Category: Economy

  • ऊर्जा और कृषि पर सरकार का फोकस, Narendra Modi बोले—भारत आत्मनिर्भरता की राह पर


    नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत ने अपनी तैयारी मजबूत कर ली है। प्रधानमंत्री Narendra Modi ने संसद में स्पष्ट किया कि देश के पास उर्वरकों का पर्याप्त भंडार मौजूद है और आयात के स्रोतों को भी विविध बनाया गया है। उन्होंने कहा कि सरकार ने पिछले कुछ वर्षों में किसानों को किसी भी संकट से बचाने के लिए ठोस कदम उठाए हैं। लोकसभा में अपने संबोधन के दौरान प्रधानमंत्री ने भरोसा दिलाया कि खरीफ सीजन के लिए उर्वरकों की उपलब्धता पूरी तरह सुनिश्चित की गई है, जिससे खेती पर किसी तरह का नकारात्मक असर नहीं पड़ेगा। साथ ही ‘मेक इन इंडिया’ के तहत देश में ही उर्वरकों के उत्पादन को बढ़ावा दिया गया है, जिससे आयात पर निर्भरता कम हो रही है और किसानों को समय पर खाद मिल रही है।

    किसानों को राहत, सौर पंप और योजनाओं से मजबूती

    प्रधानमंत्री ने बताया कि सरकार ने किसानों की लागत घटाने और उन्हें ऊर्जा के वैकल्पिक साधन देने के लिए बड़े स्तर पर काम किया है। डीजल पर निर्भरता कम करने के लिए अब तक 22 लाख से ज्यादा सौर पंप किसानों को दिए जा चुके हैं। इससे न सिर्फ किसानों का खर्च कम हुआ है, बल्कि ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता भी बढ़ी है। उन्होंने कहा कि सरकार ने पहले से ही उर्वरकों की जरूरत का आकलन कर लिया है और पर्याप्त स्टॉक बनाए रखा है, ताकि किसी भी वैश्विक संकट का असर किसानों तक न पहुंचे। यह कदम देश की खाद्य सुरक्षा को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभा रहा है।

    इथेनॉल मिश्रण से घटा तेल आयात, ऊर्जा सुरक्षा को बल

    ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में भारत को बड़ी सफलता इथेनॉल मिश्रण से मिल रही है। प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि इथेनॉल ब्लेंडिंग के कारण देश हर साल लगभग 4.5 करोड़ बैरल तेल के आयात को कम करने में सफल हो रहा है। यह न सिर्फ विदेशी मुद्रा की बचत कर रहा है, बल्कि वैश्विक तेल बाजार में उतार चढ़ाव से भी देश को बचा रहा है। सरकार वैकल्पिक ईंधनों को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। इसी कड़ी में केंद्र ने राज्यों को 15,000 ई बसें भी उपलब्ध कराई हैं, जिससे स्वच्छ और टिकाऊ परिवहन को बढ़ावा मिल रहा है।

    ऊर्जा और औद्योगिक क्षेत्र के लिए रणनीति, अर्थव्यवस्था मजबूत

    प्रधानमंत्री ने कहा कि ऊर्जा किसी भी अर्थव्यवस्था की रीढ़ होती है और पश्चिम एशिया वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का प्रमुख स्रोत है। ऐसे में सरकार ने संभावित व्यवधानों से निपटने के लिए व्यापक रणनीति बनाई है। हाल ही में प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी की बैठक में उर्वरकों के वैकल्पिक स्रोतों, बिजली संयंत्रों में पर्याप्त कोयला भंडार और जरूरी आयात के स्रोतों में विविधता लाने पर चर्चा की गई। रसायन, फार्मास्यूटिकल्स और पेट्रोकेमिकल्स जैसे क्षेत्रों के लिए भी नई रणनीतियां तैयार की जा रही हैं। साथ ही भारतीय उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए नए निर्यात बाजार विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है, ताकि देश की अर्थव्यवस्था किसी भी वैश्विक संकट में मजबूत बनी रहे।

  • एविएशन सेक्टर पर दबाव, IndiGo के भविष्य को लेकर Goldman Sachs की चेतावनी

    एविएशन सेक्टर पर दबाव, IndiGo के भविष्य को लेकर Goldman Sachs की चेतावनी


    नई दिल्ली। देश की सबसे बड़ी एयरलाइन InterGlobe Aviation को लेकर वैश्विक ब्रोकरेज Goldman Sachs ने सतर्क रुख अपनाया है। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में भारी उतार चढ़ाव के बीच कंपनी के मुनाफे पर दबाव बढ़ने की आशंका जताई गई है। विश्लेषकों ने इंडिगो के टारगेट प्राइस को 13.33 प्रतिशत घटाकर 5,200 रुपए कर दिया है, जो पहले 6,000 रुपए था। हालांकि, इसके बावजूद ब्रोकरेज ने स्टॉक पर अपनी बाय रेटिंग बरकरार रखी है। रिपोर्ट के मुताबिक, मौजूदा वैश्विक हालात और यात्रा क्षेत्र में अनिश्चितता के चलते कंपनी के आय के अनुमान कमजोर हो गए हैं और निकट भविष्य में प्रदर्शन दबाव में रह सकता है।

    वित्त वर्ष 27 में मुनाफे की उम्मीद नहीं, आय पर संकट

    विश्लेषकों ने साफ कहा है कि लगातार बदलती कच्चे तेल की कीमतें एयरलाइन सेक्टर के लिए सबसे बड़ा जोखिम बनी हुई हैं। इसी वजह से IndiGo के लिए वित्त वर्ष 2027 में मुनाफा होने की संभावना बेहद कम है। कंपनी के शेयर में उतार चढ़ाव जारी रहने की भी चेतावनी दी गई है। जून तिमाही के लिए अंतरराष्ट्रीय उड़ान क्षमता के अनुमान, खासकर मिडिल ईस्ट रूट्स पर, घटा दिए गए हैं। खाड़ी देशों में बार बार हवाई क्षेत्र बंद होने से उड़ानों पर असर पड़ा है, जिससे यात्रियों की संख्या और राजस्व दोनों प्रभावित हो सकते हैं।

    जेट ईंधन महंगा, लागत बढ़ने से दबाव

    एयरलाइन उद्योग में जेट ईंधन सबसे बड़ा खर्च होता है और मौजूदा हालात में इसकी कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं। ईरान से जुड़े संघर्ष के बाद आपूर्ति संबंधी जोखिम और निर्यात प्रतिबंधों के कारण प्रोसेस्ड ईंधन की कीमतें कच्चे तेल से भी ज्यादा तेजी से बढ़ी हैं। इसका सीधा असर इंडिगो की लागत पर पड़ रहा है। यही वजह है कि गोल्डमैन सैक्स ने कंपनी के परिचालन आय यानी ईबीआईटीडीआर के अनुमानों में भी भारी कटौती की है। वित्त वर्ष 2026 के लिए यह अनुमान घटाकर 13,700 करोड़ रुपए और 2027 के लिए 15,900 करोड़ रुपए कर दिया गया है, जो पहले क्रमशः 18,300 करोड़ और 25,800 करोड़ रुपए था। प्रति शेयर आय के अनुमान में भी तेज गिरावट दर्ज की गई है।

    शेयर में गिरावट, निवेशकों की नजर भविष्य पर

    बाजार में भी इस रिपोर्ट का असर साफ दिखाई दिया। इंडिगो का शेयर दोपहर कारोबार में करीब 5.75 प्रतिशत गिरकर 3,910 रुपए पर आ गया। बीते एक महीने में यह शेयर लगभग 20 प्रतिशत तक टूट चुका है। हालांकि, ब्रोकरेज का मानना है कि लंबी अवधि में कंपनी की मजबूती उसके लागत नियंत्रण और बैलेंस शीट प्रबंधन पर निर्भर करेगी। निवेशकों के लिए फिलहाल सबसे बड़ा फोकस आय में स्थिरता और वैश्विक हालात में सुधार पर रहेगा।

  • 1 अप्रैल से एटीएम नियमों में होगा बड़ा बदलाव, निकासी सीमा और चार्ज पर पड़ेगा असर

    1 अप्रैल से एटीएम नियमों में होगा बड़ा बदलाव, निकासी सीमा और चार्ज पर पड़ेगा असर

    नई दिल्ली। अगले महीने 1 अप्रैल 2026 से बैंकिंग नियमों में बड़े बदलाव लागू होने जा रहे हैं, जो सीधे एटीएम इस्तेमाल करने वाले ग्राहकों को प्रभावित करेंगे। इन बदलावों के तहत एचडीएफसी बैंक, पंजाब नेशनल बैंक और बंधन बैंक ने कैश निकासी सीमा, फ्री ट्रांजैक्शन लिमिट और चार्ज को लेकर नई व्यवस्था तैयार की है।

    एचडीएफसी बैंक ने फ्री ट्रांजैक्शन लिमिट में किया बदलाव

    एचडीएफसी बैंक ने घोषणा की है कि अब एटीएम कैश विथड्रॉल UPI आधारित फ्री ट्रांजैक्शन लिमिट से जोड़ा जाएगा। इसका मतलब है कि तय फ्री लिमिट पार होने के बाद हर अतिरिक्त एटीएम ट्रांजैक्शन पर ग्राहकों को 23 रुपये और टैक्स देना होगा। नए नियम मेट्रो शहरों में तीन फ्री ट्रांजैक्शन और नॉन-मेट्रो शहरों में पांच फ्री ट्रांजैक्शन तक ही लागू होंगे। इसके बाद किए जाने वाले हर लेनदेन पर अतिरिक्त शुल्क लगेगा।

    PNB ने घटाई ATM निकासी सीमा

    Punjab National Bank ने अपने कुछ डेबिट और प्रीमियम कार्ड्स पर कैश निकासी सीमा घटाने का फैसला किया है। चुनिंदा डेबिट कार्ड्स पर अब ग्राहक पहले की तुलना में आधी राशि, यानी 50,000 रुपये प्रतिदिन, ही निकाल सकेंगे। वहीं कुछ प्रीमियम कार्ड्स पर दैनिक निकासी सीमा घटाकर 75,000 रुपये कर दी गई है। पहले यह सीमा 1.5 लाख रुपये तक थी। यह बदलाव 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी होगा।

    बंधन बैंक ने भी बदले नियम

    बंधन बैंक ने भी अपने ग्राहकों के लिए ATM ट्रांजैक्शन से जुड़े नियमों में बदलाव किया है। अब ग्राहक बैंक के अपने एटीएम पर महीने में सिर्फ 5 फ्री फाइनेंशियल ट्रांजैक्शन कर सकेंगे। अन्य बैंकों के एटीएम से यह सीमा घटाकर 3 फ्री ट्रांजैक्शन कर दी गई है। तय सीमा पार होने पर हर अतिरिक्त लेनदेन पर 23 रुपये का चार्ज लागू होगा।

  • मिडिल ईस्ट तनाव से तेल बाजार में भूचाल, ब्रेंट क्रूड 60% से ज्यादा उछला

    मिडिल ईस्ट तनाव से तेल बाजार में भूचाल, ब्रेंट क्रूड 60% से ज्यादा उछला


    नई दिल्ली। मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव ने वैश्विक तेल बाजार में तीव्र हलचल पैदा कर दी है। ईरान से संबद्ध युद्ध जैसे हालातों के बाद अंतरराष्ट्रीय पैनल ब्रेंट क्रूड के द्वीप में 60 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। करीब 70 डॉलर प्रति डॉलर का कारोबार ब्रेंट अब 112 डॉलर प्रति डॉलर के करीब पहुंच गया है। वहीं, भारत के मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज में कच्चे तेल के लिए 3 फीसदी से ज्यादा उछाल 9,310 रुपये प्रति शेयर तक पहुंच गया। पिछले एक महीने में ही जिले में 56 प्रतिशत की तेजी ने बाजार की चमक को साफ तौर पर शामिल कर दिया है। अमेरिका का वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट भी करीब 98.75 डॉलर प्रति शेयर पर पहुंच गया, जिसमें कोडो सत्र में 2 फीसदी से ज्यादा की तेजी देखी गई।

    होर्मुज पर खतरा, अल्ट्रासाउंड बाधित होने का डर

    पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण दुनिया का सबसे अहम तेल मार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य पर खतरा मंडरा रहा है। इस समुद्री मार्ग से वैश्विक तेल आपूर्ति का एक बड़ा हिस्सा शामिल है, लेकिन स्थिर बंदरगाहों में यहां से बाधा उत्पन्न हो रही है। कई तेल उत्पादक संयंत्रों में उत्पादन की नौबत आ गई है, जिससे बाजार में ऑक्सफोर्ड को लेकर चिंता बढ़ गई है। रिपोर्ट के अनुसार, इस मार्ग से तेल की आपूर्ति सामान्य स्तर के केवल 5 प्रतिशत तक सीमित रह सकती है और स्थिति सामान्य होने में कम से कम एक महीने का समय लग सकता है। यही वजह है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में लगातार दबाव बना हुआ है।

    अमेरिका-ईरान माजी से बड़ी चिंता

    यह संकट और गंभीर बना हुआ है अमेरिका और ईरान के बीच भारी संकट। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को होर्मुज जलडमरूमध्य में 48 घंटे के भीतर पूरी तरह से चेतावनी दी थी। उन्होंने साफ कहा कि अगर ऐसा नहीं हुआ तो ईरान के पावर प्लांट्स को बंद कर दिया जाएगा। दूसरी ओर, ईरान ने भी पलटवार करते हुए खाड़ी देशों के ऊर्जा पर्यावरण पर हमले को खतरनाक बना दिया है। हालाँकि ईरान का दावा है कि होर्मुज़ पूरी तरह से बंद नहीं है और साथियों की छुट्टी जारी है, लेकिन सुरक्षा के दावे से सख्त कदम उठाए गए हैं, जिससे स्थिति बेहद खराब हो गई है।

    आगे और बढ़ोतरी संभावित है, उत्पादन में भारी गिरावट का अनुमान है

    वैश्विक वित्तीय संस्था गोल्डमैन सैक्स ने भी इस संकट को देखते हुए अपने अनुमान में बदलाव किया है। संस्था ने 2026 के लिए ब्रेंट क्रूड का औसत अनुमान 77 डॉलर से 85 डॉलर प्रति आँकड़ा कर दिया है, जबकि मार्च-अप्रैल के दौरान लगभग 110 डॉलर प्रति आँकड़े के आसपास रहने की संभावना है। रिपोर्ट के अनुसार, मध्य पूर्व में कच्चे तेल के उत्पादन में नुकसान 1.1 करोड़ कोटा प्रति दिन से लेकर 1.7 करोड़ कोटा प्रति दिन तक पहुंच सकता है। हालाँकि, एक राहत की बात यह है कि अमेरिका और यूरोप में अभी भी कच्चे तेल का भंडार है, जिससे संकेत मिलता है कि संघर्ष पहले ही शुरू हो चुका है, जो कि विश्वव्यापी राक्षस माँग से अधिक है।

  • पश्चिम एशिया युद्ध का बड़ा असर! 40+ तेल-गैस ठिकाने तबाह, IEA अधिकारी का खुलासा

    पश्चिम एशिया युद्ध का बड़ा असर! 40+ तेल-गैस ठिकाने तबाह, IEA अधिकारी का खुलासा


    नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में जारी युद्ध ने अब पूरी दुनिया के ऊर्जा संतुलन को झकझोर कर रख दिया है। International Energy Agency के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर Fatih Birol ने ऑस्ट्रेलिया के Canberra में बताया कि इस संघर्ष के चलते नौ देशों में फैले 40 से अधिक तेल और गैस इंफ्रास्ट्रक्चर को गंभीर या अत्यंत गंभीर नुकसान हुआ है। इसका सीधा असर वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति पर पड़ा है और हालात ऐसे बन गए हैं कि कोई भी देश इस संकट से अछूता नहीं रह पाएगा। सप्लाई में आई इस बड़ी बाधा ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में अस्थिरता बढ़ा दी है और कीमतों में तेज उतार चढ़ाव देखने को मिल रहा है।

    1970 के दशक से भी बड़ा खतरा, रिकॉर्ड सप्लाई प्रभावित

    आईईए प्रमुख ने इस संकट को बेहद गंभीर बताते हुए कहा कि इसकी तुलना 1970 के दशक के तेल संकट और Russia-Ukraine War के बाद आए गैस संकट को मिलाकर की जा सकती है। उन्होंने बताया कि 1970 के दशक में करीब 1 करोड़ बैरल प्रतिदिन की सप्लाई प्रभावित हुई थी, जबकि मौजूदा हालात में यह आंकड़ा बढ़कर लगभग 1.1 करोड़ बैरल प्रतिदिन तक पहुंच गया है। यह स्थिति वैश्विक ऊर्जा बाजार के लिए खतरे की घंटी है। बढ़ती मांग और घटती सप्लाई के कारण महंगाई बढ़ने की आशंका भी तेज हो गई है, जिससे आम लोगों के साथ साथ उद्योग जगत पर भी असर पड़ सकता है।

    तेल ही नहीं, कई जरूरी सेक्टर भी प्रभावित

    इस युद्ध का असर सिर्फ तेल और गैस तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे जुड़े कई अहम उद्योग भी संकट में आ गए हैं। पेट्रोकेमिकल्स, उर्वरक, सल्फर और हीलियम जैसे जरूरी उत्पादों की सप्लाई प्रभावित होने लगी है। इन उत्पादों की कमी का असर कृषि, मैन्युफैक्चरिंग और तकनीकी क्षेत्रों पर पड़ेगा। यदि स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है, तो खाद्य उत्पादन और औद्योगिक गतिविधियों में गिरावट आ सकती है, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था की रफ्तार धीमी पड़ने का खतरा है।

    होर्मुज जलडमरूमध्य बना संकट की जड़

    इस पूरे संकट की सबसे बड़ी वजह Strait of Hormuz का लगभग ठप हो जाना है। यह दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्ग है, जहां से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल और गैस का निर्यात होता है। इसके बंद होने से एशिया और यूरोप के कई देशों में ईंधन आपूर्ति पर गहरा असर पड़ा है। हालात को संभालने के लिए आईईए ने अपने सदस्य देशों के आपातकालीन भंडार से रिकॉर्ड 40 करोड़ बैरल तेल जारी करने का फैसला लिया है और आगे भी जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त तेल जारी करने की योजना बनाई जा रही है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि यह केवल अस्थायी समाधान है और स्थायी राहत तभी मिलेगी जब इस समुद्री मार्ग को फिर से सुचारू किया जाएगा।

  • Gold-Petrol Today: सोना गिरा, चांदी कमजोर; जानें पेट्रोल-डीजल आज कहां महंगा और कहां सस्ता

    Gold-Petrol Today: सोना गिरा, चांदी कमजोर; जानें पेट्रोल-डीजल आज कहां महंगा और कहां सस्ता


    नई दिल्ली। देश में सोने की कीमतों में गिरावट का सिलसिला जारी है। 23 मार्च 2026 को राजधानी दिल्ली के सर्राफा बाजार में 24 कैरेट सोना 650 रुपये सस्ता होकर 1,52,650 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया। इससे पहले यह 1,53,300 रुपये प्रति 10 ग्राम था। हालांकि वायदा बाजार में हल्की तेजी देखने को मिली है। MCX पर सोने का भाव 333 रुपये बढ़कर 1,44,825 रुपये प्रति 10 ग्राम पहुंच गया। विशेषज्ञों के मुताबिक सोने की कीमतों पर अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों का बड़ा असर पड़ रहा है। पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव और डॉलर की मजबूती के कारण निवेशक सोने से दूरी बना रहे हैं। यही वजह है कि सोना फिलहाल दबाव में बना हुआ है, जबकि कच्चे तेल और डॉलर की ओर निवेश बढ़ा है।

    आज का सोने का ताजा भाव (IBJA)
    IBJA के मुताबिक आज सोने के रेट इस प्रकार हैं

    24 कैरेट: ₹1,47,218 प्रति 10 ग्राम
    23 कैरेट: ₹1,46,628 प्रति 10 ग्राम
    22 कैरेट: ₹1,34,852 प्रति 10 ग्राम
    18 कैरेट: ₹1,10,414 प्रति 10 ग्राम
    14 कैरेट: ₹86,123 प्रति 10 ग्राम
    देश के प्रमुख शहरों में सोने की कीमतों में हल्का अंतर देखने को मिला

    दिल्ली: ₹1,46,120 (24K), ₹1,33,950 (22K),
    मुंबई: ₹1,45,970 (24K), ₹1,33,800 (22K)
    कोलकाता: ₹1,45,970 (24K), ₹1,33,800 (22K)
    चेन्नई: ₹1,48,580 (24K), ₹1,36,200 (22K)
    पटना: ₹1,46,020 (24K), ₹1,33,850 (22K)

    पेट्रोल-डीजल का ताजा अपडेट
    पेट्रोल और डीजल की कीमतों में आज मिलाजुला असर देखने को मिला पटना में पेट्रोल 51 पैसे महंगा हुआ जमशेदपुर में 84 पैसे की बढ़ोतरी चेन्नई में पेट्रोल-डीजल सस्ता हुआ वहीं दिल्ली में पेट्रोल ₹94.77 और डीजल ₹87.67 प्रति लीटर पर स्थिर बना हुआ है।

    फ्यूल की कीमतें कई फैक्टर्स पर निर्भर करती हैं कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतडॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति केंद्र और राज्य सरकारों के टैक्स इसी वजह से पेट्रोल-डीजल के दाम रोजाना बदलते रहते हैं।

    घर बैठे SMS के जरिए भी आप कीमत जान सकते हैं Indian Oil: RSP लिखकर 9224992249 पर भेजे BPCL: RSP लिखकर 9223112222 पर भेजें HPCL: HP Price लिखकर 9222201122 पर भेजें सोने की कीमतों में फिलहाल गिरावट का दौर जारी है, जबकि चांदी भी कमजोर बनी हुई है। वैश्विक तनाव और डॉलर की मजबूती आगे भी कीमतों की दिशा तय करेंगे। वहीं पेट्रोल-डीजल के दाम में स्थानीय स्तर पर उतार-चढ़ाव जारी है।

  • ग्लोबल टेंशन से सहमा बाजार! भारतीय शेयर मार्केट की कमजोर शुरुआत

    ग्लोबल टेंशन से सहमा बाजार! भारतीय शेयर मार्केट की कमजोर शुरुआत


    नई दिल्ली। मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर सोमवार को भारतीय शेयर बाजार पर साफ तौर पर देखने को मिला। व्यापारिक प्रतिष्ठानों की शुरुआत ही भारी गिरावट के साथ हुई, जिससे व्यापारियों की चिंता और बढ़ गई। सुबह 9:28 बजे बीएसई सेंसेक्स 1,309 प्रतिशत की गिरावट के साथ 1.78 प्रतिशत शेयर 73,223 पर पहुंच गया, जबकि निफ्टी 50 408 अंक 1.77 प्रतिशत की गिरावट के साथ 22,705 पर कारोबार हुआ।

    हर सेक्टर में बिकवाली,अजनबी में डर का माहौल

    शुरुआती कारोबार में बाजार में चौतरफा बिकवाली देखने को मिली। मेटल, पीएससीयू बैंक और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स सेक्टर सबसे ज्यादा प्रभावित रहे। इसके अलावा रियल्टी, डिफेंस, आईटी, स्कॉर्पियो, एनर्जी और आर्किटेक्चर जैसे लगभग सभी सेक्टर लाल निशान में बिजनेस कर रहे थे। लार्जकैप स्टॉकहोम के साथ-साथ मिडकैप और स्मॉलकैप शेयर बाजार में भी नजर आए। निफ्टी मिडकैप 100 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 में भी तेजी से गिरावट दर्ज की गई, जिससे यह साफ हो गया कि बाजार में व्यापक स्तर पर कमजोरी बनी हुई है।

    वैश्विक हस्ताक्षर भी फ़्राईड, एशियाई अख़्तियार में भी गिरावट

    भारतीय बाज़ार की इस गिरावट के पीछे अंतर्राष्ट्रीय संकेत भी बड़ी वजह बने। टोक्यो, शंघाई, हांगकांग, बैंकॉक और सियोल जैसे एशियाई सामानों की भी भारी बिक्री आंकी गई है। वहीं, अमेरिकी बाजार में भी पिछले सत्र में गिरावट के साथ गिरावट आई थी, जिससे उपभोक्ताओं का भरोसा टूट गया है।

    तेल के कारखाने और मध्य पूर्व संकट बना सबसे बड़ा कारण

    वैज्ञानिकों के अनुसार, इस गिरावट का सबसे बड़ा कारण मध्य पूर्व में भारी तनाव है, विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर भारी असमानता। इस क्षेत्र में वैश्विक तेल आपूर्ति का अहम मार्ग है, और यहां किसी भी तरह के संकटग्रस्त कच्चे तेल की आपूर्ति को तेजी से बढ़ाया जा सकता है। तेल की पेट्रोलियम कंपनी भारत जैसे तीर्थ-निर्भर देश के लिए चिंता का विषय हैं, क्योंकि इसी वजह से तेल की पेट्रोलियम कंपनी की कीमत में भी बढ़ोतरी होती है।

    विदेशी ग्राहकों की लगातार बिकवाली

    बाजार पर दबाव बढ़ाने वाला एक और बड़ा कारण विदेशी निवेशकों (FII) की लगातार बिकवाली है। पिछले फेस्टिवल सत्र में एफओआई ने 5,518 करोड़ रुपये की बड़ी बिक्री की, जिससे बाजार का सेंटीमेंट और गिरावट आई। हालाँकि, घरेलू एंटरप्राइज़ कॉमर्स (डीआईआई) ने कुछ हद तक खरीदारी कर बाजार को सहारा देने की कोशिश की।

    आगे क्या? विद्यार्थी के लिए संकेत

    विशेषज्ञ का मानना ​​है कि जब तक मध्य पूर्व में तनाव कम नहीं हुआ और तेल की कीमतें स्थिर नहीं हुईं, तब तक बाजार में मिश्रण बना रह सकता है। आवेदकों को अनुमति और लंबी अवधि की रणनीति पर ध्यान देने की सलाह दी जा रही है।

  • टेक दुनिया में बड़ा बदलाव! सैमसंग और एप्पल के बीच फाइल ट्रांसफर अब और हारने

    टेक दुनिया में बड़ा बदलाव! सैमसंग और एप्पल के बीच फाइल ट्रांसफर अब और हारने


    नई दिल्ली। टेक वर्ल्ड में एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है। सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स ने अपने फाइल-शेयरिंग प्लेटफॉर्म क्विक शेयर को एयरड्रॉप के साथ कंपैटिबल बनाया है। इसका मतलब यह है कि अब क्लाइमेट और आईफोन ग्राहकों के बीच फाइल शेयर करना पहले कहीं और आसान हो जाएगा।

    गैलेक्सी S26 उपभोक्ता को मिलेगा पहला फायदा

    यह नई सुविधा सुविधा Galaxy S26 सीरीज उपभोक्ताओं के लिए शुरू की गई है। इस अपडेट के बाद गैलेक्सी उपभोक्ता सीधे आईफोन उपभोक्ताओं के साथ फोटो, वीडियो, कॉन्टैक्ट और अन्य चीजें साझा कर सकते हैं। पहले यह संभव नहीं था, क्योंकि दोनों प्लेटफॉर्म अलग-अलग सिस्टम पर काम करते थे।

    कैसे काम करें यह विशेषता?

    क्विक शेयर और एयरड्रॉप दोनों ही रॉकेट और रॉकेट डिटेक्शन तकनीक पर आधारित हैं। अब इन दोनों के बीच इंटरऑपरेबिलिटी (पारस्पर काम करने की क्षमता) जोड़ दिया गया है, जिससे अलग-अलग ऑपरेटिंग सिस्टम के उपकरण भी आसानी से जुड़ सकते हैं।

    कंपनी के अनुसार:

    शुरुआत में यह फीचर गैलेक्सी S26 पर उपलब्ध होगा
    बाद में इसे अन्य बाज़ारों तक भी विस्तारित किया जाएगा
    अमेरिका और यूरोप जैसे देशों में इसकी शुरुआत सबसे पहले होगी
    कार से घर नियंत्रण: नई स्मार्ट सेवा शुरू की गई

    सिर्फ फाइल शेयरिंग ही नहीं, सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स ने हुंडई मोटर ग्रुप के साथ मिलकर एक नई “कार-टू-होम” सर्विस भी लॉन्च की है। इस सेवा के माध्यम से उपभोक्ता स्मार्टथिंग्स प्लेटफॉर्म का उपयोग करके अपनी कार से ही घर के उपकरणों को नियंत्रित कर सकते हैं।

    उदाहरण:

    घर पहुंचने से पहले एसी और लाइट ऑन करें
    बाहरी व्यवसाय ही गैर-जरूरी सुपरमार्केट बंद
    रोबोटिक रॉकेट लॉन्चर को चालू करना
    यह सुविधा 2022 के बाद हुंडई और किआ में उपलब्ध है।

    नवरात्र एक्सपीरियंस में बड़ा बदलाव

    इस कदम को टेक और इंडस्ट्री में बड़ा बदलाव माना जा रहा है, क्योंकि लंबे समय से एप्पल एंड्रॉइड के बीच फाइल शेयरिंग एक बड़ी समस्या बनी हुई है। अब इस इंटरऑपरेबिलिटी से उपभोक्ता को अलग-अलग इकोसिस्टम के बावजूद भी सहज अनुभव मिलेगा।

  • Finance Bill 2026-27 आज पेश, कॉर्पोरेट कानून में भी बड़े बदलाव की तैयारी

    Finance Bill 2026-27 आज पेश, कॉर्पोरेट कानून में भी बड़े बदलाव की तैयारी


    नई दिल्ली। देश की आर्थिक दिशा तय करने वाले अहम कदम के तहत वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आज संसद में वित्त विधेयक 2026-27 और कॉर्पोरेट कानून (संशोधन) विधेयक 2026 पेश किया। यह दोनों विधेयक आने वाले वित्त वर्ष के लिए सरकार की नीतियां, बजट नीतियां और कॉर्पोरेट नीतियां में सुधार को लागू करने की दिशा में बहुत महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।

    वित्त विधेयक 2026-27: बजट लागू करने की दिशा में अहम कदम

    वित्त विधेयक 2026-27 का मुख्य उद्देश्य वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट नीतियों को कानूनी रूप देना है। इसके जरिए सरकार कराधान, खर्च और आर्थिक नीतियों को लागू करेगी। संसद में इस पर चर्चा होगी और इसे पारित कराने की कोशिश की जाएगी। यह विधेयक देश की आर्थिक रणनीति, विकास योजनाओं और राजकोषीय संतुलन को सुनिश्चित करने में अहम भूमिका निभाएगा।

    कॉर्पोरेट कानून में बदलाव की तैयारी

    इसके साथ ही निर्मला सीतारमण कॉर्पोरेट कानून (संशोधन) विधेयक 2026 भी पेश किया, जिसमें कंपनी अधिनियम 2013 और सीमित देयता भागीदारी अधिनियम 2008 में बदलाव प्रस्तावित हैं। इन संशोधनों का उद्देश्य कॉर्पोरेट गवर्नेंस को मजबूत करना, हस्तांतरण बढ़ाना और कंपनियों के संचालन को अधिक पक्षपाती बनाना है।

    कंपनी अधिनियम कंपनियों के गठन, प्रबंधन और बंद होने की प्रक्रिया को नियंत्रित करता है, जबकि एलएलपी अधिनियम संयंत्रों को सीमित दायित्वों के साथ काम करने का अवसर देता है। नए संशोधनों से निवेश माहौल को और बेहतर बनाने की उम्मीद है।

    IBC संशोधन का रास्ता भी साफ

    सरकार ने पहले ही दिवाला और दिवालियापन संहिता (IBC) में संशोधन को मंजूरी दे दी है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 10 मार्च को इसे हरी झंडी दी थी, जिससे मौजूदा सत्रों में IBC संशोधन विधेयक पेश होने का रास्ता साफ हो गया है।

    संसदीय समिति की सिफारिशों पर आधारित बदलाव

    प्रस्तावित संशोधन बैजयंत पांडा की अध्यक्षता वाली संसदीय समिति की सिफारिशों पर आधारित हैं। समिति ने दिसंबर 2025 में अपनी रिपोर्ट पेश की थी, जिसमें दिवालियापन प्रक्रिया को तेज करने और देरी को कम करने पर जोर दिया गया था।

    समिति ने सुझाव दिया:

    दिवालियापन मामलों के समाधान के लिए सख्त समयसीमा
    लेनदारों की समिति (CoC) को अधिक अधिकार
    सीमा पार दिवालियापन के लिए नया ढांचा
    निवेश और अर्थव्यवस्था पर क्या असर होगा?

    इन विधेयकों के लागू होने से भारत में वित्तीय माहौल और मजबूत होने की उम्मीद है। तेज दिवालियापन प्रक्रिया और बेहतर कॉर्पोरेट गवर्नेंस से भारतीयों का भरोसा बढ़ेगा और आर्थिक विकास को गति मिलेगी।

  • सोना-चांदी धड़ाम! कीमतों में बड़ी गिरावट, 14,500 रुपये तक सस्ता हुआ गोल्ड

    सोना-चांदी धड़ाम! कीमतों में बड़ी गिरावट, 14,500 रुपये तक सस्ता हुआ गोल्ड


    नई दिल्ली। सोने और चांदी के जिले में सोमवार को आंशिक ढलान वाला दृश्य मिला, जिसने अवशोषण को चौंका दिया। घरेलू बाजार बाजार मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर सोना और चांदी दोनों में तेजी से बिकवाली दर्ज की गई। सोने का दाम 1.37 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम से नीचे चला गया है, जबकि चांदी का दाम भी 2.13 लाख रुपये प्रति किलो के स्तर से नीचे चला गया है। यह गिरावट हाल के समय की सबसे बड़ी गिरावट में से एक पैसा जा रही है।

    MCX पर सोने- पानी के भाव में भारी गिरावट

    2 अप्रैल 2026 को फॉक्सवैगन्स की कीमत 7,619 रुपए पर पहुंच गई। कारोबार के दौरान सोना 1,36,403 रुपये के रु. तक पहुंच गया, जबकि ऊपरी स्तर 1,40,158 रुपये रहा। वहीं चांदी के 5 मई 2026 के दशक में और भी तेज गिरावट देखने को मिली। चांदी का भाव 14,495 रुपये पर 6.39 प्रतिशत टूटकर 2,12,277 रुपये पर आ गया। इंट्रा-डे में चांदी 2,11,086 रुपये तक।

    अंतर्राष्ट्रीय इस्टेट का दिखावा भी असरदार

    वैश्विक संस्था में भी मंदी का रुख देखने को मिला। COMEX (कॉमेक्स) पर सोना 5.50 प्रतिशत टूटकर 4,359 डॉलर प्रति शेयर पर पहुंच गया, जबकि सिल्वर 6.65 प्रतिशत टूटकर 65.08 डॉलर प्रति शेयर पर पहुंच गया। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर इस गिरावट का सीधा असर भारतीय उद्योग पर भी डाला गया है।

    इतनी बड़ी गिरावट क्यों?

    विशेषज्ञ के अनुसार, इस गिरावट के पीछे कई बड़े कारण हैं। मोती लाल ओसवाल के कमोडिटी पसन्द मानव मोदी का कहना है कि अमीर भाई-बहनों ने सोने की मांग को कमजोर कर दिया है। इसके अलावा संयुक्त राज्य अमेरिका, इज़राइल और ईरान के बीच जारी तनाव ने बाजार में अनिश्चितता पैदा कर दी है।

    राजनीतिक तनाव और असहमति की रणनीति

    हालांकि आम तौर पर ग्लोबल टेंशन के समय सोना सुरक्षित निवेश माना जाता है, लेकिन इस बार की तस्वीर अलग नजर आती है। भीष्म रुचि की आशा और डॉलर की रेस्तरां के विद्यार्थियों ने सोने से दूरी बना ली। वहीं मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य के संकट ने ऊर्जा बाजार को प्रभावित किया है, जिसका असर कमोडिटी बाजार पर भी पड़ा है।

    आगे क्या रहेगा रुख?

    विशेषज्ञों का मानना ​​है कि आने वाले सोने और चांदी के सिक्कों में दिन जारी कर सकते हैं। संस्था की नजरें अब सांख्यिकी के आंकड़े, मध्याह्न के बिंदु और वैश्विक राजनीतिक संकट पर रहेंगे। यदि हितधारकों के पास स्वामित्व है, तो सोने में दबाव बनाया जा सकता है।