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  • सोने की कीमतों में उछाल का फायदा: भारत में गोल्ड लोन 200% तक बढ़ा, कारोबार तीन गुना हुआ

    सोने की कीमतों में उछाल का फायदा: भारत में गोल्ड लोन 200% तक बढ़ा, कारोबार तीन गुना हुआ


    नई दिल्ली। सोने की कीमतों में आई तेज बढ़ोतरी का भारतीयों ने बड़े पैमाने पर लाभ उठाया है। वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान सोना गिरवी रखकर लिए जाने वाले कर्ज की प्रति व्यक्ति औसत राशि में 39 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है, जो बढ़कर 1.96 लाख रुपये तक पहुंच गई है। तीन साल पहले यानी वित्त वर्ष 2022-23 में यह आंकड़ा केवल 98,000 रुपये था। इस तरह लोगों द्वारा लिए जा रहे गोल्ड लोन की औसत राशि लगभग दोगुनी हो गई है।

    क्रेडिट सूचना प्रदाता कंपनी एक्सपेरियन इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, मार्च 2024 से मार्च 2026 के बीच सोने की कीमतों के सूचकांक में 144 प्रतिशत की तेज वृद्धि दर्ज की गई है। इसी बढ़ोतरी के कारण ग्राहकों के पास मौजूद सोने का मूल्य काफी बढ़ गया, जिसके चलते बैंक और वित्तीय संस्थान उसी सोने के बदले 200 प्रतिशत तक अधिक लोन राशि स्वीकृत कर रहे हैं।

    गोल्ड लोन की हिस्सेदारी में तेज उछाल
    रिपोर्ट के मुताबिक, रिटेल लोन बाजार में गोल्ड लोन की हिस्सेदारी पिछले दो वर्षों में 20 प्रतिशत से बढ़कर 41 प्रतिशत तक पहुंच गई है। इसमें पर्सनल लोन और कार लोन जैसे अन्य खुदरा ऋण भी शामिल हैं। यह वृद्धि बताती है कि लोग अब अपनी पारंपरिक संपत्ति सोने को नकदी में बदलने के लिए अधिक सक्रिय हो गए हैं।

    कारोबार तीन गुना तक पहुंचा
    देश में गोल्ड लोन का कुल कारोबार भी तेज गति से बढ़ा है। यह मार्च 2023 में 6.3 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर मार्च 2026 तक 19.4 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। इसके साथ ही तीन लाख रुपये से अधिक के बड़े गोल्ड लोन की हिस्सेदारी में भी लगातार वृद्धि देखी जा रही है।

    देशभर में बढ़ी मांग
    गोल्ड लोन अब केवल दक्षिण भारत तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उत्तर और पश्चिम भारत में भी इसकी मांग तेजी से बढ़ी है। वित्त वर्ष 2025-26 में उत्तर प्रदेश में गोल्ड लोन में 138 प्रतिशत, पश्चिम बंगाल में 112 प्रतिशत, राजस्थान में 105 प्रतिशत और महाराष्ट्र में 102 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।

    बार-बार गोल्ड लोन लेने की प्रवृत्ति
    रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि गोल्ड लोन लेने वाले ग्राहक अब इसे एक नियमित वित्तीय विकल्प की तरह उपयोग कर रहे हैं। वर्ष 2026 की अंतिम तिमाही में लगभग 75 प्रतिशत ग्राहक ऐसे थे, जिन्होंने पहले भी गोल्ड लोन लिया था और फिर से इसके लिए आवेदन किया। इसके साथ ही अब लोग लंबी अवधि की बजाय कम समय के लिए लोन लेकर उसे जल्दी चुकाने की प्रवृत्ति अपना रहे हैं।

    चुकौती में सुधार, डिफॉल्ट में कमी
    तेजी से बढ़ते गोल्ड लोन बाजार के बावजूद ऋण चुकौती की स्थिति में सुधार देखा गया है। 90 दिनों से अधिक डिफॉल्ट के मामले मार्च 2023 में 0.4 प्रतिशत थे, जो मार्च 2026 तक घटकर 0.2 प्रतिशत रह गए हैं। यह संकेत देता है कि लोन बाजार का विस्तार सुरक्षित और अनुशासित तरीके से हो रहा है।

    खुदरा ऋण में बढ़ती हिस्सेदारी
    वित्त वर्ष 2023-24: 20%
    वित्त वर्ष 2024-25: 30%
    वित्त वर्ष 2025-26: 41%

  • तिमाही नतीजों से लेकर कच्चे तेल तक कई फैक्टर रहेंगे अहम, अगले सप्ताह शेयर बाजार की दिशा पर रहेगी निवेशकों की नजर

    तिमाही नतीजों से लेकर कच्चे तेल तक कई फैक्टर रहेंगे अहम, अगले सप्ताह शेयर बाजार की दिशा पर रहेगी निवेशकों की नजर

    नई दिल्ली । भारतीय शेयर बाजार के लिए आगामी कारोबारी सप्ताह कई महत्वपूर्ण घटनाओं के कारण बेहद अहम माना जा रहा है। वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही के कॉर्पोरेट नतीजों की शुरुआत, विदेशी संस्थागत निवेशकों की गतिविधियां, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और पश्चिम एशिया के हालात बाजार की दिशा तय करने में प्रमुख भूमिका निभा सकते हैं। निवेशकों की निगाहें घरेलू और वैश्विक दोनों मोर्चों पर बने घटनाक्रमों पर बनी रहेंगी।

    आने वाले सप्ताह में पहली तिमाही के नतीजों का सिलसिला शुरू होने जा रहा है। इसकी शुरुआत देश की प्रमुख आईटी कंपनी टीसीएस के वित्त वर्ष 2026-27 की अप्रैल-जून तिमाही के नतीजों से होगी। बाजार को उम्मीद है कि इस तिमाही के नतीजे आईटी सेक्टर के साथ-साथ अन्य कॉर्पोरेट कंपनियों के प्रदर्शन को लेकर शुरुआती संकेत देंगे। यही कारण है कि निवेशकों के लिए यह परिणाम विशेष महत्व रखते हैं।

    वैश्विक स्तर पर अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे घटनाक्रम भी बाजार की दिशा को प्रभावित कर सकते हैं। यदि दोनों देशों के बीच तनाव नियंत्रित रहता है तो कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता बनी रह सकती है। फिलहाल ब्रेंट क्रूड लगभग 72 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा है। ऊर्जा कीमतों में किसी भी बड़े बदलाव का असर भारतीय बाजार, महंगाई और आयात लागत पर भी देखने को मिल सकता है।

    विदेशी संस्थागत निवेशकों की रणनीति भी बाजार के लिए महत्वपूर्ण संकेत देगी। बीते सप्ताह शुरुआती दिनों में विदेशी निवेशकों ने बिकवाली का रुख अपनाया, हालांकि सप्ताह के अंतिम कारोबारी सत्र में उन्होंने फिर से खरीदारी कर बाजार को सहारा दिया। यदि आने वाले दिनों में विदेशी निवेशकों का निवेश बढ़ता है तो इससे बाजार की धारणा मजबूत हो सकती है, जबकि लगातार बिकवाली दबाव बढ़ा सकती है।

    पिछला कारोबारी सप्ताह घरेलू शेयर बाजार के लिए सकारात्मक रहा। प्रमुख सूचकांकों सेंसेक्स और निफ्टी दोनों ने मजबूती के साथ सप्ताह का समापन किया। निवेशकों की खरीदारी का असर केवल बड़ी कंपनियों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी अच्छी तेजी देखने को मिली। इससे व्यापक बाजार में निवेशकों का भरोसा मजबूत होता दिखाई दिया।

    सेक्टोरल प्रदर्शन की बात करें तो रियल्टी और फार्मा कंपनियों के शेयरों में सबसे अधिक मजबूती दर्ज की गई। हेल्थकेयर, डिफेंस, एफएमसीजी, मेटल और सर्विसेज सेक्टर के शेयरों ने भी सकारात्मक प्रदर्शन किया। दूसरी ओर पीएसयू बैंक, एनर्जी और प्राइवेट बैंकिंग सेक्टर में कुछ दबाव देखने को मिला, जिससे इन सूचकांकों ने सप्ताह का समापन गिरावट के साथ किया।

    विशेषज्ञों का मानना है कि तिमाही नतीजों के साथ-साथ वैश्विक आर्थिक संकेत और विदेशी निवेशकों की गतिविधियां आने वाले सप्ताह में बाजार की दिशा तय करेंगी। यदि कंपनियों के परिणाम उम्मीद के अनुरूप रहते हैं और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कोई बड़ा नकारात्मक घटनाक्रम नहीं होता, तो बाजार में सकारात्मक माहौल बना रह सकता है। वहीं वैश्विक तनाव या कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल जैसी परिस्थितियां निवेशकों की धारणा को प्रभावित कर सकती हैं।

    ऐसे में आगामी सप्ताह निवेशकों के लिए सतर्कता और अवसर दोनों लेकर आ सकता है। बाजार की चाल काफी हद तक कॉर्पोरेट प्रदर्शन, वैश्विक संकेतों और निवेशकों के भरोसे पर निर्भर करेगी, इसलिए कारोबारियों की नजर हर प्रमुख आर्थिक और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम पर बनी रहेगी।

  • सेंसेक्स-निफ्टी की मजबूती का बड़ा असर, छह बड़ी कंपनियों की बाजार पूंजी में जबरदस्त उछाल, निवेशकों का भरोसा लौटा

    सेंसेक्स-निफ्टी की मजबूती का बड़ा असर, छह बड़ी कंपनियों की बाजार पूंजी में जबरदस्त उछाल, निवेशकों का भरोसा लौटा

    मुंबई । शेयर बाजार में लौटे सकारात्मक माहौल का असर देश की सबसे बड़ी सूचीबद्ध कंपनियों पर भी साफ दिखाई दिया। बीते कारोबारी सप्ताह के दौरान शीर्ष 10 कंपनियों में से छह के बाजार पूंजीकरण में संयुक्त रूप से एक लाख करोड़ रुपये से अधिक की बढ़ोतरी दर्ज की गई। निवेशकों की लगातार खरीदारी और बाजार में बेहतर धारणा के चलते कई प्रमुख कंपनियों के शेयरों में मजबूती देखने को मिली, जिससे उनके मार्केटकैप में उल्लेखनीय इजाफा हुआ।

    सप्ताह के दौरान प्रमुख शेयर सूचकांकों ने भी मजबूती के साथ कारोबार समाप्त किया। बाजार में आई इस तेजी ने बैंकिंग, वित्तीय सेवाओं, दूरसंचार, बीमा और उपभोक्ता क्षेत्र की बड़ी कंपनियों को सबसे अधिक लाभ पहुंचाया। विश्लेषकों का मानना है कि निवेशकों के भरोसे में सुधार और सकारात्मक आर्थिक संकेतों ने बाजार को समर्थन दिया, जिससे कई कंपनियों का मूल्यांकन मजबूत हुआ।

    सप्ताह भर के प्रदर्शन में सबसे अधिक बढ़त दूरसंचार क्षेत्र की अग्रणी कंपनी भारती एयरटेल के बाजार पूंजीकरण में दर्ज की गई। इसके बाद बजाज फाइनेंस ने भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी हासिल की। निजी बैंकिंग क्षेत्र की प्रमुख कंपनी आईसीआईसीआई बैंक का बाजार मूल्य भी मजबूत हुआ, जबकि एलआईसी, एचडीएफसी बैंक और हिंदुस्तान यूनिलीवर के मार्केटकैप में भी अच्छी बढ़त देखने को मिली। इन कंपनियों में निवेशकों की लगातार खरीदारी ने उनके बाजार मूल्य को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

    हालांकि सभी कंपनियों के लिए सप्ताह समान रूप से सकारात्मक नहीं रहा। कुछ बड़ी कंपनियों के शेयरों में मुनाफावसूली और सीमित दबाव के कारण उनके बाजार पूंजीकरण में गिरावट दर्ज की गई। इंफ्रास्ट्रक्चर, ऊर्जा और आईटी क्षेत्र की कुछ प्रमुख कंपनियां इस दौरान नुकसान उठाने वालों में शामिल रहीं। इसके बावजूद समग्र रूप से बाजार की दिशा सकारात्मक बनी रही और अधिकांश क्षेत्रों में निवेशकों का रुझान मजबूत बना रहा।

    बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि हाल के दिनों में वैश्विक संकेतों में सुधार, घरेलू आर्थिक गतिविधियों में स्थिरता और निवेशकों की बढ़ती भागीदारी ने भारतीय शेयर बाजार को मजबूती प्रदान की है। यही कारण रहा कि बड़ी कंपनियों के शेयरों में अच्छी खरीदारी देखने को मिली और उनके मूल्यांकन में उल्लेखनीय सुधार दर्ज हुआ।

    साप्ताहिक उतार-चढ़ाव के बावजूद देश की सबसे मूल्यवान सूचीबद्ध कंपनी के रूप में रिलायंस इंडस्ट्रीज ने अपना शीर्ष स्थान बरकरार रखा। इसके बाद एचडीएफसी बैंक, भारती एयरटेल, आईसीआईसीआई बैंक, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, बजाज फाइनेंस, लार्सन एंड टुब्रो, एलआईसी और हिंदुस्तान यूनिलीवर का स्थान रहा।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यदि घरेलू और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां अनुकूल बनी रहती हैं तथा निवेशकों का भरोसा इसी तरह कायम रहता है, तो आने वाले कारोबारी सत्रों में भी भारतीय शेयर बाजार में सकारात्मक रुख देखने को मिल सकता है। इससे बड़ी कंपनियों के बाजार पूंजीकरण में आगे भी बढ़ोतरी की संभावना बनी रहेगी।

  • 5,000 रुपए से 40,000 करोड़ तक का सफर: कैसे राकेश झुनझुनवाला बने भारतीय शेयर बाजार के 'बिग बुल' और निवेश की दुनिया के सबसे भरोसेमंद नाम

    5,000 रुपए से 40,000 करोड़ तक का सफर: कैसे राकेश झुनझुनवाला बने भारतीय शेयर बाजार के 'बिग बुल' और निवेश की दुनिया के सबसे भरोसेमंद नाम

    नई दिल्ली । भारतीय शेयर बाजार के इतिहास में राकेश झुनझुनवाला का नाम उन चुनिंदा निवेशकों में शामिल है, जिन्होंने अपनी दूरदर्शी सोच, मजबूत रणनीति और धैर्य के बल पर निवेश की दुनिया में असाधारण सफलता हासिल की। बेहद सीमित पूंजी से शुरुआत करने वाले झुनझुनवाला ने समय के साथ ऐसा निवेश साम्राज्य खड़ा किया, जिसने उन्हें देश का ‘बिग बुल’ और निवेश जगत का सबसे चर्चित चेहरा बना दिया। उनकी निवेश शैली आज भी नए और अनुभवी निवेशकों के लिए प्रेरणा का प्रमुख स्रोत मानी जाती है।

    5 जुलाई 1960 को मुंबई में जन्मे राकेश झुनझुनवाला का शुरुआती जीवन सामान्य रहा। उनके पिता आयकर विभाग में अधिकारी थे और घर में अक्सर अर्थव्यवस्था तथा शेयर बाजार से जुड़ी चर्चाएं होती थीं। इन्हीं चर्चाओं ने उनके भीतर पूंजी बाजार को समझने की रुचि विकसित की। उन्होंने कॉमर्स की पढ़ाई पूरी करने के बाद चार्टर्ड अकाउंटेंट की उपाधि हासिल की, लेकिन उनका लक्ष्य केवल पेशेवर जीवन तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने निवेश को अपने करियर का आधार बनाया।

    वर्ष 1985 में उन्होंने लगभग 5,000 रुपए की पूंजी के साथ शेयर बाजार में कदम रखा। शुरुआती दौर में परिवार और परिचितों से जुटाई गई पूंजी के सहारे उन्होंने कंपनियों का गहराई से अध्ययन करते हुए निवेश शुरू किया। उनकी पहली बड़ी सफलता टाटा टी के शेयरों में निवेश से मिली, जहां कुछ ही समय में उन्हें उल्लेखनीय लाभ हुआ। इस सफलता ने उन्हें बाजार में नई पहचान दिलाई और आगे बढ़ने का आत्मविश्वास भी दिया।

    इसके बाद उन्होंने कई ऐसी कंपनियों में निवेश किया, जिन्हें उस समय बाजार में अधिक महत्व नहीं दिया जा रहा था। टाटा पावर, सेसा गोवा और प्राज इंडस्ट्रीज जैसे निवेशों ने उन्हें शानदार रिटर्न दिलाया। हालांकि उनके करियर का सबसे सफल निवेश टाइटन कंपनी में माना जाता है। जब अधिकांश निवेशक इस कंपनी को लेकर आशंकित थे, तब उन्होंने इसमें भरोसा जताया। आने वाले वर्षों में टाइटन के जबरदस्त प्रदर्शन ने उनकी संपत्ति में हजारों करोड़ रुपए का इजाफा किया और यह उनके पोर्टफोलियो का सबसे मूल्यवान निवेश बन गया।

    राकेश झुनझुनवाला केवल सफल निवेशक ही नहीं थे, बल्कि एक सक्रिय उद्यमी भी थे। अपनी निवेश कंपनी के माध्यम से उन्होंने विभिन्न क्षेत्रों में निवेश किया और कई कंपनियों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। शिक्षा, मीडिया और विमानन जैसे क्षेत्रों में भी उनकी सक्रिय भागीदारी रही। वर्ष 2022 में उन्होंने विमानन क्षेत्र में प्रवेश करते हुए आकासा एयर की शुरुआत की, जिसे उनके सबसे महत्वाकांक्षी व्यावसायिक कदमों में गिना गया।

    14 अगस्त 2022 को उनका निधन हो गया, लेकिन उनका निवेश दर्शन आज भी उतना ही प्रासंगिक माना जाता है। उनका विश्वास था कि शेयर बाजार में सफलता किसी एक दिन का परिणाम नहीं होती, बल्कि सही कंपनियों का चयन, लगातार अध्ययन और लंबी अवधि तक धैर्य बनाए रखने से मिलती है। वे हमेशा कहते थे कि बाजार में उतार-चढ़ाव स्वाभाविक है और निवेशकों को छोटी अवधि की अस्थिरता से घबराने के बजाय मजबूत कंपनियों पर भरोसा बनाए रखना चाहिए।

    झुनझुनवाला का मानना था कि किसी भी निवेश से पहले कंपनी के कारोबार, वित्तीय स्थिति, प्रबंधन और भविष्य की संभावनाओं का गंभीर विश्लेषण जरूरी है। वे भीड़ का अनुसरण करने के बजाय स्वतंत्र रिसर्च पर भरोसा करने और विविध क्षेत्रों में निवेश कर जोखिम को संतुलित रखने की सलाह देते थे। उनकी यही सोच और अनुशासित निवेश रणनीति उन्हें भारतीय शेयर बाजार के इतिहास में हमेशा एक प्रेरणादायक व्यक्तित्व के रूप में स्थापित करती रहेगी।

  • भारत-यूके व्यापक व्यापार समझौते के नियम जारी, 15 जुलाई से शुरू होगा नया कारोबारी दौर, कंपनियों और निर्यातकों को मिलेंगी नई सुविधाएं

    भारत-यूके व्यापक व्यापार समझौते के नियम जारी, 15 जुलाई से शुरू होगा नया कारोबारी दौर, कंपनियों और निर्यातकों को मिलेंगी नई सुविधाएं


    नई दिल्ली। भारत और यूनाइटेड किंगडम के बीच हुए व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौते (सीईटीए) को लागू करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए केंद्र सरकार ने इससे जुड़े नियमों को अधिसूचित कर दिया है। यह नया ढांचा 15 जुलाई 2026 से प्रभावी होगा और इसके साथ ही दोनों देशों के बीच व्यापारिक गतिविधियों के लिए नई व्यवस्था लागू हो जाएगी। सरकार का मानना है कि इससे द्विपक्षीय व्यापार, निवेश, आपूर्ति श्रृंखला और औद्योगिक सहयोग को नई गति मिलेगी।

    वित्त मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, समझौते के तहत यह स्पष्ट किया गया है कि किसी उत्पाद को भारत या यूनाइटेड किंगडम में निर्मित तभी माना जाएगा, जब वह पूरी तरह संबंधित देश में तैयार किया गया हो, स्थानीय सामग्री से निर्मित हो या फिर निर्धारित उत्पाद-विशिष्ट मूल नियमों का पालन करते हुए तैयार किया गया हो। इस व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि व्यापारिक रियायतों का लाभ केवल पात्र उत्पादों को ही प्राप्त हो।

    केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) द्वारा जारी नियमों में उन शर्तों का भी विस्तृत उल्लेख किया गया है, जिनके आधार पर किसी उत्पाद को टैरिफ रियायतों के लिए योग्य माना जाएगा। साथ ही आयातकों और निर्यातकों के लिए आवश्यक अनुपालन प्रक्रियाएं भी निर्धारित की गई हैं। इन नियमों के लागू होने से सीमा शुल्क प्रक्रिया अधिक स्पष्ट और पारदर्शी बनने की उम्मीद है।

    नए प्रावधानों के तहत दोनों देशों के बीच निर्मित उत्पादों के लिए ‘क्यूमुलेशन’ यानी मिला-जुला उत्पादन व्यवस्था को भी मान्यता दी गई है। इसका अर्थ यह है कि यदि किसी उत्पाद के निर्माण में दोनों साझेदार देशों की सामग्री या उत्पादन प्रक्रिया का उपयोग किया गया है, तो निर्धारित शर्तों के तहत उसे मूल उत्पाद का दर्जा दिया जा सकेगा। इससे दोनों देशों की कंपनियों के बीच औद्योगिक सहयोग और संयुक्त विनिर्माण गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की संभावना है।

    सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि केवल साधारण रीपैकेजिंग, रीलेबलिंग, धुलाई, छंटाई, पॉलिशिंग, साधारण असेंबली अथवा अन्य सामान्य प्रक्रियाओं के आधार पर किसी उत्पाद को मूल उत्पाद का दर्जा नहीं मिलेगा। सीमा शुल्क अधिकारियों को ऐसे मामलों की जांच करने तथा नियमों का पालन नहीं करने वाले उत्पादों को व्यापारिक रियायतों से वंचित रखने का अधिकार भी दिया गया है। इससे समझौते के दुरुपयोग की संभावना को कम करने का प्रयास किया गया है।

    इन नियमों में उन आयातकों को भी राहत प्रदान की गई है जो आयात के समय किसी कारणवश टैरिफ लाभ का दावा नहीं कर पाए थे। निर्धारित प्रक्रिया के तहत ऐसे मामलों में बाद में भी पात्रता के आधार पर रियायत प्राप्त करने का अवसर उपलब्ध रहेगा। इससे व्यापारिक समुदाय को अधिक लचीलापन और सुविधा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि भारत-यूके सीईटीए केवल व्यापारिक शुल्कों में राहत तक सीमित नहीं है, बल्कि यह निवेश, प्रौद्योगिकी सहयोग, नवाचार, विनिर्माण और पेशेवर सेवाओं के क्षेत्र में भी नए अवसर पैदा करेगा। दोनों देशों के उद्योगों के बीच साझेदारी बढ़ने से निर्यात क्षमता मजबूत होगी और भारतीय कंपनियों को विकसित अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक बेहतर पहुंच मिलेगी। 15 जुलाई से नियम लागू होने के साथ ही भारत और यूनाइटेड किंगडम के आर्थिक संबंधों में एक नए चरण की शुरुआत होने की उम्मीद है।

  • स्वास्थ्य क्षेत्र में अदाणी ग्रुप का बड़ा निवेश, न्यू टाउन में 2,000 बेड के मेगा हॉस्पिटल की तैयारी, 1,000 बेड आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों के लिए होंगे समर्पित

    स्वास्थ्य क्षेत्र में अदाणी ग्रुप का बड़ा निवेश, न्यू टाउन में 2,000 बेड के मेगा हॉस्पिटल की तैयारी, 1,000 बेड आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों के लिए होंगे समर्पित

    नई दिल्ली । देश के स्वास्थ्य क्षेत्र में निजी निवेश को नई दिशा देने की दिशा में अदाणी ग्रुप ने पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता के न्यू टाउन क्षेत्र में 2,000 बेड क्षमता वाले अत्याधुनिक अस्पताल की स्थापना की घोषणा की है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह होगी कि अस्पताल के कुल 2,000 बेड में से 1,000 बेड आर्थिक रूप से कमजोर और जरूरतमंद मरीजों के निःशुल्क उपचार के लिए आरक्षित रखे जाएंगे। वहीं शेष 1,000 बेड का उपयोग व्यावसायिक स्वास्थ्य सेवाओं के संचालन के लिए किया जाएगा।

    इस परियोजना को राज्य के स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं से लैस यह अस्पताल न्यू टाउन और आसपास के क्षेत्रों के साथ-साथ राज्य के अन्य हिस्सों से आने वाले मरीजों को भी बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। बड़े स्तर पर उपचार, विशेषज्ञ चिकित्सकीय सेवाएं और आधुनिक तकनीक से सुसज्जित स्वास्थ्य सुविधाओं के कारण यह संस्थान क्षेत्र के प्रमुख चिकित्सा केंद्रों में शामिल हो सकता है।

    गरीब और जरूरतमंद मरीजों के लिए आधी क्षमता आरक्षित रखने की योजना इस परियोजना को सामाजिक दृष्टि से भी विशेष बनाती है। इससे आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लोगों को गुणवत्तापूर्ण उपचार उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी। साथ ही निजी और सामाजिक स्वास्थ्य सेवाओं के संतुलित मॉडल के रूप में यह परियोजना भविष्य की स्वास्थ्य योजनाओं के लिए भी एक उदाहरण बन सकती है।

    अदाणी ग्रुप पिछले कुछ वर्षों से स्वास्थ्य क्षेत्र में अपनी सामाजिक भागीदारी का लगातार विस्तार कर रहा है। इसी क्रम में समूह ने हाल ही में बिहार में अखंड ज्योति हॉस्पिटल और अदाणी फाउंडेशन के सहयोग से आंखों के उपचार और अनुसंधान को समर्पित एक विशेष केंद्र स्थापित करने की पहल की थी। इस संस्थान का उद्देश्य जरूरतमंद लोगों तक सुलभ और किफायती नेत्र चिकित्सा सेवाएं पहुंचाना है, ताकि गुणवत्तापूर्ण उपचार अधिक से अधिक लोगों तक उपलब्ध हो सके।

    इसी पहल के अंतर्गत नेत्र चिकित्सा विशेषज्ञों, प्रशिक्षु चिकित्सकों और महिला स्वास्थ्यकर्मियों को आधुनिक प्रशिक्षण प्रदान करने की व्यवस्था भी विकसित की जा रही है। इसका उद्देश्य भविष्य में देशभर में नेत्र स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार करने के लिए प्रशिक्षित मानव संसाधन तैयार करना है। विशेषज्ञों का मानना है कि उपचार के साथ-साथ चिकित्सा प्रशिक्षण पर दिया जा रहा यह जोर स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता बढ़ाने में सहायक सिद्ध होगा।

    अदाणी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अदाणी ने भी स्वास्थ्य सेवाओं को समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचाने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा है कि गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा केवल इलाज तक सीमित नहीं होती, बल्कि यह लोगों के जीवन में विश्वास, सम्मान और नई उम्मीद लौटाने का माध्यम भी बनती है। समूह का मानना है कि स्वास्थ्य क्षेत्र में दीर्घकालिक निवेश समाज के समग्र विकास के लिए अत्यंत आवश्यक है।

    इससे पहले भी समूह विभिन्न सामाजिक स्वास्थ्य परियोजनाओं के माध्यम से सार्वजनिक चिकित्सा ढांचे को सहयोग देता रहा है। राजधानी दिल्ली में गुर्दा रोग उपचार सुविधाओं के विस्तार सहित कई स्वास्थ्य संबंधी पहलों में उसकी भागीदारी रही है। कोलकाता में प्रस्तावित यह नया अस्पताल भी उसी व्यापक दृष्टिकोण का हिस्सा माना जा रहा है, जिसका उद्देश्य आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं का विस्तार करते हुए जरूरतमंद वर्ग तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित करना है। परियोजना के पूर्ण होने के बाद राज्य के स्वास्थ्य बुनियादी ढांचे को नई मजबूती मिलने के साथ हजारों मरीजों को उन्नत और सुलभ उपचार की सुविधा मिलने की उम्मीद है।

  • ई20 पेट्रोल को लेकर फैली अफवाहों पर केंद्र का बड़ा स्पष्टीकरण, भूटान को निर्यात के दावे खारिज, सोशल मीडिया पर भ्रामक सूचनाओं से सतर्क रहने की अपील

    ई20 पेट्रोल को लेकर फैली अफवाहों पर केंद्र का बड़ा स्पष्टीकरण, भूटान को निर्यात के दावे खारिज, सोशल मीडिया पर भ्रामक सूचनाओं से सतर्क रहने की अपील


    नई दिल्ली। भारत और भूटान के बीच ई20 पेट्रोल के निर्यात को लेकर सामने आई चर्चाओं पर केंद्र सरकार ने स्पष्ट और आधिकारिक रुख अपनाते हुए उन सभी दावों को खारिज कर दिया है, जिनमें कहा जा रहा था कि भूटान ने भारत से ई20 पेट्रोल आयात करने के प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया है। सरकार ने साफ किया कि इस तरह का कोई प्रस्ताव भूटान को भेजा ही नहीं गया था, इसलिए उसे ठुकराने का सवाल ही नहीं उठता। इसके साथ ही सोशल मीडिया पर फैल रही भ्रामक जानकारियों से सावधान रहने की अपील भी की गई है।

    सरकार के अनुसार, भारतीय ऑयल मार्केटिंग कंपनियों की ओर से भूटान को ई20 पेट्रोल निर्यात करने का कोई औपचारिक प्रस्ताव नहीं दिया गया है। ऐसे में यह दावा पूरी तरह तथ्यहीन है कि पड़ोसी देश ने भारत के प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया। केंद्र ने कहा कि इस प्रकार की अपुष्ट खबरें लोगों के बीच भ्रम की स्थिति पैदा करती हैं और वास्तविक तथ्यों से उनका कोई संबंध नहीं है।

    हाल के दिनों में कई रिपोर्ट्स में यह दावा किया गया था कि भूटान ने ई20 पेट्रोल को अपनाने से इनकार कर दिया है। इन रिपोर्ट्स में स्टोरेज से जुड़ी तकनीकी चुनौतियों को इसकी वजह बताया गया था। हालांकि केंद्र सरकार ने स्पष्ट कर दिया कि ऐसा कोई आधिकारिक संवाद या प्रस्ताव ही नहीं हुआ, इसलिए इन दावों को सही नहीं माना जा सकता।

    सरकार ने इस अवसर पर ई20 पेट्रोल को लेकर सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रही अन्य भ्रामक जानकारियों पर भी प्रतिक्रिया दी। मंत्रालय का कहना है कि ई20 ईंधन को लेकर यह प्रचार किया जा रहा है कि इससे वाहन खराब हो सकते हैं, इंजन की कार्यक्षमता प्रभावित होती है, प्रदूषण बढ़ता है या एथेनॉल उत्पादन में अत्यधिक पानी की खपत होती है। सरकार ने इन सभी दावों को वैज्ञानिक तथ्यों से परे और पूरी तरह निराधार बताया है।

    केंद्र के अनुसार, ई20 ईंधन पर देश के प्रमुख ऑटोमोटिव अनुसंधान संस्थानों द्वारा व्यापक तकनीकी अध्ययन किए जा चुके हैं। इन अध्ययनों में कहीं भी यह निष्कर्ष सामने नहीं आया कि ई20 पेट्रोल वाहनों के लिए हानिकारक है। सरकार का कहना है कि तकनीकी परीक्षणों और विशेषज्ञों की रिपोर्टों के आधार पर ही देश में चरणबद्ध तरीके से एथेनॉल मिश्रित ईंधन को बढ़ावा दिया जा रहा है।

    सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि ई20 पेट्रोल का उद्देश्य केवल पारंपरिक पेट्रोल पर निर्भरता कम करना ही नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देना भी है। एथेनॉल जैविक स्रोतों से तैयार होने वाला ईंधन है, जिसके उपयोग से कार्बन उत्सर्जन में कमी लाने में मदद मिलती है। इससे वातावरण में शुद्ध कार्बन उत्सर्जन का स्तर घटाने की दिशा में सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

    केंद्र सरकार ने नागरिकों से अपील की है कि ई20 पेट्रोल या उससे जुड़े किसी भी विषय पर केवल आधिकारिक सूचनाओं पर ही भरोसा करें। सरकार का कहना है कि सोशल मीडिया पर बिना पुष्टि के प्रसारित होने वाली खबरें भ्रम पैदा कर सकती हैं और सार्वजनिक विश्वास को प्रभावित कर सकती हैं। इसलिए किसी भी जानकारी को सही मानने से पहले उसके आधिकारिक स्रोत की पुष्टि करना आवश्यक है। सरकार ने दोहराया कि ई20 ईंधन को लेकर फैलाए जा रहे भ्रम का वास्तविक तथ्यों और वैज्ञानिक अध्ययनों से कोई संबंध नहीं है तथा इस संबंध में सभी निर्णय स्थापित तकनीकी मानकों और परीक्षणों के आधार पर ही लिए जा रहे हैं।

  • ईपीएफओ ने यूएएन से जुड़े नियमों में किया बड़ा बदलाव, अब पोर्टल पर नहीं मिलेगी एक्टिवेशन की सुविधा, पीएफ खाताधारकों के लिए बदली पूरी प्रक्रिया

    ईपीएफओ ने यूएएन से जुड़े नियमों में किया बड़ा बदलाव, अब पोर्टल पर नहीं मिलेगी एक्टिवेशन की सुविधा, पीएफ खाताधारकों के लिए बदली पूरी प्रक्रिया

    नई दिल्ली । कर्मचारी भविष्य निधि से जुड़े करोड़ों खाताधारकों के लिए यूएएन सेवाओं की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण बदलाव लागू किए गए हैं। यूनिफाइड मेंबर पोर्टल के तकनीकी उन्नयन के बाद अब यूएएन एक्टिवेशन और नया यूएएन जारी करने की सुविधा पहले की तरह पोर्टल पर उपलब्ध नहीं रहेगी। इन सेवाओं को नई डिजिटल व्यवस्था के तहत स्थानांतरित किया गया है, जिससे पूरी प्रक्रिया अधिक सुरक्षित, तेज और तकनीक आधारित बनाई जा सके।

    नए बदलाव के तहत यूएएन को सक्रिय करने और नया यूएएन प्राप्त करने के लिए आधार आधारित फेस ऑथेंटिकेशन अनिवार्य कर दिया गया है। इसका उद्देश्य पहचान सत्यापन को अधिक मजबूत बनाना और फर्जीवाड़े की संभावनाओं को कम करना है। नई प्रणाली के लागू होने के बाद सदस्यों को अपनी पहचान की पुष्टि डिजिटल माध्यम से करनी होगी, जिसके बाद ही संबंधित सेवा उपलब्ध होगी।

    तकनीकी अपग्रेड के साथ यूनिफाइड मेंबर पोर्टल के इंटरफेस और प्रोसेसिंग सिस्टम में भी सुधार किया गया है। नई व्यवस्था के अनुसार यूएएन एक्टिवेशन, नया यूएएन जारी करने और पहली बार यूएएन प्राप्त करने जैसी सेवाओं की प्रक्रिया पूरी तरह नई डिजिटल प्रणाली के माध्यम से संचालित होगी। इससे डेटाबेस का बेहतर एकीकरण होगा और सेवाओं की गति तथा सुरक्षा दोनों में सुधार आने की उम्मीद है।

    जिन कर्मचारियों का यूएएन अभी तक सक्रिय नहीं हुआ है, उन्हें नई प्रक्रिया के तहत अपनी पहचान का डिजिटल सत्यापन कराना होगा। वहीं जिन कर्मचारियों को पहली बार यूएएन जारी किया जाना है, उनके लिए भी यही प्रक्रिया अपनाई जाएगी। सफल सत्यापन के बाद नया यूएएन संबंधित कर्मचारी के भविष्य निधि खाते से जोड़ दिया जाएगा, जिससे आगे की सभी ऑनलाइन सेवाओं का लाभ आसानी से मिल सकेगा।

    संगठन ने यूएएन भूल जाने वाले सदस्यों के लिए रिकवरी प्रक्रिया को भी पहले की तुलना में अधिक सरल बनाया है। अब पंजीकृत मोबाइल नंबर के सत्यापन, आवश्यक व्यक्तिगत जानकारी और पहचान संबंधी दस्तावेजों की पुष्टि के बाद सदस्य अपना यूएएन दोबारा प्राप्त कर सकेंगे। इससे ऐसे कर्मचारियों को राहत मिलेगी जिन्हें लंबे समय बाद अपने खाते की जानकारी प्राप्त करनी होती है।

    हालांकि यूएएन से जुड़ी अधिकांश सेवाओं की प्रक्रिया नई व्यवस्था के अंतर्गत स्थानांतरित कर दी गई है, लेकिन ऑनलाइन डेथ क्लेम दाखिल करने की सुविधा पहले की तरह यूनिफाइड मेंबर पोर्टल पर उपलब्ध रहेगी। इसके लिए आधार से जुड़े मोबाइल नंबर, बैंक खाते का विवरण, मृत्यु प्रमाण पत्र और अन्य आवश्यक दस्तावेज निर्धारित प्रारूप में अपलोड करने होंगे। दस्तावेजों का आकार और फाइल प्रारूप भी तय मानकों के अनुरूप होना आवश्यक होगा।

    तकनीकी उन्नयन के बाद शुरुआती दिनों में ऑनलाइन क्लेम और अन्य अनुरोधों के निपटारे में सामान्य से थोड़ा अधिक समय लग सकता है। अतिरिक्त सत्यापन और सिस्टम जांच के कारण यह स्थिति अस्थायी मानी जा रही है। सदस्यों को सलाह दी गई है कि एक ही अनुरोध को बार-बार जमा करने या अनावश्यक रूप से बार-बार लॉगिन करने से बचें, ताकि सिस्टम पर अतिरिक्त दबाव न पड़े और सभी उपयोगकर्ताओं को सुचारु सेवाएं मिल सकें।

    नई डिजिटल व्यवस्था का उद्देश्य भविष्य निधि सेवाओं को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और उपयोगकर्ता-अनुकूल बनाना है। फेस ऑथेंटिकेशन आधारित सत्यापन प्रणाली लागू होने से पहचान संबंधी धोखाधड़ी की संभावना कम होगी और खाताधारकों को भविष्य में तेज, विश्वसनीय और अधिक सुरक्षित ऑनलाइन सेवाओं का लाभ मिल सकेगा।

  • HDFC बैंक की पहली तिमाही शानदार, डिपॉजिट और लोन में दोहरे अंक की बढ़ोतरी, कारोबार ने पकड़ी मजबूत रफ्तार

    HDFC बैंक की पहली तिमाही शानदार, डिपॉजिट और लोन में दोहरे अंक की बढ़ोतरी, कारोबार ने पकड़ी मजबूत रफ्तार

    नई दिल्ली । देश के सबसे बड़े निजी क्षेत्र के बैंकों में शामिल एचडीएफसी बैंक ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में मजबूत कारोबारी प्रदर्शन दर्ज किया है। अप्रैल से जून 2026 की अवधि के दौरान बैंक ने जमा राशि और कर्ज वितरण दोनों में दोहरे अंक की वृद्धि हासिल की। बैंक की ओर से जारी तिमाही कारोबारी अपडेट के अनुसार विभिन्न प्रमुख वित्तीय संकेतकों में लगातार मजबूती देखने को मिली है, जो बैंक के विस्तार और ग्राहक आधार में बढ़ोतरी का संकेत देती है।

    बैंक के आंकड़ों के अनुसार 30 जून 2026 तक कुल जमा राशि बढ़कर 31.70 लाख करोड़ रुपये पहुंच गई, जो पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 14.7 प्रतिशत अधिक है। इस दौरान टर्म डिपॉजिट में सबसे अधिक मजबूती देखने को मिली और यह 17 प्रतिशत से अधिक की वार्षिक वृद्धि के साथ 21.45 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया। वहीं करंट अकाउंट और सेविंग अकाउंट (CASA) जमा भी लगभग 9 प्रतिशत बढ़कर 10.25 लाख करोड़ रुपये हो गया।

    कर्ज वितरण के मोर्चे पर भी बैंक का प्रदर्शन मजबूत रहा। पहली तिमाही के अंत तक कुल ग्रॉस एडवांस 30.61 लाख करोड़ रुपये दर्ज किया गया, जो एक वर्ष पहले की तुलना में 15.4 प्रतिशत अधिक है। इससे स्पष्ट होता है कि खुदरा और कॉरपोरेट दोनों वर्गों में ऋण की मांग बनी हुई है तथा बैंक ने अपने ऋण पोर्टफोलियो का लगातार विस्तार किया है।

    बैंक के एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई। जून तिमाही के अंत तक यह आंकड़ा 31.27 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया, जो पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 12.4 प्रतिशत अधिक है। विशेषज्ञों का मानना है कि जमा और ऋण दोनों में संतुलित वृद्धि बैंक की वित्तीय स्थिति को और मजबूत बनाती है तथा भविष्य की विकास संभावनाओं को भी बेहतर करती है।

    हालांकि मजबूत कारोबारी प्रदर्शन के बीच बैंक हाल के महीनों में कॉरपोरेट गवर्नेंस से जुड़े घटनाक्रमों को लेकर भी चर्चा में रहा है। इस वर्ष बैंक के तत्कालीन पार्ट-टाइम चेयरमैन अतानु चक्रवर्ती ने अपने पद से इस्तीफा दिया था। इसके बाद अंतरिम व्यवस्था के तहत नेतृत्व में बदलाव किया गया और बाद में केंद्र सरकार के पूर्व वित्त सचिव राजीव कुमार को तीन वर्ष के कार्यकाल के लिए बैंक का नया पार्ट-टाइम चेयरमैन नियुक्त किया गया।

    इसी अवधि में बैंक के शीर्ष प्रबंधन और गवर्नेंस प्रक्रियाओं को लेकर भी विभिन्न स्तरों पर चर्चा हुई, लेकिन बैंक ने अपने नियमित कारोबारी संचालन को प्रभावित नहीं होने दिया। पहली तिमाही के आंकड़े बताते हैं कि बैंक की मुख्य बैंकिंग गतिविधियां मजबूत बनी हुई हैं और ग्राहकों का भरोसा कायम है।

    शेयर बाजार में भी बैंक के शेयर ने सकारात्मक प्रदर्शन दर्ज किया। सप्ताह के अंतिम कारोबारी सत्र में एचडीएफसी बैंक का शेयर बढ़त के साथ बंद हुआ। हालांकि पिछले छह महीनों में इसमें सीमित गिरावट देखने को मिली, लेकिन बीते एक वर्ष के दौरान शेयर ने उल्लेखनीय बढ़त दर्ज की है। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि मजबूत कारोबारी वृद्धि और स्थिर वित्तीय प्रदर्शन आने वाले समय में बैंक की संभावनाओं को और मजबूती प्रदान कर सकते हैं।

  • खिलौना उद्योग को पीयूष गोयल का बड़ा लक्ष्य, चार साल में 10 गुना निर्यात बढ़ाने का आह्वान, QCO जारी रखने का दिया भरोसा

    खिलौना उद्योग को पीयूष गोयल का बड़ा लक्ष्य, चार साल में 10 गुना निर्यात बढ़ाने का आह्वान, QCO जारी रखने का दिया भरोसा

    नई दिल्ली। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने भारतीय खिलौना उद्योग से वैश्विक बाजार में अपनी हिस्सेदारी तेजी से बढ़ाने का आह्वान करते हुए अगले चार वर्षों में खिलौनों के निर्यात को मौजूदा स्तर से दस गुना तक बढ़ाने का लक्ष्य निर्धारित करने की अपील की। उन्होंने उद्योग को भरोसा दिलाया कि सरकार गुणवत्ता मानकों से कोई समझौता नहीं करेगी और खिलौनों पर लागू क्वालिटी कंट्रोल ऑर्डर (QCO) को वापस लेने का कोई प्रस्ताव नहीं है। साथ ही घरेलू उद्योग को सस्ते विदेशी आयात से भी संरक्षण मिलता रहेगा।

    नई दिल्ली में आयोजित 17वें टॉय बिज इंटरनेशनल बी2बी एक्सपो 2026 को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि वैश्विक खिलौना बाजार का आकार लगभग 120 अरब डॉलर है, जबकि इसमें भारत की हिस्सेदारी अभी भी बेहद सीमित है। उनका कहना था कि भारतीय उद्योग के सामने निर्यात बढ़ाने और दुनिया के प्रमुख बाजारों में अपनी मजबूत पहचान स्थापित करने का बड़ा अवसर मौजूद है।

    उन्होंने बताया कि पिछले चार वर्षों में भारतीय खिलौनों के निर्यात में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है, लेकिन इसे अंतिम उपलब्धि नहीं माना जाना चाहिए। उद्योग को नई तकनीक, बेहतर गुणवत्ता और वैश्विक प्रतिस्पर्धा को ध्यान में रखते हुए दीर्घकालिक रणनीति तैयार करनी होगी, ताकि भारत विश्व के प्रमुख खिलौना निर्यातक देशों में अपनी जगह बना सके।

    पीयूष गोयल ने उद्योग जगत से हाल के वर्षों में भारत द्वारा किए गए मुक्त व्यापार समझौतों का अधिकतम लाभ उठाने की अपील भी की। उन्होंने कहा कि इन समझौतों के माध्यम से भारतीय कंपनियों के लिए कई विकसित देशों के बाजारों तक पहुंच आसान हुई है। उद्योग को विभिन्न देशों में व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल भेजकर स्थानीय कंपनियों, सुपरमार्केट श्रृंखलाओं और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के साथ नए व्यावसायिक संबंध विकसित करने चाहिए।

    उन्होंने आधुनिक उत्पादन तकनीकों और अत्याधुनिक मशीनरी को अपनाने पर भी विशेष जोर दिया। उनके अनुसार, उत्पादों की गुणवत्ता ही वैश्विक प्रतिस्पर्धा में सबसे बड़ी ताकत होती है। इसी उद्देश्य से उन्होंने सार्वजनिक-निजी भागीदारी मॉडल के तहत सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित करने का सुझाव दिया, जहां उत्पाद परीक्षण, डिजाइन विकास, अनुसंधान और नवाचार जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकें।

    केंद्रीय मंत्री ने स्पष्ट किया कि क्वालिटी कंट्रोल ऑर्डर को लेकर उद्योग में किसी प्रकार की भ्रम की स्थिति नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यह व्यवस्था घरेलू उपभोक्ताओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने और भारतीय उत्पादों की गुणवत्ता को अंतरराष्ट्रीय स्तर के अनुरूप बनाए रखने के लिए लागू की गई है। सरकार इसे जारी रखेगी और गुणवत्ता मानकों में किसी प्रकार की ढील नहीं दी जाएगी। साथ ही अनुचित डंपिंग के खिलाफ भी आवश्यक कदम उठाए जाते रहेंगे।

    उन्होंने यह भी बताया कि भारत और कई देशों के बीच प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौतों पर बातचीत तेजी से आगे बढ़ रही है। इन समझौतों के लागू होने से भारतीय खिलौना उद्योग को नए निर्यात बाजार उपलब्ध होंगे और अंतरराष्ट्रीय व्यापार का दायरा और विस्तृत होगा। उनका मानना है कि यदि उद्योग गुणवत्ता, नवाचार और वैश्विक विपणन पर समान रूप से ध्यान दे तो भारत आने वाले वर्षों में विश्व के खिलौना बाजार में कहीं अधिक प्रभावी भूमिका निभा सकता है।