Category: Economy

  • सोने की तेजी से भारतीय परिवारों की संपत्ति में 2025 में रिकॉर्ड बढ़ोतरी, 117 लाख करोड़ रुपए का इजाफा

    सोने की तेजी से भारतीय परिवारों की संपत्ति में 2025 में रिकॉर्ड बढ़ोतरी, 117 लाख करोड़ रुपए का इजाफा


    नई दिल्ली। साल 2025 में सोने की कीमतों में आई जबरदस्त तेजी ने भारतीय परिवारों की संपत्ति को ऐतिहासिक स्तर तक बढ़ा दिया। एचडीएफसी म्यूचुअल फंड ईयरबुक 2026 के आंकड़ों के मुताबिक 2025 में भारतीय घरों की कुल संपत्ति में करीब 117 लाख करोड़ रुपए या लगभग 1.3 ट्रिलियन डॉलर का इजाफा हुआ। यह पिछले 25 वर्षों में सोने की कीमतों में हुई सबसे बड़ी वृद्धि है।

    रिपोर्ट के अनुसारसाल 2025 में 15 दिसंबर तक सोने की कीमत प्रति 10 ग्राम लगभग 57, 000 रुपए तक पहुंच गई। पिछले साल 2024 में भी सोने की कीमत में प्रति 10 ग्राम 14,000 रुपए की वृद्धि हुई थी। इस तेजी ने न केवल परिवारों की संपत्ति बढ़ाई बल्कि रिटेल लोन की मांग को भी बढ़ावा दिया क्योंकि सोने के बदले लिए जाने वाले लोन में उल्लेखनीय बढ़ोतरी देखने को मिली।जबकि शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव रहा सोना सुरक्षित निवेश बनकर उभरा। रिपोर्ट में बताया गया है कि 2025 भारतीय शेयर बाजार के लिए स्थिरता का साल रहा। वहीं वैश्विक स्तर पर सोना, उभरते बाजार, यूरोप और मैग्निफिसेंट 7 स्टॉक सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वालों में शामिल रहे। दूसरी ओर ऑयल अमेरिकी डॉलर और बिटकॉइन जैसी संपत्तियों का प्रदर्शन कमजोर रहा।

    हालांकि भारत का प्रदर्शन वैश्विक बाजारों के मुकाबले कमजोर रहा। निफ्टी का प्रदर्शन वैश्विक और उभरते बाजारों के मुकाबले करीब 25 प्रतिशत कमजोर रहा जो पिछले लगभग 30 वर्षों का सबसे खराब प्रदर्शन माना जा रहा है। इस गिरावट के बावजूद भारतीय बाजार का वैल्यूएशन अब अपने लंबे समय के औसत स्तर के करीब आ गया है।रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि 2025 में स्मॉल-कैप और मिड-कैप शेयरों का प्रदर्शन लार्ज-कैप शेयरों के मुकाबले कमजोर रहा। करीब 30 प्रतिशत स्मॉल-कैप शेयर अपने 52 हफ्तों के उच्चतम स्तर से 30 प्रतिशत या उससे ज्यादा गिर चुके हैं। फिर भी लार्ज-कैप स्टॉक्स को निवेशकों के लिए अभी भी बेहतर विकल्प माना जा रहा है।

    निवेश को लेकर सलाह देते हुए एचडीएफसी म्यूचुअल फंड ने कहा कि नए निवेशकों को हाइब्रिड फंड्स पर विचार करना चाहिए। ऐसे फंड्स में इक्विटी डेट और सोने का मिश्रण होता है, जिससे बाजार में उतार-चढ़ाव के समय निवेशकों को बेहतर संतुलन और सुरक्षा मिलती है।इस तरह 2025 में सोने की तेजी ने भारतीय परिवारों की संपत्ति को नया आयाम दिया है। निवेशकों के लिए यह साल चुनौती और अवसर दोनों लेकर आया, जहां सोना सुरक्षित निवेश का सबसे भरोसेमंद विकल्प साबित हुआ।

  • विप्रो का Q3FY26 नतीजा: मुनाफा 3,119 करोड़, सालाना 7% गिरावट; 6 रुपये प्रति शेयर डिविडेंड का ऐलान

    विप्रो का Q3FY26 नतीजा: मुनाफा 3,119 करोड़, सालाना 7% गिरावट; 6 रुपये प्रति शेयर डिविडेंड का ऐलान


    नई दिल्ली। आईटी सर्विस प्रोवाइडर विप्रो लिमिटेड ने वित्त वर्ष 2026 की तीसरी तिमाही Q3FY26 अक्टूबर–दिसंबर के नतीजे जारी कर दिए हैं। कंपनी का कंसॉलिडेटेड नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 7% गिरकर ₹3,119 करोड़ रह गया जबकि पिछले साल की समान तिमाही में यह ₹3,354 करोड़ था। हालांकि विप्रो ने चुनौतीपूर्ण वैश्विक आईटी माहौल के बीच रेवेन्यू में 5.5% की बढ़ोतरी दर्ज की है। तिमाही का कंसॉलिडेटेड रेवेन्यू ₹23,556 करोड़ रहा, जो पिछले साल की समान तिमाही में ₹22,318 करोड़ था। मुनाफे में गिरावट के पीछे मुख्य कारणों में लागत दबाव, वैश्विक क्लाइंट खर्च में सतर्कता और कुछ प्रमुख बाजारों में धीमी डिमांड को माना जा रहा है।

    शेयर बाजार की प्रतिक्रिया
    नतीजों के दिन गुरुवार को विप्रो का शेयर 2.54% की बढ़त के साथ ₹266.80 पर बंद हुआ। हालांकि, कैलेंडर ईयर आधार पर स्टॉक अब तक लगभग 7.38% कमजोर हुआ है। कंपनी का मौजूदा मार्केट कैप करीब ₹2.80 लाख करोड़ है। विश्लेषकों के अनुसार, मुनाफे में गिरावट पहले से अनुमानित थी इसलिए निवेशकों की प्रतिक्रिया संतुलित रही।

    निवेशकों के लिए डिविडेंड
    विप्रो के बोर्ड ने ₹6 प्रति शेयर अंतरिम डिविडेंड की मंजूरी दी है। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब आईटी सेक्टर की ग्रोथ को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। डिविडेंड की घोषणा लॉन्ग-टर्म निवेशकों के लिए सकारात्मक संकेत मानी जा रही है।

    कर्मचारियों और संचालन अपडेट
    कंपनी ने बताया कि तिमाही के दौरान कर्मचारियों की संख्या में इजाफा हुआ है और एट्रिशन रेट में मामूली स्थिरता देखने को मिली। मैनेजमेंट ने यह भी कहा कि धीरे-धीरे डिमांड में सुधार के संकेत मिल रहे हैं, खासकर कंसल्टिंग और डिजिटल सर्विसेज सेगमेंट में।विप्रो एक ग्लोबल टेक्नोलॉजी सर्विसेज और कंसल्टिंग कंपनी है, जिसकी मौजूदगी 65 से अधिक देशों में है। वैश्विक आर्थिक हालात और आईटी खर्च में सुस्ती के बीच कंपनी लागत नियंत्रण और बड़े डील्स पर फोकस कर रही है। आने वाली तिमाहियों में निवेशक डिमांड रिकवरी और मार्जिन सुधार पर नजर रखेंगे।

  • GMP से संकेत: BCCL IPO पर मुनाफे की संभावना, हर शेयर पर 60% से ज्यादा कमाई?

    GMP से संकेत: BCCL IPO पर मुनाफे की संभावना, हर शेयर पर 60% से ज्यादा कमाई?


    नई दिल्ली। भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (BCL) IPO की लिस्टिंग को लेकर बाजार में जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है। कोल इंडिया की सब्सिडियरी कंपनी होने के नाते इस IPO को निवेशकों का खासा ध्यान मिला है और ग्रे मार्केट एक्टिविटीज को ट्रैक करने वाली कई वेबसाइट्स के मुताबिक इस IPO की लिस्टिंग ₹14.2 प्रीमियम पर होने की उम्मीद जताई जा रही है। अगर यह अनुमान सही रहा, तो IPO की लिस्टिंग ₹37.2 प्रति शेयर के भाव पर हो सकती है, जो IPO के अपर प्राइस बैंड ₹23 के मुकाबले 61.74% का जबरदस्त मुनाफा दर्शाता है।
    लिस्टिंग की तारीख पहले 16 जनवरी 2026 निर्धारित की गई थी, लेकिन BMC चुनाव परिणामों के चलते इसे बदलकर 9 जनवरी 2026 कर दिया गया है। इस IPO को निवेशकों से भारी प्रतिक्रिया मिली है और यह लगभग 147 गुना सब्सक्राइब हुआ। IPO 9 जनवरी से 13 जनवरी तक खुला रहा और अंतिम दिन में कुल 34,69,46,500 शेयरों के मुकाबले 50,95,55,58,000 शेयरों के लिए बोलियां आईं, जो इस इश्यू की लोकप्रियता को दर्शाता है।

    हालांकि यह IPO पूरी तरह से ऑफर-फॉर-सेल (OFS) है, यानी भारत कोकिंग कोल को इस इश्यू से कोई धन नहीं मिलेगा। IPO से जो भी राशि जुटेगी, वह प्रमोटर और शेयरहोल्डर कोल इंडिया लिमिटेड को मिलेगी।

    इसके बावजूद निवेशकों ने इस IPO को खूब समर्थन दिया, जो इस सेक्टर में बढ़ती विश्वास और कंपनी की मजबूत पोजिशन का संकेत है।

    कैटेगरी के हिसाब से देखें तो इस IPO को सबसे अधिक सब्सक्रिप्शन क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIBs) से मिला, जिन्होंने इसे 300 गुना से अधिक सब्सक्राइब किया। QIB सेगमेंट के लिए रिजर्व 7,91,69,000 शेयरों के मुकाबले 24,60,65,19,600 शेयरों के लिए बोलियां आईं। रिटेल इन्वेस्टर कैटेगरी में भी अच्छा उत्साह दिखा और यह 49.33 गुना सब्सक्राइब हुआ। नॉन-इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स और शेयरहोल्डर कैटेगरी में भी क्रमशः 258.16 गुना और 87.29 गुना सब्सक्रिप्शन मिला।

    कुल मिलाकर, भारत कोकिंग कोल लिमिटेड IPO ने बाजार में शानदार रिस्पॉन्स दर्ज किया है और ग्रे मार्केट के संकेत भी इस बात की ओर इशारा करते हैं कि लिस्टिंग पर अच्छा रिटर्न संभव है। लिस्टिंग की नई तारीख 9 जनवरी 2026 होने के बाद निवेशकों की नजर इस IPO पर और अधिक केंद्रित हो गई है।

  • मुंबई में महत्वपूर्ण मुलाकातें: सर्जियो गोर ने आरबीआई और टाटा ग्रुप से की बातचीत

    मुंबई में महत्वपूर्ण मुलाकातें: सर्जियो गोर ने आरबीआई और टाटा ग्रुप से की बातचीत

    नई दिल्ली।  भारत में अमेरिका के नए राजदूत सर्जियो गोर ने इस हफ्ते की शुरुआत में अपना कामकाज शुरू कर दिया। सोमवार को नई दिल्ली में जिम्मेदारी संभालने के बाद, 14 जनवरी को उन्होंने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को राष्ट्रपति भवन में अपने क्रेडेंशियल्स सौंपे। इस अवसर पर गोर ने कहा कि उन्हें राष्ट्रपति ट्रंप के भरोसे और अमेरिका सरकार की प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाने पर गर्व है। उन्होंने जोर देकर कहा कि अमेरिका-भारत साझेदारी सुरक्षा, व्यापार, ऊर्जा और तकनीक सहित कई अहम क्षेत्रों में मजबूत होगी और यह साझेदारी 21वीं सदी को परिभाषित करेगी।

    मुंबई में वाणिज्यिक दौरा और प्रमुख मुलाकातें
    अपने कार्यकाल की शुरुआत में सर्जियो गोर सबसे पहले मुंबई यात्रा पर पहुंचे। वहां उन्होंने रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के गवर्नर संजय मल्होत्रा से मुलाकात की और दोनों ने सहयोग बढ़ाने के संभावित क्षेत्रों पर चर्चा की, जिसमें नई अमेरिकी तकनीक शामिल है। इस मुलाकात की जानकारी साझा करते हुए गोर ने कहा, “आरबीआई के गवर्नर से मिलकर बहुत अच्छा लगा। हमने सहयोग बढ़ाने के क्षेत्रों पर चर्चा की।”

    इसके अलावा गोर ने टाटा कंपनी के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन से भी मुलाकात की। उन्होंने इस मुलाकात की तस्वीरें शेयर करते हुए लिखा कि यह एक ऐसा समूह है जिसकी 150 साल पुरानी विरासत है और जिसकी अमेरिका में मजबूत मौजूदगी है।

    ट्रेड और रणनीतिक साझेदारी पर जोर
    नई दिल्ली में अपने पहले दिन अमेरिकी राजदूत ने भारत-अमेरिका ट्रेड वार्ता की जानकारी भी साझा की। उन्होंने बताया कि दोनों देशों के बीच 13 जनवरी से ट्रेड वार्ता फिर से शुरू हो गई है और अगली बैठक मंगलवार को होगी। गोर ने कहा कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा देश होने के कारण डील अंतिम रूप देना आसान काम नहीं है, लेकिन अमेरिका और भारत के बीच ट्रेड, सुरक्षा, काउंटर टेररिज्म, ऊर्जा, तकनीक, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों में मजबूत सहयोग जारी रहेगा।

    भारत अमेरिका का सबसे अहम साझेदार
    सर्जियो गोर ने भारत को अमेरिका का सबसे महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदार बताया और कहा कि आने वाले महीनों और सालों में उनका उद्देश्य एक बड़ा एजेंडा पूरा करना है। उनका मानना है कि दोनों देश सच्चे रणनीतिक साझेदार बनकर काम करेंगे, जिसमें सम्मान, ताकत और नेतृत्व दोनों तरफ से आएगा।

    इस तरह, सर्जियो गोर का कार्यकाल भारत-अमेरिका सहयोग को नई ऊँचाई पर ले जाने और दोनों देशों के बीच व्यापारिक एवं रणनीतिक रिश्तों को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।

  • सेबी का बड़ा फैसला… एक अफ्रैल से बदल जाएंगे म्यूचुअल फंड से जुड़े ये नियम

    सेबी का बड़ा फैसला… एक अफ्रैल से बदल जाएंगे म्यूचुअल फंड से जुड़े ये नियम


    नई दिल्ली।
    भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) (Securities and Exchange Board of India + SEBI) ने म्यूचुअल फंड (Mutual Fund ) से जुड़े नियमों में अहम बदलाव किए हैं। इसका मकसद पारदर्शिता बढ़ाना, निवेशकों के हितों की सुरक्षा करना और फंड हाउसों में बेहतर गवर्नेंस सुनिश्चित करना है। ये नए नियम 1 अप्रैल 2026 से लागू होंगे।


    क्या हैं नए नियम?

    नए नियमों के तहत म्यूचुअल फंड योजनाओं के खर्च ढांचे में अहम बदलाव किए गए हैं। म्यूचुअल फंड योजनाएं अब अपने प्रदर्शन से जुड़ा बेस एक्सपेंस रेशियो वसूल सकेंगी। सेबी ने स्पष्ट किया है कि जो योजनाएं प्रदर्शन आधारित बेस एक्सपेंस रेशियो लेने का विकल्प चुनेंगी, उन्हें बोर्ड द्वारा समय-समय पर तय किए गए खर्च ढांचे और डिस्क्लोजर नियमों का पालन करना होगा। इसके अलावा कुल खर्च को अलग-अलग हिस्सों में दिखाना अनिवार्य होगा। इसके अलावा ब्रोकरेज सीमा में भी सेबी ने कटौती की है। कैश मार्केट में ब्रोकरेज की अधिकतम सीमा को घटाकर 6 बेसिस पॉइंट कर दिया गया है। वहीं डेरिवेटिव सेगमेंट में नेट ब्रोकरेज कैप को 3.89 बेसिस प्वाइंट से घटाकर 2 बेसिस प्वाइंट कर दिया गया है।

    इसके अलावा पहले ब्रोकरेज, सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT), स्टांप ड्यूटी और एक्सचेंज फीस जैसे खर्च टोटल एक्सपेंस रेशियो (TER) में शामिल रहते थे। वहीं अब इन्हें अलग-अलग दिखाना होगा। नया बेस एक्सपेंस रेशियो केवल एसेट मैनेजमेंट कंपनी द्वारा निवेशकों का पैसा मैनेज करने के लिए ली जाने वाली फीस को दिखाएगा। इसके अलावा, सेबी ने ट्रस्टी और प्रमुख प्रबंधकीय कर्मियों (KMPs) की जिम्मेदारियों को भी बढ़ाया है। इससे एसेट मैनेजमेंट कंपनियों पर निगरानी और जवाबदेही और सख्त होगी, जिससे गवर्नेंस मानकों को मजबूती मिलेगी।


    शेयर बाजार में बदलाव के भी प्रस्ताव

    हाल ही में सेबी ने शेयर बाजारों में कारोबार से संबंधित ढांचे में बड़े बदलाव का प्रस्ताव किया। इसका मकसद नियमों को सरल बनाना, दोहराव को हटाना और बाजार सहभागियों के लिए अनुपालन के बोझ को कम करना है। ये प्रस्ताव शेयर बाजारों और जिंस वायदा-विकल्प बाजारों में कारोबारी सुगमता बढ़ाने की सेबी की व्यापक पहल का हिस्सा हैं।

  • कहीं आपके आधार का Misuse तो नहीं हो रहा…. ऐसे करें चेक, वरना हो सकता है बड़ा नुकसान

    कहीं आपके आधार का Misuse तो नहीं हो रहा…. ऐसे करें चेक, वरना हो सकता है बड़ा नुकसान


    नई दिल्ली।
    आज डिजिटल पहचान दस्तावेज़ों (Digital Identity Documents) में आधार कार्ड (Aadhar card) सबसे प्रमुख से स्वीकार किया जाने वाला प्रमाण है। बैंक खाते खोलने से लेकर मोबाइल सिम लेने, सरकारी सेवाओं से जुड़ने तक हर जगह आधार का इस्तेमाल अनिवार्य हो गया है। हालांकि यह सुविधा सरलता प्रदान करती है, वहीं इसका गलत इस्तेमाल (misuse) भी एक गंभीर खतरा बन चुका है। जानें कैसे हो रहा यह नया फ्रॉड और कैसे आप इससे बचें।


    ऐसे किया जा रहा ये बड़ा फ्रॉड

    हाल ही में सामने आई रिपोर्ट के अनुसार कई लोगों ने अनुभव किया है कि उनके नाम पर बिना उनकी जानकारी के लोन या क्रेडिट स्कोर से जुड़ी गतिविधियां हो रही हैं, जिसके पीछे धोखेबाज़ों द्वारा आधार कार्ड डिटेल्स का उपयोग करने के मामले मिल रहे हैं। ऐसे मामलों में अक्सर पीड़ितों को तब पता चलता है जब बैंक या क्रेडिट एजेंसियों से नोटिस प्राप्त होता है या उनके क्रेडिट रिकॉर्ड में किसी अज्ञात लोन का जिक्र दिखता है।


    Aadhaar कार्ड का गलत इस्तेमाल एक गंभीर समस्या

    Aadhaar का उपयोग वित्तीय सेवाओं, कर्ज (loan) और बैंकिंग के लिए इंटरैक्शन में किया जाता है। इसलिए यदि किसी के पास आपके आधार कार्ड की डिटेल्स हैं, तो वह इसे अनधिकृत तरीकों से लोन, क्रेडिट कार्ड, बैंक खाते आदि के लिए उपयोग कर सकता है। ऐसे फ्रॉड अक्सर तब उजागर होते हैं जब व्यक्ति को बैंक या क्रेडिट एजेंसी से नोटिस या सूचना प्राप्त होती है कि उसके नाम पर लोन या क्रेडिट असाइनमेंट हुआ है, जबकि उसने ऐसा कुछ नहीं लिया होता।


    मोबाइल से कैसे करें चेक

    सबसे भरोसेमंद तरीका है क्रेडिट रिपोर्ट चेक करना। CIBIL, Equifax या Experian जैसी प्रमुख क्रेडिट ब्यूरो की वेबसाइटों पर जाकर आप अपनी क्रेडिट रिपोर्ट मुफ्त में देख सकते हैं। आवश्यक जानकारी भरें → उपयुक्त OTP वेरिफिकेशन करें → रिपोर्ट में अपने नाम से जुड़े सभी लोन, क्रेडिट कार्ड, और बैलेंस की जानकारी देखें। यदि रिपोर्ट में ऐसा कोई लोन दिखाई दे, जिसे आपने कभी लिया ही नहीं है, तो यह धोखाधड़ी का संकेत हो सकता है।


    मोबाइल बैंकिंग/बैंक ऐप द्वारा कैसे चेक करें

    आज बहुत से बैंक और वित्तीय संस्थान मोबाइल ऐप्स या ऑनलाइन पोर्टल्स के जरिये भी ग्राहकों को अपने खाते और लोन स्टेटस की जानकारी देने की सुविधा देते हैं। बैंक ऐप/वेबसाइट में लॉग इन करें। Aadhaar OTP के साथ वेरिफिकेशन करें। देखें कि आपके नाम पर कौन-कौन से लोन एक्टिव हैं। यह तरीका काफी सरल और तेज है और इसे आप मिनटों में कर सकते हैं।


    अगर लोन मिसयूज दिखता है तो तुरंत कदम

    यदि जांच के दौरान कोई अनजान/फर्जी लोन दिखाई पड़े, तो तुरंत ये कार्य करें: – बैंक या कंपनी से संपर्क – RBI की आधिकारिक complaint portal पर शिकायत दर्ज करें – नजदीकी Cyber Crime सेल / पुलिस स्टेशन पर रिपोर्ट दर्ज करें समय रहते शिकायत दर्ज होने से न सिर्फ क्रेडिट स्कोर खराब होने से बचता है, बल्कि आर्थिक नुकसान रोकना भी आसान हो जाता है।

    Aadhaar डिटेल्स शेयर करते समय सावधानियां
    Aadhaar कार्ड की जानकारी किसी के साथ तभी साझा करें जब वह भरोसेमंद वेबसाइट, बैंक, सरकारी पोर्टल या KYC प्रक्रिया के लिए आधिकारिक माध्यम हो। – OTP केवल आधिकारिक संस्थाओं को दें – मोबाइल नंबर लिंकिंग नियमित रूप से चेक करें – Aadhaar को लॉक/अनलॉक फीचर का उपयोग करें यदि संभव छोटा-सा सावधानी का कदम भी बड़े धोखों से बचा सकता है।

  • वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच भारत के निर्यात में 1.87 फीसदी का इजाफा

    वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच भारत के निर्यात में 1.87 फीसदी का इजाफा


    नई दिल्ली।
    वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं (Global Economic Uncertainties) के बीच बीते महीने (दिसंबर 2025) में भारत (India) से होने वाले वस्तु निर्यात (Commodity Export) में 1.87 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इस दौरान भारत ने 38.51 अरब डॉलर का निर्यात किया है। जबकि, उससे पहले वर्ष की की समान अवधि (दिसंबर 2024) में 37.80 अरब डॉलर का निर्यात किया था।

    वहीं, बीते महीने वस्तुओं का आयात 8.7 प्रतिशत बढ़कर 63.55 अरब डॉलर रहा, जो दिसंबर 2024 में 58.43 अरब डॉलर का रहा है। इस तरह से बीते महीने वस्तुओं के आयात में वृद्धि के चलते व्यापार घाटा बढ़कर 25.04 अरब डॉलर हो गया।

    गुरुवार को वाणिज्य मंत्रालय की तरफ से जारी आयात-निर्यात के आंकड़ों से पता चलता है कि वस्तु एवं सेवाओं को मिलाकर भारत ने बीते महीने 74.01 अरब डॉलर का निर्यात किया है, जबकि दिसंबर 2024 में 74.77 अरब डॉलर का निर्यात किया था।

    सेवा के निर्यात में गिरावट
    इस अवधि में सेवा के निर्यात में गिरावट दर्ज की गई है, जो 36.97 से घटकर 36.50 अरब डॉलर रही है। वहीं, आयात की बात करें तो दिसंबर 2025 में भारत ने वस्तु एवं सेवा का कुल निर्यात 80.84 अरब डॉलर का रहा है, जो दिसंबर 2024 में 76.23 अब ड़लर का रहा था। चालू वित्त वर्ष (अप्रैल-दिसंबर) के दौरान देश का कुल वस्तु निर्यात 2.44 प्रतिशत बढ़कर 330.29 अरब डॉलर का रहा है। जबकि आयात 5.9 प्रतिशत बढ़कर 578.61 अरब डॉलर हो गया।


    नौ महीनों में कुल व्यापार घाटा 248.32 अरब डॉलर पर पहुंचा

    इस तरह वित्त वर्ष के पहले नौ महीनों में कुल व्यापार घाटा 248.32 अरब डॉलर दर्ज किया गया। अगर वस्तु एवं सेवा क्षेत्र के निर्यात को जोड़कर देखा जाए तो बीते नौ महीनों में निर्यात 4.33 प्रतिशत बढ़ गया है जो वित्तीय वर्ष 2024-25 में 607.93 अरब डॉलर का था लेकिन चालू वित्तीय वर्ष दिसंबर तक ही निर्यात बढ़कर 634.26 अरब डॉलर का रहा है।


    निर्यात के मोर्चे पर सकारात्मक रुझान

    वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल का निर्यात को लेकर कहना है कि तमाम वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारत का निर्यात सकारात्मक दिखाई दे रहा है। मौजूदा रुझानों को देखते हुए उम्मीद है कि चालू वित्त वर्ष में कुल निर्यात (वस्तु और सेवाएं) 850 अरब डॉलर का आंकड़ा पार कर सकता है। बीते महीने इंजीनियरिंग उत्पाद, इलेक्ट्रॉनिक्स, समुद्री उत्पाद और दवा जैसे क्षेत्रों में निर्यात बढ़ा है। इसके साथ अमेरिका, चीन और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) को भारत का निर्यात स्थिर गति से बढ़ रहा है।


    अमेरिका-चीन के साथ बढ़ रहा कारोबार

    वैश्विक खींचतान के बीच अमेरिका द्वारा भारत पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगाया हुआ है लेकिन उसके बावजूद अमेरिका को होने वाला निर्यात नवंबर की तुलना में दिसंबर में भी स्थिर रहा है। बीते महीने भारत से 6.89 अरब डॉलर का निर्यात हुआ है। जबकि नवंबर 2025 में 6.98 अरब डॉलर का निर्यात हुआ था। अगर दिसंबर 2024 के मुकाबले देखा जाए तो थोड़ी से कमी दिखाई देती है क्योंकि दिसंबर 2024 में भारत से 7.01 अरब डॉलर का निर्यात हुआ था। उधर, चालू वित्तीय वर्ष में वित्तीय वर्ष 2024-25 के मुकाबले 9.75 प्रतिशत की वृद्धि दिखाई देती है। वहीं, चीन को होने वाले निर्यात में 36.68 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

  • भारत में टेस्ला को नहीं मिला अपेक्षित रिस्पॉन्स, 2025 में सिर्फ 225 कारों की बिक्री..

    भारत में टेस्ला को नहीं मिला अपेक्षित रिस्पॉन्स, 2025 में सिर्फ 225 कारों की बिक्री..


    नई दिल्ली। दुनिया भर में इलेक्ट्रिक वाहन क्रांति की अगुआ मानी जाने वाली अमेरिकी कार कंपनी टेस्ला को भारत में अब तक अपेक्षित सफलता नहीं मिल पाई है। इंडस्ट्री डेटा के अनुसार वर्ष 2025 में टेस्ला ने भारतीय बाजार में केवल 225 यूनिट्स की बिक्री दर्ज की जो कंपनी की वैश्विक पहचान और भारत में तेजी से बढ़ते ईवी बाजार को देखते हुए बेहद कम मानी जा रही है।

    फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशन FADA के आंकड़ों के मुताबिक सितंबर 2025 में टेस्ला की 64 कारें बिकीं अक्टूबर में यह आंकड़ा 40 यूनिट्स रहा नवंबर में 48 यूनिट्स और दिसंबर में 73 यूनिट्स की बिक्री दर्ज की गई। साल के अंतिम महीने में थोड़ी बढ़त जरूर देखने को मिली लेकिन कुल मिलाकर आंकड़े यह संकेत देते हैं कि भारतीय ग्राहक टेस्ला से अभी दूरी बनाए हुए हैं।

    टेस्ला ने भारत में अपने सफर की शुरुआत मुंबई में शोरूम खोलकर की थी। इसके बाद कंपनी ने गुरुग्राम मुंबई और दिल्ली में एक्सपीरियंस सेंटर्स भी शुरू किए जहां ग्राहकों को वाहन देखने टेस्ट ड्राइव और चार्जिंग सुविधाओं की जानकारी दी जाती है। कंपनी के पास फिलहाल भारत में करीब 12 सुपरचार्जर और 10 डेस्टिनेशन चार्जर मौजूद हैं लेकिन यह नेटवर्क अभी बड़े पैमाने पर ग्राहकों का भरोसा जीतने के लिए पर्याप्त नहीं माना जा रहा।

    वर्तमान में टेस्ला भारत में केवल एक मॉडल – मॉडल वाई – की बिक्री कर रही है। यह रियरव्हीलड्राइव RWD इलेक्ट्रिक एसयूवी है। इसके स्टैंडर्ड RWD वेरिएंट की एक्सशोरूम कीमत 59.89 लाख रुपये है जबकि लॉन्ग रेंज RWD वेरिएंट की कीमत 67.89 लाख रुपये रखी गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि पूरी तरह से निर्मित वाहनों CBU पर लगने वाले भारी आयात शुल्क के कारण टेस्ला की कीमतें भारतीय बाजार में काफी ज्यादा हो गई हैं जिससे संभावित ग्राहक पीछे हट रहे हैं।

    हालांकि तकनीकी रूप से टेस्ला मॉडल वाई एक दमदार इलेक्ट्रिक वाहन है। कंपनी के अनुसार इसका स्टैंडर्ड वेरिएंट एक बार चार्ज करने पर करीब 500 किलोमीटर की रेंज देता है जबकि लॉन्ग रेंज वेरिएंट 622 किलोमीटर तक चल सकता है। स्टैंडर्ड मॉडल 0 से 100 किमी प्रति घंटे की रफ्तार महज 5.9 सेकंड में पकड़ लेता है जबकि लॉन्ग रेंज वेरिएंट 5.6 सेकंड में यह गति हासिल कर लेता है। दोनों मॉडलों की अधिकतम रफ्तार 201 किमी प्रति घंटे बताई गई है। फास्ट चार्जिंग के जरिए सिर्फ 15 मिनट में 238 से 267 किलोमीटर तक की अतिरिक्त रेंज मिलने का दावा भी किया जाता है।

    दिलचस्प बात यह है कि जहां टेस्ला को भारत में संघर्ष करना पड़ रहा है वहीं देश का इलेक्ट्रिक वाहन बाजार तेजी से विस्तार कर रहा है। वाहन पोर्टल के आंकड़ों के अनुसार 2025 में कुल वाहन पंजीकरण में इलेक्ट्रिक वाहनों की हिस्सेदारी बढ़कर 8 प्रतिशत तक पहुंच गई है और कुल ईवी बिक्री 23 लाख यूनिट्स का आंकड़ा पार कर चुकी है। ऐसे में विशेषज्ञों का मानना है कि अगर टेस्ला भारत में स्थानीय मैन्युफैक्चरिंग या किफायती मॉडल लाती है तो भविष्य में उसकी स्थिति बेहतर हो सकती है।

  • CREDIT CARD अभी-अभी लिया है तो बुद्धिमानी से इस्तेमाल की ये बातें तुरंत जान लें, चक्रव्यूह में फंसने से बच जाएंगे

    CREDIT CARD अभी-अभी लिया है तो बुद्धिमानी से इस्तेमाल की ये बातें तुरंत जान लें, चक्रव्यूह में फंसने से बच जाएंगे

    नई दिल्ली  क्रेडिट कार्ड अभी-अभी आपके हाथ में आया है और वो चमकदार प्लास्टिक का टुकड़ा आपको लग रहा है जैसे जादू की छड़ी, लेकिन सावधान! ये जादू की छड़ी नहीं, बल्कि एक दो धारी तलवार है। सही इस्तेमाल से ये आपकी फाइनेंशियल लाइफ को आसान बना सकता है, रिवॉर्ड्स, कैशबैक, क्रेडिट स्कोर मजबूत कर सकता है और इमरजेंसी में काम आ सकता है। लेकिन थोड़ी सी लापरवाही और आप चक्रव्यूह में फंस जाएंगे, जहां ब्याज की दरें 3-3.5% प्रति माह (यानी 36-42% सालाना), लेट फीस, पेनाल्टी और क्रेडिट स्कोर का भारी नुकसान आपको सालों तक परेशान कर सकता है। खासकर पहली बार क्रेडिट कार्ड यूजर्स के लिए ये शुरुआती दौर सबसे खतरनाक और सबसे महत्वपूर्ण होता है। बैंक आपको कम लिमिट देता है, लेकिन आपकी हर हरकत पर नजर रखता है। इसलिए अभी से ही कुछ बुनियादी लेकिन गेम-चेंजिंग नियमों को अपनाएं, ताकि आप क्रेडिट कार्ड के फायदे उठा सकें और उसके जाल में न फंसें।
    क्रेडिट कार्ड का सही इस्तेमाल कैसे करें?
    बिल समय पर और पूरा चुकाना है सबसे जरूरी

    क्रेडिट कार्ड का बिल हमेशा तय तारीख से पहले और पूरा चुकाने की कोशिश करें। इससे न केवल आपका क्रेडिट स्कोर बेहतर बना रहता है, बल्कि भारी ब्याज देने से भी बचाव होता है। अगर किसी कारणवश पूरा भुगतान संभव न हो, तो कम से कम न्यूनतम राशि से अधिक भुगतान जरूर करें, ताकि ब्याज का बोझ कम किया जा सके।

    बड़े खर्च को EMI में बदलना हो सकता है फायदेमंद
    क्रेडिट कार्ड से की गई बड़ी खरीदारी को EMI में बदलने का विकल्प चुनकर आप अपने खर्च को आसान किस्तों में बांट सकते हैं। इससे एकमुश्त भुगतान का दबाव कम होता है और कई बार यह सामान्य क्रेडिट कार्ड ब्याज से सस्ता भी पड़ता है।

    कैश निकालने से करें परहेज
    क्रेडिट कार्ड से नकद निकालना सबसे महंगे विकल्पों में से एक माना जाता है। कैश एडवांस पर पैसे निकालते ही ब्याज लगना शुरू हो जाता है और इसमें कोई ब्याज-मुक्त अवधि नहीं मिलती। साथ ही, अतिरिक्त शुल्क भी देना पड़ता है। इसलिए इस सुविधा का इस्तेमाल केवल आपात स्थिति में ही करें।

    अपने खर्च पर लगातार रखें नजर
    क्रेडिट कार्ड के खर्च को कंट्रोल में रखने के लिए स्टेटमेंट और बैंक से आने वाले SMS या ई-मेल अलर्ट नियमित रूप से चेक करते रहें। इससे आपके खर्च की पूरी जानकारी बनी रहती है। इसके अलावा, समय-समय पर क्रेडिट रिपोर्ट की जांच करना भी जरूरी है, ताकि किसी तरह की गलती या गड़बड़ी समय रहते पकड़ी जा सके।

    एक साथ कई क्रेडिट कार्ड के लिए आवेदन न करें
    बार-बार या एक साथ कई क्रेडिट कार्ड के लिए आवेदन करने से आपके क्रेडिट स्कोर पर नकारात्मक असर पड़ सकता है, क्योंकि इससे हार्ड इंक्वायरी बढ़ती है। बेहतर है कि अपनी जरूरत और खर्च करने की आदतों के अनुसार ही सही कार्ड का चयन करें।

    रिवॉर्ड्स और बेनिफिट्स की जानकारी रखें
    हर क्रेडिट कार्ड पर मिलने वाले रिवॉर्ड पॉइंट्स, कैशबैक और अन्य ऑफर्स अलग-अलग होते हैं। इनकी जानकारी रखकर सही तरीके से इस्तेमाल किया जाए, तो यह आपकी बचत में इजाफा कर सकते हैं।

    सिर्फ भरोसेमंद जगहों पर ही कार्ड का इस्तेमाल करें
    क्रेडिट कार्ड से होने वाले फ्रॉड से बचने के लिए हमेशा भरोसेमंद दुकानों, वेबसाइट्स और मर्चेंट्स पर ही भुगतान करें। इससे कार्ड के दुरुपयोग का खतरा काफी हद तक कम हो जाता है। समझदारी से किया गया क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल न केवल आपके रोजमर्रा के खर्च को आसान बनाता है, बल्कि भविष्य में लोन और अन्य वित्तीय जरूरतों के लिए भी आपको मजबूत स्थिति में रखता है।