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  • एस. जयशंकर ने रखा भारत का वैश्विक विजन; बोले- संघर्ष और अस्थिरता के दौर में संयुक्त राष्ट्र को निभानी होगी निर्णायक भूमिका

    एस. जयशंकर ने रखा भारत का वैश्विक विजन; बोले- संघर्ष और अस्थिरता के दौर में संयुक्त राष्ट्र को निभानी होगी निर्णायक भूमिका

    नई दिल्ली । भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) की 2028-29 की गैर-स्थायी सदस्यता के लिए अपना औपचारिक अभियान शुरू करते हुए वैश्विक मंच पर अपनी प्राथमिकताओं और दृष्टिकोण को स्पष्ट किया है। विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने अभियान की शुरुआत के दौरान कहा कि वर्तमान समय में दुनिया अभूतपूर्व संघर्ष, हिंसा और अस्थिरता के दौर से गुजर रही है। ऐसे माहौल में संयुक्त राष्ट्र और विशेष रूप से सुरक्षा परिषद की जिम्मेदारी पहले से कहीं अधिक बढ़ गई है। उन्होंने कहा कि वैश्विक शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए संयुक्त राष्ट्र को अधिक प्रभावी, प्रतिनिधित्वपूर्ण और भविष्य की चुनौतियों के अनुरूप कार्य करना होगा।

    डॉ. जयशंकर ने कहा कि भारत का उद्देश्य केवल सुरक्षा परिषद की सदस्यता हासिल करना नहीं, बल्कि वैश्विक शासन व्यवस्था को अधिक समावेशी और व्यावहारिक बनाने में सक्रिय योगदान देना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत ऐसी विश्व व्यवस्था का समर्थन करता है जहां सभी देशों की आवाज को समान महत्व मिले और विकासशील देशों, विशेषकर ग्लोबल साउथ, को निर्णय प्रक्रिया में उचित प्रतिनिधित्व प्राप्त हो। उनके अनुसार बदलती वैश्विक परिस्थितियों में बहुपक्षीय संस्थाओं को भी समय के अनुरूप स्वयं को ढालना आवश्यक है।

    विदेश मंत्री ने बताया कि भारत का पूरा अभियान एसएचएएनटीआई दृष्टिकोण पर आधारित होगा, जिसका उद्देश्य विश्वास, पारदर्शिता, अंतरराष्ट्रीय मानकों और सहयोग के माध्यम से समग्र प्रगति सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि भारत विभिन्न देशों के बीच संवाद, सहयोग और आपसी विश्वास को बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास करेगा ताकि अंतरराष्ट्रीय विवादों का समाधान शांतिपूर्ण तरीकों से संभव हो सके। उनका मानना है कि स्थायी शांति केवल बातचीत और सहयोग से ही सुनिश्चित की जा सकती है।

    उन्होंने संयुक्त राष्ट्र शांति अभियानों को और अधिक प्रभावी बनाने की आवश्यकता पर भी बल दिया। उनके अनुसार भविष्य की चुनौतियों का सामना करने के लिए पीसकीपिंग मिशनों को आधुनिक तकनीक, बेहतर प्रशिक्षण और स्पष्ट रणनीति से लैस करना जरूरी है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत महिला, शांति और सुरक्षा एजेंडा को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध रहेगा तथा शांति अभियानों में महिला शांति सैनिकों की भूमिका को और मजबूत करने का समर्थन करेगा।

    नई और उभरती तकनीकों का उल्लेख करते हुए डॉ. जयशंकर ने कहा कि भारत कृत्रिम बुद्धिमत्ता के मानव-केंद्रित और जिम्मेदार उपयोग का समर्थक है। उन्होंने कहा कि एआई का उपयोग समावेशी विकास, सार्वजनिक हित और सुरक्षा के लिए किया जाना चाहिए। साथ ही इसके दुरुपयोग को रोकने और अंतरराष्ट्रीय शांति व सुरक्षा पर संभावित खतरों से निपटने के लिए वैश्विक सहयोग की आवश्यकता भी उन्होंने रेखांकित की।

    समुद्री सुरक्षा को भारत की महत्वपूर्ण प्राथमिकताओं में शामिल बताते हुए विदेश मंत्री ने कहा कि नियम-आधारित और स्वतंत्र समुद्री व्यवस्था अंतरराष्ट्रीय व्यापार और वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए आवश्यक है। उन्होंने सुरक्षित समुद्री व्यापार, समुद्री डकैती पर नियंत्रण, नाविकों की सुरक्षा तथा मानवीय सहायता और आपदा राहत अभियानों को निरंतर समर्थन देने की भारत की प्रतिबद्धता दोहराई। साथ ही उन्होंने आतंकवाद के वित्तपोषण पर प्रभावी रोक लगाने और आतंकी संगठनों के खिलाफ पारदर्शी एवं साक्ष्य-आधारित वैश्विक प्रतिबंध प्रणाली की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

    अपने संबोधन के अंत में डॉ. जयशंकर ने कहा कि आज की चुनौतियों का समाधान तभी संभव है जब संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद अधिक प्रतिनिधित्वपूर्ण, उत्तरदायी और परिणामोन्मुख बने। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि भारत का अभियान वैश्विक शासन व्यवस्था को अधिक समावेशी, संतुलित और प्रभावी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान देगा तथा विश्व समुदाय के सामने मौजूद नई चुनौतियों से सामूहिक रूप से निपटने का मार्ग प्रशस्त करेगा।

  • 10 महीनों में 50 लाख यूजर्स का आंकड़ा पार, 'अदाणी वन' ऐप ने एयरपोर्ट लॉयल्टी प्रोग्राम में बनाई मजबूत पहचान, यात्रियों के लिए जल्द आएंगी नई प्रीमियम सुविधाएं

    10 महीनों में 50 लाख यूजर्स का आंकड़ा पार, 'अदाणी वन' ऐप ने एयरपोर्ट लॉयल्टी प्रोग्राम में बनाई मजबूत पहचान, यात्रियों के लिए जल्द आएंगी नई प्रीमियम सुविधाएं

    नई दिल्ली । देश में तेजी से बढ़ते डिजिटल एयरपोर्ट इकोसिस्टम के बीच अदाणी एयरपोर्ट होल्डिंग्स लिमिटेड के कंज्यूमर ऐप ‘अदाणी वन’ ने एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। कंपनी के एयरपोर्ट लॉयल्टी प्रोग्राम ‘अदाणी रिवार्ड्स’ ने लॉन्च होने के महज 10 महीनों के भीतर 50 लाख सदस्यों का आंकड़ा पार कर लिया है। यह उपलब्धि इस बात का संकेत मानी जा रही है कि यात्रियों के बीच डिजिटल सेवाओं और रिवार्ड आधारित सुविधाओं की स्वीकार्यता लगातार बढ़ रही है। कंपनी का मानना है कि यह बढ़ती भागीदारी यात्रियों को अधिक सुविधाजनक, तेज और लाभकारी एयरपोर्ट अनुभव उपलब्ध कराने की दिशा में सकारात्मक संकेत देती है।

    ‘अदाणी रिवार्ड्स’ देश के सात राज्यों में स्थित अदाणी एयरपोर्ट्स द्वारा संचालित सभी आठ एयरपोर्ट पर उपलब्ध है। इस कार्यक्रम के तहत यात्री ‘अदाणी वन’ ऐप के माध्यम से एयरपोर्ट परिसर में खरीदारी, खानपान और अन्य सेवाओं का उपयोग करते समय रिवार्ड पॉइंट अर्जित कर सकते हैं। बाद में इन पॉइंट्स का उपयोग विभिन्न सुविधाओं और विशेष लाभों के लिए किया जा सकता है। इससे यात्रियों को अपनी नियमित यात्रा के दौरान अतिरिक्त लाभ प्राप्त करने का अवसर मिलता है।

    कंपनी के अनुसार, डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से यात्रियों को एकीकृत सेवाएं उपलब्ध कराने का प्रयास लगातार किया जा रहा है। ऐप के जरिए टिकट, एयरपोर्ट सेवाएं और रिवार्ड सिस्टम को एक ही मंच पर उपलब्ध कराने से उपयोगकर्ताओं का अनुभव अधिक सरल और सुविधाजनक बना है। यही वजह है कि कम समय में बड़ी संख्या में लोगों ने इस प्लेटफॉर्म को अपनाया है और लॉयल्टी प्रोग्राम से जुड़ना पसंद किया है।

    कंपनी ने यह भी जानकारी दी है कि वर्ष के अंत तक टियर-बेस्ड मेंबरशिप मॉडल शुरू करने की योजना बनाई गई है। इस नई व्यवस्था के तहत नियमित और अधिक यात्रा करने वाले यात्रियों को अतिरिक्त लाभ, विशेष सुविधाएं और उनकी जरूरतों के अनुरूप व्यक्तिगत सेवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। इससे यात्रियों की भागीदारी बढ़ाने के साथ-साथ एयरपोर्ट अनुभव को और बेहतर बनाने का लक्ष्य रखा गया है।

    कंपनी के प्रतिनिधियों का कहना है कि 50 लाख सदस्यों का आंकड़ा पार करना ‘अदाणी रिवार्ड्स’ के लिए एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। आने वाले समय में नए फीचर्स, बेहतर ऑफर्स और अतिरिक्त सुविधाएं जोड़ी जाएंगी ताकि अधिक से अधिक यात्री इस प्लेटफॉर्म से जुड़ सकें। कंपनी का उद्देश्य अपने सभी एयरपोर्ट पर यात्रियों को एक समान और आधुनिक डिजिटल अनुभव प्रदान करना है।

    यात्रियों के लिए इस प्रोग्राम से जुड़ना भी काफी आसान बनाया गया है। एयरपोर्ट पर खरीदारी या अन्य सेवाओं का उपयोग करते समय केवल मोबाइल नंबर के माध्यम से तुरंत सदस्यता ली जा सकती है। इसके बाद अर्जित रिवार्ड पॉइंट्स का उपयोग मुफ्त खानपान, प्रीमियम एयरपोर्ट सेवाओं और अन्य विशेष सुविधाओं के लिए किया जा सकता है। इससे यात्रियों को नियमित यात्रा के दौरान अतिरिक्त मूल्य प्राप्त होता है।

    कंपनी ने यह भी बताया कि दिवाली, विंटरफेस्ट और समर कार्निवल जैसे विशेष अभियान उपयोगकर्ताओं की भागीदारी बढ़ाने में प्रभावी साबित हुए हैं। इन अभियानों के दौरान विशेष ऑफर्स और चुनिंदा अनुभव उपलब्ध कराए गए, जिससे ऐप के उपयोग में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई। वर्तमान में कंपनी मुंबई, अहमदाबाद, लखनऊ, जयपुर, मंगलुरु, गुवाहाटी, तिरुवनंतपुरम और नवी मुंबई सहित आठ एयरपोर्ट का संचालन कर रही है। आने वाले महीनों में लॉयल्टी प्रोग्राम का और विस्तार कर यात्रियों को अधिक डिजिटल सुविधाएं और बेहतर सेवाएं उपलब्ध कराने की योजना पर काम किया जा रहा है।

  • अदाणी इलेक्ट्रिसिटी ने घटाया एटीएंडसी लॉस, हजारों छापों से करोड़ों की चोरी का हुआ खुलासा

    अदाणी इलेक्ट्रिसिटी ने घटाया एटीएंडसी लॉस, हजारों छापों से करोड़ों की चोरी का हुआ खुलासा


    नई दिल्ली ।
    बिजली चोरी के खिलाफ लगातार चलाए गए सघन अभियान का असर अब बिजली वितरण व्यवस्था के प्रदर्शन में भी दिखाई देने लगा है। अदाणी इलेक्ट्रिसिटी ने वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान अपने एग्रीगेट टेक्निकल एंड कमर्शियल (एटीएंडसी) लॉस को घटाकर 4.46 प्रतिशत तक पहुंचाने का दावा किया है। कंपनी के अनुसार यह पिछले वित्त वर्ष की तुलना में बेहतर प्रदर्शन है और इससे वितरण प्रणाली की दक्षता में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।

    कंपनी का कहना है कि एटीएंडसी लॉस में आई कमी का सीधा लाभ उन उपभोक्ताओं को मिलेगा जो नियमित रूप से बिजली बिल का भुगतान करते हैं। बिजली चोरी कम होने से वितरण कंपनियों पर वित्तीय दबाव घटता है, जिससे नेटवर्क को बेहतर बनाने और उपभोक्ताओं को गुणवत्तापूर्ण सेवा उपलब्ध कराने में मदद मिलती है। साथ ही बिजली आपूर्ति व्यवस्था भी अधिक स्थिर और विश्वसनीय बनती है।

    बिजली चोरी पर अंकुश लगाने के लिए पूरे वर्ष बड़े स्तर पर विशेष अभियान चलाया गया। इस दौरान हजारों स्थानों पर छापेमारी की गई और चोरी के मामलों में सैकड़ों प्राथमिकी दर्ज कराई गईं। अभियान के दौरान सुबह, देर शाम और अवकाश के दिनों में भी विशेष कार्रवाई की गई, ताकि चोरी के ऐसे मामलों को रोका जा सके जो सामान्य निरीक्षण के दौरान सामने नहीं आ पाते।

    जांच के दौरान बड़ी मात्रा में अवैध बिजली खपत का पता चला। इसके साथ ही बिजली चोरी में इस्तेमाल किए जा रहे भारी मात्रा में अवैध तार और अन्य उपकरण भी जब्त किए गए। कंपनी का कहना है कि इस कार्रवाई से करोड़ों रुपये मूल्य की अवैध बिजली खपत का खुलासा हुआ, जिससे वितरण व्यवस्था को होने वाले आर्थिक नुकसान को कम करने में मदद मिली।

    अभियान के दौरान औद्योगिक गतिविधियों से जुड़े कुछ बड़े मामलों का भी पता चला, जहां कथित रूप से सीधे बिजली आपूर्ति का उपयोग कर अवैध तरीके से बिजली का इस्तेमाल किया जा रहा था। ऐसे मामलों में संबंधित स्थानों पर कार्रवाई करते हुए अवैध कनेक्शन हटाए गए और कानूनी प्रक्रिया शुरू की गई। कंपनी का कहना है कि इस प्रकार की कार्रवाई भविष्य में बिजली चोरी पर प्रभावी रोक लगाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

    कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया कि बिजली चोरी केवल आर्थिक नुकसान का विषय नहीं है, बल्कि इससे पूरे वितरण नेटवर्क पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। अधिक भार के कारण ट्रांसफॉर्मर, केबल और अन्य उपकरणों के खराब होने की संभावना बढ़ जाती है। विशेष रूप से अधिक मांग वाले घनी आबादी वाले क्षेत्रों में इसका असर बिजली आपूर्ति की गुणवत्ता और रखरखाव लागत दोनों पर पड़ता है।

    बिजली अधिनियम के प्रावधानों के तहत बिजली चोरी को गंभीर अपराध माना गया है। दोषी पाए जाने पर संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ जुर्माना, कारावास अथवा दोनों प्रकार की कार्रवाई का प्रावधान है। इसी कारण कंपनी स्थानीय प्रशासन और पुलिस के सहयोग से नियमित संयुक्त अभियान चलाकर ऐसे मामलों में कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करने का प्रयास कर रही है।

    कंपनी का मानना है कि बिजली चोरी पर प्रभावी नियंत्रण से न केवल वितरण प्रणाली अधिक मजबूत होगी, बल्कि उपभोक्ताओं को प्रतिस्पर्धी दरों पर बेहतर सेवा उपलब्ध कराने में भी सहायता मिलेगी। आने वाले समय में भी विशेष निगरानी अभियान जारी रखने की योजना है, ताकि एटीएंडसी लॉस को और कम किया जा सके तथा बिजली वितरण व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और सक्षम बनाया जा सके।

  • टाटा कैपिटल की गोल्ड लोन बिजनेस में धमाकेदार एंट्री…. ₹318 करोड़ की डील की तैयारी!

    टाटा कैपिटल की गोल्ड लोन बिजनेस में धमाकेदार एंट्री…. ₹318 करोड़ की डील की तैयारी!


    नई दिल्ली।
    देश की दिग्गज गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी (NBFC) टाटा कैपिटल (Tata Capital) ने तेजी से बढ़ते गोल्ड लोन बिजनेस (Gold Loan Business) में धमाकेदार एंट्री कर ली है। कंपनी ने केरल की गोल्ड लोन कंपनी योगलोन्स (Yogakshemam Loans) में 88.6% हिस्सेदारी खरीदने का फैसला किया है। इस डील की कुल कीमत 318 करोड़ रुपये तक हो सकती है। इसके साथ ही टाटा कैपिटल (Tata Capital) ने कंपनी के विस्तार के लिए करीब 93 करोड़ रुपये का नया निवेश भी करने का फैसला किया है। इस अधिग्रहण के बाद योगलोन्स, टाटा कैपिटल की सहायक (Subsidiary) कंपनी बन जाएगी।

    यह डील ऐसे समय में हुआ है, जब भारत में गोल्ड लोन की मांग लगातार बढ़ रही है। बढ़ती महंगाई, आसान लोन प्रक्रिया और सोने की ऊंची कीमतों के कारण लोग तेजी से गोल्ड लोन का विकल्प अपना रहे हैं। ऐसे में टाटा कैपिटल (Tata Capital) का यह कदम उसके रिटेल लोन कारोबार को नई दिशा देने वाला माना जा रहा है।


    योगलोंस कौन है और क्यों है खास?

    योगलोंस (Yogloans) दक्षिण भारत की एक तेजी से बढ़ती गोल्ड लोन NBFC है। कंपनी के 162 ब्रांच केरल, कर्नाटक, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश में फैले हुए हैं। 31 मार्च तक कंपनी का एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) करीब 708 करोड़ रुपये था और यह लगभग 32,000 ग्राहकों को सेवाएं दे रही थी।

    इस कंपनी की सबसे बड़ी ताकत इसका अनुभवी प्रबंधन है। योगलोंस (Yogloans) के प्रमोटर उन्नीकृष्णन इडिचारम वीटिल पहले मनप्पुरम फाइनेंस (Manappuram Finance) के डिप्टी CEO रह चुके हैं। टाटा कैपिटल (Tata Capital) ने साफ किया है कि अधिग्रहण के बाद भी वही कंपनी का नेतृत्व करते रहेंगे, जिससे ग्राहकों और कर्मचारियों को किसी तरह की परेशानी नहीं होगी।


    टाटा कैपिटल को क्या होगा फायदा?

    टाटा कैपिटल (Tata Capital) का कुल नेट AUM 2.77 लाख करोड़ रुपये से अधिक है। अभी तक कंपनी का फोकस रिटेल लोन, SME लोन और कॉर्पोरेट लोन पर था। अब गोल्ड लोन जुड़ने से उसका रिटेल पोर्टफोलियो और मजबूत होगा।

    कंपनी के MD और CEO राजीव सभरवाल के अनुसार, गोल्ड लोन एक सुरक्षित (Secured) लेंडिंग बिजनेस है, जिसमें तेजी से ग्रोथ की संभावना है। इससे कंपनी का लोन पोर्टफोलियो और अधिक विविध (Diversified) बनेगा और भविष्य में कम जोखिम के साथ बेहतर कमाई का अवसर मिलेगा।


    भारत में क्यों बढ़ रहा है गोल्ड लोन का कारोबार?

    भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के आंकड़ों के अनुसार, मई के अंत तक NBFC का गोल्ड लोन पोर्टफोलियो 69% बढ़कर 3.3 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया। इससे साफ है कि यह सेक्टर तेजी से विस्तार कर रहा है। सोने की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी और आसान लोन उपलब्ध होने से ग्राहक भी इस विकल्प को पसंद कर रहे हैं।

    ब्रोकरेज फर्म IIFL Capital का मानना है कि योगलोंस (Yogloans) का लोन बुक भविष्य में करीब 5% Return on Assets (RoA) दे सकता है, जबकि टाटा कैपिटल (Tata Capital) का अनुमानित RoA करीब 2.2% है, यानी यह अधिग्रहण कंपनी की कमाई और मुनाफे दोनों को मजबूत कर सकता है।


    क्या मुथूट फाइनेंस और मनप्पुरम को मिलेगी चुनौती?

    अब तक भारत के गोल्ड लोन बाजार में मुथूट फाइनेंस और मनप्पुरम फाइनेंस जैसी कंपनियों का दबदबा रहा है। लेकिन टाटा ग्रुप (Tata Group) जैसे बड़े और भरोसेमंद ब्रांड की एंट्री से इस सेक्टर में प्रतिस्पर्धा और तेज होने की संभावना है। मजबूत वित्तीय स्थिति, बड़ा ग्राहक आधार और तकनीकी क्षमता के दम पर टाटा कैपिटल (Tata Capital) आने वाले सालों में गोल्ड लोन मार्केट में बड़ी हिस्सेदारी हासिल करने की कोशिश करेगी।

    टाटा कैपिटल (Tata Capital) का योगलोंस (Yogloans) में निवेश सिर्फ एक अधिग्रहण नहीं, बल्कि तेजी से बढ़ते गोल्ड लोन बाजार में अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराने की रणनीति है। यदि कंपनी इस कारोबार का सफलतापूर्वक विस्तार करती है, तो आने वाले समय में यह टाटा कैपिटल (Tata Capital) के लिए कमाई का एक बड़ा इंजन बन सकता है।

  • अब तक सिर्फ 1.97 करोड़ ITR दाखिल, डेडलाइन बढ़ने की उम्मीद नहीं… कहीं भारी न पड़ जाए 31 जुलाई का इंतजार!

    अब तक सिर्फ 1.97 करोड़ ITR दाखिल, डेडलाइन बढ़ने की उम्मीद नहीं… कहीं भारी न पड़ जाए 31 जुलाई का इंतजार!


    नई दिल्ली।
    अगर आपने अभी तक अपना इनकम टैक्स रिटर्न (Income Tax Return- ITR) दाखिल नहीं किया है और सोच रहे हैं कि पिछले साल की तरह इस बार भी सरकार अंतिम तारीख बढ़ा देगी, तो यह खबर आपके लिए बेहद जरूरी है। वित्त वर्ष 2025-26 (आकलन वर्ष 2026-27) के लिए 31 जुलाई ITR फाइल करने की आखिरी तारीख है। हालांकि, अब तक केवल करीब 1.97 करोड़ ITR ही दाखिल हुए हैं, जबकि पिछले दो वर्षों में कुल 7 करोड़ से ज्यादा रिटर्न फाइल हुए थे। धीमी रफ्तार को देखकर कई लोग डेडलाइन (Deadline) बढ़ने की उम्मीद लगा रहे हैं, लेकिन टैक्स एक्सपर्ट का कहना है कि इस बार ऐसा होने की संभावना बेहद कम है।

    पिछले साल सरकार ने ITR फाइल करने की अंतिम तारीख इसलिए बढ़ाई थी, क्योंकि आयकर विभाग ने ITR फॉर्म और ऑनलाइन फाइलिंग यूटिलिटी जारी करने में देरी की थी। इसके कारण करदाताओं के पास रिटर्न दाखिल करने के लिए पर्याप्त समय नहीं बचा था। लेकिन, इस साल स्थिति पूरी तरह अलग है। अधिकांश ITR फॉर्म, ऑनलाइन यूटिलिटी, फॉर्म 16, फॉर्म 26AS, एनुअल इंफॉर्मेशन स्टेटमेंट (AIS) और TIS (Taxpayer Information Summary) पहले से उपलब्ध हैं। ऐसे में टैक्सपेयर्स के पास समय की कमी का कोई बड़ा कारण नहीं है।

    एक्सपर्ट का मानना है कि अगर कोई बड़ा तकनीकी व्यवधान या आयकर पोर्टल पर गंभीर समस्या नहीं आती, तो सरकार के पास डेडलाइन बढ़ाने का कोई ठोस आधार नहीं होगा। इसलिए केवल उम्मीद के भरोसे बैठना महंगा साबित हो सकता है।

    अगर कोई करदाता 31 जुलाई के बाद ITR फाइल करता है, तो उसे कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। सबसे पहले इनकम टैक्स एक्ट की धारा 234F के तहत लेट फाइलिंग फीस देनी पड़ सकती है। अगर टैक्स बकाया है, तो उस पर ब्याज भी देना होगा। इतना ही नहीं, कुछ मामलों में कैपिटल लॉस या बिजनेस लॉस को अगले सालों में कैरी फॉरवर्ड करने का लाभ भी नहीं मिलेगा, यानी देरी सिर्फ जुर्माने तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि भविष्य की टैक्स प्लानिंग पर भी असर डाल सकती है।

    टैक्स एक्सपर्ट का कहना है कि जल्दी ITR फाइल करने के कई फायदे हैं। सबसे बड़ा फायदा यह है कि अगर आपको टैक्स रिफंड मिलना है, तो वह जल्दी प्रोसेस हो जाएगा। इसके अलावा अगर रिटर्न में कोई गलती रह जाती है, तो उसे समय रहते सुधारा भी जा सकता है। आखिरी दिनों में पोर्टल पर भारी ट्रैफिक के कारण वेबसाइट धीमी पड़ने या तकनीकी दिक्कतें आने की संभावना भी बढ़ जाती है, जिससे फाइलिंग में परेशानी हो सकती है।

    ITR दाखिल करने से पहले कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना भी बेहद जरूरी है। सबसे पहले फॉर्म 16, बैंक इंटरेस्ट सर्टिफिकेट, कैपिटल गेन स्टेटमेंट, अन्य आय से जुड़े दस्तावेज और टैक्स कटौती की पूरी जानकारी एकत्र कर लें। इसके बाद फॉर्म 26AS, AIS और TIS में दर्ज जानकारी का मिलान करें ताकि किसी भी तरह की गड़बड़ी से बचा जा सके। साथ ही यह भी जांच लें कि इस बार आपके लिए पुरानी टैक्स व्यवस्था (Old Tax Regime) बेहतर है या नई टैक्स व्यवस्था (New Tax Regime)। सिर्फ पिछले साल चुने गए विकल्प के आधार पर निर्णय लेना सही नहीं होगा।

    इस बार ITR की अंतिम तारीख बढ़ने की संभावना बेहद कम मानी जा रही है। इसलिए आखिरी समय तक इंतजार करने के बजाय जल्द से जल्द रिटर्न दाखिल करना ही समझदारी होगी। इससे न केवल जुर्माने और ब्याज से बचा जा सकेगा, बल्कि रिफंड भी जल्दी मिलेगा और किसी संभावित टैक्स नोटिस की आशंका भी कम हो जाएगी। अगर आपने अभी तक ITR फाइल नहीं किया है, तो 31 जुलाई से पहले यह काम पूरा करना आपके लिए सबसे सुरक्षित विकल्प होगा।

  • सेंसेक्स निफ्टी में आज क्या होगा बड़ा उतार चढ़ाव निवेशकों के लिए 14 जुलाई का पूरा मार्केट आउटलुक

    सेंसेक्स निफ्टी में आज क्या होगा बड़ा उतार चढ़ाव निवेशकों के लिए 14 जुलाई का पूरा मार्केट आउटलुक


    नई दिल्ली । 14 जुलाई को भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत कई अहम घरेलू और वैश्विक संकेतों के बीच होने जा रही है। निवेशकों की नजर एक ओर कंपनियों के पहली तिमाही के वित्तीय नतीजों पर रहेगी तो दूसरी ओर वैश्विक बाजारों की चाल भी बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। बीते कारोबारी सत्र में बाजार में उतार चढ़ाव देखने को मिला था और अब निवेशक यह जानने को उत्सुक हैं कि नया कारोबारी दिन किस दिशा में आगे बढ़ेगा।

    विशेषज्ञों का मानना है कि बाजार की चाल पर विदेशी संस्थागत निवेशकों और घरेलू संस्थागत निवेशकों की खरीद और बिकवाली का सीधा असर दिखाई दे सकता है। यदि विदेशी निवेशकों की खरीदारी मजबूत रहती है तो बाजार को सहारा मिल सकता है जबकि लगातार बिकवाली होने पर दबाव देखने को मिल सकता है। इसके साथ ही रुपये की चाल और कच्चे तेल की कीमतों पर भी निवेशकों की पैनी नजर बनी रहेगी क्योंकि इनका असर कई प्रमुख सेक्टरों पर पड़ता है।

    इस सप्ताह कई बड़ी कंपनियों के तिमाही नतीजे आने वाले हैं। ऐसे में बैंकिंग आईटी ऑटो फार्मा और एफएमसीजी सेक्टर के शेयरों में हलचल देखने को मिल सकती है। जिन कंपनियों के नतीजे उम्मीद से बेहतर रहेंगे उनके शेयरों में तेजी आने की संभावना बन सकती है जबकि कमजोर नतीजों का असर संबंधित शेयरों पर दबाव के रूप में दिखाई दे सकता है। यही वजह है कि निवेशकों को जल्दबाजी में निर्णय लेने के बजाय कंपनियों के प्रदर्शन और बाजार के रुझान पर ध्यान देना चाहिए।

    वैश्विक बाजारों से मिलने वाले संकेत भी आज के कारोबार के लिए महत्वपूर्ण रहेंगे। अमेरिका और एशियाई बाजारों का प्रदर्शन भारतीय बाजार की शुरुआती चाल को प्रभावित कर सकता है। यदि अंतरराष्ट्रीय बाजारों में सकारात्मक माहौल रहता है तो घरेलू बाजार में भी उत्साह देखने को मिल सकता है। वहीं किसी बड़े आर्थिक घटनाक्रम या भू राजनीतिक तनाव की स्थिति में बाजार में अस्थिरता बढ़ सकती है।

    तकनीकी विश्लेषकों के अनुसार बाजार फिलहाल महत्वपूर्ण सपोर्ट और रेजिस्टेंस स्तरों के बीच कारोबार कर सकता है। यदि प्रमुख सूचकांक शुरुआती कारोबार में मजबूती दिखाते हैं तो चुनिंदा सेक्टरों में खरीदारी बढ़ सकती है। दूसरी ओर कमजोर शुरुआत होने पर मुनाफावसूली का दबाव भी देखने को मिल सकता है। ऐसे माहौल में लंबी अवधि के निवेशकों को घबराने के बजाय मजबूत मूलभूत आधार वाली कंपनियों पर ध्यान देना चाहिए।

    बाजार विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि निवेशकों को अफवाहों या तेजी से बदलते माहौल में भावनात्मक फैसले लेने से बचना चाहिए। जोखिम प्रबंधन के साथ निवेश करना और अपने पोर्टफोलियो में विविधता बनाए रखना हमेशा बेहतर रणनीति मानी जाती है। खासकर नए निवेशकों को बिना पर्याप्त जानकारी के किसी भी शेयर में निवेश करने से बचना चाहिए।

    कुल मिलाकर 14 जुलाई का कारोबारी दिन कई अहम आर्थिक संकेतों और कॉरपोरेट नतीजों के कारण बाजार के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। निवेशकों को पूरे दिन बाजार की गतिविधियों पर नजर रखते हुए सोच समझकर निर्णय लेना चाहिए ताकि बदलते माहौल में बेहतर निवेश अवसरों का लाभ उठाया जा सके।

  • ईरान-अमेरिका तनाव का भारत पर असर, बढ़ा आयात खर्च, जून में व्यापार घाटा 30.4 अरब डॉलर पर पहुंचा

    ईरान-अमेरिका तनाव का भारत पर असर, बढ़ा आयात खर्च, जून में व्यापार घाटा 30.4 अरब डॉलर पर पहुंचा


    नई दिल्ली। ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव का असर अब भारतीय अर्थव्यवस्था पर भी दिखाई देने लगा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के कारण भारत का आयात बिल बढ़ गया है। इसका सीधा असर देश के व्यापार घाटे पर पड़ा है।

    सरकारी आंकड़ों के अनुसार, जून 2026 में भारत का व्यापार घाटा बढ़कर करीब 30.4 अरब डॉलर पहुंच गया, जो पिछले पांच महीनों का सबसे ऊंचा स्तर है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पश्चिम एशिया में तनाव लंबे समय तक जारी रहा और कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी रहीं, तो भारत पर आर्थिक दबाव और बढ़ सकता है।

    महंगे तेल ने बढ़ाया आयात खर्च
    भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़ी मात्रा में कच्चे तेल का आयात करता है। ऐसे में वैश्विक बाजार में तेल की कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा असर देश के आयात खर्च पर पड़ता है। जून महीने में कच्चे तेल का आयात 40 प्रतिशत से अधिक बढ़कर करीब 19.3 अरब डॉलर तक पहुंच गया। इसके पीछे मध्य-पूर्व में बढ़ा तनाव और सप्लाई को लेकर बनी अनिश्चितता को प्रमुख कारण माना जा रहा है।

    इसके अलावा खाद, इलेक्ट्रॉनिक सामान और मशीनरी के आयात में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई। इसके चलते जून में भारत का कुल आयात बढ़कर 70.8 अरब डॉलर हो गया।

    निर्यात बढ़ा, लेकिन घाटे पर नहीं लगी लगाम
    भारत के लिए राहत की बात यह रही कि जून में निर्यात में भी वृद्धि दर्ज की गई। देश का कुल निर्यात करीब 40.4 अरब डॉलर रहा, जो पिछले साल की तुलना में बेहतर प्रदर्शन है।

    इंजीनियरिंग उत्पाद, इलेक्ट्रॉनिक्स, दवाइयां और रसायनों की विदेशी मांग मजबूत रही। इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात में लगातार सुधार देखा गया, वहीं हीरे और आभूषणों के निर्यात में भी बढ़ोतरी हुई। हालांकि, आयात में हुई तेज वृद्धि के मुकाबले निर्यात की रफ्तार कम रही, जिसके कारण व्यापार घाटा बढ़ गया।

    आम लोगों पर क्या हो सकता है असर?
    व्यापार घाटे में बढ़ोतरी का असर केवल सरकारी आंकड़ों तक सीमित नहीं रहता। यदि कच्चा तेल लंबे समय तक महंगा बना रहता है, तो पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है।

    ईंधन महंगा होने से परिवहन लागत बढ़ सकती है, जिसका असर रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतों पर भी पड़ सकता है। इसके अलावा उद्योगों की उत्पादन लागत बढ़ने से कंपनियां अपने उत्पादों के दाम बढ़ा सकती हैं, जिससे महंगाई बढ़ने का खतरा रहता है। इसी वजह से सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।

    आगे की चुनौती और सरकार की रणनीति
    आर्थिक विशेषज्ञों का कहना है कि यदि पश्चिम एशिया में हालात जल्द सामान्य नहीं हुए तो भारत का आयात बिल ऊंचा बना रह सकता है। इससे चालू खाता घाटा (Current Account Deficit) बढ़ने की आशंका भी जताई जा रही है। सरकार फिलहाल निर्यात बढ़ाने और आयात पर निर्भरता कम करने के प्रयासों में जुटी है। इलेक्ट्रॉनिक्स और मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों में बढ़ता निर्यात सकारात्मक संकेत दे रहा है।

    हालांकि, भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए वैश्विक बाजार की स्थिति अब भी बड़ी चुनौती बनी हुई है। आने वाले समय में कच्चे तेल की कीमतें और भू-राजनीतिक हालात देश की आर्थिक दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

  • अब घरों में रखा सोना आएगा अर्थव्यवस्था के काम, सरकार 'गोल्ड मोनेटाइजेशन 2.0' प्रस्ताव पर कर रही विचार

    अब घरों में रखा सोना आएगा अर्थव्यवस्था के काम, सरकार 'गोल्ड मोनेटाइजेशन 2.0' प्रस्ताव पर कर रही विचार


    नई दिल्ली। भारतीय परिवारों के घरों और लॉकरों में वर्षों से सुरक्षित रखे सोने को औपचारिक अर्थव्यवस्था से जोड़ने की दिशा में केंद्र सरकार एक नए प्रस्ताव पर विचार कर रही है। सराफा कारोबारियों की ओर से तैयार किए गए इस प्रस्ताव को ‘गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम 2.0’ नाम दिया गया है। यदि इसे मंजूरी मिलती है, तो घरेलू स्तर पर मौजूद सोने का बड़ा हिस्सा बाजार में वापस आ सकता है, जिससे सोने के आयात पर निर्भरता कम होने के साथ अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है।

    शुरुआती लक्ष्य 200 टन सोना बाजार में लाने का
    सराफा संगठनों द्वारा सरकार को सौंपे गए प्रस्ताव के अनुसार, योजना के पहले चरण में देशभर के घरों में रखा करीब 200 टन सोना औपचारिक व्यवस्था में लाने का लक्ष्य रखा गया है। इससे घरेलू मांग का कुछ हिस्सा देश के भीतर उपलब्ध सोने से पूरा किया जा सकेगा और विदेशों से सोना आयात करने की आवश्यकता कम हो सकती है। इसके परिणामस्वरूप विदेशी मुद्रा की बचत होने की संभावना भी जताई गई है।

    पुरानी योजना से कैसे होगी अलग?
    इससे पहले लागू की गई गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम को अपेक्षित सफलता नहीं मिल पाई थी, क्योंकि लोग सीधे बैंकों के माध्यम से प्रक्रिया अपनाने में सहज महसूस नहीं करते थे।

    नए प्रस्ताव में व्यवस्था को अधिक आसान बनाने की बात कही गई है। इसके तहत ग्राहक अपने पुराने या अनुपयोगी आभूषण लेकर सीधे बैंक जाने के बजाय पंजीकृत ज्वेलर्स के पास पहुंच सकेंगे। ज्वेलर गहनों को गलाकर उनकी शुद्धता का आकलन करेगा और निर्धारित प्रक्रिया के तहत उन्हें बैंक में जमा कराया जाएगा।

    ग्राहकों को मिल सकती हैं गोल्ड यूनिट्स
    प्रस्ताव के मुताबिक, जमा किए गए सोने के बदले ग्राहक के बैंक खाते में उसी मूल्य के बराबर गोल्ड यूनिट्स क्रेडिट की जा सकती हैं। इससे लोग पुराने डिजाइनों के गहनों का बेहतर उपयोग कर सकेंगे और अपनी पसंद के नए आभूषण खरीदने का विकल्प भी मिलेगा। वहीं ज्वेलरी उद्योग को अपेक्षाकृत कम लागत पर कच्चे माल के रूप में सोना उपलब्ध होने की संभावना है।

    टैक्स नियमों को लेकर भी राहत की उम्मीद
    योजना के मसौदे में प्रक्रिया को पारदर्शी रखने और लोगों की टैक्स संबंधी आशंकाओं को कम करने पर भी जोर दिया गया है। मौजूदा आयकर नियमों के अनुसार, विवाहित महिला के पास 500 ग्राम, अविवाहित महिला के पास 250 ग्राम और पुरुष के पास 100 ग्राम तक सोना रखने पर सामान्य परिस्थितियों में राहत का प्रावधान है। हालांकि, अंतिम स्थिति संबंधित नियमों और प्रत्येक मामले के तथ्यों पर निर्भर करती है।

    सरकार की मंजूरी का इंतजार
    फिलहाल केंद्र सरकार ने इस प्रस्ताव को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है। हालांकि, सराफा बाजार इस पहल को सकारात्मक मान रहा है। कारोबारियों का मानना है कि यदि यह योजना लागू होती है तो घरों में निष्क्रिय पड़े सोने को औपचारिक बैंकिंग प्रणाली से जोड़ा जा सकेगा। इससे न केवल गोल्ड मार्केट को नई गति मिल सकती है, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था और आत्मनिर्भरता को भी मजबूती मिलने की संभावना है।

  • मध्य पूर्व संकट से सहमा भारतीय शेयर बाजार सेंसेक्स 77000 के नीचे फिसला निवेशकों की बढ़ी चिंता

    मध्य पूर्व संकट से सहमा भारतीय शेयर बाजार सेंसेक्स 77000 के नीचे फिसला निवेशकों की बढ़ी चिंता


    नई दिल्ली । मध्य पूर्व में बढ़ते सैन्य तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल का असर सोमवार को भारतीय शेयर बाजार पर साफ दिखाई दिया। कारोबारी सप्ताह की शुरुआत भारी बिकवाली के साथ हुई और निवेशकों में सतर्कता का माहौल नजर आया। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 649 अंकों की गिरावट के साथ 76920 के स्तर पर पहुंच गया जबकि निफ्टी 184 अंक टूटकर 24022 पर कारोबार करता दिखाई दिया। वैश्विक घटनाक्रमों से बढ़ी अनिश्चितता और ऊर्जा कीमतों में तेजी ने बाजार की धारणा को कमजोर कर दिया।

    सुबह के कारोबार में केवल बड़ी कंपनियों के शेयर ही नहीं बल्कि मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों पर भी दबाव देखने को मिला। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स करीब 280 अंक टूट गया जबकि निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स भी गिरावट के साथ कारोबार करता रहा। इससे साफ संकेत मिला कि निवेशक जोखिम वाले निवेश से दूरी बनाते हुए सुरक्षित विकल्पों की ओर बढ़ रहे हैं।

    सेक्टोरल इंडेक्स पर नजर डालें तो सबसे अधिक दबाव मेटल फाइनेंशियल सर्विसेज और कंजम्प्शन शेयरों पर रहा। इसके अलावा ऑटो प्राइवेट बैंक पीएसयू बैंक कमोडिटी इन्फ्रास्ट्रक्चर ऑयल एंड गैस एफएमसीजी और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स जैसे लगभग सभी प्रमुख सेक्टर लाल निशान में कारोबार करते रहे। केवल आईटी और फार्मा सेक्टर ने मजबूती दिखाई और सीमित बढ़त के साथ कारोबार किया। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक अनिश्चितता के दौर में आईटी और दवा कंपनियों को अपेक्षाकृत सुरक्षित निवेश माना जाता है इसलिए इन शेयरों में खरीदारी देखने को मिली।

    सेंसेक्स की प्रमुख कंपनियों में टाटा स्टील इंडिगो मारुति सुजुकी एशियन पेंट्स बजाज फिनसर्व बजाज फाइनेंस एचडीएफसी बैंक एलएंडटी अल्ट्राटेक सीमेंट बीईएल टाइटन महिंद्रा एंड महिंद्रा भारती एयरटेल एसबीआई सन फार्मा आईसीआईसीआई बैंक इन्फोसिस और आईटीसी जैसे शेयरों में गिरावट दर्ज की गई। वहीं टीसीएस एचसीएल टेक पावर ग्रिड और एनटीपीसी के शेयर सीमित बढ़त के साथ कारोबार करते दिखाई दिए।

    भारतीय बाजार पर दबाव की सबसे बड़ी वजह मध्य पूर्व में बढ़ता सैन्य तनाव माना जा रहा है। अमेरिका द्वारा कमर्शियल जहाजों पर हुए हमलों के जवाब में ईरान पर की गई नई सैन्य कार्रवाई के बाद हालात और तनावपूर्ण हो गए हैं। इसके जवाब में ईरान ने कुवैत बहरीन और जॉर्डन में स्थित अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया है। इस घटनाक्रम ने वैश्विक निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है और इसका सीधा असर दुनिया भर के शेयर बाजारों पर दिखाई दे रहा है।

    एशियाई बाजारों में भी कमजोरी का माहौल रहा। टोक्यो शंघाई हांगकांग बैंकॉक और सोल के प्रमुख सूचकांक गिरावट के साथ कारोबार करते नजर आए जबकि जकार्ता का बाजार हल्की बढ़त बनाए रखने में सफल रहा। दूसरी ओर शुक्रवार को अमेरिकी शेयर बाजार मजबूती के साथ बंद हुए थे लेकिन ताजा घटनाओं के बाद वैश्विक बाजारों का रुख बदल गया।

    मध्य पूर्व में तनाव बढ़ने के साथ कच्चे तेल की कीमतों में भी तेज उछाल आया है। ब्रेंट क्रूड चार प्रतिशत से अधिक बढ़कर लगभग 79 डॉलर प्रति बैरल और डब्ल्यूटीआई क्रूड करीब 74 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर है इसलिए तेल की कीमतों में तेजी का असर महंगाई आयात बिल और कंपनियों की लागत पर पड़ सकता है। यही वजह है कि निवेशक फिलहाल सतर्क रुख अपनाए हुए हैं।

    बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में निवेशकों की नजर मध्य पूर्व के घटनाक्रम कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक बाजारों के रुख पर बनी रहेगी। यदि तनाव और बढ़ता है तो बाजार में उतार चढ़ाव जारी रह सकता है जबकि हालात सामान्य होने पर निवेशकों का भरोसा दोबारा लौटने की संभावना भी बनी रहेगी।

  • भारत और यूरोप के बीच मजबूत होगी रणनीतिक साझेदारी पीयूष गोयल का तीन देशों का दौरा आज से शुरू

    भारत और यूरोप के बीच मजबूत होगी रणनीतिक साझेदारी पीयूष गोयल का तीन देशों का दौरा आज से शुरू


    नई दिल्ली । मध्य प्रदेश। भारत और यूरोपीय देशों के बीच आर्थिक और रणनीतिक साझेदारी को नई दिशा देने की तैयारी शुरू हो गई है। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल सोमवार से स्पेन बेल्जियम और फिनलैंड के पांच दिवसीय आधिकारिक दौरे पर रवाना हो रहे हैं। 13 से 17 जुलाई तक चलने वाले इस दौरे के दौरान वे उच्चस्तरीय भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करेंगे और व्यापार निवेश तकनीक नवाचार तथा स्वच्छ ऊर्जा जैसे अहम क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के लिए कई महत्वपूर्ण बैठकों में हिस्सा लेंगे। इस यात्रा को भारत और यूरोपीय संघ के बीच तेजी से मजबूत होते संबंधों की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

    वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार इस दौरे का मुख्य उद्देश्य यूरोप के साथ भारत की आर्थिक भागीदारी को और मजबूत बनाना है। यात्रा के दौरान एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग क्लीन एनर्जी डिजिटल टेक्नोलॉजी नवाचार रत्न एवं आभूषण उद्योग और खाद्य प्रसंस्करण जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर विशेष जोर रहेगा। इसके साथ ही दोनों पक्ष निवेश के नए अवसरों और दीर्घकालिक व्यापारिक साझेदारी पर भी चर्चा करेंगे।

    सरकार का मानना है कि भारत और यूरोपीय संघ के बीच प्रस्तावित व्यापक व्यापार समझौते को आगे बढ़ाने में यह दौरा महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। भारत की कोशिश एक ऐसे संतुलित और पारस्परिक लाभ वाले समझौते की है जो मजबूत आपूर्ति श्रृंखला टिकाऊ विकास और नियम आधारित वैश्विक व्यापार व्यवस्था को बढ़ावा दे सके। यही वजह है कि इस दौरे को केवल राजनयिक यात्रा नहीं बल्कि आर्थिक सहयोग के नए अध्याय की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है।

    स्पेन दौरे के दौरान पीयूष गोयल वहां के शीर्ष राजनीतिक और आर्थिक नेतृत्व से मुलाकात करेंगे। वे स्पेन के पहले उपराष्ट्रपति और अर्थव्यवस्था व्यापार एवं उद्योग मंत्री कार्लोस कुएर्पो कैबालेरो उद्योग एवं पर्यटन मंत्री जोर्डी हेरेउ बोहेर तथा विदेश मामलों और यूरोपीय संघ सहयोग मंत्री जोस मैनुअल अल्बारेस बुएनो के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे। इसके अलावा भारत स्पेन बिजनेस राउंडटेबल की अध्यक्षता करते हुए वे स्पेन की प्रमुख कंपनियों और उद्योग संगठनों के साथ निवेश और कारोबारी साझेदारी की संभावनाओं पर चर्चा करेंगे। इस दौरान भारत में निवेश के अवसरों को भी प्रमुखता से प्रस्तुत किया जाएगा।

    बेल्जियम में केंद्रीय मंत्री एंटवर्प बंदरगाह और विश्व प्रसिद्ध एंटवर्प वर्ल्ड डायमंड सेंटर का दौरा करेंगे। यहां वे कई प्रमुख वैश्विक कंपनियों के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों के साथ बैठक करेंगे। इसके अलावा ब्रसेल्स में आयोजित तीसरी भारत यूरोपीय संघ व्यापार एवं प्रौद्योगिकी परिषद की मंत्री स्तरीय बैठक की सह अध्यक्षता भी करेंगे। यह परिषद भारत और यूरोपीय संघ के बीच व्यापार भरोसेमंद तकनीक और आर्थिक सुरक्षा जैसे विषयों पर सहयोग का सबसे महत्वपूर्ण संस्थागत मंच माना जाता है।

    फिनलैंड में पीयूष गोयल वहां के आर्थिक मामलों के मंत्री डॉ सकारी पुइस्टो के साथ द्विपक्षीय बैठक करेंगे। साथ ही भारत फिनलैंड बिजनेस राउंडटेबल में भाग लेकर फिनिश कंपनियों को भारत में निवेश और साझेदारी के नए अवसरों से अवगत कराएंगे। विशेष रूप से डिजिटल तकनीक हरित ऊर्जा और नवाचार आधारित उद्योगों में सहयोग बढ़ाने पर जोर रहेगा।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यह दौरा ऐसे समय हो रहा है जब वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में बदलाव तेजी से हो रहे हैं और दुनिया विश्वसनीय व्यापारिक साझेदारों की तलाश में है। भारत तेजी से विनिर्माण नवाचार और तकनीकी विकास का बड़ा केंद्र बनकर उभर रहा है। ऐसे में यूरोपीय देशों के साथ मजबूत आर्थिक संबंध न केवल निवेश बढ़ाएंगे बल्कि रोजगार सृजन तकनीकी सहयोग और निर्यात को भी नई गति देंगे। उम्मीद की जा रही है कि इस दौरे के परिणाम आने वाले समय में भारत और यूरोप के बीच आर्थिक संबंधों को नई ऊंचाई तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण साबित होंगे।