Author: bharati

  • विराट-अनुष्का की वृंदावन यात्रा: क्या बदल गया है क्रिकेट के 'किंग' का जीवन के प्रति दृष्टिकोण? भक्ति और मानसिक संतुलन के नए सफर का हुआ आगाज़!

    विराट-अनुष्का की वृंदावन यात्रा: क्या बदल गया है क्रिकेट के 'किंग' का जीवन के प्रति दृष्टिकोण? भक्ति और मानसिक संतुलन के नए सफर का हुआ आगाज़!


    नई दिल्ली। वृंदावन, उत्तर प्रदेश: भारतीय क्रिकेट टीम के स्टार खिलाड़ी विराट कोहली और अभिनेत्री अनुष्का शर्मा एक बार फिर आध्यात्मिक यात्रा के लिए वृंदावन पहुंचे, जहां उन्होंने प्रेमानंद महाराज के आश्रम में पहुंचकर दर्शन किए और आशीर्वाद प्राप्त किया। इस यात्रा को उनके लगातार बढ़ते आध्यात्मिक रुझान के रूप में देखा जा रहा है, जिसमें वे पिछले कुछ समय से नियमित रूप से धार्मिक स्थलों का दौरा कर रहे हैं। इस दौरान कपल बेहद साधारण और शांत अंदाज में नजर आया, जिसने वहां मौजूद लोगों और फैंस का ध्यान आकर्षित किया।

    वृंदावन स्थित श्रीहित राधा केली कुंज आश्रम में पहुंचकर विराट और अनुष्का ने धार्मिक वातावरण में कुछ समय बिताया। दोनों ने मंदिर में दर्शन किए और वहां मौजूद संतों के सानिध्य में आध्यात्मिक माहौल को अनुभव किया। इस दौरान उनका व्यवहार पूरी तरह सहज और विनम्र दिखाई दिया। वे बिना किसी दिखावे के भक्तों के बीच शांत भाव से बैठे रहे और पूरे वातावरण को गंभीरता से महसूस करते नजर आए। धार्मिक स्थान पर उनकी उपस्थिति ने वहां मौजूद लोगों के बीच उत्साह और श्रद्धा का माहौल बना दिया।

    आश्रम में दोनों ने प्रेमानंद महाराज से मुलाकात कर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया। इस मुलाकात के दौरान जीवन के उद्देश्य, भक्ति, मानसिक शांति और गुरु के महत्व जैसे विषयों पर चर्चा हुई। बताया जाता है कि इस संवाद में आध्यात्मिक जीवन को समझने और उसे दैनिक जीवन में अपनाने पर विशेष रूप से विचार साझा किए गए। विराट और अनुष्का ने पूरी बातचीत को ध्यानपूर्वक सुना और इसे आत्मिक शांति से जोड़कर देखा।

    पिछले कुछ महीनों में यह पहली बार नहीं है जब यह कपल वृंदावन पहुंचा हो। जानकारी के अनुसार, पिछले कुछ समय में वे कई बार यहां आ चुके हैं। लगातार हो रही इन यात्राओं से यह साफ संकेत मिलता है कि दोनों अपने जीवन में आध्यात्मिकता को एक महत्वपूर्ण स्थान दे रहे हैं। व्यस्त पेशेवर जीवन और सार्वजनिक चर्चाओं के बीच वे समय निकालकर इस तरह के स्थानों पर पहुंचते हैं, जहां वे मानसिक शांति और संतुलन की तलाश करते हैं।

    इस यात्रा के दौरान उनका सादगी भरा अंदाज सोशल मीडिया पर भी चर्चा का विषय बना रहा। वायरल हुए वीडियो और तस्वीरों में दोनों को बेहद सामान्य और सहज रूप में देखा गया, जहां वे किसी भी तरह के औपचारिक या दिखावटी व्यवहार से दूर नजर आए। लोगों ने उनके इस व्यवहार को वास्तविक और जमीन से जुड़ा हुआ बताया। खेल और फिल्म जगत की चकाचौंध के बीच उनका यह रूप उनके फैंस के लिए प्रेरणादायक माना जा रहा है।

  • महिला आरक्षण को लेकर सियासी संग्राम, भोपाल में CM मोहन यादव का तीखा वार, हजारों बहनों ने निकाली पदयात्रा

    महिला आरक्षण को लेकर सियासी संग्राम, भोपाल में CM मोहन यादव का तीखा वार, हजारों बहनों ने निकाली पदयात्रा

    भोपाल । भोपाल की सड़कों पर रविवार को महिला आक्रोश और राजनीतिक संदेशों का बड़ा प्रदर्शन देखने को मिला जब ‘जन-आक्रोश महिला पदयात्रा’ में हजारों की संख्या में महिलाएं शामिल हुईं। इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने विपक्ष पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि महिलाओं के अधिकारों को कुचलने वालों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा और जरूरत पड़ी तो कठोर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि बहनों की इच्छा और अधिकार के खिलाफ जाने वालों को इतिहास कभी माफ नहीं करेगा।

    कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कांग्रेस पर निशाना साधा और कहा कि महिला आरक्षण बिल का विरोध करना देश की आधी आबादी के साथ अन्याय है। उन्होंने कांग्रेस नेतृत्व पर सवाल उठाते हुए कहा कि जो नेता महिलाओं के अधिकार की बात करते हैं वही अब उनके हक को कमजोर करने में लगे हैं। मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से विपक्षी नेताओं पर आरोप लगाया कि उन्होंने महिलाओं की आकांक्षाओं को दबाने का काम किया है।

    सीएम डॉ. यादव ने अपने संबोधन में यह भी कहा कि भारतीय समाज की परंपरा हमेशा से नारी शक्ति के सम्मान पर आधारित रही है। उन्होंने ऐतिहासिक उदाहरण देते हुए कहा कि समाज सुधारकों ने महिलाओं के अधिकारों के लिए संघर्ष किया है और आज भी वही विचारधारा आगे बढ़ाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि बिना नारी शक्ति के किसी भी समाज का विकास संभव नहीं है और सरकार हमेशा महिलाओं के साथ खड़ी है।

    कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने हजारों महिलाओं का अभिवादन किया और कहा कि यह आक्रोश केवल विरोध नहीं बल्कि अपने अधिकारों के लिए उठी आवाज है जिसे पूरे देश तक पहुंचाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि महिलाएं लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रख रही हैं और यह देश की शक्ति का प्रतीक है।

    इस मौके पर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने भी विपक्ष पर निशाना साधा और कहा कि महिला आरक्षण कोई राजनीतिक मुद्दा नहीं बल्कि महिलाओं का अधिकार था जिसे जानबूझकर रोका गया। उन्होंने कहा कि विपक्ष की भूमिका इस मामले में निराशाजनक रही है और यह कदम महिलाओं के सपनों पर चोट के समान है।

    कार्यक्रम में उपस्थित महिलाओं ने हाथों में स्लोगन लिखे पोस्टर लेकर अपनी भावनाएं व्यक्त कीं। कई जगहों पर नारों और गीतों के माध्यम से महिलाओं ने अपने अधिकारों के प्रति जागरूकता का संदेश दिया। पूरे आयोजन के दौरान राजधानी की सड़कों पर एक अलग ही माहौल देखने को मिला जहां सामाजिक और राजनीतिक चेतना का संगम नजर आया।

    मुख्यमंत्री ने अंत में कहा कि सरकार हर स्तर पर महिलाओं के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है और आगे भी इस दिशा में मजबूत कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि विधानसभा और अन्य मंचों पर महिलाओं के अधिकारों की आवाज को मजबूती से उठाया जाएगा। पूरा आयोजन केवल एक राजनीतिक कार्यक्रम नहीं बल्कि महिलाओं की शक्ति और उनके अधिकारों की अभिव्यक्ति के रूप में सामने आया, जिसने भोपाल की सड़कों को जनआंदोलन के रंग में रंग दिया।

  • जन्मदिन के मौके पर सामने आई उनकी भविष्य की योजनाएं; क्या शिक्षा को ही बनाएंगी अपनी असली ताकत?

    जन्मदिन के मौके पर सामने आई उनकी भविष्य की योजनाएं; क्या शिक्षा को ही बनाएंगी अपनी असली ताकत?


    नई दिल्ली। बॉलीवुड के लोकप्रिय और प्रतिष्ठित परिवारों में शामिल अजय देवगन और काजोल की बेटी नीसा देवगन एक बार फिर अपने जन्मदिन के मौके पर चर्चा का केंद्र बन गई हैं। 20 अप्रैल को उन्होंने अपना 23वां जन्मदिन मनाया, जिसके बाद उनके जीवन, शिक्षा और भविष्य की योजनाओं को लेकर लोगों की रुचि और अधिक बढ़ गई है। इस अवसर पर परिवार की ओर से उनके बचपन से जुड़ी कुछ पुरानी यादें साझा की गईं, जिनमें उनकी मासूमियत और पारिवारिक जुड़ाव साफ झलकता है। इन तस्वीरों ने सोशल मीडिया पर भी लोगों का ध्यान आकर्षित किया और नीसा की सादगी और सहज व्यक्तित्व की सराहना की जाने लगी।

    नीसा देवगन का नाम हमेशा से ही स्टार किड्स की चर्चा में शामिल रहा है, लेकिन उन्होंने अपने जीवन को काफी हद तक निजी रखने की कोशिश की है। एक बड़े फिल्मी परिवार से होने के बावजूद उन्होंने ग्लैमर की दुनिया से दूरी बनाकर अपनी पढ़ाई और व्यक्तिगत विकास पर अधिक ध्यान दिया है। बचपन से ही उनकी परवरिश एक संतुलित माहौल में हुई है, जहां उन्हें सामान्य जीवन जीने और अपनी पहचान खुद बनाने की सीख दी गई है। उनके माता पिता ने हमेशा यह स्पष्ट किया है कि वे अपने बच्चों को किसी भी तरह के दबाव में नहीं रखना चाहते और उन्हें अपने फैसले खुद लेने की स्वतंत्रता देते हैं।

    नीसा की शिक्षा का सफर भी काफी दिलचस्प रहा है। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा मुंबई के एक प्रतिष्ठित स्कूल से प्राप्त की, जहां उन्होंने अपनी स्कूली पढ़ाई पूरी की। इसके बाद वे आगे की पढ़ाई के लिए विदेश चली गईं, जहां उन्होंने सिंगापुर में एक अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक संस्थान से उच्च शिक्षा प्राप्त की। वहां उन्होंने विविध सांस्कृतिक माहौल में रहकर सीखने का अनुभव हासिल किया। इसके बाद उन्होंने स्विट्जरलैंड में बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन की पढ़ाई की, जिसमें उनका मुख्य फोकस लग्जरी ब्रांड मैनेजमेंट और स्ट्रैटेजी पर रहा। इस तरह उनकी शिक्षा ने उन्हें वैश्विक दृष्टिकोण और आधुनिक बिजनेस समझ विकसित करने में मदद की।

    साल 2025 में नीसा ने अपनी पढ़ाई पूरी की और इसके बाद से ही उनके करियर को लेकर तरह तरह की चर्चाएं होने लगीं। हालांकि अब तक उन्होंने किसी भी पेशेवर क्षेत्र में औपचारिक रूप से कदम नहीं रखा है। फिल्म इंडस्ट्री में आने को लेकर भी कई तरह की अटकलें लगाई जाती रही हैं, लेकिन परिवार की ओर से यह साफ किया गया है कि फिलहाल उनका फिल्मी दुनिया में कदम रखने का कोई इरादा नहीं है। वे अपने भविष्य को लेकर सोच समझकर आगे बढ़ने में विश्वास रखती हैं और अभी अपने व्यक्तिगत विकास पर ध्यान दे रही हैं।

    नीसा देवगन अक्सर अपनी निजी जिंदगी को लेकर सुर्खियों में रहती हैं, लेकिन वे मीडिया और सार्वजनिक चर्चाओं से दूरी बनाए रखने की कोशिश करती हैं। उनकी जीवनशैली और सोच उन्हें अपने समकालीन युवाओं से अलग बनाती है। परिवार का भी यह मानना है कि उन्हें अपने तरीके से जीवन जीने की पूरी आजादी मिलनी चाहिए। वर्तमान में नीसा अपने भविष्य की दिशा तय करने की प्रक्रिया में हैं और अपने अनुभवों के आधार पर आगे के फैसले लेने की तैयारी कर रही हैं।

  • हॉर्मुज में जहाजों पर फायरिंग के बाद भारत सतर्क, नौसेना की एडवाइजरी, ‘हमारी बिना अनुमति के न गुजरें’

    हॉर्मुज में जहाजों पर फायरिंग के बाद भारत सतर्क, नौसेना की एडवाइजरी, ‘हमारी बिना अनुमति के न गुजरें’


    नई दिल्ली। हॉर्मुज जलडमरूमध्य में भारतीय जहाजों पर फायरिंग की घटना के बाद भारत ने सुरक्षा को लेकर बड़ा कदम उठाया है। 18 अप्रैल को भारतीय नौसेना ने फारस की खाड़ी में संचालित भारतीय जहाजों के लिए नई एडवाइजरी जारी की जिसमें स्पष्ट निर्देश दिया गया है कि वे केवल नेवी के आदेश मिलने पर ही इस संवेदनशील मार्ग से गुजरें।

    नेवी की निगरानी में ही होगा जहाजों का मूवमेंट

    सूत्रों के मुताबिक भारतीय नौसेना ने हॉर्मुज पार करने वाले सभी भारतीय जहाजों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी है। अब तक 11 जहाज इस जलडमरूमध्य को पार कर चुके हैं। हालांकि हाल ही में दो भारतीय जहाजों जग अर्नव और सनमार हेराल्ड पर गोलीबारी के बाद उन्हें वापस लौटना पड़ा था।

    देश गरिमा को मिल रही नौसेना की सुरक्षा

    भारतीय टैंकर देश गरिमा 18 अप्रैल को हॉर्मुज जलडमरूमध्य पार कर चुका है। फिलहाल इसे अरब सागर में भारतीय नौसेना की सुरक्षा मिल रही है और इसके 22 अप्रैल तक मुंबई पहुंचने की संभावना है।

    लारक द्वीप के आसपास बढ़ाई गई सतर्कता
    एडवाइजरी में खासतौर पर जहाजों को लारक द्वीप से दूर रहने को कहा गया है। यह द्वीप हॉर्मुज के सबसे संकरे हिस्से में स्थित है और ईरान के तेल इंफ्रास्ट्रक्चर का अहम केंद्र माना जाता है। इसी कारण यहां सुरक्षा बेहद कड़ी रहती है और हर गतिविधि पर नजर रखी जाती है।

    वैश्विक तेल आपूर्ति का अहम मार्ग

    हॉर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है जहां से पहले वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग 20% गुजरता रहा है। इस क्षेत्र में बढ़ते तनाव का असर अंतरराष्ट्रीय बाजार और तेल की कीमतों पर भी पड़ सकता है।

    भारतीय नौसेना की मजबूत तैनाती
    फिलहाल फारस की खाड़ी में 14 भारतीय जहाज मौजूद हैं जो हॉर्मुज पार करने का इंतजार कर रहे हैं। भारतीय नौसेना इन सभी जहाजों के संपर्क में है और उन्हें अनुमति मिलने के बाद ही आगे बढ़ने की सलाह दी गई है। इसके अलावा क्षेत्र में भारतीय नौसेना के 7 युद्धपोत तैनात किए गए हैं जो जहाजों को सुरक्षित मार्ग प्रदान करेंगे।

  • ग्रामीण धरोहरों को विकास का आधार बनाने के लिए विशेषज्ञों ने दिया बड़ा मंत्र!

    ग्रामीण धरोहरों को विकास का आधार बनाने के लिए विशेषज्ञों ने दिया बड़ा मंत्र!

    नई दिल्ली। वर्ल्ड हेरिटेज डे के अवसर पर नई दिल्ली में ग्रामीण धरोहर संरक्षण और सतत विकास को लेकर एक महत्वपूर्ण संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया जिसमें देश की सांस्कृतिक और ग्रामीण विरासत को बचाने और उसे विकास की मुख्यधारा से जोड़ने पर विस्तृत चर्चा हुई। इस अवसर पर यह विचार प्रमुख रूप से सामने आया कि धरोहर केवल ऐतिहासिक पहचान नहीं बल्कि सामाजिक और आर्थिक विकास का एक मजबूत आधार भी हो सकती है। कार्यक्रम में पिछले कई वर्षों में किए गए प्रयासों और ग्रामीण क्षेत्रों में धरोहर संरक्षण से जुड़े कार्यों की समीक्षा भी की गई। इस दौरान विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया कि बदलते समय में धरोहर संरक्षण को नई चुनौतियों के अनुरूप ढालना आवश्यक है ताकि इसे आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखा जा सके।

    कार्यक्रम में मुख्य अतिथि ने अपने संबोधन में कहा कि भारत में धरोहर संरक्षण के लिए मजबूत कानूनी प्रावधान मौजूद हैं लेकिन असली चुनौती उनके प्रभावी क्रियान्वयन की है। उन्होंने कहा कि कई स्थानों पर जागरूकता की कमी और संवेदनशीलता का अभाव देखा जाता है जिससे ऐतिहासिक स्थलों और ग्रामीण विरासत को नुकसान पहुंचने की आशंका बनी रहती है। उन्होंने विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों की ओर ध्यान आकर्षित करते हुए कहा कि वहां धरोहर को संरक्षित करने के लिए अधिक सक्रिय प्रयासों की आवश्यकता है ताकि स्थानीय पहचान और सांस्कृतिक परंपराएं सुरक्षित रह सकें।

    संस्था के अध्यक्ष ने अपने विचार रखते हुए कहा कि ग्रामीण धरोहर को केवल संरक्षण की दृष्टि से नहीं देखा जाना चाहिए बल्कि इसे स्थानीय विकास और रोजगार के अवसरों से जोड़ना जरूरी है। उन्होंने बताया कि संस्था पिछले कई वर्षों से उपेक्षित धरोहर स्थलों को पुनर्जीवित करने और उन्हें स्थानीय समुदायों के साथ जोड़ने के लिए कार्य कर रही है। उनका मानना है कि जब स्थानीय लोग अपनी विरासत से जुड़ते हैं तो उसका संरक्षण स्वाभाविक रूप से मजबूत होता है और यह क्षेत्रीय विकास में भी योगदान देता है।

    कार्यक्रम में अंतरराष्ट्रीय अनुभवों को भी साझा किया गया जिसमें बताया गया कि कई देशों में धरोहर संरक्षण में समुदाय की भागीदारी सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। यह देखा गया कि जब लोग अपनी परंपराओं और सांस्कृतिक मूल्यों को अपने जीवन का हिस्सा बना लेते हैं तो धरोहर अधिक सुरक्षित रहती है और पीढ़ियों तक आगे बढ़ती है। इस दौरान यह भी कहा गया कि धरोहर केवल भौतिक संरचनाओं तक सीमित नहीं है बल्कि इसमें ज्ञान परंपराएं, सामाजिक मूल्य और सांस्कृतिक भावनाएं भी शामिल हैं जिन्हें संरक्षित करना आवश्यक है।

    चर्चा में यह बात भी सामने आई कि भारत की ग्रामीण धरोहर जिसमें पारंपरिक खेती, हस्तशिल्प, लोक कलाएं और स्थानीय भाषाएं शामिल हैं अभी भी विकास की मुख्यधारा से पूरी तरह नहीं जुड़ पाई हैं। विशेषज्ञों ने सुझाव दिया कि यदि इन संसाधनों को आर्थिक अवसरों से जोड़ा जाए तो ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और सतत विकास को बढ़ावा मिल सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि देश की बड़ी ग्रामीण आबादी को ध्यान में रखते हुए धरोहर आधारित विकास मॉडल अपनाना समय की आवश्यकता है।

    कार्यक्रम में युवाओं की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताया गया और कहा गया कि नई पीढ़ी को धरोहर से जोड़ना और उनके भीतर सांस्कृतिक जागरूकता विकसित करना भविष्य के संरक्षण के लिए अत्यंत आवश्यक है। इस अवसर पर यह भी कहा गया कि धरोहर संरक्षण केवल सरकारी या संस्थागत जिम्मेदारी नहीं है बल्कि समाज के हर वर्ग की साझा जिम्मेदारी है।

  • भोपाल और जबलपुर जेल में दो बंदियों ने फांसी लगाई सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

    भोपाल और जबलपुर जेल में दो बंदियों ने फांसी लगाई सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल


    मध्य प्रदेश । मध्य प्रदेश की दो प्रमुख सेंट्रल जेलों में कैदियों द्वारा आत्महत्या किए जाने की घटनाओं ने जेल प्रशासन की व्यवस्था और सुरक्षा प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक घटना भोपाल केंद्रीय जेल की है और दूसरी जबलपुर स्थित नेताजी सुभाषचंद्र बोस केंद्रीय जेल की है। दोनों ही मामलों में पुलिस ने मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है और कारणों का पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है।

    भोपाल सेंट्रल जेल में हत्या के मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहे एक बंदी ने आत्महत्या कर ली। मृतक की पहचान गुड्डू आदिवासी के रूप में हुई है जो रायसेन जिले के बाड़ी क्षेत्र का रहने वाला था। वह वर्ष 2017 से जेल में बंद था और जेल परिसर की गौशाला में गौसेवक के रूप में कार्य कर रहा था। जानकारी के अनुसार उसने जेल परिसर में स्थित गौशाला क्षेत्र में पेड़ पर रस्सी का फंदा बनाकर फांसी लगा ली। घटना की जानकारी मिलते ही जेल प्रशासन में हड़कंप मच गया और तुरंत पुलिस को सूचना दी गई। शव को पोस्टमार्टम के लिए गांधी मेडिकल कॉलेज की मर्चुरी में भेजा गया है। गांधीनगर थाना पुलिस ने मर्ग कायम कर जांच प्रक्रिया शुरू कर दी है। प्रारंभिक तौर पर आत्महत्या के कारण स्पष्ट नहीं हो पाए हैं।

    दूसरी घटना जबलपुर केंद्रीय जेल की है जहां एक विचाराधीन बंदी ने अस्पताल वार्ड के शौचालय में तौलिये से फंदा बनाकर आत्महत्या कर ली। मृतक की पहचान गुड्डू उर्फ राजा विश्वकर्मा के रूप में हुई है जो संजीवनी नगर क्षेत्र का निवासी था। उसे वर्ष 2024 में विभिन्न धाराओं के तहत गिरफ्तार कर जेल में बंद किया गया था। जानकारी के अनुसार वह लंबे समय से शुगर और अन्य बीमारियों से भी पीड़ित था। घटना के समय वह जेल के अस्पताल खंड में भर्ती था और वहीं उसने यह कदम उठाया। जेल स्टाफ ने तुरंत डॉक्टर को बुलाया लेकिन जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया गया।

    घटना के बाद जेल प्रशासन ने संबंधित थाने को सूचना दी और सिविल लाइन थाना पुलिस ने मौके पर पहुंचकर जांच शुरू की। उप जेलर के अनुसार बंदी की स्थिति पर निगरानी रखी जा रही थी लेकिन अचानक हुई इस घटना ने सभी को चौंका दिया।

    दोनों मामलों में आत्महत्या के पीछे के कारण फिलहाल स्पष्ट नहीं हैं। पुलिस और जेल प्रशासन सभी पहलुओं की जांच कर रहे हैं जिनमें मानसिक स्थिति स्वास्थ्य समस्याएं और जेल के भीतर की परिस्थितियां शामिल हैं। लगातार दो जेलों में ऐसी घटनाएं सामने आने के बाद सुरक्षा व्यवस्था और कैदियों की निगरानी प्रणाली पर गंभीर बहस शुरू हो गई है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि जेलों में मानसिक स्वास्थ्य सहायता और नियमित काउंसलिंग की व्यवस्था को और मजबूत करने की आवश्यकता है ताकि इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके। फिलहाल पुलिस जांच जारी है और रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

  • ईरान युद्ध के बीच भारतीय सेना ने की ऊर्जा संकट से निपटने की तैयारी, बनाया ये प्लान..

    ईरान युद्ध के बीच भारतीय सेना ने की ऊर्जा संकट से निपटने की तैयारी, बनाया ये प्लान..

    नई दिल्ली। ईरान में जारी तनाव और संभावित तेल-गैस संकट के बीच भारतीय सेना ने ऊर्जा खपत को कम करने और वैकल्पिक संसाधनों को अपनाने के लिए बड़ा रणनीतिक प्लान तैयार किया है। सेना अब एलपीजी और पारंपरिक ईंधन पर निर्भरता घटाकर बायोगैस, सोलर और अन्य वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों की ओर तेजी से बढ़ रही है। यह योजना अगले महीने से मिशन मोड में लागू की जाएगी।

    फ्यूल बचाने के लिए नई रणनीति तैयार
    रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय सेना ने बायोगैस स्टोव्स की खरीद का ऑर्डर जारी कर दिया है। इसके साथ ही जवानों की मूवमेंट को 400 किलोमीटर के दायरे तक सीमित करने की योजना बनाई गई है, ताकि ईंधन की खपत कम की जा सके। अधिकारियों का कहना है कि यह बदलाव बिना किसी ऑपरेशनल क्षमता को प्रभावित किए लागू किया जाएगा।

    वाहनों की पूलिंग और इलेक्ट्रिक विकल्पों पर जोर
    सेना अब वाहनों की पूलिंग सिस्टम को बढ़ावा दे रही है, यानी एक साथ कई कार्यों को एक यात्रा में पूरा करने की रणनीति अपनाई जा रही है। इसके अलावा इलेक्ट्रिक वाहनों और सीएनजी के उपयोग को भी बढ़ाने की योजना है। कुछ नियम पहले ही लागू हो चुके हैं, जबकि बाकी अगले एक-दो हफ्तों में लागू किए जाएंगे।

    हवाई गतिविधियों में भी कटौती
    फ्यूल बचाने के लिए सेना से जुड़ी कुछ उड़ानों को भी सीमित किया जाएगा। अधिकारियों के अनुसार यह कदम रणनीतिक जरूरतों को प्रभावित किए बिना ईंधन खपत कम करने के उद्देश्य से उठाया जा रहा है।

    सौर और पवन ऊर्जा पर बड़ा फोक

    सेना की योजना आने वाले वर्षों में बड़े स्तर पर सोलर प्लांट और पवन चक्कियों की स्थापना करने की है। अनुमान के मुताबिक, सेना में रोजाना लगभग 1,56,000 किलो कुकिंग गैस की खपत होती है, जिसमें बायोगैस के इस्तेमाल से लगभग 20% तक बचत संभव है। वहीं, करीब 2 लाख वाहनों के चलते बड़ी मात्रा में ईंधन खर्च होता है।

    पांच साल का हरित ऊर्जा मिशन
    सेना का लक्ष्य है कि अगले पांच वर्षों में खाली और उपयोग न हो रहे क्षेत्रों में सोलर और विंड एनर्जी प्रोजेक्ट्स लगाए जाएं, जिससे ऊर्जा आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिल सके और पारंपरिक ईंधन पर निर्भरता घटे।

    होर्मुज जलमार्ग से गुजरता भारतीय टैंकर सुरक्षित

    इसी बीच एक अहम घटनाक्रम में भारतीय ध्वज वाला तेल टैंकर होर्मुज जलडमरूमध्य को सुरक्षित पार कर मुंबई की ओर बढ़ रहा है। यह वही संवेदनशील जलमार्ग है, जहां हाल ही में तनाव की स्थिति देखने को मिली थी। इस टैंकर पर 31 भारतीय नाविक सवार हैं और इसके 22 अप्रैल तक मुंबई पहुंचने की उम्मीद है।

  • बंगाल चुनाव से पहले गरमाई सियासत, हिमंत बिस्वा सरमा का तीखा हमला, बोले- 29 से पहले सरेंडर करो, वरना..

    बंगाल चुनाव से पहले गरमाई सियासत, हिमंत बिस्वा सरमा का तीखा हमला, बोले- 29 से पहले सरेंडर करो, वरना..


    कोलकाता। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के पहले चरण की वोटिंग में अब कुछ ही दिन शेष हैं। 23 तारीख को पहले चरण का मतदान होना है, जबकि दूसरे चरण के लिए 29 तारीख तय की गई है। इसके साथ ही तमिलनाडु में भी 23 को एक ही चरण में मतदान होगा। वहीं 4 मई को असम, केरल, पुडुचेरी, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल के चुनाव परिणाम घोषित किए जाएंगे।

    बंगाल में बनेगी भाजपा सरकार- हिमंत बिस्वा सरमा
    असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने पश्चिम बंगाल में भाजपा की जीत का बड़ा दावा किया है। पश्चिम बर्धमान जिले के गौरबाजार में चुनाव प्रचार के दौरान उन्होंने कहा कि इस बार राज्य में भाजपा की सरकार बनना 100 प्रतिशत तय है। उन्होंने पार्टी की संभावनाओं को लेकर पूरा भरोसा जताया।

    चुनावी मंच से दी सख्त चेतावनी
    पांडुआ में जनसभा को संबोधित करते हुए हिमंत बिस्वा सरमा ने तीखा बयान दिया। उन्होंने टीएमसी के कथित सिंडिकेट पर निशाना साधते हुए कहा, 29 तारीख से पहले सरेंडर कर दो, नहीं तो बाद में जेल जाना पड़ेगा। इस बयान के बाद राज्य की राजनीति में हलचल और तेज हो गई है।

    गौरव वल्लभ का दावा, भवानीपुर से हारेंगी ममता बनर्जी

    भाजपा नेता गौरव वल्लभ ने भी बड़ा बयान देते हुए कहा कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भवानीपुर सीट से चुनाव हार सकती हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले 15 वर्षों में टीएमसी सरकार ने मां, माटी और मानुष के साथ विश्वासघात किया है और राज्य में अराजकता का माहौल बना रहा।

    भाजपा नेताओं का डबल इंजन सरकार पर जोर
    भाजपा सांसद गुलाम अली खटाना ने दावा किया कि पश्चिम बंगाल की जनता डबल इंजन सरकार बनाने का मन बना चुकी है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बयान का समर्थन करते हुए कहा कि 29 अप्रैल से पहले आरोपियों को सरेंडर कर देना चाहिए, अन्यथा 4 मई के बाद सख्त कार्रवाई की जाएगी।

  • पहाड़ों के बीच सुकून तलाशने वालों के लिए जन्नत से कम नहीं है शानगढ़!

    पहाड़ों के बीच सुकून तलाशने वालों के लिए जन्नत से कम नहीं है शानगढ़!


    नई दिल्ली। हिमाचल प्रदेश की सैंज घाटी में स्थित शानगढ़ एक ऐसा शांत और प्राकृतिक गांव है जो अपनी अनछुई सुंदरता और सादगी के कारण विशेष पहचान रखता है। ऊंचे पहाड़ों, घने जंगलों और विशाल हरित मैदानों के बीच बसा यह स्थान शहरों की भागदौड़ से दूर एक अलग ही दुनिया का अनुभव कराता है। यहां पहुंचते ही वातावरण की शांति और ठंडी हवा मन को सुकून देती है और ऐसा महसूस होता है जैसे जीवन की गति कुछ समय के लिए धीमी पड़ गई हो।

    शानगढ़ की सबसे बड़ी विशेषता इसके विस्तृत घास के मैदान हैं जो दूर तक फैले हुए हैं और चारों ओर हरियाली का अद्भुत दृश्य प्रस्तुत करते हैं। देवदार के ऊंचे पेड़, लकड़ी से बने पारंपरिक घर और पहाड़ी जीवनशैली इस गांव की सांस्कृतिक पहचान को जीवंत बनाते हैं। यहां का जीवन आज भी सरल और प्रकृति के करीब है जहां लोग अपनी परंपराओं को संजोकर रखते हैं। आधुनिकता का प्रभाव सीमित होने के कारण यहां का वातावरण शुद्ध और प्राकृतिक बना हुआ है।

    यह स्थान केवल प्राकृतिक सौंदर्य तक सीमित नहीं है बल्कि आध्यात्मिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जाता है। यहां स्थित प्राचीन शिव मंदिर स्थानीय आस्था का केंद्र है जहां लोगों की गहरी श्रद्धा जुड़ी हुई है। मंदिर के आसपास बने लकड़ी के छोटे ढांचे और पारंपरिक स्थापत्य शैली इस क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत को दर्शाते हैं। शांत वातावरण में स्थित यह धार्मिक स्थल ध्यान और आत्मिक शांति के लिए उपयुक्त माना जाता है।

    शानगढ़ का मौसम पूरे वर्ष बदलता रहता है और हर मौसम इसकी सुंदरता को एक नया रूप देता है। वसंत और गर्मियों के दौरान यहां के घास के मैदान हरे और जीवंत हो जाते हैं तथा हल्की धूप वातावरण को और सुखद बना देती है। गर्मियों में भी यहां का तापमान अपेक्षाकृत ठंडा रहता है जिससे यह स्थान मैदानी इलाकों की गर्मी से राहत पाने के लिए उपयुक्त बन जाता है। शरद ऋतु में सेब और अखरोट के बागान इस क्षेत्र की सुंदरता को और बढ़ा देते हैं। सर्दियों में ठंडी हवाएं और हल्की बर्फ इसे एक शांत और आकर्षक रूप प्रदान करती हैं।

    मानसून के समय इस क्षेत्र में यात्रा सावधानी से करनी चाहिए क्योंकि पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन का खतरा बढ़ जाता है। इसके बावजूद अन्य मौसमों में यहां का सफर बेहद मनमोहक होता है और हर मोड़ पर प्राकृतिक दृश्य यात्रियों को आकर्षित करते हैं। यहां तक पहुंचने के लिए पहाड़ी रास्तों से होकर गुजरना पड़ता है जो यात्रा को रोमांचक और यादगार बना देता है।

    शानगढ़ में पर्यटकों के लिए होमस्टे की सुविधा उपलब्ध है जहां उन्हें स्थानीय जीवनशैली को करीब से देखने का अवसर मिलता है। यहां का पारंपरिक भोजन और सरल आतिथ्य पर्यटकों के अनुभव को और भी खास बना देता है। यह गांव उन लोगों के लिए एक आदर्श स्थान है जो प्रकृति के बीच शांति और सुकून के पल बिताना चाहते हैं और भीड़भाड़ से दूर एक सादगी भरा अनुभव तलाश रहे हैं।

  • खेल का महाकुंभ उज्जैन में सम्पन्न, फिरोजिया ट्रॉफी फाइनल में CM की बड़ी घोषणाएं

    खेल का महाकुंभ उज्जैन में सम्पन्न, फिरोजिया ट्रॉफी फाइनल में CM की बड़ी घोषणाएं


    उज्जैन । उज्जैन शहर में आयोजित फिरोजिया ट्रॉफी 2026 का फाइनल मुकाबला बेहद रोमांच और उत्साह के बीच संपन्न हुआ। क्षीर सागर मैदान पर खेले गए इस फाइनल मैच में खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन किया और दर्शकों को अंत तक रोमांच से बांधे रखा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव मुख्य अतिथि के रूप में कार्यक्रम में शामिल हुए और उन्होंने खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन किया।

    कार्यक्रम में देर रात तक भारी संख्या में खेल प्रेमी मैदान में मौजूद रहे, जिससे शहर में क्रिकेट और खेल के प्रति गहरा जुनून देखने को मिला। फाइनल मुकाबला 12 से 19 अप्रैल तक चली इस प्रतियोगिता का समापन था, जिसमें दोनों टीमों के बीच जबरदस्त संघर्ष देखने को मिला।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस अवसर पर विजेता टीम के लिए 1 लाख रुपये और उपविजेता टीम के लिए 51 हजार रुपये की नगद राशि देने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि इस तरह के आयोजन युवाओं को खेलों के प्रति प्रेरित करते हैं और उनमें अनुशासन तथा टीम भावना को मजबूत बनाते हैं।

    सीएम ने उज्जैन में खेल सुविधाओं के विस्तार की भी घोषणा की। उन्होंने बताया कि नानाखेड़ा स्टेडियम, माधव नगर मैदान और दशहरा मैदान का आधुनिकरण किया जाएगा। इसके साथ ही क्षीरसागर मैदान को भी एक आधुनिक खेल स्टेडियम के रूप में विकसित करने की योजना है, जिससे स्थानीय खिलाड़ियों को बेहतर सुविधाएं मिल सकें।

    यह प्रतियोगिता पिछले 21 वर्षों से आयोजित की जा रही है और इसका आयोजन सांसद अनिल फिरोजिया द्वारा उनके स्वर्गीय पिता भूरेलाल फिरोजिया की स्मृति में किया जाता है। इस बार आयोजन में महिला क्रिकेट मैच और मातृशक्ति सम्मान समारोह भी आकर्षण का केंद्र रहे, जिससे कार्यक्रम को सामाजिक और सांस्कृतिक आयाम भी मिला।

    फाइनल मुकाबले के बाद पूरे आयोजन स्थल पर उत्सव जैसा माहौल देखने को मिला। खिलाड़ियों के प्रदर्शन और दर्शकों की भारी भागीदारी ने यह साबित किया कि उज्जैन में खेल संस्कृति लगातार मजबूत हो रही है।