Author: bharati

  • एमपी बोर्ड सेकेंड एग्जाम का मौका 10वीं 12वीं के छात्रों के लिए आवेदन शुरू 7 मई से परीक्षा

    एमपी बोर्ड सेकेंड एग्जाम का मौका 10वीं 12वीं के छात्रों के लिए आवेदन शुरू 7 मई से परीक्षा


    भोपाल । मध्यप्रदेश में बोर्ड परीक्षा से जुड़े छात्रों के लिए एक अहम अपडेट सामने आया है जहां मध्य प्रदेश माध्यमिक शिक्षा मंडल ने 10वीं और 12वीं की द्वितीय परीक्षा को लेकर प्रक्रिया शुरू कर दी है इस फैसले के तहत उन छात्रों को बड़ा अवसर मिला है जो मुख्य परीक्षा में असफल रहे हैं या अपने अंकों में सुधार करना चाहते हैं

    बोर्ड द्वारा जारी कार्यक्रम के अनुसार द्वितीय परीक्षा 7 मई 2026 से शुरू होगी इस परीक्षा में न केवल फेल हुए विद्यार्थी बल्कि वे छात्र भी शामिल हो सकेंगे जो अपने प्राप्त अंकों को बेहतर करना चाहते हैं यानी श्रेणी सुधार के इच्छुक छात्र भी इस मौके का लाभ उठा सकते हैं

    आवेदन प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन रखी गई है छात्र एमपी ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से 22 अप्रैल 2026 तक आवेदन कर सकते हैं बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि निर्धारित समय सीमा के भीतर आवेदन करना अनिवार्य होगा इसके बाद किसी भी प्रकार का आवेदन स्वीकार नहीं किया जाएगा

    परीक्षा कार्यक्रम की बात करें तो 10वीं कक्षा की द्वितीय परीक्षा 7 मई से शुरू होकर 19 मई 2026 तक चलेगी वहीं 12वीं कक्षा की परीक्षा 7 मई से 25 मई 2026 तक आयोजित की जाएगी इस बार अनुमान लगाया जा रहा है कि करीब 5 लाख विद्यार्थी इस द्वितीय परीक्षा में शामिल हो सकते हैं जो इसे एक बड़ा आयोजन बनाता है

    बोर्ड का यह कदम उन छात्रों के लिए राहत भरा है जो किसी कारणवश मुख्य परीक्षा में बेहतर प्रदर्शन नहीं कर पाए थे अब उन्हें बिना एक साल गंवाए अपनी स्थिति सुधारने का अवसर मिल रहा है इससे छात्रों का शैक्षणिक वर्ष भी सुरक्षित रहेगा और उनके करियर पर नकारात्मक प्रभाव भी कम होगा

    शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की द्वितीय परीक्षा प्रणाली छात्रों के लिए सकारात्मक पहल है क्योंकि इससे उन्हें एक और मौका मिलता है अपनी तैयारी को बेहतर तरीके से प्रस्तुत करने का साथ ही यह व्यवस्था शिक्षा प्रणाली को अधिक लचीला और छात्र हितैषी बनाती है कुल मिलाकर मध्यप्रदेश बोर्ड की यह पहल हजारों छात्रों के लिए उम्मीद की नई किरण लेकर आई है जो अपने परिणाम को सुधारना चाहते हैं या आगे की पढ़ाई में बिना रुकावट के बढ़ना चाहते हैं

  • फर्श से अर्श तक अरशद वारसी का प्रेरणादायक सफर अनाथपन से कॉमेडी के शिखर तक पहुंची एक असाधारण कहानी..

    फर्श से अर्श तक अरशद वारसी का प्रेरणादायक सफर अनाथपन से कॉमेडी के शिखर तक पहुंची एक असाधारण कहानी..

    नई दिल्ली: बॉलीवुड में अपनी कॉमिक टाइमिंग और सहज अभिनय से अलग पहचान बनाने वाले अरशद वारसी का जीवन संघर्ष और सफलता की एक प्रेरक कहानी है। मुन्ना भाई एम बी बी एस में सर्किट के किरदार और गोलमाल सीरीज में माधव जैसे रोल ने उन्हें कॉमेडी के क्षेत्र में मजबूत स्थान दिलाया। लेकिन इस मुकाम तक पहुंचने का सफर आसान नहीं था और इसके पीछे गहरी व्यक्तिगत चुनौतियां और कठिन जीवन परिस्थितियां छिपी हैं।

    अरशद वारसी का बचपन संघर्षों से भरा रहा। कम उम्र में उन्होंने माता पिता की गंभीर बीमारियों का सामना देखा। परिवार आर्थिक संकट से गुजर रहा था और घर में संसाधनों की कमी थी। उनके पिता व्यापार में असफल रहे और स्वास्थ्य समस्याओं से जूझते रहे जबकि उनकी मां लंबे समय तक किडनी की बीमारी से पीड़ित रहीं। नियमित डायलिसिस की वजह से परिवार पर आर्थिक दबाव बना रहता था। इस स्थिति में अरशद ने छोटी उम्र में काम करना शुरू किया और जिम्मेदारियां समय से पहले समझ लीं। बोर्डिंग स्कूल में पढ़ाई के दौरान वे अकेलेपन से जूझते रहे और खुद को लिखकर व्यक्त करने की आदत विकसित की।

    अरशद ने कोरियोग्राफी के क्षेत्र में कदम रखा और मंच पर प्रदर्शन करने लगे। यहीं से उनकी आय का छोटा जरिया बना लेकिन पारिवारिक हालात लगातार चुनौतीपूर्ण रहे। माता पिता के निधन ने उन्हें गहरे स्तर पर प्रभावित किया और जीवन को नए सिरे से समझने के लिए मजबूर किया। इसके बाद उन्होंने खुद को संभाला और काम की तलाश में फिल्मी दुनिया की ओर रुख किया। संघर्ष के दौर में उन्हें कई छोटे बड़े काम करने पड़े लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और लगातार आगे बढ़ते रहे।

    फिल्मी करियर की शुरुआत में उन्हें छोटे भूमिकाओं में काम मिला और धीरे धीरे अनुभव बढ़ता गया। शुरुआती संघर्षों के बावजूद उन्होंने अभिनय को सीखने और सुधारने की प्रक्रिया जारी रखी। समय के साथ उनकी मेहनत रंग लाई और उन्हें ऐसे किरदार मिलने लगे जिन्होंने उन्हें पहचान दिलाई।

    अरशद वारसी के करियर का बड़ा मोड़ तब आया जब उन्हें मुन्ना भाई एम बी बी एस में सर्किट का किरदार मिला। इस भूमिका ने उन्हें जबरदस्त लोकप्रियता दिलाई और उनकी कॉमिक टाइमिंग को दर्शकों ने बेहद पसंद किया। इसके बाद गोलमाल सीरीज में माधव का किरदार निभाकर उन्होंने कॉमेडी शैली में अपनी मजबूत पकड़ साबित की। इन किरदारों ने उन्हें हिंदी सिनेमा के सबसे लोकप्रिय कॉमेडी कलाकारों में शामिल कर दिया।

    आज अरशद वारसी उन कलाकारों में गिने जाते हैं जिन्होंने कठिन परिस्थितियों से निकलकर मेहनत और प्रतिभा के दम पर अपनी पहचान बनाई। उनका सफर यह दिखाता है कि संघर्ष चाहे जितना भी बड़ा हो, लगन और आत्मविश्वास से सफलता हासिल की जा सकती है।

  • अभिनय और किरदार की सच्चाई को लेकर अभिनेत्री ने खोला अपने अनुभवों का राज..

    अभिनय और किरदार की सच्चाई को लेकर अभिनेत्री ने खोला अपने अनुभवों का राज..


    नई दिल्ली: 1993 में रिलीज हुई फिल्म खलनायिका एक बार फिर चर्चा में आ गई है, क्योंकि इससे जुड़ा एक पुराना दृश्य और अभिनेत्री अनु अग्रवाल की हालिया टिप्पणी सोशल मीडिया पर तेजी से सामने आई है। आशिकी से पहचान बनाने वाली अनु अग्रवाल ने इस फिल्म में अपने किरदार और उस समय चर्चा में रहे एक विशेष सीन को लेकर अपनी राय साझा की है। उनका कहना है कि जिसे उस समय विवादित या बोल्ड माना गया था, वह उनके लिए केवल कहानी और किरदार की स्वाभाविक मांग थी।

    अनु अग्रवाल ने बताया कि खलनायिका में उन्होंने एक ऐसी महिला का किरदार निभाया था जो परिस्थितियों और कहानी के अनुसार जटिल भावनाओं से गुजरती है। फिल्म के एक दृश्य में उन्हें एक बच्चे को दूध पिलाते हुए दिखाया गया था, जिसे लेकर उस समय काफी बहस हुई थी। हालांकि अभिनेत्री का मानना है कि अभिनय का उद्देश्य किसी दृश्य को बाहरी नजर से जज करना नहीं होता, बल्कि उसे किरदार की परिस्थिति में समझकर निभाना होता है।

    उनका कहना है कि एक कलाकार को अक्सर अपनी व्यक्तिगत सोच से ऊपर उठकर किरदार की भावनाओं और कहानी की जरूरतों के अनुसार काम करना पड़ता है। इसी कारण उन्होंने उस दृश्य को भी सामान्य अभिनय प्रक्रिया का हिस्सा माना और उसे उसी दृष्टिकोण से निभाया।

    फिल्म खलनायिका एक ऐसी कहानी पर आधारित थी जिसमें एक महिला अपने जीवन में मिले संघर्षों और अन्याय के बाद बदले की भावना से आगे बढ़ती है। कहानी में कई भावनात्मक और तीव्र मोड़ शामिल थे, जिनके कारण फिल्म अपने समय में चर्चा का विषय बनी रही।

    अनु अग्रवाल ने अपने करियर की शुरुआत 1990 के दशक में की थी और उस दौर में उन्होंने कई फिल्मों में काम करके अपनी पहचान बनाई। बाद में एक गंभीर दुर्घटना ने उनके जीवन को बदल दिया, लेकिन वे समय समय पर अपने अनुभवों और फिल्मों से जुड़े पुराने पलों को साझा करती रहती हैं।

    उनका कहना है कि फिल्मों में हर दृश्य को कहानी और किरदार के संदर्भ में देखा जाना चाहिए, क्योंकि अभिनय केवल अभिनय नहीं बल्कि एक परिस्थिति को जीने की प्रक्रिया होती है।

  • एमपी सरकार का बड़ा ऐलान गेहूं बिक्री के लिए अब ज्यादा समय और ज्यादा सुविधा

    एमपी सरकार का बड़ा ऐलान गेहूं बिक्री के लिए अब ज्यादा समय और ज्यादा सुविधा


    भोपाल । मध्यप्रदेश के किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण राहत भरा फैसला सामने आया है जहां राज्य सरकार ने गेहूं उपार्जन को लेकर बड़ा कदम उठाते हुए स्लॉट बुकिंग की अंतिम तिथि को बढ़ा दिया है अब किसान 30 अप्रैल 2026 तक गेहूं विक्रय के लिए स्लॉट बुक कर सकेंगे यह निर्णय किसानों को अधिक समय और सुविधा देने के उद्देश्य से लिया गया है जिससे वे बिना किसी जल्दबाजी के अपनी उपज को समर्थन मूल्य पर बेच सकें

    डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व वाली सरकार ने स्लॉट बुकिंग की अवधि में 6 दिन की वृद्धि की है इसके साथ ही एक और अहम बदलाव करते हुए स्लॉट बुकिंग की क्षमता को भी बढ़ा दिया गया है पहले जहां एक स्लॉट में 1000 क्विंटल गेहूं की सीमा तय थी वहीं अब इसे बढ़ाकर 1500 क्विंटल कर दिया गया है इस फैसले से बड़े और मध्यम किसानों को विशेष राहत मिलने की उम्मीद है

    अब तक की स्थिति पर नजर डालें तो प्रदेश में गेहूं खरीदी का काम तेजी से चल रहा है आंकड़ों के मुताबिक अब तक 1 लाख 30 हजार 655 किसानों से 57 लाख 13 हजार 640 क्विंटल गेहूं की खरीदी की जा चुकी है इसके एवज में किसानों के खातों में 355 करोड़ 3 लाख रुपए का भुगतान भी किया जा चुका है यह भुगतान सीधे बैंक खातों में ट्रांसफर किया गया है जिससे पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके

    वहीं दूसरी ओर बड़ी संख्या में किसान अपनी उपज बेचने के लिए आगे आ रहे हैं अब तक 4 लाख 22 हजार 848 किसानों ने 1 करोड़ 82 लाख 96 हजार 810 क्विंटल गेहूं के विक्रय के लिए स्लॉट बुक कराए हैं इससे साफ है कि इस बार गेहूं उपार्जन को लेकर किसानों में उत्साह देखने को मिल रहा है

    राज्य सरकार ने खरीदी प्रक्रिया को सुचारु बनाने के लिए प्रदेशभर में 3171 उपार्जन केंद्र स्थापित किए हैं इन केंद्रों पर किसानों की सुविधा के लिए व्यापक इंतजाम किए गए हैं जैसे छायादार बैठने की व्यवस्था स्वच्छ पेयजल बारदाने तौल कांटे सिलाई मशीन कंप्यूटर इंटरनेट और गुणवत्ता परीक्षण उपकरण उपलब्ध कराए गए हैं इसके अलावा उपज की सफाई के लिए पंखे और छनने की व्यवस्था भी की गई है ताकि किसानों को किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े

    वर्ष 2026 27 के लिए सरकार ने गेहूं की खरीदी 2625 रुपए प्रति क्विंटल की दर से करने का निर्णय लिया है इसमें केंद्र सरकार द्वारा तय 2585 रुपए प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य के साथ राज्य सरकार की ओर से 40 रुपए प्रति क्विंटल का बोनस भी शामिल है इस मूल्य से किसानों को उनकी उपज का बेहतर लाभ मिलने की उम्मीद है

    इस वर्ष गेहूं उपार्जन के लिए 19 लाख 4 हजार से अधिक किसानों ने पंजीयन कराया है जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 3 लाख 60 हजार अधिक है यह आंकड़ा दर्शाता है कि सरकार की योजनाओं पर किसानों का भरोसा बढ़ा है पिछले साल जहां लगभग 77 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीदा गया था वहीं इस साल 78 लाख मीट्रिक टन का लक्ष्य रखा गया है

    कुल मिलाकर सरकार का यह निर्णय किसानों के लिए राहत और सुविधा दोनों लेकर आया है जिससे उन्हें अपनी मेहनत की उपज का उचित मूल्य पाने में मदद मिलेगी और खरीदी प्रक्रिया भी अधिक व्यवस्थित और पारदर्शी बन सकेगी

  • स्पाइस बोर्ड में रिसर्च ट्रेनी पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू, 30 अप्रैल को वॉक इन टेस्ट से होगा चयन, कृषि शोध में युवाओं के लिए सुनहरा अवसर

    स्पाइस बोर्ड में रिसर्च ट्रेनी पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू, 30 अप्रैल को वॉक इन टेस्ट से होगा चयन, कृषि शोध में युवाओं के लिए सुनहरा अवसर

    नई दिल्ली/तिरुवनंतपुरम:केरल स्थित मसाला बोर्ड ने भारतीय इलायची अनुसंधान संस्थान में रिसर्च ट्रेनी पदों पर नई भर्ती प्रक्रिया शुरू कर दी है। यह अवसर विशेष रूप से अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्ग के योग्य उम्मीदवारों के लिए उपलब्ध कराया गया है। कुल पांच पदों पर नियुक्ति की जाएगी, जिनमें कृषि विज्ञान और मृदा विज्ञान से जुड़े दो पद तथा पादप रोग विज्ञान से जुड़े तीन पद शामिल हैं।

    इन पदों के लिए चयन प्रक्रिया वॉक इन टेस्ट के माध्यम से पूरी की जाएगी। इस प्रक्रिया में उम्मीदवारों की प्रारंभिक स्क्रीनिंग के साथ लिखित परीक्षा, दक्षता परीक्षण और दस्तावेजों का सत्यापन शामिल रहेगा। चयनित अभ्यर्थियों को प्रति माह 21 हजार रुपये का स्टाइपेंड प्रदान किया जाएगा।

    वॉक इन टेस्ट का आयोजन 30 अप्रैल को सुबह 10 बजे निर्धारित स्थान पर किया जाएगा। उम्मीदवारों को निर्देश दिया गया है कि वे परीक्षा स्थल पर समय से कम से कम एक घंटा पहले उपस्थित हों ताकि दस्तावेज सत्यापन की प्रक्रिया सुचारू रूप से पूरी की जा सके।

    योग्यता मानदंड के अनुसार कृषि विज्ञान और मृदा विज्ञान पद के लिए उम्मीदवार के पास कृषि विज्ञान, मृदा विज्ञान, जैव रसायन, रसायन विज्ञान, बागवानी या पर्यावरण विज्ञान में स्नातकोत्तर डिग्री होना आवश्यक है और न्यूनतम 55 प्रतिशत अंक अनिवार्य रखे गए हैं। वहीं पादप रोग विज्ञान पद के लिए कृषि विषय में पादप रोग विज्ञान, सूक्ष्म जीव विज्ञान, वनस्पति विज्ञान या बागवानी में पोस्ट ग्रेजुएशन की डिग्री जरूरी है।

    इसके साथ ही कंप्यूटर का कार्यसाधक ज्ञान रखने वाले और संबंधित क्षेत्र में अनुभव रखने वाले उम्मीदवारों को चयन प्रक्रिया में प्राथमिकता दी जाएगी। इस भर्ती के लिए अधिकतम आयु सीमा 30 वर्ष निर्धारित की गई है, जिसकी गणना 12 मार्च के आधार पर की जाएगी।

    चयन प्रक्रिया पूरी तरह वॉक इन टेस्ट आधारित होगी, जिसमें उम्मीदवारों की शैक्षणिक योग्यता और व्यावहारिक क्षमता का मूल्यांकन किया जाएगा। चयनित उम्मीदवारों को मसाला फसलों और विशेष रूप से इलायची से जुड़े अनुसंधान कार्यों में योगदान देना होगा।

    यह भर्ती कृषि और वैज्ञानिक अनुसंधान के क्षेत्र में करियर बनाने के इच्छुक युवाओं के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर मानी जा रही है। इससे न केवल शोध कार्यों को मजबूती मिलेगी बल्कि कृषि विज्ञान के क्षेत्र में नई तकनीकों के विकास को भी गति मिलेगी।

  • आईपीएल 2026 में रिंकू सिंह का खराब प्रदर्शन टीम के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। फॉर्म में वापसी अब बेहद जरूरी हो गई है।

    आईपीएल 2026 में रिंकू सिंह का खराब प्रदर्शन टीम के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। फॉर्म में वापसी अब बेहद जरूरी हो गई है।

    नई दिल्ली/कोलकाता। कभी आखिरी ओवर में लगातार पांच छक्के लगाकर क्रिकेट जगत में सनसनी मचाने वाले रिंकू सिंह इस समय अपने करियर के सबसे मुश्किल दौर से गुजर रहे हैं। आईपीएल 2026 में उनका लगातार खराब प्रदर्शन न केवल उनकी व्यक्तिगत फॉर्म पर सवाल खड़े कर रहा है, बल्कि कोलकाता नाइट राइडर्स की टीम संतुलन और रणनीति को भी प्रभावित कर रहा है। जिस खिलाड़ी को टीम का सबसे भरोसेमंद फिनिशर माना जाता था, वही अब संघर्ष करता नजर आ रहा है।

    9 अप्रैल 2023 का वह मुकाबला आज भी क्रिकेट इतिहास के सबसे रोमांचक पलों में गिना जाता है, जब रिंकू सिंह ने असंभव को संभव कर दिखाया था। आखिरी ओवर में 29 रन की जरूरत थी और उन्होंने लगातार पांच छक्के लगाकर टीम को यादगार जीत दिलाई थी। उस पारी के बाद रिंकू सिंह को एक ऐसे खिलाड़ी के रूप में देखा जाने लगा, जो किसी भी मुश्किल परिस्थिति में मैच का रुख बदल सकता है। उनकी इसी क्षमता ने उन्हें भारतीय क्रिकेट में एक खास पहचान दिलाई।

    इसके बाद उन्हें राष्ट्रीय टीम में भी मौके मिले और उन्होंने कई अहम पारियां खेलकर अपनी उपयोगिता साबित की। हालांकि उनका अंतरराष्ट्रीय सफर पूरी तरह स्थिर नहीं रहा और उन्हें टीम में जगह बनाने के लिए लगातार संघर्ष करना पड़ा। इसके बावजूद केकेआर ने उन पर पूरा भरोसा जताया और उन्हें लंबे समय तक टीम के साथ बनाए रखा। आईपीएल 2025 में टीम ने उन्हें बड़ी कीमत पर रिटेन किया और भविष्य के प्रमुख खिलाड़ी के रूप में देखा।

    मौजूदा सीजन में उनकी फॉर्म ने सभी को निराश किया है। आईपीएल 2026 में वह रन बनाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं और कई पारियों में उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर पाए हैं। चाहे उन्हें ऊपरी क्रम में भेजा जाए या निचले क्रम में, उनकी बल्लेबाजी में आत्मविश्वास की कमी साफ दिखाई दे रही है। उनके शॉट चयन और टाइमिंग में भी वह धार नजर नहीं आ रही, जिसने उन्हें कभी खतरनाक बल्लेबाज बनाया था।

    रिंकू सिंह की खराब फॉर्म का सीधा असर टीम के प्रदर्शन पर भी पड़ा है। मध्यक्रम में स्थिरता की कमी के कारण टीम को निर्णायक मौकों पर मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। एक समय जिस खिलाड़ी पर टीम को सबसे ज्यादा भरोसा था, वही अब टीम के लिए चिंता का कारण बन गया है। उनकी असफलता ने टीम प्रबंधन को भी सोचने पर मजबूर कर दिया है।

    आने वाले समय में रिंकू सिंह के लिए यह दौर बेहद अहम साबित हो सकता है। यदि वह जल्द ही अपनी लय में वापसी नहीं करते हैं, तो टीम संयोजन में बदलाव की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। लंबे समय से टीम का हिस्सा रहे इस खिलाड़ी के सामने अब खुद को फिर से साबित करने की चुनौती है और इसके लिए उन्हें अपने खेल में निरंतर सुधार करना होगा।

  • शिक्षकों ने अपनी मांगों को लेकर भोपाल में किया प्रदर्शन, TET अनिवार्यता का विरोध, बड़े आंदोलन की चेतावनी

    शिक्षकों ने अपनी मांगों को लेकर भोपाल में किया प्रदर्शन, TET अनिवार्यता का विरोध, बड़े आंदोलन की चेतावनी


    भोपाल । मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में शनिवार को शिक्षकों ने अपनी मांगों को लेकर बड़ा प्रदर्शन किया। अध्यापक शिक्षक संयुक्त मोर्चा के आह्वान पर आयोजित इस आंदोलन में प्रदेशभर से बड़ी संख्या में शिक्षक शामिल हुए। शिक्षकों ने एमपी नगर एसडीएम को ज्ञापन सौंपा।

    दशहरा मैदान में जुटी भारी भीड़

    भोपाल के भेल स्थित दशहरा मैदान में आयोजित मुख्यमंत्री अनुरोध यात्रा के तहत अलग-अलग जिलों से आए करीब 50 हजार से अधिक शिक्षकों ने हिस्सा लिया। भारी भीड़ के चलते पंडाल छोटा पड़ गया, जिससे कई शिक्षकों को पेड़ों की छांव में बैठना पड़ा।

    TET अनिवार्यता पर जताया विरोध
    संयुक्त मोर्चा के पदाधिकारियों ने शिक्षक पात्रता परीक्षा को अनिवार्य किए जाने का विरोध किया। उनका कहना है कि जो शिक्षक पहले से सेवा में हैं, उनसे दोबारा परीक्षा दिलवाना अनुचित है। उन्होंने मांग की कि यदि सरकार परीक्षा लेना चाहती है तो शिक्षकों को तैयारी के लिए पर्याप्त समय दिया जाए और उन्हें अन्य कार्यों, जैसे जनगणना, में न लगाया जाए।
    भोपाल । मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में शनिवार को शिक्षकों ने अपनी मांगों को लेकर बड़ा प्रदर्शन किया। अध्यापक शिक्षक संयुक्त मोर्चा के आह्वान पर आयोजित इस आंदोलन में प्रदेशभर से बड़ी संख्या में शिक्षक शामिल हुए। शिक्षकों ने एमपी नगर एसडीएम को ज्ञापन सौंपा।

    दशहरा मैदान में जुटी भारी भीड़

    भोपाल के भेल स्थित दशहरा मैदान में आयोजित मुख्यमंत्री अनुरोध यात्रा के तहत अलग-अलग जिलों से आए करीब 50 हजार से अधिक शिक्षकों ने हिस्सा लिया। भारी भीड़ के चलते पंडाल छोटा पड़ गया, जिससे कई शिक्षकों को पेड़ों की छांव में बैठना पड़ा।

    TET अनिवार्यता पर जताया विरोध
    संयुक्त मोर्चा के पदाधिकारियों ने शिक्षक पात्रता परीक्षा को अनिवार्य किए जाने का विरोध किया। उनका कहना है कि जो शिक्षक पहले से सेवा में हैं, उनसे दोबारा परीक्षा दिलवाना अनुचित है। उन्होंने मांग की कि यदि सरकार परीक्षा लेना चाहती है तो शिक्षकों को तैयारी के लिए पर्याप्त समय दिया जाए और उन्हें अन्य कार्यों, जैसे जनगणना, में न लगाया जाए।

    सुप्रीम कोर्ट के फैसले से बढ़ी चिंता 
    शिक्षकों का दावा है कि हालिया सुप्रीम कोर्ट के आदेश से 90 से 95 प्रतिशत शिक्षक प्रभावित हुए हैं, खासकर वे जो पहले अध्यापक संवर्ग में थे और बाद में शिक्षक बने। उनका कहना है कि लंबे समय से सेवा दे रहे शिक्षकों पर नई शर्तें लागू करना न्यायसंगत नहीं है।

    सेवा गणना और पेंशन को लेकर नाराजगी

    संयुक्त मोर्चा ने आरोप लगाया कि सरकार नियुक्ति की मूल तारीख से सेवा की गणना नहीं कर रही, जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान हो रहा है। साथ ही TET अनिवार्यता से भविष्य में पेंशन और ग्रेच्युटी पर भी असर पड़ने की आशंका जताई गई। शिक्षकों ने आखिर में एमपी नगर एसडीएम एल.के खरे को ज्ञापन सौंपा और अपनी मांगों पर जल्द फैसला लेने की अपील की। इसके साथ ही दिन भर चला यह बड़ा प्रदर्शन शांतिपूर्ण तरीके से समाप्त हो गया।

    जून में बड़े आंदोलन की चेतावनी

    अध्यापक संघ के अध्यक्ष भरत पटेल ने साफ कहा कि यदि सरकार ने मांगों पर जल्द निर्णय नहीं लिया, तो जून में राज्यव्यापी बड़ा आंदोलन किया जाएगा। बता दें कि इससे पहले 8 अप्रैल को जिला स्तर और 11 अप्रैल को ब्लॉक स्तर पर भी प्रदर्शन किए जा चुके हैं। उसी क्रम में भोपाल में यह राज्य स्तरीय आंदोलन आयोजित किया गया।

    शिक्षकों का दावा है कि हालिया सुप्रीम कोर्ट के आदेश से 90 से 95 प्रतिशत शिक्षक प्रभावित हुए हैं, खासकर वे जो पहले अध्यापक संवर्ग में थे और बाद में शिक्षक बने। उनका कहना है कि लंबे समय से सेवा दे रहे शिक्षकों पर नई शर्तें लागू करना न्यायसंगत नहीं है।

    सेवा गणना और पेंशन को लेकर नाराजगी

    संयुक्त मोर्चा ने आरोप लगाया कि सरकार नियुक्ति की मूल तारीख से सेवा की गणना नहीं कर रही, जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान हो रहा है। साथ ही TET अनिवार्यता से भविष्य में पेंशन और ग्रेच्युटी पर भी असर पड़ने की आशंका जताई गई। शिक्षकों ने आखिर में एमपी नगर एसडीएम एल.के खरे को ज्ञापन सौंपा और अपनी मांगों पर जल्द फैसला लेने की अपील की। इसके साथ ही दिन भर चला यह बड़ा प्रदर्शन शांतिपूर्ण तरीके से समाप्त हो गया।

    जून में बड़े आंदोलन की चेतावनी

    अध्यापक संघ के अध्यक्ष भरत पटेल ने साफ कहा कि यदि सरकार ने मांगों पर जल्द निर्णय नहीं लिया, तो जून में राज्यव्यापी बड़ा आंदोलन किया जाएगा। बता दें कि इससे पहले 8 अप्रैल को जिला स्तर और 11 अप्रैल को ब्लॉक स्तर पर भी प्रदर्शन किए जा चुके हैं। उसी क्रम में भोपाल में यह राज्य स्तरीय आंदोलन आयोजित किया गया।

  • न्यायपालिका में एआई के उपयोग पर मुख्य न्यायाधीश की सख्त और संतुलित चेतावनी..

    न्यायपालिका में एआई के उपयोग पर मुख्य न्यायाधीश की सख्त और संतुलित चेतावनी..

    नई दिल्ली: देश की न्यायपालिका में तेजी से बढ़ते तकनीकी हस्तक्षेप के बीच मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता के उपयोग को लेकर महत्वपूर्ण और संतुलित संदेश दिया है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि एआई न्याय व्यवस्था के लिए एक उपयोगी सहयोगी साबित हो सकता है, लेकिन इसे कभी भी मानव निर्णय क्षमता का विकल्प नहीं बनाया जा सकता। उन्होंने न्यायिक अधिकारियों से अपील की कि वे तकनीक से घबराने के बजाय उसे समझदारी और सतर्कता के साथ अपनाएं।

    एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि एआई के आगमन से न्यायपालिका के सामने नए अवसर भी खुले हैं और कई गंभीर चुनौतियां भी सामने आई हैं। उनके अनुसार तकनीक का सही उपयोग न्यायिक प्रक्रिया को अधिक तेज, पारदर्शी और प्रभावी बना सकता है, लेकिन इसके साथ ही इसकी सीमाओं को समझना भी उतना ही आवश्यक है।

    उन्होंने कहा कि एआई का इस्तेमाल विशेष रूप से कानूनी शोध, मामलों के प्रबंधन और बड़े आंकड़ों के विश्लेषण में सहायक हो सकता है। इससे न्यायाधीशों पर पड़ने वाले प्रशासनिक दबाव को कम किया जा सकता है और कार्यक्षमता में सुधार लाया जा सकता है। हालांकि उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि इन तकनीकों पर अत्यधिक निर्भरता न्याय के मूल सिद्धांतों को प्रभावित कर सकती है।

    मुख्य न्यायाधीश ने जोर देकर कहा कि न्यायिक प्रक्रिया में मानवीय तत्व की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि किसी भी मामले में अंतिम निर्णय लेते समय न्यायाधीश की समझ, अनुभव और संवैधानिक दृष्टिकोण ही सर्वोपरि होना चाहिए। तकनीक केवल सहायता प्रदान कर सकती है, लेकिन निर्णय की जिम्मेदारी पूरी तरह मानव के पास ही रहनी चाहिए।

    अपने संबोधन में उन्होंने एआई से जुड़े संभावित खतरों की ओर भी ध्यान दिलाया। उन्होंने कहा कि हाल के समय में ऐसे कई उदाहरण सामने आए हैं, जहां एआई आधारित प्रणालियों ने गलत या काल्पनिक कानूनी संदर्भ प्रस्तुत किए हैं। इस तरह की त्रुटियां न्यायिक प्रक्रिया की विश्वसनीयता को प्रभावित कर सकती हैं और गलत दिशा में फैसलों को ले जा सकती हैं।

    उन्होंने इसे केवल तकनीकी कमी नहीं बल्कि न्याय व्यवस्था के लिए एक गंभीर चुनौती बताया। उनके अनुसार यदि इन त्रुटियों को समय रहते नियंत्रित नहीं किया गया, तो यह न्याय की गुणवत्ता और निष्पक्षता दोनों पर असर डाल सकती हैं।

    मुख्य न्यायाधीश ने न्यायिक अधिकारियों से कहा कि जब वे जटिल मामलों पर निर्णय लेते हैं, तो उन्हें गहराई से सोचने और संतुलित दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता होती है। इसी प्रकार एआई का उपयोग भी सोच समझकर और जिम्मेदारी के साथ किया जाना चाहिए, ताकि न्यायिक प्रक्रिया की गरिमा बनी रहे।

    उन्होंने यह भी कहा कि भविष्य की न्यायपालिका वही होगी जो अपनी मूल पहचान को बनाए रखते हुए नए बदलावों को अपनाने में सक्षम होगी। इसके लिए निरंतर सीखने, आत्ममंथन और उत्कृष्टता के प्रति प्रतिबद्धता आवश्यक है।

  • सीहोर में खौफनाक वारदात, बेटे ने पिता को पीट पीटकर मार डाला घर में पसरा मातम

    सीहोर में खौफनाक वारदात, बेटे ने पिता को पीट पीटकर मार डाला घर में पसरा मातम


    सीहोर । मध्य प्रदेश के सीहोर जिले से एक ऐसी हृदयविदारक घटना सामने आई है जिसने मानवीय रिश्तों की मर्यादा और विश्वास को पूरी तरह तार-तार कर दिया है। जिला मुख्यालय के समीपस्थ गंज क्षेत्र में शुक्रवार को एक बेटे ने अपने ही पिता की इतनी बेरहमी से पिटाई की कि उनकी जान चली गई। जिस आंगन में पिता की छांव में बच्चे सुरक्षित महसूस करते हैं उसी आंगन में एक बेटे का जल्लाद रूप देखकर पूरा इलाका दहल उठा है। यह घटना केवल एक हत्या नहीं बल्कि एक हसंते-खेलते परिवार के उजड़ने और सामाजिक ताने-बाने के बिखरने की एक दुखद कहानी है।

    मामला गंज क्षेत्र के कोली मोहल्ला का है जहाँ शुक्रवार का दिन एक सामान्य दिन की तरह शुरू हुआ था लेकिन शाम ढलते-ढलते यहाँ मातम पसर गया। पुलिस और स्थानीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार यहाँ रहने वाले सोनू शाक्य का अपने पिता सुभाष शाक्य के साथ किसी बात को लेकर विवाद शुरू हुआ। शुरुआत में यह बहस सामान्य लग रही थी लेकिन देखते ही देखते विवाद इतना उग्र हो गया कि सोनू अपना आपा खो बैठा। आवेश में आकर सोनू ने अपने वृद्ध पिता पर जानलेवा हमला बोल दिया।

    चश्मदीदों और परिजनों की मानें तो विवाद के दौरान सोनू के सिर पर खून सवार था। उसने अपने पिता की इतनी निर्दयता से पिटाई की कि वे लहूलुहान होकर जमीन पर गिर पड़े। चीख-पुकार सुनकर जब आसपास के लोग और परिवार के अन्य सदस्य वहाँ पहुंचे तो सुभाष शाक्य अचेत अवस्था में पड़े थे। घर में मौजूद माँ की स्थिति सबसे दयनीय थी जो अपनी आंखों के सामने अपने सुहाग को अपने ही बेटे के हाथों उजड़ते देख रही थी। वह बदहवास होकर रोती रही लेकिन गुस्से में अंधा हो चुका बेटा तब तक अनर्थ कर चुका था।

    स्थानीय लोग और परिजन आनन-फानन में गंभीर रूप से घायल सुभाष शाक्य को उठाकर जिला अस्पताल ले गए। रास्ते भर सबकी यही प्रार्थना थी कि वे बच जाएं लेकिन चोटें इतनी गहरी थीं कि डॉक्टरों का हर प्रयास विफल रहा। प्राथमिक परीक्षण के बाद डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। अस्पताल से आई मौत की खबर ने कोली मोहल्ले में सन्नाटा पसरा दिया। लोग यह यकीन नहीं कर पा रहे थे कि सोनू जैसा युवक ऐसी जघन्य वारदात को अंजाम दे सकता है।

    घटना की सूचना मिलते ही कोतवाली पुलिस सक्रिय हुई और तत्काल मौके पर पहुंचकर छानबीन शुरू की। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए फरार होने की फिराक में लगे आरोपी पुत्र सोनू शाक्य को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आरोपी अभी भी पुलिस की गिरफ्त में है और उससे गहन पूछताछ की जा रही है। हालाँकि अभी तक हत्या के सटीक कारणों का पता नहीं चल पाया है लेकिन प्राथमिक जांच में इसे पारिवारिक क्लेश और आवेश में किया गया अपराध माना जा रहा है।

    सीहोर की इस घटना ने एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि आखिर युवा पीढ़ी में धैर्य की इतनी कमी क्यों होती जा रही है? पुलिस अब मोहल्ले वालों और परिवार के अन्य सदस्यों के बयान दर्ज कर रही है ताकि विवाद की उस जड़ तक पहुँचा जा सके जिसने एक बेटे को अपने ही पिता का कातिल बना दिया। फिलहाल सुभाष शाक्य का शव पोस्टमार्टम के बाद परिजनों को सौंप दिया गया है और पूरे क्षेत्र में तनावपूर्ण शांति बनी हुई है।

  • लखनऊ सुपर जायंट्स के सामने संतुलित और आत्मविश्वास से भरी टीम को रोकने की कठिन चुनौती, हर विभाग में सुधार जरूरी

    लखनऊ सुपर जायंट्स के सामने संतुलित और आत्मविश्वास से भरी टीम को रोकने की कठिन चुनौती, हर विभाग में सुधार जरूरी

    नई दिल्ली /आईपीएल 2026 के 29वें मुकाबले में पंजाब किंग्स और लखनऊ सुपर जायंट्स के बीच चंडीगढ़ के पीसीए न्यू क्रिकेट स्टेडियम में मुकाबला खेला जाएगा। इस मैच में पंजाब किंग्स जहां अपनी शानदार लय को जारी रखने के इरादे से मैदान में उतरेगी, वहीं लखनऊ सुपर जायंट्स के लिए यह मुकाबला वापसी का अहम मौका साबित हो सकता है। मौजूदा फॉर्म को देखते हुए पंजाब किंग्स इस समय लीग की सबसे संतुलित और प्रभावशाली टीमों में से एक नजर आ रही है।

    पंजाब किंग्स ने इस सीजन में अब तक बेहतरीन प्रदर्शन किया है। टीम ने पांच में से चार मुकाबलों में जीत हासिल की है, जबकि एक मैच बारिश के कारण पूरा नहीं हो सका। कप्तान श्रेयस अय्यर की अगुवाई में टीम ने खासकर लक्ष्य का पीछा करते हुए अपनी मजबूत पकड़ दिखाई है। बल्लेबाजों ने दबाव की स्थिति में भी संयम बनाए रखते हुए टीम को जीत दिलाने में अहम भूमिका निभाई है।

    टीम की बल्लेबाजी इकाई ने लगातार प्रभावी प्रदर्शन किया है। प्रभसिमरन सिंह, शशांक सिंह और मार्कस स्टोइनिस जैसे खिलाड़ियों ने महत्वपूर्ण मौकों पर जिम्मेदारी निभाई है। मध्यक्रम की स्थिरता और निचले क्रम की उपयोगी पारियों ने टीम को हर स्थिति में प्रतिस्पर्धी बनाए रखा है। गेंदबाजी में अर्शदीप सिंह और युजवेंद्र चहल ने विपक्षी टीमों पर दबाव बनाने में अहम भूमिका निभाई है, जिससे टीम को लगातार बढ़त मिलती रही है।

    दूसरी ओर लखनऊ सुपर जायंट्स का प्रदर्शन इस सीजन में अस्थिर रहा है। टीम ने पांच मैचों में दो जीत दर्ज की हैं, लेकिन लगातार हार ने उसकी लय को प्रभावित किया है। कप्तान ऋषभ पंत के नेतृत्व में टीम को अब हर विभाग में बेहतर प्रदर्शन की जरूरत है। बल्लेबाजी में निकोलस पूरन, मिशेल मार्श और एडेन मार्करम पर बड़ी जिम्मेदारी होगी, जबकि गेंदबाजी में मोहम्मद शमी और आवेश खान को अपनी भूमिका प्रभावी ढंग से निभानी होगी।

    दोनों टीमों के बीच अब तक खेले गए मुकाबलों का रिकॉर्ड भी बराबरी का रहा है। छह मैचों में दोनों टीमों ने तीन-तीन जीत दर्ज की हैं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि मुकाबला संतुलित हो सकता है। हालांकि मौजूदा फॉर्म और आत्मविश्वास के आधार पर पंजाब किंग्स को बढ़त मिलती हुई दिखाई देती है।

    इस मुकाबले में जीत और हार का अंतर काफी हद तक दबाव में प्रदर्शन पर निर्भर करेगा। पंजाब किंग्स जहां अपनी लय को बनाए रखने के आत्मविश्वास के साथ उतरेगी, वहीं लखनऊ सुपर जायंट्स के लिए यह जरूरी होगा कि वह अपनी कमजोरियों को दूर करते हुए एक संतुलित प्रदर्शन करे। मुकाबले में रणनीति, संयम और मौके का सही उपयोग ही निर्णायक साबित हो सकता है।