Category: Economy

  • साउथ पार्स गैस फील्ड पर हमला: ब्रेंट क्रूड पहुंचा 112 डॉलर पर, भारत में पेट्रोल-डीजल महंगा होने की संभावना

    साउथ पार्स गैस फील्ड पर हमला: ब्रेंट क्रूड पहुंचा 112 डॉलर पर, भारत में पेट्रोल-डीजल महंगा होने की संभावना


    नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट में जारी तनाव और ईरान-इजरायल संघर्ष के बीच ग्लोबल क्रूड मार्केट में बड़ी तेजी देखने को मिल रही है। इजरायल ने दुनिया की सबसे बड़ी ऑयल और नेचुरल गैस फील्ड साउथ पार्स पर हमला किया है। इसके बाद ब्रेंट क्रूड के दाम 112 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गए हैं। अमेरिकी क्रूड (WTI) भी 99 डॉलर प्रति बैरल के करीब कारोबार कर रहा है।

    साउथ पार्स पर हमला और उसके असर
    इजरायल के हमले के जवाब में ईरान ने कतर के रास लाफान इंडस्ट्रियल सिटी पर मिसाइल दागी। एक मिसाइल सीधे लक्ष्य पर लगी जबकि चार को बीच में ही रोका गया। रास लाफान दुनिया की सबसे बड़ी LNG प्रोडक्शन साइट है जो इस महीने की शुरुआत से बंद पड़ी थी। हमले से काफी नुकसान हुआ है।

    साउथ पार्स गैस फील्ड ईरान की घरेलू गैस सप्लाई के साथ पड़ोसी देशों इराक और टर्की को भी गैस भेजता है। हमले में असलुयेह के ऑयल और पेट्रोकेमिकल प्लांट्स को भी नुकसान पहुंचा है। यह फील्ड ईरान और कतर के बीच बंटा हुआ है और दुनिया के सबसे बड़े नेचुरल गैस भंडार का करीब एक-तिहाई हिस्सा है।

    ब्रेंट क्रूड और गैस में उछाल

    एशियाई ट्रेडिंग में गुरुवार सुबह क्रूड ऑयल 112 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। अमेरिकी नेचुरल गैस में भी 5% की तेजी आई है। विश्लेषकों का कहना है कि यदि हमले जारी रहे तो क्रूड की कीमतें और बढ़ सकती हैं।

    भारत पर असर

    भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए मिडिल ईस्ट पर काफी निर्भर है। देश का लगभग 85-90% क्रूड आयात इसी क्षेत्र से आता है जिसमें 45-50% सीधे मिडिल ईस्ट से है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तनाव और सप्लाई बाधित होने से भारत में पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने की संभावना है।

    महंगाई पर असर

    क्रूड ऑयल की बढ़ती कीमतों का सीधा असर पेट्रोल-डीजल ट्रांसपोर्ट लॉजिस्टिक्स और घरेलू LPG सिलेंडर के दाम पर पड़ेगा। स्टोरेज सीमित होने और सप्लाई बाधित होने से शॉर्टेज का खतरा भी है जिससे आम परिवारों की जेब पर दबाव बढ़ सकता है।

  • FASTag: सरकार ने लागू किए सख्त नियम….टोल नहीं कटा तो अब भरना होगा डबल जुर्माना

    FASTag: सरकार ने लागू किए सख्त नियम….टोल नहीं कटा तो अब भरना होगा डबल जुर्माना


    नई दिल्ली।
    हाईवे (Highway) पर सफर करने वालों के लिए बड़ी खबर है। सरकार (Government) ने FASTag Rules में बदलाव करते हुए नया सख्त नियम (New Strict Rule) लागू किया है। अब अगर टोल प्लाजा पर किसी कारण से FASTag से भुगतान नहीं हो पाता है, तो वाहन मालिक को तय समय में भुगतान करना जरूरी होगा, वरना दोगुना जुर्माना देना पड़ेगा।


    72 घंटे में भुगतान नहीं किया तो देना होगा डबल चार्ज

    नए नियम के अनुसार, अगर कोई वाहन बिना टोल भुगतान किए बैरियर-फ्री टोल प्लाजा से गुजर जाता है और 72 घंटे के भीतर बकाया राशि नहीं चुकाता, तो उस पर दोगुना शुल्क लगाया जाएगा। यानी अगर आपने समय पर भुगतान नहीं किया, तो आपको मूल टोल से दो गुना रकम चुकानी पड़ेगी।

    क्यों लाए गए ये नए नियम?
    सरकार ने यह फैसला इसलिए लिया है ताकि बिना भुगतान के टोल पार करने वालों पर रोक लगे और डिजिटल टोल सिस्टम को और मजबूत किया जा सके। नियमों का पालन सुनिश्चित हो। यह बदलाव नेशनल हाईवे फीस नियमों में संशोधन के तहत लागू किया गया है।


    टोल एजेंसियों की जिम्मेदारी भी तय

    सिर्फ वाहन चालकों पर ही नहीं, बल्कि टोल एजेंसियों पर भी जिम्मेदारी तय की गई है। अगर किसी उपभोक्ता की शिकायत पर टोल एजेंसी 5 दिनों के अंदर कार्रवाई नहीं करती है तो उस मामले में बकाया टोल की मांग अपने आप खत्म हो जाएगी। यानी अगर गलती एजेंसी की है और समय पर समाधान नहीं हुआ, तो आपको राहत मिल सकती है।


    क्या है ‘अवैतनिक उपयोगकर्ता शुल्क’?

    संशोधित नियमों में ‘अवैतनिक उपयोगकर्ता शुल्क’ को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया है। यह वह टोल है जो इलेक्ट्रॉनिक टोल संग्रह प्रणाली द्वारा वाहन के गुजरने की पुष्टि के बावजूद प्राप्त नहीं होता है। ऐसे मामलों में, पंजीकृत वाहन मालिकों को एक इलेक्ट्रॉनिक नोटिस भेजा जाएगा, जिसमें वाहन का विवरण, टोल पार करने की तारीख और स्थान, और देय राशि की जानकारी होगी।

    ये नोटिस एसएमएस, ईमेल, मोबाइल ऐप और एक विशेष पोर्टल के माध्यम से भेजे जाएंगे। साथ ही, राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिक टोल संग्रह प्रणाली को वाहन डेटाबेस ‘वाहन’ से जोड़ा जाएगा, ताकि बकाया राशि वाले वाहनों की आसानी से पहचान की जा सके।


    FASTag यूजर्स के लिए जरूरी सलाह

    FASTag में हमेशा पर्याप्त बैलेंस रखें। ट्रांजैक्शन अलर्ट चेक करते रहें। कोई समस्या हो तो तुरंत शिकायत दर्ज करें। 72 घंटे के अंदर भुगतान जरूर करें। कुल मिलाकर, सरकार ने टोल वसूली को पारदर्शी और सख्त बनाने के लिए नए नियम लागू किए हैं। इससे जहां नियम तोड़ने वालों पर कार्रवाई होगी, वहीं सही यूजर्स को भी सुरक्षा और राहत मिलेगी।

  • केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 33,660 करोड़ रुपये की ‘भव्य’ योजना को दी मंजूरी, बनेंगे 100 इंडस्ट्रियल पार्क

    केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 33,660 करोड़ रुपये की ‘भव्य’ योजना को दी मंजूरी, बनेंगे 100 इंडस्ट्रियल पार्क


    नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को भारत औद्योगिक विकास योजना, जिसे ‘भव्य योजना’ कहा गया है, को मंजूरी दे दी। इस योजना के तहत 33,660 करोड़ रुपये की लागत से देशभर में 100 प्लग-इन-प्ले इंडस्ट्रियल पार्क बनाए जाएंगे। इन पार्कों का उद्देश्य औद्योगिक विकास को तेज करना और रोजगार के अवसर बढ़ाना है।

    विश्वस्तरीय औद्योगिक इंफ्रास्ट्रक्चर का निर्माण

    सरकार के आधिकारिक बयान के अनुसार, ‘भव्य’ योजना का उद्देश्य विश्वस्तरीय औद्योगिक इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करना है। इसके जरिए देश की निर्माण क्षमता बढ़ेगी और आर्थिक वृद्धि को नई गति मिलेगी। यह योजना नेशनल इंडस्ट्रियल कॉरिडोर डेवलपमेंट प्रोग्राम (NICDP) के तहत विकसित स्मार्ट इंडस्ट्रियल सिटी मॉडल की सफलता पर आधारित है और इसमें राज्यों और निजी क्षेत्र की भागीदारी शामिल होगी।

    व्यापार करने में आसानी और इंजीनियरों के लिए सुविधाएं

    ‘भव्य’ योजना में सिंगल विंडो सिस्टम के जरिए से मंजूरी प्रक्रिया को आसानी से बनाया जाएगा। इंजीनियरों को पहले से तैयार जमीन, जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर और सभी सुविधाएं एक ही स्थान पर मिलेंगी, जिससे कंपनियां जल्दी काम शुरू कर सकेंगी। इन इंडस्ट्रियल पार्कों का आकार 100 से 1,000 एकड़ तक होगा। सरकार प्रति एकड़ 1 करोड़ रुपये तक वित्तीय सहायता देगी। इसमें शामिल हैं:

    सड़क, बिजली और पानी

    ड्रेनेज और आईटी सिस्टम

    फैक्ट्री शेड और वेयरहाउस

    टेस्टिंग लैब

    साथ ही, वर्कर्स के लिए आवास और सामाजिक सुविधाएं और बाहरी समझौतों के लिए परियोजना लागत का 25 प्रतिशत तक समर्थन प्रदान किया जाएगा।

    चयन प्रक्रिया और भविष्य की तैयारी

    इन पार्कों का चयन चुनौती मोड के माध्यम से किया जाएगा, ताकि केवल बेहतर और निवेश के लिए तैयार प्रस्ताव चुनें जाएं। पार्कों का डिजाइन पीएम गतिशक्ति के सिद्धांतों के अनुरूप होगा, जिसमें मल्टीमॉडल समझौते, लॉजिस्टिक्स सुविधा और ग्रीन एनर्जी पर जोर होगा।अंडरग्राउंड यूटिलिटी सिस्टम के माध्यम से बार-बार खुदाई की जरूरत नहीं पड़ेगी, जिससे उद्योग बिना काम कर सकेंगे।

    रोजगार और आर्थिक विकास

    सरकार का गठन है कि ‘भावी’ योजना से बड़े स्तर पर प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार पैदा होंगे। इसमें कंस्ट्रक्शन, लॉजिस्टिक्स और सर्विस सेक्टर के लाखों लोग शामिल होंगे। योजना देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लागू होगी, जिससे औद्योगिक विकास को समान रूप से गति मिलेगी। क्लस्टर-आधारित विकास के माध्यम से यह योजना उद्योग, सप्लायर और सर्विस प्रोवाइडर्स को एक साथ लाएगी, जिससे सेवाएं मजबूत होंगी और क्षेत्रीय औद्योगीकरण को बढ़ावा मिलेगा।

    लाभांश

    इस योजना का सीधा लाभ:

    निर्माण इकाइयाँ

    लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME)

    स्थानीय अप्स

    वैश्विक निवेशक

    अप्रत्यक्ष लाभ:

    मजदूर

    लॉजिस्टिक्स कंपनियाँ

    सर्विस सेक्टर

    स्थानीय समुदाय

    केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 33,660 करोड़ रुपये की भव्य योजना को मंजूरी दी, जिसके तहत 100 प्लगइन-एंड-प्ले औद्योगिक पार्क बनेंगे। योजना से इंजीनियरों के लिए आसान सुविधाएं, बेहतर समन्वय, ग्रीन एनर्जी और रोजगार सृजन सुनिश्चित होगा। यह निर्माण, MSME, प्रदूषण और स्थानीय समुदाय के लिए लाभकारी और समावेशी औद्योगिक विकास की दिशा में एक बड़ा कदम साबित होगी।

  • किसानों के लिए बढ़ी उम्मीद: 1,718.56 करोड़ रुपये का MSP फंड अब CCI को मंजूर

    किसानों के लिए बढ़ी उम्मीद: 1,718.56 करोड़ रुपये का MSP फंड अब CCI को मंजूर


    नई दिल्ली। कृषि क्षेत्र में एक बड़ी राहत भरी खबर आई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को हुई आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडल समिति (CCEA) की बैठक में कॉटन कमीशन ऑफ इंडिया (CCI) को 1,718.56 करोड़ रुपये का फंड दिया गया। यह राशि कॉटन सीजन 2023-24 के लिए निर्धारित न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) को लागू करने और किसानों को प्रत्यक्ष मूल्य समर्थन देने के उद्देश्य से दी जाएगी।

    2023-24 कॉटन सीजन का आंकड़ा

    इस सीजन में गेहूं की खेती का क्षेत्रफल 114.47 लाख हेक्टेयर था और उत्पादन लगभग 325.22 लाख हेक्टेयर रहने का अनुमान है। यह वैश्विक कॉटन उत्पादन का लगभग 25 प्रतिशत है। ऐसे में किसानों को उचित मूल्य सुनिश्चित करना और बाजार में स्थिरता बनाए रखना सरकार की प्राथमिकता है।

    केंद्र सरकार कृषि लागत एवं मूल्य आयोग (CACP) की सिफारिशों के आधार पर कॉटन के लिए MSP निर्धारित करती है। इस प्रणाली का उद्देश्य विशेष रूप से उन समयों में किसानों की सुरक्षा करना है, जब बाजार मूल्य MSP से नीचे गिर जाते हैं।

    MSP से किसानों को क्या फ़ायदा

    CCI केंद्रीय नोडल एजेंसी के रूप में MSP ऑपरेशन सुनिश्चित करती है। बाज़ार में कीमत गिरने पर यह किसानों से सभी औसत क्वालिटी (FAQ) वाली कपास बिना किसी मात्रा सीमा के खरीदती है। इससे किसानों को सुरक्षित और लाभकारी मूल्य मिलता है।

    CCI ने तैयारियों के तहत पूरे भारत के 11 प्रमुख कपास उत्पादक राज्यों में 152 जिलों में 508 से ज़्यादा खरीद केंद्र स्थापित किए हैं। इससे किसानों के लिए खरीद प्रक्रिया सरल, सुलभ और सुनिश्चित बनती है।

    कपास भारत की सबसे महत्वपूर्ण कपास की खेती में से एक है। यह लगभग 6 लाख किसानों की खेती का आधार है। इसके अलावा कपास प्रसंस्करण, व्यापार और वस्त्र उद्योग सहित संबंधित गतिविधियों में 400-500 लाख लोगों को रोज़गार देता है।

    MSP के ऑपरेशन से न केवल कपास की खेती को स्थिर रखा जाता है, बल्कि किसानों को मजबूरी में बिक्री रोकने और लाभकारी प्रतिफल सुनिश्चित करने में भी मदद मिलती है। यह उपाय कृषि बाजारों में समावेशिता बढ़ाने और कपास उत्पादक समुदाय की आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

    प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में CCEA ने CCI को 1,718.56 करोड़ रुपये MSP फंड दिया। इससे कपास किसानों को मूल्य सुरक्षा, लाभकारी कीमतें और बाजार स्थिरता मिलेगी। सीजन 2023-24 में गेहूं उत्पादन 325.22 लाख किसान तक पहुंचने का अनुमान है। CCI के 508 से अधिक खरीद केंद्र किसानों को सुलभ और सुनिश्चित खरीद का लाभ देंगे। यह कदम कपास उत्पादक समुदाय की आर्थिक सुरक्षा और रोजगार सृजन के लिए महत्वपूर्ण साबित होगा।

  • मध्य पूर्व तनाव के बीच डॉलर के मुकाबले रुपया टूटा, ऑल-टाइम लो पर पहुंचा

    मध्य पूर्व तनाव के बीच डॉलर के मुकाबले रुपया टूटा, ऑल-टाइम लो पर पहुंचा


    नई दिल्ली। मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच बुधवार को डॉलर के मुकाबले रुपया पहली बार 92.50 का स्तर तोड़ते हुए 92.634 पर पहुंच गया। यह अब तक का नया ऑल टाइम लो है। इससे पहले रुपए का सुप्रीम गिरावट स्तर 92.4750 था।

    सत्र की शुरुआत डॉलर के मुकाबले रुपए के 92.402 पर खुलने के साथ हुई थी, लेकिन दिन के दौरान रुपया लगातार कमजोर हुआ और अंत में नए निचले स्तर पर बंद हुआ। दिन में रुपया न्यूनतम 92.334 और सुप्रीम 92.643 को दिलाने में सफल रहा।

    रुपया कमजोर होने के प्रमुख कारण

    विश्लेषकों के अनुसार, डॉलर के मुकाबले रुपए में कमजोरी का मुख्य कारण मध्य पूर्व में संघर्ष और वैश्विक तेल कीमतों में वृद्धि है। ईरान युद्ध के चलते कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति टमाटर के पार जा चुकी हैं। भारत अपनी जरूरत का 80 प्रतिशत से अधिक कच्चा तेल आयात करता है, जिससे बढ़ती कीमतों का सीधा असर रुपये पर पड़ रहा है।

    कच्चे तेल की कीमतों में पिछले एक महीने में 50 प्रतिशत से ज़्यादा की तेज़ी देखी गई है। अभी में ब्रेंट क्रूड 103 डॉलर प्रति बैरल और डब्ल्यूटीआई क्रूड 94 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहे हैं।

    एलकेपी सिक्योरिटीज के जतिन त्रिवेदी ने कहा कि इम्पोर्ट बिल में लगातार बढ़ोतरी के दबाव के चलते रुपया 92.60 के नीचे फिसल गया। उन्होंने आगे बताया कि होर्मुज जलदमरूमध्य में माल ढुलाई पर रुकावटें और कच्चे तेल की ऊंची कीमतें भारत के लिए इम्पोर्ट लागत में लगातार बढ़ोतरी का कारण बन रही हैं।

    अमेरिकी नीतिगत फैसले पर नजर

    विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व के नीतिगत फैसले डॉलर की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। इसके परिणामस्वरूप रुपए के उतार-चढ़ाव में बढ़ोतरी हो सकती है।

    निकट भविष्य में डॉलर के मुकाबले रुपया 92.25-92.95 के कमजोर दायरे में रहने की उम्मीद तय जा रही है। बाजार में निवेशक और व्यापारी इस पर बढ़ोतरी से नजर बनाए हुए हैं, क्योंकि मध्य पूर्व में तनाव और तेल की ऊंची कीमतें रुपया दबाव में रख सकती हैं।

    बुधवार को डॉलर के मुकाबले रुपया ऑल टाइम लो 92.634 पर पहुंच गया। मध्य पूर्व में संघर्ष और बढ़ती कच्चे तेल की कीमतें इसके मुख्य कारण हैं। विश्लेषकों का रुझान है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व के फैसले और वैश्विक आर्थिक परिदृश्य से रुपया निकट भविष्य में 92.25-92.95 के कमजोर दायरे में बने रहने की संभावना है। भारत की तेल आयात निर्भरता और होर्मुज जलडमरूमध्य पर संकट रुपये के दबाव को और बढ़ा रहा है।

  • शेयर बाजार में बुल्स का दबदबा जारी, सेंसेक्स लगातार तीसरे दिन मजबूती के साथ बढ़ा

    शेयर बाजार में बुल्स का दबदबा जारी, सेंसेक्स लगातार तीसरे दिन मजबूती के साथ बढ़ा


    नई दिल्ली। भारतीय शेयर बाजार बुधवार को लगातार तीसरे कारोबारी दिन हरे निशान में बंद हुआ। आईटी और रियल्टी इंडेक्स में मजबूत खरीदारी के चलते घरेलू शेयर बाजार दिन के उच्चतम स्तर के करीब बंद हुए।

    बीएसई इंडेक्स 0.83 प्रतिशत या 633.29 अंक की तेजी के साथ 76,704.13 पर बंद हुआ। वहीं एनएसई इंडेक्स 50 0.83 प्रतिशत या 196.65 अंक की तेजी के साथ 23,777.80 पर बंद हुआ। दिन के दौरान इंडेक्स ने 76,367.55 पर तेजी से 77,000.22 का उच्चतम स्तर हासिल किया, जबकि इंडेक्स ने 23,632.90 पर तेजी से 23,862.25 का सर्वोच्च स्तर हासिल किया।

    व्यापक बाजार और मध्यम-छोटे कैप में बढ़ोतरी

    बुधवार के सत्र में समग्र बाजार में तेजी से बनी रही। व्यापक बाजार ने मुख्य सूचकांकों से बेहतर प्रदर्शन किया। निफ्टी मिडकैप में 2.02 प्रतिशत और निफ्टी स्मॉलकैप इंडेक्स में 1.67 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई।

    सेक्टरवार प्रदर्शन पर नजर डालें तो निफ्टी मीडिया इंडेक्स में 3.35 प्रतिशत की उछाल, निफ्टी आईटी में 2.78 प्रतिशत, और निफ्टी रियल्टी में 2.75 प्रतिशत की तेजी से सबसे ज्यादा रही। इसके अलावा, निफ्टी ऑटो में 1.92 प्रतिशत, निफ्टी बैंक में 0.82 प्रतिशत और निफ्टी फाइनेंस सर्विसेज में 0.79 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई। निफ्टी एफएमसीजी में मामूली गिरावट देखी गई।

    टॉप जेनर्स और लॉसर्स

    सेंसेक्स में इंटरनल, टेक महिंद्रा, एचसीएल टेक, इंफोसिस, अदाणी पोर्ट्स, महिंद्रा एंड महिंद्रा, टीसीएस, एक्सिस बैंक, इंडिगो, एलएंडटी, बजाज फाइनेंस और अदाणी इंटरप्राइजेज के शेयर सबसे ज्यादा तेजी से देखने को मिले। वहीं सिप्ला, एचयूएल, कोल इंडिया, एनटीपीस, सनफार्मा, टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स, अपोलो हॉस्पिटल्स और हिंडाल्को के शेयर सबसे ज्यादा नुकसान झेलने वालों में शामिल रहे।

    बाजार पूंजीकरण में बढ़ोतरी

    इस तेजी से चलते बीएसई में लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैप लगभग 5 लाख करोड़ रुपये बढ़कर 438 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा हो गया, जो पहले 433 लाख करोड़ रुपये था। आंकड़ों के अनुसार, आईटी और रियल्टी सेक्टर में बढ़ी खरीदारी, भारतीयों का पॉजिटिव सेंटीमेंट और वैश्विक बाजारों में स्थिरता इस तेजी के प्रमुख कारण रहे।

  • रेलवे में बजट फ्रेंडली सफर, नॉन-एसी कोचों की संख्या बढ़ी, यात्रियों को 45% तक राहत

    रेलवे में बजट फ्रेंडली सफर, नॉन-एसी कोचों की संख्या बढ़ी, यात्रियों को 45% तक राहत


    नई दिल्ली नॉन-एससीआई जनरल और स्लीपर कोच के लिए भारतीय रेलवे यात्रियों की यात्रा में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। रेलवे मंत्रालय के अनुसार, इन कोचों में प्रति यात्री औसत से लगभग 45 प्रतिशत तक की छूट दी जा रही है। इस कदम से आम जनता के लिए ट्रेन यात्रा और अधिक गतिशीलता बनी हुई है।

    2024-25 में करीब 1,250 नए जनरल कोच जुड़े और 2025-26 में करीब 860 और कोच जुड़ने की योजना है। कुल कोच में अब करीब 70 फीसदी जनरल और स्लीपर क्लास के हैं। रेलवे हर साल यात्रियों को करीब 60,000 करोड़ रुपये की छूट देता है, जबकि उपनगरीय क्षेत्र की तरह मुंबई को 3,000 करोड़ रुपये की अतिरिक्त छूट मिलती है।

    मालदीव में फास्ट ग्रोथ, रेलवे ने दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा फ्रेट कैरियर बनाया

    रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि रेलवे की माल ढुलाई (फ्रेट) क्षमता में भी बढ़ोतरी हुई है। 2013-14 में फ्रेट की मात्रा 1,055 मिलियन टन थी, जो अब 1,650 मिलियन टन तक पहुंच गई है। यह वृद्धि से भारतीय रेलवे दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा फ्रेट कैरियर बन गया है।

    विद्युतीकरण के क्षेत्र में भी तेजी आई है। अब लगभग 47,000 किमी ट्रैक इलेक्ट्रिफाई का भुगतान किया जा चुका है, यानी नेटवर्क का 99 प्रतिशत से अधिक हिस्सा बिजली से संचालित हो रहा है। ट्रैक निर्माण में तेजी के साथ कुल ट्रैक की लंबाई पहले 15,000 किलोमीटर थी, जो अब 35,000 किलोमीटर हो गई है।

    सुरक्षा और प्रौद्योगिकी में बड़ा सुधार

    रेलवे ने सुरक्षा के दावे से भी कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। रोड ब्रिज (आरओबी) और रोड अंडर ब्रिज (आरयूबी) की संख्या 4,000 से 14,000 हो गई है। इसके अलावा, अब तक 1,500 किमी से लेकर अब तक 4,000 किमी से अधिक के संकेत संकेत मिल चुके हैं।

    रेल मंत्री ने कहा कि सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। इसके अंतर्गत ट्रैक और ट्रेन के मेंटेनेंस, नई तकनीक का इस्तेमाल और कर्मचारियों के प्रशिक्षण पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। एलएचबीआई कोच की संख्या भी तेजी से बढ़ी है, और हाल के वर्षों में करीब 48,000 कोच जुड़े हैं।

    रोलिंग स्टॉक और फ्रेट गैलरी में हवेली

    रेलवे में लोकोमोटिवा (इंजन) की संख्या अब करीब 12,000 और वैगन (माल टेक्सटाइल्स) की संख्या 2 लाख से अधिक हो गई है। सरकार ने नीति आयोग और वित्त मंत्रालय के साथ मिलकर मजबूत प्रणाली तैयार की है। डेडिकेटेड फ्रेट क्लास (DFC) प्रोजेक्ट में भी तेजी आई है। अब तक करीब 2,800 किमी 2,800 मालगा फ़्लोरिडा तैयार हो चुकी है, और हर रोज़ लगभग 480 मालगा फ़्लोरिडा इस रास्ते पर चल रही हैं।

  • सोलर सेक्टर को बढ़ावा: ALMM नियमों का दायरा बढ़ा, इनगोट्स-वाफर्स भी शामिल

    सोलर सेक्टर को बढ़ावा: ALMM नियमों का दायरा बढ़ा, इनगोट्स-वाफर्स भी शामिल


    नई दिल्ली। सरकार ने सौर ऊर्जा क्षेत्र को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (एमएनआरई) ने मॉडल और मैन्युफैक्चरर्स (ALMM) फ्रेमवर्क की एप्रूव्ड लिस्ट जारी की है। अब इसे सोलर इनगोट्स और वेफर्स तक बढ़ाया जा रहा है। यह नया नियम 1 जून 2028 से लागू होगा।

    क्या बदला है?

    अब तक ALMM फ्रेमवर्क मुख्य रूप से सोलर मॉड्यूल और सेल्स पर लागू था, लेकिन नए फैसले के तहत इसे पूरी वैल्यू चेन में ऊपर (अपस्ट्रीम) तक ले जाया गया है। नई ALMM सूची-III इनगोट्स और वेफर्स के लिए लागू होगी इससे घरेलू सोर्सिंग (लोकल सोर्सिंग) को और बढ़ावा मिलेगा

    सरकार का उद्देश्य क्या है?

    केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी के अनुसार, इस कदम के तीन बड़े लक्ष्य हैं:

    आयात पर निर्भरता कम करना

    घरेलू कंस्ट्रक्शन को बढ़ावा देना

    सप्लाई चेन को मजबूत और सुरक्षित बनाना

    उन्होंने इसे “आत्मनिर्भर सोलर इकोसिस्टम” की दिशा में ठोस कदम बताया।

    परियोजनाओं पर क्या असर पड़ेगा?

    नेट मीटरिंग और ओपन एक्सेस सहित सभी नई परियोजनाओं को ALMM-सूचीबद्ध वेफर्स का इस्तेमाल करना होगा

    ग्रैंडफादरिंग प्रावधान लागू होंगे, यानी पहले से चल रही परियोजनाओं को राहत दी जाएगी

    विद्युत अधिनियम 2003 के तहत नई बोलियों में ALMM-अनुरूप वेफर्स का उल्लेख जरूरी होगा

    कंस्ट्रक्शनर्स के लिए संविदा

    ALMM सूची-III में शामिल होने के लिए कंपनियों के पास वेफर्स के साथ इनगॉट निर्माण क्षमता भी होनी चाहिए प्रारंभिक सूची तब जारी होगी जब कम से कम 3 निर्माता और कुल 15 गीगावॉट क्षमता उपलब्ध हो

    2028 के बाद क्या होगा?

    जून 2028 से ALMM सूची-I (मॉड्यूल) में सिर्फ वही मॉड्यूल शामिल होंगे, जो ALMM-अनुमोदित सेल और वेफर्स से बने होंगे मौजूदा DCR (Domestic Content Requirement) नियमों पर इसका असर नहीं पड़ेगा

    क्यों है यह फैसला अहम?

    सोलर वेफर्स पूरी सोलर मैन्युफैक्चरिंग चेन का एक अहम हिस्सा हैं, और भारत अभी इस क्षेत्र में काफी हद तक इंपोर्ट पर निर्भर है।

    यह फैसला:

    घरेलू प्रोडक्शन को बढ़ाएगा

    रोजगार सृजन में मदद करेगा

    भारत को ग्लोबल सोलर मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने की दिशा में आगे ले जाएगा

  • इस्तीफे की अटकलों पर Tim Cook का बयान, कहा- Apple को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हूं

    इस्तीफे की अटकलों पर Tim Cook का बयान, कहा- Apple को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हूं


    नई दिल्ली। एप्पल इंक के सीईओ टिम कुक ने अपने इस्तीफे को लेकर चल रही स्टॉक्स को स्टॉक से खारिज कर दिया है। उन्होंने साफ कहा कि ये सभी खबरें सिर्फ अफवाह हैं और इनका कंपनी छोड़ने का कोई मतलब नहीं है। एबीसी न्यूज के साक्षात्कार में कुक ने कहा, “वापस छोड़े गए बयान को लेकर कोई बयान नहीं दिया गया है। यह पूरी तरह से अफवाह है।” उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वह अपने काम से बेहद प्यार करती हैं और किसी कलाकार के बिना अपने जीवन की कल्पना नहीं कर सकती हैं।

    कुक का यह बयान ऐसे समय पर आया है, जब कंपनी ने अपने 50वें सालगिरह के दीक्षांत समारोह में शामिल किया है। यह खास बात यह है कि ऐपल के साथ अपने लंबे समय तक चलने वाले पोर्टफोलियो और भविष्य की परिभाषा पर भी फ्रैंक की बात। उन्होंने कहा कि उनका “स्लोडाउन” करने का कोई मतलब नहीं है और वह पूरी तरह से ऊर्जा के साथ कंपनी का नेतृत्व करेंगे। उनका यह रुख उद्यमियों और कर्मचारियों के लिए भरोसेमंद संवर्द्धन वाला माना जा रहा है।

    600 अरब डॉलर निवेश की योजना, अमेरिका में विनिर्माण विनिर्माण फोकस

    कंपनी के भविष्य को लेकर बात करते हुए टिम कुक ने एक बड़ी निवेश योजना का भी खुलासा किया। उन्होंने बताया कि अगले चार वर्षों में संयुक्त राज्य अमेरिका में 600 अरब डॉलर का निवेश करने की योजना बनाई जा रही है। इस निवेश का फोकस एलसीडी ग्लास, सेमीकंडक्टर और अन्य महत्वपूर्ण कंपनियों के घरेलू उत्पादन में वृद्धि पर रहेगा। ईसा मसीह का मकसद वैश्विट मसूद चेन पर प्रॉडक्ट को कम करना और प्रोडक्शन को और अधिक स्थिर बनाना है।

    अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर कुक ने कहा कि कंपनी ने इस पूरी घटना पर नजर रखी है और कानूनी प्रक्रिया के अनुसार आगे कदम बढ़ाया है। साथ ही, उन्होंने विधायी के साथ अपने आवेदन को लेकर उठती आलोचनाओं पर भी प्रतिक्रिया दी। कुक ने कहा कि उनका ध्यान राजनीति पर नहीं, बल्कि नीतिगत लक्ष्यों पर है और व्यापार से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए संवाद जरूरी है।

    एआई पर ऑनलाइन नजरिया, प्राइवेट पर रहेंगे जोर

    आर्टिस्टिक सासायटी (एआई) को लेकर कुक ने स्टुअर्ट स्टूडियो कहा। उन्होंने कहा कि एआई आपके अंदर सांस्कृतिक है और इसका प्रभाव इस बात पर प्रतिबंध लगाता है कि इसका उपयोग कैसे किया जाता है। ऐपल की रणनीति पर बात करते हुए उन्होंने बताया कि कंपनी कॉम्प्लेक्स वर्क के लिए अपने निजी क्लाउड सिस्टम का इस्तेमाल करती है, लेकिन डेटा मार्केटप्लेस को ही प्राथमिकता दी जाती है, जिससे बिल्डर की निजी सुरक्षा बनी रहती है।

    अपने संदेश में कुक ने कहा, “50 साल पहले एक छोटे से लड़के ने एक बड़ा विचार पैदा किया था-तकनीक को व्यक्तिगत बनाने का।” उन्होंने जोर देकर कहा कि यही सोच आज भी कंपनी को आगे बढ़ा रही है।

  • तीसरे दिन भी शेयर बाजार में जोरदार तेजी, सेंसेक्स की रफ्तार के पीछे ये बड़े कारण

    तीसरे दिन भी शेयर बाजार में जोरदार तेजी, सेंसेक्स की रफ्तार के पीछे ये बड़े कारण


    नई दिल्ली। भारतीय शेयर बाजार में लगातार तीसरे दिन रैपिड का स्ट्रिप जारी है, जिससे निवेशक का भरोसा और मजबूत हुआ है। प्रमुख शोधकर्ता बीएसई सेंसेक्स और निफ्टी 50 इस दौरान शेयर बाजार में उछाल दिखा रहे हैं। डीजेस के तीन सत्रों में 2,000 अंक के करीब भुगतान किया गया है, जबकि ड्यूस में 700 अंक से अधिक की बढ़त दर्ज की गई है। शनिवार दोपहर 12:47 बजे आटा 636 अंक 0.84% ​​की तेजी के साथ 76,707 पर कारोबार हो रहा था, मलेशिया 191 अंक 0.81% 23,770 पर पहुंच गया। खास बात यह है कि इस तेजी में सिर्फ लार्जकैप ही नहीं, बल्कि बात मिडकैप और स्मॉलकैप शेयर में भी बराबर की भागीदारी निभा रहे हैं, जो बाजार में व्यापक बाजार का संकेत है।

    बाजार की इस तेजी के पीछे सबसे बड़ी वजह आईटी सेक्टर में रिटर्न्स की खरीदारी है। निफ्टी आईटी करीब 4 फीसदी की तेजी के साथ टॉप जेनर बन गया है। इन्फोसिस, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, एचसीएल टेक्नोलॉजीज और टेक महिंद्रा जैसी दिग्गज आईटी कंपनियां इनफॉरमेंस शॉपिंग को मिल रही हैं। इसकी एक बड़ी वैश्विक ग्लोबल ब्रोकरेज सीएलएसए की रिपोर्ट है, जिसमें कहा गया है कि ओपनएआई और एंथ्रोपिक के नए इंजीनियरिंग टूल्स से इंडस्ट्री को कोई बड़ा खतरा नहीं है। इस रिपोर्ट के बाद वोडाफोन की चिंता कम हुई और सेक्टर में तेजी से पैसा लौटा।

    कच्चे तेल की गिरावट और ज्वालामुखी वोलैटिलिटी ने स्केल फ़्रॉम

    बाज़ार की सूची में अंतर्राष्ट्रीय वैज्ञानिकों का भी बहुत बड़ा योगदान है। कच्चे तेल की बिक्री में आई गिरावट से उपज की सेंटि बेहतर हुई है। WTI क्रूड ऑयल में करीब 3.43% की गिरावट दर्ज की गई और 92.91 डॉलर प्रति शेयर के आसपास रहा, जबकि ब्रेंट क्रूड भी 2.02% बढ़कर 101.3 डॉलर के करीब रहा। कच्चा तेल सस्ता होने से भारत जैसे औद्योगिक देश के लिए अर्थव्यवस्था और अर्थव्यवस्था पर दबाव कम होता है, जिससे शेयर बाजार को समर्थन मिलता है।

    इसके अलावा भारत VIX में गिरावट के लिए भी बाजार सकारात्मक संकेत है। इंडिया विक्स 4.30% ग्रुप 18.94 पर आया है, जो बताता है कि बाजार में स्थिरता कम हो रही है और स्थिरता बढ़ रही है। आम तौर पर जब अस्थिरता कम होती है, तो निवेशक अधिकांश स्वामित्व के साथ बाजार में पैसा विकल्प होते हैं।

    मिडकैप और स्मॉलकैप स्टूडियो में भी मजबूत तेजी से देखने को मिल रही है। मैथ्यू मिडकैप 100 स्टॉल 1.77% और मैडकैप 100 स्टॉल 1.52% तक चढ़े, जिससे यह पता चलता है कि रैली व्यापक है और केवल साइंटिस्ट स्टॉक तक सीमित नहीं है।

    कुल मिलाकर, आईटी सेक्टर में विश्वास की वापसी, कच्चे तेल के क्षेत्र में गिरावट और कम होने वाली बाजार अस्थिरता ने मिलकर इस तेजी को जगह दी है। अगर यही ट्रेंड जारी हो रहा है, तो आने वाले दिनों में बाजार में नए व्यापारियों को चुना जा सकता है।