Category: Economy

  • खरबपति बनने की ओर एलन मस्क, दौलत में बड़ा उछाल, 722 अरब डॉलर के पार नेटवर्थ

    खरबपति बनने की ओर एलन मस्क, दौलत में बड़ा उछाल, 722 अरब डॉलर के पार नेटवर्थ

    नई दिल्ली। दुनिया के सबसे अमीर व्यक्ति एलन मस्क की संपत्ति में तेज रफ्तार से बढ़ोतरी जारी है। गुरुवार को उनकी नेटवर्थ में एक ही दिन में 45 अरब डॉलर का इजाफा हुआ, जिसके बाद कुल संपत्ति बढ़कर 722 अरब डॉलर तक पहुंच गई। इस उछाल के साथ मस्क अब ट्रिलियनेयर यानि खरबपति बनने की दिशा में और करीब माने जा रहे हैं। ब्लूमबर्ग बिलियनेयर्स इंडेक्स के अनुसार, दूसरे स्थान पर मौजूद लैरी पेज की संपत्ति मस्क के मुकाबले आधे से भी कम है।

    स्पेसएक्स IPO से और बढ़ सकती है दौलत
    एलन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स अमेरिका में IPO लाने की तैयारी में है। यह कंपनी रॉकेट निर्माण और स्टारलिंक सैटेलाइट इंटरनेट सेवा के लिए जानी जाती है। माना जा रहा है कि यह IPO वॉल स्ट्रीट के इतिहास में सबसे बड़े इश्यू में से एक हो सकता है और अगले महीने SPCX कोड के तहत लॉन्च किया जा सकता है।

    विशेषज्ञों के अनुसार, स्पेसएक्स की अनुमानित वैल्यू 1.25 ट्रिलियन डॉलर तक हो सकती है, जिसमें मस्क की हिस्सेदारी का मूल्य 600 अरब डॉलर से अधिक आंका जा सकता है। इसके बाद उनकी कुल संपत्ति 1 ट्रिलियन डॉलर से भी ऊपर जा सकती है।

    5 महीने में 103 अरब डॉलर की बढ़ोतरी
    रिपोर्ट के मुताबिक, इस साल अब तक एलन मस्क की संपत्ति में 103 अरब डॉलर का इजाफा हुआ है। यह राशि भारत के शीर्ष उद्योगपतियों की दौलत से भी अधिक है। तुलना के अनुसार, मुकेश अंबानी की कुल संपत्ति 88.10 अरब डॉलर है, जबकि गौतम अडानी की नेटवर्थ लगभग 108 अरब डॉलर के आसपास है।

    अरबपतियों की रेस में मस्क सबसे आगे
    ब्लूमबर्ग रैंकिंग के अनुसार, इस साल संपत्ति बढ़ाने वाले अरबपतियों की सूची में मस्क शीर्ष पर हैं। उनके बाद लैरी पेज, सर्गी ब्रिन, माइकल डेल, जेफ बेजोस, जेनसेन हुआंग और गौतम अडानी जैसे नाम शामिल हैं, जिनकी संपत्ति में अरबों डॉलर का इजाफा दर्ज किया गया है।

    ट्रिलियनेयर बनने की ओर कदम
    स्पेसएक्स की संभावित लिस्टिंग के बाद एलन मस्क इतिहास में पहले ऐसे व्यक्ति बन सकते हैं जिनकी संपत्ति 1 ट्रिलियन डॉलर के पार पहुंच जाएगी। इससे वैश्विक अरबपति सूची में उनकी बढ़त और भी मजबूत हो जाएगी।

  • पनगढ़िया ने दी रुपये की गिरावट में हस्तक्षेप न करने की सलाह, बोले- 100 सिर्फ एक संख्या

    पनगढ़िया ने दी रुपये की गिरावट में हस्तक्षेप न करने की सलाह, बोले- 100 सिर्फ एक संख्या


    नई दिल्ली।
    नीति आयोग (Policy Commission) के पूर्व उपाध्यक्ष और प्रमुख अर्थशास्त्री अरविंद पनगढ़िया (Arvind Panagariya) ने रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (Reserve Bank of India.- RBI) को रुपये के गिरावट (Decline of Rs) पर हस्तक्षेप न करने की सलाह दी है। उन्होंने कहा है कि एक डॉलर के बराबर 100 रुपये के मनोवैज्ञानिक स्तर को नीति निर्धारण का आधार न बनाएं। पनगढ़िया ने गुरुवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर लिखा कि 100 भी बस एक संख्या है, ठीक 99 और 101 की तरह। उन्होंने साफ कहा कि कच्चे तेल (Crude oil) की कमी अल्पकालिक हो या दीर्घकालिक, इस समय रुपये को अपने स्तर पर गिरने देना ही सही नीति है।

    अर्थशास्त्री ने कहा कि यदि कच्चे तेल की कमी तीन महीने से एक साल तक की है तो रुपये में शुरुआती कमजोरी आएगी, लेकिन बाद में तेल कीमतों में नरमी आने पर रुपये में मजबूत वापसी होगी। इस दौरान विदेशी निवेशक ‘सस्ते’ रुपये का फायदा उठाकर भारत में निवेश बढ़ा सकते हैं। दीर्घकालिक तेल संकट की स्थिति में पनगढ़िया का मत है कि रुपये के अवमूल्यन के अलावा कोई विकल्प घाटे का सौदा साबित होगा। विदेशी मुद्रा भंडार खर्च करके रुपये बचाने की कोशिश बेकार होगी, क्योंकि इससे कोई स्थायी फायदा नहीं होगा।

    उन्होंने डॉलर में बॉन्ड जारी करने या प्रवासी भारतीयों से ऊंची ब्याज दर पर जमा स्वीकार करने जैसे उपायों को अस्थायी राहत बताते हुए खारिज किया। पनगढ़िया ने चेतावनी दी कि इनसे प्राप्त विदेशी मुद्रा पर चुकाए जाने वाले ब्याज की लागत, मिलने वाले लाभ से ज्यादा होगी। पनगढ़िया ने आगे कहा कि मौजूदा समय 2013 जैसा नहीं है, जब मुद्रास्फीति दोहरे अंकों में थी। आज भारतीय अर्थव्यवस्था रुपये के कुछ अवमूल्यन से आने वाले मुद्रास्फीति दबाव को सहन करने की क्षमता रखती है।


    गुरुवार को रुपये में उछाल

    इस बीच, विदेशी मुद्रा बाजार में रुपये ने गुरुवार को अपने सर्वकालिक निचले स्तर से उबरते हुए 50 पैसे की तेजी दर्ज की। अंतरबैंक बाजार में डॉलर के मुकाबले रुपये 96.36 पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान रुपये ने 96.05 के उच्चतम और 96.60 के निम्नतम स्तर को छुआ। बुधवार को रुपये ने 96.86 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर बंद होने के बाद गुरुवार को मजबूती दिखाई। भू-राजनीतिक तनाव में कमी के संकेत और केंद्रीय बैंक के संभावित हस्तक्षेप की उम्मीद ने रुपये को सहारा दिया।


    क्या कह रहे एक्सपर्ट्स?

    एचडीएफसी सिक्योरिटीज के शोध विश्लेषक दिलीप परमार ने कहा कि भू-राजनीतिक तनाव कम होने के शुरुआती संकेत और आरबीआई के सक्रिय हस्तक्षेप से रुपये संभला है। आगे निवेशकों का ध्यान भू-राजनीतिक घटनाक्रमों और मौद्रिक नीति समीक्षा पर रहेगा। उन्होंने अनुमान जताया कि रुपये 95.74 से 96.50 के दायरे में रह सकता है। मिराए एसेट शेयरखान के अनुज चौधरी ने कहा कि आरबीआई के दखल और कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से रुपये में मजबूती आई है।

  • ग्रामीण और शहरी भारत के लिए बड़ा बदलाव, डाक विभाग की नई सर्विस से घर बैठे लोन और डिजिटल सुविधाएं उपलब्ध

    ग्रामीण और शहरी भारत के लिए बड़ा बदलाव, डाक विभाग की नई सर्विस से घर बैठे लोन और डिजिटल सुविधाएं उपलब्ध

    नई दिल्ली ।भारतीय वित्तीय सेवाओं के डिजिटल विस्तार में एक नया अध्याय जुड़ गया है, जहां अब बैंकिंग सुविधाएं सिर्फ शाखाओं तक सीमित नहीं रहेंगी बल्कि सीधे आम नागरिकों के घर तक पहुंचेंगी। इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक द्वारा शुरू की गई नई स्मार्ट पोस्टमैन सेवा के तहत अब डाकिया केवल पत्र या पार्सल ही नहीं, बल्कि वित्तीय सेवाओं का पूरा पैकेज लेकर लोगों के दरवाजे तक पहुंचेगा। इस पहल का उद्देश्य ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में बैंकिंग सुविधाओं को और अधिक सरल, तेज और सुलभ बनाना बताया जा रहा है।

    नई व्यवस्था के तहत डाकिया अब बायोमेट्रिक डिवाइस और डिजिटल टैबलेट के माध्यम से लोगों को पर्सनल लोन, माइक्रो इंश्योरेंस और डिजिटल लॉकर जैसी सेवाएं उपलब्ध कराने में सक्षम होगा। इसका सीधा लाभ उन लोगों को मिलेगा जो बैंक शाखाओं तक पहुंचने में असमर्थ हैं या जिनके लिए बैंकिंग प्रक्रियाएं जटिल और समय लेने वाली साबित होती हैं। इस पहल से वित्तीय समावेशन को भी नई गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

    सेवा के तहत ग्राहक घर बैठे ही लोन के लिए आवेदन कर सकेंगे और डाकिया उनके घर पहुंचकर आधार आधारित बायोमेट्रिक सत्यापन करेगा। सत्यापन प्रक्रिया पूरी होने के बाद पात्रता के आधार पर लोन की राशि सीधे बैंक खाते में ट्रांसफर की जा सकेगी। इसी तरह माइक्रो इंश्योरेंस की सुविधा भी सरल प्रक्रिया के माध्यम से उपलब्ध कराई जाएगी, जिससे छोटे प्रीमियम पर बीमा कवरेज हासिल किया जा सकेगा।

    डिजिटल लॉकर सेवा के माध्यम से नागरिक अपने महत्वपूर्ण दस्तावेजों को सुरक्षित डिजिटल प्लेटफॉर्म पर संरक्षित कर सकेंगे। डाकिया इस प्रक्रिया में दस्तावेजों को स्कैन कर डिजिटल रूप में सुरक्षित करने में सहायता करेगा, जिससे कागजी दस्तावेजों के खोने या खराब होने की समस्या से राहत मिलने की संभावना है। यह कदम विशेष रूप से उन लोगों के लिए उपयोगी माना जा रहा है जो अपने दस्तावेजों की सुरक्षा को लेकर चिंतित रहते हैं।

    इस पूरी व्यवस्था को सरकार के वित्तीय समावेशन अभियान का एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है, जिसका लक्ष्य देश के अंतिम व्यक्ति तक बैंकिंग सुविधाएं पहुंचाना है। विशेषज्ञों के अनुसार इस पहल से छोटे व्यवसायियों, किसानों और निम्न आय वर्ग के परिवारों को काफी राहत मिल सकती है, क्योंकि उन्हें छोटे-छोटे वित्तीय कार्यों के लिए अब बैंक शाखाओं के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।

    हालांकि, इस नई व्यवस्था के साथ कुछ चुनौतियां भी जुड़ी हुई हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट कनेक्टिविटी की समस्या और डिजिटल साक्षरता की कमी इस सेवा के प्रभावी संचालन में बाधा बन सकती है। इसके अलावा डाक कर्मचारियों पर बढ़ती जिम्मेदारियों के चलते उन्हें विशेष प्रशिक्षण और तकनीकी सहायता की आवश्यकता होगी ताकि सेवा की गुणवत्ता प्रभावित न हो।

    इसके बावजूद यह पहल भारतीय डाक प्रणाली को एक नए डिजिटल वित्तीय ढांचे में बदलने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। यदि इसे प्रभावी ढंग से लागू किया गया, तो यह न केवल बैंकिंग व्यवस्था को सरल बनाएगा बल्कि देश के आर्थिक ढांचे में भी व्यापक बदलाव ला सकता है।

  • बाजार में क्या रहेगा ट्रेंड? जानें 22 मई का शेयर मार्केट और गोल्ड आउटलुक

    बाजार में क्या रहेगा ट्रेंड? जानें 22 मई का शेयर मार्केट और गोल्ड आउटलुक


    नई दिल्ली। 22 मई 2026 को भारतीय शेयर बाजार और सर्राफा बाजार दोनों में हलचल देखने को मिल सकती है। अंतरराष्ट्रीय बाजारों के संकेत, डॉलर की चाल, कच्चे तेल की कीमतें और विदेशी निवेशकों की गतिविधियां शुक्रवार के कारोबार की दिशा तय करेंगी। विशेषज्ञों के अनुसार, शेयर बाजार में जहां उतार-चढ़ाव बना रह सकता है, वहीं सोने की कीमतों में हल्की तेजी देखने को मिल सकती है।

    भारतीय शेयर बाजार के प्रमुख सूचकांक BSE Sensex और NIFTY 50 में शुक्रवार को शुरुआती कारोबार में दबाव और खरीदारी दोनों का मिश्रित असर देखने को मिल सकता है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि विदेशी निवेशकों की गतिविधियां और वैश्विक बाजारों का रुख निवेशकों की धारणा को प्रभावित करेगा।

    आईटी, बैंकिंग और ऑटो सेक्टर के शेयरों में हल्की मजबूती देखने को मिल सकती है, जबकि मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में मुनाफावसूली का दबाव रह सकता है। पिछले कुछ दिनों से बाजार में जारी तेजी के बाद निवेशक अब सतर्क नजर आ रहे हैं। ऐसे में ट्रेडिंग के दौरान उतार-चढ़ाव अधिक रहने की संभावना जताई जा रही है।

    विशेषज्ञों के मुताबिक, यदि विदेशी संस्थागत निवेशकों की खरीदारी जारी रहती है तो बाजार को मजबूती मिल सकती है। वहीं अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और वैश्विक आर्थिक संकेतकों का असर भी भारतीय बाजार पर दिखाई देगा। निवेशकों को सलाह दी जा रही है कि वे बिना रणनीति के बड़े निवेश से बचें और स्टॉप लॉस के साथ ट्रेडिंग करें।

    दूसरी ओर, सर्राफा बाजार में सोना की कीमतों में तेजी के संकेत मिल रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर की कमजोरी और सुरक्षित निवेश के बढ़ते रुझान के कारण सोने की मांग बढ़ सकती है। अनुमान है कि 24 कैरेट सोना 98 हजार से 99 हजार 500 रुपए प्रति 10 ग्राम के बीच कारोबार कर सकता है, जबकि 22 कैरेट सोने का भाव 89 हजार 500 से 91 हजार रुपए प्रति 10 ग्राम तक रह सकता है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं और भू-राजनीतिक तनाव के माहौल में निवेशक सोने को सुरक्षित निवेश मान रहे हैं। यही वजह है कि गोल्ड में लगातार निवेश बढ़ रहा है। हालांकि शहरों और राज्यों के हिसाब से टैक्स और मेकिंग चार्ज के कारण कीमतों में थोड़ा अंतर हो सकता है।

    आर्थिक जानकारों के अनुसार, लंबी अवधि के निवेशकों के लिए बाजार में गिरावट के दौरान अच्छी कंपनियों के शेयर खरीदना फायदेमंद हो सकता है। वहीं सोने में निवेश करने वालों के लिए डिजिटल गोल्ड और गोल्ड ETF भी अच्छे विकल्प बनकर उभर रहे हैं।

    कुल मिलाकर 22 मई का दिन निवेशकों के लिए काफी अहम रहने वाला है। शेयर बाजार में जहां सावधानी के साथ निवेश की जरूरत होगी, वहीं सोने की चमक निवेशकों को आकर्षित कर सकती है।

  • डॉक्टरों के लिए बड़ी खुशखबरी, ईएसआईसी मेडिकल कॉलेजों में 118 प्रोफेसर पदों पर भर्ती शुरू, जानिए पूरी प्रक्रिया

    डॉक्टरों के लिए बड़ी खुशखबरी, ईएसआईसी मेडिकल कॉलेजों में 118 प्रोफेसर पदों पर भर्ती शुरू, जानिए पूरी प्रक्रिया

    नई दिल्ली । चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में करियर बनाने का सपना देख रहे अनुभवी डॉक्टरों और शिक्षकों के लिए एक बड़ी खुशखबरी सामने आई है। कर्मचारी राज्य बीमा निगम ने देश के विभिन्न ईएसआईसी मेडिकल कॉलेजों और पीजीआईएमएसआर संस्थानों में प्रोफेसर पदों पर भर्ती के लिए बड़ा भर्ती अभियान शुरू किया है। इस भर्ती प्रक्रिया के तहत अलग-अलग मेडिकल विभागों में कुल 118 पदों पर योग्य उम्मीदवारों की नियुक्ति की जाएगी। भर्ती को लेकर जारी अधिसूचना के बाद मेडिकल शिक्षा क्षेत्र से जुड़े अभ्यर्थियों में काफी उत्साह देखने को मिल रहा है।

    भर्ती प्रक्रिया के अंतर्गत एनाटॉमी, अनेस्थीसियोलॉजी, बायोकेमिस्ट्री, सामुदायिक चिकित्सा, सामान्य चिकित्सा, सामान्य सर्जरी, माइक्रोबायोलॉजी, ऑर्थोपेडिक्स, पीडियाट्रिक्स, पैथोलॉजी, रेडियोलॉजी, मनोरोग चिकित्सा, रेस्पिरेटरी मेडिसिन और ब्लड बैंक समेत कई महत्वपूर्ण विभागों में रिक्तियां निकाली गई हैं। मेडिकल शिक्षा और अस्पताल प्रबंधन से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि यह भर्ती स्वास्थ्य शिक्षा प्रणाली को और मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।

    आवेदन प्रक्रिया ऑफलाइन माध्यम से शुरू हो चुकी है और इच्छुक उम्मीदवार निर्धारित अंतिम तिथि तक अपना आवेदन जमा कर सकते हैं। भर्ती में शामिल होने के लिए उम्मीदवारों के पास संबंधित विषय में एमडी, एमएस या समकक्ष मान्यता प्राप्त पोस्ट ग्रेजुएट डिग्री होना अनिवार्य रखा गया है। इसके साथ ही संबंधित विषय में निर्धारित वर्षों का शिक्षण अनुभव भी जरूरी होगा। इससे यह सुनिश्चित किया जाएगा कि चयनित उम्मीदवार मेडिकल शिक्षा के क्षेत्र में गुणवत्तापूर्ण योगदान दे सकें।

    आयु सीमा की बात करें तो उम्मीदवारों की अधिकतम उम्र 50 वर्ष निर्धारित की गई है। हालांकि आरक्षित वर्गों से आने वाले अभ्यर्थियों को सरकारी नियमों के अनुसार आयु सीमा में विशेष छूट प्रदान की जाएगी। भर्ती प्रक्रिया में उम्मीदवारों का चयन इंटरव्यू, शॉर्टलिस्टिंग और दस्तावेज सत्यापन के आधार पर किया जाएगा। चयनित उम्मीदवारों को आकर्षक वेतनमान के साथ अन्य सरकारी सुविधाएं और भत्ते भी दिए जाएंगे। जानकारी के अनुसार चयनित प्रोफेसरों को प्रति माह एक लाख तेइस हजार रुपये से लेकर दो लाख पंद्रह हजार रुपये तक का वेतन मिल सकेगा।

    आवेदन शुल्क को लेकर भी अलग-अलग श्रेणियों के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं। सामान्य, ओबीसी, ईडब्ल्यूएस और विभागीय पुरुष उम्मीदवारों के लिए आवेदन शुल्क निर्धारित किया गया है, जबकि अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, दिव्यांग, महिलाओं और पूर्व सैनिकों को शुल्क में छूट दी गई है। इससे अधिक से अधिक योग्य उम्मीदवारों को आवेदन का अवसर मिल सकेगा।

    उम्मीदवारों को आवेदन पत्र भरते समय सभी आवश्यक दस्तावेज सावधानीपूर्वक संलग्न करने होंगे। आवेदन फॉर्म जमा करने के बाद उसकी एक प्रति भविष्य के लिए सुरक्षित रखना भी जरूरी बताया गया है। मेडिकल शिक्षा क्षेत्र में स्थायी और प्रतिष्ठित सरकारी नौकरी की तलाश कर रहे उम्मीदवारों के लिए यह भर्ती एक बड़ा अवसर मानी जा रही है। आने वाले समय में इस भर्ती प्रक्रिया को लेकर प्रतियोगिता भी काफी बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।

  • बढ़ सकती हैं जरूरी दवाओं की कीमतें: फार्मा कंपनियों की तैयारी, आम लोगों पर पड़ सकता है असर

    बढ़ सकती हैं जरूरी दवाओं की कीमतें: फार्मा कंपनियों की तैयारी, आम लोगों पर पड़ सकता है असर


    नई दिल्ली । पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव और युद्ध जैसे हालातों का असर अब वैश्विक सप्लाई चेन पर साफ दिखाई देने लगा है। पेट्रोकेमिकल आधारित कच्चे माल की आपूर्ति प्रभावित होने से दवा निर्माण की लागत में बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। इसी कारण देश में 384 जरूरी दवाओं की कीमतें बढ़ने की संभावना जताई जा रही है, जिससे फार्मा सेक्टर में हलचल तेज हो गई है।

    सूत्रों के अनुसार, केंद्र सरकार और दवा मूल्य निर्धारण से जुड़ी संस्थाओं के बीच इस मुद्दे पर गंभीर चर्चा चल रही है। उद्योग जगत की ओर से यह प्रस्ताव दिया गया है कि बढ़ती उत्पादन लागत को देखते हुए आवश्यक दवाओं की कीमतों में संशोधन किया जाए। फिलहाल सरकार इस प्रस्ताव की समीक्षा कर रही है और अंतिम निर्णय परिस्थितियों को देखते हुए लिया जा सकता है।

    बताया जा रहा है कि जिन दवाओं की कीमतों में बदलाव की चर्चा हो रही है, उनमें कई जीवन रक्षक दवाएं शामिल हैं। इनमें एंटीबायोटिक, हृदय रोगों की दवाएं, बुखार और दर्द निवारक दवाएं, सूजन कम करने वाली दवाएं तथा विटामिन सप्लीमेंट जैसी आवश्यक दवाएं भी शामिल हैं। इन दवाओं का उपयोग सामान्य संक्रमण से लेकर गंभीर बीमारियों के इलाज तक में किया जाता है, जिससे इनकी मांग हमेशा बनी रहती है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और पेट्रोकेमिकल उत्पादों की कीमतों में उतार-चढ़ाव का सीधा असर दवा निर्माण पर पड़ता है। कई जरूरी फार्मा सामग्री आयात पर निर्भर होती है, ऐसे में सप्लाई बाधित होने पर उत्पादन लागत बढ़ जाती है। इसी वजह से कंपनियां कीमतों में संशोधन की मांग कर रही हैं।

    हालांकि यह भी संभावना जताई जा रही है कि यदि वैश्विक हालात सामान्य होते हैं और सप्लाई चेन फिर से स्थिर हो जाती है, तो इन दवाओं की कीमतों में कमी भी संभव है। फिलहाल स्थिति पर नजर रखी जा रही है और अंतिम निर्णय नियामक संस्थाओं की समीक्षा के बाद ही सामने आएगा।

    इस संभावित बदलाव को लेकर आम लोगों में चिंता भी बढ़ सकती है, क्योंकि जरूरी दवाओं की कीमतों में वृद्धि सीधे स्वास्थ्य खर्च पर असर डालती है। विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार को इस दौरान संतुलन बनाए रखना होगा ताकि मरीजों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ न पड़े और दवा उद्योग भी स्थिर बना रहे।

  • साइबर फ्रॉड पर सख्ती: वरिष्ठ नागरिकों के लिए डबल OTP सिस्टम से बढ़ेगी बैंकिंग सुरक्षा

    साइबर फ्रॉड पर सख्ती: वरिष्ठ नागरिकों के लिए डबल OTP सिस्टम से बढ़ेगी बैंकिंग सुरक्षा


    नई दिल्ली । देश में तेजी से बढ़ रहे साइबर अपराध और ऑनलाइन बैंकिंग फ्रॉड के मामलों के बीच वरिष्ठ नागरिकों की सुरक्षा को लेकर एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। डिजिटल लेनदेन के दौरान होने वाली ठगी की घटनाओं पर रोक लगाने के उद्देश्य से अब “डबल OTP सिस्टम” लागू किया जा रहा है। इस नई व्यवस्था के तहत 60 वर्ष और उससे अधिक आयु के खाताधारकों के बैंक ट्रांजैक्शन को तभी मंजूरी मिलेगी जब दो अलग-अलग स्तरों पर OTP की पुष्टि पूरी हो जाएगी।

    जानकारी के अनुसार, इस प्रणाली के तहत पहला OTP खाताधारक के रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर भेजा जाएगा, जबकि दूसरा OTP उस व्यक्ति के मोबाइल नंबर पर जाएगा जिसे खाताधारक ने अपने विश्वसनीय संपर्क यानी “ट्रस्टेड कॉन्टैक्ट” के रूप में चुना होगा। यह संपर्क आमतौर पर परिवार का कोई सदस्य या भरोसेमंद व्यक्ति होता है। जब तक दोनों OTP की पुष्टि नहीं हो जाती, तब तक कोई भी वित्तीय लेनदेन पूरा नहीं किया जा सकेगा।

    इस नई व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि वरिष्ठ नागरिकों के साथ किसी भी प्रकार की डिजिटल धोखाधड़ी न हो सके। कई बार देखा गया है कि साइबर अपराधी फर्जी कॉल, लिंक या खुद को अधिकारी बताकर लोगों से बैंक डिटेल्स हासिल कर लेते हैं। ऐसे मामलों में बुजुर्ग अधिक असुरक्षित माने जाते हैं क्योंकि वे तकनीकी धोखाधड़ी को तुरंत पहचान नहीं पाते। डबल OTP सिस्टम इस खतरे को काफी हद तक कम करने में मदद करेगा।

    फिलहाल इस व्यवस्था को सीमित स्तर पर लागू किया गया है और इसे पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर कुछ बैंकों में शुरू किया गया है। शुरुआती चरण में चुनिंदा शाखाओं को इसमें शामिल किया गया है, जहां वरिष्ठ नागरिक ग्राहकों के लिए इस नई सुविधा का परीक्षण किया जा रहा है। परीक्षण सफल रहने के बाद इसे धीरे-धीरे अन्य बैंकों में भी लागू किए जाने की संभावना है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम डिजिटल बैंकिंग सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में एक अहम पहल है। इससे न केवल धोखाधड़ी की घटनाओं में कमी आएगी, बल्कि परिवार के सदस्यों की भागीदारी भी वित्तीय सुरक्षा में बढ़ेगी। हालांकि विशेषज्ञ यह भी चेतावनी देते हैं कि सुरक्षा के साथ-साथ सिस्टम को सरल बनाए रखना भी जरूरी है, ताकि वरिष्ठ नागरिकों को किसी प्रकार की तकनीकी परेशानी का सामना न करना पड़े।

    डिजिटल बैंकिंग के बढ़ते उपयोग के साथ साइबर अपराधियों के तरीके भी लगातार बदल रहे हैं। ऐसे में यह डबल OTP सिस्टम एक अतिरिक्त सुरक्षा परत की तरह काम करेगा, जिससे बिना दूसरी पुष्टि के कोई भी बड़ा लेनदेन संभव नहीं होगा। इससे ऑनलाइन ठगी, डिजिटल अरेस्ट और फर्जी लेनदेन जैसे मामलों पर अंकुश लगने की उम्मीद जताई जा रही है।

  • दूसरे दिन भी मजबूत रहा वेगोरमा पंजाबी अंगीठी आईपीओ का सब्सक्रिप्शन, ग्रे मार्केट प्रीमियम में आई बड़ी नरमी

    दूसरे दिन भी मजबूत रहा वेगोरमा पंजाबी अंगीठी आईपीओ का सब्सक्रिप्शन, ग्रे मार्केट प्रीमियम में आई बड़ी नरमी

    नई दिल्ली। फूड और क्लाउड किचन सेक्टर से जुड़ी कंपनी वेगोरामा पंजाबी अंगीठी का एसएमई आईपीओ निवेशकों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। दूसरे दिन भी इस इश्यू को अच्छा रिस्पॉन्स मिलता दिखाई दिया, हालांकि ग्रे मार्केट प्रीमियम में आई गिरावट ने बाजार के रुख को लेकर नई चर्चाएं शुरू कर दी हैं। कंपनी उत्तर भारतीय और पंजाबी फूड सेगमेंट में अपनी मजबूत पहचान बना चुकी है और अब आईपीओ के जरिए जुटाई गई राशि के सहारे अपने कारोबार को और विस्तार देने की तैयारी में है।

    कंपनी का यह आईपीओ लगभग 38 करोड़ रुपये जुटाने के उद्देश्य से लाया गया है। इसमें फ्रेश इश्यू के साथ ऑफर फॉर सेल भी शामिल है। बाजार में शुरुआत से ही इस इश्यू को लेकर निवेशकों में उत्साह देखने को मिला और पहले ही दिन यह पूरी तरह सब्सक्राइब हो गया था। दूसरे दिन भी रिटेल और गैर-संस्थागत निवेशकों की ओर से मजबूत भागीदारी जारी रही, जिससे यह संकेत मिला कि छोटे और मध्यम स्तर के निवेशकों के बीच इस कंपनी को लेकर भरोसा बना हुआ है। हालांकि संस्थागत निवेशकों की भागीदारी अपेक्षाकृत धीमी दिखाई दी, जिस पर बाजार विशेषज्ञ लगातार नजर बनाए हुए हैं।

    कंपनी ने अपने शेयरों का प्राइस बैंड 73 से 77 रुपये प्रति शेयर तय किया है। रिटेल निवेशकों के लिए न्यूनतम निवेश राशि अपेक्षाकृत अधिक रखी गई है, जिसके कारण यह इश्यू मुख्य रूप से उन निवेशकों को आकर्षित कर रहा है जो एसएमई प्लेटफॉर्म पर लंबी अवधि के अवसर तलाश रहे हैं। कंपनी की लिस्टिंग आगामी दिनों में बीएसई एसएमई प्लेटफॉर्म पर होने वाली है और उससे पहले ही एंकर निवेशकों से कंपनी को अच्छी पूंजी मिल चुकी है।

    हालांकि आईपीओ को मिल रहे अच्छे सब्सक्रिप्शन के बावजूद ग्रे मार्केट प्रीमियम में आई गिरावट ने निवेशकों के बीच सतर्कता बढ़ा दी है। शुरुआती दौर में जहां इस इश्यू का प्रीमियम काफी ऊंचा बताया जा रहा था, वहीं अब इसमें कमी देखी जा रही है। बाजार जानकारों का मानना है कि यह बदलाव निवेशकों की अल्पकालिक मुनाफावसूली की सोच और मौजूदा बाजार परिस्थितियों का संकेत हो सकता है। फिर भी मजबूत ब्रांड पहचान और विस्तार योजनाओं के कारण कंपनी को लेकर सकारात्मक दृष्टिकोण पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।

    वेगोरामा पंजाबी अंगीठी का बिजनेस मॉडल मुख्य रूप से क्लाउड किचन, डाइन-इन और ऑनलाइन फूड डिलीवरी पर आधारित है। दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में कंपनी ने तेजी से अपनी मौजूदगी बढ़ाई है और शहरी ग्राहकों के बीच इसकी लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है। कंपनी अब आईपीओ से मिलने वाली राशि का उपयोग नए आउटलेट्स और इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने में करेगी, जिससे आने वाले समय में इसके विस्तार की संभावनाएं और बढ़ सकती हैं।

  • जंग और वैश्विक तनाव के बीच चमके भारतीय मिडकैप स्टॉक्स, Suzlon और BHEL समेत कई कंपनियों ने दिया जोरदार रिटर्न

    जंग और वैश्विक तनाव के बीच चमके भारतीय मिडकैप स्टॉक्स, Suzlon और BHEL समेत कई कंपनियों ने दिया जोरदार रिटर्न

    नई दिल्ली । वैश्विक स्तर पर बढ़ते युद्ध जैसे हालात और पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच भारतीय शेयर बाजार में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। अमेरिका, ईरान और इजराइल के बीच बढ़ते तनाव ने अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अनिश्चितता का माहौल पैदा कर दिया है, जिसका सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों और निवेशकों की धारणा पर पड़ा है। इसके बावजूद भारतीय बाजार में कुछ मिडकैप कंपनियों ने उम्मीद से कहीं बेहतर प्रदर्शन कर निवेशकों को चौंका दिया है। खासतौर पर ऊर्जा, इंफ्रास्ट्रक्चर और रिन्यूएबल सेक्टर से जुड़ी कंपनियों के शेयरों में मजबूत तेजी दर्ज की गई है।

    बाजार में कमजोरी और भारी बिकवाली के माहौल के बावजूद कुछ मिडकैप शेयरों ने 20 प्रतिशत से लेकर 51 प्रतिशत तक की तेजी दिखाई है। इन कंपनियों में BHEL, Suzlon Energy, Thermax, Premier Energies और Ola Electric Mobility जैसी कंपनियां प्रमुख रूप से शामिल हैं। इन शेयरों में आई तेजी ने यह संकेत दिया है कि निवेशक फिलहाल उन सेक्टरों की ओर अधिक आकर्षित हो रहे हैं, जिनका सीधा संबंध ऊर्जा सुरक्षा और वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों से है।

    भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड यानी BHEL इस रैली में सबसे आगे दिखाई दी है। कंपनी के शेयरों में पिछले कुछ महीनों के दौरान जबरदस्त उछाल दर्ज किया गया और इसने निवेशकों को शानदार रिटर्न दिया। विशेषज्ञों का मानना है कि पावर और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में बढ़ते निवेश तथा सरकारी परियोजनाओं से कंपनी को मजबूत समर्थन मिल रहा है।

    वहीं, रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर की चर्चित कंपनी Suzlon Energy ने भी बाजार में अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई है। पवन ऊर्जा क्षेत्र में कंपनी की सक्रियता और स्वच्छ ऊर्जा की बढ़ती मांग ने निवेशकों का भरोसा बढ़ाया है। हाल के महीनों में कंपनी के शेयरों में अच्छी तेजी देखने को मिली है, हालांकि लंबे समय के उतार-चढ़ाव के कारण निवेशक अब भी सतर्क नजर आ रहे हैं।

    Thermax और Premier Energies जैसी कंपनियों को भी बढ़ती ऊर्जा मांग और वैकल्पिक ऊर्जा समाधानों पर बढ़ते फोकस का फायदा मिला है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेल और गैस की कीमतों में तेजी ने निवेशकों का ध्यान रिन्यूएबल और ऊर्जा दक्षता आधारित कंपनियों की ओर मोड़ दिया है। इसी कारण इन कंपनियों के शेयरों में भी लगातार मजबूती बनी हुई है।

    इलेक्ट्रिक वाहन क्षेत्र से जुड़ी Ola Electric Mobility ने भी इस दौरान तेज रिकवरी दिखाई है। हालांकि कंपनी के शेयर पहले दबाव में थे, लेकिन बाजार में सुधार और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी सेक्टर के प्रति बढ़ते भरोसे ने इसमें तेजी वापस ला दी।

    विशेषज्ञों का मानना है that वैश्विक तनाव के दौर में निवेशक ऐसे सेक्टरों में अवसर तलाशते हैं जो भविष्य की जरूरतों और ऊर्जा सुरक्षा से जुड़े हों। यही वजह है कि रिन्यूएबल एनर्जी, स्मार्ट पावर और इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियां निवेशकों के लिए आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं।

    कुल मिलाकर, बाजार में अस्थिरता और वैश्विक दबाव के बावजूद भारतीय मिडकैप सेक्टर के कुछ चुनिंदा शेयरों ने यह साबित किया है कि मजबूत बिजनेस मॉडल और भविष्य की संभावनाओं वाली कंपनियां कठिन परिस्थितियों में भी बेहतर प्रदर्शन कर सकती हैं।

  • मेगा मर्जर की चर्चा के बीच PFC और REC पर निवेशकों की नजर, जानिए किस शेयर में ज्यादा दम

    नई दिल्ली । पावर फाइनेंस सेक्टर में संभावित मेगा मर्जर को लेकर बाजार में हलचल तेज हो गई है। पावर फाइनेंस कॉर्पोरेशन लिमिटेड और REC लिमिटेड के प्रस्तावित विलय ने निवेशकों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। दोनों सरकारी वित्तीय कंपनियों के शेयरों में हाल के महीनों में अलग-अलग प्रदर्शन देखने को मिला है, जिसके बाद बाजार विशेषज्ञ लगातार यह आकलन कर रहे हैं कि निवेशकों के लिए कौन सा विकल्प ज्यादा मजबूत साबित हो सकता है।

    साल 2026 में अब तक PFC के शेयरों में उल्लेखनीय तेजी दर्ज की गई है, जबकि REC के शेयरों में कमजोरी देखने को मिली है। इसी अंतर ने निवेशकों के बीच यह सवाल खड़ा कर दिया है कि मर्जर प्रक्रिया आगे बढ़ने के दौरान किस कंपनी में निवेश ज्यादा सुरक्षित और लाभदायक हो सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल PFC अपेक्षाकृत मजबूत स्थिति में दिखाई दे रही है, क्योंकि प्रस्तावित ढांचे में यह प्रमुख भूमिका में रह सकती है।

    सरकार पहले ही दोनों कंपनियों के संचालन को अधिक प्रभावी और संगठित बनाने की दिशा में संकेत दे चुकी है। इससे पहले PFC द्वारा REC में सरकार की हिस्सेदारी का अधिग्रहण किए जाने के बाद दोनों कंपनियां होल्डिंग और सब्सिडियरी संरचना में कार्य कर रही हैं। अब प्रस्तावित मर्जर के तहत दोनों को एकीकृत बैलेंस शीट के अंतर्गत लाने की योजना बनाई जा रही है। हालांकि यह प्रक्रिया अभी विभिन्न नियामकीय मंजूरियों और विस्तृत संरचनात्मक प्रक्रियाओं पर निर्भर है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि इस संभावित विलय से परिचालन लागत कम करने, फंडिंग क्षमता मजबूत करने और कारोबार के एकीकरण में मदद मिल सकती है। यही वजह है कि बाजार में इस डील को लेकर उत्साह बना हुआ है। हालांकि विश्लेषकों ने निवेशकों को जल्दबाजी से बचने की सलाह दी है। उनका मानना है कि केवल मर्जर की खबरों के आधार पर निवेश करना जोखिम भरा हो सकता है, क्योंकि आगे की दिशा काफी हद तक शेयर स्वैप अनुपात और अंतिम शर्तों पर निर्भर करेगी।

    विशेषज्ञों के अनुसार, REC में हालिया कमजोरी के कारण भविष्य में तेजी की संभावना बन सकती है, लेकिन इसे पूरी तरह मर्जर आधारित अवसर माना जा रहा है। वहीं PFC को अधिक स्थिर विकल्प के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि कंपनी की स्थिति तुलनात्मक रूप से मजबूत मानी जा रही है। ऐसे में कम जोखिम लेने वाले निवेशकों के लिए PFC अधिक सुरक्षित विकल्प माना जा सकता है।

    इस पूरे घटनाक्रम के बीच पावर सेक्टर की मजबूत विकास संभावनाएं भी इन कंपनियों के पक्ष में दिखाई दे रही हैं। देश में बढ़ते बिजली ढांचे, ट्रांसमिशन नेटवर्क के विस्तार और रिन्यूएबल एनर्जी परियोजनाओं पर बढ़ते निवेश से दोनों कंपनियों को दीर्घकालिक लाभ मिलने की उम्मीद है। साथ ही राज्यों की बिजली वितरण कंपनियों की वित्तीय स्थिति में सुधार भी इनके कारोबार को समर्थन दे रहा है।

    कुल मिलाकर, PFC और REC का संभावित मेगा मर्जर भारतीय पावर फाइनेंस सेक्टर के लिए बड़ा बदलाव साबित हो सकता है। हालांकि निवेशकों के लिए यह समय सतर्कता और संतुलित रणनीति अपनाने का माना जा रहा है, क्योंकि आने वाले फैसले ही तय करेंगे कि इस रेस में आखिर किस कंपनी को सबसे बड़ा फायदा मिलेगा।