Author: bharati

  • केन-बेतवा लिंक परियोजना पर बढ़ा विवाद, 44,600 करोड़ की योजना को लेकर पीएम मोदी ने राज्यों को दिए तेजी से समाधान के निर्देश

    केन-बेतवा लिंक परियोजना पर बढ़ा विवाद, 44,600 करोड़ की योजना को लेकर पीएम मोदी ने राज्यों को दिए तेजी से समाधान के निर्देश

    नई दिल्ली । मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के बीच प्रस्तावित केन-बेतवा लिंक परियोजना एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा के केंद्र में आ गई है। लगभग 44,600 करोड़ रुपये की इस महत्वाकांक्षी जल परियोजना को लेकर प्रधानमंत्री स्तर पर हुई हालिया बैठक में इसके क्रियान्वयन में आ रही बाधाओं पर विस्तार से विचार किया गया। इस दौरान प्रधानमंत्री ने संबंधित राज्यों को निर्देश दिए कि परियोजना से जुड़े लंबित मुद्दों का जल्द समाधान किया जाए ताकि इसे निर्धारित समयसीमा के भीतर आगे बढ़ाया जा सके। यह परियोजना देश की प्रमुख नदी जोड़ो योजनाओं में से एक मानी जाती है, जिसका उद्देश्य जल संसाधनों का बेहतर प्रबंधन और सूखा प्रभावित क्षेत्रों में सिंचाई सुविधा को मजबूत करना है।

    केन-बेतवा लिंक परियोजना के तहत मध्य प्रदेश की केन नदी को उत्तर प्रदेश की बेतवा नदी से जोड़ा जाना प्रस्तावित है। इस योजना के माध्यम से दोनों नदियों के जल प्रवाह को संतुलित कर बुंदेलखंड क्षेत्र में पानी की उपलब्धता बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है। परियोजना पर केंद्र सरकार का बड़ा निवेश प्रस्तावित है, जबकि इसका अधिकांश वित्तीय भार केंद्र द्वारा वहन किया जा रहा है। इस योजना के तहत नहर प्रणाली, बांध निर्माण और जल वितरण ढांचे का व्यापक विकास किया जाएगा, जिससे लाखों हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचाई सुविधा मिलने की उम्मीद है।

    परियोजना का सबसे महत्वपूर्ण पहलू इसका भौगोलिक और पर्यावरणीय प्रभाव है। केन नदी मध्य प्रदेश के कैमूर क्षेत्र से निकलकर उत्तर प्रदेश में यमुना में मिलती है, जबकि बेतवा नदी रायसेन जिले से शुरू होकर आगे बढ़ते हुए यमुना में समाहित होती है। इन दोनों नदियों के प्राकृतिक प्रवाह को जोड़ने के लिए बड़े पैमाने पर इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित किया जाना है, जिसमें बांध, नहरें और पावर उत्पादन इकाइयाँ शामिल हैं। इस परियोजना के माध्यम से कुछ क्षेत्रों में बिजली उत्पादन और जल आपूर्ति को भी बेहतर बनाने की योजना है।

    हालांकि, इस महत्वाकांक्षी योजना के सामने सबसे बड़ी चुनौती प्रभावित गांवों का पुनर्वास और विस्थापन है। परियोजना के कारण लगभग दो दर्जन गांव प्रभावित हो रहे हैं, जिनमें कई गांव जलभराव क्षेत्र में आते हैं, जबकि कुछ वन्यजीव अभयारण्यों के दायरे में स्थित हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि पुनर्वास और मुआवजे की व्यवस्था पर्याप्त नहीं है, जिसके चलते विरोध की स्थिति बनी हुई है। ग्रामीणों और प्रशासन के बीच इस मुद्दे को लेकर लंबे समय से बातचीत जारी है, लेकिन समाधान पूरी तरह सामने नहीं आ सका है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी बड़ी परियोजना के लिए सामाजिक और पर्यावरणीय संतुलन बेहद आवश्यक है। जल संसाधनों के बेहतर उपयोग के साथ-साथ स्थानीय समुदायों के हितों का ध्यान रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यही कारण है कि केंद्र सरकार ने राज्यों को निर्देश दिए हैं कि सभी संबंधित पक्षों से चर्चा कर समाधान निकाला जाए ताकि परियोजना आगे बढ़ सके।

    फिलहाल केन-बेतवा लिंक परियोजना देश की सबसे चर्चित जल परियोजनाओं में शामिल है, जो भविष्य में बुंदेलखंड क्षेत्र की जल समस्या को काफी हद तक हल कर सकती है। लेकिन इसके साथ जुड़े सामाजिक और प्रशासनिक मुद्दे इसे एक जटिल परियोजना भी बनाते हैं। आने वाले समय में इस पर होने वाले निर्णयों पर पूरे क्षेत्र की निगाहें टिकी रहेंगी।

  • कर्नाटक की राजनीति में बड़ा मोड़, 36 साल से अजेय डीके शिवकुमार के सामने अब सबसे कठिन अग्निपरीक्षा

    कर्नाटक की राजनीति में बड़ा मोड़, 36 साल से अजेय डीके शिवकुमार के सामने अब सबसे कठिन अग्निपरीक्षा

    नई दिल्ली । कर्नाटक की राजनीति में हालिया नेतृत्व परिवर्तन ने राज्य के राजनीतिक समीकरणों को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है। कांग्रेस संगठन के भीतर सहमति बनने के बाद डीके शिवकुमार को राज्य की कमान सौंपे जाने के फैसले को आने वाले विधानसभा चुनावों की रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि, इस नई जिम्मेदारी के साथ उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि क्या वे राज्य में पिछले लगभग चार दशकों से चले आ रहे सत्ता परिवर्तन के पैटर्न को बदल पाएंगे।

    राजनीतिक जानकारों के अनुसार कर्नाटक में पिछले करीब 40 वर्षों से यह प्रवृत्ति देखी गई है कि कोई भी सरकार लगातार दोबारा सत्ता में वापसी नहीं कर पाई है। हर चुनाव में मतदाताओं ने बदलाव का रुख अपनाया है, जिससे किसी भी दल के लिए अपनी सत्ता को बरकरार रखना एक कठिन चुनौती साबित हुआ है। इसी संदर्भ में डीके शिवकुमार के नेतृत्व को कांग्रेस की भविष्य की रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है, जहां लक्ष्य केवल शासन चलाना नहीं बल्कि आगामी चुनाव में फिर से जनादेश हासिल करना भी है।

    डीके शिवकुमार का राजनीतिक सफर लंबे संघर्ष और संगठनात्मक कौशल से भरा रहा है। वे छात्र राजनीति से निकलकर राज्य की मुख्यधारा की राजनीति तक पहुंचे और धीरे-धीरे कांग्रेस संगठन में एक मजबूत स्तंभ के रूप में स्थापित हुए। अपने राजनीतिक जीवन में उन्होंने कई चुनावों में सफलता हासिल की है और अब तक पराजय का सामना नहीं करना पड़ा है, जो उन्हें राज्य के प्रमुख नेताओं में एक अलग पहचान देता है। पार्टी संगठन को मजबूत करने और संकट के समय विधायकों को एकजुट रखने में उनकी भूमिका को भी महत्वपूर्ण माना जाता है।

    कांग्रेस ने 2023 के विधानसभा चुनाव में मिली सफलता के बाद उन्हें उपमुख्यमंत्री की जिम्मेदारी सौंपी थी, जहां उन्होंने सरकार और संगठन दोनों स्तर पर सक्रिय भूमिका निभाई। अब मुख्यमंत्री के रूप में उनकी जिम्मेदारी और भी बढ़ गई है, क्योंकि उन्हें न केवल प्रशासनिक स्थिरता बनाए रखनी है, बल्कि आगामी चुनाव के लिए मजबूत जनाधार भी तैयार करना है।

    राज्य की सामाजिक और राजनीतिक संरचना भी इस चुनौती को और जटिल बनाती है। कर्नाटक में विभिन्न समुदायों की भूमिका चुनावी परिणामों को प्रभावित करती रही है। ऐसे में सभी प्रमुख सामाजिक समूहों के बीच संतुलन बनाए रखना सरकार के लिए आवश्यक होगा। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि किसी भी प्रकार का असंतुलन आगामी चुनाव में सीधे परिणामों पर असर डाल सकता है।

    कांग्रेस के लिए यह बदलाव एक रणनीतिक कदम माना जा रहा है, जिसका उद्देश्य संगठन को नई ऊर्जा देना और मतदाताओं के बीच एक नया संदेश पहुंचाना है। वहीं विपक्षी दल भी इस बदलाव को ध्यान में रखते हुए अपनी रणनीति तैयार करने में जुटे हैं। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि डीके शिवकुमार अपने प्रशासनिक अनुभव और संगठनात्मक क्षमता के दम पर कर्नाटक की राजनीति में स्थापित इस लंबे ट्रेंड को बदलने में सफल हो पाते हैं या नहीं।

    आने वाले दो वर्ष न केवल उनके नेतृत्व की परीक्षा होंगे, बल्कि यह भी तय करेंगे कि कर्नाटक की राजनीति में बदलाव की परंपरा जारी रहती है या कोई नया अध्याय शुरू होता है।

  • गांधीनगर में STF की बड़ी कार्रवाई: नशीले कफ सिरप का अवैध जाल उजागर, 10 हिरासत में

    गांधीनगर में STF की बड़ी कार्रवाई: नशीले कफ सिरप का अवैध जाल उजागर, 10 हिरासत में


    भोपाल । भोपाल के गांधीनगर थाना क्षेत्र में देर रात STF ने बड़ी कार्रवाई करते हुए अवैध कफ सिरप बनाने की फैक्ट्री का भंडाफोड़ किया है। यह पूरा अवैध कारोबार एक सामान्य से दिखने वाले मकान के सिर्फ दो कमरों में संचालित किया जा रहा था, जहां नशीले कफ सिरप का उत्पादन, पैकिंग और स्टोरेज किया जा रहा था।

    STF की टीम को लंबे समय से सूचना मिल रही थी कि इलाके में प्रतिबंधित और नशीले तत्वों से युक्त कफ सिरप की सप्लाई का नेटवर्क सक्रिय है। इसी इनपुट के आधार पर गुरुवार देर रात करीब 12 बजे छापा मारा गया, जो शुक्रवार तड़के 3 बजे तक चला। कार्रवाई के दौरान 700 से अधिक पेटियां, पैकिंग मशीनें और बड़ी मात्रा में तैयार माल बरामद किया गया, जिसकी अनुमानित कीमत करीब डेढ़ करोड़ रुपये बताई जा रही है।

    मकान के भीतर ‘आफ कफ’ नाम से अवैध सिरप तैयार किया जा रहा था। एक कमरे में उत्पादन से जुड़ा सामान रखा गया था, जबकि दूसरे कमरे को स्टोरेज और पैकिंग यूनिट के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा था। मौके से मिले सैंपलों को जांच के लिए प्रयोगशाला भेज दिया गया है, ताकि सिरप में मौजूद रसायनों और नशीले तत्वों की पुष्टि की जा सके।

    कार्रवाई के दौरान STF ने मौके से 10 लोगों को हिरासत में लिया है। पूछताछ में सामने आ रहा है कि यह नेटवर्क सिर्फ स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं था, बल्कि कई जिलों में इसकी सप्लाई की जा रही थी। अब STF यह पता लगाने में जुटी है कि इस पूरे रैकेट के पीछे कौन-कौन लोग शामिल हैं और सप्लाई चैन किन-किन राज्यों या शहरों तक फैला हुआ है।

    दिलचस्प बात यह रही कि पूरी कार्रवाई की भनक स्थानीय पुलिस को नहीं लग सकी। STF अधिकारियों के मुताबिक यह एक सुनियोजित छापेमारी थी, ताकि नेटवर्क को मौके पर ही दबोचा जा सके। मकान किसके नाम पर है, इसकी भी जांच की जा रही है। शुरुआती जानकारी के अनुसार यह मकान किसी मालवीय नामक व्यक्ति का बताया जा रहा है, हालांकि उससे अभी संपर्क नहीं हो पाया है।

    STF अब इस बात की भी जांच कर रही है कि अवैध कफ सिरप किन-किन मेडिकल स्टोर्स या अवैध चैनलों के जरिए सप्लाई किया जा रहा था। साथ ही अन्य ठिकानों पर भी दबिश की संभावना जताई जा रही है।

    यह कार्रवाई ऐसे समय में सामने आई है जब देश के अलग-अलग हिस्सों में कफ सिरप की गुणवत्ता और अवैध निर्माण को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। कुछ मामलों में जहरीले केमिकल मिलने से बच्चों की मौत तक की घटनाएं सामने आई हैं, जिससे इस तरह के अवैध नेटवर्क पर सख्ती और बढ़ा दी गई है।

  • सिद्धारमैया आज आएंगे दिल्ली, कांग्रेस चाहती है राष्ट्रीय भूमिका, क्या राहुल गांधी मना पाएंगे?

    सिद्धारमैया आज आएंगे दिल्ली, कांग्रेस चाहती है राष्ट्रीय भूमिका, क्या राहुल गांधी मना पाएंगे?

    नई दिल्ली। कर्नाटक की राजनीति में बड़े बदलाव के बीच पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया अब दिल्ली पहुंच रहे हैं। उनकी यह यात्रा सिर्फ औपचारिक नहीं मानी जा रही, बल्कि कांग्रेस नेतृत्व उन्हें राष्ट्रीय राजनीति में बड़ी जिम्मेदारी देने की तैयारी में है। पार्टी चाहती है कि सिद्धारमैया राज्यसभा जाएं और 2029 लोकसभा चुनाव से पहले संगठन में अहम भूमिका निभाएं।

    सूत्रों के मुताबिक राहुल गांधी खुद सिद्धारमैया से मुलाकात कर उन्हें दिल्ली की राजनीति में सक्रिय होने के लिए मनाने वाले हैं। उनकी सोनिया गांधी से भी मुलाकात प्रस्तावित है। कांग्रेस नेतृत्व का मानना है कि सिद्धारमैया पार्टी के सबसे मजबूत OBC चेहरों में से एक हैं और उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर सामने लाने से पार्टी को राजनीतिक फायदा मिल सकता है।

    खराब मौसम के कारण बदला यात्रा कार्यक्रम
    सिद्धारमैया गुरुवार को दिल्ली के लिए रवाना हुए थे, लेकिन खराब मौसम की वजह से उनका विशेष विमान जयपुर में उतारना पड़ा। उनके साथ कांग्रेस महासचिव रणदीप सिंह सुरजेवाला, मंत्री के.जे. जॉर्ज, बयरती सुरेश, कानूनी सलाहकार पोन्नान्ना, विधान परिषद सदस्य डॉ. यतींद्र और AICC सचिव अभिषेक दत्त भी मौजूद थे। फ्लाइट में देरी होने के कारण रात की प्रस्तावित बैठक टल गई। अब राहुल गांधी और सिद्धारमैया के बीच शुक्रवार सुबह आमने-सामने चर्चा होगी।

    पहले भी दिया गया था राज्यसभा का प्रस्ताव
    बताया जा रहा है कि राहुल गांधी और सिद्धारमैया के बीच पहले हुई करीब 40 मिनट की बातचीत में उन्हें राज्यसभा भेजने का प्रस्ताव दिया गया था। साथ ही 2029 के लोकसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए दिल्ली में बड़ी भूमिका निभाने का संकेत भी दिया गया था। अब इस दिल्ली दौरे में कांग्रेस नेतृत्व एक बार फिर उन्हें मनाने की कोशिश करेगा। पार्टी चाहती है कि सिद्धारमैया OBC और पिछड़े वर्गों के बीच कांग्रेस की पकड़ मजबूत करने में राष्ट्रीय स्तर पर भूमिका निभाएं।

    कर्नाटक में बड़ा राजनीतिक बदलाव
    गुरुवार को कर्नाटक की राजनीति में बड़ा घटनाक्रम सामने आया, जब सिद्धारमैया ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने साफ कहा कि यह फैसला कांग्रेस हाईकमान के निर्देश पर लिया गया है। सिद्धारमैया ने बताया कि उन्होंने अपना इस्तीफा राज्यपाल कार्यालय को सौंप दिया है। उन्होंने कहा कि उन्होंने पहले ही पार्टी नेतृत्व से वादा किया था कि जब भी उनसे पद छोड़ने को कहा जाएगा, वह ऐसा करेंगे। हालांकि राष्ट्रीय राजनीति में जाने की चर्चाओं पर उन्होंने फिलहाल साफ इनकार किया है। सिद्धारमैया का कहना है कि वह कर्नाटक की राजनीति में सक्रिय रहना चाहते हैं।

    भावुक हुए सिद्धारमैया
    इस्तीफे के बाद आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में सिद्धारमैया भावुक नजर आए। उन्होंने कहा कि कर्नाटक के सात करोड़ लोगों की सेवा करने का अवसर मिलना उनके लिए गर्व की बात रही। उन्होंने सोनिया गांधी, राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे का आभार भी जताया। उन्होंने कहा कि वह “संयोग से राजनीति में आए” क्योंकि उनके परिवार का पहले राजनीति से कोई संबंध नहीं था। उन्होंने बुद्ध, बसवेश्वर और बाबा साहेब आंबेडकर के विचारों को अपनी प्रेरणा बताया।

    सरकार के कामकाज का किया बचाव
    सिद्धारमैया ने अपनी सरकार की उपलब्धियों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की गारंटी योजनाओं को लेकर विपक्ष द्वारा लगाए जा रहे आर्थिक बोझ के आरोप गलत हैं। उनका दावा था कि कर्नाटक आज प्रति व्यक्ति आय के मामले में देश में शीर्ष पर है और GST संग्रह में दूसरे स्थान पर है। उन्होंने कहा कि राज्य की विकास दर राष्ट्रीय औसत से बेहतर रही है। कर्ज को लेकर विपक्ष के आरोपों पर उन्होंने कहा कि सरकार ने कानून के दायरे में रहकर ही उधारी ली। उन्होंने यह भी बताया कि कांग्रेस की पांच गारंटी योजनाओं पर अब तक 1.40 लाख करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए जा चुके हैं।

    सरकार की स्थिरता पर दिया भरोसा
    सिद्धारमैया ने कहा कि मुख्यमंत्री बदलने के बावजूद सरकार पर कोई खतरा नहीं है। कांग्रेस के पास विधानसभा में स्पष्ट बहुमत है और सरकार अपना कार्यकाल पूरा करेगी।

  • 8 जून को शुक्र का राशि परिवर्तन, इन जातकों पर बढ़ेगा खर्च और तनाव, रिश्तों में आ सकती हैं परेशानियां

    8 जून को शुक्र का राशि परिवर्तन, इन जातकों पर बढ़ेगा खर्च और तनाव, रिश्तों में आ सकती हैं परेशानियां


    नई दिल्ली।
    ज्योतिष शास्त्र में शुक्र ग्रह को सुख, वैभव, प्रेम, सौंदर्य और भौतिक सुख-सुविधाओं का कारक माना जाता है। 8 जून 2026 को शुक्र देव मिथुन राशि से निकलकर कर्क राशि में प्रवेश करेंगे। कर्क जल तत्व की राशि मानी जाती है, ऐसे में शुक्र का यह राशि परिवर्तन कुछ जातकों के जीवन में आर्थिक दबाव, मानसिक तनाव और रिश्तों में उतार-चढ़ाव ला सकता है।

    ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार यह गोचर खास तौर पर चार राशियों के लिए चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है। आइए जानते हैं किन राशियों को इस दौरान अधिक सतर्क रहने की जरूरत है।

    मिथुन राशि

    शुक्र का गोचर मिथुन राशि वालों के लिए आर्थिक मामलों में परेशानी बढ़ा सकता है। इस दौरान सुख-सुविधाओं और दिखावे पर जरूरत से ज्यादा खर्च होने की संभावना है, जिससे बचत प्रभावित हो सकती है। किसी को पैसा उधार देने से बचें। परिवार में बातचीत के दौरान शब्दों का चयन सोच-समझकर करें, नहीं तो विवाद की स्थिति बन सकती है।

    तुला राशि

    तुला राशि के स्वामी शुक्र ग्रह हैं, इसलिए यह गोचर आपके लिए विशेष प्रभाव डाल सकता है। कार्यक्षेत्र में जिम्मेदारियां बढ़ सकती हैं और सहकर्मियों के साथ तालमेल बैठाने में मुश्किलें आ सकती हैं। ऑफिस पॉलिटिक्स से छवि प्रभावित होने की आशंका रहेगी। इस समय जल्दबाजी में नौकरी बदलने या नया निवेश करने से बचना बेहतर रहेगा।

    धनु राशि

    धनु राशि वालों के लिए शुक्र का यह परिवर्तन अष्टम भाव में होगा, जिसे ज्योतिष में संवेदनशील स्थिति माना जाता है। सेहत से जुड़ी परेशानियां बढ़ सकती हैं, खासकर आंखों और पेट संबंधी दिक्कतें सामने आ सकती हैं। अचानक खर्च बढ़ने से बजट बिगड़ सकता है। वहीं जीवनसाथी या प्रेम संबंधों में गलतफहमियां बढ़ने की आशंका भी रहेगी।

    मकर राशि

    मकर राशि के जातकों के लिए शुक्र का गोचर वैवाहिक और साझेदारी के मामलों में चुनौतियां ला सकता है। जीवनसाथी के साथ विचारों में मतभेद बढ़ सकते हैं और छोटी-छोटी बातों पर तनाव पैदा हो सकता है। यदि आप पार्टनरशिप में व्यापार करते हैं, तो लेनदेन को लेकर विवाद की स्थिति बन सकती है, जिससे कामकाज प्रभावित होगा।

    परेशानियों से बचने के उपाय
    शुक्रवार के दिन सफेद वस्तुओं जैसे चावल, दूध, चीनी या सफेद मिठाई का दान करें।
    नियमित रूप से “ॐ शुं शुक्राय नमः” मंत्र का 108 बार जाप करें।
    घर की महिलाओं और जीवनसाथी का सम्मान करें।
    शुक्रवार को साफ-सुथरे और हल्के रंग के कपड़े पहनना शुभ माना गया है।

  • गर्मी से मिलेगी जल्‍द राहत, भारत की ओर बढ़ रहा बादलों का विशाल सिस्टम, कई राज्यों में बारिश के आसार

    गर्मी से मिलेगी जल्‍द राहत, भारत की ओर बढ़ रहा बादलों का विशाल सिस्टम, कई राज्यों में बारिश के आसार

    नई दिल्ली। उत्तर-पश्चिम भारत में पड़ रही भीषण गर्मी के बीच मौसम अब राहत की खबर लेकर आ रहा है। मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक भारत की ओर करीब 2500 किलोमीटर चौड़ा बादलों का विशाल समूह तेजी से बढ़ रहा है, जिससे कई राज्यों में बारिश और आंधी का दौर शुरू हो सकता है।

    भारत के मौसम उपग्रह इनसैट-3डीएस ने इस विशाल बादल प्रणाली की तस्वीरें कैद की हैं। मौसम विभाग के अनुसार, यह सिस्टम उत्तर और मध्य भारत में सक्रिय मौसम बदलाव का संकेत दे रहा है, जो आने वाले दिनों में तेज बारिश और तापमान में गिरावट ला सकता है।

    उत्तर भारत से मध्य भारत तक फैला बादलों का घना घेरा
    मौसम विभाग द्वारा जारी सैटेलाइट तस्वीरों में पाकिस्तान और उत्तर-पश्चिम भारत से लेकर पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, उत्तर प्रदेश और मध्य भारत के कई हिस्सों तक बादलों का बड़ा जमावड़ा दिखाई दे रहा है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यह सिस्टम भीषण गर्मी के बाद राहत देने वाला साबित हो सकता है। बादलों का यह घना समूह तूफानी गतिविधियों और प्री-मानसून बारिश का संकेत माना जा रहा है।

    दिल्ली में बारिश और तेज हवाओं से राहत
    गुरुवार शाम दिल्ली के कई इलाकों में तेज हवाओं और हल्की बारिश ने मौसम बदल दिया। लंबे समय से जारी गर्मी से लोगों को काफी राहत मिली। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, राजधानी में गरज-चमक के साथ आंधी चली, जिसमें पालम क्षेत्र में हवा की रफ्तार 61 किलोमीटर प्रति घंटा दर्ज की गई।

    तापमान में 5 डिग्री तक गिरावट
    मौसम में बदलाव के बाद दिल्ली के अधिकतम तापमान में 3 से 5 डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट दर्ज की गई। इससे पहले राजधानी के कई इलाकों में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच गया था।

    31 मई तक जारी रह सकता है बारिश का दौर
    मौसम विभाग का अनुमान है कि दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों में 31 मई तक गरज-चमक और बारिश की गतिविधियां जारी रह सकती हैं। मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक राजस्थान के उत्तरी हिस्सों में पहले ही बारिश और आंधी शुरू हो चुकी है। यह मौसम प्रणाली धीरे-धीरे दिल्ली और अन्य उत्तर भारतीय राज्यों की ओर बढ़ रही है।

    गुजरात की ओर बढ़ेगा सिस्टम
    विशेषज्ञों का कहना है कि शुक्रवार को तूफानी गतिविधियां और तेज हो सकती हैं। यह सिस्टम 30 मई तक सक्रिय रहेगा और इसके बाद 30-31 मई के बीच गुजरात की ओर बढ़ने की संभावना है।

    इन वजहों से बदला मौसम
    मौसम विभाग ने बताया कि पश्चिमी विक्षोभ, राजस्थान और आसपास बने चक्रवाती परिसंचरण तथा बंगाल की खाड़ी से आ रही नमी भरी हवाओं के कारण मौसम में यह बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। विभाग का कहना है कि इस बार होने वाली प्री-मानसून बारिश अप्रैल और मई की शुरुआत में हुई बारिश से अधिक प्रभावी और व्यापक हो सकती है।

  • सीएम बनने से पहले डीके शिवकुमार को बड़ी राहत, कोर्ट ने दी विदेश यात्रा की मंजूरी

    सीएम बनने से पहले डीके शिवकुमार को बड़ी राहत, कोर्ट ने दी विदेश यात्रा की मंजूरी

    बेंगलुरु। कर्नाटक के भावी मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार को बेंगलुरु की विशेष अदालत से बड़ी राहत मिली है। अदालत ने उन्हें 2017 के आयकर चोरी मामले में दो साल की अवधि के लिए विदेश यात्रा करने की अनुमति दे दी है। हालांकि, यह अनुमति कुछ सख्त शर्तों के साथ दी गई है।

    अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट केएन शिवकुमार ने डीके शिवकुमार की उस याचिका को मंजूरी दी, जिसमें उन्होंने आधिकारिक और व्यावसायिक कार्यों के लिए विदेश जाने की अनुमति मांगी थी। यह अनुमति उनकी जमानत शर्तों में संशोधन के तहत दी गई है।

    किन देशों की यात्रा कर सकेंगे
    अदालत ने डीके शिवकुमार को अगले दो वर्षों के दौरान कई देशों की यात्रा की अनुमति दी है, जिनमें शामिल हैं-
    अमेरिका
    यूरोपीय देश
    यूनाइटेड किंगडम
    ऑस्ट्रेलिया
    रूस
    अरब देश

    कोर्ट की सख्त शर्तें लागू
    अदालत ने स्पष्ट किया है कि हर विदेश यात्रा से पहले डीके शिवकुमार को अपने यात्रा कार्यक्रम की पूरी जानकारी जांच एजेंसी को देनी होगी। इसके अलावा उन्हें अदालत के समक्ष आवश्यकतानुसार पेश होना होगा।

    कोर्ट ने यह भी चेतावनी दी है कि यदि किसी भी शर्त का उल्लंघन होता है, तो जांच एजेंसी या अभियोजन पक्ष विदेश यात्रा की अनुमति रद्द कराने के लिए अदालत में आवेदन कर सकता है। 15 मई के आदेश में अदालत ने यह भी कहा था कि किसी भी तरह की चूक होने पर जांच एजेंसी आवश्यक कार्रवाई के लिए स्वतंत्र होगी।

    क्या है पूरा मामला
    यह मामला 2017 में आयकर विभाग की छापेमारी से जुड़ा है। जांच एजेंसी का आरोप है कि बेंगलुरु-मैसूरु हाईवे स्थित ईगलटन गोल्फ रिजॉर्ट सहित कई स्थानों पर तलाशी के दौरान सबूतों को नष्ट करने की कोशिश की गई थी। इस दौरान लगभग 8.83 करोड़ रुपये नकद बरामद होने का दावा भी किया गया था।

    इस मामले में डीके शिवकुमार के साथ अन्य लोग भी आरोपी हैं और उनके खिलाफ आयकर अधिनियम तथा आईपीसी की विभिन्न धाराओं में केस दर्ज है। हालांकि डीके शिवकुमार लगातार इन आरोपों को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताते रहे हैं।

    अदालत ने क्यों दी अनुमति
    अदालत ने अपने आदेश में कहा कि डीके शिवकुमार को अपने विभागीय कार्यों और कारोबारी गतिविधियों के विस्तार के लिए विदेश यात्रा की आवश्यकता पड़ सकती है। उनके द्वारा दिए गए कारण प्रथम दृष्टया उचित प्रतीत होते हैं।

    कोर्ट ने यह भी माना कि इसी मामले में एक अन्य आरोपी को पहले विदेश यात्रा की अनुमति दी जा चुकी है, इसलिए समान आधार पर उन्हें भी राहत दी गई है। साथ ही अदालत ने यह भी नोट किया कि कुछ सह-आरोपियों के मामलों पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगाई हुई है, ऐसे में फिलहाल ट्रायल के लिए उनकी व्यक्तिगत उपस्थिति अनिवार्य नहीं मानी गई है।

    राजनीतिक पृष्ठभूमि भी चर्चा में
    यह राहत ऐसे समय में आई है जब कर्नाटक की राजनीति में नेतृत्व परिवर्तन और मुख्यमंत्री पद को लेकर चर्चाएं तेज हैं। कांग्रेस नेता सिद्धारमैया ने हाल ही में मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दिया है, जिससे राज्य में सत्ता संतुलन को लेकर नई राजनीतिक हलचल शुरू हो गई है।

  • एमपी में बदला मौसम का मिजाज, ग्वालियर-मुरैना में बारिश, कई जिलों में लू और ओलावृष्टि का अलर्ट

    एमपी में बदला मौसम का मिजाज, ग्वालियर-मुरैना में बारिश, कई जिलों में लू और ओलावृष्टि का अलर्ट

    भोपाल। मध्य प्रदेश में नौतपा के बीच मौसम ने अचानक करवट ले ली है। शुक्रवार सुबह से ग्वालियर में रुक-रुक कर बारिश हो रही है, जबकि मुरैना में तेज बारिश दर्ज की गई। मौसम में आए इस बदलाव से लोगों को भीषण गर्मी और उमस से राहत मिली है। गुरुवार को भी दमोह सहित कई जिलों में बारिश और ओलावृष्टि हुई थी।

    मौसम विभाग ने शुक्रवार को ग्वालियर, मुरैना, श्योपुर, निवाड़ी, टीकमगढ़ और छतरपुर में तीव्र लू का ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। वहीं भोपाल, जबलपुर समेत 27 जिलों में हीटवेव का येलो अलर्ट घोषित किया गया है। इन जिलों में तापमान 43 डिग्री सेल्सियस से ऊपर रहने की संभावना है।

    10 शहरों में पारा 45 डिग्री के पार, खजुराहो सबसे गर्म
    प्रदेश में 25 मई से नौतपा की शुरुआत के साथ ही तेज गर्मी का दौर जारी है। 18 मई से खजुराहो और नौगांव सबसे गर्म क्षेत्र बने हुए हैं, जहां तापमान 47 डिग्री सेल्सियस के करीब पहुंच चुका है। गुरुवार को नौतपा के चौथे दिन प्रदेश के 10 शहरों में तापमान 45 डिग्री या उससे अधिक दर्ज किया गया। खजुराहो सबसे गर्म रहा, जहां अधिकतम तापमान 46.5 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। इसके अलावा राजगढ़ में 46 डिग्री, दतिया में 45.7 डिग्री, नौगांव, दमोह और मलाजखंड में 45.5 डिग्री, टीकमगढ़ में 45.2 डिग्री, सतना में 45.1 डिग्री तथा मंडला और सागर में 45 डिग्री तापमान दर्ज हुआ। गुना में 44.7 डिग्री, श्योपुर में 44.6 डिग्री, रायसेन में 44.2 डिग्री और रीवा व छिंदवाड़ा में तापमान 44 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। प्रदेश के प्रमुख शहरों में ग्वालियर सबसे गर्म रहा, जहां तापमान 44.7 डिग्री दर्ज किया गया। जबलपुर में 44 डिग्री, भोपाल में 43.8 डिग्री, उज्जैन में 42.5 डिग्री और इंदौर में 41.8 डिग्री सेल्सियस तापमान रिकॉर्ड हुआ।

    30 मई से बदलेगा मौसम, आंधी-बारिश और ओलों की संभावना
    मौसम विभाग के अनुसार 30 मई से 1 जून तक प्रदेश के कई हिस्सों में तेज आंधी, बारिश और ओलावृष्टि हो सकती है। 30 मई को अधिकांश जिलों में आंधी और बारिश की चेतावनी जारी की गई है। हालांकि इंदौर और नर्मदापुरम संभाग में गर्मी का असर बना रह सकता है। 31 मई और 1 जून को भी प्रदेश में ऐसा ही मौसम रहने का अनुमान है। इन तीन दिनों के दौरान कहीं भी हीटवेव का अलर्ट जारी नहीं किया गया है।

    भोपाल में नौतपा के दौरान बारिश का रिकॉर्ड
    भोपाल में पिछले 14 वर्षों में 7 बार नौतपा के दौरान बारिश दर्ज की गई है, जबकि 2 बार बूंदाबांदी हुई। इस बार भी नौतपा की शुरुआत में हल्की बूंदाबांदी देखने को मिली। वर्ष 2018 और 2019 में सबसे ज्यादा गर्मी पड़ी थी, जब औसत तापमान 43 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंच गया था।

    आज का अलर्ट
    ऑरेंज अलर्ट (तीव्र लू): ग्वालियर, मुरैना, श्योपुर, निवाड़ी, टीकमगढ़ और छतरपुर।
    येलो अलर्ट (हीटवेव): भोपाल, विदिशा, रायसेन, सागर, गुना, अशोकनगर, शिवपुरी, नरसिंहपुर, नीमच, मंदसौर, आगर-मालवा, राजगढ़, शाजापुर, सीहोर, जबलपुर, दमोह, कटनी, पन्ना, सतना, मैहर, उमरिया, शहडोल, खरगोन, भिंड, दतिया, खंडवा और बुरहानपुर।
    तेज गर्मी वाले जिले: इंदौर, उज्जैन, देवास, हरदा, नर्मदापुरम, बैतूल, बड़वानी, अलीराजपुर, झाबुआ, धार और रतलाम।

    आंधी-बारिश की संभावना:
    छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, सिवनी, बालाघाट, मंडला, डिंडौरी, अनूपपुर, रीवा, मऊगंज, सीधी और सिंगरौली।

    मौसम विभाग ने 29 मई से 1 जून तक का पूर्वानुमान जारी करते हुए कहा है कि शुक्रवार को प्रदेश में गर्मी, बारिश और ओलावृष्टि जैसे मिश्रित मौसम की स्थिति बनी रह सकती है, जबकि 30 मई से बारिश का दौर तेज होने की संभावना है।

  • उत्तराखंड में जंगलों की आग विकराल: मदद न करने वालों पर होगी जेल कार्रवाई, 2 लोगों की मौत

    उत्तराखंड में जंगलों की आग विकराल: मदद न करने वालों पर होगी जेल कार्रवाई, 2 लोगों की मौत


    नई दिल्ली। उत्तराखंड में बढ़ती गर्मी के साथ जंगलों में आग अब भयावह रूप लेती जा रही है। पहाड़ी इलाकों से शुरू हुई वनाग्नि अब मैदानी जिलों तक फैल चुकी है। हालात इतने गंभीर हो गए हैं कि राज्य सरकार और वन विभाग को सख्त कदम उठाने पड़े हैं। लगातार फैल रही आग के बीच सरकार ने साफ कर दिया है कि जंगलों की आग बुझाने में सहयोग नहीं करने वालों पर अब कानूनी कार्रवाई की जाएगी। दोषी पाए जाने पर जेल और जुर्माने दोनों का प्रावधान रहेगा।

    वन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, इस सीजन में अब तक राज्यभर में 460 से अधिक वनाग्नि की घटनाएं सामने आ चुकी हैं, जिनमें लगभग 380 हेक्टेयर वन क्षेत्र प्रभावित हुआ है। गुरुवार को ही प्रदेश में 37 नई घटनाएं दर्ज की गईं। देहरादून जिला अब सबसे ज्यादा प्रभावित इलाकों में शामिल हो गया है। यहां के चार वन प्रभागों में करीब 74 हेक्टेयर जंगल जल चुके हैं, जबकि चमोली जिले में 68 हेक्टेयर वन क्षेत्र आग की चपेट में आया है।

    वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि लगातार बढ़ते तापमान, बारिश की कमी, सूखी वनस्पतियों और तेज हवाओं के कारण आग तेजी से फैल रही है। कई क्षेत्रों में दुर्गम पहाड़ी रास्तों के चलते आग बुझाने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। राज्यभर में हाई अलर्ट जारी कर संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त टीमें तैनात कर दी गई हैं।

    सबसे ज्यादा नुकसान देहरादून के कालसी वन प्रभाग में हुआ है, जहां करीब 37 हेक्टेयर जंगल जल गए। वहीं चकराता, मसूरी और दून डिवीजन के जंगल भी आग की चपेट में हैं। दूसरी ओर चमोली जिले के बद्रीनाथ वन प्रभाग और अलकनंदा सॉयल कंजर्वेशन क्षेत्र में भी आग ने भारी तबाही मचाई है। यहां दो लोगों की मौत की भी पुष्टि हुई है।

    वन विभाग अब सख्त रुख अपनाने जा रहा है। बदरीनाथ-केदारनाथ वन प्रभाग के डीएफओ एसके दुबे ने कहा कि जंगलों में आग बुझाने में सहयोग नहीं करने वालों के खिलाफ केस दर्ज किए जाएंगे। इसमें वन उपज लेने वाले, लकड़ी कटान की अनुमति प्राप्त लोग, मवेशी चराने वाले और जंगलों के आसपास रहने वाले ग्रामीण भी शामिल हो सकते हैं। संशोधित नियमों के अनुसार दोषी पाए जाने पर एक वर्ष तक की जेल और दो हजार रुपए तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।

    चकराता के देवघर रेंज क्षेत्र में बुधवार रात लगी आग को गुरुवार दोपहर तक काबू किया गया। इस आग में करीब साढ़े सात हेक्टेयर जंगल जल गए, जबकि वन विभाग ने करीब 428 हेक्टेयर जंगल को बचा लिया। वनकर्मियों ने लगातार 12 घंटे तक मशक्कत कर आग पर नियंत्रण पाया। मामले में अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा भी दर्ज किया गया है।

    इधर त्यूणी और उत्तरकाशी के जंगल भी लगातार धधक रहे हैं। कई इलाकों में किसानों के बाग-बगीचों को भारी नुकसान पहुंचा है और सैकड़ों सेब के पेड़ जल गए हैं। देहरादून शहर में भी अलग-अलग जगहों पर आग लगने की घटनाएं सामने आई हैं, जिनमें जंगल, ट्रांसफॉर्मर और दुकानों तक को नुकसान पहुंचा है।

    वन विभाग ने लोगों से अपील की है कि जंगलों में आग लगने की सूचना तुरंत प्रशासन को दें और आग बुझाने में सहयोग करें। अधिकारियों का कहना है कि यदि समय रहते हालात नियंत्रित नहीं हुए तो आने वाले दिनों में स्थिति और गंभीर हो सकती है।

  • अब 100, 101, 108 नहीं… इमरजेंसी में सिर्फ 112 करेगा मदद, सुप्रीम कोर्ट का बड़ा आदेश

    अब 100, 101, 108 नहीं… इमरजेंसी में सिर्फ 112 करेगा मदद, सुप्रीम कोर्ट का बड़ा आदेश


    नई दिल्ली। देश में आपातकालीन सेवाओं को लेकर अब बड़ा बदलाव होने जा रहा है। पुलिस, फायर ब्रिगेड, एंबुलेंस और महिला हेल्पलाइन जैसे अलग-अलग नंबरों की जगह अब सिर्फ एक नंबर ‘112’ ही लोगों की मदद के लिए इस्तेमाल होगा। सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिया है कि अगले तीन महीने के भीतर सभी इमरजेंसी हेल्पलाइन नंबरों को तकनीकी और संचालन स्तर पर ‘112’ से जोड़ दिया जाए।

    सुप्रीम कोर्ट की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब सड़क हादसों और आपातकालीन स्थितियों में समय पर मदद नहीं मिलने के मामले लगातार सामने आते रहे हैं। अदालत ने स्पष्ट कहा कि नागरिकों को समय पर ट्रॉमा केयर और आपातकालीन इलाज मिलना संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार का अहम हिस्सा है। कोर्ट ने कहा कि देशभर में इमरजेंसी रिस्पॉन्स सिस्टम को एक समान और अधिक प्रभावी बनाने की जरूरत है।

    यह आदेश जस्टिस जेके माहेश्वरी और एएस चंदूरकर की पीठ ने जारी किया। अदालत ने कहा कि मौजूदा समय में अलग-अलग सेवाओं के लिए कई नंबर होने से आम लोगों को भ्रम की स्थिति का सामना करना पड़ता है। ऐसे में एकीकृत हेल्पलाइन नंबर लागू करना जरूरी हो गया है।

    सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक, अब 100, 101, 102, 108, 1033 और 1091 जैसे सभी हेल्पलाइन नंबरों को ‘112’ में समाहित किया जाएगा। इसका मतलब यह होगा कि किसी भी तरह की इमरजेंसी में नागरिकों को सिर्फ एक नंबर डायल करना होगा और संबंधित सेवा तुरंत उपलब्ध कराई जाएगी।

    अदालत ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिया है कि वे अगले तीन महीने में इस व्यवस्था को पूरी तरह लागू करें और इसके बाद अनुपालन रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में पेश करें। कोर्ट ने यह भी कहा कि ‘हेल्पलाइन 112’ को लेकर व्यापक स्तर पर जनजागरूकता अभियान चलाया जाए, ताकि देश के हर नागरिक तक इसकी जानकारी पहुंच सके।

    सिर्फ हेल्पलाइन नंबर को एकीकृत करने तक ही अदालत ने खुद को सीमित नहीं रखा। सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों को ‘गुड समैरिटन कानून’ के तहत एक प्रभावी शिकायत निवारण प्रणाली विकसित करने का भी आदेश दिया है। इसका उद्देश्य सड़क हादसों में घायल लोगों की मदद करने वाले नागरिकों को कानूनी सुरक्षा और प्रोत्साहन देना है।

    इसके अलावा अदालत ने केंद्र सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय और सड़क परिवहन मंत्रालय को निर्देश दिया है कि तीन महीने के भीतर ट्रॉमा मामलों के लिए एक राष्ट्रीय ‘मेडिकल रेस्क्यू प्रोटोकॉल’ तैयार किया जाए। यह प्रोटोकॉल जारी होने के बाद राज्यों को अगले तीन महीने में उसे अपने यहां लागू करना होगा।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला देश में आपातकालीन सेवाओं को तेज, सरल और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में बड़ा कदम साबित हो सकता है। एकीकृत हेल्पलाइन सिस्टम लागू होने से हादसों और संकट की घड़ी में लोगों को तेजी से सहायता मिल सकेगी और कई जानें बचाई जा सकेंगी।