Category: Economy

  • सेफ हेवन की ओर भागे निवेशक, युद्ध की आहट से गोल्ड-सिल्वर में जबरदस्त तेजी

    सेफ हेवन की ओर भागे निवेशक, युद्ध की आहट से गोल्ड-सिल्वर में जबरदस्त तेजी

    नई दिल्ली। इजरायल-ईरान के बीच बढ़ते सैन्य टकराव ने वैश्विक बाजारों में घबराहट बढ़ा दी है। मध्य पूर्व में अमेरिका-इजरायल की संयुक्त कार्रवाई और उसके बाद जवाबी हमलों की खबरों ने अनिश्चितता को और गहरा कर दिया। इसी माहौल में निवेशकों ने जोखिम वाले एसेट्स से दूरी बनाते हुए सुरक्षित निवेश की ओर रुख किया, जिसका सीधा फायदा सोना और चांदी को मिला। सोमवार को कीमती धातुओं में 3 प्रतिशत से अधिक की तेज उछाल दर्ज की गई।

    एमसीएक्स पर रिकॉर्ड के करीब भाव
    मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर अप्रैल वायदा सोना कारोबार के दौरान 3 प्रतिशत से ज्यादा उछलकर 1,67,915 रुपये प्रति 10 ग्राम के उच्चतम स्तर तक पहुंच गया। वहीं मार्च वायदा चांदी भी 3 प्रतिशत से अधिक की तेजी के साथ 2,85,978 रुपये प्रति किलोग्राम पर जा पहुंची। खबर लिखे जाने तक सुबह लगभग 10:46 बजे अप्रैल एक्सपायरी वाला सोना 4,612 रुपये यानी 2.85 प्रतिशत बढ़कर 1,66,716 रुपये प्रति 10 ग्राम पर ट्रेड कर रहा था, जबकि मार्च एक्सपायरी चांदी 7,311 रुपये यानी 2.66 प्रतिशत की बढ़त के साथ 2,82,309 रुपये प्रति किलोग्राम पर कारोबार कर रही थी।

    भू-राजनीतिक जोखिम से बाजार में घबराहट
    तेहरान पर हमलों और जवाबी मिसाइल कार्रवाई के बाद व्यापक क्षेत्रीय संघर्ष की आशंका ने बाजारों को जोखिम से बचाव की मुद्रा में ला दिया है। हालांकि कुछ रिपोर्टों में Ali Khamenei को लेकर दावे किए गए, लेकिन ऐसी बड़ी खबरों की स्वतंत्र और आधिकारिक पुष्टि आवश्यक होती है। भू-राजनीतिक तनाव के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य से कच्चे तेल की आपूर्ति बाधित होने की आशंका भी बढ़ी है, जिससे ऊर्जा बाजार में भी हलचल तेज हुई।

    डॉलर और कच्चा तेल भी चढ़े
    डॉलर इंडेक्स 0.24 प्रतिशत बढ़कर 97.85 पर पहुंच गया, जिससे अन्य मुद्राओं में खरीदारी करने वालों के लिए सोना अपेक्षाकृत महंगा हो गया। इसके बावजूद सुरक्षित निवेश की मांग इतनी मजबूत रही कि कीमतों में तेजी बनी रही। कच्चे तेल में भी 7 प्रतिशत से अधिक की उछाल दर्ज की गई, क्योंकि बाजार को डर है कि आपूर्ति श्रृंखला पर असर पड़ सकता है।

    विशेषज्ञों की राय और आगे का अनुमान
    मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज लिमिटेड के कमोडिटी विश्लेषक मानव मोदी के मुताबिक, अमेरिका-ईरान तनाव और टैरिफ नीति को लेकर अनिश्चितता ने सोने की तेजी को मजबूती दी है। 2025 में अब तक सोना करीब 64 प्रतिशत चढ़ चुका है, जिसे केंद्रीय बैंकों की खरीद, ईटीएफ में निवेश और ढीली मौद्रिक नीति की उम्मीदों का सहारा मिला है।

    वैश्विक निवेश बैंक JPMorgan Chase ने 2026 के अंत तक सोना 6,300 डॉलर प्रति औंस तक पहुंचने का अनुमान जताया है, जबकि Bank of America ने 6,000 डॉलर प्रति औंस तक जाने की संभावना व्यक्त की है। अब निवेशकों की नजर प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के विनिर्माण पीएमआई और अमेरिकी श्रम बाजार के आंकड़ों पर है, जो आगे की दिशा तय करेंगे।

  • Israel-Iran युद्ध के बीच कच्चे तेल की आपूर्ति की चिंता… क्या रूस से आयात बढ़ाएगा भारत?

    Israel-Iran युद्ध के बीच कच्चे तेल की आपूर्ति की चिंता… क्या रूस से आयात बढ़ाएगा भारत?


    नई दिल्ली।
    ईरान संकट (Israel-Iran War) के बीच भारत (India) समेत दुनिया के तमाम देशों के सामने तेल से जुड़ी समस्याएं खड़ी होने की चिंता है। हालांकि जानकारों का कहना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे कच्चे तेल (Crude Oil) के प्रमुख आपूर्ति मार्ग के बंद होने से भारत को निकट भविष्य में कच्चे तेल (Crude Oil) की आपूर्ति में किसी बड़े व्यवधान का सामना करने की आशंका नहीं है। अधिकारियों ने यह जानकारी देते हुए कहा कि कच्चे तेल का भंडार कम से कम 10 दिन की जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त है।


    भारत के पास आकस्मिक योजनाएं

    ईरान पर अमेरिका और इजरायल के सैन्य हमलों के बाद तेजी से बदलते घटनाक्रम में इस्लामिक गणराज्य के सर्वोच्च नेता के मारे जाने की खबरें भी शामिल हैं। इससे संकेत मिलता है कि यह संघर्ष बहुत लंबा नहीं चलेगा। हालांकि, शीर्ष अधिकारियों और विश्लेषकों का कहना है कि यदि तनाव बढ़ता है, तो भारत के पास आकस्मिक योजनाएं तैयार हैं।


    रूस से आयात बढ़ा सकता है भारत

    ईरान के सरकारी मीडिया ने 28 फरवरी को कहा था कि अमेरिका और इजरायल के मिसाइल हमलों के जवाब में उसने होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद कर दिया है। यह दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा निकासी बिंदुओं में से एक है, जिससे वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति का लगभग पांचवां हिस्सा गुजरता है। अधिकारियों ने कहा कि कम अवधि के लिए इसके बंद होने से भारत पर ज्यादा असर नहीं पड़ेगा क्योंकि उसके पास ईंधन की जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त आपूर्ति है। उन्होंने आगे कहा कि यदि होर्मुज जलडमरूमध्य लंबे समय तक बंद रहता है, तो देश रूसी तेल की खरीद बढ़ाकर अपने आयात स्रोतों में बदलाव कर सकता है।


    भारत के पास कितना तेल भंडार

    हालांकि, इसका तत्काल प्रभाव तेल की कीमतों पर दिखेगा। ब्रेंट क्रूड इस सप्ताह सात महीने के उच्चस्तर लगभग 73 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ। यदि आपूर्ति बाधित होती है, तो कीमतें 80 डॉलर प्रति बैरल की ओर बढ़ सकती हैं। एक अधिकारी ने कहा, ”भारतीय रिफाइनरी कंपनियों के पास टैंक और पारगमन में मिलाकर 10 से 15 दिन का कच्चा तेल भंडार है। इसके अलावा, उनके ईंधन टैंक भरे हुए हैं, जो देश की 7-10 दिन की ईंधन जरूरत को आसानी से पूरा कर सकते हैं।” एक अन्य अधिकारी ने कहा कि भारत वेनेजुएला, ब्राजील और अफ्रीका जैसे दूरदराज के देशों से भी तेल खरीद सकता है।

  • फरवरी में जीएसटी राजस्व संग्रह 8.1 फीसदी बढ़कर 1.83 लाख करोड़ रुपये

    फरवरी में जीएसटी राजस्व संग्रह 8.1 फीसदी बढ़कर 1.83 लाख करोड़ रुपये


    नई दिल्ली।
    देश का सकल माल एवं सेवा कर (जीएसटी) राजस्व संग्रह फरवरी में सालाना आधार पर 8.1 फीसदी बढ़कर 1.83 लाख करोड़ रुपये से अधिक रहा है। इससे पिछले महीने जनवरी में जीएसटी राजस्व संग्रह 1.71 लाख करोड़ रुपये रहा था। बीते वर्ष की समान अवधि में यह 1.69 लाख करोड़ रुपये था।

    जीएसटी महानिदेशालय ने रविवार को जारी आंकड़ों में बताया कि फरवरी महीने में सकल माल एवं सेवा कर (जीएसटी) जीएसटी राजस्व संग्रह में आयात से प्राप्त राजस्व में हुई उच्च वृद्धि का मुख्य योगदान रहा है। आंकड़ों के अनुसार फरवरी के कुल जीएसटी राजस्व संग्रह में केंद्रीय जीएसटी (सीजीएसटी) 37,473 करोड़ रुपये रहा है, राज्य जीएसटी (एसजीएसटी) 45,900 करोड़ रुपये रहा है। इस दौरान एकीकृत जीएसटी (आईजीएसटी) 1,00,236 करोड़ रुपये रहा।

    आंकड़ों के मुताबिक फरवरी महीने में शुद्ध जीएसटी राजस्व संग्रह 1.61 लाख करोड़ रुपये से अधिक रहा है जो पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में 7.9 फीसदी अधिक है। शुद्ध उपकर राजस्व 5,063 करोड़ रुपये रहा है, जो पिछले साल फरवरी में 13,481 करोड़ रुपये रहा था। फरवरी में 22,595 करोड़ रुपये का रिफंड जारी किया गया, जो सलाना आधार पर 10.2 फीसदी की वृद्धि है।

    वित्त वर्ष 2025-26 की शुरुआत से लेकर अब तक (1 अप्रैल, 2025 से 1 फरवरी, 2026 तक) जीएसटी राजस्व संग्रह 20,27,033 करोड़ रुपये रहा है। इसमें सालाना आधार पर 8.3 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई है, जबकि पिछले साल की समान अवधि में जीएसटी राजस्व संग्रह 18,71,670 करोड़ रुपये था। फरवरी में महाराष्ट्र, गुजरात, तमिलनाडु और कर्नाटक में सबसे अधिक जीएसटी राजस्व संग्रह दर्ज किया गया है। लद्दाख, मिजोरम, नागालैंड और मणिपुर उन राज्यों में शामिल थे जहां सबसे कम जीएसटी राजस्व संग्रह हुआ है।

  • यूपीआई लेनदेन में बूम: फरवरी में 27% वृद्धि, 26 लाख करोड़ से अधिक का डिजिटल ट्रांजेक्शन

    यूपीआई लेनदेन में बूम: फरवरी में 27% वृद्धि, 26 लाख करोड़ से अधिक का डिजिटल ट्रांजेक्शन


    नई दिल्ली: फरवरी 2026 में यूनाइटेड पेमेंट्स इंटरफेस यानी यूपीआई ट्रांजेक्शन में जोरदार वृद्धि दर्ज की गई है। नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) के आंकड़ों के अनुसार, यूपीआई ट्रांजेक्शन की संख्या सालाना आधार पर 27 प्रतिशत बढ़कर 20.39 अरब हो गई है। इसी दौरान यूपीआई ट्रांजेक्शन की कुल वैल्यू भी 22 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 26.84 लाख करोड़ रुपए पर पहुंच गई है।

    इस अवधि में प्रतिदिन औसतन 728 मिलियन लेनदेन हुए, जबकि जनवरी में यह आंकड़ा 700 मिलियन था। फरवरी का औसत दैनिक लेनदेन 95,865 करोड़ रुपए रहा, जो जनवरी के 91,403 करोड़ रुपए की तुलना में अधिक है। जनवरी में यूपीआई के लेनदेन की संख्या सालाना आधार पर 28 प्रतिशत बढ़ी थी और कुल वैल्यू 28.33 लाख करोड़ रुपए तक पहुंची थी।

    वहीं, यूपीआई की तुलना में आईएमपीएस लेनदेन का मासिक वॉल्यूम फरवरी में 336 मिलियन रहा, जिसमें सालाना 14 प्रतिशत की वृद्धि हुई और कुल लेनदेन वैल्यू 6.42 लाख करोड़ रुपए रही। प्रतिदिन औसतन 12 मिलियन लेनदेन दर्ज किए गए। फास्टैग का मासिक लेनदेन 350 मिलियन रहा और इसका कुल मूल्य 6,925 करोड़ रुपए था, जो पिछले साल की तुलना में 5 प्रतिशत अधिक है।

    यूपीआई का विस्तार केवल घरेलू स्तर तक सीमित नहीं है। यह अब संयुक्त अरब अमीरात, सिंगापुर, भूटान, नेपाल, श्रीलंका, फ्रांस, मॉरीशस और कतर सहित आठ से अधिक देशों में सक्रिय है। इस वैश्विक विस्तार के कारण भारत डिजिटल भुगतान के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर अग्रणी बन गया है। यूपीआई की अंतरराष्ट्रीय पहुँच से रेमिटेंस बढ़ रही है, वित्तीय समावेशन मजबूत हो रहा है और भारत की फिनटेक स्थिति सुदृढ़ हो रही है।

    हाल ही में भारत और इजरायल ने यूपीआई के सीमा-पार उपयोग को सक्षम करने की घोषणा की, जिससे दोनों देशों की डिजिटल और वित्तीय साझेदारी और गहरी होगी। इस प्रक्रिया के तहत यूपीआई इजरायल के घरेलू भुगतान नेटवर्क से जुड़कर तेज और किफायती डिजिटल लेनदेन सुनिश्चित करेगा।

    भारत के वित्त मंत्रालय के स्वतंत्र अध्ययन के अनुसार, यूपीआई देश में भुगतान का सबसे पसंदीदा माध्यम बन चुका है। कुल डिजिटल भुगतान में यूपीआई का हिस्सा 57 प्रतिशत है, जबकि नकद लेनदेन 38 प्रतिशत पर सीमित है। इसकी सफलता का मुख्य कारण इसकी उपयोग में सरलता और इंस्टेंट मनी ट्रांसफर की क्षमता है। यूपीआई के बढ़ते ट्रांजेक्शन और अंतरराष्ट्रीय विस्तार ने यह साबित कर दिया है कि भारत डिजिटल भुगतान में न केवल घरेलू बल्कि वैश्विक नेतृत्व की दिशा में तेजी से अग्रसर है।

  • होली से पहले महंगा हुआ कॉमर्शियल LPG सिलेंडर… घरेलू गैस के दाम में कोई बदलाव नहीं

    होली से पहले महंगा हुआ कॉमर्शियल LPG सिलेंडर… घरेलू गैस के दाम में कोई बदलाव नहीं


    नई दिल्ली।
    होली (Holi) से पहले 1 मार्च को LPG (लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस-Liquefied Petroleum Gas) के रेट अपडेट हो गए हैं। उपभोक्ताओं को होली से पहले ही महंगाई का झटका लगा है। कॉमर्शियल एलपीजी (Commercial LPG) (लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस) सिलेंडर (Cylinder) के उपभोक्ताओं को दिल्ली से पटना तक करीब 28 से 31 रुपये का झटका लगा है। घरेलू उपभोक्ताओं के लिए राहत कि बात यह है कि 14 किलो वाले एलपीजी सिलेंडर के दाम में कोई बदलाव नहीं हुआ है। कॉमर्शियल सिलेंडर का मार्च ट्रेंड नहीं बदला। इस बार मार्च ने झटका दे ही दिया।

    दिल्ली में 19 किलो वाला एलपीजी सिलेंडर आज से 1768.50 पर मिलेगा। इससे पहले 1740.50 में मिल रहा था। कोलकाता में पहले 1844.50 रुपये का था और अब 1875.50 रुपये का हो गया है। मुंबई में कॉमर्शियल सिलेंडर 1692 रुपये की जगह आज से 1720 रुपये में मिलेगा। चेन्नई में अब आज से कॉमर्शियल सिलेंडर 1929 रुपये में मिलेगा। पहले यह 1899.50 रुपये का था।


    घरेलू एलपीजी के रेट

    भारत में इंडियन ऑयल (Indian Oil) के डेटा के आधार पर एलपीजी (लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस) की कीमतों की बात करें तो आज 14.2 किग्रा वाला घरेलू सिलेंडर दिल्ली में ₹853 में मिल रहा है। जबकि, पटना में इसकी कीमत ₹951 है। मुंबई में ₹852.50 और लखनऊ में ₹890.50 में मिल रहा है। कारगिल में ₹985.5, पुलवामा में ₹969, बागेश्वर में ₹890.5 का है।


    मार्च में महंगाई का ट्रेंड: पिछले 5 सालों का हाल

    पिछले 5 सालों के आंकड़े बताते हैं कि मार्च का महीना एलपीजी उपभोक्ताओं के लिए अक्सर महंगाई लेकर आया है। खासकर कॉमर्शियल सिलेंडर हर बार इस महीने में महंगा हुआ है, जबकि घरेलू सिलेंडर के रेट जब भी बदले, उपभोक्ताओं को झटका ही लगा। फिलहाल फरवरी 2026 के अंत में दिल्ली में घरेलू एलपीजी सिलेंडर 853 रुपये, कोलकाता में 879 रुपये, मुंबई में 852.50 रुपये और चेन्नई में 868.50 रुपये में मिल रहा है। वहीं, कॉमर्शियल सिलेंडर दिल्ली में 1740.50 रुपये, कोलकाता में 1844.50 रुपये, मुंबई में 1692 रुपये और चेन्नई में 1899.50 रुपये का भाव है। आइए, साल-दर-साल देखते हैं कि मार्च में कैसे बढ़े दाम।


    2021: दोहरा झटका

    साल 2021 की शुरुआत में ही उपभोक्ताओं को दोहरा झटका लगा। 1 मार्च 2021 को घरेलू एलपीजी सिलेंडर 25 रुपये महंगा होकर दिल्ली में 819 रुपये, कोलकाता में 845.50, मुंबई में 819 और चेन्नई में 835 रुपये पर पहुंच गया। इसी दिन कॉमर्शियल सिलेंडर ने भी रफ्तार पकड़ी और 95 से 98 रुपये की बढ़ोतरी के साथ दिल्ली में 1614, कोलकाता में 1681.50, मुंबई में 1564 और चेन्नई में 1731 रुपये पर पहुंच गया।


    2022: दो बार बढ़े दाम

    2022 में मार्च ने एक नहीं, दो बार रेट अपडेट हुए। 1 मार्च को कॉमर्शियल सिलेंडर ने 105 से 108 रुपये की तक छलांग लगाई। दिल्ली में यह 2012, कोलकाता में 2095, मुंबई में 1963 और चेन्नई में 2146 रुपये पर पहुंच गया। इसके बाद 22 मार्च को घरेलू सिलेंडर पर गाज गिरी और 50 रुपये की बढ़ोतरी के साथ दिल्ली में 949.50, कोलकाता में 976, मुंबई में 949.50 और चेन्नई में 965.50 रुपये हो गए।


    2023: इस साल भी लगा बड़ा झटका

    2023 का मार्च सबसे महंगा साबित हुआ। 1 मार्च को घरेलू सिलेंडर 50 रुपये उछलकर दिल्ली में 1103, कोलकाता में 1129, मुंबई में 1102.50 और चेन्नई में 1118.50 रुपये पर पहुंच गया। वहीं, कॉमर्शियल सिलेंडर ने तो कमर ही तोड़ दी। दिल्ली में 105 रुपये बढ़कर 2120, कोलकाता में 108 रुपये बढ़कर 2222, मुंबई में 106 रुपये बढ़कर 2072 और चेन्नई में 106 रुपये बढ़कर 2268 रुपये पर पहुंच गए।


    2024: कॉमर्शियल में मामूली बढ़ोतरी

    2024 में घरेलू सिलेंडर के दाम स्थिर रहे, लेकिन कॉमर्शियल सिलेंडर ने हल्की बढ़ोतरी से उपभोक्ताओं को राहत दी। 1 मार्च को 19 किलो वाले सिलेंडर दिल्ली और मुंबई में 26 रुपये, जबकि कोलकाता और चेन्नई में 24 रुपये महंगे हुए। नए दाम दिल्ली में 1795, मुंबई में 1749, कोलकाता में 1911 और चेन्नई में 1961 रुपये रहे।


    2025: हल्की सी बढ़ोतरी

    पिछले साल यानी 2025 में मार्च फिर कॉमर्शियल सिलेंडर पर भारी पड़ा, हालांकि बढ़ोतरी मामूली रही। 1 मार्च को दिल्ली में 6 रुपये की बढ़त के साथ सिलेंडर 1803 रुपये, कोलकाता में 1913, मुंबई में 1756 और चेन्नई में 1965 रुपये पर पहुंच गए। घरेलू सिलेंडर इस बार भी बदलाव से बचा रहा।

  • बीएसई और एनएसई पर SMEs की बड़ी छलांग, 360 कंपनियां मुख्य स्टॉक एक्सचेंज में लिस्टेड

    बीएसई और एनएसई पर SMEs की बड़ी छलांग, 360 कंपनियां मुख्य स्टॉक एक्सचेंज में लिस्टेड


    नई दिल्ली :भारत के छोटे और मध्यम उद्यमों की बढ़ती परिपक्वता का संकेत देते हुए लगभग 360 कंपनियां एनएसई और बीएसई के एसएमई प्लेटफॉर्म से मुख्य स्टॉक एक्सचेंज पर माइग्रेट हो चुकी हैं। बी2के एनालिटिक्स की रिपोर्ट के मुताबिक बीएसई एसएमई प्लेटफॉर्म की 199 कंपनियां और एनएसई इमर्ज प्लेटफॉर्म की 158 कंपनियां अब मेनबोर्ड पर लिस्टेड हैं।

    माइग्रेशन का मतलब है कि कंपनियां अपने शेयरों को एसएमई एक्सचेंज से मुख्य स्टॉक एक्सचेंज पर शिफ्ट करती हैं जिससे उन्हें अधिक निवेशकों तक पहुंच और बाजार में बेहतर पहचान मिलती है। बी2के एनालिटिक्स के सीईओ रिताबन बसु का कहना है कि मेनबोर्ड पर जाने का सबसे बड़ा फायदा यह है कि कंपनी रिटेल और संस्थागत निवेशकों से पूंजी जुटा सकती है और साथ ही उसकी साख भी बढ़ती है। इससे प्रतिभा को आकर्षित करना आसान होता है और शेयरों में अधिक तरलता आती है जिससे निवेशकों को आसानी से बाहर निकलने का विकल्प मिलता है।

    माइग्रेशन के लिए कंपनियों को कुछ मानक पूरे करने होते हैं। उदाहरण के लिए औसत बाजार पूंजीकरण 100 करोड़ रुपए से अधिक होना चाहिए और लगातार तीन साल तक परिचालन लाभ 15 करोड़ रुपए से ज्यादा होना चाहिए। कंपनी का मुख्य व्यवसाय तीन साल से अधिक समय तक सक्रिय होना चाहिए और कुल आय का आधे से अधिक हिस्सा मुख्य कारोबार से आना चाहिए।

    सेक्टर के हिसाब से देखा जाए तो टेक्सटाइल कंपनियों ने सबसे ज्यादा मेनबोर्ड माइग्रेशन किया है जहां 44 कंपनियां लिस्टेड हुईं। इसके बाद मशीनरी उपकरण और कंपोनेंट सेक्टर की 33 कंपनियां और फूड व तंबाकू सेक्टर की 29 कंपनियां मुख्य एक्सचेंज में पहुंचीं।

    रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि 2023 से एसएमई लिस्टिंग और फंड जुटाने में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। 2023 में 179 कंपनियों ने 4823 करोड़ रुपए जुटाए जबकि 2025 में यह आंकड़ा 268 कंपनियों और 12105 करोड़ रुपए तक पहुंच गया। यह सिर्फ दो साल में दोगुने से भी ज्यादा वृद्धि दर्शाता है।

    विशेषज्ञों के अनुसार एसएमई कंपनियों का मेनबोर्ड पर माइग्रेशन निवेशकों के लिए नए अवसर पैदा करता है और छोटे उद्यमों को बड़े पैमाने पर पूंजी जुटाने में मदद करता है। यह प्रवृत्ति भारत के शेयर बाजार में SMEs की बढ़ती परिपक्वता और निवेशकों के लिए विविध विकल्पों का संकेत देती है।

  • साप्ताहिक शेयर बाजार: सेंसेक्स और निफ्टी लगभग 1.5% गिरे, वैश्विक तनाव से निवेशक सतर्क

    साप्ताहिक शेयर बाजार: सेंसेक्स और निफ्टी लगभग 1.5% गिरे, वैश्विक तनाव से निवेशक सतर्क


    नई दिल्ली:
    भारतीय शेयर बाजार इस सप्ताह वैश्विक अनिश्चितता और भू-राजनीतिक तनाव के बीच कमजोरी के साथ बंद हुआ। अमेरिका-ईरान वार्ता और वैश्विक बाजारों में उतार-चढ़ाव के कारण निवेशक सतर्क रहे।

    साप्ताहिक कारोबार में सेंसेक्स 961.42 अंक (1.17%) गिरकर 81,287.19 और निफ्टी 317.90 अंक (1.25%) गिरकर 25,178.65 पर बंद हुआ। निफ्टी मिडकैप और स्मॉलकैप 100 इंडेक्स में भी 1% से अधिक की गिरावट देखी गई।

    सेक्टरवार हालात:

    ऑटो, बैंकिंग, एफएमसीजी, मेटल और रियल्टी में 1–2% की गिरावट।

    आईटी, मीडिया और कंज्यूमर ड्यूरेबल में कुछ मजबूती।

    बैंक निफ्टी में मुनाफावसूली और नकारात्मक पैटर्न, 60,000–61,750 के दायरे में कारोबार संभव।

    विशेषज्ञों की राय:

    निफ्टी हालिया ट्रेडिंग रेंज से नीचे आ गया, इमीडिएट रेजिस्टेंस 25,400।

    घरेलू आर्थिक मजबूती और कुछ सेक्टरों की ताकत से बाजार को सहारा मिल सकता है।

    वैश्विक आर्थिक घटनाक्रम और संस्थागत निवेश प्रवाह बाजार की दिशा तय करेंगे।

    वैश्विक घटनाक्रम:
    अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत में ठोस नतीजा नहीं निकला। अगले सप्ताह फिर बातचीत होने के संकेत हैं, लेकिन ऊर्जा बाजार और क्षेत्रीय स्थिरता पर असर को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।

  • देश का विदेशी मुद्रा भंडार 2.11 अरब डॉलर घटकर 723.6 अरब डॉलर पर

    देश का विदेशी मुद्रा भंडार 2.11 अरब डॉलर घटकर 723.6 अरब डॉलर पर


    नई दिल्ली।
    देश का विदेशी मुद्रा भंडार 20 फरवरी को समाप्त हफ्ते में 2.11 अरब डॉलर घटकर 723.60 अरब डॉलर रहा। इससे पहले छह फरवरी को समाप्त हफ्ते में विदेशी मुद्रा भंडार 8.66 अरब डॉलर बढ़कर 725.72 अरब डॉलर के सर्वकालिक उच्चतम स्तर पर पहुंच गया था।

    रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) ने शुक्रवार को जारी आंकड़ों में बताया कि 20 फरवरी को समाप्त हफ्ते सप्ताह में विदेशी मुद्रा भंडार का अहम हिस्सा माने जाने वाली विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियां 1.03 अरब डॉलर घटकर 572.56 अरब डॉलर रहीं। इस दौरान स्वर्ण भंडार का मूल्य 97.7 करोड़ डॉलर घटकर 127.48 अरब डॉलर रह गया।

    आंकड़ों के मुताबिक इस अवधि में विशेष आहरण अधिकार(एसडीआर) 8.4 करोड़ डॉलर घटकर 18.84 अरब डॉलर रहा। 20 फरवरी को समाप्त हफ्ते सप्ताह में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के पास भारत का आरक्षित भंडार 1.8 करोड़ डॉलर घटकर 4.71 अरब डॉलर रह गया है।


    केंद्र सरकार का राजकोषीय घाटा जनवरी तक सालाना लक्ष्य का 63 फीसदी

    केंद्र सरकार का राजकोषीय घाटा जनवरी के अंत तक 9.8 लाख करोड़ रुपये रहा, जो वित्त वर्ष 2025-26 के वार्षिक बजट लक्ष्य का 63 फीसदी है। वित्त मंत्रालय ने शुक्रवार को जारी आंकड़ों में यह जानकारी दी है।

    वित्त मंत्रालय ने महालेखा नियंत्रक (सीजीए) की ओर से जारी आंकड़ों में बताया कि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में यह 74.5 फीसदी था। केंद्र सरकार का अनुमान है कि वित्त वर्ष 2025-26 में राजकोषीय घाटा सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का 4.4 फीसदी यानी 15.58 लाख करोड़ रुपये रहेगा।

    महालेखा नियंत्रक (सीजीए) के आंकड़ों के अनुसार जनवरी 2026 तक केंद्र को कुल 27.08 लाख करोड़ रुपये प्राप्त हुए, जो संशोधित अनुमान (आरई) के तहत वित्त वर्ष 2025-26 की कुल प्राप्तियों का 79.5 फीसदी है। इसमें 20.94 लाख करोड़ रुपये का कर राजस्व, 5.57 लाख करोड़ रुपये का गैर-कर राजस्व और 57,129 करोड़ रुपये की गैर-ऋण पूंजीगत प्राप्तियां शामिल हैं।

    सीजीए के आंकड़ों के अनुसार भारत सरकार ने करों के हिस्से के रूप में राज्यों को 11.39 लाख करोड़ रुपये हस्तांतरित किए, जो पिछले वर्ष की तुलना में 65,588 करोड़ रुपये अधिक हैं। इसके अलावा भारत सरकार का कुल व्यय 36.9 लाख करोड़ रुपये रहा, जो वित्त वर्ष 2025-26 के संशोधित अनुमान का 74.3 फीसदी है। इसमें से 28.47 लाख करोड़ रुपये राजस्व मद और 8.42 लाख करोड़ रुपये पूंजी मद में खर्च किए गए। वहीं, कुल राजस्व व्यय में 9.88 लाख करोड़ रुपये ब्याज भुगतान और 3.54 लाख करोड़ रुपये प्रमुख सब्सिडी पर खर्च हुए।

  • पॉलिसी सरेंडर करने से पहले रुकिए! वरना डूब सकते हैं हजारों-लाखों रुपए

    पॉलिसी सरेंडर करने से पहले रुकिए! वरना डूब सकते हैं हजारों-लाखों रुपए



    नई दिल्ली। इंश्योरेंस पॉलिसी लेना आसान है, लेकिन बीच में उसे छोड़ना भारी पड़ सकता है। कई लोग आर्थिक दबाव, बदलती प्राथमिकताओं या गलत वित्तीय योजना के कारण पॉलिसी सरेंडर करने का फैसला कर लेते हैं, जबकि इसके दूरगामी नुकसान को पूरी तरह समझ नहीं पाते। पॉलिसी को तय अवधि से पहले बंद करने पर बीमा कंपनी पूरी जमा राशि वापस नहीं करती, बल्कि कटौतियों के बाद जो रकम देती है उसे ‘सरेंडर वैल्यू’ कहा जाता है। शुरुआती वर्षों में यह राशि अक्सर भरे गए कुल प्रीमियम से काफी कम होती है, क्योंकि पहले कुछ सालों में प्रीमियम का बड़ा हिस्सा कमीशन और प्रशासनिक खर्च में चला जाता है।

    सबसे बड़ा झटका यह होता है कि पॉलिसी बंद करते ही जीवन बीमा कवरेज तुरंत समाप्त हो जाता है। यानी किसी अनहोनी की स्थिति में परिवार को कोई डेथ बेनिफिट नहीं मिलेगा। टर्म इंश्योरेंस के मामले में तो कोई बचत घटक होता ही नहीं, इसलिए उसे बीच में छोड़ने पर कोई पैसा वापस नहीं मिलता। वहीं एंडोमेंट, मनी-बैक या ULIP जैसी योजनाओं में कुछ सरेंडर वैल्यू मिल सकती है, लेकिन भविष्य के बोनस, गारंटीड रिटर्न और मैच्योरिटी लाभ खत्म हो जाते हैं।

    बीमा नियामक Insurance Regulatory and Development Authority of India (IRDAI) ने हाल के वर्षों में कुछ नियमों में बदलाव किए हैं, जिससे पारंपरिक पॉलिसियों में सरेंडर वैल्यू पहले की तुलना में कुछ बेहतर हो सकती है, खासकर यदि कम से कम एक साल का प्रीमियम जमा किया गया हो। फिर भी, यह जरूरी नहीं कि नुकसान पूरी तरह टल जाए।

    पूरी तरह पॉलिसी बंद करने की बजाय ‘पेड-अप’ विकल्प पर विचार किया जा सकता है, जिसमें आगे प्रीमियम देना बंद कर दिया जाता है, लेकिन कम बीमा राशि के साथ पॉलिसी जारी रहती है। इसके अलावा, कंपनियां 15–30 दिन का ग्रेस पीरियड देती हैं और कुछ शर्तों के तहत लैप्स पॉलिसी को दोबारा चालू (रिवाइवल) भी किया जा सकता है।

    इसलिए पॉलिसी सरेंडर करने से पहले अपनी वित्तीय स्थिति, परिवार की सुरक्षा, सरेंडर चार्ज, भविष्य के लाभ और वैकल्पिक विकल्पों का संतुलित आकलन करना बेहद जरूरी है। जल्दबाजी में लिया गया फैसला भविष्य में बड़ी आर्थिक और सुरक्षा संबंधी परेशानी का कारण बन सकता है।

  • दीपिंदर गोयल का नया वेंचर Temple: एलीट एथलीट्स के लिए भर्ती की अनोखी शर्त

    दीपिंदर गोयल का नया वेंचर Temple: एलीट एथलीट्स के लिए भर्ती की अनोखी शर्त


    नई दिल्ली। जोमैटो के संस्थापक और सीईओ दीपिंदर गोयल ने अपने नए वेंचर Temple के लिए 12 पदों पर भर्ती की घोषणा की है। यह स्टार्टअप न्यूरोटेक की दुनिया में कदम रख रहा है और एलीट एथलीट्स के लिए एक क्रांतिकारी ‘हेड-वॉर्न’ वियरेबल डिवाइस विकसित कर रहा है। यह डिवाइस नियर-इंफ्रारेड स्पेक्ट्रोस्कोपी तकनीक का इस्तेमाल करते हुए दिमाग की गतिविधियों और ब्लड फ्लो को ट्रैक करेगा, जिससे एथलीट्स के प्रदर्शन और स्वास्थ्य को नए स्तर पर मापा जा सकेगा।

    गोयल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट के लिए 12 विशिष्ट इंजीनियरिंग और न्यूरोसाइंस पदों पर भर्ती की जानकारी साझा की। इन पदों पर सालाना 10 लाख से लेकर 45 लाख रुपये या उससे अधिक का पैकेज मिलने की संभावना है। शुरुआती स्तर के इंजीनियरों से लेकर वरिष्ठ वैज्ञानिकों तक के लिए अवसर उपलब्ध हैं।

    हालांकि इस भर्ती की सबसे विवादित और चर्चित शर्त इसकी ‘फिटनेस अनिवार्यता’ है। चूंकि Temple का फोकस एथलीट्स के लिए उत्पाद विकसित करना है, इसलिए गोयल चाहते हैं कि उनकी टीम के सदस्य भी खुद एथलीट हों। इसके तहत पुरुष आवेदकों का बॉडी फैट प्रतिशत 16% से कम और महिलाओं का 26% से कम होना आवश्यक है। इस अनोखी शर्त ने सोशल मीडिया पर काफी चर्चा और प्रतिक्रियाएं पैदा की हैं।

    विशेषज्ञों का कहना है कि इस कदम से स्टार्टअप को तकनीकी दक्षता के साथ-साथ वास्तविक एथलीट अनुभव भी मिलेगा। टीम के सदस्य खुद फिट और सक्रिय होने के कारण उत्पाद के डिजाइन और परीक्षण में बेहतर योगदान दे सकेंगे। हालांकि कुछ लोगों ने इस फिटनेस मानक को लेकर विवाद भी उठाया है और इसे प्रतिभा चयन में बाधा मान रहे हैं।

    Temple का यह प्रोजेक्ट एथलीट्स के प्रदर्शन और स्वास्थ्य पर आधारित डेटा-संचालित समाधान प्रदान करेगा। इस वियरेबल डिवाइस से खिलाड़ियों के दिमाग और शरीर की गतिविधियों का वास्तविक समय ट्रैकिंग संभव होगी। दीपिंदर गोयल का यह नया प्रयोग स्टार्टअप और न्यूरोटेक जगत में काफी उम्मीदों और उत्सुकता के साथ देखा जा रहा है।

    Temple स्टार्टअप में 12 पदों पर खुली भर्ती ने तकनीकी और वैज्ञानिक समुदाय के बीच हलचल मचा दी है। एथलीट-केंद्रित फिटनेस शर्त ने इसे अलग और ध्यान आकर्षित करने वाला अवसर बना दिया है। साथ ही, यह दिखाता है कि भविष्य के स्टार्टअप न केवल तकनीकी दक्षता बल्कि वास्तविक अनुभव और स्वास्थ्य मानकों को भी प्राथमिकता दे रहे हैं।