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  • EPFO अपडेट: नया फॉर्म 121 से टैक्स प्रक्रिया में बड़ा बदलाव

    EPFO अपडेट: नया फॉर्म 121 से टैक्स प्रक्रिया में बड़ा बदलाव


    नई दिल्ली।  Employees’ Provident Fund Organisation (EPFO) ने PF खाताधारकों के लिए बड़ा बदलाव (EPFO New Rule) करते हुए नया Form 121 लागू किया है। यह फॉर्म पहले इस्तेमाल होने वाले Form 15G और Form 15H की जगह लेगा। यह नियम 1 अप्रैल 2026 से लागू हो चुका है और इसका मकसद टैक्स से जुड़े नियमों को आसान बनाना है।

    अब EPF सदस्य एक ही फॉर्म के जरिए यह घोषित कर सकते हैं कि उनकी कुल आय टैक्स के दायरे में नहीं आती, जिससे उनके PF पर TDS (टैक्स कटौती) नहीं लगेगा। पहले अलग-अलग उम्र के हिसाब से 15G और 15H भरना पड़ता था, लेकिन अब यह प्रक्रिया आसान कर दी गई है।

    क्या है Form 121 और किसे भरना जरूरी है?
    Form 121 एक यूनिफाइड डिक्लेरेशन फॉर्म है, जिसे वह व्यक्ति भर सकता है जिसकी कुल टैक्स देनदारी शून्य (Nil) है। यानी अगर आपकी सालाना आय टैक्स लिमिट से कम है, तो आप यह फॉर्म भरकर TDS कटने से बच सकते हैं।

    यह फॉर्म खासतौर पर PF निकासी, बैंक ब्याज, डिविडेंड और अन्य इनकम पर लागू होता है। हालांकि, यह सभी के लिए अनिवार्य नहीं है सिर्फ वही लोग इसे भरेंगे जिन्हें TDS से बचना है।

    EPFO New Rule में क्या बदला?
    EPFO ने Form 121 के साथ कुछ नए नियम भी लागू किए हैं। अब हर फॉर्म को एक यूनिक आइडेंटिफिकेशन नंबर (UIN) दिया जाएगा, जिससे इसकी ट्रैकिंग आसान होगी। इसके अलावा, यह डेटा नियमित रूप से इनकम टैक्स विभाग को भेजा जाएगा।

    फॉर्म भरते समय अब पिछले दो साल के ITR की जानकारी देना भी जरूरी हो सकता है, जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि व्यक्ति वास्तव में टैक्स छूट के योग्य है।

    इसके अलावा EPFO डिजिटल सिस्टम भी तैयार कर रहा है, जिससे भविष्य में यह फॉर्म ऑनलाइन भरना और आसान हो जाएगा।

    कुल मिलाकर, Form 121 का उद्देश्य PF सदस्यों के लिए टैक्स प्रक्रिया को सरल बनाना और पारदर्शिता बढ़ाना है। अब एक ही फॉर्म के जरिए TDS से बचना आसान होगा, लेकिन सही जानकारी देना बेहद जरूरी है।

  • इकोनॉमी को राहत: एक्सपोर्ट बढ़ा, ट्रेड डेफिसिट 20.67 अरब डॉलर पर आया

    इकोनॉमी को राहत: एक्सपोर्ट बढ़ा, ट्रेड डेफिसिट 20.67 अरब डॉलर पर आया


    नई दिल्ली। वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारत के विदेशी व्यापार से राहत भरी खबर सामने आई है। मार्च 2026 में देश का व्यापारिक निर्यात 6.3% बढ़कर 38.92 अरब डॉलर पहुंच गया, जबकि व्यापार घाटा घटकर 20.67 अरब डॉलर रह गया। यह जानकारी Ministry of Commerce and Industry की ओर से जारी आंकड़ों में सामने आई है।

     निर्यात में मजबूती, सालाना प्रदर्शन भी बेहतर
    वाणिज्य सचिव Rajesh Agrawal के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का कुल निर्यात 860.09 अरब डॉलर से ज्यादा रहा। यह पिछले वित्त वर्ष (825.26 अरब डॉलर) की तुलना में 4.22% की बढ़त दर्शाता है।
    यह आंकड़े बताते हैं कि वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारत का निर्यात सेक्टर मजबूती से आगे बढ़ रहा है।

    आयात में गिरावट से घाटा कम
    मार्च में आयात 5.98% घटकर 59.9 अरब डॉलर रह गया। आयात में कमी आने से व्यापार घाटा घटा, जिससे देश की अर्थव्यवस्था को राहत मिली।
    विशेषज्ञों का मानना है कि आयात में कमी का एक बड़ा कारण कच्चे तेल की रणनीतिक खरीद में बदलाव रहा है।

    तेल रणनीति ने दिलाई राहत
    वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के पार जाने के बाद भारतीय कंपनियों ने बड़े पैमाने पर आयात करने के बजाय अपने भंडार का उपयोग किया। इससे तेल आयात बिल कम हुआ और व्यापार घाटे पर सकारात्मक असर पड़ा।

     वैश्विक तनाव के बीच आया डेटा
    यह आंकड़े ऐसे समय पर सामने आए हैं, जब Iran और United States के बीच बढ़ते तनाव ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को प्रभावित किया है।
    होर्मुज जलडमरूमध्य, जहां से दुनिया के करीब 20% तेल-गैस का व्यापार होता है, वहां तनाव के कारण सप्लाई चेन पर असर पड़ा है।

     भारत को मिली राहत: LPG सप्लाई जारी
    तनाव के बावजूद भारत के लिए राहत की खबर यह रही कि ईरान ने कुछ भारतीय जहाजों को सुरक्षित मार्ग दिया।

    ‘जग विक्रम’ नामक पोत 20,400 मीट्रिक टन LPG लेकर Kandla Port पहुंचा

    ‘ग्रीन आशा’ जहाज 15,400 टन LPG के साथ Jawaharlal Nehru Port पहुंचा

    इससे देश में रसोई गैस की आपूर्ति बनाए रखने में मदद मिली।

     क्या है इसका व्यापक असर?

    निर्यात बढ़ने से विदेशी मुद्रा भंडार मजबूत होगा
    आयात घटने से व्यापार घाटा नियंत्रित रहेगा
    वैश्विक संकट के बीच भारत की आर्थिक स्थिरता मजबूत दिखती है

  • दिल्ली EV पॉलिसी ड्राफ्ट से बढ़ेगी इलेक्ट्रिक वाहनों की रफ्तार, बिक्री में उछाल के आसार

    दिल्ली EV पॉलिसी ड्राफ्ट से बढ़ेगी इलेक्ट्रिक वाहनों की रफ्तार, बिक्री में उछाल के आसार


    नई दिल्ली। देश की राजधानी Delhi में इलेक्ट्रिक वाहनों को लेकर बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। नई EV पॉलिसी (2024-2030) का ड्राफ्ट सामने आने के बाद यह संकेत मिल रहे हैं कि आने वाले समय में इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री में जबरदस्त उछाल आ सकता है। करीब 40,000 करोड़ रुपए के प्रावधान वाली इस नीति का मकसद न सिर्फ प्रदूषण कम करना है, बल्कि आम लोगों को इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की ओर तेजी से आकर्षित करना भी है।

     शुरुआती झटका, फिर तेज रफ्तार पकड़ सकता है बाजार
    Axis Direct की रिपोर्ट के अनुसार, फिलहाल इस पॉलिसी को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। ऐसे में कई खरीदार नई नीति के लागू होने का इंतजार करते हुए अपनी EV खरीद को कुछ समय के लिए टाल सकते हैं। हालांकि, जैसे ही नीति लागू होगी, तब तक जमा हुई मांग (pent-up demand) और स्पष्ट प्रोत्साहनों के कारण बाजार में तेजी से उछाल देखने को मिल सकता है।

     कब से क्या बदलेगा? बड़े फैसलों की टाइमलाइन
    इस ड्राफ्ट पॉलिसी में इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए सख्त नियम तय किए गए हैं-

    जनवरी 2027 से सिर्फ इलेक्ट्रिक तिपहिया वाहनों का ही रजिस्ट्रेशन होगा

    अप्रैल 2028 से दिल्ली में केवल इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों का पंजीकरण किया जाएगा

    यह कदम राजधानी को पूरी तरह इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की ओर ले जाने का बड़ा प्रयास माना जा रहा है।

     प्रोत्साहन और स्क्रैपेज से मिलेगा बूस्ट
    नीति में शुरुआती वर्षों में ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए सब्सिडी और प्रोत्साहन दिए जाएंगे।

    पहले साल: ₹10,000 प्रति kWh (अधिकतम ₹30,000)
    दूसरे साल: ₹6,600
    तीसरे साल: ₹3,300

    इसके अलावा, पुराने वाहनों को हटाने (स्क्रैपेज) पर भी लाभ मिलेगा। हालांकि, यात्री वाहनों पर सीधी सब्सिडी खत्म कर दी गई है और कर छूट व अन्य लाभों पर जोर दिया गया है।

     कंपनियों के लिए बड़ा मौका
    रिपोर्ट के मुताबिक, वे कंपनियां जो पहले से EV सेगमेंट में निवेश कर चुकी हैं और जिनके पास मजबूत प्रोडक्ट पोर्टफोलियो है, उन्हें इस नीति से सबसे ज्यादा फायदा होगा।
    दोपहिया और तिपहिया सेगमेंट में पहले से मजबूत पकड़ रखने वाली कंपनियां अपनी हिस्सेदारी बढ़ा सकती हैं, जबकि नई कंपनियां भी इस बाजार में तेजी से निवेश बढ़ा रही हैं।

    हाइब्रिड वाहनों को भी मिला सहारा
    नीति में हाइब्रिड वाहनों को भी नजरअंदाज नहीं किया गया है। 30 लाख रुपए से कम कीमत वाले मजबूत हाइब्रिड वाहनों पर 50% तक रोड टैक्स छूट दी जाएगी, जिससे ट्रांजिशन को आसान बनाया जा सके।

     प्रदूषण कम करने की दिशा में बड़ा कदम
    दिल्ली लंबे समय से प्रदूषण की समस्या से जूझ रही है। ऐसे में यह EV पॉलिसी न सिर्फ परिवहन को स्वच्छ बनाएगी, बल्कि आने वाले वर्षों में शहर के पर्यावरण पर भी सकारात्मक असर डालेगी।

     कुल मिलाकर क्या होगा असर?
    यह नीति लागू होने के बाद

    EV की मांग में तेज उछाल आएगा
    बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी
    ग्राहकों को बेहतर विकल्प मिलेंगे
    प्रदूषण में कमी आएगी

  • ईंधन कीमतों पर लगाम की तैयारी, सरकार ला सकती है प्राइस स्टेबिलाइजेशन मैकेनिज्म

    ईंधन कीमतों पर लगाम की तैयारी, सरकार ला सकती है प्राइस स्टेबिलाइजेशन मैकेनिज्म


    नई दिल्ली। वैश्विक बाजार में बढ़ती अनिश्चितता और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बीच केंद्र सरकार अब एक बड़े कदम की तैयारी में है। पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की कीमतों में अचानक बढ़ोतरी से आम लोगों को राहत देने के लिए सरकार ‘ईंधन मूल्य स्थिरीकरण तंत्र’ (Fuel Price Stabilization Mechanism) पर गंभीरता से विचार कर रही है।

     क्यों उठी इस तंत्र की जरूरत?
    पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनावों के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हो रही है। इसका सीधा असर भारत जैसे आयात-निर्भर देशों पर पड़ता है। कच्चे तेल की कीमत बढ़ते ही घरेलू बाजार में ईंधन महंगा हो जाता है, जिससे महंगाई और बढ़ती है।
    इसी समस्या से निपटने के लिए Government of India एक ऐसा तंत्र तैयार कर रही है, जो कीमतों में अचानक उछाल को नियंत्रित कर सके।

    कैसे काम करेगा यह तंत्र?
    रिपोर्ट के अनुसार, प्रस्तावित व्यवस्था एक “बफर फंड” या रिजर्व सिस्टम पर आधारित होगी। जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें तेजी से बढ़ेंगी, तब इस फंड के जरिए हस्तक्षेप कर उपभोक्ताओं पर सीधा बोझ कम किया जाएगा।
    यह मॉडल कुछ हद तक कृषि उत्पादों के मूल्य स्थिरीकरण तंत्र जैसा होगा, जहां जरूरत पड़ने पर बफर स्टॉक बाजार में उतारा जाता है।

    पेट्रोल-डीजल और LPG होंगे शामिल
    इस प्रस्तावित योजना में पेट्रोल, डीजल और एलपीजी तीनों ईंधनों को शामिल किया जाएगा। इसके लिए एक अलग “ईंधन बफर फंड” बनाने की तैयारी है, जिससे कीमतों के तेज उतार-चढ़ाव को संतुलित किया जा सके।

     रणनीतिक भंडार से अलग होगा यह सिस्टम
    यह तंत्र भारत के मौजूदा रणनीतिक कच्चे तेल भंडार से अलग होगा। जहां रणनीतिक भंडार का मकसद आपूर्ति सुनिश्चित करना है, वहीं यह नया सिस्टम कीमतों को स्थिर रखने पर फोकस करेगा।

     कब होगा हस्तक्षेप? तय होंगे खास मानदंड
    सरकार इस बात पर भी काम कर रही है कि कब और कैसे हस्तक्षेप किया जाए। इसके लिए कुछ तय सीमाएं (थ्रेशहोल्ड) बनाई जा सकती हैं, जैस

    कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमत

    वैश्विक बाजार में अस्थिरता का स्तर
    जब ये सीमाएं पार होंगी, तब सरकार बफर फंड का इस्तेमाल कर कीमतों को काबू में रखने की कोशिश करेगी।

     स्थायी सब्सिडी नहीं, सिर्फ अस्थायी राहत
    सरकार का मकसद स्थायी सब्सिडी देना नहीं है, बल्कि सिर्फ अत्यधिक उतार-चढ़ाव के समय अस्थायी राहत देना है। जब हालात सामान्य हो जाएंगे, तब बफर को फिर से भर दिया जाएगा।

     आम लोगों को क्या फायदा?
    इस तंत्र के लागू होने से
    पेट्रोल-डीजल के अचानक महंगे होने का झटका कम लगेगा
    महंगाई पर नियंत्रण रखने में मदद मिलेगी
    घरेलू बजट पर दबाव घटेगा

  • रेल नेटवर्क का विस्तार: 741 करोड़ यात्रियों का आंकड़ा पार, इलेक्ट्रिफिकेशन में बड़ी उपलब्धि

    रेल नेटवर्क का विस्तार: 741 करोड़ यात्रियों का आंकड़ा पार, इलेक्ट्रिफिकेशन में बड़ी उपलब्धि


    नई दिल्ली। देश की लाइफलाइन मानी जाने वाली Indian Railways ने वित्त वर्ष 2025-26 में रिकॉर्ड उपलब्धियां हासिल की हैं। इस दौरान करीब 741 करोड़ यात्रियों ने ट्रेन से सफर किया, जो रेलवे की बढ़ती पहुंच और भरोसे को दर्शाता है। वहीं, ब्रॉड गेज नेटवर्क का 99.6% हिस्सा अब विद्युतीकृत हो चुका है, जिससे परिचालन और भी तेज, सस्ता और पर्यावरण के अनुकूल बन गया है।

     आय और माल ढुलाई में भी जबरदस्त बढ़ोतरी

    सरकारी आंकड़ों के अनुसार, रेलवे की कुल आय बढ़कर लगभग ₹80,000 करोड़ तक पहुंच गई है। वहीं माल ढुलाई भी बढ़कर 1,670 मिलियन टन (MT) हो गई है, जो देश की अर्थव्यवस्था में रेलवे की अहम भूमिका को मजबूत करता है।

    विद्युतीकरण में ऐतिहासिक छलांग

    2014 तक जहां सिर्फ 20% रेलवे नेटवर्क ही विद्युतीकृत था, वहीं मार्च 2026 तक यह बढ़कर 69,873 रूट किलोमीटर (RKM) हो गया है। यह कुल नेटवर्क का 99.6% हिस्सा है। इस उपलब्धि ने भारत को विद्युतीकरण के मामले में United Kingdom (39%), Russia (52%) और China (82%) जैसे देशों से भी आगे पहुंचा दिया है।

     डीजल की बचत, पर्यावरण को राहत

    रेलवे विद्युतीकरण के चलते 2024-25 में करीब 180 करोड़ लीटर डीजल की बचत हुई, जिससे लगभग ₹6,000 करोड़ की लागत बची। साथ ही कच्चे तेल के आयात में कमी आई, जो देश के लिए बड़ी आर्थिक राहत है।

    सुरक्षा में तकनीकी मजबूती

    रेलवे ने सुरक्षा के क्षेत्र में भी बड़े कदम उठाए हैं। ‘कवच’ ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन सिस्टम 3,100 किमी से ज्यादा ट्रैक पर लागू हो चुका है और 24,400 किमी पर काम जारी है। इसके अलावा, 1,874 स्टेशनों पर वीडियो सर्विलांस सिस्टम (VSS) लगाया गया है, जिसमें AI आधारित एनालिसिस और फेस रिकग्निशन तकनीक का उपयोग हो रहा है।

     यात्रियों को बेहतर सुविधा

    1,405 स्टेशनों पर इंटीग्रेटेड पैसेंजर इंफॉर्मेशन सिस्टम (IPIS) लागू किया गया है, जो National Train Enquiry System से जुड़ा है। इससे यात्रियों को समय पर जानकारी और बेहतर कम्युनिकेशन मिल रहा है।

     वंदे भारत और अमृत भारत ट्रेनों का विस्तार

    नई पीढ़ी की Vande Bharat Express ने जबरदस्त लोकप्रियता हासिल की है। वित्त वर्ष 2025-26 में करीब 3.98 करोड़ यात्रियों ने इसमें सफर किया। अब तक यह सेवा 1 लाख ट्रिप में 9.1 करोड़ यात्रियों को ले जा चुकी है। वहीं, किफायती यात्रा के लिए Amrit Bharat Express भी शुरू की गई है, जिसकी 60 सेवाएं नेटवर्क पर चल रही हैं।

     ट्रैक और स्पीड में भी सुधार

    पिछले दशक में 54,600 किमी ट्रैक का नवीनीकरण किया गया है। 110 किमी/घंटा से ज्यादा स्पीड झेलने वाले ट्रैक की लंबाई 31,445 किमी से बढ़कर 85,000 किमी से अधिक हो गई है, जिससे ट्रेनें अब ज्यादा तेज और सुरक्षित हो गई हैं।

  • अनिश्चितता के दौर में गोल्ड ETF बना सुरक्षित विकल्प, AUM पहुंचा 1.7 लाख करोड़

    अनिश्चितता के दौर में गोल्ड ETF बना सुरक्षित विकल्प, AUM पहुंचा 1.7 लाख करोड़


    नई दिल्ली। वैश्विक अस्थिरता और बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच निवेशकों का भरोसा एक बार फिर सोने पर मजबूत होता दिख रहा है। खासतौर पर डिजिटल निवेश के रूप में Gold ETF ने जबरदस्त रफ्तार पकड़ी है। मार्च 2026 में गोल्ड ETF का कुल एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) बढ़कर ₹1,71,468 करोड़ हो गया, जो सालाना आधार पर लगभग तीन गुना उछाल को दर्शाता है।
    पांच साल में धमाकेदार ग्रोथ

    ICRA Analytics की रिपोर्ट के मुताबिक, गोल्ड ETF ने पिछले पांच वर्षों में करीब 64.76% की कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट (CAGR) हासिल की है। मार्च 2021 में जहां AUM सिर्फ ₹14,122 करोड़ था, वहीं अब यह कई गुना बढ़ चुका है।

    सिर्फ एक साल में ही AUM ₹58,887 करोड़ (मार्च 2025) से बढ़कर ₹1.71 लाख करोड़ पहुंच गया—यानी करीब 191% की जोरदार बढ़ोतरी।
     इनफ्लो भी मजबूत, लेकिन मासिक आधार पर गिरावट

    मार्च 2026 में गोल्ड ETF में ₹2,265 करोड़ का शुद्ध निवेश (इनफ्लो) आया, जबकि पिछले साल इसी महीने ₹77 करोड़ की निकासी हुई थी। हालांकि फरवरी 2026 के ₹5,254 करोड़ के मुकाबले मार्च में इनफ्लो करीब 56% घटा है।

    इस गिरावट की वजह सोने की कीमतों में थोड़ी नरमी और वैश्विक जोखिम में अस्थायी कमी मानी जा रही है।
     क्यों बढ़ रहा है गोल्ड ETF में निवेश?

    विशेषज्ञों के अनुसार, दो बड़े कारण इस उछाल के पीछे हैं—
    वैश्विक अनिश्चितता और तनाव
    सोने की लगातार मजबूत कीमतें
    इन हालात में निवेशक सुरक्षित विकल्प की तलाश में रहते हैं और सोना पारंपरिक रूप से “सेफ हेवन” माना जाता है। इसलिए Gold ETF तेजी से लोकप्रिय हो रहा है।
     पोर्टफोलियो डाइवर्सिफिकेशन का पसंदीदा विकल्प

    फिलहाल बाजार में 26 गोल्ड ETF स्कीम उपलब्ध हैं, जिनमें से 6 नई स्कीम वित्त वर्ष 2025-26 में लॉन्च हुई हैं।

    इन फंड्स ने पिछले एक साल में करीब 58% से 62% तक का रिटर्न दिया है, जबकि 5 साल का CAGR रिटर्न लगभग 26% के आसपास रहा है।

    विशेषज्ञ मानते हैं कि गोल्ड ETF निवेश पोर्टफोलियो डाइवर्सिफिकेशन और लॉन्ग टर्म रिटर्न के लिए बेहतर विकल्प है, जबकि फिजिकल गोल्ड अधिकतर पारंपरिक उपयोग के लिए खरीदा जाता है।

     गिरावट के बावजूद भरोसा कायम

    हालांकि हाल के महीनों में इनफ्लो में थोड़ी कमी आई है, लेकिन निवेश पूरी तरह बंद नहीं हुआ है। इससे साफ है कि निवेशकों का भरोसा अब भी इस एसेट क्लास पर कायम है और आगे भी इसमें स्थिर ग्रोथ की संभावना बनी हुई है।

  • वैश्विक संकेतों से शेयर बाजार में तेजी, सेंसेक्स-निफ्टी 1.6% उछले

    वैश्विक संकेतों से शेयर बाजार में तेजी, सेंसेक्स-निफ्टी 1.6% उछले


    नई दिल्ली। वैश्विक बाजारों से मिले सकारात्मक संकेतों और भू-राजनीतिक तनाव कम होने की उम्मीदों के चलते भारतीय शेयर बाजार ने बुधवार को शानदार तेजी दिखाई। कारोबारी सत्र के अंत में BSE Sensex और Nifty 50 दोनों करीब 1.6% की बढ़त के साथ हरे निशान में बंद हुए, जिससे निवेशकों का भरोसा मजबूत होता दिखा।

    दिनभर ऐसा रहा बाजार का हाल
    30 शेयरों वाला सेंसेक्स 1,263.67 अंक (1.63%) चढ़कर 78,111.24 पर बंद हुआ। वहीं निफ्टी 388.65 अंक (1.63%) की तेजी के साथ 24,231.30 के स्तर पर पहुंच गया।
    दिन के दौरान सेंसेक्स 77,981.10 पर खुला और 78,270.42 का हाई छुआ, जबकि निफ्टी ने 24,163.80 से शुरुआत कर 24,280.90 का इंट्रा-डे उच्च स्तर हासिल किया। यह पूरे सत्र में मजबूत खरीदारी का संकेत देता है।

    मिडकैप-स्मॉलकैप में और ज्यादा तेजी
    मुख्य इंडेक्स के साथ-साथ ब्रॉडर मार्केट में भी जबरदस्त उछाल देखने को मिला। निफ्टी मिडकैप 100 में 2.20% और स्मॉलकैप 100 में 2.35% की बढ़त दर्ज की गई। यह दर्शाता है कि निवेशक बड़े शेयरों के साथ-साथ मिड और स्मॉल कंपनियों में भी भरोसा जता रहे हैं।

     हर सेक्टर में खरीदारी, आईटी-रियल्टी में जोरदार उछाल
    बुधवार को लगभग सभी सेक्टोरल इंडेक्स हरे निशान में रहे। आईटी, मेटल, पीएसयू बैंक, मीडिया और रियल्टी सेक्टर में 2% से ज्यादा की तेजी दर्ज की गई। वहीं ऑटो, एफएमसीजी, बैंकिंग और फाइनेंशियल सर्विसेज सेक्टर में भी 1% से अधिक की बढ़त देखने को मिली।

     किन शेयरों ने दिखाई सबसे ज्यादा तेजी
    निफ्टी 50 के ज्यादातर शेयरों में खरीदारी रही। खासतौर पर Wipro, Tata Consultancy Services, Tech Mahindra, Larsen & Toubro और Hindalco Industries जैसे दिग्गज शेयरों में 3% से 4% तक की तेजी दर्ज की गई।
    हालांकि Bharti Airtel, ICICI Bank, Axis Bank और ONGC जैसे कुछ शेयरों में हल्की गिरावट भी देखने को मिली।

    क्यों आई बाजार में तेजी?
    विशेषज्ञों के मुताबिक, United States और Iran के बीच तनाव कम होने और शांति वार्ता दोबारा शुरू होने की उम्मीदों ने बाजार का मूड पॉजिटिव किया। Donald Trump के बयान ने भी निवेशकों का भरोसा बढ़ाया, जिससे बाजार में खरीदारी तेज हुई।

    कच्चे तेल में नरमी, रुपये को मिला सहारा
    कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट (94-95 डॉलर के आसपास) से भारत के आयात बिल पर दबाव कम हुआ है। इससे रुपये को मजबूती मिली और यह करीब 93.50 के स्तर तक पहुंच गया। यह भी बाजार की तेजी का एक बड़ा कारण रहा।

  • ईरान युद्ध से धीमी हुई विश्व की आर्थिक गति… IMF ने घटाया वृद्धि दर का अनुमान.. महंगाई बढ़ने का आशंका

    ईरान युद्ध से धीमी हुई विश्व की आर्थिक गति… IMF ने घटाया वृद्धि दर का अनुमान.. महंगाई बढ़ने का आशंका


    वॉशिंगटन।
    अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष (आईएमएफ) (International Monetary Fund (IMF) ने मंगलवार को कहाकि ईरान युद्ध (Iran War) ने इस वर्ष विश्व की आर्थिक गति (World Economic Dynamics) को धीमा कर दिया है। इसके चलते 2025 की तुलना में वृद्धि दर में गिरावट आने की आशंका है। आईएमएफ ने वैश्विक वृद्धि के अपने अनुमान को घटाकर 2026 के लिए 3.1 फीसदी कर दिया है। इससे पहले जनवरी महीने में इसके 3.3 फीसदी रहने की संभावना जताई गई थी। यह 2025 में अनुमानित 3.4 प्रतिशत वृद्धि से धीमी होगी।

    बढ़ गईं तेल और गैस की कीमतें
    ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हमलों, ईरान के होर्मुज स्ट्रेट को बंद करने और पड़ोसी देशों में तेल रिफाइनरियों और अन्य ऊर्जा बुनियादी ढांचों पर जवाबी हमलों के कारण दुनिया भर में तेल एवं गैस की कीमतों में तेजी आई है। इसके परिणामस्वरूप, आईएमएफ ने इस साल वैश्विक मुद्रास्फीति के अपने अनुमान को बढ़ाकर 4.4 फीसदी कर दिया है, जबकि जनवरी में इसके 3.8 फीसदी रहने का अनुमान लगाया गया था। वहीं 2025 के लिए यह 4.1 फीसदी था।


    युद्ध पहले तक सब सही था

    युद्ध से पहले तक, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की संरक्षणवादी नीतियों के बावजूद विश्व अर्थव्यवस्था ने आश्चर्यजनक रूप से मजबूती दिखाई थी। इन नीतियों ने दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था और कभी आयात के लिए लगभग पूरी तरह से खुला बाजार रहे अमेरिका के चारों ओर आयात कर की दीवार खड़ी कर दी थी। लेकिन इससे नुकसान कम हुआ। इसका एक कारण यह भी था कि पिछले साल ट्रंप द्वारा घोषित शुल्क मूल रूप से कम थे।


    क्या बोले आईएमएफ चीफ

    डेटा केंद्रों और कृत्रिम मेधा में भारी निवेश के साथ प्रौद्योगिकी क्षेत्र में तेजी और बढ़ती उत्पादकता ने भी विश्व अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में योगदान दिया। आईएमएफ के मुख्य अर्थशास्त्री पियरे-ओलिवियर गौरिंचास ने मुद्राकोष के नवीनतम विश्व आर्थिक परिदृश्य के साथ ब्लॉग पोस्ट में लिखा कि पश्चिम एशिया में युद्ध ने इस गति को रोक दिया है। गौरिंचास ने लिखा कि आईएमएफ का यह मानना था कि फारस की खाड़ी में संघर्ष अल्पकालिक होगा और इस वर्ष ऊर्जा की कीमतों में 19 फीसदी की हल्की वृद्धि होगी।

    उन्होंने आगे चेताया कि हालांकि इससे कहीं अधिक खराब हो सकते हैं। एक सीरियस सिनैरियो में, जिसमें ऊर्जा संकट अगले साल तक जारी रहता है और केंद्रीय बैंकों को मुद्रास्फीति से निपटने के लिए ब्याज दरें बढ़ाने के लिए मजबूर होना पड़ता है, वैश्विक वृद्धि 2026 और 2027 में घटकर दो फीसदी हो सकती है। उन्होंने कहाकि अस्थायी युद्धविराम की हाल की खबरों के बावजूद, कुछ नुकसान पहले ही हो चुका है और आगे के जोखिम अभी भी बहुत अधिक हैं।


    अमेरिका का क्या हाल

    आईएमएफ ने इस साल अमेरिका की वृद्धि दर के अपने अनुमान को थोड़ा घटाकर 2.3 फीसदी कर दिया है। मुद्राकोष के अनुमान के अनुसार, यूरो मुद्रा साझा करने वाले 21 यूरोपीय देश इस साल सामूहिक रूप से 1.1 फीसदी की वृद्धि हासिल करेंगे, जो 2025 के 1.4 फीसदी से कम है। यूरोप प्राकृतिक गैस की बढ़ती कीमतों से बुरी तरह प्रभावित है। सबसे ज्यादा प्रभावित होने की संभावना उन कर्ज में डूबे गरीब देशों की है जो ऊर्जा आयात करते हैं और सरकारी खर्च और कर राहत बढ़ाकर अपनी अर्थव्यवस्थाओं को सहारा देने में असमर्थ हैं।

    रूस पर ज्यादा असर नहीं
    इस संघर्ष से उभरने वाले एक प्रमुख देश रूस है, जो ऊर्जा निर्यातक होने के नाते उच्च कीमतों से लाभान्वित होगा। 2022 में यूक्रेन पर आक्रमण के बाद प्रतिबंधों से बुरी तरह प्रभावित रूसी अर्थव्यवस्था के लिए आईएमएफ ने अपने अनुमान को बढ़ाकर 1.1 फीसदी कर दिया है, जो अभी भी मामूली है।

  • ईरान-अमेरिका युद्ध का असर…. सोना-चांदी की कीमतों में लगातार दूसरे दिन तेजी

    ईरान-अमेरिका युद्ध का असर…. सोना-चांदी की कीमतों में लगातार दूसरे दिन तेजी


    नई दिल्ली।
    सोने और चांदी की कीमतों (Gold Silver Price) में आज लगातार दूसरे दिन तेजी देखने को मिली है। अमेरिका और ईरान (America and Iran War) के बीच फिर से बातचीत की संभावनाओं की वजह से आज इंटरनेशनल मार्केट (International Market) गोल्ड और सिल्वर का रेट (Gold Silver Price) फिर से बढ़ा हुआ है। मौजूदा परिस्थितियों की वजह से दुनिया भर में एनर्जी संकट गहरा गया है। बता दें, पाकिस्तान में ईरान और अमेरिका के बीच एक दौर की बातचीत हो गई है। लेकिन यह पूरी वार्ता विफल रही थी। दोनों पक्षों के बीच कोई समझौता तब नहीं हो पाया था।


    क्या है गोल्ड का ताजा रेट (Gold Latest Price)

    COMEX gold की कीमतों में आज शुरुआती कारोबार के दौरान बढ़ोतरी देखने को मिली। जिसके बाद यह 4855 डॉलर प्रति आउंस के स्तर पर पहुंच गया। इससे पहले के सत्र में सोने का भाव 2 प्रतिशत से अधिक बढ़ा था। COMEX Silver के रेट भी आज बुधवार को बढ़ोतरी देखने को मिली है। चांदी की कीमतों में उछाल के बाद यह 79 डॉलर प्रति आउंस के स्तर पर पहुंच गई थी।


    क्यों बढ़ रहा सोने और चांदी का रेट (Why Gold Silver prices rising)

    ब्लूमबर्ग के अनुसार अमेरिका और ईरान के बीच दूसरे दौर की बातचीत आने वाले दिनों में हो सकती है। न्यूयार्क पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अगले दो दिनों में बातचीत शुरू होने के संकेत दिए हैं। इन खबरों की वजह से मंगलवार को अमेरिकी शेयर बाजार में तेजी दर्ज की गई। वहीं, डॉलर इंडेक्स 0.3 प्रतिशत लुढ़क चुका है। बता दें, जब से युद्ध शुरू हुआ है तब से मेटल की कीमतों में 8 प्रतिशत की गिरावट देखने को मिली है।


    कहां तक जाएगा सोने और चांदी का रेट (Gold Silver Price Outlook)

    Augmon से जुड़ी रेनिशा कहती हैं कि सोने और चांदी इस समय भी बुल रन पर सवार हैं। हालांकि, आगे का रास्ता काफी अनिश्चितताओं से भरा हुआ है। रेनिशा का कहना है टेक्निकल स्तर पर, “गोल्ड 4800 से 4850 डॉलर (154000 रुपये से 155000 रुपये तक) के आस-पास रेसिस्टेंस दिखा रहा है। अगर कीमतें इसके ऊपर गई तो यह फिर 5000 डॉलर (160000 रुपये) के स्तर तक जा सकती हैं।”

    चांदी के विषय में एक्सपर्ट की राय है कि यह 77 डॉलर (246000 रुपये) के स्तर पर रेसिस्टेंस दिखा रहा है। इसके ऊपर जाने की स्थिति में चांदी का दाम 82 डॉलर से 87 डॉलर (255000 रुपये से 265000 रुपये) के स्तर तक पहुंच सकता है।”

  • एशिया के सबसे अमीर परिवारों की नई सूची जारी, अंबानी परिवार टॉप पर, AI बूम से बढ़ी दौलत

    एशिया के सबसे अमीर परिवारों की नई सूची जारी, अंबानी परिवार टॉप पर, AI बूम से बढ़ी दौलत


    नई दिल्ली। दुनिया में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस AI के तेज़ विस्तार ने एशिया के सबसे बड़े कारोबारी परिवारों की संपत्ति में बड़ा इजाफा किया है। ब्लूमबर्ग की ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार 2026 में एशिया के टॉप 10 सबसे अमीर परिवारों की कुल नेटवर्थ में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इसकी बड़ी वजह AI इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे डेटा सेंटर ऊर्जा चिप्स और कच्चे माल की बढ़ती मांग को माना जा रहा है। साथ ही हांगकांग के रियल एस्टेट सेक्टर में सुधार ने भी इन संपत्तियों को और मजबूती दी है।

    अंबानी परिवार सबसे आगे

    इस सूची में पहला स्थान एक बार फिर अंबानी परिवार के पास है जिनकी कुल संपत्ति लगभग 89.7 अरब डॉलर करीब 7.4 लाख करोड़ रुपये आंकी गई है। रिलायंस इंडस्ट्रीज ऊर्जा टेलीकॉम रिटेल और फाइनेंशियल सर्विसेज में लगातार विस्तार कर रही है। रिपोर्ट के मुताबिक परिवार ने अगले कुछ वर्षों में AI इंफ्रास्ट्रक्चर में बड़े निवेश की योजना भी बनाई है।

    क्वोक परिवार दूसरे स्थान पर

    दूसरे नंबर पर क्वोक परिवार है जिनकी संपत्ति करीब 50.2 अरब डॉलर है। इनका मुख्य कारोबार हांगकांग का रियल एस्टेट सेक्टर है जहां हाल के समय में सुधार देखने को मिला है।

    सैमसंग का ली परिवार तीसरे स्थान पर

    तीसरे स्थान पर ली परिवार है जिनकी संपत्ति लगभग 45.5 अरब डॉलर है। सेमीकंडक्टर और स्मार्टफोन इंडस्ट्री में सैमसंग की मजबूत पकड़ और AI व रोबोटिक्स में बढ़ता फोकस इनके विकास को आगे बढ़ा रहा है।

    चौथे स्थान पर चेरावनोन्त परिवार
    चेरावनोन्त परिवार की कुल संपत्ति 44.8 अरब डॉलर के आसपास है। इनका चारोएन पोकफैंड ग्रुप फूड रिटेल और टेलीकॉम सेक्टर में सक्रिय है और एशिया में तेजी से विस्तार कर रहा है।

    एल्युमीनियम से बढ़ी झांग परिवार की कमाई
    झांग परिवार की संपत्ति लगभग 44.7 अरब डॉलर है। इलेक्ट्रिक वाहनों और AI इंडस्ट्री में एल्युमीनियम की बढ़ती मांग से इनके बिजनेस को बड़ा फायदा मिला है।

    त्साई परिवार की स्थिर ग्रोथ
    त्साई परिवार लगभग 34.3 अरब डॉलर की संपत्ति के साथ बैंकिंग और इंश्योरेंस सेक्टर से मजबूत आय बनाए हुए है।

    रेड बुल से चमका यूविदया परिवार

    यूविदया परिवार की संपत्ति करीब 32.9 अरब डॉलर है। रेड बुल ब्रांड ने उन्हें ग्लोबल स्तर पर मजबूत पहचान और लगातार मुनाफा दिया है।

    बैंकिंग सेक्टर में हार्टोनो परिवार
    हार्टोनो परिवार की संपत्ति लगभग 30.2 अरब डॉलर है और इंडोनेशिया के बैंकिंग सेक्टर में इनकी मजबूत पकड़ बनी हुई है।

    भारत के मिस्त्री और जिंदल परिवार भी सूची में

    भारत के मिस्त्री परिवार की संपत्ति करीब 29.5 अरब डॉलर और जिंदल परिवार की संपत्ति लगभग 29.4 अरब डॉलर आंकी गई है। दोनों परिवार क्रमशः इंफ्रास्ट्रक्चर स्टील एनर्जी और सीमेंट जैसे क्षेत्रों में सक्रिय हैं।