NPS निवेशकों के लिए अलर्ट: 25 दिसंबर अहम
ITR अलर्ट: 31 दिसंबर आखिरी मौका
PAN-आधार लिंकिंग की भी डेडलाइन

NPS निवेशकों के लिए अलर्ट: 25 दिसंबर अहम
ITR अलर्ट: 31 दिसंबर आखिरी मौका
PAN-आधार लिंकिंग की भी डेडलाइन

31 दिसंबर बुधवार को न्यू ईयर ईव के अवसर पर मिजोरम और मणिपुर में बैंक बंद रहेंगे। इसके अलावा 30 दिसंबर मंगलवार को मेघालय में बैंक बंद रहेंगे। इस तरह दिसंबर के अंतिम सप्ताह में अलग-अलग राज्यों और शहरों में बैंकों में कामकाज की स्थिति अलग-अलग दिन प्रभावित होगी।RBI की सूची के अनुसार 24 से 31 दिसंबर तक अधिकांश दिनों में विभिन्न राज्यों और शहरों में बैंक बंद रहेंगे। इस दौरान केवल 29 दिसंबर को ही बैंकों में सामान्य कामकाज होगा। इसलिए ग्राहकों को वित्तीय लेनदेन और जरूरी कामकाज में असुविधा से बचने के लिए पूर्व योजना बनाने की सलाह दी जा रही है।
हालांकि बैंकों के बंद रहने के बावजूद एटीएम मोबाइल बैंकिंग नेट बैंकिंग और इंटरनेट बैंकिंग सेवाएं सामान्य रूप से चालू रहेंगी। ग्राहक ATM मोबाइल ऐप या नेट बैंकिंग के जरिए पैसे निकालने चेक बैलेंस देखने और ऑनलाइन ट्रांजेक्शन जैसी सुविधाओं का इस्तेमाल कर सकते हैं। लेकिन इस अवधि में शाखाओं में जाकर ड्राफ्ट चेक या अन्य काउंटर सेवाओं का उपयोग संभव नहीं होगा।विशेष रूप से क्रिसमस और न्यू ईयर के अवसर पर यह छुट्टियां बैंक कर्मचारियों के लिए भी महत्वपूर्ण हैं। ग्राहकों को सलाह दी जाती है कि वे जरूरी बैंकिंग कार्य जैसे पैसे जमा करना चेक क्लियरिंग और फिक्स्ड डिपॉजिट जैसी सेवाओं को पहले निपटा लें।
RBI की घोषणा के अनुसार यह छुट्टियों का शेड्यूल सालाना बैंक हॉलिडे कैलेंडर के तहत जारी किया गया है। इस दौरान राज्यों और शहरों में छुट्टियों की सूची अलग-अलग हो सकती है। इसलिए ग्राहक अपनी संबंधित शाखा से भी छुट्टियों की पुष्टि कर सकते हैं।इस तरह दिसंबर के अंतिम सप्ताह में बैंकिंग सेवाओं में रुकावट होने के बावजूद डिजिटल बैंकिंग और ATM सेवाएं निरंतर उपलब्ध रहेंगी। ग्राहक अपने जरूरी कामकाज के लिए इन विकल्पों का लाभ उठा सकते हैं।

एंटरटेनमेंट ऑफर्स में सख्ती
प्रीमियम कार्ड्स पर अतिरिक्त बोझ

हालांकि, आज फोर्ब्स रियल टाइम बिलियनेयर्स इंडेक्स में यह 748.9 बिलियन डॉलर दिख रही है, जो भारत के टॉप 40 सबसे अमीरों की कुल संपत्ति के बराबर है। मस्क पहले शख्स हैं ,जिन्होंने यह आंकड़ा छुआ। 16 दिसंबर को यह 600 बिलियन डॉलर पर पहुंची थी।
दौलत में उछाल का डेलावेयर ट्रिगर
उनकी संपत्ति में यह ऐतिहासिक उछाल अमेरिका की एक अदालत के फैसले के बाद आया, जिसमें टेस्ला के स्टॉक विकल्प पैकेज को बहाल कर दिया गया, जिसकी कीमत करीब 139 अरब डॉलर है। फोर्ब्स मैगजीन ने पहले मस्क को 600 अरब डॉलर से अधिक सम्पति वाला पहला व्यक्ति बताया था
अदालत का यह फैसला मस्क के 2018 के उस वेतन पैकेज से जुड़ा है, जिसे निचली अदालत ने अकल्पनीय बताते हुए रद्द कर दिया था। टेस्ला कंपनी ने मस्क के लिए यह मोटा पैकेज स्वीकृत किया था, जो टेस्ला के शेयरों की मौजूदा कीमत के हिसाब से करीब 139 अरब डॉलर का है। फोर्ब्स रियल टाइम बिलेनियर इंडेक्स के मुताबिक मस्क की वेल्थ अब लैरी पेज (252.6 बिलियन), लैरी एलिसन (242.7 बिलियन) और जेफ बेजोस (239.4 बिलियन) की कुल संपत्ति से भी ज्यादा है।
कारण 1: टेस्ला पे-पैकेज की वापसी
2018 में टेस्ला ने मस्क को 56 बिलियन डॉलर का स्टॉक ऑप्शन दिया था। 2024 में लोअर कोर्ट ने रद्द किया, लेकिन दिसंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने बहाल किया। इससे वेल्थ पहली बार 700 बिलियन पार हुई।
कारण 2: स्पेसएक्स का 800 बिलियन वैल्यूएशन
रॉयटर्स के अनुसार, आंतरिक शेयर बिक्री से स्पेसएक्स की वैल्यूएशन 800 बिलियन डॉलर पहुंची। मस्क की 42% हिस्सेदारी पर अगर लिस्टिंग हो, तो अकेले यह 336 बिलियन डॉलर से ज्यादा जोड़ सकती है।
कारण 3: टेस्ला शेयरों की उछाल
नवंबर 2025 में शेयरहोल्डर्स ने 1 ट्रिलियन डॉलर का नया पे-पैकेज अप्रूव किया। 2025 में मस्क की वेल्थ में 340 बिलियन डॉलर जुड़े। टेस्ला में 12% स्टेक अब 197 बिलियन डॉलर का है। शेयर 13% चढ़े, सोमवार को 4% ऊपर जब मस्क ने रोबोटैक्सी टेस्ट की घोषणा की।

कैश निकासी और क्रेडिट रिपोर्ट पर नजर
पुराना कार्ड बंद करने से पहले सोचें
सही इस्तेमाल से बनेगा फाइनेंशियल फ्यूचर

दूसरा अहम कारण डॉलर की वैश्विक मजबूती है। अमेरिका में ऊंची ब्याज दरों और मजबूत आर्थिक संकेतों के चलते डॉलर दुनियाभर की मुद्राओं के मुकाबले मजबूत बना हुआ है। जब अमेरिकी बॉन्ड पर रिटर्न बढ़ता है तो वैश्विक निवेशक उभरते बाजारों से पूंजी निकालकर अमेरिका की ओर रुख करते हैं। इसका असर भारत जैसे देशों की मुद्रा पर पड़ता है।भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते को लेकर बनी अनिश्चितता ने भी रुपये पर दबाव बढ़ाया है। अमेरिका द्वारा भारतीय निर्यात पर कुछ उत्पादों में ऊंची टैरिफ दरें लगाए जाने से भारतीय सामानों की अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धा घटी है। इससे निर्यात से होने वाली डॉलर की आमद सीमित हुई है और चालू खाते के घाटे की चिंता बढ़ी है।
रुपये की गिरावट का असर आम आदमी की जिंदगी पर भी पड़ता है। कमजोर रुपये के कारण कच्चा तेल गैस इलेक्ट्रॉनिक्स और अन्य आयातित वस्तुएं महंगी हो जाती हैं। इससे पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने और महंगाई में दोबारा तेजी आने का खतरा रहता है जिसका बोझ सीधे उपभोक्ताओं पर पड़ता है।तेल आयात भी रुपये की कमजोरी की एक बड़ी वजह है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की ऊंची कीमतों से भारत का आयात बिल बढ़ गया है। इससे व्यापार घाटा और चालू खाता घाटा बढ़ने की आशंका है जो मुद्रा पर अतिरिक्त दबाव डालता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि रुपये की गिरावट को थामने में भारतीय रिजर्व बैंक RBIकी भूमिका बेहद अहम है। आरबीआई जरूरत पड़ने पर बाजार में डॉलर बेचकर और तरलता का प्रबंधन कर रुपये की तेज गिरावट को रोक सकता है। हालांकि केंद्रीय बैंक आमतौर पर बहुत ज्यादा हस्तक्षेप से बचता है ताकि बाजार में अस्थिरता न बढ़े।लंबी अवधि में रुपये को स्थिर रखने के लिए सिर्फ मौद्रिक हस्तक्षेप काफी नहीं होगा। अर्थशास्त्रियों का कहना है कि भारत को विदेशी प्रत्यक्ष निवेश FDIऔर दीर्घकालिक पूंजी प्रवाह को बढ़ावा देना होगा। मैन्युफैक्चरिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और ग्रीन एनर्जी जैसे क्षेत्रों में निवेश बढ़ने से डॉलर की स्थायी आमद होगी।
निर्यात बढ़ाना भी रुपये को सहारा देने का एक अहम तरीका है। आईटी फार्मा इंजीनियरिंग और सेवा क्षेत्र के निर्यात में मजबूती आने से विदेशी मुद्रा भंडार मजबूत हो सकता है। इसके साथ ही अमेरिका और अन्य प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के साथ संतुलित और स्पष्ट व्यापार समझौते विदेशी मुद्रा प्रवाह को बढ़ा सकते हैं।महंगाई पर नियंत्रण भी रुपये की स्थिरता के लिए जरूरी है। अगर महंगाई काबू में रहती है तो आरबीआई को नीतिगत समर्थन बनाए रखने में आसानी होती है और ब्याज दरों पर दबाव कम रहता है। मध्यम से लंबी अवधि में नीतिगत सुधार निवेश अनुकूल माहौल और निर्यात को बढ़ावा देने वाली रणनीतियां रुपये की गिरावट पर ब्रेक लगा सकती हैं।

औद्योगिक मांग का प्रभाव
वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता
चांदी की मूल्यवृद्धि
सतर्कता और जोखिम
निवेशकों के लिए सलाह

ICICI बैंक की नई शुल्क संरचना
क्रेडिट कार्ड पर गेमिंग शुल्क 15 जनवरी 2026 से ICICI बैंक क्रेडिट कार्ड से गेमिंग प्लेटफॉर्म पर किए गए ट्रांजैक्शन्स पर 2% शुल्क लगाएगा।वॉलेट पर शुल्क थर्ड-पार्टी वॉलेट ऐप्स जैसे पेटीएम मोबिक्विक पर ₹5000 से अधिक राशि भेजने पर 1% शुल्क लिया जाएगा।क्रेडिट कार्ड का बिल भुगतान शाखा में जाकर क्रेडिट कार्ड बिल जमा करने पर 150 रुपये अतिरिक्त शुल्क लिया जाएगा जो पहले 100 रुपये था। फिल्म के ऑफर में बदलाव 1 फरवरी 2026 से इंसटेंट प्लेटिनम कार्ड पर फिल्म देखने के मुफ्त ऑफर को बंद कर दिया जाएगा और इसके लिए ₹25000 खर्च करने की शर्त रखी जाएगी।
एयरटेल पेमेंट बैंक
एयरटेल पेमेंट बैंक ने 1 जनवरी 2026 से अपने वॉलेट पर ₹75 प्रति वर्ष का रखरखाव शुल्क एएमसीलगाने का निर्णय लिया है। यदि वॉलेट में शेष राशि नहीं होगी तो यह शुल्क डेबिट कर लिया जाएगा।
वॉलेट ऐप्स पर शुल्क वृद्धि
भारत में वॉलेट सेवाएं 2004 में ऑक्सीजन वॉलेट से शुरू हुईं लेकिन 2010 में पेटीएम के बाद वॉलेट ऐप्स ने काफी लोकप्रियता हासिल की। शुरुआती दौर में अधिकांश कंपनियां अपनी सेवाएं मुफ्त देती थीं लेकिन 2021 से मोबिक्विक ने गैर-सक्रिय वॉलेट पर रखरखाव शुल्क और केवाईसी न कराने पर जुर्माना लगाना शुरू किया। अब कई वॉलेट कंपनियां क्रेडिट व डेबिट कार्ड से वॉलेट में पैसा डालने पर 1.5% सर्विस चार्ज लगा रही हैं।
ग्रामीण बैंकों का एकीकरण
इसके अलावा सरकार ने 28 क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों के लिए एक नया एकीकृत ब्रांड लोगो जारी किया है। यह लोगो राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक NABARDके सहयोग से तैयार किया गया है और यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था के विकास और प्रगति को दर्शाता है।
उपभोक्ताओं के लिए चिंता
बैंकिंग और डिजिटल लेनदेन की बढ़ती लागत के साथ उपभोक्ताओं को आने वाले समय में अतिरिक्त शुल्क और सीमित सेवाओं का सामना करना पड़ेगा। यह स्थिति उपभोक्ताओं के लिए चिंता का कारण बन सकती है खासकर उन लोगों के लिए जो इन सेवाओं पर निर्भर हैं।