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  • रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस केस में सीबीआई का बड़ा एक्शन पहली चार्जशीट में दो कंपनियां और पांच पूर्व अधिकारी नामजद

    रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस केस में सीबीआई का बड़ा एक्शन पहली चार्जशीट में दो कंपनियां और पांच पूर्व अधिकारी नामजद

    नई दिल्ली । देश के चर्चित बैंक धोखाधड़ी मामलों में शामिल रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस लिमिटेड से जुड़े 4097 करोड़ रुपए के मामले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो यानी सीबीआई ने बड़ी कार्रवाई करते हुए पहली चार्जशीट दाखिल कर दी है। विशेष सीबीआई अदालत में पेश किए गए आरोप पत्र में रिलायंस समूह की दो कंपनियों सहित कुल सात आरोपियों को नामजद किया गया है। जांच एजेंसी का आरोप है कि सुनियोजित साजिश के तहत सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को हजारों करोड़ रुपए का वित्तीय नुकसान पहुंचाया गया जबकि संबंधित कंपनियों और आरोपियों को अनुचित लाभ मिला।

    सीबीआई की चार्जशीट में रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड और रिलायंस होम फाइनेंस लिमिटेड के अलावा रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस लिमिटेड के पांच पूर्व वरिष्ठ अधिकारियों के नाम शामिल किए गए हैं। इनमें तत्कालीन निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी देवांग प्रवीण मोदी निदेशक रविंद्र सोमयाजुला राव धनंजय भगवानप्रसाद तिवारी एग्जीक्यूटिव रिस्क ऑफिसर राजेश कृष्णमूर्ति और चीफ रिस्क ऑफिसर लव चतुर्वेदी शामिल हैं। सभी पर आपराधिक साजिश रचने धोखाधड़ी करने और सरकारी बैंकों को भारी नुकसान पहुंचाने के आरोप लगाए गए हैं।

    जांच एजेंसी के अनुसार रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस लिमिटेड ने बैंकों से प्राप्त ऋण राशि का उपयोग निर्धारित शर्तों के अनुरूप नहीं किया। आरोप है कि यह धनराशि विभिन्न मध्यस्थ और शेल कंपनियों के माध्यम से रिलायंस एडीए समूह की अन्य कंपनियों में स्थानांतरित कर दी गई। इस पूरी प्रक्रिया से बैंकिंग नियमों का उल्लंघन हुआ और सरकारी बैंकों को 4097 करोड़ रुपए का नुकसान उठाना पड़ा।

    सीबीआई ने बताया कि यह मामला बैंक ऑफ महाराष्ट्र सहित अन्य सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की शिकायतों के आधार पर दर्ज किया गया था। जांच में सामने आया कि कुल 13 सरकारी बैंकों के बैंकिंग कंसोर्टियम को इस कथित वित्तीय अनियमितता के कारण भारी नुकसान हुआ। एजेंसी अब इस पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस कथित साजिश में और कौन कौन शामिल था।

    मामले की जांच के दौरान सीबीआई अब तक तीन आरोपियों को गिरफ्तार भी कर चुकी है। इनमें रिलायंस कैपिटल लिमिटेड के पूर्व उपाध्यक्ष अमिताभ झुनझुनवाला रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस के पूर्व मुख्य कार्यकारी अधिकारी देवांग मोदी तथा रिलायंस कैपिटल के पूर्व मुख्य वित्त अधिकारी अमित बापना शामिल हैं। वर्तमान में अमिताभ झुनझुनवाला और देवांग मोदी न्यायिक हिरासत में हैं जबकि अमित बापना सीबीआई की हिरासत में हैं।

    जांच एजेंसी ने यह भी स्पष्ट किया है कि यह केवल पहली चार्जशीट है और जांच अभी जारी है। आने वाले समय में अन्य निदेशकों कंपनियों और संभावित सार्वजनिक अधिकारियों की भूमिका की भी जांच की जाएगी। यदि नए साक्ष्य सामने आते हैं तो पूरक चार्जशीट भी दाखिल की जाएगी।

    सीबीआई के अनुसार रिलायंस कम्युनिकेशंस रिलायंस होम फाइनेंस रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस और रिलायंस टेलीकॉम लिमिटेड से जुड़े मामलों में विभिन्न सरकारी बैंकों और भारतीय जीवन बीमा निगम की शिकायतों पर कुल सात एफआईआर दर्ज की गई हैं। इससे पहले मई महीने में रिलायंस कम्युनिकेशंस से जुड़े मामले में भी पहली चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है। एजेंसी का कहना है कि इन सभी मामलों की निष्पक्ष व्यापक और त्वरित जांच की जा रही है तथा पूरी प्रक्रिया पर सर्वोच्च न्यायालय की निगरानी बनी हुई है।

  • ई-25 पेट्रोल पर अटकलों पर केंद्र का विराम, सरकार ने कहा- फिलहाल ई-20 से आगे बढ़ाने का कोई फैसला नहीं; वैज्ञानिक परीक्षण के बाद ही होगा अगला कदम

    ई-25 पेट्रोल पर अटकलों पर केंद्र का विराम, सरकार ने कहा- फिलहाल ई-20 से आगे बढ़ाने का कोई फैसला नहीं; वैज्ञानिक परीक्षण के बाद ही होगा अगला कदम

    नई दिल्ली । देश में एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच केंद्र सरकार ने ई-25 पेट्रोल को जल्द लागू किए जाने संबंधी खबरों का खंडन किया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल ई-20 से अधिक एथेनॉल मिश्रण लागू करने का कोई निर्णय नहीं लिया गया है। अधिकारियों के अनुसार भविष्य में यदि इस दिशा में कोई कदम उठाया जाता है तो वह केवल व्यापक वैज्ञानिक परीक्षण, तकनीकी मूल्यांकन और सुरक्षा मानकों की पुष्टि के बाद ही किया जाएगा।

    सरकार का यह स्पष्टीकरण ऐसे समय आया है जब सोशल मीडिया और विभिन्न मंचों पर अधिक एथेनॉल मिश्रण वाले ईंधन को लेकर कई तरह की आशंकाएं व्यक्त की जा रही थीं। इनमें वाहनों के प्रदर्शन, इंजन की कार्यक्षमता और माइलेज पर संभावित प्रभाव को लेकर कई दावे सामने आए थे। सरकार ने कहा कि वर्तमान में उपयोग किया जा रहा ई-20 पेट्रोल लंबे समय तक परीक्षण और मूल्यांकन के बाद ही चरणबद्ध तरीके से लागू किया गया है, इसलिए उपभोक्ताओं को किसी प्रकार की चिंता करने की आवश्यकता नहीं है।

    सरकारी जानकारी के अनुसार देश में करोड़ों दोपहिया और लाखों पेट्रोल आधारित चारपहिया वाहन पहले से एथेनॉल मिश्रित ईंधन का उपयोग कर रहे हैं। एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम को धीरे-धीरे लागू किया गया ताकि वाहन निर्माता कंपनियां, ईंधन आपूर्ति व्यवस्था और उपभोक्ता सभी इसके अनुरूप स्वयं को तैयार कर सकें। सरकार का कहना है कि यह कार्यक्रम अंतरराष्ट्रीय अनुभवों और वैज्ञानिक मानकों को ध्यान में रखकर आगे बढ़ाया गया है।

    हाल ही में सरकार ने एथेनॉल मिश्रण से जुड़े कई प्रमुख बिंदुओं पर विस्तृत स्पष्टीकरण भी जारी किया था। इसमें कहा गया कि ई-20 पेट्रोल किसी प्रयोगात्मक ईंधन की श्रेणी में नहीं आता, बल्कि इसके पीछे व्यापक वैज्ञानिक अध्ययन, सुरक्षा परीक्षण और नियामकीय मानकों का पालन किया गया है। सरकार के अनुसार दुनिया के अनेक देशों में दशकों से एथेनॉल मिश्रित ईंधन का सफलतापूर्वक उपयोग किया जा रहा है और भारत ने भी उसी अनुभव के आधार पर अपनी नीति तैयार की है।

    सरकार ने एथेनॉल उत्पादन में अत्यधिक पानी की खपत संबंधी दावों को भी भ्रामक बताया है। अधिकारियों के अनुसार आधुनिक एथेनॉल डिस्टिलरी में एक लीटर एथेनॉल तैयार करने के लिए सीमित मात्रा में प्रोसेस्ड पानी की आवश्यकता होती है तथा अधिकांश इकाइयों में जीरो लिक्विड डिस्चार्ज जैसी आधुनिक तकनीक अपनाई जा रही है। इससे पानी का पुनर्चक्रण संभव हो रहा है और जल संसाधनों पर दबाव कम पड़ता है।

    सरकार का यह भी कहना है कि एथेनॉल उत्पादन के लिए अब केवल अतिरिक्त खाद्यान्न पर निर्भरता नहीं है। मक्का आधारित एथेनॉल उत्पादन में लगातार वृद्धि हुई है और वर्तमान आपूर्ति का बड़ा हिस्सा इसी स्रोत से आ रहा है। मक्का की खेती में अपेक्षाकृत कम सिंचाई की आवश्यकता होती है, जिससे जल संरक्षण को भी बढ़ावा मिलता है। किसानों को इस दिशा में प्रोत्साहित करने के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य सहित अन्य नीतिगत कदम भी उठाए गए हैं।

    विशेषज्ञों का मानना है कि एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम का उद्देश्य केवल पेट्रोलियम आयात पर निर्भरता कम करना ही नहीं, बल्कि स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देना, किसानों की आय बढ़ाना और ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करना भी है। सरकार ने दोहराया है कि ईंधन नीति से जुड़ा हर अगला निर्णय वैज्ञानिक प्रमाण, तकनीकी परीक्षण और सार्वजनिक हित को ध्यान में रखते हुए ही लिया जाएगा। फिलहाल देश में ई-20 कार्यक्रम निर्धारित नीति के अनुसार जारी रहेगा और ई-25 को लेकर कोई तत्काल योजना नहीं है।

  • रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस बैंक धोखाधड़ी मामले में सीबीआई की बड़ी कार्रवाई, पहली चार्जशीट दाखिल; दो कंपनियों समेत सात आरोपी नामजद

    रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस बैंक धोखाधड़ी मामले में सीबीआई की बड़ी कार्रवाई, पहली चार्जशीट दाखिल; दो कंपनियों समेत सात आरोपी नामजद

    नई दिल्ली । रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस लिमिटेड से जुड़े कथित बैंक धोखाधड़ी मामले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो ने जांच को आगे बढ़ाते हुए पहली चार्जशीट विशेष अदालत में दाखिल कर दी है। इस आरोपपत्र में दो रिलायंस समूह की कंपनियों सहित कुल सात आरोपियों को नामजद किया गया है। जांच एजेंसी का आरोप है कि इस मामले में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को हजारों करोड़ रुपये का वित्तीय नुकसान हुआ, जबकि संबंधित कंपनियों और कुछ अधिकारियों को अनुचित लाभ पहुंचाया गया। मामले की जांच अभी भी जारी है और आगे पूरक आरोपपत्र दाखिल किए जाने की संभावना जताई गई है।

    जांच एजेंसी के अनुसार आरोपपत्र में रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड, रिलायंस होम फाइनेंस लिमिटेड तथा रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस लिमिटेड के पांच पूर्व वरिष्ठ अधिकारियों के नाम शामिल किए गए हैं। इनमें तत्कालीन निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी, निदेशक तथा जोखिम प्रबंधन से जुड़े वरिष्ठ पदों पर कार्यरत अधिकारी शामिल हैं। सीबीआई ने सभी आरोपियों पर आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को वित्तीय नुकसान पहुंचाने से संबंधित आरोप लगाए हैं।

    जांच में यह आरोप सामने आया है कि बैंकों से प्राप्त ऋण राशि का उपयोग निर्धारित शर्तों के अनुरूप नहीं किया गया। एजेंसी का दावा है कि ऋण की राशि को विभिन्न मध्यस्थ और शेल कंपनियों के माध्यम से समूह की अन्य कंपनियों में स्थानांतरित किया गया। जांच के अनुसार इस पूरी प्रक्रिया के कारण ऋण देने वाले सरकारी बैंकों को भारी वित्तीय क्षति हुई और संबंधित पक्षों को अनुचित आर्थिक लाभ प्राप्त हुआ।

    यह मामला बैंक ऑफ महाराष्ट्र सहित सार्वजनिक क्षेत्र के कई बैंकों की शिकायतों के आधार पर दर्ज किया गया था। जांच एजेंसी के अनुसार बैंकिंग कंसोर्टियम से जुड़े 13 सरकारी बैंकों को कुल 4,097 करोड़ रुपये का कथित नुकसान हुआ है। इसी आधार पर विस्तृत जांच शुरू की गई, जिसके बाद पहली चार्जशीट अदालत में प्रस्तुत की गई है।

    सीबीआई ने स्पष्ट किया है कि जांच केवल वर्तमान आरोपियों तक सीमित नहीं है। एजेंसी अन्य निदेशकों, कंपनियों तथा संभावित रूप से जुड़े सार्वजनिक अधिकारियों की भूमिका की भी जांच कर रही है। जांच पूरी होने के बाद आवश्यकता पड़ने पर अतिरिक्त आरोपियों के खिलाफ पूरक चार्जशीट दाखिल की जाएगी। एजेंसी का कहना है कि पूरे मामले की हर कड़ी की गहन जांच की जा रही है।

    इस मामले में अब तक तीन लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। इनमें रिलायंस कैपिटल लिमिटेड के पूर्व उपाध्यक्ष अमिताभ झुनझुनवाला, रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस लिमिटेड के पूर्व मुख्य कार्यकारी अधिकारी देवांग मोदी तथा रिलायंस कैपिटल के पूर्व मुख्य वित्त अधिकारी अमित बापना शामिल हैं। वर्तमान में दो आरोपी न्यायिक हिरासत में हैं, जबकि एक आरोपी जांच एजेंसी की हिरासत में है।

    सीबीआई के अनुसार रिलायंस समूह की विभिन्न कंपनियों से जुड़े मामलों में अब तक कई प्राथमिकी दर्ज की जा चुकी हैं। इनमें रिलायंस कम्युनिकेशंस, रिलायंस होम फाइनेंस, रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस और रिलायंस टेलीकॉम से संबंधित मामले शामिल हैं। इन मामलों में विभिन्न सरकारी बैंकों और भारतीय जीवन बीमा निगम की शिकायतों के आधार पर जांच आगे बढ़ाई जा रही है।

    जांच एजेंसी ने यह भी बताया कि इससे पहले रिलायंस कम्युनिकेशंस से जुड़े मामले में भी आरोपपत्र दाखिल किया जा चुका है। मौजूदा कार्रवाई उसी श्रृंखला का अगला महत्वपूर्ण चरण मानी जा रही है। एजेंसी का कहना है कि सभी मामलों की निष्पक्ष, व्यापक और समयबद्ध जांच जारी है तथा आगे मिलने वाले साक्ष्यों के आधार पर आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

  • वैश्विक सप्लाई चेन के नए दौर में भारत की मजबूत छलांग, मैन्युफैक्चरिंग हब बनने की दिशा में तेज हुई रफ्तार; निवेश और उत्पादन में बढ़त के संकेत

    वैश्विक सप्लाई चेन के नए दौर में भारत की मजबूत छलांग, मैन्युफैक्चरिंग हब बनने की दिशा में तेज हुई रफ्तार; निवेश और उत्पादन में बढ़त के संकेत

    नई दिल्ली । वैश्विक सप्लाई चेन में लगातार हो रहे बदलाव के बीच भारत दुनिया के प्रमुख विनिर्माण केंद्रों में अपनी स्थिति तेजी से मजबूत करता दिखाई दे रहा है। महामारी के बाद बदले अंतरराष्ट्रीय कारोबारी माहौल ने वैश्विक कंपनियों को उत्पादन और आपूर्ति व्यवस्था में विविधता लाने के लिए प्रेरित किया है। इसका सबसे बड़ा लाभ भारत को मिलता दिखाई दे रहा है, जहां निवेश, उत्पादन क्षमता और औद्योगिक गतिविधियों में लगातार विस्तार दर्ज किया जा रहा है। उद्योग जगत का मानना है कि आने वाले वर्षों में भारत वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग नेटवर्क का और भी महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकता है।

    हालिया आकलन के अनुसार कोविड-19 के बाद दुनिया भर की कंपनियों ने केवल एक देश पर निर्भर रहने की रणनीति से दूरी बनानी शुरू की है। इसके स्थान पर चीन+1, फ्रेंडशोरिंग और नियरशोरिंग जैसी रणनीतियों को अपनाया जा रहा है, जिससे सप्लाई चेन अधिक सुरक्षित, लचीली और जोखिमों से कम प्रभावित रहे। इस वैश्विक बदलाव ने भारत को नए निवेश और उत्पादन अवसर उपलब्ध कराए हैं।

    रिपोर्ट में दुनिया की प्रमुख विनिर्माण अर्थव्यवस्थाओं का विश्लेषण करते हुए बताया गया है कि महामारी के बाद भारत ने अपनी औसत विनिर्माण वृद्धि दर में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया है। महामारी-पूर्व अवधि की तुलना में हाल के वर्षों में उत्पादन वृद्धि तेज हुई है और भारत वैश्विक औसत से बेहतर प्रदर्शन करने वाले देशों की श्रेणी में शामिल हो गया है। इससे यह संकेत मिलता है कि भारतीय विनिर्माण क्षेत्र लगातार प्रतिस्पर्धी बन रहा है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की सफलता के पीछे कई संरचनात्मक कारण हैं। देश का विशाल घरेलू बाजार, तेजी से विकसित हो रहा बुनियादी ढांचा, लॉजिस्टिक्स नेटवर्क में सुधार, डिजिटल परिवर्तन और निवेश के अनुकूल नीतियों ने उद्योगों का भरोसा बढ़ाया है। इसके साथ ही वैश्विक कंपनियां उत्पादन इकाइयों के विस्तार के लिए भारत को एक भरोसेमंद विकल्प के रूप में देख रही हैं।

    औद्योगिक क्षेत्र को गति देने में सरकार की विभिन्न योजनाओं की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव योजना, औद्योगिक कॉरिडोर, पीएम गति शक्ति जैसी पहलों ने विनिर्माण क्षेत्र में निवेश आकर्षित करने के साथ उत्पादन क्षमता बढ़ाने का रास्ता तैयार किया है। इन पहलों के कारण कई क्षेत्रों में नई परियोजनाएं शुरू हुई हैं और रोजगार सृजन की संभावनाएं भी बढ़ी हैं।

    रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि वैश्विक प्रतिस्पर्धा में आगे बने रहने के लिए भारत को लॉजिस्टिक्स लागत कम करने, औद्योगिक आधारभूत ढांचे को और मजबूत बनाने तथा घरेलू सप्लायर नेटवर्क का विस्तार करने पर लगातार काम करना होगा। कारोबार करने में आसानी को बेहतर बनाना, नई तकनीकों को उद्योगों में तेजी से अपनाना और मुक्त व्यापार समझौतों का प्रभावी उपयोग भी भविष्य की विकास रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा माना गया है।

    विश्लेषकों के अनुसार यदि वर्तमान सुधारों की गति बनी रहती है और वैश्विक निवेश का प्रवाह इसी तरह जारी रहता है, तो भारत आने वाले वर्षों में दुनिया के अग्रणी विनिर्माण केंद्रों में अपनी स्थिति और मजबूत कर सकता है। इससे न केवल निर्यात क्षमता बढ़ेगी, बल्कि रोजगार, औद्योगिक विकास और आर्थिक वृद्धि को भी नई गति मिलेगी। बदलती वैश्विक सप्लाई चेन के इस दौर में भारत के सामने एक दीर्घकालिक अवसर मौजूद है, जिसे प्रभावी नीतियों और मजबूत औद्योगिक ढांचे के माध्यम से और अधिक सशक्त बनाया जा सकता है।

  • लगातार दूसरे दिन फिसले सोने-चांदी के भाव, घरेलू और वैश्विक बाजारों में बिकवाली से निवेशकों की बढ़ी सतर्कता

    लगातार दूसरे दिन फिसले सोने-चांदी के भाव, घरेलू और वैश्विक बाजारों में बिकवाली से निवेशकों की बढ़ी सतर्कता

    नई दिल्ली । घरेलू सर्राफा और वायदा बाजार में मंगलवार को लगातार दूसरे दिन सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई। कारोबारी सत्र की शुरुआत से ही दोनों कीमती धातुओं पर बिकवाली का दबाव दिखाई दिया, जिसके कारण इनके दाम में लगभग 1.20 प्रतिशत तक की कमजोरी देखने को मिली। अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी नरमी का असर भारतीय बाजार पर स्पष्ट रूप से दिखाई दिया, जिससे निवेशकों और कारोबारियों ने सतर्क रुख अपनाया।

    मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज में सोने के अगस्त 2026 डिलीवरी वाले वायदा अनुबंध की शुरुआत पिछले कारोबारी सत्र के मुकाबले हल्की कमजोरी के साथ हुई। शुरुआती कारोबार के दौरान कीमतों में लगातार गिरावट बनी रही और सोना दिन के शुरुआती घंटों में एक हजार रुपये से अधिक सस्ता होकर कारोबार करता दिखाई दिया। कारोबार के दौरान सोने ने दिन का निचला स्तर भी छुआ, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि बाजार में खरीदारी की तुलना में बिकवाली का दबाव अधिक बना हुआ है।

    चांदी के वायदा कारोबार में भी इसी तरह का रुख देखने को मिला। सितंबर 2026 डिलीवरी वाले अनुबंध की शुरुआत गिरावट के साथ हुई और शुरुआती कारोबार के दौरान इसमें और अधिक कमजोरी दर्ज की गई। कारोबार के पहले कुछ घंटों में चांदी एक प्रतिशत से अधिक टूट गई। दिन के दौरान इसके भाव लगातार दबाव में बने रहे, जिससे यह संकेत मिला कि निवेशकों का झुकाव फिलहाल सुरक्षित मुनाफावसूली की ओर है।

    अंतरराष्ट्रीय कमोडिटी बाजारों में भी सोना और चांदी दोनों दबाव में रहे। वैश्विक स्तर पर कीमती धातुओं में आई बिकवाली का सीधा असर घरेलू बाजार पर पड़ा। विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों, निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता में बदलाव और डॉलर से जुड़े संकेतों का प्रभाव कीमती धातुओं की कीमतों पर लगातार बना हुआ है। ऐसे माहौल में निवेशक नए आर्थिक संकेतों और केंद्रीय बैंकों की आगामी नीतियों पर भी नजर बनाए हुए हैं।

    हालांकि कीमतों में गिरावट के बावजूद सोने की मांग से जुड़ा एक अलग रुझान भी सामने आया है। चालू वित्त वर्ष की अप्रैल से जून तिमाही के दौरान गोल्ड लोन का दायरा उल्लेखनीय रूप से बढ़ा है। हालिया आकलनों के अनुसार, गोल्ड लोन अब सुरक्षित ऋण श्रेणी में सबसे बड़ा एसेट क्लास बनकर उभरा है और इसने वाहन ऋण को भी पीछे छोड़ दिया है। यह संकेत देता है कि आर्थिक जरूरतों के समय लोग सोने को वित्तीय सुरक्षा के प्रभावी साधन के रूप में अधिक प्राथमिकता दे रहे हैं।

    बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि कीमती धातुओं में अल्पकालिक उतार-चढ़ाव सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है। निवेशकों को केवल दैनिक मूल्य परिवर्तन के आधार पर निर्णय लेने के बजाय वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों, ब्याज दरों के रुझान, मुद्रा बाजार की चाल और घरेलू मांग जैसे व्यापक कारकों पर भी ध्यान देना चाहिए। यदि अंतरराष्ट्रीय बाजारों में दबाव बना रहता है तो निकट भविष्य में सोने और चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। वहीं, घरेलू मांग और निवेशकों की खरीदारी की रणनीति आगे की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

  • भारत-इंडोनेशिया रक्षा साझेदारी को नई मजबूती, ब्रह्मोस मिसाइल आपूर्ति समझौते से स्वदेशी रक्षा उद्योग को मिलेगा बड़ा प्रोत्साहन

    भारत-इंडोनेशिया रक्षा साझेदारी को नई मजबूती, ब्रह्मोस मिसाइल आपूर्ति समझौते से स्वदेशी रक्षा उद्योग को मिलेगा बड़ा प्रोत्साहन

    नई दिल्ली । भारत और इंडोनेशिया ने रक्षा सहयोग को नई ऊंचाई देते हुए ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल की आपूर्ति के लिए महत्वपूर्ण समझौता किया है। इस करार को भारत के रक्षा निर्यात, स्वदेशी सैन्य तकनीक और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में रणनीतिक साझेदारी के लिहाज से एक अहम उपलब्धि माना जा रहा है। समझौते के साथ दोनों देशों ने रक्षा, समुद्री सुरक्षा, औद्योगिक सहयोग और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भी संबंधों को और मजबूत बनाने पर सहमति जताई है।

    यह समझौता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इंडोनेशिया यात्रा के दौरान संपन्न हुआ, जो उनके तीन देशों के विदेश दौरे का पहला चरण है। इस अवसर पर दोनों देशों के बीच कई रणनीतिक और आर्थिक समझौतों को अंतिम रूप दिया गया। ब्रह्मोस मिसाइल की आपूर्ति के साथ भारत की स्वदेशी रक्षा उत्पादन क्षमता को वैश्विक स्तर पर नई पहचान मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

    समझौते के तहत इंडोनेशिया भारत में विकसित ‘अस्त्र’ एयर-टू-एयर मिसाइल प्रणाली की खरीद भी करेगा। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन द्वारा विकसित यह मिसाइल ‘बियॉन्ड विजुअल रेंज’ क्षमता से लैस है और आधुनिक हवाई युद्ध की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार की गई है। यह तेजी से दिशा बदलने वाले दुश्मन के लड़ाकू विमानों को लक्ष्य बनाकर उन्हें प्रभावी ढंग से निष्क्रिय करने में सक्षम मानी जाती है।

    जानकारी के अनुसार भारत भविष्य में इंडोनेशिया को ब्रह्मोस मिसाइल की अतिरिक्त बैटरियां भी उपलब्ध करा सकता है। यदि ऐसा होता है तो यह भारत के रक्षा निर्यात कार्यक्रम को और मजबूती देगा तथा स्वदेशी रक्षा उद्योग के लिए नए अवसर तैयार करेगा। हाल के वर्षों में भारत ने रक्षा उपकरणों के निर्यात को बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया है और कई मित्र देशों के साथ इस दिशा में सहयोग लगातार बढ़ रहा है।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दोनों देशों के बीच बढ़ते विश्वास को इस साझेदारी की सबसे बड़ी ताकत बताया। उन्होंने कहा कि भारत और इंडोनेशिया के बीच रक्षा, सुरक्षा और समुद्री सहयोग लगातार मजबूत हो रहा है। उनके अनुसार नए समझौतों से रक्षा आदान-प्रदान, आपदा प्रबंधन, औद्योगिक सहयोग और क्षमता निर्माण जैसे क्षेत्रों में भी व्यापक सहयोग का मार्ग प्रशस्त होगा।

    रक्षा क्षेत्र के अलावा दोनों देशों ने स्वास्थ्य, खनिज संसाधन और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भी कई महत्वपूर्ण पहल की हैं। भारत की गुणवत्तापूर्ण और किफायती दवाओं की उपलब्धता इंडोनेशिया में और आसान बनाने पर सहमति बनी है। साथ ही डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों के प्रशिक्षण एवं क्षमता विकास में भी भारत सहयोग करेगा, जिससे स्वास्थ्य क्षेत्र में द्विपक्षीय संबंध और मजबूत होंगे।

    भारत और इंडोनेशिया ने आवश्यक खनिजों की आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने के लिए स्टील, मिनरल्स और आधुनिक तकनीक के क्षेत्र में भी सहयोग बढ़ाने का निर्णय लिया है। इसके अलावा भारत इंडोनेशिया को विशेष इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन विकसित करने और चुनावी प्रौद्योगिकी से जुड़ा तकनीकी सहयोग भी उपलब्ध कराएगा। इन पहलों को दोनों देशों के बीच दीर्घकालिक रणनीतिक सहयोग का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है।

    यात्रा के दौरान इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्राबोवो सुबियांतो ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को देश के सर्वोच्च नागरिक एवं सैन्य सम्मान ‘बिंतांग आदिपूर्णा ऑफ द रिपब्लिक ऑफ इंडोनेशिया’ से सम्मानित किया। यह सम्मान उन व्यक्तियों को प्रदान किया जाता है जिन्होंने असाधारण योगदान और उत्कृष्ट सेवाएं दी हों। इस सम्मान को भारत और इंडोनेशिया के बीच मजबूत होते संबंधों तथा पारस्परिक विश्वास का प्रतीक माना जा रहा है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि ब्रह्मोस और ‘अस्त्र’ जैसी स्वदेशी रक्षा प्रणालियों का निर्यात भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता, तकनीकी क्षमता और वैश्विक रक्षा बाजार में बढ़ती उपस्थिति को और मजबूत करेगा। साथ ही यह समझौता इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में दोनों देशों के रणनीतिक सहयोग को नई दिशा देने के साथ भारत के घरेलू रक्षा उद्योग, अनुसंधान और विनिर्माण क्षेत्र के लिए भी दीर्घकालिक अवसरों का मार्ग प्रशस्त करेगा।

  • कमजोर तिमाही बिजनेस अपडेट से ट्रेंट के शेयर में बड़ी बिकवाली, निवेशकों की उम्मीदों को झटका, एक ही दिन में 11 प्रतिशत से अधिक लुढ़का स्टॉक

    कमजोर तिमाही बिजनेस अपडेट से ट्रेंट के शेयर में बड़ी बिकवाली, निवेशकों की उम्मीदों को झटका, एक ही दिन में 11 प्रतिशत से अधिक लुढ़का स्टॉक

    नई दिल्ली । टाटा समूह की प्रमुख रिटेल कंपनी ट्रेंट के शेयरों में मंगलवार को तेज गिरावट दर्ज की गई, जब कंपनी की जून तिमाही से जुड़ा कारोबारी अपडेट बाजार की अपेक्षाओं से कमजोर रहा। कारोबार के शुरुआती घंटों में कंपनी का शेयर 11 प्रतिशत से अधिक टूट गया, जिससे निवेशकों की धारणा पर स्पष्ट असर दिखाई दिया। विश्लेषकों का मानना है कि कंपनी की आय वृद्धि अनुमान से कम रहने और नए स्टोर जोड़ने की रफ्तार धीमी पड़ने के कारण बाजार ने नकारात्मक प्रतिक्रिया दी।

    जून तिमाही के दौरान ट्रेंट ने 5,666 करोड़ रुपये की स्टैंडअलोन आय दर्ज की, जबकि पिछले वर्ष की समान अवधि में यह आंकड़ा 4,781 करोड़ रुपये था। हालांकि कंपनी की आय में सालाना आधार पर वृद्धि हुई, लेकिन यह वृद्धि बाजार की उम्मीदों से कम रही। निवेशकों और विश्लेषकों को इस अवधि में लगभग 22 से 23 प्रतिशत की वृद्धि की उम्मीद थी, जबकि वास्तविक वृद्धि करीब 19 प्रतिशत के आसपास रही। इसी अंतर ने शेयर बाजार में दबाव बढ़ा दिया।

    तिमाही के अंत तक कंपनी के कुल स्टोरों की संख्या बढ़कर 1,312 हो गई। इनमें 301 वेस्टसाइड स्टोर, 982 जूडियो आउटलेट और लाइफस्टाइल श्रेणी के 29 स्टोर शामिल रहे। इसके बावजूद नए स्टोर खोलने की गति पहले की तुलना में अपेक्षाकृत धीमी रहने को लेकर बाजार ने चिंता जताई। रिटेल क्षेत्र में विस्तार की रफ्तार निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण संकेतक मानी जाती है और इसी वजह से इस पहलू पर भी विशेष ध्यान दिया गया।

    बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि तिमाही प्रदर्शन अपेक्षाओं से कमजोर जरूर रहा, लेकिन इसे कंपनी के कारोबार में किसी स्थायी या संरचनात्मक समस्या का संकेत नहीं माना जाना चाहिए। उनका मानना है कि रिटेल कारोबार में तिमाही दर तिमाही उतार-चढ़ाव सामान्य बात है और किसी एक तिमाही के आंकड़ों के आधार पर कंपनी की दीर्घकालिक संभावनाओं का आकलन करना उचित नहीं होगा। आने वाली तिमाहियों में कंपनी के विस्तार और बिक्री की गति पर निवेशकों की नजर बनी रहेगी।

    हाल के महीनों में ट्रेंट के शेयरों ने अच्छा प्रदर्शन किया था और निवेशकों को सकारात्मक रिटर्न भी मिला था। मंगलवार की बड़ी गिरावट के बावजूद पिछले एक महीने के दौरान कंपनी का शेयर लगभग 9 प्रतिशत का लाभ दे चुका है। हालांकि एक वर्ष की अवधि में इसमें करीब 19 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। इसके विपरीत, यदि लंबे समय के प्रदर्शन पर नजर डालें तो पिछले पांच वर्षों में ट्रेंट ने लगभग 390 प्रतिशत का उल्लेखनीय रिटर्न देकर निवेशकों का भरोसा मजबूत किया है।

    कंपनी के पिछले वित्तीय प्रदर्शन पर नजर डालें तो वित्त वर्ष 2025-26 की मार्च तिमाही में ट्रेंट ने 5,028 करोड़ रुपये की आय दर्ज की थी। इस दौरान कुल खर्च 4,117 करोड़ रुपये रहा। कंपनी का ऑपरेटिंग मुनाफा 911 करोड़ रुपये और कर के बाद शुद्ध लाभ 413 करोड़ रुपये दर्ज किया गया था। ऑपरेटिंग मार्जिन भी बढ़कर 18 प्रतिशत पर पहुंच गया था, जो पिछले वर्ष की समान अवधि के 15 प्रतिशत से अधिक था। इससे स्पष्ट है कि कंपनी की लाभप्रदता में सुधार देखने को मिला था, लेकिन मौजूदा तिमाही के कारोबारी संकेतकों ने निवेशकों की उम्मीदों को फिलहाल कुछ हद तक निराश किया है।

  • सेंसेक्स-निफ्टी सीमित बढ़त के साथ खुले, आईटी सेक्टर में खरीदारी रही हावी, एफपीआई के रुख में बदलाव से बाजार को मिला सहारा

    सेंसेक्स-निफ्टी सीमित बढ़त के साथ खुले, आईटी सेक्टर में खरीदारी रही हावी, एफपीआई के रुख में बदलाव से बाजार को मिला सहारा

    नई दिल्ली । भारतीय शेयर बाजार ने मंगलवार को कारोबारी सत्र की शुरुआत सीमित बढ़त के साथ की। शुरुआती कारोबार में प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी लगभग सपाट स्तर पर कारोबार करते दिखाई दिए, जबकि आईटी क्षेत्र के शेयरों में अच्छी खरीदारी ने बाजार को सहारा दिया। निवेशकों का रुझान फिलहाल चुनिंदा सेक्टरों की ओर बना हुआ है और बाजार में सतर्क आशावाद का माहौल देखने को मिल रहा है।

    शुरुआती कारोबार में आईटी कंपनियों के शेयर सबसे अधिक आकर्षण का केंद्र बने। इस क्षेत्र में लगातार खरीदारी के कारण संबंधित सेक्टोरल इंडेक्स अन्य सूचकांकों की तुलना में बेहतर प्रदर्शन करता नजर आया। इसके अलावा वित्तीय सेवाएं, निजी बैंक, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक, ऑटो, हेल्थकेयर, ऑयल एंड गैस, रियल्टी और सर्विसेज सेक्टर में भी सकारात्मक कारोबार देखने को मिला, जिससे बाजार का समग्र रुख संतुलित बना रहा।

    दूसरी ओर धातु, रक्षा, मीडिया, मैन्युफैक्चरिंग, सार्वजनिक उपक्रमों और कमोडिटी से जुड़े शेयरों में दबाव देखने को मिला। इन क्षेत्रों में बिकवाली के कारण कुछ प्रमुख कंपनियों के शेयर लाल निशान में कारोबार करते रहे। इससे यह संकेत मिला कि निवेशक फिलहाल मजबूत बुनियादी संकेतों वाले क्षेत्रों में निवेश को प्राथमिकता दे रहे हैं।

    लार्जकैप कंपनियों के साथ-साथ मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी सीमित उतार-चढ़ाव दर्ज किया गया। व्यापक बाजार में किसी बड़ी तेजी या गिरावट के बजाय संतुलित कारोबार देखने को मिला। इससे यह स्पष्ट हुआ कि निवेशक फिलहाल बड़े फैसले लेने के बजाय बाजार के अगले संकेतों का इंतजार कर रहे हैं।

    आईटी क्षेत्र की प्रमुख कंपनियों के साथ कुछ वित्तीय और उपभोक्ता कंपनियों के शेयरों में अच्छी मजबूती देखने को मिली। वहीं कुछ औद्योगिक, स्टील, फार्मा और इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियों के शेयरों पर दबाव बना रहा। बाजार का यह मिश्रित प्रदर्शन निवेशकों की सेक्टर आधारित रणनीति को दर्शाता है, जहां अलग-अलग उद्योगों में अलग रुख अपनाया जा रहा है।

    वैश्विक बाजारों का प्रभाव भी भारतीय शेयर बाजार पर सीमित रूप से दिखाई दिया। अधिकांश एशियाई बाजारों में कमजोरी का माहौल रहा, जबकि अमेरिकी बाजार पिछले कारोबारी सत्र में बढ़त के साथ बंद हुए थे। विशेष रूप से तकनीकी कंपनियों में आई मजबूती का सकारात्मक असर भारतीय आईटी शेयरों पर भी दिखाई दिया।

    बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि हाल के दिनों में जिन दो प्रमुख कारणों से बाजार पर दबाव बना हुआ था, उनमें अब राहत के संकेत दिखाई दे रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में आई नरमी से आयात लागत को लेकर चिंताएं कम हुई हैं। इसके साथ ही विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों का रुख भी बदलता नजर आ रहा है। लगातार बिकवाली के बाद अब विदेशी निवेशकों की ओर से खरीदारी शुरू होना बाजार के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।

    घरेलू संस्थागत निवेशकों की सक्रिय खरीदारी भी बाजार को स्थिरता प्रदान कर रही है। विदेशी और घरेलू निवेशकों की भागीदारी से बाजार में संतुलन बना हुआ है, जिससे आने वाले समय में निवेशकों का भरोसा और मजबूत हो सकता है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि वैश्विक परिस्थितियां अनुकूल बनी रहती हैं और विदेशी निवेशकों की खरीदारी जारी रहती है तो भारतीय शेयर बाजार को आगे भी समर्थन मिल सकता है। फिलहाल निवेशकों की नजर आगामी आर्थिक संकेतकों, कॉर्पोरेट नतीजों और वैश्विक बाजारों की दिशा पर बनी हुई है।

  • शेयर बाजार में बढ़त के बीच ऊपरी स्तरों पर मुनाफावसूली के संकेत, टाइटन और आईटी शेयरों की तेजी ने निवेशकों का बढ़ाया उत्साह

    शेयर बाजार में बढ़त के बीच ऊपरी स्तरों पर मुनाफावसूली के संकेत, टाइटन और आईटी शेयरों की तेजी ने निवेशकों का बढ़ाया उत्साह

    नई दिल्ली । घरेलू शेयर बाजार ने मंगलवार को सकारात्मक संकेतों के साथ कारोबार की शुरुआत की। शुरुआती सत्र में निवेशकों की खरीदारी के चलते प्रमुख सूचकांक बढ़त के साथ खुले। सेंसेक्स ने शुरुआती कारोबार में मजबूती दिखाई, जबकि निफ्टी भी बढ़त के साथ महत्वपूर्ण स्तरों के करीब पहुंच गया। बैंकिंग और सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र के चुनिंदा शेयरों में खरीदारी का रुझान देखने को मिला, जिससे बाजार का समग्र माहौल सकारात्मक बना रहा।

    शुरुआती कारोबार में टाइटन कंपनी के शेयर सबसे अधिक चर्चा में रहे। कंपनी के हालिया कारोबारी अपडेट के बाद निवेशकों की मजबूत खरीदारी देखने को मिली, जिससे शेयर में करीब तीन प्रतिशत तक की तेजी दर्ज की गई। इसके अलावा आईटी क्षेत्र में भी सकारात्मक रुझान दिखाई दिया और इंफोसिस सहित कई प्रमुख कंपनियों के शेयरों में अच्छी बढ़त दर्ज हुई। इससे संकेत मिला कि निवेशक गुणवत्ता वाले बड़े शेयरों में दोबारा रुचि दिखा रहे हैं।

    बाजार में श्रीराम फाइनेंस, एसबीआई लाइफ, जियो फाइनेंशियल, एचसीएल टेक्नोलॉजीज और आयशर मोटर्स जैसे शेयरों में भी मजबूती देखने को मिली। विभिन्न क्षेत्रों में खरीदारी का यह रुझान दर्शाता है कि निवेशक फिलहाल चुनिंदा कंपनियों पर भरोसा जता रहे हैं। हालांकि व्यापक बाजार में कारोबार अपेक्षाकृत संतुलित बना हुआ है और निवेशक अगले संकेतों का इंतजार कर रहे हैं।

    बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार कई सत्रों की बढ़त के बाद अब ऊपरी स्तरों पर मुनाफावसूली का दबाव देखने को मिल सकता है। इसी वजह से निफ्टी कुछ समय तक सीमित दायरे में कारोबार कर सकता है। साप्ताहिक एक्सपायरी के दिन डेरिवेटिव बाजार की गतिविधियां भी सूचकांकों की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। ऐसे समय में उतार-चढ़ाव सामान्य से अधिक रहने की संभावना मानी जा रही है।

    तकनीकी विश्लेषण के अनुसार निफ्टी के लिए 24,500 अंक का स्तर निकट अवधि में महत्वपूर्ण प्रतिरोध माना जा रहा है। यदि बाजार इस स्तर को मजबूती के साथ पार करता है तो आगे नई तेजी देखने को मिल सकती है। दूसरी ओर 24,400 अंक के आसपास का स्तर तत्काल समर्थन के रूप में देखा जा रहा है। यदि बाजार इस स्तर से नीचे फिसलता है तो अल्पकालिक दबाव बढ़ सकता है।

    विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि बाजार में अभी तक व्यापक कमजोरी के संकेत नहीं हैं, लेकिन ऊंचे स्तरों पर निवेशकों द्वारा लाभ बुक करने की संभावना बनी हुई है। ऐसे में सूचकांक कुछ समय तक सीमित दायरे में कारोबार करने के बाद अगली दिशा तय कर सकते हैं। निवेशकों को जल्दबाजी में बड़े फैसले लेने के बजाय कंपनियों के मूलभूत प्रदर्शन और बाजार के समग्र रुझान पर ध्यान देने की सलाह दी जा रही है।

    घरेलू और वैश्विक संकेतों के बीच भारतीय शेयर बाजार फिलहाल संतुलित स्थिति में दिखाई दे रहा है। कॉर्पोरेट नतीजों, आर्थिक आंकड़ों और विदेशी निवेशकों की गतिविधियों पर निवेशकों की नजर बनी रहेगी। आने वाले कारोबारी सत्रों में यही कारक बाजार की अगली दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। फिलहाल शुरुआती कारोबार में आई मजबूती ने निवेशकों का विश्वास बढ़ाया है, लेकिन ऊपरी स्तरों पर सतर्कता बनाए रखना भी उतना ही आवश्यक माना जा रहा है।

  • आज शेयर बाजार में कैसी रहेगी चाल निवेशकों की नजर वैश्विक संकेतों और विदेशी निवेश पर

    आज शेयर बाजार में कैसी रहेगी चाल निवेशकों की नजर वैश्विक संकेतों और विदेशी निवेश पर


    नई दिल्ली । सप्ताह के दूसरे कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत कई अहम घरेलू और वैश्विक संकेतों के बीच होने जा रही है। निवेशकों की नजर सबसे ज्यादा विदेशी बाजारों के रुख विदेशी संस्थागत निवेशकों की खरीद बिक्री कच्चे तेल की कीमतों और रुपये की चाल पर रहेगी। इसके अलावा कंपनियों के पहली तिमाही के कारोबारी अपडेट और आगामी वित्तीय नतीजे भी बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

    बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यदि एशियाई बाजारों से सकारात्मक संकेत मिलते हैं और विदेशी निवेशकों की खरीदारी जारी रहती है तो सेंसेक्स और निफ्टी में शुरुआती बढ़त देखने को मिल सकती है। वहीं यदि वैश्विक स्तर पर किसी तरह की अनिश्चितता या मुनाफावसूली का दबाव बढ़ता है तो बाजार में उतार चढ़ाव भी देखने को मिल सकता है। ऐसे में निवेशकों को जल्दबाजी में बड़े फैसले लेने से बचने की सलाह दी जा रही है।

    इस समय आईटी बैंकिंग ऑटो और एफएमसीजी सेक्टर के शेयरों पर निवेशकों की विशेष नजर बनी हुई है। सूचना प्रौद्योगिकी कंपनियों के तिमाही नतीजों का सीजन शुरू होने वाला है इसलिए इस सेक्टर में गतिविधियां बढ़ सकती हैं। बैंकिंग शेयरों में भी अच्छी खरीदारी देखने को मिल सकती है यदि आर्थिक संकेतक सकारात्मक बने रहते हैं। ऑटो सेक्टर में मासिक बिक्री के आंकड़ों के आधार पर चुनिंदा शेयरों में हलचल संभव है।

    विदेशी संस्थागत निवेशकों और घरेलू संस्थागत निवेशकों की गतिविधियां भी आज बाजार की दिशा तय करेंगी। यदि विदेशी निवेशकों की ओर से लगातार पूंजी निवेश जारी रहता है तो बाजार को मजबूती मिल सकती है। दूसरी ओर वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों या भू राजनीतिक घटनाक्रमों के कारण बिकवाली बढ़ने पर बाजार दबाव में आ सकता है।

    कच्चे तेल की कीमतों पर भी निवेशकों की पैनी नजर रहेगी। यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें नियंत्रित रहती हैं तो इसका सकारात्मक असर भारतीय अर्थव्यवस्था और शेयर बाजार दोनों पर देखने को मिल सकता है। वहीं रुपये की मजबूती या कमजोरी भी आयात निर्यात से जुड़ी कंपनियों के शेयरों को प्रभावित कर सकती है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा समय में बाजार में चुनिंदा शेयरों पर आधारित कारोबार देखने को मिल सकता है। मजबूत बुनियादी स्थिति वाली कंपनियों में निवेश की रणनीति बेहतर मानी जा रही है जबकि केवल अफवाहों या तेजी से बढ़ते शेयरों के पीछे भागने से बचना चाहिए। लंबी अवधि के निवेशकों के लिए अच्छी कंपनियों में चरणबद्ध निवेश अब भी बेहतर विकल्प माना जा रहा है।

    कुल मिलाकर आज शेयर बाजार में कारोबार के दौरान उतार चढ़ाव देखने को मिल सकता है लेकिन मजबूत आर्थिक संकेत और निवेशकों का भरोसा बाजार को सहारा दे सकते हैं। निवेशकों को सलाह है कि किसी भी निवेश निर्णय से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय अवश्य लें और बाजार की चाल को ध्यान में रखते हुए संतुलित रणनीति अपनाएं।