Category: Economy

  • नए एफटीए से भारत को मिलेगी नई आर्थिक रफ्तार, मैन्युफैक्चरिंग, इनोवेशन और युवाओं के लिए खुलेंगे वैश्विक अवसर

    नए एफटीए से भारत को मिलेगी नई आर्थिक रफ्तार, मैन्युफैक्चरिंग, इनोवेशन और युवाओं के लिए खुलेंगे वैश्विक अवसर

    नई दिल्ली । भारत के नए मुक्त व्यापार समझौते देश की अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने के साथ-साथ मैन्युफैक्चरिंग, नवाचार और रोजगार के नए अवसर पैदा करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। सरकार का मानना है कि वैश्विक बाजारों तक बढ़ती पहुंच भारतीय उद्योगों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता को मजबूत करेगी और युवाओं के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर करियर के नए रास्ते खोलेगी। इसी उद्देश्य के तहत छात्रों को तकनीकी दक्षता, व्यावहारिक अनुभव और आधुनिक शिक्षा से जोड़ने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।

    एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री ने कहा कि भारत तेजी से बदलती वैश्विक अर्थव्यवस्था में अपनी मजबूत पहचान बना रहा है। नए मुक्त व्यापार समझौतों के माध्यम से देश के उद्योगों को नए बाजार मिल रहे हैं, जिससे उत्पादन क्षमता बढ़ने के साथ-साथ इनोवेशन को भी प्रोत्साहन मिल रहा है। उन्होंने कहा कि यह बदलाव केवल उद्योगों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आने वाले वर्षों में युवाओं के लिए रोजगार, उद्यमिता और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के अवसर भी बढ़ाएगा।

    उन्होंने छात्रों से पारंपरिक शिक्षा के साथ-साथ व्यावहारिक कौशल विकसित करने का आग्रह किया। उनका कहना था कि केवल सैद्धांतिक ज्ञान आज के प्रतिस्पर्धी दौर में पर्याप्त नहीं है। उद्योगों की बदलती जरूरतों के अनुरूप तकनीकी दक्षता, समस्या समाधान की क्षमता और व्यावहारिक अनुभव ही भविष्य की सफलता का आधार बनेंगे।

    डिजिटल शिक्षा की बढ़ती भूमिका पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि देश में इंटरनेट उपयोगकर्ताओं की बड़ी संख्या उच्च शिक्षा को अधिक सुलभ और समावेशी बनाने का अवसर प्रदान करती है। आधुनिक तकनीक के माध्यम से गुणवत्तापूर्ण शिक्षा अब देश के दूरदराज क्षेत्रों तक भी पहुंचाई जा सकती है, जिससे भौगोलिक और आर्थिक असमानताओं को कम करने में मदद मिलेगी।

    उन्होंने ऑनलाइन द्विभाषी प्रबंधन शिक्षा कार्यक्रम को शिक्षा क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण पहल बताया। उनके अनुसार, इस प्रकार के कार्यक्रम ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के विद्यार्थियों के बीच मौजूद अवसरों की खाई को कम करेंगे। अब छोटे शहरों और दूरस्थ इलाकों के छात्र भी घर बैठे उच्च गुणवत्ता वाली प्रबंधन शिक्षा प्राप्त कर सकेंगे और राष्ट्रीय स्तर के शैक्षणिक संसाधनों का लाभ उठा पाएंगे।

    उन्होंने यह भी कहा कि हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में उपलब्ध पाठ्यक्रम देश के विभिन्न वर्गों के विद्यार्थियों को समान अवसर प्रदान करेंगे। इससे भाषा संबंधी बाधाएं कम होंगी और अधिक संख्या में छात्र उच्च शिक्षा से जुड़ सकेंगे। डिजिटल माध्यमों के जरिए पढ़ाई करने वाले विद्यार्थियों के लिए पारदर्शी और विश्वसनीय मूल्यांकन प्रणाली सुनिश्चित करने हेतु परीक्षाएं ऑफलाइन आयोजित किए जाने की व्यवस्था भी प्रभावी मानी जा रही है।

    कार्यक्रम के दौरान हाइब्रिड शिक्षा मॉडल को और मजबूत बनाने की आवश्यकता पर भी बल दिया गया। उनका कहना था कि ऑनलाइन अध्ययन के साथ समय-समय पर शिक्षकों और विद्यार्थियों के बीच प्रत्यक्ष संवाद भी आवश्यक है। इससे छात्रों को टीमवर्क, नेतृत्व क्षमता, विचारों के आदान-प्रदान और नेटवर्किंग जैसे महत्वपूर्ण प्रबंधन कौशल विकसित करने का अवसर मिलेगा।

    सरकार का मानना है कि मुक्त व्यापार समझौतों, डिजिटल शिक्षा और कौशल विकास की संयुक्त रणनीति भारत को वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में अधिक प्रतिस्पर्धी बनाएगी। उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप प्रशिक्षित मानव संसाधन तैयार होने से देश की उत्पादन क्षमता, नवाचार और आर्थिक विकास को भी दीर्घकालिक मजबूती मिलने की उम्मीद है।

  • नीरव मोदी की आखिरी कानूनी उम्मीद भी खत्म, यूरोपीय अदालत से झटका, भारत प्रत्यर्पण का रास्ता लगभग साफ

    नीरव मोदी की आखिरी कानूनी उम्मीद भी खत्म, यूरोपीय अदालत से झटका, भारत प्रत्यर्पण का रास्ता लगभग साफ


    नई दिल्ली।
    पंजाब नेशनल बैंक से जुड़े बहुचर्चित बैंक धोखाधड़ी मामले के मुख्य आरोपी और भगोड़े हीरा कारोबारी नीरव मोदी के भारत प्रत्यर्पण का रास्ता अब लगभग साफ माना जा रहा है। यूरोपियन कोर्ट ऑफ ह्यूमन राइट्स से भी राहत नहीं मिलने के बाद उसके पास उपलब्ध सभी प्रमुख कानूनी विकल्प समाप्त हो चुके हैं। अब मामला मुख्य रूप से ब्रिटेन की प्रशासनिक प्रक्रिया पर निर्भर है, जिसके पूरा होने के बाद उसे भारत लाए जाने की दिशा में अगला कदम उठाया जा सकता है।

    जानकारी के अनुसार नीरव मोदी ने ब्रिटेन की अदालतों से राहत नहीं मिलने के बाद अप्रैल 2026 में यूरोपियन कोर्ट ऑफ ह्यूमन राइट्स का दरवाजा खटखटाया था। उसने अपने प्रत्यर्पण को रोकने की मांग करते हुए याचिका दायर की थी। हालांकि अदालत ने उसे कोई राहत नहीं दी, जिससे उसके प्रत्यर्पण की राह में मौजूद अंतिम कानूनी बाधा भी समाप्त हो गई है। अब ब्रिटेन की संबंधित एजेंसियां प्रत्यर्पण की औपचारिक प्रक्रिया को आगे बढ़ा सकती हैं।

    इससे पहले ब्रिटेन की हाई कोर्ट ने भी नीरव मोदी की उस याचिका को खारिज कर दिया था, जिसमें उसने प्रत्यर्पण आदेश को चुनौती देने की अनुमति मांगी थी। अदालत ने माना था कि भारत की ओर से जेल की सुरक्षा, कैद की परिस्थितियों और कानूनी अधिकारों को लेकर दिए गए आश्वासन पर्याप्त हैं। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया था कि इस मामले में ऐसे असाधारण हालात नहीं हैं, जिनके आधार पर प्रत्यर्पण रोका जाए।

    नीरव मोदी ने अपनी याचिकाओं में यह तर्क दिया था कि भारत लौटने पर उसे प्रताड़ना और अनुचित व्यवहार का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि जांच एजेंसियों और भारतीय पक्ष ने इन दावों का विरोध करते हुए अदालत में विस्तृत तथ्य और सुरक्षा संबंधी आश्वासन प्रस्तुत किए। इन्हीं आधारों पर ब्रिटेन की अदालतों ने उसके तर्कों को स्वीकार नहीं किया और प्रत्यर्पण प्रक्रिया को वैध माना।

    यूरोपियन कोर्ट ऑफ ह्यूमन राइट्स में दायर याचिका की सुनवाई गोपनीय रही। अदालत ने प्रक्रिया के दौरान मामले की जानकारी सार्वजनिक नहीं की थी। अब वहां से भी राहत नहीं मिलने के बाद राजनयिक स्तर पर यह माना जा रहा है कि कानूनी दृष्टि से प्रत्यर्पण के खिलाफ कोई बड़ा अवरोध शेष नहीं बचा है। इसके बाद संबंधित प्रशासनिक औपचारिकताएं पूरी होने पर नीरव मोदी को भारत भेजने की प्रक्रिया तेज हो सकती है।

    नीरव मोदी मार्च 2019 से लंदन की वैंड्सवर्थ जेल में बंद है। उसके खिलाफ पंजाब नेशनल बैंक से जुड़े हजारों करोड़ रुपये के कथित बैंक धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग मामलों में जांच चल रही है। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो और प्रवर्तन निदेशालय लंबे समय से उसके प्रत्यर्पण की कोशिश कर रहे हैं ताकि भारत में उसके खिलाफ लंबित मामलों की सुनवाई आगे बढ़ाई जा सके।

    ब्रिटेन की अदालतों में नीरव मोदी ने अपने पक्ष में कई कानूनी दलीलें दी थीं। इनमें भारत की जेलों की स्थिति, मानवाधिकारों से जुड़े मुद्दे और पूर्व के कुछ मामलों का हवाला भी शामिल था। लेकिन अदालत ने प्रत्येक स्तर पर उपलब्ध साक्ष्यों और दोनों पक्षों की दलीलों पर विचार करने के बाद उसके तर्कों को पर्याप्त आधार नहीं माना। अब माना जा रहा है कि यदि प्रशासनिक प्रक्रिया तय समय पर पूरी होती है तो नीरव मोदी का भारत प्रत्यर्पण जल्द संभव हो सकता है, जिससे देश के सबसे चर्चित आर्थिक अपराध मामलों में कानूनी कार्रवाई को नई गति मिल सकती है।

  • वैश्विक संकेतों और मजबूत खरीदारी से बाजार में लौटी रफ्तार, सेंसेक्स-निफ्टी मजबूती के साथ बंद, ऑटो और रियल्टी शेयरों ने दिखाई ताकत

    वैश्विक संकेतों और मजबूत खरीदारी से बाजार में लौटी रफ्तार, सेंसेक्स-निफ्टी मजबूती के साथ बंद, ऑटो और रियल्टी शेयरों ने दिखाई ताकत

    नई दिल्ली । सप्ताह के पहले कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार ने लगातार चौथे सत्र में मजबूती का सिलसिला कायम रखते हुए बढ़त के साथ कारोबार समाप्त किया। सकारात्मक वैश्विक संकेतों, प्रमुख सेक्टरों में खरीदारी और निवेशकों के बेहतर भरोसे के चलते बाजार में पूरे दिन उत्साह का माहौल बना रहा। कारोबार के अंत में सेंसेक्स और निफ्टी दोनों प्रमुख सूचकांक मजबूत बढ़त के साथ बंद हुए, जिससे बाजार की सकारात्मक धारणा और मजबूत हुई।

    कारोबार समाप्त होने पर बीएसई सेंसेक्स 521.16 अंकों की बढ़त के साथ 78,285.07 अंक पर बंद हुआ। वहीं, एनएसई निफ्टी 159.50 अंक चढ़कर 24,430.35 अंक के स्तर पर पहुंच गया। शुरुआती कारोबार से ही दोनों सूचकांकों में तेजी का रुख दिखाई दिया और दिनभर खरीदारी का दबदबा बना रहा। कारोबार के दौरान सेंसेक्स 78,398.06 अंक और निफ्टी 24,458.65 अंक के उच्चतम स्तर तक पहुंचने में सफल रहे।

    व्यापक बाजार में भी सकारात्मक रुझान देखने को मिला। मिडकैप और स्मॉलकैप सूचकांकों में भी अच्छी बढ़त दर्ज की गई, जिससे यह संकेत मिला कि केवल बड़ी कंपनियों तक ही नहीं बल्कि मध्यम और छोटी कंपनियों के शेयरों में भी निवेशकों की रुचि बनी रही। बाजार की व्यापक मजबूती को निवेशकों ने सकारात्मक संकेत के रूप में देखा।

    सेक्टोरल प्रदर्शन की बात करें तो रियल्टी, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, ऑटो तथा ऑयल एंड गैस कंपनियों के शेयरों में सबसे अधिक खरीदारी देखने को मिली। इसके अलावा मेटल, फार्मा, हेल्थकेयर और वित्तीय सेवाओं से जुड़े शेयर भी बढ़त के साथ बंद हुए। हालांकि आईटी, मीडिया और पीएसयू बैंकिंग सेक्टर में कुछ मुनाफावसूली देखने को मिली, जिसके कारण इन क्षेत्रों के सूचकांक दबाव में रहे।

    प्रमुख कंपनियों में एचडीएफसी बैंक, हिंडाल्को इंडस्ट्रीज, ओएनजीसी, बजाज ऑटो और महिंद्रा एंड महिंद्रा के शेयरों ने बेहतर प्रदर्शन किया। दूसरी ओर कोटक महिंद्रा बैंक, टीसीएस, कोल इंडिया, बजाज फिनसर्व और मैक्स हेल्थकेयर के शेयरों में गिरावट दर्ज की गई। इसके बावजूद बाजार की समग्र दिशा सकारात्मक बनी रही।

    बाजार में आई इस तेजी का सीधा लाभ निवेशकों को भी मिला। कारोबार समाप्त होने तक सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण बढ़कर लगभग 482.33 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया। एक ही कारोबारी सत्र में निवेशकों की संपत्ति में करीब दो लाख करोड़ रुपये की वृद्धि दर्ज की गई, जिससे निवेशकों का मनोबल और मजबूत हुआ।

    विश्लेषकों का मानना है कि पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव में नरमी, कच्चे तेल की अपेक्षाकृत स्थिर कीमतें, पहली तिमाही के वित्तीय परिणामों से पहले सकारात्मक माहौल तथा घरेलू स्तर पर मजबूत खरीदारी ने बाजार को मजबूती प्रदान की है। इन कारकों ने निवेशकों के विश्वास को बढ़ाया और बाजार में लगातार चौथे दिन तेजी बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

    तकनीकी संकेतक भी फिलहाल बाजार के पक्ष में दिखाई दे रहे हैं। प्रमुख सूचकांक महत्वपूर्ण तकनीकी स्तरों के ऊपर टिके हुए हैं, जिससे निकट अवधि में सकारात्मक रुझान बने रहने की संभावना जताई जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि निफ्टी आने वाले सत्रों में प्रमुख प्रतिरोध स्तरों को पार करने में सफल रहता है तो बाजार में तेजी का अगला चरण देखने को मिल सकता है। वहीं, किसी भी सीमित गिरावट की स्थिति में निचले स्तरों पर खरीदारी का समर्थन मिलने की संभावना बनी हुई है, जिससे बाजार की मजबूती आगे भी बरकरार रह सकती है।

  • सूरत और अहमदाबाद की पहचान से आगे निकला कोयम्बटूर, जानिए क्यों तमिलनाडु का यह शहर आज भारत की असली 'टेक्सटाइल सिटी' कहलाता है

    सूरत और अहमदाबाद की पहचान से आगे निकला कोयम्बटूर, जानिए क्यों तमिलनाडु का यह शहर आज भारत की असली 'टेक्सटाइल सिटी' कहलाता है

    नई दिल्ली। भारत में कपड़ा उद्योग का इतिहास हजारों वर्षों पुराना माना जाता है। प्राचीन काल से ही यहां सूती और रेशमी वस्त्रों का निर्माण होता रहा है। समय के साथ इस उद्योग ने आधुनिक रूप लिया और देश के अलग-अलग शहर कपड़ा उत्पादन के प्रमुख केंद्र बनते गए। कभी कानपुर को टेक्सटाइल कैपिटल कहा जाता था तो अहमदाबाद और सूरत भी लंबे समय तक वस्त्र उद्योग के बड़े केंद्र रहे। हालांकि वर्तमान समय में तमिलनाडु का कोयम्बटूर भारत की ‘टेक्सटाइल सिटी’ के रूप में सबसे मजबूत पहचान बना चुका है।

    कोयम्बटूर को यह पहचान केवल कपड़ा उत्पादन की वजह से नहीं मिली, बल्कि यहां विकसित हुए संपूर्ण टेक्सटाइल उद्योग ने इसे देश के सबसे महत्वपूर्ण औद्योगिक शहरों में शामिल कर दिया है। शहर में बड़ी संख्या में स्पिनिंग मिल्स, टेक्सटाइल यूनिट्स, गारमेंट निर्माण केंद्र और प्रोसेसिंग प्लांट संचालित हैं। यही कारण है कि यह भारत में सूती धागे के सबसे बड़े उत्पादन केंद्रों में गिना जाता है।

    इस शहर की भौगोलिक परिस्थितियां भी कपड़ा उद्योग के लिए अनुकूल मानी जाती हैं। यहां का मौसम, औद्योगिक वातावरण और प्रशिक्षित श्रमिकों की उपलब्धता उत्पादन क्षमता को लगातार मजबूत बनाती है। वर्षों से विकसित औद्योगिक ढांचे ने कोयम्बटूर को टेक्सटाइल क्षेत्र में स्थिर और भरोसेमंद पहचान दिलाई है। यही वजह है कि देश की कई प्रमुख वस्त्र कंपनियां यहां से अपना उत्पादन संचालित करती हैं।

    कोयम्बटूर की सबसे बड़ी विशेषता इसका एकीकृत टेक्सटाइल नेटवर्क है। यहां कपास की खरीद से लेकर धागा तैयार करने, बुनाई, रंगाई, प्रिंटिंग और तैयार परिधान बनाने तक की पूरी प्रक्रिया स्थानीय स्तर पर ही पूरी हो जाती है। इससे उत्पादन लागत नियंत्रित रहती है और उद्योग की कार्यक्षमता भी बढ़ती है। इस मॉडल ने शहर को देश के सबसे संगठित टेक्सटाइल क्लस्टरों में शामिल कर दिया है।

    शहर में तैयार होने वाला कॉटन यार्न देश के अनेक राज्यों की वस्त्र इकाइयों तक पहुंचता है। उच्च गुणवत्ता वाले सूती धागे की वजह से यहां का उत्पादन गारमेंट उद्योग और निर्यात आधारित कंपनियों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। इसके अलावा निटवियर, फैब्रिक, होम टेक्सटाइल्स, तौलिये और अन्य तैयार वस्त्रों का भी बड़े पैमाने पर निर्माण किया जाता है।

    कोयम्बटूर का योगदान केवल घरेलू बाजार तक सीमित नहीं है। यहां निर्मित टेक्सटाइल उत्पादों की आपूर्ति कई विदेशी बाजारों में भी होती है। सूती धागा, तैयार कपड़े, टेक्निकल टेक्सटाइल और होम फर्निशिंग उत्पादों का निर्यात इस शहर की औद्योगिक अर्थव्यवस्था को मजबूत आधार देता है। इसी वजह से यह भारत के प्रमुख निर्यात केंद्रों में भी अपनी मजबूत उपस्थिति बनाए हुए है।

    टेक्सटाइल उत्पादन के साथ-साथ कोयम्बटूर मशीन निर्माण के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यहां टेक्सटाइल मशीनरी, मोटर्स, स्पेयर पार्ट्स और इंजीनियरिंग उपकरणों का भी बड़े पैमाने पर निर्माण होता है। इससे वस्त्र उद्योग को स्थानीय स्तर पर आवश्यक मशीनें और तकनीकी सहायता आसानी से उपलब्ध हो जाती है।

    भारत का कपड़ा उद्योग आज भी देश की अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार बना हुआ है। कृषि के बाद यह सबसे अधिक रोजगार उपलब्ध कराने वाले क्षेत्रों में शामिल है और निर्यात में भी इसकी उल्लेखनीय हिस्सेदारी है। इसी मजबूत औद्योगिक व्यवस्था, व्यापक उत्पादन क्षमता और निर्यात में अहम योगदान के कारण कोयम्बटूर को आज भारत की ‘टेक्सटाइल सिटी’ के रूप में विशेष पहचान प्राप्त है।

  • E20, XP95 या XP100… आपकी गाड़ी के लिए कौन-सा पेट्रोल है सबसे सही? जानिए ऑक्टेन, इथेनॉल और परफॉर्मेंस का पूरा गणित

    E20, XP95 या XP100… आपकी गाड़ी के लिए कौन-सा पेट्रोल है सबसे सही? जानिए ऑक्टेन, इथेनॉल और परफॉर्मेंस का पूरा गणित

    नई दिल्ली। देश में इथेनॉल मिश्रित ईंधन को बढ़ावा दिए जाने के बाद E20 पेट्रोल अब अधिकांश पेट्रोल पंपों पर सामान्य ईंधन के रूप में उपलब्ध है। वहीं दूसरी ओर हाई-ऑक्टेन फ्यूल XP95 और XP100 को लेकर भी वाहन चालकों के बीच रुचि बढ़ी है। कई लोग यह जानना चाहते हैं कि इन तीनों प्रकार के पेट्रोल में वास्तविक अंतर क्या है और उनकी कार या बाइक के लिए कौन-सा विकल्प सबसे उपयुक्त रहेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि केवल महंगा या अधिक ऑक्टेन वाला पेट्रोल हर वाहन के लिए बेहतर नहीं होता, बल्कि सही ईंधन का चुनाव वाहन निर्माता की तकनीकी सिफारिश के आधार पर किया जाना चाहिए।

    E20 पेट्रोल वर्तमान समय में सबसे अधिक उपयोग होने वाला ईंधन है। इसमें 20 प्रतिशत इथेनॉल और 80 प्रतिशत पेट्रोल का मिश्रण होता है। इसकी ऑक्टेन रेटिंग 91 RON होती है, जो सामान्य उपयोग वाले पेट्रोल इंजन के लिए पर्याप्त मानी जाती है। सरकार का उद्देश्य इथेनॉल मिश्रण बढ़ाकर जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करना और पर्यावरणीय प्रभाव घटाना है। जिन वाहनों को E20 के अनुरूप तैयार किया गया है, उनके लिए यह ईंधन सामान्य परिस्थितियों में उपयुक्त माना जाता है।

    हाल के समय में कुछ वाहन मालिकों ने E20 पेट्रोल के इस्तेमाल के बाद माइलेज में कमी आने और इंजन की कार्यक्षमता प्रभावित होने जैसी बातें सामने रखी हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे अनुभव वाहन की तकनीक, इंजन की स्थिति और ड्राइविंग पैटर्न पर भी निर्भर करते हैं। यदि वाहन E20 के अनुकूल नहीं है, तो लंबे समय में कुछ तकनीकी चुनौतियां सामने आ सकती हैं। इसलिए वाहन निर्माता द्वारा सुझाए गए ईंधन का ही उपयोग करना सबसे सुरक्षित विकल्प माना जाता है।

    XP95 प्रीमियम श्रेणी का हाई-ऑक्टेन पेट्रोल है, जिसकी ऑक्टेन रेटिंग 95 RON होती है। इसमें लगभग 15 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रित रहता है। यह विशेष रूप से हाई-कंप्रेशन, टर्बोचार्ज्ड और आधुनिक पेट्रोल इंजनों के लिए विकसित किया गया है। अधिक ऑक्टेन रेटिंग के कारण इंजन में नॉकिंग की संभावना कम होती है, जिससे इंजन अधिक स्मूद तरीके से कार्य करता है। इसके उपयोग से बेहतर एक्सेलरेशन, संतुलित प्रदर्शन और इंजन के भीतर कार्बन जमा होने में कमी जैसी विशेषताएं देखने को मिल सकती हैं। हालांकि इसका वास्तविक लाभ उन्हीं वाहनों में मिलता है जिनके इंजन की डिजाइन इस प्रकार के ईंधन के अनुरूप होती है।

    XP100 सबसे प्रीमियम श्रेणी का पेट्रोल माना जाता है। इसकी ऑक्टेन रेटिंग 100 RON होती है और इसमें इथेनॉल का मिश्रण नहीं किया जाता। यह मुख्य रूप से हाई-परफॉर्मेंस स्पोर्ट्स कारों, सुपरकारों और सुपरबाइक्स के लिए तैयार किया गया ईंधन है। इसमें विशेष एडिटिव्स मिलाए जाते हैं जो इंजन को साफ रखने, कार्बन जमाव कम करने और अधिकतम प्रदर्शन बनाए रखने में मदद करते हैं। इसकी कीमत सामान्य पेट्रोल की तुलना में काफी अधिक होती है, इसलिए इसका उपयोग केवल उन वाहनों में व्यावहारिक माना जाता है जिन्हें वास्तव में इतने उच्च ऑक्टेन ईंधन की आवश्यकता होती है।

    ऑटोमोबाइल विशेषज्ञों का मानना है कि यदि किसी सामान्य कार या बाइक के निर्माता ने 91 RON ईंधन की सिफारिश की है, तो केवल अधिक महंगा पेट्रोल भरवाने से इंजन की शक्ति या माइलेज में उल्लेखनीय सुधार नहीं होता। वहीं जिन वाहनों के लिए 95 RON या उससे अधिक ऑक्टेन वाला ईंधन निर्धारित किया गया है, उनमें XP95 या XP100 बेहतर परिणाम दे सकते हैं। इसलिए ईंधन का चुनाव हमेशा वाहन के इंजन की जरूरत, निर्माता की सलाह और वास्तविक उपयोग के आधार पर करना चाहिए। सही पेट्रोल का चयन न केवल इंजन की कार्यक्षमता बनाए रखता है, बल्कि लंबे समय तक वाहन की विश्वसनीयता और प्रदर्शन को भी बेहतर बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

  • कच्चा तेल 71 डॉलर के करीब, फिर भी नहीं मिली राहत; जानिए 6 जुलाई को आपके शहर में पेट्रोल-डीजल के ताजा दाम और कीमतें घटने की पूरी तस्वीर

    कच्चा तेल 71 डॉलर के करीब, फिर भी नहीं मिली राहत; जानिए 6 जुलाई को आपके शहर में पेट्रोल-डीजल के ताजा दाम और कीमतें घटने की पूरी तस्वीर


    नई दिल्ली।
    अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार नरमी आने के बावजूद देश में पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में फिलहाल कोई बदलाव नहीं किया गया है। सोमवार 6 जुलाई को भी सरकारी तेल कंपनियों ने ईंधन के दाम स्थिर रखे हैं। इससे वाहन चालकों को बढ़ोतरी से राहत तो मिली है, लेकिन सस्ते कच्चे तेल का सीधा लाभ अभी उपभोक्ताओं तक नहीं पहुंच पाया है। पिछले कई दिनों से पेट्रोल और डीजल की कीमतें एक ही स्तर पर बनी हुई हैं और बाजार की नजर अब आगे होने वाले संभावित बदलाव पर टिकी है।

    अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में हाल के दिनों में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई है। उत्पादन बढ़ाने के फैसलों और वैश्विक आपूर्ति में सुधार की उम्मीद के चलते ब्रेंट और डब्ल्यूटीआई दोनों प्रमुख बेंचमार्क नीचे आए हैं। इससे यह उम्मीद जगी कि भारत में भी पेट्रोल और डीजल की कीमतों में राहत मिल सकती है। हालांकि घरेलू स्तर पर फिलहाल कीमतों में किसी प्रकार की कटौती नहीं की गई है।

    राजधानी दिल्ली में पेट्रोल 102.12 रुपये और डीजल 95.20 रुपये प्रति लीटर पर उपलब्ध है। मुंबई में पेट्रोल 111.21 रुपये और डीजल 97.83 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है। कोलकाता में पेट्रोल 113.51 रुपये तथा डीजल 99.82 रुपये प्रति लीटर है। चेन्नई में पेट्रोल 107.76 रुपये और डीजल 99.55 रुपये प्रति लीटर के भाव पर मिल रहा है। इसके अलावा नोएडा, गुरुग्राम, लखनऊ, जयपुर, पटना, बेंगलुरु, हैदराबाद और चंडीगढ़ सहित अन्य शहरों में भी निर्धारित दरों पर ईंधन की बिक्री जारी है।

    सरकार का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में आई हालिया गिरावट का असर घरेलू कीमतों पर तुरंत दिखाई देना संभव नहीं है। इसकी प्रमुख वजह यह है कि तेल कंपनियां अभी भी कुछ समय पहले ऊंची कीमतों पर खरीदे गए कच्चे तेल को रिफाइन कर रही हैं। इसके अलावा परिवहन, बीमा और अन्य परिचालन लागत भी ईंधन की अंतिम कीमत तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। ऐसे में कच्चे तेल के सस्ता होने का लाभ उपभोक्ताओं तक पहुंचने में कुछ समय लग सकता है।

    सरकार का यह भी मानना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक मौजूदा स्तर पर बनी रहती हैं या और नीचे आती हैं, तभी पेट्रोल और डीजल की कीमतों की समीक्षा की जा सकती है। फिलहाल तेल कंपनियां पूर्व में हुए अतिरिक्त खर्च और लागत की भरपाई करने की प्रक्रिया में हैं, इसलिए तत्काल राहत की संभावना सीमित मानी जा रही है।

    गौरतलब है कि मई 2026 के दौरान पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कई चरणों में बढ़ोतरी की गई थी। उसके बाद से अब तक किसी प्रकार का संशोधन नहीं हुआ है। यही कारण है कि उपभोक्ता अब अंतरराष्ट्रीय बाजार में आई गिरावट के बाद घरेलू कीमतों में कटौती की उम्मीद लगाए हुए हैं।

    जो उपभोक्ता अपने शहर के ताजा पेट्रोल और डीजल के दाम जानना चाहते हैं, वे संबंधित तेल कंपनियों की आधिकारिक डिजिटल सेवाओं या एसएमएस सुविधा के माध्यम से रोजाना अपडेट प्राप्त कर सकते हैं। चूंकि विभिन्न राज्यों में लगने वाले वैट और स्थानीय कर अलग-अलग होते हैं, इसलिए शहरों के अनुसार ईंधन की कीमतों में अंतर देखने को मिलता है। फिलहाल देशभर में कीमतें स्थिर हैं, जबकि बाजार की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की मौजूदा नरमी घरेलू ईंधन दरों में राहत का रास्ता कब खोलती है।

  • OPEC+ ने बढ़ाया तेल उत्पादन, अब सबसे बड़ा सवाल खरीदारों का; भारत-चीन की मांग पर टिकी वैश्विक बाजार की दिशा

    OPEC+ ने बढ़ाया तेल उत्पादन, अब सबसे बड़ा सवाल खरीदारों का; भारत-चीन की मांग पर टिकी वैश्विक बाजार की दिशा


    नई दिल्ली ।
    वैश्विक ऊर्जा बाजार एक बार फिर महत्वपूर्ण मोड़ पर पहुंच गया है। OPEC+ देशों ने अगस्त से कच्चे तेल के उत्पादन में बढ़ोतरी का फैसला लेकर यह संकेत दिया है कि आने वाले महीनों में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की उपलब्धता और बढ़ सकती है। हालांकि उत्पादन बढ़ाने के इस निर्णय के साथ सबसे बड़ा सवाल यह खड़ा हो गया है कि अतिरिक्त तेल की खपत आखिर कौन करेगा और क्या वैश्विक मांग इतनी मजबूत है कि बढ़ी हुई सप्लाई को आसानी से समाहित किया जा सके।

    OPEC+ के प्रमुख सदस्य देशों ने अगस्त से प्रतिदिन लगभग 1.88 लाख बैरल अतिरिक्त उत्पादन पर सहमति बनाई है। अप्रैल से शुरू हुई उत्पादन वृद्धि को मिलाकर अब कुल बढ़ोतरी करीब आठ लाख बैरल प्रतिदिन तक पहुंच चुकी है। इस कदम का उद्देश्य वैश्विक बाजार में पर्याप्त आपूर्ति बनाए रखना और ऊर्जा बाजार को स्थिरता देना माना जा रहा है।

    उत्पादन बढ़ाने की योजना की सफलता काफी हद तक पश्चिम एशिया की भू-राजनीतिक परिस्थितियों पर भी निर्भर करेगी। विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक तेल व्यापार का सबसे अहम समुद्री मार्ग माना जाता है। हाल के महीनों में क्षेत्रीय तनाव के कारण इस मार्ग से तेल परिवहन प्रभावित हुआ था, जिससे निर्यात में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई। हालांकि हालात में धीरे-धीरे सुधार के संकेत मिल रहे हैं और यदि यह मार्ग पूरी तरह सामान्य बना रहता है तो तेल निर्यात भी पहले की तुलना में तेज हो सकता है।

    बाजार में बढ़ती सप्लाई की संभावना का असर अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों पर भी दिखाई दे रहा है। हाल के सप्ताहों में ब्रेंट क्रूड की कीमतों में नरमी आई है और दरें युद्ध-पूर्व स्तर के आसपास पहुंच गई हैं। इससे संकेत मिलता है कि निवेशकों को भविष्य में पर्याप्त आपूर्ति मिलने का भरोसा है। यदि आने वाले समय में अतिरिक्त उत्पादन लगातार बाजार में पहुंचता है तो कीमतों पर दबाव बना रह सकता है।

    अब सबसे अधिक ध्यान दुनिया के दो बड़े तेल आयातक देशों भारत और चीन पर है। चीन लंबे समय से अपनी खरीद रणनीति के लिए जाना जाता है। जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होता है तो वहां आयात की गति धीमी कर दी जाती है, जबकि कीमतों में गिरावट आने पर बड़े पैमाने पर खरीद कर रणनीतिक भंडार बढ़ाया जाता है। हाल के महीनों में चीन का आयात अपेक्षाकृत कमजोर रहा है, लेकिन यदि कीमतें कम बनी रहती हैं तो उसकी रिफाइनरियां दोबारा सक्रिय होकर खरीद बढ़ा सकती हैं।

    भारत के लिए भी यह फैसला राहत देने वाला माना जा रहा है। देश अपनी कुल कच्चे तेल की आवश्यकता का लगभग 90 प्रतिशत आयात के जरिए पूरा करता है। ऐसे में वैश्विक बाजार में सप्लाई बढ़ने और कीमतों में नरमी आने से आयात लागत कम हो सकती है। इससे पेट्रोलियम कंपनियों के खर्च पर सकारात्मक असर पड़ सकता है और ऊर्जा सुरक्षा को भी मजबूती मिल सकती है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले महीनों में तेल बाजार की दिशा केवल उत्पादन बढ़ने से तय नहीं होगी, बल्कि वास्तविक मांग, वैश्विक आर्थिक गतिविधियों, समुद्री व्यापार की स्थिति और प्रमुख आयातक देशों की खरीद रणनीति भी अहम भूमिका निभाएगी। यदि भारत और चीन अपेक्षित स्तर पर खरीद बढ़ाते हैं तो अतिरिक्त उत्पादन को आसानी से बाजार मिल सकता है। वहीं मांग कमजोर रहने की स्थिति में वैश्विक तेल बाजार में अधिक आपूर्ति का दबाव बढ़ सकता है, जिससे कीमतों में और नरमी देखने को मिल सकती है।

  • बाजार में लौटा निवेशकों का भरोसा, चौथे दिन भी जारी रही तेजी; बैंकिंग सेक्टर की मजबूती से सेंसेक्स और निफ्टी में शानदार उछाल

    बाजार में लौटा निवेशकों का भरोसा, चौथे दिन भी जारी रही तेजी; बैंकिंग सेक्टर की मजबूती से सेंसेक्स और निफ्टी में शानदार उछाल

    नई दिल्ली । घरेलू शेयर बाजार में सप्ताह के पहले कारोबारी दिन भी सकारात्मक रुख देखने को मिला। लगातार चौथे सत्र में बाजार ने मजबूती के साथ शुरुआत की, जिससे निवेशकों का विश्वास और मजबूत होता नजर आया। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 300 अंकों से अधिक की बढ़त के साथ कारोबार करता दिखा, जबकि निफ्टी 24,350 के स्तर के पार पहुंच गया। बाजार की इस तेजी में सबसे बड़ा योगदान बैंकिंग शेयरों का रहा, जहां निजी और सार्वजनिक क्षेत्र के कई प्रमुख बैंकों में अच्छी खरीदारी देखने को मिली।

    कारोबार की शुरुआत से ही निवेशकों का रुझान मजबूत बना रहा। बेहतर मानसून की संभावनाओं, घरेलू आर्थिक गतिविधियों में सुधार और विदेशी निवेशकों की बढ़ती दिलचस्पी ने बाजार के माहौल को सकारात्मक बनाए रखा। शुरुआती सत्र में प्रमुख सूचकांकों में बढ़त दर्ज होने से यह संकेत मिला कि निवेशकों का भरोसा अभी भी मजबूत बना हुआ है।

    बैंकिंग सेक्टर ने बाजार की तेजी में अहम भूमिका निभाई। कई प्रमुख निजी बैंकों के शेयरों में उल्लेखनीय खरीदारी देखने को मिली, जिससे बैंकिंग सूचकांक में अच्छी मजबूती आई। वित्तीय क्षेत्र के अलावा रक्षा, दूरसंचार, इंफ्रास्ट्रक्चर और सार्वजनिक क्षेत्र की कुछ कंपनियों के शेयरों में भी निवेशकों की दिलचस्पी बनी रही। इन क्षेत्रों में आई मजबूती ने बाजार को ऊंचे स्तर पर बनाए रखने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

    हालांकि सभी क्षेत्रों में तेजी का माहौल नहीं रहा। सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र के कुछ प्रमुख शेयरों में मुनाफावसूली देखने को मिली, जिससे आईटी सूचकांक पर दबाव बना। इसके अलावा कुछ ऑटो, पेंट और एविएशन कंपनियों के शेयर भी शुरुआती कारोबार में कमजोरी के साथ कारोबार करते दिखाई दिए। इसके बावजूद बाजार की समग्र दिशा सकारात्मक बनी रही और प्रमुख सूचकांक बढ़त के साथ कारोबार करते रहे।

    व्यापक बाजार में भी सकारात्मक संकेत देखने को मिले। मिडकैप और स्मॉलकैप कंपनियों के शेयरों में सीमित लेकिन स्थिर बढ़त दर्ज की गई। इससे यह स्पष्ट हुआ कि केवल बड़ी कंपनियों तक ही खरीदारी सीमित नहीं रही, बल्कि निवेशकों ने मध्यम और छोटी कंपनियों में भी निवेश करना जारी रखा। व्यापक भागीदारी को बाजार की मजबूती का महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है।

    विदेशी मुद्रा बाजार में भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले लगभग स्थिर स्तर पर खुला। मुद्रा बाजार में बड़े उतार-चढ़ाव की अनुपस्थिति ने भी निवेशकों को राहत दी। वहीं अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में नरमी देखने को मिली, जिसे आयात पर निर्भर भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। ऊर्जा लागत में कमी का प्रभाव आने वाले समय में कई उद्योगों के परिचालन खर्च पर भी पड़ सकता है।

    विश्लेषकों का मानना है कि यदि वैश्विक संकेत अनुकूल बने रहते हैं और विदेशी निवेशकों का निवेश जारी रहता है, तो घरेलू शेयर बाजार में सकारात्मक रुख आगे भी कायम रह सकता है। हालांकि निवेशकों को वैश्विक आर्थिक घटनाक्रम, केंद्रीय बैंकों की नीतियों और कंपनियों के आगामी तिमाही नतीजों पर भी नजर बनाए रखनी होगी।

    लगातार चौथे दिन दर्ज हुई यह तेजी इस बात का संकेत है कि बाजार में फिलहाल निवेशकों का भरोसा मजबूत बना हुआ है। आने वाले कारोबारी सत्रों में आर्थिक आंकड़ों, वैश्विक संकेतों और कॉरपोरेट प्रदर्शन के आधार पर बाजार की आगे की दिशा तय होगी, लेकिन फिलहाल शुरुआती रुझान निवेशकों के लिए उत्साहजनक माना जा रहा है।

  • रतन टाटा की भतीजी माया टाटा को मिली बड़ी जिम्मेदारी, वेस्टसाइड के ग्लोबल विस्तार की कमान संभालेंगी

    रतन टाटा की भतीजी माया टाटा को मिली बड़ी जिम्मेदारी, वेस्टसाइड के ग्लोबल विस्तार की कमान संभालेंगी


    नई दिल्ली । टाटा समूह में नई पीढ़ी की भूमिका लगातार मजबूत होती जा रही है। इसी क्रम में रतन टाटा की भतीजी और टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा की बेटी माया टाटा को एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिलने जा रही है। रिपोर्टों के अनुसार माया अब ट्रेंट लिमिटेड के प्रमुख रिटेल ब्रांड वेस्टसाइड के ओवरसीज ई कॉमर्स और अंतरराष्ट्रीय मार्केटिंग विस्तार का नेतृत्व करेंगी। यह जिम्मेदारी ऐसे समय दी जा रही है जब कंपनी घरेलू बाजार के साथ विदेशों में भी अपनी मजबूत मौजूदगी बनाने की रणनीति पर तेजी से काम कर रही है।

    माया टाटा इससे पहले टाटा डिजिटल में अहम भूमिका निभा चुकी हैं और डिजिटल रिटेल तथा ऑनलाइन बिजनेस से जुड़ा अनुभव रखती हैं। माना जा रहा है कि अब उनका मुख्य फोकस वेस्टसाइड के ऑनलाइन कारोबार को वैश्विक स्तर पर विस्तार देने और नए बाजारों में ब्रांड की पहुंच बढ़ाने पर रहेगा। कंपनी अपने डिजिटल प्लेटफॉर्म को मजबूत करने के साथ ऑफलाइन स्टोर नेटवर्क का भी तेजी से विस्तार कर रही है।

    ट्रेंट लिमिटेड के लिए वेस्टसाइड सबसे अहम ब्रांड माना जाता है और कंपनी की आय का बड़ा हिस्सा इसी से आता है। हाल के वर्षों में ट्रेंट ने अपने विस्तार की रफ्तार तेज की है। कंपनी ने हाल ही में संयुक्त अरब अमीरात में नया स्टोर शुरू किया है और हर साल करीब 50 नए वेस्टसाइड स्टोर खोलने का लक्ष्य रखा है। वित्त वर्ष 2026 में कंपनी ने 53 नए स्टोर शुरू किए जबकि उसका कुल रिटेल नेटवर्क बढ़कर 321 शहरों में 1286 स्टोर तक पहुंच गया। बीते वित्त वर्ष में कंपनी का कुल राजस्व लगभग 19700 करोड़ रुपये दर्ज किया गया।

    माया टाटा ने अपनी पढ़ाई यूनाइटेड किंगडम से की है जहां उन्होंने बिजनेस और फाइनेंस की शिक्षा हासिल की। करियर की शुरुआत उन्होंने टाटा कैपिटल के टाटा अपॉर्च्युनिटीज फंड से की और बाद में टाटा डिजिटल का हिस्सा बनीं। वहां उन्होंने डिजिटल रिटेल और उपभोक्ता कारोबार से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स पर काम किया।

    माया टाटा लंबे समय तक सार्वजनिक जीवन और मीडिया की सुर्खियों से दूर रही हैं। पहली बार वह उस समय चर्चा में आईं जब अपने पिता नोएल टाटा के साथ जमशेदपुर में टाटा समूह के स्थापना दिवस समारोह में दिखाई दीं। इसके बाद से समूह में उनकी भविष्य की भूमिका को लेकर लगातार अटकलें लगाई जाती रही हैं।

    माया टाटा का संबंध केवल टाटा परिवार ही नहीं बल्कि मिस्त्री परिवार से भी है। उनकी मां आलू मिस्त्री उद्योगपति पालोनजी मिस्त्री की बेटी हैं। इस तरह माया दो प्रमुख कारोबारी परिवारों की विरासत से जुड़ी हुई हैं। वहीं उनकी दादी सिमोन टाटा ने लैक्मे जैसे प्रतिष्ठित ब्रांड को नई पहचान दिलाने के साथ ट्रेंट के विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

    विशेषज्ञों का मानना है कि माया टाटा की नई जिम्मेदारी केवल एक प्रबंधन बदलाव नहीं बल्कि टाटा समूह की अगली पीढ़ी को वैश्विक नेतृत्व देने की रणनीति का अहम हिस्सा है। आने वाले वर्षों में वेस्टसाइड के अंतरराष्ट्रीय विस्तार और डिजिटल कारोबार को नई दिशा देने में उनकी भूमिका बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

  • कच्चा तेल 60 डॉलर तक गिरने का अनुमान, पेट्रोल-डीजल के सस्ते होने की उम्मीद, जानें आज के ताजा रेट

    कच्चा तेल 60 डॉलर तक गिरने का अनुमान, पेट्रोल-डीजल के सस्ते होने की उम्मीद, जानें आज के ताजा रेट


    नई दिल्ली। वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बीच पेट्रोल-डीजल की कीमतों को लेकर राहत की उम्मीदें बढ़ी हैं। ऑयल मार्केटिंग कंपनियों इंडियन ऑयल, HPCL और भारत पेट्रोलियम ने 6 जुलाई की सुबह 6 बजे नए रेट जारी किए, जिनमें पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। इसी तरह सीएनजी के दाम भी स्थिर बने हुए हैं।

    अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड 0.55% की गिरावट के साथ 71.72 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में कीमतों में और गिरावट संभव है। सिटीग्रुप इंक ने अनुमान जताया है कि साल के अंत तक कच्चा तेल 60 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकता है, जिससे ईंधन की कीमतों में राहत मिल सकती है।

    वैश्विक स्तर पर तेल बाजार में उतार-चढ़ाव के पीछे कई कारण बताए जा रहे हैं। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, ओपेक देशों ने अगले महीने के लिए उत्पादन कोटे में मामूली बढ़ोतरी को मंजूरी दी है। सऊदी अरब और रूस के नेतृत्व में सात देशों ने मिलकर उत्पादन में 1,88,000 बैरल प्रति दिन की वृद्धि पर सहमति जताई है।

    दूसरी ओर, कच्चे तेल की कीमतों में दूसरी तिमाही के दौरान लगभग 30% की गिरावट दर्ज की गई है। बताया जा रहा है कि वॉशिंगटन और तेहरान के बीच एक अंतरिम शांति समझौते के बाद होर्मुज स्ट्रेट से तेल परिवहन फिर से शुरू होने का रास्ता साफ हुआ है, हालांकि स्थिति अभी पूरी तरह सामान्य नहीं हुई है।

    पेट्रोल-डीजल के ताज़ा रेट (6 जुलाई)
    सरकारी पंपों पर ईंधन की कीमतों में कोई बदलाव नहीं हुआ है।
    दिल्ली: पेट्रोल ₹102.12, डीजल ₹95.20
    लखनऊ: पेट्रोल ₹102.05, डीजल ₹99.28
    अयोध्या: पेट्रोल ₹102.04, डीजल ₹99.27
    भोपाल: पेट्रोल ₹114.65, डीजल ₹99.74
    इंदौर: पेट्रोल ₹114.61, डीजल ₹99.70
    कोलकाता: पेट्रोल ₹113.51, डीजल ₹99.82
    पटना: पेट्रोल ₹112.70, डीजल ₹99.87

    CNG के रेट भी स्थिर
    CNG की कीमतों में भी कोई बदलाव नहीं हुआ है। IGL के अनुसार दिल्ली-एनसीआर में CNG ₹83.09 प्रति किलोग्राम पर स्थिर रही। गुरुग्राम में यह ₹88.12, नोएडा और गाजियाबाद में ₹91.70 प्रति किलोग्राम पर बनी हुई है।

    अन्य शहरों में भी रेट लगभग स्थिर रहे—
    मुजफ्फरनगर, मेरठ, शामली: ₹91.58
    रेवाड़ी: ₹87.70
    करनाल: ₹87.43
    कैथल: ₹88.43
    कानपुर, हमीरपुर, फतेहपुर: ₹94.42
    अजमेर, पाली, राजसमंद: ₹92.44
    महोबा, बांदा, चित्रकूट: ₹89.42
    हापुड़: ₹92.70
    ग्रेटर नोएडा: ₹91.70

    विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की गिरावट जारी रहती है, तो आने वाले समय में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में भी कमी देखने को मिल सकती है।