Category: Economy

  • दिसंबर के अंत तक खत्म होंगी बड़ी फाइनैंशल डेडलाइन, NPS, ITR और PAN-आधार से जुड़े जरूरी काम निपटाने की आखिरी चेतावनी

    दिसंबर के अंत तक खत्म होंगी बड़ी फाइनैंशल डेडलाइन, NPS, ITR और PAN-आधार से जुड़े जरूरी काम निपटाने की आखिरी चेतावनी


    नई दिल्ली: साल 2025 का दिसंबर महीना अब अपने अंतिम चरण में है और इसके साथ ही कई अहम फाइनैंशल डेडलाइन भी खत्म होने वाली हैं। अगर आपने अब तक नेशनल पेंशन सिस्टमNPS, इनकम टैक्स रिटर्नITR या पैन-आधार लिंकिंग से जुड़े जरूरी काम पूरे नहीं किए हैं, तो अब सतर्क हो जाना जरूरी है। टाइम्स ऑफ इंडियाTOI की रिपोर्ट के अनुसार 31 दिसंबर तक टैक्स रिटर्न भरने और पैन-आधार लिंक करने की अंतिम तारीख है, जबकि NPS निवेशकों के लिए 25 दिसंबर बेहद अहम दिन माना जा रहा है।

    NPS निवेशकों के लिए अलर्ट: 25 दिसंबर अहम

    पेंशन फंड रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटीP FRDA ने हाल ही में NPS से जुड़ा एक बड़ा फैसला लिया है। PFRDA ने NPS की ‘स्कीम A’ को बंद कर इसे अन्य स्कीमों में मर्ज करने का निर्णय लिया है। दरअसल, स्कीम A का कॉर्पस काफी छोटा था और इसमें निवेश के विकल्प भी सीमित थे। इस स्कीम में REITs, InvITs, AIFs और स्ट्रक्चर्ड डेट इंस्ट्रूमेंट्स जैसे वैकल्पिक निवेश शामिल थे।अब इस स्कीम को स्कीम Cकॉरपोरेट डेट और स्कीम Eइक्विटी में मर्ज किया जा रहा है। PFRDA का कहना है कि इससे निवेशकों को बेहतर रिटर्न और कम जोखिम का फायदा मिलेगा। हालांकि, निवेशकों के लिए यह जरूरी है कि वे 25 दिसंबर तक अपनी पसंद के अनुसार पोर्टफोलियो में बदलाव कर लें। अगर कोई निवेशक इस तारीख तक कोई कदम नहीं उठाता है, तो उसका पैसा अपने आप दूसरी स्कीम में ट्रांसफर कर दिया जाएगा।

    ITR अलर्ट: 31 दिसंबर आखिरी मौका

    असेसमेंट ईयर 2025-26वित्त वर्ष 2024-25 के लिए देर से भरा जाने वाला या रिवाइज्ड इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल करने की अंतिम तारीख 31 दिसंबर है। यह तारीख सिर्फ एक डेडलाइन नहीं, बल्कि टैक्सपेयर्स के लिए आखिरी चेतावनी मानी जा रही है। अगर आपने अब तक ITR नहीं भरा है या उसमें कोई गलती रह गई है, तो इसे सुधारने का यह अंतिम अवसर है।अगर 31 दिसंबर तक रिटर्न दाखिल नहीं किया गया, तो टैक्सपेयर्स को लेट फीस और ब्याज देना पड़ सकता है। इसके अलावा, बिजनेस या शेयर बाजार में हुए नुकसान को अगले साल के मुनाफे से समायोजित करने Carry Forward की सुविधा भी खत्म हो जाएगी। इसके बाद केवल ITR-U यानी अपडेटेड रिटर्न भरने का विकल्प बचेगा, जिसमें पेनल्टी टैक्स देना होगा और पुराने घाटे का दावा नहीं किया जा सकेगा।

    PAN-आधार लिंकिंग की भी डेडलाइन

    31 दिसंबर को पैन-आधार लिंकिंग की एक और महत्वपूर्ण डेडलाइन खत्म हो रही है। यह डेडलाइन उन पैन कार्ड धारकों के लिए है, जिन्होंने पैन बनवाते समय आधार नंबर की जगह ‘आधार एनरोलमेंट आईडी’ का इस्तेमाल किया था। अगर तय समय तक लिंकिंग नहीं की गई, तो पैन कार्ड अमान्य हो सकता है।ऐसी स्थिति में न तो टैक्स रिटर्न दाखिल किया जा सकेगा और न ही निवेश या KYC से जुड़े काम पूरे होंगे। साथ ही, इनकम पर ज्यादा TDS कट सकता है और फिक्स्ड डिपॉजिट जैसे वित्तीय उत्पादों के आवेदन भी खारिज हो सकते हैं।दिसंबर के अंतिम दिनों में फाइनैंशल मामलों को टालना भारी पड़ सकता है। NPS निवेश, टैक्स रिटर्न और पैन-आधार लिंकिंग से जुड़े जरूरी काम समय रहते पूरे करना ही समझदारी होगी, ताकि भविष्य में किसी तरह की परेशानी से बचा जा सके।

  • 24 दिसंबर से 31 दिसंबर तक बैंक बंद, सिर्फ 29 को होगा कामकाज; ATM और नेट बैंकिंग सेवाएं जारी

    24 दिसंबर से 31 दिसंबर तक बैंक बंद, सिर्फ 29 को होगा कामकाज; ATM और नेट बैंकिंग सेवाएं जारी

    नई दिल्ली: रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया RBI ने दिसंबर के अंतिम सप्ताह में बैंकों के लिए लंबी छुट्टियों की घोषणा की है। 24 दिसंबर बुधवार को देश के तीन राज्यों- नागालैंड मेघालय और मिजोरम में बैंक बंद रहेंगे। इस दिन क्रिसमस ईव के अवसर पर इन राज्यों में कामकाज नहीं होगा। इसके अलावा 25 दिसंबर गुरुवार को क्रिसमस के मौके पर देशभर के बैंकों में कामकाज नहीं होगा।जानकारी के अनुसार 26 दिसंबर शुक्रवार को नागालैंड मेघालय और मिजोरम में बैंक बंद रहेंगे। वहीं 27 दिसंबर शनिवार को महीने के चौथे शनिवार के चलते देशभर के बैंकों में कामकाज नहीं होगा। 28 दिसंबर रविवार को भी सभी राज्यों में बैंक बंद रहेंगे। केवल 29 दिसंबर सोमवार को बैंकों में सामान्य कामकाज होगा।

    31 दिसंबर बुधवार को न्यू ईयर ईव के अवसर पर मिजोरम और मणिपुर में बैंक बंद रहेंगे। इसके अलावा 30 दिसंबर मंगलवार को मेघालय में बैंक बंद रहेंगे। इस तरह दिसंबर के अंतिम सप्ताह में अलग-अलग राज्यों और शहरों में बैंकों में कामकाज की स्थिति अलग-अलग दिन प्रभावित होगी।RBI की सूची के अनुसार 24 से 31 दिसंबर तक अधिकांश दिनों में विभिन्न राज्यों और शहरों में बैंक बंद रहेंगे। इस दौरान केवल 29 दिसंबर को ही बैंकों में सामान्य कामकाज होगा। इसलिए ग्राहकों को वित्तीय लेनदेन और जरूरी कामकाज में असुविधा से बचने के लिए पूर्व योजना बनाने की सलाह दी जा रही है।

    हालांकि बैंकों के बंद रहने के बावजूद एटीएम मोबाइल बैंकिंग नेट बैंकिंग और इंटरनेट बैंकिंग सेवाएं सामान्य रूप से चालू रहेंगी। ग्राहक ATM मोबाइल ऐप या नेट बैंकिंग के जरिए पैसे निकालने चेक बैलेंस देखने और ऑनलाइन ट्रांजेक्शन जैसी सुविधाओं का इस्तेमाल कर सकते हैं। लेकिन इस अवधि में शाखाओं में जाकर ड्राफ्ट चेक या अन्य काउंटर सेवाओं का उपयोग संभव नहीं होगा।विशेष रूप से क्रिसमस और न्यू ईयर के अवसर पर यह छुट्टियां बैंक कर्मचारियों के लिए भी महत्वपूर्ण हैं। ग्राहकों को सलाह दी जाती है कि वे जरूरी बैंकिंग कार्य जैसे पैसे जमा करना चेक क्लियरिंग और फिक्स्ड डिपॉजिट जैसी सेवाओं को पहले निपटा लें।

    RBI की घोषणा के अनुसार यह छुट्टियों का शेड्यूल सालाना बैंक हॉलिडे कैलेंडर के तहत जारी किया गया है। इस दौरान राज्यों और शहरों में छुट्टियों की सूची अलग-अलग हो सकती है। इसलिए ग्राहक अपनी संबंधित शाखा से भी छुट्टियों की पुष्टि कर सकते हैं।इस तरह दिसंबर के अंतिम सप्ताह में बैंकिंग सेवाओं में रुकावट होने के बावजूद डिजिटल बैंकिंग और ATM सेवाएं निरंतर उपलब्ध रहेंगी। ग्राहक अपने जरूरी कामकाज के लिए इन विकल्पों का लाभ उठा सकते हैं।

  • क्रेडिट कार्ड से किए गए ऐसे पेमेंट पर ये बैंक वसूलेगा 2% चार्ज, 15 जनवरी 2026 से लागू, जानें पूरी बात

    क्रेडिट कार्ड से किए गए ऐसे पेमेंट पर ये बैंक वसूलेगा 2% चार्ज, 15 जनवरी 2026 से लागू, जानें पूरी बात


    नई दिल्‍ली। प्राइवेट सेक्टर के अग्रणी आईसीआईसीआई बैंक ने अपने सभी रिटेल क्रेडिट कार्ड ग्राहकों के लिए फीचर्स, चार्जेस और रिवॉर्ड स्ट्रक्चर में बड़े बदलावों का ऐलान किया है। ये बदलाव चरणबद्ध तरीके से लागू होंगे। अधिकांश नियम 15 जनवरी 2026 से प्रभावी होंगे, जबकि कुछ रिवॉर्ड कैप और बेनिफिट्स में कटौती 1 फरवरी 2026 से लागू की जाएगी। बैंक ने कार्डधारकों को सलाह दी है कि वे संशोधित नियमों को ध्यान से समझें, क्योंकि इनका सीधा असर उनकी खर्च करने की रणनीति पर पड़ेगा।

    ऑनलाइन गेमिंग पर 2% अतिरिक्त शुल्क
    बिजनेस टुडे की खबर के मुताबिक, इस बदलाव का सबसे बड़ा असर ऑनलाइन गेमिंग ट्रांजैक्शन्स पर पड़ेगा। Dream11, Rummy Culture, Junglee Games, MPL जैसे प्लेटफॉर्म्स पर किए गए डिपॉजिट या अन्य ट्रांजैक्शन्स पर अब 2% का अतिरिक्त चार्ज लगेगा। इसके अलावा, भविष्य में गेमिंग से जुड़े नए मर्चेंट कैटेगरी कोडएमसीसी पर भी यह शुल्क लागू किया जा सकता है।वॉलेट लोडिंग और ट्रांसपोर्ट खर्च महंगे Amazon Pay, Paytm, MobiKwik, Freecharge और OlaMoney जैसे थर्ड-पार्टी वॉलेट्स में ₹5,000 या उससे अधिक की राशि लोड करने पर 1% चार्ज देना होगा। रेलवे, बस बुकिंग और अन्य हाई-वैल्यू ट्रैवल से जुड़े चुनिंदा ट्रांसपोर्टेशन MCCs के तहत ₹50,000 से ज्यादा के ट्रांजैक्शन पर 1% सरचार्ज लगाया जाएगा।

    रिवॉर्ड पॉइंट्स पर नई सीमा
    1 फरवरी 2026 से ट्रांसपोर्टेशन खर्च पर मासिक रिवॉर्ड कैप लागू होगी:Emeralde, Emeralde Private, Sapphiro और Rubyx कार्ड्स पर रिवॉर्ड केवल ₹20,000 प्रति माह तक। Coral, Platinum, Manchester United, CSK समेत मिड-टियर कार्ड्स पर यह सीमा ₹10,000 प्रति माह होगी।Emeralde Metal कार्ड पर अब सरकारी सेवाओं, फ्यूल, किराया, प्रॉपर्टी मैनेजमेंट, टैक्स भुगतान और थर्ड-पार्टी वॉलेट ट्रांजैक्शन्स पर रिवॉर्ड पॉइंट्स नहीं मिलेंगे।

    एंटरटेनमेंट ऑफर्स में सख्ती

    BookMyShow का लोकप्रिय Buy-One-Get-One ऑफर अब बिना शर्त नहीं मिलेगा। इसे पाने के लिए पिछले कैलेंडर क्वार्टर में कम से कम ₹25,000 का खर्च जरूरी होगा। वहीं, Instant Platinum कार्ड पर यह ऑफर फरवरी 2026 से पूरी तरह बंद कर दिया जाएगा।

    प्रीमियम कार्ड्स पर अतिरिक्त बोझ

    Emeralde सीरीजMetal, Private और PVC पर Dynamic Currency ConversionDCC शुल्क 2% कर दिया गया है। Emeralde Metal के नए ऐड-ऑन कार्ड पर ₹3,500 का एकमुश्त शुल्क लगेगा। अन्य कार्ड्स पर DCC मार्कअप को भी बदला गया है, MakeMyTrip Travel पर 0.99%, Times Black पर 1.49%, Amazon Pay ICICI पर 1.99%, जबकि ज्यादातर अन्य कार्ड्स पर यह 3.5% तक हो सकता है।

  • क्या सच हो रही की बात? खुलते ही ₹6000 का उछाल… जानें New Silver Rate

    क्या सच हो रही की बात? खुलते ही ₹6000 का उछाल… जानें New Silver Rate


    नई दिल्ली
    /सोना-चांदी की कीमतें साल 2025 के आखिरी महीने में धमाल मचा रही हैं. हर रोज ये दोनों कीमती धातुओं नए शिखर पर पहुंचते हुए पुराने सारे रिकॉर्ड ध्वस्त कर रही हैं. सप्ताह के पहले कारोबारी दिन सोमवार को तो Silver Price एमसीएक्स पर खुलने के साथ ही 6000 रुपये से ज्यादा चढ़ गया और चांदी 2,14,471 रुपये के नए हाई पर जा पहुंची. सोना भी कुछ कम नजर नहीं आया और चांदी के कदम से कदम मिलाकर चलता दिखा. MCX Gold Rate देखें, तो खुलने के साथ ही ये 1384 रुपये की उछाल के साथ 1,35,580 रुपये के नए लाइफ टाइम हाई लेवल पर जा पहुंचा. ऐसे में रिच डैड पुअर डैडके लेखक रॉबर्ट कियोसाकी की भविष्यवाणी सच होते नजर आ रही है. वे अक्सर अपनी सोशल मीडिया पोस्ट में चांदी को अमीर बनने का जरिया बताते हैं.
    रुकने का नाम नहीं ले रही चांदी
    इस साल हालांकि, Gold-Silver दोनों धातुओं ने धमाल मचाया है, लेकिन चांदी की रफ्तार ने चौंकाने का काम किया है और साल के खत्म होते-होते इसकी कीमतों में तेजी बढ़ती जा रही है. सोमवार को एमसीएक्स पर चांदी खुलने के साथ ही 6032 रुपये प्रति किलो चढ़ गई और 2.14 लाख रुपये के पार निकल गई. बीते सप्ताह ही इसने इतिहास में पहली बार 2 लाख रुपये का आंकड़ा पार किया था और तमाम उतार-चढ़ाव के बावजूद इस स्तर पर टिकी हुई है.

    Gold Rate में तेज उछाल

    न सिर्फ चांदी की कीमत में सप्ताह के पहले दिन तेजी आई है, सोना भी छलांग लगा रहा है. मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर 5 फरवरी की एक्सपायरी वाला सोना, अपने पिछले बंद की तुलना में 1000 रुपये प्रति 10 ग्राम से ज्यादा की बढ़त लेकर खुला. इसके कुछ ही मिनटों में Gold Price 1384 रुपये या 1.03% की उछाल के साथ 1,35,580 रुपये प्रति 10 ग्राम पर जा पहुंचा, जो इसका अब तक का सबसे हाई लेवल है.
    रॉबर्ट कियोसाकी की भविष्यवाणी हो रही सच
    Silver Rate में लगातार आ रहे उछाल को देखते हुए मशहूर किताब Rich Dad Poor Dad के लेखक रॉबर्ट कियोसाकी Robert Kiyosaki की भविष्यवाणी सच होती नजर आ रही है, जिसमें वो कहते नजर आते हैं कि चांदी अमीर बना सकती है. हाल ही उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्विटर अब X पर एक पोस्ट के जरिए चांदी में निवेश की सलाह दी थी और 2026 के लिए इसे नया टारगेट Silver Target दिया था. गौरतलब है कि कियोसाकी अक्सर सोना-चांदी में निवेश की सलाह देते नजर आते हैं.

    ‘चांद पर पहुंचती जा रही है चांदी…’

    अपनी नई पोस्ट में रिच डैड पुअर डैड के लेखक ने चांदी की बढ़ती कीमतों की ओर फोकस करते हुए लिखा कि चांदी चांद पर जा रही है, शायद 2026 में इसका भाव 200 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच जाएगा. बीते साल 2024 में ये सिर्फ 20 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रही थी. उन्होंने बताया कि जैसे ही पिछले हफ्ते US FED एक और रेट कट का ऐलान किया था, मैंने और असली चांदी खरीद ली.

  • मस्क के पास Pak-श्रीलंका-नेपाल की कुल GDP से ज्यादा संपत्ति, जानें कहां से आई इतनी दौलत

    मस्क के पास Pak-श्रीलंका-नेपाल की कुल GDP से ज्यादा संपत्ति, जानें कहां से आई इतनी दौलत


    वाशिंगटन।
    दुनिया के सबसे अमीर शख्स एलन मस्क (World’s Richest man, Elon Musk) की संपत्ति अब पाकिस्तान, श्रीलंका और नेपाल की कुल GDP (करीब 555 बिलियन डॉलर) से ज्यादा हो गई है। मात्र 4 दिनों में उनकी नेटवर्थ 150 बिलियन डॉलर (₹13.46 लाख करोड़) बढ़कर 750 बिलियन डॉलर (₹67.18 लाख करोड़) पार कर गई।

    हालांकि, आज फोर्ब्स रियल टाइम बिलियनेयर्स इंडेक्स में यह 748.9 बिलियन डॉलर दिख रही है, जो भारत के टॉप 40 सबसे अमीरों की कुल संपत्ति के बराबर है। मस्क पहले शख्स हैं ,जिन्होंने यह आंकड़ा छुआ। 16 दिसंबर को यह 600 बिलियन डॉलर पर पहुंची थी।


    दौलत में उछाल का डेलावेयर ट्रिगर

    उनकी संपत्ति में यह ऐतिहासिक उछाल अमेरिका की एक अदालत के फैसले के बाद आया, जिसमें टेस्ला के स्टॉक विकल्प पैकेज को बहाल कर दिया गया, जिसकी कीमत करीब 139 अरब डॉलर है। फोर्ब्स मैगजीन ने पहले मस्क को 600 अरब डॉलर से अधिक सम्पति वाला पहला व्यक्ति बताया था

    अदालत का यह फैसला मस्क के 2018 के उस वेतन पैकेज से जुड़ा है, जिसे निचली अदालत ने अकल्पनीय बताते हुए रद्द कर दिया था। टेस्ला कंपनी ने मस्क के लिए यह मोटा पैकेज स्वीकृत किया था, जो टेस्ला के शेयरों की मौजूदा कीमत के हिसाब से करीब 139 अरब डॉलर का है। फोर्ब्स रियल टाइम बिलेनियर इंडेक्स के मुताबिक मस्क की वेल्थ अब लैरी पेज (252.6 बिलियन), लैरी एलिसन (242.7 बिलियन) और जेफ बेजोस (239.4 बिलियन) की कुल संपत्ति से भी ज्यादा है।


    कारण 1: टेस्ला पे-पैकेज की वापसी

    2018 में टेस्ला ने मस्क को 56 बिलियन डॉलर का स्टॉक ऑप्शन दिया था। 2024 में लोअर कोर्ट ने रद्द किया, लेकिन दिसंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने बहाल किया। इससे वेल्थ पहली बार 700 बिलियन पार हुई।


    कारण 2: स्पेसएक्स का 800 बिलियन वैल्यूएशन

    रॉयटर्स के अनुसार, आंतरिक शेयर बिक्री से स्पेसएक्स की वैल्यूएशन 800 बिलियन डॉलर पहुंची। मस्क की 42% हिस्सेदारी पर अगर लिस्टिंग हो, तो अकेले यह 336 बिलियन डॉलर से ज्यादा जोड़ सकती है।

    कारण 3: टेस्ला शेयरों की उछाल
    नवंबर 2025 में शेयरहोल्डर्स ने 1 ट्रिलियन डॉलर का नया पे-पैकेज अप्रूव किया। 2025 में मस्क की वेल्थ में 340 बिलियन डॉलर जुड़े। टेस्ला में 12% स्टेक अब 197 बिलियन डॉलर का है। शेयर 13% चढ़े, सोमवार को 4% ऊपर जब मस्क ने रोबोटैक्सी टेस्ट की घोषणा की।

  • EPFO ने बदले नियम: नौकरी बदलने और बीमा राशि में बड़ा बदलाव, कर्मचारियों को मिलेगा सीधा लाभ

    EPFO ने बदले नियम: नौकरी बदलने और बीमा राशि में बड़ा बदलाव, कर्मचारियों को मिलेगा सीधा लाभ


    नई दिल्ली । कर्मचारी भविष्य निधि संगठन ने हाल ही में नौकरी बदलने से संबंधित नियमों में महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं जिसका असर लाखों कर्मचारियों और उनके परिवारों पर पड़ेगा। EPFO ने स्पष्ट किया है कि अब दो नौकरियों के बीच 60 दिनों तक का अंतराल होने पर भी कर्मचारी की सेवा को निरंतर माना जाएगा यानी नौकरी छोड़ने के बाद यदि कोई कर्मचारी 60 दिनों के भीतर दूसरी नौकरी जॉइन करता है तो उसकी सेवा को ब्रेक नहीं माना जाएगा।

    नौकरी बदलते वक्त अक्सर कर्मचारियों को डर रहता है कि कहीं उनका पीएफ सर्विस रिकॉर्ड या बीमा लाभ प्रभावित न हो जाए। पहले दो-चार दिन के गैप या वीकेंड की छुट्टियों के कारण कर्मचारियों को कई बार नुकसान उठाना पड़ा था। अब EPFO ने इस चिंता को दूर करते हुए नए नियम जारी किए हैं जो कर्मचारियों के लिए एक बड़ी राहत हैं।

    बीमा लाभ में मिली राहत

    नए नियमों के तहत अगर किसी EPFO सदस्य की मृत्यु आखिरी पीएफ योगदान मिलने के 60 दिनों के भीतर हो जाती है और वह कर्मचारी कंपनी के रिकॉर्ड में दर्ज था तो उसके परिवार को बीमा लाभ मिलेगा। पहले ऐसे मामलों में सेवा ब्रेक का हवाला देकर बीमा दावे को खारिज कर दिया जाता था लेकिन अब यह फायदा कर्मचारियों के परिवारों को मिलेगा।

    वीकेंड ब्रेक को खत्म किया

    EPFO ने यह भी स्पष्ट किया है कि नौकरी बदलते वक्त आने वाले शनिवार रविवार या अन्य राजपत्रित अवकाश को अब सेवा ब्रेक नहीं माना जाएगा। इसका मतलब यह है कि अगर कर्मचारी किसी शुक्रवार को पुरानी कंपनी छोड़ता है और वीकेंड या छुट्टी के बाद नई कंपनी जॉइन करता है तो इस अंतराल को भी लगातार सेवा में गिना जाएगा। पहले ऐसे मामलों में कर्मचारियों के परिवारों को EDLI योजना का लाभ नहीं मिलता था लेकिन अब यह समस्या हल हो गई है।

    न्यूनतम बीमा राशि बढ़ी

    EPFO ने न्यूनतम बीमा राशि को लेकर भी महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। अब ऐसे कर्मचारियों के आश्रितों को भी कम से कम 50000 रुपये का बीमा लाभ मिलेगा जिन्होंने मृत्यु से पहले लगातार 12 महीने काम नहीं किया था या जिनके पीएफ खाते में 50000 रुपये से कम बैलेंस था। पहले इन मामलों में परिवारों को बहुत कम या कोई बीमा लाभ नहीं मिल पाता था लेकिन अब यह राशि बढ़ा दी गई है।

    मंत्रालय की पहल

    यह बदलाव श्रम और रोजगार मंत्रालय की पहल पर हुआ है। मंत्रालय को कई ऐसे मामले मिले थे जहां नौकरी बदलने के दौरान कर्मचारी की मृत्यु हो जाने के बावजूद तकनीकी कारणों से उनके परिवारों को बीमा लाभ से वंचित रहना पड़ा था। मंत्रालय ने इस मुद्दे को गंभीरता से लिया और EPFO द्वारा नियमों में बदलाव किए गए।

    इन बदलावों से कर्मचारियों को काफी राहत मिलेगी और उनके परिवारों को बीमा लाभ प्राप्त करने में किसी तरह की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा। यह कदम सामाजिक सुरक्षा की दिशा में एक मजबूत कदम माना जा रहा है जो नौकरीपेशा लोगों के लिए एक बड़ी राहत साबित होगा। इस बदलाव के बाद कर्मचारी नौकरी बदलते वक्त अब पहले से अधिक सुरक्षित महसूस करेंगे खासकर जब बीमा और पीएफ जैसे महत्वपूर्ण लाभ की बात आती है। EPFO द्वारा किया गया यह कदम कर्मचारियों की सामाजिक सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है।

  • क्रेडिट कार्ड यूज में सुधार करें, इन 7 ट्रिक्स से बनें फाइनेंशियली स्ट्रॉन्ग

    क्रेडिट कार्ड यूज में सुधार करें, इन 7 ट्रिक्स से बनें फाइनेंशियली स्ट्रॉन्ग


    नई दिल्ली । आज के डिजिटल दौर में क्रेडिट कार्ड रोजमर्रा की जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है। शॉपिंग से लेकर ट्रैवल और इमरजेंसी खर्च तक हर जगह कार्ड का इस्तेमाल बढ़ा है। लेकिन जरा-सी लापरवाही इसे भारी कर्ज में बदल सकती है। EMI मिनिमम ड्यू पेमेंट और ऊंची ब्याज दरों के चलते लाखों लोग फाइनेंशियल प्रेशर झेल रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर क्रेडिट कार्ड को सही प्लानिंग और अनुशासन के साथ इस्तेमाल किया जाए तो यह कर्ज नहीं बल्कि आर्थिक मजबूती का जरिया बन सकता है।
    क्रेडिट लिमिट का संतुलित इस्तेमाल जरूरी
    फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स के अनुसार, क्रेडिट कार्ड की कुल लिमिट का 30 प्रतिशत से ज्यादा इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। ज्यादा उपयोग से क्रेडिट यूटिलाइजेशन रेशियो बढ़ता है जिसका सीधा असर CIBIL स्कोर पर पड़ता है। सीमित खर्च आपकी फाइनेंशियल इमेज को मजबूत बनाता है।

    समय पर पूरा बिल चुकाना सबसे अहम
    मिनिमम अमाउंट ड्यू चुकाना आसान जरूर लगता है लेकिन यही सबसे बड़ा फाइनेंशियल जाल है। इससे ब्याज तेजी से बढ़ता है और कर्ज लंबा खिंचता है। हर महीने पूरा बिल समय पर चुकाने से न सिर्फ ब्याज से बचाव होता है बल्कि क्रेडिट स्कोर भी मजबूत होता है।

    कार्ड की संख्या और EMI पर रखें नियंत्रण
    एक से ज्यादा क्रेडिट कार्ड रखने से खर्च पर नियंत्रण मुश्किल हो जाता है। जरूरत के मुताबिक एक या दो कार्ड ही पर्याप्त हैं। वहीं नो-कॉस्ट EMI ऑफर्स आकर्षक लगते हैं लेकिन हर खरीदारी को EMI में बदलना भविष्य की इनकम पर बोझ डाल देता है।

    कैश निकासी और क्रेडिट रिपोर्ट पर नजर

    क्रेडिट कार्ड से कैश निकालने पर भारी ब्याज और अतिरिक्त चार्ज लगते हैं इसलिए इससे बचना चाहिए। साथ ही साल में कम से कम एक बार अपनी क्रेडिट रिपोर्ट जरूर जांचें ताकि किसी गलती या धोखाधड़ी का समय रहते पता चल सके।

    पुराना कार्ड बंद करने से पहले सोचें

    लंबे समय से चल रहा क्रेडिट कार्ड आपकी क्रेडिट हिस्ट्री को मजबूत बनाता है। बिना वजह पुराना कार्ड बंद करने से स्कोर गिर सकता है।

    सही इस्तेमाल से बनेगा फाइनेंशियल फ्यूचर

    विशेषज्ञों का मानना है कि सही प्लानिंग अनुशासन और समय पर भुगतान से क्रेडिट कार्ड कर्ज का कारण नहीं, बल्कि फाइनेंशियल ग्रोथ का मजबूत टूल बन सकता है। इन 7 स्मार्ट ट्रिक्स को अपनाकर न सिर्फ कर्ज से बचा जा सकता है बल्कि 800+ क्रेडिट स्कोर का लक्ष्य भी हासिल किया जा सकता है।

  • डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंचा रुपया, जानिए गिरावट की बड़ी वजहें और बचाव के उपाय

    डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंचा रुपया, जानिए गिरावट की बड़ी वजहें और बचाव के उपाय


    नई दिल्ली
    /भारतीय रुपया इन दिनों गंभीर दबाव में है और डॉलर के मुकाबले अपने अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच चुका है। दिसंबर 2025 में पहली बार रुपया 91 के पार चला गया जिसने सरकार रिजर्व बैंक निवेशकों और आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है। विशेषज्ञों के मुताबिक यह गिरावट किसी एक वजह से नहीं बल्कि घरेलू और वैश्विक कारकों के संयुक्त असर से हुई है। सबसे बड़ा कारण विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली माना जा रहा है। विदेशी संस्थागत निवेशक FII भारतीय शेयर और बॉन्ड बाजार से तेजी से पैसा निकाल रहे हैं। आंकड़ों के मुताबिक इस साल अब तक विदेशी निवेशक भारतीय बाजार से करीब 18 अरब डॉलर से अधिक निकाल चुके हैं। इससे बाजार में डॉलर की मांग बढ़ी है और रुपये की मांग कमजोर पड़ी है जिसका सीधा असर मुद्रा विनिमय दर पर दिख रहा है।

    दूसरा अहम कारण डॉलर की वैश्विक मजबूती है। अमेरिका में ऊंची ब्याज दरों और मजबूत आर्थिक संकेतों के चलते डॉलर दुनियाभर की मुद्राओं के मुकाबले मजबूत बना हुआ है। जब अमेरिकी बॉन्ड पर रिटर्न बढ़ता है तो वैश्विक निवेशक उभरते बाजारों से पूंजी निकालकर अमेरिका की ओर रुख करते हैं। इसका असर भारत जैसे देशों की मुद्रा पर पड़ता है।भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते को लेकर बनी अनिश्चितता ने भी रुपये पर दबाव बढ़ाया है। अमेरिका द्वारा भारतीय निर्यात पर कुछ उत्पादों में ऊंची टैरिफ दरें लगाए जाने से भारतीय सामानों की अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धा घटी है। इससे निर्यात से होने वाली डॉलर की आमद सीमित हुई है और चालू खाते के घाटे की चिंता बढ़ी है।

    रुपये की गिरावट का असर आम आदमी की जिंदगी पर भी पड़ता है। कमजोर रुपये के कारण कच्चा तेल गैस इलेक्ट्रॉनिक्स और अन्य आयातित वस्तुएं महंगी हो जाती हैं। इससे पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने और महंगाई में दोबारा तेजी आने का खतरा रहता है जिसका बोझ सीधे उपभोक्ताओं पर पड़ता है।तेल आयात भी रुपये की कमजोरी की एक बड़ी वजह है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की ऊंची कीमतों से भारत का आयात बिल बढ़ गया है। इससे व्यापार घाटा और चालू खाता घाटा बढ़ने की आशंका है जो मुद्रा पर अतिरिक्त दबाव डालता है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि रुपये की गिरावट को थामने में भारतीय रिजर्व बैंक RBIकी भूमिका बेहद अहम है। आरबीआई जरूरत पड़ने पर बाजार में डॉलर बेचकर और तरलता का प्रबंधन कर रुपये की तेज गिरावट को रोक सकता है। हालांकि केंद्रीय बैंक आमतौर पर बहुत ज्यादा हस्तक्षेप से बचता है ताकि बाजार में अस्थिरता न बढ़े।लंबी अवधि में रुपये को स्थिर रखने के लिए सिर्फ मौद्रिक हस्तक्षेप काफी नहीं होगा। अर्थशास्त्रियों का कहना है कि भारत को विदेशी प्रत्यक्ष निवेश FDIऔर दीर्घकालिक पूंजी प्रवाह को बढ़ावा देना होगा। मैन्युफैक्चरिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और ग्रीन एनर्जी जैसे क्षेत्रों में निवेश बढ़ने से डॉलर की स्थायी आमद होगी।

    निर्यात बढ़ाना भी रुपये को सहारा देने का एक अहम तरीका है। आईटी फार्मा इंजीनियरिंग और सेवा क्षेत्र के निर्यात में मजबूती आने से विदेशी मुद्रा भंडार मजबूत हो सकता है। इसके साथ ही अमेरिका और अन्य प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के साथ संतुलित और स्पष्ट व्यापार समझौते विदेशी मुद्रा प्रवाह को बढ़ा सकते हैं।महंगाई पर नियंत्रण भी रुपये की स्थिरता के लिए जरूरी है। अगर महंगाई काबू में रहती है तो आरबीआई को नीतिगत समर्थन बनाए रखने में आसानी होती है और ब्याज दरों पर दबाव कम रहता है। मध्यम से लंबी अवधि में नीतिगत सुधार निवेश अनुकूल माहौल और निर्यात को बढ़ावा देने वाली रणनीतियां रुपये की गिरावट पर ब्रेक लगा सकती हैं।

  • 2026 तक चांदी की कीमत ₹2.50 लाख तक पहुंचने का अनुमान, विशेषज्ञों का कहना है कि तेजी जारी रहेगी

    2026 तक चांदी की कीमत ₹2.50 लाख तक पहुंचने का अनुमान, विशेषज्ञों का कहना है कि तेजी जारी रहेगी


    नई दिल्ली । चांदी की कीमतों में इस समय लगातार वृद्धि हो रही है और यह रुझान आने वाले वर्षों तक जारी रहने का अनुमान है। विशेषज्ञों के मुताबिक 2026 तक चांदी की कीमत ₹2.25 लाख से ₹2.50 लाख प्रति किलोग्राम तक पहुँच सकती है। इस वृद्धि के पीछे कई कारण हैं जिनमें औद्योगिक मांग वैश्विक आर्थिक बदलाव और ग्रीन एनर्जी पर बढ़ते निवेश जैसे कारक शामिल हैं।

    औद्योगिक मांग का प्रभाव

    चांदी की कीमतों में इस वृद्धि का सबसे बड़ा कारण है औद्योगिक मांग। सोलर पैनल इलेक्ट्रिक वाहन EV और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे क्षेत्रों में चांदी का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है। सोलर पैनल की उत्पादन क्षमता में वृद्धि और इलेक्ट्रिक वाहनों के उत्पादन में वृद्धि चांदी की मांग को बढ़ा रहे हैं। इस बढ़ती औद्योगिक मांग के कारण चांदी की कीमतें उच्च स्तर पर बनी हुई हैं। इसके साथ ही ग्रीन एनर्जी हरित ऊर्जा में निवेश में भी तेजी आई है। कई देशों में हरित ऊर्जा स्रोतों को बढ़ावा दिया जा रहा है जैसे सौर ऊर्जा और पवन ऊर्जा और इन सभी क्षेत्रों में चांदी का महत्वपूर्ण उपयोग हो रहा है। यही कारण है कि वैश्विक स्तर पर चांदी की मांग में भी वृद्धि हुई है।

    वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता

    वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता खासकर अमेरिका और यूरोप में चांदी की कीमतों के लिए एक सहायक कारक साबित हो रही है। अमेरिकी फेडरल रिजर्व और यूरोपीय सेंट्रल बैंक द्वारा ब्याज दरों में बदलाव के संकेत और वैश्विक मुद्रास्फीति के दबाव निवेशकों को सुरक्षित निवेश के विकल्पों की ओर आकर्षित कर रहे हैं। ऐसे में सोने और चांदी की कीमतों में बढ़ोतरी देखी जा रही है क्योंकि ये दोनों धातुएं सुरक्षित निवेश के रूप में मानी जाती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ब्याज दरों में कटौती का सिलसिला शुरू होता है तो निवेशक चांदी और सोने जैसे सुरक्षित विकल्पों की ओर रुख करेंगे। इसके साथ ही डॉलर की कमजोरी और अन्य वैश्विक आर्थिक कारक भी चांदी की कीमतों को सहारा देने वाले महत्वपूर्ण तत्व हैं।

    चांदी की मूल्यवृद्धि

    हाल ही में चांदी के भाव ₹2.07 लाख प्रति किलोग्राम तक पहुँच चुके हैं जो कि एक नया रिकॉर्ड है। पिछले कुछ महीनों में चांदी की कीमत में 129.4% की वृद्धि हुई है जो 1 जनवरी 2025 को ₹90 500 प्रति किलोग्राम थी। इस वृद्धि का मुख्य कारण व्यापारियों द्वारा निरंतर खरीदारी और वैश्विक मांग में वृद्धि है। इसके अलावा चांदी में निवेश के लिए विशेषज्ञों द्वारा लंबी अवधि के निवेश की सलाह दी जा रही है। निवेशकों को यह सलाह दी जा रही है कि वे एकमुश्त निवेश के बजाय चरणबद्ध तरीके से निवेश करें। चांदी के बाजार में उथल-पुथल हो सकती है लेकिन लंबी अवधि में यह एक लाभकारी निवेश विकल्प साबित हो सकता है।

    सतर्कता और जोखिम

    हालांकि चांदी की कीमतों में तेजी देखने को मिल रही है विशेषज्ञों ने यह भी चेतावनी दी है कि इतनी तेजी के बाद बाजार में उतार-चढ़ाव आ सकता है। मुनाफावसूली के चलते अल्पावधि में कीमतों में नरमी भी देखी जा सकती है। कुछ ब्रोकरेज और रिसर्च रिपोर्ट्स का अनुमान है कि 2026 के अंत तक चांदी ₹2.40 लाख प्रति किलोग्राम का स्तर छू सकती है जबकि बाजार में 1.78 लाख रुपये तक की गिरावट का भी खतरा है।

    निवेशकों के लिए सलाह

    विशेषज्ञों का कहना है कि चांदी में निवेश करते समय सतर्कता बरतनी चाहिए। एक ओर जहां चांदी के दाम में वृद्धि की उम्मीद है वहीं निवेशकों को यह भी याद रखना चाहिए कि कीमतों में अस्थिरता बनी रह सकती है। इसीलिए चांदी में निवेश करते समय दीर्घकालिक दृष्टिकोण अपनाना और एकमुश्त निवेश के बजाय चरणबद्ध निवेश की रणनीति अपनाना सबसे सही रहेगा। कुल मिलाकर चांदी के भाव में तेज वृद्धि और आगामी वर्षों में इसकी कीमतों में और वृद्धि की संभावना को देखते हुए यह एक आकर्षक निवेश विकल्प बन सकता है। हालांकि निवेशकों को इसके साथ जुड़ी जोखिमों को भी समझना चाहिए और उन्हें अपनी निवेश रणनीतियों में सावधानी बरतनी चाहिए।

  • बैंक और वॉलेट ऐप्स में बढ़ेंगे शुल्क सेवाएं होंगी सीमित; ग्राहकों के लिए मायूस करने वाली खबर

    बैंक और वॉलेट ऐप्स में बढ़ेंगे शुल्क सेवाएं होंगी सीमित; ग्राहकों के लिए मायूस करने वाली खबर


    नई दिल्ली । बैंकिंग सेवाओं और वॉलेट ऐप्स पर शुल्क लगातार बढ़ाए जा रहे हैं जिससे ग्राहकों को नए साल में और अधिक खर्च का सामना करना पड़ेगा। ICICI बैंक पेटीएम मोबिक्विक जैसे वॉलेट ऐप्स और एयरटेल पेमेंट बैंक ने अपनी सेवाओं में बदलाव की योजना बनाई है। इनमें शुल्क वृद्धि नई सेवाओं का शुल्क लगाना और कुछ सुविधाओं को बंद करना शामिल है।

    ICICI बैंक की नई शुल्क संरचना

    क्रेडिट कार्ड पर गेमिंग शुल्क 15 जनवरी 2026 से ICICI बैंक क्रेडिट कार्ड से गेमिंग प्लेटफॉर्म पर किए गए ट्रांजैक्शन्स पर 2% शुल्क लगाएगा।वॉलेट पर शुल्क थर्ड-पार्टी वॉलेट ऐप्स जैसे पेटीएम मोबिक्विक पर ₹5000 से अधिक राशि भेजने पर 1% शुल्क लिया जाएगा।क्रेडिट कार्ड का बिल भुगतान शाखा में जाकर क्रेडिट कार्ड बिल जमा करने पर 150 रुपये अतिरिक्त शुल्क लिया जाएगा जो पहले 100 रुपये था। फिल्म के ऑफर में बदलाव 1 फरवरी 2026 से इंसटेंट प्लेटिनम कार्ड पर फिल्म देखने के मुफ्त ऑफर को बंद कर दिया जाएगा और इसके लिए ₹25000 खर्च करने की शर्त रखी जाएगी।

    एयरटेल पेमेंट बैंक

    एयरटेल पेमेंट बैंक ने 1 जनवरी 2026 से अपने वॉलेट पर ₹75 प्रति वर्ष का रखरखाव शुल्क एएमसीलगाने का निर्णय लिया है। यदि वॉलेट में शेष राशि नहीं होगी तो यह शुल्क डेबिट कर लिया जाएगा।

    वॉलेट ऐप्स पर शुल्क वृद्धि

    भारत में वॉलेट सेवाएं 2004 में ऑक्सीजन वॉलेट से शुरू हुईं लेकिन 2010 में पेटीएम के बाद वॉलेट ऐप्स ने काफी लोकप्रियता हासिल की। शुरुआती दौर में अधिकांश कंपनियां अपनी सेवाएं मुफ्त देती थीं लेकिन 2021 से मोबिक्विक ने गैर-सक्रिय वॉलेट पर रखरखाव शुल्क और केवाईसी न कराने पर जुर्माना लगाना शुरू किया। अब कई वॉलेट कंपनियां क्रेडिट व डेबिट कार्ड से वॉलेट में पैसा डालने पर 1.5% सर्विस चार्ज लगा रही हैं।

    ग्रामीण बैंकों का एकीकरण

    इसके अलावा सरकार ने 28 क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों के लिए एक नया एकीकृत ब्रांड लोगो जारी किया है। यह लोगो राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक NABARDके सहयोग से तैयार किया गया है और यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था के विकास और प्रगति को दर्शाता है।

    उपभोक्ताओं के लिए चिंता

    बैंकिंग और डिजिटल लेनदेन की बढ़ती लागत के साथ उपभोक्ताओं को आने वाले समय में अतिरिक्त शुल्क और सीमित सेवाओं का सामना करना पड़ेगा। यह स्थिति उपभोक्ताओं के लिए चिंता का कारण बन सकती है खासकर उन लोगों के लिए जो इन सेवाओं पर निर्भर हैं।