Category: Economy

  • अगले हफ्ते कैसी रहेगी शेयर बाजार की चाल? ऑटो सेल्स, GST और कच्चा तेल तय करेंगे दिशा

    अगले हफ्ते कैसी रहेगी शेयर बाजार की चाल? ऑटो सेल्स, GST और कच्चा तेल तय करेंगे दिशा


    नई दिल्ली भारतीय शेयर बाजार के लिए आने वाला हफ्ता बेहद अहम रहने वाला है। नए वित्त वर्ष 2026-27 की शुरुआत के साथ कई ऐसे बड़े फैक्टर सामने आएंगे, जो बाजार की दिशा तय करेंगे। कंपनियों की नजर दूसरी कंपनियों पर ऑटो सेल्स डेटा, GST कलेक्शन, कच्चे तेल की कीमतें और वैश्विक तनाव पर टिकी रहेगी।

    1 अप्रैल के आंकड़े दिखाएंगे अर्थव्यवस्था की सेहत
    1 अप्रैल को ऑटो कंपनियां अपनी बिक्री के आंकड़े जारी करेंगी, वहीं सरकार गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (GST) कलेक्शन डेटा पेश करेगी। ये आंकड़े देश में मांग (डिमांड) की स्थिति का साफ संकेत देंगे। अगर आंकड़े मजबूत रहे, तो बाजार में पॉजिटिव माहौल बन सकता है।

    कच्चे तेल की कीमतें बढ़ना बना चिंता का कारण
    वैश्विक स्तर पर तनाव के चलते कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल देखने को मिला है। ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत करीब 105 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच चुकी है। भारत अपनी जरूरत का लगभग 80% तेल आयात करता है, इसलिए कीमतों में बढ़ोतरी से महंगाई और बाजार दोनों पर दबाव बढ़ सकता है।

    मध्य पूर्व तनाव से बढ़ते अनिश्चितता
    यूनाइटेड स्टेट्स, इज़राइल और ईरान के बीच जारी तनाव और संघर्ष का असर भी बाजार पर साफ दिख रहा है। इस जियोपॉलिटिकल अनिश्चितता के चलते निवेशक सतर्क रुख अपना रहे हैं।

    FII का रुख बना रहेगा निवेशक
    विदेशी निवेशक (FII) पिछले कई हफ्तों से लगातार बिकवाली कर रहे हैं। अगर यह ट्रेंड जारी रहता है, तो बाजार पर दबाव बना रह सकता है। वहीं, अगर FII खरीदारी शुरू करते हैं, तो बाजार में तेजी से देखने को मिल सकती है।

    पिछले हफ्ते बाजार में रही गिरावट
    23 से 27 मार्च के बीच बाजार में कमजोरी देखी गई:

    निफ्टी 50 करीब 1.28% गिरकर 22,819 पर बंद हुआ
    BSE सेंसेक्स 1.27% गिरकर 73,583 पर पहुंच गया

    मिडकैप और स्मॉलकैप रिकवरी में भी गिरावट दर्ज की गई, जिससे बाजार का सेंटिमेंट कमजोर रहा।

    किन सेक्टर्स पर रहा दबाव, कौन चमका?
    पिछले हफ़्ते:

    डिफेंस, PSU बैंक, रियल्टी और मेटल सेक्टर में बड़ी गिरावट
    IT, हेल्थकेयर और फार्मा सेक्टर में तेज़ी से गिरावट

    इससे साफ़ है कि इन्वेस्टर डिफेंसिव सेक्टर की ओर झुक रहे हैं।

    इन्वेस्टर के लिए क्या है स्ट्रैटेजी?
    आने वाला हफ़्ता डेटा और ग्लोबल लेवल पर आधारित रहेगा। ऐसे में:

    जल्दबाजी में निवेश से बचें
    बड़े इवेंट्स पर नज़र रखें
    सेक्टर-बेस्ड स्ट्रैटेजी अपनाएं

  • 1 अप्रैल से क्रेडिट कार्ड निययों में होगा बदलाव, हाई ट्रांजैक्शन पर रहेगी नजर, जानें 5 बड़े बदलाव

    1 अप्रैल से क्रेडिट कार्ड निययों में होगा बदलाव, हाई ट्रांजैक्शन पर रहेगी नजर, जानें 5 बड़े बदलाव


    नई दिल्ली । अगर आप भी क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल करते हैं, तो आने वाली 1 अप्रैल 2026 की तारीख आपके लिए अहम हो सकती है। इस दिन से क्रेडिट कार्ड से जुड़े कई बड़े बदलाव लागू होने जा रहे हैं। ये बदलाव इनकम टैक्स एक्ट 2025 के तहत प्रस्तावित हैं। नए नियमों के लागू होने के बाद क्रेडिट कार्ड के इस्तेमाल पर निगरानी और सख्त हो जाएगी। खासतौर पर पैन कार्ड लिंकिंग और हाई वैल्यू ट्रांजैक्शंस पर नजर बढ़ेगी।

    हालांकि आम उपभोक्ताओं के रोजमर्रा के खर्च पर इसका ज्यादा असर नहीं पड़ेगा, लेकिन ज्यादा खर्च करने वाले या विदेश यात्रा करने वालों के लिए ये बदलाव महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं।

    हाई वैल्यू ट्रांजैक्शंस पर कड़ी निगरानी
    1 अप्रैल 2026 से सबसे बड़ा बदलाव ज्यादा खर्च करने वाले यूजर्स के लिए होगा। नए नियमों के अनुसार, यदि किसी वित्त वर्ष में आपके क्रेडिट कार्ड से 10 लाख रुपये या उससे अधिक का भुगतान होता है, तो बैंक इसकी जानकारी इनकम टैक्स विभाग को दे सकता है। इसके अलावा, एक तय सीमा से अधिक विदेशी खर्चों पर भी नजर रखी जाएगी। यदि आपका खर्च आपकी घोषित आय से ज्यादा पाया जाता है, तो आपको स्पष्टीकरण के लिए नोटिस मिल सकता है।

    PAN कार्ड लिंकिंग होगी जरूरी
    अगले महीने से क्रेडिट कार्ड के लिए पैन कार्ड अनिवार्य कर दिया जाएगा। 1 अप्रैल 2026 के बाद बिना पैन नंबर के नया क्रेडिट कार्ड जारी नहीं होगा। साथ ही मौजूदा कार्डधारकों को भी अपना कार्ड पैन से लिंक कराना होगा। इससे क्रेडिट कार्ड आपकी टैक्स पहचान का अहम हिस्सा बन जाएगा।

    कंपनी के कार्ड के इस्तेमाल पर टैक्स
    यदि आपको आपकी कंपनी की ओर से क्रेडिट कार्ड मिला है, तो यह बदलाव आपके लिए महत्वपूर्ण है। नए नियमों के तहत कंपनी के कार्ड से किए गए व्यक्तिगत खर्च को टैक्स योग्य लाभ माना जा सकता है। यानी यदि आप निजी खर्च, यात्रा या मनोरंजन के लिए इस कार्ड का उपयोग करते हैं, तो वह राशि आपकी आय में जोड़ी जा सकती है और उस पर टैक्स देना पड़ सकता है। ऐसे मामलों में खर्च से जुड़े बिल या प्रमाण रखना जरूरी होगा।

    क्रेडिट कार्ड से टैक्स पेमेंट का विकल्प
    नए नियमों के तहत क्रेडिट कार्ड से इनकम टैक्स भुगतान करने का विकल्प भी मिल सकता है। यानी अब आप नेट बैंकिंग या डेबिट कार्ड के अलावा क्रेडिट कार्ड से भी टैक्स जमा कर सकेंगे। यह सुविधा उन लोगों के लिए मददगार हो सकती है, जिनके पास भुगतान के समय पर्याप्त नकदी नहीं होती। हालांकि, इस पर बैंक प्रोसेसिंग फीस ले सकता है और समय पर भुगतान न करने पर ब्याज भी देना पड़ सकता है।

    क्रेडिट कार्ड स्टेटमेंट बनेगा एड्रेस प्रूफ
    एक और अहम बदलाव के तहत क्रेडिट कार्ड स्टेटमेंट को पते के प्रमाण के रूप में इस्तेमाल किया जा सकेगा। यदि स्टेटमेंट हाल का है और उसमें सही पता दर्ज है, तो इसे वैध दस्तावेज माना जाएगा। इससे पैन कार्ड बनवाने या उसमें बदलाव करने की प्रक्रिया आसान हो जाएगी। साथ ही, क्रेडिट कार्ड के लिए आवेदन करते समय पैन कार्ड देना भी अनिवार्य होगा।

  • वैश्विक व्यापार में भरोसे के लिए पीयूष गोयल ने सदस्य देशों से सर्वसम्मति की अपील..

    वैश्विक व्यापार में भरोसे के लिए पीयूष गोयल ने सदस्य देशों से सर्वसम्मति की अपील..


    नई दिल्ली:  Piyush Goyal ने कैमरून के Yaounde में आयोजित विश्व व्यापार संगठन की 14वीं मंत्रीस्तरीय बैठक (MC14) के दूसरे दिन भारत का नेतृत्व करते हुए सर्वसम्मति आधारित फैसलों पर जोर दिया उन्होंने कहा कि किसी भी देश पर ऐसे नियम नहीं थोपे जाने चाहिए जिनसे वह सहमत न हो

    गोयल ने मौजूदा गतिरोध को खत्म करने और सदस्य देशों के बीच भरोसा दोबारा बनाने की जरूरत बताई उन्होंने कहा कि डब्ल्यूटीओ में चर्चाएं पूरी तरह पारदर्शी, समावेशी और सदस्य देशों के नेतृत्व में होनी चाहिए और अगर संस्थागत ढांचे में बिखराव हुआ तो वैश्विक व्यापार प्रणाली कमजोर हो जाएगी

    भारत ने समान अवसर (level playing field) बनाए रखने की बात की और कहा कि उरुग्वे दौर से उत्पन्न असमानताओं को दूर करना जरूरी है साथ ही खाद्य सुरक्षा, पब्लिक स्टॉकहोल्डिंग (PSH), स्पेशल सेफगार्ड मैकेनिज्म (SSM) और कपास जैसे लंबित मुद्दों को प्राथमिकता देने की बात कही गई

    डब्ल्यूटीओ के विवाद निपटान तंत्र की कमजोर स्थिति पर भारत ने चिंता जताई और कहा कि सही तरीके से फैसले नहीं होंगे तो नियम लागू नहीं हो पाएंगे और इसका सबसे अधिक असर छोटे देशों पर पड़ेगा इसके अलावा पारदर्शिता के नाम पर व्यापारिक जवाबी कार्रवाई या घरेलू नीतियों को चुनौती देने के प्रयासों पर सावधानी बरतने को कहा गया

    बैठक में Rajesh Aggarwal ने डब्ल्यूटीओ सुधारों को समयबद्ध तरीके से आगे बढ़ाने और स्पष्ट लक्ष्य तय करने की आवश्यकता पर बल दिया

    पीयूष गोयल ने इस दौरान अमेरिका, चीन, दक्षिण कोरिया, स्विट्जरलैंड, न्यूजीलैंड, कनाडा, मोरक्को और ओमान के प्रतिनिधियों से अलग-अलग मुलाकात भी की जिसमें व्यापार संबंधों को मजबूत करने पर चर्चा हुई

    यह डब्ल्यूटीओ सम्मेलन 26 मार्च से शुरू होकर 29 मार्च तक चलेगा और इसमें वैश्विक व्यापार की दिशा तय करने वाले कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की जाएगी

  • रक्षा क्षेत्र में बड़ा कदम: अदाणी डिफेंस ने सेना को सौंपी पहली प्रहार मशीन गन

    रक्षा क्षेत्र में बड़ा कदम: अदाणी डिफेंस ने सेना को सौंपी पहली प्रहार मशीन गन


    नई दिल्ली। शनिवार को अदाणी डिफेंस एंड एयरोस्पेस ने भारतीय सशस्त्र बलों को 2,000 ‘प्रहार’ लाइट मशीन गन (एलएमजी) की पहली खेप सौंप दी। इस मौके पर कंपनी के सीईओ आशीष राजवंशी ने इसे ‘मेक इन इंडिया’ पहल में एक बड़ा मील का पत्थर बताया।

    7.62 मिमी कैलिबर की आधुनिक मशीन गन

    यह 7.62 मिमी कैलिबर वाली ‘प्रहार’ लाइट मशीन गन ग्वालियर के बाहरी इलाके में स्थित कंपनी के स्मॉल आर्म्स कॉम्प्लेक्स में तैयार की गई है। सीईओ राजवंशी ने कहा कि कंपनी को सात साल में कुल 41,000 एलएमजी देने का लक्ष्य मिला है, लेकिन टीम की मेहनत और क्षमता के दम पर यह लक्ष्य तीन साल से भी कम समय में पूरा किया जा सकता है।

    पहली खेप और उत्पादन क्षमता

    पहली 2,000 एलएमजी की डिलीवरी के बाद अदाणी डिफेंस ने हर महीने 1,000 मशीन गन बनाने की क्षमता हासिल कर ली है। यह अब तक का एक रिकॉर्ड है और इसे कंपनी की तकनीकी दक्षता और उत्पादन क्षमता का प्रमाण माना जा रहा है।

    ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ की यात्रा

    सीईओ ने बताया कि यह उपलब्धि ‘मेक इन इंडिया’ रणनीति और शुरुआती दौर में तकनीकी सहयोग से संभव हो पाई। उन्होंने कहा कि साल 2020 में ‘आत्मनिर्भर भारत’ के विजन के साथ यह यात्रा शुरू हुई और पिछले छह वर्षों में अदाणी डिफेंस एक छोटे कंपोनेंट निर्माता से पूरी तरह हथियार बनाने वाली ओईएम कंपनी बन गई है।

    रक्षा मंत्रालय की मौजूदगी

    कार्यक्रम में रक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी ए अनबरसु भी मौजूद रहे। उन्होंने सेना के लिए भेजी जा रही पहली खेप वाले ट्रकों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। अनबरसु ने कहा कि यह उपलब्धि दिखाती है कि भारत अब रक्षा सौदों को तेजी से उत्पादन और डिलीवरी में बदलने की क्षमता रखता है, जो देश की रक्षा ताकत को और मजबूत करेगा।

    सीईओ का संदेश

    आशीष राजवंशी ने यह भी बताया कि कंपनी ने टेक्नोलॉजी पार्टनर्स की मदद से शुरुआत की थी, लेकिन अब पूरी प्रक्रिया में कंपनी स्वतंत्र और आत्मनिर्भर बन चुकी है। उनका कहना है कि यह कदम भारतीय सशस्त्र बलों के लिए आधुनिक हथियारों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के साथ-साथ देश में रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में नए मानक स्थापित करेगा।

  • नोएडा-ग्रेटर नोएडा रियल एस्टेट को मिलेगा बड़ा बूस्ट, जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट करेगा विकास को प्रेरित

    नोएडा-ग्रेटर नोएडा रियल एस्टेट को मिलेगा बड़ा बूस्ट, जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट करेगा विकास को प्रेरित


    नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा उद्घाटन किए गए नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (जेवर एयरपोर्ट) से ग्रेटर नोएडा और यमुना एक्सप्रेसवे के रियल एस्टेट सेक्टर को बड़ी बढ़त मिलने की उम्मीद है। नई नोएडा के अनुसार, एयरपोर्ट की शुरुआत से डेवलपर्स का भरोसा बढ़ेगा और नए आवासीय प्रोजेक्ट्स की संख्या में तेजी से आएगी।

    रियल एस्टेट पर असर:

    ग्रेटर नोएडा ने 2025 में ग्रेटर नोएडा के कुल रेजिडेंशियल लॉन्च का 28% हिस्सा हासिल किया, जो 2021 में 19% था। नए प्रोजेक्ट्स की लॉन्चिंग 2021 में 4,415 यूनिट से बढ़कर 2025 में 14,000 यूनिट हो गई। हाउसिंग सेल्स में ग्रेटर नोएडा का योगदान 2025 में 12,903 यूनिट रहा, जो 2021 के 10,685 यूनिट से बढ़ा।

    नेशनल एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर राजीव विजय के अनुसार, यह एयरपोर्ट ग्रेटर नोएडा और यमुना एक्सप्रेसवे के आसपास रियल एस्टेट के लिए टर्निंग पॉइंट साबित होगा।
    विभागीय शिशिर बैजल के अनुसार, जेवर एयरपोर्ट खेड़ा के एविएशन और शहरी विकास को नया रूप देगा और क्षेत्र में संतुलित शहरी विस्तार को बढ़ावा देगा।

    निरंतरता और विकास:

    सड़क, मेट्रो और रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (आरआरटीएस) जैसी मल्टीमॉडल निरंतरता एयरपोर्ट के आसपास के क्षेत्रों के विकास में अहम भूमिका निभाएगी।
    आवेदकों के अनुसार, नए एयरपोर्ट जैसे जेवर भी यात्रियों को आकर्षित करेंगे और एरोट्रोपोलिस आधारित विकास को गति देंगे।

    जेवर एयरपोर्ट न केवल हवाई यातायात को संतुलित करेगा, बल्कि ग्रेटर नोएडा और खेड़ा में हाउसिंग डिमांड, प्रॉपर्टी प्लेसमेंट और रियल एस्टेट निवेश को भी नई ऊंचाई देगा। आने वाले वर्षों में यह क्षेत्र खेड़ा का प्रमुख सेकेंडरी एयरपोर्ट हब बन सकता है।

  • रुपये के मूल्य और बाजार नियंत्रण के लिए RBI ने बैंकों को दिए सख्त निर्देश

    रुपये के मूल्य और बाजार नियंत्रण के लिए RBI ने बैंकों को दिए सख्त निर्देश


    नई दिल्ली भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने रुपये में गिरावट को लेकर निवेश और सट्टेबाजी (स्पेकुलेटिव ट्रेडिंग) पर शेयरों के लिए नए निर्देश जारी किए हैं। इसके तहत सरकारी उद्यमों के रूप में काम करने वाले बैंकों को दिन के अंत तक रुपये में अपने ओपन इन्वेस्टमेंट के लिए 100 मिलियन डॉलर तक सीमित रखने का ऑर्डर दिया गया है।

    मुख्य कारण और समय:

    अमेरिकी-इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण व्यापार घाटा बढ़ा और रुपये पर दबाव आया।
    शुक्रवार को पहली बार 94 प्रति डॉलर से नीचे और करीब 1% की गिरावट दर्ज की गई। अब तक अमेरिकी-ईरान संघर्ष के बाद कुल गिरावट 4% से अधिक हो गई है।
    ब्रेंट क्रूड की कीमत 100 डॉलर प्रति शेयर से ऊपर बनी है, जो कि अक्टूबर में रेटिंग 70 डॉलर से काफी ज्यादा है। इससे भारत का अहित बिल और बैचलर पर दबाव बढ़ गया।

    आरबीआई की कार्रवाई और निर्देश:

    सभी सरकारी बैंक इस दैनिक सीमा को 10 अप्रैल तक लागू करेंगे।
    बाजार की स्थिति के अनुसार आवश्यकतानुसार यह सीमा कीटनाशक भी हो सकती है।
    विशेषज्ञ का कहना है कि रुपये में गिरावट जारी रहने का मानक और सख्त कदम उठाया जा सकता है।
    रुपये को सहारा देने के लिए आरबीआई ने अपने विदेशी मुद्रा भंडार (फॉरेक्स रिजर्व) का उपयोग किया है, जिससे उसकी हस्तक्षेप क्षमता कुछ सीमित हो गई है।

    भविष्यवाणी और बाजार का प्रभाव:

    एमके ग्लोबल ग्लोबल की रिपोर्ट के मुताबिक, रुपये में आने वाले समय में सुराजाकर करीब 91 प्रति डॉलर तक जा सकते हैं।
    10 साल के सरकारी बॉन्ड की उपज सीमा 6.83% से लेकर 6.65% तक हो सकती है।
    वैश्विक तेल की फार्मास्युटिकल स्थिरांक, तो चालू खाता घाटा (सीएडी) में वृद्धि हो सकती है और इसका असर आर्थिक विकास और अनुपात पर पड़ सकता है।

    आरबीआई का यह कदम बाजार में सट्टेबाजी और रुपये के परमिट पर नियंत्रण के लिए है। नए नियम के लागू होने के बाद रुपये में स्थिरता आने और विदेशी मुद्रा बाजार में जोखिम कम होने की उम्मीद है।

  • WTO मंच पर भारत की आवाज: पीयूष गोयल ने consensus-based फैसलों की वकालत की

    WTO मंच पर भारत की आवाज: पीयूष गोयल ने consensus-based फैसलों की वकालत की


    नई दिल्ली कैमरून के युंडे में विश्व व्यापार संगठन की 14वीं मिनिस्ट्री मीटिंग (MC14) आयोजित की गई, जिसमें भारत ने वैश्विक व्यापार व्यवस्था को लेकर अहम रुख पेश किया। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने सदस्यों से सर्वसम्मति (आम सहमति) के आधार पर निर्णय लेने की अपील की और कहा कि यही डब्ल्यूटीओ की मूल स्थापना है।

    ‘इको बताए गए नियम नहीं, जरूरी जरूरी’

    दूसरे दिन की बैठक में भारत का नेतृत्व करते हुए पीयूष गोयल ने स्पष्ट कहा कि किसी भी देश को ऐसे नियमों का पालन नहीं करना चाहिए, उन्होंने इस बात पर सहमति जताई। उन्होंने जोर देकर कहा कि सर्वसम्मति-आधारित निर्णय प्रक्रिया ही छात्रों और वैश्विक व्यापार प्रणाली को सुनिश्चित कर सकती है।

    भरोसा बहाल पर दिया जोर

    भारत ने स्थिर गतिरोध को समाप्त करने के लिए सदस्य देशों के बीच विश्वास बहाली की आवश्यकता बताई। सरकार का मानना ​​है कि जब तक देश के बीच मजबूत मजबूत नहीं होगा, तब तक प्रभावी निर्णय लेना कठिन रहेगा। बाकी बाधाओं की गहराई से समीक्षा करने की भी मांग की गई।

    भारत का रुख

    भारत ने कहा कि विश्व व्यापार संगठन में शामिल होने वाली सभी चर्चाएं शामिल, समावेशी और सदस्य देश के नेतृत्व में होनी चाहिए। भारत ने यह भी चेतावनी दी कि यदि फ़्लोरिडा स्ट्रक्चर फ़्लोरिडा या ब्रेकडाउन बढ़ा हुआ है, तो वैश्विक व्यापार प्रणाली गंभीर रूप से प्रभावित होगी।

    पुरानी संस्थागत व्यवस्था की मांग

    भारत ने उरुग्वे दौर से आए तूफान को दूर करने की भी जरूरत बताई। साथ ही,

    खाद्य सुरक्षा
    सार्वजनिक स्टॉक होल्डिंग (पीएसएच)
    स्पेशल सेफगार्ड मैकेनिज्म (एसएसएम)
    सिक्के से जुड़ा मुद्दा

    जैसे लंबे समय से ऑटोमोबाइल विषयों को प्राथमिकता देने की बात कही।

    विवाद तंत्र शास्त्र पर चिंता

    भारत ने विश्व व्यापार संगठन के विवाद में चमत्कारिक तंत्र की ख़राब स्थिति पर भी चिंता व्यक्त की। सरकार का कहना है कि यदि यह तंत्र प्रभावी नहीं रहेगा, तो सबसे पुराने दोस्त दोस्त बने रहेंगे और इससे छोटे और ग्रामीण इलाकों को सबसे ज्यादा नुकसान होगा।

    सामूहिक बैठकों में मजबूत आधार पर चर्चा

    सम्मेलन के दौरान पीयूष गोयल ने अमेरिका, चीन, दक्षिण कोरिया, जॉर्जिया, न्यूजीलैंड, कनाडा, मोरक्को और ओमान के सम्मेलनों से अलग-अलग मुलाकात की। इन बैठकों में व्यापार को मजबूत करने और सहयोग बढ़ाने पर चर्चा हुई।

    समयबद्धन सुधारों की आवश्यकता

    सचिव राजेश अग्रवाल ने डब्ल्यूटीओ सुधारों को समयबद्ध तरीके से लागू करने की आवश्यकता और स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित करने पर जोर दिया।

    भारत की पहली मंजिल पर अलॉटमेंट और ऑटोमोबाइल व्यापार की दिशा
    भारत का यह रूखा वैश्विक व्यापार में संतुलन, प्लॉट और सामाग्री सुनिश्चित करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।

  • डॉलर के आगे कमजोर पड़ा रुपया, पहली बार 94 के पार, जानिए क्‍या कहते हैं एक्‍सपर्ट ?

    डॉलर के आगे कमजोर पड़ा रुपया, पहली बार 94 के पार, जानिए क्‍या कहते हैं एक्‍सपर्ट ?


    नई दिल्ली। भारतीय करेंसी में गिरावट का सिलसिला जारी है और शुक्रवार को रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले अपने अब तक के सबसे निचले स्तर पर बंद हुआ। पहली बार रुपया 94 के पार पहुंच गया। कारोबार के दौरान यह 94.84 तक फिसल गया, जबकि दिन के अंत में 94.81 पर बंद हुआ।

    विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर रुपये पर साफ दिखाई दे रहा है। आंकड़ों के अनुसार, चालू वित्त वर्ष में अब तक रुपया करीब 11 प्रतिशत कमजोर हो चुका है। यह गिरावट पिछले एक दशक में किसी भी वित्त वर्ष की तुलना में सबसे अधिक मानी जा रही है।

    रुपये में गिरावट के प्रमुख कारण

    विशेषज्ञों के मुताबिक कच्चे तेल की कीमतों में उछाल रुपये पर दबाव बना रहा है। जानकारों का कहना है कि आने वाले हफ्तों में कच्चा तेल 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बना रह सकता है, जिससे महंगाई बढ़ने की आशंका है और इसका सीधा असर करेंसी पर पड़ रहा है।

    विदेशी निवेशकों का भारतीय बाजार से लगातार पैसा निकालना भी एक बड़ी वजह है। आंकड़ों के मुताबिक पिछले एक महीने में करीब 13 अरब डॉलर की निकासी की गई है, जिससे रुपये पर दबाव और बढ़ा है।

    मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव ने भी स्थिति को और कमजोर किया है। युद्ध शुरू होने के बाद से रुपया करीब 4 फीसदी तक गिर चुका है। इस अनिश्चित माहौल ने निवेशकों के भरोसे को भी प्रभावित किया है।

    आगे क्या रह सकता है रुख?

    मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, जब तक ईरान और इजरायल के बीच जारी तनाव कम नहीं होता, तब तक रुपये में बड़ी मजबूती की संभावना कम है। हालांकि सरकार अपने स्तर पर स्थिति संभालने की कोशिश कर रही है।

    पेट्रोल और डीजल की कीमतों को नियंत्रित रखने के लिए सरकार ने एक्साइज ड्यूटी में कटौती का फैसला लिया है, जिससे आम लोगों को कुछ राहत मिल सकती है। हालांकि, इससे सरकारी राजस्व पर दबाव बढ़ने की आशंका भी जताई जा रही है।

  • गोल्ड की कीमतों में जोरदार तेजी, चांदी रही सुस्त—जानिए बाजार का हाल

    गोल्ड की कीमतों में जोरदार तेजी, चांदी रही सुस्त—जानिए बाजार का हाल


    नई दिल्ली विश्वव्यापी और कच्चे तेल की सीमा में गिरावट के बीच इस सप्ताह सोने ने शानदार वापसी की। सोने की कीमत में करीब 5.77% की तेजी दर्ज की गई, जबकि चांदी में हल्की गिरावट देखने को मिली। बाजार में रिलीज- विज्ञापन के बावजूद सोने का टिकाऊ मजबूत बना हुआ है।

    बाबक्स पर क्या चल रहा है?

    शुक्रवार को मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज ऑफ इंडिया (एमसीएक्स) पर गोल्ड अप्रैल फ्यूचर्स में 0.15% की बढ़ोतरी हुई और यह करीब 1,44,500 रुपये प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गया। वहीं मई सिल्वर फ्यूचर्स 0.09% ग्रुप करीब 2,27,750 रुपए प्रति किराए पर कारोबार करता है।

    लैपटॉपजे के आंकड़े में भी तेजी से साफ

    इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (आईबीजेए) के मुताबिक, 999 करोड़ रुपये वाले सोने का भाव शुक्रवार को 1,42,942 रुपये प्रति 10 ग्राम रहा, जो सप्ताह की शुरुआत में 1,35,141 रुपये था। यानी पूरे सप्ताह में मजबूत उछाल देखने को मिला।

    क्यों टूटे सोने के दाम? समझें कारण

    वैश्विक तनाव और अनिश्चितता के सुरक्षित निवेश के विशेष रूप से सोने की मांग की गारंटी
    कॉन्स्टेबल सोने की दुकान सेंट्रल द्वारा
    कच्चे तेल की उपज से उपज का दबाव कुछ कम हुआ

    हालाँकि, मजबूत अमेरिकी डॉलर और बोल्ड बॉन्ड यील्ड ने बीच-बीच में सोने की तेजी को तोड़ने की भी कोशिश की।

    कच्चे तेल की गिरावट का असर

    ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत इस सप्ताह करीब 120 डॉलर से बढ़कर 93 डॉलर प्रति शेयर तक बढ़ गई। इसी तरह की संगति को लेकर चिंता कुछ कम हुई और सोने को गुड़िया स्तर से शुरू करने में मदद मिली।

    आगे क्या ट्रेंड?

    विशेषज्ञ के अनुसार, प्रमाणन गोल्ड के लिए 1,36,000-1,40,000 रुपये का स्तर मजबूत समर्थन माना जाता है, जबकि 1,55,000-1,60,000 रुपये के बीच मजबूत समर्थन है।

    आने वाले दिनों में मध्य पूर्व की स्थिति, कच्चे तेल के बांध और केंद्रीय बैंकों के न्याय बाजार की दिशा तय होगी। रिलीज़- अपलोड जारी रह सकता है, लेकिन लॉन्ग स्टार में सोने की स्टोरेज जारी रह सकती है।

    सुरक्षित निवेश वास्तव में विश्वसनीय बना हुआ है

    विश्वसनीयता के बीच गोल्ड एक बार फिर से अन्नू की पहली पसंद बनी दिख रही है, जबकि सिल्वर इंडिकेटेड आइटम में बिजनेस कर रही है।

  • ऊर्जा सेक्टर में बूस्ट: Coal India का 3,300 करोड़ का निवेश, 8 नई वाशरी स्थापित

    ऊर्जा सेक्टर में बूस्ट: Coal India का 3,300 करोड़ का निवेश, 8 नई वाशरी स्थापित


    नई दिल्ली। देश की प्रमुख कोयला कंपनी Coal India Limited ने कोकिंग कोल की गुणवत्ता सुधारने और आयात पर निर्भरता घटाने के लिए बड़ा निवेश ऐलान किया है। कंपनी करीब 3,300 करोड़ रुपये खर्च कर 8 नई कोकिंग कोल वॉशरियां स्थापित करेगी। इस कदम को भारत के स्टील सेक्टर को मजबूत करने और घरेलू उत्पादन बढ़ाने की दिशा में अहम माना जा रहा है। कंपनी का लक्ष्य है कि इन वॉशरियों को 2029-30 तक चालू कर दिया जाए।

    क्षमता में होगा बड़ा इजाफा, दोगुनी से ज्यादा बढ़ेगी ताकत

    नई वॉशरियों की कुल क्षमता 21.5 मिलियन टन प्रति वर्ष (MTY) होगी। फिलहाल Coal India Limited के पास 10 वॉशरियों का नेटवर्क है, जिसकी कुल क्षमता 18.35 MTY है। यानी आने वाले वर्षों में कंपनी अपनी वॉशिंग क्षमता को दोगुने से भी अधिक बढ़ा देगी। इससे न सिर्फ उत्पादन में वृद्धि होगी, बल्कि कोयले की गुणवत्ता में भी सुधार आएगा।

    क्या होती है कोकिंग कोल वॉशरी?

    कोकिंग कोल वॉशरी एक ऐसा संयंत्र होता है, जहां कच्चे कोयले से राख, मिट्टी और पत्थर जैसी अशुद्धियों को हटाया जाता है। इससे कोयले की गुणवत्ता बेहतर होती है और वह स्टील उत्पादन के लिए उपयुक्त बन जाता है। भारत में कोयले में राख की मात्रा 25% से 45% तक होती है, जो इसकी गुणवत्ता को प्रभावित करती है। ऐसे में वॉशरियों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है।

    कहां लगेंगी नई वॉशरियां?

    नई बनने वाली 8 वॉशरियों में से-

    5 वॉशरियां (14.5 MTY) Central Coalfields Limited के तहत स्थापित की जाएंगी
    3 वॉशरियां (7 MTY) Bharat Coking Coal Limited के अंतर्गत विकसित होंगी

    इसके अलावा कंपनी मौजूदा वॉशरियों के आधुनिकीकरण और नवीनीकरण पर भी करीब 300 करोड़ रुपये खर्च करेगी, जिससे उनकी दक्षता और उत्पादन क्षमता बढ़ाई जा सके।

    पुरानी परिसंपत्तियों का मुद्रीकरण और निजी साझेदारी

    Coal India Limited राष्ट्रीय मुद्रीकरण पाइपलाइन के तहत अपनी पुरानी वॉशरियों का भी उपयोग बढ़ाने की योजना बना रही है। कुछ बंद पड़ी इकाइयों को भी इस प्रक्रिया में शामिल किया जाएगा। इसके साथ ही कंपनी Tata Steel जैसी निजी कंपनियों के साथ मिलकर तकनीकी सहयोग बढ़ा रही है, ताकि वॉशिंग क्षमता और गुणवत्ता दोनों में सुधार हो सके।

    आयात में कमी और विदेशी मुद्रा की बचत

    भारत में उच्च गुणवत्ता वाले कोकिंग कोल की कमी के कारण भारी मात्रा में आयात करना पड़ता है, जिससे विदेशी मुद्रा पर दबाव पड़ता है। Coal India Limited की यह पहल आयात निर्भरता कम करने, लागत घटाने और घरेलू स्टील उद्योग को सस्ता व बेहतर कच्चा माल उपलब्ध कराने में मदद करेगी।

      आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम

    यह निवेश न सिर्फ कोल सेक्टर बल्कि पूरे औद्योगिक ढांचे को मजबूती देगा। इससे ‘मेक इन इंडिया’ और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को भी बढ़ावा मिलेगा।