Category: Economy

  • स्मार्टफोन खरीदने की सोच बदल रही एआई फीचर्स बने सबसे बड़ा फैसला 68 फीसदी उपभोक्ता दे रहे प्राथमिकता

    स्मार्टफोन खरीदने की सोच बदल रही एआई फीचर्स बने सबसे बड़ा फैसला 68 फीसदी उपभोक्ता दे रहे प्राथमिकता


    नई दिल्ली । मध्य पूर्व में एक बार फिर बढ़ते भू राजनीतिक तनाव के बीच भारत के लिए राहत की खबर यह है कि देश अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के मामले में पहले की तुलना में कहीं अधिक मजबूत स्थिति में खड़ा है। ईरान और अमेरिका के बीच फिर से बढ़े सैन्य तनाव तथा होर्मुज स्ट्रेट को बंद करने की घोषणा के बाद वैश्विक ऊर्जा बाजार में चिंता बढ़ गई है लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि भारत ने समय रहते आवश्यक तैयारियां कर ली हैं। इसी कारण संभावित आपूर्ति संकट का असर फिलहाल सीमित रहने की उम्मीद है।

    हाल के घटनाक्रम में अमेरिका की ओर से सैन्य कार्रवाई के बाद ईरान ने 11 जुलाई को दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री तेल मार्गों में शामिल होर्मुज स्ट्रेट को फिर से बंद करने का ऐलान किया। इसके बाद इस मार्ग से जहाजों की आवाजाही लगभग ठप हो गई। यह समुद्री रास्ता दुनिया के बड़े हिस्से में कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की आपूर्ति का प्रमुख माध्यम है इसलिए इसके प्रभावित होने का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर तुरंत दिखाई देने लगा।

    ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है तो सितंबर और अक्टूबर के दौरान कच्चे तेल की आपूर्ति लागत बढ़ सकती है। हालांकि भारत ने पहले से ही अगस्त तक के लिए कच्चे तेल और एलपीजी के आयात की व्यवस्था सुरक्षित कर ली है। यही वजह है कि निकट भविष्य में देश के भीतर ईंधन की उपलब्धता को लेकर किसी बड़े संकट की आशंका नहीं है। विशेषज्ञों के अनुसार प्राकृतिक गैस के क्षेत्र में कुछ चुनौतियां जरूर सामने आ सकती हैं लेकिन उन्हें भी प्रभावी तरीके से संभाला जा सकता है।

    मध्य पूर्व में तनाव बढ़ने के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी दर्ज की गई है। ब्रेंट क्रूड करीब पांच प्रतिशत की बढ़त के साथ 80 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया है जबकि डब्ल्यूटीआई क्रूड भी लगभग पांच प्रतिशत बढ़कर 75 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर कारोबार कर रहा है। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि यदि तनाव और बढ़ता है तो कच्चे तेल की कीमतें 80 से 85 डॉलर प्रति बैरल के बीच पहुंच सकती हैं।

    हालांकि इस बार वैश्विक बाजार में एक महत्वपूर्ण अंतर यह है कि गैर ओपेक देशों ने अपना उत्पादन पहले ही बढ़ा दिया है। इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में आपूर्ति का दबाव कुछ हद तक कम हुआ है और संभावित कमी की भरपाई करने की क्षमता भी बनी हुई है। यही कारण है कि कीमतों में बढ़ोतरी की आशंका के बावजूद वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को लेकर स्थिति पहले जैसी गंभीर नहीं मानी जा रही।

    भारत सरकार भी ऊर्जा सुरक्षा को लेकर लगातार सतर्क बनी हुई है। केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि देश के पास लगभग 60 दिनों के लिए कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस का पर्याप्त भंडार उपलब्ध है जबकि एलपीजी का करीब 45 दिनों का स्टॉक सुरक्षित रखा गया है। इसके अलावा वैकल्पिक आयात स्रोतों और रणनीतिक भंडारण की व्यवस्था भी लगातार मजबूत की जा रही है ताकि किसी भी आपात स्थिति में आम लोगों और उद्योगों पर असर कम से कम पड़े।

    विशेषज्ञों का मानना है कि भारत ने पिछले कुछ वर्षों में ऊर्जा आयात के स्रोतों में विविधता लाने रणनीतिक भंडारण क्षमता बढ़ाने और आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने पर जो काम किया है उसका फायदा अब दिखाई दे रहा है। यदि मध्य पूर्व में तनाव लंबा भी खिंचता है तो भारत के पास स्थिति से निपटने के लिए पहले की तुलना में कहीं अधिक मजबूत तैयारी मौजूद है। यही कारण है कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद देश की ऊर्जा सुरक्षा फिलहाल सुरक्षित मानी जा रही है।

  • ईरान अमेरिका तनाव के बीच भारत तैयार कच्चे तेल एलपीजी और गैस का पर्याप्त भंडार संकट से देगा सुरक्षा

    ईरान अमेरिका तनाव के बीच भारत तैयार कच्चे तेल एलपीजी और गैस का पर्याप्त भंडार संकट से देगा सुरक्षा


    नई दिल्ली । मध्य पूर्व में एक बार फिर बढ़ते भू राजनीतिक तनाव के बीच भारत के लिए राहत की खबर यह है कि देश अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के मामले में पहले की तुलना में कहीं अधिक मजबूत स्थिति में खड़ा है। ईरान और अमेरिका के बीच फिर से बढ़े सैन्य तनाव तथा होर्मुज स्ट्रेट को बंद करने की घोषणा के बाद वैश्विक ऊर्जा बाजार में चिंता बढ़ गई है लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि भारत ने समय रहते आवश्यक तैयारियां कर ली हैं। इसी कारण संभावित आपूर्ति संकट का असर फिलहाल सीमित रहने की उम्मीद है।

    हाल के घटनाक्रम में अमेरिका की ओर से सैन्य कार्रवाई के बाद ईरान ने 11 जुलाई को दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री तेल मार्गों में शामिल होर्मुज स्ट्रेट को फिर से बंद करने का ऐलान किया। इसके बाद इस मार्ग से जहाजों की आवाजाही लगभग ठप हो गई। यह समुद्री रास्ता दुनिया के बड़े हिस्से में कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की आपूर्ति का प्रमुख माध्यम है इसलिए इसके प्रभावित होने का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर तुरंत दिखाई देने लगा।

    ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है तो सितंबर और अक्टूबर के दौरान कच्चे तेल की आपूर्ति लागत बढ़ सकती है। हालांकि भारत ने पहले से ही अगस्त तक के लिए कच्चे तेल और एलपीजी के आयात की व्यवस्था सुरक्षित कर ली है। यही वजह है कि निकट भविष्य में देश के भीतर ईंधन की उपलब्धता को लेकर किसी बड़े संकट की आशंका नहीं है। विशेषज्ञों के अनुसार प्राकृतिक गैस के क्षेत्र में कुछ चुनौतियां जरूर सामने आ सकती हैं लेकिन उन्हें भी प्रभावी तरीके से संभाला जा सकता है।

    मध्य पूर्व में तनाव बढ़ने के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी दर्ज की गई है। ब्रेंट क्रूड करीब पांच प्रतिशत की बढ़त के साथ 80 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया है जबकि डब्ल्यूटीआई क्रूड भी लगभग पांच प्रतिशत बढ़कर 75 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर कारोबार कर रहा है। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि यदि तनाव और बढ़ता है तो कच्चे तेल की कीमतें 80 से 85 डॉलर प्रति बैरल के बीच पहुंच सकती हैं।

    हालांकि इस बार वैश्विक बाजार में एक महत्वपूर्ण अंतर यह है कि गैर ओपेक देशों ने अपना उत्पादन पहले ही बढ़ा दिया है। इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में आपूर्ति का दबाव कुछ हद तक कम हुआ है और संभावित कमी की भरपाई करने की क्षमता भी बनी हुई है। यही कारण है कि कीमतों में बढ़ोतरी की आशंका के बावजूद वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को लेकर स्थिति पहले जैसी गंभीर नहीं मानी जा रही।

    भारत सरकार भी ऊर्जा सुरक्षा को लेकर लगातार सतर्क बनी हुई है। केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि देश के पास लगभग 60 दिनों के लिए कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस का पर्याप्त भंडार उपलब्ध है जबकि एलपीजी का करीब 45 दिनों का स्टॉक सुरक्षित रखा गया है। इसके अलावा वैकल्पिक आयात स्रोतों और रणनीतिक भंडारण की व्यवस्था भी लगातार मजबूत की जा रही है ताकि किसी भी आपात स्थिति में आम लोगों और उद्योगों पर असर कम से कम पड़े।

    विशेषज्ञों का मानना है कि भारत ने पिछले कुछ वर्षों में ऊर्जा आयात के स्रोतों में विविधता लाने रणनीतिक भंडारण क्षमता बढ़ाने और आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने पर जो काम किया है उसका फायदा अब दिखाई दे रहा है। यदि मध्य पूर्व में तनाव लंबा भी खिंचता है तो भारत के पास स्थिति से निपटने के लिए पहले की तुलना में कहीं अधिक मजबूत तैयारी मौजूद है। यही कारण है कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद देश की ऊर्जा सुरक्षा फिलहाल सुरक्षित मानी जा रही है।

  • रियल एस्टेट सेक्टर पर निवेशकों का भरोसा मजबूत, 33 फीसदी बढ़ा प्राइवेट इक्विटी निवेश, विदेशी पूंजी ने बढ़ाई रफ्तार

    रियल एस्टेट सेक्टर पर निवेशकों का भरोसा मजबूत, 33 फीसदी बढ़ा प्राइवेट इक्विटी निवेश, विदेशी पूंजी ने बढ़ाई रफ्तार


    नई दिल्ली । भारतीय रियल एस्टेट बाजार लगातार नई ऊंचाइयों को छू रहा है और वर्ष 2026 की पहली छमाही ने इस क्षेत्र के लिए बेहद उत्साहजनक तस्वीर पेश की है। जनवरी से जून के बीच देश के रियल एस्टेट सेक्टर में 3.2 अरब डॉलर का निजी इक्विटी निवेश दर्ज किया गया है जो पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 33 प्रतिशत अधिक है। यह बढ़ोतरी इस बात का स्पष्ट संकेत है कि घरेलू और विदेशी दोनों निवेशकों का भरोसा भारतीय रियल एस्टेट बाजार पर लगातार मजबूत हो रहा है और आने वाले वर्षों में इस क्षेत्र में निवेश की संभावनाएं और अधिक बढ़ सकती हैं।

    ग्लोबल रियल एस्टेट कंसल्टिंग फर्म सैविल्स इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार केवल दूसरी तिमाही यानी अप्रैल से जून के दौरान ही करीब 2 अरब डॉलर का निवेश हुआ। यह पिछले वर्ष की समान अवधि के मुकाबले 25 प्रतिशत अधिक है। रिपोर्ट बताती है कि निवेशकों की प्राथमिकताएं अब तेजी से बदल रही हैं और पारंपरिक ऑफिस परिसंपत्तियों के साथ-साथ डेटा सेंटर जैसे आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर पर भी उनका भरोसा लगातार बढ़ रहा है।

    दूसरी तिमाही के दौरान कुल निवेश में डेटा सेंटर का हिस्सा सबसे अधिक 38 प्रतिशत रहा। इसके बाद ऑफिस सेक्टर ने 30 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ दूसरा स्थान हासिल किया जबकि रेजिडेंशियल सेक्टर 16 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ तीसरे स्थान पर रहा। हालांकि यदि पूरे जनवरी से जून की अवधि की बात करें तो ऑफिस सेक्टर अब भी सबसे आगे बना हुआ है और कुल निजी इक्विटी निवेश में इसकी हिस्सेदारी 34 प्रतिशत रही। इससे साफ है कि कॉरपोरेट गतिविधियों के विस्तार और आधुनिक कार्यस्थलों की बढ़ती मांग के कारण ऑफिस स्पेस निवेशकों की पहली पसंद बना हुआ है।

    रिपोर्ट के मुताबिक निवेश केवल पारंपरिक क्षेत्रों तक सीमित नहीं रहा बल्कि हॉस्पिटैलिटी हेल्थकेयर और स्टूडेंट हाउसिंग या को लिविंग जैसे वैकल्पिक रियल एस्टेट सेगमेंट में भी पूंजी का प्रवाह बढ़ा है। हॉस्पिटैलिटी सेक्टर में 8 प्रतिशत और स्टूडेंट हाउसिंग तथा को लिविंग में 3 प्रतिशत निवेश दर्ज किया गया। इससे यह संकेत मिलता है कि निवेशक अब तेजी से उभरते नए क्षेत्रों में भी अवसर तलाश रहे हैं।

    निवेश के स्रोतों पर नजर डालें तो इस अवधि में कुल निजी इक्विटी निवेश का 51 प्रतिशत हिस्सा घरेलू निवेशकों से आया जबकि 49 प्रतिशत निवेश विदेशी निवेशकों ने किया। घरेलू निवेश का बड़ा हिस्सा ऑफिस सेक्टर में लगाया गया और इसका लगभग 68 प्रतिशत निवेश देश के प्रमुख टियर वन शहरों में केंद्रित रहा। दूसरी ओर विदेशी निवेशकों की पूंजी का 69 प्रतिशत हिस्सा अमेरिका और कनाडा से आया जिसने मुख्य रूप से डेटा सेंटर और हॉस्पिटैलिटी सेक्टर को प्राथमिकता दी।

    विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में तेजी से बढ़ती डिजिटल अर्थव्यवस्था मजबूत शहरीकरण बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर और स्थिर आर्थिक माहौल निवेशकों को आकर्षित कर रहे हैं। डेटा सेंटर जैसे क्षेत्रों में बढ़ता निवेश इस बात का संकेत है कि डिजिटल सेवाओं और क्लाउड टेक्नोलॉजी की मांग भविष्य में और तेजी से बढ़ने वाली है।

    सैविल्स इंडिया के कैपिटल मार्केट सर्विसेज के मैनेजिंग डायरेक्टर सुमीत भाटिया का कहना है कि पहली छमाही के निवेश आंकड़े भारतीय रियल एस्टेट बाजार में निवेशकों के मजबूत विश्वास को दर्शाते हैं। उनका मानना है कि हॉस्पिटैलिटी हेल्थकेयर स्टूडेंट हाउसिंग और डेटा सेंटर जैसे क्षेत्रों में लगातार बढ़ता निवेश यह साबित करता है कि निवेशक अब भारत की डिजिटल और वैकल्पिक रियल एस्टेट ग्रोथ स्टोरी पर लंबी अवधि का दांव लगा रहे हैं। कंपनी को उम्मीद है कि आने वाली तिमाहियों में भी निवेश का यह सकारात्मक रुझान जारी रहेगा और भारतीय रियल एस्टेट बाजार वैश्विक निवेशकों के लिए आकर्षण का प्रमुख केंद्र बना रहेगा।

  • सेबी का बड़ा एक्शन कर्मचारियों पर सख्त हुई आचार संहिता शेयर बाजार में निवेश से लेकर नई नौकरी तक हर कदम पर रहेगी नजर

    सेबी का बड़ा एक्शन कर्मचारियों पर सख्त हुई आचार संहिता शेयर बाजार में निवेश से लेकर नई नौकरी तक हर कदम पर रहेगी नजर


    नई दिल्ली ।  भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड यानी सेबी ने अपने कर्मचारियों के लिए सेवा नियमों में व्यापक बदलाव करते हुए आचार संहिता को पहले से अधिक सख्त बना दिया है। नए संशोधित नियमों का उद्देश्य हितों के टकराव की संभावना को कम करना पारदर्शिता को बढ़ावा देना और बाजार नियामक संस्था की निष्पक्षता को और मजबूत बनाना है। सेबी द्वारा अधिसूचित कर्मचारी सेवा संशोधन विनियम 2026 के तहत कर्मचारियों के निवेश खुलासे नौकरी बदलने और उपहार स्वीकार करने से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रावधान लागू किए गए हैं।

    नए नियमों के अनुसार अब कर्मचारियों के साथ उनके परिवार और आश्रितों की परिभाषा का भी विस्तार किया गया है। इसमें गोद लिए गए बच्चे सौतेले बच्चे और ऐसे लोग भी शामिल होंगे जो किसी कर्मचारी पर आर्थिक रूप से निर्भर हैं। इससे अब निवेश और सेवा संबंधी नियमों का दायरा पहले की तुलना में कहीं अधिक व्यापक हो जाएगा और किसी भी प्रकार के हितों के टकराव की संभावना पर अधिक प्रभावी निगरानी रखी जा सकेगी।

    सेबी ने कर्मचारियों के निवेश नियमों में सबसे बड़ा बदलाव किया है। अब कर्मचारी और उनके परिवार के सदस्य नौकरी के दौरान शेयर इक्विटी में परिवर्तनीय प्रतिभूतियों और डेरिवेटिव उत्पादों में नया निवेश नहीं कर सकेंगे। हालांकि म्यूचुअल फंड रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट यानी रीट्स और अन्य विनियमित सामूहिक निवेश योजनाओं में निवेश की अनुमति पहले की तरह जारी रहेगी। इसके साथ ही ऐसे निवेश उत्पादों में निवेश की अधिकतम सीमा भी तय कर दी गई है जो किसी कर्मचारी के कुल निवेश पोर्टफोलियो के 25 प्रतिशत से अधिक नहीं हो सकती।

    कुछ विशेष परिस्थितियों में कर्मचारियों को छूट भी दी गई है। इनमें जीवनसाथी को मिलने वाले एम्प्लॉई स्टॉक ऑप्शन और विवेकाधीन पोर्टफोलियो प्रबंधन सेवाओं के माध्यम से किए गए निवेश शामिल हैं। सेबी का मानना है कि इन प्रावधानों से कर्मचारियों की निष्पक्षता बनी रहेगी और बाजार से जुड़े संवेदनशील निर्णयों पर किसी प्रकार का निजी प्रभाव नहीं पड़ेगा।

    संशोधित नियमों के तहत यदि कोई कर्मचारी इस्तीफा देता है या सेवानिवृत्त होता है तो उस पर दो वर्ष का कूलिंग ऑफ पीरियड लागू रहेगा। इस अवधि के दौरान वह किसी भी व्यक्ति कंपनी या संस्था की ओर से सेबी के समक्ष किसी मामले में पैरवी नहीं कर सकेगा। यह प्रतिबंध जांच सुनवाई सेटलमेंट और विभिन्न मंजूरियों से जुड़े मामलों पर भी लागू रहेगा। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सेवा के दौरान प्राप्त गोपनीय जानकारी का निजी लाभ के लिए उपयोग न किया जा सके।

    नौकरी बदलने से जुड़े नियमों को भी अधिक पारदर्शी बनाया गया है। यदि कोई कर्मचारी किसी अन्य संस्था या कंपनी में नौकरी के लिए बातचीत शुरू करता है तो उसे एक महीने के भीतर इसकी जानकारी सेबी को देना अनिवार्य होगा। इससे संभावित हितों के टकराव की समय रहते पहचान की जा सकेगी और आवश्यक कदम उठाए जा सकेंगे।

    सेबी ने उपहार स्वीकार करने के नियमों में भी संशोधन किया है। अब कर्मचारियों को 50 हजार रुपए तक के उपहार की रिपोर्ट करने की आवश्यकता नहीं होगी जबकि पहले यह सीमा 10 हजार रुपए थी। साथ ही यह भी स्पष्ट कर दिया गया है कि सामाजिक और पारंपरिक अवसरों पर मिलने वाले कौन से उपहार नियमों के अनुरूप स्वीकार किए जा सकते हैं।

    विशेषज्ञों का मानना है कि सेबी के ये नए नियम नियामकीय संस्थाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। इससे न केवल कर्मचारियों के आचरण पर बेहतर निगरानी रखी जा सकेगी बल्कि निवेशकों का भरोसा भी और मजबूत होगा। बदलते वित्तीय माहौल में यह पहल भारतीय पूंजी बाजार की विश्वसनीयता को नई मजबूती देने वाली मानी जा रही है।

  • विदेशी निवेशकों की वापसी से भारतीय शेयर बाजार को नई रफ्तार, जून 2027 तक निफ्टी 26,500 पहुंचने की उम्मीद

    विदेशी निवेशकों की वापसी से भारतीय शेयर बाजार को नई रफ्तार, जून 2027 तक निफ्टी 26,500 पहुंचने की उम्मीद


    नई दिल्ली । भारतीय शेयर बाजार को लेकर वैश्विक निवेश बैंक गोल्डमैन सैक्स ने उत्साहजनक अनुमान जारी किया है। संस्थान का मानना है कि भारत में विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली का दौर अब लगभग समाप्त हो चुका है और आने वाले महीनों में विदेशी पूंजी का प्रवाह फिर से तेज हो सकता है। मजबूत घरेलू मांग, स्थिर आर्थिक आधार और निवेशकों की बदलती रणनीति के चलते भारतीय इक्विटी बाजार में तेजी की संभावना जताई गई है।

    गोल्डमैन सैक्स के एशिया मैक्रो रिसर्च के सह-प्रमुख और एशिया-पैसिफिक इक्विटी रणनीतिकार टिमोथी मो, अमोरिता गोयल और सुनील कौल द्वारा जारी इंडिया स्ट्रैटेजी नोट के अनुसार जून 2027 तक निफ्टी 26,500 अंक के स्तर तक पहुंच सकता है। यह मौजूदा स्तर से करीब 10 प्रतिशत की संभावित बढ़त दर्शाता है।

    रिपोर्ट में कहा गया है कि मई 2026 की तुलना में अब बाजार को लेकर दृष्टिकोण पूरी तरह बदल चुका है। उस समय उत्तर एशियाई बाजारों की तुलना में भारतीय बाजार कम आकर्षक माना जा रहा था और विदेशी निवेशकों की जल्द वापसी की उम्मीद भी नहीं थी। हालांकि अब हालात बदलते नजर आ रहे हैं।

    विश्लेषकों के मुताबिक वर्ष 2026 की पहली छमाही में वैश्विक निवेशकों ने भारत को फंडिंग मार्केट की तरह इस्तेमाल किया। इस दौरान महज साढ़े तीन महीनों में विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार से 30 अरब डॉलर से अधिक की बिकवाली की। लेकिन जून के दूसरे पखवाड़े से तस्वीर बदलने लगी और विदेशी निवेशक फिर से शुद्ध खरीदार बन गए। इस दौरान उन्होंने करीब दो अरब डॉलर का निवेश किया।

    गोल्डमैन सैक्स का मानना है कि वैश्विक फंडों की भारतीय बाजार में हिस्सेदारी अभी भी सामान्य स्तर से कम है। ऐसे में उनके पास दोबारा निवेश बढ़ाने की पर्याप्त गुंजाइश मौजूद है। हालांकि कंपनियों की आय में संशोधन और अन्य वैश्विक बाजारों की तुलना में मूल्यांकन निवेशकों के लिए चुनौती बने रह सकते हैं, लेकिन घरेलू अर्थव्यवस्था में सुधार और मांग में मजबूती बाजार की धारणा को सकारात्मक बनाए रखेगी।

    एनएसडीएल के आंकड़ों के अनुसार वित्त वर्ष 2026-27 में अब तक विदेशी संस्थागत निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार से 1.28 लाख करोड़ रुपए की शुद्ध निकासी की है। जून महीने में एफआईआई ने 49,340 करोड़ रुपए की बिकवाली की थी, जबकि जुलाई में अब तक 15,157 करोड़ रुपए का शुद्ध निवेश दर्ज किया गया है। इससे संकेत मिलता है कि विदेशी निवेशकों का भरोसा धीरे-धीरे भारतीय बाजार की ओर लौट रहा है।

    बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यदि घरेलू आर्थिक गतिविधियां मजबूत बनी रहती हैं और वैश्विक परिस्थितियां अनुकूल रहती हैं तो आने वाले समय में भारतीय शेयर बाजार नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ सकता है। ऐसे में निवेशकों की नजर अब विदेशी निवेश के रुझान और कंपनियों के तिमाही नतीजों पर रहेगी।

  • मिडिल ईस्ट तनाव के बीच रूसी तेल की जमकर हो रही खरीदी… रिकॉर्ड हाई पर पहुंचा भारत का आयात

    मिडिल ईस्ट तनाव के बीच रूसी तेल की जमकर हो रही खरीदी… रिकॉर्ड हाई पर पहुंचा भारत का आयात


    नई दिल्ली।
    अमेरिका-ईरान के बीच शुरू हुए युद्ध (America-Iran War) से ग्लोबल टेंशन (Global Tension) फिर से चरम पर पहुंच गई है और होर्मुज स्ट्रेट बंद (Hormuz Strait Closure) होने के चलते दुनिया के तमाम देशों के सामने तेल-गैस का संकट गहराने लगा है. वहीं दूसरी ओर भारत की बात करें, तो मिडिल ईस्ट के देशों तनाव के बीच भारत ने अपने तेल आयात में विविधता लाने का जो कदम Plan-B के तहत उठाया, उसका फायदा मिल रहा है।

    मिडिल ईस्ट में तनाव के बीच भी भारत लगातार रूसी तेल खरीदने (India’s Russian Oil Import) में लगा है और ताजा आंकड़े देखें, तो जून महीने में भारत की रूसी तेल आयात रिकॉर्ड हाई पर पहुंच गया, इसमें 34 फीसदी का जबर्दस्त उछाल दर्ज किया गया है।


    CREA की रिपोर्ट में बड़ा खुलासा

    एक रिपोर्ट में सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर (CREA) के हवाले से बताया गया है कि रूस के कुल तेल निर्यात राजस्व में गिरावट के बावजूद, भारत का रूसी कच्चे तेल का आयात बीते जून में रिकॉर्ड लेवल पर पहुंच गया, जो इससे पिछले मई महीने की तुलना में 34% अधिक रहा।


    Oil-Gas Supply पर फिर मंडराया बड़ा खतरा

    डेटा पर नजर डालें, तो भारत ने जून में 4.5 अरब यूरो मूल्य का रूसी कच्चा तेल खरीदा, जो उसके कुल 5.5 अरब यूरो के रूसी जीवाश्म ईंधन आयात का 83% है. इस आंकड़े के साथ भारत चीन के बाद रूसी ईंधन का दूसरा सबसे बड़ा खरीदार बना है. वहीं जून में चीन रूस का सबसे बड़ा ग्राहक बना रहा, जिसने 7.3 अरब यूरो की खरीदारी की.


    रिफाइनरियों की आपूर्ति में उछाल

    भारत के कुल कच्चे तेल आयात में महीने-दर-महीने 5.4 फीसदी की बढ़ोतरी देखने को मिली है और यह उछाल प्रमुख रिफाइनरियों को रूसी आपूर्ति में इजाफे के चलते देखने को मिली है. रिलायंस इंडस्ट्रीज की जामनगर रिफाइनरी को सप्लाई जून में मई के मुकाबले 150% बढ़ गई, जबकि इंडियन ऑयल कॉर्प (IOCL) की पारादीप रिफाइनरी में आयात 126% बढ़ा. CREA का कहना है कि BPCL की कोच्चि रिफाइनरी 82% और नायरा एनर्जी की वडीनार रिफाइनरी में 45% की वृद्धि हुई है।

    Russian Oil की खरीद, फिर एक्सपोर्ट
    न सिर्फ भारत की रूसी कच्चे तेल से तैयार ईंधन के ग्लोबल व्यापार में बड़ी भूमिका बनी हुई है. यही नहीं रूस से तेल का आयात करते भारत, तुर्की, ब्रुनेई और जॉर्जिया की रिफाइनरियों ने जून में रूस पर प्रतिबंध लगाने वाले देशों को जमकर तेल प्रोडक्ट का निर्यात भी किया. यूरोपीय संघ, ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका को 814 मिलियन यूरो मूल्य के तेल उत्पादों का निर्यात किया गया।

    बात अमेरिका को निर्यात की करें, तो इसमें भारत की जामनगर रिफाइनरी, तुर्की में SOCAR के स्वामित्व वाली STAR रिफाइनरी और तुप्रास इजमित रिफाइनरी आगे है. सीआरईए के आंकड़ों के मुताबिक, बीते तीन महीनों में, तुप्रास इजमित रिफाइनरी के कच्चे तेल का 60% और जामनगर रिफाइनरी के कच्चे तेल का 27% रूस से आया था और इनके द्वारा US को निर्यात किया गया।

  • सोना-चांदी की कीमतों में गिरावट के संकेत, ईरान-अमेरिका तनाव का पड़ सकता है असर

    सोना-चांदी की कीमतों में गिरावट के संकेत, ईरान-अमेरिका तनाव का पड़ सकता है असर


    नई दिल्ली। ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और महंगाई के आंकड़ों के बीच इस सप्ताह सोने और चांदी की कीमतों में हलचल जारी रहने की संभावना है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल कीमती धातुओं पर दबाव बना रह सकता है और इनमें गिरावट का रुख देखने को मिल सकता है।

    विशेषज्ञों के अनुसार, आने वाले दिनों में महंगाई से जुड़े आंकड़े वैश्विक ब्याज दरों को लेकर निवेशकों की उम्मीदों को प्रभावित करेंगे, जिसका सीधा असर सोने-चांदी की कीमतों पर पड़ सकता है।

    ईरान-अमेरिका तनाव से वैश्विक बाजारों में चिंता
    पश्चिम एशिया में एक बार फिर बढ़े तनाव ने अंतरराष्ट्रीय बाजारों में चिंता बढ़ा दी है। ईरान ने हाल में दावा किया था कि उसने एक ऐसे जहाज को निशाना बनाया जो उसकी अनुमति के बिना निर्धारित मार्ग से गुजर रहा था। इसके बाद ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद करने की घोषणा की।

    इसके जवाब में अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने ईरान पर हमले किए, जिसके बाद ईरान ने संयुक्त अरब अमीरात, कुवैत और बहरीन में अमेरिका से जुड़े ठिकानों को निशाना बनाया। इस घटनाक्रम के बाद वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता बढ़ गई है।

    जेएम फाइनेंशियल सर्विसेज लिमिटेड के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट (कमोडिटी एंड करेंसी रिसर्च) प्रणव मेर के अनुसार, सोने और चांदी में फिलहाल गिरावट और करेक्शन का दौर जारी है। उन्होंने कहा कि अब बाजार की नजरें अमेरिका-ईरान तनाव की दिशा पर रहेंगी।

    उनके मुताबिक, यदि भू-राजनीतिक तनाव और बढ़ता है तो कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आ सकती है। इसके साथ ही अमेरिकी डॉलर और अमेरिकी बॉन्ड प्रतिफल जैसे सुरक्षित निवेश विकल्पों को मजबूती मिल सकती है।

    पिछले सप्ताह सोने-चांदी के दाम में गिरावट
    घरेलू बाजार में मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर अगस्त डिलीवरी वाले सोने का वायदा भाव सप्ताह के दौरान 3,900 रुपये यानी 2.65 प्रतिशत गिरकर 1.43 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ। वहीं, सितंबर अनुबंध वाली चांदी में 14,746 रुपये यानी 6.2 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई और इसका भाव 2.22 लाख रुपये प्रति किलोग्राम रह गया।

    तेजी पर निवेशकों ने की मुनाफावसूली
    एलकेपी सिक्योरिटीज के जतिन त्रिवेदी ने कहा कि सोने के लिए पिछला सप्ताह भी कमजोर रहा। मजबूत अमेरिकी डॉलर, कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और ब्याज दरों में बढ़ोतरी की आशंका ने निवेशकों की धारणा को प्रभावित किया, जिससे सोने में दो प्रतिशत से अधिक की गिरावट आई। उन्होंने कहा कि कीमतों में सुधार की कोशिशों के बावजूद तेजी टिक नहीं पाई और हर उछाल पर निवेशकों ने मुनाफावसूली की। त्रिवेदी के मुताबिक, भारतीय रुपये में मामूली कमजोरी से एमसीएक्स सोने को कुछ समर्थन जरूर मिला, लेकिन वैश्विक बाजार में कमजोर रुख ने इसके असर को सीमित कर दिया।

    अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी नरमी
    अंतरराष्ट्रीय बाजार में न्यूयॉर्क कॉमेक्स सोना वायदा 12 डॉलर यानी 0.3 प्रतिशत की गिरावट के साथ 4,113.7 डॉलर प्रति औंस पर बंद हुआ। वहीं, चांदी में 1.5 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई और यह 60.16 डॉलर प्रति औंस पर रही।

    अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों पर रहेगी बाजार की नजर
    विशेषज्ञों के अनुसार, निवेशक अब अमेरिकी फेडरल रिजर्व की आगे की मौद्रिक नीति को समझने के लिए कई अहम आर्थिक आंकड़ों पर नजर रखेंगे। इनमें खुदरा बिक्री, आवास क्षेत्र के आंकड़े और साप्ताहिक बेरोजगारी दावे प्रमुख हैं। इन आंकड़ों से ब्याज दरों की दिशा को लेकर संकेत मिल सकते हैं, जिसका असर आने वाले समय में सोने और चांदी की कीमतों पर दिखाई देगा।

  • 13 जुलाई को शेयर बाजार में क्या होगा बड़ा उलटफेर या नई तेजी निवेशकों के लिए जानना क्यों है जरूरी

    13 जुलाई को शेयर बाजार में क्या होगा बड़ा उलटफेर या नई तेजी निवेशकों के लिए जानना क्यों है जरूरी


    नई दिल्ली । भारतीय शेयर बाजार में 13 जुलाई का कारोबारी दिन निवेशकों के लिए काफी अहम माना जा रहा है। पिछले कुछ सत्रों में बाजार में उतार चढ़ाव देखने को मिला है और अब सभी की नजर सोमवार के कारोबार पर टिकी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि बाजार की दिशा तय करने में वैश्विक बाजारों का रुख विदेशी निवेशकों की खरीद बिक्री कंपनियों के तिमाही नतीजे और कच्चे तेल की कीमतें महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।

    यदि एशियाई और अमेरिकी बाजारों से सकारात्मक संकेत मिलते हैं तो भारतीय बाजार की शुरुआत मजबूती के साथ हो सकती है। हालांकि यदि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर किसी तरह की आर्थिक या भू राजनीतिक चिंता सामने आती है तो बाजार में दबाव भी देखने को मिल सकता है। ऐसे में निवेशकों को जल्दबाजी में बड़े फैसले लेने से बचना चाहिए।

    इस सप्ताह कई बड़ी कंपनियों के पहली तिमाही के वित्तीय नतीजे आने वाले हैं। इन नतीजों का असर बैंकिंग आईटी ऑटो फार्मा और एफएमसीजी सेक्टर के शेयरों पर साफ दिखाई दे सकता है। यदि कंपनियों के परिणाम उम्मीद से बेहतर रहते हैं तो बाजार में नई खरीदारी देखने को मिल सकती है। वहीं कमजोर नतीजों की स्थिति में मुनाफावसूली का दबाव भी बढ़ सकता है।

    विदेशी संस्थागत निवेशकों और घरेलू निवेशकों की गतिविधियां भी बाजार की चाल तय करेंगी। पिछले कुछ दिनों में विदेशी निवेशकों की खरीदारी ने बाजार को सहारा दिया है। यदि यह रुझान सोमवार को भी जारी रहता है तो सेंसेक्स और निफ्टी में तेजी की संभावना मजबूत हो सकती है। दूसरी ओर बिकवाली बढ़ने पर बाजार में कमजोरी भी आ सकती है।

    तकनीकी विश्लेषकों का कहना है कि निफ्टी के लिए कुछ प्रमुख स्तरों पर नजर रखना जरूरी होगा। यदि बाजार इन स्तरों के ऊपर टिकता है तो आगे तेजी का रास्ता खुल सकता है। वहीं महत्वपूर्ण सपोर्ट स्तर टूटने पर बाजार में गिरावट तेज हो सकती है। इसलिए ट्रेडर्स को स्टॉप लॉस के साथ ही कारोबार करने की सलाह दी जा रही है।

    लंबी अवधि के निवेशकों के लिए यह समय धैर्य बनाए रखने का है। बाजार में आने वाले छोटे उतार चढ़ाव से घबराने के बजाय मजबूत कंपनियों पर भरोसा बनाए रखना बेहतर रणनीति हो सकती है। जिन निवेशकों का लक्ष्य लंबी अवधि का है उन्हें अच्छी गुणवत्ता वाले शेयरों में चरणबद्ध निवेश करने पर विचार करना चाहिए।

    कुल मिलाकर 13 जुलाई का कारोबारी दिन कई महत्वपूर्ण संकेत लेकर आएगा। वैश्विक बाजारों की चाल तिमाही नतीजे विदेशी निवेशकों का रुख और आर्थिक घटनाक्रम भारतीय शेयर बाजार की दिशा तय करेंगे। निवेशकों के लिए सबसे जरूरी बात यह होगी कि वे अफवाहों से दूर रहें सही जानकारी के आधार पर निर्णय लें और जोखिम प्रबंधन को प्राथमिकता दें। यही रणनीति उन्हें बाजार के उतार चढ़ाव के बीच बेहतर अवसर दिला सकती है।

  • भारत की सबसे बड़ी कंपनियों का मिला-जुला प्रदर्शन, चार दिग्गजों की बाजार वैल्यू बढ़ी, छह कंपनियों के मार्केटकैप में आई गिरावट

    भारत की सबसे बड़ी कंपनियों का मिला-जुला प्रदर्शन, चार दिग्गजों की बाजार वैल्यू बढ़ी, छह कंपनियों के मार्केटकैप में आई गिरावट


    नई दिल्ली ।
    भारतीय शेयर बाजार में बीते सप्ताह उतार-चढ़ाव के बीच देश की शीर्ष 10 सूचीबद्ध कंपनियों का प्रदर्शन मिश्रित रहा। इस दौरान चार प्रमुख कंपनियों के बाजार पूंजीकरण में कुल 92,995.48 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी दर्ज की गई, जबकि छह कंपनियों के मार्केटकैप में गिरावट देखने को मिली। सबसे अधिक लाभ एचडीएफसी बैंक और भारती एयरटेल को हुआ, जिन्होंने निवेशकों की मजबूत रुचि के चलते अपने बाजार मूल्य में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की।

    समीक्षा अवधि के दौरान एचडीएफसी बैंक सबसे अधिक लाभ हासिल करने वाली कंपनी रही। बैंक के बाजार पूंजीकरण में 35,808.09 करोड़ रुपये की वृद्धि हुई, जिससे उसका कुल बाजार मूल्य बढ़कर 12.69 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया। इसके बाद भारती एयरटेल का स्थान रहा, जिसके बाजार पूंजीकरण में 34,896.92 करोड़ रुपये का इजाफा हुआ और कंपनी का कुल मूल्य लगभग 11.99 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया।

    रिलायंस इंडस्ट्रीज और भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) ने भी सकारात्मक प्रदर्शन किया। रिलायंस इंडस्ट्रीज के बाजार पूंजीकरण में 6,224.97 करोड़ रुपये की वृद्धि दर्ज की गई, जिससे कंपनी का कुल मूल्य बढ़कर 17.71 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया। वहीं एलआईसी के मार्केटकैप में 16,065.50 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी हुई और उसका कुल बाजार मूल्य 5.60 लाख करोड़ रुपये के पार पहुंच गया।

    दूसरी ओर, शीर्ष 10 कंपनियों में शामिल छह कंपनियों के बाजार पूंजीकरण में गिरावट दर्ज की गई। सबसे अधिक नुकसान हिंदुस्तान यूनिलीवर को हुआ, जिसके बाजार मूल्य में 12,088.65 करोड़ रुपये की कमी आई। इसके अलावा लार्सन एंड टुब्रो, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, बजाज फाइनेंस, आईसीआईसीआई बैंक और भारतीय स्टेट बैंक के मार्केटकैप में भी गिरावट दर्ज की गई। हालांकि इन कंपनियों की बाजार स्थिति मजबूत बनी हुई है, लेकिन सप्ताह के दौरान निवेशकों की धारणा और बाजार की चाल का असर इनके मूल्यांकन पर दिखाई दिया।

    विश्लेषकों के अनुसार, वैश्विक आर्थिक संकेतकों, विदेशी निवेशकों की गतिविधियों, ब्याज दरों की संभावनाओं और कॉर्पोरेट प्रदर्शन से जुड़ी उम्मीदों का असर बड़ी कंपनियों के शेयरों पर लगातार बना हुआ है। इसी कारण अलग-अलग क्षेत्रों की कंपनियों में निवेशकों का रुझान भी अलग-अलग देखने को मिल रहा है। बैंकिंग और दूरसंचार क्षेत्र की कुछ कंपनियों ने बेहतर प्रदर्शन किया, जबकि उपभोक्ता, आईटी और वित्तीय क्षेत्र की कुछ कंपनियों पर दबाव बना रहा।

    मिश्रित प्रदर्शन के बावजूद बाजार पूंजीकरण के आधार पर रिलायंस इंडस्ट्रीज देश की सबसे मूल्यवान सूचीबद्ध कंपनी बनी रही। इसके बाद एचडीएफसी बैंक, भारती एयरटेल, आईसीआईसीआई बैंक, भारतीय स्टेट बैंक, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, बजाज फाइनेंस, भारतीय जीवन बीमा निगम, लार्सन एंड टुब्रो और हिंदुस्तान यूनिलीवर का स्थान रहा।

    विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले सप्ताहों में कंपनियों के तिमाही नतीजे, वैश्विक बाजारों की दिशा और विदेशी निवेशकों की गतिविधियां भारतीय शेयर बाजार की चाल तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। ऐसे में निवेशकों की नजर प्रमुख कंपनियों के वित्तीय प्रदर्शन और व्यापक आर्थिक संकेतकों पर बनी रहेगी, जो आगे बाजार पूंजीकरण में बदलाव का प्रमुख आधार बन सकते हैं।

  • 16 से 19 जुलाई के बीच कई शहरों में अलग-अलग दिनों पर बंद रहेंगे बैंक, शाखा जाने से पहले जरूर देखें अपने शहर की छुट्टियों की सूची

    16 से 19 जुलाई के बीच कई शहरों में अलग-अलग दिनों पर बंद रहेंगे बैंक, शाखा जाने से पहले जरूर देखें अपने शहर की छुट्टियों की सूची


    नई दिल्ली ।
    अगले सप्ताह बैंकिंग सेवाओं से जुड़ा कोई भी आवश्यक कार्य करने की योजना बना रहे ग्राहकों के लिए बैंक अवकाश की जानकारी पहले से जानना महत्वपूर्ण होगा। 16 जुलाई से 19 जुलाई के बीच देश के अलग-अलग शहरों में स्थानीय पर्वों, स्मृति दिवस और साप्ताहिक अवकाश के कारण बैंक शाखाएं बंद रहेंगी। ऐसे में ग्राहकों को सलाह दी जाती है कि बैंक पहुंचने से पहले अपने शहर में लागू अवकाश की स्थिति अवश्य जांच लें, ताकि किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।

    16 जुलाई को देश के कुछ चुनिंदा शहरों में बैंक बंद रहेंगे। इस दिन भुवनेश्वर, देहरादून और इंफाल में स्थानीय पर्वों और सांस्कृतिक आयोजनों के चलते बैंक शाखाओं में कामकाज नहीं होगा। ओडिशा में रथ यात्रा तथा उत्तराखंड में हरेला पर्व के अवसर पर अवकाश रहेगा, जबकि संबंधित स्थानीय अवकाश के कारण इंफाल में भी बैंक सेवाएं प्रभावित रहेंगी। इन शहरों में ग्राहकों को अपने बैंकिंग कार्य निर्धारित तिथि से पहले या बाद में निपटाने की योजना बनानी चाहिए।

    17 जुलाई को बैंक अवकाश केवल मेघालय की राजधानी शिलांग में रहेगा। यहां तिरोत सिंह की पुण्यतिथि के अवसर पर सरकारी अवकाश घोषित होने के कारण बैंक शाखाएं बंद रहेंगी। यह अवकाश केवल स्थानीय स्तर पर लागू होगा, इसलिए देश के अन्य हिस्सों में सामान्य बैंकिंग सेवाएं जारी रहेंगी।

    18 जुलाई को सिक्किम की राजधानी गंगटोक में द्रुकपा त्शे-जी पर्व के अवसर पर बैंक बंद रहेंगे। यह पर्व स्थानीय धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व रखता है, जिसके कारण इस दिन बैंक शाखाओं में नियमित कामकाज नहीं होगा। गंगटोक के अलावा देश के अधिकांश शहरों में बैंक सामान्य रूप से खुले रहेंगे।

    19 जुलाई को रविवार होने के कारण पूरे देश में सभी सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के बैंक शाखा स्तर पर बंद रहेंगे। यह नियमित साप्ताहिक अवकाश है और देशभर में लागू होगा। जिन ग्राहकों को नकद जमा, चेक क्लियरेंस, ड्राफ्ट या अन्य शाखा आधारित सेवाओं की आवश्यकता है, उन्हें रविवार से पहले अपने कार्य पूरे करने चाहिए।

    हालांकि शाखाएं बंद रहने के बावजूद डिजिटल बैंकिंग सेवाओं पर इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। इंटरनेट बैंकिंग, मोबाइल बैंकिंग, यूपीआई, एटीएम, कार्ड भुगतान और अन्य ऑनलाइन सेवाएं सामान्य रूप से उपलब्ध रहेंगी। ग्राहक धन हस्तांतरण, बिल भुगतान, बैलेंस जांच और अन्य डिजिटल लेनदेन पहले की तरह कर सकेंगे।

    भारतीय रिजर्व बैंक प्रत्येक वर्ष और प्रत्येक महीने के लिए बैंक अवकाश की सूची जारी करता है, जिसमें राष्ट्रीय अवकाशों के साथ-साथ विभिन्न राज्यों और शहरों के स्थानीय त्योहारों एवं विशेष अवसरों को भी शामिल किया जाता है। यही कारण है कि पूरे देश में सभी शहरों में एक ही दिन बैंक बंद नहीं रहते। ऐसे में किसी भी महत्वपूर्ण बैंकिंग कार्य के लिए शाखा जाने से पहले अपने शहर में लागू अवकाश की जानकारी की पुष्टि करना ग्राहकों के लिए सबसे बेहतर विकल्प माना जाता है। इससे समय की बचत होगी और बैंकिंग कार्य बिना किसी अनावश्यक परेशानी के पूरे किए जा सकेंगे।