Author: bharati

  • सिंगरौली में 15 करोड़ की दिनदहाड़े डकैती, सुरक्षा में 3 बड़ी चूक से बदमाश हुए फरार

    सिंगरौली में 15 करोड़ की दिनदहाड़े डकैती, सुरक्षा में 3 बड़ी चूक से बदमाश हुए फरार


    सिंगरौली । मध्य प्रदेश के सिंगरौली जिले में हुई 15 करोड़ रुपए की सनसनीखेज बैंक डकैती ने सुरक्षा व्यवस्था की गंभीर खामियों को उजागर कर दिया है। बैढ़न स्थित बैंक ऑफ महाराष्ट्र की शाखा में दिनदहाड़े पांच हथियारबंद बदमाश घुसे और करीब 10 किलो सोना व 20 लाख रुपए नकद लूटकर फरार हो गए। इस वारदात ने पूरे इलाके में दहशत फैला दी है और पुलिस-प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

    इस मामले में पुलिस ने एक आरोपी कमलेश कुमार को गिरफ्तार किया है, जिसे आठ दिन की पुलिस रिमांड पर लिया गया है। हालांकि लूट का पूरा माल अभी बरामद नहीं हो सका है। पुलिस के अनुसार मुख्य आरोपी फंटूश उर्फ ननकी बिहार के नालंदा जिले का रहने वाला है जबकि अन्य आरोपी झारखंड और अन्य क्षेत्रों से जुड़े हैं। फरार आरोपियों की तलाश के लिए पुलिस की 10 विशेष टीमें लगातार छापेमारी कर रही हैं।

    डकैती की घटना के पीछे सबसे बड़ी बात तीन गंभीर लापरवाहियां मानी जा रही हैं। पहली यह कि बैंक में शुरुआत से ही कोई सुरक्षा गार्ड तैनात नहीं था। वर्ष 2018 में खुली इस शाखा में कभी गार्ड नहीं रखा गया। बैंक प्रबंधन ने खर्च कम करने के नाम पर यह व्यवस्था खत्म कर दी थी। इससे बदमाशों को वारदात को अंजाम देने में आसानी मिली।

    दूसरी बड़ी चूक पुलिस की प्रतिक्रिया में देरी को लेकर सामने आई है। घटना की सूचना मिलने के बावजूद पुलिस मौके पर करीब 20 मिनट की देरी से पहुंची जबकि थाना बैंक से महज डेढ़ किलोमीटर की दूरी पर है। इस देरी का फायदा उठाकर आरोपी आसानी से फरार हो गए।

    तीसरी और अहम लापरवाही यह रही कि शहर के चेक पॉइंट्स को समय पर अलर्ट नहीं किया गया। सीसीटीवी फुटेज में बदमाशों को बाइक से शहर से बाहर जाते हुए देखा गया लेकिन वे मस्जिद तिराहा और अंबेडकर चौक जैसे प्रमुख चेक पॉइंट पार कर गए और किसी ने उन्हें नहीं रोका। इसके बाद वे बीजपुर रोड होते हुए छत्तीसगढ़ सीमा में प्रवेश कर गए।

    घटना के बाद बैंक के सुरक्षा इंतजामों की पोल और भी खुली जब यह सामने आया कि बैंक में लगा अलार्म सिस्टम भी सिर्फ औपचारिकता भर था। अलार्म बजने पर भी कोई त्वरित मदद नहीं मिलती क्योंकि वह पुलिस कंट्रोल रूम से जुड़ा नहीं है।

    इस बीच गिरफ्तार आरोपी कमलेश कुमार को रेलवे स्टेशन पर शक के आधार पर पकड़ा गया। उसके पास से 15 लाख 20 हजार रुपए और 61 ग्राम सोना बरामद हुआ। पूछताछ में उसने पहले पुलिस को गुमराह करने की कोशिश की लेकिन सख्ती के बाद उसने डकैती में शामिल होने की बात कबूल कर ली।

    पुलिस अब अन्य फरार आरोपियों की तलाश में जुटी है और पड़ोसी राज्यों की पुलिस के साथ मिलकर कार्रवाई कर रही है। इस घटना ने न केवल बैंकिंग सुरक्षा व्यवस्था बल्कि पुलिस की त्वरित प्रतिक्रिया प्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

  • सलमान खान की वो ब्लॉकबस्टर जिसने पर्दे पर मचाया धमाल, मगर पर्दे के पीछे विवादों ने नहीं छोड़ा पीछा!

    सलमान खान की वो ब्लॉकबस्टर जिसने पर्दे पर मचाया धमाल, मगर पर्दे के पीछे विवादों ने नहीं छोड़ा पीछा!


    नई दिल्ली। बॉलीवुड की कई सफल फिल्मों के पीछे सिर्फ ग्लैमर और सफलता ही नहीं, बल्कि कई बार ऐसे किस्से भी जुड़े होते हैं जो समय के साथ सामने आते हैं और इंडस्ट्री को हिला देते हैं। ऐसी ही एक फिल्म रही चोरी चोरी चुपके चुपके, जिसमें सलमान खान, रानी मुखर्जी और प्रीति जिंटा मुख्य भूमिकाओं में नजर आए थे। यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर बड़ी हिट साबित हुई, लेकिन इसके निर्माण से जुड़ी कुछ विवादित चर्चाएं लंबे समय तक सुर्खियों में बनी रहीं।

    फिल्म के निर्माण को लेकर उस दौर में यह चर्चा सामने आई थी कि इसके वित्तीय प्रबंधन और प्रोडक्शन प्रक्रिया में कुछ ऐसे संपर्क शामिल थे जिन पर बाद में सवाल उठे। बताया जाता है कि फिल्म की शुरुआत के दौरान एक व्यक्ति ने सलमान खान की डेट्स को लेकर दावा किया था, जिसके आधार पर प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाया गया। बाद में जैसे जैसे फिल्म पर काम आगे बढ़ा, वैसे वैसे इसके वित्तीय ढांचे को लेकर कई तरह की बातें सामने आने लगीं।

    स्थिति तब और गंभीर हो गई जब फिल्म से जुड़े कुछ लेनदेन और संपर्कों को लेकर संदेह जताया गया। उस समय इंडस्ट्री में यह भी चर्चा रही कि कुछ बाहरी दबाव और अनौपचारिक मांगों ने माहौल को जटिल बना दिया था। इसी दौरान जांच और कानूनी कार्रवाई जैसी स्थितियां भी बनीं, जिसने पूरे मामले को और विवादित बना दिया।

    इस पूरे घटनाक्रम को लेकर फिल्म इंडस्ट्री के कुछ लोगों ने बाद में यह संकेत दिए कि उस दौर में फिल्म निर्माण और फाइनेंसिंग के क्षेत्र में पारदर्शिता की कमी के कारण कई प्रोजेक्ट्स प्रभावित होते थे। हालांकि फिल्म की शूटिंग और निर्माण अंततः पूरा हुआ और यह बड़े पर्दे पर रिलीज भी हुई।

    2001 में रिलीज हुई इस फिल्म का निर्देशन अब्बास मस्तान ने किया था। रोमांटिक कॉमेडी शैली में बनी यह फिल्म दर्शकों के बीच काफी लोकप्रिय रही और इसने बॉक्स ऑफिस पर मजबूत प्रदर्शन किया। करीब 13 करोड़ रुपये के बजट में बनी इस फिल्म ने लगभग 37 करोड़ रुपये की कमाई की, जिससे यह उस साल की सफल फिल्मों में शामिल हो गई।

    फिल्म की सफलता का मुख्य कारण इसकी मनोरंजक कहानी, कलाकारों की केमिस्ट्री और हल्के फुल्के अंदाज में पेश किया गया कथानक था। दर्शकों ने इसे खूब पसंद किया, लेकिन इसके निर्माण से जुड़ी चर्चाएं इसे लंबे समय तक विवादों में भी बनाए रखती हैं।

    यह फिल्म आज भी इस बात का उदाहरण मानी जाती है कि बॉलीवुड की चमकदार दुनिया के पीछे कई बार ऐसी परतें भी होती हैं जो समय के साथ धीरे धीरे सामने आती हैं और दर्शकों को हैरान कर देती हैं।

  • UPI और दक्षिण कोरियाई पेमेंट सिस्टम के बीच ऐतिहासिक करार, लेन-देन होगा अब और भी आसान!

    UPI और दक्षिण कोरियाई पेमेंट सिस्टम के बीच ऐतिहासिक करार, लेन-देन होगा अब और भी आसान!


    नई दिल्ली। भारत की डिजिटल भुगतान प्रणाली UPI अब एक और बड़े देश में अपनी पहुंच बनाने जा रही है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर डिजिटल अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के तहत भारत और दक्षिण कोरिया ने अपने-अपने इलेक्ट्रॉनिक भुगतान सिस्टम को जोड़ने पर सहमति जताई है। इस पहल के बाद भारतीय नागरिक जल्द ही दक्षिण कोरिया में भी अपने UPI आधारित ऐप्स के जरिए आसानी से भुगतान कर सकेंगे, जिससे विदेशी यात्रा और लेनदेन पहले से अधिक सरल हो जाएंगे।

    इस समझौते का उद्देश्य दोनों देशों के लोकल QR कोड आधारित भुगतान सिस्टम को आपस में जोड़ना है। इसका सीधा फायदा यात्रियों, छात्रों और कामकाजी लोगों को मिलेगा, जो एक देश से दूसरे देश में जाते समय डिजिटल भुगतान की सुविधा का उपयोग कर सकेंगे। इस व्यवस्था के लागू होने के बाद भारतीय उपयोगकर्ता दक्षिण कोरिया में वहां के QR कोड स्कैन कर अपने UPI ऐप से सीधे भुगतान कर सकेंगे। इसी तरह दक्षिण कोरिया के नागरिक भारत में भी इसी सुविधा का लाभ उठा सकेंगे।

    यह पहल डिजिटल भुगतान के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। इसके तहत तकनीकी एकीकरण, सुरक्षा मानक, मुद्रा विनिमय और संचालन व्यवस्था जैसे कई महत्वपूर्ण पहलुओं पर काम किया जाएगा। इन प्रक्रियाओं के पूरा होने के बाद ही यह सुविधा आम उपयोगकर्ताओं के लिए पूरी तरह से उपलब्ध हो पाएगी।

    भारत में UPI पहले से ही डिजिटल लेनदेन का सबसे बड़ा माध्यम बन चुका है। देश के भीतर इसकी लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है और अब इसका अंतरराष्ट्रीय विस्तार इसे वैश्विक पहचान दिला रहा है। इस कदम से भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है और नकद रहित लेनदेन को और अधिक बढ़ावा मिलेगा।

    डिजिटल भुगतान के अलावा इस समझौते के दौरान दोनों देशों ने आपसी सहयोग के अन्य क्षेत्रों पर भी चर्चा की है। इनमें सांस्कृतिक आदान-प्रदान, शिक्षा, तकनीकी सहयोग और रचनात्मक उद्योग शामिल हैं। दोनों देशों ने फिल्म, संगीत और सांस्कृतिक गतिविधियों के माध्यम से लोगों के बीच संबंध मजबूत करने पर सहमति जताई है, जिससे आपसी समझ और सहयोग को बढ़ावा मिलेगा।

    इसके साथ ही दोनों देशों ने व्यापारिक संबंधों को भी विस्तार देने का लक्ष्य तय किया है। आने वाले वर्षों में व्यापार को दोगुना करने की दिशा में काम किया जाएगा। इसके लिए एआई, सेमीकंडक्टर, जहाज निर्माण और वित्तीय तकनीक जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की योजना बनाई जा रही है।

    इस डिजिटल पेमेंट एकीकरण को एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है, क्योंकि इससे न केवल अंतरराष्ट्रीय यात्रा आसान होगी, बल्कि वैश्विक स्तर पर भारत की फिनटेक क्षमता भी मजबूत होगी। यह पहल भविष्य में अन्य देशों के साथ भी इसी तरह के समझौतों का रास्ता खोल सकती है।

  • ब्रोकरेज ने जताया 64 रुपये के टारगेट का भरोसा; क्या अब मल्टीबैगर रिटर्न के लिए तैयार हैं निवेशक?

    ब्रोकरेज ने जताया 64 रुपये के टारगेट का भरोसा; क्या अब मल्टीबैगर रिटर्न के लिए तैयार हैं निवेशक?


    नई दिल्ली।विंड एनर्जी सेक्टर की प्रमुख कंपनी सुजलॉन एनर्जी के शेयरों में हाल के दिनों में तेज रफ्तार देखने को मिली है। लगातार खरीदारी के चलते स्टॉक में मजबूत तेजी बनी हुई है और निवेशकों का रुझान इस ओर बढ़ा है। पिछले कुछ कारोबारी सत्रों में शेयर में लगभग 20 प्रतिशत तक की बढ़त दर्ज की गई है, जबकि एक महीने के भीतर इसमें करीब 28 प्रतिशत तक की तेजी देखने को मिली है।

    हाल के कारोबारी सत्र में शेयर लगभग 53 रुपये के स्तर पर बंद हुआ, जिससे बाजार में यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या यह आगे चलकर 64 रुपये के स्तर को पार कर सकता है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि कंपनी में आई यह तेजी केवल अल्पकालिक नहीं है, बल्कि इसके पीछे सेक्टर की मजबूत संभावनाएं भी अहम भूमिका निभा रही हैं।

    ब्रोकरेज हाउस जेएम फाइनेंशियल ने सुजलॉन एनर्जी पर अपनी BUY रेटिंग को बरकरार रखते हुए अगले 12 महीनों के लिए 64 रुपये का टारगेट प्राइस तय किया है। रिपोर्ट के अनुसार मौजूदा स्तर से शेयर में लगभग 30 प्रतिशत तक की अतिरिक्त बढ़त की संभावना बनी हुई है। इसके पीछे मुख्य कारण भारत में तेजी से बढ़ती बिजली की मांग और नवीकरणीय ऊर्जा पर सरकार का बढ़ता फोकस माना जा रहा है।

    विशेषज्ञों के अनुसार विंड एनर्जी सेक्टर आने वाले समय में और अधिक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है, खासकर तब जब सोलर और गैस आधारित ऊर्जा उत्पादन दिन के कुछ समय तक सीमित रहता है। शाम और रात के समय बिजली की मांग को पूरा करने में विंड एनर्जी एक मजबूत विकल्प के रूप में उभर रही है, जिससे इस सेक्टर की कंपनियों को फायदा मिल सकता है।

    सरकारी स्तर पर भी विंड एनर्जी क्षमता बढ़ाने पर लगातार काम किया जा रहा है। आने वाले वर्षों में बड़े पैमाने पर नए प्रोजेक्ट्स शुरू होने की संभावना है, जिससे इस क्षेत्र में निवेश और विस्तार दोनों को बढ़ावा मिलेगा। इससे कंपनियों की ऑर्डर बुक मजबूत होने और उत्पादन क्षमता में सुधार की उम्मीद है।

    कंपनी के प्रदर्शन में हाल के समय में सुधार देखने को मिला है। प्रोजेक्ट्स के निष्पादन और डिलीवरी में तेजी आई है, जिससे पहले की तुलना में कामकाज अधिक सुचारू हुआ है। इससे कंपनी के कैश फ्लो में सुधार और नए ऑर्डर्स मिलने की संभावना भी बढ़ी है।

    बाजार विश्लेषकों का कहना है कि सुजलॉन के शेयर की दिशा आगे चलकर पूरी तरह से रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर की मांग, सरकारी नीतियों और वैश्विक ऊर्जा परिस्थितियों पर निर्भर करेगी। यदि सेक्टर में मौजूदा रफ्तार बनी रहती है, तो शेयर में आगे और मजबूती देखने को मिल सकती है।

  • रिश्तों पर भारी पड़ा पैसा: बड़वानी के पिछोड़ी में बेटे ने पिता के सिर में मारी गोली

    रिश्तों पर भारी पड़ा पैसा: बड़वानी के पिछोड़ी में बेटे ने पिता के सिर में मारी गोली

    बड़वानी । मध्य प्रदेश के बड़वानी जिले से एक ऐसी सनसनीखेज वारदात सामने आई है जिसने पिता-पुत्र के पवित्र रिश्ते को लहूलुहान कर दिया है। जिला मुख्यालय के समीपस्थ ग्राम पिछोड़ी में एक कलयुगी बेटे ने महज चंद रुपयों के लालच और विवाद में अपने ही पिता के सिर में गोली मारकर उनकी हत्या कर दी। जिस पिता ने बेटे के बेहतर भविष्य के लिए अपनी जमा-पूंजी दांव पर लगा दी उसी बेटे ने आवेश में आकर पिता की जीवनलीला समाप्त कर दी। सोमवार 20 अप्रैल की दोपहर हुई इस घटना के बाद से पूरे इलाके में दहशत और मातम का माहौल है।

    मिली जानकारी के अनुसार पुलिस को सोमवार दोपहर फोन के जरिए सूचना मिली थी कि ग्राम पिछोड़ी में एक व्यक्ति की गोली मारकर हत्या कर दी गई है। सूचना मिलते ही कोतवाली पुलिस की टीम तत्काल घटनास्थल पर पहुंची। पुलिस ने मौके का बारीकी से निरीक्षण किया और शव का पंचनामा तैयार कर मामले की जांच शुरू की। इस दौरान पुलिस को जो सच्चाई पता चली उसने अधिकारियों को भी हैरान कर दिया। इस जघन्य हत्याकांड की चश्मदीद गवाह कोई और नहीं बल्कि मृतक की पत्नी और आरोपी की मां गौरी बाई हैं।

    गौरी बाई ने रोते हुए पुलिस को बताया कि उनके 32 वर्षीय बेटे चंदन बडोले ने अपने 58 वर्षीय पिता जगन बडोले की हत्या की है। मां के अनुसार पिता और पुत्र के बीच पिछले कुछ समय से रुपयों के लेनदेन को लेकर तनाव चल रहा था। सोमवार को भी इसी बात को लेकर विवाद शुरू हुआ। देखते ही देखते बहस इतनी बढ़ गई कि दोनों के बीच मारपीट होने लगी। इसी बीच गुस्से में आपा खो चुके चंदन ने पास रखी पिस्तौल निकाली और सीधे अपने पिता के सिर पर गोली दाग दी। गोली लगते ही जगन बडोले लहूलुहान होकर जमीन पर गिर पड़े और मौके पर ही उनकी मौत हो गई।

    शहर कोतवाली थाना प्रभारी बलजीत सिंह बिसेन ने मामले की जानकारी देते हुए बताया कि शुरुआती जांच और मृतक की पत्नी के बयानों से यह स्पष्ट है कि विवाद की मुख्य वजह पैसा थी। मृतक जगन बडोले ने पहले भी अपने बेटे चंदन को वेल्डिंग की दुकान चलाने और अन्य जरूरतों के लिए दो लाख रुपये दिए थे। बावजूद इसके चंदन की मांगें कम नहीं हो रही थीं। वह लगातार और पैसों के लिए अपने पिता पर दबाव बना रहा था। सोमवार को जब पिता ने और पैसे देने से मना किया तो आरोपी ने इस खौफनाक वारदात को अंजाम दे दिया।

    पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भेजा जहाँ की प्रारंभिक रिपोर्ट में भी सिर पर गंभीर चोट और गोली लगने के कारण मौत होने की पुष्टि हुई है। थाना प्रभारी बिसेन ने बताया कि आरोपी चंदन बडोले वारदात को अंजाम देने के बाद से ही फरार है। पुलिस की अलग-अलग टीमें उसकी गिरफ्तारी के लिए संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही हैं। पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज कर लिया है और जल्द ही आरोपी को सलाखों के पीछे भेजने का दावा किया है। इस घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि जब रिश्तों के बीच लालच की दीवार खड़ी होती है तो वहां केवल खून और पछतावा ही शेष बचता है।

  • एक मशहूर अभिनेत्री जिसने परिवार को दी प्राथमिकता, और बॉलीवुड को 'करिश्मा-करीना' के रूप में दी सबसे बड़ी विरासत!

    एक मशहूर अभिनेत्री जिसने परिवार को दी प्राथमिकता, और बॉलीवुड को 'करिश्मा-करीना' के रूप में दी सबसे बड़ी विरासत!


    नई दिल्ली। हिंदी सिनेमा के सुनहरे दौर में कई ऐसी अभिनेत्रियां रहीं जिन्होंने कम समय में ही अपनी मजबूत पहचान बना ली थी। इन्हीं में से एक नाम बबीता का है, जिन्होंने अपने अभिनय और स्क्रीन प्रेजेंस से दर्शकों के बीच खास जगह बनाई। 20 अप्रैल 1947 को कराची में जन्मी बबीता का बचपन फिल्मी माहौल में ही बीता, क्योंकि उनके परिवार का संबंध पहले से ही सिनेमा जगत से था। इसी कारण बहुत कम उम्र में उन्होंने फिल्मों की दुनिया में कदम रख दिया और शुरुआती दौर से ही अपनी प्रतिभा का परिचय देने लगीं।

    बबीता ने अपने करियर में उस दौर के बड़े सितारों के साथ काम किया और कई चर्चित फिल्मों का हिस्सा बनीं। उन्होंने राजेश खन्ना, जितेंद्र और शशि कपूर जैसे सुपरस्टार्स के साथ स्क्रीन साझा की और अपनी भूमिकाओं से दर्शकों का ध्यान खींचा। उनके किरदारों में रोमांस, पारिवारिक भावनाएं और हल्की कॉमेडी का सुंदर मिश्रण देखने को मिलता था, जिससे वे उस समय की लोकप्रिय अभिनेत्रियों में शामिल हो गईं। उनकी अभिनय शैली सहज और प्रभावशाली मानी जाती थी, जिसने उन्हें इंडस्ट्री में एक अलग पहचान दी।

    फिल्मी करियर के दौरान बबीता ने कई सफल फिल्मों में काम किया और धीरे-धीरे अपनी जगह मजबूत की। हालांकि उनका यह सफर अपेक्षाकृत छोटा रहा, लेकिन इस दौरान उन्होंने अपनी छाप छोड़ दी। करियर के चरम पर पहुंचने के बाद उनकी निजी जिंदगी ने एक नया मोड़ लिया, जिसने उनके पेशेवर जीवन को पूरी तरह बदल दिया।

    उनकी जिंदगी में बड़ा बदलाव तब आया जब उनकी मुलाकात रणधीर कपूर से हुई। दोनों ने एक साथ काम किया और यहीं से उनके रिश्ते की शुरुआत हुई। बाद में दोनों ने विवाह कर लिया। शादी के बाद बबीता ने फिल्मों से दूरी बनाने का फैसला किया और अपने परिवार को प्राथमिकता दी। उस समय पारिवारिक परंपराओं और व्यक्तिगत निर्णयों के चलते उन्होंने अभिनय की दुनिया को छोड़ दिया।

    शादी के बाद उनका जीवन पूरी तरह परिवार केंद्रित हो गया। समय के साथ कपूर परिवार को आर्थिक चुनौतियों का भी सामना करना पड़ा, क्योंकि रणधीर कपूर का करियर अपेक्षित गति नहीं पकड़ सका। ऐसे समय में बबीता ने परिवार को संभालने और घर की जिम्मेदारियों को मजबूती से निभाने में अहम भूमिका निभाई। उन्होंने कठिन परिस्थितियों के बावजूद परिवार को स्थिर बनाए रखा।

    बबीता की सबसे बड़ी भूमिका उनकी बेटियों करिश्मा कपूर और करीना कपूर खान के जीवन में देखी जाती है। दोनों बेटियां आगे चलकर हिंदी सिनेमा की बड़ी और सफल अभिनेत्रियां बनीं। उनकी परवरिश और मार्गदर्शन में बबीता का महत्वपूर्ण योगदान माना जाता है। उन्होंने अपनी बेटियों को सही दिशा दी और उन्हें आत्मनिर्भर और सफल बनाने में अहम भूमिका निभाई।

    बबीता की कहानी इस बात का उदाहरण है कि फिल्मी दुनिया की चमक के पीछे कई बार व्यक्तिगत फैसले और त्याग भी छिपे होते हैं। उन्होंने अपने करियर को छोड़कर परिवार को प्राथमिकता दी और अपनी बेटियों के भविष्य को संवारने में खुद को पूरी तरह समर्पित कर दिया।

  • स्थिर खेल और सटीक रणनीति ने बनाया दर्शकों का चहेता, जीत के साथ रचा इतिहास!

    स्थिर खेल और सटीक रणनीति ने बनाया दर्शकों का चहेता, जीत के साथ रचा इतिहास!


    नई दिल्ली। टेलीविजन रियलिटी शो बिग बॉस मराठी सीजन 6 का ग्रैंड फिनाले बेहद रोमांचक माहौल में संपन्न हुआ, जहां तन्वी कोलते ने इस सीजन की विजेता बनकर खिताब अपने नाम कर लिया। करीब 100 दिनों तक चले इस शो में प्रतियोगियों के बीच लगातार टकराव, रणनीति, भावनात्मक उतार चढ़ाव और प्रतिस्पर्धा का दौर देखने को मिला, लेकिन अंत में तन्वी ने अपनी स्थिरता और समझदारी से सबको पीछे छोड़ दिया।

    फिनाले की रात माहौल पूरी तरह उत्साह से भरा हुआ था जब अंतिम परिणाम की घोषणा की गई। जैसे ही विजेता के रूप में तन्वी कोलते का नाम सामने आया, मंच पर मौजूद दर्शकों और प्रतिभागियों में उत्साह की लहर दौड़ गई। शो के दौरान होस्ट की भूमिका निभा रहे रितेश देशमुख ने उनके हाथ को ऊपर उठाकर विजेता घोषित किया, जिसके बाद पूरा सेट तालियों से गूंज उठा।

    इस सीजन में कई मजबूत प्रतिभागियों ने अपनी जगह बनाई थी। फाइनल राउंड में तन्वी कोलते के साथ राकेश बापट, अनुश्री माने, दीपाली सैयद और विशाल कोटियन जैसे नाम शामिल थे। जैसे जैसे शो आगे बढ़ा, मुकाबला और भी कड़ा होता गया और अंतिम चरण में तीन प्रमुख प्रतियोगियों के बीच खिताब की दौड़ बेहद दिलचस्प हो गई। अंततः तन्वी ने निर्णायक बढ़त हासिल करते हुए जीत दर्ज की।

    तन्वी कोलते की जीत को केवल किस्मत नहीं बल्कि एक मजबूत रणनीतिक खेल का परिणाम माना जा रहा है। पूरे सीजन में उन्होंने संतुलित व्यवहार बनाए रखा और टास्क में लगातार अच्छा प्रदर्शन किया। चाहे शारीरिक चुनौतियां हों या मानसिक दबाव, उन्होंने हर परिस्थिति में खुद को स्थिर रखते हुए आगे बढ़ने की कोशिश की। उनका यही संतुलन उन्हें अन्य प्रतियोगियों से अलग बनाता रहा।

    शो के दौरान राकेश बापट ने रनर अप की स्थिति हासिल की, जबकि विशाल कोटियन तीसरे स्थान पर रहे। विशाल को पूरे सीजन में उनकी रणनीतिक सोच और गेम प्लान के कारण मजबूत प्रतियोगी माना गया। अन्य प्रतिभागियों ने भी अपने प्रदर्शन से शो को रोचक बनाए रखा और दर्शकों का मनोरंजन किया।

    इस पूरे सीजन में दर्शकों को कई तरह के रंग देखने को मिले, जिसमें दोस्ती, प्रतिस्पर्धा, टकराव और भावनात्मक पल शामिल थे। हर कंटेस्टेंट ने अपने तरीके से गेम को आगे बढ़ाया, लेकिन अंत में तन्वी कोलते की निरंतरता और समझदारी उन्हें विजेता बनाने में सबसे बड़ा कारण साबित हुई।

  • सरकार का 'फ्लेक्स फ्यूल' पर बड़ा दांव, एथेनॉल के दम पर ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने की तैयारी!

    सरकार का 'फ्लेक्स फ्यूल' पर बड़ा दांव, एथेनॉल के दम पर ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने की तैयारी!


    नई दिल्ली। वैश्विक तेल बाजार में बढ़ती अनिश्चितता और मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच भारत सरकार ने ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए फ्लेक्स फ्यूल वाहनों को बढ़ावा देने की दिशा में तेजी दिखाई है। सरकार का उद्देश्य परिवहन क्षेत्र में एथेनॉल के उपयोग को बढ़ाना और कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता को धीरे-धीरे कम करना है। यह कदम देश की अर्थव्यवस्था को बाहरी झटकों से सुरक्षित रखने के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    नीति स्तर पर इस विषय पर व्यापक विचार-विमर्श की तैयारी की जा रही है, जिसमें तेल कंपनियों, ऑटोमोबाइल क्षेत्र और अन्य संबंधित पक्षों के साथ मिलकर एक स्पष्ट रणनीति तैयार की जाएगी। इस प्रक्रिया में ऐसे उपायों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा, जो मौजूदा ईंधन नीतियों को आगे बढ़ाते हुए एथेनॉल मिश्रण के स्तर को बढ़ा सकें और फ्लेक्स फ्यूल वाहनों के उपयोग को आसान बना सकें।

    वर्तमान में देश में पेट्रोल में 20 प्रतिशत तक एथेनॉल मिलाने का कार्यक्रम लागू है। अब सरकार ऐसे वाहनों को बढ़ावा देने पर विचार कर रही है जो उच्च स्तर के एथेनॉल मिश्रण, यहां तक कि 85 प्रतिशत तक, पर भी आसानी से चल सकें। इससे न केवल वैकल्पिक ईंधनों का उपयोग बढ़ेगा, बल्कि कृषि क्षेत्र को भी लाभ मिलने की संभावना है, क्योंकि एथेनॉल उत्पादन में कृषि आधारित कच्चे माल का उपयोग किया जाता है।

    भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर कच्चे तेल का आयात करता है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों में उतार-चढ़ाव का सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। ऐसे में फ्लेक्स फ्यूल वाहनों को अपनाना ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। इसके साथ ही, सरकार एथेनॉल मिश्रण के लक्ष्यों को पहले तय समय से पहले हासिल करने की दिशा में भी काम कर रही है, जिससे इस क्षेत्र में तेजी लाई जा सके।

    एथेनॉल उत्पादन को बढ़ाने के लिए भी कई स्तरों पर प्रयास किए जा रहे हैं। इसमें कच्चे माल के दायरे का विस्तार, उत्पादन के लिए कृषि क्लस्टर विकसित करना और अतिरिक्त खाद्यान्न का उपयोग शामिल है। चावल और चीनी जैसे संसाधनों का एक हिस्सा एथेनॉल उत्पादन के लिए निर्धारित किया गया है, जिससे उत्पादन क्षमता में वृद्धि हो सके। इसके अलावा, एथेनॉल की खरीद के लिए तय मूल्य और कर में रियायत जैसे कदम भी इस क्षेत्र को प्रोत्साहित कर रहे हैं।

    यह पहल न केवल पर्यावरणीय दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि आर्थिक स्थिरता के लिए भी लाभकारी मानी जा रही है। फ्लेक्स फ्यूल वाहनों के माध्यम से भारत वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है, जो भविष्य में परिवहन क्षेत्र में बड़े बदलाव का संकेत देता है।

  • सेंसेक्स और निफ्टी में 'वेट एंड वॉच' की स्थिति: विदेशी तनाव के चलते सुरक्षित निवेश की तलाश में निवेशक, छोटे शेयरों में गिरावट ने बिगाड़ा बाजार का मूड!

    सेंसेक्स और निफ्टी में 'वेट एंड वॉच' की स्थिति: विदेशी तनाव के चलते सुरक्षित निवेश की तलाश में निवेशक, छोटे शेयरों में गिरावट ने बिगाड़ा बाजार का मूड!


    नई दिल्ली। सप्ताह के पहले कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार वैश्विक अनिश्चितता और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच सीमित दायरे में उतार चढ़ाव के बाद लगभग सपाट स्तर पर बंद हुआ। दिनभर निवेशकों के बीच सतर्कता का माहौल बना रहा, जिससे बाजार में कोई स्पष्ट दिशा देखने को नहीं मिली। शुरुआती सत्र में हल्की तेजी के बाद बाजार ने अपने ऊपरी स्तरों से फिसलते हुए अंत में मामूली बढ़त दर्ज की।

    कारोबार के अंत में सेंसेक्स करीब 26 अंकों की बढ़त के साथ 78,520 के स्तर पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी भी हल्की बढ़त के साथ 24,364 के आसपास पहुंच गया। दिन की शुरुआत सकारात्मक रही थी और दोनों सूचकांकों ने शुरुआती कारोबार में ऊंचे स्तरों को छुआ, लेकिन बाद में मुनाफावसूली और वैश्विक संकेतों की कमजोरी के कारण बाजार पर दबाव बन गया।

    दिन के दौरान बाजार ने सीमित दायरे में कारोबार किया। निवेशक बड़े फैसले लेने से बचते नजर आए और ज्यादातर समय सतर्क रुख अपनाए रखा। वैश्विक स्तर पर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव तथा संभावित संघर्षविराम को लेकर बनी अनिश्चितता ने निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता को प्रभावित किया। इसी कारण बाजार अपने उच्चतम स्तर को बनाए रखने में सफल नहीं हो सका।

    वृहद बाजार में भी कमजोरी देखने को मिली। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में गिरावट दर्ज की गई, जिससे यह संकेत मिला कि निवेशक फिलहाल सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर झुकाव बनाए हुए हैं। यह रुझान आमतौर पर तब देखने को मिलता है जब बाजार में अनिश्चितता अधिक होती है और निवेशक जोखिम कम करने की कोशिश करते हैं।

    सेक्टर स्तर पर बाजार का रुख मिला जुला रहा। कुछ क्षेत्रों में खरीदारी देखने को मिली जबकि कई सेक्टरों में बिकवाली का दबाव बना रहा। ऑटो और बैंकिंग से जुड़े शेयरों में हल्की मजबूती रही, जबकि आईटी, मेटल और एफएमसीजी क्षेत्रों में कमजोरी दर्ज की गई। इस मिश्रित प्रदर्शन ने भी बाजार को किसी एक दिशा में आगे बढ़ने से रोके रखा।

    पश्चिम एशिया में हालिया घटनाक्रमों ने वैश्विक निवेश माहौल को प्रभावित किया है। समुद्री मार्गों और व्यापारिक गतिविधियों से जुड़ी अनिश्चितता ने निवेशकों की चिंताओं को बढ़ा दिया है। ऐसी परिस्थितियों में बाजार आमतौर पर सतर्क रुख अपनाता है और उतार चढ़ाव सीमित दायरे में रहता है।

    आने वाले दिनों में बाजार की दिशा काफी हद तक अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों और वैश्विक आर्थिक संकेतों पर निर्भर करेगी। निवेशक फिलहाल सतर्क बने हुए हैं और किसी बड़े संकेत का इंतजार कर रहे हैं जो बाजार को स्पष्ट दिशा दे सके।

  • सीमित संसाधनों के बावजूद सार्वजनिक निवेश को प्राथमिकता देने की तैयारी, क्या सफल होगा यह बड़ा दांव?

    सीमित संसाधनों के बावजूद सार्वजनिक निवेश को प्राथमिकता देने की तैयारी, क्या सफल होगा यह बड़ा दांव?


    नई दिल्ली।देश के विभिन्न राज्यों के लिए वित्त वर्ष 2027 में आर्थिक रणनीति का केंद्र सार्वजनिक निवेश बना रहेगा। अनुमान है कि राज्य सरकारें बुनियादी ढांचे के विकास और दीर्घकालिक आर्थिक मजबूती को ध्यान में रखते हुए पूंजीगत खर्च को प्राथमिकता देती रहेंगी। हालांकि, इस खर्च की वृद्धि दर अपेक्षाकृत सीमित रह सकती है और इसके 8 से 10 प्रतिशत के बीच रहने की संभावना जताई जा रही है। यह स्थिति दर्शाती है कि राज्यों को विकास और वित्तीय संतुलन के बीच सावधानीपूर्वक तालमेल बनाना होगा।

    आर्थिक आकलनों के अनुसार, राज्यों का पूंजीगत व्यय सकल राज्य घरेलू उत्पाद के लगभग 2.3 से 2.4 प्रतिशत के दायरे में रह सकता है। यह संकेत देता है कि बुनियादी ढांचे से जुड़ी परियोजनाओं जैसे सड़क, परिवहन, ऊर्जा और शहरी विकास में निवेश जारी रहेगा। इस तरह के निवेश से रोजगार सृजन और आर्थिक गतिविधियों को गति मिलने की उम्मीद है, जो दीर्घकाल में राज्यों की अर्थव्यवस्था को मजबूत आधार प्रदान कर सकता है।

    दूसरी ओर, राज्यों के सामने राजस्व व्यय को नियंत्रित करना एक बड़ी चुनौती बन सकता है। जनकल्याणकारी योजनाओं पर बढ़ता खर्च और ऊर्जा तथा कमोडिटी की ऊंची लागत से वित्तीय दबाव बढ़ने की संभावना है। इसके चलते राज्यों के कुल खर्च में वृद्धि हो सकती है, जिससे उनके बजट संतुलन पर असर पड़ सकता है। साथ ही, राजस्व प्राप्तियों की वृद्धि दर भी सीमित रहने का अनुमान है, जो वित्त वर्ष 2026 में लगभग 6.2 प्रतिशत और वित्त वर्ष 2027 में करीब 7.9 प्रतिशत तक रह सकती है। यह वृद्धि दर नाममात्र के आर्थिक विस्तार की तुलना में कम मानी जा रही है।

    राज्यों की आय पर केंद्र से मिलने वाले संसाधनों की गति में संभावित कमी का भी प्रभाव पड़ सकता है। वैश्विक परिस्थितियों और बढ़ती सब्सिडी आवश्यकताओं के कारण केंद्र सरकार पर वित्तीय दबाव बढ़ने की आशंका है, जिससे राज्यों को मिलने वाले हस्तांतरणों की वृद्धि धीमी हो सकती है। इस स्थिति में राज्यों को अपने संसाधनों का अधिक कुशल प्रबंधन करना होगा ताकि विकास परियोजनाओं को जारी रखा जा सके।

    विशेषज्ञों के अनुसार, पूंजीगत व्यय को प्राथमिकता देने के बावजूद इसकी वृद्धि दर धीमी पड़ सकती है, जिसका असर राजकोषीय घाटे और ऋण स्तर पर दिखाई दे सकता है। अनुमान है कि राजस्व घाटा धीरे-धीरे बढ़कर वित्त वर्ष 2027 तक सकल राज्य घरेलू उत्पाद के लगभग 1.2 प्रतिशत तक पहुंच सकता है। यह स्थिति राज्यों के लिए वित्तीय अनुशासन बनाए रखने की आवश्यकता को और महत्वपूर्ण बना देती है, ताकि वे अपने विकास लक्ष्यों और सामाजिक जिम्मेदारियों के बीच संतुलन स्थापित कर सकें।

    उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र और तेलंगाना जैसे प्रमुख राज्यों ने पहले भी सीमित राजस्व वृद्धि के बावजूद पूंजीगत व्यय को प्राथमिकता दी है। यह रुझान बताता है कि राज्यों का ध्यान दीर्घकालिक आर्थिक विकास और बुनियादी ढांचे को सुदृढ़ करने पर केंद्रित है। आने वाले समय में भी यह रणनीति आर्थिक स्थिरता और विकास को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।