Category: Economy

  • लॉन्ग टर्म SIP कैलकुलेशन; 1000 से 3000 रुपये तक निवेश पर संभावित रिटर्न का पूरा हिसाब, जानें डिटेल

    लॉन्ग टर्म SIP कैलकुलेशन; 1000 से 3000 रुपये तक निवेश पर संभावित रिटर्न का पूरा हिसाब, जानें डिटेल


    नई दिल्ली । महीने का SIP इन्वेस्टमेंट रिटर्न 1000 2000 3000 कॉर्पस कैलकुलेशन 20 साल भारत में डिटेल्स जानें लॉन्ग टर्म SIP कैलकुलेशन; 1000 से 3000 रुपये तक निवेश पर संभावित रिटर्न का पूरा हिसाब, जानें डिटेल
    छोटे निवेश से बनेगा बड़ा फंड
    SIP इन्वेस्टमेंट रिटर्न कैलकुलेशन बदलते परिवेश में पैसे कमाने के साथ-साथ पैसा बचाना और सही जगह निवेश करना सबसे जरूरी हो गया है. निवेश के कई विकल्प बाजार में उपलब्ध है. जहां निवेशक अपनी सहूलियत के अनुसार निवेश करते हैं. भारतीय निवेशकों के बीच म्यूचुअल फंड में एसआईपी बहुत फेमस है. इसकी वजह यह है कि, निवेशक लंबी अवधि तक छोटी-छोटी राशि में निवेश करने एक बड़ा फंड बना पाते हैं.

    अगर बाजार की चाल पॉजिटिव रहती है तो, एसआईपी में बेहतर रिटर्न मिलता है. यहीं कारण है कि, बहुत से लोग एसआईपी में निवेश का रास्ता चुन रहे हैं. ऐसे में छोटे निवेशक जो हर महीने हजार- दो हजार रुपये निवेश करते हैं, उनके मन में यह सवाल आता है कि, लंबी अवधि में उन्हें कितना रिटर्न मिलेगा. आइए इस सवाल का जवाब खोजते है….

    1000 के निवेश पर इतना बनेगा फंड

    नियमित निवेश की आदत लंबे समय में मजबूत फंड बनाने में मदद करती है. उदाहरण के तौर पर, यदि कोई व्यक्ति हर महीने 1000 रुपये की SIP म्यूचुअल फंड में लगाता है और यह निवेश लगातार 20 वर्षों तक जारी रखता है.

    इस अवधि में 12 प्रतिशत के अनुमानित रिटर्न के आधार पर उसके पास लगभग 9.19 लाख रुपये का कॉर्पस तैयार हो सकता है. इस अवधि में निवेशक की कुल जमा राशि 2.40 लाख रुपये होगी. जबकि कमाई के रूप में करीब 6.79 लाख रुपये का लाभ मिल सकता है. जो चक्रवृद्धि की ताकत को साफ दिखाता है.

    2000 रुपये की मासिक SIP से 20 साल में बन सकता है इतना कॉर्पस

    अगर कोई निवेशक हर महीने 2000 रुपये की SIP म्यूचुअल फंड में करता है और इस निवेश को लगातार 20 वर्षों तक बनाए रखता है, तो 12 प्रतिशत के अनुमानित रिटर्न के हिसाब से उसके पास करीब 18.39 लाख रुपये की रकम तैयार हो सकती है.

    इस दौरान कुल निवेश 4.80 लाख रुपये का होगा. जबकि संभावित लाभ लगभग 13.59 लाख रुपये तक पहुंच सकता है. जो लंबे समय तक अनुशासित निवेश के फायदे को दिखाता है.

    3000 रुपये की SIP से 20 वर्षों में इतना बनेगा फंड

    हर महीने 3000 रुपये की SIP के जरिए म्यूचुअल फंड में निवेश करने और इसे लगातार 20 साल तक जारी रखने पर अच्छा फंड तैयार किया जा सकता है. 12 प्रतिशत के अनुमानित रिटर्न के आधार पर इस अवधि के अंत में कुल कॉर्पस लगभग 27.59 लाख रुपये तक पहुंच सकता है.

    इस दौरान निवेशक की जेब से कुल 7.20 लाख रुपये का निवेश होगा. जबकि संभावित कमाई करीब 20.39 लाख रुपये की हो सकती है. डिस्क्लेमर यहां मुहैया जानकारी सिर्फ़ सूचना हेतु दी जा रही है. यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है. निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें  किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है.

  • अकाउंट फ्रीज होने के बाद नहीं निकाल पाएंगे एक भी रुपया; समझिए उन 5 वजहों को जो आपके बैंक खाते को कर सकती हैं ब्लॉक

    अकाउंट फ्रीज होने के बाद नहीं निकाल पाएंगे एक भी रुपया; समझिए उन 5 वजहों को जो आपके बैंक खाते को कर सकती हैं ब्लॉक


    नई दिल्ली ।बैंकिंग सेवाओं के इस दौर में हमारा बैंक अकाउंट हमारी जीवनरेखा की तरह है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि आपकी एक छोटी सी लापरवाही आपके खाते पर ताला लगवा सकती है? बैंक अकाउंट के ‘फ्रीज’ होने का सीधा मतलब है कि आप अपने ही जमा पैसों को न तो निकाल सकते हैं और न ही कहीं ट्रांसफर कर सकते हैं। बैंक यह सख्त कदम ग्राहकों की सुरक्षा और कानूनी नियमों के पालन के लिए उठाते हैं। अगर आप चाहते हैं कि आपकी मेहनत की कमाई हमेशा सुरक्षित रहे और लेनदेन में कोई बाधा न आए, तो आपको उन 5 प्रमुख वजहों को जान लेना चाहिए जिनकी वजह से बैंक आपके अकाउंट को फ्रीज कर सकता है।

    इन 5 कारणों से आपके खाते पर लग सकती है रोक
    बैंक बिना वजह किसी का खाता बंद नहीं करते, लेकिन निम्नलिखित परिस्थितियों में वे तुरंत कार्रवाई करने के लिए बाध्य होते हैं:

    संदिग्ध धोखाधड़ी या फर्जी लेन-देन: बैंकों के पास अत्याधुनिक मॉनिटरिंग सिस्टम होते हैं। अगर आपके खाते में अचानक कोई ऐसा ट्रांजैक्शन होता है जो आपकी पहचान की चोरी या वित्तीय धोखाधड़ी की ओर इशारा करता है, तो बैंक सुरक्षा के लिहाज से तुरंत एक्सेस ब्लॉक कर देता है।

    कोर्ट आदेश या सरकारी जांच: यदि किसी व्यक्ति का कोई कानूनी विवाद चल रहा है या आयकर विभाग Income Tax और अन्य जांच एजेंसियों को किसी अनियमितता का शक होता है, तो वे बैंक को ‘गार्निशमेंट ऑर्डर’ जारी कर सकते हैं। ऐसे सरकारी आदेशों के बाद बैंक को खाता फ्रीज करना ही पड़ता है।

    मनी लॉन्ड्रिंग की आशंका: ‘एंटी-मनी लॉन्ड्रिंग’ नियमों के तहत बैंक हर उस ट्रांजैक्शन पर पैनी नजर रखते हैं जिसका स्रोत स्पष्ट नहीं होता। यदि खाते का उपयोग अवैध धन के लेन-देन या संदिग्ध गतिविधियों के लिए होता पाया जाता है, तो जांच पूरी होने तक उसे फ्रीज कर दिया जाता है।

    KYC या दस्तावेजों में कमी: अक्सर ग्राहक अपने बैंक अकाउंट की ‘KYC’ Know Your Customer अपडेट करने में ढिलाई बरतते हैं। अगर आप समय पर जरूरी दस्तावेज जमा नहीं करते या आपका बैलेंस लगातार ‘नेगेटिव’ रहता है, तो बैंक रखरखाव नियमों के तहत लेनदेन रोक सकता है।

    असामान्य या हाई-वैल्यू ट्रांजैक्शन: अगर आपके खाते का पैटर्न अचानक बदल जाता है—जैसे अचानक बहुत बड़ी रकम का आना या बार-बार हाई-वैल्यू ट्रांजैक्शन होना—तो बैंक इसे सुरक्षा जोखिम मानकर अस्थायी रोक लगा सकता है ताकि पुष्टि की जा सके कि यह लेन-देन आप ही कर रहे हैं।

  • NBFC या बैंक: पर्सनल लोन लेने से पहले जानें सही विकल्प

    NBFC या बैंक: पर्सनल लोन लेने से पहले जानें सही विकल्प


    नई दिल्ली । पैसे की जरूरत पड़ने पर सबसे पहले दिमाग में बैंक आता है। लेकिन बैंक के अलावा भारत में नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी NBFC भी लाखों लोगों को लोन देती हैं। दोनों ही पर्सनल लोन की सुविधा देती हैं, लेकिन इनके बीच का फर्क समझना जरूरी है। लाइसेंसिंग, नियामक ढांचा और जमा स्वीकारने की क्षमता में अंतर होने के कारण सही विकल्प चुनना आपके भविष्य की आर्थिक परेशानियों से बचा सकता है।

    NBFC क्या है?
    NBFC वे कंपनियां हैं जो कंपनी अधिनियम 1956/2013 के तहत पंजीकृत होती हैं और RBI अधिनियम 1934 के अध्याय III-B के तहत विनियमित होती हैं। इनके पास बैंकिंग लाइसेंस नहीं होता, बल्कि उन्हें विशेष वित्तीय गतिविधियों के लिए रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट मिलता है। NBFC विभिन्न प्रकार के लोन देती हैं, फिक्स्ड डिपॉजिट सुविधा, बीमा और अन्य वित्तीय उत्पाद भी प्रदान करती हैं।

    बैंक क्या है?

    बैंक बैंकिंग विनियमन अधिनियम 1949 के तहत नियंत्रित होते हैं। ये बचत और चालू खाते के रूप में डिमांड डिपॉजिट स्वीकारते हैं और ऋण प्रदान करते हैं। NBFC और बैंक का सबसे बड़ा अंतर यह है कि बैंक भुगतान और निपटान प्रणाली का हिस्सा होते हैं और चेक/क्लीयरिंग सुविधा देते हैं, जबकि NBFC ऐसा नहीं कर सकती।

    NBFC से पर्सनल लोन क्यों लें?

    तेज प्रोसेसिंग: अधिकांश NBFC 24–48 घंटे में लोन राशि डिस्बर्स कर देती हैं। लचीले क्रेडिट मानदंड: मध्यम CIBIL स्कोर वाले या नए उधारकर्ता भी पात्र हो सकते हैं। कम दस्तावेज़ और डिजिटल प्रक्रिया: KYC और बैंक स्टेटमेंट ऑनलाइन अपलोड कर लोन प्रक्रिया पूरी होती है। कस्टमाइज्ड लोन: ट्रैवल, वेडिंग या छोटे ब्रिज लोन जैसी विशेष जरूरतों के लिए प्रोडक्ट डिजाइन किए जाते हैं। प्रतिस्पर्धी दरें: स्थिर आय और अच्छे रिकॉर्ड वाले ग्राहकों को आकर्षक ब्याज दर मिल सकती है।

    बैंक से पर्सनल लोन क्यों लें?

    कम ब्याज दर: बैंक की ब्याज दर NBFC से 2–5% कम हो सकती है।पारदर्शी शुल्क: RBI दिशा-निर्देशों से छिपे चार्ज कम होते हैं।बड़ी लोन राशि: ₹20–40 लाख तक बड़े लोन के लिए बैंक उपयुक्त हैं। मौजूदा संबंध का लाभ: सैलरी अकाउंट या FD से प्री-अप्रूव्ड लोन और विशेष ब्याज दर मिल सकती है। शाखा नेटवर्क और ग्राहक सहायता: समस्या का समाधान सीधे शाखा में मिल सकता है।

    NBFC vs बैंक: कौन बेहतर?

    यदि आपको तेजी और सुविधा चाहिए तो NBFC बेहतर हैं। वहीं, यदि आपकी प्राथमिकता कम ब्याज दर, बड़ी राशि और दीर्घकालिक विश्वसनीयता है तो बैंक अधिक उपयुक्त हैं। दोनों RBI द्वारा विनियमित हैं, लेकिन बैंक में बचत खाते पर DICGC बीमा का अतिरिक्त सुरक्षा लाभ मिलता है।

  • सोना-चांदी की कीमतों में 'यू-टर्न': रिकवरी के बाद भी हाई लेवल से ₹1.67 लाख सस्ती है चांदी, जानें निवेश का सही मौका!

    सोना-चांदी की कीमतों में 'यू-टर्न': रिकवरी के बाद भी हाई लेवल से ₹1.67 लाख सस्ती है चांदी, जानें निवेश का सही मौका!


    नई दिल्ली ।भारतीय सर्राफा बाजार और मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर बीते एक सप्ताह के दौरान हलचल तेज रही है। लंबे समय की गिरावट के बाद सोने और चांदी की कीमतों ने एक बार फिर ‘यू-टर्न’ लिया है और निवेशकों के चेहरों पर चमक लौट आई है। बीते हफ्ते दोनों कीमती धातुओं में जोरदार उछाल देखने को मिला, लेकिन सबसे दिलचस्प बात यह है कि इस हालिया तेजी के बावजूद सोना और चांदी अपने ऑल-टाइम हाई लेवल से अब भी काफी रियायती दरों पर उपलब्ध हैं। खास तौर पर चांदी की बात करें तो यह अपने जीवनकाल के उच्चतम स्तर से अभी भी 1.67 लाख रुपये प्रति किलो से ज्यादा सस्ती मिल रही है, जो खरीदारों के लिए एक बड़ा अवसर साबित हो सकता है।

    बाजार के आंकड़ों पर गौर करें तो चांदी की कीमतों में बीते सप्ताह जबरदस्त रिकवरी दर्ज की गई है। हफ्ते भर के भीतर चांदी 8,584 रुपये प्रति किलोग्राम तक महंगी हुई है। 13 फरवरी को जहां चांदी 2,44,360 रुपये पर बंद हुई थी, वहीं शुक्रवार तक यह उछलकर 2,52,944 रुपये के स्तर पर पहुंच गई। हालांकि, यदि हम इसकी तुलना 29 जनवरी के उस ऐतिहासिक दिन से करें जब चांदी ने पहली बार 4 लाख का आंकड़ा पार करते हुए 4,20,048 रुपये प्रति किलो का “लाइफ टाइम हाई” छुआ था, तो मौजूदा भाव अब भी 1,67,104 रुपये प्रति किलोग्राम कम है। चांदी की कीमतों में आया यह “क्रैश” उन लोगों के लिए मुफीद है जो लंबी अवधि के लिए निवेश की योजना बना रहे हैं।

    चांदी की ही राह पर चलते हुए सोने ने भी बीते सप्ताह अपनी चमक बिखेरी है। एमसीएक्स पर 2 अप्रैल की एक्सपायरी वाला सोना हफ्ते भर में 981 रुपये महंगा होकर 1,56,876 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर पहुंच गया। सोने की कहानी भी चांदी जैसी ही है; बीते महीने 29 जनवरी को सोना भागते हुए 1,93,096 रुपये के शिखर पर पहुंच गया था, लेकिन उसके बाद आई भारी गिरावट की वजह से यह अब भी अपने हाई लेवल से लगभग 36,220 रुपये सस्ता बना हुआ है।

    घरेलू बाजार की बात करें तो इंडियन बुलियन ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) की वेबसाइट के अनुसार, शुद्धता के आधार पर सोने की कीमतों में भी बदलाव आया है। वर्तमान में 24 कैरेट गोल्ड का रेट 1,55,066 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बना हुआ है। वहीं, आभूषणों के लिए सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाले 22 कैरेट सोने का भाव 1,51,340 रुपये प्रति 10 ग्राम दर्ज किया गया है। इसके अलावा, 20 कैरेट सोने का रेट 1,38,010 रुपये और 18 कैरेट का भाव 1,25,600 रुपये प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गया है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि कीमतों में आई यह हालिया रिकवरी वैश्विक अनिश्चितताओं का परिणाम हो सकती है, लेकिन हाई लेवल से भारी गिरावट के कारण अभी भी बाजार में खरीदारी का माहौल बना हुआ है।

  • निवेशकों के लिए सुनहरा सप्ताह: 23 फरवरी से 9 IPO की बहार, 4 कंपनियों की होगी लिस्टिंग

    निवेशकों के लिए सुनहरा सप्ताह: 23 फरवरी से 9 IPO की बहार, 4 कंपनियों की होगी लिस्टिंग


    नई दिल्ली। प्राइमरी मार्केट में अगले सप्ताह जबरदस्त हलचल देखने को मिलेगी। 23 फरवरी से शुरू हो रहे कारोबारी सप्ताह में कुल नौ नए आईपीओ निवेश के लिए खुलने जा रहे हैं। इनमें चार मेनबोर्ड सेगमेंट के बड़े इश्यू शामिल हैं, जबकि शेष SME प्लेटफॉर्म से हैं। इसके साथ ही दो पहले से खुले आईपीओ में भी निवेश का मौका रहेगा। इतना ही नहीं, 24 से 27 फरवरी के बीच चार कंपनियां शेयर बाजार में डेब्यू करने वाली हैं, जिससे बाजार में उत्साह और बढ़ेगा।

    मेनबोर्ड में बड़े दांव, निवेशकों की नजरें टिकीं
    23 फरवरी को ₹3100 करोड़ का बड़ा इश्यू लेकर Clean Max Enviro Energy Solutions बाजार में उतरेगी। इसका प्राइस बैंड ₹1000-₹1053 प्रति शेयर तय है और 14 शेयरों के लॉट में आवेदन किया जा सकेगा। इसी दिन Shree Ram Twistex का ₹110.24 करोड़ का आईपीओ खुलेगा, जिसका प्राइस बैंड ₹95-₹104 है।

    24 फरवरी को ज्वेलरी सेक्टर की कंपनी PNGS Reva Diamond Jewellery ₹380 करोड़ का इश्यू लेकर आएगी। इसका प्राइस बैंड ₹367-₹386 प्रति शेयर है। वहीं 25 फरवरी से Omnitech Engineering का ₹583 करोड़ का आईपीओ खुलेगा, जो 27 फरवरी तक निवेश के लिए उपलब्ध रहेगा। इन कंपनियों की संभावित लिस्टिंग क्रमशः 2, 4 और 5 मार्च को बीएसई और एनएसई पर हो सकती है।

    SME सेगमेंट में भी रौनक

    SME प्लेटफॉर्म पर भी गतिविधियां तेज रहेंगी। Kiaasa Retail 23 से 25 फरवरी के बीच ₹69.72 करोड़ जुटाने की योजना के साथ आएगी। इसी अवधि में Mobilise App और Accord Transformer & Switchgear के इश्यू खुलेंगे। 25 फरवरी से Yaap Digital और 26 फरवरी से Striders Impex का पब्लिक इश्यू निवेशकों के लिए उपलब्ध रहेगा। इन सभी कंपनियों की लिस्टिंग मार्च के पहले सप्ताह में BSE SME या NSE SME प्लेटफॉर्म पर संभावित है।

    पहले से खुले इश्यू और लिस्टिंग पर नजर
    20 फरवरी से खुले Gaudium IVF के ₹165 करोड़ के आईपीओ को अब तक लगभग 90 प्रतिशत सब्सक्रिप्शन मिल चुका है। वहीं Manilam Industries का ₹39.95 करोड़ का इश्यू अपेक्षाकृत धीमा रहा है। दोनों की संभावित लिस्टिंग 27 फरवरी को हो सकती है। 24 फरवरी को Fractal Industries और 25 फरवरी को Yashhtej Industries (India) की बाजार में एंट्री संभावित है।

    बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि निवेश से पहले कंपनी के वित्तीय प्रदर्शन, कर्ज की स्थिति और वैल्यूएशन का आकलन जरूर करें, क्योंकि शेयर बाजार में निवेश जोखिमों के अधीन होता है। 23 फरवरी से शुरू हो रहे सप्ताह में नौ नए आईपीओ और चार लिस्टिंग के साथ प्राइमरी मार्केट में जबरदस्त हलचल रहेगी। निवेशकों के लिए अवसर तो भरपूर हैं, लेकिन समझदारी से निर्णय लेना जरूरी होगा।

  • कीमती धातुओं में आग, 2026 में अब तक सोना 22 हजार और चांदी 20 हजार महंगी

    कीमती धातुओं में आग, 2026 में अब तक सोना 22 हजार और चांदी 20 हजार महंगी


    नई दिल्ली।देश के सर्राफा बाजार में इस सप्ताह कीमती धातुओं में उल्लेखनीय तेजी दर्ज की गई है ताजा आंकड़ों के अनुसार सोना 2300 रुपये उछलकर 1.55 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया है जो पिछले सप्ताह 1.53 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम था वहीं चांदी 2.42 लाख रुपये प्रति किलो से बढ़कर 2.50 लाख रुपये प्रति किलो पर पहुंच गई है यानी केवल एक सप्ताह में 8000 रुपये की मजबूती दर्ज की गई

    2026 की शुरुआत से अब तक सोने की कीमत में लगभग 22000 रुपये और चांदी में करीब 20000 रुपये की वृद्धि हो चुकी है वर्ष के दौरान कीमतों में उतार चढ़ाव जरूर रहा लेकिन समग्र रुझान तेजी का बना हुआ है 29 जनवरी को सोने ने 1.76 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम और चांदी ने 3.86 लाख रुपये प्रति किलो का रिकॉर्ड स्तर छुआ था हालांकि उसके बाद कुछ मुनाफावसूली देखी गई

    विशेषज्ञों के अनुसार वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता मुद्रा विनिमय दरों में उतार चढ़ाव और सुरक्षित निवेश की बढ़ती मांग ने सोने और चांदी को सहारा दिया है अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर की चाल और भू राजनीतिक तनाव भी कीमती धातुओं के भाव को प्रभावित कर रहे हैं निवेशक अस्थिर बाजार परिस्थितियों में सोने को सुरक्षित विकल्प के रूप में देख रहे हैं

    अगर पिछले वर्ष के प्रदर्शन पर नजर डालें तो 2025 में सोने की कीमत में 57000 रुपये यानी लगभग 75 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई थी 31 दिसंबर 2024 को 24 कैरेट सोना 76000 रुपये प्रति 10 ग्राम था जो 31 दिसंबर 2025 तक बढ़कर 1.33 लाख रुपये पर पहुंच गया इसी अवधि में चांदी 86000 रुपये प्रति किलो से बढ़कर 2.30 लाख रुपये प्रति किलो हो गई जो लगभग 167 प्रतिशत की तेजी दर्शाती है

    बाजार जानकारों का कहना है कि खुदरा खरीदारों को ऊंची कीमतों के इस दौर में सतर्कता बरतनी चाहिए खरीदारी से पहले शुद्धता और पारदर्शिता की जांच बेहद जरूरी है उपभोक्ताओं को सलाह दी जाती है कि वे केवल Bureau of Indian Standards द्वारा प्रमाणित हॉलमार्क वाला सोना ही खरीदें जिससे शुद्धता सुनिश्चित हो सके इसके अलावा दैनिक दरों की पुष्टि के लिए India Bullion and Jewellers Association जैसे विश्वसनीय स्रोतों से मिलान करना बेहतर माना जाता है

    विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि आगे के महीनों में अंतरराष्ट्रीय संकेतकों के आधार पर कीमतों में और उतार चढ़ाव संभव है ऐसे में निवेशकों को लंबी अवधि की रणनीति अपनानी चाहिए और केवल अफवाहों के आधार पर निर्णय लेने से बचना चाहिए

  • 1 अप्रैल 2026 से हाईवे टोल पर कैश पूरी तरह बंद, केवल FASTag और UPI से होगा भुगतान

    1 अप्रैल 2026 से हाईवे टोल पर कैश पूरी तरह बंद, केवल FASTag और UPI से होगा भुगतान


    नई दिल्ली।देश के राष्ट्रीय राजमार्गों पर यात्रा करने वाले वाहन चालकों के लिए 1 अप्रैल 2026 से बड़ा बदलाव लागू होने जा रहा है National Highways Authority of India ने सभी राष्ट्रीय राजमार्ग टोल प्लाजा पर नकद भुगतान पूरी तरह समाप्त करने की तैयारी शुरू कर दी है नई व्यवस्था लागू होने के बाद टोल शुल्क केवल FASTag या UPI जैसे डिजिटल माध्यमों से ही स्वीकार किया जाएगा

    अधिकारियों के अनुसार देशभर में 1150 से अधिक टोल प्लाजा पर पहले से इलेक्ट्रॉनिक टोल कलेक्शन प्रणाली लागू है जिसे अब पूर्ण रूप से अनिवार्य किया जाएगा इस फैसले का उद्देश्य टोल संचालन को अधिक पारदर्शी बनाना और ट्रैफिक जाम की समस्या को कम करना है

    NHAI का कहना है कि नकद भुगतान के कारण टोल प्लाजा पर पीक ऑवर्स में लंबी कतारें लग जाती हैं छुट्टे पैसों को लेकर होने वाले विवाद और मैन्युअल एंट्री की प्रक्रिया यातायात की रफ्तार को धीमा कर देती है डिजिटल भुगतान अनिवार्य होने से वाहनों की आवाजाही तेज होगी और यात्रा समय में कमी आएगी

    आंकड़ों के मुताबिक देश में 98 प्रतिशत से अधिक वाहनों में FASTag पहले से लगा हुआ है वर्तमान नियमों के तहत यदि कोई वाहन बिना सक्रिय FASTag के टोल लेन में प्रवेश करता है तो उससे दोगुना शुल्क वसूला जाता है डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के लिए पहले से ही कई प्रावधान लागू हैं अब इसे पूरी तरह अनिवार्य बनाकर नकद लेनदेन को समाप्त किया जाएगा

    विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम डिजिटल इंडिया की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रगति है पूरी तरह डिजिटल टोल प्रणाली से डेटा प्रबंधन अधिक सटीक होगा राजस्व लीकेज पर नियंत्रण लगेगा और राजमार्ग संचालन की निगरानी बेहतर तरीके से की जा सकेगी इससे परिवहन क्षेत्र में पारदर्शिता और दक्षता दोनों बढ़ेंगी

    हालांकि कुछ वाहन चालकों और ट्रांसपोर्ट संगठनों ने ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट कनेक्टिविटी और डिजिटल भुगतान साक्षरता को लेकर चिंता जताई है उनका कहना है कि दूरदराज इलाकों में नेटवर्क की समस्या के कारण भुगतान में दिक्कत आ सकती है इस पर अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि संक्रमण काल में व्यापक जागरूकता अभियान चलाए जाएंगे और उपयोगकर्ताओं को नई प्रणाली के अनुकूल बनाया जाएगा

    सरकार का मानना है कि हाईवे नेटवर्क को तकनीकी रूप से अधिक सक्षम बनाने के लिए यह आवश्यक कदम है आने वाले समय में टोल संग्रह की प्रक्रिया पूरी तरह ऑटोमेटेड और डेटा आधारित होगी जिससे यात्रा अनुभव बेहतर और सुगम बनेगा

  • टैरिफ वॉर और कमजोर अमेरिकी अर्थव्यवस्था ने सोने को बनाया सुरक्षित निवेश, दिल्ली-मुंबई-इंदौर में रिकॉर्ड रेट्स

    टैरिफ वॉर और कमजोर अमेरिकी अर्थव्यवस्था ने सोने को बनाया सुरक्षित निवेश, दिल्ली-मुंबई-इंदौर में रिकॉर्ड रेट्स


    अंतरराष्ट्रीय और घरेलू बाजारों में सोने की कीमतों ने निवेशकों को चौका दिया अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीति पर अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के कड़े रुख और कमजोर आर्थिक आंकड़ों ने वैश्विक सर्राफा बाजार में भूचाल ला दिया शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप के टैरिफ को अवैध करार दिया और रद्द कर दिया इसके जवाब में ट्रंप ने पूरी दुनिया पर 10% का नया ग्लोबल टैरिफ लगाने की घोषणा की इस राजनीतिक उठापटक के बीच निवेशक सुरक्षित निवेश के लिए सोने की ओर बढ़ गए

    अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों में 1.5% से अधिक तेजी देखी गई स्पॉट गोल्ड $5071.48 प्रति औंस पर पहुंच गया जबकि गोल्ड फ्यूचर्स अप्रैल डिलीवरी 1.7% की बढ़त के साथ $5080.90 पर बंद हुआ इस तेजी को अमेरिकी चौथी तिमाही जीडीपी 1.4% में गिरने के आंकड़े से भी समर्थन मिला जो अनुमानित 3% से काफी कम था सरकारी शटडाउन और कम उपभोक्ता खर्च ने अमेरिकी अर्थव्यवस्था की गति धीमी कर दी

    भारत में भी सोने के दाम मजबूती दिखा रहे हैं मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज MCX पर अप्रैल का फ्यूचर कॉन्ट्रैक्ट ₹156993 प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ वहीं इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन IBJA के अनुसार 24 कैरेट सोना ₹155066, 23 कैरेट ₹154445, 22 कैरेट ₹142040, 18 कैरेट ₹116300 और 14 कैरेट ₹90714 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बिक रहा है

    शहरवार सोने के भाव भी उभरे दिल्ली में 24 कैरेट ₹157520 और 22 कैरेट ₹144400 मुंबई में 24 कैरेट ₹157370 और 22 कैरेट ₹144250 इंदौर में 24 कैरेट ₹157420 और 22 कैरेट ₹144300 रिकॉर्ड किए गए निवेशकों का रुझान सुरक्षित धातु की ओर बढ़ गया है

    स्वतंत्र धातु व्यापारी ताई वोंग का मानना है कि ट्रंप हार मानने वालों में से नहीं हैं वे टैरिफ फिर से लगाने के अन्य कानूनी रास्तों की तलाश करेंगे इससे बाजार में अस्थिरता बढ़ेगी हालांकि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के तुरंत बाद वॉल स्ट्रीट के प्रमुख स्टॉक इंडेक्स में उछाल देखा गया लेकिन सोने की चमक आर्थिक अनिश्चितता के कारण बरकरार है

    विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक टैरिफ विवाद, अमेरिकी आर्थिक धीमी गति और सुरक्षित निवेश की मांग ने सोने की कीमतों को मजबूती दी निवेशक इस समय किसी भी जोखिम से बचने के लिए सोने और अन्य कीमती धातुओं की ओर आकर्षित हो रहे हैं यह प्रवृत्ति आने वाले हफ्तों में भी जारी रहने की संभावना है

    अंतरराष्ट्रीय भूचाल और अमेरिकी कोर्ट फैसले के बाद सोने की कीमतों में तेजी न सिर्फ निवेशकों बल्कि घरेलू खरीदारों के लिए भी संकेत है इस दौर में सोने का बाजार लगातार अपडेट हो रहा है और शहरवार रेट्स निवेशकों के लिए मार्गदर्शन का काम कर रहे हैं

  • अमेरिकी राष्ट्रपति ने धारा 122 के तहत टैरिफ लगाया, 150 दिनों के लिए आयात शुल्क लागू

    अमेरिकी राष्ट्रपति ने धारा 122 के तहत टैरिफ लगाया, 150 दिनों के लिए आयात शुल्क लागू


    नई दिल्ली । अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिकी अर्थव्यवस्था में आयातित वस्तुओं के लिए 10 प्रतिशत का अस्थायी टैरिफ लगाने का आदेश दिया है यह आदेश 24 फरवरी से प्रभावी होगा और 150 दिनों तक लागू रहेगा इस टैरिफ का उद्देश्य अमेरिकी व्यापार घाटे और अंतरराष्ट्रीय भुगतान समस्याओं को संबोधित करना है

    धारा 122 क्या है और इसे क्यों लागू किया गया
    ट्रेड एक्ट 1974 की धारा 122 राष्ट्रपति को अधिकार देती है कि वे सरचार्ज और विशेष आयात प्रतिबंधों के माध्यम से अमेरिका की आर्थिक सुरक्षा को प्रभावित करने वाले अंतरराष्ट्रीय भुगतान संकटों का समाधान कर सकें इस प्रावधान के तहत राष्ट्रपति औपचारिक जांच की आवश्यकता के बिना त्वरित कार्रवाई कर सकते हैं

    कौन-कौन सी वस्तुएं टैरिफ से मुक्त रहेंगी
    व्हाइट हाउस की फैक्टशीट के अनुसार, कुछ महत्वपूर्ण वस्तुएं टैरिफ से मुक्त रहेंगी इनमें खनिज, मुद्रा और बुलियन धातुएं, ऊर्जा और ऊर्जा उत्पाद, प्राकृतिक संसाधन और उर्वरक, कुछ कृषि उत्पाद, फार्मास्यूटिकल्स और उनका कच्चा माल, इलेक्ट्रॉनिक्स, यात्री वाहन और अन्य आवश्यक वस्तुएं शामिल हैं

    अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि को दिए गए निर्देश
    राष्ट्रपति ने अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय को धारा 301 के तहत निर्देश दिया है कि वे उन देशों की जांच करें जिनकी नीतियां और कानून अमेरिकी व्यापार को नुकसान पहुंचा रही हैं या भेदभाव कर रहे हैं इस कदम का मकसद अनुचित व्यापार प्रथाओं का विरोध करना और अमेरिकी कंपनियों को सुरक्षित रखना है

    अर्थव्यवस्था पर प्रभाव और आगे की संभावनाएँ
    राष्ट्रपति ट्रंप के अनुसार अमेरिका को व्यापार घाटे और घरेलू उत्पादन में कमी के कारण अपनी अधिकांश वस्तुएं आयात करनी पड़ती हैं जिससे अमेरिकी डॉलर विदेशों में चले जाते हैं टैरिफ 150 दिनों के बाद अपने आप समाप्त हो जाएगा लेकिन यदि आवश्यक हुआ तो राष्ट्रपति नई भुगतान संतुलन आपातकाल की घोषणा कर इसे फिर से लागू कर सकते हैं

    विशेषज्ञों की राय
    व्यापार विशेषज्ञों का मानना है कि धारा 122 के तहत टैरिफ लगाना अन्य व्यापार कानूनों की तुलना में तेज और अधिक प्रभावी है क्योंकि इसके लिए लंबी औपचारिक जांच की आवश्यकता नहीं होती यह अमेरिकी व्यापार हितों की रक्षा के लिए तात्कालिक कदम उठाने की अनुमति देता है
    ट्रंप प्रशासन का यह कदम अमेरिका की अंतरराष्ट्रीय व्यापार नीति को मजबूत करने और घरेलू उद्योगों को बढ़ावा देने की दिशा में एक रणनीतिक पहल है हालांकि इसके प्रभाव और प्रतिक्रिया दुनिया भर में निगरानी के दायरे में रहेंगे

  • RBI का बड़ा ऐलान… साइबर फ्रॉड के पीड़ितों को मिलेगा 25000 रुपये तक मुआवजा

    RBI का बड़ा ऐलान… साइबर फ्रॉड के पीड़ितों को मिलेगा 25000 रुपये तक मुआवजा


    नई दिल्ली।
    साइबर फ्रॉड (Cyber ​​fraud) के शिकार लोगों को भारतीय रिजर्व बैंक (Reserve Bank of India) की ओर से थोड़ी राहत मिलने वाली है। बीते दिनों रिजर्व बैंक ने डिजिटल फ्रॉड में हो रही बढ़ोतरी के बीच ग्राहकों को धोखाधड़ी वाले ट्रांजैक्शन के लिए 25,000 रुपये तक की मुआवजा देने की घोषणा की। आइए जानते हैं कि ये मुआवजा किसे और कैसे मिलेगा।


    किस तरह के पीड़ित को मिलेगा मुआवजा?

    साइबर फ्रॉड के पीड़ितों को 25,000 रुपये का मुआवजा उन मामलों में भी दिया जाएगा जहां ग्राहक गलती से अपना वन-टाइम पासवर्ड (ओटीपी) धोखेबाजों के साथ साझा कर देते हैं। मतलब ये कि अगर आपने गलती से स्कैमर को ओटीपी शेयर कर दिया है और आपके बैंक से पैसे कट गए हैं तो आप इस स्कीम का लाभ लेने के लिए योग्य हैं।

    सिर्फ एक बार ही लाभ
    रिजर्व बैंक के गवर्नर ने स्पष्ट किया था कि पीड़ित को जीवन में केवल एक बार ही मुआवजा मिलेगा। कहने का मतलब है कि अगर आपके साथ बार-बार साइबर फ्रॉड होता है तो इस योजना का फायदा नहीं मिलेगा। आरबीआई अधिकारियों के मुताबिक डिजिटल धोखाधड़ी के मामलों में दो-तिहाई मामले 50,000 रुपये से कम के हैं। धोखाधड़ी से प्रभावित लोगों में से ज्यादातर को इस सुविधा से लाभ होगा। कैल्कुलेशन पर गौर करें तो धोखाधड़ी की राशि में से 15 प्रतिशत का नुकसान ग्राहक को उठाना होगा और 15 प्रतिशत का नुकसान संबंधित बैंक उठाएगा। शेष 70 प्रतिशत राशि केंद्रीय रिजर्व बैंक देगा। हालांकि किसी भी स्थिति में ग्राहक को 25,000 रुपये से अधिक का हर्जाना नहीं मिलेगा। आरबीआई 70 प्रतिशत नुकसान की भरपाई के लिए अपनी सरप्लस आय का इस्तेमाल करेगा। गर्वनर के मुताबिक इसके लिए केंद्रीय बैंक के पास पर्याप्त पैसा है। हालांकि, इस योजना का फ्रेमवर्क अभी तैयार नहीं है।


    साइबर फ्रॉड से कैचे बचे

    साइबर फ्रॉड से बचाव के लिए जरूरी है कि OTP, पासवर्ड, PIN, CVV कभी किसी को न बताएं। अनजान लिंक / QR कोड पर क्लिक / स्कैन न करें । मजबूत और अलग-अलग पासवर्ड रखें और 2FA (टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन) जरूर चालू करें। UPI और बैंकिंग में सावधानी पेमेंट से पहले हमेशा रिसीवर का नाम चेक करें। बैंक ऐप से ही ट्रांजेक्शन करें। अनजान नंबर से बैंक कॉल आए तो काट दें और खुद बैंक के ऑफिशियल नंबर पर कॉल करें। साइबर फ्रॉड होने पर तुरंत 1930 (साइबर क्राइम हेल्पलाइन) पर कॉल करें। इसके अलावा, cybercrime.gov.in पर कंप्लेंट दर्ज करें। वहीं, बैंक को तुरंत बताएं और अकाउंट फ्रीज/ब्लॉक करवाएं। साइबर फ्रॉड के मामले में अपने नजदीकी साइबर थाना जाकर भी आपको शिकायत दर्ज करानी होती है।