Author: bharati

  • IPL में नया इतिहास: Jofra Archer की धमाकेदार गेंदबाजी, टीम के लिए साबित हुए मैच विनर

    IPL में नया इतिहास: Jofra Archer की धमाकेदार गेंदबाजी, टीम के लिए साबित हुए मैच विनर


    नई दिल्ली । आईपीएल 2026 में राजस्थान रॉयल्स के तेज गेंदबाज जोफ्रा आर्चर ने एक बड़ा कीर्तिमान अपने नाम कर लिया है। लखनऊ सुपर जाएंट्स के खिलाफ शानदार गेंदबाजी करते हुए आर्चर ने न सिर्फ टीम को जीत दिलाई, बल्कि राजस्थान रॉयल्स के इतिहास में सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाज बनकर युजवेंद्र चहल का रिकॉर्ड भी तोड़ दिया।
    आर्चर ने तोड़ा चहल का रिकॉर्ड
    लखनऊ के इकाना स्टेडियम में खेले गए मुकाबले में जैसे ही जोफ्रा आर्चर ने अपना दूसरा विकेट लिया, उन्होंने युजवेंद्र चहल को पीछे छोड़ दिया। इसके बाद अपने स्पेल में दो और विकेट लेकर उन्होंने राजस्थान रॉयल्स के लिए कुल 68 विकेट पूरे कर लिए।
    अब राजस्थान रॉयल्स के लिए आईपीएल इतिहास में सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाज जोफ्रा आर्चर बन गए हैं। इससे पहले यह रिकॉर्ड युजवेंद्र चहल के नाम था, जिन्होंने 66 विकेट लिए थे।
    राजस्थान के लिए सबसे सफल गेंदबाज
    राजस्थान रॉयल्स के इतिहास में आर्चर की यह उपलब्धि उन्हें खास बनाती है। उनके बाद सूची में युजवेंद्र चहल, सिद्धार्थ त्रिवेदी, शेन वॉटसन और शेन वॉर्न जैसे दिग्गज गेंदबाज शामिल हैं। ये सभी खिलाड़ी अपने-अपने समय में टीम के लिए अहम योगदान दे चुके हैं।
    आईपीएल करियर में भी चमके आर्चर
    अगर आईपीएल करियर की बात करें तो जोफ्रा आर्चर के नाम कुल 70 से ज्यादा विकेट दर्ज हैं। उन्होंने कुछ समय मुंबई इंडियंस के लिए भी खेला था, लेकिन राजस्थान रॉयल्स के साथ उनका प्रदर्शन हमेशा बेहतर रहा है। उनकी गति, सटीक लाइन-लेंथ और डेथ ओवर्स में विकेट निकालने की क्षमता उन्हें खास बनाती है।

    राजस्थान रॉयल्स के दिग्गजों की सूची

    राजस्थान रॉयल्स के लिए सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाजों की सूची इस प्रकार है-

    जोफ्रा आर्चर – 68 विकेट
    युजवेंद्र चहल – 66 विकेट
    सिद्धार्थ त्रिवेदी – 65 विकेट
    शेन वॉटसन – 61 विकेट
    शेन वॉर्न – 57 विकेट

    टीम के लिए बड़ा संबल
    आर्चर का यह प्रदर्शन राजस्थान रॉयल्स के लिए बड़ी राहत और ताकत दोनों है। लगातार विकेट निकालने की उनकी क्षमता ने टीम को कई अहम मुकाबलों में जीत दिलाई है। इस सीजन में उनका फॉर्म टीम के प्लेऑफ की उम्मीदों को भी मजबूत कर रहा है।

    जोफ्रा आर्चर का यह रिकॉर्ड न सिर्फ उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि है, बल्कि राजस्थान रॉयल्स के इतिहास में एक नया अध्याय भी जोड़ता है। चहल जैसे अनुभवी स्पिनर को पीछे छोड़कर आर्चर का शीर्ष पर पहुंचना साबित करता है कि वह इस समय आईपीएल के सबसे खतरनाक गेंदबाजों में से एक हैं।
  • IPL में बड़ा उलटफेर: गेंदबाजों की मेहनत बेकार, Rajasthan Royals ने अंक तालिका में लगाई छलांग

    IPL में बड़ा उलटफेर: गेंदबाजों की मेहनत बेकार, Rajasthan Royals ने अंक तालिका में लगाई छलांग


    नई दिल्ली । इकाना स्टेडियम में खेले गए आईपीएल 2026 के एक रोमांचक मुकाबले में राजस्थान रॉयल्स ने शानदार प्रदर्शन करते हुए लखनऊ सुपर जाएंट्स को 40 रनों से हरा दिया। राजस्थान ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 20 ओवर में 6 विकेट खोकर 159 रन बनाए, जिसके जवाब में लखनऊ की पूरी टीम 18 ओवर में 119 रन पर ऑलआउट हो गई।
    राजस्थान की संभली हुई बल्लेबाजी
    टॉस हारकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी राजस्थान की शुरुआत थोड़ी लड़खड़ाई, लेकिन टीम ने धीरे-धीरे पारी को संभाल लिया। यशस्वी जायसवाल और वैभव सूर्यवंशी ने शुरुआत में 32 रनों की साझेदारी की। हालांकि जल्द ही विकेट गिरने का सिलसिला शुरू हो गया और टीम ने 32 रन पर ही तीन विकेट खो दिए।
    इसके बाद कप्तान रियान पराग और शिमरॉन हेटमायर ने पारी को संभालने की कोशिश की। अंत में रवींद्र जडेजा ने नाबाद 43 रनों की जिम्मेदार पारी खेली और शुभम दुबे के साथ मिलकर टीम को 159 के चुनौतीपूर्ण स्कोर तक पहुंचाया।
    लखनऊ की बल्लेबाजी बिखरी
    160 रनों के लक्ष्य का पीछा करने उतरी लखनऊ सुपर जाएंट्स की शुरुआत बेहद खराब रही। टीम ने सिर्फ 11 रनों के अंदर तीन बड़े विकेट गंवा दिए, जिसमें ऋषभ पंत, एडेन मार्करम और आयुष बडोनी बिना खाता खोले आउट हो गए।
    मिचेल मार्श ने 55 रनों की जुझारू पारी खेलकर कुछ उम्मीद जगाई, लेकिन उन्हें किसी अन्य बल्लेबाज का साथ नहीं मिला। पूरी टीम 119 रन पर सिमट गई और लखनऊ को घरेलू मैदान पर एक और हार का सामना करना पड़ा।
    आर्चर की घातक गेंदबाजी
    राजस्थान की जीत में सबसे बड़ा योगदान गेंदबाजों का रहा। जोफ्रा आर्चर ने 3 विकेट लेकर लखनऊ की बल्लेबाजी को झकझोर दिया। नांद्रे बर्गर और अन्य गेंदबाजों ने भी अहम मौके पर विकेट निकालकर टीम को मजबूत स्थिति में पहुंचाया।
    अंक तालिका में बड़ा बदलाव
    इस जीत के साथ राजस्थान रॉयल्स अंक तालिका में दूसरे स्थान पर पहुंच गई है। टीम ने 7 में से 5 मैच जीतकर 10 अंक हासिल किए हैं। वहीं लखनऊ सुपर जाएंट्स को 7 में से 5 हार के बाद निचले पायदान पर रहना पड़ा है।
    राजस्थान रॉयल्स ने एक बार फिर साबित किया कि उनकी टीम संतुलित है। गेंदबाजी और बल्लेबाजी दोनों विभागों में शानदार प्रदर्शन के दम पर उन्होंने आसान जीत दर्ज की। दूसरी ओर लखनऊ की लगातार असफल बल्लेबाजी चिंता का विषय बनी हुई है।
  • बद्रीनाथ धाम के अद्भुत रहस्य, 6 महीने बंद रहने के बाद भी जलती मिलती है अखंड ज्योति..

    बद्रीनाथ धाम के अद्भुत रहस्य, 6 महीने बंद रहने के बाद भी जलती मिलती है अखंड ज्योति..

    देहरादून । बद्रीनाथ धाम के कपाट 23 अप्रैल 2026 की सुबह 6 बजे खोल दिए गए हैं। इसके साथ ही अगले छह महीनों तक श्रद्धालु भगवान बद्रीनाथ के दर्शन कर सकेंगे और इस पवित्र स्थल के दिव्य वातावरण में आध्यात्मिक शांति का अनुभव करेंगे। इसी मौके पर बद्रीनाथ धाम से जुड़े कुछ ऐसे रहस्य और मान्यताएं चर्चा में हैं, जिनका वैज्ञानिक प्रमाण भले ही न हो, लेकिन श्रद्धालुओं की आस्था में इनका विशेष स्थान है।

    6 महीने बंद रहने के बाद भी जलती रहती है अखंड ज्योति
    मान्यता के अनुसार, शीतकाल में मंदिर के कपाट बंद करने से पहले यहां एक बड़ा घी का दीपक जलाया जाता है, जिसे अखंड ज्योति कहा जाता है। आश्चर्य की बात यह है कि छह महीने बाद जब मंदिर के कपाट फिर खोले जाते हैं, तो यह दीपक जलता हुआ मिलता है। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि इस दौरान देवतागण स्वयं इस ज्योति की रक्षा करते हैं। मंदिर खुलने पर सबसे पहले इसी दिव्य ज्योति के दर्शन कराए जाते हैं, जिसे अत्यंत शुभ माना जाता है।

    कुत्ते नहीं भौंकते और माहौल रहता है शांत
    स्थानीय मान्यताओं के अनुसार बद्रीनाथ धाम में कुत्तों का भौंकना नहीं सुना जाता। इसे मंदिर के आध्यात्मिक और शांत वातावरण से जोड़ा जाता है। श्रद्धालुओं का मानना है कि यह स्थान इतना पवित्र और दिव्य है कि यहां हर जीव शांत व्यवहार करता है।

    सांप-बिच्छुओं को लेकर अनोखी मान्यता
    धार्मिक कथाओं और लोक मान्यताओं में कहा जाता है कि बद्रीनाथ क्षेत्र में पाए जाने वाले सांप और बिच्छू विषहीन होते हैं। मान्यता है कि भगवान विष्णु ने यहां नर-नारायण स्वरूप में तप किया था, जिससे यह भूमि अत्यंत पवित्र और शांत मानी जाती है। इसी कारण यहां के जीव-जंतु किसी को हानि नहीं पहुंचाते। हालांकि वैज्ञानिक रूप से इसका कोई प्रमाण नहीं है, लेकिन यह क्षेत्र की आध्यात्मिक छवि को और गहरा बनाता है।

    आस्था और आध्यात्म का संगम
    बद्रीनाथ धाम से जुड़ी ये मान्यताएं भले ही लोक आस्था और परंपराओं पर आधारित हों, लेकिन यह स्थान सदियों से श्रद्धा और आस्था का केंद्र रहा है। हर साल लाखों श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं और इस दिव्य धाम की अलौकिक अनुभूति को महसूस करते हैं।

  • अटल पेंशन योजना में हो सकती है बढ़ोत्‍तरी, ₹10,000 तक करने पर सरकार कर रही विचार

    अटल पेंशन योजना में हो सकती है बढ़ोत्‍तरी, ₹10,000 तक करने पर सरकार कर रही विचार

    नई दिल्ली । भारत सरकार असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के लिए सामाजिक सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाने पर विचार कर रही है। बढ़ती महंगाई और रिटायरमेंट के बाद बढ़ते खर्चों को देखते हुए, सरकार अटल पेंशन योजना (APY) के तहत मिलने वाली न्यूनतम पेंशन की ऊपरी सीमा को बढ़ाकर ₹10,000 प्रति माह तक करने की संभावना पर मंथन कर रही है। यह जानकारी मिंट ने तीन सरकारी अधिकारियों के हवाले से दी है, जिन्होंने नाम सार्वजनिक नहीं किया।

    असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों पर फोकस
    भारत में असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों की हिस्सेदारी करीब 90% है। इनमें रेहड़ी-पटरी वाले, घरेलू कामगार, दिहाड़ी मजदूर और स्वरोजगार करने वाले लोग शामिल हैं। इस वर्ग के लिए नौकरी की सुरक्षा, नियमित वेतन और सामाजिक सुरक्षा सुविधाएं सीमित होती हैं, जिससे बुढ़ापे में आर्थिक असुरक्षा बढ़ जाती है।

    क्या है अटल पेंशन योजना?
    अटल पेंशन योजना की शुरुआत मई 2015 में की गई थी, जिसका उद्देश्य असंगठित क्षेत्र के लोगों को वृद्धावस्था में आर्थिक सहारा देना है। फिलहाल इस योजना के तहत 60 वर्ष की आयु के बाद ₹1,000 से ₹5,000 प्रति माह तक की गारंटीड पेंशन दी जाती है। हालांकि, बढ़ती महंगाई के कारण यह राशि अब पर्याप्त नहीं मानी जा रही है।

    सदस्यता तो बढ़ी, लेकिन नियमित योगदान में कमी
    अब तक इस योजना से 9 करोड़ से अधिक लोग जुड़ चुके हैं। हालांकि इनमें से लगभग आधे सदस्य समय पर नियमित योगदान नहीं कर रहे हैं। वित्त वर्ष 2025-26 में अब तक 1.35 करोड़ नए सदस्य जुड़े हैं, जो योजना के प्रति बढ़ती रुचि को दर्शाता है। सरकार का मानना है कि पेंशन राशि बढ़ाने से न केवल नए लोग जुड़ेंगे, बल्कि पुराने सदस्य भी योजना में बने रहेंगे।

    पेंशन बढ़ाने पर चल रहा मंथन
    वित्त मंत्रालय और पेंशन फंड नियामक प्राधिकरण (PFRDA) मिलकर इस प्रस्ताव पर काम कर रहे हैं। विचार यह है कि वर्तमान अधिकतम पेंशन सीमा को ₹8,000 से बढ़ाकर ₹10,000 प्रति माह तक किया जाए। अधिकारियों के अनुसार, यह कदम योजना को मौजूदा आर्थिक परिस्थितियों के अनुरूप बनाएगा और इसे अधिक आकर्षक भी करेगा।

    सरकारी योगदान और विस्तार की योजना
    शुरुआती वर्षों में सरकार ने कुछ लाभार्थियों को सह-योगदान (co-contribution) भी दिया था। अब सरकार इस योजना को गांव-गांव तक पहुंचाने के लिए ‘पेंशन सखी’ और बिजनेस कॉरेस्पॉन्डेंट नेटवर्क का विस्तार करने की तैयारी में है। योजना को वित्त वर्ष 2031 तक जारी रखने की मंजूरी पहले ही दी जा चुकी है।

    खजाने पर सीमित असर की संभावना
    विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रस्ताव से सरकारी वित्त पर बड़ा बोझ नहीं पड़ेगा, क्योंकि यह योजना मुख्य रूप से लाभार्थियों के अपने योगदान पर आधारित है। ऐसे में पेंशन राशि बढ़ने के बावजूद राजकोष पर सीमित प्रभाव ही पड़ेगा।

  • गर्मियों में चिड़चिड़ापन और गुस्सा क्यों बढ़ता है? इन उपायों से पाएं मन की शांति

    गर्मियों में चिड़चिड़ापन और गुस्सा क्यों बढ़ता है? इन उपायों से पाएं मन की शांति


    नई दिल्ली। गर्मी का मौसम शुरू होते ही सिर्फ तापमान ही नहीं बढ़ता, बल्कि इसका असर हमारे शरीर और मन पर भी साफ दिखाई देने लगता है। तेज धूप और गर्म हवाओं के कारण शरीर में पित्त दोष बढ़ जाता है, जिससे चिड़चिड़ापन, गुस्सा, बेचैनी और मानसिक अस्थिरता जैसी समस्याएं बढ़ने लगती हैं। आयुर्वेद के अनुसार जब शरीर का आंतरिक ताप असंतुलित हो जाता है, तो व्यक्ति छोटी-छोटी बातों पर भी जल्दी प्रतिक्रिया देने लगता है और मानसिक शांति भंग हो जाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस मौसम में शरीर को ठंडक और संतुलन देने वाली दिनचर्या अपनाना बेहद जरूरी है, जिससे मन और तन दोनों स्वस्थ रह सकें।

    पित्त बढ़ने से क्यों आता है गुस्सा?
    आयुर्वेद में पित्त को अग्नि तत्व माना गया है, जो शरीर के पाचन, ऊर्जा और तापमान को नियंत्रित करता है। गर्मियों में बाहरी तापमान बढ़ने से यह पित्त और अधिक सक्रिय हो जाता है, जिससे शरीर में गर्मी बढ़ती है। इसका सीधा असर मन पर पड़ता है और व्यक्ति जल्दी गुस्से में आ जाता है। इसके अलावा सिर में भारीपन, जलन, अनिद्रा और तनाव भी इसी असंतुलन के लक्षण हैं। ऐसे में शरीर को ठंडक देने वाले उपाय अपनाना आवश्यक हो जाता है।

    हर्बल टी से मिलेगा मानसिक सुकून
    गर्मियों में चाय और कॉफी का अत्यधिक सेवन शरीर में गर्मी बढ़ा सकता है, इसलिए विशेषज्ञ इसकी जगह हर्बल टी लेने की सलाह देते हैं। तुलसी, गुलाब की पंखुड़ियां, कैमोमाइल और पैशनफ्लावर जैसी जड़ी-बूटियों से बनी हर्बल टी तनाव को कम करने में मदद करती है। इसे दिन में एक या दो बार लेने से हार्मोन संतुलित रहते हैं और मानसिक शांति बनी रहती है। यह शरीर को प्राकृतिक रूप से ठंडक भी प्रदान करती है।

     मानसिक तनाव का प्राकृतिक उपचार
    आयुर्वेद में नस्य क्रिया को बेहद प्रभावी माना गया है। इसमें रात के समय नाक में शुद्ध घी की कुछ बूंदें डाली जाती हैं। यह प्रक्रिया मस्तिष्क को ठंडक देती है और तंत्रिका तंत्र को शांत करती है। इससे मानसिक तनाव, चिड़चिड़ापन और अनिद्रा जैसी समस्याओं में राहत मिलती है। नियमित रूप से करने पर यह पित्त दोष को संतुलित करने में सहायक होती है।

    चंदन का लेप: शरीर को देता है ठंडक
    चंदन की तासीर स्वभाव से ही ठंडी होती है। इसे माथे पर लगाने से शरीर का तापमान नियंत्रित रहता है और मानसिक अशांति कम होती है। गर्मियों में इसका प्रयोग विशेष रूप से लाभकारी माना जाता है। यह सिर में होने वाली जलन और तनाव को भी दूर करता है।

    तेल मालिश से मिलेगा आराम
    नारियल तेल या भृंगराज तेल से सिर और पैरों के तलवों की मालिश करना भी बेहद फायदेमंद होता है। इससे शरीर की थकान दूर होती है और रक्त संचार बेहतर होता है। विशेषकर तलवों की मालिश करने से तुरंत शीतलता का अनुभव होता है और गहरी नींद आने में मदद मिलती है।

    दिनचर्या में बदलाव जरूरी
    गर्मियों में हल्का और सुपाच्य भोजन करना चाहिए। अधिक मसालेदार और तले-भुने भोजन से बचना चाहिए। पर्याप्त पानी पीना, समय पर आराम करना और धूप में कम निकलना भी जरूरी है। दिन में थोड़ी देर आराम करने से शरीर की ऊर्जा संतुलित रहती है और मानसिक तनाव कम होता है।

    गर्मियों में बढ़ता गुस्सा और चिड़चिड़ापन केवल स्वभाव नहीं बल्कि शरीर के पित्त असंतुलन का संकेत है। यदि सही समय पर हर्बल उपाय, आयुर्वेदिक दिनचर्या और ठंडक देने वाले उपाय अपनाए जाएं, तो मन और शरीर दोनों को संतुलित रखा जा सकता है।

  • सुरक्षा एजेंसियों को भ्रमित कर रहे आतंकी, 57 के 200 से ज्यादा नाम, गृह मंत्रालय ने सूची की जारी

    सुरक्षा एजेंसियों को भ्रमित कर रहे आतंकी, 57 के 200 से ज्यादा नाम, गृह मंत्रालय ने सूची की जारी


    नई दिल्ली । पाकिस्तान से जुड़े कई खतरनाक आतंकियों ने सुरक्षा और जांच एजेंसियों को भ्रमित करने के लिए अपनी पहचान बदलने का तरीका अपना लिया है। इन आतंकियों के एक-दो नहीं, बल्कि कई-कई नाम दर्ज हैं, जिससे उनकी पहचान करना मुश्किल हो जाता है। केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा गैर-कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत तैयार सूची में 57 आतंकियों के करीब 200 अलग-अलग नाम शामिल किए गए हैं।

    अलग-अलग नामों से छिपा रहे असली पहचान
    गृह मंत्रालय की सूची में शामिल आतंकियों ने पहचान छिपाने के लिए कई नाम अपनाए हैं। मुंबई हमलों का आरोपी और भारत का मोस्ट वांटेड आतंकी दाऊद इब्राहिम सबसे आगे है, जिसके 22 नाम दर्ज हैं। वहीं लश्कर-ए-ताइबा के प्रमुख हाफिज सईद के 9 और जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े मोहीउद्दीन औरंगजेब आलमगीर के 11 नाम बताए गए हैं।

    मसूद अजहर समेत कई बड़े नाम शामिल
    सूची में मौलाना मसूद अजहर का नाम प्रमुख रूप से दर्ज है, जिसे कई अन्य नामों से भी जाना जाता है। इसी तरह रियाज इस्माइल शाहबंदर, इब्राहिम मेनन और सैयद मोहम्मद युसूफ शाह जैसे आतंकियों ने भी अलग-अलग नाम रखे हुए हैं। कुछ आतंकियों के नामों की संख्या 5 से 9 तक है, जिससे उनकी गतिविधियों को ट्रैक करना और कठिन हो जाता है।

    दाऊद इब्राहिम के नामों की लंबी सूची
    दाऊद इब्राहिम के सबसे अधिक 22 नाम सामने आए हैं। इनमें दाऊद इब्राहिम कासकर, दाऊद हसन शेख कासकर, दाऊद भाई, इकबाल सेठ, बड़ा पटेल सहित कई अन्य नाम शामिल हैं। इतने ज्यादा नामों का इस्तेमाल कर वह लंबे समय से एजेंसियों को चकमा देता रहा है।

    लश्कर और जैश के आतंकियों ने भी बदली पहचान
    लश्कर-ए-ताइबा प्रमुख हाफिज सईद ने भी अपनी पहचान छिपाने के लिए 9 अलग-अलग नाम अपनाए हैं। वहीं जकी उर रहमान लख्वी और जैश-ए-मोहम्मद के सदस्य मोहीउद्दीन औरंगजेब आलमगीर ने भी कई उपनाम रखे हुए हैं। एजेंसियों के रिकॉर्ड के अनुसार, ये आतंकी अलग-अलग नामों के जरिए अपनी गतिविधियों को अंजाम देते रहे हैं।

  • MP: खंडवा सांसद के छोटे भाई ने किया सुसाइड… कुएं में कूदकर दी जान, खेत में मिली चप्पल

    MP: खंडवा सांसद के छोटे भाई ने किया सुसाइड… कुएं में कूदकर दी जान, खेत में मिली चप्पल


    बुरहानपुर।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के खंडवा-बुरहानपुर संसदीय क्षेत्र (Khandwa-Burhanpur parliamentary constituency) से सांसद ज्ञानेश्वर पाटिल (MP Dnyaneshwar Patil) के छोटे भाई विश्वनाथ उर्फ बाडू पाटिल (58) ने आत्महत्या कर ली. यह घटना बुरहानपुर जिले (Burhanpur district) के गृह ग्राम बोहरडा में सामने आई, जहां उन्होंने अपने ही खेत के कुएं में कूदकर जान दे दी. बताया गया कि बुधवार तड़के वे चुपचाप घर से निकले थे और फिर वापस नहीं लौटे.

    सूचना मिलते ही प्रशासन और पुलिस में हड़कंप मच गया. जिले के डीएम और एसपी दल-बल के साथ मौके पर पहुंचे. इसके बाद गोताखोरों की मदद से कुएं में तलाश शुरू की गई. करीब तीन घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद विश्वनाथ पाटिल का शव कुएं से बाहर निकाला गया।

    पुलिस ने पंचनामा बनाकर शव को पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भेज दिया. प्रारंभिक जांच में आत्महत्या की आशंका जताई जा रही है, हालांकि घटना का वास्तविक कारण अभी तक सामने नहीं आ सका है.


    घटना के बाद क्षेत्र में शोक की लहर

    इस दुखद घटना के बाद पूरे क्षेत्र और पाटिल परिवार के समर्थकों में शोक की लहर दौड़ गई है. जानकारी के अनुसार, दिवंगत विश्वनाथ पाटिल का अंतिम संस्कार उनके पैतृक गांव बोहरडा में किया जाएगा.

    सांसद ज्ञानेश्वर पाटिल उस समय दिल्ली में थे. घटना की जानकारी मिलते ही वे तुरंत दिल्ली से बुरहानपुर के लिए रवाना हो गए. उधर, सांसद के गृह ग्राम बोहरडा स्थित निवास पर बड़ी संख्या में समर्थक और रिश्तेदार पहुंचने लगे. नेपानगर विधायक मंजू दादू सहित भाजपा और कांग्रेस के कई नेता भी सांसद निवास पहुंचे और शोक संवेदना व्यक्त की. स्थिति को देखते हुए पुलिस बल भी तैनात किया गया।


    पुलिस जांच जारी

    बुरहानपुर एसपी देवेंद्र पाटीदार ने बताया कि पुलिस को पहले विश्वनाथ पाटिल के लापता होने की सूचना मिली थी. सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू की गई. जांच के दौरान खेत के पास उनकी चप्पल मिली, जिसके बाद कुएं में तलाश की गई और शव बरामद किया गया. पुलिस ने मर्ग कायम कर लिया है और मृत्यु के कारणों की जांच जारी है। पुलिस का कहना है कि प्रथम दृष्टया मामला आत्महत्या का प्रतीत हो रहा है, लेकिन सभी पहलुओं की जांच की जा रही है. घटना के बाद पूरे इलाके में गमगीन माहौल बना हुआ है।

  • MP: सतना में भीषण हादसा…. बेकाबू ट्रक डिवाइडर तोड़ नहर में गिरा, 3 लोगों की मौत

    MP: सतना में भीषण हादसा…. बेकाबू ट्रक डिवाइडर तोड़ नहर में गिरा, 3 लोगों की मौत


    सतना।
    एमपी (MP) में सतना जिले (Satna district) के नेशनल हाईवे-39 (National Highway-39) पर बुधवार की सुबह एक भयावह मंजर देखने को मिला है। सतना से रीवा की ओर जा रहा सरिया लदा एक तेज रफ्तार ट्रक नेमुआ मोड़ के पास बेकाबू होकर डिवाइडर लांघते हुए सीधे गहरी नहर में जा गिरा। इस भीषण हादसे में ट्रक के केबिन के परखच्चे उड़ गए और उसमें सवार चालक, क्लीनर व मजदूर की मौके पर ही सांसें थम गईं। मलबे और भारी सरियों के बीच फंसे शवों को निकालने के लिए प्रशासन को करीब 4 घंटे तक कड़ा संघर्ष करना पड़ा।


    कटर मशीन से काटकर निकाली लाश

    हादसा इतना भीषण था कि ट्रक का अगला हिस्सा पूरी तरह पिचक गया था। सूचना पर रामपुर बघेलान थाना प्रभारी संदीप चतुर्वेदी जब पुलिस बल के साथ पहुंचे, तो ट्रक के भीतर शव लोहे के जाल में फंसे हुए थे। पुलिस ने पहले बड़ी क्रेन के जरिए ट्रक को सीधा कराया, लेकिन एक शव ऐसी जगह फंसा था जिसे सामान्य रूप से निकालना नामुमकिन था। इसके बाद मौके पर गैस कटर मशीन बुलाई गई और ट्रक की बॉडी को काटकर शव बाहर निकाले गए।


    मैहर जिले के है दो मृतक

    हादसे का शिकार हुए तीन लोगों में से दो की पहचान मैहर जिले के निवासियों के रूप में हुई है। मृतकों की शिनाख्त पडरी निवासी दिलीप केवट (पिता राजेश केवट) और रामगढ़ निवासी विष्णु केवट (पिता माखनलाल केवट) के रूप में की गई है। तीसरे मृतक की शिनाख्त फिलहाल नहीं हो सकी है, पुलिस उसके परिजनों का पता लगाने का प्रयास कर रही है।


    5 घंटे तक थमा रहा हाईवे का सफर

    सुबह करीब 8 बजे हुए इस हादसे के बाद हाईवे पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया। मौके पर सैकड़ों ग्रामीणों की भीड़ जमा हो गई, जिससे सतना-रीवा मार्ग पर लंबा जाम लग गया। हालात का जायजा लेने एडिशनल एसपी और तहसीलदार सुजीत नागेश भी पहुंचे। पुलिस ने एम्बुलेंस के जरिए शवों को मरचुरी भिजवाया और क्षतिग्रस्त ट्रक को हटवाने के बाद करीब 5 घंटे बाद यातायात बहाल कराया।


    जांच के घेरे में हादसे की वजह

    पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। अंदेशा जताया जा रहा है कि या तो ट्रक की स्टेयरिंग फेल हुई या फिर अलसुबह चालक को झपकी आने के कारण यह भीषण हादसा हुआ। ट्रक में लदे भारी भरकम लोहे के सरियों ने केबिन पर दबाव बनाया, जिससे बचाव का कोई मौका नहीं मिला है।

  • भीषण गर्मी से वैश्विक कृषि सिस्टम तबाही की कगार पर… 100 करोड़ लोगों की आजीविका पर संकट

    भीषण गर्मी से वैश्विक कृषि सिस्टम तबाही की कगार पर… 100 करोड़ लोगों की आजीविका पर संकट


    रोम।
    भीषण गर्मी (Extreme Heat) वैश्विक कृषि प्रणालियों (Global Agricultural Systems) को तबाही की कगार पर धकेल रही हैं। इससे वैश्विक खाद्य तंत्र बिगड़ने लगा है। इसके चलते दुनियाभर में 100 करोड़ से अधिक लोगों की आजीविका और उनके स्वास्थ्य पर सीधा खतरा मंडरा रहा है।

    संयुक्त राष्ट्र खाद्य एवं कृषि संगठन (एफएओ) और विश्व मौसम विज्ञान संगठन (डब्ल्यूएमओ) की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि अत्यधिक गर्मी अब केवल मौसम ही नहीं, बल्कि खेती, मछली पालन और वानिकी के लिए एक अस्तित्वगत खतरा बन गई है। एफएओ के जलवायु परिवर्तन कार्यालय के प्रमुख कावेह जाहेदी ने कहा, भीषण गर्मी यह तय कर रही है कि किसान और मछुआरे क्या उगा सकते हैं और कब काम कर सकते हैं।


    समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र भी खतरे में

    गर्मी का असर केवल जमीन तक सीमित नहीं है। रिपोर्ट के अनुसार, 2024 में दुनिया के 91 फीसदी महासागरों ने कम से कम एक समुद्री लू का सामना किया। इससे पानी में ऑक्सीजन का स्तर कम हो रहा है, जिससे मछलियों का अस्तित्व खतरे में है और समुद्री खाद्य प्रणालियां चरमरा रही हैं।


    प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियों की आवश्यकता

    कृषि से संबंधित रिपोर्ट में बताया गया कि किसानों को मौसम का सटीक डेटा समय पर मिलना चाहिए ताकि वे बुवाई और कटाई के समय में बदलाव कर सकें। अगर तापमान 1.5 डिग्री के बजाय 3 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ता है, तो भीषण गर्मी की तीव्रता और आवृत्ति चार गुना तक बढ़ सकती है।


    चार प्रमुख फसलों पर पड़ता है असर

    वैश्विक औसत तापमान में प्रत्येक एक डिग्री की वृद्धि से चार प्रमुख फसलों मक्का, चावल, सोयाबीन और गेहूं की पैदावार में लगभग 6% की कमी आती है। आंकड़ों के मुताबिक, साल 2025 अब तक के तीन सबसे गर्म वर्षों में से एक रहा है। जब तापमान 30 डिग्री की सीमा को पार कर जाता है, तो प्रमुख फसलों की पैदावार में तेजी से गिरावट आने लगती है।

  • गुरुवार पूजा विधि: सही तरीके से करें आराधना, विष्णु की कृपा से पूरी अपेक्षित मनोकामनाएं

    गुरुवार पूजा विधि: सही तरीके से करें आराधना, विष्णु की कृपा से पूरी अपेक्षित मनोकामनाएं


    नई दिल्ली। गुरुवार का दिन हिंदू धर्म में अत्यंत शुभ माना जाता है क्योंकि यह दिन भगवान विष्णु और देवगुरु बृहस्पति को समर्पित होता है। मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से पूजा करने और व्रत रखने से जीवन में सुख-समृद्धि आती है, कुंडली में गुरु ग्रह मजबूत होता है और विवाह संबंधी बाधाएं दूर होती हैं।

    गुरुवार पूजा की सही विधि
    गुरुवार के दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। स्नान के पानी में हल्दी मिलाना शुभ माना जाता है, जिससे सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है।
    इसके बाद पूजा का संकल्प लें और पूजा स्थल को गंगाजल से शुद्ध करें। एक चौकी पर पीला कपड़ा बिछाकर भगवान विष्णु की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें।
    भगवान विष्णु को जल अर्पित करें और हल्दी या केसर से तिलक लगाएं। घी का दीपक जलाकर पीले फूल और पीले अक्षत (हल्दी से रंगे चावल) अर्पित करें।

    भोग और पूजा सामग्री
    भगवान विष्णु को चने की दाल, गुड़, केला और पीली मिठाई का भोग लगाना अत्यंत शुभ माना जाता है। यह भोग समृद्धि और सौभाग्य का प्रतीक है।

     गुरुवार व्रत कथा और मंत्र जाप
    पूजा के दौरान गुरुवार व्रत कथा का पाठ अवश्य करें। इसके बाद भगवान विष्णु की आरती करें और मंत्रों का जाप करें।

     प्रमुख मंत्र

    ॐ नमो भगवते वासुदेवाय

    ॐ विष्णवे नमः

    ॐ नारायणाय विद्महे वासुदेवाय धीमहि तन्नो विष्णु प्रचोदयात्

    ॐ बृं बृहस्पतये नमः

    इन मंत्रों के जाप से मानसिक शांति और ग्रह दोषों में कमी आती है।

    गुरुवार को क्या करें और क्या नहीं
    गुरुवार के दिन कुछ नियमों का पालन करना जरूरी माना गया है:
     करें–
    केले के पेड़ की पूजा करें
    पीले वस्त्र, हल्दी और चने की दाल का दान करें
    व्रत रखें और सकारात्मक विचार रखें

    न करें

    बाल और नाखून न काटें
    कपड़े न धोएं
    घर में पोछा लगाने से बचें
    व्रत के दौरान नमक का सेवन न करें

    गुरुवार के दिन श्रद्धा और नियमपूर्वक भगवान विष्णु की पूजा करने से जीवन में स्थिरता, सुख-समृद्धि और शुभ फल प्राप्त होते हैं। यह व्रत विशेष रूप से विवाह में बाधा, आर्थिक समस्या और ग्रह दोष दूर करने में सहायक माना जाता है।