Author: bharati

  • भारत-न्यूजीलैंड फ्री ट्रेड समझौता साइन, दोनों देशों के आर्थिक रिश्तों को मिलेगी नई रफ्तार

    भारत-न्यूजीलैंड फ्री ट्रेड समझौता साइन, दोनों देशों के आर्थिक रिश्तों को मिलेगी नई रफ्तार


    नई दिल्ली। भारत और न्यूजीलैंड के बीच आर्थिक साझेदारी को नई दिशा देते हुए एक महत्वपूर्ण फ्री ट्रेड एग्रीमेंट पर सहमति बन गई है। इस समझौते को दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों में एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है, जिससे आने वाले समय में आयात-निर्यात और निवेश के क्षेत्र में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।

    इस समझौते के तहत भारत से न्यूजीलैंड जाने वाले लगभग सभी उत्पादों को टैरिफ छूट का लाभ मिलेगा। इसका सीधा फायदा भारतीय निर्यातकों को होगा, क्योंकि उनके उत्पाद वहां के बाजार में और अधिक प्रतिस्पर्धी बन जाएंगे। दूसरी ओर, न्यूजीलैंड से भारत आने वाले अधिकतर उत्पादों पर भी टैरिफ कम किया जाएगा या समाप्त किया जाएगा, जिससे उपभोक्ताओं को भी राहत मिलेगी।

    यह फ्री ट्रेड एग्रीमेंट लंबे समय से चल रही बातचीत के बाद अंतिम रूप में पहुंचा है और इसे दोनों देशों के आर्थिक रिश्तों को मजबूत करने वाला अहम समझौता माना जा रहा है। इससे व्यापार की रफ्तार बढ़ने के साथ-साथ नए निवेश के अवसर भी पैदा होंगे।

    समझौते में केवल व्यापार ही नहीं, बल्कि निवेश और मानव संसाधन से जुड़े प्रावधानों को भी शामिल किया गया है। इसके तहत न्यूजीलैंड आने वाले वर्षों में भारत में बड़े स्तर पर निवेश करने की योजना बना सकता है, जिससे दोनों देशों की अर्थव्यवस्था को लाभ मिलेगा।

    इसके अलावा इस समझौते में छात्रों और पेशेवरों की आवाजाही को भी आसान बनाने पर जोर दिया गया है। भारतीय छात्रों को न्यूजीलैंड में पढ़ाई के दौरान काम करने और बाद में रोजगार के अवसरों तक पहुंच मिलने की सुविधा इस समझौते का अहम हिस्सा है।

    कौशल आधारित भारतीय पेशेवरों के लिए भी अस्थायी वर्क वीजा की सुविधा रखी गई है, जिससे वे निर्धारित अवधि तक न्यूजीलैंड में काम कर सकेंगे। इससे दोनों देशों के बीच स्किल एक्सचेंज और रोजगार के नए रास्ते खुलेंगे।

    हालांकि भारत ने अपने कृषि और डेयरी जैसे संवेदनशील क्षेत्रों को इस समझौते में सुरक्षित रखा है, ताकि घरेलू उद्योगों पर किसी तरह का नकारात्मक असर न पड़े।

  • राज्यसभा का समीकरण बदला, राघव चड्ढा के फैसले से NDA बहुमत के और करीब पहुंचा..

    राज्यसभा का समीकरण बदला, राघव चड्ढा के फैसले से NDA बहुमत के और करीब पहुंचा..

    नई दिल्ली। राज्यसभा की राजनीति में अचानक बड़ा बदलाव देखने को मिला है, जिसने पूरे सत्ता समीकरण को प्रभावित कर दिया है। सदन में हुए हालिया घटनाक्रम के बाद नंबर गेम पूरी तरह बदल गया है और इसका सीधा असर राजनीतिक ताकतों के संतुलन पर पड़ा है।

    इस पूरे घटनाक्रम में Raghav Chadha का नाम प्रमुख रूप से सामने आया है। उनके राजनीतिक कदम और उससे जुड़े बदलावों के बाद राज्यसभा में सत्ता पक्ष की स्थिति पहले से ज्यादा मजबूत हो गई है। माना जा रहा है कि इससे राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन को सीधा फायदा मिला है।

    सूत्रों के अनुसार, कुछ सांसदों के दलगत बदलाव और विलय की प्रक्रिया के बाद सदन में सीटों का गणित बदल गया है। इस बदलाव के बाद सत्ता पक्ष की संख्या में बढ़ोतरी हुई है, जबकि विपक्ष की स्थिति कमजोर हुई है।

    राज्यसभा में यह बदलाव इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि यहां बहुमत का सीधा असर कानून निर्माण और बड़े विधायी फैसलों पर पड़ता है। अब बदले हुए समीकरण के बाद सत्ता पक्ष बहुमत के आंकड़े के और करीब पहुंच गया है।

    राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस तरह के बदलाव आने वाले समय में संसद की कार्यवाही और महत्वपूर्ण बिलों पर असर डाल सकते हैं। खासकर उन मुद्दों पर जहां दो-तिहाई बहुमत की जरूरत होती है, वहां अब स्थिति पहले से ज्यादा अनुकूल दिखाई दे रही है।

    इस पूरे घटनाक्रम ने राजनीतिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है, जहां इसे सत्ता पक्ष की बड़ी रणनीतिक जीत के तौर पर देखा जा रहा है, वहीं विपक्ष इसे अपने लिए चुनौतीपूर्ण स्थिति मान रहा है।

  • जब बॉलीवुड के 'राज' ने अपने ही परिवार का किरदार निभाकर रचा इतिहास..

    जब बॉलीवुड के 'राज' ने अपने ही परिवार का किरदार निभाकर रचा इतिहास..

    नई दिल्ली। बॉलीवुड के इतिहास में कई ऐसी फिल्में आई हैं जिन्होंने अपनी अनूठी कहानी और कलाकारों के शानदार अभिनय से दर्शकों के दिलों में जगह बनाई है। ऐसी ही एक यादगार फिल्म साल 2000 में बड़े पर्दे पर उतरी थी, जिसने न केवल बॉक्स ऑफिस पर सफलता के झंडे गाड़े, बल्कि अभिनय की दुनिया में एक नया कीर्तिमान भी स्थापित किया।

    इस फिल्म की सबसे बड़ी खासियत इसके मुख्य अभिनेता गोविंदा थे, जिन्होंने एक या दो नहीं, बल्कि पूरे छह अलग-अलग किरदारों को एक साथ पर्दे पर जीवंत कर दिया था। उस दौर में इस तरह का प्रयोग करना न केवल चुनौतीपूर्ण था, बल्कि दर्शकों के लिए भी यह एक बिल्कुल नया और रोमांचक अनुभव था।

    फिल्म की कहानी मुख्य रूप से राज मल्होत्रा नाम के एक युवक के इर्द-गिर्द घूमती है, जो अपनी चुलबुली और मजाकिया हरकतों से सबको हंसने पर मजबूर कर देता है। लेकिन कहानी में असली मोड़ तब आता है जब राज के पूरे परिवार की एंट्री होती है।

    पर्दे पर जब राज के दादा, उसकी दादी, पिता, मां और बहन एक साथ नजर आते हैं, तो दर्शक यह देखकर दंग रह जाते हैं कि इन सभी किरदारों को निभाने वाला शख्स कोई और नहीं बल्कि खुद गोविंदा ही थे। हर किरदार के लिए उन्होंने अपनी आवाज, बोलने के लहजे और शारीरिक हाव-भाव को इतनी बारीकी से बदला था कि फिल्म देखते समय एक पल के लिए भी ऐसा महसूस नहीं होता था कि ये सभी भूमिकाएं एक ही कलाकार द्वारा निभाई जा रही हैं।

    व्यावसायिक मोर्चे पर भी इस फिल्म ने अपनी चमक बिखेरी। मध्यम बजट में तैयार हुई इस फिल्म ने सिनेमाघरों में जबरदस्त भीड़ जुटाई और अपनी लागत से दोगुने से भी ज्यादा की कमाई करने में सफल रही। इस फिल्म की सफलता ने यह साबित कर दिया कि अगर अभिनेता में प्रतिभा हो और पटकथा में दम हो, तो दर्शक उसे भरपूर प्यार देते हैं।

    फिल्म के संवाद और कॉमेडी सीन आज भी सोशल मीडिया पर खासे लोकप्रिय हैं। इस प्रोजेक्ट ने गोविंदा को एक ऐसे वर्सटाइल एक्टर के रूप में स्थापित किया जो किसी भी सांचे में ढल सकता था, चाहे वह एक बुजुर्ग दादी का किरदार हो या एक शरारती जवान लड़के का।

    अभिनय के अलावा फिल्म की स्टारकास्ट ने भी इसकी सफलता में अहम भूमिका निभाई। मुख्य अभिनेत्री के साथ गोविंदा की जोड़ी को काफी सराहा गया और दोनों के बीच की केमिस्ट्री ने पर्दे पर जादू बिखेरा। साथ ही, कॉमेडी जगत के अन्य दिग्गज कलाकारों ने भी अपनी उपस्थिति से फिल्म को और भी मजेदार बना दिया।

    दिलचस्प बात यह है कि इस फिल्म में केवल मुख्य नायक ने ही बहुमुखी भूमिका नहीं निभाई थी, बल्कि एक अन्य मशहूर कॉमेडियन ने भी दोहरी भूमिका निभाकर हंसी का तड़का लगाया था। तकनीकी रूप से यह फिल्म उस समय की अन्य फिल्मों से काफी आगे थी क्योंकि इसमें कई किरदारों को एक ही फ्रेम में कुशलतापूर्वक दिखाया गया था।

    आज दशकों बीत जाने के बाद भी यह फिल्म भारतीय सिनेमा प्रेमियों की पसंदीदा सूची में शामिल है। यह फिल्म उस दौर का प्रतीक है जब पारिवारिक मनोरंजन और शुद्ध कॉमेडी ही सिनेमा की जान हुआ करती थी।

    बिना किसी विवाद या भारी भरकम स्पेशल इफेक्ट्स के, केवल सादगी और बेहतरीन टाइमिंग के दम पर इस फिल्म ने जो मुकाम हासिल किया, वह आज के दौर की फिल्मों के लिए एक मिसाल है। गोविंदा के वे छह यादगार चेहरे आज भी दर्शकों को गुदगुदाते हैं और सिनेमाई पर्दे पर उनके उस अनोखे ‘सिक्सर’ की याद दिलाते हैं।
  • MP: मुरैना में भक्ति की अनोखी मिसाल… खड़ियाहार गांव की रेखा ने भगवान ठाकुर जी से रचाया विवाह

    MP: मुरैना में भक्ति की अनोखी मिसाल… खड़ियाहार गांव की रेखा ने भगवान ठाकुर जी से रचाया विवाह


    मुरैना।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के मुरैना (Morena) जिले के खड़ियाहार गांव (Khadiyahar village) में भक्ति की अनोखी मिसाल देखने को मिली. 42 साल की रेखा तोमर (Rekha Tomar) ने भगवान ठाकुर जी (Bhagwan Thakur ji) को अपना दूल्हा मानकर वैदिक रीति से विवाह रचा लिया. पूरे गांव में भजन-कीर्तन और राधे-राधे के जयकारे गूंजे. इस आयोजन को ग्रामीणों ने आस्था और समर्पण का दुर्लभ उदाहरण बताया।

    मुरैना जिले के एक छोटे से गांव खड़ियाहार में 42 वर्षीय रेखा तोमर ने भगवान श्री ठाकुर जी को अपना जीवनसाथी मानते हुए पूरे विधि-विधान और वैदिक रीति-रिवाजों के साथ विवाह रचा लिया. यह घटना सिर्फ एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि उस आस्था की अभिव्यक्ति है, जिसमें व्यक्ति अपने जीवन को पूरी तरह ईश्वर के चरणों में समर्पित कर देता है. गांव में हुए इस आयोजन ने हर किसी को चौंकाया भी और भावुक भी किया.

    इस अनोखे विवाह की चर्चा पूरे क्षेत्र में हो रही है. ग्रामीणों के मुताबिक, यह आयोजन पूरी तरह पारंपरिक हिंदू रीति से किया गया, जिसमें विवाह की हर रस्म को विधिवत निभाया गया. रेखा तोमर लंबे समय से ठाकुर जी की भक्ति में लीन थीं और उन्होंने पहले ही यह संकल्प लिया था कि वह अपना जीवन प्रभु को समर्पित करेंगी. यही संकल्प इस विवाह का आधार बना. भक्ति के इस रूप ने एक बार फिर यह साबित किया कि आस्था की कोई सीमा नहीं होती और यह व्यक्ति को अलग पहचान देती है.

    वैदिक रीति से संपन्न हुआ विवाह

    ग्राम खड़ियाहार के प्राचीन देवालय में यह विवाह संपन्न हुआ. मंदिर के पुजारी रामदुलारे बाबा ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच सभी धार्मिक रस्में पूरी कराईं. लग्न पत्रिका का वाचन हुआ. पूजन और पैर पूजाई जैसी परंपराएं निभाई गईं. पूरा आयोजन एक पारंपरिक शादी की तरह ही आयोजित किया गया, जिसमें हर विधि का पालन किया गया.


    भाई ने किया कन्यादान, भावुक हुआ माहौल

    इस विवाह का सबसे भावुक पल तब आया, जब रेखा तोमर के भाई सुरेंद्र ने उनका कन्यादान किया. परिवार के लिए यह क्षण आस्था और भावना का संगम था. ग्रामीणों ने भी इस दृश्य को श्रद्धा के साथ देखा. यह आयोजन सिर्फ धार्मिक नहीं, बल्कि सामाजिक रूप से भी एक अलग अनुभव लेकर आया.


    भजन-कीर्तन से गूंजा पूरा गांव

    विवाह के दौरान पूरे गांव में भक्ति का माहौल रहा. भजन-कीर्तन और राधे-राधे के जयकारों से वातावरण गूंज उठा. बड़ी संख्या में ग्रामीण इस आयोजन में शामिल हुए. लोगों ने इसे आस्था और समर्पण की अनोखी मिसाल बताया. गांव के कई प्रमुख लोग भी कार्यक्रम में मौजूद रहे और उन्होंने इसे दुर्लभ आयोजन माना.


    कौन हैं रेखा तोमर

    रेखा तोमर, पिता लाखन सिंह, लंबे समय से धार्मिक प्रवृत्ति की रही हैं. ग्रामीणों के अनुसार, वह अधिकतर समय पूजा-पाठ और भजन में व्यतीत करती थीं. उनका यह निर्णय अचानक नहीं था, बल्कि वर्षों की भक्ति और साधना का परिणाम था. उन्होंने सामाजिक जीवन से अलग हटकर आध्यात्मिक जीवन को प्राथमिकता दी.


    ईश्वर को जीवनसाथी मानने की परंपरा नई नहीं

    धार्मिक मान्यताओं में ईश्वर को जीवनसाथी मानने की परंपरा नई नहीं है. इतिहास और भक्ति परंपरा में कई उदाहरण मिलते हैं, जहां भक्त ने ईश्वर को अपना सर्वस्व मान लिया. ऐसे आयोजन समाज में आस्था और विश्वास को मजबूत करते हैं. हालांकि, यह व्यक्तिगत आस्था का विषय होता है और हर व्यक्ति इसे अपने तरीके से समझता है।

  • US: ट्रंप के डिनर हमले को लेकर नया खुलासा, हमलावर ने गोलीबारी से पहले परिवार को भेजा था मैसेज

    US: ट्रंप के डिनर हमले को लेकर नया खुलासा, हमलावर ने गोलीबारी से पहले परिवार को भेजा था मैसेज


    वाशिंगटन।
    अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) के डिनर कार्यक्रम (Dinner program) में हुए हमले को लेकर नए खुलासे हो रहे हैं। हमलावर ने गोलीबारी करने के कुछ मिनट पहले अपने परिवार को एक संदेश भेजा था। इसमें उसने हमला करने की वजह को भी लिखा था। इस संदेश के मुताबिक काश पटेल को छोड़कर ट्रंप प्रशासन की पूरी टीम उसके निशाने पर थी।

    न्यूयॉर्क पोस्ट ने हमलावर एलन के द्वारा परिवार को भेजे गए इस मैसेज को प्रकाशित किया है। इस मैसेज में वह साफ तौर पर कहता हुआ नजर आता है कि काश पटेल को छोड़कर ट्रंप प्रशासन के सभी अधिकारी मेरे निशाने पर हैं। उसने लिखा, “मैं अब यह और स्वीकार करने को तैयार नहीं हूं कि एक पीडोफाइल, बलात्कारी और गद्दार मेरे हाथों को उसके अपराधों से रंगे।” कथित तौर पर इस मैसेज में एलन ने सीधे तौर पर ट्रंप का नाम नहीं लिया। लेकिन ट्रंप का नाम यौन अपराधी जेफ्री एपस्टीन के साथ लगातार जोड़ा जाता रहा है। ऐसे में संभव है कि वह ट्रंप की ही बात कर रहा हो।

    न्यूयॉर्क टाइम्स द्वारा देखे गए इस मैसेज में कोल ने लिखा, “ट्रंप प्रशासन के सभी अधिकारी, पटेल को छोड़कर मेरे निशाने पर हैं। और उन्हें इसमें उनके पद के अनुसार प्राथमिकता दी जाएगी। इसके साथ ही उसने यह भी लिखा कि संयुक्त राज्य सीक्रेट सर्विस के एजेंट्स को केवल जरूरत पड़ने पर ही निशाना बनाया जाएगा। अगर वह नुकसान पहुंचाने की कोशिश नहीं करते हैं, तो उन्होंने गैर घातक तरीके से रास्ते से हटाया जाएगा।


    होटल की सुरक्षा पर भी बात

    हमले के ठीक पहले परिवार को भेजे गए इस मैसेज में एलन ने होटल में मौजूद सुरक्षा व्यवस्था के बारे में भी लिखा। उसने लिखा कि यहां कि सुरक्षा व्यवस्था केवल प्रदर्शनकारियों को रोकने तक ही सीमित थी। उसने लिखा, “मैं कई हथियारों के साथ अंदर चला जाता हूँ और वहाँ कोई भी यह नहीं सोचता कि मैं खतरा हो सकता हूं।” एलन ने अंत में संभावित तौर पर ट्रंप को निशाना बनाते हुए लिखा, “इस स्तर पर ऐसी अक्षमता पागलपन हैं। मैं ईमानदारी के साथ उम्मीद करता हूं कि जब इस देश को वास्तव में सक्षम नेतृत्व मिलेगा, तब तक इसे सुधार लिया जाएगा।”

    इससे पहले, रविवार को एक वाइट हाउस की तरफ से होटल में आयोजित इस डिनर में लगभग अमेरिकी प्रशासन के सभी बड़े लोग मौजूद थे। उसी वक्त वहां पर गोलियों की आवाज सुनाई दी। हमला होने का संकेत मिलते हैं वहां पर मौजूद सुरक्षाकर्मियों ने सभी राजनेताओं और उनके साथियों को वहां से बाहर निकाल दिया। हमलावर कोल एलन को भी गिरफ्तार कर लिया गया। बाद में इस हमले को लेकर ट्रंप ने कहा कि हमलावर में ईसाइयों को लेकर नफरत भरी हुई है।

    बता दें, यह पहली बार नहीं है जब ट्रंप के ऊपर जानलेवा हमला करने की कोशिश हुई हो। 2024 में चुनावी रैली के दौरान भी ट्रंप के ऊपर हमला हुआ था। इस हमले में गोली ट्रंप के कान को घायल करती हुई निकल गई थी। इसके कुछ समय बाद ट्रंप के घर के बाहर भी हमला हुआ था। और अब यह तीसरी बार उनके ऊपर जानलेवा हमला करने की कोशिश हुई है।

  • ईरान के विदेश मंत्री की रूस यात्रा से भड़के ट्रंप… बोले- 3 दिन में समझौता… नहीं तो होगा भयंकर विस्फोट….

    ईरान के विदेश मंत्री की रूस यात्रा से भड़के ट्रंप… बोले- 3 दिन में समझौता… नहीं तो होगा भयंकर विस्फोट….


    वाशिंगटन।
    ईरान के विदेश मंत्री (Iran Foreign Minister) की रूस की यात्रा (Russia Trip) से राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) और भड़क गए हैं। उन्होंने धमकी देते हुए कहा है कि अगर तीन दिन के अंदर ईरान समझौता नहीं करता है तो फिर उसकी तेल की पाइपलाइनों में भयंकर विस्फोट होगा। एक इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा कि ईरान तेल निर्यात करने के लायक ही नहीं बचेगा। ट्रंप ने कहा कि नाकेबंदी की वजह से ईरान जहाजों के जरिए निर्यात नहीं कर पा रहा है। वहीं पाइपलाइन ध्वस्त होने के बाद उसका निर्यात एकदम से बंद हो जाएगा। बता दें कि ईरान के विदेश मंत्री पाकिस्तान से एक बार फिर रूस पहुंचे हैं और वह अब पुतिन से वार्ता करने वाले हैं। रूसी मीडिया ने इसकी पुष्टि की है।


    ईरानी विदेश मंत्री के रूस दौरे से नाराज ट्रंप?

    दरअसल ईरान के विदेश मंत्री अमेरिका के साथ अप्रत्यक्ष वार्ता के लिए पाकिस्तान गए थे। हालांकि डोनाल्ड ट्रंप ने अपने प्रतिनिधिमंडल को भेजने से इनकार कर दिया। इसके बाद ईरानी विदेश मंत्री अराघची भी रूस और ओमान की यात्रा पर निकल गए। रूस के दौरे से वह एक बार फिर पाकिस्तान लौटे। उधर ट्रंप ने कहा कि अब उनकी टीम पाकिस्तान नहीं जाएगी बल्कि जो भी बात होगी, फोन पर ही होगी।


    ईरान ने भेजा अपना प्रस्ताव

    ईरान ने एक लिखित प्रस्ताव डोनाल्ड ट्रंप को भेजा था जिसे उन्होंने तुरंत खारिज कर दिया। ट्रंप ने दावा किया कि पहले प्रस्ताव खारिज होने के बाद ईरान ने दूसरा प्रस्ताव भेजा जो कि उससे बेहतर है। उन्होंने कहा कि वार्ता के लिए आने-जाने में सफर बहुत करना पड़ता है और अब सारी बातें फोन पर होंगी। ईरान जब चाहें उन्हें फोन कर सकता है। जानकारी के मुताबिक ईरानी विदेश मंत्री एक बार फिर रूस चले गए हैं और ईरान का कहना है कि मॉस्को में अब आगे की बातें होंगी।

    राष्ट्रपति ट्रंप ने धमकी देते हुए कहा है कि उसकी तेल की पाइपलाइन को इस तरह तबाह किया जाएगा कि दोबारा वह वैसी पाइपलाइन नहीं बना पाएगा। जियो टीवी’ ने ईरानी समाचार एजेंसी ‘आईएसएनए’ के हवाले से बताया कि अराघची ”युद्ध को पूरी तरह से समाप्त करने के लिए किसी भी समझौते के ढांचे पर ईरान के रुख और विचारों” से अवगत कराएंगे।

    ग्यारह और बारह अप्रैल को आयोजित शांति वार्ता का पहला दौर संघर्ष में शामिल पक्षों के लिए वांछित परिणाम लाने में विफल रहा। शनिवार को अराघची के ओमान रवाना होने के बाद, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की कि अमेरिकी वार्ताकार स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर अब ईरान के साथ वार्ता के लिए इस्लामाबाद नहीं जाएंगे। रविवार को ट्रंप ने दोहराया कि अमेरिकी और ईरानी अधिकारी संघर्ष के शांतिपूर्ण समाधान के लिए फोन पर बातचीत कर सकते हैं।

  • IPL 2026: ऋतुराज गायकवाड़ की फिफ्टी के बावजूद उनके नाम बना ये बुरा रिकॉर्ड, जानिए कैसे ?

    IPL 2026: ऋतुराज गायकवाड़ की फिफ्टी के बावजूद उनके नाम बना ये बुरा रिकॉर्ड, जानिए कैसे ?


    नई दिल्ली। IPL 2026 में चेन्नई सुपर किंग्स के कप्तान ऋतुराज गायकवाड़ ने आखिरकार अपनी खराब फॉर्म से बाहर निकलते हुए अर्धशतक जरूर लगाया, लेकिन यह पारी बेहद धीमी रही। उन्होंने 50 रन पूरे करने के लिए 49 गेंदें खेलीं, जिसके चलते उनका नाम IPL इतिहास के सबसे धीमे अर्धशतकों की सूची में जुड़ गया।

    गायकवाड़ ने शुरुआत में बेहद संभलकर बल्लेबाजी की और लंबे समय तक रन बनाने में संघर्ष करते नजर आए। हालांकि, अर्धशतक पूरा करने के बाद उन्होंने गति बढ़ाई और अंततः 60 गेंदों में 74 रन की पारी खेली। इस दौरान उन्होंने 6 चौके और 4 छक्के लगाए।

    IPL इतिहास में सबसे धीमा अर्धशतक 55 गेंदों में आया था, जबकि कुछ खिलाड़ियों ने 50 से 53 गेंदों में भी फिफ्टी पूरी की है। अब 49 गेंदों में अर्धशतक बनाने वालों की सूची में गायकवाड़ का नाम भी शामिल हो गया है, जहां पहले कुछ दिग्गज खिलाड़ियों के नाम दर्ज हैं। यह रिकॉर्ड चेन्नई सुपर किंग्स के लिए भी उल्लेखनीय रूप से धीमी पारियों की सूची में शामिल हो गया है। टीम के इतिहास में भी कई बल्लेबाजों ने 49 से 53 गेंदों के बीच अर्धशतक लगाए हैं, और अब गायकवाड़ भी इस लिस्ट का हिस्सा बन गए हैं।

    मैच की बात करें तो Chennai Super Kings और Gujarat Titans के बीच खेले गए मुकाबले में CSK ने पहले बल्लेबाजी की, लेकिन शुरुआत बेहद खराब रही। पावरप्ले में ही टीम के तीन विकेट गिर गए और स्कोर 28/3 हो गया।

    मिडिल ऑर्डर भी ज्यादा योगदान नहीं दे सका और 10 ओवर तक टीम 43/4 पर संघर्ष करती रही। इसके बाद गायकवाड़ और शिवम दुबे के बीच 59 रनों की साझेदारी ने टीम को संभाला। आखिरी ओवरों में कुछ तेज रन आए और CSK ने 20 ओवर में 158/7 का स्कोर खड़ा किया। हालांकि लक्ष्य का पीछा करने उतरी गुजरात की टीम ने आसानी से यह मुकाबला जीत लिया और CSK को हार का सामना करना पड़ा।

  • ETF में निवेश का बढ़ता दायरा: सोना-चांदी से आगे बैंकिंग, टेक और ग्लोबल मार्केट में भी मौका

    ETF में निवेश का बढ़ता दायरा: सोना-चांदी से आगे बैंकिंग, टेक और ग्लोबल मार्केट में भी मौका


    नई दिल्ली। कई निवेशक हाल के दिनों में थोड़ा निराश हैं, क्योंकि जब वे देखते हैं कि पिछले एक साल में सोने ने करीब 56% और चांदी ने 155% तक का रिटर्न दिया है, तो उन्हें लगता है कि उन्होंने निवेश का अच्छा मौका गंवा दिया। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि निवेश की दुनिया अब केवल सोने-चांदी तक सीमित नहीं रही है। Exchange Traded Fund यानी ईटीएफ आज निवेश का एक ऐसा विकल्प बन चुका है, जिसमें बैंकिंग, आईटी, सरकारी बॉन्ड और यहां तक कि विदेशी बाजारों में भी निवेश का मौका मिलता है। यह निवेशकों के लिए एक तरह की “मल्टी-कुजीन थाली” जैसा बन गया है, जहां अलग-अलग विकल्प मौजूद हैं।

    भारत में पैसिव निवेश को लेकर जागरूकता तेजी से बढ़ रही है। इसी का नतीजा है कि वित्त वर्ष 2025-26 में ईटीएफ में निवेश पिछले साल की तुलना में लगभग 94% तक बढ़ गया है।

    सोना-चांदी बने सबसे बड़े आकर्षण
    पिछले साल ईटीएफ निवेश में सबसे ज्यादा पैसा गोल्ड और सिल्वर फंड्स में आया। गोल्ड ईटीएफ में करीब 350% और सिल्वर ईटीएफ में लगभग 296% की बढ़ोतरी दर्ज की गई। इसकी वजह मजबूत रिटर्न रहा है। हालांकि कुछ अन्य ईटीएफ ऐसे भी हैं जिन्होंने पिछले तीन वर्षों में 250% तक का रिटर्न दिया है।

    क्यों बढ़ रहा है ETF का क्रेज?
    ईटीएफ की लोकप्रियता के पीछे मुख्य तीन कारण हैं—
    कम लागत: कम एक्सपेंस रेशियो के कारण यह सस्ता निवेश विकल्प है।
    पारदर्शिता: यह सीधे किसी इंडेक्स को फॉलो करता है, जिससे पोर्टफोलियो साफ-सुथरा रहता है।
    लिक्विडिटी: स्टॉक एक्सचेंज पर इसे कभी भी खरीदा और बेचा जा सकता है।

    ETF के प्रमुख प्रकार
    ईटीएफ कई तरह के होते हैं—
    इक्विटी ईटीएफ: जैसे Nifty 50, बैंकिंग, आईटी और सेक्टर आधारित फंड
    कमोडिटी ईटीएफ: सोना और चांदी आधारित फंड
    डेट/बॉन्ड ईटीएफ: सरकारी और कॉर्पोरेट बॉन्ड में निवेश
    इंटरनेशनल ईटीएफ: जैसे NASDAQ 100 या S&P 500 में निवेश का अवसर

    निवेश से पहले किन बातों का ध्यान रखें
    विशेषज्ञों के अनुसार ईटीएफ चुनते समय तीन बातें जरूरी हैं—
    लिक्विडिटी: ज्यादा ट्रेडिंग वॉल्यूम वाले ETF चुनें
    एक्सपेंस रेशियो: कम खर्च वाला फंड बेहतर होता है
    ट्रैकिंग एरर: इंडेक्स और ETF रिटर्न में अंतर जितना कम हो, फंड उतना बेहतर माना जाता है

    निवेश में समझदारी जरूरी
    ईटीएफ में निवेश करते समय ध्यान रखना चाहिए कि इसमें कोई सक्रिय फंड मैनेजर लगातार निर्णय नहीं लेता। इसलिए एसेट एलोकेशन, एंट्री-एग्जिट और पोर्टफोलियो रीबैलेंस की जिम्मेदारी निवेशक की होती है। विशेषज्ञों का कहना है कि निवेश को केवल ट्रेंड के आधार पर नहीं, बल्कि अपने वित्तीय लक्ष्य, जोखिम क्षमता और लंबी अवधि की रणनीति के अनुसार करना चाहिए।

  • "मेरा नाम रिंकू ही रहने दो…" प्लेयर ऑफ द मैच बने रिंकू सिंह का दिल जीतने वाला बयान वायरल

    "मेरा नाम रिंकू ही रहने दो…" प्लेयर ऑफ द मैच बने रिंकू सिंह का दिल जीतने वाला बयान वायरल


    नई दिल्‍ली । लखनऊ सुपर जायंट्स के खिलाफ कोलकाता नाइट राइडर्स को आईपीएल 2026 की दूसरी जीत दिलाने में अहम योगदान रिंकू सिंह (Rinku Singh) का था। उन्हीं की बदौलत केकेआर ने 155 रन बनाए, क्योंकि आखिरी ओवर में दिग्वेश राठी के खिलाफ रिंकू सिंह ने ही 4 छक्के लगाए थे। रिंकू ने इस मैच में 51 गेंदों में नाबाद 83 रनों की पारी खेली थी। उनके अलावा 34 रन कैमरोन ग्रीन ने बनाए थे, लेकिन अन्य कोई बल्लेबाज 10 से आगे नहीं बढ़ सका था। एक समय पर केकेआर की टीम 140 के आसपास सिमटती नजर आ रही थी, लेकिन रिंकू सिंह ने अच्छी तरह से मैच को फिनिश किया। सात चौके और 5 छक्के अपनी पारी में रिंकू ने लगाए और मैच बाद बताया कि उनका प्लान इस मैच में क्या था? वे इस मैच में प्लेयर ऑफ द मैच भी चुने गए।

    क्या हमें आपका नाम बदलकर रिंकू संकटमोचक कर देना चाहिए? इस पर पोस्ट मैच प्रेजेंटेशन सेरेमनी में प्लेयर ऑफ द मैच का खिताब हासिल करने के बाद रिंकू सिंह ने कहा, “नहीं, रिंकू ठीक है।” मुश्किल हालातों में माइंडसेट आपका क्या होता है? इस पर रिंकू ने कहा, “जब भी मैं बैटिंग करने जाता हूं और टीम पहले ही 3-4 विकेट खो चुकी होती है, तो मेरा फोकस इस बात पर होता है कि गेम को कैसे कंट्रोल किया जाए और आगे बढ़ाया जाए। मैं सोचता हूं कि स्ट्राइक कैसे रोटेट करूँ – सिंगल्स और डबल्स कैसे लूं – और कहां बाउंड्री लगा सकता हूं। मेरा मुख्य मकसद हमेशा गेम को आखिर तक ले जाना होता है।”

    आज रात क्या प्लान था? इस पर रिंकू ने बताया, “प्लान सिंपल था, क्योंकि विकेट गिर चुके थे, इसलिए मैंने सेफ खेलने, सिंगल्स/डबल्स से इनिंग्स बनाने और जब भी कोई खराब बॉल मिले तो बाउंड्री मारने पर फोकस किया।” आखिरी ओवर्स की प्लानिंग पर रिंकू सिंह ने कहा, “आखिरी ओवर्स के लिए शॉट्स बचाने जैसा कोई फिक्स्ड प्लान नहीं था। मैंने बस सिचुएशन के हिसाब से रिएक्ट किया। बाद में मुझे पता चला कि एक स्पिनर बॉलिंग कर रहा है, तो मैंने उसी हिसाब से एडजस्ट किया।”

    फील्डिंग पसंद है- रिंकू
    वहीं, अपनी फील्डिंग पर रिंकू ने कहा, “मुझे बचपन से ही फील्डिंग पसंद रही है। मैं नैचुरली फिट हूं, इसलिए मैं तेज़ दौड़ सकता हूं और ग्राउंड को अच्छी तरह कवर कर सकता हूं। मुझे फील्डिंग करना बहुत ही ज्यादा पसंद है।” आगे रिंकू से पूछा गया कि क्या आप सुपर ओवर कैच के लिए तैयार थे? उन्होंने बताया, “सच कहूं तो, मैं उस कैच के लिए तैयार नहीं था। मुझे लगा कि बॉल कहीं और चली जाएगी, लेकिन अचानक वह मेरी तरफ आई और मैं उसे पकड़ने में कामयाब रहा।”

  • भारत के इस दक्षिणी राज्य में खत्म हुआ तेल का स्टॉक … 400 से ज्यादा पेट्रोल पंप बंद

    भारत के इस दक्षिणी राज्य में खत्म हुआ तेल का स्टॉक … 400 से ज्यादा पेट्रोल पंप बंद


    विजयवाड़ा।
    ईरान और अमेरिका (Iran and America) के बीच छिड़ी जंग की वजह से दुनियाभर में ऊर्जा आपूर्ति को लेकर संशय की स्थिति पैदा हो गई है। इसका असर अब भारत (India) में भी दिखने लगा है। दक्षिणी राज्य आंध्र प्रदेश (Southern State Andhra Pradesh) के कई पेट्रोल पंपों (Petrol pumps) पर पेट्रोल और डीजल का स्टॉक खत्म हो जाने की खबर फैलने और लोगों की भारी भीड़ उमड़ने के बाद, रविवार को अलग-अलग जिलों में 400 से ज्यादा पंप बंद कर दिए गए हैं। वहीं इन पेट्रोल पंपों पर स्टॉक खत्म होने की सूचना दी जाने के बाद लोगों ने दूसरे पंपों पर धावा बोल दिया, जहां लंबी लाइनें देखी जा रही हैं।

    आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक राज्य में 4,510 पेट्रोल पंप हैं, जिनमें से 421 पंपों पर पेट्रोल और डीजल का स्टॉक खत्म हो गया। वहीं अधिकांश पेट्रोल पंप दोपहिया वाहनों को सिर्फ 2 लीटर और कारों को 10 लीटर पेट्रोल ही बेच रहे हैं। आंध्र प्रदेश पेट्रोल डीलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष गोपाल कृष्ण ने बताया कि कई पेट्रोल पंपों पर डीजल की भारी कमी है। उन्होंने कहा कि औसतन वे 7000 लीटर से अधिक डीजल बेचते हैं, लेकिन अब घबराहट में हो रही खरीदारी के कारण 14,000 लीटर से अधिक डीजल बिक रहा है।


    कई जगहों पर कमी की खबरें

    पेट्रोल और डीजल की कमी ने विजयवाड़ा, गुंटूर, राजमुंद्री, कुरनूल और नेल्लोर सहित कई शहरों में जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया। कई जगह पर पेट्रोल पंप कर्मचारियों द्वारा स्टॉक खत्म होने के बोर्ड लगाने पर वाहन चालकों और पेट्रोल पंप कर्मचारियों के बीच तीखी बहस हुई। प्रसिद्ध पहाड़ी तीर्थ तिरुमाला में भी परिवहन व्यवस्था प्रभावित हुई। यहां दो पेट्रोल पंपों पर स्टॉक खत्म हो गया था। पेट्रोल भरवाने के लिए लाइन में खड़े कुछ लोगों ने मीडिया को बताया कि वे अपनी बाइकों में पेट्रोल भरवाने के लिए कई घंटे से इंतजार कर रहे हैं।


    क्यों बंद करने पड़े पंप?

    सूत्रों ने बताया कि वीकेंड पर, सोशल मीडिया पर कई ऐसी पोस्ट्स वायरल होने लगीं जिनमें कहा जा रहा था कि ईरान अमेरिका युद्ध अभी और बढ़ने वाला है और ईंधन की कमी हो जाएगी। इसके कारण लोग घबराकर खरीदारी करने लगे। अधिकारियों ने बताया कि कई जगहों पर हजारों लोग पेट्रोल पंपों के बाहर खड़े हो गए और जरूरत से ज्यादा ईंधन खरीदने लगे जिसकी वजह से कमी हो गई। मुख्यमंत्री कार्यालय के अधिकारियों ने भी एक बयान में बताया कि रविवार दोपहर तक जो ज्यादातर आउटलेट्स बंद हुए, वे स्टॉक खत्म होने के कारण नहीं, बल्कि पैनिक में की जा रही खरीदारी को रोकने के लिए बंद किए गए थे।


    CM ने मांगी रिपोर्ट

    इस बीच, मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू (Chief Minister Chandrababu Naidu.) ने एक्शन लिया है। उन्होंने जिला कलेक्टरों को तेल की कमी की समस्या से निपटने के लिए तुरंत एक कार्य योजना लागू करने और समस्या के समाधान के लिए विभिन्न विभागों द्वारा उठाए गए कदमों पर सोमवार शाम तक रिपोर्ट देने का निर्देश दिया है। मुख्यमंत्री ने स्थिति का जायजा लेने के लिए मुख्य सचिव जी साई प्रसाद और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ टेलीकॉन्फ्रेंस भी की। अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को बताया कि शनिवार को डीलरों को 10,345 किलो लीटर पेट्रोल और 14,156 किलो लीटर डीजल की आपूर्ति की गई, लेकिन घबराहट में खरीदारी के कारण कई आउटलेट्स पर भारी भीड़ उमड़ पड़ी।

    होर्मुज में नाकेबंदी
    गौरतलब है कि ईरान और अमेरिका के बीच 28 फरवरी को शुरू हुई जंग के बाद से ही दुनिया के सबसे प्रमुख जलमार्ग स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जहाजों की आवाजाही प्रभावी रूप से बंद हो गई है। जंग खत्म होने से वैश्विक तेल व्यापार का 20 फीसदी हिस्सा यहां से होकर गुजरता था। यह इसीलिए अहम है क्योंकि भारत भी अपनी जरूरतों का 85 फीसदी से अधिक हिस्सा आयात करता है और इनमें से ज्यादातर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से होकर ही भारत पहुंचता है। अब इस रास्ते के बंद होने के बाद ऊर्जा संकट बढ़ सकता है। हालांकि केंद्र सरकार ने कहा है कि भारत अपने आयात विकल्पों को बढ़ा रहा है और देश में ईंधन की कोई कमी फिलहाल नहीं है।