभावना है, जो 5 जून तक पूरे उत्तर प्रदेश को प्रभावित कर सकता है। इस दौरान पश्चिमी और पूर्वी यूपी में छिटपुट बारिश के साथ-साथ तेज हवाएं और कुछ स्थानों पर ओलावृष्टि भी हो सकती है। हवा की रफ्तार 70 किमी प्रति घंटे तक पहुंचने का अनुमान है।

    लखनऊ के मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल लू का खतरा नहीं है और आने वाले दिनों में भी तापमान में ज्यादा बढ़ोतरी की संभावना कम है। हालांकि बारिश के कारण कहीं राहत है तो कहीं बाढ़ जैसे हालात ने चिंता बढ़ा दी है।

    कुल मिलाकर यूपी में मौसम का यह बदलाव लोगों के लिए राहत और परेशानी दोनों लेकर आया है। जहां एक ओर गर्मी से राहत मिली है, वहीं दूसरी ओर बारिश से हुई तबाही ने प्रशासन की तैयारियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

  • ललित मोदी ने सुष्मिता सेन संग ब्रेकअप की असली वजह का किया खुलासा, बताया क्यों अलग हुए दोनों के रास्ते

    ललित मोदी ने सुष्मिता सेन संग ब्रेकअप की असली वजह का किया खुलासा, बताया क्यों अलग हुए दोनों के रास्ते

    नई दिल्ली । मशहूर बिजनेसमैन ललित मोदी ने बॉलीवुड अभिनेत्री और पूर्व मिस यूनिवर्स सुष्मिता सेन के साथ अपने चर्चित रिश्ते और फिर उसके बाद हुए अलगाव पर पहली बार खुलकर अपनी बात रखी है। एक हालिया इंटरव्यू में उन्होंने सोशल मीडिया पर सुष्मिता सेन के साथ साझा की गई तस्वीरों के पीछे की पूरी कहानी बयां की और साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि दोनों के बीच ब्रेकअप क्यों हुआ था। ललित मोदी ने अपने रिश्ते के दिनों को याद करते हुए सुष्मिता सेन की जमकर तारीफ की और उन तमाम आलोचकों को करारा जवाब दिया जो अभिनेत्री को सोशल मीडिया पर ट्रोल कर रहे थे। उन्होंने कहा कि सुष्मिता आज भी उनकी जिंदगी में एक बेहद खास स्थान रखती हैं और दोनों के बीच वर्तमान में भी एक बेहद खूबसूरत और प्यारी दोस्ती का रिश्ता कायम है।

    ललित मोदी ने ह्यूमन्स ऑफ बॉम्बे को दिए अपने विशेष इंटरव्यू में ब्रेकअप की मुख्य वजह भौगोलिक दूरियों को बताया। उन्होंने साझा किया कि सुष्मिता सेन उनके लिए हमेशा से बेहद खास रही हैं और उन्होंने सुष्मिता से अपने जीवन में बहुत कुछ सीखा है। जब उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर सुष्मिता के साथ अपनी तस्वीरें पोस्ट की थीं, तब वे दोनों एक गंभीर रिश्ते में थे और भविष्य में भी साथ रह सकते थे, लेकिन दोनों के काम और जीवन के ठिकाने अलग होने के कारण दूरियां बढ़ती चली गईं। सुष्मिता सेन का पूरा करियर और काम भारत में केंद्रित है, जबकि ललित मोदी का पूरा जीवन और व्यवसाय लंदन में स्थापित है। इस लंबी दूरी के कारण रिश्ते को आगे बढ़ाना मुश्किल हो गया था, हालांकि ललित मोदी का मानना है कि दूरियों के बावजूद सुष्मिता के साथ बिताया गया समय उनके जीवन का एक बेहद खूबसूरत अनुभव था, जिसकी यादें हमेशा उनके पास रहेंगी।

    इस इंटरव्यू के दौरान ललित मोदी ने उन लोगों को भी आड़े हाथों लिया जिन्होंने इस रिश्ते की घोषणा के बाद सुष्मिता सेन को सोशल मीडिया पर ‘गोल्ड डिगर’ यानी पैसों के लिए रिश्ता बनाने वाली महिला कहकर ट्रोल किया था। ललित मोदी ने मजाकिया और बेबाक अंदाज में इन दावों को खारिज करते हुए कहा कि सुष्मिता बहुत स्वाभिमानी और बेहद अमीर महिला हैं, जिनके पास खुद के कमाए हुए ढेर सारे डायमंड्स हैं। उन्होंने बताया कि सुष्मिता का अपना डायमंड स्टोर भी है और उन्होंने अपनी कड़ी मेहनत के दम पर यह मुकाम हासिल किया है। ललित मोदी ने एक दिलचस्प वाकया साझा करते हुए कहा कि जब भी वे दोनों बाहर जाते थे, तो सुष्मिता कभी उन्हें पैसे खर्च नहीं करने देती थीं और हर चीज का भुगतान खुद करती थीं। ऐसे में वे गोल्ड डिगर बिल्कुल नहीं थीं, बल्कि मजाक में कहा जाए तो वे खुद ‘डायमंड डिगर’ साबित हुए थे।

    साल 2022 में इंटरनेट पर तहलका मचाने वाली उस इंस्टाग्राम पोस्ट के पीछे की कहानी बताते हुए ललित मोदी ने कहा कि वह पोस्ट एक मजेदार बहस का नतीजा थी। दोनों के बीच किसी बात पर हल्की नोंकझोंक हो रही था और ललित मोदी ने मजाक में कहा कि वे इस रिश्ते को सार्वजनिक करने जा रहे हैं, जिस पर सुष्मिता हंस पड़ीं। इसके बाद जब ललित मोदी लंदन से सार्डिनिया की यात्रा पर थे, तब उन्होंने तस्वीरें पोस्ट कर दीं और सार्डिनिया पहुंचते-पहुंचते यह खबर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मीडिया की सबसे बड़ी सुर्खी बन चुकी थी। खास बात यह रही कि सुष्मिता ने कभी भी उनसे उस पोस्ट को हटाने के लिए नहीं कहा और न ही ललित मोदी ने कभी उसे डिलीट करने के बारे में सोचा। दोनों अपनी उस स्थिति को लेकर पूरी तरह सहज थे और उन्हें आज भी अपने उस फैसले पर कोई पछतावा नहीं है।

    इस पूरे घटनाक्रम से यह साफ होता है कि भले ही समय और परिस्थितियों के कारण ललित मोदी और सुष्मिता सेन का प्रेम संबंध आगे नहीं बढ़ सका, लेकिन दोनों के मन में एक-दूसरे के प्रति सम्मान आज भी बरकरार है। यह इंटरव्यू दर्शाता है कि आधुनिक दौर में परिपक्वता के साथ रिश्तों को कैसे निभाया और खत्म किया जा सकता है, जहां आपसी समझ और दोस्ती ब्रेकअप के बाद भी कायम रहती है।

  • कारगिल युद्ध के समय अटल बिहारी वाजपेयी ने क्यों कराई थी पाकिस्तानी प्रधानमंत्री की दिलीप कुमार से बात

    कारगिल युद्ध के समय अटल बिहारी वाजपेयी ने क्यों कराई थी पाकिस्तानी प्रधानमंत्री की दिलीप कुमार से बात

    नई दिल्ली । भारत और पाकिस्तान के बीच साल 1999 में लड़ा गया कारगिल युद्ध न केवल सैन्य शौर्य बल्कि कूटनीतिक रणनीतियों के लिए भी जाना जाता है। इस युद्ध के दौरान पर्दे के पीछे का एक ऐसा ऐतिहासिक और बेहद चौंकाने वाला किस्सा सामने आया था, जब हिंदी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता दिलीप कुमार ने देश के प्रति अपनी वफादारी निभाते हुए पाकिस्तान के तत्कालीन प्रधानमंत्री नवाज शरीफ को फोन पर खरी-खरी सुना दी थी।
    पाकिस्तान के पूर्व विदेश मंत्री खुर्शीद कसूरी ने अपनी किताब ‘नाइदर ए हॉक नॉर ए डव’ में इस पूरे घटनाक्रम का विस्तार से जिक्र किया है। यह वाकया उस समय का है जब पाकिस्तानी सेना ने नियंत्रण रेखा पार कर भारतीय चौकियों पर चुपके से कब्जा कर लिया था और भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी पाकिस्तान के इस धोखे से बेहद आहत थे, क्योंकि कुछ ही समय पहले वे शांति का पैगाम लेकर खुद बस से लाहौर गए थे।

    किताब के अनुसार, एक दिन पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज शरीफ अपने कार्यालय में बैठे थे, तभी उनके एडीसी ने आकर सूचना दी कि भारत के प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी उनसे बेहद जरूरी बात करना चाहते हैं।

    फोन लाइन कनेक्ट होते ही वाजपेयी जी ने बेहद तल्ख और निराश आवाज में नवाज शरीफ से सीधे सवाल किया कि मियाां साहब, एक तरफ आप लाहौर में मुझसे गर्मजोशी से गले मिल रहे थे और दूसरी तरफ आपकी सेना ने हमारे कारगिल पर कब्जा कर लिया, यह कैसी दोस्ती है। इस अचानक हुए सीधे हमले से नवाज शरीफ पूरी तरह सकपका गए और उन्होंने सफाई देते हुए कहा कि उन्हें कारगिल की इस सैन्य कार्रवाई के बारे में पहले से कोई जानकारी नहीं थी और यह सब उनकी मर्जी के बिना हुआ है।

    अटल बिहारी वाजपेयी ने नवाज शरीफ की इस सफाई पर पूरी तरह भरोसा नहीं किया और अपनी कूटनीतिक रणनीति के तहत उनसे कहा कि अगर आपको मेरी बात पर यकीन नहीं हो रहा है, तो जरा उस शख्स से बात कीजिए जो इस वक्त मेरे पास ही बैठा है। इसके बाद वाजपेयी जी ने फोन की कमान बॉलीवुड के ‘ट्रैजेडी किंग’ कहे जाने वाले अभिनेता दिलीप कुमार के हाथों में सौंप दी।

    जैसे ही फोन के दूसरी तरफ से दिलीप कुमार की आवाज गूंजी, पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज शरीफ पूरी तरह दंग रह गए। चूंकि दिलीप कुमार का जन्म विभाजन से पहले पेशावर में हुआ था, इसलिए पाकिस्तान की आवाम और वहां के हुक्मरानों के बीच भी उनके प्रति बेहद सम्मान और गहरी दीवानगी थी।

    फोन हाथ में लेते ही दिलीप कुमार ने बिना किसी संकोच के नवाज शरीफ को एक कड़ा और भावुक संदेश दिया। उन्होंने कहा कि मियाां साहब, हमें आपसे इस तरह के कदम की उम्मीद बिल्कुल नहीं थी क्योंकि आपने हमेशा भारत और पाकिस्तान के बीच शांति व्यवस्था बनाए रखने का दावा किया है।

    उन्होंने आगे एक हिंदुस्तानी मुस्लिम के दर्द को बयां करते हुए कहा कि जब भी दोनों देशों के बीच सरहद पर तनाव बढ़ता है, तो भारत के मुस्लिम खुद को असुरक्षित महसूस करने लगते हैं और उनके लिए घरों से बाहर निकलना तक मुश्किल हो जाता है। दिलीप कुमार ने नवाज शरीफ से खुदा के वास्ते इस गंभीर स्थिति को संभालने और तुरंत कुछ ठोस कदम उठाने की अपील की।

    हालांकि, इस ऐतिहासिक फोन कॉल के तुरंत बाद जमीनी स्तर पर युद्ध पूरी तरह तो नहीं रुका, लेकिन माना जाता है कि इससे कुछ समय के लिए कूटनीतिक गलियारों में हलचल तेज हुई और सीमा पर तनाव को समझने में मदद मिली। यह युद्ध पूरे तीन महीने तक जारी रहा, जिसमें भारतीय सेना ने अपने वीर जवानों की शहादत और अदम्य साहस की बदौलत कारगिल की चोटियों से दुश्मनों को खदेड़कर दोबारा तिरंगा फहराया था।

    देश के प्रति दिलीप कुमार का यह जज्बा हमेशा से अटूट था, जिसका अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि साल 1947 में विभाजन के समय जब उनके परिवार को किसी ने पाकिस्तान लौटने की सलाह दी थी, तो उन्होंने दोटूक जवाब दिया था कि उनका वतन हिंदुस्तान ही है और वे यहीं जिएंगे और यहीं मरेंगे।
  • राजेंद्र कुमार की आंखों में आ गए थे आंसू, जब बेटी की विदाई में गूंजा नील कमल फिल्म का यह सदाबहार गाना

    राजेंद्र कुमार की आंखों में आ गए थे आंसू, जब बेटी की विदाई में गूंजा नील कमल फिल्म का यह सदाबहार गाना


    नई दिल्ली।
    भारतीय सिनेमा के इतिहास में साठ का दशक संगीत और अभिनय के लिहाज से स्वर्णिम युग माना जाता है। इस दौर में जहां एक तरफ राजेश खन्ना और राजेंद्र कुमार जैसे दिग्गज अभिनेताओं ने बॉक्स ऑफिस पर सफलता के नए कीर्तिमान स्थापित किए, वहीं दूसरी ओर संगीत की दुनिया में भी कई ऐसे अमर गीतों का निर्माण हुआ जो आज भी लोगों के दिलों को छू जाते हैं। ऐसा ही एक बेहद भावुक और यादगार किस्सा साठ के दशक के आखिरी सालों से जुड़ा हुआ है, जब फिल्म ‘नील कमल’ का एक प्रसिद्ध गाना अभी रिलीज भी नहीं हुआ था और उसने एक शादी समारोह में मौजूद सभी लोगों की आंखों को नम कर दिया था। इस गाने के बोल इतने मार्मिक थे कि हिंदी सिनेमा के जाने-माने अभिनेता राजेंद्र कुमार खुद को रोने से रोक नहीं पाए थे और उन्होंने बेहद भावुक होकर संगीतकार से इस फिल्म और गाने के बारे में पूछताछ की थी।

    यह पूरा घटनाक्रम फिल्म नील कमल के निर्माण के समय का है, जिसमें बलराज साहनी, राजकुमार और मनोज कुमार जैसे बड़े कलाकार मुख्य भूमिकाओं में नजर आने वाले थे। फिल्म के लिए एक विशेष विदाई गीत की आवश्यकता थी, जिसे संगीतकार रवि तैयार कर रहे थे। रवि ने इस खास गीत के लिए मशहूर गीतकार साहिर लुधियानवी से संपर्क किया, जिन्होंने अपनी कलम से बेहद दर्द भरे और दिल को छू लेने वाले बोल लिखे। इसके बाद इस गाने को अमर बनाने की जिम्मेदारी महान गायक मोहम्मद रफी को सौंपी गई, जिन्होंने ‘बाबुल की दुआएं लेती जा’ नामक इस विदाई गीत को अपनी जादुई आवाज से सजाया। गाना पूरी तरह से रिकॉर्ड हो चुका था, लेकिन फिल्म की रिलीज में अभी काफी समय बाकी था, जिसके कारण आम जनता और फिल्म इंडस्ट्री के कई लोग इस शानदार रचना से पूरी तरह अनजान थे।

    इसी दौरान फिल्म इंडस्ट्री के मशहूर गीतकार राजेंद्र कृष्णन की बेटी की शादी का आयोजन हुआ, जिसमें बॉलीवुड के तमाम दिग्गज कलाकारों और संगीतकारों को आमंत्रित किया गया था। इस भव्य शादी समारोह में अभिनेता राजेंद्र कुमार भी शामिल हुए थे। शादी की रस्मों के बीच राजेंद्र कृष्णन ने संगीतकार रवि से अनुरोध किया कि वे अपनी सुरीली आवाज में महफिल में कोई गाना गाएं। रवि ने इस अनुरोध को स्वीकार तो कर लिया, लेकिन उन्होंने एक अनूठी शर्त रखी कि वे यह गाना केवल बेटी की विदाई के समय ही गाएंगे। जैसे ही विदाई की रस्म शुरू हुई और माहौल में उदासी छाने लगी, रवि ने हाथ में माइक संभाला और पूरी शिद्दत व गहरे भावों के साथ अपनी ही धुन पर तैयार किया हुआ अनरिलीज्ड गाना ‘बाबुल की दुआएं लेती जा’ गाना शुरू कर दिया।

    रवि की मखमली और भावुक आवाज में इस गाने के बोल जैसे ही गूंजे, वहां मौजूद हर शख्स की आंखें भर आईं। बेटी की विदाई का वह दृश्य इस गाने के प्रभाव से इतना गमगीन हो गया कि शादी में मौजूद राजेंद्र कुमार अपने आंसुओं पर काबू नहीं रख सके और फूट-फूट कर रोने लगे। गाना खत्म होने के बाद राजेंद्र कुमार तुरंत संगीतकार रवि के पास पहुंचे और अत्यंत भावुक होकर उनसे पूछा कि आखिर यह दिल को झकझोर देने वाला गाना किस फिल्म का है। चूंकि उस समय तक फिल्म नील कमल सिनेमाघरों में नहीं आई थी, इसलिए रवि ने उन्हें विस्तार से बताया कि यह उनकी आगामी फिल्म का एक विशेष विदाई गीत है, जिसे मोहम्मद रफी ने गाया है।

    इस कालजयी गाने से जुड़ा एक और बेहद दिलचस्प और भावनात्मक पहलू गायक मोहम्मद रफी से भी जुड़ा हुआ है। जब रफी साहब स्टूडियो में इस गाने की रिकॉर्डिंग कर रहे थे, तब वे खुद भी अपने आंसुओं को रोक नहीं पाए थे। दरअसल, उन दिनों रफी साहब ने अपनी खुद की बेटी की सगाई की थी, और रिकॉर्डिंग के समय उनके जेहन में अपनी बेटी की विदाई का ख्याल आ गया था। इस वजह से गाते-गाते उनकी आवाज भारी हो गई और वे रो पड़े। संगीतकार रवि ने मोहम्मद रफी की उस भारी और दर्द भरी आवाज को तकनीकी रूप से सुधारने के बजाय वैसे ही रहने दिया, क्योंकि उन्हें लगा कि एक पिता का यह वास्तविक दर्द गाने की आत्मा को और अधिक गहरा और जीवंत बना देगा, जो आज भी इस गाने में साफ महसूस होता है।

    इस प्रकार, यह गाना न केवल फिल्म नील कमल की पहचान बना, बल्कि भारतीय शादियों में बेटी की विदाई का एक अनिवार्य हिस्सा भी बन गया। इतने दशक बीत जाने के बाद भी जब यह गाना कहीं बजता है, तो आज भी लोगों की आंखें नम हो जाती हैं। यह गीत इस बात का जीवंत प्रमाण है कि जब सच्चे भाव, बेहतरीन लेखन और बेहतरीन संगीत का मिलन होता है, तो ऐसी अमर कलाकृतियों का जन्म होता है जो पीढ़ियों तक इंसानी भावनाओं को झकझोरती रहती हैं।