Category: Economy

  • अंकारा NATO शिखर सम्मेलन में कई बड़े फैसले, रक्षा बजट बढ़ाने, यूक्रेन सहायता और ईरान पर सख्त रुख के बीच ट्रंप ने फिर उठाया ग्रीनलैंड का मुद्दा

    अंकारा NATO शिखर सम्मेलन में कई बड़े फैसले, रक्षा बजट बढ़ाने, यूक्रेन सहायता और ईरान पर सख्त रुख के बीच ट्रंप ने फिर उठाया ग्रीनलैंड का मुद्दा

    नई दिल्ली । तुर्किये की राजधानी अंकारा में आयोजित दो दिवसीय उत्तर अटलांटिक संधि संगठन (NATO) शिखर सम्मेलन कई महत्वपूर्ण निर्णयों और राजनीतिक संदेशों के साथ संपन्न हुआ। बैठक के दौरान सदस्य देशों ने रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने, यूक्रेन को निरंतर सहायता जारी रखने और वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए सामूहिक रणनीति पर सहमति जताई। वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ईरान, ग्रीनलैंड और सहयोगी देशों को लेकर दिए गए बयानों ने भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व्यापक चर्चा को जन्म दिया।

    सम्मेलन के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति ने ईरान के साथ समझौते को समाप्त मानते हुए तेहरान के नेतृत्व पर तीखी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि ईरान को किसी भी परिस्थिति में परमाणु हथियार हासिल नहीं करने दिए जा सकते। हालांकि बाद में उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें व्यापक और लंबे समय तक चलने वाले युद्ध की संभावना कम दिखाई देती है। NATO के संयुक्त घोषणापत्र में भी ईरान से अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों पर नौवहन की स्वतंत्रता बनाए रखने का आग्रह किया गया और परमाणु हथियारों के प्रसार को रोकने की प्रतिबद्धता दोहराई गई।

    शिखर सम्मेलन में रक्षा खर्च बढ़ाने का मुद्दा भी प्रमुख एजेंडा रहा। सदस्य देशों ने अपनी सैन्य तैयारियों को मजबूत करने, आधुनिक हथियार प्रणालियों, हवाई एवं मिसाइल रक्षा, मानव रहित तकनीकों, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और खुफिया क्षमताओं के विकास पर निवेश बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की। गठबंधन का उद्देश्य बदलते सुरक्षा वातावरण के अनुरूप अपनी सामूहिक रक्षा क्षमता को और प्रभावी बनाना है। हालांकि उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार सभी सदस्य देश अभी निर्धारित रक्षा व्यय लक्ष्य तक नहीं पहुंच पाए हैं, लेकिन आने वाले वर्षों में इस दिशा में प्रयास तेज करने का भरोसा जताया गया।

    यूक्रेन को लेकर भी NATO ने अपना समर्थन दोहराया। सम्मेलन में सदस्य देशों ने सैन्य उपकरण, प्रशिक्षण और आर्थिक सहायता जारी रखने की प्रतिबद्धता दोहराते हुए आने वाले वर्षों तक सहयोग बनाए रखने का आश्वासन दिया। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने सम्मेलन के दौरान कई नेताओं से मुलाकात कर अतिरिक्त सहयोग की मांग रखी। अमेरिका ने भी यूक्रेन की रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने के लिए सहयोग बढ़ाने के संकेत दिए, जिससे संघर्ष के बीच कीव को महत्वपूर्ण समर्थन मिलने की उम्मीद है।

    सम्मेलन के दौरान ग्रीनलैंड का मुद्दा भी एक बार फिर चर्चा में रहा। अमेरिकी राष्ट्रपति ने इस क्षेत्र के सामरिक महत्व पर जोर देते हुए अपने पुराने रुख को दोहराया। दूसरी ओर डेनमार्क ने स्पष्ट किया कि ग्रीनलैंड उसके अधिकार क्षेत्र का हिस्सा है और उसके भविष्य का निर्णय स्थानीय जनता तथा डेनमार्क के संवैधानिक ढांचे के अनुसार ही होगा। यूरोपीय पक्ष ने भी इस विषय पर डेनमार्क के रुख का समर्थन किया।

    बैठक के दौरान सहयोगी देशों के बीच रक्षा सहयोग, ऊर्जा सुरक्षा और रणनीतिक साझेदारी पर भी व्यापक विचार-विमर्श हुआ। कुछ मुद्दों पर मतभेद सामने आने के बावजूद सदस्य देशों ने सामूहिक सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाए रखने की प्रतिबद्धता दोहराई। विश्लेषकों का मानना है कि इस शिखर सम्मेलन के फैसले आने वाले समय में यूरोप, मध्य पूर्व और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र की सुरक्षा रणनीतियों पर महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकते हैं।

    अंकारा शिखर सम्मेलन ने यह स्पष्ट संकेत दिया कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में NATO अपने रक्षा ढांचे को अधिक आधुनिक और सक्षम बनाने के साथ-साथ यूक्रेन जैसे साझेदार देशों के समर्थन तथा क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए संयुक्त प्रयासों को और मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

  • क्‍या LPG गैस की होने वाली है किल्लत ? जाने 10 जुलाई के रेट, सप्लाई और बुकिंग स्थिति

    क्‍या LPG गैस की होने वाली है किल्लत ? जाने 10 जुलाई के रेट, सप्लाई और बुकिंग स्थिति


    नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और होर्मुज स्ट्रेट के आसपास फिर से बढ़ी हलचल के बीच देशभर में एलपीजी उपभोक्ताओं के मन में कई सवाल उठ रहे हैं। क्या रसोई गैस की सप्लाई प्रभावित होगी? क्या सिलेंडर के दाम बढ़ सकते हैं? और क्या बुकिंग के नियमों में कोई बदलाव होगा? फिलहाल इन सभी सवालों का जवाब राहत देने वाला है।

    होर्मुज स्ट्रेट में बढ़ा तनाव
    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से संघर्ष विराम को लेकर दिए गए बयानों के बाद होर्मुज स्ट्रेट क्षेत्र में एक बार फिर गोलीबारी की घटनाएं सामने आई हैं। इससे दुनिया के सबसे व्यस्त तेल परिवहन मार्गों में शामिल इस समुद्री रास्ते की सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं।

    भारत की एलपीजी सप्लाई पर कितना असर?
    भारत की करीब 60 प्रतिशत एलपीजी सप्लाई होर्मुज स्ट्रेट से होकर आती है। संघर्ष के दौरान इस मार्ग पर संकट की स्थिति बनी थी, लेकिन भारत ने सप्लाई प्रबंधन और वैकल्पिक व्यवस्था के जरिए घरेलू उपभोक्ताओं तक रसोई गैस की आपूर्ति जारी रखी।

    फिलहाल किल्लत के आसार नहीं
    केप्लर के एनालिस्ट सुमित रितोलिया के मुताबिक, मौजूदा हालात का भारत के कच्चे तेल आयात पर फिलहाल बड़ा असर नहीं पड़ा है। उनका कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में भारतीय रिफाइनरियों ने अपने आयात स्रोतों में विविधता लाई है, जिससे किसी एक मार्ग पर निर्भरता कम हुई है।

    कच्चे तेल की सप्लाई बनी हुई है सामान्य
    रितोलिया के अनुसार, पिछले 100 दिनों में भारत के लिए कच्चे तेल की आपूर्ति लगभग सामान्य रही है। रूस से बड़ी मात्रा में आयात के अलावा सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात से वैकल्पिक मार्गों के जरिए भी सप्लाई जारी है। वहीं पश्चिमी अफ्रीका और लैटिन अमेरिका से आयात ने भी आपूर्ति को संतुलित बनाए रखा है।

    रूस बना सबसे बड़ा तेल आपूर्तिकर्ता
    जून महीने में भारत का कच्चे तेल का आयात रिकॉर्ड 4.93 मिलियन बैरल प्रतिदिन पहुंच गया। इसमें रूस से करीब 2.7 मिलियन बैरल प्रतिदिन आयात हुआ, जो कुल आयात का आधे से अधिक हिस्सा रहा। इसके साथ ही रूस भारत का सबसे बड़ा कच्चा तेल आपूर्तिकर्ता बना हुआ है।

    शिपिंग और बीमा लागत बढ़ने की आशंका
    विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों की आवाजाही सामान्य बनी हुई है। हालांकि, यदि क्षेत्रीय तनाव लंबे समय तक जारी रहता है तो मालभाड़ा और बीमा लागत बढ़ सकती है। वहीं अमेरिकी प्रतिबंधों और कारोबारी जोखिमों के कारण भारतीय रिफाइनरियों के ईरान से तेल आयात बढ़ाने की संभावना फिलहाल नहीं है।

    10 जुलाई को LPG रेट में कोई बदलाव नहीं
    10 जुलाई के ताजा रेट के अनुसार घरेलू और कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। इंडियन ऑयल की कीमतों के मुताबिक, दिल्ली में 14.2 किलोग्राम का घरेलू सिलेंडर 942 रुपये और 19 किलोग्राम का कमर्शियल सिलेंडर 2930 रुपये में मिल रहा है। कोलकाता में घरेलू सिलेंडर 968 रुपये और कमर्शियल सिलेंडर 3081.50 रुपये का है।

    जयपुर में घरेलू सिलेंडर 945.50 रुपये और कमर्शियल सिलेंडर 2957.50 रुपये में उपलब्ध है। वहीं चेन्नई में घरेलू सिलेंडर की कीमत 957.50 रुपये और कमर्शियल सिलेंडर 3106 रुपये है।

    बुकिंग और सप्लाई पहले की तरह सामान्य
    फिलहाल एलपीजी सिलेंडर की बुकिंग प्रक्रिया में कोई बदलाव नहीं किया गया है। सरकार और ऑयल मार्केटिंग कंपनियों का कहना है कि घरेलू एलपीजी की पर्याप्त उपलब्धता है और सप्लाई पूरी तरह सामान्य बनी हुई है। ऐसे में उपभोक्ताओं को किसी तरह की किल्लत या घबराहट में खरीदारी करने की आवश्यकता नहीं है।

  • तेलंगाना में Premier Energies का बड़ा विस्तार, 11.1 GW मॉड्यूल क्षमता के साथ क्लीन एनर्जी सेक्टर में मजबूत होगी पकड़

    तेलंगाना में Premier Energies का बड़ा विस्तार, 11.1 GW मॉड्यूल क्षमता के साथ क्लीन एनर्जी सेक्टर में मजबूत होगी पकड़

    नई दिल्ली । देश के सौर ऊर्जा क्षेत्र में अग्रणी कंपनियों में शामिल Premier Energies ने तेलंगाना के रंगारेड्डी जिले के सीतारामपुर में अत्याधुनिक सोलर मॉड्यूल निर्माण संयंत्र का संचालन शुरू कर अपनी उत्पादन क्षमता में बड़ा विस्तार किया है। नई 5.6 गीगावॉट क्षमता वाली इस इकाई के शुरू होने के साथ कंपनी की कुल सोलर मॉड्यूल निर्माण क्षमता बढ़कर 11.1 गीगावॉट हो गई है। कंपनी का कहना है कि यह विस्तार घरेलू और वैश्विक दोनों बाजारों में बढ़ती मांग को पूरा करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।

    नई निर्माण इकाई आधुनिक तकनीक से लैस है और पूरी तरह स्वचालित उत्पादन प्रणाली पर आधारित है। इस संयंत्र की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां हर चार सेकेंड में एक सोलर मॉड्यूल तैयार किया जा सकेगा। उत्पादन प्रक्रिया में ऑटोमेटेड मैटेरियल मूवमेंट, कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित गुणवत्ता परीक्षण प्रणाली और अत्याधुनिक निर्माण तकनीकों का उपयोग किया गया है, जिससे उत्पादों की गुणवत्ता और उत्पादन दक्षता दोनों में सुधार होगा।

    कंपनी ने इस विस्तार के साथ 6 गीगावॉट-घंटे क्षमता वाले बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम और 18 हजार मीट्रिक टन क्षमता के एल्युमीनियम फ्रेम निर्माण संयंत्र की आधारशिला भी रखी है। इन परियोजनाओं का उद्देश्य सौर ऊर्जा से जुड़ी पूरी वैल्यू चेन में कंपनी की मौजूदगी को मजबूत करना है। इससे ऊर्जा भंडारण और सौर उपकरण निर्माण के क्षेत्र में भी कंपनी की क्षमता बढ़ेगी।

    करीब 75 एकड़ में फैला सीतारामपुर मैन्युफैक्चरिंग कैंपस कंपनी का प्रमुख उत्पादन केंद्र बनकर उभर रहा है। परियोजना पूरी तरह संचालित होने के बाद यहां तीन हजार से अधिक प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होने की संभावना है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे क्षेत्र में औद्योगिक गतिविधियों को भी नई गति मिलेगी और स्थानीय अर्थव्यवस्था को लाभ होगा।

    कंपनी ने हाल ही में चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही के दौरान 3,011 करोड़ रुपये के नए ऑर्डर मिलने की जानकारी भी दी है। इन ऑर्डरों के तहत 1,846 मेगावॉट सोलर सेल और मॉड्यूल की आपूर्ति की जाएगी, जिसकी डिलीवरी वित्त वर्ष 2028 तक पूरी करने का लक्ष्य रखा गया है। मजबूत ऑर्डर बुक कंपनी के भविष्य के कारोबार और उत्पादन विस्तार को भी समर्थन प्रदान करेगी।

    Premier Energies ने यह भी संकेत दिया है कि सितंबर 2026 तक उसकी सोलर सेल निर्माण क्षमता 3.6 गीगावॉट से बढ़कर 10.6 गीगावॉट तक पहुंच सकती है। इससे कंपनी सौर ऊर्जा उपकरण निर्माण के क्षेत्र में अपनी प्रतिस्पर्धी स्थिति और मजबूत करेगी। भारत में नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देने की सरकारी नीतियों के बीच इस तरह का निवेश उद्योग के लिए भी सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।

    कंपनी के विस्तार और मजबूत कारोबारी संभावनाओं का असर शेयर बाजार में भी दिखाई दिया। कारोबार के दौरान निवेशकों की खरीदारी बढ़ने से कंपनी का शेयर मजबूती के साथ बंद हुआ। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि उत्पादन क्षमता में वृद्धि, आधुनिक तकनीक का उपयोग और लगातार मिल रहे नए ऑर्डर आने वाले समय में कंपनी की विकास संभावनाओं को और मजबूत कर सकते हैं। Premier Energies का यह विस्तार भारत के स्वच्छ ऊर्जा मिशन और घरेलू विनिर्माण क्षमता को बढ़ाने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।

  • 550 अंकों की गिरावट के बाद निफ्टी ने बनाया इनसाइड कैंडल पैटर्न, अब ब्रेकआउट या ब्रेकडाउन तय करेगा बाजार की अगली बड़ी दिशा

    550 अंकों की गिरावट के बाद निफ्टी ने बनाया इनसाइड कैंडल पैटर्न, अब ब्रेकआउट या ब्रेकडाउन तय करेगा बाजार की अगली बड़ी दिशा


    नई दिल्ली ।
    घरेलू शेयर बाजार में तेज उतार-चढ़ाव के बीच निफ्टी ने गुरुवार के कारोबारी सत्र में सीमित बढ़त के साथ कारोबार समाप्त किया, लेकिन तकनीकी विश्लेषण के लिहाज से बाजार एक महत्वपूर्ण मोड़ पर पहुंच गया है। बुधवार की भारी गिरावट के बाद गुरुवार को डेली चार्ट पर इनसाइड कैंडल पैटर्न बनने से संकेत मिले हैं कि फिलहाल बाजार नई दिशा तय करने से पहले संतुलन बनाने की कोशिश कर रहा है। तकनीकी विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले एक-दो कारोबारी सत्र निफ्टी की अगली चाल तय करने में निर्णायक साबित हो सकते हैं।

    गुरुवार को निफ्टी बढ़त के साथ खुला और कारोबार के दौरान 24,000 अंक के ऊपर जाने का प्रयास भी किया। हालांकि ऊपरी स्तरों पर लगातार बिकवाली का दबाव बना रहा, जिसके कारण सूचकांक दिन की ऊंचाई से नीचे फिसल गया। कारोबार समाप्त होने तक निफ्टी 81 अंकों की बढ़त के साथ 23,963 के स्तर पर बंद हुआ, जबकि दिन के दौरान 24,135 का उच्च स्तर छुआ गया। यह स्तर फिलहाल बाजार के लिए प्रमुख रेजिस्टेंस के रूप में देखा जा रहा है।

    तकनीकी चार्ट पर बनी इनसाइड कैंडल इस बात का संकेत मानी जाती है कि बड़ी गिरावट या तेज उछाल के बाद बाजार अस्थायी रूप से संतुलन की स्थिति में पहुंच गया है। इस पैटर्न में नई कैंडल पूरी तरह पिछली बड़ी कैंडल की ऊपरी और निचली सीमा के भीतर बनती है। इसका अर्थ यह नहीं होता कि बाजार में तेजी या मंदी निश्चित है, बल्कि यह दर्शाता है कि खरीदार और विक्रेता दोनों अगले बड़े संकेत का इंतजार कर रहे हैं।

    बाजार विशेषज्ञों के अनुसार इस स्थिति में जल्दबाजी में ट्रेड लेने से बचना अधिक उचित माना जाता है। यदि निफ्टी इनसाइड कैंडल की ऊपरी सीमा को मजबूत कारोबार और बेहतर वॉल्यूम के साथ पार करता है तो इसे तेजी का संकेत माना जा सकता है। इसके विपरीत यदि सूचकांक निचले स्तर से नीचे फिसलता है तो बाजार में कमजोरी और बिकवाली का दबाव बढ़ने की संभावना मानी जाती है। इसलिए तकनीकी विश्लेषण करने वाले अधिकांश ट्रेडर्स फिलहाल ब्रेकआउट या ब्रेकडाउन का इंतजार करने की रणनीति अपना रहे हैं।

    विश्लेषकों का यह भी मानना है कि हाल के कारोबारी सत्रों में वैश्विक संकेत, तिमाही नतीजों का दौर और निवेशकों की धारणा बाजार की दिशा पर महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकते हैं। ऐसे समय में केवल चार्ट पैटर्न ही नहीं, बल्कि कारोबार की मात्रा, संस्थागत निवेशकों की गतिविधियां और प्रमुख आर्थिक घटनाक्रम भी बाजार की चाल तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे।

    बाजार विशेषज्ञ निवेशकों को सलाह दे रहे हैं कि मौजूदा परिस्थितियों में जोखिम प्रबंधन को प्राथमिकता दें और किसी भी दिशा में स्पष्ट संकेत मिलने के बाद ही नई पोजीशन बनाएं। तकनीकी संकेतकों के साथ-साथ मजबूत फंडामेंटल और उचित निवेश रणनीति को ध्यान में रखकर निर्णय लेना अधिक सुरक्षित माना जा रहा है। आने वाले कारोबारी सत्रों में निफ्टी का व्यवहार यह तय करेगा कि हालिया गिरावट के बाद बाजार में स्थिरता लौटती है या फिर कमजोरी का दौर आगे भी जारी रहता है।

  • सोने की कीमतों में दिनभर रहा उतार-चढ़ाव, वैश्विक तनाव के बीच फिर बढ़े दाम; जानिए 24 से 10 कैरेट तक का ताजा भाव और बाजार का रुख

    सोने की कीमतों में दिनभर रहा उतार-चढ़ाव, वैश्विक तनाव के बीच फिर बढ़े दाम; जानिए 24 से 10 कैरेट तक का ताजा भाव और बाजार का रुख

    नई दिल्ली । वैश्विक स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और निवेशकों की बदलती रणनीतियों के बीच गुरुवार को घरेलू सर्राफा बाजार और वायदा कारोबार में सोने की कीमतों में फिर उतार-चढ़ाव देखने को मिला। कारोबारी सत्र की शुरुआत में कमजोरी के संकेत मिलने के बावजूद दोपहर तक सोने के भाव में सुधार दर्ज किया गया। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम, डॉलर की मजबूती, कच्चे तेल की कीमतों में बदलाव और सुरक्षित निवेश की बढ़ती मांग आने वाले दिनों में भी सोने के दामों को प्रभावित कर सकती है।

    मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज में 24 कैरेट सोने के वायदा भाव में दोपहर तक लगभग आधा प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई। प्रति 10 ग्राम सोने का भाव बढ़कर 1.44 लाख रुपये के पार पहुंच गया, जबकि पिछले कारोबारी सत्र में यह इससे नीचे बंद हुआ था। इसी दौरान भौतिक बाजार में भी सोने की कीमतों में सुधार देखने को मिला और विभिन्न कैरेट के सोने के दामों में बढ़ोतरी दर्ज की गई। शुद्धता के आधार पर 24, 22, 20, 18, 16, 14, 12 और 10 कैरेट सोने की कीमतों में अलग-अलग स्तर पर तेजी देखने को मिली।

    देश के प्रमुख शहरों में भी सोने के दामों में मामूली अंतर बना रहा। दिल्ली, लखनऊ, जयपुर और चंडीगढ़ जैसे शहरों में 24 कैरेट सोने का भाव 1.43 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम से ऊपर रहा, जबकि मुंबई, कोलकाता, पुणे, बेंगलुरु और हैदराबाद में कीमतें इससे कुछ कम दर्ज की गईं। चेन्नई में अन्य प्रमुख शहरों की तुलना में सोने का भाव अपेक्षाकृत अधिक रहा। 22 और 18 कैरेट सोने के दामों में भी इसी प्रकार का अंतर देखने को मिला, जो स्थानीय करों और बाजार परिस्थितियों के कारण सामान्य माना जाता है।

    बाजार जानकारों के अनुसार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ती अनिश्चितता ने निवेशकों की रणनीति को प्रभावित किया है। पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने और वैश्विक आर्थिक संकेतों में बदलाव के कारण निवेशक लगातार सुरक्षित निवेश विकल्पों पर नजर बनाए हुए हैं। हालांकि डॉलर में मजबूती और अमेरिकी बॉन्ड प्रतिफल में वृद्धि जैसे कारकों ने सोने की तेजी को सीमित करने का भी काम किया है। यही कारण है कि दिनभर बाजार में कीमतों में उतार-चढ़ाव बना रहा।

    विश्लेषकों का कहना है कि कच्चे तेल की कीमतों में तेजी से महंगाई संबंधी चिंताएं बढ़ी हैं। इसका असर वैश्विक वित्तीय बाजारों के साथ-साथ कीमती धातुओं पर भी देखने को मिल रहा है। कई निवेशकों ने अल्पकालिक लाभ के लिए मुनाफावसूली की रणनीति अपनाई, जिससे सोने की कीमतों पर दबाव बना। वहीं दूसरी ओर वैश्विक अस्थिरता के कारण सुरक्षित निवेश की मांग पूरी तरह समाप्त नहीं हुई, जिससे गिरावट के बाद कीमतों में फिर सुधार देखने को मिला।

    पिछले कारोबारी सत्र में घरेलू सर्राफा बाजार में सोने की कीमतों में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई थी और वायदा बाजार में भी तेज कमजोरी देखने को मिली थी। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी हाजिर और वायदा दोनों प्रकार के सोने के भाव दबाव में रहे थे। इसके बावजूद गुरुवार को बाजार खुलने के बाद निवेशकों की नई खरीदारी और बदलते वैश्विक संकेतों ने कीमतों को फिर सहारा दिया।

    विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक घटनाक्रम, अमेरिकी आर्थिक आंकड़े, डॉलर की चाल और केंद्रीय बैंकों की नीतियां सोने की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगी। ऐसे में निवेशकों को अल्पकालिक उतार-चढ़ाव के बजाय बाजार के व्यापक संकेतों पर नजर रखते हुए निवेश संबंधी निर्णय लेने की सलाह दी जा रही है।

  • Jio डील को लेकर आशंकाओं के बीच Indus Towers पर Nomura का भरोसा कायम, 505 रुपये का लक्ष्य देकर जताई 30% तक तेजी की उम्मीद

    Jio डील को लेकर आशंकाओं के बीच Indus Towers पर Nomura का भरोसा कायम, 505 रुपये का लक्ष्य देकर जताई 30% तक तेजी की उम्मीद

    नई दिल्ली । टेलीकॉम इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र की प्रमुख कंपनी इंडस टावर्स के शेयरों को लेकर बाजार में बनी अनिश्चितता के बीच ब्रोकरेज फर्म नोमुरा ने कंपनी पर अपना सकारात्मक रुख बरकरार रखा है। रिलायंस जियो के साथ टावर किराये के समझौतों को लेकर निवेशकों की चिंता के बावजूद ब्रोकरेज ने कंपनी के शेयर पर खरीदारी की सलाह दोहराते हुए 505 रुपये प्रति शेयर का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसके साथ ही मौजूदा स्तरों से लगभग 30 प्रतिशत तक तेजी की संभावना जताई गई है, जिससे निवेशकों के बीच इस स्टॉक को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है।

    गुरुवार को कारोबार के दौरान इंडस टावर्स के शेयर में बढ़त दर्ज की गई और बाजार में सकारात्मक माहौल देखने को मिला। हाल के महीनों में कंपनी के शेयरों में लगातार गिरावट आई थी, जिसका मुख्य कारण रिलायंस जियो के साथ भविष्य में होने वाले टावर किराये के समझौतों को लेकर बनी अनिश्चितता रही। निवेशकों को आशंका थी कि यदि नए समझौते कंपनी के पक्ष में नहीं हुए तो उसके राजस्व और भविष्य की आय पर असर पड़ सकता है। इसी वजह से शेयर पर दबाव बना रहा और इसमें उल्लेखनीय कमजोरी देखने को मिली।

    हालांकि नोमुरा का मानना है कि बाजार ने इन आशंकाओं को जरूरत से ज्यादा महत्व दिया है। ब्रोकरेज के अनुसार शेयर में आई हालिया गिरावट कंपनी की वास्तविक स्थिति को पूरी तरह प्रतिबिंबित नहीं करती। उसका कहना है कि सबसे प्रतिकूल स्थिति में भी यदि कंपनी को जियो से जुड़े कुछ अनुबंधों का नुकसान उठाना पड़े, तब भी इंडस टावर्स के कारोबार की बुनियादी मजबूती बनी रह सकती है। इसी कारण वर्तमान स्तरों को निवेश के लिहाज से आकर्षक अवसर माना गया है।

    ब्रोकरेज का आकलन है कि रिलायंस जियो के लिए मौजूदा टावर नेटवर्क में बड़े पैमाने पर बदलाव करना आसान नहीं होगा। देश के कई भीड़भाड़ वाले शहरों में इंडस टावर्स का व्यापक नेटवर्क पहले से मौजूद है और जियो लंबे समय से इन टावरों का उपयोग कर रही है। ऐसे में पूरी व्यवस्था को किसी अन्य नेटवर्क पर स्थानांतरित करना न केवल तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण होगा, बल्कि इसमें भारी लागत भी आएगी। यही वजह है कि मौजूदा समझौतों में बड़े बदलाव की संभावना सीमित मानी जा रही है।

    नोमुरा ने यह भी माना है कि इंडस टावर्स की प्रमोटर कंपनी भारती एयरटेल की मौजूदगी कंपनी के लिए एक अतिरिक्त मजबूती का आधार है। एयरटेल टेलीकॉम क्षेत्र की प्रमुख कंपनियों में शामिल है और टावर इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी उसकी रणनीतिक स्थिति कंपनी की सौदेबाजी क्षमता को मजबूत बनाती है। इससे भविष्य में किसी भी व्यावसायिक बातचीत के दौरान इंडस टावर्स की स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर रह सकती है।

    ब्रोकरेज का यह भी मानना है कि यदि भविष्य में भारती एयरटेल इंडस टावर्स में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने का फैसला करती है तो इससे निवेशकों का भरोसा और मजबूत हो सकता है। ऐसी किसी भी संभावित पहल का सकारात्मक प्रभाव शेयर के प्रदर्शन पर देखने को मिल सकता है और बाजार में कंपनी के प्रति विश्वास बढ़ सकता है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि टेलीकॉम इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र में लंबे समय की संभावनाएं अभी भी मजबूत बनी हुई हैं। बढ़ते डेटा उपयोग, 5जी नेटवर्क के विस्तार और डिजिटल सेवाओं की मांग के चलते टावर कंपनियों की भूमिका लगातार महत्वपूर्ण होती जा रही है। ऐसे में यदि मौजूदा अनिश्चितताएं धीरे-धीरे समाप्त होती हैं तो इंडस टावर्स के शेयर में सुधार की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। फिलहाल बाजार की नजर जियो और इंडस टावर्स के बीच भविष्य के व्यावसायिक समझौतों तथा कंपनी से जुड़े आगे के रणनीतिक फैसलों पर बनी हुई है।

  • भारी गिरावट के बाद संभला शेयर बाजार, 24,000 के करीब पहुंचा निफ्टी लेकिन वैश्विक तनाव से ऊपरी स्तरों पर दबाव कायम

    भारी गिरावट के बाद संभला शेयर बाजार, 24,000 के करीब पहुंचा निफ्टी लेकिन वैश्विक तनाव से ऊपरी स्तरों पर दबाव कायम

    नई दिल्ली । बुधवार की तेज गिरावट के बाद गुरुवार को घरेलू शेयर बाजार ने राहत की सांस ली और शुरुआती कारोबार में सकारात्मक रुख के साथ शुरुआत की। शुरुआती घंटों में निवेशकों की चुनिंदा खरीदारी के दम पर प्रमुख सूचकांक बढ़त में दिखाई दिए। हालांकि बाजार में रिकवरी के संकेत जरूर मिले, लेकिन निवेशकों का विश्वास अभी पूरी तरह मजबूत नहीं हुआ है। वैश्विक आर्थिक और भू-राजनीतिक परिस्थितियों के बीच बाजार की चाल अब भी सतर्कता का संकेत दे रही है।

    कारोबार की शुरुआत में निफ्टी और सेंसेक्स दोनों ने बढ़त दर्ज की। निफ्टी शुरुआती कारोबार में 24,000 के करीब पहुंच गया, जबकि सेंसेक्स भी हरे निशान में कारोबार करता दिखाई दिया। पिछले कारोबारी सत्र में आई भारी गिरावट के बाद यह तेजी निवेशकों के लिए कुछ राहत लेकर आई, लेकिन बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि केवल शुरुआती बढ़त को स्थायी मजबूती का संकेत नहीं माना जा सकता।

    तकनीकी विश्लेषण के अनुसार निफ्टी के सामने ऊपरी स्तरों पर अब भी मजबूत प्रतिरोध मौजूद है। यदि सूचकांक 24,000 के आसपास मजबूती के साथ टिककर कारोबार करता है और कुछ समय तक स्थिरता बनाए रखता है, तभी आगे की रिकवरी को मजबूती मिल सकती है। दूसरी ओर, ऊंचे स्तरों पर मुनाफावसूली का दबाव भी लगातार बना रह सकता है, जिससे बाजार में उतार-चढ़ाव की स्थिति बनी रहने की संभावना है।

    बाजार की दिशा पर वैश्विक घटनाक्रम का भी स्पष्ट प्रभाव दिखाई दे रहा है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जारी भू-राजनीतिक तनाव ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। इसके चलते कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव बना हुआ है, जिसका असर भारत जैसे आयात-निर्भर देशों की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। यदि ऊर्जा लागत लंबे समय तक ऊंची बनी रहती है तो महंगाई, कंपनियों के परिचालन खर्च और कॉर्पोरेट आय पर दबाव बढ़ने की आशंका भी बनी रहेगी।

    गुरुवार के कारोबार में कुछ बड़े शेयरों ने बाजार को सहारा दिया। चुनिंदा लार्जकैप कंपनियों में खरीदारी के कारण प्रमुख सूचकांकों को शुरुआती मजबूती मिली। विशेष रूप से फार्मा क्षेत्र में निवेशकों की दिलचस्पी बनी रही, जबकि रियल एस्टेट सेक्टर में भी अच्छी खरीदारी दर्ज की गई। इसके विपरीत सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र के शेयरों पर दबाव बना रहा, जिससे इस सेक्टर का प्रदर्शन अपेक्षाकृत कमजोर दिखाई दिया।

    विश्लेषकों का मानना है कि फिलहाल निवेशक व्यापक खरीदारी के बजाय गुणवत्ता वाले और मजबूत मूलभूत आधार वाली कंपनियों पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। बाजार में जोखिम लेने की प्रवृत्ति पहले की तुलना में सीमित बनी हुई है और अधिकांश निवेशक वैश्विक संकेतों पर करीबी नजर रख रहे हैं। यही वजह है कि हर बढ़त पर सीमित मुनाफावसूली भी देखने को मिल रही है।

    आने वाले कारोबारी सत्रों में बाजार की दिशा काफी हद तक अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों, कच्चे तेल की कीमतों और विदेशी निवेशकों की गतिविधियों पर निर्भर करेगी। यदि वैश्विक माहौल में स्थिरता आती है और घरेलू बाजार महत्वपूर्ण स्तरों के ऊपर टिकने में सफल रहता है तो निवेशकों का भरोसा धीरे-धीरे मजबूत हो सकता है। फिलहाल बाजार में सावधानी के साथ निवेश की रणनीति अपनाई जा रही है और विशेषज्ञ भी चुनिंदा क्षेत्रों में संतुलित निवेश की सलाह दे रहे हैं।

  • Ather Energy पर विदेशी ब्रोकरेज का बड़ा दांव, Nomura ने बढ़ाया ₹1,470 का टारगेट; EV सेक्टर की तेज ग्रोथ से लंबी छलांग की उम्मीद

    Ather Energy पर विदेशी ब्रोकरेज का बड़ा दांव, Nomura ने बढ़ाया ₹1,470 का टारगेट; EV सेक्टर की तेज ग्रोथ से लंबी छलांग की उम्मीद


    नई दिल्ली ।
    भारत के इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर बाजार में तेजी से बढ़ती संभावनाओं के बीच Ather Energy को लेकर निवेशकों का भरोसा मजबूत होता दिखाई दे रहा है। विदेशी ब्रोकरेज Nomura ने कंपनी पर अपनी ‘Buy’ रेटिंग बरकरार रखते हुए शेयर का लक्ष्य मूल्य बढ़ाकर 1,470 रुपये कर दिया है। यह मौजूदा बाजार मूल्य की तुलना में उल्लेखनीय बढ़त की संभावना दर्शाता है। ब्रोकरेज का मानना है कि देश में इलेक्ट्रिक वाहनों की मांग आने वाले वर्षों में तेज गति से बढ़ेगी और इसका सीधा लाभ उन कंपनियों को मिलेगा जो पूरी तरह इस क्षेत्र पर केंद्रित हैं।

    Nomura के अनुसार भारत में इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर सेगमेंट अब विकास के ऐसे चरण में पहुंच चुका है जहां अगले कुछ वर्षों में बाजार का विस्तार पहले के अनुमानों से भी अधिक तेज हो सकता है। ब्रोकरेज ने अनुमान जताया है कि वित्त वर्ष 2030 तक इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर की बाजार हिस्सेदारी में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। इससे पूरे उद्योग में मजबूत वार्षिक वृद्धि दर देखने को मिल सकती है और Ather Energy जैसी कंपनियां इस बदलाव का प्रमुख लाभ उठा सकती हैं।

    रिपोर्ट में कहा गया है कि Ather Energy की सबसे बड़ी ताकत उसका पूर्ण रूप से इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर व्यवसाय पर केंद्रित होना है। कंपनी ने हाल के वर्षों में अपने बाजार हिस्से को स्थिर बनाए रखा है और प्रीमियम सेगमेंट में मजबूत पहचान बनाई है। हालांकि फिलहाल कंपनी को उत्पादन क्षमता और आपूर्ति संबंधी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, लेकिन आने वाले समय में इन समस्याओं के कम होने की संभावना जताई गई है।

    ब्रोकरेज का मानना है कि कंपनी अगले वित्तीय वर्षों में अपेक्षाकृत कम कीमत वाला नया इलेक्ट्रिक स्कूटर बाजार में उतार सकती है। यह मॉडल ऐसे मूल्य वर्ग को लक्षित करेगा जहां सबसे अधिक मांग मौजूद है। इससे Ather Energy को नए ग्राहकों तक पहुंच बनाने और बिक्री में तेज बढ़ोतरी हासिल करने का अवसर मिलेगा। साथ ही कंपनी का नया विनिर्माण संयंत्र शुरू होने से उत्पादन क्षमता बढ़ेगी और मौजूदा आपूर्ति बाधाएं काफी हद तक दूर हो सकती हैं।

    Nomura ने कंपनी की बिक्री को लेकर भी सकारात्मक अनुमान पेश किया है। रिपोर्ट के अनुसार अगले तीन वर्षों में वाहन बिक्री में लगातार मजबूत वृद्धि देखने को मिल सकती है। बढ़ती मांग, नए उत्पाद और विस्तारित उत्पादन क्षमता के कारण कंपनी का कारोबार तेजी से आगे बढ़ने की संभावना है। इससे राजस्व में भी लगातार सुधार देखने को मिल सकता है।

    ब्रोकरेज का अनुमान है कि आने वाले वर्षों में कंपनी के परिचालन प्रदर्शन में उल्लेखनीय सुधार होगा। लागत प्रबंधन, बेहतर उत्पाद मिश्रण और कीमतों में संतुलित वृद्धि के चलते परिचालन मार्जिन मजबूत होने की संभावना है। इसके साथ ही कंपनी वित्त वर्ष 2029 तक लाभप्रदता के स्तर पर पहुंच सकती है। यदि प्रतिस्पर्धी कंपनियों को मिलने वाले कुछ प्रोत्साहन समाप्त होते हैं तो Ather Energy के लिए प्रतिस्पर्धी स्थिति और अधिक मजबूत हो सकती है।

    रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि वैश्विक परिस्थितियां भी इलेक्ट्रिक वाहन उद्योग की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगी। यदि भविष्य में ईंधन की कीमतों में दोबारा बढ़ोतरी होती है तो पारंपरिक वाहनों की तुलना में इलेक्ट्रिक वाहनों की मांग और तेज हो सकती है। ऐसे परिदृश्य में Ather Energy का प्रदर्शन मौजूदा अनुमानों से भी बेहतर रहने की संभावना बन सकती है।

    शेयर बाजार में भी कंपनी के स्टॉक में सकारात्मक रुझान देखने को मिला। कारोबार के दौरान शेयर हल्की बढ़त के साथ खुले और निवेशकों की नजर अब कंपनी की आगामी रणनीति, नए उत्पादों और उत्पादन विस्तार पर बनी हुई है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कंपनी अपनी विकास योजनाओं को समय पर लागू करती है तो आने वाले वर्षों में उसका प्रदर्शन निवेशकों की अपेक्षाओं के अनुरूप रह सकता है।

  • Jefferies की नई रिपोर्ट से फार्मा सेक्टर में बढ़ी हलचल, Dr Reddy's और Cipla पर सतर्क रुख बरकरार, Mankind Pharma बनी सबसे मजबूत पसंद

    Jefferies की नई रिपोर्ट से फार्मा सेक्टर में बढ़ी हलचल, Dr Reddy's और Cipla पर सतर्क रुख बरकरार, Mankind Pharma बनी सबसे मजबूत पसंद


    नई दिल्ली ।
    ग्लोबल ब्रोकरेज Jefferies की ताजा रिसर्च रिपोर्ट के बाद गुरुवार को फार्मा सेक्टर एक बार फिर निवेशकों के केंद्र में आ गया। रिपोर्ट में देश की तीन प्रमुख दवा कंपनियों Dr Reddy’s Laboratories, Cipla और Mankind Pharma का विस्तृत मूल्यांकन करते हुए अलग-अलग निवेश राय दी गई है। इस आकलन ने बाजार में इन शेयरों को लेकर नई चर्चा शुरू कर दी है और शुरुआती कारोबार में तीनों कंपनियों के शेयरों में अलग-अलग रुख देखने को मिला।

    Jefferies ने अपनी रिपोर्ट में Dr Reddy’s Laboratories पर पहले की तरह अंडरपरफॉर्म रेटिंग बरकरार रखी है। ब्रोकरेज का मानना है कि मौजूदा बाजार मूल्य की तुलना में इस शेयर में आकर्षक रिटर्न की संभावना सीमित दिखाई देती है। रिपोर्ट के अनुसार, कंपनी के लिए सबसे अनुकूल कारोबारी परिस्थितियां भी बन जाएं तो संभावित बढ़त सीमित रह सकती है। इसी कारण मौजूदा वैल्यूएशन को निवेश के लिहाज से अधिक आकर्षक नहीं माना गया है।

    Cipla को लेकर भी Jefferies का नजरिया फिलहाल सतर्क बना हुआ है। ब्रोकरेज का कहना है कि कंपनी के भविष्य का बड़ा हिस्सा अमेरिकी बाजार में कुछ महत्वपूर्ण दवाओं की नियामकीय मंजूरी पर निर्भर करता है। यदि इन मंजूरियों में अपेक्षा से अधिक समय लगता है तो कंपनी की आय और शेयर प्रदर्शन पर असर पड़ सकता है। इसी संभावना को देखते हुए ब्रोकरेज ने इस शेयर पर भी अंडरपरफॉर्म रेटिंग बनाए रखी है और निवेशकों को फिलहाल सावधानी बरतने की सलाह दी है।

    इसके विपरीत Mankind Pharma को Jefferies ने अपनी सबसे पसंदीदा पसंद के रूप में बनाए रखा है। ब्रोकरेज का मानना है कि कंपनी में कारोबार सुधार के शुरुआती संकेत दिखाई दे रहे हैं और आने वाले समय में इसका सकारात्मक प्रभाव वित्तीय प्रदर्शन पर देखने को मिल सकता है। रिपोर्ट के अनुसार, कंपनी के लिए जोखिम सीमित नजर आता है, जबकि संभावित रिटर्न अपेक्षाकृत बेहतर हो सकता है। इसी आधार पर ब्रोकरेज ने इस शेयर पर बाय रेटिंग दोहराते हुए सकारात्मक दृष्टिकोण कायम रखा है।

    रिपोर्ट का असर शेयर बाजार में भी साफ दिखाई दिया। कारोबार के दौरान Dr Reddy’s Laboratories के शेयर में गिरावट दर्ज की गई, जबकि Cipla के शेयर में हल्की मजबूती देखने को मिली। दूसरी ओर Mankind Pharma के शेयर में अच्छी बढ़त दर्ज हुई, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि निवेशकों ने ब्रोकरेज की सकारात्मक राय को गंभीरता से लिया।

    हालांकि बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी ब्रोकरेज की रिपोर्ट निवेश का अंतिम आधार नहीं हो सकती। निवेशकों को कंपनी के वित्तीय नतीजों, उद्योग की स्थिति, नियामकीय बदलाव, उत्पाद पाइपलाइन और दीर्घकालिक विकास क्षमता जैसे अन्य पहलुओं का भी मूल्यांकन करना चाहिए। फार्मा सेक्टर में प्रतिस्पर्धा, वैश्विक मांग, अमेरिकी बाजार की नीतियां और दवा अनुमोदन की प्रक्रिया जैसे कारक शेयरों की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

    विशेषज्ञों के अनुसार, आने वाले तिमाही नतीजे और प्रबंधन की भविष्य की रणनीति इन तीनों कंपनियों के प्रदर्शन पर महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकती है। ऐसे में निवेशकों की नजर अब आगामी वित्तीय परिणामों और आगे आने वाली कारोबारी घोषणाओं पर बनी रहेगी, क्योंकि वही यह तय करेंगे कि Jefferies के मौजूदा अनुमान भविष्य में कितने सटीक साबित होते हैं।

  • Q1 नतीजों से पहले मोतीलाल ओसवाल का बड़ा दांव, BSE से हिंडाल्को तक 5 शेयरों को मॉडल पोर्टफोलियो में दी जगह

    Q1 नतीजों से पहले मोतीलाल ओसवाल का बड़ा दांव, BSE से हिंडाल्को तक 5 शेयरों को मॉडल पोर्टफोलियो में दी जगह

    नई दिल्ली । वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही के नतीजों का दौर शुरू होने के साथ ही भारतीय शेयर बाजार में निवेशकों की नजर प्रमुख कंपनियों के प्रदर्शन पर टिक गई है। इसी बीच ब्रोकरेज फर्म मोतीलाल ओसवाल ने अपने मॉडल पोर्टफोलियो में बदलाव करते हुए पांच प्रमुख कंपनियों के शेयरों को शामिल किया है। फर्म का मानना है कि आने वाले तिमाही नतीजों में इन कंपनियों का प्रदर्शन अपेक्षाकृत मजबूत रह सकता है, जिससे निवेशकों के लिए बेहतर अवसर बन सकते हैं।

    अर्निंग सीजन की शुरुआत सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र की बड़ी कंपनी के तिमाही नतीजों के साथ हो रही है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार कंपनियों की आय और लाभ में स्थिर सुधार देखने को मिल सकता है। इसी अनुमान के आधार पर ब्रोकरेज फर्म ने लार्जकैप, मिडकैप और स्मॉलकैप कंपनियों की आय वृद्धि को लेकर सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाया है। फर्म का अनुमान है कि लार्जकैप कंपनियां सालाना आधार पर लगभग 17 प्रतिशत, मिडकैप कंपनियां 15 प्रतिशत और स्मॉलकैप कंपनियां 16 प्रतिशत तक राजस्व वृद्धि दर्ज कर सकती हैं।

    मॉडल पोर्टफोलियो में शामिल कंपनियों में अरविंद फैशन्स को मजबूत उपभोक्ता मांग और मौजूदा स्टोर्स की बिक्री में सुधार का लाभ मिलने की उम्मीद जताई गई है। ब्रोकरेज का मानना है कि कंपनी के राजस्व में अच्छी बढ़ोतरी के साथ लाभप्रदता में भी सुधार देखने को मिल सकता है। परिचालन मार्जिन और ग्रॉस मार्जिन में सुधार की संभावना को भी सकारात्मक संकेत माना गया है।

    एचडीएफसी एएमसी को लेकर फर्म का आकलन अपेक्षाकृत संतुलित है। अनुमान है कि कंपनी के प्रबंधनाधीन परिसंपत्तियों में बहुत बड़ा बदलाव नहीं होगा, जिससे राजस्व वृद्धि सीमित रह सकती है। इसके बावजूद मजबूत परिचालन दक्षता और ऊंचे ईबीआईटीडीए मार्जिन के कारण कंपनी की वित्तीय स्थिति स्थिर बनी रहने की संभावना व्यक्त की गई है।

    ब्रोकरेज ने बीएसई को भी अपने पसंदीदा शेयरों में शामिल किया है। उसका मानना है कि नकद और डेरिवेटिव बाजार में बढ़ती गतिविधियों से कंपनी के ट्रांजैक्शन आधारित राजस्व में सुधार हो सकता है। साथ ही परिचालन लागत पर नियंत्रण और बेहतर दक्षता के कारण कंपनी के मार्जिन में भी सकारात्मक बदलाव आने की संभावना जताई गई है।

    किर्लोस्कर ऑयल इंजन्स के बारे में ब्रोकरेज का अनुमान है कि घरेलू कारोबार में मजबूत मांग कंपनी की आय को सहारा दे सकती है। निर्यात क्षेत्र में फिलहाल कुछ चुनौतियां बनी हुई हैं, लेकिन आने वाली तिमाहियों में अंतरराष्ट्रीय मांग में सुधार की उम्मीद व्यक्त की गई है। निवेशकों की नजर कंपनी के जेनरेटर सेट कारोबार, मूल्य निर्धारण रणनीति, उच्च क्षमता वाले उत्पादों और विस्तार योजनाओं की प्रगति पर बनी रहेगी।

    हिंडाल्को को लेकर भी ब्रोकरेज ने सकारात्मक रुख अपनाया है। फर्म का मानना है कि वैश्विक बाजार में एल्युमीनियम की कीमतों में मजबूती और घरेलू कारोबार का स्थिर प्रदर्शन कंपनी के परिणामों को समर्थन दे सकता है। हालांकि विदेशी इकाई के एक संयंत्र में हुई आग की घटना के कारण कुछ परिचालन दबाव बने रहने की संभावना भी जताई गई है। इसके बावजूद समग्र कारोबार को मजबूत माना गया है।

    अर्निंग सीजन के दौरान कंपनियों के वास्तविक वित्तीय नतीजे और भविष्य को लेकर दिए जाने वाले प्रबंधन के संकेत बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। ऐसे में निवेशकों की निगाह केवल मुनाफे और आय पर ही नहीं, बल्कि कंपनियों की भविष्य की रणनीति, मांग के रुझान और विस्तार योजनाओं पर भी रहेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि तिमाही परिणामों के आधार पर आने वाले दिनों में शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है और निवेशकों को सोच-समझकर निर्णय लेने की आवश्यकता होगी।