Category: Economy

  • सेंसेक्स और निफ्टी में 'वेट एंड वॉच' की स्थिति: विदेशी तनाव के चलते सुरक्षित निवेश की तलाश में निवेशक, छोटे शेयरों में गिरावट ने बिगाड़ा बाजार का मूड!

    सेंसेक्स और निफ्टी में 'वेट एंड वॉच' की स्थिति: विदेशी तनाव के चलते सुरक्षित निवेश की तलाश में निवेशक, छोटे शेयरों में गिरावट ने बिगाड़ा बाजार का मूड!


    नई दिल्ली। सप्ताह के पहले कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार वैश्विक अनिश्चितता और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच सीमित दायरे में उतार चढ़ाव के बाद लगभग सपाट स्तर पर बंद हुआ। दिनभर निवेशकों के बीच सतर्कता का माहौल बना रहा, जिससे बाजार में कोई स्पष्ट दिशा देखने को नहीं मिली। शुरुआती सत्र में हल्की तेजी के बाद बाजार ने अपने ऊपरी स्तरों से फिसलते हुए अंत में मामूली बढ़त दर्ज की।

    कारोबार के अंत में सेंसेक्स करीब 26 अंकों की बढ़त के साथ 78,520 के स्तर पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी भी हल्की बढ़त के साथ 24,364 के आसपास पहुंच गया। दिन की शुरुआत सकारात्मक रही थी और दोनों सूचकांकों ने शुरुआती कारोबार में ऊंचे स्तरों को छुआ, लेकिन बाद में मुनाफावसूली और वैश्विक संकेतों की कमजोरी के कारण बाजार पर दबाव बन गया।

    दिन के दौरान बाजार ने सीमित दायरे में कारोबार किया। निवेशक बड़े फैसले लेने से बचते नजर आए और ज्यादातर समय सतर्क रुख अपनाए रखा। वैश्विक स्तर पर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव तथा संभावित संघर्षविराम को लेकर बनी अनिश्चितता ने निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता को प्रभावित किया। इसी कारण बाजार अपने उच्चतम स्तर को बनाए रखने में सफल नहीं हो सका।

    वृहद बाजार में भी कमजोरी देखने को मिली। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में गिरावट दर्ज की गई, जिससे यह संकेत मिला कि निवेशक फिलहाल सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर झुकाव बनाए हुए हैं। यह रुझान आमतौर पर तब देखने को मिलता है जब बाजार में अनिश्चितता अधिक होती है और निवेशक जोखिम कम करने की कोशिश करते हैं।

    सेक्टर स्तर पर बाजार का रुख मिला जुला रहा। कुछ क्षेत्रों में खरीदारी देखने को मिली जबकि कई सेक्टरों में बिकवाली का दबाव बना रहा। ऑटो और बैंकिंग से जुड़े शेयरों में हल्की मजबूती रही, जबकि आईटी, मेटल और एफएमसीजी क्षेत्रों में कमजोरी दर्ज की गई। इस मिश्रित प्रदर्शन ने भी बाजार को किसी एक दिशा में आगे बढ़ने से रोके रखा।

    पश्चिम एशिया में हालिया घटनाक्रमों ने वैश्विक निवेश माहौल को प्रभावित किया है। समुद्री मार्गों और व्यापारिक गतिविधियों से जुड़ी अनिश्चितता ने निवेशकों की चिंताओं को बढ़ा दिया है। ऐसी परिस्थितियों में बाजार आमतौर पर सतर्क रुख अपनाता है और उतार चढ़ाव सीमित दायरे में रहता है।

    आने वाले दिनों में बाजार की दिशा काफी हद तक अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों और वैश्विक आर्थिक संकेतों पर निर्भर करेगी। निवेशक फिलहाल सतर्क बने हुए हैं और किसी बड़े संकेत का इंतजार कर रहे हैं जो बाजार को स्पष्ट दिशा दे सके।

  • सीमित संसाधनों के बावजूद सार्वजनिक निवेश को प्राथमिकता देने की तैयारी, क्या सफल होगा यह बड़ा दांव?

    सीमित संसाधनों के बावजूद सार्वजनिक निवेश को प्राथमिकता देने की तैयारी, क्या सफल होगा यह बड़ा दांव?


    नई दिल्ली।देश के विभिन्न राज्यों के लिए वित्त वर्ष 2027 में आर्थिक रणनीति का केंद्र सार्वजनिक निवेश बना रहेगा। अनुमान है कि राज्य सरकारें बुनियादी ढांचे के विकास और दीर्घकालिक आर्थिक मजबूती को ध्यान में रखते हुए पूंजीगत खर्च को प्राथमिकता देती रहेंगी। हालांकि, इस खर्च की वृद्धि दर अपेक्षाकृत सीमित रह सकती है और इसके 8 से 10 प्रतिशत के बीच रहने की संभावना जताई जा रही है। यह स्थिति दर्शाती है कि राज्यों को विकास और वित्तीय संतुलन के बीच सावधानीपूर्वक तालमेल बनाना होगा।

    आर्थिक आकलनों के अनुसार, राज्यों का पूंजीगत व्यय सकल राज्य घरेलू उत्पाद के लगभग 2.3 से 2.4 प्रतिशत के दायरे में रह सकता है। यह संकेत देता है कि बुनियादी ढांचे से जुड़ी परियोजनाओं जैसे सड़क, परिवहन, ऊर्जा और शहरी विकास में निवेश जारी रहेगा। इस तरह के निवेश से रोजगार सृजन और आर्थिक गतिविधियों को गति मिलने की उम्मीद है, जो दीर्घकाल में राज्यों की अर्थव्यवस्था को मजबूत आधार प्रदान कर सकता है।

    दूसरी ओर, राज्यों के सामने राजस्व व्यय को नियंत्रित करना एक बड़ी चुनौती बन सकता है। जनकल्याणकारी योजनाओं पर बढ़ता खर्च और ऊर्जा तथा कमोडिटी की ऊंची लागत से वित्तीय दबाव बढ़ने की संभावना है। इसके चलते राज्यों के कुल खर्च में वृद्धि हो सकती है, जिससे उनके बजट संतुलन पर असर पड़ सकता है। साथ ही, राजस्व प्राप्तियों की वृद्धि दर भी सीमित रहने का अनुमान है, जो वित्त वर्ष 2026 में लगभग 6.2 प्रतिशत और वित्त वर्ष 2027 में करीब 7.9 प्रतिशत तक रह सकती है। यह वृद्धि दर नाममात्र के आर्थिक विस्तार की तुलना में कम मानी जा रही है।

    राज्यों की आय पर केंद्र से मिलने वाले संसाधनों की गति में संभावित कमी का भी प्रभाव पड़ सकता है। वैश्विक परिस्थितियों और बढ़ती सब्सिडी आवश्यकताओं के कारण केंद्र सरकार पर वित्तीय दबाव बढ़ने की आशंका है, जिससे राज्यों को मिलने वाले हस्तांतरणों की वृद्धि धीमी हो सकती है। इस स्थिति में राज्यों को अपने संसाधनों का अधिक कुशल प्रबंधन करना होगा ताकि विकास परियोजनाओं को जारी रखा जा सके।

    विशेषज्ञों के अनुसार, पूंजीगत व्यय को प्राथमिकता देने के बावजूद इसकी वृद्धि दर धीमी पड़ सकती है, जिसका असर राजकोषीय घाटे और ऋण स्तर पर दिखाई दे सकता है। अनुमान है कि राजस्व घाटा धीरे-धीरे बढ़कर वित्त वर्ष 2027 तक सकल राज्य घरेलू उत्पाद के लगभग 1.2 प्रतिशत तक पहुंच सकता है। यह स्थिति राज्यों के लिए वित्तीय अनुशासन बनाए रखने की आवश्यकता को और महत्वपूर्ण बना देती है, ताकि वे अपने विकास लक्ष्यों और सामाजिक जिम्मेदारियों के बीच संतुलन स्थापित कर सकें।

    उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र और तेलंगाना जैसे प्रमुख राज्यों ने पहले भी सीमित राजस्व वृद्धि के बावजूद पूंजीगत व्यय को प्राथमिकता दी है। यह रुझान बताता है कि राज्यों का ध्यान दीर्घकालिक आर्थिक विकास और बुनियादी ढांचे को सुदृढ़ करने पर केंद्रित है। आने वाले समय में भी यह रणनीति आर्थिक स्थिरता और विकास को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

  • भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर फिर शुरू होगी बातचीत, सहमति के बाद क्यों अटक गया मामला?

    भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर फिर शुरू होगी बातचीत, सहमति के बाद क्यों अटक गया मामला?

    नई दिल्ली। भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच प्रस्तावित ट्रेड डील (BTA) को लेकर आज 20 अप्रैल से वॉशिंगटन डीसी में अहम दौर की बातचीत शुरू हो रही है। तीन दिन तक चलने वाली इस वार्ता में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व वाणिज्य विभाग के अतिरिक्त सचिव दर्पण जैन करेंगे। उनके साथ कस्टम और विदेश मंत्रालय के अधिकारी भी शामिल रहेंगे।

    टैरिफ बदलाव से बिगड़ा समीकरण

    यह बैठक ऐसे समय हो रही है जब अमेरिकी टैरिफ नीति में बड़ा बदलाव आया है। डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने 24 फरवरी से 150 दिनों के लिए सभी देशों के आयात पर 10% का अस्थायी टैरिफ लागू कर दिया।

    पहले प्रस्तावित डील के तहत अमेरिका भारत के उत्पादों पर टैरिफ 50% से घटाकर 18% करने पर सहमत था, लेकिन नए नियम के बाद सभी देशों पर समान शुल्क लगने से भारत को मिलने वाला खास फायदा कम हो गया। यही वजह है कि अब दोनों देशों को डील की शर्तों पर फिर से विचार करना पड़ रहा है।

    सेक्शन 301 भी बड़ा मुद्दा

    बातचीत में सेक्शन 301 के तहत अमेरिका द्वारा शुरू की गई जांच भी अहम मुद्दा रहेगी। अमेरिका का आरोप है कि भारत कुछ क्षेत्रों में अनुचित व्यापारिक नीतियां अपनाता है, जबकि भारत ने इन आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए इन्हें खत्म करने की मांग की है।

    किन सेक्टर पर होगी चर्चा?

    प्रस्तावित डील में भारत ने अमेरिकी उत्पादों पर टैरिफ कम करने का संकेत दिया था। इनमें शामिल हैं:

    सोयाबीन तेल
    ड्राई फ्रूट्स
    फल
    वाइन और स्पिरिट्स
    पशु आहार

    इसके बदले भारत ने ऊर्जा, एविएशन, टेक्नोलॉजी और कोकिंग कोल जैसे क्षेत्रों में अगले 5 वर्षों में 500 अरब डॉलर तक आयात बढ़ाने की इच्छा जताई है।

    कृषि सेक्टर बना सबसे बड़ा अड़ंगा

    अमेरिका की ओर से बाजार पहुंच (Market Access) सबसे बड़ा मुद्दा बना हुआ है।

    अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेमिसन ग्रीर ने साफ कहा है कि अमेरिका भारतीय बाजार में अपने निर्यात के लिए बेहतर अवसर चाहता है।

    खासतौर पर कृषि क्षेत्र—जहां टैरिफ ज्यादा हैं—विवाद का केंद्र बन गया है।

    सेब पर टैरिफ बना विवाद की जड़

    अमेरिका ने भारत में सेब पर 50% टैरिफ को बड़ा मुद्दा बताया है। इसका असर साफ दिखा है:

    2018 में भारत के सेब आयात में अमेरिका की हिस्सेदारी: 53%
    अब घटकर: करीब 8.5%

    इस दौरान ईरान, तुर्की और अफगानिस्तान जैसे देशों की हिस्सेदारी बढ़ गई है।

    क्यों फंसा पेंच?

    अमेरिकी टैरिफ नीति में अचानक बदलाव
    सेक्शन 301 की जांच
    कृषि और खासकर सेब जैसे उत्पादों पर ऊंचा शुल्क
    भारत को मिलने वाला पहले का तुलनात्मक लाभ खत्म होना

    अब नजरें इस बात पर हैं कि क्या यह नया दौर दोनों देशों के बीच संतुलित और पारस्परिक लाभ वाली ट्रेड डील का रास्ता साफ कर पाएगा या नहीं।

  • आयकर स्लैब से कम है सालाना कमाई तो भी भरें ITR… इसके फायदे जानकर रह जाएंगे हैरान

    आयकर स्लैब से कम है सालाना कमाई तो भी भरें ITR… इसके फायदे जानकर रह जाएंगे हैरान


    नई दिल्ली।
    एक अप्रैल 2026 से नया वित्तीय वर्ष (New Financial Year) शुरू हो चुका है और टैक्सपेयर (Taxpayer.) आयकर रिटर्न (Income Tax Return.-ITR) दाखिल करने की तैयारी कर रहे हैं। लेकिन, बहुत सारे ऐसे लोग हैं, जिनकी सालाना इनकम कमाई टैक्स स्लैब (Annual Income Tax Slab.) से कम है या कटौती के बाद उनकी टैक्स की देनदारी शून्य हो जाती है। ऐसे में उन्हें लगता है कि उन्हें अब आईटीआर दाखिल करने की जरूरत नहीं है, लेकिन टैक्स एक्सपर्ट्स कहते हैं कि ऐसे मामलों में ‘शून्य आईटीआर’ दाखिल की जा सकती है, जिसके अपने कई फायदे हैं।

    सभी के लिए आईटीआर भरना जरूरी
    इनकम टैक्स रूल्स के मुताबिक, उन सभी लोगों को आईटीआर जमा करना जरूरी है, जिनकी कुल इनकम मूल टैक्स छूट की सीमा से अधिक है। कई लोगों को गलतफहमी रहती है कि यदि उनकी सालाना आय ओल्ड टैक्स रिजीम में पांच लाख रुपये और नए टैक्स रिजीम में 12 लाख रुपये से कम है तो ITR भरना जरूरी नहीं है, लेकिन ऐसा नहीं है।

    टैक्स एक्सपर्ट्स के अनुसार, इस सीमा से कम आय होने पर टैक्स इसलिए नहीं देना पड़ता क्योंकि धारा 87ए के तहत ओल्ड टैक्स रिजीम में 12,500 रुपये और नए टैक्स रिजीम में 60 हजार रुपये तक की रिबेट मिलती है, लेकिन पुरानी व्यवस्था में छूट की वास्तविक सीमा अब सिर्फ 2.5 लाख रुपये है। वहीं, नई कर व्यवस्था में यह सीमा चार लाख रुपये है। अगर इससे एक रुपये भी अधिक आय है तो टैक्सपेयर के लिए आईटीआर दाखिल करना जरूरी है, भले ही उनका टैक्स शून्य हो। इसे जीरो आईटीआर भी कहते हैं।

    इन मामलों में जरूर भरें आईटीआर
    1. भारी-भरकम बिजली बिल का भुगतान

    नियमों के अनुसार, अगर टैक्सपेयर ने एक वित्त वर्ष के दौरान कुल मिलाकर एक लाख रुपये या उससे अधिक का बिजली बिल चुकाया है, तो आपके लिए आईटीआर दाखिल करना अनिवार्य है। भले ही उसकी कुल सालाना टैक्स स्लैब से कम हो। विभाग यह मानकर चलता है कि आपकी जीवनशैली और खर्च घोषित आय से मेल नहीं खा रहे हैं।

    2. विदेश यात्रा पर बड़ा खर्च
    अगर टैक्सपेयर ने विदेश यात्रा पर दो लाख या उससे ज्यादा खर्च किए हैं, तो आईटीआर भरना होगा। इस मामले में नियम बहुत स्पष्ट हैं। इसके अनुसार, विदेश यात्रा पर दो लाख से अधिक का खर्च उच्च श्रेणी के लेनदेन में शामिल होता है। इसलिए इस खर्च के कारण विभाग को सूचित करना अनिवार्य हो जाता है।


    3. बैंक खातों में बड़ी रकम जमा करना

    यदि व्यक्ति ने अपने बचत खाते में 50 लाख या उससे ज्यादा की नकद राशि जमा की है, तो आईटीआर भरना जरूरी है। ‘करेंट अकाउंट’ के मामले में यह सीमा एक करोड़ रुपये या इससे अधिक है। कई बार संपत्ति बेचने या निवेश की रकम प्राप्त होने पर इतनी बड़ी रकम खाते में प्राप्त होती है। बैंक इसकी जानकारी आयकर विभाग को देता है। ऐसे में टैक्सपेयर के लिए भी रिटर्न भरना अनिवार्य हो जाता है।


    4. इसके लिए भी जरूरी

    अगर किसी व्यक्ति का टीडीएस या टीसीएस 25,000 रुपये या उससे अधिक कटा है (बुजुर्गों के लिए ₹50,000), तो रिफंड लेने या न लेने, दोनों ही स्थितियों में रिकॉर्ड के लिए आईटीआर दाखिल करना होता है। इसके अलावा अगर अगर कुल व्यावसायिक बिक्री 60 लाख रुपये से अधिक है या पेशेवर आय 10 लाख रुपये से ज्यादा है, तब भी रिटर्न दाखिल करना अनिवार्य है।


    जीरो आईटीआर भरने के फायदे
    1. लोन लेना आसान

    होम लोन या व्यक्तिगत कर्ज देने से पहले बैंक या वित्तीय संस्थान पिछलने तीन वर्षों का आयकर रिटर्न मांगते हैं। इससे कर्ज मिलने की प्रक्रिया आसान हो जाती है।


    2. विदेश जाने के लिए भी मददगार

    विदेश यात्रा के लिए वीजा आवेदन करते समय संबंधित देश के दूतावास वित्तीय स्थिति जांचने करते हैं। इसके लिए भी आईटीआर मांगते हैं। इससे वीजा मिलना आसान हो जाता है।


    3. शेयर बाजार में निवेश पर बचा सकते हैं टैक्स

    शेयर बाजार या म्यूचुअल फंड में अगर घाटा हुआ है, तो उस हानि को अगले कुछ सालों के लिए समायोजित (कैरी फॉरवर्ड) करने की सुविधा तभी मिलती है, जब आप समय पर आईटीआर दाखिल करते हैं।


    4. बिना आईटीआर टीडीएस रिफंड नहीं मिलेगा

    कई बार बैंक टैक्स दायरे में नहीं आने के बावजूद फिक्स डिपॉजिट (FD) के ब्याज पर टीडीएस काट लेते हैं। इसका रिफंड बिना आईटीआर दाखिल किए नहीं मिलेगा।


    विभाग के पास हर वित्तीय गतिविधि की जानकारी

    मौजूदा समय में आयकर विभाग आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और डेटा एनालिटिक्स का भरपूर इस्तेमाल कर रहा है। वार्षिक सूचना विवरण (एआईएस) और टैक्सपेयर इंफॉर्मेशन समरी (टीआईए,) जैसे टूल्स के जरिए विभाग के पास आपके बैंक ब्याज, शेयर बाजार के निवेश, डिविडेंड और हाई-वैल्यू ट्रांजेक्शन की पूरी डिटेल मौजूद रहती है। ऐसी में अगर आप अपनी कमाई का ब्यौरा नहीं देते हैं, तो डाटा में विसंगति होने पर विभाग की ओर से नोटिस आने की संभावना बढ़ जाती है।


    ITR Slab (नई व्यवस्था)

    ₹0 से ₹4 लाख: शून्य
    ₹4 लाख से ₹8 लाख: 5%
    ₹8 लाख से ₹12 लाख: 10%
    ₹12 लाख से ₹16 लाख: 15%
    ₹16 लाख से ₹20 लाख: 20%
    ₹20 लाख से ₹24 लाख: 25%
    ₹24 लाख से अधिक: 30%


    पुरानी टैक्स व्यवस्था के स्लैब

    ₹0 से ₹2.5 लाख : शून्य
    ₹2.5 लाख से ₹5 लाख: 5%
    ₹5 लाख से ₹10 लाख : 20%
    ₹10 लाख से अधिक: 30%

  • रिपोर्ट में खुलासा: बैंकिंग सेक्टर की सेहत बेहतर, बढ़ती मांग दे रही मजबूती

    रिपोर्ट में खुलासा: बैंकिंग सेक्टर की सेहत बेहतर, बढ़ती मांग दे रही मजबूती


    नई दिल्ली। भारत का बैंकिंग सेक्टर फिलहाल मजबूत स्थिति में बना हुआ है। FICCI और Indian Banks’ Association (आईबीए) के ताजा सर्वेक्षण के मुताबिक, एसेट क्वालिटी में सुधार, मजबूत कैपिटल बेस और रिटेल व एसएमई सेक्टर में बढ़ती क्रेडिट मांग बैंकिंग सेक्टर को मजबूती दे रही है।

    क्रेडिट मांग और बैलेंस शीट से मिला सपोर्ट

    रिपोर्ट के अनुसार, बैंकों की बैलेंस शीट पहले से ज्यादा मजबूत हुई है और अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों में स्थिर गतिविधियों के चलते लोन की मांग बनी हुई है। खासकर नॉन-फूड क्रेडिट में लगातार वृद्धि की उम्मीद जताई गई है, जो सेक्टर के लिए सकारात्मक संकेत है।

    मौद्रिक नीति में स्थिरता की उम्मीद

    सर्वे में शामिल विशेषज्ञों का मानना है कि निकट भविष्य में मौद्रिक नीति में बड़ा बदलाव नहीं होगा। मौजूदा नीति ढांचा विकास और महंगाई के बीच संतुलन बनाए रखने के लिहाज से उपयुक्त माना जा रहा है। हालांकि, सहकारी बैंकों के कुछ प्रतिभागियों ने 25 बेसिस पॉइंट की ब्याज दर बढ़ोतरी की संभावना जताई है।

    पीएसबी ज्यादा आशावादी, निजी बैंक सतर्क

    रिपोर्ट के मुताबिक, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक (पीएसबी) भविष्य को लेकर ज्यादा आशावादी हैं। बेहतर एसेट क्वालिटी और मजबूत पूंजी स्थिति के चलते वे कॉरपोरेट लोन में बढ़ती मांग देख रहे हैं।
    वहीं निजी बैंक क्रेडिट ग्रोथ को लेकर संतुलित और चयनात्मक रुख अपना रहे हैं, जबकि विदेशी बैंक कॉरपोरेट और संस्थागत निवेश पर फोकस रखते हुए मध्यम स्तर का आशावाद दिखा रहे हैं।

    रिटेल और एसएमई सेक्टर बने ग्रोथ इंजन

    सेवा और रिटेल सेक्टर से लोन की मांग बैंकिंग ग्रोथ का प्रमुख आधार बनी हुई है। रियल एस्टेट, लॉजिस्टिक्स, वित्तीय सेवाएं और पर्यटन जैसे क्षेत्रों में गतिविधियां बढ़ने से क्रेडिट डिमांड को बल मिल रहा है।
    साथ ही, एमएसएमई सेक्टर में भी लोन की मांग मजबूत रहने की उम्मीद है, जो छोटे व्यवसायों में बढ़ती गतिविधियों और नीतिगत समर्थन का संकेत है।

    क्रेडिट ग्रोथ का अनुमान 11–13%

    सर्वे में करीब 46% प्रतिभागियों का मानना है कि नॉन-फूड क्रेडिट ग्रोथ 11% से 13% के बीच रह सकती है। रिटेल लोन भी मजबूत बना रहेगा, जो बैंकिंग सेक्टर के विस्तार में अहम भूमिका निभाएगा।

    साइबर सुरक्षा बनी सबसे बड़ी चुनौती

    रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि बैंकों के सामने साइबर सुरक्षा जोखिम सबसे बड़ी चुनौती के रूप में उभरा है। डिजिटल बैंकिंग के बढ़ते दायरे के साथ इस जोखिम को गंभीरता से लेने की जरूरत बताई गई है।

    कुल मिलाकर, मजबूत एसेट क्वालिटी, बढ़ती क्रेडिट मांग और स्थिर आर्थिक माहौल के चलते भारत का बैंकिंग सेक्टर सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रहा है, हालांकि साइबर सुरक्षा जैसे जोखिमों पर नजर बनाए रखना जरूरी होगा।

  • भारत-दक्षिण कोरिया रिश्तों को मिलेगी नई रफ्तार, राष्ट्रपति पहुंचे दिल्ली

    भारत-दक्षिण कोरिया रिश्तों को मिलेगी नई रफ्तार, राष्ट्रपति पहुंचे दिल्ली


    नई दिल्ली। दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति Lee Jae-myung रविवार को भारत के लिए रवाना हो गए हैं। यह दौरा भारत और वियतनाम दो प्रमुख एशियाई अर्थव्यवस्थाओं के साथ रणनीतिक सहयोग को मजबूत करने के उद्देश्य से किया जा रहा है। राष्ट्रपति ली आज नई दिल्ली पहुंचेंगे।

    सोमवार को Narendra Modi के साथ शिखर वार्ता

    राष्ट्रपति ली सोमवार को भारत के प्रधानमंत्री Narendra Modi के साथ द्विपक्षीय शिखर वार्ता करेंगे। दोनों नेताओं के बीच यह हाल के वर्षों में तीसरी आमने-सामने की बैठक होगी, जो पहले G7 Summit और G20 Summit के दौरान हुई बातचीत के बाद हो रही है।

    ऊर्जा सप्लाई और सप्लाई चेन पर रहेगा खास ध्यान

    इस बैठक में मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के चलते ग्लोबल एनर्जी मार्केट में आई अनिश्चितता प्रमुख मुद्दा रहेगा। दोनों देश ऊर्जा सप्लाई चेन को स्थिर करने और रणनीतिक सहयोग बढ़ाने पर चर्चा करेंगे। इसके साथ ही शिपबिल्डिंग, मैरीटाइम इंडस्ट्री, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डिफेंस सेक्टर में साझेदारी बढ़ाने पर भी फोकस रहेगा।

    भारत में कोरियाई कंपनियों को मिलेगा बढ़ावा

    राष्ट्रपति ली भारत में कोरियाई कंपनियों के ऑपरेशन को मजबूत करने और नए निवेश के अवसर तलाशने के लिए एक बिजनेस फोरम में भी शामिल हो सकते हैं। भारत को दक्षिण कोरिया की इलेक्ट्रॉनिक्स और ऑटोमोबाइल कंपनियों के लिए एक महत्वपूर्ण प्रोडक्शन हब और बड़ा उपभोक्ता बाजार माना जाता है।

    वियतनाम दौरे पर भी जाएंगे राष्ट्रपति ली

    भारत दौरे के बाद Lee Jae-myung मंगलवार को Hanoi (वियतनाम) के लिए रवाना होंगे। वहां वह To Lam और प्रधानमंत्री Le Minh Hung सहित अन्य शीर्ष नेताओं से मुलाकात करेंगे। इस दौरान ऊर्जा सप्लाई चेन और जरूरी खनिजों पर सहयोग एजेंडे में शीर्ष पर रहेगा।

    रणनीतिक साझेदारी को मिलेगा नया आयाम

    यह दौरा दक्षिण कोरिया की कूटनीतिक पहुंच को मजबूत करने और तेजी से बढ़ती एशियाई अर्थव्यवस्थाओं के साथ संबंधों को गहरा करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।

    भारत और दक्षिण कोरिया के बीच यह शिखर वार्ता न सिर्फ द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करेगी, बल्कि वैश्विक स्तर पर ऊर्जा और सप्लाई चेन से जुड़ी चुनौतियों के समाधान की दिशा में भी महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।

  • ग्लोबल संकेतों से तय होगी बाजार की दिशा, जानें किन फैक्टर्स पर रहेगा फोकस

    ग्लोबल संकेतों से तय होगी बाजार की दिशा, जानें किन फैक्टर्स पर रहेगा फोकस


    नई दिल्ली। भारतीय शेयर बाजार के लिए आने वाला हफ्ता काफी अहम रहने वाला है। खासकर US–Iran peace talks पर निवेशकों की नजरें टिकी रहेंगी। दोनों देशों के बीच जारी दो हफ्तों का युद्धविराम खत्म होने जा रहा है, ऐसे में किसी भी तरह का घटनाक्रम ग्लोबल मार्केट और तेल की कीमतों को प्रभावित कर सकता है।

    कच्चे तेल में उतार-चढ़ाव से बढ़ेगी चिंता

    Strait of Hormuz के बार-बार बंद होने की खबरों से कच्चे तेल की सप्लाई पर असर पड़ सकता है। इसका सीधा प्रभाव भारत जैसे आयात-निर्भर देशों पर पड़ेगा, जिससे महंगाई और बाजार की चाल दोनों प्रभावित हो सकती हैं।

    तिमाही नतीजों से बनेगा सेंटीमेंट

    अगले हफ्ते कई बड़ी कंपनियां अपने तिमाही नतीजे पेश करेंगी, जिनमें Infosys, HCLTech, Nestlé India, SBI Life Insurance और Adani Green Energy शामिल हैं। इन कंपनियों के प्रदर्शन से बाजार की दिशा तय होने में मदद मिलेगी।

    घरेलू आर्थिक आंकड़े भी रहेंगे अहम

    भारतीय बाजार के लिए घरेलू डेटा भी काफी महत्वपूर्ण रहेगा।

    20 अप्रैल: इन्फ्रास्ट्रक्चर आउटपुट
    22 अप्रैल: Reserve Bank of India की मौद्रिक नीति के मिनट्स
    23 अप्रैल: पीएमआई (PMI) डेटा

    ये आंकड़े आर्थिक गतिविधियों की गति और भविष्य की दिशा का संकेत देंगे।

    बीते हफ्ते बाजार में रही तेजी

    पिछला सप्ताह शेयर बाजार के लिए सकारात्मक रहा।

    BSE Sensex 943.29 अंक (1.22%) बढ़कर 78,493.54 पर बंद हुआ
    Nifty 50 302.95 अंक (1.26%) चढ़कर 24,353.55 पर बंद हुआ

    वहीं मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स में भी जोरदार तेजी देखने को मिली, जिससे निवेशकों का भरोसा मजबूत हुआ।

    सेक्टर परफॉर्मेंस: डिफेंस और एनर्जी सबसे आगे

    बीते हफ्ते सेक्टोरल इंडेक्स में शानदार बढ़त देखने को मिली।

    निफ्टी इंडिया डिफेंस टॉप गेनर रहा
    इसके बाद एनर्जी, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, मेटल और पीएसई सेक्टर में तेजी दर्ज की गई

    यह संकेत देता है कि बाजार में व्यापक खरीदारी का माहौल बना हुआ है।

    अगले हफ्ते बाजार की दिशा ग्लोबल घटनाओं, खासकर अमेरिका-ईरान वार्ता, कच्चे तेल की कीमतों और तिमाही नतीजों पर निर्भर करेगी। साथ ही घरेलू आर्थिक आंकड़े भी निवेशकों के फैसलों को प्रभावित करेंगे।

  • Indian Oil ने लॉन्च किया इंडोर सोलर कुकिंग सिस्टम…. गैस-बिजली के बगैर बनेगा खाना

    Indian Oil ने लॉन्च किया इंडोर सोलर कुकिंग सिस्टम…. गैस-बिजली के बगैर बनेगा खाना


    नई दिल्ली।
    बढ़ती एलपीजी कीमतें (Rising LPG prices) और कई जगहों पर सप्लाई की दिक्कतों ने आम लोगों की परेशानी बढ़ा दी है। हर महीने महंगा होता सिलेंडर (Cylinder Expensive) अब घर के बजट पर भारी पड़ रहा है। ऐसे समय में लोग ऐसे ऑप्शन तलाश रहे हैं जो सस्ते हों, भरोसेमंद हों और लंबे समय तक राहत दे सकें। Indian Oil ने एक ऐसा समाधान पेश किया है जो LPG संकट के बीच बड़ा समाधान बनकर सामने आया है। कंपनी ने ‘Surya Nutan’ नाम का इंडोर सोलर कुकिंग सिस्टम (Solar Cooking System ) लॉन्च किया है, जिस पर बिना LPG, PNG गैस और यहां तक कि बिना बिजली के भी खाना बनाया जा सकता है। यह सिस्टम सूरज की रोशनी से चलता है। खास बात यह है कि एक बार लगाने के बाद यह लंबे समय तक आपका खर्च कम कर सकता है। अगर आप इस कुकिंग सिस्‍टम को बुकिंग कराना चाहते हैं तो यहां हम आपको इसे बुक करने का प्रोसेस कीमत आगे बता रहे हैं।


    ‘Surya Nutan’ सोलर कुकिंग सिस्टम क्या है?

    ‘Surya Nutan’ एक इंडोर सोलर कुकिंग सिस्टम है जिसे घर के अंदर इस्तेमाल के लिए डिजाइन किया गया है। इसमें आपको चूल्हा बाहर धूप में रखने की जरूरत नहीं होती। यह सिस्टम पूरी तरह से किचन से जुड़ा रहता है और सोलर एनर्जी का इस्तेमाल करके खाना बनाता है। इसे Indian Oil Corporation के रिसर्च एंड डेवलपमेंट सेंटर ने तैयार किया है, जिससे साफ है कि यह एक मेड-इन-इंडिया टेक्नोलॉजी है।


    ऐसे काम करता है यह सोलर चूल्हा

    इस सिस्टम में घर की छत पर सोलर पैनल लगाए जाते हैं, जो सूरज की रोशनी को एनर्जी में बदलते हैं। यह एनर्जी एक केबल के जरिए सीधे किचन में लगे कुकटॉप तक पहुंचती है। खास बात यह है कि इसमें “हाइब्रिड सिस्टम” दिया गया है, यानी यह सोलर के साथ-साथ जरूरत पड़ने पर दूसरी एनर्जी से भी चल सकता है। इसका मतलब यह है कि अगर धूप नहीं है या बारिश हो रही है, तब भी आप बिना परेशानी खाना बना सकते हैं।


    Surya Nutan की कीमत

    इस सोलर कुकिंग सिस्टम को तीन अलग-अलग मॉडल्स में पेश किया है, ताकि लोग अपनी जरूरत और बजट के हिसाब से चुन सकें। इसकी शुरुआती कीमत करीब 12,000 रुपये रखी गई है, जबकि इसका टॉप या प्रीमियम मॉडल लगभग 23,000 रुपये तक जाता है। खास बात यह है कि प्रीमियम वेरिएंट इतना पावरफुल है कि यह एक आम 4 लोगों के परिवार के पूरे दिन का खाना आराम से बना सकता है।


    ऐसे करें सोलर चूल्हे के लिए अप्लाई

    अगर आप इस सोलर कुकिंग सिस्टम को खरीदने की सोच रहे हैं, तो इसकी प्री-बुकिंग ऑनलाइन की जा रही है। इसके लिए आपको Indian Oil Corporation की अधिकारिक वेबसाइट पर जाकर अपना नाम, ईमेल और परिवार में कितने लोग हैं जैसी जरूरी जानकारी भरनी होगी। इसके अलावा, आपको अपनी जरूरत के हिसाब से सिंगल या डबल बर्नर का ऑप्शन भी चुनना होगा। सारी डिटेल भरने के बाद फॉर्म सबमिट करना होता है, जिसके जरिए आपकी प्री-बुकिंग दर्ज हो जाती है।


    हर मौसम में करेगा काम

    लोगों को अक्सर लगता है कि सोलर कुकिंग सिर्फ धूप में ही काम करती है, लेकिन ‘Surya Nutan’ के साथ ऐसा नहीं है। यह सिस्टम ऐसी टेक्नोलॉजी के साथ आता है जो कम धूप या बारिश के समय भी काम कर सकता है। यानी आपको मौसम की चिंता करने की जरूरत नहीं है।

  • अक्षय तृतीया पर चमके-सोना चांदी….., जानिए पिछले 10 सालों में कितनी बढ़ी कीमतें ?

    अक्षय तृतीया पर चमके-सोना चांदी….., जानिए पिछले 10 सालों में कितनी बढ़ी कीमतें ?


    नई दिल्ली।
    अक्षय तृतीया 2026 (Akshaya Tritiya 2026) का त्योहार कल यानी 19 अप्रैल को है। 10 साल पहले यानी 2016 में अक्षय तृतीया के समय पर 10 ग्राम गोल्ड की कीमत (Gold Price) 30,100 रुपये थी। इंडियन बुलियंस ज्वैलर्स एसोसिएशन की रिपोर्ट के अनुसार कल यानी शुक्रवार को 24 कैरेट गोल्ड का रेट 151358 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर बना हुआ है। यानी अगर किसी निवेशक ने 2026 में अक्षय तृतीया के समय पर 10,000 रुपये का निवेश किया होगा उसका इनवेस्टमेंट बढ़कर 45000 रुपये हो गया होगा। निवेशकों का तगड़ा फायदा हुआ है। बता दें, 10 साल में सोने का रेट 400 प्रतिशत बढ़ा है।


    चांदी के रेट में पिछले 10 साल में तेज इजाफा (Silver price histroy)

    2016 में अक्षय तृतीया के त्योहार के समय पर 1 किलोग्राम चांदी का रेट 41200 रुपये था। जोकि शुक्रवार यानी 17 अप्रैल की शाम को 247930 रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर पर पहुंच गया। यानी 10 साल में चांदी की कीमतों में 2,06,730 रुपये बढ़ोतरी देखने को मिली है।

    पिछले एक साल में 50% बढ़ा सोने का रेट (Gold price surged 50 percent in one year)
    2025 में अक्षय तृतीया के समय पर गोल्ड का रेट 95500 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर था। जोकि अब 151000 रुपये के लेवल पर पहुंच गया है। यानी बीते साल अक्षय तृतीया की तुलना में इस बार सोने का रेट 50% से अधिक बढ़ चुका है।


    आज क्या है 24 से 14 कैरेट गोल्ड का रेट (Gold Price Today)

    इंडियन बुलियंस ज्वैलर्स एसोसिएशन की रिपोर्ट के अनुसार 24 कैरेट गोल्ड का रेट शुक्रवार यानी 17 अप्रैल की शाम को 151358 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर पहुंच गया है। वहीं, 23 कैरेट गोल्ड का रेट 150752 रुपये प्रति 10 ग्राम, 22 कैरेट गोल्ड का रेट 138644 रुपये, 18 कैरेट गोल्ड का रेट 113519 रुपये और 14 कैरेट गोल्ड का रेट 88544 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर है।

    इससे पहले 16 अप्रैल को गोल्ड का रेट 153305 रुपये प्रति 10 ग्राम था। यानी महज दो दिन में गोल्ड की कीमतों में करीब 2000 रुपये की गिरावट देखने को मिली है। बता दें, अप्रैल के महीने में गोल्ड का रेट लगभग स्थिर ही बना हुआ है।


    रिकॉर्ड हाई से क्यों गिरा गोल्ड का रेट? (Why Gold get cheaper)

    इसी साल एक समय पर गोल्ड का रेट 175000 रुपये को पार कर गया था। लेकिन वहां से गोल्ड की कीमतों में भारी गिरावट देखने को मिली। इसके पीछे की वजह डॉलर का मजबूत होना माना जा रहा है। वहीं, निवेशकों की तरफ से मुनाफावसूली भी जमकर देखने को मिली है।

  • एचडीएफसी बैंक का चौथी तिमाही में मजबूत वित्तीय प्रदर्शन मुनाफे में 9 प्रतिशत की बढ़त से निवेशकों में बढ़ा भरोसा और डिविडेंड की घोषणा से शेयरधारकों में उत्साह

    एचडीएफसी बैंक का चौथी तिमाही में मजबूत वित्तीय प्रदर्शन मुनाफे में 9 प्रतिशत की बढ़त से निवेशकों में बढ़ा भरोसा और डिविडेंड की घोषणा से शेयरधारकों में उत्साह

    नई दिल्ली :देश के प्रमुख निजी बैंकों में शामिल एचडीएफसी बैंक ने वित्त वर्ष 2025 26 की चौथी तिमाही में मजबूत प्रदर्शन करते हुए बाजार में सकारात्मक संकेत दिए हैं। बैंक ने इस अवधि में शुद्ध मुनाफे में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की है जिससे इसकी वित्तीय मजबूती और संचालन क्षमता एक बार फिर सामने आई है। लगातार बदलते आर्थिक माहौल के बीच बैंक का यह प्रदर्शन निवेशकों के लिए भरोसे का संकेत माना जा रहा है।

    ताजा आंकड़ों के अनुसार बैंक का शुद्ध मुनाफा लगभग 9 प्रतिशत बढ़कर 19221 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है जो पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में बेहतर परिणाम है। इस वृद्धि के साथ बैंक ने अपने निवेशकों के लिए डिविडेंड की घोषणा भी की है जिससे शेयरधारकों को अतिरिक्त लाभ मिलने की उम्मीद है। यह कदम निवेशकों के बीच सकारात्मक भावना को और मजबूत करता है।

    राजस्व के स्तर पर भी बैंक ने स्थिर वृद्धि दर्ज की है। कुल शुद्ध आय में बढ़ोतरी देखने को मिली है जबकि शुद्ध ब्याज आय में भी सुधार हुआ है। यह दर्शाता है कि बैंक की ऋण वितरण क्षमता और ब्याज से होने वाली कमाई दोनों ही मजबूत स्थिति में बनी हुई हैं। वित्तीय विशेषज्ञों का मानना है कि यह प्रदर्शन बैंक की स्थिर रणनीति और मजबूत ग्राहक आधार का परिणाम है।

    इस तिमाही में बैंक की परिसंपत्ति गुणवत्ता में भी सुधार देखने को मिला है। गैर निष्पादित परिसंपत्तियों में कमी दर्ज की गई है जिससे यह संकेत मिलता है कि बैंक का ऋण पोर्टफोलियो पहले की तुलना में अधिक सुरक्षित और स्थिर हो गया है। यह स्थिति बैंक की जोखिम प्रबंधन प्रणाली की मजबूती को दर्शाती है और भविष्य के लिए सकारात्मक संकेत देती है।

    बैंक की पूंजी स्थिति भी मजबूत बनी हुई है। पूंजी पर्याप्तता अनुपात नियामक आवश्यकताओं से काफी अधिक है जिससे यह स्पष्ट होता है कि बैंक के पास वित्तीय स्थिरता बनाए रखने के लिए पर्याप्त संसाधन मौजूद हैं। यह स्थिति बैंक को भविष्य में विस्तार और निवेश के अवसरों के लिए सक्षम बनाती है।

    जमा राशि और बचत खातों में भी वृद्धि दर्ज की गई है जिससे बैंक की फंडिंग क्षमता मजबूत हुई है। ग्राहक आधार में लगातार बढ़ोतरी और शाखा नेटवर्क के विस्तार ने बैंक की पहुंच को और व्यापक बनाया है। इससे यह संकेत मिलता है कि बैंक अपनी सेवाओं को अधिक ग्राहकों तक पहुंचाने में सफल हो रहा है।

    शेयर बाजार में भी इस परिणाम का सकारात्मक प्रभाव देखने को मिला है जहां बैंक के शेयरों में हल्की तेजी दर्ज की गई। निवेशकों का भरोसा मजबूत वित्तीय परिणामों और डिविडेंड की घोषणा के बाद और बढ़ा है। कुल मिलाकर यह तिमाही परिणाम बैंक की स्थिर वृद्धि मजबूत वित्तीय स्थिति और भविष्य की सकारात्मक संभावनाओं को दर्शाते हैं।