Category: Economy

  • लोन का गारंटर बनने से पहले सावधान! ये कानून जानना जरूरी, वरना चुकाना पड़ सकता है पूरा कर्ज

    लोन का गारंटर बनने से पहले सावधान! ये कानून जानना जरूरी, वरना चुकाना पड़ सकता है पूरा कर्ज


    नई दिल्ली। जब हम लोन लेने के लिए आवेदन करते हैं तो गारंटर की जरूरत पड़ती ही है। किसी दोस्त या रिश्तेदार की मदद के लिए लोग अक्सर बिना सोचे-समझे लोन में गारंटर बन जाते हैं, लेकिन यह फैसला कई बार भारी पड़ सकता है। Loan Guarantor बनने का मतलब सिर्फ औपचारिकता नहीं होता, बल्कि आप कानूनी रूप से उस लोन की जिम्मेदारी भी अपने ऊपर ले लेते हैं।

    अगर लोन लेने वाला व्यक्ति समय पर EMI नहीं भरता या डिफॉल्ट कर देता है, तो बैंक सीधे गारंटर से पैसे वसूल सकता है जो कि कानून सम्मत है। कई मामलों में गारंटर को पूरा बकाया चुकाना पड़ता है, जिससे उसकी आर्थिक स्थिति भी खराब हो सकती है।

    Loan Guarantor पर कब आती है कानूनी जिम्मेदारी
    भारतीय कानून के तहत, खासकर Indian Contract Act 1872 के अनुसार, गारंटर (Surety) की जिम्मेदारी उधार लेने वाले (Principal Borrower) के बराबर मानी जाती है। लोन लेने वाला व्यक्ति अगर चुकाने में असमर्थता जता रहा है तो लोन गारंटर की जिम्मेदारी भी उतनी ही बनती है। इसका मतलब यह है कि अगर borrower पैसा नहीं चुकाता, तो बैंक सीधे गारंटर से वसूली कर सकता है, बिना पहले borrower पर पूरी कार्रवाई किए। यही वजह है कि गारंटर बनना एक बड़ा कानूनी जोखिम माना जाता है।

    गारंटर बनने से पहले किन बातों का रखें ध्यान
    गारंटर बनने से पहले यह जरूरी है कि आप उस व्यक्ति की वित्तीय स्थिति को अच्छी तरह समझ लें, जिसके लिए आप गारंटी दे रहे हैं। साथ ही लोन की शर्तें और दस्तावेज ध्यान से पढ़ें। ध्यान रखें कि डिफॉल्ट होने पर आपका क्रेडिट स्कोर भी खराब हो सकता है, जिससे भविष्य में आपको खुद लोन लेने में परेशानी आ सकती है।

    कुल मिलाकर, गारंटर बनना एक बड़ी जिम्मेदारी है, इसलिए भावनाओं में आकर नहीं बल्कि पूरी जानकारी और समझ के साथ ही यह फैसला लेना चाहिए।

  • सुरों की विदाई पर भावुक हुए गौतम अदाणी: "अमर रहेगी आशा भोसले की विरासत, सदियों तक गूँजेगी वो आवाज़"

    सुरों की विदाई पर भावुक हुए गौतम अदाणी: "अमर रहेगी आशा भोसले की विरासत, सदियों तक गूँजेगी वो आवाज़"



    नई दिल्ली।  भारतीय संगीत जगत से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है। सुरों की जादूगर और लाखों दिलों की धड़कन रहीं आशा भोसले ने 92 वर्ष की उम्र में दुनिया को अलविदा कह दिया। बीते कुछ दिनों से उनकी तबीयत खराब चल रही थी और उन्हें ब्रीच कैंडी अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां इलाज के दौरान उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन से संगीत प्रेमियों के बीच शोक की लहर दौड़ गई है।

    आठ दशकों तक चला सुरों का जादू

    40 के दशक में अपने करियर की शुरुआत करने वाली आशा भोसले ने संगीत की दुनिया में एक लंबा और शानदार सफर तय किया। उन्होंने बिमल रॉय, राज कपूर जैसे दिग्गजों के साथ काम किया और ओ. पी. नैय्यर, ए. आर. रहमान जैसे महान संगीतकारों के साथ मिलकर कई यादगार गीत दिए। शुरुआत में उन्होंने लो-बजट फिल्मों में गाकर पहचान बनाई, लेकिन 1957 की फिल्म नया दौर ने उन्हें स्टार बना दिया। इसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।

    हर दौर की आवाज, हर दिल की धड़कन

    आशा भोसले की आवाज ने हर जॉनर में अपनी छाप छोड़ी। मोहम्मद रफी के साथ उनकी जोड़ी सुपरहिट रही। ‘पिया तू अब तो आजा’, ‘दम मारो दम’, ‘चुरा लिया है तुमने’, ‘ये मेरा दिल’ जैसे गाने आज भी लोगों की जुबान पर हैं।
    1966 में आर. डी. बर्मन के साथ फिल्म तीसरी मंजिल के गानों ने उन्हें नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया। वहीं 1981 की फिल्म उमराव जान में गाई गई गज़लों ने उन्हें नेशनल अवॉर्ड दिलाया और उनकी गायकी की गहराई को साबित किया।

    रिकॉर्ड, सम्मान और अमर विरासत

    आशा भोसले ने अपने करियर में 20 से अधिक भाषाओं में हजारों गाने गाए और उनका नाम गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड में भी दर्ज है। उन्हें दादा साहेब फाल्के पुरस्कार, पद्म विभूषण और कई राष्ट्रीय व फिल्मफेयर पुरस्कारों से सम्मानित किया गया। उनकी आवाज सिर्फ गाने नहीं थी, बल्कि एक एहसास थी, जिसने पीढ़ियों को जोड़े रखा।

    देशभर में शोक, हमेशा जिंदा रहेंगी यादें

    आशा भोसले के निधन पर देशभर में शोक की लहर है। संगीत, फिल्म और अन्य क्षेत्रों से जुड़े लोगों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी है। उनका अंतिम संस्कार मुंबई के शिवाजी पार्क में राजकीय सम्मान के साथ किया जाएगा। उनकी मधुर आवाज, उनके गीत और उनकी विरासत हमेशा अमर रहेगी—एक ऐसी धरोहर, जिसे आने वाली पीढ़ियां भी महसूस करती रहेंगी।

  • स्पेस अपडेट: Northrop Grumman CRS-24 मिशन लॉन्च की तैयारी में, जानें कैसे देखें लाइव

    स्पेस अपडेट: Northrop Grumman CRS-24 मिशन लॉन्च की तैयारी में, जानें कैसे देखें लाइव


    नई दिल्ली। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी NASA ने Northrop Grumman के कमर्शियल रिसप्लाई सर्विसेज-24 (CRS-24) मिशन के लॉन्च की सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं। यह अहम मिशन 11 अप्रैल को भारतीय समयानुसार शाम 5:11 बजे लॉन्च किया जाएगा, जिस पर दुनियाभर की नजरें टिकी हैं।

    ISS के लिए 5000 किलो सामान

    इस मिशन के तहत Cygnus XL spacecraft लगभग 11,000 पाउंड (करीब 5,000 किलोग्राम) वैज्ञानिक उपकरण, रिसर्च सामग्री और जरूरी सप्लाई लेकर International Space Station (ISS) की ओर रवाना होगा। यह साइगनस का उन्नत और बड़ा वर्जन है, जो सौर ऊर्जा से संचालित होता है।

     फाल्कन 9 से होगा प्रक्षेपण

    इस मिशन को SpaceX के Falcon 9 रॉकेट के जरिए फ्लोरिडा स्थित Cape Canaveral Space Force Station से लॉन्च किया जाएगा। यह लॉन्च स्पेस लॉन्च कॉम्प्लेक्स-40 से होगा।

    13 अप्रैल को ISS से जुड़ेगा स्पेसक्राफ्ट

    लॉन्च के दो दिन बाद, 13 अप्रैल को ISS पर मौजूद अंतरिक्ष यात्री Canadarm2 robotic arm की मदद से इस स्पेसक्राफ्ट को कैप्चर करेंगे। इसके बाद इसे यूनिटी मॉड्यूल से जोड़ा जाएगा, ताकि सामान को सुरक्षित तरीके से उतारा जा सके।

    कई अहम वैज्ञानिक प्रयोग भेजे जा रहे

    इस मिशन में कई महत्वपूर्ण रिसर्च प्रोजेक्ट्स भी शामिल हैं:

    क्वांटम साइंस को आगे बढ़ाने के लिए कोल्ड एटम लैब मॉड्यूल
    कैंसर और खून की बीमारियों के इलाज के लिए स्टेम सेल रिसर्च हार्डवेयर
    आंत के माइक्रोबायोम का अध्ययन
    स्पेस वेदर को समझने के लिए एडवांस रिसीवर
    ये प्रयोग भविष्य में चिकित्सा, कंप्यूटिंग और अंतरिक्ष विज्ञान में बड़ा बदलाव ला सकते हैं।


    अंतरिक्ष यात्री के नाम पर रखा गया नाम

    इस स्पेसक्राफ्ट का नाम नासा के पूर्व अंतरिक्ष यात्री Steven R. Nagel के सम्मान में “SS स्टीवन आर नागेल” रखा गया है। यह अक्टूबर 2026 तक ISS से जुड़ा रहेगा और बाद में कचरे के साथ पृथ्वी के वायुमंडल में जलकर नष्ट हो जाएगा।

    यहां देख सकेंगे लाइव लॉन्च

    नासा ने इस ऐतिहासिक लॉन्च की लाइव स्ट्रीमिंग NASA+, Amazon Prime Video और यूट्यूब पर उपलब्ध कराई है। लाइव कवरेज भारतीय समयानुसार शाम 4:50 बजे से शुरू होगी।

  • गोल्ड-सिल्वर में उछाल जारी, कमजोर डॉलर ने बढ़ाई निवेशकों की दिलचस्पी

    गोल्ड-सिल्वर में उछाल जारी, कमजोर डॉलर ने बढ़ाई निवेशकों की दिलचस्पी


    नई दिल्ली। वैश्विक बाजार में अनिश्चितता और डॉलर की कमजोरी के बीच सोने-चांदी की कीमतों में लगातार तीसरे हफ्ते तेजी देखने को मिली है। सुरक्षित निवेश (सेफ-हेवन) की बढ़ती मांग और भू-राजनीतिक हालात ने कीमती धातुओं को मजबूती दी है।

    सोने में 1.65% साप्ताहिक उछाल

    इस हफ्ते सोने की कीमतों में 1.65 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर शुक्रवार को सोने के जून फ्यूचर्स हल्की बढ़त के साथ करीब 1,52,690 रुपए प्रति 10 ग्राम पर कारोबार करते नजर आए। वहीं इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (IBJA) के अनुसार, 999 प्योरिटी वाले सोने का भाव बढ़कर 1,50,327 रुपए प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गया, जो सप्ताह की शुरुआत से ऊंचा स्तर है।

     चांदी भी चमकी, कीमतों में मजबूती

    चांदी की कीमतों में भी तेजी का रुख बना रहा। एमसीएक्स पर मई फ्यूचर्स 2,43,300 रुपए प्रति किलोग्राम के आसपास ट्रेड करते दिखे।
    आईबीजेए के मुताबिक, 999 प्योरिटी वाली चांदी 2,39,934 रुपए प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई, जो पिछले सप्ताह की तुलना में मजबूत बढ़त दर्शाता है।

    अंतरराष्ट्रीय बाजार का असर

    अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कॉमेक्स (COMEX) पर सोना लगभग 3% की साप्ताहिक बढ़त के साथ 4,787 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस के करीब बंद हुआ। विश्लेषकों का मानना है कि 5,000 डॉलर का स्तर एक बड़ा रेजिस्टेंस है, जिसे पार करने पर तेजी और तेज हो सकती है।

    डॉलर की कमजोरी और फेड नीति बनी वजह

    अमेरिका-ईरान के बीच तनाव कम होने और सीजफायर बातचीत के चलते डॉलर पर दबाव बना है। इससे निवेशकों ने ब्याज दरों को लेकर नए सिरे से आकलन शुरू किया है।
    कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से महंगाई कम होने की उम्मीद बढ़ी है, जिससे फेडरल रिजर्व द्वारा भविष्य में ब्याज दरों में कटौती की संभावना मजबूत हुई है।

    बाजार में संतुलन, लेकिन सतर्कता बरकरार

    कमोडिटी बाजार इस हफ्ते संतुलित लेकिन सतर्क माहौल में रहा। हालिया उतार-चढ़ाव के बाद अब कीमतों में स्थिरता के शुरुआती संकेत भी देखने को मिल रहे हैं, हालांकि वैश्विक अनिश्चितता अभी भी बनी हुई है।


    सपोर्ट और रेजिस्टेंस स्तर

    विशेषज्ञों के अनुसार:

    सोना: 1,48,000–1,46,000 रुपए मजबूत सपोर्ट, 1,54,000–1,55,000 रुपए रेजिस्टेंस
    चांदी: 2,30,000–2,25,000 रुपए सपोर्ट, गहरा सपोर्ट 2,05,000–2,00,000 रुपए साथ ही डॉलर-रुपया (USD/INR) की चाल आगे भी कीमतों की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगी।

  • निवेशकों के लिए भारत सुरक्षित और खुला बाजार, SEBI प्रमुख ने जताया भरोसा

    निवेशकों के लिए भारत सुरक्षित और खुला बाजार, SEBI प्रमुख ने जताया भरोसा


    नई दिल्ली।भारत आज भी वैश्विक निवेशकों के लिए एक खुला, स्थिर और आकर्षक बाजार बना हुआ है। भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) के चेयरमैन तुहिन कांत पांडे ने कहा कि मजबूत आर्थिक आधार, तेजी से बढ़ता निवेशक वर्ग और सुधार-आधारित नीतियां भारत को वैश्विक पूंजी के लिए खास बनाती हैं।

    🇺🇸 सैन फ्रांसिस्को में निवेशकों से संवाद

    यह बयान सैन फ्रांसिस्को में आयोजित एक इंटरएक्टिव सेशन के दौरान दिया गया, जिसे भारतीय उद्योग परिसंघ (CII) और भारतीय महावाणिज्य दूतावास ने संयुक्त रूप से आयोजित किया था। इस कार्यक्रम में वैश्विक निवेशकों, वेंचर कैपिटल फर्म्स और उद्योग जगत के दिग्गजों ने हिस्सा लिया।

    पारदर्शी और टेक्नोलॉजी-आधारित रेगुलेटरी सिस्टम

    सेबी प्रमुख ने कहा कि नियामकीय ढांचा पारदर्शी, परामर्श-आधारित और तकनीक-संचालित है। सेबी का फोकस ऐसी नीतियों पर है जो जोखिम को ध्यान में रखते हुए निवेश को आसान बनाएं और पूंजी बाजार की स्थिरता बनाए रखें।

    उन्होंने बताया कि विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) के रजिस्ट्रेशन और री-केवाईसी प्रक्रिया को आसान किया गया है। साथ ही डिजिटल प्लेटफॉर्म का बढ़ता उपयोग, मजबूत आईपीओ बाजार और वैकल्पिक निवेश फंड (AIF) की बढ़ती भूमिका बाजार को और गहराई दे रही है।

    घरेलू निवेशकों की बढ़ती भागीदारी

    भारत के पूंजी बाजार की एक बड़ी ताकत घरेलू निवेशकों की बढ़ती भागीदारी है। इससे बाजार को स्थिरता और मजबूती मिल रही है, जो वैश्विक निवेशकों के लिए भी भरोसे का संकेत है।

    मजबूत आर्थिक संकेतक दे रहे सहारा

    तुहिन कांत पांडे ने कहा कि नियंत्रित महंगाई, मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार और संतुलित बाहरी खाते भारतीय अर्थव्यवस्था को मजबूत आधार देते हैं। यही कारण है कि भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है।

    भारत-अमेरिका व्यापार को 500 अरब डॉलर तक ले जाने का लक्ष्य

    इस मौके पर के. श्रीकर रेड्डी ने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच व्यापार 240 अरब डॉलर से अधिक हो चुका है और इसे 2030 तक 500 अरब डॉलर तक ले जाने का लक्ष्य है।

    वहीं रामकृष्णन मुकुंदन ने सरकार, उद्योग और वैश्विक निवेशकों के बीच सहयोग को भारत की भविष्य की ग्रोथ के लिए अहम बताया। उन्होंने कहा कि भारत की प्रगति वैश्विक साझेदारी, खासकर अमेरिका के साथ, पर निर्भर करेगी।

    निवेश माहौल को और बेहतर बनाने पर जोर

    सत्र के दौरान निवेशकों और नीति-निर्माताओं के बीच खुली चर्चा हुई। इसमें नियामकीय प्रक्रियाओं को सरल बनाने, क्रॉस-बॉर्डर निवेश नियमों में स्पष्टता लाने, डीप-टेक सेक्टर में फंडिंग बढ़ाने और डिजिटल प्रक्रियाओं को तेज करने जैसे मुद्दों पर जोर दिया गया।

  • सागरमाला का बड़ा असर! पोर्ट और लॉजिस्टिक्स सेक्टर में रिकॉर्ड विकास

    सागरमाला का बड़ा असर! पोर्ट और लॉजिस्टिक्स सेक्टर में रिकॉर्ड विकास


    नई दिल्ली। देश के समुद्री क्षेत्र में पिछले एक दशक में ऐतिहासिक बदलाव देखने को मिला है और इसमें सागरमाला प्रोग्राम की अहम भूमिका रही है। बंदरगाहों के आधुनिकीकरण से लेकर जलमार्गों के विकास तक, इस महत्वाकांक्षी योजना ने भारत की लॉजिस्टिक्स और व्यापारिक क्षमता को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है।

    845 परियोजनाएं शुरू, 315 पूरी

    पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय के अनुसार, ‘सागरमाला’ के तहत अब तक करीब 845 परियोजनाएं शुरू की जा चुकी हैं, जिनकी कुल लागत लगभग 6.06 लाख करोड़ रुपए है। इनमें से 1.57 लाख करोड़ रुपए की लागत वाली 315 परियोजनाएं 24 मार्च 2026 तक पूरी हो चुकी हैं।
    इसके अलावा 210 परियोजनाएं निर्माणाधीन हैं, जबकि 320 परियोजनाएं अभी योजना चरण में हैं।

    ‘सागरमाला 2.0’ से निवेश को मिलेगा बड़ा बूस्ट

    सरकार अब सागरमाला 2.0 के जरिए इस पहल को और आगे बढ़ा रही है। इसके तहत 85,482 करोड़ रुपए के निवेश से लगभग 3.6 लाख करोड़ रुपए के कुल निवेश को आकर्षित करने का लक्ष्य रखा गया है। इससे देश में पोर्ट-आधारित औद्योगिक विकास को नई गति मिलने की उम्मीद है।

    कार्गो हैंडलिंग और कनेक्टिविटी में बड़ा सुधार

    ‘सागरमाला’ के प्रभाव से भारत के प्रमुख बंदरगाहों की क्षमता और दक्षता में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। वित्त वर्ष 2025-26 में बंदरगाहों ने 915.17 मिलियन टन कार्गो हैंडल किया, जो तय लक्ष्य से अधिक है और सालाना आधार पर 7.06% की वृद्धि दर्शाता है।

    साथ ही, जहाजों का औसत टर्नअराउंड टाइम 2014 के 96 घंटे से घटकर 2025 में 49.5 घंटे रह गया है। इससे माल ढुलाई की गति बढ़ी है और लॉजिस्टिक्स लागत में कमी आई है।

    वैश्विक स्तर पर मजबूत हुई भारत की स्थिति

    भारतीय बंदरगाहों की वैश्विक रैंकिंग में भी सुधार हुआ है। देश के 9 बंदरगाह अब दुनिया के टॉप-100 बंदरगाहों में शामिल हो चुके हैं।
    विशाखापत्तनम बंदरगाह कंटेनर ट्रैफिक के मामले में दुनिया के शीर्ष 20 बंदरगाहों में अपनी जगह बना चुका है, जो भारत के लिए बड़ी उपलब्धि है।

    जलमार्गों से बढ़ी माल ढुलाई, 700% की छलांग

    अंतर्देशीय जलमार्गों के जरिए कार्गो परिवहन में भी जबरदस्त वृद्धि दर्ज की गई है। यह 2013-14 के 18.10 मिलियन टन से बढ़कर 2024-25 में 145.50 मिलियन टन हो गया है, यानी करीब 700% की बढ़ोतरी। इससे देश का लॉजिस्टिक्स नेटवर्क अधिक कुशल और विविधतापूर्ण बन गया है।

     मछुआरों और रोजगार पर सकारात्मक असर

    ‘सागरमाला’ के तहत 1,057 करोड़ रुपए की लागत से 11 फिशिंग हार्बर परियोजनाएं पूरी की गई हैं, जिससे 30,000 से ज्यादा मछुआरों को सीधा लाभ मिला है।
    इसके अलावा, कौशल विकास कार्यक्रमों के जरिए तटीय क्षेत्रों में लोगों की आजीविका भी बेहतर हुई है। सरकार का अनुमान है कि इस कार्यक्रम से लगभग 1 करोड़ रोजगार सृजित होंगे, जिनमें 40 लाख प्रत्यक्ष और 60 लाख अप्रत्यक्ष नौकरियां शामिल हैं।

  • Petrol-Diesel के रेट में कोई बदलाव नहीं… इस शहर में डीजल 78 और पेट्रोल 82 रुपये प्रति लीटर

    Petrol-Diesel के रेट में कोई बदलाव नहीं… इस शहर में डीजल 78 और पेट्रोल 82 रुपये प्रति लीटर


    नई दिल्ली।
    ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (Oil Marketing Companies) ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों (Petrol Diesel Price ) में आज शनिवार को कोई इजाफा नहीं किया है। तेल कंपनियों की तरफ से पुरानी की कीमतें बरकरार हैं। कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में जारी तेजी के बीच कई देशों में पेट्रोल और डीजल के रेट बढ़ोतरी दर्ज की गई है। हालांकि, भारत में कीमतों में कोई भी इजाफा सरकार तेल कंपनियों ने नहीं किया है।

    पेट्रोल रेट (Petrol Rate)
    – नई दिल्ली – 94.77 रुपये
    – मुंबई – 103.54 रुपये
    – कोलकाता – 105.41 रुपये
    – बेंगलुरू – 102.92 रुपये
    – चेन्नई – 100.90 रुपये
    – पटना – 105.23 रुपये
    – जयपुर – 104.86 रुपये
    – पोर्ट ब्लेयर – 82.46 रुपये
    – तिरुअनंतपुरम् – 107.48 रुपये


    डीजल रेट (Diesel Rate)

    – दिल्ली – 87.67 रुपये
    – मुंबई – 90.03 रुपये
    – कोलकाता – 92.02 रुपये
    – बेंगलुरू – 90.99 रुपये
    – चेन्नई – 92.49 रुपये
    – पटना – 91.49 रुपये
    – जयपुर – 90.34 रुपये
    – पोर्टब्लेयर – 78.05 रुपये
    – तिरुअनंतपुरम्- 96.48 रुपये


    रिलायंस ने अपने फैसले से डराया

    बीते दिनों रिलायंस और बीपी पेट्रोल पंपों पर नया नियम लागू कर दिया गया। रिपोर्ट के अनुसार एक बार में कोई भी व्यक्ति 1000 रुपये ही पेट्रोल या डीजल खरीद सकता है। जब से युद्ध शुरू हुआ है तब से पहली बार किसी कंपनी ने ऐसा नियम लगाया है।


    कच्चे तेल का रेट 100 डॉलर के नीचे

    ईरान-अमेरिका के बीच जारी बातचीत का असर क्रूड ऑयल की कीमतों पर साफ दिख रहा है। कल शुक्रवार कच्चे तेल का भाव 100 डॉलर प्रति बैरल के नीचे आ गया था। युद्ध शुरू होने से पहले क्रूड ऑयल 70 डॉलर के आस-पास बना हुआ था।


    Shell India ने 25.01 रुपये बढ़ाया डीजल का रेट

    कंपनी ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में इजाफा किया है। शेल इंडिया की तरफ से बीते सप्ताह पेट्रोल के रेट में 25.01 रुपये और डीजल के रेट में 7.41 रुपये का इजाफा किया था। इससे पहले नायरा ने भी कीमतों में बढ़ोतरी की थी। नायरा ने मार्च में पेट्रोल के रेट में 5 रुपये और डीजल की कीमतों में 3 रुपये प्रति लीटर का इजाफा किया था।


    एक्साइज ड्यूटी में कटौती

    तेल कंपनियों को राहत देने के लिए केंद्र सरकार की तरफ से एक्साइज ड्यूटी में कटौती की गई थी। केंद्र सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर 10-10 रुपये एक्साइज ड्यूटी घटा दिया था। जिसके बाद डीजल ड्यूटी फ्री हो गया था।

  • मध्यपूर्व में तनाव कम होने से भारतीय शेयर बाजार में तेजी, सेंसेक्स 918 अंक उछला

    मध्यपूर्व में तनाव कम होने से भारतीय शेयर बाजार में तेजी, सेंसेक्स 918 अंक उछला


    नई दिल्ली।मध्यपूर्व में तनाव कम होने के संकेतों के बीच शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार में जबरदस्त तेजी देखने को मिली। कारोबार के अंत में BSE Sensex 918.60 अंक यानी 1.20% उछलकर 77,550.25 पर बंद हुआ, जबकि Nifty 50 275.50 अंक यानी 1.10% की बढ़त के साथ 24,050.60 पर पहुंच गया।

    ऑटो और बैंकिंग शेयर बने बाजार के हीरो

    इस तेजी में सबसे बड़ा योगदान ऑटो और फाइनेंशियल सेक्टर का रहा।

    निफ्टी ऑटो: +2.85% (टॉप गेनर)
    निफ्टी रियल्टी: +2.08%
    निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज: +2.06%
    निफ्टी पीएसयू बैंक: +2.01%
    निफ्टी प्राइवेट बैंक: +1.98%
    इसके अलावा कंज्यूमर ड्यूरेबल्स और कंजम्प्शन सेक्टर में भी अच्छी खरीदारी देखने को मिली।

    आईटी सेक्टर में रही कमजोरी

    जहां अधिकांश सेक्टर्स में तेजी रही, वहीं आईटी शेयरों पर दबाव बना रहा। निफ्टी आईटी 1.91% की गिरावट के साथ बंद हुआ। Infosys, TCS और HCLTech जैसे दिग्गज शेयरों में कमजोरी देखने को मिली।

    मिडकैप और स्मॉलकैप में भी शानदार तेजी

    बाजार की तेजी सिर्फ लार्जकैप तक सीमित नहीं रही, बल्कि व्यापक बाजार में भी खरीदारी का माहौल दिखा:

    निफ्टी मिडकैप 100: +1.52% (57,843.95)
    निफ्टी स्मॉलकैप 100: +1.65% (16,840.10)
    सेंसेक्स के टॉप गेनर्स

    इस तेजी में Asian Paints, ICICI Bank, Mahindra & Mahindra, State Bank of India, Axis Bank, HDFC Bank और Larsen & Toubro जैसे शेयरों में मजबूत खरीदारी रही। वहीं Sun Pharma, Infosys और Tech Mahindra गिरावट में रहे।

    एक्सपर्ट की राय: आगे क्या?

    Sudeep Shah (SBI सिक्योरिटीज) के अनुसार, बाजार ने गैप-अप ओपनिंग के बाद स्थिर रेंज में कारोबार किया और 24,000 के ऊपर मजबूती से बंद हुआ।

    रेजिस्टेंस: 24,200 – 24,250
    ब्रेकआउट पर लक्ष्य: 24,400 से 24,600
    सपोर्ट: 23,850 – 23,800

    मध्यपूर्व में तनाव कम होने से निवेशकों का भरोसा लौटा है, जिससे बाजार में मजबूत तेजी देखने को मिली। अगर वैश्विक संकेत सकारात्मक बने रहते हैं, तो आने वाले समय में बाजार और ऊपर जा सकता है।

  • यूपीआई के 10 साल पूरे: लेनदेन की वॉल्यूम 12,000 गुना बढ़ी; वैल्यू में 4,000 गुना से अधिक की बढ़ोतरी

    यूपीआई के 10 साल पूरे: लेनदेन की वॉल्यूम 12,000 गुना बढ़ी; वैल्यू में 4,000 गुना से अधिक की बढ़ोतरी


    नई दिल्ली। भारत के डिजिटल पेमेंट सिस्टम UPI (Unified Payments Interface) ने 11 अप्रैल को अपने 10 साल पूरे कर लिए हैं। इस एक दशक में यूपीआई ने देश में लेनदेन के तरीके को पूरी तरह बदल दिया है। आंकड़ों के मुताबिक, इसकी लेनदेन वॉल्यूम में 12,000 गुना से ज्यादा और वैल्यू में 4,000 गुना से अधिक की बढ़ोतरी हुई है।

    2017 से 2026 तक का सफर: जबरदस्त ग्रोथ

    एनालिटिक्स फर्म Tracxn के अनुसार,

    वित्त वर्ष 2017: 1.786 करोड़ ट्रांजैक्शन, 6,952 करोड़ रुपए वैल्यू
    वित्त वर्ष 2026: 218.98 अरब ट्रांजैक्शन, 285 लाख करोड़ रुपए वैल्यू

    यह आंकड़े दिखाते हैं कि यूपीआई ने बेहद कम समय में अभूतपूर्व विस्तार किया है।

    महामारी के दौरान मिली सबसे बड़ी रफ्तार

    शुरुआती वर्षों में धीमी बढ़त के बाद कोविड-19 महामारी के दौरान यूपीआई ने तेजी से रफ्तार पकड़ी:

    FY21: 22.33 अरब ट्रांजैक्शन
    FY22: 45.97 अरब
    FY23: 83.75 अरब

    इसके बाद भी ग्रोथ जारी रही और FY24 में 130.13 अरब और FY25 में 185.87 अरब लेनदेन दर्ज किए गए।

    मार्च 2026 में बना नया रिकॉर्ड

    National Payments Corporation of India (NPCI) के अनुसार, मार्च 2026 में यूपीआई ने अब तक का सबसे बड़ा मासिक रिकॉर्ड बनाया:

    22.64 अरब ट्रांजैक्शन (फरवरी: 20.39 अरब)
    सालाना आधार पर 24% की बढ़त

    इसने जनवरी 2026 के 21.70 अरब के पिछले रिकॉर्ड को भी पीछे छोड़ दिया।

    डिजिटल इकोसिस्टम का तेजी से विस्तार

    यूपीआई की सफलता का एक बड़ा कारण इसका तेजी से बढ़ता इंफ्रास्ट्रक्चर भी है:

    यूपीआई QR कोड: 73.13 करोड़ (15% वृद्धि)
    पॉइंट-ऑफ-सेल टर्मिनल: 1.148 करोड़ (15% वृद्धि)

    इससे छोटे व्यापारियों से लेकर बड़े कारोबारियों तक डिजिटल भुगतान को बढ़ावा मिला है।

    क्यों खास है यूपीआई?

    UPI (Unified Payments Interface) ने भारत में:

    कैशलेस इकोनॉमी को बढ़ावा दिया
    छोटे व्यापारियों को डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ा
    आम लोगों के लिए आसान और तेज पेमेंट सिस्टम उपलब्ध कराया
    निष्कर्ष

    10 साल में यूपीआई ने भारत को डिजिटल पेमेंट के क्षेत्र में वैश्विक लीडर बना दिया है। इसकी तेजी से बढ़ती पहुंच और उपयोग भविष्य में भी अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयों तक ले जाने की क्षमता रखती है।