Category: Economy

  • सरकार 8वें वेतन आयोग पर लेकर आ सकती है बड़ा फैसला, 2026-27 से लागू होने की चर्चा तेज

    सरकार 8वें वेतन आयोग पर लेकर आ सकती है बड़ा फैसला, 2026-27 से लागू होने की चर्चा तेज


    नई दिल्ली
    । केंद्र सरकार के लाखों कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए खुशखबरी से भरी बड़ी अपडेट सामने आई है। लंबे इंतज़ार के बाद 8वें वेतन आयोग की प्रक्रिया तेज़ी से आगे बढ़ रही है। नवंबर 2025 में आयोग का गठन औपचारिक रूप से पूरा हो चुका है और इसके टर्म्स ऑफ रेफरेंस को केंद्र की मंजूरी मिल चुकी है। इसी के साथ कर्मचारी वर्ग के बीच यह उम्मीद और भी मजबूत हो गई है कि उनकी सैलरी और पेंशन में बड़ी बढ़ोतरी अब ज्यादा दूर नहीं।

    सरकारी सूत्रों के अनुसार, इस बार आयोग की सिफारिशें 2026 के अंत से 2027 की शुरुआत के बीच लागू की जा सकती हैं। ऐसे समय में जब महंगाई लगातार लोगों की जेब पर भार डाल रही है, यह वृद्धि कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए राहत की बड़ी सौगात साबित हो सकती है।

    आयोग को रिपोर्ट तैयार करने में 18–24 महीने लगने का अनुमान

    8वें वेतन आयोग को अपनी विस्तृत रिपोर्ट सौंपने के लिए शुरुआत में 18 महीने दिए गए हैं। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि काम की व्यापकता और विभिन्न मंत्रालयों से डेटा इकट्ठा करने में आयोग को 18 से बढ़कर 24 महीने तक भी लग सकते हैं   फिलहाल, वेतन ढांचे, भत्तों और पेंशन से जुड़े अधिकतर आंकड़े इकट्ठा किए जा चुके हैं। आयोग विभिन्न कर्मचारी संगठनों, केंद्रीय मंत्रालयों और राज्यों से फीडबैक भी ले रहा है, जिससे संकेत मिलता है कि रिपोर्ट का निर्माण तेज़ी से आगे बढ़ रहा है।

    कब बढ़ेगी सैलरी और पेंशन?

    वित्तीय मामलों के विशेषज्ञ स्वप्निल अग्रवाल के मुताबिक, किसी भी वेतन आयोग की सिफारिशों को लागू करने में सरकार को रिपोर्ट मिलने के बाद 12 से 24 महीने लग जाते हैं। 7वें वेतन आयोग को लागू होने में लगभग 29 महीने लगे थे। इसी पैटर्न के आधार पर माना जा रहा है कि 8वें वेतन आयोग की सिफारिशें 2026 के अंत या 2027 की पहली तिमाही में लागू हो सकती हैं। इसके लागू होने पर: बेसिक पे, महंगाई भत्ता DA, मकान किराया भत्ता HRA ट्रांसपोर्ट एवं अन्य भत्ते पेंशन  इन सभी में एक साथ बड़ी बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।

    UP चुनाव से पहले बड़ा ऐलान संभव?

    राजनीतिक हलकों में भी वेतन आयोग की चर्चा तेज़ है। 2027 के फरवरी में उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव होने हैं। विश्लेषकों का कहना है कि बड़ा कर्मचारी वर्ग होने के कारण UP में वेतन आयोग का प्रभाव काफी अहम होगा।इसलिए संभावना जताई जा रही है कि सरकार चुनाव से पहले वेतन आयोग लागू कर कर्मचारी समुदाय को बड़ी राहत दे सकती है। कुछ वरिष्ठ अधिकारियों का मानना है कि अगर पूरी रिपोर्ट लागू करना संभव नहीं हुआ, तो सरकार अंतरिम राहत के तौर पर बेसिक पे में आंशिक बढ़ोतरी भी कर सकती है।

    क्या आयोग को स्थगित करने की संभावना है?

    विशेषज्ञों का मानना है कि अब 8वें वेतन आयोग को टालना लगभग असंभव है। आयोग का गठन हो चुका है। ToR मंजूर हो चुके हैं । सरकार पहले ही 1 जनवरी 2026 से इसे लागू करने का लक्ष्य तय कर चुकी है। साथ ही दिसंबर 2027 में राजस्थान चुनाव और 2029 के लोकसभा चुनाव भी सरकार के कैलेंडर को प्रभावित करते हैं। ऐसे में आयोग को समय से लागू करना ही सरकार के लिए अधिक व्यावहारिक माना जा रहा है।

    लागू होने पर किन चीजों में होगा बदलाव?

    8वें वेतन आयोग के लागू होते ही सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स की आय में कई बड़े परिवर्तन होने वाले हैं: बेसिक सैलरी में उल्लेखनीय वृद्धि, DA की नई दरें HRA का पुनर्गठन ट्रांसपोर्ट व अन्य अलाउंस सुधार  पेंशन में बड़ा उछाल  कुछ पुराने भत्ते हटाने और नए जोड़ने की संभावना

    इससे कुल मासिक आय में अच्छा खासा सुधार आएगा।

    कुल मिलाकर, 8वें वेतन आयोग का काम अंतिम चरण में प्रवेश कर चुका है। अगर सब कुछ योजना के अनुसार आगे बढ़ा, तो 2026–27 तक करोड़ों कर्मचारियों और पेंशनर्स की आय में भारी बढ़ोतरी देखने को मिलेगी। इससे न केवल उनकी वित्तीय स्थिति मजबूत होगी, बल्कि घरेलू उपभोग बढ़ने से अर्थव्यवस्था में भी नई गति आने की उम्मीद है।

  • छोटा शेयर, बड़ा धमाका: साल में 454% उछलाा, बड़े ऐलान के बाद फिर लगा अपर सर्किट

    छोटा शेयर, बड़ा धमाका: साल में 454% उछलाा, बड़े ऐलान के बाद फिर लगा अपर सर्किट


    नई दिल्‍ली । स्मॉल कैप स्पाइस लाउंज फूड वर्क्स के शेयर की कीमत गुरुवार, 4 दिसंबर को 5% अपर सर्किट तक पहुंच गई। कंपनी ने WingZone के एक्सक्लूसिव मास्टर फ्रेंचाइजी अधिकार हासिल करने की घोषणा की है। गुरुवार को यह शेयर 52.70 रुपये प्रति शेयर के भाव पर खुला, जबकि बुधवार को इसका पिछला बंद भाव 50.47 रुपये था। स्पाइस लाउंज फूड वर्क्स के शेयर ने मल्टीबैगर रिटर्न दिया है। सिर्फ छह महीने में 137.62% का उछाल, इस साल अब तक 454.29% की बढ़त और पिछले एक साल में 896% की वृद्धि।

    आज की तेजी का कारण
    4 दिसंबर की एक घोषणा में स्पाइस लाउंज फूड वर्क्स ने बताया कि उसने WingZone के एक्सक्लूसिव मास्टर फ्रेंचाइजी अधिकार हासिल कर लिए हैं। WingZone एक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त क्विक सर्विस रेस्टोरेंट ब्रांड है, जो अपने चिकन-बेस्ड प्रोडक्ट्स और स्वादिष्ट मेनू इनोवेशन के लिए प्रसिद्ध है।

    भारत में योजना
    कंपनी की योजना भारत के उपभोक्ताओं तक WingZone को पहुंचाने की है, इसके लिए हाई-स्ट्रीट आउटलेट और क्लाउड-किचन फॉर्मेट के मिश्रण का रणनीतिक इस्तेमाल किया जाएगा। इससे ब्रांड की पहुँच आसान होगी और विकास को बढ़ावा मिलेगा।

    स्पाइस लाउंज फूड वर्क्स लिमिटेड के चेयरपर्सन और डायरेक्टर मोहन बाबू करजेला ने कहा कि वे भारत में WingZone लाने को लेकर उत्साहित हैं और यह साझेदारी कंपनी की लंबे समय की ग्रोथ रणनीति के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है।

    भारतीय QSR बाजार में उपभोक्ताओं की बदलती पसंद, बढ़ते शहरीकरण और वैश्विक खाद्य प्रारूपों की बढ़ती स्वीकार्यता के कारण मजबूत गति देखी जा रही है। WingZone के अंतरराष्ट्रीय स्वाद और कंपनी के परिचालन कौशल के कारण यह अवसर अच्छा है।

    लॉन्च और भविष्य की रूपरेखा
    घोषणा के अनुसार, कंपनी जनवरी 2026 में कोरमंगला, बैंगलोर में भारत का पहला WingZone आउटलेट लॉन्च करेगी।

    लॉन्च के बाद, स्पाइस लाउंज फूड वर्क्स का इरादा WingZone की मौजूदगी बैंगलोर, हैदराबाद और चेन्नई में अतिरिक्त आउटलेट्स के साथ बढ़ाने का है। इसके बाद अन्य प्रमुख शहरों में भी रोलआउट की योजना है।

    करजेला ने कहा कि बैंगलोर के कोरमंगला में लॉन्च केवल एक शुरुआत है। प्रमुख महानगरों में विस्तार के लिए एक स्पष्ट रोडमैप है, जिसमें हाई-स्ट्रीट स्टोर और क्लाउड किचन का संयोजन होगा। इससे सुलभता और विस्तार दोनों सुनिश्चित होंगे। यह अधिग्रहण एक विविधतापूर्ण मल्टी-ब्रांड पोर्टफोलियो बनाने के सपने को मजबूत करता है और भारत के तेजी से बढ़ते फूड सर्विस सेक्टर में एक अग्रणी खिलाड़ी बनने के संकल्प को पुष्ट करता है।

  • नए लेबर कोड में कर्मचारियों को बड़ी राहत… नौकरी से हटाने पर 48 घंटे में करना होगा पूरा भुगतान

    नए लेबर कोड में कर्मचारियों को बड़ी राहत… नौकरी से हटाने पर 48 घंटे में करना होगा पूरा भुगतान


    नई दिल्ली।
    केंद्र सरकार (Central Government) द्वारा लागू नए लेबर कोड (New Labour Code) में कर्मचारियों को बड़ी राहत दी गई है। इसके तहत अब किसी भी कर्मचारी के नौकरी छोड़ने, इस्तीफा देने या बर्खास्त होने की स्थिति में उसका पूरा भुगतान नियोक्ता कंपनी (Employer Company) को सिर्फ दो कार्य दिवसों में करना होगा। पहले इसके लिए कोई निर्धारित समयसीमा तय नहीं थी।

    यह प्रावधान श्रम संहिता-2019 में जोड़ा गया है। अभी तक कई कंपनियों में फुल एंड फाइनल सेटलमेंट में 30 से 45 दिन तक लगते थे। कई मामलों में कंपनियां अगले वेतन साइकल का इंतजार करती थीं। इससे कर्मचारियों को आर्थिक दिक्कतों का सामना करना पड़ता था। नए नियमों के तहत अब नियोक्ता को दो कामकाजी दिनों में कर्मचारी का पूरा हिसाब करना होगा।

    नए नियम में ये शामिल
    1. शामिल हिस्से : आखिरी महीने का वेतन, बकाया छुट्टी का पैसा और अन्य भत्ते शामिल होंगे, जो ‘वेतन’ की परिभाषा में आते हैं।
    2. इनमें देरी संभव: ग्रेच्युटी, पीएफ के भुगतान की समय सीमा अलग हो सकती है, क्योंकि इनके नियम अलग होते हैं।

    छंटनी होने पर 15 दिन की कौशल राशि अलग मिलेगी
    सरकार ने 21 नवंबर 2025 से लागू हुए नए श्रम संहिता में कर्मचारियों को बड़ी राहत दी है। नए नियमों के अनुसार, नौकरी से हटाए गए कर्मचारियों को अनिवार्य मुआवजे के साथ-साथ 15 दिनों की मजदूरी के बराबर एक अलग ‘पुन: कौशल निधि’ भी मिलेगी।

    यह राशि नौकरी समाप्त होने के 45 दिनों के भीतर सीधे कर्मचारी के बैंक खाते में जमा की जाएगी। यह राशि निश्चित अवधि और स्थायी दोनों तरह के कर्मचारियों को नौकरी से हटाए जाने की स्थिति में दी जाएगी। विशेषज्ञों का कहना है कि यह प्रावधान औद्योगिक संबंध संहिता, 2020 का हिस्सा है और इसका उद्देश्य कर्मचारियों को नई कौशल सीखने में सहायता देना है। इससे नौकरी छूटने के बाद कर्मचारी बदलते हुए रोजगार बाज़ार में फिर से रोजगार पाने की क्षमता विकसित कर सकेंगे।

    क्या है नई व्यवस्था
    नए श्रम नियमों में रिट्रेंचमेंट यानी गैर-अनुशासनात्मक कारणों से नौकरी समाप्त करने की प्रक्रिया को और स्पष्ट किया गया है। रिट्रेंचमेंट का अर्थ है कि कर्मचारी को किसी गलती या अनुशासनहीनता के बिना, कंपनी की आवश्यकता कम होने या पद समाप्त होने जैसी वजहों से नौकरी से हटाया जाए। यह व्यवस्था उन स्थितियों पर लागू नहीं होती जिनमें कर्मचारी स्वयं सेवानिवृत्ति लेता है।


    कर्मचारियों को फायदा

    1. नौकरी छोड़ते समय पैसों की कमी नहीं होगी।
    2. नई नौकरी शुरू करने से पहले आर्थिक दबाव कम होगा।
    3. कंपनियों की मनमानी और देरी पर रोक लगेगी।
    4. फुल एंड फाइनल प्रक्रिया ज्यादा पारदर्शी और तेज होगी।

  • आज सोने के दामों में जबरदस्त तेजी! MCX पर ₹1,200 की उछाल, दिल्ली‑लखनऊ में कीमतें हुई बढ़त पर

    आज सोने के दामों में जबरदस्त तेजी! MCX पर ₹1,200 की उछाल, दिल्ली‑लखनऊ में कीमतें हुई बढ़त पर

    नई दिल्ली। घरेलू फ्यूचर मार्केट में आज, 25 नवंबर 2025, सोने और चांदी की कीमतों में जबरदस्त तेजी देखने को मिली है। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज MCX पर शुरुआती कारोबार में सोना ₹1,200 से अधिक महंगा हो गया, जिससे शादियों के सीजन में खरीदारी करने वालों के लिए यह दिन खासा खर्चीला साबित हो सकता है।
    MCX पर 5 दिसंबर एक्सपायरी वाला गोल्ड फ्यूचर वायदा आज ₹1,25,124 प्रति 10 ग्राम पर ट्रेड कर रहा था, जो पिछले बंद भाव ₹1,23,854 की तुलना में लगभग ₹1,270 का उछाल दर्शाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक बाजार में मजबूत मांग और घरेलू बाजार में बढ़ती खरीदारी की वजह से सोने में यह तेजी आई है।

    फ्यूचर मार्केट में सोना-चांदी की चाल:
    आज सुबह 10:40 बजे तक सोने और चांदी की कीमतें इस प्रकार थीं। कमोडिटी शुरुआती कीमत MCX मौजूदा कीमत पिछली बंद कीमत से उछाल। सोना 5 दिसंबर ₹1,24,789/10 ग्राम ₹1,25,124/10 ग्राम लगभग ₹1,270 हाई ₹1,25,291 चांदी ₹1,57,162/किलोग्राम ₹1,56,950/किलोग्राम लगभग ₹2,400

    विशेषज्ञों का मानना है कि सोने और चांदी दोनों में यह तेजी वैश्विक बाजार में बहुमूल्य धातुओं की मजबूत मांग को दर्शाती है। खासकर शादियों और त्योहारी सीजन के दौरान निवेश और गहनों की मांग बढ़ने से कीमतों में यह उछाल आया है।

    आपके शहर में आज का सोने-चांदी का रेट

    गुड रिटर्न के अनुसार, देश के प्रमुख शहरों में 24 कैरेट शुद्धता वाले सोने के आज के खुदरा दाम प्रति 10 ग्राम इस प्रकार हैं:
    शहर 24 कैरेट सोना 22 कैरेट सोना
    दिल्ली / लखनऊ ₹1,27,190 ₹1,16,600
    मुंबई / कोलकाता ₹1,27,040 ₹1,16,450
    चेन्नई ₹1,27,860 ₹1,17,200
    अहमदाबाद / पटना ₹1,27,090 ₹1,16,500
    हैदराबाद ₹1,27,040 ₹1,16,450
    यह बढ़ोतरी दिखाती है कि सोना और चांदी अभी भी निवेशकों के लिए आकर्षक विकल्प बने हुए हैं। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि सोने में निवेश सुरक्षित और दीर्घकालीन लाभ देने वाला माना जाता है।

    विशेषज्ञों की राय और निवेश सुझाव

    विशेषज्ञों के अनुसार, सोने में निवेश अभी भी सुरक्षित है क्योंकि यह बाजार के उतार-चढ़ाव के बीच भी बेहतर रिटर्न देने की क्षमता रखता है। वहीं, चांदी में भी लगातार मजबूत मांग के संकेत मिल रहे हैं  जिससे यह  अल्टरनेटिव  निवेश  के रूप में उभर रही है। शादी और त्यौहार के  सीजन में उपभोक्ताओं को सलाह दी जाती है कि सोने की खरीदारी समय पर और सही भाव में करें क्योंकि कीमतों में रोजाना बदलाव देखने को मिल सकता है।
    आज की तेजी के साथ ही यह साफ हो गया है कि सोना और चांदी का बाजार अभी मजबूत स्थिति में है और निवेशकों तथा खरीदारों के लिए यह समय सोच-समझकर कदम उठाने का है।

  • आयुष्मान भारत का बड़ा तोहफा: 70 साल और उससे ऊपर के वरिष्ठ नागरिक अब पा सकेंगे ₹10 लाख तक का कैशलेस इलाज

    आयुष्मान भारत का बड़ा तोहफा: 70 साल और उससे ऊपर के वरिष्ठ नागरिक अब पा सकेंगे ₹10 लाख तक का कैशलेस इलाज


    नई दिल्ली। देश की सबसे बड़ी सरकारी स्वास्थ्य बीमा योजना आयुष्मान भारत – प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (AB-PMJAY) अब और भी मजबूत हो गई है। केंद्र सरकार ने 70 वर्ष और उससे अधिक उम्र के वरिष्ठ नागरिकों के लिए ₹5 लाख का अतिरिक्त टॉप-अप हेल्थ कवर जोड़ दिया है। इसके साथ ही, अब उन्हें कुल ₹10 लाख तक का कैशलेस इलाज मिल सकेगा।

    क्या है नया बदलाव?
    पहले: परिवार को सालाना ₹5 लाख तक का कैशलेस हेल्थ कवर मिलता था।
    अब: 70+ उम्र के प्रत्येक सदस्य के लिए ₹5 लाख का अतिरिक्त टॉप-अप, जिससे कुल कवर ₹10 लाख तक पहुँच गया।

    कौन मिलेगा लाभ?
    आयु: 70 वर्ष या उससे अधिक।
    पहचान: आधार कार्ड के माध्यम से।
    प्रक्रिया: लाभ लेने के लिए वरिष्ठ नागरिक को eKYC आधार अपडेट करवाना होगा।

    योजना की विशेषताएँ
    परिवार के सभी सदस्य कवर: पति-पत्नी, बच्चे, माता-पिता, दादा-दादी और अन्य आश्रित।
    सेकेंडरी और टर्शियरी स्वास्थ्य सेवाओं का कवरेज।
    सर्जरी, ऑर्गन ट्रांसप्लांट, विशेषज्ञ इलाज शामिल।
    पुरानी बीमारियाँ (pre-existing conditions) भी कवरेज में।

    क्यों है यह बदलाव खास?
    बुज़ुर्गों के लिए स्वास्थ्य संबंधी खर्च अक्सर सबसे बड़ा बोझ होता है। अब 70+ वरिष्ठ नागरिक अपने गंभीर इलाज के लिए आर्थिक चिंता मुक्त रह सकते हैं, और परिवार को भारी चिकित्सा बिलों का सामना नहीं करना पड़ेगा।

  • सोना-चांदी का जोरदार झटका: MCX और ग्लोबल मार्केट में भारी गिरावट, गोल्ड फिसला $4,040 के करीब

    सोना-चांदी का जोरदार झटका: MCX और ग्लोबल मार्केट में भारी गिरावट, गोल्ड फिसला $4,040 के करीब


    नई दिल्ली: सोमवार को सोने और चांदी के निवेशकों के लिए एक निराशाजनक शुरुआत रही, जब वायदा बाजार और ग्लोबल मार्केट दोनों में कीमती धातुओं के दामों में गिरावट दर्ज की गई। विशेषज्ञों का कहना है कि यह गिरावट मुख्य रूप से अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दर नीति और आगामी आर्थिक आंकड़ों की अनिश्चितता के कारण आई है।

    ग्लोबल मार्केट में गिरावट

    सोने की कीमतें सोमवार को ग्लोबल मार्केट में लगभग $4,040 प्रति औंस तक गिर गईं। हालांकि, वर्ष-दर-वर्ष की तुलना में सोने की कीमत में लगभग 54% की वृद्धि दर्ज की गई है, लेकिन यह गिरावट निवेशकों के लिए चिंता का कारण बनी हुई है। निवेशकों का ध्यान अमेरिकी रिटेल सेल्स और पीपीआई डेटा जैसे आगामी आर्थिक आंकड़ों पर बना हुआ है। इस बीच, मजबूत रोजगार डेटा के बाद दिसंबर में ब्याज दरों में कटौती की संभावना 40% से बढ़कर अब 69% हो गई है, जिससे सोने और चांदी के दामों में और गिरावट का संकेत मिल रहा है।

    MCX वायदा बाजार में स्थिति

    सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट का असर मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर भी देखा गया। सोमवार सुबह 11:10 बजे तक दर्ज आंकड़ों के अनुसार, दिसंबर डिलीवरी अनुबंध में सोने की कीमत ₹1,22,731 प्रति 10 ग्राम रही, जो 1.18% की गिरावट को दर्शाता है। चांदी की कीमत ₹1,53,147 प्रति किलोग्राम रही, जो 0.65% की गिरावट दिखाती है।

    वर्तमान में सोने और चांदी के दामों में यह गिरावट ब्याज दरों में संभावित बदलाव और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं की वजह से हो रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि निवेशकों को इस समय खरीदारी में सावधानी बरतनी चाहिए और हाजिर भाव तथा महानगरों में स्थानीय कीमतों को ध्यान में रखते हुए ही सोने या चांदी की खरीदारी करनी चाहिए।

    महानगरों में सोने की कीमतें

    गुडरिटर्न्स के अनुसार, प्रमुख महानगरों में 24 कैरेट सोने की हाजिर कीमत इस प्रकार रही:

    दिल्ली: ₹12,528 प्रति ग्राम
    मुंबई: ₹12,513 प्रति ग्राम
    कोलकाता: ₹12,513 प्रति ग्राम
    चेन्नई: ₹12,567 प्रति ग्राम
    बैंगलोर: ₹12,513 प्रति ग्राम

    22 कैरेट सोने की कीमतें इनसे थोड़ा कम हैं, और प्रत्येक शहर में यह ₹11,470 से ₹11,520 प्रति ग्राम के बीच रही हैं। वित्तीय विशेषज्ञों के अनुसार, वर्तमान में गिरते हुए दामों के बावजूद, निवेशकों को जल्दबाजी में खरीदारी करने से बचना चाहिए और बाजार की रुझानों को ध्यान से देखना चाहिए।

    आर्थिक संकेत और भविष्य का रुझान

    विशेषज्ञों का कहना है कि सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट मुख्य रूप से अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों और फेडरल रिजर्व की ब्याज दर नीति के कारण हुई है। ब्याज दरों में संभावित कटौती के कारण कीमती धातुओं के दामों में और भी उतार-चढ़ाव हो सकते हैं। इसके साथ ही, वैश्विक आर्थिक हालात और निवेशकों की चिंता बढ़ी हुई है, जिसके चलते कीमती धातुओं में अस्थिरता बनी हुई है।

    निवेशकों के लिए सलाह

    वित्तीय विशेषज्ञों का कहना है कि निवेशकों को इस समय हाजिर बाजार के भाव और स्थानीय कीमतों को देखकर खरीदारी करनी चाहिए। साथ ही, सोने और चांदी के दामों में गिरावट को देखते हुए, जल्दबाजी में निवेश करना सही कदम नहीं होगा। बाजार की स्थितियों को ध्यान से समझते हुए ही निवेश निर्णय लेना चाहिए, ताकि भविष्य में अच्छा मुनाफा हो सके।

    सोने और चांदी के दामों में यह उतार-चढ़ाव यह भी संकेत देते हैं कि वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां लगातार बदल रही हैं, और इनकी वजह से कीमती धातुओं की कीमतों में अनिश्चितता बनी रहेगी। निवेशकों को इन परिवर्तनों को ध्यान में रखते हुए अपनी निवेश रणनीतियों में बदलाव करने की सलाह दी जा रही है।

  • बैंकों में लंबा ब्रेक: दिसंबर में 18 दिन बंद रहेंगे कामकाज, RBI की छुट्टियों की लिस्ट देखें

    बैंकों में लंबा ब्रेक: दिसंबर में 18 दिन बंद रहेंगे कामकाज, RBI की छुट्टियों की लिस्ट देखें


    नई दिल्ली
    । साल का आखिरी महीना दिसंबर शुरू होने वाला है और अगर आपको बैंक से जुड़े कोई महत्वपूर्ण काम निपटाने हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद जरूरी है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने दिसंबर 2025 के लिए बैंकिंग छुट्टियों की लिस्ट जारी की है। इस महीने कुल 18 दिन बैंक बंद रहेंगे, जो राष्ट्रीय और क्षेत्रीय अवकाशों, त्योहारों और वीकेंड्स के कारण होंगे।

    चूंकि ये छुट्टियां राज्यों और शहरों के हिसाब से अलग-अलग हैं, इसलिए किसी भी परेशानी से बचने के लिए ग्राहकों को अपने क्षेत्र की छुट्टियों की पूरी सूची पहले से चेक कर लेनी चाहिए। इससे ब्रांच विजिट, चेक क्लियरिंग, लोन प्रोसेसिंग या अन्य जरूरी बैंकिंग काम में रुकावट नहीं आएगी।

    दिसंबर की शुरुआत में क्षेत्रीय अवकाश

    दिसंबर के पहले हफ्ते में कुछ राज्य और शहरों में विशेष छुट्टियां पड़ रही हैं। इनमें शामिल हैं:1 दिसंबर: इंडिजिनस फेथ डे, अरुणाचल प्रदेश में बैंक बंद  3 दिसंबर: सेंट फ्रांसिस जेवियर डे, गोवा में अवकाश 12 दिसंबर: पा तोगन नेंगमिंजा संगमा दिवस मेघालय में बैंक बंद इस दौरान अगर आपको बैंक जाना है तो अपनी योजना अनुसार अवकाश की जानकारी लेना जरूरी है।मध्य दिसंबर के महत्वपूर्ण अवकाश महीने के मध्य में भी कुछ महत्वपूर्ण त्योहार और क्षेत्रीय अवकाश हैं:

    18 दिसंबर: गुरु घासीदास जयंती / यू सोसो थम पुण्यतिथि छत्तीसगढ़, मेघालय
    19 दिसंबर: मुक्ति दिवस Liberation Day गोवा इन दिनों बैंकिंग सेवाएं प्रभावित रहेंगी, इसलिए चेक क्लियरिंग या ब्रांच विजिट की योजना पहले से बनाना लाभदायक रहेगा। क्रिसमस और साल के अंत का लंबा ब्रेक 24-31 दिसंबर साल के अंत में कई राज्यों में बैंकिंग कामकाज पर बड़ा असर पड़ेगा।

    इस अवधि में प्रमुख छुट्टियां इस प्रकार हैं:
    24 दिसंबर: क्रिसमस ईव मेघालय, मिजोरम

    25 दिसंबर: क्रिसमस डे राष्ट्रीय अवकाश, अधिकांश राज्यों में

    26 दिसंबर: क्रिसमस शहीद उधम सिंह जयंती मेघालय, मिजोरम, तेलंगाना, हरियाणा

    27 दिसंबर: गुरु गोबिंद सिंह जयंती हरियाणा पंजाब, हिमाचल प्रदेश

    30 दिसंबर: यू कियांग नांगबाह दिवस / तामु लोसर मेघालय, सिक्किम

    31 दिसंबर: नए साल की पूर्व संध्या मिजोरम, मणिपुर इस लंबी छुट्टियों की श्रृंखला के दौरान बैंक शाखाओं में कोई भी सेवा उपलब्ध नहीं होगी।

    नेट बैंकिंग और डिजिटल सेवाएं जारी रहेंगी

    हालांकि, छुट्टियों के बावजूद नेट बैंकिंग, मोबाइल बैंकिंग और यूपीआई (UPI) सेवाएं नियमित रूप से चालू रहेंगी। इसलिए ग्राहक इन डिजिटल विकल्पों के जरिए अपने दैनिक लेन-देन कर सकते हैं।
     ग्राहकों को सुझाव दिया जाता है कि वे चेक क्लियरिंग, लोन प्रोसेसिंग और ब्रांच विजिट जैसे महत्वपूर्ण कामों की योजना दिसंबर की छुट्टियों को ध्यान में रखते हुए बनाएं। छुट्टियों के अनुसार पहले से तैयारी करने से किसी भी तरह की असुविधा या देरी से बचा जा सकता है।

  • नारायण मूर्ति का 996 वर्क कल्चर पर जोर, बोले- हफ्ते में 72 घंटे काम की आदत डालें युवा

    नारायण मूर्ति का 996 वर्क कल्चर पर जोर, बोले- हफ्ते में 72 घंटे काम की आदत डालें युवा

    नई दिल्ली। इन्फोसिस के को-फाउंडर (Infosys co-founder) नारायण मूर्ति (Narayana Murthy) ने हाल ही में युवाओं से कहा कि अगर भारत (India) को तेजी से विकास करना है, तो युवाओं को हफ्ते में 72 घंटे काम करने (Working 72 Hours Week.) की आदत डालनी चाहिए। उन्होंने चीन के मशहूर “996 वर्क कल्चर” का उदाहरण देते हुए कहा, “सुबह 9 बजे से रात 9 बजे तक, हफ्ते में 6 दिन यानी 72 घंटे।”

    उनका तर्क था कि चीन जैसे देशों ने ऐसी मेहनती संस्कृति से तेज विकास हासिल किया। मूर्ति ने बताया कि उनकी कंपनी कैटामरन के कुछ अधिकारी चीन गए थे ताकि वे वहां की असली कामकाजी संस्कृति को समझ सकें। वहां एक कहावत है, “9, 9, 6” यानी “सुबह 9 से रात 9 तक, हफ्ते में 6 दिन।”

    ‘996’ वर्क कल्चर का मतलब है कि सुबह 9 बजे से रात 9 बजे तक, हफ्ते में 6 दिन काम करना। यानी कुल 72 घंटे काम करना, जो सामान्य कामकाजी घंटों से कहीं ज्यादा है। यह प्रथा खासकर चीन की टेक कंपनियों में ज्यादा प्रचलित थी।


    चीन में कैसे शुरू हुआ 996 कल्चर

    2010 के दशक में चीन की टेक इंडस्ट्री बहुत तेजी से बढ़ रही थी। मार्केट में आगे बढ़ने की होड़, कंपनियों की स्पीड और ज्यादा मेहनत की मांग ने ‘996’ को आम बना दिया। उस समय के कुछ मशहूर उद्यमी जैसे जैक मा ने इस कल्चर को एक प्रकार की ‘आशीर्वाद’ के रूप में प्रचारित किया।


    996 कल्चर का बुरा असर

    समय के साथ इन लंबे घंटों का बुरा असर दिखने लगा। कर्मचारियों में थकान, मानसिक तनाव, और काम-जीवन संतुलन बिगड़ने जैसी दिक्कतें आम हो गईं। कई कंपनियों में ज्यादा मेहनत के कारण बीमारियां और यहां तक कि मौत तक के मामले सामने आए। कर्मचारियों ने डिजिटल प्लेटफार्म पर 996 का विरोध किया और 2021 में चीन की सरकार ने इसे अवैध घोषित कर दिया।


    996 की कानूनी रोक के बाद क्या बदला?

    चीन की अदालतों ने साफ किया कि 996 नियम कानून के हिसाब से गलत है। फिर भी ये कल्चर पूरी तरह से खत्म नहीं हुआ है। कई कंपनियों ने नए नाम से ओवरटाइम जारी रखा या नियमों में बदलाव किए। रिपोर्ट्स के मुताबिक चीन में औसतन 48.5 घंटे प्रति सप्ताह काम अब भी होता है, जो कॉन्ट्रैक्ट के हिसाब से ज्यादा है।


    दुनिया के दूसरे देशों में काम के घंटे

    यूरोप जैसे देशों में जहां औसतन बहुत कम घंटे काम होता है (जैसे नीदरलैंड्स में 32.1 घंटे/सप्ताह), वहीं भारत और चीन जैसे देशों में हफ्ते के 50 घंटे से ज्यादा आम बात है। शोध बताते हैं कि ज्यादा घंटे काम करने से उत्पादकता बढ़ती नहीं, बल्कि 50 घंटे के बाद और गिरने लगती है।

    भारत के लिए उत्पादकता या लंबे घंटे?
    भारत में भी लंबे कामकाजी घंटे आम हैं, पर उत्पादकता अभी भी कम है। विशेषज्ञों के मुताबिक, असली जरूरत काम के घंटों को बढ़ाने की नहीं, बल्कि स्मार्ट तरीके, टेक्नोलॉजी, कौशल और बेहतर प्रबंधन से उत्पादकता बढ़ाने की है।


    स्मार्ट वर्क, न कि हार्ड वर्क

    चीन के अनुभव से यही सीख मिलती है कि विकास के लिए जरूरी है कि काम की गुणवत्ता और श्रमिकों की सेहत पर ध्यान दिया जाए, न कि केवल घंटों की संख्या बढ़ाई जाए। कंपनियों और नीतिगत स्तर पर संतुलित और व्यावहारिक बदलाव ही टिकाऊ विकास ला सकते हैं​।