Category: Economy

  • 31 दिसंबर तक न करें ये काम, वरना पैन कार्ड वॉलेट में बेकार हो जाएगा!

    31 दिसंबर तक न करें ये काम, वरना पैन कार्ड वॉलेट में बेकार हो जाएगा!


    नई दिल्ली। अगर आपके पास पैन कार्ड है और आपने इसे अभी तक आधार कार्ड से लिंक नहीं कराया है, तो यह खबर आपके लिए बेहद जरूरी है। इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने सभी पैन कार्ड होल्डर्स को चेतावनी दी है कि 31 दिसंबर, 2025 तक पैन और आधार लिंक न कराने पर 1 जनवरी, 2026 से आपका पैन कार्ड इनएक्टिव हो जाएगा।
    लेट फीस और छूट की जानकारी
    31 दिसंबर, 2025 तक लिंक न कराने वाले लोगों को पैन-आधार लिंक करते समय 1000 रुपये की लेट फीस देनी होगी। हालांकि, 1 अक्टूबर, 2024 के बाद आधार से पैन बनवाने वालों को यह लेट फीस नहीं देनी होगी। समय पर लिंक न कराने से TDS/TCS अधिक कट सकता है और अन्य वित्तीय परेशानियां भी हो सकती हैं।
    पैन को आधार से लिंक कैसे करें
    सबसे पहले ऑफिशियल इनकम टैक्स ई-फाइलिंग पोर्टल पर जाएं: www.incometax.gov.in
    ‘क्विक लिंक्स’ सेक्शन में जाएं और ‘लिंक आधार ऑप्शन’ पर क्लिक करें।
    अपना पैन कार्ड और आधार नंबर डालें और वैलिडेट पर क्लिक करें।
    अगर पैन पहले से आधार से लिंक है, तो स्क्रीन पर मैसेज दिखेगा।
    अगर लिंक नहीं है, तो आपको NSDL पोर्टल पर 1000 रुपये का चालान जमा करना होगा।
    वैलिडेशन के बाद एक पॉप-अप नोटिफिकेशन मिलेगा, जिसमें लिखा होगा ‘आपकी पेमेंट डिटेल्स वेरिफाई हो गई है’।
    जरूरी डिटेल्स डालने के बाद लिंक आधार ऑप्शन पर क्लिक करें।
    रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर मिला 6-डिजिट OTP डालें और रिक्वेस्ट सबमिट करें।
    पैन कार्ड को आधार से लिंक होने में 4-5 वर्किंग डे का समय लग सकता है।
    इस बार की आखिरी डेट 31 दिसंबर, 2025 है। समय रहते पैन और आधार लिंक कर लें, वरना न केवल आपका पैन कार्ड इनएक्टिव होगा बल्कि वित्तीय परेशानियां भी बढ़ सकती हैं।
  • EPFO में बड़ा सुधार: सिंगल-विंडो सेवा, सुविधा प्रोवाइडर और मिशन मोड KYC के साथ मार्च 2026 तक 100 करोड़ लोगों को सामाजिक सुरक्षा

    EPFO में बड़ा सुधार: सिंगल-विंडो सेवा, सुविधा प्रोवाइडर और मिशन मोड KYC के साथ मार्च 2026 तक 100 करोड़ लोगों को सामाजिक सुरक्षा


    नई दिल्ली।कर्मचारी भविष्य निधि संगठनEPFOमें बड़े स्तर पर सुधार और डिजिटल बदलाव लागू किए जा रहे हैं, जिससे देशभर के लाखों कर्मचारियों को लाभ मिलेगा। केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री मनसुख मांडविया ने शुक्रवार को घोषणा की कि सभी EPFO कार्यालय अब सिंगल-विंडो सर्विस सेंटर में तब्दील किए जाएंगे। इस बदलाव के बाद पीएफ खाताधारक किसी भी शहर के EPFO कार्यालय में जाकर अपने दावे, शिकायतें या सुधार करा सकेंगे।मौजूदा व्यवस्था में खाताधारकों को केवल अपने “होम ऑफिस” में ही लेन-देन करना पड़ता था, जिससे समय और खर्च दोनों बढ़ते थे। नई सिंगल-विंडो सेवा से अब यह बाधा खत्म हो जाएगी और प्रक्रिया तेज और पारदर्शी बनेगी। इस योजना का पायलट प्रोजेक्ट दिल्ली में पहले ही शुरू हो चुका है।

    मंत्री ने कहा कि EPFO के सभी कार्यालयों को आधुनिक तकनीक के जरिए डिजिटल रूप से जोड़ा जा रहा है। साथ ही सरकार ईपीएफ सुविधा प्रोवाइडर नाम से एक नया मैकेनिज्म भी शुरू करने जा रही है। ये अधिकृत सुविधा प्रदाता उन कर्मचारियों की मदद करेंगे, जिन्हें ऑनलाइन सिस्टम समझने में कठिनाई होती है या जो पहली बार पीएफ के दायरे में आते हैं। ये प्रोवाइडर क्लेम फाइलिंग, KYC और अन्य प्रक्रियाओं में मार्गदर्शन देंगे, जिससे दलालों पर निर्भरता कम होगी।एक और अहम पहल मिशन मोड KYC अभियान है। इसके तहत लंबे समय से निष्क्रिय पड़े EPF खातों को सक्रिय करने के लिए एक अलग डिजिटल प्लेटफॉर्म तैयार किया जाएगा। इससे खाताधारकों या उनके कानूनी वारिसों की पहचान कर फंसी हुई राशि को सुरक्षित तरीके से लौटाया जा सकेगा। देश में ऐसे लाखों खाते हैं, जिनमें लंबे समय से पैसे पड़े हैं, लेकिन KYC या अन्य जानकारी के अभाव में निकासी नहीं हो पा रही थी।

    विदेश में काम करने वाले भारतीय कर्मचारियों के लिए भी राहत की खबर है। सरकार अब अपने मुक्त व्यापार समझौतोंFTAमें सोशल सिक्योरिटी क्लॉज शामिल कर रही है। इससे विदेश में काम करने वाले कर्मचारियों का वहां जमा PF योगदान भारत लौटने पर लाभकारी रहेगा।मनसुख मांडविया ने EPFO की वित्तीय स्थिति पर भरोसा जताते हुए बताया कि संगठन के पास लगभग 28 लाख करोड़ रुपये का फंड कॉर्पस है और यह वर्तमान में 8.25 प्रतिशत की दर से ब्याज दे रहा है। उन्होंने कहा कि EPFO में जमा राशि पूरी तरह सुरक्षित है और इसे भारत सरकार की गारंटी प्राप्त है।

    सामाजिक सुरक्षा कवरेज के विस्तार पर बात करते हुए मंत्री ने कहा कि 2014 में देश की केवल 19 प्रतिशत आबादी सामाजिक सुरक्षा के दायरे में थी, जो अब बढ़कर 64 प्रतिशत हो चुकी है। वर्तमान में लगभग 94 करोड़ लोग किसी न किसी रूप में सामाजिक सुरक्षा से जुड़े हैं। सरकार का लक्ष्य मार्च 2026 तक इस संख्या को 100 करोड़ तक पहुंचाना है।इस सुधार से EPFO सेवाएं अधिक कर्मचारी-केंद्रित, पारदर्शी और त्वरित होंगी। डिजिटल प्लेटफॉर्म और सुविधा प्रदाता कर्मचारियों को मार्गदर्शन देने के साथ-साथ दलालों पर निर्भरता कम करेंगे। मिशन मोड KYC अभियान से लंबे समय से निष्क्रिय खातों का फंड सक्रिय होगा और विदेश में काम करने वाले भारतीय कर्मचारियों के लिए PF लाभ सुनिश्चित होगा। विशेषज्ञों का कहना है कि यह कदम देश की सामाजिक सुरक्षा प्रणाली को मजबूत बनाने की दिशा में बड़ा बदलाव साबित होगा।

  • IBJA रिपोर्ट: चांदी और सोने ने तोड़े रिकॉर्ड, निवेशकों के लिए नई रफ्तार

    IBJA रिपोर्ट: चांदी और सोने ने तोड़े रिकॉर्ड, निवेशकों के लिए नई रफ्तार


    नई दिल्ली।देश के सर्राफा बाजार में कीमती धातुओं की कीमतों ने नए रिकॉर्ड स्थापित किए हैं। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन IBJA की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, चांदी ने साल 2025 में 165 प्रतिशत से अधिक की बढ़त दर्ज की और 26 दिसंबर को यह ₹2,28,107 प्रति किलो पर पहुंच गई। 19 दिसंबर को चांदी ₹2,00,336 प्रति किलो पर थी, जो मात्र एक हफ्ते में 27,771 रुपए की तेज वृद्धि दर्शाती है। यह लगातार पांचवां सप्ताह है जब चांदी में मजबूती देखने को मिली है।हफ्तेभर के कारोबार में चांदी ने चार बार नया ऑल टाइम हाई बनाया। शुक्रवार को यह ₹9,124 की एकदिनी तेजी के साथ बंद हुई। विशेषज्ञों का मानना है कि यह तेजी केवल सट्टा नहीं, बल्कि मजबूत मांग और वैश्विक आर्थिक कारकों का नतीजा है।

    सोने की कीमतों में भी उल्लेखनीय उछाल देखने को मिला। 19 दिसंबर को 10 ग्राम 24 कैरेट सोना ₹1,31,779 पर था, जो 26 दिसंबर को बढ़कर ₹1,37,956 प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। यह अब तक का उच्चतम स्तर है। घरेलू सोने की कीमतों में यह बढ़त न सिर्फ स्थानीय मांग बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजार के रुझानों से भी प्रभावित मानी जा रही है।साल 2025 की शुरुआत के आंकड़े देखें तो 31 दिसंबर 2024 को 24 कैरेट सोना ₹76,162 प्रति 10 ग्राम था। इसका मतलब है कि सोने में इस साल 81 प्रतिशत की बढ़त हुई। वहीं, चांदी ₹86,017 प्रति किलो से बढ़कर ₹2,28,107 प्रति किलो पर पहुंच गई, यानी सालाना आधार पर 165 प्रतिशत की तेज वृद्धि।

    विशेषज्ञों का कहना है कि सोने में तेजी के पीछे तीन मुख्य कारण हैं। पहला, अमेरिकी ब्याज दरों में कटौती के संकेतों से डॉलर कमजोर हुआ, जिससे सोना निवेशकों के लिए आकर्षक विकल्प बन गया। दूसरा, रूस-यूक्रेन युद्ध और वैश्विक तनाव ने सोने को सुरक्षित निवेश के रूप में मजबूत किया। तीसरा, चीन और अन्य देशों के केंद्रीय बैंक बड़े पैमाने पर सोने की खरीद कर रहे हैं।चांदी की कीमतों में उछाल की वजहें थोड़ी अलग हैं। सोलर पैनल, इलेक्ट्रॉनिक्स और इलेक्ट्रिक वाहनों में बढ़ती खपत ने औद्योगिक मांग को बढ़ा दिया है। इसके अलावा, अमेरिका में संभावित टैरिफ के डर से कंपनियां चांदी का स्टॉक बढ़ा रही हैं। मैन्युफैक्चरर्स भी संभावित उत्पादन बाधा के चलते अग्रिम खरीद कर रहे हैं, जिससे वैश्विक आपूर्ति पर दबाव बना है।

    IBJA की दरों में GST, मेकिंग चार्ज और ज्वेलर्स मार्जिन शामिल नहीं होते। इसलिए अलग-अलग शहरों में कीमतों में थोड़ी भिन्नता देखी जा सकती है। यही दरें RBI के सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड और कई बैंकों के गोल्ड लोन के लिए आधार बनती हैं।विशेषज्ञों का सुझाव है कि निवेशक इस तेजी को ध्यान में रखते हुए सोने और चांदी में निवेश की रणनीति बनाएं। खासकर चांदी में लगातार पांचवे सप्ताह तक मजबूती ने निवेशकों और ज्वेलर्स दोनों का ध्यान आकर्षित किया है। वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों और औद्योगिक मांग को देखते हुए, आने वाले हफ्तों में कीमती धातुओं की कीमतों में और उछाल की संभावना भी बनी हुई है।

  • बीमा कंपनियों की मनमानी पर रोक, ग्वालियर आयोग ने कहा-दावा खारिज करना सेवा में कमी

    बीमा कंपनियों की मनमानी पर रोक, ग्वालियर आयोग ने कहा-दावा खारिज करना सेवा में कमी


    नई दिल्ली ।ग्वालियर उपभोक्ता आयोग ने बीमा कंपनियों की मनमानी पर कड़ा रुख अपनाते हुए एक अहम फैसला सुनाया है। आयोग ने स्पष्ट किया कि बीमाधारक द्वारा बीमारी की जानकारी छिपाने का ठोस सबूत न होने पर बीमा दावा खारिज करना अनुचित है और इसे सेवा में कमी माना जाएगा। इसके तहत आदित्य बिरला हेल्थ इंश्योरेंस कंपनी को निर्देश दिया गया है कि वह बीमाधारक को इलाज में हुए 2 लाख 18 हजार 912 रुपये की राशि 45 दिनों के भीतर अदा करे। समय सीमा में भुगतान न होने पर कंपनी को आदेश की तिथि से छह प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा।

    यह फैसला ग्वालियर निवासी सुरेश शर्मा द्वारा दायर उपभोक्ता परिवाद पर सुनाया गया। उनके अनुसार उनकी पत्नी 13 अगस्त 2024 को एक सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हो गई थीं। प्राथमिक उपचार के बाद उनकी हालत बिगड़ने पर 15 अगस्त को उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया और 19 अगस्त तक उनका इलाज चला। इस दौरान इलाज पर कुल 2.18 लाख रुपये से अधिक का खर्च आया।सुरेश शर्मा ने अपनी वैध हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी के तहत बीमा कंपनी के समक्ष दावा प्रस्तुत किया। लेकिन कंपनी ने दावा खारिज कर दिया और कहा कि बीमाधारक की पत्नी को पॉलिसी लेने से पहले से डायबिटीज थी। कंपनी का तर्क था कि यह प्री-एक्जिस्टिंग डिजीजकी श्रेणी में आती है और पॉलिसी प्रस्ताव पत्र भरते समय इस बीमारी की जानकारी छिपाई गई थी।

    हालांकि मामले की सुनवाई के दौरान आयोग ने बीमा कंपनी के तर्कों को खारिज कर दिया। आयोग ने कहा कि केवल बीमारी का हवाला देकर दावा अस्वीकार नहीं किया जा सकता। बीमा कंपनी की जिम्मेदारी है कि वह यह साबित करे कि पॉलिसी लेने के समय बीमाधारक ने जानबूझकर बीमारी छिपाई थी। इस मामले में कंपनी कोई ठोस मेडिकल रिकॉर्ड पूर्व उपचार का प्रमाण या विश्वसनीय दस्तावेज पेश करने में असफल रही।आयोग ने अपने आदेश में कहा कि सड़क दुर्घटना के कारण किया गया इलाज डायबिटीज से सीधे संबंधित नहीं था। ऐसे में बीमा कंपनी द्वारा दावा अस्वीकार करना उपभोक्ता हितों के खिलाफ और अनुचित है। आयोग ने इसे बीमा सेवा में गंभीर कमी माना और कंपनी को भुगतान का आदेश दिया।

    कानूनी जानकारों का कहना है कि यह फैसला उपभोक्ताओं के अधिकारों को मजबूत करता है और बीमा कंपनियों को चेतावनी देता है कि वे बिना पुख्ता आधार के दावे खारिज नहीं कर सकतीं। अक्सर बीमा कंपनियां प्री-एक्जिस्टिंग डिजीजका हवाला देकर दावों को रोक देती हैं जिससे उपभोक्ताओं को आर्थिक और मानसिक परेशानी का सामना करना पड़ता है।ग्वालियर उपभोक्ता आयोग का यह आदेश न केवल ग्वालियर बल्कि पूरे प्रदेश के लिए एक मिसाल माना जा रहा है। इससे यह स्पष्ट होता है कि बीमा पॉलिसीधारकों के साथ पारदर्शिता और निष्पक्षता बरतना कंपनियों की कानूनी जिम्मेदारी है। ऐसे फैसले बीमा दावों में भरोसा बढ़ाने और उपभोक्ताओं को न्याय दिलाने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

  • गुजरात बन रहा स्टार्टअप और नवाचार का हब, आई-हब से युवा स्टार्टअप्स को मिल रही प्रगति की राह

    गुजरात बन रहा स्टार्टअप और नवाचार का हब, आई-हब से युवा स्टार्टअप्स को मिल रही प्रगति की राह


    अहमदाबाद । गुजरात देश के उन राज्यों में तेजी से शामिल हो रहा है जहां नवाचार और स्टार्टअप संस्कृति को मजबूत आधार मिल रहा है। सक्रिय सरकारी नीतियों और युवाओं को आगे बढ़ाने वाले दृष्टिकोण के चलते गुजरात आज युवा उद्यमिता का एक बड़ा केंद्र बनकर उभर रहा है। गुजरात सरकार की स्टूडेंट स्टार्टअप एंड इनोवेशन पॉलिसी के तहत स्थापित आई-हब गुजरात ने नए विचारों को सफल व्यवसायों में बदलने में अहम भूमिका निभाई है।

    एसएसआईपी को जमीनी स्तर पर प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए वर्ष 2019 में ई-हब गुजरात की स्थापना की गई थी। यह एक सिंगल-विंडो प्लेटफॉर्म के रूप में काम करता है जहां छात्रों नवाचारकर्ताओं और स्टार्टअप्स को विचार से लेकर बाजार तक की पूरी यात्रा में सहयोग मिलता है। आइडिया की पहचान उसकी जांच इनक्यूबेशन और बाजार तक पहुंच बनाने तक ई-हब हर चरण में मार्गदर्शन मेंटरशिप और संस्थागत समर्थन प्रदान करता है।

    अहमदाबाद में स्थित अत्याधुनिक ई-हब परिसर में इस समय सैकड़ों स्टार्टअप्स को तैयार किया जा रहा है। यहां स्टार्टअप्स को इनक्यूबेशन सुविधाएं अनुभवी विशेषज्ञों का मार्गदर्शन और फंडिंग के अवसर उपलब्ध कराए जाते हैं जिससे युवा उद्यमियों को शुरुआती चुनौतियों से उबरने और अपने विचारों को टिकाऊ व्यवसाय में बदलने में मदद मिलती है।

    गुजरात की नवाचार केंद्रित सोच को राष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान मिली है। भारत सरकार की स्टेट स्टार्टअप रैंकिंग 2018 में गुजरात को सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के लिए सम्मानित किया गया था। यह उपलब्धि एसएसआईपी जैसी नीतियों और राज्य के मजबूत स्टार्टअप ढांचे की सफलता को दर्शाती है। गुजरात सरकार के शिक्षा विभाग के अंतर्गत काम करने वाला ई-हब छात्रों शैक्षणिक संस्थानों उद्योग और समाज के बीच एक मजबूत सेतु का काम कर रहा है।

    गुजरात लगातार भारत सरकार की स्टार्टअप रैंकिंग में शीर्ष राज्यों में शामिल रहा है। इसका श्रेय एसएसआईपी ई-हब गुजरात सेक्टर आधारित इनक्यूबेशन सेंटर और स्टार्टअप्स के लिए विशेष प्रोत्साहन योजनाओं को जाता है। राज्य में फिनटेक एग्रीटेक हेल्थटेक मैन्युफैक्चरिंग क्लीन एनर्जी और डीप टेक जैसे क्षेत्रों में हजारों पंजीकृत स्टार्टअप्स सक्रिय हैं।

    अहमदाबाद गांधीनगर सूरत वडोदरा और राजकोट जैसे शहर स्टार्टअप हब के रूप में उभर चुके हैं। यहां 100 से अधिक इनक्यूबेशन सेंटर विश्वविद्यालयों से जुड़े इनोवेशन सेल सरकारी सीड फंडिंग और मजबूत एमएसएमई व औद्योगिक क्लस्टर मौजूद हैं। विश्वस्तरीय बंदरगाह बेहतर लॉजिस्टिक्स कनेक्टिविटी निवेशकों के अनुकूल शासन और व्यापार व निर्माण से जुड़ी उद्यमशील संस्कृति गुजरात को देशभर के स्टार्टअप्स और नवाचारकर्ताओं के लिए पसंदीदा राज्य बना रही है।

  • नया रेलवे फीस स्ट्रक्चर आज से लागू स्थिरता और अफोर्डेबिलिटी में बैलेंस बनाए रखने में मिलेगी मदद

    नया रेलवे फीस स्ट्रक्चर आज से लागू स्थिरता और अफोर्डेबिलिटी में बैलेंस बनाए रखने में मिलेगी मदद


    नई दिल्ली । नया रेलवे पैसेंजर फीस स्ट्रक्चर शुक्रवार को लागू हो गया है। इसमें स्लीपर और फर्स्ट क्लास साधारण क्लास में उपनगरीय क्षेत्रों से बाहर की यात्राओं के लिए किराए में एक पैसा प्रति किलोमीटर का इजाफा किया गया है। रेलवे मंत्रालय के मुताबिक इस कदम का उद्देश्य स्थिरता के साथ अफोर्डेबिलिटी को संतुलित करना है।

    रेलवे ने साधारण नॉन-एसी गैर-उपनगरीय सेवाओं के लिए सेकंड क्लास ऑर्डिनरी स्लीपर क्लास ऑर्डिनरी और फर्स्ट क्लास ऑर्डिनरी में किराए को श्रेणीबद्ध तरीके से बढ़ाया है। सेकंड क्लास ऑर्डिनरी का किराया 215 किलोमीटर तक की यात्राओं के लिए अपरिवर्तित रहेगा जिससे कम दूरी और दैनिक यात्रियों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।

    216 किलोमीटर से 750 किलोमीटर की दूरी के लिए किराए में 5 रुपए की वृद्धि की गई है। 751 किलोमीटर से 1250 किलोमीटर तक की दूरी के लिए 10 रुपए की वृद्धि की गई है। 1251 किलोमीटर से 1750 किलोमीटर की दूरी के लिए 15 रुपए की वृद्धि की गई है और 1751 किमी से 2250 किमी की दूरी के लिए 20 रुपए की वृद्धि की गई है।

    मंत्रालय ने कहा कि उपनगरीय सेवाओं और सीजन टिकटों पर जिसमें उपनगरीय और गैर-उपनगरीय रूट शामिल हैं कोई असर नहीं पड़ेगा। मेल और एक्सप्रेस ट्रेनों में नॉन-एसी और एसी क्लास जिसमें स्लीपर फर्स्ट क्लास एसी चेयर कार एसी 3-टियर एसी 2-टियर और एसी फर्स्ट क्लास शामिल हैं सभी में प्रति किलोमीटर 2 पैसे की मामूली बढ़ोतरी की गई है।

    बयान में कहा गया है कि लंबी यात्राओं के लिए जैसे कि 500 ​​किलोमीटर की नॉन-एसी मेल या एक्सप्रेस यात्रा पर लगभग 10 रुपए अधिक लगेंगे।
    तेजस राजधानी राजधानी शताब्दी दुरंतो वंदे भारत हमसफर अमृत भारत तेजस महामना गतिमान अंत्योदय गरीब रथ जन शताब्दी युवा एक्सप्रेस नमो भारत रैपिड रेल और सामान्य नॉन-सबअर्बन सेवाओं जहां लागू हो एस मेमू को छोड़कर सहित प्रमुख ट्रेन सेवाओं के मौजूदा बेसिक किराए को अप्रूव्ड क्लास-वाइज बेसिक किराए में बढ़ोतरी के हिसाब से रिवाइज किया गया है।

    रिजर्वेशन फीस सुपरफास्ट सरचार्ज और अन्य चार्ज में कोई बदलाव नहीं किया गया है जबकि जीएसटी की वैघता पर कोई असर नहीं पड़ेगा और किराए को मौजूदा नियमों के अनुसार राउंड ऑफ किया जाता रहेगा। संशोधित किराए सिर्फ 26 दिसंबर 2025 को या उसके बाद बुक किए गए टिकटों पर लागू होंगे और पहले से बुक किए गए टिकटों पर कोई अतिरिक्त चार्ज नहीं लगेगा। मंत्रालय ने कहा कि नए रेट दिखाने के लिए स्टेशन किराए की लिस्ट को अपडेट किया जाएगा।

  • जोमाटो-स्विगी को बाजार में भी मिलेगी टक्कर होश उड़ाने आ रहा Zepto IPO

    जोमाटो-स्विगी को बाजार में भी मिलेगी टक्कर होश उड़ाने आ रहा Zepto IPO


    नई दिल्ली । जहां एक ओर जोमाटो और स्विगी को डिलीवरी के मोर्चे पर सड़क पर तगड़ी टक्कर मिल रही है. वहीं अब शेयर बाजार में भी बड़ी चुनौती का सामना भी करना पड़ सकता है. दोनों कंपनियों का होश उड़ाने के लिए रोजमर्रा की जरूरत के सामान डिलीवर करने वाली कंपनी जेप्टो अपना आईपीओ लेकर आ रही है. शुक्रवार यानी आज कंपनी गुपचुप तरीके से अपना ड्राफ्ट पेपर सेबी दफ्तर में दाखिल करेगी. जानकारों का कहना है कि जेप्टो आईपीओ का साइज 11 हजार करोड़ या उससे ऊपर जा सकता है.
    लेकिन अभी तक कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है. अभी तक जितनी भी जानकारी सामने आई है वो सभी सूत्रों के हवाले से की गई है.कंपनी का अगले साल शेयर बाजार में सूचीबद्ध होने का इरादा है. मामले से परिचित सूत्रों ने जानकारी देते हुए कहा कि जेप्टो 26 दिसंबर को सेबी के पास निर्गम संबंधी मसौदा प्रस्ताव डीआरएचपी दाखिल करने जा रही है.

    जोमैटो-स्विगी की राह पर जेप्टो

    आईपीओ संबंधी मसौदा प्रस्ताव को सेबी की मंजूरी मिलने की स्थिति में जेप्टो भारतीय शेयर बाजार में सूचीबद्ध होने वाले सबसे नई स्टार्टअप फर्मों में से एक बन जाएगी. आईपीओ लाने के साथ ही जेप्टो वह अपने क्षेत्र के प्रतिद्वंद्वियों जोमैटो एवं स्विगी की कतार में खड़ी हो जाएगी जो पहले से ही शेयर बाजार में सूचीबद्ध हैं. कंपनी का अगले साल शेयर बाजार में सूचीबद्ध होने का इरादा है. मामले से परिचित सूत्रों ने जानकारी देते हुए कहा कि जेप्टो 26 दिसंबर को सेबी के पास निर्गम संबंधी मसौदा प्रस्ताव डीआरएचपी दाखिल करने जा रही है. अभी तक कंपनी की ओर से कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई है.
    गुपचुप तरीका अपना आईपीओ
    सूत्रों के मुताबिक जेप्टो गोपनीय मार्ग से आईपीओ के लिए आवेदन करने की तैयारी में है. इस मार्ग के तहत कंपनी सेबी के साथ अपने मसौदा दस्तावेज को सार्वजनिक किए बगैर उस पर शुरुआती चर्चा कर सकती है. हाल के वर्षों में गोपनीय मार्ग से आईपीओ लाने का तरीका उन कंपनियों के बीच लोकप्रिय हुआ है जो आईपीओ से पहले बाजार की स्थिति को देखते हुए अधिक लचीलापन चाहती हैं और नियामक से प्रारंभिक सुझाव लेना चाहती हैं.
    कंपनी कितना जुटा सकी पैसा
    जेप्टो का मौजूदा मूल्यांकन सात अरब अमेरिकी डॉलर आंका गया है. कंपनी अपने गठन से लेकर अब तक कुल 1.8 अरब डॉलर करीब 16000 करोड़ रुपये का कोष जुटा चुकी है. कंपनी ने अगस्त 2023 में एक अरब डॉलर से अधिक मूल्यांकन वाली कंपनी यानी यूनिकॉर्न होने का दर्जा हासिल किया था. स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी से पढ़ाई अधूरी छोड़ने वाले युवाओं आदित पलिचा और कैवल्य वोहरा ने इस कंपनी की स्थापना की थी. जेप्टो ने 10 मिनट में किराना के सामान की आपूर्ति का मॉडल अपनाकर बड़े भारतीय शहरों में तेजी से विस्तार किया.

  • 2026 की पहली सैलरी आते ही इस फॉर्मूले से शुरू कर देना निवेश, 21 साल में बना देगा करोड़पति

    2026 की पहली सैलरी आते ही इस फॉर्मूले से शुरू कर देना निवेश, 21 साल में बना देगा करोड़पति


    नई दिल्ली । अक्सर लोग सोचते हैं कि करोड़पति बनने के लिए बड़ी सैलरी या भारी निवेश जरूरी है लेकिन सच्चाई ये है कि अगर सही प्लानिंग और अनुशासन के साथ निवेश किया जाए तो छोटी रकम भी बड़ा कमाल कर सकती है. नया साल 2026 नई उम्मीदों और नए फाइनेंशियल गोल्‍स के साथ आ रहा है. ऐसे में हम आपको बताने जा रहे हैं एक ऐसा फॉर्मूले के बारे में जिसे अगर आपने नए साल 2026 में अपना लिया तो अगले 21 साल में आप करोड़पति बन सकते हैं. फॉर्मूला है- 21x10x12. यहां जानिए इसके बारे में.

    क्या है 21x10x12 का SIP फॉर्मूला

    21 का मतलब है 21 साल तक लगातार निवेश. SIP में सबसे बड़ा हथियार समय होता है और 21 साल का वक्त कंपाउंडिंग को पूरा मौका देता है.

    10 से मतलब है ₹10000 की मासिक SIP. यानी हर महीने आपको सिर्फ 10 हजार रुपये निवेश करने हैं. 12 का मतलब है 12 फीसदी सालाना औसत रिटर्न. इक्विटी म्यूचुअल फंड्स में लंबे समय में इतना औसत रिटर्न माना जाता है

    21 साल में कैसे बनेंगे आप करोड़पति
    अगर आप जनवरी 2026 से हर महीने ₹10000 की SIP शुरू करते हैं और इसे 21 साल तक बिना रुके जारी रखते हैं तो आंकड़े कुछ ऐसे बनते हैं.

    कुल निवेश: ₹2520000

    अनुमानित ब्याज 12% रिटर्न ₹7910067 ,21 साल बाद कुल रकम: ₹10430067 यानी आपकी निवेश की गई रकम से करीब तीन गुना ज्यादा पैसा सिर्फ कंपाउंडिंग की ताकत से तैयार हो जाएगा और आप आराम से करोड़पति बन सकते हैं
    .
    SIP को इतना पावरफुल क्या बनाता है
    SIP की सबसे बड़ी खासियत है डिसिप्लिन और कंपाउंडिंग. हर महीने थोड़ा-थोड़ा निवेश जेब पर बोझ नहीं डालता. बाजार के उतार-चढ़ाव का असर एवरेज हो जाता है. लंबी अवधि में रिटर्न काफी शानदार बनते हैं. यही वजह है कि SIP को आम निवेशकों के लिए सबसे बेहतर तरीका माना जाता है.

    2026 से निवेश शुरू करना क्यों है सही फैसला

    नया साल आ रहा है नए साल का मतलब नई शुरुआत से है नई उम्‍मीदों से है. ऐसे मौकों पर लोग अपनी उन गलतियों को सुधारने का संकल्‍प लेते हैं जिन्‍हें वो आज तक करते आए हैं. अगर आप भी निवेश से जुड़ी प्‍लानिंग में लापरवाही करते रहे हैं तो नया साल 2026 इस गलती को सुधारने और नई शुरुआत करने का बेहतरीन समय हो सकता है. इसलिए यहां 2026 की पहली सैलरी से निवेश शुरू करने की बात कही गई है.

    किन बातों का रखें ध्यान
    SIP लंबी अवधि के लिए होती है बीच में रुकना नहीं चाहिए.अच्छे और भरोसेमंद इक्विटी म्यूचुअल फंड चुनें.समय-समय पर पोर्टफोलियो रिव्यू करते रहें.बाजार गिरने पर घबराने की बजाय निवेश जारी रखें. क्या 12 फीसदी रिटर्न मिलना पक्का है नहीं ये गारंटी नहीं है क्‍योंकि म्‍यूचुअल फंड मार्केट लिंक्‍ड स्‍कीम है. लेकिन लंबे समय में इक्विटी म्यूचुअल फंड्स का औसत रिटर्न करीब 12 फीसदी माना जाता है
    . अगर मैं बीच में SIP रोक दूं तो क्या होगा ऐसा करने से कंपाउंडिंग टूट जाती है और फाइनल रकम काफी कम हो सकती है. बेहतर है SIP लगातार जारी रखें.  क्या ₹10000 से कम रकम से भी ये फॉर्मूला काम करेगा हां SIP किसी भी रकम से शुरू की जा सकती है. रकम कम होगी तो फाइनल कॉर्पस भी उसी हिसाब से कम बनेगा.कौन से म्यूचुअल फंड में SIP करनी चाहिएक्या 12 फीसदी रिटर्न मिलना पक्का है नहीं ये गारंटी नहीं है क्‍योंकि म्‍यूचुअल फंड मार्केट लिंक्‍ड स्‍कीम है. लेकिन लंबे समय में इक्विटी म्यूचुअल फंड्स का औसत रिटर्न करीब 12 फीसदी माना जाता है.

    अगर मैं बीच में SIP रोक दूं तो क्या होगा ऐसा करने से कंपाउंडिंग टूट जाती है और फाइनल रकम काफी कम हो सकती है. बेहतर है SIP लगातार जारी रखें. क्या ₹10000 से कम रकम से भी ये फॉर्मूला काम करेगा हां SIP किसी भी रकम से शुरू की जा सकती है. रकम कम होगी तो फाइनल कॉर्पस भी उसी हिसाब से कम बनेगा.  कौन से म्यूचुअल फंड में SIP करनी चाहिए अच्छे लार्ज कैप फ्लेक्सी कैप या इंडेक्स फंड्स में SIP लंबे समय के लिए बेहतर माने जाते हैं. क्या 21 साल बाद टैक्स देना होगा हां इक्विटी म्यूचुअल फंड पर लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स लागू होता है जो मौजूदा नियमों के मुताबिक देना होता है.

  • भारतीय अर्थव्यवस्था नए साल भी तेज रफ्तार से बढ़ेगी…. जीडीपी 6.7% रहने का अनुमान

    भारतीय अर्थव्यवस्था नए साल भी तेज रफ्तार से बढ़ेगी…. जीडीपी 6.7% रहने का अनुमान


    नई दिल्ली।
    वैश्विक आर्थिक विकास (Global Economic Development) के स्थिर रहने की उम्मीद के बीच अगले साल भी भारत (India) तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं (Indian Economy Grow at Faster) में से एक बना रहेगा। गोल्डमैन सैश (Goldman Sachs) के अनुसार, 2026 में वैश्विक विकास दर के 2.8 फीसदी रहने का अनुमान है। यह 2.5 फीसदी के आम सहमति अनुमान से अधिक है। यह कई अर्थव्यवस्थाओं में स्थिर महंगाई और आसान मौद्रिक स्थितियों के कारण संभव हो पा रहा है।

    रिपोर्ट में कहा गया है, टैरिफ में कमी, कर कटौती और आसान वित्तीय स्थितियों के कारण अमेरिका का प्रदर्शन काफी बेहतर रहने की संभावना है। मजबूत घरेलू मांग और अनुकूल संरचनात्मक रुझानों के कारण भारत सहित उभरते बाजारों का प्रदर्शन विकसित देशों से बेहतर रहने की उम्मीद है। इस दौरान भारत की वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वृद्धि दर लगभग 6.7 फीसदी और 2027 में 6.8 फीसदी रह सकती है। यह आम सहमति के विकास अनुमानों से अधिक है और भारत को तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में से एक बनाए रखता है।


    अधिकांश अर्थव्यवस्थाओं में कम होगा मूल्य का दबाव

    गोल्डमैन सैश का अनुमान है कि कमोडिटी की कम कीमतों, बेहतर उत्पादकता और आपूर्ति पक्ष की बाधाओं में कमी से 2026 के अंत तक अधिकांश अर्थव्यवस्थाओं में मूल्य दबाव कम हो जाएगा। इस माहौल से कई उभरते बाजारों के केंद्रीय बैंकों को उदार नीतिगत रुख बनाए रखने या अपनाने की अनुमति मिलने की संभावना है, जो भारत जैसे देशों के लिए विकास की संभावनाओं को और अधिक समर्थन दे सकता है।


    चीन की विकास दर 4.8%

    फर्म का अनुमान है कि चीन 2026 में 4.8 और 2027 में 4.7 फीसदी की दर से विकास करेगा। भारत की विकास गति को मजबूत घरेलू खपत, सार्वजनिक अवसंरचना पर खर्च और निर्यात प्रधान अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में वैश्विक व्यापार व्यवधानों के प्रति अपेक्षाकृत सीमित जोखिम से लगातार लाभ मिल रहा है। अमेरिका और यूरो क्षेत्र जैसी उन्नत अर्थव्यवस्थाओं में जहां मध्यम वृद्धि की उम्मीद है, वहीं भारत जैसी उभरती अर्थव्यवस्थाएं वैश्विक विस्तार में महत्वपूर्ण योगदानकर्ता बनी हुई हैं।