Category: Economy

  • FASTag: 1 अप्रैल से महंगा होगा नेशनल हाईवे सफर, देशभर में टोल दरों में होगी बढ़ोतरी

    FASTag: 1 अप्रैल से महंगा होगा नेशनल हाईवे सफर, देशभर में टोल दरों में होगी बढ़ोतरी

    नई दिल्ली। नेशनल हाईवे पर सफर करने वालों के लिए 1 अप्रैल से यात्रा महंगी होने जा रही है। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत के साथ टोल दरों में बढ़ोतरी का फैसला लिया है। देशभर के टोल प्लाजा पर औसतन 4 से 5 प्रतिशत तक टोल बढ़ाया गया है, जिससे नियमित यात्रा करने वाले लोगों की जेब पर सीधा असर पड़ेगा।

    किन रूट्स पर पड़ेगा ज्यादा असर?

    उत्तर भारत में बढ़ेगा खर्च
    उत्तर प्रदेश में दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे, नेशनल हाईवे-9 और लखनऊ-कानपुर रूट पर टोल लगभग 5 प्रतिशत तक बढ़ सकता है। इससे इन मार्गों पर रोजाना यात्रा करने वालों को ज्यादा भुगतान करना होगा। हरियाणा के दिल्ली-सोनीपत-पानीपत और अंबाला-चंडीगढ़ रूट पर भी टोल 5 से 15 रुपये तक बढ़ने की संभावना है, जिसका असर निजी और व्यावसायिक दोनों वाहनों पर पड़ेगा।

    राजस्थान के हाईवे भी होंगे महंगे
    राजस्थान में जयपुर-दिल्ली, जयपुर-अजमेर और जयपुर-किशनगढ़ रूट पर टोल दरों में बढ़ोतरी तय मानी जा रही है। जयपुर-किशनगढ़ मार्ग पर कारों के लिए टोल 140 रुपये से बढ़कर 155 रुपये तक पहुंच सकता है। वहीं, दिल्ली से मुंबई की लंबी यात्रा करने वालों को राजस्थान के रास्ते हर टोल पर 5 से 15 रुपये अतिरिक्त देने पड़ सकते हैं।

    दक्षिण भारत में भी बढ़ेगा बोझ
    दक्षिण भारत, खासकर तमिलनाडु में 65 से ज्यादा टोल प्लाजा पर नई दरें लागू होंगी। चेन्नई बाईपास और चेन्नई-तिरुपति हाईवे पर सफर करने वालों का खर्च बढ़ेगा। इसके अलावा बेंगलुरु-मैसूर और बेंगलुरु एयरपोर्ट रोड पर भी टोल में 3 से 5 प्रतिशत तक बढ़ोतरी की संभावना है, जहां ट्रैफिक पहले से ही काफी ज्यादा रहता है।

  • एनएसई का IPO नजदीक: शेयरधारकों से 27 अप्रैल तक मांगी प्रतिक्रिया

    एनएसई का IPO नजदीक: शेयरधारकों से 27 अप्रैल तक मांगी प्रतिक्रिया


    नई दिल्ली। देश के प्रमुख वित्तीय निवेशकों ने एक नेशनल स्टॉक शेयर बाजार (साओजी) से अपने लंबे समय के एसोसिएट इनशियल ऑफरिंग (आईपीओ) की तैयारी तेज कर दी है। रिजेक्शन ने स्टाफ़ से संपर्क कर यह खोज की कोशिश की है कि वे सेल (ओ फ़ॉक्स) के लिए प्रस्तावित ऑफर में हिस्सा लेना चाहते हैं या नहीं। यह स्टेप एन डीएसी के आई सैनिकों की दिशा में एक अहम और प्रभावशाली प्रक्रिया मानी जा रही है।

    डिस्काउंट से छूट एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट

    ग़ौरतलब के अनुसार, एन कंपनी ने एक्स्प्रेशन ऑफ़ इंटरेस्ट (ईओआई) में एक अन्जर्थी को संदेश भेजने की मांग की है। उन पैराग्राफ में बताया गया है कि जो अपने कुछ या सभी शेयर आई को सोखने की चाहत रखते हैं। ईओआई फॉर्म और संबंधित दस्तावेज भी दस्तावेजों के साथ साझा किए गए हैं, जिसमें ओ एफओ के माध्यम से भाग लेने के आवास और ढांचे को स्पष्ट किया गया है।

    विपक्ष को बताया गया है कि वे 27 अप्रैल, शाम 5 बजे तक अपनी प्रतिक्रिया जमा कर लें, जिसमें वे आई अध्ययन में भाग लेने की अपनी इच्छा व्यक्तित्व कर योग्यता। इसमें उल्लेख किया गया है, “एक शेयरधारक के रूप में आप अपने होल्डिंग के कुछ या सभी निजी शेयर आई संदेश को बिक्री के लिए पेश कर सकते हैं, जो ओ फ़ेस नोटिस में शेयरधारकों के स्वामित्व में दिए जाएंगे।”

    बड़ी संख्या में मर्चेंट बैंकर्स की दुकानें

    एनएससी ने इस ग्रुप आई को 20 मर्चेंट बैंकर नियुक्त करने के लिए नियुक्त किया है। यह किसी भी भारतीय सार्वजनिक इश्यू में अब तक की सबसे बड़ी संख्या है। इस सूची में कोटक महिंद्रा कैपिटल, एलसीडी कैपिटल मार्केट्स, जापान मॉर्गन, और सिटीग्रुप जैसे बड़े निवेश बैंक शामिल हैं। इसके अलावा, एक्सचेंज ने आठ लॉ फर्मों को भी नियुक्त किया है। इसमें घरेलू फर्म सिरिल अमरचंद मंगलदास, ट्राइलीगल और अमेरिका की लैथम एंड वॉटकिंस शामिल हैं। अन्य मध्यस्थों में आई.एस.आई. सेवा फर्म, एफ़जी इंटिमेटी और कंसल्टेंसी फर्म रेडसीर भी शामिल हैं।इससे पहले 2025 में एसोसिएटेड प्रूडेंसियल एएमसी के आई डिपो में 18 बुक रनर शामिल थे, जो उस समय भारत का सबसे बड़ा रिकॉर्ड था।

    सेबी से मंजूरी और बिक्री की नई दिशा

    जनवरी 2026 में सेबी (भारतीय सिक्योरिटीज और इलेक्ट्रॉनिक्स बोर्ड) में एनएससी को अपनी लैपटॉप आई के लिए मंजूरी मिल गई है। उस समय एन सोसाइटी के चेयरपर्सन श्रीनिवास इंजेती ने कहा था कि यह एक बड़े मील का पत्थर है। उन्होंने निर्देश दिया कि सभी हितधारकों के लिए वैल्यू क्रिएशन का नया अध्याय शुरू होगा।

    इस प्रक्रिया के तहत एनएसआई एसआई सिपहसालार से पहले विक्रेता डीलरों की पहचान की जा रही है, जिससे दीक्षा के समय प्रक्रिया को धीरे-धीरे और अंतिम चरण में रखा जा सके।

    एनएससी का आईपीओ भारतीय वित्तीय बाजार में नई दिशा और उद्यम के लिए अवसर लेकर आएं। 27 अप्रैल तक उपदेश की प्रतिक्रिया के बाद ही ओ फ़ेस के तहत उनकी भागीदारी तय होगी। विशेषज्ञ के अनुसार, यह कदम न केवल मूल्यांकन के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि भारतीय शेयर बाजार के विकास में भी मील का पत्थर साबित होगा।

  • इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए बढ़ा सहारा, चार्जिंग इकोसिस्टम को मिलेगा जोर-'लीफ' लॉन्च

    इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए बढ़ा सहारा, चार्जिंग इकोसिस्टम को मिलेगा जोर-'लीफ' लॉन्च


    नई दिल्ली केंद्र सरकार ने इलेक्ट्रिक असेंबल (ईवी) के इकोसिस्टम को बढ़ावा देने के लिए ‘लीफ’ (LEAF – लाइट इलेक्ट्रिक-व्हीकल एक्सेलेरेशन फोरम) लॉन्च किया है। मंत्रालय उद्योग एच. डी. कुमारस्वामी ने सोमवार को इसकी घोषणा की। यह एक इंडस्ट्रीज़-नेतृत्व मंच वाला है, जहां लाइट इलेक्ट्रिक व्हीकल (एलिवी) सेक्टर के सभी स्टेक होल्डर्स – व्हीकल निर्माता (ओईएम), रियोटेक्नोलॉजिस्ट, कंपोनेंट निर्माता और टेक्नोलॉजी प्रदाता – एक साथ काम कर रहे हैं।

    मंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर बताया कि यह पहल इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को तेजी से बढ़ाने और बेहतर इंटरऑपरेबिलिटी, कंज्यूमर सिस्टम और डिजिटल नेटवर्क सुनिश्चित करने में मदद करेगी। उनका कहना था कि यह कदम ‘आत्मनिर्भर भारत’ के दृष्टिकोण का मानक है और इससे सस्टेनेबल मोबिलिटी को बढ़ावा मिलेगा, साथ ही कार्बन उत्सर्जन में भी कमी आएगी।

    LEAF का मकसद और उद्देश्य:

    नेटवर्क के बीच बेहतर संतुलन (इंटरऑपरेबिलिटी) सुनिश्चित करना।
    सिस्टम के अवशेष और उपभोक्ता को समान अनुभव देना।
    सार्वजनिक निजीकरण का विस्तार करना।
    ‘लाइट इलेक्ट्रिक कंबाइंड रिजर्वेशन सिस्टम (LECCS)’ जैसे स्टेप स्ट्रेंथ जा रहे हैं, जिनमें भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) ने मंजूरी दे दी है। यह सिस्टम स्लो और फास्ट दोनों तरह के रिजर्वेशन को सपोर्ट करेगा।

    अब तक इसमें 20 से ज्यादा कंपनियों को शामिल किया गया है, जिसमें ऑटोमोबाइल निर्माता, मोटरसाइकल निर्माता, सप्लायर और सॉफ्टवेयर इंजीनियर शामिल हैं। विशेषज्ञ का कहना है कि बेहतर इंटरऑपरेबिलिटी और मजबूत सार्वजनिक आरक्षण नेटवर्क ही देश में ईवी एनोटेशन की साख बढ़ाने में अहम भूमिका निभाएगा।

    लीफ (LEAF) फोरम के माध्यम से सरकार और औद्योगिक समूह भारत में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा देते हैं। यह कदम ईवी आरक्षण नेटवर्क की अनोखी और अनोखी अनुभव में अंतर जैसा झलक को दूर करने की दिशा में अहम साबित होगा।

  • RBI की पहल से मजबूत हुआ रुपया, डॉलर के मुकाबले 1% की बढ़त के साथ खुला

    RBI की पहल से मजबूत हुआ रुपया, डॉलर के मुकाबले 1% की बढ़त के साथ खुला


    नई दिल्ली।सोमवार को भारतीय मुद्रा में बढ़ोतरी देखने को मिली, जब भारतीय रिजर्व बैंक की नई पहल के बाद रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले करीब 1.3 प्रतिशत बढ़कर 93.59 पर खुला। हाल के दिनों में लगातार दबाव झेल रहे रुपए के लिए यह एक बड़ी राहत मानी जा रही है।

    सट्टेबाजी पर लगाम के लिए RBI का बड़ा कदम

    रुपए में बढ़ोतरी का मुख्य कारण RBI का वह निर्देश है, जिसमें बैंकों को विदेशी मुद्रा बाजार में अपनी खुली स्थिति 100 मिलियन डॉलर तक सीमित रखने को कहा गया है। केंद्रीय बैंक ने अधिकृत डीलर बैंकों को साफ निर्देश दिया है कि वे दिन के अंत तक अपनी ऑनशोर स्थिति इसी सीमा के भीतर रखें।

    साथ ही, सभी चालू बैंकों को 10 अप्रैल तक इस नियम को लागू करने के निर्देश दिए गए हैं। माना जा रहा है कि इससे बाजार में डॉलर की अटकलों पर रोक गिल और रुपए को स्थिरता मिलेगी।

    पहले गिरावट में था रुपया

    गौरतलब है कि मार्च के दौरान वैश्विक तनाव के कारण रुपया 4 प्रतिशत से ज्यादा कमजोर हो गया था। पिछले हफ़्ते यह करीब 94.84 के स्तर तक गिर गया था, जिससे बाज़ार में चिंता बढ़ गई थी। ऐसे में RBI का यह कदम बाज़ार में भरोसा बहाल करने के लिए अहम माना जा रहा है।

    कच्चे तेल की महंगाई बना दबाव

    हालांकि रुपए पर अभी भी दबाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। ब्रेंट क्रूड की कीमतें 116 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बनी हुई हैं, जिससे भारत जैसे आयातक देश की चिंता बढ़ गई है। महंगाई तेल महंगाई को बढ़ती है और इससे रुपए पर नेगेटिव असर पड़ता है।

    वैश्विक तनाव और डॉलर की मांग

    पश्चिम एशिया में जारी तनाव, हूती विद्रोहियों की सक्रियता और अमेरिका की सैन्य गतिविधियों के चलते वैश्विक अनिश्चितता बनी हुई है। ऐसे माहौल में डॉलर की मांग बढ़ती है, जिससे उभरती अर्थव्यवस्थाओं की मुद्राओं पर दबाव पड़ता है।

    आगे क्या कह रहे हैं विशेषज्ञ

    विश्लेषकों का दबाव है कि RBI का यह कदम अल्पकाल में रुपए को सहारा देगा। डॉलर की बड़ी स्थिति कम होने से बाजार में संतुलन आएगा और रुपए में बढ़ोतरी बनी रह सकती है। हालांकि, अगर कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं और वैश्विक तनाव जारी रहता है, तो रुपए पर फिर से दबाव आ सकता है।

  • सोना और ईंधन की कीमत आज: सप्ताह की शुरुआत में सोना- सस्ता, पेट्रोल- डीजल की नई बिक्री जारी

    सोना और ईंधन की कीमत आज: सप्ताह की शुरुआत में सोना- सस्ता, पेट्रोल- डीजल की नई बिक्री जारी


    नई दिल्ली। सप्ताह के पहले दिन सोमवार को सोने की जिले में गिरावट देखने को मिली। राजधानी दिल्ली में 24 कैरेट सोना स्टॉक प्रति 10 ग्राम ₹1,48,210 है। वहीं 22 कैरेट सोने का भाव ₹1,35,890 प्रति 10 ग्राम दर्ज किया गया। हालाँकि, एक सप्ताह में सोने की झील में बढ़त का आकलन भी किया गया था। 24 कैरेट सोना करीब ₹2,100 तक महंगा हुआ था।

    अलग-अलग डिज़ाइन में सोने के रेट
    दिल्ली: ₹1,48,210 (24K), ₹1,35,890 (22K)
    मुंबई और कोलकाता: ₹1,48,080 (24K), ₹1,35,740 (22K)
    शहर: ₹1,49,010 (24K), ₹1,36,590 (22K)
    बैंगलोर और पुणे: ₹1,48,080 (24K), ₹1,35,740 (22K)
    भोपाल और फ़ाइल: ₹1,48,110 (24K), ₹1,35,790 (22K)

    चाँदी भी हुई
    सोने के साथ-साथ चांदी की कीमत में भी गिरावट आई है। सोमवार सुबह सिल्वर का भाव ₹2,44,900 प्रति टिकट हो गया। पिछले हफ्ते सिल्वर में जबरदस्त रिलीज- देखने को मिला था। शुक्रवार को इसकी कीमत करीब ₹11,250 तक गिर गई थी। सोने और चांदी के उत्पादों से सिर्फ देश के लाभ से नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजार, डॉलर के डॉलर के डॉलर की स्थिति और कच्चे तेल के उत्पादों से भी प्रभावित होते हैं।

    पेट्रोल-डीजल की नई फैक्ट्री
    देश में हर दिन सुबह 6 बजे पेट्रोल और डीजल की नई मार्केटिंग कंपनियां चलती हैं। आज भी कई होटलों में मामूली बदलाव देखने को मिलते हैं।
    मुंबई: पेट्रोल ₹104.21 | डीजल ₹92.15
    कोलकाता: पेट्रोल ₹103.94 | डीजल ₹90.76
    शहर: पेट्रोल ₹100.75 | डीजल ₹92.34
    मुफ़्त: पेट्रोल ₹94.49 | डीजल ₹90.17
    बेंगलुरु: पेट्रोल ₹102.92 | डीजल ₹89.02
    पेट्रोल: ₹107.46 | डीजल ₹95.70
    जयपुर: पेट्रोल ₹104.72 | डीजल ₹90.21
    लखनऊ: पेट्रोल ₹94.69 | डीजल ₹87.80
    पुणे: पेट्रोल ₹104.04 | डीजल ₹90.57
    चंडीगढ़: पेट्रोल ₹94.30 | डीजल ₹82.45

    आम आदमी पर क्या असर होता है?
    पेट्रोल-डीजल की दुकानों का सीधा असर आम लोगों की जेब पर पड़ता है। महंगे होने से खाने-पीने की कीमत भी बढ़ सकती है। वहीं सोने-पुराने यूरोप में बदलाव निवेश और शादी-ब्याह के सीजन में भी शानदार प्रदर्शन देखने को मिल रहा है। सप्ताह की शुरुआत में जहां सोना और चांदी चढ़े हैं, वहीं पेट्रोल-डीजल के मसालों में ज्यादा बड़ा बदलाव नहीं है। ऐसे में डायनासोर पर नजर रखना जरूरी है ताकि आप अपने खर्च और निवेश को बेहतर कर सकें।

  • ऑयल मार्केट में हलचल: कीमतों में जोरदार उछाल, साल के उच्चतम स्तर के पास

    ऑयल मार्केट में हलचल: कीमतों में जोरदार उछाल, साल के उच्चतम स्तर के पास


    नई दिल्ली पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर अब वैश्विक ऊर्जा बाजार पर साफ नजर आने लगा है। सोमवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की 3 प्रतिशत से अधिक की तेज बढ़त दर्ज की गई। ब्रेंट क्रूड 3.66 प्रतिशत पैमाना 116.70 डॉलर प्रति पाउंड इंट्रा-डे हाई रीच तक पहुंच गया, जो 52 सामान्य के करीब है। वहीं डब्ल्यूटीआई क्रूड भी 3 प्रतिशत से अधिक उछालकर 103 डॉलर प्रति शेयर के पार पहुंच गया।

    पश्चिम एशिया तनाव बना सबसे बड़ा कारण

    तेल की इस तेजी की मुख्य वजह पश्चिम एशिया में बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव है। विशेष रूप से यमन के होती विद्रोहियों के इस संघर्ष में शामिल हैं और इजराइल पर हमले के बाद हमले और हमले हुए हैं। हूती ग्रुप ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि जब तक उनके सहयोगी आतंकवादी हमले जारी रखेंगे, तब तक वे भी कार्रवाई करेंगे। इससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ गई है।

    अक्रियाशील होने का खतरा

    विशेषज्ञ का मानना ​​है कि अगर यह तनाव लंबे समय तक जारी रहता है, तो कच्चे तेल की विषाक्तता प्रभावित हो सकती है। विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य में अहम समुद्री मील का पत्थर पर प्रभाव का खतरा है, जहां से दुनिया की बड़ी मात्रा में तेल की आपूर्ति होती है।
    मार्च महीने में ही ब्रेंट क्रूड के बाजार में 50 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई है, जो संकेत देता है कि अनिश्चितता और जोखिम लगातार बढ़ रहे हैं।

    200 डॉलर तक पहुंच संभव है

    कुछ वैश्विक अनुमानों के अनुसार, यदि दरें और विशेषताएं हैं तो कच्चे तेल की कीमत 200 डॉलर प्रति शेयर तक पहुंच सकती है। यह स्थिति ग्लोबल इंडस्ट्री के लिए बड़ा झटका साबित हो सकती है।

    भारत पर उत्खनन दबाव

    भारत जैसे राष्ट्र के लिए यह स्थिति विशेष रूप से चिंता का विषय है, क्योंकि देश में 85 से 90 प्रतिशत तेल कोटा के लिए मान्यता पर प्रतिबंध है। सरकारी कच्चे तेल से शेयरों में बढ़ोतरी हो सकती है, कंपनी के शेयरों पर असर पड़ सकता है और चालू खाते में भी बढ़ोतरी हो सकती है।

    वैश्विक शेयर प्रभावकारी

    तेल के स्टॉक में तेजी का असर वैश्विक शेयर पर भी देखने को मिला। अमेरिकी उद्यमों में गिरावट दर्ज की गई, वहीं एशियाई बाजारों में भी गिरावट जारी है। इसका असर भारत के शेयर बाजार पर भी पड़ा है, जहां बीएसई सेंसेक्स और निफ्टी 50 दोनों ही शुरुआती कारोबार में गिरावट के साथ खुले हैं।

  • पोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर में बड़ा कदम: न्यू मैंगलोर में बर्थ का होगा आधुनिकीकरण

    पोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर में बड़ा कदम: न्यू मैंगलोर में बर्थ का होगा आधुनिकीकरण


    नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने देश के समुद्री इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए न्यू मैंगलोर पोर्ट मालिक के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इस योजना के तहत न्यू मैंगलोर पोर्ट पर बर्थ नंबर 9 का पुनर्विकास किया जाएगा। यह परियोजना पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल के तहत डीबीएफओटी आधार पर लागू होगी, जिससे निजी और सरकारी साझेदारी के जरिए आधुनिक सुविधाएं विकसित की जाएंगी।

    438 करोड़ की परियोजना, 2 साल में पूरा होगा निर्माण

    करीब 438.29 करोड़ रुपये की लागत वाली इस परियोजना को 25 मार्च 2026 को मंजूरी दी गई है। इसे ओपन टेंडर प्रक्रिया के जरिए चुनी गई निजी कंपनी द्वारा विकसित किया जाएगा। निर्माण कार्य को पूरा होने में लगभग दो साल का समय लगेगा, जबकि इस परियोजना की कुल अवधि 30 साल तय की गई है।

    जहां पोर्ट की क्षमता और दक्षता

    इस पुनर्विकास के बाद बर्थ नंबर 9 की कार्गो हैंडलिंग क्षमता 10.90 मिलियन टन प्रति वर्ष तक पहुंच जाएगी। साथ ही, ऑपरेटर कंपनी को पांचवें साल तक कम से कम 7.63 एमटीपीए कार्गो हैंडल करने की सप्लाई देनी होगी।

    यहां कच्चा तेल, पेट्रोलियम उत्पाद और एलपीजी जैसे जैविक बल्क कार्गो को संभालेगा, जिससे देश की ऊर्जा पैदावार को पूरा करने में मदद मिलेगी।

    बड़े जहाजों के लिए बनेगी नई सुविधा

    इस प्रोजेक्ट के तहत बर्थ की गहराई को 10.5 मीटर से बढ़ाकर 14 मीटर किया जाएगा और भविष्य में इसे 19.8 मीटर तक बढ़ाने की योजना भी रखी गई है। इससे 2 लाख डेडवेट टन तक के बड़े जहाज आसानी से यहां आ-जा सवार, जिनमें बहुत बड़े गैस कैरियर भी शामिल हैं।

    50 साल पुराने आइडिया की जगह आधुनिक स्ट्रक्चर

    करीब 50 साल पुराने आइडिया को यहां आधुनिक और टिकाऊ इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया जाएगा, जिसकी उम्र भी लगभग 50 साल तक होगी। इससे पोर्ट का ऑपरेशन लंबे समय तक स्थिर और प्रभावी बना रहेगा।

    वैश्विक व्यापार में भारत की स्थिति मजबूत होगी

    केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनवाल ने कहा कि यह परियोजना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश के समुद्री क्षेत्र को आधुनिक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इससे लॉजिस्टिक्स लागत कम होगी, पोर्ट की प्रतिस्पर्धी क्षमता बढ़ेगी और भारत वैश्विक समुद्री व्यापार में अपनी मजबूत स्थिति बना सकेगी।

  • शेयर बाजार में मची हड़कंप: सेंसेक्स 1,200 अंक टूटा, जानिए गिरावट के बड़े कारण

    शेयर बाजार में मची हड़कंप: सेंसेक्स 1,200 अंक टूटा, जानिए गिरावट के बड़े कारण


    नई दिल्ली सप्ताह के पहले दिन भारतीय शेयर बाजार में जबरदस्त गिरावट देखने को मिली। बीएसई सेंसेक्स करीब 1200 अंक टूटकर 72,326 के स्तर तक पहुंच गया, जबकि निफ्टी 50 भी 350 अंक के करीब 22,453 के स्तर पर पहुंच गया। इस गिरावट का असर सिर्फ बड़े स्टॉक तक ही सीमित नहीं रहा, बल्कि मिडकैप और स्मॉलकैप स्टॉक में भी 1 फीसदी से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई है।

    कुछ ही घंटों में 6 लाख करोड़ का नुकसान

    इस भारी गिरावट के साथ उद्यम की संपत्ति में बड़ी गिरावट आई। बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण कुछ ही घंटों में 422 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर करीब 416 लाख करोड़ रुपये हो गया। यानी उद्यम को लगभग 6 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ, जिससे बाजार में अशांति का माहौल बन गया।

    अमेरिका-ईरान तनाव बना सबसे बड़ा कारण

    इस गिरावट के पीछे सबसे बड़ा कारण अमेरिका और ईरान के समुद्र तटों पर भारी तनाव है। यह भू-राजनीतिक संकट अब कई ऐतिहासिक से जारी है और इसके समाप्त होने को लेकर अस्तित्व में है। इस तनाव के कारण ग्लोबल मार्केट में भी दबाव देखा जा रहा है, जिसका सीधा असर भारतीय बाजार पर पड़ा है।

    कच्चे तेल की उथल-पुथल

    दूसरा बड़ा कारण कच्चे तेल की जिले में तेजी। ब्रेंट क्रूड 115 डॉलर प्रति शेयर के पार पहुंच गया है, जिससे भारत जैसे बड़े प्रतिष्ठित देश की चिंता बढ़ गई है। महंगे तेल देश की अर्थव्यवस्था पर दबाव है और इससे बाजार की धारणा खराब होती है।

    हल्दी उद्योग से व्यापारी डरे

    बाजार में डर और असमानता का मॉडल इंडिया VIX लगाया जा सकता है, जो 5 फीसदी से ज्यादा उछाल 28 के पार पहुंच गया। आम तौर पर 12-15 का स्तर सामान्य माना जाता है, लेकिन इससे ऊपर जाने का मतलब यह है कि बाजार में उतार-चढ़ाव काफी बढ़ गया है और निवेशक आकर्षित हो गए हैं।

    विदेशी व्यापारियों की लगातार बिक्री

    विदेशी व्यापारियों की लगातार बिकवाली भी बाजार पर भारी पड़ रही है। विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने मार्च में बड़ी पूंजी बाजार में धूम मचा दी, जिससे बाजार में अस्थिरता कम हो गई और दबाव बढ़ गया।

    एफ एंड ओ एक्सपायरी से बढ़िया हलचल

    इसके अलावा फ्यूचर्स और ऑप्शंस क्लैन्सल की एक्सपायरी भी बाजार में उतार-चढ़ाव का बड़ा कारण बनी। एक्सपायरी के समय व्यापारी अपने पोर्टफोलियो को एडजस्ट करते हैं, जिससे बाजार में तेज गति से देखने को मिलता है।

  • पश्चिम एशिया तनाव और अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों पर तय होगी सोना-चांदी की चाल

    पश्चिम एशिया तनाव और अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों पर तय होगी सोना-चांदी की चाल

    नई दिल्ली। अगले सप्ताह सोना और चांदी में सीमित दायरे में कारोबार देखने को मिल सकता है। निवेशकों की नजरें पश्चिम एशिया के भू-राजनीतिक हालात और प्रमुख वैश्विक आर्थिक आंकड़ों पर टिकी रहेंगी, जो कीमती धातुओं की दिशा तय करेंगे। विशेषज्ञों के अनुसार, इस हफ्ते जेरोम पॉवेल के संबोधन और अन्य फेड अधिकारियों के बयानों पर ध्यान रहेगा, क्योंकि इससे ब्याज दरों और मौद्रिक नीति के संकेत मिलेंगे, जो सोना-चांदी की मांग को प्रभावित कर सकते हैं।

    विश्लेषकों ने बताया कि सोने में हालिया गिरावट का कारण गोल्ड ईटीएफ निवेशकों की बिकवाली, कमजोर भौतिक मांग, मजबूत डॉलर और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी रही। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना करीब 2% गिरकर 4,492.5 डॉलर प्रति औंस पर बंद हुआ, जबकि चांदी 69.79 डॉलर प्रति औंस पर हल्की बढ़त के साथ बंद रही। अमेरिकी बाजार में कमजोरी के बावजूद सुरक्षित निवेश की मांग बढ़ी, जिससे चांदी को सहारा मिला।

    घरेलू बाजार में पिछले सप्ताह सोना मामूली गिरावट के साथ लगभग 1.44 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ, जबकि चांदी 1,182 रुपये की बढ़त के साथ 2.27 लाख रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गई। रुपये की कमजोरी ने कीमती धातुओं की कीमतों को कुछ सपोर्ट दिया। रुपया पिछले हफ्ते 1% से ज्यादा गिरकर करीब 94.80 प्रति डॉलर पर आ गया।

    अगले सप्ताह निवेशकों की नजरें

    जेएम फाइनेंशियल के प्रणव मेर ने कहा कि अगले सप्ताह बाजार में ध्यान पश्चिम एशिया की घटनाओं पर रहेगा। तनाव बढ़ने या घटने का कोई भी संकेत कीमतों को ऊपर या नीचे ले जा सकता है। इसके अलावा, प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के विनिर्माण आंकड़े, यूरोज़ोन के महंगाई आंकड़े और अमेरिकी खपत व रोजगार के डेटा पर भी नजर रहेगी। घरेलू बाजार में सुस्ती रहने की संभावना है, क्योंकि 31 मार्च और 3 अप्रैल को महावीर जयंती और गुड फ्राइडे के कारण बाजार बंद रहेंगे।

  • Bank Holidays Alert: अप्रैल में कई दिन बंद रहेंगे बैंक, जानें कब-कब रहेंगी छुट्टियां

    Bank Holidays Alert: अप्रैल में कई दिन बंद रहेंगे बैंक, जानें कब-कब रहेंगी छुट्टियां


    नई दिल्ली। अप्रैल 2026 में बैंक से जुड़े काम करने वालों के लिए जरूरी खबर है। इस महीने कई ऐसे दिन हैं जब देशभर में अलग-अलग कारणों से बैंक बंद रहेंगे। अगर आप बैंक से जुड़े जरूरी काम करने की योजना बना रहे हैं, तो पहले इन छुट्टियों की लिस्ट जान लेना बेहद जरूरी है।

    इतने दिन बैंकों में बंद रहेगा कामकाज
    अप्रैल महीने की शुरुआत ही बैंकिंग छुट्टी से होती है। 1 अप्रैल को कई राज्यों में बैंकों का सालाना क्लोजिंग डे होता है, जिसके चलते बैंक बंद रहते हैं। इसके अलावा 3 अप्रैल को गुड फ्राइडे के अवसर पर देश के कई हिस्सों में बैंक बंद रहेंगे। महीने में नियमित छुट्टियों की बात करें तो 11 अप्रैल को दूसरा शनिवार और 25 अप्रैल को चौथा शनिवार पड़ रहा है, जिस दिन पूरे देश में बैंक बंद रहते हैं। इसके अलावा सभी रविवार को भी बैंकिंग सेवाएं बंद रहती हैं।

    14 अप्रैल को डॉ. भीमराव आंबेडकर जयंती और कई राज्यों में बैसाखी जैसे त्योहारों के कारण बैंक बंद रह सकते हैं। यह छुट्टी कई राज्यों में लागू होती है, इसलिए अपने राज्य की छुट्टी जरूर चेक कर लें।

    इसके अलावा कुछ राज्यों में स्थानीय त्योहारों और विशेष अवसरों के कारण अलग-अलग तारीखों पर बैंक बंद रह सकते हैं। यानी यह जरूरी नहीं है कि सभी छुट्टियां पूरे देश में एक जैसी हों। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) हर साल राज्यवार बैंक छुट्टियों की सूची जारी करता है।

    हालांकि, बैंक बंद रहने के बावजूद ग्राहकों को घबराने की जरूरत नहीं है। ऑनलाइन बैंकिंग, मोबाइल बैंकिंग और एटीएम सेवाएं सामान्य रूप से चालू रहती हैं, जिससे आप अपने जरूरी काम आसानी से निपटा सकते हैं।

    कुल मिलाकर, अप्रैल 2026 में कई छुट्टियां होने वाली हैं, ऐसे में बैंक जाने से पहले छुट्टियों की लिस्ट जरूर चेक करें ताकि आपको किसी परेशानी का सामना न करना पड़े।