Category: Economy

  • 2026 में भारतीय शेयर बाजार की मजबूत शुरुआत, आम बजट से मिलेगी नीतिगत स्थिरता

    2026 में भारतीय शेयर बाजार की मजबूत शुरुआत, आम बजट से मिलेगी नीतिगत स्थिरता


    नई दिल्ली। बुधवार को जारी रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय शेयर बाजार पिछले सालों की स्थिरता के बाद अब 2026 में निवेशकों के लिए बेहतर अवसर पेश कर रहा है। रिपोर्ट में कहा गया है कि शेयरों के मूल्यांकन ठीक हैं, कंपनियों की कमाई को लेकर उम्मीदें यथार्थवादी हैं और देश की आर्थिक नींव मजबूत है। हालांकि, वैश्विक घटनाएं निवेशकों के लिए कभी-कभी अनिश्चितता पैदा कर सकती हैं।


    मजबूत आर्थिक नींव और संतुलित बाजार

    स्मॉलकेस मैनेजर्स का कहना है कि भारत की मैक्रो इकोनॉमिक स्थिति अभी भी मजबूत है। देश में नियंत्रित महंगाई, ब्याज दरों में कटौती, टैक्स में राहत और जीएसटी में छूट के कारण आर्थिक विकास को गति मिलेगी। यह कदम उपभोक्ताओं की खर्च करने की क्षमता बढ़ाएंगे और कर्ज लेना आसान बनाएंगे।

    सोनम श्रीवास्तव, राइट रिसर्च की संस्थापक, बताती हैं कि 2026 में बाजार 2025 की तुलना में ज्यादा संतुलित और सकारात्मक है। उन्होंने कहा कि निवेश से मिलने वाला लाभ कंपनियों की कमाई पर आधारित होगा, न कि केवल शेयरों की कीमत बढ़ने पर।


    लार्ज, मिड और स्मॉल कैप शेयरों का परिदृश्य

    वेल्थट्रस्ट कैपिटल की स्मॉलकेस मैनेजर और सीईओ स्नेहा जैन के अनुसार, 2025 में मूल्यांकन में गिरावट के बाद अब लार्ज कैप कंपनियों के शेयर मिड और स्मॉल कैप से नीचे ट्रेड कर रहे हैं। लार्ज कैप कंपनियों की बैलेंस शीट, कैश फ्लो और कॉरपोरेट गवर्नेंस मजबूत है। इसलिए अगले 6 से 8 महीनों में ये निवेशकों के लिए अपेक्षा से अधिक आकर्षक साबित हो सकते हैं।

    स्नेहा जैन बताती हैं कि लार्ज कैप को ज्यादा मुनाफे के लिए नहीं, बल्कि पोर्टफोलियो में स्थिरता और मजबूत आधार देने के लिए रखना चाहिए। इसके अलावा, सरकार की राजकोषीय अनुशासन नीति, इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च, मैन्युफैक्चरिंग और एमएसएमई सेक्टर को समर्थन, लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स की स्पष्टता, अल्पकालिक प्रोत्साहनों से ज्यादा अहम हैं।


    बजट और निवेशकों की भागीदारी

    प्राची देउस्कर, लोटसड्यू वेल्थ एंड इन्वेस्टमेंट एडवाइजर्स की सह-संस्थापक, कहती हैं कि आगामी केंद्रीय बजट बुनियादी ढांचे, औपचारिक अर्थव्यवस्था और वित्तीय अनुशासन से जुड़े कदम बढ़ाएगा। इससे घरेलू निवेशकों की वित्तीय भागीदारी बढ़ सकती है।

    एमएसएमई सेक्टर को प्रोत्साहित करने के लिए फाइनेंस तक आसान पहुंच, क्रेडिट गारंटी और उत्पादकता बढ़ाने व बाजार तक पहुंच को मजबूत करने वाले कदम भी देखने को मिल सकते हैं।


    निवेशकों के लिए सलाह

    विशेषज्ञों का मानना है कि 2026 में निवेश करने वाले निवेशकों को सोच-समझकर कंपनियों के कमाई के आधार पर शेयर चुनने चाहिए। वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारत की मजबूत आर्थिक नींव और संतुलित बाजार संभावनाओं को बढ़ा रहे हैं। निवेशकों के लिए यह साल लंबी अवधि के फायदे के लिहाज से अवसरपूर्ण साबित हो सकता है।

  • ₹70,000 है मंथली सैलरी, 20 साल के लिए मैक्सिमम कितना मिल सकता है Home Loan? समझें EMI का गणित

    ₹70,000 है मंथली सैलरी, 20 साल के लिए मैक्सिमम कितना मिल सकता है Home Loan? समझें EMI का गणित

    नई दिल्ली। अगर आपकी मंथली सैलरी ₹70,000 है और आप अपना घर खरीदने का प्लान बना रहे हैं, तो सबसे पहला सवाल यही है कि बैंक आपको अधिकतम कितना होम लोन दे सकता है। लोन की राशि सीधे आपकी आय, मौजूदा खर्च, ब्याज दर और लोन अवधि पर निर्भर करती है। 20 साल की अवधि के लिए होम लोन लेते समय EMI कैसे तय होती है और आपकी सैलरी के हिसाब से बैंक कितना लोन अप्रूव कर सकता है, आइए इस EMI के गणित को आसान शब्दों में समझते हैं। इससे आपको प्लानिंग में मदद मिलेगी।
    सबसे सस्ता होम लोन
    कोई भी बैंक जिस सबसे शुरुआती ब्याज दर पर होम लोन या अन्य लोन उपलब्ध कराते हैं, वही उस बैंक का सबसे सस्ता लोन होता है। उदाहरण के लिए मौजूदा समय में बैंक ऑफ इंडिया या बैंक ऑफ महाराष्ट्र महज 7.10 प्रतिशत की शुरुआती ब्याज दर पर होम लोन ऑफर कर रहे हैं। बैंक ब्याज दर आपकी इनकम, उम्र, सिबिल स्कोर और लोन रीपेमेंट की अवधि के मुताबिक तय करती है। होम लोन में एक बात समझ लें होम लोन की रीपेमेंट अवधि जितनी कम होगी, ब्याज आप उतना कम चुकाएंगे। लोन की रीपेमेंट अवधि जितनी ज्यादा होगी तो आपको ब्याज उतना ही ज्यादा चुकाना होगा।

    ₹70,000 है मंथली सैलरी पर मैक्सिमम होम लोन
    बैंक ऑफ इंडिया के होम लोन एलिजिबिलिटी कैलकुलेटर के मुताबिक, अगर आपकी मंथली सैलरी 70,000 रुपये है। आपका पिछला कोई बकाया लोन या ईएमआई नहीं चल रहा है तो 7.10 प्रतिशत की ब्याज दर पर 20 साल की रीपेमेंट अवधि के लिए आपको मैक्सिमम ₹50,40,000 तक होम लोन मिल सकेगा। 20 साल के लिए इसकी ईएमआई ₹39,378 बनेगी। इस आधार पर आप इस होम लोन पर ₹44,10,760 सिर्फ ब्याज के तौर पर चुकाएंगे। यानी आखिर में बैंक को ₹94,50,760 चुकाएंगे। इतनी सैलरी पर अगर आप 15 साल के लिए होम लोन लेते हैं तो आपको मैक्सिमम ₹46,43,818 होम लोन मिलेगा।

  • शेयर बाजारों में गिरावट सेंसेक्स 250 अंक टूटा; निफ्टी भी गिरकर बंद हुआ

    शेयर बाजारों में गिरावट सेंसेक्स 250 अंक टूटा; निफ्टी भी गिरकर बंद हुआ


    नई दिल्ली । मंगलवार को शेयर बाजारों में गिरावट का रुख देखा गया। विदेशों से मिले मिश्रित संकेतों और घरेलू स्तर पर निवेशकों के बीच सतर्कता की भावना ने बाजार को दबाव में डाला। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स 250.48 अंक यानी 0.30 प्रतिशत गिरकर 83 627.69 अंक पर बंद हुआ। वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी-50 सूचकांक भी 57.95 अंक यानी 0.22 प्रतिशत गिरकर 25, 732.30 अंक पर रहा विदेशी बाजारों से मिले संकेतों में मिश्रित रुझान देखे गए जिससे घरेलू निवेशकों ने सतर्कता बरती। एशियाई और यूरोपीय बाजारों में भी हल्की गिरावट दर्ज की गई जो भारतीय बाजारों पर असर डालने का कारण बनी। इसके अलावा घरेलू स्तर पर भी कुछ प्रमुख कंपनियों के तिमाही परिणामों को लेकर निवेशकों के बीच अनिश्चितता बनी रही जिससे बाजार में बिकवाली का दबाव बढ़ा।
    इस गिरावट के बावजूद विश्लेषकों का मानना है कि यह कोई लंबी अवधि की मंदी नहीं है। वे मानते हैं कि आगामी दिनों में बाजार में पुनः सुधार की संभावना हो सकती है खासकर अगर वैश्विक आर्थिक परिस्थितियाँ बेहतर होती हैं। निवेशकों को सलाह दी जा रही है कि वे अपनी पोर्टफोलियो को सावधानीपूर्वक देखें और लंबी अवधि के लिए निवेश करें। वहीं कुछ विश्लेषकों का यह भी कहना है कि भारतीय अर्थव्यवस्था के बुनियादी पहलू मजबूत हैं और आने वाले समय में सकारात्मक रुझान दिख सकते हैं। सरकार के आर्थिक सुधारों और कॉरपोरेट क्षेत्र में संभावित वृद्धि को ध्यान में रखते हुए बाजार में भी सुधार की उम्मीद है। हालांकि फिलहाल बाजार में उतार-चढ़ाव बना रहेगा और निवेशकों को सतर्क रहना होगा।
    इसी के साथ मंगलवार को मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी हल्की गिरावट आई। मिडकैप इंडेक्स में 0.32 प्रतिशत और स्मॉलकैप इंडेक्स में 0.25 प्रतिशत की गिरावट आई। बैंकों और वित्तीय कंपनियों के शेयरों में भी दबाव देखा गया जबकि ऊर्जा और कच्चे तेल से संबंधित कंपनियों में कुछ राहत मिली। कुल मिलाकर मंगलवार का कारोबारी सत्र भारतीय शेयर बाजारों के लिए नकारात्मक रहा हालांकि आने वाले दिनों में कुछ सकारात्मक बदलाव की उम्मीद जताई जा रही है। निवेशकों के लिए सलाह है कि वे बाजार की मौजूदा स्थिति को समझते हुए अपने निवेश निर्णय लें और लघु अवधि के उतार-चढ़ाव से बचने के लिए धैर्य रखें।

  • कैट ने खुदरा व्यापारियों के लिए सस्ते ऋण ई-कॉमर्स पर नियंत्रण की मांग की

    कैट ने खुदरा व्यापारियों के लिए सस्ते ऋण ई-कॉमर्स पर नियंत्रण की मांग की


    नई दिल्ली । अखिल भारतीय व्यापारी परिसंघ कैट ने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में खुदरा व्यापारियों के हितों का विशेष ध्यान रखने की अपील की है। कैट का कहना है कि बजट में खुदरा व्यापारियों के लिए सस्ते ऋण की सुविधा प्रदान की जाए और साथ ही ई-कॉमर्स पर नियंत्रण की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाए ताकि व्यापारियों को अनुचित प्रतिस्पर्धा का सामना न करना पड़े।
    कैट के राष्ट्रीय महामंत्री और चांदनी चौक सीट से लोकसभा सांसद प्रवीन खंडेलवाल ने मंगलवार को बताया कि संगठन ने वित्त मंत्री के समक्ष कुछ प्रमुख सुझाव रखे हैं। इन सुझावों में व्यापार के लिए सम्मान सरलता सुरक्षा और समान अवसर प्रदान करने की बात की गई है। खंडेलवाल ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार ने कई महत्वपूर्ण पहलों की शुरुआत की है जिनमें “आत्मनिर्भर भारत” “मेक इन इंडिया” “डिजिटल इंडिया” और “लोकल के लिए वोकल” जैसे अभियानों ने देश के व्यापारिक वातावरण को एक नई दिशा दी है। उन्होंने कहा कि अब आगामी बजट में इन पहलों को और भी मजबूत बनाने की आवश्यकता है ताकि व्यापारियों को और अधिक प्रोत्साहन मिल सके।

    सस्ते ऋण की आवश्यकता
    कैट ने यह स्पष्ट किया है कि खुदरा व्यापारियों के लिए सस्ते ऋण की उपलब्धता व्यापार के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। वर्तमान में व्यापारियों को उच्च ब्याज दरों पर ऋण मिलता है जिससे उनके लिए व्यापार में वृद्धि करना और नई चुनौतियों का सामना करना मुश्किल हो जाता है। अगर सस्ते ऋण की सुविधा प्रदान की जाती है तो छोटे और मंझले व्यापारी अपनी व्यापारिक गतिविधियों को बेहतर तरीके से चला सकते हैं जिससे रोजगार के अवसर भी बढ़ सकते हैं। इसके अलावा व्यापारियों को ऋण के लिए कागजी प्रक्रिया में भी सरलता की आवश्यकता है। कैट ने वित्त मंत्री से यह भी अनुरोध किया है कि ऋण लेने की प्रक्रिया को और अधिक सरल और पारदर्शी बनाया जाए ताकि व्यापारी समय और श्रम की बचत कर सकें और अपने व्यापार को गति दे सकें।
    ई-कॉमर्स पर नियंत्रण की आवश्यकता
    कैट ने यह भी कहा कि ई-कॉमर्स प्लेटफार्मों पर बेईमानी से प्रतिस्पर्धा की वजह से खुदरा व्यापारियों को भारी नुकसान हो रहा है। कई बार ई-कॉमर्स कंपनियां बड़े पैमाने पर डिस्काउंट और भारी प्रमोशन करती हैं जिनका छोटे व्यापारियों से मुकाबला करना मुश्किल हो जाता है। कैट ने वित्त मंत्री से यह अनुरोध किया कि ई-कॉमर्स के नियमों को सख्त किया जाए और सुनिश्चित किया जाए कि यह प्लेटफॉर्म्स खुदरा व्यापारियों के लिए एक समान अवसर प्रदान करें न कि उन्हें नुकसान पहुँचाए। कैट का कहना है कि इन अनुचित प्रतिस्पर्धाओं के कारण खुदरा व्यापारियों को न केवल आर्थिक नुकसान हो रहा है बल्कि उनका सम्मान भी प्रभावित हो रहा है। यदि ई-कॉमर्स कंपनियों को नियंत्रित किया जाता है तो पारदर्शिता और समता को बढ़ावा मिलेगा जिससे सभी व्यापारी एक समान तरीके से व्यापार कर सकेंगे।

    सरकारी पहलों का महत्व
    प्रवीन खंडेलवाल ने आगे कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने पिछले कुछ वर्षों में व्यापारिक वातावरण को बेहतर बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। आत्मनिर्भर भारत” अभियान के तहत छोटे और मंझले व्यापारियों को अपना व्यवसाय बढ़ाने के लिए कई अवसर दिए गए हैं। वहीं मेक इन इंडिया” और “डिजिटल इंडिया” जैसे अभियानों ने भारतीय व्यापारियों को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने की दिशा में काम किया है। हालांकि उन्होंने कहा कि इन पहलों को और भी मजबूत किया जाना चाहिए ताकि व्यापारियों को अधिक प्रोत्साहन मिले और वे वैश्विक बाजार में बेहतर तरीके से प्रतिस्पर्धा कर सकें।
    कैट का यह सुझाव है कि आगामी बजट में छोटे और मंझले खुदरा व्यापारियों को ध्यान में रखते हुए सस्ते ऋण की सुविधा प्रदान की जाए साथ ही ई-कॉमर्स पर नियंत्रण भी सुनिश्चित किया जाए। यह कदम न केवल व्यापारियों के लिए अवसर पैदा करेगा बल्कि भारत के समग्र व्यापारिक वातावरण को भी एक नई दिशा दे सकता है। सरकार द्वारा उठाए गए कदमों को और भी सशक्त किया जाए ताकि देश की अर्थव्यवस्था और व्यापार क्षेत्र में संतुलन बना रहे और छोटे व्यापारियों को भी समान अवसर प्राप्त हो सकें।

  • रिकॉर्ड ऊंचाई के बाद सोने की चमक पड़ी फीकी, चांदी ने ज़ोरदार वापसी कर पकड़ी रफ्तार

    रिकॉर्ड ऊंचाई के बाद सोने की चमक पड़ी फीकी, चांदी ने ज़ोरदार वापसी कर पकड़ी रफ्तार

    नई दिल्ली। सोमवार को ऐतिहासिक ऊंचाई छूने के बाद हफ्ते के दूसरे कारोबारी दिन मंगलवार को कीमती धातुओं के बाजार में उतार-चढ़ाव देखने को मिला। शुरुआती कारोबार में निवेशकों की मुनाफावसूली के चलते सोने की कीमतों में हल्की गिरावट दर्ज की गई, जबकि चांदी ने गिरावट से उबरते हुए मजबूती दिखाई।

    एमसीएक्स पर सोना कमजोर, चांदी में उछाल

    एमसीएक्स पर फरवरी डिलीवरी वाला सोना 0.32 प्रतिशत टूटकर 1,41,577 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया। वहीं मार्च डिलीवरी वाली चांदी 0.50 प्रतिशत यानी 1,352 रुपये की तेजी के साथ 2,70,322 रुपये प्रति किलोग्राम पर कारोबार करती दिखी। इससे साफ है कि रिकॉर्ड स्तर के बाद सोने में जहां दबाव बना, वहीं चांदी में खरीदारी लौटी।

    घरेलू बाजार में भी हल्की नरमी

    इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (IBJA) के अनुसार 24 कैरेट सोने के 10 ग्राम का भाव घटकर 1,40,482 रुपये रह गया, जो पिछले कारोबारी दिन 1,40,499 रुपये था। यह गिरावट भले ही मामूली हो, लेकिन यह संकेत देती है कि ऊंचे दामों पर निवेशक फिलहाल सतर्क हो गए हैं।

    अंतरराष्ट्रीय बाजार से मिला संकेत

    अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना पहली बार 4,600 डॉलर प्रति औंस के पार पहुंचा था। इसी रिकॉर्ड स्तर के बाद वैश्विक निवेशकों ने मुनाफावसूली शुरू की, जिसका असर घरेलू बाजारों पर भी पड़ा। हालांकि भू-राजनीतिक तनावों के कारण सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की मांग बनी हुई है।

    भू-राजनीति और फेड पर टिकी नजर

    सोने में हालिया तेजी के पीछे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का ईरान से व्यापार करने वाले देशों पर 25 प्रतिशत टैक्स लगाने का ऐलान और सैन्य कार्रवाई की चेतावनी बड़ा कारण रही। इसके अलावा अमेरिकी फेडरल रिजर्व के प्रमुख जेरोम पॉवेल से जुड़ी जांच की खबरों ने भी बाजार में अनिश्चितता बढ़ाई। मेहता इक्विटीज लिमिटेड के कमोडिटी उपाध्यक्ष राहुल कलंत्री के मुताबिक, निवेशकों की नजर अब अमेरिकी महंगाई के आंकड़ों और ब्याज दर नीति पर टिकी है।

    ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद

    हालिया अमेरिकी रोजगार रिपोर्ट में उम्मीद से कम नौकरियां बढ़ने से यह भरोसा मजबूत हुआ है कि इस साल के अंत तक फेड ब्याज दरों में दो बार कटौती कर सकता है। यही उम्मीद कीमती धातुओं को मध्यम अवधि में सहारा दे रही है।

    तकनीकी स्तर और आगे का रुख

    विश्लेषकों के अनुसार सोने को 1,39,550 से 1,37,310 रुपये के दायरे में मजबूत सपोर्ट मिल रहा है, जबकि ऊपर की ओर 1,44,350 से 1,46,670 रुपये पर रेजिस्टेंस है। चांदी के लिए 2,60,810 से 2,54,170 रुपये सपोर्ट जोन है और 2,71,810 से 2,74,470 रुपये रेजिस्टेंस।

    चांदी की लंबी अवधि में चमक

    एक्सपर्ट्स का मानना है कि उद्योगों और हरित ऊर्जा क्षेत्रों में बढ़ती मांग और सीमित आपूर्ति के कारण चांदी की दीर्घकालिक मांग मजबूत बनी रहेगी। ऐसे में आने वाले समय में चांदी की कीमतें सोने से बेहतर प्रदर्शन कर सकती हैं।

  • तेज विकास, कम महंगाई-भारत को अपनानी चाहिए संतुलित और तटस्थ नीति: रिपोर्ट

    तेज विकास, कम महंगाई-भारत को अपनानी चाहिए संतुलित और तटस्थ नीति: रिपोर्ट

    नई दिल्ली। भारत इस समय आर्थिक विकास और कम महंगाई के संतुलित दौर में है, जिसे अर्थशास्त्री ‘गोल्डीलक्स फेज’ कह रहे हैं। मंगलवार को जारी एचएसबीसी ग्लोबल इन्वेस्टमेंट रिसर्च की रिपोर्ट में कहा गया कि अब नीतियों को न तो बहुत सख्त और न ही बहुत ढीला रखना चाहिए, बल्कि लगभग तटस्थ नीति अपनाई जानी चाहिए।

    नीति का संतुलित दृष्टिकोण

    रिपोर्ट में सुझाया गया है कि 2026 में अर्थव्यवस्था और बाजार को सहारा देने के लिए ऐसी नीति सबसे बेहतर होगी जिसमें सरकारी खर्च पर नियंत्रण रखा जाए और ब्याज दरें आसान बनी रहें। यदि सरकार खर्च में सावधानी रखे और रिजर्व बैंक ब्याज दरों को आसान बनाए रखे, तो इससे निवेशकों और अर्थव्यवस्था को लाभ मिलेगा।

    अंदरूनी कमजोरियों पर ध्यान

    हालांकि, रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि अर्थव्यवस्था में कुछ कमजोरियां अभी भी मौजूद हैं। इनमें कंपनियों का कम निवेश और विदेशी पूंजी का सीमित प्रवाह शामिल है, जिन्हें सुधारना जरूरी होगा।

    बॉन्ड और विदेशी निवेश की उम्मीद

    बॉन्ड मार्केट्स ने 2026 की शुरुआत में राज्यों द्वारा कर्ज लेने की संभावना पहले ही ध्यान में रख ली है। आरबीआई द्वारा बॉन्ड खरीद, बजट में वित्तीय अनुशासन और भारत को ग्लोबल बॉन्ड इंडेक्स में शामिल किए जाने से विदेशी निवेश आने की उम्मीद बढ़ी है।

    शेयर बाजार और आर्थिक सुधार

    रिपोर्ट के अनुसार, हाल के आर्थिक सुधारों, सकल घरेलू उत्पाद में वृद्धि और शेयरों के उचित दामों के कारण शेयर बाजार को फायदा मिल सकता है। हालांकि, लंबे समय तक लाभ के लिए कंपनियों का निवेश और विदेशी निवेश बढ़ाने वाले बड़े सुधार जरूरी हैं।

    ब्याज दर और महंगाई का अनुमान

    एचएसबीसी की चीफ इंडिया इकोनॉमिस्ट प्रांजुल भंडारी ने कहा कि अगले साल महंगाई दर चार प्रतिशत से थोड़ी कम रहने की संभावना है। इससे आरबीआई पर ब्याज दरें बढ़ाने का दबाव नहीं रहेगा और विकास धीमा होने पर दरें और कम करने की गुंजाइश भी रहेगी।

    वैश्विक घटनाओं का असर

    भंडारी ने बताया कि वैश्विक स्तर पर टैरिफ से जुड़ी खबरें, ग्लोबल बॉन्ड इंडेक्स में शामिल होने की प्रक्रिया और विकसित देशों में बढ़ती ब्याज दरें भारतीय बाजार को प्रभावित कर सकती हैं।

    सरकार का वित्तीय संतुलन लक्ष्य

    केंद्र सरकार का लक्ष्य है कि 2031 तक सार्वजनिक कर्ज महामारी से पहले के स्तर पर लाया जाए। इसके लिए अगले पांच वर्षों तक वित्तीय सुधार और खर्च पर नियंत्रण जरूरी होगा। निजीकरण के जरिए यह संतुलन स्थापित किया जा सकता है ताकि आर्थिक विकास पर असर कम से कम हो।

    राज्यों का कर्ज और घाटा

    रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि कई राज्यों में सार्वजनिक कर्ज बढ़ने की संभावना है, लेकिन 3 प्रतिशत की वित्तीय घाटे की सीमा के कारण यह नियंत्रित रहेगा। इस प्रकार, भारत 2026 में संतुलित विकास और तटस्थ नीतियों के जरिए आर्थिक स्थिरता बनाए रखने की स्थिति में है।

  • दिसंबर में ऑटो सेल्स में रिकॉर्ड बढ़त, कारों की बिक्री ऑल-टाइम हाई पर पहुंची

    दिसंबर में ऑटो सेल्स में रिकॉर्ड बढ़त, कारों की बिक्री ऑल-टाइम हाई पर पहुंची

    नई दिल्ली। सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (सियाम) ने मंगलवार को दिसंबर 2025 के वाहन बिक्री आंकड़े जारी किए। इसके अनुसार, दिसंबर में थोक पैसेंजर वाहनों की बिक्री सालाना आधार पर करीब 26.8 प्रतिशत बढ़कर 3,99,216 यूनिट्स रही, जो पिछले साल दिसंबर में 3,14,934 यूनिट्स थी। इस बढ़त ने वाहन निर्माता और डीलरों के बीच उत्साह पैदा कर दिया है।

    दोपहिया और तिपहिया वाहनों की मजबूत बिक्री

    सियाम के आंकड़ों के मुताबिक, दोपहिया वाहनों की थोक बिक्री सालाना आधार पर 39 प्रतिशत बढ़कर 15,41,036 यूनिट्स हुई, जबकि दिसंबर 2024 में यह आंकड़ा 11,05,565 यूनिट्स था। तिपहिया वाहनों की बिक्री भी 17 प्रतिशत बढ़कर 61,924 यूनिट्स दर्ज की गई, जो पिछले साल 52,733 यूनिट्स थी। इन आंकड़ों से साफ है कि छोटे और कम लागत वाले वाहन भी ग्राहकों के बीच काफी लोकप्रिय हैं।

    तीसरी तिमाही में अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा

    वित्त वर्ष 2025-26 की तीसरी तिमाही (अक्टूबर-दिसंबर) में पैसेंजर वाहनों की थोक बिक्री 12.76 लाख यूनिट्स रही। यह तिमाही की बिक्री का अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है और पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 20.6 प्रतिशत की बढ़त को दर्शाता है।

    2025 में वार्षिक बिक्री का नया रिकॉर्ड

    पूरा साल 2025 (जनवरी-दिसंबर) देखा जाए तो पैसेंजर वाहनों की कुल थोक बिक्री 44.90 लाख यूनिट्स रही। यह वार्षिक बिक्री का अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है और सालाना आधार पर 5 प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाता है।

    निर्यात में भी वृद्धि

    साल 2025 में देश से 8.63 लाख पैसेंजर वाहनों का निर्यात हुआ। यह निर्यात का अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है और पिछले साल की तुलना में 16 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।

    मजबूत बिक्री के पीछे कारक

    सियाम का मानना है कि इस मजबूत वृद्धि के पीछे कई कारक हैं। आयकर में कटौती, जीएसटी 2.0 की सुविधा और आरबीआई द्वारा ब्याज दरों में कमी ने ग्राहकों की खरीद क्षमता और धारणा पर सकारात्मक असर डाला। इन उपायों के चलते उपभोक्ता वाहन खरीदने के लिए ज्यादा प्रेरित हुए।

    सियाम के आंकड़े स्पष्ट करते हैं कि भारत में ऑटोमोबाइल सेक्टर लगातार बढ़त पर है। दिसंबर और पूरे 2025 के आंकड़े बताते हैं कि पैसेंजर, दोपहिया और तिपहिया वाहनों की मांग में मजबूत रिकवरी हुई है। भविष्य में भी यह रुझान उद्योग के लिए उत्साहजनक संकेत देता है।

  • ATM ही नहीं, UPI से भी निकाल सकेंगे PF का पैसा; जानिए कब से लागू होगा नया नियम?

    ATM ही नहीं, UPI से भी निकाल सकेंगे PF का पैसा; जानिए कब से लागू होगा नया नियम?

    नई दिल्ली। अगर आप भी जरूरत के समय पीएफ का पैसा निकालने की लंबी प्रक्रिया से परेशान रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए बड़ी राहत लेकर आई है। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) अपने करोड़ों खाताधारकों के लिए ऐसा बदलाव करने जा रहा है, जो पीएफ निकासी की परिभाषा ही बदल देगा। बहुत जल्द पीएफ का पैसा निकालने के लिए न तो दफ्तरों के चक्कर लगाने होंगे और न ही कई दिनों तक इंतजार करना पड़ेगा। अब एटीएम ही नहीं, बल्कि UPI के जरिए भी पीएफ की रकम सीधे निकाली जा सकेगी।अगर आप भी यह सोचकर परेशान रहते हैं कि जरूरत के वक्त पीएफ का पैसा निकालना इतना कठिन क्यों है, तो अब यह परेशानी जल्द ही खत्म होने वाली है। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) अपने करोड़ों सदस्यों के लिए एक ऐसा डिजिटल बदलाव लाने जा रहा है, जिससे पीएफ से पैसे निकालना आसान हो जाएगा।

    अप्रैल से शुरू हो सकती है नई सुविधा
    सूत्रों के मुताबिक, EPFO अप्रैल 2026 तक एटीएम और UPI आधारित पीएफ निकासी सुविधा शुरू कर सकता है। इसके लिए संगठन अपने डिजिटल सिस्टम को पूरी तरह अपग्रेड कर रहा है। बीते साल श्रम एवं रोजगार मंत्रालय ने घोषणा की थी कि ईपीएफओ सदस्यों के लिए पीएफ निकासी को आसान और तेज बनाया जाएगा। इसी कड़ी में अब बिना किसी अन्य अनुमति के तय सीमा तक राशि निकालने की सुविधा देने की तैयारी है।
    EPFO 3.0 का ट्रायल पूरा
    जानकारी के अनुसार, EPFO 3.0 से जुड़े सभी मॉड्यूल्स का ट्रायल पूरा कर लिया गया है। फिलहाल कोई बड़ी तकनीकी दिक्कत सामने नहीं आई है, लेकिन इसके बावजूद संगठन किसी भी तरह की खामी से बचना चाहता है। यही वजह है कि हर एंगल से सिस्टम की टेस्टिंग की जा रही है, ताकि सुविधा लागू होने के बाद खाताधारकों को किसी तरह की परेशानी न हो।

    कैसे काम करेगा नया सिस्टम?
    नए सिस्टम के तहत कर्मचारियों को पीएफ खाते से जुड़ा एक एटीएम कार्ड दिया जा सकता है, जिसके जरिए वे तय सीमा तक रकम सीधे एटीएम से निकाल सकेंगे। इसके अलावा UPI के माध्यम से भी पीएफ बैलेंस से भुगतान या ट्रांसफर संभव होगा। इससे इमरजेंसी में तुरंत कैश या डिजिटल पेमेंट करना आसान हो जाएगा।

    पहले ही मिल चुकी है 75% निकासी की छूट
    गौरतलब है कि कुछ महीने पहले EPFO ने सदस्यों को पीएफ में जमा राशि का 75 प्रतिशत तक निकालने की सुविधा दी थी। इस कदम के बाद कर्मचारियों को आर्थिक संकट के समय बड़ी राहत मिली थी। अब ATM और UPI से निकासी की सुविधा शुरू होने के बाद यह प्रक्रिया और ज्यादा सरल और तेज हो जाएगी।

  • तैयार रखें निवेश की रकम! अगले हफ्ते IPO मार्केट में आएगा तूफान, खुलेंगे 6 नए कमाई के मौके

    तैयार रखें निवेश की रकम! अगले हफ्ते IPO मार्केट में आएगा तूफान, खुलेंगे 6 नए कमाई के मौके


    नई दिल्ली। अगले हफ्ते शेयर बाजार के निवेशकों के लिए बेहद खास रहने वाला है। 12 जनवरी से 16 जनवरी के बीच प्राइमरी मार्केट में जोरदार हलचल देखने को मिलेगी। इस दौरान कुल 6 कंपनियां अपने IPO लॉन्च कर रही हैं, जिसमें एक बड़ा मेनबोर्ड IPO और पांच SME सेगमेंट के इश्यू शामिल हैं। टेक्नोलॉजी, एनर्जी और मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों की कंपनियां निवेशकों के लिए नए अवसर लेकर आ रही हैं। विशेषज्ञों के अनुसार यह सप्ताह उन निवेशकों के लिए अहम है जो शुरुआत से किसी कंपनी की ग्रोथ स्टोरी में शामिल होना चाहते हैं। अलग-अलग सेक्टरों के IPO आने से निवेशकों को अपने पोर्टफोलियो को विविधता देने का भी मौका मिलेगा। अधिकांश इश्यू 12 और 13 जनवरी से बोली प्रक्रिया शुरू करेंगे और अलग-अलग तारीखों पर बंद होंगे।

    मेनबोर्ड सेगमेंट में इस हफ्ते सबसे अधिक ध्यान Amagi Media Labs पर रहेगा। यह क्लाउड-बेस्ड SaaS कंपनी 13 जनवरी से निवेश के लिए खुलेगी और 16 जनवरी तक उपलब्ध रहेगी। इसका प्राइस बैंड ₹343 -₹361 प्रति शेयर और इश्यू साइज लगभग ₹1,788 करोड़ है। इसमें फ्रेश इश्यू के साथ OFS भी शामिल है, जिसके तहत पुराने निवेशक आंशिक हिस्सेदारी बेचेंगे। साइज और सेक्टर दोनों ही दृष्टि से यह सप्ताह का सबसे बड़ा आकर्षण माना जा रहा है।SME प्लेटफॉर्म पर भी जोरदार हलचल देखने को मिलेगी। पांच कंपनियों के इश्यू निवेशकों के लिए नए अवसर प्रदान करेंगे। इनमें शामिल हैं:

    अवाना इलेक्ट्रोसिस्टम्स: 12–14 जनवरी, प्राइस ₹56–₹59, NSE SME, लॉट साइज 4,000 शेयर।

    नर्मदेश ब्रास इंडस्ट्रीज: 12–15 जनवरी, प्राइस ₹515, इश्यू साइज ₹44.87 करोड़, लॉट 480 शेयर।

    इंडो एसएमसी: 13–15 जनवरी, प्राइस ₹141–₹149, BSE SME, न्यूनतम निवेश 2,000 शेयर।

    GRE रिन्यू एनरटेक: 13–16 जनवरी, प्राइस ₹100–₹105, रिन्यूएबल एनर्जी, लॉट साइज 2,400 शेयर।

    आर्मर सिक्योरिटी इंडिया: 14–19 जनवरी, प्राइस ₹55–₹57, लॉट साइज 4,000 शेयर।

    इसके अलावा, हाल ही में आए कुछ IPO अब लिस्टिंग के लिए तैयार हैं। इनमें भारत कोकिंग कोल, गैबियन टेक्नोलॉजीज, यजुर फाइबर्स, विक्ट्री इलेक्ट्रिक व्हीकल्स और डिफ्रेल टेक्नोलॉजीज शामिल हैं। लिस्टिंग के दिन इन शेयरों की चाल यह तय करेगी कि निवेशकों को तुरंत लिस्टिंग गेन मिलेगा या लॉन्ग टर्म निवेश करना पड़ेगा।विशेषज्ञों का कहना है कि IPO में निवेश आकर्षक होता है, लेकिन इसमें जोखिम भी जुड़ा रहता है। इसलिए निवेश से पहले कंपनी की वित्तीय रिपोर्ट, बिजनेस मॉडल और अपने निवेश लक्ष्य को समझना जरूरी है।अगला सप्ताह निवेशकों के लिए नए अवसर और संभावित लाभ के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।

  • नया टैक्स कानून 2025: 1 अप्रैल से होंगे बड़े बदलाव, जानें कैसे प्रभावित होंगे आपका पैसा

    नया टैक्स कानून 2025: 1 अप्रैल से होंगे बड़े बदलाव, जानें कैसे प्रभावित होंगे आपका पैसा

    नई दिल्ली| देश में इनकम टैक्स को लेकर सबसे बड़ी शिकायत हमेशा यही रही है कि कानून बहुत जटिल है. आम आदमी के लिए यह समझ पाना मुश्किल हो जाता है कि उसे किस सेक्शन में क्या करना है और कितना टैक्स देना है. इसी परेशानी को दूर करने के लिए सरकार अब एक नया और ज्यादा सरल कानून लेकर आ रही है, जिसका नाम है इनकम टैक्स एक्ट 2025. यह नया कानून 1 अप्रैल से पूरे देश में लागू होगा और करीब 64 साल पुराने इनकम टैक्स एक्ट 1961 की जगह लेगा.
    इनकम टैक्स एक्ट 1961 उस दौर में बनाया गया था, जब भारत की अर्थव्यवस्था आज जैसी डिजिटल और आधुनिक नहीं थी. समय के साथ इसमें सैकड़ों संशोधन होते चले गए. नतीजा यह हुआ कि कानून इतना भारी और उलझा हो गया कि टैक्स भरना तो दूर, उसे पढ़ना भी मुश्किल हो गया. छोटे टैक्सपेयर्स, नौकरीपेशा लोगों और सीनियर सिटीज़न्स के लिए यह एक बड़ी समस्या बन चुका था. सरकार का मानना है कि अब समय आ गया था कि पूरे कानून को नए सिरे से लिखा जाए.
    इनकम टैक्स एक्ट 2025 में क्या है खास
    सरकार के मुताबिक नया टैक्स कानून लगभग 50 फीसदी छोटा होगा. इसमें भाषा को आसान किया गया है ताकि आम लोग भी बिना टैक्स एक्सपर्ट की मदद के नियम समझ सकें. गैरज़रूरी सेक्शन हटाए गए हैं और कई पुराने व बेकार टैक्स प्रावधानों को पूरी तरह खत्म कर दिया गया है. सरकार का दावा है कि इससे टैक्स को लेकर होने वाले विवाद और कोर्ट-कचहरी के मामले भी कम होंगे.
    टैक्स रेट वही, नियम हुए आसान
    सबसे बड़ी राहत की बात यह है कि टैक्स की दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है. यानी आपकी टैक्स स्लैब वही रहेगी, जो पहले थी. यह कानून रेवेन्यू न्यूट्रल है, मतलब सरकार की कमाई पर भी इसका कोई असर नहीं पड़ेगा. फर्क सिर्फ इतना होगा कि अब टैक्स भरने के नियम ज्यादा साफ और समझने में आसान होंगे.

    Assessment Year का झंझट खत्म
    अब तक इनकम टैक्स में प्रीवियस ईयर और असेसमेंट ईयर जैसे मुश्किल शब्द लोगों को भ्रम में डालते थे. नए कानून में इसे खत्म कर दिया गया है. अब सिर्फ एक ही शब्द होगा टैक्स ईयर. इससे ITR भरने की प्रक्रिया और भी सरल हो जाएगी. इसके अलावा, अगर कोई टैक्सपेयर तय तारीख के बाद भी रिटर्न फाइल करता है, तो उसे TDS रिफंड पाने का अधिकार मिलेगा, जो पहले आसान नहीं था.

    सरकार ने साफ किया है कि बजट 2026-27 में टैक्स से जुड़े जो भी नए बदलाव होंगे, चाहे वो पर्सनल टैक्स हों, कॉरपोरेट टैक्स या HUF से जुड़े नियम, सभी को इसी नए इनकम टैक्स एक्ट 2025 के तहत शामिल किया जाएगा. संसद से मंजूरी मिलने के बाद अब इसके नियम और टैक्स फॉर्म तैयार किए जा रहे हैं.

    पहले भी हो चुकी है कोशिश
    यह पहली बार नहीं है जब टैक्स सिस्टम को नया रूप देने की कोशिश हुई है. साल 2010 में डायरेक्ट टैक्स कोड लाने का प्रयास हुआ था, लेकिन वह सफल नहीं हो सका. बाद में 2017 में एक कमेटी बनाई गई, जिसकी रिपोर्ट के आधार पर अब यह नया कानून तैयार किया गया है. इनकम टैक्स एक्ट 2025 का मकसद साफ है. टैक्स सिस्टम को सरल, पारदर्शी और भरोसेमंद बनाना. टैक्स वही रहेगा, लेकिन समझना अब आसान होगा. नौकरीपेशा लोगों, छोटे कारोबारियों और सीनियर सिटीज़न्स के लिए यह बदलाव बड़ी राहत माना जा रहा है.