Author: bharati

  • नोबेल तो नहीं… मगर ट्रंप को मिला शांति पुरस्कार, इतने खुश हुए…खुद ही उठाकर पहन लिया

    नोबेल तो नहीं… मगर ट्रंप को मिला शांति पुरस्कार, इतने खुश हुए…खुद ही उठाकर पहन लिया


    वाशिंगटन।
    नोबेल शांति पुरस्कार (Nobel Peace Prize) की मांग कर रहे अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) को नोबेल तो नहीं लेकिन फीफा शांति पुरस्कार (FIFA Peace Prize) जरूर मिल गया है। फुटबॉल की वैश्विक संस्था (FIFA) अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को अपने नए फीफा शांति पुरस्कार (FIFA Peace Prize) से सम्मानित किया है। यह पुरस्कार खेल से इतर वैश्विक शांति को ध्यान में रखकर बनाया गया है और ट्रंप इसके पहले विजेता हैं।


    फीफा ने क्यों दिया यह पुरस्कार

    डोनाल्ड ट्रंप का नोबेल शांति पुरस्कार के लिए प्रेम किसी से छिपा नहीं है। ऐसा माना जा रहा है कि फीफा द्वारा इस साल से शुरू किया जा रहा है शांति पुरस्कार ट्रंप को ही मिलेगा। वैसे बी फीफा के वर्तमान अध्यक्ष जियानी इन्फेंटिनो को ट्रंप का करीबी माना जाता है। वह कई बार खुले तौर पर इस बात को कह चुके हैं कि गाजा संघर्ष में युद्धविराम करवाने के लिए ट्रंप को नोबेल शांति पुरस्कार मिलना ही चाहिए।

    फीफा के अगले विश्वकप के लिए आयोजित किए जा रहे एक कार्यक्रम में जियानी ने अमेरिकी राष्ट्रपति का स्वागत करते हुए ट्रंप को यह पुरस्कार देने का ऐलान किया। उन्होंने कहा, “यह आपके लिए एक सुंदर मेडल है, जिसे आप जहां चाहें, वहां पहन सकते हैं।” इसके बाद ट्रंप ने तुरंत ही इसे अपने गले में डाल लिया। इसके साथ ही ट्रंप को एक सर्टिफिकेट भी दिया गया, जिसमें ट्रंप को ‘दुनिया में शांति और एकता बढ़ाने में योगदान’ देने वाला बताया गया।

    इसके अलावा जियानी ने ट्रंप को एक सोने की ट्राफी भी भेंट की। इस पर आगे ट्रंप का नाम लिखा हुआ था। उन्होंने कहा, “आप इस शांति पुरस्कार के योग्य हैं, अपनी कोशिशों और उपलब्धियों के लिए।

    फीफा शांति पुरस्कार मिलने के बाद ट्रंप उत्साहित नजर आए। उन्होंने कहा, “यह मेरे जीवन के सबसे बड़े सम्मानों में से एक है।” इसके बाद उन्होंने अपने परिवार, खासतौर पर अपनी पत्नी मेलानिया का धन्यवाद दिया और मेजबान देशों कनाडा और मेक्सिको के नेताओं की प्रशंसा करते हुए कहा कि यह तीनों देशों के लिए बेहतर रहेगा।

  • यूक्रेनी बच्चों को तुरंत बिना शर्त वापस लौटाए रूस… UNGA में प्रस्ताव पारित, वोटिंग से दूर रहा भारत

    यूक्रेनी बच्चों को तुरंत बिना शर्त वापस लौटाए रूस… UNGA में प्रस्ताव पारित, वोटिंग से दूर रहा भारत


    न्यूयॉर्क।
    संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) (United Nations General Assembly (UNGA) ने रूस पर दबाव बढ़ाते हुए एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित किया है। इसमें रूस से यूक्रेनी बच्चों को तुरंत और बिना शर्त वापस लौटाने की मांग की गई है। यह प्रस्ताव रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच मानवीय संकट पर केंद्रित है, जहां कथित तौर पर हजारों बच्चों को जबरन रूसी क्षेत्र में निर्वासित किया गया है। इस महत्वपूर्ण मसौदा प्रस्ताव पर बुधवार को मतदान हुआ, जिसमें भारत ने मतदान से परहेज किया।

    193 सदस्यीय महासभा में ‘यूक्रेनी बच्चों की वापसी’ शीर्षक वाले प्रस्ताव को 91 देशों ने समर्थन दिया, 12 देशों ने इसका विरोध किया और 57 देशों ने मतदान में हिस्सा नहीं लिया। भारत के साथ-साथ बहरीन, बांग्लादेश, ब्राजील, चीन, मिस्र, मालदीव, नेपाल, पाकिस्तान और श्रीलंका ने भी वोटिंग से परहेज किया। बता दें कि यह प्रस्ताव रूसी राष्ट्रपति पुतिन की भारत यात्रा से ठीक पहले पेश किया गया था। भारत ने फिलहाल वोटिंग में हिस्सा नहीं लिया।


    प्रस्ताव में क्या कहा गया?

    प्रस्ताव में युद्ध के बच्चों पर पड़ रहे प्रभाव को लेकर गहरी चिंता जताई गई, विशेषकर उन यूक्रेनी बच्चों की स्थिति पर जिन्हें 2014 के बाद अपने परिवारों से अलग कर रूस-नियंत्रित इलाकों में ले जाया गया या रूस भेजा गया।


    महासभा ने रूस से मांग की कि वह-

    – जबरन ले जाए गए सभी यूक्रेनी बच्चों को तुरंत, सुरक्षित और बिना शर्त वापस भेजे।
    – बच्चों के जबरन निर्वासन, परिवारों से अलगाव, नागरिकता बदलने, दत्तक ग्रहण या फॉस्टर केयर में रखने जैसी सभी कार्रवाइयों को तुरंत रोके।
    – इस तरह के मामलों में जिम्मेदार लोगों की जांच और जवाबदेही सुनिश्चित करे।

    प्रस्ताव ने रूस द्वारा 2022 के बाद किए गए उन कानूनी बदलावों पर भी आपत्ति जताई, जिनसे यूक्रेनी अनाथ बच्चों या अभिभावक-विहीन बच्चों को रूसी नागरिकता प्राप्त करने की प्रक्रिया आसान हुई है।

    यूक्रेन का दावा: 20000 से अधिक बच्चों के मामले की जांच
    यूक्रेन की उप विदेश मंत्री मारियाना बेट्सा ने महासभा में मसौदा प्रस्ताव पेश करते हुए कहा कि अक्टूबर 2025 तक 6395 बच्चों की जबरन ट्रांसफर/डेपोर्टेशन की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 20,000 से अधिक मामलों की जांच जारी है।


    रूस का जवाब: झूठे आरोपों से भरा प्रस्ताव

    रूस की उप स्थायी प्रतिनिधि मारिया जाबोलोत्स्काया ने मसौदा प्रस्ताव को झूठे आरोपों से भरा बताया। उन्होंने कहा कि कई बच्चे युद्ध क्षेत्रों से सुरक्षित निकाले गए हैं या अपने परिवारों से बिछड़ गए थे, जिसे उल्लंघन नहीं माना जा सकता। यूक्रेनी शरणार्थियों के लिए रूसी नागरिकता प्राप्त करने की प्रक्रिया को आसान बनाना स्वेच्छिक और बिना किसी दबाव के है। उन्होंने कहा कि इस प्रस्ताव के पक्ष में हर वोट झूठ, युद्ध और टकराव के समर्थन में है, जबकि विरोध में दिया गया हर वोट शांति के पक्ष में है।


    यूएन महासभा अध्यक्ष की टिप्पणी

    यूएन महासभा की अध्यक्ष अन्नालेना बैरबॉक ने कहा कि फरवरी 2022 में रूस के यूक्रेन पर पूर्ण पैमाने पर हमले के बाद से महासभा ने लगातार अपनी आठ अलग-अलग प्रस्तावों में रूस से तत्काल और बिना शर्त वापसी की मांग की है। उन्होंने कहा- यूक्रेनी बच्चों का मामला खाली संदर्भ में नहीं देखा जा सकता। यह पूरी स्थिति रूस के आक्रमण का परिणाम है। उन्होंने यह भी कहा कि युद्ध से न सिर्फ यूक्रेन बल्कि अन्य क्षेत्रों और वैश्विक स्थिरता पर भी गंभीर प्रभाव पड़ा है।

  • IndiGo का सिस्टम फेल होने से देश में हवाई यात्रा संकट… एयरपोर्ट पर स्टेशनों जैसा नजारा

    IndiGo का सिस्टम फेल होने से देश में हवाई यात्रा संकट… एयरपोर्ट पर स्टेशनों जैसा नजारा


    नई दिल्ली।
    हमारा प्यारा भारत (India) इस समय पर हवाई यात्रा संकट (Air Travel Crisis) का सामना कर रहा है। तेज रफ्तार ट्रेनों के जरिए और भी कम समय में यात्रा करने का सपना देखने वाला आम आदमी (Common man) इस समय इंडिगो (IndiGo Airline) के ठप्प होने से परेशान है। देश की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडियो (IndiGo Airline) ने पिछले कुछ समय में 1 हजार से ज्यादा उड़ानों को रद्द कर दिया है, जिसकी वजह से देश भर के एयरपोर्ट्स रेलवे स्टेशन की तरह नजर आने लगे हैं। चारों तरफ अफरा-तफरी मची हुई है और लोग अपने गंतव्य तक जाने के लिए परेशान नजर आ रहे हैं।

    अंतर्देशीय उड़ानों का सबसे बड़ा नेटवर्क चलाने वाली इंडिगो एयरलाइन के इस संकट के पीछे कोई एक कारण नहीं है। इसके पीछे एक के बाद एक आए कई बदलाव शामिल हैं। तो आइए जानते हैं कि आखिर ऐसा क्या हुआ कि हजारों की संख्या में लोग एयरपोर्ट पर ही फंसते नजर आए।


    कैसे बढ़ा संकट?

    इंडिगो एयरलाइन शुरुआत से ही फ्लाइट्स के लेट होने की समस्या का सामना कर रही थी। शुरुआत ने एयरलाइन ने इसके पीछे छोटी तकनीकी खराबियां, सर्दियों के लिए फ्लाइट की नई टाइमिंग, एयरपोर्ट पर भीड़ और मौसम को जिम्मेदार बताया था। हालांकि, इसको एयरलाइन को असली झटका तब लगा जब सरकार की तरफ से फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन नामक नए नियम लागू कर दिए गए, जिनका मकसद पायलटों को थकान से बचाना था।


    सरकार ने जारी किए नए नियम

    पहले से ही स्टाफ की कमी के साथ ज्यादा उड़ानों का संचालन कर रही इंडिगो के लिए यह नियम एक बड़ी परेशानी बनकर आए। हालांकि, सरकार ने यह कदम पायलट और एयरलाइन की भलाई के लिए ही उठाया था। लेकिन पहले से ही फंसी हुई इंडिगो के लिए यह नियम झेल पाना आसान नहीं था। इन नियमों की वजह से बड़ी संख्या में पायलट अनिवार्य आराम पर चले गए, जिससे स्टाफ की भारी कमी हो गई। इसकी वजह से कई फ्लाइट्स कैंसिल करनी पड़ी।


    एयरबस 320 की चेतावनी

    फ्लाइट्स की छोटी तकनीकी खराबियों, सरकार के नए नियमों से परेशानी का सामना कर रही इंडिगो एयरलाइन के लिए असली खतरा तब सामने आया जब एयरबस 320 की चेतावनी के बाद देर रात उड़ाने प्रभावित होना शुरू हुईं। रात के 12 बजे के बाद नए नियम लागू हो गए, इसकी वजह से बहुत सारी फ्लाइट्स कैंसिल करने का सिलसिला शुरू हो गया।


    इंडिगो का बड़ा आकार

    भारत में सबसे ज्यादा उड़ानों का परिचालन करने वाली इंडिगो के लिए उसका बड़ा आकार ही संकट का कारण बन गया है। हालांकि, एयरपोर्ट पर यात्रियों की भीड़ और लगातार रद्द होती उड़ानों के बीच सरकार ने नए नियमों में कुछ राहत दी है। डीजीसीए ने शुक्रवार को नया आदेश जारी करके एक महत्वपूर्ण नियम वापस ले लिया। इसके मुताबिक अब पायलट्स की सप्ताहिक आराम को छुट्टी में नहीं बदला जा सकता है। सरकार द्वारा हटाए गए इस नियम से एयरलाइन को पायलट रोटेट करने में आसानी होगी, जिससे कुछ दबाव कम होने की उम्मीद है।

    इंडिगो भले ही इस नियम के हटने के बाद स्थिरता की उम्मीद कर रही हो, लेकिन पायलट संघ इससे नाराज नजर आता है। पायलट संघों का आरोप है कि इंडिगो के मैनेजमेंट ने समय रहते इन नियमों और परेशानियों के लिए तैयारी नहीं की। संघ के मुताबिक इंडिगो के मैनेजमेंट को इस बात की जानकारी थी कि सरकार ऐसे नियम लागू करने वाली है। इसके लिए नई भर्ती की जानी चाहिए थी, लेकिन एयरलाइ्ंस ने ऐसा नहीं किया। उन्होंने पहले से ही कम स्टाफ को और कम कर दिया, जिससे समस्या बिगड़ गई।

    कई विशेषज्ञों का कहना है कि इंडिगो ने इस संकट को बढ़ावा देकर सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश की है। इससे सरकार द्वारा लागू किए गए नियमों में ढिलाई ली जा सके। हालांकि, पायलट संघ ने इसे पायलट और हवाई यात्रियों की सुरक्षा के संकट से जोड़ा है।

    कारण चाहे कुछ भी हो, लेकिन परेशानी आम आदमी को ही हो रही है। देश भर के एयरपोर्ट्स पर इस समय भारी भीड़ मची हुई है। हर दिन एयरलाइन की तरफ से सैकड़ों फ्लाइट्स को कैंसिल किया जा रहा है, जिसकी वजह से एयरपोर्ट पर स्टेशन जैसे हालात बने हुए हैं। सरकार का मानना है कि 10 फरवरी 2026 तक पूरी तरह से स्थिरता लाई जा सकती है।

  • पिछले 20 ODI में टॉस नहीं जीत पाई टीम इंडिया… असिस्टेंट कोच ने निकाला ड्यू फैक्टर का तोड़

    पिछले 20 ODI में टॉस नहीं जीत पाई टीम इंडिया… असिस्टेंट कोच ने निकाला ड्यू फैक्टर का तोड़


    नई दिल्ली।
    टीम इंडिया (Team India) की किस्मत वनडे इंटरनेशनल क्रिकेट (One Day International Cricket) में टॉस के मामले में बहुत खराब चल रही है। भारतीय टीम (Indian team) पिछले 20 वनडे मैचों में टॉस नहीं जीत पाई है। वर्ल्ड कप 2023 के सेमीफाइनल में भारतीय टीम (Indian team) ने आखिरी बार वनडे मैच में टॉस जीता था। इसके बाद से भारत के तीन कप्तान बदल गए हैं, लेकिन टॉस कोई भी नहीं जीता है। कई बार इसका खामियाजा भी भारतीय टीम को भुगतना पड़ा है। हाल ही में रांची में इंडिया और साउथ अफ्रीका के बीच खेले गए दूसरे वनडे मैच में भी यही दिखा, जब ड्यू फैक्टर के कारण टीम इंडिया को 350 से ज्यादा रन बनाने के बावजूद हार मिली। हालांकि, इसका तोड़ टीम इंडिया के असिस्टेंट कोच रयान टेन डोएशे ने खोज लिया है।

    विशाखापट्टनम में आज यानी शनिवार 6 दिसंबर को खेले जाने वाले सीरीज डिसाइडर मैच में भी ओस एक अहम कारक होगा। यहां टॉस महत्वपूर्ण होगा, क्योंकि दूसरी पारी में ओस गिरने की संभावना है। इसका फायदा बल्लेबाजी टीम को मिलता है, लेकिन भारत के असिस्टेंट कोच ने बताया है कि ड्यू फैक्टर से कैसे निपटा जा सकता है? तीसरे ODI मैच से पहले रयान टेन डोएशे ने बताया, “सबसे बड़ी चुनौती, फिर से, पहले बैटिंग करने और दूसरी बैटिंग करने वाली टीम के बीच का अंतर होने वाला है। मुझे लगता है कि यह वनडे क्रिकेट में ज्यादा साफ तौर पर दिख रहा है और यही असली चुनौती है।”

    रायपुर में टीम इंडिया ने 359 रनों का टारगेट साउथ अफ्रीका के सामने रखा, जिसे भारतीय गेंदबाज डिफेंड नहीं कर सके। इस पर डोएशे ने कहा, “ओस का फैक्टर बहुत बड़ा है, हां, यह साफ तौर पर हमारी गलती नहीं है, लेकिन इससे निपटने का तरीका ढूंढना हमारी जिम्मेदारी है।” इसका सॉल्यूशन उनसे पूछा गया तो उन्होंने कहा, “यह सच है कि दूसरी पारी शुरू होते ही ओस गिरने लगती है। इसका मतलब है कि ओस पूरे समय रहती है, इसलिए मैच का समय बदलने से इसका असर थोड़ा कम हो सकता है। अगर आप दो घंटे पहले मैच शुरू करते हैं, तो यह एक समाधान हो सकता है।” उन्होंने माना है कि ऐसा करने के लिए सभी स्टेकहोल्डर्स को साथ आना होगा।

  • बंगाल में आज 'बाबरी मस्जिद' का शिलान्यास…HC का निर्देश- तनाव रोके सरकार, CISF तैनात

    बंगाल में आज 'बाबरी मस्जिद' का शिलान्यास…HC का निर्देश- तनाव रोके सरकार, CISF तैनात


    कोलकाता।
    कोलकाता हाईकोर्ट (Kolkata High Court) ने शुक्रवार को पश्चिम बंगाल सरकार (West Bengal Government) को निर्देश दिया कि मुर्शिदाबाद जिले (Murshidabad district) के बेलडांगा में संभावित सांप्रदायिक तनाव को रोकने के लिए जो भी आवश्यक हो, वह कदम तुरंत उठाए जाएं। यह निर्देश निलंबित टीएमसी विधायक हुमायूं कबीर (TMC MLA Humayun Kabir) द्वारा 6 दिसंबर को प्रस्तावित बाबरी मस्जिद शिलान्यास कार्यक्रम के मद्देनजर दिया गया है। यह वही तारीख है जब 1992 में अयोध्या में बाबरी का ढांचा ढहाया गया था।

    कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश सुजॉय पॉल और न्यायमूर्ति पार्थ सारथी सेन की खंडपीठ ने इस संबंध में दायर एक जनहित याचिका का निपटारा करते हुए कहा कि राज्य सरकार को अपने रुख के अनुसार कार्य करना होगा… मुर्शिदाबाद में कानून-व्यवस्था कड़ाई से कायम रखी जानी चाहिए और नागरिकों के जीवन व संपत्ति की रक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए।


    8 महीने पहले भड़के थे दंगे

    हुमायूं कबीर का यह मस्जिद शिलान्यास कार्यक्रम ऐसे समय में प्रस्तावित है जब मुर्शिदाबाद आठ महीने पहले वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 के विरोध में भड़की सांप्रदायिक हिंसा से उबरा है। इस पृष्ठभूमि में प्रशासन ने सुरक्षा को लेकर पूरी सतर्कता बरतने का दावा किया है।

    राज्य के महाधिवक्ता किशोर दत्ता ने अदालत को बताया कि किसी भी तरह की गड़बड़ी रोकने के लिए पर्याप्त पुलिसबल तैनात कर दिया गया है। उधर, उप सॉलिसिटर-जनरल राजदीप मजूमदार ने कहा कि सीआईएसएफ की 19 कंपनियां पहले से इलाके में मौजूद हैं।

    अधिकारियों के मुताबिक, 3500 की संयुक्त सुरक्षा टुकड़ी, जिसमें आरएएफ की यूनिटें शामिल हैं, वे शुक्रवार शाम से रेजीनगर और आसपास के इलाकों में मोर्चा संभाल चुकी है। बीएसएफ की दो कंपनियां एनएच-12 की सुरक्षा के लिए तैयार रखी गई हैं। इसी बीच, निलंबन के एक दिन बाद विधायक कबीर को रेजीनगर थाने तलब किया गया, जहां उनसे कई घंटे पूछताछ हुई।


    कबीर का दावा- कुरान पढ़ी जाएगी, कोई राजनीति नहीं होगी

    पूरे विवाद के बीच हुमायूं कबीर दिनभर कार्यक्रम की तैयारियों की निगरानी करते रहे। उन्होंने अपनी टीम से 30000 बिरयानी पैकेट मेहमानों के लिए तैयार रखने के निर्देश दिए। साथ ही वे जमीअत उलेमा-ए-हिंद के कुछ अलग हुए गुटों और ऑल बंगाल इमाम मुअज्जिन एसोसिएशन के प्रतिनिधियों से भी मिले।

    उन्होंने पत्रकारों से कहा- मुख्य कार्यक्रम दोपहर 12 बजे शुरू होगा। दो घंटे तक कुरान पढ़ी जाएगी। कोई भाषण नहीं होगा, कोई राजनीतिक प्रतिनिधित्व नहीं होगा, न पार्टी के झंडे, न कोई राजनीतिक बयानबाजी। मैं 2,000 स्वयंसेवकों के साथ उपस्थित रहूंगा। सब जानते हैं… यह कोई नई बात नहीं है।


    टीएमसी का आरोप- विपक्ष की साजिश

    टीएमसी प्रवक्ता कुनाल घोष ने इस पूरे घटनाक्रम को साजिश करार दिया। उनका आरोप है कि राज्य चुनावी वर्ष में प्रवेश कर रहा है और प्रतिद्वंदी दल टीएमसी को बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं। हाई कोर्ट के निर्देशों के बाद राज्य सरकार और केंद्रीय एजेंसियाँ दोनों ही सतर्क मोड पर आ गई हैं। चौतरफ़ा सुरक्षा व्यवस्था के बीच शनिवार को होने वाले इस कार्यक्रम पर पूरे प्रदेश की नज़र रहेगी।

    राज्यपाल ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की
    राज्यपाल सी वी आनंद बोस ने बंगाल के लोगों से शांति बनाए रखने और भड़काऊ बयानों व अफवाहों से प्रभावित न होने का आग्रह किया। उन्होंने यह आग्रह तृणमूल कांग्रेस के निलंबित विधायक हुमायूं कबीर द्वारा मुर्शिदाबाद जिले में बाबरी मस्जिद की तर्ज पर बनाई गई मस्जिद की आधारशिला रखने से पहले किया है।

    लोक भवन द्वारा सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर किए गए एक पोस्ट के अनुसार, बोस ने राज्य सरकार से आग्रह किया है कि वह यह सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक कार्रवाई करे कि कहीं भी कोई अशांति न हो और कानून व्यवस्था बनी रहे। उन्होंने लोकभवन में तत्काल प्रभाव से 24×7 कार्यरत रहने वाला एक ‘एक्सेस प्वाइंट सेल’ बनाने का भी निर्देश दिया है। इसके अध्यक्ष सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी एस के पटनायक होंगे।

    पोस्ट में कहा गया है, “लोग फोन या ईमेल के माध्यम से लोक भवन ‘एक्सेस प्वाइंट सेल’ से संपर्क करने और किसी भी अप्रिय घटना, धमकी या किसी के द्वारा दिए जा रहे भड़काऊ बयान की सूचना देने के लिए स्वतंत्र हैं।” पोस्ट में कहा गया है कि राज्यपाल समूची स्थिति पर निगरानी रखेंगे। राज्यपाल को विश्वास है कि राज्य सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक कार्रवाई करेगी कि कानून और व्यवस्था को कोई खतरा न हो।

  • मप्र के कूनो राष्ट्रीय उद्यान में मादा चीता वीरा के शावक की मौत

    मप्र के कूनो राष्ट्रीय उद्यान में मादा चीता वीरा के शावक की मौत


    – एक दिन पहले ही मुख्यमंत्री ने वीरा और उसके दो शावकों को बाड़े से खुले जंगल में किया था रिलीज

    श्योपुर। मध्य प्रदेश के श्योपुर जिले में स्थित कूनो राष्ट्रीय उद्यान में दक्षिण अफ्रीकी मादा चीता वीरा के 10 महीने के शावक की मौत हो गई। उसे मादा चीता वीरा और दूसरे शावक के साथ एक दिन पहले ही मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बाड़े से कूनो के पारोंद क्षेत्र में खुले जंगल में रिलीज किया था। शुक्रवार शाम पारोंद के जंगल में शावक का शव मिला है।

    चीता प्रोजेक्ट के फील्ड डायरेक्टर उत्तम कुमार शर्मा ने बताया कि शावक की मौत का वास्तविक कारण पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा। प्रारंभिक जांच में किसी तरह की चोट या संघर्ष के निशान नहीं मिले हैं। उन्होंने बताया कि वीरा और उसका दूसरा शावक पूरी तरह सुरक्षित हैं। उनकी लगातार निगरानी की जा रही है। कूनो में चीतों की गतिविधियों और स्वास्थ्य पर चौबीसों घंटे नजर रखी जा रही है।

    गौरतलब है कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गुरुवार को श्योपुर जिले के कूनो राष्ट्रीय उद्यान में अंतरराष्ट्रीय चीता दिवस पर तीन चीतों को स्वछंद विचरण के लिये बाड़े से अभयारण्य में छोड़ा था। इनमें मादा चीता वीरा और उसके दो शावक शामिल हैं। बताया गया है कि गुरुवार देर रात ही ये शावक अपनी मां से अलग हो गया था। शुक्रवार को इसकी खोज की गई। शाम को पारोंद के जंगल में उसका शव मिला है।

    फील्ड डायरेक्टर उत्तम शर्मा ने बताया कि इस शावक की मौत के बाद कूनो नेशनल पार्क में चीतों की कुल संख्या अब 28 रह गई है। इनमें 8 वयस्क चीते (5 मादा और 3 नर) और भारत में जन्मे 20 शावक शामिल हैं। पार्क के अन्य सभी चीते स्वस्थ बताए गए हैं। चीता प्रोजेक्ट के अधिकारी इस घटना की बारीकी से जांच कर रहे हैं। इसमें शावकों के प्राकृतिक व्यवहार, क्षेत्र में मौजूद खतरों और निगरानी प्रणाली की समीक्षा भी शामिल है।

  • मप्रः रीवा में जीएसटी विभाग का छापा, किराना दुकान में मिले संदिग्ध बिल और कागजात

    मप्रः रीवा में जीएसटी विभाग का छापा, किराना दुकान में मिले संदिग्ध बिल और कागजात


    रीवा।
    मध्य प्रदेश के रीवा में शुक्रवार शाम शहर के व्यस्त बाजार क्षेत्र में जीएसटी विभाग की टीम ने रतन किराना स्टोर पर अचानक छापा मारा। लंबे समय से दुकान पर जीएसटी चोरी की शिकायतें मिल रही थीं, जिसके बाद विभाग ने बिना पूर्व जानकारी के कार्रवाई करने का निर्णय लिया। टीम के पहुंचते ही पूरे इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया और कुछ ही मिनटों में दुकान के बाहर लोगों की भीड़ इकट्ठा हो गई।

    विभाग के अधिकारियों ने दुकान के अंदर जाकर दस्तावेजों की जांच शुरू की। सूत्रों के अनुसार, टीम को कई ऐसे बिल और कागजात मिले हैं जिनमें बिलिंग से जुड़ी अनियमितताओं के संकेत मिलते हैं। बताया जा रहा है कि कुछ बिल रिकॉर्ड में दर्ज नहीं थे, जबकि कुछ में जीएसटी की गणना संदिग्ध पाई गई है। अधिकारियों ने इन सभी दस्तावेजों को जब्त कर लिया है और दुकान के कंप्यूटर सिस्टम का बैकअप भी लिया गया है, ताकि डिजिटल रिकॉर्ड की भी जांच की जा सके।

    कार्रवाई के दौरान दुकान मालिक से भी पूछताछ की गई और विभाग ने लेखा-जोखा से जुड़े कई प्रश्नों के उत्तर मांगे। हालांकि, दुकान संचालक ने अपना पक्ष स्पष्ट करते हुए कहा कि वह सभी दस्तावेज उपलब्ध कराने के लिए तैयार है और किसी प्रकार की जानबूझकर की गई गलती नहीं हुई है।

    जीएसटी विभाग का कहना है कि यह कार्रवाई शिकायतों और प्राथमिक साक्ष्यों के आधार पर की गई है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि अभी जांच प्रारंभिक चरण में है और दस्तावेजों की विस्तृत जांच के बाद ही यह तय होगा कि दुकान के खिलाफ क्या कानूनी कदम उठाए जाएंगे।

  • मप्र के छतरपुर में ट्रक और कार की जोरदार भिड़ंत, एक ही परिवार के 5 लोगों की मौत, दो घायल

    मप्र के छतरपुर में ट्रक और कार की जोरदार भिड़ंत, एक ही परिवार के 5 लोगों की मौत, दो घायल


    छतरपुर।
    मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में सागर-कानपुर हाईवे नंबर 34 पर शुक्रवार की रात एक भीषण सड़क हादसे में एक ही परिवार के पांच लोगों की मौत हो गई। यहां बड़ामलहरा तहसील के मुंगवारी और चौपरिया सरकार गांव के पास एक तेज रफ्तार ट्रक और कार के बीच जोरदार भिड़ंत हो गई। इस हादसे में दो घायल हुए हैं, जिन्हें गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया है। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू कर दी है।

    गुलगंज थाना पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, सतना के नागौद निवासी प्रजापति परिवार के सात लोग शुक्रवार को सेंट्रो कार नंबर एमपी 19 सीए 0857 से सागर के शाहगढ़ के लिए जा रहे थे। रात करीब आठ बजे बड़ामलहरा तहसील के मुंगवारी और चौपरिया सरकार गांव के बीच तेज रफ्तार कार और ट्रक की टक्कर हो गई। कार की रफ्तार इतनी थी कि हादसे के बाद कार का अगला हिस्सा पूरी तरह नष्ट हो गया। हादसे में पांच लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। सूचना मिलते ही सागर आईजी हिमानी खन्ना सहित गुलगंज पुलिस मौके पर पहुंची। कार के गेट तोड़कर शवों को बाहर निकाला जा सका। हादसे में दो लोग घायल हुए हैं, जिनकी हालत गंभीर है। दोनों घायलों को इलाज के लिए जिला अस्पताल रिफर किया गया है, जहां वह आईसीयू में भर्ती हैं।

    गुलगंज थाना प्रभारी गुरुदत्त शेषा ने बताया कि एक तेज रफ्तार कार सामने से आ रहे ट्रक से टकरा गई थी, जिसमें पांच लोगों की मौत हो गई है। कार में सात लोग सवार थे। दो घायलों को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। उन्होंने बताया कि मृतकों की पहचान महेंद्र प्रजापति (30), लक्ष्मण प्रजापति (40), दीपक प्रजापति (24), सुरेंद्र प्रजापति (26) और लालू प्रजापति (17) के रूप में हैं। दो लोग भूपेंद्र और जितेंद्र प्रजापति की हालत गंभीर है। हादसे के बाद ट्रक चालक वाहन को लेकर भाग निकला था। जिसे पुलिस ने पीछा कर बिजावर रोड पर पकड़ लिया। फिलहाल उससे पूछताछ की जा रही है।

    पुलिस के मुताबिक, सतना निवासी प्रजापति परिवार के लोग दो कारों में छतरपुर से शाहगढ़ जा रहे थे। सभी बहन को ससुराल से मायके लाने के लिए निकले थे। एक कार आगे निकल गई थी, जबकि पीछे चल रही सेंट्रो कार हादसे का शिकार हो गई।

  • मप्र में इंडिगो की 65 से ज्यादा फ्लाइट रद्द, यात्री बोले- कोई मदद नहीं मिल रही

    मप्र में इंडिगो की 65 से ज्यादा फ्लाइट रद्द, यात्री बोले- कोई मदद नहीं मिल रही


    इंदौर।
    देश की सबसे बड़ी एयरलाइन कंपनी इंडिगो पिछले चार दिन से क्रू मेंबर्स की कमी से जूझ रही है। इसके कारण देशभर के कई एयरपोर्ट पर 500 से ज्यादा फ्लाइट्स रद्द हो गईं। इनमें मध्य प्रदेश से संचालित होने वाली 65 से भी ज्यादा फ्लाइट्स शामिल हैं। शुक्रवार को इंदौर से जाने वाली 26 उड़ानों को निरस्त कर दिया गया, जबकि इंदौर आने वाली इंडिगो की 18 से ज्यादा फ्लाइट भी रद्द है। वहीं, भोपाल से कुल 18 और जबलपुर से इंडिगो की 6 में से 5 फ्लाइट को निरस्त कर दिया गया है। इससे यात्रियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। यात्रियों का कहना है कि विमानतल पर उन्हें कोई मदद नहीं मिल रही है।

    दरअसल, एविएशन सेक्टर के नए सुरक्षा नियमों की वजह से देश की सबसे बड़ी एयरलाइन कंपनी इंडिगो लगातार क्रू की कमी से जूझ रही है। इंडिगो की फ्लाइट्स का परिचालन शुक्रवार को भी लड़खड़ाता नजर आ रहा है। मुंबई और दिल्ली से ग्वालियर आने वाली फ्लाइट भी कैंसिल हैं। ऐसे में पैसेंजर ट्रेन का सहारा ले रहे हैं। शुक्रवार को इंदौर से जाने वाली 26 उड़ानों को निरस्त कर दिया गया। वहीं, इंदौर आने वाली इंडिगो की 18 से ज्यादा फ्लाइट भी कैंसिल है। इंदौर एयरपोर्ट पर पैसेंजर नागराज ने कहा कि मेरी शाम 6.45 बजे बेंगलुरु की फ्लाइट थी, वह कैंसिल हो गई है। एयरलाइंस के कर्मचारी से पूछा तो वह बोला कि इसके बाद वाली 7.45 की फ्लाइट में आपकी सीट बुक कर दूंगा लेकिन उसका जाना भी निश्चित नहीं है। नागराज ने कहा कि एयरलाइंस की तरफ से कहा गया है कि पैसे रिफंड किए जा रहे हैं। आगे की व्यवस्था खुद ही कर लें।

    भोपाल एयरपोर्ट पर पैसेंजर सस्मिता ने कहा कि मेरी भोपाल से बेंगलुरु की फ्लाइट थी। एयरलाइंस की तरफ से कोई भी जानकारी नहीं दी गई है। इनकी हेल्पलाइन में भी कोई मैसेज नहीं है। हम परेशान हो रहे हैं।

    हालांकि, इंडिगो ने कहा है कि जल्द ही नियमित संचालन बहाल किया जाएगा। एयरलाइन ने यात्रियों से अपील की है कि वे एयरपोर्ट आने से पहले अपनी उड़ान की ताजा जानकारी ले लें। यात्रियों की मदद के लिए भोपाल एयरपोर्ट प्रबंधन ने वाहन पार्किंग शुल्क पूरी तरह माफ कर दिया है। एयरपोर्ट प्रशासन ने कहा है कि इस चुनौतीपूर्ण समय में सभी यात्रियों की सहायता को प्राथमिकता दी जा रही है।

    इंडिगो की ग्वालियर से दिल्ली और मुंबई आने-जाने वाली फ्लाइट्स भी कैंसिल की गई हैं। ऐसे में यात्री ट्रेन के जरिए अपनी मंजिल की तरफ रवाना हो रहे हैं। भोपाल एयरपोर्ट पर आईं सोनल को 7 दिसंबर को बेंगलुरु जाना है। वे बोलीं- इंक्वारी में इंडिगो अथॉरिटीज ने बताया कि 7 तारीख को बेंगलुरु की फ्लाइट उड़ने के चांसेज बहुत कम हैं। जिस तरह से रोजाना उड़ानें कैंसिल हो रही हैं, उनकी फ्लाइट भी कैंसिल हो सकती है।

    ट्रैवल एजेंट फेडरेशन ऑफ इंडिया के प्रदेश अध्यक्ष अमोल कटारिया ने बताया कि जिन उड़ानों का संचालन हो रहा है, वह पूरी तरह से पैक हैं। आखिरी की खाली सीटें सामान्य की अपेक्षा 4 से 5 गुना तक कीमत पर बेची जा रही हैं। शाम इंदौर से दिल्ली जाने वाली दूसरी उड़ानों में एक टिकट का किराया 36 हजार रुपये तक पहुंचा था। ऐसे में यात्रियों के लिए सफर कर पाना मुश्किल हो गया है।

    मध्य प्रदेश कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी और पूर्व मंत्री पीसी शर्मा को शुक्रवार दोपहर 1:45 पर इंडिगो की फ्लाइट से भोपाल से दिल्ली जाना था। दिल्ली से वे इंडिगो की ही फ्लाइट से देहरादून जाने वाले थे। यहां उन्हें छतरपुर के पूर्व कांग्रेस विधायक आलोक चतुर्वेदी की बेटी के विवाह समारोह में शामिल होना था लेकिन इंडिगो की फ्लाइट कैंसिलेशन के चक्कर में दोनों नेता यात्रा नहीं कर पाए।

    इंडिगो के फ्लाइट ऑपरेशन कैंसिल होने के चलते पूर्व मंत्री पीसी शर्मा भी दिल्ली में आयोजित शादी में नहीं पहुंच पा रहे हैं। उन्होंने कहा कि छतरपुर के पूर्व कांग्रेस विधायक आलोक चतुर्वेदी की बेटी के विवाह समारोह में शामिल होना था लेकिन इंडिगो की फ्लाइट कैंसिलेशन के चक्कर में यात्रा नहीं कर पाए। उन्होंने केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया से विमान परिचालन सामान्य कराने की मांग की है।


    भोपाल में इंडिगो की 18 उड़ानें रद्द, 3600 से ज्यादा यात्री प्रभावित

    इंडिगो एयरलाइंस के नेटवर्क में जारी तकनीकी और परिचालन दिक्कतों का असर भोपाल में भी दिख रहा है। यहां से आने और जाने वाली इंडिगो की कुल 9 उड़ानें रद्द करनी पड़ीं। इससे 18 फ्लाइट मूवमेंट प्रभावित हुए हैं। रद्द उड़ानों में दिल्ली की 3, मुंबई की 2, बेंगलुरु की 2, पुणे और गोवा की 1-1 उड़ान शामिल हैं। इन उड़ानों के रद्द होने से भोपाल एयरपोर्ट पर लगभग 3600 यात्री परेशान हुए। भोपाल एयरपोर्ट से रोजाना 18 उड़ानें (36 मूवमेंट) संचालित होती हैं। इनमें से इंडिगो की 14 और एयर इंडिया की 4 उड़ानें शामिल हैं। प्रतिदिन औसतन करीब 5500 यात्री यहां से यात्रा करते हैं।

    वहीं, देश के अलग-अलग शहरों से जबलपुर के डुमना एयरपोर्ट आने वाली इंडिगो की 6 में से 5 फ्लाइट आज कैंसिल हो गई हैं। इंदौर से जबलपुर होते हुए हैदराबाद जाने वाली फ्लाइट सुबह साढ़े 8 बजे आती है और 9 बजे जाती है, वह कैंसिल हो गई। मुंबई से जबलपुर होते हुए 9 बजकर 40 मिनट पर आने वाली और 10 बजे दिल्ली जाने वाली फ्लाइट कैंसिल है। बेंगलुरु से दोपहर 12 बजकर 45 मिनट पर आने वाली और वापस 1 बजकर 15 मिनट पर बेंगलुरु जाने वाली फ्लाइट कैंसिल हो गई है। दिल्ली से दोपहर डेढ़ बजे आकर वापस 2 बजे दिल्ली जाने वाली फ्लाइट कैंसिल हो गई। दिल्ली से शाम 5 बजे जबलपुर आकर साढ़े 5 बजे मुंबई जाने वाली फ्लाइट कैंसिल हो गई। इसके अलावा हैदराबाद से शाम 7 बजकर 20 मिनट पर जबलपुर आकर 7 बजकर 50 पर इंदौर जाने वाली फ्लाइट के भी लेट होने की आशंका है।

  • मप्रः इंदौर में दो साल की मासूम से दुष्कर्म करने वाले को 4 धाराओं में उम्रकैद

    मप्रः इंदौर में दो साल की मासूम से दुष्कर्म करने वाले को 4 धाराओं में उम्रकैद


    – देश में पहली बार दुष्कर्मी को चार बार उम्रकैद, कोर्ट ने कहा- महिलाएं बाहर ही नहीं, घर में भी असुरक्षित

    इंदौर। मध्य प्रदेश के इंदौर शहर में दो साल की बच्ची को घर से उठाकर दुष्कर्म और उसकी हत्या की कोशिश करने वाले आरोपित को न्यायालय ने चार अलग-अलग धाराओं में चार बार उम्रकैद की सजा सुनाई है। अपर सत्र न्यायाधीश (विशेष न्यायालय पाक्सो) शिप्रा पटेल की कोर्ट ने शुक्रवार को फैसला सुनाया। आरोपित दिनेश डाबर (38 वर्ष), निवासी धार को पाक्सो एक्ट की तीन धाराओं के साथ ही हत्या के प्रयास की धारा में अलग-अलग आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही जबरदस्ती संबंध बनाने की धारा में भी पांच साल की सजा सुनाई गई। दोषी पर कोर्ट ने 42,000 रुपये का अर्थदंड भी लगाया है।

    फैसले में कोर्ट ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा है कि दोषी ने बालिका को घर से ले जाकर उसके साथ बलात्कार की घटना कारित की। उसे गंभीर चोंटे पहुंचाई। यह उसकी आपराधिक कुंठित मानसिकता को दर्शाता है। वर्तमान परिवेश में महिलाएं न केवल घर के बाहर बल्कि घर के अंदर भी असुरक्षित हैं। ऐसी स्थिति में अभियुक्त को न्यूनतम दंडादेश दिया जाना न्यायोचित और विधिपूर्ण नहीं है ।

    विशेष लोक अभियोजक सुशीला राठौर एवं प्रीति अग्रवाल ने बताया कि घटना 13 अक्टूबर 2022 की है। बालिका के पिता ने थाना चंदननगर में सूचना दी कि वह एक निर्माणाधीन भवन में परिवार सहित रहता है वहां चौकीदारी करते हैं। रात में लगभग 2 बजे से उनकी दो साल की वर्षीय जो अपनी मां के पास सो रही थी, वह गायब हो गई है। उसने और उसकी पत्नी ने पुत्री की आसपास तलाश किया लेकिन उसका कोई पता नहीं चला। मामले में पुलिस ने पिता की रिपोर्ट पर अज्ञात के खिलाफ अपहरण का केस दर्ज कर तलाश शुरू की। 13 अक्टूबर को सुबह रेती मंडी रोड स्थित खम्बाती कंपाउंड के सामने डायल-100 के सिपाही अभिनव सेन को झाड़ियों के पास घायल अवस्था में वह बच्ची मिली। जिसकी पहचान उसके माता-पिता ने की। विवेचना में घटनास्थल के आसपास स्थित सीसीटीवी फुटेज की रिकार्डिंग जब्त की। सीसीटीवी फुटेज में घटना में प्रयुक्त ट्रक ड्राइवर बच्ची के घर जाते हुए और वापस आते हुए दिखाई दिया।

    इन फुटेज की पहचान बच्ची के पिता से कराई तो उन्होंने बताया कि यह इस ट्रक का ड्राइवर दिनेश डाबर है। पुलिस ने इसे हिरासत में लेकर उसका मेडिकल परीक्षण कराया गया। इसके साथ ही डीएनए जांच करवाई गई तो उसके द्वारा यह अपराध किया जाना साबित हुआ और उसने स्वीकार भी किया। इस पर पुलिस ने उसके खिलाफ अपहरण, पाक्सो, जान से मारने का प्रयास सहित गंभीर धाराओं में केस दर्ज कर उसे गिरफ्तार किया। बाद में पुलिस ने बालिका के शरीर में मिले डीएनए की जांच की तो आरोपित से डीएनए मैच हुआ। पुलिस ने मेडिकल व वैज्ञानिक साक्ष्यों, विशेषकर डीएनए रिपोर्ट कोर्ट में पेश की थी।

    शुक्रवार को अपर सत्र न्या्याधीश (विशेष न्यायालय पॉक्सो अधिनियम) क्षिप्रा पटेल ने आरोपी को विभिन्न चार धाराओं में आजीवन कारावास से दंडित किया। जिन धाराओं में उसे चार बार आजीवन कारावास की सजा सुनाई है वे धारा 5एम/6 पॉक्सो एक्ट, 5-J (iii) /6 पॉक्सो एक्ट, 5(ईR/ 6 पॉक्सो एक्टा और धारा 307 है। इसके साथ ही भादंवि की धारा 366 में 5 वर्ष का सश्रम कारावास और 42 हजार रुपए के अर्थदंड से दंडित किया गया। अभियोजन की ओर से पैरवी विशेष लोक अभियोजक सुशीला राठौर और प्रीति अग्रवाल ने की।

    खास बात यह कि इस केस को कोर्ट ने गंभीर एवं सनसनीखेज प्रकरणों की श्रेणी में लिया। इसमें अभियोजन की ओर से कुल 31 गवाह करवाए गए। इसके अलावा परिस्थितजंय साक्ष्य भी काफी मजबूत रहे जिससे आरोपी को चौहरा आजीवन कारावास हुआ। कोर्ट ने बालिका को हुई मानसिक और शारीरिक क्षति की पूर्ति के लिए उसे 3 लाख रुपये पीड़ित प्रतिकर योजना के तहत देने की अनुशंसा भी की है। कोर्ट ने इस मामले में दोषी को कम सजा देने को सही नहीं माना। कोर्ट ने आदेश में टिप्पणी की है कि उसने 2 वर्षीय मासूम को घर से उठाकर उसके साथ जघन्य कृत्य किया तथा उसे गंभीर चोटें पहुंचाईं, जो उसकी कुंठित आपराधिक मानसिकता को दर्शाता है। वर्तमान परिस्थिति में महिलाएं घर से बाहर ही नहीं, बल्कि घर के अंदर भी असुरक्षित हैं। ऐसी स्थिति में न्यूनतम दंड देना न्यायोचित नहीं है।